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इच्छाधारी आंदोलनकारी योगेन्द्र यादव ने की गणतंत्र दिवस पर बोरिस जॉनसन बन कर आने की पेशकश

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के सामने आने के बाद गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत आने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है। लेकिन इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है कि इच्छाधारी आन्दोलनकारी योगेन्द्र यादव ने केंद्र सरकार के सामने गणतंत्र दिवस के दिन बोरिस जॉनसन बनकर आने की इच्छा जाहिर की है।

जी हाँ, आजकल किसान आंदोलनों में एक प्रदर्शनकारी की भूमिका निभा रहे इच्छाधारी आंदोलनकारी योगेंद्र यादव ने ये प्रस्ताव खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखा। उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए, बहुत ही विनम्र और धीमी आवाज में, शब्दों को चबाते हुए कहा, “राष्ट्रहित में मैं बोरिस जॉनसन क्या, डोनल्ड ट्रम्प भी बन सकता हूँ। आपको क्या लगता है कि ‘नमस्ते ट्रंप’ इवेंट में मोदी जी के साथ ट्रंप थे? वहाँ भी मैं ही था। चार पैसे मिल जाएँ तो किसान, चार और मिल जाएँ तो मजदूर… अपनी तो मस्त कट रही है ब्रो!”

योगेन्द्र यादव ने हमें बताया कि हाल ही के कुछ समय में देश में इच्छाधारियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, इस बात की गंभीरता को जानते हुए उन्होंने बोरिस जॉनसन के मना करने की खबर सुनते ही तुरंत अपने लम्ब्रेटा स्कूटर को थोड़ा झुकाकर दो किक मारी और प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह प्रस्ताव रखा। लेकिन पीएम मोदी ने कहा कि उनके सामने योगेन्द्र यादव से पहले ही लिबरलों के दुग्गल साहब यानी ध्रुव राठी भी ये पेशकश कर चुके हैं।

हालाँकि, पीएम मोदी ने ऑपइंडिया से बताया कि उनकी हार्दिक इच्छा ना योगेन्द्र यादव को बोरिस भाई जॉनसन बनाने की है और ना ही ध्रुव राठी को! प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी इच्छा है कि अगर किसी विदेशी को ही मेहमान बनाना है तो क्यों न राहुल गाँधी को ही ये मौका दिया जाए?

असमंजस की स्थिति में पीएम मोदी ने कहा कि जनता के बीच योगेन्द्र यादव और ध्रुव राठी ने अपनी इच्छाधारी शक्तियों का लोहा मनवाया है लेकिन फिर भी जो मजा राहुल गाँधी जनता को दे सकते हैं वह योगेन्द्र और राठी सामूहिक रूप से नहीं दे सकते। इस पर, राहुल गाँधी के पास वर्तमान में एक बड़ी बढ़त ये भी है कि वो विदेशों में ही किसी अज्ञात जगह पर हैं और भारत में किसानों के साथ आँदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

गौरतलब है कि कभी कानून के जानकार, कभी किसान मामलों के जानकार, कभी कोरोना एक्सपर्ट, कभी राजनीतिज्ञ, तो कभी साहित्य के बारे में भरपूर जानकारी रखने वाले योगेन्द्र यादव कई बार अपनी क्षमताओं को साबित भी कर चुके हैं। इस कारण पीएम मोदी अभी उनके नाम पर भी विचार कर रहे हैं। इस बारे में अंतिम फैसला आने पर सबसे पहले हमारे गोपनीय सूत्रों को ही सूचित किया जाएगा।

केजरीवाल सरकार द्वारा मंदिर गिराए जाने पर भड़के हिंदू संगठन: महिला कार्यकर्ताओं ने किया चाँदनी चौक में हनुमान चालीसा का पाठ

केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली के चाँदनी चौक में कराए जा रहे सौंदर्यीकरण के दौरान तोड़े गए हनुमान मंदिर को लेकर हिंदू संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उत्तर दिल्ली नगर निगम ने अदालत के आदेश के बाद रविवार (जनवरी 3, 2021) को मंदिर तोड़ दिया था।

यह चाँदनी चौक के सौंदर्यीकरण का हिस्सा बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी भगवा झंडा थामे बजरंग दल के कार्यकर्ता थे। उन्होंने गौरी शंकर मंदिर से लेकर उस स्थान तक मार्च निकाला, जहाँ मंदिर बना था। उन्होंने नारेबाजी भी की। हालाँकि, पुलिस ने उन्हें बैरिकेट लगाकर रोक दिया।

दोपहर करीब 2 बजे हिंदू संगठनों की महिला कार्यकर्ताओं ने तोड़े गए मंदिर स्थल पर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। लेकिन दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ते देख उन्हें वहाँ से भी दूर कर दिया।

विहिप के प्रवक्ता महेंद्र रावत ने बताया कि दिल्ली के प्रमुख कपिल खन्ना, उपाध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता, सतिव रवि और बजरंग दल के राज्य संयोजक बी बत्रा समेत 15-20 कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मंदिर तोड़े जाने के मामले में भाजपा ने AAP सरकार को घेरा। दिल्ली भाजपा ने माँग की है कि दिल्ली सरकार चाँदनी चौक के सौंदर्यीकरण की योजना को री-डिजाइन करके वहाँ हनुमान मंदिर को फिर से बनवाने की व्यवस्था करें।

वहीं आम आदमी ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा शासित MCD ने पहले सैकड़ों साल पुराना मंदिर तोड़ा और अब जनता के आक्रोश से बचने के लिए और अपने जघन्य अपराध को छिपाने के लिए AAP पर आरोप लगा रही है। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस भी इस विवाद में कूद गई है। कॉन्ग्रेस ने AAP और भाजपा दोनों पर निशाना साधा।

इससे पहले सोमवार (जनवरी 04, 2020) को उपराज्यपाल से मुलाकात के बाद विश्व हिंदू परिषद के नेता आलोक कुमार ने कहा था कि उन्होंने उपराज्यपाल से कहा है कि वे उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र लगाकर मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए अनुमति लें तथा उसी स्थान पर मंदिर को दोबारा स्थापित करें। उन्होंने कहा था कि अगर मंदिर की पुनर्स्थापना नहीं होती है तो वीएचपी आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

वहीं, विहिप प्रान्त प्रचार प्रसार प्रमुख महेंद्र रावत ने बताया था कि वीएचपी, बजरंगदल, मातृशक्ति, दुर्गावाहनी, अन्य हिन्दू संगठनों के साथ मिलकर विरोध दर्ज कराएँगे। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर माँग की कि हनुमान मंदिर तोड़ने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

गौरतलब है कि इस मसले पर बीजेपी दिल्ली के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि दो अन्य धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त करने का प्रस्ताव था, जिन्हें दिल्ली सरकार द्वारा संरक्षित किया गया, लेकिन AAP ने हनुमान मंदिर के लिए ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “योजना दिल्ली सरकार की थी, यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय से आया था। दिल्ली सरकार ने दो अन्य धार्मिक स्थलों को बचाया है, हनुमान मंदिर को क्यों नहीं?”

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नवंबर 2019 में मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। HC ने दिल्ली सरकार की ‘धार्मिक समिति’ के पुनर्विकास योजना के तहत हनुमान मंदिर और शिव मंदिर के एकीकरण के सुझाव को खारिज कर दिया था।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने दिसंबर में दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह जल्द ही हनुमान मंदिर को ध्वस्त करना चाहता है। विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए विध्वंस को कई बार स्थगित किया गया था। विध्वंस की तारीख 20 दिसंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन तब भी कुछ नहीं हुआ। अंततः इसे 2 और 3 जनवरी के बीच की मध्यरात्रि में ध्वस्त कर दिया गया।

निगरानी, जेल या फिर भाग गए हैं जैक मा: चीनी सरकार की आलोचना के बाद से लापता हैं अलीबाबा के संस्थापक

चीन के सबसे अमीर कारोबारियों में शुमार अलीबाबा ग्रुप के मालिक जैक मा पिछले दो महीने से गायब हैं। हालाँकि, अब चीनी मीडिया का कहना है कि जैक मा चीनी सरकार के सुपरविजन यानी, ‘देखरेख’ में हैं। ऐसे में, कयास लगाए जा रहे हैं कि जैक मा (Jack Ma) को गिरफ्तार कर लिया गया है या फिर उन्हें अनजान जगह पर नजरबंद कर दिया गया है। बड़ी और नामी हस्तियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी छुपाने का चीन का इतिहास रहा है, इसलिए आशंका लगाई जा रही है कि ‘सरकार की देखरेख’ (सुपरविजन) में होने का मतलब जेल हो सकता है।

जैक मा के व्यापार पर बीजिंग के आक्रामक तेवर के बाद, हांगकांग के ‘द एशिया टाइम्स’ ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेली’ के हवाले से कहा है कि उन्हें देश नहीं छोड़ने का आदेश दिया गया है। पीपुल्स डेली ने नवंबर माह के एक अंश में यह भी कहा था कि जैक मा चीनी सरकार की नीतियों के बिना अलीबाबा को इतनी ऊँचाइयों तक नहीं ले जा सकते। जैक मा नवंबर, 2020 से किसी भी सार्वजनिक इवेंट या टीवी शो में नजर नहीं आए जिसके बाद उनके गायब होने की खबरें आने लगीं।

जैक मा करीब दो महीने से किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखाई दिए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जैक मा ने चीन के वित्तीय नियामकों और सरकारी बैंकों की पिछले साल अक्टूबर में दिए गए भाषण की आलोचना की थी। इसी आलोचना के बाद उनका और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विवाद भी हुआ और इस विवाद के बाद से वो लगभग दो महीने से नजर नहीं आए हैं।

कौन हैं जैक मा

चीन की बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार अलीबाबा के संस्थापक हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अलीबाबा चीन के मशहूर कारोबारी और अपने बोलने के लिए प्रसिद्ध जैक मा की है। वह कभी एक स्कूल में पढ़ाया करते थे और अब वह अरबपति कारोबारी हैं। अलीबाबा विश्व की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है जिसके करोड़ों की संख्या में यूजर्स हैं। अलीबाबा का टर्नओवर भी अरबों में है। इसकी तीन मेन वेबसाइट टाउबाउ (Taobao), टीमॉल (Tmall) और अलीबाबा डॉट कॉम (Alibaba.com) है। अलीबाबा का ही एंट ग्रुप भी है, जिसने डिजिटल वॉलेट ‘अलीपे’ बनाया है, जो चीन में एक मोबाइल पेमेंट सिस्टम (मोबाइल वॉलेट) है। कंपनी ने भारत के पेटीएम में भी निवेश किया है।

दो महीने से लापता हैं अलीबाबा कंपनी के मालिक जैक मा, चीनी राष्ट्रपति से हुआ था विवाद

जैक मा के बनाए उनके टीवी शो ‘अफ्रीका के बिजनेस हीरो’ में भी जैक मा नजर नहीं आए हैं। कार्यक्रम में उनकी जगह किसी और शख्स को भेज दिया गया है। टीवी शो में शामिल नहीं होने पर अलीबाबा के प्रवक्ता ने कहा कि शेड्यूल को लेकर हुए विवाद की वजह से वे टीवी शो में शामिल नहीं हुए।

क्या है पूरा मामला

चीन की सरकार अलीबाबा ग्रुप पर मोनोपोली यानी एकाधिकार के गलत इस्तेमाल को लेकर तहकीकात कर रही है। अलीबाबा ने कहा था कि उन्हें एसएएमआर (SAMR) के जरिए एंट ग्रुप (Ant Group) को भी नोटिस भी भेजा गया है। यह जैक-मा की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा डॉट कॉम और फिनटेक एंपायर के लिए बहुत बड़ा झटका माना गया।

भारी पड़ा सरकार की आलोचना करना

माना का रहा है कि ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के मालिक जैक मा द्वारा सार्वजनिक तौर पर चीन के वित्तीय नियामकों और बैंकों का अलोचना करना भारी पड़ गया है। चीन सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बाद जैक मा की संपत्ति बीते दो महीने में 11 अरब डॉलर कम हो गई है। दरअसल, जैक मा ने चीन के वित्तीय नियामकों की इस बात के लिए लताड़ लगाई थी कि वो जोखिम लेना बिल्कुल पसंद नहीं करते।

उन्होंने चीन के बैंकों पर सूदखोर सेठों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। उनका इशारा इस तरफ था कि चीनी बैंक बिना कोई चीज गिरवी रखवाए कर्ज नहीं देते। गौरतलब है कि चीन में ज्यादातर बैंक सरकारी हैं, इसलिए उनकी टिप्पणियों को सीधे सरकार के खिलाफ कही गई बात माना गया।

शुरू हुए जैक मा के बुरे दिन

इस भाषण के बाद चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी भड़क उठी। जैक मा की आलोचना को कम्युनिस्ट पार्टी पर हमले के रूप में लिया गया। इसके बाद जैक मा के बुरे दिन शुरू हो गए। उनके कारोबार के खिलाफ तरह-तरह की जाँच शुरू कर दी गईं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इशारे पर चीनी अधिकारियों ने जैक मा को झटका देते हुए पिछले साल नवंबर माह में उनके एंट ग्रुप के 37 अरब डॉलर के आईपीओ को निलंबित कर दिया। 

चीन से बाहर नहीं जाने के आदेश

एक मीडिया रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई थी कि जैक मा के एंट ग्रुप के आईपीओ को रद्द करने का आदेश सीधा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से आया था। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर जैक मा को निर्देश दिए गए कि वह तब तक चीन से बाहर न जाएँ, जब तक कि उनके अलीबाबा ग्रुप के खिलाफ चल रही जाँच को पूरा नहीं कर लिया जाता है।

अलीबाबा और एंट ग्रुप पर कार्रवाई

चीन ने जैक मा की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा और उसकी वित्तीय कारोबार की शाखा एन्ट ग्रुप पर कार्रवाई शुरू की है। इस कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं, चीन के मार्केट रेगुलेटर का कहना है कि उसने अलीबाबा के खिलाफ बाजार पर एकाधिकार कायम करने संबंधी कोशिशों को लेकर यह कार्रवाई शुरू की है। चीन सरकार की कार्रवाई से कंपनियों में ऐसा खौफ समाया है कि महज दो ही दिन में चीन की बड़ी कंपनियों को करीब 15 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया है। कुछ समय पहले जानकारों का मानना है कि यह बदले में की गई कार्रवाई ज्यादा लगती है।

आखिरी वक्त चीन की सरकार ने रोकी लिस्टिंग

चीन सरकार ने जैक मा को कमजोर करने के लिए हाल ही में नए बैंक एंट ग्रुप की शेयर बाजार में लिस्टिंग को रोक दिया था। इस कदम के पहले इस ग्रुप की कीमत 316 अरब डॉलर आँकी गई थी। एंट ग्रुप के आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफ़रिंग) को जबर्दस्त कामयाबी मिल रही थी। चीन की नियामक संस्था ने लिस्टिंग रोकते हुए कहा था कि एंट ग्रुप को अपने कारोबारों में सुधार (रेक्टिफिकेशन) करने की जरूरत है। एंट ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी है।

रॉबर्ट वाड्रा से बेनामी संपत्ति मामले में आयकर अधिकारियों ने की पूछताछ: गाँधी परिवार के दामाद ने लगाया ‘राजनीति’ का आरोप

मंगलवार (जनवरी 05, 2021) को लगातार दूसरे दिन कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद और प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा के घर आयकर विभाग की टीम पहुँची है। बेनामी संपत्ति मामले में उनसे लगातार दूसरे दिन पूछताछ की जाएगा। आपको बता दें कि कल भी वाड्रा के बयान विभागीय अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए थे।

जानकारी के मुताबिक, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बेनामी संपत्ति के मामले में प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस भेजा था, लेकिन वह इनकम टैक्स के दफ्तर नहीं पहुँचे। ऐसे में इनकम टैक्स की टीम पूछताछ के लिए रॉबर्ट वाड्रा के घर ही पहुँच गई। फिलहाल रॉबर्ट से पूछताछ जारी है।

ब्रिटेन में कथित तौर पर कुछ अघोषित आय रखने के आरोप में वाड्रा आयकर विभाग की जाँच के दायरे में हैं। प्रवर्तन निदेशालय भी धनशोधन विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ इन आरोपों की जाँच कर रहा है। पेशे से कारोबारी वाड्रा ने अपने खिलाफ लगे आरोपों और कुछ भी गलत करने से इनकार किया है। कॉन्ग्रेस ने कुछ महीने पहले कहा था कि वाड्रा के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की जा रही है।

आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने कम दाम में बीकानेर में ज़मीन खरीदी, जिसे आगे अधिक दाम में बेचकर मुनाफा कमाया। इसी से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी जाँच कर रहा है। प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा पर लंदन में संपत्ति की खरीद के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। वाड्रा पर ब्रायनस्टन स्क्वायर में 1.9 मिलियन पाउंड की कीमत का मकान खरीदने का आरोप है। रॉबर्ट वाड्रा फिलहाल अग्रिम जमानत पर हैं।

पहले दिन की पूछताछ के बाद पेशे से कारोबारी वाड्रा ने कुछ भी गलत करने से इनकार किया। उन्होंने अपने घर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा पूछे गए सभी सवालों का जवाब दिया। अधिकारियों ने उनसे उनके कारोबार और कामकाज के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई कर चोरी नहीं की है और उनसे जो भी पूछा गया उन्होंने उसके जवाब दिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या आयकर विभाग ने उनसे बेनामी संपत्ति को लेकर पूछताछ की तो वाड्रा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। कई मामले अदालत में हैं। हमारा मकसद सहयोग करना है। एक दिन जरूर सच्चाई की जीत होगी। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले रॉबर्ट वाड्रा को लगातार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के ऑफिस बुलाया जा रहा था। उस दौरान ईडी ने दिल्ली उच्च न्यायालय से यहाँ तक कहा था कि रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की आवश्यकता है। जाँच एजेंसी ने दलील दी थी कि धन के लेन-देन की कड़ियों से कथित रूप से उनका सीधा संबंध है। ईडी ने वाड्रा पर आरोप लगाया था कि वे अपने खिलाफ धनशोधन मामले की जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

साल 2018 से ही प्रतिद्वंदी चैनलों से व्यूअरशिप में आगे निकल चुका है रिपब्लिक TV: Chrome DM ने किया खुलासा

साल 2018 से ही समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी ने अपने सभी प्रतिद्वंदी चैनलों को पछाड़ते हुए व्यूअरशिप मामले में काफी बढ़त हासिल की है। यह खुलासा अब ‘क्रोम डीएम’ (Chrome DM) के हवाले से हुआ है जो कि एक प्रतिष्ठित मार्केट रिसर्च फर्म है। ‘क्रोम डीएम’ ने बताया है कि रिपब्लिक टीवी के पास अपने प्रतिद्वंदी समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ से ज्यादा ‘ओटीएस’ (Opportunity-To-See) है।  

ओटीएस का मतलब होता है कि एक दर्शक ने चैनल या ब्रांड को कितनी बार देखा। किसी चैनल का ओटीएस यदि अधिक है, तो मतलब साफ है कि उस चैनल को देखने वाले लोग भी अधिक हैं। 

इंडियन टेलीविजन के अनुसार, क्रोम डीएम ने साल 2016 से 2020 का डेटा का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि रिपब्लिक टीवी ने साल 2018 में अपने प्रतिद्वंदी चैनल टाइम्स नाउ को पछाड़ा और 2019 तक शहर में रहने वाले भारतीयों के घरों में देखे जाने वाला सबसे बड़ा चैनल बन गया।

अपनी रिपोर्ट में क्रोम डीएम ने कहा, “इस शैली (समाचार) में किसी भी अन्य चैनल की तुलना में चैनल (रिपब्लिक) का वितरण और उपलब्धता बहुत अधिक है।” फर्म ने यह भी पाया कि 2017 में इंडस्ट्री में रिपब्लिक टीवी के प्रवेश ने समाचार शैली को महत्वपूर्ण दिशा दी है।

साल 2017 के बाद ‘टाइम्स नाउ’ ने रिपब्लिक टीवी को कैसे पछाड़ा

रिपब्लिक टीवी चूँकि एक ‘फ्री टू एयर’ चैनल है। ऐसे में, TRAI ने जब अपने नए टैरिफ ऑर्डर (NTO) के कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया, तो इसकी पहुँच पूरे भारत में बढ़ गई। और इस प्रकार, टाइम्स नाउ और रिपब्लिक टीवी के बीच दर्शकों की संख्या/पहुँच में साल 2018 से 2020 के बीच ज्यादा फर्क आ गया। क्रोम डीएम ने यह भी नोटिस किया कि साल 2017 में रिपब्लिक के लॉन्च के बाद चैनल ने अच्छी बढ़त बनाई। वहीं, उसके साथ शुरू हुए चैनल इतनी रफ्तार नहीं पकड़ पाए।

OTS विश्लेषण रिपब्लिक टीवी की बढ़त और नेतृत्व को दर्शाता है: रिपब्लिक मीडिया ग्रुप सीईओ

ओटीएस विश्लेषण पर रिपब्लिक मीडिया ग्रुप के सीईओ विकास खानचंदानी ने कहा कि रिपब्लिक नेटवर्क ने अपनी संबंधित शैलियों में सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करके उसको व्यापक प्लेटफॉर्मों तक वितरित किया। उन्होंने कहा कि Chrome का उपरोक्त डेटा महज एक आँकड़ा है, जो दिखाता है कि हमारा ब्रांड और नेतृत्व कितना बढ़ा। मीडिया ग्रुप के सीईओ ने सोशल मीडिया पर भी रिपब्लिक टीवी को यूजर्स से जुड़ा हुआ बताया। साथ ही, विश्वास जताया कि वह उभोक्ताओं और विज्ञापनदाताओं के लिए सबसे बड़े अंग्रेजी और हिंदी समाचार के लिए मंच को लाते रहेंगे।

फेक टीआरपी स्कैम

यहाँ याद दिला दें कि एक ओर जहाँ रिपब्लिक टीवी आए दिन नई ऊँचाइयों को छू रहा है, उसकी कामयाबी के स्पष्ट सबूत आँकड़ों में नजर आ रहे हैं, वहीं, रिपब्लिक टीवी पिछले दिनों फेक टीआरपी मामले में विवादों में रहा। फेक टीआरपी का पूरा मामला 8 अक्टूबर को मुंबई कमिशनर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ था।

हालाँकि, एक दिन के भीतर ही रिपब्लिक टीवी ने यह सबूत दे दिए थे कि मामले में दर्ज हुई शिकायत में उनके चैनल का नाम नहीं है। लेकिन तब भी, मुंबई पुलिस चैनल को निशाना बनाती रही और पिछले दिनों रिपब्लिक टीवी पर कई कार्रवाई कर डाली।

भाई की आँखें फोड़वा दी, बीवी 14वें बच्चे को जन्म देते मरी: मोहब्बत का दुश्मन था हिन्दू-मुस्लिम शादी पर प्रतिबंध लगाने वाला शाहजहाँ

शाहजहाँ ने अपनी मरी हुई बीवी मुमताज की याद में ताजमहल बनवा दिया था, ये सभी को याद है। लेकिन, शाहजहाँ नहीं चाहता था कि कोई भी मुस्लिम लड़की किसी हिन्दू लड़के से प्यार करे और उनकी शादी हो – इस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता। आगे हम इसकी तह तक जाएँगे, लेकिन उससे पहले बता दें कि मुग़ल बादशाह का जन्म लाहौर में जनवरी 5, 1605 को हुआ था और युवाकाल तक उसका नाम खुर्रम हुआ करता था।

वो पाँचवाँ मुग़ल बादशाह था, जिसके नाम का अर्थ है – पूरी दुनिया का राजा। लिबरल गिरोह को वो बहुत प्यारा है और भारतीय इतिहासकारों ने उसकी छवि को चमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, क्योंकि उसने ताजमहल बनवाया और उसके राज्यकाल में कई मुग़ल इमारतों का निर्माण हुआ। उसे भारत का संत वेलेंटाइन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। लेकिन, लोग ये नहीं बताते कि उसकी 7 पत्नियाँ थीं और हजारों उसकी हरम में थीं।

मुमताज महल निकाह के बाद अधिकतर गर्भवती ही रहीं और 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। जहाँगीर की पत्नी नूर जहाँ के साथ क्या किया गया, ये भी नहीं बताया जाता। जहाँगीर के राज में असली ताकत नूरजहाँ के हाथ में ही होती थी और सिक्कों तक पर उसके नाम हुआ करते थे। जहाँगीर की मौत के बाद नूरजहाँ की जान तो बख्श दी गई, लेकिन इस शर्त पर कि वो दरबार के मामलों में कभी दखल नहीं देगी।

नूरजहाँ ने अपनी बची हुई ज़िंदगी लाहौर के एक घर में अपनी बेटी के साथ काटी और अपने शौहर की मौत के बाद फिर कभी किसी भी ख़ुशी के मौके पर मुगलिया जश्नों में नहीं देखी गई। इसी तरह शाहजहाँ के राज में भी 14 बच्चे पैदा करने वाली मुमताज महल (जिसका असली नाम आरज़ूमंद बानू बेगम) के हाथ में असली सत्ता थी, जिस कारण उसकी चर्चा ज्यादा है। मात्र 38 साल उम्र में उसकी मौत हुई थी। उसके 14 बच्चों में से 7 ही जिंदा बचे थे।

अकबर ने बादशाह रहते हुए बाहर से थोड़ी उदार नीति अपनाई थी, ताकि वो खुद को हिन्दुओं का भी हितैषी दिखा सके क्योंकि विरोधों को दबाने का उसका एक अलग तरीका था। शाहजहाँ ने सत्ता में आते ही उन नीतियों को ख़त्म कर दिया और धार्मिक असहिष्णुता को अपना हथियार बनाया। उसने भारत को इस्लामी राज्य घोषित करते हुए शरीयत के हिसाब से शासन चलाना शुरू किया। उसने हिजरी संवत चलाया।

हिन्दुओं पर तीर्थयात्रा कर लगाए गए। मंदिरों ही नहीं, आगरा में गिरिजाघरों को भी तुड़वाया गया। हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच होने वाली शादी पर रोक लगा दी गई। गोहत्या खुलेआम होने लगी और उन पर लगी रोक हटा दी गई। निर्माणाधीन मंदिरों को तुड़वा दिया गया। नए मंदिर बनाने पर रोक लगा दी गई। बुढ़ापे में उसके साथ भी औरंगजेब ने क्रूरता की और उसे खाने के थाल में उसके बेटे का कटा सिर भेजा था।

अकबर के काल में जब थोड़ी छूट मिली तो ऐसे कई हिन्दुओं ने अपने पुराने पंथ को फिर से अपना लिया, जिन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया गया था। मुस्लिम महिलाओं की अगर हिन्दू परिवारों में शादी होती थी तो वो हिन्दू धर्म अपना सकती थी। शाहजहाँ एक सैन्य कमांडर भी था। इसी तरह के एक सैन्य मिशन के लिए वो कश्मीर गया था। वहाँ से लौटते वक़्त उसने भदौरि और भिम्बर में देखा कि वहाँ कई हिन्दू पुरुषों ने मुस्लिम महिलाओं से शादी कर रखी थी।

उसने पाया कि उनमें से कई महिलाओं ने शादी के बाद अपने पति के हिन्दू धर्म को अपना लिया था। अपनी पुस्तक ‘Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery‘ में M A खान लिखते हैं कि भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलम आजाद ने अकबर की इसीलिए आलोचना की थी, क्योंकि उसने ‘सहिष्णुता से शासन चलाया था जो भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लाम की आत्महत्या के समान था।

वो लिखते हैं कि आज़ाद ने कट्टर सूफी मौलाना शेख अहमद सरहिंदी का समर्थन किया था, क्योंकि उसने अकबर के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। उसने हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ाने की माँग लेकर विद्रोह किया था। असहिष्णु शाहजहाँ ने जिस कट्टरवाद के पौधे को सिंचित किया था, उसके बेटे औरंगजेब ने उसे ही और बड़ा किया। मक्का-मदीना का यात्रा करने वाले मुस्लिमों को विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं, जबकि हिन्दू पर्व-त्यौहारों को वो हतोत्साहित करता था।

बुंदेलखंड के राजपूत शासक जुझार सिंह ने उसकी इन्हीं नीतियों के कारण विद्रोह किया था। हालाँकि, शाहजहाँ को कभी विदेशी आक्रमण का सामना नहीं करना पड़ा, जिससे उसने एक असफल शासक होकर भी शांतिपूर्ण ढंग से राज चलाया और एक के बाद एक कई इमारतों का निर्माण करवाया। एक और बात जानने लायक है कि मुमताज महल उसकी सौतेली माँ नूरजहाँ के भाई आसफ खान की ही पुत्री थी।

शाहजहाँ ने ही इलाही संवत की जगह हिजरी संवत को चलाना शुरू किया। शाहजहाँ इतना कट्टर सुन्नी मुस्लिम तब था, जब उसकी माँ भी हिन्दू थी। हालाँकि, इतिहास में कहीं भी ‘जोधाबाई’ को लेकर कोई प्रसंग नहीं मिलता है, लेकिन इतना ज़रूर पाया जाता है कि शाहजहाँ और जहाँगीर, इन दोनों की माँएँ हिन्दू ही थीं। शाहजहाँ ने वंधेरा के राजा इंद्रमणि को कैद किया था और शर्त रखी थी कि मुस्लिम मजहब अपनाने पर ही वो उसे छोड़ेगा।

जिस तरह शाहजहाँ ने अपने भाई खुसरो को मरवाया था, उसी तरह उसके बेटे औरंगजेब ने अपने भाई द्वारा शिकोह की हत्या करवाई। शाहजहाँ भी तमाम बगावतों के बाद ही बादशाह बना था। उसके ही ससुर आसफ खान की सहायता से उसने शहरयार की हत्या करवाई और मुग़ल वंश में जो भी उसके खिलाफ थे, उन्हें बेरहम मौत दी। कई बेगमों ने आत्महत्या कर ली। शहरयार की तो आँखें तक निकाल ली गई थीं। वो नूरजहाँ का दामाद था और जहाँगीर का बेटा था। इस तरह से वो नूरजहाँ का दामाद और सौतेला बेटा – दोनों था।

इस तरह से हम देखें तो ताजमहल की आड़ में ऐसी काफी सारी बातें हैं, जिन्हें न सिर्फ आज के लिबरल-सेक्युलर-कट्टर गिरोह द्वारा छिपा ली जाती हैं, बल्कि इन पर इतिहासकारों ने भी भरपूर पर्दा डाला। अपने ससुर की मदद से अपनी सौतेली माँ के दामाद की आँखें फोड़वाने वाला, अपनी सौतेली माँ को राजधानी से बदर करने वाला और अपनी बीवी को 14 बार प्रेग्नेंट करने वाला क्रूर इस्लामी शासक जब ‘प्यार का मसीहा’ बना दिया जाए, तो समझिए कुछ तो गलत है।

ताजमहल में लहराया भगवा, फिर से | Ajeet Bharti explains saffron flags inside Taj Mahal

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने लिखा, “एक बार फिर भगवा गुंडों ने मुस्लिम राजा द्वारा बनाई गई इमारत (ताजमहल) में तोड़फोड़ की।” प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ के जुबैर ने तो CISF पर ही सवाल उठाते हुए बकैती की।

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‘बाल बढ़ने की गारंटी, 6 सप्ताह के भीतर 3 गुना फायदा’ – हीरो ने किया था क्रीम का प्रचार, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

केरल के उपभोक्ता निवारण आयोग ने मलयालम अभिनेता अनूप मेनन और आयुर्वेद उत्पाद कंपनी ‘धात्री’ पर ‘फर्ज़ी’ वादे करने के लिए जुर्माने के रूप में एक उपभोक्ता को ₹10,000-₹10,000 का भुगतान करने को कहा है। 2012 में एक उपभोक्ता ने यह आरोप लगाते हुए ‘धात्री’ की शिकायत की थी कि कंपनी की हेयर क्रीम से उसे कोई फायदा नहीं हुआ।

डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर रिड्रेसल फोरम, त्रिशूर ने ‘धात्री हेयर क्रीम’ के निर्माताओं और एक विज्ञापन में उत्पाद का समर्थन करने वाले सेलिब्रिटी फिल्म अभिनेता अनूप मेनन को “झूठा वादा” करने के लिए एक उपभोक्ता को 10,000 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।

दरअसल फ्रांसिस वडक्कन द्वारा ए-वन मेडिकल, धात्री आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड और अनूप मेनन के खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत पर यह आदेश पारित किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट एडी बेनी ने फोरम से कहा कि उन्होंने पहली बार जनवरी 2012 में विज्ञापन देखने के बाद 376 रुपए में क्रीम खरीदी थी, जिसमें अनूप मेनन ने वादा किया था कि 6 सप्ताह के लिए उत्पाद का उपयोग करने से बालों में वृद्धि होगी। 

हालाँकि उन्होंने क्रीम का इस्तेमाल किया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने शिकायत की कि उत्पाद खरीदने के लिए उनके दोस्तों और परिवार द्वारा उनका मजाक उड़ाया गया। अपमानित महसूस करते हुए, उन्होंने 5 लाख रुपए मुआवजे के लिए फोरम से संपर्क किया।

अनूप मेनन ने फोरम में अपने बयान में स्वीकार किया कि उन्होंने कभी भी उत्पाद का इस्तेमाल नहीं किया है और उन्होंने केवल अपनी माँ द्वारा तैयार हेयर ऑयल का इस्तेमाल किया है। 

उन्होंने कहा, “मैंने कभी भी उल्लेखित उत्पाद का उपयोग नहीं किया है। मैं केवल बालों के तेल का उपयोग करता हूँ, जो मेरी माँ मेरे लिए बनाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि विज्ञापन के दौरान क्या बताया गया क्योंकि यह निर्माताओं की ‘कहानी’ थी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि यह उत्पाद बालों की देखभाल के लिए है न कि बालों के विकास के लिए।

फोरम ने कहा, “इस प्रकार यह स्पष्ट है कि ब्रांड एंबेसडर विज्ञापन में उत्पाद का उपयोग किए बिना ही दिखाई दिए। अदालत द्वारा यह भी देखा गया कि निर्माता उस उत्पाद में परिणाम नहीं दे सका, जैसा कि उसके द्वारा दावा किया गया था।”

फोरम ने विज्ञापन में अनूप मेनन द्वारा कहे गए बयानों को भी संदर्भित किया, जिसमें कहा गया था, “बालों में वृद्धि की गारंटी है। सिर्फ 6 सप्ताह के भीतर, परिणाम तीन गुना हो जाएगा।” न्यायालय ने यह भी पाया कि उत्पाद के साथ-साथ विवरणिका में बताई गई सावधानियाँ इस तरह से छपी हुई हैं कि मैग्नीफ़ाइंग ग्लास की सहायता से देखने पर भी यह दिखाई नहीं देती है।

फोरम ने कहा, “विज्ञापन को एक सूचित उपभोक्ता संस्कृति के विकास में मदद करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता फर्जी उत्पादों को अस्वीकार करके सही विकल्प बना सके।”

सभी साक्ष्यों को देखते हुए, डिस्ट्रिक्ट फोरम के अध्यक्ष सी टी साबू और सदस्यों डॉ के राधाकृष्णन नायर और श्रीजा एस ने अनूप मेनन को उत्पाद की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के बाद ही भविष्य के विज्ञापन में शामिल होने का निर्देश दिया। उन्होंने अभिनेता और कंपनी, प्रत्येक को 10000 रुपए का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने ‘ए वन मेडिकल’ (मेडिकल स्टोर), जहाँ से उत्पाद खरीदा गया था, को 3,000 रुपए का जुर्माना देने का निर्देश दिया।

ओडिशा: मंदिर की मूर्तियाँ तोड़ीं, छत्र भी चोरी.. मिशनरी गतिविधियों के लिए जाना जाता है आंध्र की सीमा से लगा ये गाँव

शनिवार (जनवरी 02, 2021) देर रात ओडिशा के एक मंदिर में देवी सरस्वती, लक्ष्मी की मूर्तियों को कथित तौर पर कुछ अज्ञात उपद्रवियों द्वारा तोड़ दिया गया। यह घटना ओडिशा के दक्षिणी हिस्से में आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे रायगढ़ जिला स्थित हुकुमटोला गाँव की है। दावा किया जा रहा है कि यह इलाका मिशनरी गतिविधियों के लिए मशहूर है।

खबरों के मुताबिक, भगवान रामेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी को अगले दिन, रविवार सुबह इस मंदिर के दरवाजे खुले मिले। उन्होंने जब मंदिर में प्रवेश किया उन्होंने मंदिर के वास्तुशिल्प और मूर्तियों के टुकड़े मंदिर परिसर में पाए। इसके बाद पुजारी ने मंदिर प्रबंधन समिति को इस घटना की जानकारी दी। मंदिर प्रबंधन समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि मूर्तियाँ तोड़ने वाले उपद्रवियों ने भगवान जगन्नाथ के गहने भी चोरी कर लिए।

इसके बाद, मंदिर प्रबंधन समिति ने इस संबंध में मुनिगुड़ा पुलिस स्टेशन में इस सम्बन्ध में एक लिखित शिकायत दर्ज की। स्थानीय निवासियों और मंदिर प्रबंधन ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। बताया जा रहा है कि कुछ शरारती तत्वों ने रामेश्वर शैवपीठ के देवता की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। मंदिर में देवी सरस्वती, महालक्ष्मी और वृंदावती की भी मूर्तियाँ हैं उन्हें भी खंडित कर दिया गया है।

कुछ मूर्तियों को तोड़ दिया गया, किसी को कमर के हिस्से से ही क्षतिग्रस्त कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मंदिर से भगवान जगन्नाथ का एक छत्र भी चोरी किया गया। जिसके बाद मंदिर प्रबंधन
समिति के सचिव पुरुषोत्तम जेना ने इसकी शिकायत मुनिगुड़ा थाने में की। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि रविवार शाम तक भी कथित तौर पर मंदिर परिसर का निरीक्षण नहीं किया गया था।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा सकता है। कुछ ट्विटर यूजर्स ने इसमें मिशनरी लोगों का हाथ होने की सम्भावना भी जताई हैं।

हिन्दू नाम के सहारे मुस्लिम युवक ने की मस्जिद में ‘फर्जी निकाह’: एक्ट्रेस प्रीति तलरेजा ने लगाया मारपीट का आरोप, देखें Video

महाराष्ट्र में प्रीति तलरेजा नाम की कथित एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए अपने साथ हो रही घरेलू हिंसा के मामले को उजागर किया है। एक्स्ट्रेस ने अपने (मुस्लिम) पति पर उससे मारपीट करने के अलावा, धर्मांतरण, शारीरिक और मानसिक शोषण आदि का आरोप लगाया है। 

महिला का कहना है कि उसके द्वारा कई सबूत पेश किए जाने के बाद भी उसके पति ‘अभिजीत पेटकर’ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया जा रहा और उसे एनसी देकर कहा जा रहा है कि ये पारिवारिक मामला है।

सोशल मीडिया पर प्रीति तलरेजा ने 29 दिसंबर 2020 से इस संबंध में अपने पोस्ट डालने शुरू किए थे। पहले उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने खड़कपड़ा थाने (khadakpada police station) में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन वहाँ से उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया। उनकी एफआईआर तक नहीं लिखी गई।

इसके बाद उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करके कहा कि उन्होंने अपने पति के ख़िलाफ़ शिकायत लिखवाई है जिसने प्रेम के नाम पर उनसे धोखा किया, उनका इस्तेमाल किया और एक फर्जी मुस्लिम निकाह करके ये यकीन दिलाया कि उनकी आधिकारिक तौर पर शादी हो गई है। एक्ट्रेस ने बताया कि एक ओर उनकी शिकायत को थाने में दर्ज तक नहीं होने दे रहे। वहीं दूसरी ओर मस्जिद में निकाह होने के कारण उन्हें सर्टिफिकेट देने से मना किया जा रहा है।

महिला ने बताया कि उनका पति मुस्लिम है और उसके पास धर्म परिवर्तन के कोई सबूत भी नहीं है, फिर भी वो अपने लीगल डॉक्यूमेंट पर अपना नाम अभिजीत पेटकर इस्तेमाल करता है। प्रीति ने अपने ट्विटर पर उनके साथ हुई मारपीट की वीडियो भी शेयर की है। उनका दावा है कि सबूत दिखाने के बावजूद कल्याण खड़पड़ा थाने में शिकायत दर्ज नहीं हो रही।

वह तंग होकर 4 जनवरी को कहती हैं कि भारत में महिला यदि आत्महत्या कर ले तो मासूम को भी सजा दे दी जाती है लेकिन यदि कोई जिंदा महिला संघर्ष करे तो उसका सिर्फ़ शोषण होता है, यही सच्चाई है। महिला के मुताबिक, उसका पति उसकी पहली बेटी को पसंद नहीं करता और नहीं चाहता कि वो उन लोगों के साथ रहे। 

वह त्रस्त होकर अपने अकॉउंट पर लिखती हैं, “…मैं हिन्दू जन्मी हूँ और हिंदू ही मरूँगी। मेरी अपील है अपनी बेटी को अकेला न छोड़ें। मेरा परिवार मेरे साथ है इसलिए हिम्मत करके मैं यहाँ तक पहुँची हूँ। लोगों को जो कहना है कहने दो। लेकिन इसे एक अपनी बेटी, बहन, बीवी और अन्य महिलाओं के लिए अच्छे उदाहरण की तरह लो।”

बता दें कि प्रीति तलरेजा ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड की है। इसके डिस्क्रिप्शन में उन्होंने आप बीती के रूप में एक नोट लिखा है। वह लिखती हैं:

मैंने इस आदमी से शादी की क्योंकि इसने मुझे अपना मासूम चेहरा दिखाया कि इसे इसकी पुरानी पत्नी ने बहुत प्रताड़ित किया है और इसके माता-पिता भी नहीं हैं। इस बीच मैं इसकी तरफ आकर्षित हुई क्योंकि मेरे पति से मेरी कुछ लड़ाइयाँ हो रही थीं। इसने मुझे बेहतर जीवन का वादा किया और मेरे पति को तालाक देने के लिए मुझे मना लिया। इसने मुझ पर मुस्लिम कानून के हिसाब से शादी का दबाव बनाया जो वास्तविकता में फर्जी शादी थी, जिसे इसके दोस्तों ने ही अरेंज किया था। ये मुझे सोशल मीडिया यूज करने पर गाली गलौच करता और मेरी बड़ी बेटी के साथ रहने पर भी गुस्सा होता। मेरे घरवालों और मैंने कई बार इसे इसकी छात्राओं के साथ डेट करते देखा है। लेकिन पूछने पर कहता कि वो 4 बीवियों से ज्यादा रख सकता है। इसकी पुलिस विभाग में और कुछ गुंडों से जान पहचान है, ये हमेशा अपनी और मेरी तस्वीरें शेयर करने की धमकी देता और मुझे व मेरे परिवार वालों को नुकसान पहुँचाने की धमकी देता। इसने मुझे राक्षस की तरह पीटा। मेरी बेटी को लात मारी। यह हड्डियाँ तोड़ना अच्छे से जानता है, उसने मेरी माँ को भी विश्वास और प्यार के बदले मारा। मैंने इस घटिया आदमी के लिए सबकुछ छोड़ दिया और बदले में मुझे 3 साल से सिर्फ़ बेवकूफ बनाया गया। कभी जाति धर्म के नाम पर कभी भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करके। मैं न्याय के लिए गुहार लगा रही हूँ। लेकिन भारतीय कानून बहुत सुस्त है कि वो एक जिंदा इंसान को न्याय दिलवा सके। लेकिन यहाँ यदि कोई व्यक्ति सुसाइड करले तो किसी मासूम को भी सूली पर चढ़ा दिया जाएगा।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर अभिजीत पेटकर नाम के इस युवक की कई फोटोज यूजर शेयर कर रहे हैं। इनमें से एक मे यह एक उलेमा के साथ खड़ा है। वहीं ज्यादातर पोस्ट में ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ भी लिखता है।