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सिर गायब-गुप्तांग भी काटा: युवती की नग्न लाश से हड़कंप, आक्रोशित लोगों ने CM हेमंत सोरेन के काफिले को रोका

झारखंड के राँची में एक युवती की सिरकटी लाश मिलने से हड़कंप मच गया। मामला ओरमांझी थाना इलाके के जिराबार जंगल का है। महिला का शव नग्न अवस्था में मिला है और सिर की तलाश जारी है। पुलिस की टीम लगातार जाँच में जुटी हुई है। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है। फिलहाल महिला का सिर का अभी तक पता नहीं चला है।

ओरमांझी पुलिस का कहना है कि आसपास के लोगों को मौके पर बुलाकर शव दिखाया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया। पुलिस आशंका जता रही है कि युवती के साथ दुष्कर्म करने के बाद अपराधियों ने गला रेत कर उसकी हत्या कर दी। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला। अपराधियों ने युवती का गुप्‍तांग भी काट दिया है।

राँची के पुलिस अधीक्षक नौशाद आलम ने बताया, “निर्वस्त्र अवस्था में महिला की सिर कटी लाश मिली है। युवती की पहचान अभी नहीं की जा सकी है। डेड बॉडी को ऑटोप्सी के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि युवती के साथ दुष्कर्म हुआ है या नहीं। मामले में जाँच जारी है।”

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस को घटनास्थल पर खाना बनाने के लिए चूल्हा और कई बीयर की खाली बोतलें भी मिली है। इससे भी अनुमान लगाया जा रहा है कि युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई है और साक्ष्य छुपाने की नीयत से उसके कपड़े और सर को गायब कर दिया गया।

युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला। शव की पहचान नहीं हो पाए इस वजह से सिर को कहीं और ले जाकर फेंक दिया गया होगा। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही दुष्कर्म की पुष्टि हो जाएगी। पुलिस घटना की हर एंगल से जाँच कर रही है।

इस संबंध में सिल्ली के डीएसपी चंद्रशेखर ने बताया कि एक हफ्ते के अंदर राँची में जितनी भी महिलाओं और युवतियों के लापता होने का मामला दर्ज हुआ है, उनकी तस्वीर और विस्तृत जानकारी मँगाई जा रही है।

शव के डीएनए को भी सुरक्षित रखवाया गया है, जल्द ही युवती की पहचान हो जाने और घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों की शिनाख्त हो जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि घटनास्थल के पास नदी है। युवती की हत्या करने के बाद अपराधियों ने घटनास्थल पर पानी डाल दिया था ताकि खून और पुलिस को साक्ष्य नहीं मिल पाए।

ऐसी आशंका भी जताई जा रही कि करीब 19 से 20 वर्षीय युवती की हत्या कहीं और करने के बाद शव को जंगल में लाकर फेंक दिया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची। जाँच में महिला का शव पूरी तरह से नग्न अवस्था में मिला। 

पुलिस इस मामले में सीसीटीवी का फुटेज देखकर और घटनास्थल का कॉल डंप निकाल अपराधियों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। पुलिस कॉल डंप के सहारे इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटनास्थल पर कौन-कौन से मोबाइलधारक मौजूद थे। एसएसपी सुरेंद्र झा का कहना है कि अपराधियों के द्वारा बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस हर हाल में अपराधियों को गिरफ्तार करेगी।

ओरमांझी में रविवार (जनवरी 03, 2021) को मिले युवती के शव के विरोध में लोगाें ने किशोरगंज चौक पर सोमवार (जनवरी 4, 2020) को विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को राँची के किशोरगंज चौक के पास रोक दिया। वहाँ से गुजर रहे सीएम के कारकेड को रोकने का प्रयास किया। सुरक्षा के मद्देनजर सीएम का काफिला रास्‍ता बदलकर रवाना हुआ।

‘हम केरल के CM के गुलाम नहीं’: आर्थोडॉक्स चर्च ने वामपंथी सरकार को चेताया, कहा- अदब से पेश आएँ विजयन

केरल की वामपंथी सरकार को आर्थोडॉक्स चर्च ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री पी विजयन के तानाशाही रवैए पर तंज कसते हुए कहा है कि केरल में कम्युनिस्ट पार्टी के फासीवादी शासन को अनुमति नहीं दी जा सकती।

चर्च के मीडिया प्रमुख डॉ. गिवर्गीस मार यूलिओस मेथ्रोपोलिथ ने कहा कि मुख्यमंत्री का राजनीतिक संदेश सीपीआईएम के पार्टी कार्यालयों के लिए होना चाहिए, न कि ऑर्थोडॉक्स चर्च के लिए। उन्होंने कहा कि विजयन को राज्य में सीएम का पद दिया गया है और अगर वह चाहते हैं कि उन्हें दिया गया सम्मान बरकरार रहे तो उन्हें चर्च से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

ऑर्थोडॉक्स चर्च के मीडिया प्रमुख ने कहा, “मुख्यमंत्री को केवल पार्टी के स्थानीय कार्यालय में राजनीतिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। अगर वह चर्च के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करते हैं तो यह उनके लिए फायदेमंद होगा।”

जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने एक पादरी से ऑर्थोडॉक्स चर्च और जैकबाइट चर्च के बीच विवाद एवं प्रवेश के बारे में सवाल पूछा था। इसकी जह से ऑर्थोडॉक्स चर्च मीडिया प्रमुख उत्तेजित थे। डॉ. गिवर्गीस ने सीएम को फटकारते हुए कहा, “हम केरल के मुख्यमंत्री के गुलाम नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पिनाराई विजयन को चर्च के साथ व्यवहार करते समय शालीनता दिखानी चाहिए।

चर्च ने विजयन पर कथित तौर पर झूठ बोलने और पादरियों की अखंडता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। मीडिया प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी तरफ था और विवादित चर्चों को जब्त करना और उन्हें सौंपना राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी। उन्होंने यह भी कहा कि चर्च का निष्कासन अदालत के आदेशों के अनुसार है और यह राज्य सरकार की मंशा के अनुसार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री को कभी भी गलत धारणा नहीं बनानी चाहिए कि चर्चा के माध्यम से अदालत के फैसले से ऊपर जाया जा सकता है।

27 साल पहले जिन धमाकों में मरे थे 257, उसमें शामिल रही रुबीना मेमन बेटी का घर बसाने जेल से बाहर आएगी

रुबीना सुलेमान मेमन को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 31 दिसंबर 2020 को पेरोल पर जेल से बाहर जाने की इजाजत दे दी। उसने बेटी की शादी का हवाला देते हुए पेरोल माँगी थी। 1993 में मुंबई में हुए धमाकों में रुबीना उम्रकैद की सजा काट रही है। 8 जनवरी 2021 को उसकी बेटी की शादी होनी है।

न्यायाधीश एसएस शिंदे और न्यायाधीश अभय आहूजा की पीठ ने बेटी के मानवाधिकारों को मद्देनज़र रखते हुए पैरोल की अनुमति दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “पहले बताए गए हालातों और बेटी के मानवाधिकारों को देखते हुए हम पेरोल याचिका स्वीकार कर रहे हैं।”

रुबीना मेमन ने यरवदा सेंट्रल जेल में पेरोल के लिए आवदेन किया था। लेकिन अधिकारियों ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अर्जी डाली। जब हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई तब पुलिस ने अदालत को बताया कि 2 दिन की पेरोल दी गई है। इसके अलावा पेरोल पर रिहाई के पहले पुलिस बंदोबस्त का भुगतान किया जाना भी ज़रूरी है। न्यायालय ने पुलिस का पक्ष सुनने के बाद मामले की सुनवाई 31 दिसंबर 2020 को तय की थी। 

31 दिसंबर को रुबीना की वकील फरहाना ने निवेदन किया था कि अदालत रुबीना को अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए कम से कम सात दिन की पेरोल दे। अदालत के सामने ये दलील भी पेश की गई कि 13 साल के कारावास में रुबीना को कभी पेरोल नहीं दी गई। अदालत ने जेल के भीतर रुबीना के व्यवहार की जानकारी लेते हुए उसे 6-11 जनवरी तक पेरोल की अनुमति दी। रुबीना को पेरोल पर रिहाई से पहले पुणे के पुलिस मुख्यालय में 1 लाख रुपए भी जमा करने होंगे। 

कौन है रुबीना मेमन?

रुबीना मेमन 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी है। फ़िलहाल वह यरवदा सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रही है। इन बम धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी और लगभग 700 लोग घायल हुए थे। वह इस मामले के मुख्य आरोपित टाइगर मेमन की भाभी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ टाइगर मेमन फ़िलहाल पाकिस्तान में छुपा हुआ है। 2006 में रुबीना को ‘आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम’ (TADA) के तहत दोषी पाया गया था। 

2015 में अदालत ने रुबीना की कुछ दिनों के अवकाश की याचिका खारिज की थी। ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था, “अगर उसे (रुबीना) को रिहा किया जाता है जो काफी लोग उससे मिलने के लिए आएँगे। इसकी वजह से क़ानून-व्यवस्था के लिए समस्या खड़ी होगी। ख़ास कर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याकूब मेमन की अंतिम यात्रा में किस तरह लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी।” 

         

फेक न्यूज संक्रमणग्रस्त ज़ुबैर को वैक्सीन में चिप लगाने वाले पाकिस्तानी मुल्ले से इतना आंतरिक लगाव क्यों है?

फैक्ट चेक के नाम पर इस्लामी संस्थाओं, मजहबी मुल्ला-मौलवियों और कोरोना वायरस महामारी की दहशत के बीच यहाँ-वहाँ थूकने वाले तबलीगियों को क्लीन चिट देने वाली वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने एक बार फिर अपने ट्विटर अकाउंट से अपना ‘पाकिस्तान प्रेम’ जगजाहिर किया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने सोमवार (जनवरी 04, 2021) को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अल्लामा कौकब नूरानी नाम का एक मौलवी, कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बेहद भ्रामक जानकारी और अफवाह फैलाते हुए देखा जा सकता है।

नूरानी ने इस वीडियो में इतनी वाहियात बातें कही हैं कि इन्हें अगर कोरोना वायरस खुद अपने कानों से सुन ले तो वो बिना वैक्सीन के ही आत्महत्या करने का मन बना सकता है। मौलाना नूरानी इस वीडियो में कहते सुने जा सकते हैं कि मुस्लिमों के खिलाफ छेड़ी गई साजिश कोरोना यहूदियों की साजिश इसलिए है क्योंकि वे इसकी वैक्सीन बनाकर उसमें एक चिप डाल रहे हैं। जब वह वैक्सीन मुसलमानों या किसी भी इंसान को लगाई जाएगी, तब चिप भी इंसानी जिस्म में दाखिल कर टिका दी जाएगी। इस चिप से आपका मिजाज कंट्रोल किया जाएगा। आप क्या सोचते हैं, क्या करते हैं सब यहूदियों को पहले ही पता होगा।

मगर मौलाना नूरानी ने इसमें क्या कहा, यह बड़ा विषय नहीं है। विषय इस वीडियो को शेयर करने वाले व्यक्ति, यानी मोहम्मद जुबैर, जिसका अधिकतर समय हममजहब लोगों का बचाव करने और झूठ फ़ैलाने में ही जाता है, की मंशा है। ये वीडियो शेयर करते हुए शलभ मणि त्रिपाठी ने लिखा, “ये हैं भारत के ‘मुन्ना भाई वैक्सीन विशेषज्ञों’ का इस्लामिक संस्करण। कहते हैं वैक्सीन में चिप लगी है, सबका मिज़ाज क़ाबू कर लेंगे।”

मौलाना कौकब नूरानी का यह वीडियो काफी समय से ही सोशल मीडिया पर वायरल होता आया है। लेकिन इस्लामी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर को कौकब नूरानी के इस वीडियो का मजाक बनाना बहुत रास नहीं आया और ‘फैक्ट चेकर’ ने इस पर अपनी मजहबी खुजली मिटाते हुए ‘ज्ञान’ देने की कोशिश कर डाली।

मोहम्मद जुबैर ने शलभ मणि त्रिपाठी का यह ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा, “हैलो शलभ मणि त्रिपाठी, वो आदमी पाकिस्तान से है (Raukab Noorani Okarvl), भारत से नहीं। वैसे वीडियो देख के, नैनो चिप वाली नोट का वीडियो याद आ गया।”

पहली गलती तो यहाँ पर मजहबी ‘फैक्ट चेकर’ ज़ुबैर ने यह की है कि मौलाना नूरानी का बचाव करने की जल्दबाजी में उसने मौलाना कोकब नूरानी का नाम ‘रोकब नूरानी’ लिख दिया।

दूसरी गलती, जो मोहम्मद जुबैर ने अपनी होशियारी दिखाते हुए और मौलाना नूरानी का बचाव करते हुए की, वो ये कि जब शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मौलाना के देश का जिक्र ही नहीं किया तो फिर मोहम्मद जुबैर को इसमें स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता ही क्यों महसूस हुई?

वास्तव में, शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘भारत के मुन्ना भाई विशेषज्ञों का इस्लामी संस्करण’, जिसका सीधा सा मतलब ‘भारत के वैक्सीन विरोधी मूर्खों का इस्लामी संस्करण’ है। यह लिखते हुए उन्होंने कहीं पर भी इस मौलवी को ‘भारतीय’ नहीं कहा है, जैसा कि मोहम्मद जुबैर ने जल्दबाजी में मौलाना का बचाव करते हुए दावा किया है।

मोहम्मद जुबैर को यहाँ पर ज्यादा कुछ नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर उसे हिंदी नहीं आती है तो पहले किसी से पूछ लिया करे। अगर योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार ने वहाँ इस्लामी संस्करण की जगह ‘भारतीय संस्करण’ लिखा होता तो मोहम्मद जुबैर की बात शायद सही होती।

यह भी सम्भव है कि मोहम्मद जुबैर को दाएँ से बाएँ पढ़ने की आदत हो। हो सकता है कि इसी आदत के चलते उन्होंने ‘भारतीय’ को सबसे आखिर में पढ़ा और फौरन ये मतलब भी निकाल लिया कि मौलवी को भारतीय बताया जा रहा है जबकि वो पाकिस्तानी है।

अकबर-बीरबल के चुटकुलों का फैक्ट चेक करने वाला मोहम्मद जुबैर अपनी बुद्धि क्षमता का परिचय देकर हर दूसरी बात पर फैक्ट चेक की गुंजाइश तलाशता है और जब दिनभर में ये कोटा पूरा नहीं होता, तो उसे इसी तरह से दूसरों के रैंडम ट्वीट का जबरन फैक्ट चेकर करना होता है।

ऐसे में, अगर किसी मुल्ला-मौलवी को क्लीन चिट देने का मौका मिल जाए तो वह आखिर उसे चूकेगा ही क्यों? यूँ भी, मजहब में ‘उम्माह’ का महत्त्व सबसे ऊपर है। तो क्या ये माना जा सकता है कि चाहे मुल्ला-मौलवी पाकिस्तानी ही क्यों न हो, मोहम्मद जुबैर को बचाव करने के लिए आना पड़ा?

मोहम्मद जुबैर को अपने दैनिक फैक्ट चेक के बहीखाते को दुरुस्त रखने के लिए इस तरह के कारनामों का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इससे पहले उन्हें हिंदी पर भी अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी वरना वो इसी तरह अपना ही फैक्ट चेक करवाते नजर आएँगे।

आखिरी बार जब मोहम्मद जुबैर चर्चा में आया था, तब वह अस्पताल से लेकर सड़कों पर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सरदर्द बने तबलीगी जमात के लोगों को क्लीन चिट देते हुए देखा गया था। यही नहीं, जुबैर ने फलों पर थूक लगाकर बेचने वाले समुदाय विशेष के लोगों का भी फर्जी फैक्ट चेक कर उन्हें क्लीन चिट देने की कोशिशें भी की थीं।

सोशल मीडिया पर लोगों की स्टाकिंग करना और उनकी गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करना तो मोहम्मद जुबैर का पहला पेशा है ही। इसी शौक के चलते वो एक मासूम बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक कर चर्चा का विषय भी बने थे।

आजकल मोहम्मद जुबैर, कोरोना को यहूदियों की साजिश बताने वाले मौलाना नूरानी के वकील और निजी प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं। हालाँकि, यह बात कितनी सही है और कितनी गलत, इसका फैक्ट चेक करने की गुंजाइश हमेशा बनी रहेगी मगर उनके ट्वीट और स्पष्टीकरण कम से कम इस बात की गवाही देने के लिए काफी हैं।

UP: योगी सरकार के समर्थन में 224 पूर्व IAS अधिकारी, कहा- ‘लव जिहाद’ पर कानून जरूरी

ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जो कानून लागू किया है, उसका 224 पूर्व IAS अधिकारियों ने समर्थन किया है। इससे पहले 104 पूर्व आईएएस अधिकारियों ने इस कानून को ‘हेट पॉलिटिक्स’ का हिस्सा बताते हुए वापस लेने की माँग की थी।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक 224 पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में कहा है, “यह चिंता का विषय है कि खुद को गैर राजनीतिक दिखाने वाला सेवानिवृत्त अधिकारियों का एक समूह पक्षपाती है और उसका रवैया हर मुद्दे पर सत्ता विरोधी है। वह समूह इस तरह के अनैतिक बयान देकर भारतीय संविधान, उससे जुड़े लोगों, संस्थानों और खुद आईएएस अधिकारियों की छवि खराब करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ता है।”

‘फोरम ऑफ़ कंसर्न्ड सिटिज़न्स’ (Forum of Concerned Citizens) के बैनर तले 224 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने कहा कि ‘पक्षपाती’ प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों की रुचि इस बात में है कि कैसे भारत की अखंडता को नुकसान पहुँचाया जाए।

टाइम्स नाउ से बात करते हुए पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले योगेन्द्र नरेन ने कहा कि ‘धर्मांतरण के खिलाफ़ क़ानून’ ग़ैरक़ानूनी तरीके से होने वाले धर्म परिवर्तन के मामलों पर निगाह रखने के लिए ज़रूरी है। उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस तरह के मामलों से निपटने के लिए यह क़ानून बना कर बिलकुल सही किया। उन्होंने कहा, “यह सभी पर लागू होता है। यह किसी एक धर्म या वर्ग को निशाना नहीं बनाता है। अगर कोई धर्म परिवर्तन करवाना चाहता है तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार के पास यह तय करने का अधिकार है कि धर्म परिवर्तन किस तरह किए जाएँगे।” 

104 पूर्व आईएएस अधिकारियों द्वारा किए गए दावों से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए नरेन ने कहा कि जनता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को चुना है और सरकार के पास इस तरह के क़ानून को लागू करने का अधिकार है। इस क़ानून की ‘संवैधानिक वैधता’ जाँचने के लिए न्यायपालिका है। जबरन धर्मांतरण की समस्या को कई समाचार पत्र सामने लेकर आए हैं और इस मामले में सरकार की तरफ से कदम उठाए जाने के लिए यही सही समय था। 

कुछ दिनों पहले 104 पूर्व आईएएस अधिकारियों ने योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश ‘नफ़रत की राजनीति’ का केंद्र बन गया है। अधिकारियों ने अपने पत्र में लिखा था, “यह काफी दुःखद है कि पिछले कुछ सालों में, उत्तर प्रदेश जिसे गंगा-जमुनी तहजीब का गढ़ माना जाता था वह कट्टरता, विभाजन और नफ़रत की राजनीति का केंद्र बन चुका है। इसके अलावा शासन से जुड़ी संस्थाएँ समाज में ज़हर घोलने का काम कर रही हैं।” 

कोरोना वैक्सीन पर कई लोग केवल गॉसिप कर रहे, हमने 123 देशों के लिए बनाई है वैक्सीन: भारत बॉयोटेक का जवाबी डोज

भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है। इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ये मंजूरी हड़बड़ी में दी गई है। वैक्सीन पर जारी सियासत के बीच भारत बॉयोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने सोमवार (जनवरी 4, 2021) को अपना पक्ष रखा है। एल्ला ने कहा कि वैक्सीन पर सियासत हो रही है। कुछ लोग हमारी वैक्सीन के बारे में केवल गॉसिप कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

एल्ला ने कहा, “मैं ये स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास वैक्सीन बनाने का अनुभव है।”

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि भारतीय कंपनियाँ हमेशा दुनिया में हर किसी के निशाने पर क्यों रहती हैं। आपातकालीन चिकित्सा लाइसेंस जारी करना एक वैश्विक अभ्यास है। यहाँ तक कि अमेरिका का कहना है कि अगर आपके पास अच्छा टीकाकरण डेटा है, तो आपातकालीन प्राधिकरण किया जा सकता है।”

हम ग्लोबल कंपनी, 12 से अधिक देशों में किया क्लीनिकल ट्रायल 

कृष्णा एल्ला ने कहा, “हम केवल भारत में क्लीनिकल ट्रायल नहीं कर रहे हैं। हमने ब्रिटेन समेत 12 देशों में ट्रायल किए हैं। हम पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और दूसरे देशों में ट्रायल कर रहे हैं। हम केवल भारतीय कंपनी नहीं है, हम वास्तव में एक ग्लोबल कंपनी हैं।”

123 देशों के लिए वैक्सीन बनाई

उन्होंने कहा, “हम ऐसी कंपनी नहीं हैं, जिसके पास वैक्सीन बनाने का अनुभव नहीं है। हमारे पास वैक्सीन बनाने का बहुत ज्यादा अनुभव है। हमने 123 देशों के लिए वैक्सीन बनाई। इस तरह का अनुभव रखने वाली हमारी कंपनी इकलौती है।”

डेटा पर सवाल उठाने वाले आर्टिकल्स पढ़ें

एल्ला ने कहा, “कई लोग कह रहे हैं कि हमारे डेटा में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। मुझे लगता है कि लोगों को संयम रखना चाहिए और इंटरनेट पर हमने डेटा के संबंध में जो आर्टिकल पब्लिश किए हैं, उन्हें पढ़ना चाहिए। अब तक 70 से ज्यादा आर्टिकल इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश हो चुके हैं।”

हम पर लांछन लगाना ठीक नहीं

उन्होंने कहा, “वैक्सीन पर कई लोग केवल गॉसिप कर रहे हैं, ये भारतीय कंपनियों पर लांछन है। ये हमारे लिए सही नहीं है। हमारे साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। मेरेक इबोला वैक्सीन का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल कभी पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद WHO ने उसे लाइबेरिया और गिनी के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।”

हमारे पास दो करोड़ डोज तैयार 

उनका कहना है कि मौजूदा समय में उनके पास 2 करोड़ डोज तैयार हैं। वो जल्द ही 70 करोड़ डोज तैयार कर लेंगे। ये वैक्सीन उनके चार सेंटर्स पर तैयार हो रहे हैं। इनमें से तीन हैदराबाद में है और एक बेंगलुरु में। उन्होंने कहा कि इस समय हम कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें लॉजिस्टिक समस्या भी शामिल है।

BSL-3 प्रोडक्शन सुविधा सिर्फ हमारे पास

इसके साथ ही उन्होंने कहा, “गर्व की बात है कि पूरी दुनिया में केवल हमारे पास BSL-3 प्रोडक्शन सुविधा है। यहाँ तक कि US के पास भी ये सुविधा नहीं है। हम पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी में मदद करने के लिए हैं, फिर वो दुनिया के किसी भी हिस्से में क्यों न हो।”

नए कोरोना स्ट्रेन के मसले पर उन्होंने कहा कि वह एक हफ्ते में इसका पूरा कंफर्म डेटा देंगे। वहीं वैक्सीन की कीमत पर उन्होंने कहा कि शुरूआती दौर में वैक्सीन थोड़ी महँगी होगी। मगर जब वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ जाएगा तब इसका प्राइस मार्केट के जरिए कंट्रोल होने लगेगा।

अखिलेश यादव ने सबसे पहले सवाल खड़े किए थे

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले इस पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि ताली-थाली बजवाकर कोरोना को भगाने वाली सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की वैक्सीन लगवाने की उस व्यवस्था पर भरोसा नहीं कर सकते, जो कोरोनाकाल में ठप्प-सी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि हम भाजपा की राजनीतिक वैक्सीन नहीं लगवाएँगे। जब हमारी सरकार बनेगी, तब हम मुफ्त में वैक्सीन लगवाएँगे।

अखिलेश के समर्थन में कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अखिलेश का समर्थन किया। उन्होंने कहा था कि जिस तरह से भाजपा और प्रधानमंत्री CBI, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और ED का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ कर रहे हैं, मुझे लगता है कि अखिलेश यादव का यह डर गलत नहीं है कि वैक्सीन का भी गलत इस्तेमाल हो सकता है। जिस तरह से सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ काम कर रही है, यह डर वाजिब है।

शशि थरूर और जयराम रमेश ने भी सवाल उठाए थे

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि कोवैक्सिन ने अभी तक अपना तीसरा ट्रायल भी पूरा नहीं किया है। जल्दबाजी में वैक्सीन को मंजूरी दी गई और यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक ट्रायल पूरा नहीं हो जाता, इसके इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए।

कॉन्ग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत बॉयोटेक एक फर्स्ट रेट इंटरप्राइज है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल से जुड़े प्रोटोकॉल, जिन्हें इंटरनेशनल लेवल पर मंजूर किया गया है, उसे मोडिफाई किया जा रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए।

‘कुछ फसलों पर बाजार भाव से भी ज्यादा MSP दे रही सरकार’: नितिन गडकरी ने कृषि सुधारों से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य तक पर की बात

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य, इथेनॉल उत्पादन के साथ किसानों की आय में सुधार की संभावनाओं, सोडियम-आयन बैट्री पर रिसर्च, भारत में टेस्ला और कई अन्य मुद्दों पर बात की। यह उन परिवर्तनों की झलक है जो भारत आने वाले दिनों में अनुभव करेगा।

इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन 

केंद्रीय मंत्री ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े पैमाने पर उत्पादन पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कई छोटी कंपनियाँ पहले से ही उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में ई-बाइक और ई-स्कूटर का निर्माण कर रही हैं। इन कंपनियों का मुख्य मुद्दा लिथियम आयन बैटरी की उपलब्धता है। लिथियम-आयन खानों में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी के रूप में, अर्जेंटीना सहित उन पर चीनी पकड़ है, यह भारतीय निर्माताओं के लिए थोड़ी सी समस्या की बात है।

हालाँकि, मंत्री ने कहा कि एल्यूमीनियम-आयन विकसित करने के लिए बहुत सारे रिसर्च चल रहे हैं। ये एल्यूमीनियम-आयन बैटरी न केवल आसानी से उपलब्ध होंगी, बल्कि लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में काफी कम खर्चीला होगा। गडकरी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का उदाहरण दिया जो उपग्रहों को भेजने के लिए विभिन्न प्रकार की बैट्रियों का उपयोग करता है। वैकल्पिक के लिए अनुसंधान अंतिम चरण पर है और मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आईआईटी के छात्रों और इंजीनियरों को क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि कुछ समय में हमें बहुत सारे नए विकल्प मिलेंगे और जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहन देश का भविष्य होंगे।” मुंबई, पुणे, नागपुर आदि शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ रही है। यहाँ तक कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर भी बनने की प्रक्रिया में है। हाल ही में, गडकरी ने CNC पर चलने वाली JCB को भी लॉन्च किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में बहुत कुछ हो रहा है जो आने वाले वर्षों में प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा।

टेस्ला का भारत में आगमन

टेस्ला के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि कंपनी 2021 की शुरुआत तक भारत में अपना परिचालन शुरू कर देगी। हालाँकि, मंत्री ने कहा कि टेस्ला द्वारा भारत में परिचालन शुरू करने के बाद विनिर्माण के दृष्टिकोण से इसके बारे में बात करना बेहतर होगा। जैव-ईंधन, इथेनॉल, मेथनॉल, जैव-सीएनजी, जैव-डीजल, आदि के क्षेत्र में बहुत सारे शोध चल रहे हैं, जो भारत में प्रमुख ब्रांडों को लाएँगे। 

बुनियादी ढाँचों में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी

भारत में सड़कों, रेलवे, मेट्रो आदि के बुनियादी ढाँचों के बारे में बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि यह सच है कि हम वैश्विक स्तर के नहीं हैं। हालाँकि, हम जल्दी से सुधार कर रहे हैं। उन्होंने नागपुर में 1,200 करोड़ रुपए के मल्टी-मॉडल स्टेशन का उल्लेख किया जो एक अमेरिकी वास्तुकार द्वारा डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा, “यह दुनिया के पाँच सबसे अच्छे रेलवे स्टेशनों में से एक होगा। तो चीजें धीरे-धीरे होने लगी हैं।”

गडकरी ने नागपुर में मेट्रो बुनियादी ढाँचे में निजी खिलाड़ियों को शामिल करने की अपनी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नागपुर, पुणे और दिल्ली में मेट्रो के निर्माण की लागत प्रति किलोमीटर 50 करोड़ रुपए है। उनके द्वारा प्रस्तावित प्रति किलोमीटर (नागपुर ब्रॉड गेज मेट्रो) की लागत 5 करोड़ रुपए होगी। ब्रॉड-गेज 6 कोच वाली मेट्रो 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। सभी अनुमतियाँ पहले ही ली जा चुकी हैं। 6 कोचों में से तीन में मोटरें होंगी और इनकी लागत 8 करोड़ रुपए होगी। बिना मोटर वाले डिब्बों पर 4 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सामान ले जाने के लिए अतिरिक्त कोच भी शामिल होंगे।

गडकरी ने उल्लेख किया कि नागपुर से अमरावती पहुँचने में लगभग ढाई घंटे लगते हैं। मेट्रो एक घंटे 15 मिनट में दूरी तय करेगी। उन्होंने कहा कि वह मेट्रो टीम और विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के साथ बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने बैठक के लिए यात्रा और पर्यटन कंपनियों को भी आमंत्रित किया है।

अगर यह परियोजना लोकप्रिय हो जाती है तो लोग सड़क परिवहन पर मेट्रो को प्राथमिकता देंगे और यह नागपुर के लिए पहला सार्वजनिक-निजी निवेश बन जाएगा। चूँकि सिस्टम पहले से मौजूद ब्रॉड गेज का उपयोग करेगा, इसलिए लागत बहुत कम होगी। भारत में चल रही कुछ परियोजनाएँ दुनिया में पहला है।

किसानों का विरोध-प्रदर्शन

एक महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे किसान विरोध के बारे में बात करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत के पास सरप्लस अनाज है। एक समय था जब भारत में खाद्यान्न की कमी थी, लेकिन इस समय हमारे पास गोदामों में लगभग 280 लाख टन चावल है, जो पूरी दुनिया को खिलाने के लिए पर्याप्त है। बाजार मूल्य की तुलना में MSP बहुत अधिक है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल हमने 600 करोड़ रुपए की सब्सिडी के साथ 60 लाख टन चीनी का निर्यात किया। जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत प्रति किलोग्राम 22 रुपए प्रति किलोग्राम है, जबकि सरकार ने गन्ने के लिए प्रति किलोग्राम 34 रुपए का भुगतान किया। कीमतों में यह अंतर समस्या है। उन्होंने उल्लेख किया कि वह सरप्लस खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन की बात कर रहे हैं, लेकिन अनुमति नहीं दी गई।

इस समय भारत में 8 लाख करोड़ रुपए का ईंधन आयात किया जा रहा है। एक टन चावल को 480 लीटर इथेनॉल में बदला जा सकता है और एक टन मकई 280 लीटर इथेनॉल का उत्पादन कर सकता है। यदि इथेनॉल के उत्पादन के लिए अनुमति दी जाती है, तो बिहार और यूपी में अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव आएगा। चीनी के बजाय गन्ने का रस और गुड़ इथेनॉल के उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

गडकरी ने कहा कि उन्होंने Bajaj और TVS द्वारा स्कूटर और बाइक लॉन्च की हैं जो इथेनॉल पर चलते हैं। इसके साथ बहुत सारे उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिनमें बायोडिग्रेडेबल बायो-प्लास्टिक भी शामिल है। यह किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकता है। 

गडकरी ने कहा कि भारत सरकार किसानों के लाभ और हर साल एमएसपी बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जून में संसद में पहले से चर्चा में आए कानूनों पर अकाली दल का गठबंधन देखकर दुख होता है। सरकार बात करने के लिए तैयार है और स्थिति को हल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है और उम्मीद है कि यह जल्द ही हल हो जाएगा।

MSME के लिए समर्थन

गडकरी ने कहा कि मई में MSME के लिए जमानत-मुक्त ऋण के लिए 3 लाख करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। 2 लाख करोड़ पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं और ऋणों का संवितरण 1.6 लाख करोड़ से 1.8 लाख करोड़ रुपए के बीच है। उन्होंने वित्त मंत्री से योजना में और छूट देने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने भी एमएसएमई को वित्तपोषित किया है, उन्हें इस योजना के तहत लाया जाना चाहिए जो इस क्षेत्र की मदद करेगा।

अब तक, सरकार ने संकटग्रस्त एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपए दिए हैं। ‘fund for funds’ स्कीम के अंतर्गत MSME के लिए 50,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता प्रदान की गई थी। फिलहाल यह प्रक्रिया के तहत है। उन MSMEs जिनका अच्छा निर्यात कारोबार है, वह कर रिटर्न, जीएसटी और बैंक रिकॉर्ड पूँजी बाजार का लाभ उठाने में सक्षम होंगे। सरकार उन्हें 15 प्रतिशत इक्विटी इनफ्यूजन प्रदान करेगी और बाकी वे बाजार से प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार ने MSME द्वारा उठाए गए समस्याओं के समाधान के लिए ‘चैंपियन’ नामक एक पोर्टल भी लॉन्च किया है। MSMEs का भारत के निर्यात में 48% का योगदान है और GDP में 30% योगदान है, सरकार उन्हें पुनर्जीवित करने और फलने-फूलने में मदद करने के लिए सभी कदम उठा रही है। इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में निर्यात प्रतिशत को 60% और जीडीपी योगदान को 40% तक सुधारना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि MSMEs क्षेत्र इस समय 11 करोड़ नौकरियाँ प्रदान करता है और लिक्विडिटी के बेहतर प्रवाह के साथ पाँच करोड़ अधिक रोजगार प्रदान करने में सक्षम होगा।

सुमैया ने प्रेमी रेहान से कह अब्बा को ही कटवा डाला, सोए में कुल्हाड़ी से कई वार: रिश्ते पर जताई थी आपत्ति

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कौशांबी में तबरेज़ अहमद (52) की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इस वारदात को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि मृतक की बेटी सोमैया (18) और उसका प्रेमी रेहान (19) है।

मीडिया रिपोर्ट्स के पुलिस को मामले की जाँच के दौरान बेटी के बयानों पर संदेह हुआ। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक पिता ने अपनी बेटी के रिश्ते पर आपत्ति जताई थी। इस बात से नाराज़ होकर 12वीं में पढ़ने वाली बेटी ने प्रेमी के साथ हत्या की साज़िश रच डाली। 

तबरेज़ अहमद कौशांबी के सराय अकिल क्षेत्र का निवासी था और वहीं खेती करता था। पिछले कुछ दिनों से वह अपना मकान बनवा रहा था। मकान में काम चलने की वजह से वो अपने पड़ोसी कट्टटू के घर सोने जाता था। इसी क्रम में 28 दिसंबर 2020 को वह पड़ोसी के घर सो रहा था तभी देर रात लगभग 12 बजे वहाँ एक व्यक्ति पहुँचा। उसने तबरेज़ अहमद की गर्दन पर कुल्हाड़ी से कई वार किए जिसकी वजह से उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घटना के दौरान शोर होने के बाद आस-पास के लोग इकट्ठा हुआ, उन्होंने पुलिस को इस घटना की जानकारी दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले से संबंधित लगभग सभी लोगों और परिजनों को सर्विलांस पर रखा। इसके अलावा एसओजी ने भी जाँच शुरू की, लगभग एक हफ्ते की जाँच के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गुत्थी सुलझा ली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर ने बताया कि आरोपित रेहान मृतक की बेटी सोमैया से प्यार करता था। तबरेज़ को इस बात की जानकारी हुई तो उसने आपत्ति जताई। तबरेज़ ने सोमैया का स्कूल जाना बंद करवा दिया। फिर भी दोनों का चोरी छुपे मिलना जारी था। वारदात की रात तबरेज़ को सोमैया की इस हरकत की भनक लगी तो उसने बेटी की पिटाई कर दी। सोमैया ने यह बात रेहान को बताई जिसके बाद दोनों ने हत्या की साज़िश रच डाली।   

28 दिसंबर की देर रात रेहान सोमैया के घर पहुँचा जहाँ उसे पता चला कि तबरेज़ पड़ोसी के घर में सोया है। रेहान कुल्हाड़ी लेकर वहाँ पहुँचा और तबरेज़ पर कुल्हाड़ी से कई वार किए जिसके बाद तबरेज़ की मौके पर ही मृत्यु हो गई। हत्या के बाद आरोपित रेहान अपने गाँव पुरखास भाग गया था।   

मुंबई का मालवणी, रहते थे 100 हिंदू परिवार, बचे 8-10: घर कब्जा रहे मुस्लिम गुर्गों को मंत्री असलम शेख का संरक्षण होने का दावा

90 के दशक में जो जम्मू-कश्मीर के कश्मीरी पंडितों और हाल में कैराना के हिंदुओं के साथ हुआ, वही अब मुंबई के मलाड (Malad) में भी शुरू हो गया है। मलाड के मालवानी/मालवणी (Malvani) में बहुसंख्यक आबादी (मुस्लिम आबादी) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (sc/st) समेत सभी हिंदुओं को इलाका छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

मालवणी के मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है कि वो अपनी घर-जमीन छोड़कर वहाँ से पलायन कर जाएँ। एक समय में इस इलाके में 100 से ज्यादा हिंदू परिवार रहा करते थे। मगर अब हिंदू परिवारों की संख्या सिर्फ़ 8 से 10 रह गई है और वह भी बहुसंख्यक आबादी के बीच से निकल कर भागना चाहते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हिंदू परिवारों पर दबाव बनाने वाले (मुस्लिम) गुंडों को स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता व महा विकास आघाड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है। एक पीड़ित का दावा है कि कॉन्ग्रेस नेता की आड़ में समुदाय विशेष के लोग हिंदुओं की जमीन पर कब्जा करते हैं और बाद में दरगाह व मदरसों का निर्माण कर दिया जाता है।

मालवणी में पीड़ित के घर की छत का हाल

पीड़ित के अनुसार पुलिस भी इन गुंडों के ख़िलाफ़ कई एफआईआर होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करती है, जबकि ये गुंडे सिर्फ़ जमीन नहीं कब्जाते बल्कि साथ में ड्रग तस्करी, अनधिकृत निर्माण और कई अवैध काम करते हैं।

मुंबई के भाजपा अध्यक्ष प्रभात लोढ़ा पहुँचे मालवानी

हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के इस मामले पर मुंबई में बीजेपी अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने संज्ञान लिया है। उन्होंने क्षेत्र में पहुँच कर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने मालवणी में हिंदुओं की स्थिति को कश्मीरी पंडितों से जोड़ा। साथ ही स्थानीय प्रशासन से अपील की कि वह बिन भेदभाव के दलितों के साथ हो रही नाइंसाफी के लिए आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें और पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करें।

मुस्लिम गुर्गों स्थानीय नेता असलम शेख का समर्थन: बीजेपी मंडल अध्यक्ष सुनील कोली

लोढ़ा के मालवणी दौरे के बाद ऑपइंडिया ने बीजेपी मंडल अध्यक्ष सुनील कोली से संपर्क किया। कोली ने बातचीत के दौरान इलाके में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का घिनौना चेहरा उजागर किया। कोली ने कहा वह (मुस्लिम) गुंडे जो दलितों को धमकाते हैं, उन्हें क्षेत्र से जाने को मजबूर करते हैं, उन्हें स्थानीय नेता असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है।

वह कहते हैं, “वो मुस्लिम गुंडे जो लोगों को घर खाली कराने के लिए धमकाते हैं और जमीन छोड़ने का दबाव बनाते घूमते हैं, उन सबको असलम शेख का संरक्षण प्राप्त है। उनकी तस्वीरें पूरे इलाके में बड़े-बड़े होर्डिंगों में शेख की तस्वीर के नीचे लगी दिखाई देती है। वह सिर्फ़ अपने मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए दूसरों को जगह छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं।”

उन्होंने कहा कि एक समय में यहाँ 100 से ज्यादा हिंदू रहते थे। अब सिर्फ़ मुश्किल से 8-10 परिवार बचे हैं। कई इन गुंडों के डर से भाग गए। वह बताते हैं कि इलाके में दलित परिवारों के साथ भी वही सब होता है जो सामान्य हिंदू परिवारों के साथ हुआ। उन्हें धमकी दी जाती है, पलायन को मजबूर किया जाता है, बिलकुल हिंदू परिवारों की तरह। 

बीजेपी मुंबई अध्यक्ष पहुँचे मालवणी

महाराष्ट्र सरकार की जमीन पर बने हैं अवैध मदरसा: सुनील कोली

कोली बताते हैं, “मुस्लिम गुंडों ने भाजी मार्केट के पीछे चॉल नंबर 7 में अवैध रूप से हिंदुओं के घरों पर कब्जा किया है। वह अब दलितों को सता रहे हैं कि वह भी जगह खाली कर दें। उनके घरों पर हमला हो रहा है। उनकी औरतों को प्रताड़ित किया जाता है।” सुनील कोली जानकारी देते हैं कि मालवणी में अनधिकृत मदरसों और दरगाहों की संख्या में वृद्धि हुई है। और नए मदरसे व दरगाह महाराष्ट्र सरकार के स्वामित्व वाली भूमि पर बनाए गए हैं।

एक सबसे अहम बिंदु जो गौर करने वाला है वो यह कि महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अंतर्गत आने वाली चॉलों में कई अनियंत्रित मदरसों और दरगाहों का अचानक उदय हुआ है। छेदा कॉन्प्लेक्स की चॉल नंबर 5  में एक मदरसा और एक दरगाह है। कोली ने इस संबंध में आगे जानकारी देते हुए कहा कि पूरे मामले का संज्ञान भाजपा ने ले लिया है और उन लोगों की ओर से  पुलिस अधिकारियों को अल्टीमेटम दे दिया गया है कि इस संबंध में 15 जनवरी तक रिपोर्ट दी जाए। वह कहते हैं कि अगर पुलिस पीड़ितों को उनके अधिकार दिलाने में असमर्थ रहती है तो पार्टी रोड पर उतर कर प्रदर्शन करेगी।

गहलोत कहता है कि अंग्रेज़ी बोलने से नेता नहीं बनता, पायलट कहता है हाफपैंट पहनना राष्ट्रवाद नहीं

कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट ने रविवार (जनवरी 03, 2021) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के हक की बात करना असली राष्ट्रवाद है और जो नागुपर से हाफ पैंट पहनकर भाषण देते हैं, वह राष्ट्रवाद नहीं है।

कुछ ही महीनों पहले, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से टकराव और कॉन्ग्रेस के खिलाफ बागी स्वर अपनाने के कारण चर्चा में आए सचिन पायलट केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में नजर आए और अपने एक संबोधन में, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर संगठन का नाम लिए बिना हमला किया।

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आप लव जिहाद पर कानून बना रहे हो औऱ किसानों के भविष्य को अंधेरे में धकेल रहे हो। राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम ने नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में जयपुर में कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

सचिन पायलट के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके जमकर मजे लिए हैं। फिल्म मेकर अशोक पंडित ने सचिन पायलट के इस भाषण का वीडियो ट्विटर पर रिट्वीट करते हुए लिखा, “सचिन पायलट जी, दुनिया को यह पता है की 2014 में आपकी निक्कर निकाल दी गई थी। आपको यह भी पता होगा की आपके 70 सालों के राज में हज़ारों किसानो ने आत्महत्या की है।”

अशोक पंडित के साथ ही कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सचिन पायलट के भाषण पर उन्हें ट्रोल किया। ‘बींग ह्यूमर’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने सचिन पायलट की वर्तमान स्थिति को एक मीम के माध्यम से रखते हुए एक ऐसे कुत्ते की तस्वीर शेयर की है, जिसमें उसके आगे के 2 पैर दाईं ओर तो पीछे के दो पैर बाईं ओर भाग रहे हैं।

प्रतीक पांड्या नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा है, “अगर यें हाफ पैंट पहनने वाले RSS के स्वयंसेवक नहीं होते तो आज आपका नाम सचिन पायलट नहीं, सचिन पिरजादा होता मान्यवर। वैसे अपने पिताजी के हत्यारों के साथ काम करके आपकों रात में नींद आ जाती है क्या?”

आदिरा ने सचिन पायलट के इस बयान में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि आप भूल रहे हैं कि अगर इसी भाजपा ने आपको मुख्यमंत्री बनाने में सहमति दिखाई होती तो आप भी आज ख़ुशी से ये हाफ पैंट पहन रहे होते।

गौरतलब है कि कुछ ही माह पहले अशोक गहलोत के खिलाफ बगावती होने के बाद अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लिए बगैर उन पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि अच्छी अंग्रेजी बोलना, अच्छी बाइट देना और हैंडसम होना सब कुछ नहीं है। उन्होंने कहा था कि देश आपकी विचारधारा, नीतियों और प्रतिबद्धता के लिए आपके दिल के अंदर क्या है, सब कुछ माना जाता है।