Home Blog Page 4179

शाहीनबाग के शूटर और पूर्व AAP नेता कपिल गुर्जर को BJP ने दिखाया बाहर का रास्ता

शाहीन बाग़ में गोली चलाने वाले पूर्व AAP नेता कपिल गुर्जर के भाजपा ज्वाइन करने की खबरों को लेकर लिबरल्स और विपक्षी दल सोशल मीडिया पर माहौल बना ही रहे थे कि कुछ ही देर बाद एक अन्य खबर में खुलासा हुआ कि भाजपा ने कपिल गुर्जर को पार्टी से निकाल दिया है और उसे पार्टी में जोड़ने के खिलाफ है।

भाजपा की ओर से इस खबर के सम्बन्ध में आधिकारिक बयान भी शेयर कर दिया गया है। जिसमें लिखा है कि कपिल गुर्जर को पार्टी निकाल दिया गया है। वह बसपा से भाजपा में शामिल होने आए कुछ लोगों में से एक था और उन सभी को पार्टी ने लेने से इनकार कर दिया है।

‘टाइम्स नाउ’ ने बताया कि भाजपा ने कपिल गुर्जर को पार्टी में लेने से इनकार कर दिया है। पार्टी द्वारा बुधवार (दिसंबर 30, 2020) यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब तमाम विरोधी दल कपिल गुर्जर को लेकर भाजपा को घेरने का प्रयास कर रहे थे।

गौरतलब है कि कपिल गुर्जर इस साल की शुरुआत में तब चर्चा में आया था जब दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध प्रदर्शन के दौरान कपिल गुर्जर ने फायरिंग कर दी थी।

आज शाम ही यह चर्चा सामने आई कि कपिल गुर्जर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं और गाजियाबाद के भाजपा अधिकारियों द्वारा पार्टी में उनका स्वागत किया गया।

शाहीन बाग़ से चर्चा में आया था AAP नेता कपिल गुर्जर

दरअसल 1 फरवरी, 2020 को कपिल गुर्जर नाम के एक व्यक्ति ने शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के करीब पहुँचकर तीन हवाई फायर किए थे। इसके बाद वहाँ तैनात पुलिस कर्मियों ने आरोपित को तत्काल हिरासत में ले लिया था। पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद आरोपित ने कहा था कि हमारे देश में केवल हिंदुओं की चलेगी और किसी की नहीं। इस घटना पर शीघ्र ही प्रतिक्रिया देते हुए आप नेता संजय सिंह ने केन्द्र की बीजेपी सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया था।

अब इसके बाद खुलासे में साफ़ हो गया था कि कपिल गुर्जर कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है बल्कि आम आदमी पार्टी का ही एक नेता है और शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन की साजिश के पीछे आम आदमी पार्टी की ही एक महत्वपूर्ण भूमिका भी नजर आ रही है।

दरअसल, इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच को जाँच के दौरान कपिल गुर्जर के मोबाइल फोन से कुछ तस्वीरें मिलीं। जिनको दिल्ली पुलिस ने साझा किया। इन तस्वीरों में कपिल गुर्जर को आप नेता आतिशी और संजय सिंह के साथ देखा गया। वहीं, तस्वीरों में आप नेता आतिशी, संजय सिंह और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया कपिल गुर्जर और उनके पिता का स्वागत करते नजर आए। कपिल ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया था कि उसने और उसके पिता ने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पिछले वर्ष 2019 के शुरुआत में ही आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे।

वामपंथी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए किसानों को सिख धर्म और गुरु गोविंद सिंह के नाम पर उकसाया: मीडिया रिपोर्ट

समाचार चैनल ‘इंडिया टीवी’ पर प्रसारित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों का विरोध एक स्वत: आंदोलन नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ वामपंथी संगठनों द्वारा सावधानीपूर्वक रची गई साजिश है

अपने प्राइम टाइम शो ‘आज की बात’ में वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने वामपंथी झुकाव वाले संगठनों द्वारा किए गए उन अपराधी मानसिकताओं और विस्तृत योजनाओं से अवगत कराया, जिसमें उन्होंने किसानों को मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए उकसाया था।

शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के विरोधी राजनीतिक दल किसानों को गुमराह करने के लिए झूठ और दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि तीन नए कृषि कानून उनके हितों के खिलाफ हैं। शर्मा ने पंजाब के विभिन्न शहरों में कई किसानों से बात की, जिन्होंने मौजूदा शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में वामपंथी संगठनों के शामिल होने की बात कबूल की।

शर्मा ने कहा कि वामपंथियों द्वारा भोले-भाले किसानों को केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचाने के लिए ढेर सारी चालें और तरकीबें अपनाई गई। मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश उत्पन्न करने के लिए पंजाब के दूर-दराज गाँव में हुई मौत की फोटो लगाकर अफवाह फैलाई जा रही है कि किसान विरोध प्रदर्शन करते हुए शहीद हो गए। यह भी झूठ फैलाया जा रहा है कि किसान मर रहे हैं और सरकार तमाशा देख रही है।

शर्मा ने कहा, “किसानों को सिख धर्म का हवाला दिया जा रहा है। कृषि कानूनों के विरोध के लिए गुरु गोविंद सिंह के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेफ्ट पार्टियों के लोग लगातार मुहिम चला रहे हैं और जो लोग इस तरह की बातों का विरोध करते हैं, उन्हें कौम का दुश्मन बताकर उनके सामाजिक बहिष्कार की अपील की जाती है। और ये सब हो रहा है किसान आंदोलन के नाम पर। ये सब हरकतें वे लोग कर रहे हैं जो खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी बता रहे हैं।”

किसानों को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए सिख धर्म और गुरु गोविंद सिंह का नाम लेकर की गई अपील

उन्होंने कहा कि किसानों ने उन्हें बताया कि ये आंदोलन 1-2 दिन या हफ्ते का नहीं है, बल्कि पंजाब के गाँव में वामपंथी दलों के लोग पिछले पाँच महीनों से आंदोलन की हवा बना रहे थे। किसानों को भड़का रहे थे। पंजाब में वामपंथी दलों के लोग कृषि कानूनों का इस्तेमाल अपनी खोई राजनीतिक जमीन को वापस लाने के लिए कर रहे हैं। नए कानूनों के बारे में डराने-धमकाने का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किसानों को यह विश्वास दिलाने के लिए किया गया था कि सरकार उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेगी।

संगरूर के एक किसान विजेंद्र सिंह ने बताया कि किस तरह से वामपंथी संगठन विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए अपने गाँवों में किसानों को बेवकूफ बनाया। उन्होंने कहा कि जब लोगों ने नए कृषि बिलों के बारे में फैलाए गए झूठ को नहीं माना तो वामपंथियों ने सिख धर्म और गुरु गोविंद सिंह का हवाला देकर उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल करने की कोशिश की। 

किसानों ने ही किया उकसाने वाले वामपंथी प्रोपेगेंडा को उजागर

किसान विजेंद्र सिंह ने कहा-

“मालवा बेल्ट किसानों के किसान संघ इस क्षेत्र में बहुत बोलबाला रखते हैं और इन सभी का वामपंथी संगठनों से मजबूत संबंध है। शुरू में जब तीन कृषि विधेयकों को पारित किया गया था, तब इन संगठनों ने गाँवों में प्रचार करना शुरू कर दिया था कि मोदी सरकार ने ‘काले कानून’ लागू किए हैं और ये कानून हमारे खेत की उपज को नष्ट कर देंगे और हमारी जमीनें कॉरपोरेट्स को दे देंगे। हालाँकि उन लोगों ने जब कानून को ध्यान से देखा तो पाया कि हंगामा ज्यादा मचाया जा रहा है, वैसा कुछ है नहीं। इसके बाद वामपंथी दलों ने सिख और गुरु गोविंद सिंह का नाम लेना शुरू किया।”

सिंह आगे कहते हैं, “उन्होंने महसूस किया कि लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं हो रहे थे, तो वामपंथी संगठनों ने विरोध प्रदर्शनों को सिख गौरव से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह कहते हुए लोगों को उकसाया कि गुरु गोविंद सिंह ने मुगलों से जमीनें छीन लीं। हम मुगलों से नहीं डरे तो यह मोदी क्या चीज है। हम मोदी की गर्दन पर घुटना रखकर गुदा मार देंगे। इसको हम छोड़ेंगे नहीं। वामपंथियों ने इस तरह से लोगों को भड़काना शुरू कर दिया।”

विजेंद्र सिंह ने बताया कि वामपंथी नेताओं ने किसान आंदोलन के नाम पर पैसा भी लिया। प्रति एकड़ 200 रुपए के हिसाब से पैसा इकट्ठा किया गया। इसी पैसे का अस्तेमाल दिल्ली में आंदोलन खड़ा करने के लिए किया गया। उन्होंने कहा, “हमारे गाँव में जो कॉमरेड लीडर है, उसने प्रति एकड़ के हिसाब से 200-200 रुपए इकट्ठा करवाए और लाखों का चंदा लेकर वे दिल्ली गए हैं। इधर गाँव में ढाई रुपए की एक खाली बोतल उसने ली है और उसमें पानी भर भर कर 20-20 रुपए की बोतलें दिखा दीं। इस तरह से गाँव को भी चूना लगा रहे हैं। ज्यादातर लेफ्ट का कैडर वहाँ बैठा है।”

सिंह कहते हैं, “मैं ये नहीं कहता कि वहाँ किसान नहीं बैठे हैं, किसान भी बैठे हैं, लेकिन ज्यादातर ऐसे किसान बैठे हैं, जिन्हें गाँव से यह कहकर लेकर गए कि चलो इज्जत का सवाल है। हौंद (जमीर) का सवाल मतलब अपनी इज्जत का सवाल आ गया। हौंद के आगे कुछ भी नहीं। हमारी पगड़ी, हमारी मान-मर्यादा का सवाल है। इस तरह से सिख धर्म का तड़का लगाकर लोगों को वहाँ इकट्ठा किया गया है।”

गाँव में पैदा हुए ‘भारत रत्न’ और जीत का रिकॉर्ड बनाने वाले नेता… इंजिनियर से जो बना हीरो… 2020 में छोड़ गए यह दुनिया

2020 कई मामलों में क्रूर था। देश और दुनिया के बहुत से लोगों ने इस साल दुनिया को अलविदा कहा। इस साल की करवट में बहुत से नाम मिट गए, चाहे राजनेता हों या गायक और अभिनेता, कई बड़े नाम 2020 में इस दुनिया से चले गए। हर व्यक्ति का जाना खुद में कष्टदायी था लेकिन कई नाम ऐसे भी थे, जिनके जाने की शायद ही किसी ने कल्पना की होगी, पर यह 2020 था! महामारी के बाद शायद ये दूसरी सबसे बड़ी वजह होगी 2020 को चाहते हुए भी नहीं भूल पाने की। आखिर कौन कल्पना करता है कि उसका पसंदीदा फ़नकार या नेता दुनिया छोड़ सकता है।

धर्मपाल गुलाटी 

मसाला कंपनी ‘महाशय दी हट्टी’ (एमडीएच) के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन भी 2020 में ही हुआ। धर्मपाल गुलाटी पहले कोरोना संक्रमित हो गए थे लेकिन वो उससे उबर चुके थे। इसके बाद हार्ट अटैक से उनका निधन 3 दिसंबर 2020 को सुबह 5:38 पर हुआ था। उन्हें व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। मसालों के इतने बड़े व्यापार को स्थापित करने वाले धर्मपाल गुलाटी सिर्फ चौथी तक पढ़े थे। 

पाँचवीं में फेल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। देश के विभाजन के बाद 27 सितम्बर 1947 को इनका परिवार भारत आकर दिल्ली में रहने लगा। दिल्‍ली आकर इन्‍होंने न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से कुतुब रोड और करोल बाग से बड़ा हिन्दू राव तक तांगा चलाने का काम किया। तांगा चलाने वाले धर्मपाल गुलाटी ने कुछ पैसे बचा कर मसालों का काम करोल बाग से शुरू किया। 1953 में इन्होंने एक दूसरी दुकान चांदनी चौक में ली। और 1959 में इन्‍होंने दिल्‍ली के कीर्ति नगर में मसालों की एक फैक्‍ट्री लगा दी। इसके बाद MDH ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 

पंडित जसराज

2020 में ही शास्त्रीय संगीत के ‘रसराज’ पंडित जसराज का निधन हुआ। लोकप्रिय भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित जसराज का निधन अगस्त 17, 2020 को अमेरिका के न्यूजर्सी में कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ था। वह इस साल जनवरी में 90 साल के हो गए थे। पद्म विभूषण पंडित जसराज पिछले कुछ समय से अपने परिवार के साथ अमेरिका में ही थे। उन्होंने कोरोना वायरस के बीच जारी लॉकडाउन के कारण अमेरिका में ही रुकने का फैसला लिया था। लगभग 80 वर्षों के संगीतमय करियर के दौरान, पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के शीर्ष पर रहे और पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों का प्राप्त किया था। उन्होंने शास्त्रीय गायकों की एक पीढ़ी का प्रतिनिधित्व किया था।

प्रणब मुखर्जी 

लंबे समय से अस्वस्थ्य चल रहे भारत के पूर्व राष्ट्र्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन भी 2020 में ही हुआ। इसके पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत गंभीर बनी हुई थी और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। वह भारत के 13वें राष्ट्रपति थे और 26 जनवरी 2019 को उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ सम्मान ‘भारत रत्न’ से सुशोभित किया गया था। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के छोटे से गाँव में जन्मे प्रणब मुखर्जी भले काफी समय तक कॉन्ग्रेस से जुड़े थे लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सभी राजनीतिक दलों के चहेते थे। उनका राजनीतिक जीवन काफ़ी लंबा था, यूपीए सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री बनने से लेकर एनडीए सरकार में राष्ट्रपति बनने तक, प्रणब मुखर्जी हर मौके पर देश के लिए खड़े नज़र आए। 

जसवंत सिंह 

भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वयोवृद्ध नेता रहे जसवंत सिंह का निधन सितम्बर 27, 2020 की सुबह हुआ था। भाजपा नेता जसवंत सिंह ने वाजपेयी सरकार में रक्षा, वित्त और विदेश जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला था। जसवंत सिंह भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके थे। उन्होंने 60 की दशक के अंत में ही राजनीति में कदम रखा था लेकिन जनसंघ में आने के बाद उन्हें सफलता मिलनी शुरू हुई और 1980 में वो राज्यसभा सांसद के रूप में संसद पहुँचे। केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने कई आर्थिक सुधारों को गति दी। वहीं विदेश मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारत-पाकिस्तान के तनाव का काल था, जिससे वो बखूबी निपटे।   

रामविलास पासवान 

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन 8 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में हुआ। चुनावों से पहले ही किसी पार्टी की लहर को पहचान लेने वाले व ‘मौसमी विज्ञानी’ कहे जाने वाले राम विलास पासवान सर्वप्रथम 1969 में विधायक चुने गए थे। वह केंद्र की मोदी सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे। उनका निधन 74 वर्ष की आयु में हुआ था। रामविलास पासवान का जन्म बिहार के खगड़िया जिले के शाहरबन्नी गाँव में हुआ था। 

उनकी पहली पत्नी राजकुमारी से उन्हें उषा और आशा नाम की दो बेटियाँ हैं। रामविलास पासवान 32 सालों में 11 चुनाव लड़ चुके थे। उनमें से 9 जीत भी चुके हैं। उन्हें 6 प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अनुभव था। रामविलास पासवान के सियासी अनुभव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार से पहले ही सियासत में आ गए थे। 1977 के लोकसभा चुनाव में हाजीपुर से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े पासवान ने चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद 2014 तक वे आठ बार आम चुनावों में जीते थे।   

अहमद पटेल 

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का निधन 25 नवंबर 2020 को 71 साल की उम्र में हुआ। अहमद पटेल सोनिया गाँधी के सबसे करीबी सलाहकारों में शामिल थे। उनकी गिनती पार्टी के दिग्गज नेताओं में होती थी। वह राज्यसभा सांसद और पार्टी के कोषाध्यक्ष भी थे। हालाँकि वह कई विवादों से भी घिरे रहे। अहमद पटेल के बेटे फ़ैसल पटेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किया था। ED संदेसरा बंधुओं के साथ फ़ैसल पटेल के संबंधों की भी जाँच कर रही है। 

3600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे घोटाले में आरोपित राजीव सक्सेना ने पूछताछ में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल और सलमान खुर्शीद तथा कमलनाथ के पुत्र बकुल नाथ के नाम लिए थे।

मोतीलाल वोरा 

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का 93 साल की उम्र में दिल्ली में निधन हुआ। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, वोरा छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य थे। उन्होंने 2018 तक 16 वर्षों के लिए अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष के रूप में भी काम किया था। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा फेरबदल के बाद यह पद एक अन्य वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को सौंप दिया गया था।

1995 के यूपी के कुख्यात गेस्ट हाउस कांड के समय मोतीलाल वोरा ही गवर्नर थे। मोतीलाल वोरा नेशनल हेराल्ड मामले में भी सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, ऑस्कर फर्नाडीज, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडिया कंपनी के साथ आरोपित थे। मोतीलाल वोरा AJL के मैनेजिंग डायरेक्‍टर थे। इस कंपनी पर गाँधी परिवार का दखल है। यही AJL ही नेशनल हेराल्‍ड अखबार को चलाता है। 

इरफ़ान खान 

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता इरफान खान ने भी 2020 में ही दुनिया को अलविदा कहा। इरफान मतलब फिल्मों की दुनिया का ऐसा नाम, जिससे शायद ही कोई नफरत करता हो। इरफ़ान उन चुनिंदा कलाकारों में एक थे, जिन्होंने बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी उतना ही प्यार और सम्मान कमाया। बॉलीवुड में पान सिंह तोमर, अंग्रेजी मीडियम, मकबूल, हासिल, हिन्दी मीडियम, रोग जैसी फिल्में की तो हॉलीवुड में स्लमडॉग मिलियेनर, लाइफ ऑफ़ पाई और द अमेज़िंग स्पाइडरमैन जैसी की। ज्ञात हो कि इरफान खान न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर से जंग लड़ रहे थे। इसी कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

ऋषि कपूर 

इरफ़ान खान की मृत्यु के कुछ ही दिन बाद बॉलीवुड के मशहूर दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का भी निधन हो गया। अमेरिका के कैंसर अस्पताल में ऋषि कपूर ने 11 महीने और 11 दिन गुजारे थे यानी उन्होंने लगभग 2 साल तक कैंसर से जंग लड़ी। 67 साल के ऋषि कपूर पिछले साल सितंबर में ही न्यूयॉर्क से कैंसर का इलाज करवाने के बाद भारत लौटे थे। ऋषि कपूर को 2018 में कैंसर का पता चला था। जिसके बाद वो इलाज के लिए न्यूयॉर्क चले गए। वह एक अभिनेता के अलावा निर्माता और निर्देशक भी थे। ‘मेरा नाम जोकर’ से लेकर ‘दो दूनी चार’ तक लगभग चार दर्शक के फ़िल्मी करियर में उन्होंने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। 

सुशांत सिंह राजपूत 

2020 में दुनिया को अलविदा कहने वाला एक और फ़िल्मी सितारा, जिसने कथित तौर पर अपने फ़्लैट में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। धारावाहिकों में काम करने के बाद सिने जगत में क़दम रखने वाले सुशांत का अकादमिक करियर भी अच्छा रहा था। उन्होंने AIEEE में काफ़ी अच्छी रैंक हासिल की थी। सुशांत सिंह राजपूत ने सबसे पहले ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाम के धारावाहिक में काम किया था पर वो एकता कपूर के धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ से लोकप्रिय बने। तत्पश्चात उन्होंने फिल्मों का सफर शुरू किया था। सुशांत फिल्म ‘काय पो छे’ में मुख्य अभिनेता के रूप में दिखे थे। उस फिल्म में उनके अभिनय की तारीफ भी हुई थी। हाल ही में उन्होंने ‘सोनचिड़िया’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में काम किया था, जिसे समीक्षकों ने सराहा था। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद भी एक फिल्म आई थी – ‘दिल बेचारा’ जिसे IMDB पर सबसे ज़्यादा रेटिंग मिली थी।  

ममता सरकार के 2 अध्यादेश पर राज्यपाल ने नहीं किए हस्ताक्षर, TMC सांसद अब कर रहे जगदीप धनखड़ को पद से हटाने की माँग

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शुखेंदु शेखर रे ने प्रदेश राज्यपाल को तत्काल पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति कोविंद को ज्ञापन भेजा है। इनका आरोप है कि राज्यपाल प्रदेश में संविधान की रक्षा और उसे बचाने में असफल रहे।

समाचार एजेंसी एएनआई ने शुखेंदु शेखर के हवाले से बताया, “हम ये कहते हैं कि राज्यपाल संविधान के संरक्षण, सुरक्षा और बचाव में विफल रहे हैं, और बार-बार सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून का उल्लंघन किया है।”

टीएमसी सांसद शुखेंदु शेखर रे के अलावा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय, सासंद डेरेक ओ ब्रेन, सांसद कल्याण बनर्जी और सांसद ककोली घोष दस्तीदार ने भी इस ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर किए हैं। इन सबने बंगाल राज्यपाल को हटाने की माँग की है।

गौरतलब है कि हाल में जगदीप धनखड़ ने जनसत्ता से बात करते हुए बताया था कि राज्य की ममता सरकार विधानसभा सत्र के चालू रहते अध्यादेश के जरिए अपने फैसले लागू करवाना चाहती हैं। उन्होंने 27 दिसंबर को दिए अपने साक्षात्कार में कहा कि कुछ दिन पहले राज्य सरकार की ओर से उनके पास दो अध्यादेश दस्तख्त के लिए भेजे गए। लेकिन उन्होंने फाइलें लौटा दीं और पूछा कि क्या विधानसभा सत्र की समाप्ति हो चुकी है?

उन्होंने इस इंटरव्यू में यह भी बताया था कि वह राज्य सरकार को चेता रहे हैं और स्थिति ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसमें सफलता भी मिल रही है। लेकिन कुछ अधिकारी अभी भी दबाव में ही काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी कोई भी गतिविधि संविधान के दायरे से बाहर जा रही हो तो उन्हें इस संबंध में बताया जाए।

श्रीनगर: एनकाउंटर में मारे गए 3 आतंकी, 26 जनवरी पर किसी बड़े हमले की थी साजिश

जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों की तैनाती से आतंकवादी एक बार फिर बड़ी घटना को अंजाम देने में नाकाम हो गए। 16 घंटे चली इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया। पड़ताल में पता चला कि गणतंत्र दिवस से पहले आतंकी जम्मू कश्मीर में किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे। 

जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी किलो फोर्स) एचएस साही ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को श्रीनगर मुठभेड़ खत्म होने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए ये बात कही। उन्होंने कहा कि ये आतंकी किस संगठन से हैं और इनकी पहचान क्या है, पुलिस इसका पता लगा रही है और जल्द ही इनकी पहचान बता दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों से उन्हें पिछले कई दिनों से सूचनाएँ मिल रही थीं कि आतंकवादी श्रीनगर-बारामुला हाईवे पर हमले की ताक में बैठे हैं। इतना ही नहीं, कई आतंकियों को हाईवे के साथ सटे इलाकों में भी देखा गया था। बस इसी सूचना के बाद से ही सुरक्षाबलों ने अपने तंत्रों को सक्रिय कर दिया था।

कल ही सुरक्षाबलों को पता चला कि 2 से 3 आतंकवादी श्रीनगर बारामुला हाईवे पर स्थित एचएमटी क्षेत्र के लवेपोरा इलाके में नूरा अस्पताल के सामने वाले घर में हैं। जीओसी कहते हैं कि उन्हें जानकारी की जैसे ही पुष्टि हुई, सेना की 2 आरआर बटालियन, पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त दल मौके पर पहुँची और सभी आतंकियों से आत्मसमर्पण के लिए कहा।

जब जवाब में आतंकियों ने अंधाधुंध गोली दागी, तब अंधेरे के कारण ऑपरेशन को रोक दिया गया, लेकिन घेराबंदी कम नहीं हुई। सुबह के उजाले में मुठभेड़ दोबारा शुरू हुई और करीब 11:30 बजे तीनों आतंकी मार गिराए गए। तीनों के शव को कब्जे में ले लिए गए हैं।

उन्होंने मुठभेड़ का हवाला देकर कहा कि जिस प्रकार आतंकी सुरक्षाबल पर हमला कर रहे थे, उसे देख पता चलता है कि वह किसी बड़े हमले की योजना तैयार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आतंकी हाईवे के पास ठिकाना इसलिए चुनते हैं ताकि हमले को अंजाम देकर वह भीड़भाड़ वाले इलाके से फरार हो जाएँ।

जीओसी साही ने बताया, “26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) आ रही है। आतंकी इस बीच बड़े हमले की योजना बना अपनी उपस्थिति जाहिर करना चाहते हैं लेकिन हम सतर्क हैं। उनकी सभी योजनाओं को विफल कर देंगे। मारे गए आतंकवादियों के पास से एक एके-47 राइफल, दो पिस्तौल और कुछ हथगोले बरामद किए गए हैं।”

बता दें कि इसके अलावा प्रदेश की पुलिस और सेना ने मेंढर सब डिवीजन में बालाकोट सेक्टर के डब्बी गाँव में एलओसी पर झाड़ियों में रखे 2 पिस्टल, 70 कारतूस और 2 ग्रेनेड बरामद किए हैं। हथियार और गोला-बारूद पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर रखे गए थे।

‘सुशांत सिंह राजपूत मामले में अभी तक किसी भी पहलु को नकारा नहीं गया, हर एंगल से चल रही है जाँच’: CBI

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच अभी भी CBI कर रही है, लेकिन फैंस का इंतजार अब जवाब देने लगा है। इस सम्बन्ध में राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने पत्र लिखा था, जिसका जवाब अब CBI ने दिया है। इसमें कहा गया है कि अभी तक हर एंगल से जाँच चल रही है और संस्था ने किसी भी पहलु को नकारा नहीं है। जाँच एजेंसी ने बताया कि वो पूरे प्रोफेशनल तरीके से वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लेते हुए जाँच में आगे बढ़ रही है।

ये जवाब ऐसे समय में आया है, जब मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) को दिल्ली में CBI मुख्यालय के सामने सुशांत सिंह राजपूत के समर्थकों ने न्याय की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही सोशल मीडिया पर भी ‘हल्ला बोल फॉर SSR’ नामक ट्रेंड चलाया गया। महाराष्ट्र ने गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी CBI से पूछा है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या थी या हत्या? उन्होंने कहा कि जाँच हाथ में लिए एजेंसी को 6 महीने हो गए हैं, ऐसे में अब रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।

CBI ने कहा कि इस मामले में जुलाई 25, 2020 को पटना के राजीव नगर थाने में केके सिंह की शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद बिहार सरकार की सिफारिश के बाद इस मामले की सीबीआई जाँच के लिए एजेंसी को सौंपी गई। एजेंसी ने बताया कि परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार घटनास्थल का दौरा किया और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की देखरेख में घटनास्थल का निरीक्षण हुआ।

जाँच एजेंसी ने बताया, “फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कूपर हॉस्पिटल का भी दौरा किया और किया और जाना कि पोस्टमॉर्टम के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया था। पीड़ित परिजनों और अन्य सूत्रों ने जो भी आपत्ति दर्ज कराई, उस पर जाँच की गई। सभी सम्बंधित गवाहों से पूछताछ हुई। सेल टॉवर लोकेशन और डिजिटल उपकरणों के डेटा की जाँच के लिए लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। जाँच टीम अलीगढ़, फरीदाबाद, हैदराबाद, मुंबई, मानेसर (गुरुग्राम) और पटना – हर सम्बंधित जगह गई।”

इसी महीने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग एंगल सामने आने के बाद केस की जाँच में जुटी एनसीबी ने लंबे समय से फरार चल रहे ड्रग तस्कर रीगल महाकाल को गिरफ्तार कर लिया है था, जिसे इस केस में एनसीबी की सबसे बड़ी कार्रवाई माना गया था। रीगल अपने साथी व रिया और शौविक को ड्रग पहुँचाने वाले अनुज केशवाणी के साथ दूसरे लोगों को ड्रग सप्लाई किया करता था। अब तक एनसीबी ने 20 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ की है।

‘जिस जगह है गरीब की झोपड़ी, वो जमीन होगी उसके नाम’: CM योगी ने किया 21562 आवासों के लाभाथियों के खाते में पहली किस्त ट्रांसफर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) को अधिकारियों से कहा कि जिस जमीन पर किसी गरीब की झोपड़ी है, वह उसके नाम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी जमीन रिजर्व श्रेणी की नहीं है। उसे लेकर कोई विवाद नहीं है तो झोपड़ी की जमीन संबंधित व्यक्ति के नाम करने के लिए स्वामित्व योजना के तहत अभियान चलाएँ

कुछ जिलों की तरह जरूरत के अनुसार गरीबों के आवास क्लस्टर में भी बनाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने यहाँ अपने आवास पर मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत 21562 आवासों के लाभाथियों के खाते में पहली किस्त के रूप में 87 करोड़ रुपए का हस्तातंरण किया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के हर लाभार्थी को शासन की सभी योजनाओं (शौचालय, रसोईगैस, बिजली, आयुष्मान भारत, जीवन ज्योति और जीवन सुरक्षा आदि) से संतृप्त करने के लिए अभियान चलाएँ।

इन लाभार्थियों को वहाँ की जरूरत के अनुसार, स्वरोजगार के किसी कार्यक्रम (बकरी एवं मुर्गी पालन, डेयरी आदि) से जोड़ें। इस बाबत उनको जरूरी प्रशिक्षण दें और बैंकर्स से जोड़ कर जरूरी पूँजी उपलब्ध कराकर उनको स्वरोजगार के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि घर के लिए मिले पैसे का उपयोग घर के लिए ही हो स्थानीय प्रशासन इसे सुनिश्चित कराए। गरीबों को मकान बनाने के लिए ईंट, बालू, मिट्टी, छड़ आदि वाजिब दाम पर और आसानी से मिलें यह भी सुनिश्चित कराएँ। इनकी आपूर्ति करने वालों से संपर्क करें। मकान के कार्य की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा करें। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएँ।

मुख्यमंत्री ने अलग-अलग जिलों के लाभार्थियों से बात की

सीएम योगी ने कहा कि गोशालाओं से चिन्हित कर पालने की शर्त के साथ एक स्वस्थ्य गाय दें। सरकार ऐसे गायों को पालने के लिए प्रति माह जो 900 रुपए देती है, वह उसके खाते में दें। मनरेगा के तहत गायों के रहने के लिए छाजन भी बनाए जा सकते हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अलग-अलग जिलों के लाभार्थियों से बात की। नाम, पता, पति का काम, कितने बच्चे हैं आदि जैसे सवाल पूछे।

इस दौरान उन्होंने यह भी पूछा कि शासन की किन-किन योजनाओं का लाभ मिला है। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया कि इन सबको अभियान चलाकर शासन की सभी योजनाओं का लाभ दिलवाएँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिले पैसे से घर बनाना है। बच्चों को नियमित स्कूल भेजें और उनको खूब पढ़ाएँ।

जिन लाभार्थियों से मुख्यमंत्री ने बात की, उनमें अयोध्या की प्रेमा, आजमगढ़ की सोनी, कुशीनगर की संगीता, जौनपुर की आशा, गोरखपुर के अक्षयबर, रायबरेली की अंशु, सोनभद्र की के बरई, वाराणसी की मीरा, प्रतापगढ़ के त्रिवेनी और मीरजापुर की मुनरी देवी शामिल रहीं।

फाइजर की वैक्सीन लेने वाले नर्स को छः दिन बाद हो गया कोरोना!

फाइजर की कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के एक सप्ताह से अधिक समय बाद कैलिफोर्निया में 45 वर्षीय नर्स कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। मैथ्यू डब्ल्यू नाम का यह नर्स, जो दो अलग-अलग स्थानीय अस्पतालों में काम करती हैं, ने 18 दिसंबर को एक फेसबुक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने फाइजर वैक्सीन (Pfizer vaccine) ली है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण के एक दिन बाद तक उन्हें अपने हाथ में समस्या आई लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई और नुकसान नहीं हुआ।

रिपोर्ट्स के अनुसार, टीकाकरण के 06 दिन बाद, क्रिसमस के पहले, वह एक COVID -19 यूनिट की शिफ्ट में काम करने के बाद बीमार हो गए। उन्होंने बताया कि उन्हें ठंड लगी और बाद में माँसपेशियों में दर्द और थकान का एहसास हुआ।

बताया जा रहा है कि वह क्रिसमस के एक दिन बाद अस्पताल में अपना परीक्षण करवाने गए, और उन्हें अपने कोरोना संक्रमित होने का पता चला। सैन डिएगो के पारिवारिक स्वास्थ्य केंद्रों के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिश्चियन रेमर्स ने ‘एबीसी न्यूज’ को बताया कि उन्हें ऐसी सम्भावना की भी उम्मीद थी। उनके अनुसार, “हमें लगता है कि पहली खुराक आपको लगभग 50% इम्यूनिटी देती है, और आपको 95% तक सुरक्षा पाने के लिए दूसरी खुराक की आवश्यकता होती है।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर तमाम देश आशान्वित हैं और सभी देश अपने नागरिकों तक इसे पहुँचाने की तैयारियाँ भी कर रहे हैं। इसी बीच यूरोप के कई देशों में कोरोना वायरस के नए और तुलनात्मक रूप से कहीं अधिक संक्रामक बताए जा स्ट्रेन के पाए जाने की बात सामने आई हैं। यह वायरस का वही प्रकार है, जिसकी पहचान सर्वप्रथम ब्रिटेन में हुई थी।

ब्रिटेन के बाद, स्पेन, स्वीडन और स्विटज़रलैंड ने भी कहा है कि ब्रिटेन की यात्रा से लौटकर आए उसके नागरिकों में कोरोना वायरस के इस नए प्रकार के संक्रमण की पुष्टि हुई है।

भारत में भी कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के संक्रमण के मामले सामने आए हैं। शुरुआत में यह संख्या 06 थी, जो अब बढ़कर 20 हो चुकी है। हालाँकि, एक सकारात्मक बात जो सामने आ रही है वह ये कि देश में कोरोना वायरस के आँकड़े कम होते नज़र आ रहे हैं।

‘आधा लेह चीन ले, मोदी की माँ-बहन हो जाएगी’ और ‘अनुराग कश्यप ने सोफे पर धकेल पैंट खोल कर…’ – 2020 में ऑपइंडिया टॉप 10

वर्ष 2020 जाने वाला है और इसी के साथ ऑपइंडिया हिन्दी के भी 2 साल पूरे हो रहे हैं। इस साल राजनीति और समाज से ले कर न्यायपालिका और मीडिया से जुड़ी कई ऐसी खबरें थीं, जिन्हें पाठकों ने खूब पढ़ा और पसंद किया। अभिनेता सुशांत सिंह सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए ड्रग्स एंगल से लेकर लिबरल मीडिया गिरोह द्वारा हिंदुओं को नीचा दिखाने, फिल्ममेकर अनुराग कश्यप पर लगे रेप के आरोप और मोहम्मद रफी द्वारा 5 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी जैसी खबरें इस साल सबसे ज्यादा पढ़ी गईं।

हम आपके लिए उन खबरों को संक्षिप्त तरीके से दोबारा रख रहे हैं: 

1. बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

इस खबर में प्रमुख बात ये थी कि चीन के बैंकों ने लंदन हाईकोर्ट में लोन की रिकवरी के लिए अनिल अंबानी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जहाँ अनिल अंबानी सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उद्योगपति अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया कि लोन चुकाने और क़ानूनी लड़ाइयाँ लड़ने के लिए उन्हें अपने सारे गहने बेचने पड़े हैं। इससे उन्हें 10 करोड़ रुपए मिले। फिलहाल उनका खर्च पत्नी टीना अम्बानी और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा वहन किया जा रहा है। ये मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशंस को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

लंदन की अदालत में अनिल अंबानी से 3 घंटे सवाल-जवाब (फाइल फोटो)

चूँकि अनिल अंबानी कोर्ट के आदेश के बावजूद इस ऋण को चुकता करने में असमर्थ रहे हैं लिहाजा उन्हें उनकी 1 लाख डॉलर की संपत्ति का ब्यौरा और पिछले 2 वर्षों के दौरान किए गए बैंक व क्रेडिट कार्ड लेनदेन के डिटेल्स सौंपने को कहा गया।

2. ‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को मुंबई के बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। सुशांत की मौत के मामले में सीबीआई, ईडी और एनसीबी जैसी एजेंसियाँ जाँच कर रही। वहीं, इस केस में बड़ा खुलासा हुआ था कि सुशांत ने मौत से पाँच दिन पहले यानी 9 जून को अपनी बहन मीतू को फोन कर अपने डर को लेकर बात की थी। एक्टर की बातों से लगा कि उनकी जान खतरे में है। सुशांत ने कहा था, “मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे।”

सुशांत को यह चिंता तब हुई, जब रिया चक्रवर्ती 8 जून को उनका घर छोड़ कर और लैपटॉप, कैमरा, हार्ड ड्राइव जैसी चीजें अपने साथ लेकर चली गईं थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत सिंह राजपूत ने मौत से 5 दिन पहले अपनी बहन मीतू सिंह को 9 जून को एसओएस (SOS) किया।

3. ड्रग तस्कर की गिरफ्तारी पर किया हुआ रिया का 10 साल पुराना ट्वीट बन गया उनका वर्तमान: जानिए क्या थी वह ‘भविष्यवाणी’

इस साल बिहार के रहने वाले बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मृत्यु ने देश को झकझोर कर रख दिया। वहीं मामले की जाँच के दौरान बॉलीवुड के ड्रग्स रॉकेट का भी भंडाफोड़ हुआ। इसमें सुशांत की प्रेमिका रह चुकी रिया चक्रवर्ती का भी नाम सामने आया और वह गिरफ्तार भी हुईं। उनकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद, रिया का पुराना ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने हैरान जताई थी कि क्या उन्होंने पहले से अपने भविष्य की भविष्यवाणी की थी।

दरअसल, 2009 में रिया चक्रवर्ती ने एक ऐसी भारतीय लड़की की कहानी को ट्विटर पर शेयर किया था, जिसे नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए साढ़े चार साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। रिया ने इसके जरिए ये बताने की कोशिश की कि कैसे उन्हें इस कहानी ने प्रभावित किया।

4. ‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप के ख़िलाफ अभिनेत्री पायल घोष ने साल 2013 की एक घटना पर एफआईआर दर्ज करवाई। मुंबई वर्सोवा थाने में दिए अपने बयान में उन्होंने बताया है कि अनुराग से उनकी मीटिंग उस साल 3 बार हुई थी। अभिनेत्री के अनुसार, तीसरी मुलाकात अनुराग के घर पर हुई थी। जहाँ मशहूर निर्देशक ने उन्हें सोफे पर धक्का दिया और अपनी पैंट खोल कर जबरदस्ती करने लगे। इस दौरान उन्होंने चिल्लाने की कोशिश की मगर अनुराग ने उनका मुँह दबाकर उनका रेप किया।

अनुराग कश्यप
अनुराग कश्यप

5. मैथिली ठाकुर के गाने से समस्या तो होनी ही थी... बिहार का नाम हो, ये हमसे कैसे बर्दाश्त होगा?

मैथिली ठाकुर के गाने से समस्या तो होनी ही थी… बिहार का नाम हो, ये हमसे कैसे बर्दाश्त होगा? बेहतरीन गाना गाने के लिए मशहूर बिहार की मैथिली ठाकुर को सभी जानते हैं। हाल ही में बिहार चुनाव के दौरान एक गाने को लेकर वह विवादों में घिर गई थीं। उम्र में छोटी हैं! और तो और, गिरोहों की सदस्यता भी नहीं ले रखी थी! ऐसे कैसे अपना राजनैतिक मत प्रकट कर सकती है? अरे कम से कम सुगर फ्री पीढ़ियों से सर्टिफिकेट तो लिया होता! इसलिए मैथिली ठाकुर के गाने पर विवाद तो होना ही था। आश्चर्य की बात यह है कि यही विवाद तब नहीं छिड़ा था जब जनकवियों के लिखे गीतों को यूट्यूब पर रिलीज करने पर लोग उसके खिलाफ बोल पड़े थे। तब इन्हीं सूरमाओं को याद नहीं आया थी कि लोकगीतों को, कविताओं को कोई अपनी बपौती नहीं बता सकता। लेकिन फिर सही भी है, याद आती भी कैसे?

6. असलम ने किया रेप, अखबार ने उसे ‘तांत्रिक’ लिखा, भगवा कपड़ों वाला चित्र लगाया

भाषा के जरिए मीडिया अक्सर समुदाय विशेष के अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश करता रहता है। कई ऐसे मामले हैं, जब आरोपित ‘मुस्लिमों’ की न केवल पहचान छिपाई गई, बल्कि इस चक्कर में हिंदुओं को बदनाम करने के लिए कई युक्तियाँ प्रयोग में लाई गईं। बिलासपुर में एक महिला अपने पति के दूर जाने व पारिवारिक समस्याओं के चलते परेशान थी। उसे कहीं से एक मुस्लिम आलिम असलम फैजी के बारे में सूचना मिली। वह उसके पास मदद के लिए पहुँच गई। आलिम ने महिला की समस्या को दूर करने के बहाने उसे डरा-धमकाकर शारीरिक संबंध बनाया।

पुलिस गिरफ्त में असलम और उसकी पहचान छिपाने की कोशिश करती मीडिया रिपोर्टिंग

कुछ दिन बाद जब महिला के पास न उसका पति लौटा और न ही उसकी परेशानियाँ समाप्त हुईं, तो उसे एहसास हुआ कि असलम फैजी ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया है। इसके बाद महिला ने फौरन पुलिस में जाकर असलम फैजी की शिकायत की। अब चूँकि पूरा मामला समुदाय विशेष के अपराध से संबंधित था, तो जरूरी है कि खबर को कवर करते समय दोनों बातों का ख्याल रखा जाए। मगर, नई दुनिया समेत कई मीडिया पोर्ट्ल्स ने इस खबर को प्रकाशित किया और हेडलाइन में मुस्लिम आलिम की जगह ‘तांत्रिक’ शब्द का प्रयोग किया। साथ ही जादू-टोना करने वाले मौलवी की जगह एक पुजारी का स्केच लगा दिया।

7. लेह का आधा हिस्सा चीन लेना चाहिए, फिर दिल्ली में मोदी की माँ-बहन हो जाएगी…: कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन का ऑडियो वायरल, कारगिल से गिरफ्तार

इस साल गलवान में भारतीय सैनिकों के बलिदान और चीन का महिमामंडन करते हुए कई कॉन्ग्रेसी नेताओं के बयान सामने आए थे। लेकिन, लद्दाख के कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन ने तो सारी मर्यादाएँ ​लाँघ दी थी। जाकिर LAHDC कारगिल में कॉन्ग्रेस का पार्षद है। उनकी एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी। इसमें वह भारतीय सैनिकों को नीचा दिखाते हुए चीनी फौजियों का महिमामंडन कर रहे थे।

कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन
कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन का ऑडियो वायरल

दरअसल, जाकिर अपने दोस्त को बता रहा ​था कि चीन के सैनिक लद्दाख में 135 किलोमीटर तक घुस गए हैं और भारतीय सैनिकों को मार-मार कर खदेड़ दिया। उसने आगे कहा, “पेगांग लेक को चीन यदि अपने कब्जे में ले लेता है तो भारत के पास बचता क्या है। चीन आने वाले दिनों में लद्दाख के कई टुकड़े करेगा।” जाकिर का दोस्त इस बातचीत में जब कहता है कि अगर उसने कुछ पैसे जमा किए हुए हैं, तो वह उसके पास आ जाए, वह उसे मकान दिला देगा। जिस पर जाकिर उसे आश्वस्त करता है कि आगे कुछ होने वाला नहीं है। वह कहता है, “सब ठीक हो जाएगा। बस लेह का आधा हिस्सा चाइना लेना चाहिए। फिर पता है क्या होगा… दिल्ली में मोदी की माँ-बहन हो जाएगी… लद्दाख यूटी के फिर हजार टुकड़े हो जाएँगे।”

8. 5 साल की बच्ची का बेहोश होने तक रेप किया, जब मर गई तो फेंक दिया: मोहम्मद रफी गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की पुलिस ने नवंबर 16, 2019 को 5 वर्षीय एक बच्ची के साथ यौन शोषण और उसकी हत्या के मामले में 25 वर्षीय एक लॉरी क्लीनर को गिरफ्तार किया था। आरोपित की पहचान मोहम्मद रफी के रूप में की गई। मृतक बच्ची के माता-पिता द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया और जाँच शुरू किया।

बता दें कि पाँच साल की मृतक बच्ची 7 नवंबर को अपने माता-पिता के साथ अंगल्लू गाँव के एक निजी समारोह हॉल में एक शादी में भाग लेने गई थी। जहाँ रहस्यमय परिस्थितियों में वो लापता हो गई और अगले दिन 8 नवंबर को सुबह समारोह हॉल के पीछे मृत पाई गई थी। पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया था।

9. केजरीवाल की खुली पोल: बिजली-पानी काट बॉर्डर पर छोड़ा, UP सरकार की बसें बनी सहारा

मुफ्त बिजली और पानी का सपना दिखाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने वाली अरविंद केजरीवाल सरकार की संवेदनहीनता और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही की पोल कोरोना वायरस संक्रमण से पैदा हुए संकट ने खोल दी थी। 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली और नजदीकी इलाकों से लोग उत्तर प्रदेश और अपने गृह राज्य की तरफ पैदल निकलने लगे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार ने बयान जारी कर बताया था कि दिल्ली सरकार ने इन लोगों के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए। लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन-दूध नहीं मिला, जिस कारण भूखे लोग सड़कों पर उतरे। यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी।

योगी-केजरीवाल
संकट के समय केजरीवाल सरकार ने मुॅंह फेरा, योगी बने सहारा

इसके बाद बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बॉर्डर तक पहुँचाकर छोड़ दिया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात भर जाग कर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, हापुड़ आदि इलाकों में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर इन लोगों को गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था कराई। रात में ही मजदूरों और बच्चों के लिए भोजन का इंतज़ाम कराया गया।

10. आजतक की पत्रकार को चैनल के विरोध चलते करना पड़ा शर्मिंदगी का सामना: लोगों ने लाइव TV पर लगाए ‘मुर्दाबाद’ के नारे

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत के ऑफिस को महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर BMC द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। उसी दौरान आजतक की पत्रकार मौसमी सिंह को चैनल की करतूतों के चलते काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। आजतक की रिपोर्टर मौसमी कंगना रनौत के ध्वस्त किए जा रहे ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रही महिलाओं को कवर कर रही थी, उसी दौरान रिपोर्टिंग करते वक्त मौसमी जैसी ही बीएमसी के खिलाफ महिला प्रदर्शनकारियों से सवाल पूछने गई, महिलाएँ उनके चेहरे पर ही “आज तक मुर्दाबाद” के नारे लगाने शुरू कर दिए।

आजतक की पत्रकार को चैनल के विरोध चलते करना पड़ा शर्मिंदगी का सामना

आजतक की कवरेज के दौरान पत्रकार द्वारा झेली गई यह एकमात्र शर्मिंदगी नहीं थी। कंगना के ऑफिस को ध्वस्त करने आए जेसीबी मशीन के संचालक ने भी उनके एक सीधे से प्रश्न का ऐसा उत्तर दिया, जिसके बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। कहाँ वो जेसीबी पर चढ़ कर अनोखी पत्रकारिता का प्रदर्शन करने वालीं थी और कहाँ लोग उनके मिम्स बना कर सोशल मीडिया पर फैलाने लगे। दरअसल, जैसे ही मौसमी सिंह ने ड्राइवर से बातचीत करने के लिए जेसीबी पर चढ़कर ऑपरेटर का नाम पूछा, तो ड्राइवर ने सीधे उनसे पूछा कि उन्हें उसका नाम जानने में दिलचस्पी क्यों है। उन्होंने पूछा, “ड्राइवर साब आपका क्या नाम है।” जिस पर ड्राइवर ने जवाब दिया, “क्या करोगे मेरा नाम जान के।”

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस को दीमक की तरह चाट रही है शरद पवार की पार्टी और शिवसेना: पार्टी नेता ने सोनिया गाँधी को लिखा पत्र

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर से तेज़ हो गई है। जहाँ शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के माध्यम से कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके आलाकमान पर निशाना साधा, वहीं दूसरी तरफ अब एक कॉन्ग्रेस नेता ने ही दावा किया है कि भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दल के खिलाफ शिवसेना और NCP साजिश कर रहे हैं। मुंबई कॉन्ग्रेस के महासचिव विश्वबंधु राय ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे पत्र में ये आरोप लगाया है।

उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार में कॉन्ग्रेस को लगातार दरकिनार किया जा रहा है। मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम के करीबी माने जाने वाले नेता ने लिखा कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को अब जब 1 वर्ष पूरे हो गए हैं, ऐसा लगता है कि जहाँ शिवसेना और NCP सरकार को चला रही है और कॉन्ग्रेस बस उनकी साथी है। उन्होंने लिखा कि कॉन्ग्रेस के कोटे के मंत्रियों को संगठन को जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं दिया जा रहा है।

विश्वबंधु ने लिखा, “पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को तो पता तक नहीं है कि हमारे मंत्रियों के पास कौन से विभाग हैं। हमारे बाकी दोनों गठबंधन साथी एक साजिश के तहत रणनीति बना कर कार्य कर रहे हैं और अपने-अपने दलों को मजबूत कर रहे हैं। हम ऐसा करने में विफल रहे हैं।” उन्होंने लिखा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने 2019 के चुनावों में कई वादे किए थे, उस हिसाब से अब काम ही नहीं हो रहा है। उन्होंने पार्टी से निकल रहे नेताओं को रोकने के लिए भी एक मजबूत स्ट्रेटेजी की जरूरत पर बल दिया।

कॉन्ग्रेस नेता ने सोनिया गाँधी को लिखा कि वो शिवसेना और NCP को गठबंधन धर्म का पालन करने को कहें। उन्होंने कहा कि शरद पवार की पार्टी तो दीमक की तरह कॉन्ग्रेस को कमजोर करने पर तुली हुई है। इस पत्र से जहाँ राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ने की उम्मीद है, वहीं ये भी देखने वाली बात है कि बाकी दोनों दल क्या प्रतिक्रिया देते हैं। साथ ही कॉन्ग्रेस आलाकमान के रुख पर भी सबकी नजर होगी।

उन्होंने लिखा, “महाराष्ट्र सरकार के 1 वर्ष पूरा करने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रदेश में कई विभाग, मंडल और आयोग के पद खाली हैं। एक भी नियुक्ति नहीं की गई है। एक साल में हमारे सारे वादे धरे के धरे रह गए हैं। शिवसेना-NCP को गठबंधन धर्म पर हिदायत देना जरूरी है। हमारे वोट बैंक को हमारे सहयोगी और विरोधी, दोनों ही ओर के राजनीतिक दल खींच रहे हैं। हमारी पार्टी सरकार में मात्र एक सहयोगी दल बन कर रह गई है।”

विश्वबंधु राय का सोनिया गाँधी को पत्र

हाल ही में संजय राउत की पत्नी से पूछताछ के संबंध में ईडी ने तीसरा समन जारी किया था। इससे पूर्व भी वो दो दफा स्वास्थ्य आधार पर जाँच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुईं थीं। इस मामले को लेकर उनके पति व शिवसेना नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था, बीजेपी महाराष्ट्र सरकार को गिराने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रही है। अब पेशी के लिए वर्षा राउत ने केंद्रीय जाँच एजेंसी से 5 जनवरी तक का समय माँगा है।