कोरोना वायरस महामारी के बीच लोगों का जन-जीवन बड़े स्तर तक प्रभावित हुआ है। भारत सहित ही दुनियाभर के देश कई महीनों से लॉकडाउन की पाबंदियों से जूझ रहे हैं और अब कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के प्रसार से निपटने के लिए कई देशों ने जगह-जगह पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। लेकिन रूस के नागरिक अब इन पाबंदियों से परेशान हो गए हैं और अपने तरीकों से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
येकातेरिनबर्ग, रूस में यात्रियों को ले जा रही एक मेट्रो ट्रेन के डिब्बे में करीब तीस जोड़ों ने अपने मास्क हटाकर एक-दूसरे को चूमना शुरू कर दिया। यह अनोखा विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं।
इन लोगों ने दावा किया कि वो मनोरंजन और खान-पान उद्योग पर लगे ‘अनुचित नियमों’ के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करना चाहते थे। इन कपल्स का कहना है कि मेट्रो ट्रेन्स में इतनी भीड़-भाड़ है, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जबकि, नाइट क्लब और म्यूजिक समारोहों पर पाबंदियाँ लगाई गई हैं।
मेट्रो में मौजूद इन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका लक्ष्य किसी को नुकसान पहुँचाना या फिर शर्मिंदा करना नहीं था मगर जिस तरह से कहीं छूट तो कहीं पाबंदी लगाई गई हैं, वह अनुचित है।
विरोध का यह अनोखा तरीका कई लोगों द्वारा रिकोर्ड कर लिया गया और यह सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर भी किया जा रहा है –
वीडियो में देखा जा सकता है कि ट्रेन के भीतर मौजूद कपल्स जब एक दूसरे को किस कर रहे हैं तो पीछे ‘पिंकग्लास’ बैंड का गाना बज रहा है, जिसका शीर्षक है- ‘Let’s Kiss’। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उन्होंने सेवाओं को बाधित करने या किसी को अपमानित करने की योजना नहीं बनाई थी बस वो अपना विरोध रखना चाहते थे।
नेपाल भेजा गया चीनी प्रतिनिधिमंडल अब वापस बीजिंग लौट गया है। 4 दिनों के दौरे में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के गुटों में कोई सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप-मंत्री गुओ येझोउ के नेतृत्व में आई उच्च-स्तरीय टीम बुधवार (दिसंबर 30, 2020) की सुबह वापस चली गई। कई दलों के कई नेताओं से मुलाकात के बाद भी कोई रास्ता नहीं निकला क्योंकि पीएम केपी शर्मा ओली अपने रुख पर अड़े हुए हैं।
पीएम ओली ने संसद भंग करने का निर्णय करते हुए फिर से चुनाव की घोषणा कर दी है और उनका कहना है कि अगर वो ऐसा नहीं करते तो संसद में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता, इसीलिए उन्होंने अपने विरोधियों को जवाब दिया है। गुओ येझोउ ने ही 2018 में ओली के कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) और प्रचंड के कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट) का विलय करवाया था।
फरवरी 2018 के बाद अब वो 34 महीने बाद नेपाल आए थे। पीएम ओली ने संसद को भंग करने का फैसला ये कहते हुए वापस लेने से इनकार कर दिया कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रचंड गुट उनकी सरकार को गिराने की साजिश नहीं करेगा। वहीं प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के गुट ने भी चीनियों को कोई आश्वासन नहीं दिया। चीनियों ने अब बाबूराम भट्टराई की समाजवादी पार्टी और शेर बहादुर देउबा की नेपाली कॉन्ग्रेस का समर्थन प्रचंड-नेपाल गुट के लिए जुटाने की कोशिश शुरू कर दी है।
नेपाल की सुप्रीम कोर्ट में भी संसद भंग करने के खिलाफ कई याचिकाएँ डाली गई हैं, ऐसे में अगर फैसला पीएम ओली के विपरीत आया तो कई दल मिल कर बहुमत की संभावना खोज सकते हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों गुटों ने साथ में चुनाव लड़ने से भी इनकार कर दिया है। चीन के प्रतिनिधिमंडल ने कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे स्तर के नेताओं के साथ भी बैठक की और वरिष्ठों को एक करने के लिए कहा, लेकिन अभी तक इसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया है।
#InPics | Nepal’s Prime Minister @kpsharmaoli took a sudden decision to dissolve the parliament a few days back. What followed was protests from locals and opposition leadershttps://t.co/cUSmL2ZAkW
उधर चीनी मीडिया ने आरोप लगाया है कि भारत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की जासूसी करवा रहा है। जबकि दुनिया भर में कई देश चीन पर ही हैकिंग से लेकर जासूसी तक के आरोप लगाते रहते हैं। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत पर नेपाल की राजनीति में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। चीनी मीडिया का कहना है कि नेपाल के विवाद में भारतीय हस्तक्षेप से चीन चिंतित है। दावा किया गया है कि भारत के ख़ुफ़िया एजेंट NCP नेताओं पर नजर रख रहे हैं।
मथुरा में RSS के कार्यालय पर मजहब विशेष के कम से कम 50 लोगों ने सामूहिक रूप से आकर RSS कार्यकर्ताओं के साथ पथराव और मारपीट की, जिसमें दो स्वयंसेवकों को चोट आईं हैं। कार्यालय परिसर में निर्माण कार्य के दौरान स्वयंसेवकों ने समुदाय विशेष के एक युवक चाँद बाबू उर्फ़ एके खान को सरिया चोरी करते हुए पकड़ा था, जिसे पुलिस को सौंप दिया गया। यही आरोपित एके खान अपने भाई बबलू और पिता मुख्तियार खान समेत अन्य साथियों के साथ RSS कार्यालय पहुँचा और हमला बोल दिया।
यूपी के मथुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पथराव। दो स्वयंसेवक घायल। कार्यालय परिसर में निर्माण कार्य के दौरान स्वयंसेवक ने विशेष समुदाय के एक युवक को सरिया चोरी करते हुए पकड़ा था। इसी आरोपी के साथियों ने हमला किया। #Mathura#Uppic.twitter.com/cTihbuOb3r
मजहबी भीड़ द्वारा किए गए इस सामूहिक हमले के एक दिन बाद, मथुरा पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है जबकि उत्तर प्रदेश प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से दो पुलिसकर्मियों को भी निलंबित कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इस घटना के सम्बन्ध में सलमान सहित 40-50 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। जबकि चाँद बाबू उर्फ एके खान, भाई बबलू औऱ पिता मुख्तियार खान को गिरफ्तार कर लिया गया है।
मथुरा थाना गोविन्द नगर इलाके में आरएसएस के कार्यालय पर हमला,40 से 50 महिला और पुरुषों पर पथराव करने का आरोप,मौके पर पहुँची पुलिस ने कुछ लोगो को किया गिरफ्तार घटना की जांच में जुटी ,घटना के सम्बन्ध में लापरवाही बरतने के कारण मसानी चौकी पर तैनात 2 कांस्टेबल निलंबित @CMOfficeUPpic.twitter.com/QIV3HG5bfJ
घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी और कई संगठनों के पदाधिकारी संघ कार्यालय पर उपस्थित हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को चोरी के आरोप में मुस्लिम समुदाय के दो युवकों को पुलिस को सौंपने के विरोध में मंगलवार शाम करीब 4 बजे आजमपुर से समुदाय विशेष के करीब 40-50 युवक और महिलाओं ने केशव भवन पर हमला बोल दिया। हमलावरों द्वारा कार्यालय स्थान को चारों ओर से घेर लिया गया औऱ लगातार पत्थरबाजी की गई।
पथराव में कार्यालय में मौजूद छात्र स्वयंसेवक सोनू और पवन घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि इस सम्बन्ध में दो अन्य को भी गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, तीन लोगों को हिरासत में ले लिया गया है।
दरअसल, मथुरा के गोविंदनगर इलाके में मंगलवार शाम अज्ञात बदमाशों ने आरएसएस कार्यालय पर हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि तकरीबन 50 लोगों के एक समूह द्वारा यह पथराव किया गया था और कथित रूप से संघ कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। सिटी एसपी, उदय शंकर के अनुसार, अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और आगे की पूछताछ के लिए तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।
आरएसएस कार्यालय पर हमले का कारण चोरी के संदेह में स्वयंसेवकों द्वारा दो व्यक्तियों को पुलिस को सौंप दिया जाना बताया जा रहा है। इसके अगले दिन, संघ कार्यालय के बाहर समुदाय विशेष की भीड़ जमा हो गई और कार्यालय पर पथराव किया। आरएसएस के कार्यालय में वर्तमान में निर्माण कार्य चल रहा है और दूसरे समुदाय के कुछ युवक वहाँ से कथित तौर चुरा रहे थे।
थाना गोविंद नगर क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालय केशव भवन पर पथराव-मारपीट के मामले में पुलिस की लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है। सोमवार को स्वयंसेवकों द्वारा चोरी करते पकड़े गए मुसलिम समुदाय के युवक को पुलिस ने छोड़ दिया था।
लोगों का कहना है कि अगर पुलिस चोरी के मामले में कार्रवाई करती तो मंगलवार को यह घटना न होती। पुलिस ने मंगलवार देर शाम नाबालिग समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जबकि दो सिपाही निलंबित किए गए हैं।
आरोप है कि थाना गोविंद नगर पुलिस ने चोरी की इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया और समुदाय विशेष के चोर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और उसे छोड़ भी दिया गया। इसीका नतीजा आरएसएस कार्यालय पर सामूहिक भीड़ द्वारा पत्थरबाजी के रूप में सामने आया है।
सोशल मीडिया पर लिबरल गिरोह के वकील महमूद प्राचा के समर्थन में अभियान चला रहा है। यहाँ हम आपको बताएँगे कि ये आदमी है कौन और साथ ही इसका कच्चा चिट्ठा भी खोलेंगे। वो दिल्ली दंगा में ‘पीड़ितों’ का केस मुफ्त में लड़ने का दावा करता है और भारत में अघोषित आपातकाल के नैरेटिव को आगे बढ़ाता है। न सिर्फ कोर्ट में, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी वो इस्लामी प्रोपेगंडा फैलाने में दक्ष है। दिल्ली दंगों में ये आरोपित मुस्लिम दंगाइयों का वकील है।
NDA के सत्ता में आने से पहले महमूद प्राचा की ऐसी तूती बोलती थी कि वो राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, दिल्ली सफाई कर्मचारी कमीशन और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक (FSSAI) जैसी सरकारी संस्थाओं के लिए कोर्ट में पेश को चुका है। वो सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा का एडिशनल अधिवक्ता रहा है। साथ ही AIIMS दिल्ली का स्टैंडिंग काउंसल और दिल्ली लॉ स्कूल के छात्र संघ का अध्यक्ष रहा है।
अब आइए जानते हैं कि किन-किन किस्म के संगठनों के साथ उसका नाम जुड़ा हुआ है। जमात उलेमा-ए-हिन्द ने महमूद प्राचा को कई आतंकवादियों का केस लड़ने के लिए हायर किया था। वकील महमूद प्राचा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दिल्ली ब्रांच का सदस्य है। साउथ एशिया माइनॉरिटी लॉयर्स एसोसिएशन का वो अध्यक्ष है। जुलाई 2017 से वो अमेरिका के ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ की तर्ज पर भारत में ‘दलित, माइनॉरिटी एंड ट्राइबल लाइव्स मैटर्स’ नामक अभियान चला रहा है।
‘आर्गेनाईजेशन फॉर प्रमोशन ऑफ लीगल अवेयरनेस’ का वो मुखिया है। साथ ही वो ‘संविधान सुरक्षा समिति’ का संयोजक है। इसी संगठन के एक अन्य संयोजक का नाम है चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ़ रावण। इस संगठन ने न सिर्फ CAA विरोधी आंदोलनों को देश भर में हवा दी, बल्कि प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता भी मुहैया कराई। वजाहत हबीबुल्लाह इसका संस्थापक है, जो भारत का चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष रहा है।
उसने 2004 में जम्मू कश्मीर के मसले में अमेरिका की मध्यस्तथा की माँग की थी, जबकि ये भारत का आंतरिक मामला है। महमूद प्राचा ‘भीम आर्मी’ से तो जुड़ा ही हुआ है, साथ ही ‘रावण’ को दरियागंज में हुई हिंसा के मामले में कोर्ट में डिफेंड भी कर चुका है। उसने मेवात के मुस्लिम बहुल इलाके में जाकर भड़काऊ भाषण दिया था और CAA विरोधी आंदोलन को हवा दी थी। उसने तब खुलासा किया था कि पूरे बिहार में 1500 शाहीन बाग़ चल रहे हैं और इसमें मुस्लिम महिलाओं का सबसे ज्यादा योगदान है।
तब उसने देश में खतरा होने की बात बताते हुए कोरोना के दौरान भी मुस्लिम महिलाओं को धरनास्थल पर बैठे रहने को कहा था और उन्हें बचाव के लिए लौंग और हल्दी खाने की सलाह दी थी। उसने तब कहा था कि वो CAA विरोधी आंदोलन का कानूनी सलाहकार है और पुलिस-प्रशासन पर मुस्लिमों को तंग करने का आरोप लगाया था। उसने जनप्रतिनिधियों की ‘लगाम टाइट कर के रखने’ को कहा था और भड़काते हुए कहा था कि जब हमने CAA कानून बनाने का अधिकार इन नेताओं को नहीं दिया तो ये कैसे बन गया?
दिल्ली हाईकोर्ट में कपिल मिश्रा सहित अन्य भाजपा व संघ नेताओं के खिलाफ केस करने में उसका सबसे बड़ा हाथ था। साथ ही उसे NPR के खिलाफ भी मुस्लिमों को भड़काया था और बाटला हाउस की नूह मस्जिद में केंद्र की मोदी सरकार पर मनुवाद चलाने का आरोप लगाया था। उसने दावा किया कि असम में ‘बाहरी’ मारवाड़ियों ने पूरे व्यापार पर कब्जा कर रखा था, इसीलिए NRC लाई गई। उसने बड़े उद्योगपतियों पर RSS को लोन देने का आरोप लगाया और यहाँ तक दावा कर बैठा कि जिनका नाम NRC में नहीं आएगा, उनके बैंक एकाउंट्स के रुपए सरकार खा जाएगी।
इसी तरह उसने पूरे भारत में घूम-घूम कर केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ भ्रम फैलाया। साथ ही वो मुस्लिम-दलित एकता की बातें करते हुए अपने हर भाषण में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का राम लेना भी नहीं भूलता है। दिल्ली दंगों में भी उसने जम कर अफवाहें फैलाई थीं और दावा किया था कि मुस्लिमों के घर बम लगा कर उड़ा दिए गए। उसने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दिल्ली पुलिस पूरी ताकत लगा कर दंगा कराने में जुटी हुई थी। वो दिल्ली दंगों में हिन्दुओं को जेल भिजवाने का दावा भी करता है।
दिल्ली दंगों के बाद भी उसने घूम-घूम कर ‘मुस्लिम पीड़ितों’ के वीडियो बनवाए थे और हिन्दुओं पर तरह-तरह के आरोप लगाए गए थे। जब दिल्ली के तुगलकाबाद में रविदास मंदिर के टूटने के बाद ‘रावण’ ने इस मुद्दे पर उपद्रव किया था, तब भी वो उसके समर्थन में था और दावा किया था कि इस मंदिर के लिए 96 भक्त जेल गए हैं। 2019 में जब ‘मॉब लिंचिंग’ को लेकर अफवाहें फैला जा रही थीं, तो इसमें भी महमूद प्राचा पूरी तरह शामिल था।
उसने मुस्लिम बहुल इलाकों में घूम-घूम कर लाइसेंसी हथियारों की खरीद-बिक्री करने की सलाह दी थी और उन्हें ‘आत्मरक्षा’ के लिए हथियार रखने को कहा था। उसने मुस्लिमों को यहाँ तक सलाह दी थी कि भले ही उनकी संपत्ति बिक जाए, वो बन्दूक जरूर रखें। उसने विभिन्न मस्जिदों में मुस्लिमों को बंदूक चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए कैंप लगाने की भी वकालत की थी। उसने मस्जिदों में मार्शल आर्ट्स से लेकर हर फिजिकल ट्रेनिंग की बात करते हुए कहा था कि आज देश के SC/ST और मुस्लिमों के पास यही एकमात्र विकल्प बचा है।
दिल्ली के बाटला हाउस के नूह मस्जिद में वकील महमूद प्राचा
चुनाव के दौरान वो दिल्ली के दिवंगत मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का भी समर्थक रहा है और नामांकन में उनके साथ रहा था। 2019 लोकसभा चुनाव में उसने भाजपा के खिलाफ मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए ‘मिल्लत टाइम्स’ नामक इस्लामी मीडिया संस्थान को संरक्षण दिया था। 2010 पुणे जर्मन बेकरी बम ब्लास्ट मामले में वो आतंकी मिर्ज़ा हिमायत को कोर्ट में डिफेंड कर चुका है। इजरायल दूतावास हमले में वो आरोपित सैयद मुहम्मद अहमद काजमी का वकील रहा है।
उसने उस आरोपित को कार्रवाई से बचा भी लिया और आज उसके द्वारा चलाए जाने वाले मीडिया संस्थानों में वो बड़ी हैसियत रखता है। 2008 दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट मामले में वो मुहम्मद मंसूर असगर का वकील रहा है। उसने बेअंत सिंह हत्या मामले में खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह की भी कोर्ट में मदद की। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने उसे एक बार निकाल बाहर भी किया था और कहा था कि वो इन मामलों पे ठीक से फोकस नहीं कर रहा है।
NPR को लेकर भी मुस्लिमों को भड़काया था
2014 में वो इराक के लिए निकला था और दावा किया था कि वो आतंकी संगठन ISIS द्वारा अपहृत किए गए भारतीयों को छुड़ाने के लिए गया है। IB ने उसके व उसके साथ जा रहे 6 लोगों के पासपोर्ट जब्त किए थे, जिसके बाद उसने IB पर ही उसके मानवाधिकार कार्य में बाधा पहुँचाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में केस कर दिया था। उसने IB की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसका गठन कानून के तहत नहीं हुआ है।
हाल ही में दिल्ली पुलिस की एक विशेष सेल ने अदालत से वारंट लेकर बृहस्पतिवार (दिसंबर 24, 2020) को दिल्ली दंगों के मामले के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य महमूद प्राचा के ऑफिस की तलाशी ली। वकील प्राचा पर एक सरकारी कर्मचारी को आपराधिक बल का प्रयोग करके कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने का आरोप लगा। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 186, 353 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
वैंकुठ एकादशी के मौके पर तिरुमाला वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की साज-सज्जा देखने योग्य थी। फूल और लाइटों से सजा-धजा स्वामी मंदिर इस दिन किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम था। लेकिन इस बीच फर्जी खबरों के बाजार में मंदिर की सजावट की तस्वीर यह कहकर बेची गई कि यह साज सज्जा ‘क्रॉस’ जैसी है, जो ईसाई धर्म का प्रतीक है। किसी ने प्रोपगेंडा साधने के लिए ये काम किया, किसी ने इस नाराजगी में कि आखिर हिंदू मंदिर पर ईसाइयत कैसे हावी हो सकती है।
सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि वैंकुठ एकादशी पर ऐसी सजावट जानबूझ कर क्रॉस को ध्यान में रख कर की गई क्योंकि क्रिसमस और एकादशी एक दिन थे। अपनी बात को साबित करने के लिए उन नेताओं का भी हवाला दिया गया, जिन्होंने क्रिसमस की बधाइयाँ दी हुई थीं। अब इन दावों की सच्चाई क्या है? बता दें कि तिरुमाला मंदिर पर लाइटिंग ‘क्रॉस’ का प्रतीकात्मक नहीं थीं बल्कि इसके जरिए पूर्णकुंभम यानी कलश को दिखाने का प्रयास हुआ था।
जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर नजर आई तस्वीर 25 दिसंबर से शुरू होने वाले महत्वपूर्ण त्योहार की पूर्व संध्या पर भगवान श्री महाविष्णु के विभिन्न पौराणिक रूपों का चित्रण है, जिसे लाइट से बनाने की मंदिर की प्रथा है।
Controversy erupts surrounds the lighting arrangements at Thirumala Tirupathi Devastanam. People says it looks like ‘Crosses’ when they are lit. After uproar on social media, the lights were removed. pic.twitter.com/SUHlURUpQS
जब सोशल मीडिया पर हो रहे फर्जी दावों के बारे में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को मालूम हुआ तो उन्होंने इस दावे की निंदा की और साथ ही चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास सिर्फ भगवान वेंकटेश्वर के विश्वयापी श्रद्धालुओं को दुख पहुँचाने वाला है।
सोशल मीडिया पर दावे
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी धर्म रेड्डी ने बताया कि लाइट से बनाए गए एक हिंदू प्रतीक की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ करके उसे एक क्रॉस की तरह दिखाने का प्रयास हुआ, और बाद में उसे इस दावे के साथ प्रसारित किया गया कि तिरुपति मंदिर में ईसाई कल्पना प्रदर्शित की जा रही है। उन्होंने पुष्टि की कि वास्तविकता में मंदिर की बाउंडरी पर हुई सजावट में पूर्णकुंभम को दर्शाया गया है, जिसे कलशम भी कहते हैं। इसमें हिंदू रिवाज के अनुसार नारियल और आम के पत्तों का इस्तेमाल होता है।
पूर्णकुंभम
उन्होंने कहा कि सजावट में पूर्णकुंभम प्रतीक का उपयोग किया गया था। साथ में गरुण और आंजनेय भी थे। दुर्भाग्य से सोशल मीडिया पर, इन तस्वीरों को क्रॉस दिखा कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास हुआ। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत कर दी गई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की माँग हुई है।
बता दें कि इससे पहले तिरुपति पुलिस ने पिछले साल 3 लोगों को गिरफ्तार किया था। वह मंदिर को लेकर दावा कर रहे थे कि इसका ढाँचा चर्च जैसा है। पुलिस का क्रॉस को लेकर कहना था कि वास्तविकता में फॉरेस्ट वाचटॉवर पर एक खंबा है, जिसे बहुत दूरी से और ऐसे एंगल से तस्वीर में कैद किया गया है कि लगे वो क्रॉस बना है और लोग भ्रमित हो सकें।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की महिला पुलिसकर्मियों की शक्ति (संख्या) में इस वर्ष 16% का इजाफा हुआ है। 1 जनवरी से यदि जोड़ें तो इस वर्ष महिलाओं की साझेदारी में 10.3% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले वर्ष यह प्रतिशत 8.9 फीसद था। एक ऐसे क्षेत्र में जहाँ दशकों से पुरुष प्रधानता का बोलबाला रहा हो, वहाँ महिलाओं की इस बढ़ती साझेदारी को खूब सराहा जा रहा है।
इस क्षेत्र में सबसे बढ़िया साझेदारी महिला पुलिकर्मियों की बिहार में 25.3% के साथ दर्ज हुई। इसके बाद हिमाचल में यही शेयर 19.15%, चंडीगढ़ में 18.78% और तमिलनाडु में 18.5 % देखने को मिला। जम्मू कश्मीर पुलिस में सबसे कम महिलाओं की साझेदारी देखने को मिलती है और इसके बाद तेलंगाना में भी यही हाल है।
यह सारी जानकारी ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ने मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) को मुहैया करवाई। उन्होंने इस ओर भी ध्यान आकर्षित करवाया कि प्रति लाख के हिसाब से पुलिस संख्या में पिछले साल के मुकाबले (158.2) इस वर्ष (155.7) गिरावट देखी गई।
इसके अलावा यह भी पता चला कि राज्यवार ढंग से पुलिस जनसंख्या अनुपात की गणना में सबसे सशक्त नागालैंड है। वहाँ प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से 1301 पुलिसकर्मी हैं। इसी तरह अंडमान एंव निकोबार, मणिपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश में भी पुलिस जनसंख्या का आँकड़ा सराहनीय है। वहीं प्रति लाख में पुलिस जनसंख्या का सबसे निम्न आँकड़ा बिहार, दमन एंड दिउ, पश्चिम बंगाल, आँध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर बताती है कि राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में पुलिसकर्मियों की स्वीकृत शक्ति 26.23 लाख होती है, लेकिन वास्तविकता में ये आँकड़ा सिर्फ 20.9 लाख तक सीमित है। आँकड़े बताते हैं कि कुल मिलाकर राष्ट्रभर में पुलिसबलों में कर्मियों के लिए स्वीकृत पदों का लगभग पाँचवाँ हिस्सा खाली रहता है।
हालाँकि, पूरे राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में महिला पुलिसकर्मियों की शक्ति 1.85 लाख से बढ़कर 2.15 लाख हो गई, जो बताता है कि इनमें 16% की वृद्धि हुई।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों (CAPFs) में उनकी हिस्सेदारी केवल 2.9% थी। CAPF कर्मियों में ( ITBP, BSF, CRPF, CISF, SSB, NSG) में महिलाएँ 29249 की संख्या में थीं। इनमें CISF में इनकी संख्या 8,631, CRPF में 7,860 और BSF में 5,130 थीं।
बता दें कि केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं की साझेदारी ने साल 2014 के बाद उछाल देखा था। 2014 में इनकी संख्या 1.11 लाख हुआ करती थी और 2019 में ये संख्या 2.15 लाख पहुँच गई है। इनका एक कारण राज्यों द्वारा अपनाया गया आरक्षण का तरीका भी है। आज 14 राज्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देते हैं। 2 राज्य 20 फीसद कोटा और तीन राज्य 10 फीसद कोटा देते हैं। इसके अलावा केंद्रीय फोर्स में भी लड़कियों के लिए आरक्षण लेकर आया गया है।
यूनाइटेड किंगडम (UK) में कोरोना वायरस संक्रमण का एक नया स्ट्रेन सामने आ गया है, जिसेक बाद पूरी दुनिया में यूके से आने वाले लोगों की मेडिकल जाँच की जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को जानकारी दी है कि कोरोना वायरस के इस नए SARS-CoV-2 से अब तक भारत में यूके से लौटे 20 लोग संक्रमित पाए गए हैं। मंगलवार को ही इनमें से 6 लोग कोरोना के नए संक्रमण से पॉजिटिव पाए गए थे। पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में UK से लौटे कई लोग गायब हैं।
म्युटेटेड यूके कोरोना स्ट्रेन के सैम्पल्स की जाँच में विभिन्न मेडिकल रिसर्च संस्थानों में इन्हें पॉजिटिव पाया गया। मंत्रालय ने बताया कि राज्य सरकारों ने इन्हें सिंगल रूम क्वारंटाइन फैसिलिटी में रखा हुआ है। साथ ही उनके करीबी संपर्कों को भी आइसोलेट किया जा रहा है। उनके साथ यात्रा करने वाले, परिवार वालों और अन्य करीबियों को खोज कर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। सर्विलेंस, ट्रेसिंग, जाँच और कन्टेनमेंट के लिए राज्यों को सलाह दी जा रही है।
नवंबर 25 से लेकर दिसंबर 23 तक लगभग 1 महीने में यूके से 33,000 लोग विभिन्न भारतीय एयरपोर्ट्स पर उतरे। इन सभी को ट्रेस कर के उनकी RT-PCR जाँच की जा रही है। इस नए किस्म के वायरस से बचाव के लिए सरकार ने एक प्रिवेंटिव स्ट्रेटेजी तैयार की है। टेस्टिंग और ट्रीटमेंट की रणनीति के लिए दिसंबर 26 को नेशनल टास्क फोर्स की बैठक में रणनीति भी बनाई गई। मौजूदा प्रोटोकॉल में बदलाव भी किया गया है।
तमिलनाडु से 2, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के एक-एक व्यक्ति को कोरोना के नए किस्म से संक्रमित पाया गया है। दिसंबर 31 तक यूके से आने वाली फ्लाइट्स पर अस्थायी प्रतिबन्ध लगाया गया है। कई अन्य देशों में भी लोग इससे संक्रमित पाए गए हैं। दिसंबर 21 को यूके से एक महिला अपने बेटे के साथ दिल्ली आई थी और फिर वहाँ से भाग कर वो लोग आंध्र प्रदेश गए, लेकिन ईस्ट गोदावरी के राजामहेन्द्रवर्मन से उन्हें अस्पताल में ले जाया गया।
अब उस 47 वर्षीय महिला को कोरोना के नए स्ट्रेन से पॉजिटिव पाया गया है। आंध्र प्रदेश में तब तक यूके से लौटे 12 कोरोना संक्रमितों में से इस एक महिला को ही नए स्ट्रेन से पॉजिटिव पाया गया था। आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर ने बताया कि यूके से लौटे 1423 लोगों में से 1406 को ट्रेस कर लिया गया है। उनके 6364 प्राइमरी कॉन्टेक्ट्स की भी जाँच हुई। महिला के साथ उसी एसी कोच से सफर करने वाले 8 लोग कोरोना नेगेटिव पाए गए।
पुणे में स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि यहाँ यूके से लौटे 109 लोगों का कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है। इतने लोग पिछले 15 दिनों में ही पुणे आए हैं। अब कॉर्पोरेशन (PMC) ने इसके लिए पुलिस की मदद माँगी है। भुवनेश्वर में 74 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है क्योंकि उनके फोन नंबर्स यूके वाले थे और वो अब स्विच ऑफ हैं। पुणे में कई लोग सड़क मार्ग से मुंबई से आए हैं।
इससे पहले खबर आई थी कि ब्रिटेन से हाल ही में तेलंगाना लौटे कम से कम 279 यात्रियों का पता नहीं चल पा रहा है। इसके अलावा 184 यात्रियों ने अपना फोन नंबर और पता गलत दर्ज कराया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएँ बढ़ गई हैं। 3 दिन पहले तक ब्रिटेन से आए 184 लोगों से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली थी, क्योंकि इन्होंने गलत फोन नंबर और एड्रेस दर्ज करवाए थे। इनके अलावा 92 यात्री पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक से हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाई थी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए एंटी लव जिहाद कानून का समर्थन करते हुए आज केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बयान दिया। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्वभाविक शादी होने में और जबरन धर्म परिवर्तन करवाने में बहुत फर्क होता है। उन्होंने इस बातचीत में स्पष्ट कहा कि वो शादी के लिए धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करते।
राजनाथ सिंह से जब पूछा गया कि इस कानून के कारण लड़कियाँ अपनी इच्छा से शादी नहीं कर पाएँगी तो उन्होंने जवाब में कहा, “हमारा पूछना हैं कि धर्मांतरण की जरूरत ही क्यों है। सामूहिक धर्मांतरण का प्रयास रुकना चाहिए। जहाँ तक मेरी जानकारी है, हो सकता है उसमें कोई कमी हो, लेकिन शायद मुस्लिम धर्म में कोई भी दूसरे धर्म में शादी कर सकता है। शादी करने के लिए कंवर्जन कराना मैं समझता हूँ कि इसे मैं व्यक्तिगत रूप से उचित नहीं मानता हूँ।”
In many cases, it has been seen that religious conversion is being done forcefully. There is a huge difference between natural marriage and forceful conversion for marriage. I think governments which made these laws, have considered all these things: Rajnath Singh, Defence Min https://t.co/csh3T7d8uX
आगे एंटी लव जिहाद कानून का समर्थन करते हुए वह कहते हैं, “कई बार देखा गया है कि जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है जबकि कई बार लालच देकर भी धर्मांतरण कराया जाता है। स्वभाविक विवाह और शादी के लिए जबरन धर्मांतरण में बड़ा फर्क है। मैं सोचता हूँ कि सरकार ने इन सब बातों को ध्यान में रखकर लव जिहाद कानून बनाया है।”
रक्षा मंत्री ने बातचीत के दौरान कहा, “मेरा विश्वास है कि एक सच्चा हिंदू कभी भी जाति, धर्म और संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा। हमारे धार्मिक ग्रंथ भी इसकी इजाजत नहीं देते। भारत इकलौता ऐसा देश है जिसने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया।”
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले योगी सरकार ने लव जिहाद को लेकर सख्त कानून बनाया था जिसके तहत ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के मामलों में दोषी पाए जाने पर जेल की सजा होने का प्रावधान था। सरकार के इस फैसले में लिखा था कि दूसरे धर्म में शादी करने के लिए संबंधित जिले के जिलाधिकारी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा।
इसके लिए शादी से पहले 2 माह की नोटिस देना होगा। बिना अनुमति लिए शादी करने या धर्म परिवर्तन करने पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा के साथ 10 हजार का जुर्माना भी देना पड़ेगा। इसके अलावा सामूहिक रूप से गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर जहाँ 10 साल तक सजा हो सकती है, वहीं 50 हजार तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
योगी सरकार के बाद मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने भी इस कानून की पृष्ठभूमि तैयार की। शिवराज सरकार ने साफ कहा है कि जबरन धर्मांतरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कानून के तहत आरोपितों को उनकी करतूत की सख्त सज़ा मिलेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहा कि हम गलत इरादों से धर्मांतरण नहीं होने देंगे।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत के मुखर रवैये से अब किसान आंदोलन के ‘प्रदर्शनकारियों’ को दिक्कत होने लगी है। यही कारण है कि उन्होंने कंगना की बातों से तंग आकर उनकी फिल्मों को ही बॉयकॉट करने की ठान ली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार किसानों ने फैसला किया है कि वह कंगना रनौत की फिल्म को पंजाब में रिलीज नहीं होने देंगे। इतना ही नहीं किसानों ने कंगना पर राजनीति करने का आरोप लगाया है और कहा कि वह पब्लिसिटी के लिए ये सब कर रही हैं।
एक पब्लिकेशन को दिए इंटरव्यू में किसानों ने कंगना के बारे में कहा, “कगंना का वैसे कोई कसूर नहीं है, जिसमें जितनी अक्ल होगी वो उतनी ही बात करेगा। खुद को प्रमोट करने के लिए आदमी ऐसा कर देता है, जैसे कंगना जी ने किया है।”
बता दें कि कंगना रनौत इन दिनों किसान आंदोलन पर खुल कर अपनी राय रख रही हैं। हाल में वह किसान आंदोलन समर्थक दिलजीत दोसांझ के साथ हुई बहस के कारण चर्चा में थीं। इससे पहले उन्होंने शाहीन बाग की दादी बिलकिस बानो पर भी कमेंट किया था, जिसके कारण उन्हें घेरा जाना शुरू हो गया।
फिलहाल, इस समय कंगना रनौत भारी सुरक्षा के बीच मुंबई पहुँची हुई हैं और लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही हैं। मगर, पिछले दिनों ट्विटर पर नजर आए उनके मुखर रवैये के कारण उनसे कई लोग अपनी आपत्ति दर्ज कर रहे हैं। अब इनमें किसान भी शामिल हो गए हैं।
इससे पहले वह एक वीडियो जारी करके अपना पक्ष रख चुकी हैं। जिसमें उन्होंने पूछा था कि आखिर सामान्य लोग कैसे भ्रम में फँस जाते हैं और किसी की भी बात मान लेते हैं। उन्होंने प्रियंका चोपड़ा, हिमांशी खुराना समेत कई लोगों को आड़े हाथों लिया था।
कंगना से पहले पंजाब के विभिन्न हिस्सों में रिलायंस जियो के लगभग 1300 टावरों को निशाना बनाकर नुकसान पहुँचाया गया। किसी का जेनेरेटर चुरा लिया तो किसी की बिजली सप्लाई बंद कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित किसानों ने ऐसा करके अंबानी नहीं, कनाडा की कंपनी को लगाया चूना क्योंकि कुछ महीने पहले ही रिलायंस समूह के मालिक मुकेश अंबानी ने एक कनाडाई कंपनी ‘ब्रुकफील्ड’ (Brookfield) को टावर बिजनेस बेच दिए थे।
याद दिला दें इसी साल उनके बेबाक बोल के कारण महाराष्ट्र सरकार ने उन पर कई कार्रवाई करवाई थी। उनका कार्यालय तक तोड़ दिया गया था। लेकिन हाल में इस सिलसिले में महाराष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने BMC के कमिश्नर इकबाल सिंह चहल को समन भेजा।
कंगना से संबंधित मामले में कमिश्नर चहल को 20 जनवरी से पहले आयोग के सामने हाजिरी देने के निर्देश दिए गए और यह बताने को कहा गया कि उन्होंने बांद्रा पाली हिल एरिया में बनी कंगना की प्रॉपर्टी को नष्ट करने का निर्णय क्यों लिया।
मध्य प्रदेश के दमोह में सोमवार (दिसंबर 28, 2020) की रात दर्जनों लोगों ने मिल कर दलित अजय मुड़ा नामक शिक्षक की हत्या कर दी। हत्या का आरोप मुस्लिम समाज के लोगों पर लगा है, जो दर्जनों की संख्या में थे। हमले में मृतक का भांजा सुजीत भी घायल हो गए। उनका इलाज जबलपुर के अस्पताल में चल रहा है। स्थानीय हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस हमले का आरोप कसाई समुदाय के स्थानीय मुस्लिमों पर लगाया है।
ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में जानने के लिए स्थानीय युवक से बात की, जिन्होंने बताया कि वो खुद लोकल स्तर पर पत्रकारिता करते हैं और इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया भी इस घटना को उस तरह से नहीं दिखा रहा है, जिससे सच्चाई सामने आए। ये घटना चैनपुर क्षेत्र में सोमवार को रात 9 बजे के आस-पास हुई। उन्होंने कहा कि वहाँ 4-5 लोग ही थे, जिन पर हमला किया गया।
उन्होंने हमें बताया, “हमला करने वालों की पूरी भीड़ थी। ये एक मॉब लिंचिंग है। ये कसाई समुदाय का इलाका है। मृतक अजय गोरक्षक भी थे। हालाँकि, वो इतने सक्रिय नहीं थे लेकिन गोरक्षा अभियान से जुड़े थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये हमला एकदम सुनियोजित ढंग से किया गया। चाकुओं से गोद कर निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। भाँजे को बचाने के लिए मामा आगे आ गए थे।” इस घटना को लेकर हिन्दू संगठनों में भी आक्रोश है।
मृतक अजय मुड़ा सिलैया में मिडिल स्कूल में बतौर शिक्षक पदस्थापित थे। हिन्दू संगठनों से जुड़े कई कार्यकर्ताओं ने पीड़ित के घर पहुँच कर न्याय की माँग की और सिद्धार्थ मलैया सहित भाजपा नेताओं ने भी घंटाघर पर शव रखने की माँग की, जिसे पुलिस ने अस्वीकृत कर दिया। एम्बुलेंस से शव अस्पताल चौराहा पहुँचा, जहाँ स्थानीय लोगों ने धरना दिया। मृतक के मामा द्वारिका मुड़ा की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है।
मध्य प्रदेश की इस घटना पर हमारे स्थानीय संपर्क ने ऑपइंडिया को बताया कि यहाँ के पूरे हिन्दू संगठन आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति दंगा भड़कने तक पहुँच सकती थी। उनके अनुसार प्रशासन ने मीडिया को भी रिपोर्टिंग से रोक दिया। उन्होंने बताया, “मीडिया भी यहाँ उतनी सक्रिय नहीं है। डर से वो ज्यादा कुछ लिख भी नहीं सकते। उन्होंने संभल कर ही शब्द चुने हैं।” बताया गया है कि हमलवार दो खेप में आए थे।
उज्जैन, भीकनगांव, धामनोद, इंदौर, दमोह मे मुस्लिम उपद्रवियों द्वारा पत्थरबाजी और मारपीट की घटना एक बहुत बडे खतरे की और इशारा करती है, शिवराज सरकार से निवेदन है स्तथि कि गंभीरता को समझते हुए पुलिस प्रशासन को और मुस्तेद करने की जरूरत है। pic.twitter.com/1pwR7vVvlz
पुलिस ने रियाज कसाई, शमीम कसाई, मटरू कसाई, कय्यूम कसाई और बाबा कसाई सहित कई आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो हथियारों के साथ वहाँ पहुँचे थे। भाजपा नेता सिद्धार्थ मलैया ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी FIR में आरोपितों के रूप में विजय और रवि अहिरवार का नाम लिखा है, जो मौके पर उपस्थित ही नहीं थे। एसपी हेमंत चौहान ने आश्वासन दिया है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी, साथ ही विवेचना से उनका नाम हटा दिया जाएगा, जो इस घटना में शामिल नहीं थे।
एसपी ने कहा कि कसाई मंडी क्षेत्र में रात भर पुलिस ने दबिश दी है और तलाशी अभियान चलाया है। उन्होंने बताया कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। कोतवाली के टीआर एचआर पांडेय ने बताया कि पुलिस ने 6 नामजद सहित कई अज्ञात के खिलाफ धारा 307, 302, 323, 147, 148 और 149 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने 7 आरोपितों की गिरफ़्तारी की बात कही है।
दमोह में शिक्षक अजय मुड़ा की हत्या पर पुलिस
हमने इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए दमोह कोतवाली थाने के टीआई एचआर पांडेय से संपर्क किया, जिन्होंने कहा कि न तो ये घटना सुनियोजित है और न ही इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल है। उन्होंने सिद्धार्थ मलैया के पुलिस पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि कुछ लोग इसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद का रंग देना चाहते हैं, जबकि गोरक्षा का गोहत्या से इस पूरी घटना का कुछ भी लेनादेना नहीं है।
पांडेय ने ऑपइंडिया से कहा, “रियाज कुरैशी और विजय अहिरवार बाजार से आ रहे थे। रात का समय था। इस दौरान वो अजय मुड़ा के घर के सामने पेशाब करने लगे। वहाँ कोई महिला खड़ी रही होंगी, जिसे उन्होंने अँधेरे के कारण देखा नहीं। मुड़ा परिवार ने इससे आपत्ति जताई और हमें सूचना मिली है कि दोनों के साथ मारपीट भी की। इसके बाद रियाज़ और विजय भाग कर पास में ही कसाई मंडी में पहुँचे।”
एचआर पांडेय ने आगे बताया कि इस घटना की सूचना दिए जाने के बाद इन दोनों के भी परिजन वहाँ पहुँच गए और उन्होंने भी मारपीट शुरू कर दी। इधर से भी मारपीट हुई। उन्होंने बताया, “दोनों तरफ से मारपीट हुई। अब एक पक्ष कसाई था तो उनके पास चाकू सहित इस तरह के अन्य हथियार भी थे। चाकू लगने से खून ज्यादा बहने लगा और इसी कारण मौत हो गई। ये अचानक हुई घटना है। पुराना कोई विवाद नहीं था। “