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नए साल का जश्न न पड़े फीका, इसलिए इनका रखें ध्यानः बंगाल से लेकर केरल, दिल्ली तक की ये है गाइडलाइन

साल 2020 तो कोरोना वायरस महामारी के साए में गुजर गया। कुछ घंटों बाद नया साल 2021 दस्‍तक देने वाला है। कोरोना हमारी जिंदगी से गया नहीं है, इसलिए नए साल का स्‍वागत करते समय बेहद सावधान रहना होगा। केंद्र और राज्‍य की सरकारों ने नए साल के जश्‍न की खातिर कुछ गाइडलाइंस जारी की हैं। बेहतर होगा कि घर से बाहर निकलने से पहले उनके बारे में जान लें।

कई राज्‍यों में न्‍यू ईयर ईव (new years’ eve) पर होने वाली पार्टियों पर पूरी तरह रोक है। महाराष्‍ट्र, कर्नाटक समेत कई राज्‍यों ने नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया है। नियम तोड़ने पर जुर्माने से लेकर महामारी ऐक्‍ट के तहत जेल भी हो सकती है। आइए जानते हैं, देश के अलग-अलग हिस्‍सों में नए साल के जश्‍न को लेकर क्‍या नियम हैं

दिल्ली: दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने दिल्ली में रात का कर्फ्यू लगा दिया है। सार्वजनिक स्थान पर पाँच से अधिक व्यक्ति  इकट्ठा नहीं हो सकते हैं। वहीं कोई नए साल के जश्न का कार्यक्रम नहीं होगा। DDMA ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर 31 दिसंबर के 11:00 बजे से 1 जनवरी की सुबह 6 बजे तक और 1 जनवरी की रात 11 बजे से 2 जनवरी के सुबह 6 बजे तक किसी भी सार्वजनिक बैठक या सभा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि नए साल की पूर्व संध्या पर सार्वजनिक कार्यक्रम या छत पर पार्टियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। बिना अनुमति के कोई भी कार्यक्रम या बड़ी सभा नहीं होने दी जाएगी और कानून तोड़ने वालों को दंड का सामना करना पड़ेगा।

नए साल की पूर्व संध्या पर एक भीड़ होने की संभावना को देखते हुए, दिल्ली मेट्रो अधिकारियों ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन को रात 9 बजे के बाद बंद करने का फैसला किया है। अंतिम ट्रेन के प्रस्थान तक यात्रियों को प्रवेश की अनुमति होगी।

गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गाँव के लिए कोविड के दिशा-निर्देश राज्य के अधिकार क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, नोएडा में जिला प्रशासन ने कहा है कि नए साल की पार्टी के लिए एक स्थान पर 100 से अधिक लोगों को अनुमति नहीं दी जाएगी। होटल, क्लब और रेस्टोरेंट मालिकों को संबंधित अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी। पुलिस और स्थानीय नागरिक निकायों को बताना होगा कि कितने मेहमानों के आने की संभावना है।

महाराष्‍ट्र: राज्य के होटल, रेस्तरां, पब और बार 31 दिसंबर को रात 11 बजे तक खुले रहेंगे। हालाँकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित होटलों, रेस्तरां और ढाबों को उससे छूट दी गई है। राज्‍य में नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया गया है। रात 11 बजे के बाद सार्वजनिक स्थानों पर पाँच या ज्यादा लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध रहेगा। 31 दिसंबर 2020 को रात 11 बजे तक दुकान बंद नहीं करने वाले रेस्तरां के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने कहा, “यह सामान्य नया साल नहीं है। यही वजह है कि हम सामान्य समारोह नहीं कर सकते हैं। कर्फ्यू यह सुनिश्चित करने के लिए लगाया जा रहा है कि इस तरह के उल्लंघन को दोहराया नहीं जाए।”

हालाँकि, अधिकारी ने कहा कि रात के कर्फ्यू के कारण लोग रात 11 बजे से पहले जश्न मना सकते हैं, लेकिन उसके बाद प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र राज्य सरकार ने अपील की है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे और 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग नागरिकों को नए साल की पूर्व संध्या पर घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

मुंबई में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर मुंबई पुलिस के लगभग 35,000 जवान सतर्कता बरतेंगे। COVID-19 मानदंडों के किसी भी उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी। महाराष्ट्र राज्य सरकार ने कहा कि किसी को छतों और नौकाओं पर पार्टी आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसा करने पर आयोजकों को उल्लंघन के लिए दंडित किया जाएगा।

सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता के बारे में बोलते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक परिवहन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। अगर आप टैक्सी, ओला या उबर किराए पर लेते हैं, तो चालक सहित वाहन में चार लोग हो सकते हैं। Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफार्मों के साथ-साथ रेस्तरां से सीधे भोजन की डिलिवरी की अनुमति दी जाएगी।

बेंगलुरु (कर्नाटक): कर्नाटक सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके अनुसार 24 दिसंबर से 1 जनवरी तक रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच कर्फ्यू लागू रहेगा। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक स्थान या खुली जगहों पर चार से अधिक लोगों के एकत्रित होने की अनुमति नहीं होगी। 

हालाँकि, लोग अपने घरों पर पार्टियाँ कर सकते हैं, लेकिन किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं होगी। भवन समितियों और क्लबों को आदेश दिया गया है कि वे 4 से अधिक लोगों की सभा और किसी भी सार्वजनिक उत्सव की अनुमति न दें।

इसके अलावा, होटल, मॉल, रेस्तरां, क्लब नियमित रुप से चल सकते हैं लेकिन डीजे, पार्टियों, कार्यक्रमों, म्यूजिकल नाइट्स और परफॉर्मेंस जैसे किसी विशेष कार्यक्रम की अनुमति नहीं होगी। होटलों, रेस्तराओं में कोई भीड़ नहीं होनी चाहिए। केवल ई-टोकन के साथ अग्रिम बुकिंग की अनुमति है।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों को ध्यान में रखते हुए कोलकाता पुलिस ने यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए हैं कि सभी COVID-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाए रखे जाएँ और नए साल की पूर्व संध्या को मनाने के लिए कोई बड़ी सभा न हो। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए शहर में और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

तमिलनाडु: राज्य सरकार ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी, 2021 की रात को समुद्र तटों, होटलों, क्लबों और रिसॉर्ट्स पर नए साल की पूर्व संध्या समारोह पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। इन दिनों समुद्र तटों पर कोई प्रवेश नहीं होगा। सरकार के आदेशों के अनुसार, समुद्र तट की सड़कों, रेस्तरां, होटल, क्लब, समुद्र तट रिसॉर्ट्स सहित अन्य रिसॉर्ट्स में मिडनाइट पार्टियाँ नहीं होंगी।

राजस्थान: राज्य के गृह विभाग द्वारा पारित आदेशों के अनुसार, राजस्‍थान में रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू रहेगा। जयपुर कमिश्‍नरेट के मुताबिक, विशेष कार्यक्रम छोड़ बाकी सभी कार्यक्रमों पर रोक है। शाम 7 बजे के बाद सभी तरह के होटल, रेस्‍तरां और प्रतिष्‍ठान बंद रखे जाएँगे। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि नए साल की पूर्व संध्या के दौरान ‘दिवाली की तरह’ प्रतिबंध लगाए जाएँगे और यह सभी नगरपालिका परिषदों में लागू होगा।

उत्तराखंड: राज्य की राजधानी देहरादून में 31 दिसंबर, 2020 और 1 जनवरी 2021 को होटल, बार और रेस्तरां में पार्टियों जैसे सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य सरकार ने कहा है कि प्रतिबंध का उल्लंघन आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत दंडनीय होगा। नियम तोड़ने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।

मंगलुरू: मंगलुरू के पुलिस आयुक्त ने 31 दिसंबर को शाम 6 बजे से 1 जनवरी की सुबह 6 बजे तक निषेधाज्ञा जारी की है। नए साल का जश्न मनाने के लिए 5 या अधिक लोगों का सार्वजनिक रूप से इकट्ठा होना मना है। होटल, मॉल, रेस्तरां, क्लब, पब आदि कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित नहीं करेंगे।

केरल: केरल सरकार ने नए साल के समारोहों के दौरान सभी सार्वजनिक समारोहों को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया है और निर्देश दिया है कि 31 दिसंबर को राज्य में सभी समारोह रात 10 बजे तक समाप्त हो जाएँ।

शादीशुदा प्रेमिका के घर तक खोद डाली गुप्त सुरंग, नौकरी पर जाने के लिए निकलता था पति तो घुस जाता था आशिक

मेक्सिको के एक आदमी ने पड़ोस में रहने वाली प्रेमिका से मिलने के लिए एक ऐसा काम किया जिसकी कल्पना शायद ही कोई करे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ शादीशुदा प्रेमिका से मिलने के लिए उसके घर तक गुप्त सुरंग खोदने वाला व्यक्ति भी विवाहित है। एक दिन महिला का पति दफ्तर से जल्दी घर वापस आ गया और उसने अपनी पत्नी को उसके प्रेमी के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।

घटना मेक्सिको के टीयूआना शहर की है। सुरंग बनाने वाले आदमी का नाम अल्बर्टो है और वह पेशे से कंस्ट्रक्शन वर्कर (construction worker) है। उसने यह सुरंग पड़ोस में रहने वाली अपनी शादीशुदा प्रेमिका पामेला से मिलने के लिए बनाई थी। अल्बर्टो ने ऐसा समय तय किया था जब महिला का पति जॉर्ज (सिक्योरिटी गार्ड) नौकरी के लिए जाता था। ठीक इसी समय वह सुरंग की मदद से महिला से मिलने के लिए आता था। दोनों के बीच यह सब पिछले काफी समय से चल रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जॉर्ज एक दिन समय से पहले घर आ गया तब उसने देखा कि एक आदमी सोफे के पीछे छुपा हुआ है। इसके तुरंत बाद ही वह मौके से फ़रार हो गया, उसे इस बात से काफी हैरानी हुई। काफी खोजबीन के बावजूद अल्बर्टो नहीं मिला। काफी देर बाद जॉर्ज को पता चला कि सोफे के नीचे एक सुरंग मौजूद है, जिसके जरिए अल्बर्टो उसकी पत्नी से मिलने आता है। उसने सुरंग में उतर कर देखा तो पता चला कि वह अल्बर्टो के घर तक जाती है।

पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद जॉर्ज सुरंग से होते हुए अल्बर्टो के घर पहुँचा। घर में उसकी पत्नी सोई हुई थी। अल्बर्टो ने जॉर्ज से गुहार लगाते हुए कहा कि उसके रिश्तों के बारे में उसकी पत्नी से कुछ न कहे। लेकिन जॉर्ज ने उसकी बात नहीं मानी। इसको लेकर दोनों के बीच लड़ाई शुरू हो गई। जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और अल्बर्टो को अपने साथ लेकर गई। फ़िलहाल सुरंग की सही आकार को लेकर जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन उसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गई हैं।  

उमर खालिद के खिलाफ क्राइम ब्रांच की 100 पन्नों की चार्जशीट, बताया हिंदू विरोधी दंगों के मास्टरमाइंड ने कैसे रची साजिश

2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ गुरुवार ( 31 दिसंबर, 2020) को चार्जशीट दाखिल की। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दंगे भड़ाकाने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

चार्जशीट में दंगों के मास्टमाइंड को लेकर कहा गया है कि 8 जनवरी को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग की थी। दंगों को पूरे देश में भड़काने के लिए उमर खालिद ने कई राज्‍यों का दौरा किया भी किया था। इस दौरान उसने भड़काऊ भाषण देकर नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।

चार्जशीट में लगाए गए आरोप के मुताबिक, उमर खालिद ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र के एंटी CAA प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और भड़काऊ भाषण दिए थे। यह भी कहा गया है कि जिन-जिन राज्यों में उमर खालिद गया उसके लिए आने-जाने और रुकने के लिए पैसों का इंतजाम प्रदर्शनों के कर्ताधर्ता करते थे।

क्राइम ब्रांच ने अपनी चार्जशीट में राहुल राय नाम के एक शख्‍स का भी जिक्र किया है। उस पर आरोप है कि उसने दंगों की साजिश रचने के लिए इन सभी आरोपितों का समर्थन किया था। राहुल राय ने दिल्‍ली सपोर्टर प्रोटेस्‍ट नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था जिसके जरिए दिल्ली हिंसा की साजिश रची गई थी और एंटी CAA प्रदर्शन की आड़ में हिन्दू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम के ख़िलाफ UAPA के तहत 200 पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी।

स्पेशल सेल द्वारा दायर चार्जशीट के मुताबिक, खालिद ने दूर से इन दंगों को कंट्रोल किया था, जिसके कारण 53 लोगों की जान चली गई। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान इन दंगों को भड़काया, ताकि इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय कवरेज मिले और सीएए को लेकर सरकार पर दबाव बने।

वहीं दिल्ली पुलिस की ओर से कड़कड़डूमा कोर्ट में तकरीबन 930 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई थी। 930 पेज की चार्जशीट में 197 पेज चार्जशीट है, तो 733 पेज में दस्तावेज हैं। इसमें कहा गया कि खालिद ने सीएए के संसद में पास होते ही अपनी जैसी मानसिकता वाले लोगों को बढ़ावा दिया। उसने जेएनयू के मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जेएनयू समूह को इमाम के जरिए प्रेरित किया और फिर इसी समूह का इस्तेमाल दक्षिणी दिल्ली में हिंसा भड़काने के लिए किया। उसी ने केंद्र सरकार से नफरत करने वाले विरोधियों को एक साथ जोड़ा, जिसकी वजह से दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप व्हाट्सएप पर तैयार हुआ था।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में शुरू हुई ‘शिक्षा की दीवार’, ज़रूरतमंद बच्चे ले जा सकेंगे किताब

देश के तमाम क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा को लेकर छोटी-बड़ी पहल की जाती है। ऐसी ही एक पहल हुई है मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में। पिछले चार सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर चुने जाने वाले इंदौर में ‘शिक्षा की दीवार’ बनाई गई है। ये पहल गरीब वर्ग से आने वाले बच्चों के लिए शुरू की गई है। यहाँ से वे अपने लिए किताबें लेकर जा सकते हैं। 

‘शिक्षा की दीवार’ इंदौर के आदर्श रोड पर पूर्व पार्षद दिलीप शर्मा द्वारा नगर निगम के सहयोग से तैयार की गई है। यहाँ मौजूद किताबों का सही उपयोग हो सके और ज़रूरतमंद बच्चों को किताबें मिल सकें इसके लिए पर्याप्त इंतजाम भी किए गए हैं। दिलीप शर्मा ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, “पहले यहीं पर गरीबों की मदद के लिए ‘नेकी की दीवार’ बनाई गई थी, जिससे वह यहाँ से कपड़े और ज़रूरत के छोटे-मोटे सामान ले जा सकें। अब यहाँ पर ‘शिक्षा की दीवार’ शुरू की गई है, अब वह किताबें ले जा सकते हैं।” 

इस पहल का मकसद बच्चों को शिक्षा का साधन उपलब्ध कराना है। वहाँ पर रखी गई किताबों का दुरुपयोग रोकने के लिए एक जालीनुमा कमरा बनवाया गया है। वहाँ पर एक व्यक्ति को नियुक्त किया गया है जो किताब दान देने और लेने वालों की जानकारी रखेगा। इसके अलावा वहाँ पर ऐसी व्यवस्था भी की गई है कि अगर कोई किताब नहीं उपलब्ध है तो वहाँ लगे बॉक्स में किताब का नाम और अपनी जानकारी कागज़ में लिख कर जमा करनी होगी। यहाँ पर लोग अपनी स्वेच्छा से किताब, कॉपी, पेन्सिल समेत अन्य तरह की शिक्षण सामग्री रख भी सकते हैं। 

इस पहल को लेकर स्थानीय लोगों ने काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह अच्छी है और ऐसा देश के हर शहर में होना चाहिए। कुछ समय पहले यहीं पर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित ‘नेकी की दीवार’ भी शुरू की गई थी। जहाँ पर लोग अपनी मर्ज़ी से कपड़े सहित अन्य सामान दान करते हैं और ज़रूरतमंद वहाँ से कपड़े लेकर जा सकते हैं।   

योगी सरकार का बड़ा फैसला, जेल में बंद दुर्दांत अपराधियों को पैरोल नहीं

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जेल में बंद कैदियों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब जेल में बंद सजा पा रहे दुर्दांत अपराधियों को पैरोल नहीं दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने बिकरू कांड की जाँच के लिए गठित एसआईटी की सिफारिश को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया है।

राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों को यह आदेश जारी करते हुए कहा कि अब यूपी के जेलों में बंद कैदियों को पैरोल देने की प्रक्रिया खत्म की जा रही है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी डीएम, पुलिस कमिश्नर, एसएसी व एसपी को गृह मंत्रालय की पुनरीक्षित गाइडलाइन के अनुसार बंदियों के पैरोल (दंड का अस्थायी निलंबन) के प्रकरणों का परीक्षण करने के उपरांत ही संस्तुति शासन को भेजने का निर्देश भी दिया गया है।

गौरतलब है कि एसआईटी ने अपनी सिफारिश में कहा था कि गंभीर अपराधों में सजा पाए हुए कैदी सामाजिक जीवन में रहने लायक नहीं हैं, ऐसे में उन्हें पैरोल देने से पहले विचार किया जाना चाहिए। सिफारिश में रेप, हत्या और अन्य गंभीर मामलों में सजा काट रहे कैदियों को पैरोल नहीं देने की बात कही थी।

माना जा रहा है कि यह फैसला कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के कारनामों को मद्देनजर रखते हुए लिया गया है। बता दें कि इसी साल कानपुर के बिकरू गाँव में पैरोल पर बाहर दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके साथियों ने आठ पुलिसवालों की निर्मम हत्या कर दी थी। हालाँकि बाद में पुलिस एनकाउंटर में वह मारा गया था। विकास दुबे पर करीब 60 से अधिक मामले दर्ज थे।

एसआईटी के मुताबिक, पैरोल न मिलने से कैदियों की आपराधिक गतिविधियों पर रोक लग सकेगी तथा जनसामान्य में उनका भय भी तभी समाप्त हो पाएगा। एसआईटी ने यह भी कहा है कि आपराधिक व्यक्तियों के आपराधिक कृत्यों की निगरानी के साथ ही साथ उनके अवैध आर्थिक स्रोतों पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि अवैध धन से अपराधियों की नई नर्सरी न पैदा हो सके।

हरियाणा में हथियारों संग गिरफ्तार खालिस्तानी आतंकी SFJ से जुड़े, 2 नेताओं की हत्या का मिला था ऑर्डर

हरियाणा पुलिस ने हाल ही में करनाल से दो हथियारबंद खालिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था जो ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) के लिए काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह अमेरिकी मूल के गुरमीत सिंह के संपर्क में थे। खालिस्तानी गुरमीत सिंह ने इनके खाते में मनीग्राम (MoneyGram) के ज़रिए लाखों रुपए भेजे थे। 

पूछताछ में दोनों आरोपितों ने यह भी बताया कि गुरमीत सिंह ने उन्हें हथियार खरीदने और दो ऐसे लोगों की हत्या करने का आदेश दिया था जिन्होंने कथित तौर पर सिख धर्म के विरुद्ध बोला था। दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ गिरफ्तार किए गए खालिस्तानियों का नाम तेजप्रकाश (काका) और आकाशदीप सिंह (सोनू) है। दोनों लुधियाना के रहने वाले हैं। हरियाणा की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने इनके पास से कई हथियार और ज़िंदा कारतूस बरामद किए हैं। 

हरियाणा पुलिस ने इन खालिस्तानी आतंकियों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब वे हथियार खरीदकर वापस लौट रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे दो शिवसेना नेताओं (सुधीर सूरी और गुरशरणमंद) पर हमले की योजना बना रहे थे। वह फेसबुक के ज़रिए SFJ के गुरमीत सिंह से लगातार संपर्क में थे। गुरमीत सिंह ने इन दोनों को उनके कट्टरपंथी विचारों की वजह से योजना में शामिल किया था। गुरमीत सिंह ने दोनों को हथियार खरीदने के लिए MoneyGram से पैसे भेजे थे। दोनों खालिस्तानी आतंकियों को यूएपीए की धारा 10 और 13, आर्म्स एक्ट की धारा 25, 54, 59 और आईपीसी की धारा 120बी के तहत गिरफ्तार किया गया है। 

SFJ के इन दो आतंकियों की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब किसान आंदोलन में इस प्रतिबंधित संगठन की घुसपैठ को लेकर लगातार आशंकाएँ जताई जा रही है।

किसान आंदोलन पर खालिस्तानी तत्वों और सिख फॉर जस्टिस का कब्ज़ा 

पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए थे जिससे यह स्पष्ट था कि किसान आंदोलन पर खालिस्तानी तत्वों का कब्ज़ा हो चुका है और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। 

कई खालिस्तानी आतंकी किसानों के भेस में प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और इंदिरा गाँधी की हत्या के मुद्दे पर अपनी पीठ थपथपाते हुए नज़र आए। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी धमकी देते हुए नज़र आए और कहा कि किसानों की माँग पूरी नहीं हुई तो उनका भी वही हाल होगा। किसान आंदोलन के बीच तमाम अराजक तत्वों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और कट्टरपंथियों को रिहा करने की माँग उठाई थी। 

इसके बाद पंजाब के किसानों को भड़काने के आरोप में SFJ की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे। फ़िलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ SFJ की संदिग्ध भूमिका को लेकर जाँच कर रही हैं। इसी बीच ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि खालिस्तान समर्थक तत्वों ने किसान आंदोलन को हाइजैक कर लिया है। पाकिस्तान प्रायोजित खालिस्तानी संगठन SFJ ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि पंजाब और हरियाणा के जो किसान खालिस्तान का समर्थन करेंगे उन्हें 1 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा। 

16 साल की नाबालिग से 54 साल के अब्दुल लतीफ ने किया निकाह, पुलिस ने 7 को गिरफ्तार किया

54 साल के अब्दुल लतीफ ने चार दिन पहले 16 साल की एक नाबालिग से निकाह कर लिया। मूल रूप से केरल से ताल्लुक रखने वाला लतीफ फिलहाल हैदराबाद में रहता है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें नाबालिग लड़की के माता-पिता भी हैं।

निकाह लड़की के माता-पिता की रजामंदी से हुई थी। पुलिस को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने तत्काल छापेमारी की और सात लोगों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस के अनुसार मामले की जाँच जारी है। अभी यह साफ़ नहीं हो पाया है कि लड़की को बरामद किया जा चुका है या नहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुलिस प्रेस वार्ता करेगी और उसमें ही आरोपित को मीडिया के सामने लेकर आएगी। 

नाबालिगों की ज़्यादा उम्र के आदमियों की शादी के कई मामले 

ज़्यादा उम्र के व्यक्तियों का नाबालिगों से शादी करना असामान्य नहीं है। पिछले कुछ समय में इस ऐसी घटनाओं की तमाम ख़बरें सामने आई हैं। हाल ही में मदुरै स्थित कोट्टनथम्पट्टी गाँव के ओथापट्टी में 31 साल के टी बालामुर्गन को नाबालिग से शादी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसी ही एक घटना नवंबर में सामने आई थी, पेरुनगुड़ी स्थित कस्तूरीबाई कॉलोनी के 29 वर्षीय ए सक्तिवेल को 17 साल की नाबालिग से शादी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 

तेलंगाना में बाल विवाह शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ है। 2019 में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक़ शहर की पुलिस ने 14 महीने में 51 ऐसे बच्चों को बरामद किया था जिनकी शादी हो गई थी।    

अभिषेक बनर्जी के करीबी TMC यूथ विंग महासचिव के ठिकानों पर CBI की रेड: पशु तस्करी के मामले में लुक-आउट नोटिस जारी

केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी पशु तस्करी मामले में हुई है, सीबीआई ने इस अभियान के तहत तृणमूल युवा कॉन्ग्रेस महासचिव विनय मिश्रा के ठिकाने पर भी छापा मारा। विनय मिश्रा काफी समय से फ़रार चल रहे हैं जिसकी वजह से सीबीआई ने उनके विरुद्ध लुकआउट नोटिस भी जारी किया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलकाता के कई दिग्गज नेता और व्यवसायी पशु तस्करी के मामले से जुड़े हुए हैं। इस मामले में जाँच अभियान आगे बढ़ाते हुए सीबीआई की टीम ने गुरुवार (31 दिसंबर 2020) को कोलकाता के विभिन्न क्षेत्रों में छापा मारा। इसी कड़ी में सीबीआई की एक टीम ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के महासचिव विनय मिश्रा के ठिकाने पर भी छापा मारा।

खास बात है कि विनय मिश्रा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी हैं। सीबीआई ने ये कार्रवाई दो घोटालों से जुड़े मामलों में की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिश्रा के अन्य ठिकानों पर भी जल्द छापेमारी हो सकती है। उनपर मवेशी तस्करी घोटाला और कोयला चोरी मामले में शामिल होने का आरोप है। 

पुलिस ने मौके पर मौजूद तमाम अहम दस्तावेज़ों की जाँच की, इसके पहले सीबीआई विनय मिश्रा को कई बार नोटिस जारी कर चुकी है इसके बावजूद वह जाँच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे। नतीजतन अब उनके खिलाफ़ लुकाउट नोटिस जारी किया गया है। फ़िलहाल इस मामले में सीबीआई की तरफ़ से जाँच जारी है।

सीबीआई के इस एक्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा- “बंगाल के एक पावर ब्रोकर विनय मिश्रा के यहाँ सीबीआई के छापे के बाद बंगाल के उच्च अधिकारियों की आपातकालीन बैठक और मुख्यमंत्री एवं भाइयों के यहाँ हलचल, प्रदेश में चर्चा का विषय है!”

गौरतलब है कि भारत बांग्लादेश सीमा पर काफी बड़े पैमाने पर पशु तस्करी होती है। यह मामला आधिकारिक रूप से चर्चा में तब आया जब 21 सितंबर 2020 को सीबीआई की कोलकाता शाखा ने इस सम्बन्ध में मामला दर्ज किया था। इसके बाद सीबीआई ने 6 नवंबर को पशु तस्करी रैकेट के सरगना को गिरफ्तार किया था जो भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर अपना रैकेट चला रहा था। आरोपित एनैमुल हक़ मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और सीबीआई ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया था। 

हक़ के साथ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) के एक अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले के संबंध में गुरुवार को कोलकाता के दो चार्टर्ड अकाउंटेंट के दफ्तर पर छापा मारा था। 36 बीएसएफ़ बटालियन के पूर्व कमांडेंट सतीश कुमार (जिसकी तैनाती अभी रायपुर में है), एनैमुल हक़, अनारुल एसके और मोहम्मद गुलाम मुस्तफ़ा को सीबीआई ने हिरासत में लिया था। 

जब शाह महमूद कुरैशी ने सोमनाथ को गिराने की खाई कसम: मुस्लिम भीड़ द्वारा मंदिर ध्वस्त करने के बाद पुराना वीडियो वायरल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट के करक जिले में बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को स्थानीय मौलवियों की अगुआई में उन्मादी भीड़ ने एक हिंदू मंदिर को तोड़ दिया। इतना ही नहीं, कट्टरपंथियों की भीड़ ने मंदिर को आग के हवाले भी कर दिया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिसमें कई लोग मंदिर की दीवारों और छत को तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं मंदिर पर भीड़ ने इस कदर हमला किया कि उसे बिल्कुल ही तहस-नहस कर दिया।

इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह महमूद गजनवी की तरह सोमनाथ मंदिर को गिराने की बात करते हैं। वीडियो में कुरैशी ने खुद को महमूद गजनवी का वंशज बताते हुए गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर (somnath temple) को गिराने की बात कर रहे हैं। बता दें महमूद गजनवी ने कई बार सोमनाथ मंदिर को नुकसान पहुँचाया था। हैरानी की बात तो यह है कि कुरैशी की इस बात पर हजारों की उन्मादी भीड़ जमकर तालियाँ पीट रही थी।

महमूद गजनी और सोमनाथ मंदिर 

महमूद गजनी, गजनवियों के तुर्क वंश के 10वीं शताब्दी का मुस्लिम आक्रमणकारी था, जिसने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को कई बार लूटा और डाका डाला। उसने ज्योतिर्लिंगों को भी तोड़ दिया। बताया जाता है कि उसने उन भक्तों को भी मौत के घाट उतार दिया जो मंदिर की रक्षा करने की कोशिश कर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक उसने भारत के धन से आकर्षित होकर देश पर 17 बार हमला किया और लूटा। उसने सोमनाथ मंदिर के अलावा, कांगड़ा, मथुरा और ज्वालामुखी में मंदिरों को नष्ट कर दिया था। इस वजह से, उन्होंने खुद को ‘मूर्ति तोड़ने वाला’ (‘idol breaker’) उपनाम दिया था।

गौरतलब है कि हिंदुओं की बेटियों को अगवा करना, जबरन धर्म परिवर्तन, हिंदुओं की हत्या जैसे अपराध पाकिस्तान में आम है। पाकिस्तान में करीब-करीब सारे हिंदू धर्म स्थल पिछले 73 सालों में नष्ट कर दिए गए हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री इमरान खान ने राजधानी इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाने का ऐलान किया तो देश में उबाल आ गया था। हिंदुओं के साथ कैसा सौतेला बर्ताब पाकिस्तान में हो रहा है, इसकी एक बानगी क्रिकेटर दानिश कनेरिया के केस में दुनिया ने देखी।

रेप आरोपित सपा नेता गायत्री प्रजापति के घर ED के छापे में मिले ₹11 लाख के पुराने नोट, 100 बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज जब्त

पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति (Gayatri Prasad Prajapati), उनके बेटे अनिल के अमेठी स्थित घर और ऑफिस समेत कई अन्य ठिकानों पर बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापा मारा था। इस छापेमारी में कई अहम दस्तावेज गायत्री प्रसाद प्रजापति के घर से बरामद हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गायत्री प्रसाद प्रजापति के घर से 11 लाख रुपए के पुराने नोट, 5 लाख रुपए के सादे स्टाम्प पेपर, डेढ़ लाख रुपए कैश और सौ से अधिक बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। देर रात तक कार्रवाई जारी थी।

इसके अलावा ड्राइवर के नाम 200 करोड़ की संपत्ति के सबूत हाथ लगने की बात सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को सुबह करीब 10 बजे सातों ठिकानों पर ईडी की लखनऊ और प्रयागराज यूनिट के 50 से ज्यादा अफसरों ने एक-साथ छापेमारी शुरू की। एजेंसी ने अमेठी और लखनऊ में हैवलॉक रोड स्थित गायत्री के आवास और करोड़पति ड्राइवर समेत तमाम उन सभी करीबियों के ठिकानों को खँगाला, जिनके नाम से संपत्तियाँ खरीदी गई हैं।

बेनामी संपत्ति में काली कमाई लगाई

अफसरों ने कानपुर में गायत्री और अनिल के सीए के दफ्तर के अलावा अनिल के विभूतिखंड में ओमेक्स स्थित दफ्तर में भी पड़ताल की। छापेमारी में लखनऊ, कानपुर, मुंबई और सीतापुर समेत छह से ज्यादा शहरों में संपत्तियों का पता चला है। ईडी को पड़ताल में इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि खनन घोटाले से जुटाई गई काली कमाई को कई बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया है। ये संपत्तियाँ करीबी रिश्तेदारों, निजी सहायकों और ड्राइवरों के नाम पर ली गई हैं।

दर्जनों फाइलें साथ ले गई टीम

अमेठी की आवास विकास कॉलोनी में गायत्री के आवास और टिकरी में ड्राइवर रामराज के आवास से ईडी ने दर्जनों फाइलों को कब्जे में लिया। टीम ने गायत्री के रिश्तेदार हरिलाल प्रजापति और नौकर रामटहल वर्मा के घर को भी खँगाला। बताया जा रहा है कि टीम ने गायत्री की अवैध संपत्तियों के बारे में नौकर से पूछताछ भी की। उससे पूछा गया कि संपत्तियाँ खरीदने के लिए धन किन स्रोतों से आया? इसके अलावा आईटी रिटर्न और बैंक खातों के बारे में भी पूछा गया।

सपा सरकार के दौरान हुआ था घोटाला

बता दें कि यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति अभी रेप के मामले में जेल में बंद हैं। गायत्री पर जान से मारने की धमकी देने और जबरन संपत्तियाँ हड़पने का आरोप है। साथ ही खनन के पट्टों के आवंटन मे धाँधली के आरोप में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की जाँच भी चल रही है। इस जाँच के सिलसिले में गायत्री प्रजापति और उनके करीबियों पर कई बार छापेमारी हो चुकी है।

इस मामले में एजेंसियों की नजर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर भी है। अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और 2012 से 2013 तक राज्य के खनन मंत्री रहे हैं। 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन घोटाला हुआ था। इस मामले में पहले भी एजेंसियों ने कई अधिकारियों के यहाँ छापेमारी की थी।

एजेंसियों का मानना ​​है कि अखिलेश यादव और गायत्री प्रसाद प्रजापति दोनों ने खनन मंत्री होने के दौरान स्वीकृति दी थी। सभी पट्टों को मुख्यमंत्री की मंजूरी थी। 5 लाख रुपए और उससे अधिक के सभी पट्टों को नियमानुसार सीएम कार्यालय से उचित अनुमोदन प्राप्त करना था। गायत्री प्रजापति का बेटा भी फिलहाल जेल में बंद है।