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आयुष्मान भारत योजना से गरीबों के ₹30 हजार करोड़ से ज्यादा बचे, अब 2021 का मंत्र होगा- दवाई भी, कड़ाई भीः PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (दिसंबर 31, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात के राजकोट में एम्स अस्पताल का शिलान्यास किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल ने हमें सिखाया कि स्वास्थ्य ही संपदा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य पर चोट से पूरा सामाजिक दायरा प्रभावित होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”नया साल दस्तक दे रहा है। आज देश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने वाली एक और कड़ी जुड़ रही है। राजकोट में एम्स के शिलान्यास से गुजरात सहित पूरे देश के स्वास्थ्य और मेडिकल एजुकेशन को बल मिलेगा।” उन्होंने कहा, ”साल 2020 को एक नई नेशनल हेल्थ फेसिलिटी के साथ विदाई देना, इस साल की चुनौती को भी बताता है और नए साल की प्राथमिकता को भी दर्शाता है।”

पीएम ने कहा, “पहले मैं कहता था कि जब तक दवाई तब तक ढिलाई नहीं। अब हमारा 2021 का मंत्र होगा- दवाई भी, कड़ाई भी।”

पीएम ने कहा, ”स्वास्थ्य पर जब चोट होती है तो जीवन का हर पहलू बुरी तरह प्रभावित होता है और सिर्फ परिवार नहीं पूरा सामाजिक दायरा उसकी चपेट में आ जाता है। इसलिए साल का ये अंतिम दिन भारत के लाखों डॉक्टर्स, हेल्थ वॉरियर्स, सफाई कर्मियों, दवा दुकानों में काम करने वाले, और दूसरे फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर्स को याद करने का है। कर्तव्य पथ पर जिन साथियों ने अपना जीवन दे दिया है, उन्हें मैं सादर नमन करता हूँ।”

“मुश्किल भरे इस साल ने दिखाया है कि भारत जब एकजुट होता है तो मुश्किल से मुश्किल संकट का सामना वो कितने प्रभावी तरीके से कर सकता है। भारत ने एकजुटता के साथ समय पर प्रभावी कदम उठाए, उसी का परिणाम है कि आज हम बहुत बेहतर स्थिति में हैं। जिस देश में 130 करोड़ से ज्यादा लोग हों, घनी आबादी हों। वहा करीब 1 करोड़ लोग इस बीमारी से लड़कर जीत चुके हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “2021 इलाज की आशा लेकर आ रहा है। वैक्सीन को लेकर भारत में हर जरूरी तैयारी चल रही है। भारत में बनी वैक्सीन हर जरूरी वर्ग तक पहुँचे, इसके लिए कोशिशें अंतिम दौर में हैं। दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाने के लिए भारत की तैयारियाँ जोरों पर हैं। मुझे विश्वास है कि जिस तरह बीते साल संक्रमण को रोकने के लिए प्रयास किए, इसी तरह टीकाकरण को लेकर भारत एकजुटता से आगे बढ़ेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी सिर्फ 6 एम्स ही बन पाए थे। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 6 नए एम्स बनाने के लिए कदम उठाए थे। उन्हें बनाते बनाते 2012 आ गया था, यानी 9 साल लग गए थे। बीते 6 वर्षों में 10 नए एम्स बनाने पर काम हो चुका है, जिनमें से कई आज पूरी तरह काम शुरू कर चुके हैं। एम्स के साथ ही देश में 20 एम्स जैसे सुपर स्पैशिलिटी हॉल्पिटल्स पर भी काम किया जा रहा।

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित इस समारोह में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी उपस्थित थे।

2022 तक बनकर तैयार होगा एम्स, आयुष ब्लॉक भी होगा

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि संस्थान को 201 एकड़ से अधिक जगह आवंटित की गई है और यह लगभग 1,195 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा। संस्थान का निर्माण 2022 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। इस आधुनिक अस्पताल में 750 बिस्तर होंगे जिनमें से 30 बिस्तर आयुष ब्लॉक में होंगे। इसमें एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए 125 और नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए 60 सीट होंगी।

पीएम ने कहा, “आयुष्मान भारत योजना से गरीबों के लगभग 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बचे हैं। आप सोचिए, इस योजना ने गरीबों को कितनी बड़ी आर्थिक चिंता से मुक्त किया है। अनेकों गंभीर बीमारियों का इलाज गरीबों ने अच्छे अस्पतालों में मुफ्त कराया है।”

पंजाब में टारगेट किलिंग करवाने वाला खालिस्तानी आतंकी सुख बिकरीवाल गिरफ्तार: दुबई से किया गया डिपोर्ट

लंबे समय से खालिस्तानी आतंकियों पर शिकंजा कस रही भारत की सुरक्षा एजेंसियों को गुरुवार (दिसंबर 31, 2020) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए पंजाब में टारगेट किलिंग करवाने वाले मोस्ट वांटेड गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकी सुख बिकरीवाल को सुरक्षा एजेंसियाँ दुबई से डिपोर्ट करके दिल्ली लाई। यहाँ दिल्ली एयरपोर्ट पर उसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।

अब पंजाब में टारगेट किलिंग से जुड़े मामलों पर खुलासा हो सकता है। खालिस्तानी आतंकी सुख बिकरीवाल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करता था। दुबई में रहकर उसने अपना हुलिया बदल लिया है। अब वह पगड़ी पहनता है और दाढ़ी बढ़ा ली है।

पंजाब में टारगेट किलिंग में शामिल था सुख बिकरीवाल

7 दिसंबर को दिल्ली पुलिस ने दो खालिस्तानियों समेत पाँच आतंकवादियों को गिरफ्तार करके दिल्ली में बड़े आतंकी हमले को रोका था। गिरफ्तार आतंकवादियों ने पूछताछ के दौरान पंजाब के शौर्य चक्र विजेता बलविंदर संधू की हत्या में शामिल होने का खुलासा किया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि खालिस्तानी आतंकवादी सुख बिकरीवाल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर संधू को मारने के लिए उनका इस्तेमाल किया था। ऐसा माना जाता है कि सुख 2016 में नाभा पंजाब की जेल ब्रेकिंग घटना में शामिल था। घटना के बाद वह दुबई भाग गया था।

भारतीय एजेंसियों ने दुबई में सुख के निवास पर छापा मारा

गिरफ्तार आतंकवादियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, दुबई में भारतीय एजेंसियों ने उसके आवास पर छापा मारा। एजेंसी ने उसे 8 दिसंबर को हिरासत में ले लिया। पंजाब में शिवसेना नेता हनी महाजन सहित कई अन्य हिंदू नेताओं पर हमले में भी बिकरीवाल शामिल था। घटना में महाजन के एक पड़ोसी की मौत हो गई, लेकिन महाजन बच गया। बिकरीवाल दुबई में बैठकर आईएसआई और खालिस्तानी आतंकवादियों के बीच ब्रिज का काम कर रहा था।

सुख बिकरीवाल के बारे में कहा जाता है कि उसने भारत में अशांति फैलाने के लिए पंजाब व कश्मीरी आतंकियों से हाथ मिलाया था। वहीं, दिल्ली पुलिस की मानें तो पिछले दिनों दिल्ली के शकरपुर इलाके से गिरफ्तार आतंकियों का मकसद भारत के खिलाफ खालिस्तानी आंदोलन खड़ा करना है। इनमें गैंगस्टर सुख बिकरीवाल पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसी आइएसआइ का मोहरा था। सुख बीच-बीच में पंजाब में टारगेट किलिंग के लिए आदेश देता था। गैंगस्टर सुख बिकरीवाल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ का मोहरा है, जो खालिस्तियों की आवाज बना हुआ था।

कौन हैं पाकिस्तान की अरूसा आलम, क्यों कहते हैं उन्हें ‘पंजाब की फर्स्ट लेडी’: जानिए क्यों मचा था ‘महाराज साहब’ से रिश्तों पर बवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पाकिस्तानी रक्षा मामलों की पत्रकार अरूसा आलम के बीच काफ़ी नज़दीकी रिश्ते हैं, इस बात की जानकारी बेहद सीमित लोगों को है। दोनों ही अपने इस कम मशहूर ‘अफेयर’ को लेकर सार्वजनिक रूप से बात करने से कतराते हैं। 

वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफ़ा ने अरूसा आलम को ‘पंजाब की पहली महिला’ कहा था। आम आदमी पार्टी नेता सुखपाल खैरा का रवैया इन्हें लेकर बेहद आलोचनात्मक रहा है, जिसके दो मुख्य कारण हैं, पहला इनकी नागरिकता और दूसरा कि ये पंजाब के मुख्यमंत्री के दफ़्तर में ठहरी थीं। लेखिका शोभा डे ने इन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह की लिव इन पार्टनर बताया था। तभी से इन दोनों के रिश्ते के बीच राज़ बढ़ता जा रहा है। 

कौन हैं अरूसा आलम?

अरूसा आलम पेशे से पाकिस्तानी रक्षा मामलों की पूर्व पत्रकार हैं और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में अच्छी पकड़ रखती हैं। अरूसा, अकलीन अख्तर की बेटी हैं जो कि जनरल रानी के नाम से मशहूर हैं। एक ऐसी प्रभावशाली शख्सियत जिन्हें पाकिस्तानी मीडिया, पाकिस्तानी नेता याहया खान (yahya khan) की ‘लवर और सोर्स ऑफ़ इंस्पिरेशन’ (muse and mistress) कहता था। जनरल रानी के लिए ऐसा माना जाता था कि याहया खान के पीछे सारी अभिप्रेरणा उनकी ही है। इसी क्रम में वह वह जनरल तक जाने का रास्ता बनीं और और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में उनकी अहमियत को नई ऊँचाइयाँ मिली। अरूसा आलम को यह बना बनाया नेटवर्क अपनी माँ से विरासत में मिला। 

अरूसा आलम को अगस्ता 90 बी सबमरीन (Agosta-90B submarine) समझौते से सम्बन्धित खोजी पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। इस रिपोर्ट की वजह से ही पाकिस्तानी नौसेना के मुखिया मनसुरुल हक़ को 1997 में गिरफ्तार किया गया था। साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन (SAFMA) में शामिल होने के बाद इनकी प्रसिद्धि और बढ़ी, इस संस्था का मूल काम भारत और पाकिस्तानी पत्रकारों के बीच रिश्ते सुधारना था। कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह अरूसा आलम भी शादीशुदा थीं, उनके दो बेटे थे और उनके पति व्यक्तित्व के लिहाज़ से निष्क्रिय थे इसलिए लोगों को याद भी नहीं हैं। अरूसा के मन में भारत को लेकर अलग ही रोमांच था, उनका भारत आना-जाना लगा रहता था और इस दौरान यहाँ के लोगों से भी मिलती थीं। 

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की करीबी दोस्त, अरूसा आलम   

अरूसा आलम की कैप्टन अमरिंदर सिंह से पहली मुलाक़ात उनके पाकिस्तान के दौरे पर हुई थी। दोनों को 2007 से एक दूसरे से जोड़ा जाने लगा था जब वह कई बार साथ नज़र आए थे। हालाँकि, पाकिस्तानी पत्रकार ने तत्काल प्रभाव से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था वह ‘सिर्फ दोस्त’ हैं। बाद में उन्होंने इस भाव को दूर करने का प्रयास किया और तब से वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ अपने रिश्तों को लेकर काफी स्पष्ट हैं। 

पंजाब में अरूसा आलम को पटियाला के पूर्व महाराजा और वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेहद ख़ास और करीबी दोस्त माना जाता है। चंडीगढ़ में बतौर मेहमान उनकी स्वीकार्यता उल्लेखनीय है, वह शहर के उच्च वर्ग के साथ योग और कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति अपने लगाव के बहाने काफी समय बिताती हैं। 

स्वाभाविक रूप से कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी प्रणीत कौर को दोनों के बीच का यह रिश्ता रास नहीं आया। वह अपने पति और अरूसा के बीच कथित अफेयर को लेकर काफी निराश थीं लेकिन समय के साथ सामंजस्य बैठाना सीख गईं। यह रिश्ता बेशक उनके लिए संवेदनशील मुद्दा है, उन्होंने इस पर सार्वजनिक रूप से कभी बात नहीं की। अरूसा अमूमन पटियाला जाती हैं जहाँ प्रणीत कौर रहती हैं। वह असल में चंडीगढ़ में रहती हैं और सड़क के रास्ते भारत घूमती हैं। 

महाराज साहब के साथ खूबसूरत और हमेशा बनी रहने वाली दोस्ती पर गर्व: अरूसा आलम 

अरूसा आलम 2017 के विधानसभा चुनावों में मंचों का चर्चित चेहरा रहीं जहाँ वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए प्रचार करती हुई नज़र आई थीं। वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल थीं जिन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह के शपथग्रहण में वीवीआईपी सीट मिली थी। जहाँ एक तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री अपने रिश्ते को लेकर चुप्पी साधे रहते हैं वहीं अतीत ने सारे रोड़े दूर करते हुए दोनों के रिश्ते पर चर्चाओं को जगह दे दी है। अरूसा आलम, फरवरी 2020 के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह की बायोग्राफी ‘द पीपुल्स महाराजा’ के लॉन्च में भी शामिल हुई थीं। 

सबसे उल्लेखनीय है कि इस किताब में एक पूरा अध्याय दोनों के रिश्तों पर चर्चा करता है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनकी दोस्ती खूबसूरत है और उन्हें इस पर गर्व है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से रिश्तों की वजह से पैदा होने वाले अवरोध के बारे में अरूसा आलम की जानकारी बहुत कम है। फरवरी 2018 के दौरान चंडीगढ़ में उन्होंने कहा था, “मेरा रिश्ता मेरे घर पर भी एक संवेदनशील मसला है। मैं एक मुस्लिम महिला हूँ और आप जानते हैं कि हमारे घर पर लोग कैसे सोचते हैं।”                 

कठुआ में मंदिर को निशाना बनाकर आतंकियों ने फेंका ग्रेनेड: विस्फोट से अफरातफरी की स्थिति

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बुधवार (दिसंबर 30, 2020) देर रात को एक रहस्यमय विस्फोट हुआ, जिससे सीमा के पास रहने वाले लोग बुरी तरह घबरा गए। इस विस्फोट में हालाँकि कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है। इस रहस्यमय विस्फोट के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कठुआ के हीरानगर और आस-पास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक आंतकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बुधवार को एक मंदिर को निशाना बनाकर ग्रेनेड फेंका। लेकिन इसका निशाना चूक गया और यह थोड़ी दूर जाकर फटा, जिससे वहाँ मौजूद लोगों के बीच अफरातफरी की स्थिति बन गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। 

दरअसल, जम्मू में शांति को प्रभावित करने के मकसद से पाकिस्तानी आकाओं की शह पर पुंछ एवं जम्मू जिलों में ग्रेनेड हमले की योजना को नाकाम करते हुए पुलिस ने हाल ही में आंतकवादियों के चार सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद यह हमला किया गया। 

कठुआ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र मिश्रा ने ‘पीटीआई’ को बताया, ”हीरानगर सेक्टर में देर शाम करीब 7:30 बजे एक मंदिर पर ग्रेनेड हमला किया गया, जो निशाना बनाए गए स्थान से कुछ दूरी पर खुली जगह पर फटा। हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।” 

उन्होंने कहा कि इस हमले के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर आतंकवादियों को दबोचने के लिए सघन तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारी ने कहा कि अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई तथा कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी स्थिति का पता लगाने के लिए घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने कहा, “विस्फोट किस तरह से हुआ यह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन शुरूआती रिपोर्ट से लगता है कि यह विस्फोट ग्रेनेड से किया गया है।”

पुंछ-जम्मू से पकड़े गए आतंकी

27 दिसंबर को पुलिस ने लश्कर के आतंकी को दो ग्रेनेड के साथ जम्मू के बाग-ए-बाहु के पास से गिरफ्तार किया था। इससे एक दिन पहले पुंछ लश्कर के नए संगठन से जुड़े आतंकियों के तीन मददगार पकड़े गए थे। तीनों को सीमा पार बैठे हैंडलर ने पुंछ के एक मंदिर पर ग्रेनेड हमले का काम सौंपा था।

इसी तरह से 25 दिसंबर को आतंकी तंजीम द रजिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) के दो आतंकी जम्मू से गिरफ्तार किए गए थे। दक्षिण कश्मीर के रहने वाले दोनों आतंकियों से एके-47 राइफल, एक पिस्टल और अन्य असलहा बरामद हुआ था।

गर्भगृह में घुसे उपद्रवी, भगवान राम की 400 साल पुरानी मूर्ति का सिर धड़ से अलग: मंदिरों पर लगातार हमलों से घिरी आंध्र सरकार

एक तरफ आंध प्रदेश की सरकार पर मुस्लिमों और ईसाइयों के तुष्टिकरण के आरोप लग रहे हैं, दूसरी तरफ हिंदू मंदिरों पर हमले रुक नहीं रहे। ताजा घटना में प्रदेश के विजयनगरम जिले के नेल्लीमरला मंडल में एक पहाड़ी पर स्थित मंदिर में अज्ञात उपद्रवियों ने भगवान राम की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया।

मूर्ति रामतीर्थम गाँव के पास पहाड़ी की चोटी पर स्थित बोडिकोंडा कोदंडाराम मंदिर में विराजमान थी। कथित तौर पर उपद्रवी ताला तोड़ मंदिर के गर्भगृह में घुसे और और स्वामी कोदंडारामुडु का सिर काटकर अलग कर दिया।

बताया जाता है कि यह मूर्ति 400 साल पुरानी थी। इसके साथ ही मंदिर में माता सीता और लक्ष्मण की भी मूर्तियाँ विराजमान हैं। मुख्य मंदिर पहाड़ी की तलहटी में है। जिस मंदिर में मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई वह पहाड़ी की चोटी पर है। एक ही पुजारी दोनों मंदिरों में नियमित अनुष्ठान करते हैं। यह घटना तब सामने आई जब पुजारी मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) सुबह मंदिर में नियमित अनुष्ठान करने के लिए पहुँचे। 

मंगलवार की सुबह, पुजारियों को रामतीर्थम में बोडिकोंडा पहाड़ी पर प्राचीन सीता लक्ष्मण कोदंडाराम मंदिर के दरवाजे खुले मिले और गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति का सिर धड़ से अलग दिखा। मंदिर के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। बुधवार को क्षतिग्रस्त किए गए हिस्से को पास के तालाब में प्रवाहित कर दिया गया।

जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को एक बयान में कहा, “जिस समय अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण चल रहा है, हमारे राज्य में भगवान राम की मूर्ति को नष्ट कर दिया गया है। मूर्ति के सिर को अलग करना एक पागल व्यक्ति का कार्य नहीं हो सकता है। यह धार्मिक उन्मादियों का कृत्य है।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर लापरवाह है। इसकी वजह से ही यह घटना हुई है। उन्होंने पूछा कि मंदिर पर लगातार हो रहे हमले पर मुख्यमंत्री जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? वे चुप क्यों हैं?

पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुँचकर सबूत इकट्ठे किए और अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बनाई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जाँच सभी संभावित एंगल से की जा रही है।

TNM से बात करते हुए, जिला पुलिस अधीक्षक (SP) राजा कुमारी ने कहा, “घटना सोमवार को मंदिर के बंद होने के बाद हो सकती है। यह कल (मंगलवार) हमारे संज्ञान में आई। अज्ञात बदमाशों ने भगवान राम की मूर्ति का सिर अलग कर दिया। अभी तक आरोपित का पता नहीं चला है। टीमें मामले पर काम कर रही हैं।”

मूर्ति के क्षतिग्रस्त होने के पीछे के मकसद के बारे में पूछे जाने पर एसपी ने कहा, “यह घटना दुर्घटना की तरह नहीं दिख रही है, बल्कि इरादन किया गया कृत्य जान पड़ता है। हालाँकि, फिलहाल हम इस बारे में निष्कर्ष नहीं निकाल सकते हैं कि इसके पीछे क्या इरादे थे।”

घटना की जानकारी मिलने के बाद टीडीपी के स्थानीय नेता एस.रविशेखर और अन्य लोगों ने मंदिर में जाकर पहाड़ी पर धरना दिया। उन्होंने सरकार से उपद्रवियों पर कार्रवाई करने और मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करने की माँग की। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष आर.पावनी और अन्य लोगों ने भी मंदिर का दौरा किया और धरना दिया। उन्होंने भी घटना की निंदा की और सरकार से अपराधियों का पता लगाने और मंदिर की सुरक्षा करने की माँग की।

दूसरी तरफ, नेल्लीमारला के विधायक बी.पला नायडू ने मंदिर का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। रामतीर्थम परिक्षेत्र परिषद के अध्यक्ष श्रीनिवासानंद स्वामी ने भी मंदिर का दौरा किया और कहा कि इसकी अपमानजनक घटना से भक्तों की भावनाएँ आहत हुई है। सरकार को इस मुद्दे पर तेजी से काम करना चाहिए और जनता में विश्वास पैदा करना चाहिए। राज्य के सभी मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से आंध्र प्रदेश में लगातार हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। कहीं मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, तो कहीं रथों को आग में जलाकर राख किया जा रहा है। 27 सितंबर को चित्तूर जिले में एक शिव मंदिर पर हमला किया गया और मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में नंदी की मूर्ति को 26 और 27 सितंबर की रात कुछ बदमाशों ने तोड़ा। मूर्ति के टुकड़े पास रखी कुर्सी पर बिखरे हुए पाए गए थे।

कर्नाटक: पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में नारे, SDPI के बताए जा रहे वायरल वीडियो में दिख रहे उपद्रवी

कर्नाटक में ग्राम पंचायत चुनावों की मतगणना के दौरान बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। इस वीडियो में कुछ उपद्रवी उजीरे में ग्राम पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाते दिख रहे हैं।

इस संबंध में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड के एसपी बीएम लक्ष्मी प्रसाद ने कहा, ”सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ उपद्रवी उजीरे में ग्राम पंचायत चुनावों की मतगणना के दौरान पाकिस्तान समर्थक नारे लगाते हुए दिखे। हम मामले की जाँच करेंगे।”

भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के राजनीतिक संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की रैली के दौरान पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए गए। बीजेपी ने इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

हालाँकि SDPI बेल्थांगडी विधानसभा इकाई के अध्यक्ष हैदर अली ने आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि SDPI कार्यकर्ता ‘SDPI ज़िंदाबाद’ कह रहे थे, न कि ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’। फिलहाल कर्नाटक पुलिस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर वायरल हुए वीडियो की जाँच कर रही है। 

टाइम्स नाउ के मुतबाकि जब ग्राम पंचायत चुनावों के परिणाम घोषित किए जा रहे थे और जीत का जश्न मनाया जा रहा था, तभी पाकिस्तान समर्थित नारे लगाए गए। बताया जा रहा है कि वीडियो को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया गया है। इसके अलावा, पुलिस सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच कर रही है और अधिक सबूत इकट्ठा करने के लिए चश्मदीदों से भी बात कर रही है। 

जानकारी के मुताबिक 15 एसडीपीआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ धारा 124 (ए) (राजद्रोह) और भारतीय दंड संहिता की 143 (गैरकानूनी विधानसभा) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कर्नाटक में पंचायत चुनाव के लिए बुधवार को मतगणना के शुरुआती रुझानों से अधिकतर सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के जीतने के संकेत मिले हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, अभी 36781 ग्राम पंचायत पदों के परिणाम लंबित हैं। शुरुआती रुझानों में 82616 सीटों में से बीजेपी 5340 पर, कॉन्ग्रेस 3150 पर और जेडीएस 1580 पर आगे थे। वहीं 600 से अधिक सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे रहे।

कर्नाटक ग्राम पंचायत चुनाव में 5728 ग्राम पंचायतों की 82616 सीटों पर दो चरणों (22 और 27 दिसंबर) में हुए चुनाव में बैलट पेपर का इस्तेमाल किया गया था और इस दौरान 78.58 फीसदी मतदान हुआ। चुनावी मैदान में 2,22,814 उम्मीदवार थे। अभी तक आधिकारिक रूप से किसी नतीजे की घोषणा नहीं हुई, लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील और कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने अपनी-अपनी पार्टी के समर्थन वाले उम्मीदवारों के जीतने का दावा किया

CM योगी के मंत्री का पूर्व IAS अफसरों को करारा जवाब, कहा- ‘अवैध संपत्ति खोने के डर से किया लव जिहाद पर बने कानून का विरोध’

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद पर बने कानून के खिलाफ 104 रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखते हुए इसे नफरत की राजनीति का केंद्र बताया था। जिस पर योगी सरकार के मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि उन अधिकारियों को सेवा के दौरान गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति को खोने का डर सता रहा है। इसीलिए वे इस बात से परेशान हैं और पत्र लिख रहे हैं।

यूपी के मंत्री आरपी सिंह ने बुधवार (30 दिसंबर, 2020) को समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि, “पत्र लिखने वालों में से कुछ अधिकारियों ने सेवा के दौरान गलत तरीके से संपत्ति बनाई। अब उन्हें इसे खोने का डर सता रहा है। यदि योगी जी मुख्यमंत्री बने रहे तो उनकी संपत्तियों की जाँच की जाएगी। इसी बात से वे लोग चिंतित हैं।”

104 पूर्व नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा है, “उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून 2020′ ने राज्य को नफरत, विभाजन और कट्टरता की राजनीति का केंद्र बना दिया है।” पूर्व अधिकारियों ने कानून के उपयोग पर चिंता जाहिर करते हुए CM योगी को फिर से संविधान पढ़ने की सलाह भी दे डाली।

पत्र लिखने वालों में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव, प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार टीकेए नायर, के सुजाता राय और एएस दौलत जैसे अफसर शामिल हैं। पत्र में कहा गया है कि जिस यूपी को कभी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता था, वो अब घृणा, विभाजन और कट्टरता की राजनीति का केंद्र बन गया है और शासन की संस्थाएँ अब सांप्रदायिक जहर में डूबी हुई हैं। ये काफी दर्दनाक है।

पूर्व नौकरशाहों ने लिखा, “यह युवा भारतीयों के खिलाफ किए गए ‘जघन्य अत्याचारों’ की शृँखला में से एक है, जो ‘स्वतंत्र देश के नागरिकों के रूप में अपना जीवन बसर करना चाहते हैं।” इसके अलावा चिट्ठी में लिखा गया, “ये अत्याचार, कानून के शासन के लिए समर्पित सभी भारतीयों के आक्रोश की परवाह किए बिना जारी हैं।” उन्होंने सीएम योगी से कहा कि आपके राज्य में इस कानून का इस्तेमाल लाठी के तौर पर किया जा रहा है। खासकर, ऐसे मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं को परेशान करने के लिए किया गया है जो अपनी च्वाइस की आजादी से जीना चाहते हैं।”

कोविड-19 का खुलासा करने वाली पत्रकार की जल्द रिहाई की माँग: अमेरीकी विदेश मंत्री ने चीनी सरकार को लताड़ा

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीनी नागरिक पत्रकार झांग झान की रिहाई की माँग की है। बता दें चीन ने वुहान में कोरोना वायरस पर कई खुलासे करने वाली स‍िट‍िजन जर्नलिस्‍ट झांग झान को 4 साल जेल की सजा सुनाई गई है। बीजिंग की इस कार्रवाई को शर्मनाक करार देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इसकी निंदा की है।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने वुहान में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आने पर लाइवस्ट्रीम रिपोर्टिंग दिखाने वाली महिला पत्रकार को सजा सुनाए जाने की निंदा करते हुए कहा, “अमेरिका पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) सिटीजन जर्नलिस्ट झांग झान को सजा सुनाए जाने की कड़ी निंदा करता है। हम पीआरसी सरकार से उन्हें तुरंत रिहा करने की माँग करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चीन कम्युनिस्ट पार्टी के झूठ के विपरीत, वुहान से चीनी नागरिक पत्रकार झांग झान की बिना सेंसर हुई रिपोर्टों ने दुनिया को कोरोना प्रकोप के बारे में ज़रूरी सच से अवगत कराया। उनके इस साहस के लिए उनकी तारीफ़ की जानी चाहिए न की क़ैद किया जाना चाहिए।”

अमेरिकी मंत्री ने चीन के हिटलर रवैए पर उन्हें लताड़ते कहा कि चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह उन सभी लोगों की आवाज चुप करा देगी जो उसके खिलाफ आवाज उठाएँगें।

गौरतलब है कि चीन में कोई भी स्‍वतंत्र मीडिया नहीं है और चीनी अधिकारी उन कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करते हैं जो कोरोना वायरस को लेकर चीन सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। वकील और पेशे से पत्रकार 37 वर्षीय झांग ने फरवरी में वुहान की यात्रा की थी और सोशल मीडिया के कई मंचों पर महामारी फैलने के बारे में लोगों को अवगत कराया था।

उल्लेखनीय है कि चीन के वुहान शहर से ही कोविड-19 महामारी की शुरुआत पिछले साल के अंत में फैलनी शुरू हुई थी। जानलेवा बीमारी की खबर सार्वजनिक करने के लिए उन्हें मई में गिरफ्तार किया गया था। चीन में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लक्षित राष्ट्रव्यापी उपायों और सरकार की शुरुआती प्रतिक्रिया की आलोचना पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बीच यह कार्रवाई की गई थी।

PDP नेता वहीद पारा ने घाटी में खूनी खेल के लिए आतंकी संगठन हिजबुल को दिए थे ₹10 लाख: NIA ने किया खुलासा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार (30 दिसंबर, 2020) को जम्मू-कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता वहीद उर रहमान पारा को लेकर चौकाने वाले खुलासे किए हैं। एनआईए के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले वहीद पारा ने अपने समर्थन को सुनिश्चित करने के लिए आंतकी संगठन हिजबुल-मुजाहिद्दीन को 10 लाख रुपए दिए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय जाँच एजेंसी एनआईए ने पारा को जम्मू कश्मीर के जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के कुछ दिन पहले नवम्बर में गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी सस्पेंड चल रहे डीएसपी दविंदर सिंह और हिजबुल मुजाहिदीन के संबंधों की जाँच के दौरान पारा का कनेक्शन मिलने के बाद की गई थी। वहीद पारा अभी जेल में ही है। जेल में रहते हुए ही पारा ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से डीडीसी चुनाव में जीत हासिल की थी।

गौरतलब है कि पारा के वकील टीएन रैना से जब एनआईए के दावे को लेकर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी नहीं बताया। हालाँकि, इस महीने की शुरुआत में जम्मू में एनआईए की विशेष कोर्ट में दायर की गई अपनी जमानत याचिका में पारा ने हिजबुल के साथ किसी भी तरह से संपर्क रखने से इनकार कर दिया था। पारा ने कहा कि उसे एक खास राजनीतिक पार्टी द्वारा साजिश के तहत उन्हें फँसाया जा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर, पारा ने हिजबुल के ऑपरेटिव सैयद मुश्ताक उर्फ ​​नावेद बाबू तक ये रकम डीएसपी दविंदर सिंह के जरिए पहुँचाई थी। ताकि घाटी में आंतकी खेल खेला जा सके। जम्मू कश्मीर पुलिस के निलंबित अधिकारी दविंदर सिंह को श्रीनगर एयरपोर्ट पर ये रकम दी गई थी जहाँ वह उस समय तैनात थे। यह पैसे एक टिफ़िन बॉक्स में छिपाया गया था।

दविंदर सिंह को 11 जनवरी को हिजबुल-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकवादी नवीद बाबू और आसिफ राथर के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिस दौरान वे एक कार में एक साथ यात्रा कर रहे थे। जिसके बाद मामले को एनआईए के हाथों में सौंपा गया था। एनआईए को जाँच के दौरान ही वहीद पारा के भी टेरर फंडिंग में जुड़े होने के साक्ष्य मिले थे।

इस साल भी सेना ने नहीं निकलने दिए घर-घर से अफजल: वो ऑपरेशन जिन्होंने फेल कर दिया वामपंथियों का खूनी एजेंडा

कुछ ही साल पहले जेएनयू के कुछ छात्रों ने अपने कैंपस में संसद भवन पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु की बरसी मनाई और नारे लगाए हुए ऐलान किया था कि ‘कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा।’ यह महज कुछ भटके हुए युवाओं की नारेबाजी नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में चरमपंथ और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के साथ ही केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार के लिए वामपंथी कट्टरपंथियों की ओर से भेजा गया एक तरह का संदेश था।

लेकिन पिछले कुछ सालों में भारतीय सुरक्षाबलों ने जिस तरह से कश्मीर घाटी से आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ अभियान चलाया है, उसने कट्टरपंथियों के हौंसले पस्त कर दिए हैं। हालत ये है कि कई बार हिज्बुल और जैश ए मोहम्मद जैसे संगठनों के शीर्ष पद खाली रहे, या फिर वह जल्दी भारतीय सेना और सुरक्षा बलों द्वारा खाली कर दिया गया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब कश्मीर में 170 से 200 के बीच ही आतंकी शेष रह गए हैं। इनमें से 40 पाकिस्तान के बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक आतंकी संगठन हिज्बुल और लश्कर के आतंकी हैं। सेना के ऑपरेशन का परिणाम ही है कि जैश के आतंकियों की संख्‍या में लगातार गिरावट आ रही है क्योंकि सीमा पार से घुसपैठ पर विराम लग चुका है जिस कारण सीमा की दूसरी ओर से ट्रेनिंग लेकर जैश के आतंकी भारत में नहीं घुस पा रहे हैं।

आतंकवाद के सफाए के साथ-साथ सेना ने कई आतंकियों को सरेंडर करने का भी निमंत्रण दिया। इसका ही नतीजा है कि सेना के अधिकारियों के समक्ष इस वर्ष हथियार डालने वाले 17 युवकों ने हथियार डाले और मुख्यधारा में लौटने की बात पर सहमती जताई। इनमें से 12 आतंकियों ने सीधी मुठभेड़ के दौरान आत्मसमर्पण किया।

साल 2020 में हथियार डालने वाले 17 आतंकवादियों में अल-बद्र आतंकवादी समूह का शोएब अहमद भट भी है, जिसने इस वर्ष अगस्त में सरेंडर किया था। वह उस समूह का हिस्सा था जिसने दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ जिले में टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान की हत्या की थी।

ऑपरेशन ऑल आउट

2014 में इस देश में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवादियों पर नकेल कसने के सख्त निर्देश दिए और यह अभियान 2017-18 में और भी तेज हो गया, जब भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ शुरू किया। इसका उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व को खत्म करना और घाटी से आतंकी मॉड्यूल का सफाया था। वर्ष 2018 सबसे अधिक सफल कहा जा सकता है, जब भारतीय सेना 257 आतंकवादियों को मारने में सफल रही।

कश्मीर घाटी में भारतीय सेना की आतंकवाद के खिलाफ जंग का ही नतीजा रहा कि कट्टरपंथियों के साथ ही पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तक की नींद हराम रही और उसने कई बार संदेश जाहिर करते हुए भारत पर फॉल्स ऑपरेशन करने का आरोप भी लगाया है।

इस साल सेना द्वारा घाटी में चलाए गए कुछ सफलतम ऑपरेशंस में से एक ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ (Operation All Out) भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, घाटी में मौजूद आतंकी संगठनों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या में भी कमी देखी गई है। वर्ष 2020 की शुरुआत में घाटी में करीब 300 आतंकी मौजूद थे जिनकी संख्या अब 170 से 200 के बीच बताई जा रही है। सुरक्षाबलों के अनुसार, जम्मू कश्मीर में साल 2020 में दिसंबर माह तक करीब 203 आतंकवादियों को मार गिराया गया है। पिछले वर्ष, 2019 में मारे गए आतंकियों की संख्या 152 थी।

वर्ष 2016, 2017, 2018 और 2019 में कई बड़े कमांडर मारे गए थे। इनमें सब्जार अहमद भट्ट, बुरहान वानी, जुनैद मट्टू, बशीर लश्करी, अबू लल्हारी, जाकिर मूसा, जीनल उल इस्लाम, सद्दाम पाडर, नाविद जट्ट, समीर टाइगर, मन्नान वानी आदि शामिल हैं।

ऑपरेशन जैकबूट

यही क्रम वर्ष 2020 में भी जारी रहा और इस साल सेना द्वारा मार गिराए गए कुछ बड़े आतंकियों की लिस्ट में जो एक बड़ा नाम शामिल है, वो है हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमाडंर रियाज नाइकू का। सेना ने रियाज पर 12 लाख रुपए का इनाम भी रखा था। मीडिया द्वारा यह खबर भी जमकर सामने रखी गई थी कि आतंकी संगठन का लीडर बनने से पहले रियाज एक गणित का टीचर था।

बुरहान वानी गैंग के सफाए के बाद रियाज नायकू मोस्ट वांटेड बन चुका था। उसे पकड़ने के लिए काफी कोशिशें की गई। पहले उसके ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए उसके 30 खबरियों को पकड़ा गया। साथ ही उसके सभी प्रमुख ठिकानों को भी नष्ट किया गया। 

इसी के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का ‘ऑपरेशन जैकबूट’ भी पूरा हो गया, जिसे उन्होंने घाटी में आतंकवाद को खत्म करने के पिछले साल अक्टूबर माह में शुरू किया गया था। बताया जाता है कि इस ऑपरेशन में आखिरी आतंकी रियाज नाइकू ही था।

रियाज नाइकू के बाद ‘आतंक का डॉक्‍टर’ कहा जाने वाला हिज्‍बुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर सैफुल्‍लाह भी सेना द्वारा ढेर कर दिया गया। हिज्‍बुल के टॉप कमांडर रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद सैफुल्लाह को संगठन का चीफ बनाया गया था, जिसे नवम्बर माह की शुरुआत में ही एक ज्वाइंट ऑपरेशन के बाद ढेर कर दिया गया। सेना की लिस्ट में उसे भी A++ कैटेगरी में रखा गया था।

इससे पहले जून के महीने ही शोपियाँ में हिज्बुल का टॉप कमांडर फारुक अहमद भट उर्फ नाली को भी ठिकाने लगा दिया गया था। फारूक अहमद भट ने 2015 में हिज्बुल मुजाहिदीन को ज्वॉइन किया था।

आतंकवाद मुक्त हुए त्राल और डोडा

इस साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल को हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों से पूर्ण रूप से मुक्त कराने के बाद सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के डोडा इलाके को भी आतंकी मुक्त करवाया। यह जानकारी स्वयं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने दी थी। डीजीपी ने बताया है कि एक मुठभेड़ में हिज्बुल कमांडर मसूद के मारे जाने के बाद इलाका पूरी तरह से आतंकी मुक्त हो गया। वह बलात्कार के मामले में भी वंछित था।

हिज्बुल के आलावा, आतंकी संगठन अल बद्र और लश्कर (LET) के आतंकवादियों का सफाया भी सेना द्वारा जमकर किया गया। जुलाई के माह ही श्रीनगर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें से एक इशफाक रशीद खान लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर था, जबकि एक दूसरा आतंकी एजाज भट भी इसी आतंकी संगठन से जुड़ा था।

इशफाक रशीद खान श्रीनगर के सोजिथ इलाके का रहे वाला था और उसे 2018 में आतंकी संगठन का टॉप कमांडर बना दिया गया था। उसकी मौत के बाद कश्मीर पुलिस ने घोषणा की थी कि अब श्रीनगर जिले का एक भी आतंकी जिंदा नहीं बचा है।

ऑपरेशन रंदोरी बहक

सेना और सुरक्षाबलों को कुछ मुठभेड़ों में अपने जवानों को भी गँवाना पड़ा। यह बड़े ऑपरेशन सफल तो रहे लेकिन सेना ने अपने जवानों को भी खोया। ऐसे ही एक ऑपरेशन जो इस वर्ष सबसे साहसी, खतरनाक और रक्त रंजित माना जाता है, उसका नाम था- ऑपरेशन रंदोरी बहक!

अप्रैल, 2020 के ही एक दिन सुरक्षा बलों ने कुपवाड़ा में LOC पर मुठभेड़ में 5 आतंकियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन (Operation Randori Behak) में सेना ने अपने पाँच सैनिकों को खो दिया। तीन मुठभेड़ के दौरन और दो सैनिकों ने पास के सैन्य अस्पताल में दम तोड़ दिया। खराब मौसम के कारण जख्मी जवानों को निकालने में सेना को बहुत मश्क्कत करनी पड़ी थी।

भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में ऑपरेशन रंदोरी बहक शुरू किया, जो 5 दिनों तक जारी रहा और इसमें हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद ली जा रही थी। घुसपैठ के दौरान सुरक्षा बलों से उनकी मुठभेड़ हुई, लेकिन खराब मौसम और घने जंगल का फायदा उठा कर आतंकी भाग निकलने में कामयाब हो गए थे। सेना ने अपना ऑपरेशन जारी रखते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी करके ऑपरेशन को जारी रखा।

पहली अप्रैल को नियंत्रण रेखा के पास पैरों के निशान देखे गए थे। इस जगह पर बाड़ पूरी तरह से बर्फ में डूबे हुए थे। इसके बाद पैरों के निशानों को ही आधार बनाकर सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के विशेष बल के दस्ते का नेतृत्व सूबेदार संजीव कुमार ने किया और इसमें हवलदार डावेंद्र सिंह, पैराट्रूपर बाल कृष्ण, पैराट्रूपर अमित कुमार और पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह शामिल थे। वे सभी इस मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए।

सेना द्वारा घाटी में आतंक के सफाए का अभियान लगातार जारी है। आज बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को भी सेना तीन आतंकियों को ठिकाने लगाने में कामयाब रही है। सेना ने बताया कि ये आतंकवादी आगामी गणतंत्र दिवस पर किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। यदि आतंकवाद विरोधी अभियान इसी गति से जारी रहा, तो हम 2022 के अंत तक घाटी से आतंकवाद के पूर्ण उन्मूलन की आशा कर सकते हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है।