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14 साल की लड़की से शादीशुदा शाहरुख ने किया रेप, जेल गया… बेल पर आया तो फिर से उसी के साथ किया बलात्कार

मध्य प्रदेश के सीहोर से रेप का एक मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस की लापरवाही के कारण भाजपा नेताओं को न्याय के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोपित शाहरुख़ खान ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर के रेप किया। पीड़िता की उम्र मात्र 14 साल है। पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया। आरोपित जेल भी गया। लेकिन वो जैसे ही जमानत से बाहर आया, उसे दोबारा से फिर उसी दरिंदगी को अंजाम दिया।

आरोप है कि बेल पर छूटे शाहरुख़ खान ने दोबारा पीड़िता का अपहरण कर के उसे फिर से अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपित की उम्र 22 वर्ष है। उसने अक्टूबर 11, 2020 को 14 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर के उसके साथ रेप किया था। आरोप है कि पुलिस ने मामला दर्ज कर के शाहरुख़ खान को गिरफ्तार तो किया, लेकिन उसके खिलाफ ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) के तहत केस नहीं दर्ज किया।

‘जनसत्ता’ की खबर के अनुसार, इस वजह से अदालत से वो जमानत पाने में कामयाब रहा। इसके बाद 2020 में साल के अंतिम दिन उसने फिर से पीड़िता का अपहरण किया और उसके साथ वही हरकत की, जिस कारण वो जेल जा चुका था। उसने नाबालिग को धमकाया भी कि अगर उसने किसी को कुछ बताने की कोशिश की तो उसे और उसके परिवार को बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। इसके बाद पीड़िता ने अपनी माँ को सारी बातें कह सुनाई।

इसके बाद पीड़िता ने इसकी शिकायत बाल कल्याण समिति में की। चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति के दबाव के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। आरोपित फ़िलहाल फरार चल रहा है। बाल कल्याण समिति ने सीहोर के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर जवाब माँगा है कि आखिर नाबालिग पीड़िता के साथ रेप की घटना होने के बावजूद आरोपित के खिलाफ पाॅक्साे एक्ट के तहत मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया था?

पीड़िता और उसके परिजनों को भी बाल कल्याण समिति ने राजधानी भोपाल में एक सुरक्षित जगह पर रखा गया है। ‘द क्राइम इन्फो’ की खबर के अनुसार, पीड़िता और उसके परिवार की भाजपा नेताओं ने मदद की, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। पीड़िता सीहोर में चाय की दुकान चलाती है। आरोपित शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। एसएसपी समीर यादव ने कहा कि मामला दर्ज किया गया है और कार्रवाई जारी है।

दिसंबर 2020 में ही मध्य प्रदेश के ही उज्जैन से ‘लव जिहाद’ और रेप की घटना सामने आई थी। एक युवक ने नाम बदल कर तलाकशुदा महिला को फाँसा और 2 वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। उसने छद्म हिन्दू नाम के साथ दोस्ती की और फिर उसके साथ संबंध बनाए। युवक का असली नाम वसीम अकरम था, लेकिन उसने विकास नाम के साथ महिला को धोखा दिया। उसके ड्राइविंग लाइसेंस से उसका असली राज खुला।

रईस खान की बेटी से था धर्मेंद्र को प्यार, मार कर बिजली के तार से जलाया… ‘परफेक्ट साजिश’ के बाद भी हत्यारा धराया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक युवक की रहस्मयी मौत का खुलासा करते हुए पुलिस ने रईस खान नाम के स्थानीय को गिरफ्तार किया है। रईस पर आरोप है कि उसने अपनी बेटी से मेलजोल रखने वाले हिंदू युवक धर्मेंद्र को पहले मारा और उसके बाद हाई टेंशन वायर से झुलसाया ताकि यह सुनिश्चित हो कि उसे देख कर लगे कि मौत आकाशीय बिजली गिरने के कारण हुई।

पूरा मामला 29 अगस्त 2020 का था। भोपाल पुलिस को गूंगा इलाके में 26 साल के धर्मेंद्र की मोटरसाइकल के साथ उसकी झुलसी लाश बरामद हुई थी। पोस्टमॉर्टम हुआ तो रिपोर्ट में भी सामने आया कि मौत करंट लगने से हुई है। लेकिन, पुलिस के सामने इस वाकये में संदेह पैदा करने वाले दो बिंदु थे।

पहला ये अगर बाइक चलाते हुए आकाशीय बिजली गिरने के कारण मौत यदि हुई तो आखिर धर्मेंद्र की मुट्ठी बंद कैसे हो सकती है। बाइक चलाते हुए तो ऐसा संभव नहीं था। दूसरा यह कि धर्मेंद्र शहर के दूसरे कोने में स्थित शाहपुरा के एक शॉपिंग माल में काम करता था, तो वो मौत वाले दिन गूंगा इलाके में क्या कर रहा था।

पुलिस इन दो बिंदुओं के कारण धर्मेंद्र की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद भी चुप नहीं बैठी और जाँच चालू रही। एक दिन पुलिस को मालूम हुआ कि गूंगा इलाके में रहने वाली एक लड़की से धर्मेंद्र की बातचीत थी। इसके बाद पुलिस ने जाँच करते हुए रईस खान को अपने शक के घेरे में लिया और अंत में उसी के पास से वह हाई टेंशन वायर बरामद हुई, जिससे करंट लेकर धर्मेंद्र को सुनियोजित ढंग से मारा गया।

दरअसल, रईस खान को मालूम था कि धर्मेंद्र और उसकी लड़की के बीच प्रेम संबंध थे, जिसे लेकर वह आपत्ति जता चुका था। उसे यह भी पता था कि वो दोनों किस जगह पर मिलते थे। उसने इसी का फायदा उठा कर धर्मेंद्र के ख़िलाफ़ साजिश रची और ऐसे दिन व जगह का चयन किया ताकि पूरी वारदात एक प्राकृतिक दुर्घटना लगे।

पुलिस ने इस केस में जाँच के बाद बताया कि धर्मेंद्र का रईस खान की बेटी से प्रेम संबंध था, जो रईस खान को पसंद नहीं था। 29 अगस्त को धर्मेंद्र जब लड़की से मिलने के बाद लौट रहा था तो रईस खान ने पहले उसके सिर पर पत्थर मारा और फिर उसे क्षेत्र से गुजर रही हाई टेंशन लाइन से बिजली के झटके दिए। धर्मेंद्र की मौत के बाद उसकी लाश को मेन रोड पर लाकर उसकी मोटरसाइकिल के पास फेंक दिया गया। ये सब ऐसे किया गया, जिससे लगे कि धर्मेंद्र की मौत आकाशीय बिजली के हादसे से हुई।

‘CISF में अधिकतर हिंदू… इसलिए ताजमहल में लहराने दिया भगवा’: आगरा की घटना पर पागल हुए इस्लामी कट्टरपंथी

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित मुगलकालीन स्मारक ताजमहल में कुछ लोगों ने भगवा झंडे लेकर वीडियो बना लिए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरवादियों का मानसिक संतुलन ही हिल सा गया लगता है। ताजमहल सहित कई पर्यटन स्थल कोरोना संक्रमण और उससे निपटने के लिए हुए लॉकडाउन के कारण महीनों बंद रहे थे, जिन्हें खोले जाने के बाद अब वहाँ पर्यटकों के पहुँचने का सिलसिला जारी है।

इसी बीच, 17वीं सदी के इस मुग़ल स्मारक में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कुछ युवा पहुँचे और परिसर में भगवा झंडे लहराते हुए तस्वीरें व वीडियो क्लिक करवाई। इनमें से 4 को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इसके बाद सोशल मीडिया में इस्लामी कट्टरवादियों ने वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाते हुए भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। इस अभियान का नेतृत्व किया प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ के जुबैर ने।

उसने कहा कि केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हाथों में ताजमहल की सुरक्षा सौंपी गई है और इसके सैकड़ों जवान तैनात हैं, जो विभिन्न शिफ्ट्स में काम करते हैं। उसने पूछा कि जब ये घटना हो रही थी तो ये सब कहाँ थे और क्या कर रहे थे? कुछ ने तो CISF के जवानों की देश के संविधान के प्रति निष्ठा पर भी सवाल खड़े कर दिए। आरिफ अयूब ने कहा कि भारतीय सेना, न्यायपालिका, पुलिस और मीडिया की तरह CISF के जवानों में भी अधिकतर महिला-पुरुष हिन्दू हैं।

उसने दावा किया कि अगर कोई कहता है कि इनकी निष्ठा देश के संविधान और उसके मूल्यों के प्रति है, तो वो खुला झूठ बोल रहा है। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी आपत्ति जताते हुए लिखा, “एक बार फिर क्या होता है? ‘एक बार फिर’ का सही इस्तेमाल… एक बार फिर भगवा गुंडों ने ग़ैर क़ानूनी ढंग से एक मुस्लिम राजा द्वारा बनाई गई इमारत में तोड़फोड़ की।” ‘भारत समाचार’ ने लिखा था, ‘आगरा: एक बार फिर ताजमहल पर लहराया भगवा।’, वो उसी का प्रत्युत्तर दे रही थीं।

ध्यान दीजिए कि ये वही लोग हैं, जो मंदिर में जबरन घुस कर कुछ मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं तो इसे सामुदायिक समरसता का प्रतीक बताते नहीं थकते हैं। वहीं जब किसी पर्यटन स्थल के परिसर में कुछ लोगों ने भगवा झंडे लेकर वीडियो बना लिया तो ये उससे नाराज हो जाते हैं। कुछ ने कहा कि ताजमहल को मुस्लिमों ने बनवाया है, इसीलिए वहाँ भगवा जायज नहीं। एक ने लिखा कि संघियों के घर में खाना तक ठीक से नहीं बनता और 100 साल में वो एक इमारत तक खड़ी नहीं कर सके।

नवंबर 2020 में जब कुछ मुस्लिमों ने मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़ी तो तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने तालियाँ पीटी थीं। नमाज पढ़ने वाले फैजल खान के बारे में पता चला था कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों का भी हिस्सा रहा था। तस्वीरों में फैजल खान को CAA विरोधी प्रदर्शनों को सम्बोधित करते हुए देखा जा सकता था। अयोध्या के बाद मथुरा के लिए जो लड़ाई शुरू हुई है, उसी कारण फैजल खान ने नंदबाबा मंदिर में जाकर नमाज पढ़ी।

नए संसद भवन के निर्माण का रास्ता साफ: सेन्ट्रल विस्टा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, मोदी सरकार की बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के सेंट्रल विस्टा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। साथ ही देश के सर्वोच्च न्यायालय ने ये भी कहा कि इसके लिए क्लियरेंस देने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। साथ ही पर्यावरण को लेकर जो क्लियरेंस दिया गया था, उसे भी बरकरार रखा गया है। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने बहुमत से फैसला सुनाया, जबकि जस्टिस संजीव खन्ना ‘सिडेंटिंग जजमेंट’ का हिस्सा बने।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इसके लिए हेरिटेज कंजर्वेशन कमिटी की अनुमति लेनी ज़रूरी है, इसीलिए सरकार को इस कमिटी की अनुमति लेनी चाहिए। 3 जजों के बेंच ने 2:1 से फैसला सुनाया। साथ ही DDA एक्ट के तहत जिन अधिकारों का उपयोग किया गया है, उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने न्यायसंगत और सही करार दिया। साथ ही पर्यावरण मंत्रालय से जो क्लियरेंस मिला, उसे भी नियमों के अनुरूप बताया।

बता दें कि दिसंबर 10, 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए संसद भवन का भूमि पूजन किया था, जिसे लगभग 971 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाना है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के बीच की जगह का पुनर्विकास शामिल है। हिन्दू रीति-रिवाज़ों के अंतर्गत भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। 

श्रृंगेरी के श्री शारदा पीठम से आए पुजारियों के समूह ने विधिवत पूजा की थी। इसके अलावा ऐतिहासिक आयोजन के मौके पर विभिन्न धर्म के गुरुओं ने ‘सर्व धर्म प्रार्थना’ की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी को शिलान्यास के आयोजन की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। हिन्दू रीति-रिवाज़ों से भूमि पूजन के लिए संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगतगुरु श्री भारती तीर्थ महास्वामी से इस संबंध में निवेदन किया था।

इजिप्ट के सरकारी अस्पताल के ICU में अचानक से सब मर गए: वीडियो वायरल, हो गया था ऑक्सीजन सप्लाई बंद

इजिप्ट के एक अस्पताल के ICU में अचानक से ऑक्सीजन सप्लाई ही ख़त्म हो गई, जिससे वहाँ भर्ती सारे मरीज मारे गए। अब वहाँ की सरकार ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। सार्वजनिक अस्पताल में रविवार (जनवरी 3, 2021) को हुई इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें नर्सों को मरीजों को जिंदा करने के लिए जूझते हुए देखा जा सकता है। कुल 4 मरीजों की मौत हुई।

ये सभी मरीज कोरोना संक्रमित थे। ये घटना इजिप्ट के अल-शरक़िया प्रान्त में हुई, जहाँ के गवर्नर ने इस बात से इनकार किया है कि ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से ICU में ये मौतें हुई हैं। एक मरीज के रिश्तेदार ने ये आरोप लगाया था, जिसे सरकार ने नकार दिया है। गवर्नर ममदूह घोरब ने कहा कि ये मरीज इसीलिए मरे, क्योंकि उन्हें कोरोना संक्रमण के अलावा क्रोनिक रोग भी हो गए थे। एक रिश्तेदार ने ही वीडियो बना कर वायरल किया था।

इजिप्ट 10 करोड़ की जनसंख्या के साथ अरब का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला मुल्क है, और अल-शरक़िया वहाँ का तीसरा सबसे बड़ा प्रान्त है। वहाँ कोरोना के मामले बढ़ने के कारण फिर से लॉकडाउन लगाया गया है। प्रोसिक्यूटर ऑफिस ने कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है। हॉस्पिटल के डायरेक्टर के साथ-साथ वहाँ के डॉक्टरों से भी पूछताछ जारी है। मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी गई है।

चार मृतकों में से 2 महिलाएँ थीं, जो 60 की उम्र पार कर चुकी थीं। दो पुरुष थे, जिनमें से एक 76 साल के बुजुर्ग थे तो एक की उम्र 44 साल थी। हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में फ़िलहाल 36 मरीजों का इलाज चल रहा है। इजिप्ट के स्वास्थ्य मंत्री हाला जायद का कहना है कि कोरोना का इलाज कर रहे सभी अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई है। इससे पहले नील डेल्टा के एक अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी से 2 मरीजों की मौत की खबर आई थी।

इजिप्ट में ‘China National Pharmaceutical Group (Sinopharm)’ द्वारा बनाई गई वैक्सीन के आपात प्रयोग की अनुमति दे दी गई है। दो सप्ताह के भीतर टीकाकरण अभियान शुरू होना है। इजिप्ट के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी, AstraZeneca, Pfizer और जर्मन पार्टनर BioNTech के वैक्सीन को मुल्क में लाने के लिए भी बातचीत जारी है। Pfizer/BioNTech के 2 करोड़ डोज और AstraZeneca के 3 करोड़ डोज पहुँच रहे हैं।

इधर भारत में भी दो वैक्सीन को अनुमति मिलने के बाद टीकाकरण अभियान के लिए तैयारी की जा रही है। हालाँकि, यहाँ वैक्सीन को लेकर विपक्ष राजनीति भी कर रहा है और तरह-तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं। इन सबके बीच भारत बॉयोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने सफाई भी दी है कि वैक्सीन पर सियासत हो रही है। कुछ लोग हमारी वैक्सीन के बारे में केवल गॉसिप कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

मर्सिडिज ने कर्मचारी को काम से निकाला, गुस्से में 69 नई गाड़ियों पर JCB चढ़ा कर लिया ‘बदला’

स्पेन के विटोरिया में मर्सिडिज की फैक्टरी है। 31 दिसंबर की रात को इस फैक्टरी में लगभग 44 करोड़ रुपए (6 मिलियन डॉलर का) की गाड़ियों को नुकसान हुआ। जिम्मेदार था अकेला एक पूर्व कर्मचारी।

38 साल के कर्मचारी को मर्सिडिज ने काम से निकाल दिया था। वो गुस्से में था। बदला लेना चाह रहा था। इसके लिए उसने एक कंस्ट्रक्शन साइट से कैटरपिलर बैकहो (Caterpillar Backhoe, एक तरह का JCB) चुराया। 21 किलोमीटर तक उसे चलाते हुए विटोरिया स्थित मर्सिडिज की फैक्टरी पहुँचा।

31 दिसंबर की रात थी, समय था करीब 1 बज कर कुछ मिनट। फैक्टरी का गेट बंद था। JCB से पहले उसने गेट को उखाड़ दिया। फिर वो फैक्टरी के पार्किंग लॉट (मतलब उसे यह सब पता था कि नई-नवेली गाड़ियाँ कहाँ रखी जाती हैं) की ओर बढ़ा। यहाँ उसे Mercedes EQV (V-Class) गाड़ियाँ दिखीं। एक-एक कर वो 69 गाड़ियों पर JCB चढ़ाता गया।

फैक्टरी में जो सुरक्षाकर्मी थे, उन्होंने वॉर्निंग शॉट दाग कर किसी तरह से 38 साल के पूर्व कर्मचारी को काबू में किया। इसके बाद उसे पुलिस को सौंप दिया गया।

पुलिस ने बताया कि आरोपित ने मर्सिडिज की फैक्टरी तक पहुँचने के लिए चुराई गई JCB से 21 किलोमीटर की दूरी तय की। लेकिन इस दौरान भी वो सड़क किनारे गाड़ियों को धक्के मार रहा था। आश्चर्यजनक यह कि उसका फोकस यहाँ भी मर्सिडिज ब्रांड की गाड़ियों को क्षति पहुँचाना ही था।

मर्सिडिज फैक्टरी के पार्किंग लॉट में गाड़ियों को नुकसान पहुँचाने के बाद वो असेंबली लाइन में घुस कर वहाँ ज्यादा तबाही मचाने वाला था। लेकिन एक कर्मचारी की मुस्तैदी से उसका यह प्लान फेल हो गया। फिलहाल स्थानीय पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

मार डाले गए 3 आतंकी, फेक एनकाउंटर के नाम पर परिवार कर रहा धरना-प्रदर्शन: वीडियो जारी कर पुलिस ने बताया सच

जम्मू कश्मीर में पहले आतंकियों के मारे जाने के बाद उनके जनाजे निकालने का चलन चल पड़ा था, जिसके बाद सरकार ने नए नियम बना कर आतंकियों के शवों को उनके गृह इलाकों से दूर दफनाने की प्रक्रिया चालू की, ताकि उन्हें हीरो न बनाया जा सके। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद ऐसा ही किया गया था। पुलवामा के एक आतंकी अतहर के मारे जाने के बाद भी उसके अब्बा मुस्ताक अहमद को वहाँ से दूर दफनाने को कहा गया। अब जम्मू कश्मीर पुलिस ने एनकाउंटर का वीडियो भी जारी कर दिया है।

मारे गए आतंकी का अब्बा लगातार सशस्त्र बलों पर फेक एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए कह रहा था कि उसके बेटे के मारे जाने के बाद अब वो भी मर चुका है, इसीलिए या तो उसे पुलवामा में उसके गाँव में ही बेटे को दफनाने की इजाजत मिले, नहीं तो उसे भी अपने बेटे के बगल में दफना दिया जाए। बुधवार (दिसंबर 30-31) की रात को अतहर सहित 3 आतंकियों को श्रीनगर में हुए एक मुठभेड़ में मार गिराया गया था।

भारतीय सेना को मिले इनपुट्स के आधार पर ये कार्रवाई की गई, जिसमें CRPF और पुलिस के जवान भी शामिल थे। सेना को सूचना मिली थी कि ये आतंकी किसी हमले की साजिश रच रहे थे। ये सभी कुख्यात आतंकियों की सूची में नहीं थे, लेकिन लगातार सक्रिय थे। उन्हें आत्मसमर्पण करने का भी मौका दिया गया, लेकिन वो लगातार फायरिंग करते रहे। अब तीनों ही आतंकियों की लाशों को एक साथ दफना दिया गया है।

उनमें से एक के रिश्तेदार जम्मू कश्मीर पुलिस में हैं। उनके परिवार दावा कर रहे हैं कि ये फेक एनकाउंटर है। पुलिस ने इस मामले में जाँच का आश्वासन दिया है। मृत आतंकियों में अजाज़ अहमद पुलवामा का है और एक हेड कॉन्स्टेबल का बेटा है। वो और अतहर एक-दूसरे को जानते थे। अजाज़ के अब्बा मोहम्मद मकबूल का कहना है कि वो सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा नहीं कर सकते। मारा गया तीसरा आतंकी जुबैर अहमद सोपियाँ का था।

अब जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस एनकाउंटर का वीडियो भी सोमवार को जारी कर दिया। इसमें पुलिस के जवान माइक पर अनाउंसमेंट करते हुए देखा जा सकते हैं। वो तीनों आतंकियों को लगातार आत्मसमर्पण करने के लिए कह रहे हैं। दूसरी तरफ से इसका कोई जवाब नहीं दिया जाता है। होकरसर में तीनों आतंकियों को घेर लिया गया था, जिसके बाद उन्हें आश्वस्त किया गया था कि अगर उन्होंने सरेंडर कर दिया तो कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा, लेकिन वो नहीं माने।

भारतीय सेना ने बताया है कि तीनों आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। सोमवार को इन आतंकियों के परिजन, रिश्तेदार और पड़ोसियों को लेकर श्रीनगर पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। अतहर के अब्बा मुस्ताक ने पूछा कि क्या भारत के लोग उसकी बात नहीं सुन रहे? उसने दावा किया कि उसका बेटा मात्र 16 साल का था और उसे अब न्याय चाहिए। उसने ये भी कहा कि उसकी भावनाओं को समझने वाला कोई नहीं है।

वहीं जुबैर का भाई भी पुलिस में कॉन्स्टेबल है। उसका नाम मोहम्मद शरीफ लोन है। उसने दावा किया कि उस दिन दोपहर 2 बजे तक उसका भाई घर में ही था, ऐसे में मात्र 2 घंटे के भीतर ही वो आतंकी कैसे बन गया? उसने दावा किया कि उसका भाई कंस्ट्रक्शन के बिजनेस में है। अब वीडियो जारी किए जाने के बाद परिजन कह रहे हैं कि उसमें अंदर से फायरिंग की आवाज़ नहीं आ रही है, इसीलिए ये भरोसे के लायक नहीं।

पुलिस ने जो 2 वीडियो जारी किए हैं, उनमें से एक दिसंबर 29 की शाम का है, जबकि एक उसके अगले दिन की सुबह का है। दोनों में ही पुलिस उन तीनों आतंकियों को चेतावनी देती ही दिख रही है, लेकिन उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। आतंकियों ने जिस घर को अपना अड्डा बनाया था, उसे चारों तरफ से घेर लिया गया था। इतनी देर तक चेताए जाने के बावजूद उन्होंने फायरिंग की, जिसके बाद उन्हें मार गिराया गया।

जानकारी देते चलें कि जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथियों द्वारा सेना और सुरक्षबलों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में साल 2016 से लेकर साल 2020 तक 90% की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2019 की तुलना में इस साल हुई पत्थरबाजी की घटनाओं में 87.13% की गिरावट हुई है। साल 2019 में, पत्थरबाजी की 1,999 घटनाएँ हुईं थीं, जिनमें से 1,193 बार यह पत्थरबाजी केंद्र सरकार द्वारा साल 2019 के अगस्त माह में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने की घोषणा के बाद हुईं।

सलमान खान के दोनों भाइयों व भतीजे के खिलाफ मुंबई में FIR: दुबई से लौट कर होना था क्वारंटाइन, चले गए घर

मुंबई में अभिनेता सलमान खान के दोनों छोटे भाइयों अरबाज खान और सोहैल खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन दोनों के अलावा सोहैल खान के बेटे निर्वाण खान के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई है। आरोप है कि इन तीनों ने कोरोना वायरस संक्रमण के आलोक में जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। बृहन्मुम्बई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने ये FIR दर्ज करवाई है। तीनों आरोपित हाल ही में दुबई से लौटे हैं।

FIR के अनुसार, अरबाज, निर्वाण और सोहैल खान दिसंबर 25, 2020 को दुबई से लौटे। इसके बाद उन्हें निर्देश दिया गया कि वो एक होटल में क्वारंटाइन हों। लेकिन, उन्होंने प्रशासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए इसे नहीं माना। तीनों सीधे अपने घर चले गए। नियम बनाया गया है कि UK और UAE से आने वाले सभी लोगों को अनिवार्य रूप से 7 दिन के लिए क्वारंटाइन में रहना है।

कोरोना वायरस के नए खतरनाक स्ट्रेन के सामने आने के बाद ये निर्देश जारी किए गए। चूँकि ये कोविड-19 संक्रमण से 70% ज्यादा खतरनाक है, इसीलिए भारत में यूके जैसी स्थिति न आने देने के लिए सरकार और प्रशासन पहले से ही सतर्क है। सोमवार (जनवरी 4, 2021) को महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने जानकारी दी है कि यूके से लौटने वाले 8 लोगों के नए स्ट्रेन से संक्रमित होने की सूचना मिली है।

मुंबई पुलिस के प्रवक्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ऑपरेशन) चैतन्य सिरीप्रोलु ने बताया कि इन तीनों के खिलाफ IPC की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो) और महामारी अधिनियम के धारा 3 (विहित प्रक्रिया का उल्लंघन करने) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इनमें से 5 मुंबई के हैं, जबकि ठाणे, मीरा भायंदर और पुणे के एक-एक हैं। इन आठों लोगों के सभी संपर्कों को ट्रेस कर के उन्हें क्वारंटाइन किए जाने की कोशिश जारी है। महाराष्ट्र के CMO ने कहा है कि विदेश से मुंबई आने वाले लोग राज्य से बाहर के एयरपोर्ट पर उतर रहे हैं और सड़क मार्ग से मुंबई आ रहे हैं, ताकि उन्हें क्वारंटाइन नहीं किया जा सके। पूरे देश में अब तक 38 लोगों के कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमित होने की सूचना है।

वहीं अब FIR दर्ज होने के बाद तीनों को मुम्बई के बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में क्वारंटाइन कर दिया गया है। बांद्रा के पाली हिल पर ही इन तीनों के घर हैं और ये होटल उनके घरों के एकदम करीब है। अरबाज, सोहैल और निर्वाण उसी इलाके में अलग-अलग घरों में रहते हैं। FIR दर्ज करवाने वाले BMC अधिकारी संजय फुंदे ने बताया कि तीनों को रात के 10 बजे ही क्वारंटाइन कर दिया गया। फ़िलहाल वो एक सप्ताह वहाँ रहेंगे, फिर आगे का निर्णय लिया जाएगा। सुशांत और जिया खान के मामले में भी सलमान खान का नाम विभिन्न कारणों से उछला था।

टिकटॉक पर ‘आतंक’ परोस फेमस हुआ फैजू OTT पर हो रहा लॉन्च: ट्रेलर की पब्लिक ने बजा दी बैंड

चीन ने दो महामारी दी। पहली- कोरोना, जिसके टीकाकरण की तैयारियाँ चल रही है। दूसरी- टिकटॉक, जिसका टीकाकरण भारत सरकार ने जून 2020 में ही कर दिया था। टिकटॉक पर बहुत कुछ परोसा गया, कभी महिलाओं पर एसिड फेंकने का वीडियो तो कभी आतंकवाद की मानसिकता का पुरजोर प्रचार। ऐसा करने वाले ‘सौभाग्य’ से कोई और नहीं बल्कि शांति प्रिय समुदाय के लोग थे। इन तमाम मोमबत्ती जैसे बाल वाले ‘मज़हबी डूड्स’ की सूची में एक नाम है फैज़ल शेख उर्फ़ फैजू का।

ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT Platform) ऑल्ट बालाजी एक टीवी सीरीज़ लेकर आने वाला है। नाम है बैंग बैंग (Bang Baang)। इसमें नज़र कौन आएगा? वही फैज़ल शेख। कंटेंट की आड़ में फूहड़ता और उन्माद फैलाने वाला नाम। फैज़ल की अपार ‘लोकप्रियता’ का अनुमान इस तथ्य के आधार पर ही लगा लीजिए कि 30 अगस्त 2020 को इस टीवी सीरीज़ का ट्रेलर/टीज़र जारी किया गया था। उसे अभी तक लगभग 7.6 लाख लोग देख चुके हैं लेकिन देखने वाले उसे पसंद करें ऐसा ज़रूरी नहीं। 

वीडियो को अभी तक लगभग 1.20 लाख लोग नापसंद (dislike) कर चुके हैं और सिर्फ 42 हज़ार लोग पसंद (like) करते हैं। इससे आपके लिए समझना आसान हो गया होगा कि दर्शक उस टीवी सीरीज़ के रिलीज़ होने की कितनी बेताबी से प्रतीक्षा कर रहे हैं। रिलीज़ होने के बाद टीवी सीरीज़ कितनी बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित होने वाली है (शायद सड़क 2 की रेटिंग को भी पीछे छोड़ दे)।

इसके बावजूद फैज़ल शेख की लोकप्रियता पर संदेह बचा हो तो मज़हबी डूड के ‘यूटठूब चैनल’ पर टहल आइए। जहाँ नेटिज़न्स dislikes की संख्या को लाखों में बनाए रखने के लिए हाजिरी लगाते हैं। एक दौर था जब हर यूट्यूब क्रियेटरर्स के लिए फैज़ल शेख किसी ‘बेल आइकन’ से कम नहीं था। फैज़ल शेख की मज़हबी रचनात्मकता यहीं ख़त्म नहीं होती है।

एक वीडियो है जो गूगल से लेकर यूट्यूब तक कहीं भी खोजने पर बेहद सरलता से मिल जाता है। उस वीडियो में फैज़ल शेख और मोमबत्ती जैसे बाल वाले ‘मज़हबी डूड’ आतंकवादी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं। दुर्भाग्य से यह वीडियो कहीं और नहीं, बल्कि चीन के तकनीकी वायरस ‘टिकटॉक’ पर साझा किया गया था। 

समय-समय पर जनता बीच सड़क पर इनकी क्षणिक ‘क्रियेटिविट’ के लिए इन्हें भरपूर प्रसाद भी देती है। लेकिन इनकी पूँछ इनके बाल हैं, सीधे नहीं होते हैं। ध्यान रहे कि टिकटॉक वही मंच है जिस पर एसिड अटैक को बढ़ावा देने का वीडियो डाला गया था और डालने वाला कौन? फैज़ल सिद्दकी! जो खुद को ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर’ कहता है। यही नहीं टिकटॉक पर रेप, पुलिस पर हमले, यौन शोषण, आतंकवाद और नस्लभेद को बढ़ावा देने वाले वीडियो साझा किए गए थे। 

उसी टिकटॉक से स्टार बना है फैज़ल शेख, जो खुद आतंकवादी मानसिकता को बढ़ावा देता है। जनता ऐसे चेहरों को पहचानने में देर नहीं करती है शायद इसलिए इसकी आने वाली टीवी सीरीज़ पर प्यार से ज़्यादा नफ़रत है। अफ़सोस ऐसे मज़हबी डूड्स को ‘स्टार’ बनाने की कवायद चल रही है। खैर जनता कूल है समय पर क्रांति करना जानती है, जब ट्रेलर पर इतना प्यार लुटाया तो सीरीज़ पर भी नए रिकॉर्ड बनाएगी।        

फैक्ट चेक: पुरुषों के लिंग पर लगेगा कोरोना वैक्सीन का इंजेक्शन तो होगा ज़्यादा असर?

कोरोना वैक्सीन अब कुछ देशों में उपलब्ध है और भारत अगले कुछ हफ्तों में टीकाकरण कार्यक्रम को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही, वैक्सीन को लेकर कई प्रकार की कॉन्सपिरेसी थ्योरी और फर्जी सूचनाओं का बाजार भी गर्म है।

दावा: लिंग में वैक्सीन का इंजेक्शन लगाने के पक्ष में हैं डॉक्टर्स

हाल ही में जो एक सबसे विचित्र दावा कोरोना वैक्सीन को लेकर सामने आया है, उसके अनुसार, संक्रमित पुरुषों में कोरोना का टीका पेनिस (लिंग) में लगाया जाएगा। एक ‘मीम’ को ‘वैज्ञानिक खोज’ बताते हुए सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में शेयर किया जा रहा है। इसके अनुसार, “संक्रमित पुरुषों में वैक्सीन लिंग से होकर पूरे शरीर में जल्दी से फैलती है।”

इस पोस्टर में यह भी दावा किया गया है कि ये ‘तथ्य’ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के नतीजों पर आधारित हैं, जिसमें एक अध्ययन के लिए 1,500 पुरुष शामिल किए गए और उन्हें वैक्सीन का इंजेक्शन लगाया गया।

ट्विटर पर @RoflIndian ने इस दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि शेयर किए जा रहे ‘मीम’ में नजर आ रहे डॉक्टर का नाम डॉ मोहित कुमार अर्डेसाना (Mohitkumar Ardesana) हैं, जो कि कैलिफोर्निया के क्लेयरमोंट मेडिकल सेंटर में चिकित्सक हैं। दाईं ओर की तस्वीर मैरी एन जपलैक (Mary Ann Zapalac) द्वारा बनाया गया ‘पेनाइल सेल्फ-इंजेक्शन’ का एक मेडिकल स्केच है।

ऑपइंडिया द्वारा तस्वीरों और लिखे गए संदेश का सत्यापन

हमने RoflIndian द्वारा दी गई जानकारी को प्रमाणित करने का फैसला किया और हमें यही जानकारी मिली। जब हमने ‘मोहित कुमार अर्डेसाना’ नाम सर्च किया, तो हम डॉ मोहित की ‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) प्रोफाइल तक पहुँचे। उनकी इस प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि वह वर्तमान में ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क के क्लेयरमोंट मेडिकल सेंटर में चिकित्सक के पद पर कार्यरत हैं।

डॉ मोहित का LinkedIn प्रोफाइल

हमने वायरल मीम में इस्तेमाल की गई उनकी तस्वीर को भी तलाश किया। उसी तस्वीर का प्रयोग क्लेयरमोंट मेडिकल सेंटर के इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में भी किया गया है।

अस्पताल के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर भी उसी एक तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है
रिवर्स इमेज सर्च से यह पुष्टि हुई कि ये डॉ मोहित ही हैं

अब दूसरी तस्वीर की बात करते हैं, जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया है। जब हमने तस्वीर को रिवर्स सर्च किया, तो हमें कुछ और जानकारियाँ भी मिलीं। यह एक प्रसिद्ध इलस्ट्रेटर मैरी एन ज़पलैक ( Mary Ann Zapalac) द्वारा बनाया गया था, जिन्होंने पिछले 27 वर्षों में कई मेडिकल प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। ज़पलैक ने डेल्लास में टेक्सास यूनिवर्सिटी के साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर से मेडिकल इलस्ट्रेशन में मास्टर्स किया है और वर्ष 1993 से मेडिकल इलस्ट्रेटर के रूप में अपना व्यवसाय चला रही हैं।

मैरी का LinkedIn प्रोफाइल

जिस चित्र को इस मीम में इस्तेमाल कर भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पेनाइल इंजेक्शन थेरेपी के बारे में बताती है जोलिंग सम्बन्धी समस्या के इलाज के लिए एक प्रभावी तरीका है। ये इंजेक्शन आमतौर पर रोगियों द्वारा स्वयं लगाए जाते हैं, जो लिंग में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता, जिसके परिणामस्वरूप लिंग में तनाव होता है। जाहिर तौर पर, इस तस्वीर का कोरोना वायरस वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है।

रिवर्स इमेज सर्च में इलस्ट्रेशन के निर्माता की जानकारी मिली हैं

साथ ही, 1,500 आदमियों के लिंग में कोविड -19 वैक्सीन का इंजेक्शन लगाकर कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय ने कोई भी दावा नहीं किया है। विश्वविद्यालय ने ऐसा कोई शोध नहीं किया और यह वायरल इमेज में किया गया दावा एकदम फर्जी और फेक है।