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दिल्ली के दो चिल्ड्रेन होम, शोषण का अड्डा: हर्ष मंदर का एनजीओ चला रहा, हालात देख NCPCR हैरान

दक्षिणी दिल्ली के दो चिल्ड्रेन होम। नाम- उम्मीद अमन घर (लड़कों के लिए) और खुशी रेनबो होम (लड़कियों के लिए)। इनकी स्थापना सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (CES) ने की है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के उल्लंघन की शिकायत मिलने के बाद नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने दोनों जगहों का निरीक्षण किया। बच्चों के शोषण के प्रमाण मिले।

NCPCR के अनुसार CES के निदेशक हर्ष मंदर हैं। वही मंदर जो यूपीए के जमाने में सोनिया गाँधी की नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) के सदस्य हुआ करते थे। जिनके संपर्क इटली की गुप्तचर सेवा और इतालवी सरकार से जुड़े संगठन से हैं।

दोनों चिल्ड्रेन होम का निरीक्षण 1 अक्टूबर 2020 को किया गया था। इसके लिए दो टीमें बनाई गई थी, जिसकी अगुवाई खुद NCPCR के अध्यक्ष कर रहे थे। NCPCR को ‘उम्मीद अमन घर’ में होने वाले यौन शोषण के बारे में पता चला, जिसका संचालन अमन बिरादरी ट्रस्ट करता है। बता दें कि अमन बिरादरी ट्रस्ट की मंदर ने की थी।

एनसीपीसीआर का कहना है कि उनके पूर्व सदस्य ने बताया था कि 2012 में भी आयोग को इसकी शिकायत मिली थी, लेकिन उस समय मामले को सही तरीके से नहीं निपटाया गया। इसे और अधिक सतर्कता से देखने की आवश्यकता है। एनसीपीसीआर ने पाया कि इन चिल्ड्रेन होम में कई मानदंड और नियमों का उल्लंघन किया गया। 

लड़कों के लिए उम्मीद अमन घर

चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन पंजीकरण को नवीनीकृत नहीं किया गया था। कोई पर्याप्त काउंसलर, कुक या हेल्पर उपलब्ध नहीं था। किसी स्टाफ की भर्ती का कोई रिकॉर्ड या वर्क प्रोफ़ाइल नहीं था और कोई भी चिकित्सा अधिकारी कॉल पर उपलब्ध नहीं था। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि, ‘घर के कमरों को अलग नहीं किया गया था और बड़े बच्चों के साथ नाबालिग बच्चों को एक साथ रखा जाता था, जिससे छोटे बच्चों को बड़े बच्चों द्वारा दुर्व्यवहार और धमकी का सामना करना पड़ता था।’

Rules violated at Umeed Aman Ghar
Rules violated at Umeed Aman Ghar

इसके अलावा बाल अधिकार संस्था ने कहा है कि उसे आश्रय गृह में होने वाले यौन शोषण के बारे में पता है, लेकिन फिर भी इसकी रिपोर्ट नहीं लिखवाई गई। आयोग ने संस्थानों में बाल यौन शोषण के संबंध में विरोधाभासी बयान भी पाया। आश्रय घरों के शुरुआती खंडन के बाद, CES ने स्वीकार किया कि ये मामले घटित हुए थे।

Child Sex Abuse at Umeed Aman Ghar
Child Sex Abuse at Umeed Aman Ghar

जिस तरीके से मैनेजर वाले मामले को निपटाया गया वह भी काफी घिनौना था। मैनेजर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाए, उसे संगठन के एक घर से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। दिल्ली सरकार के डब्ल्यूसीडी विभाग को इस बारे में पता था और फिर भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

The NCPCR notes that the children must be shifted from Umeed Aman Ghar
The NCPCR notes that the children must be shifted from Umeed Aman Ghar
The NCPCR notes that the children must be shifted from Umeed Aman Ghar

लड़कियों के लिए खुशी रेनबो होम

लड़कियों के लिए खुशी रेनबो होम में इसी तरह के उल्लंघन पाए गए। किसी स्टाफ की भर्ती का कोई रिकॉर्ड नहीं था। 90 बच्चों के लिए केवल एक बाल कल्याण अधिकारी था। कोई भी कक्षा नहीं थी। स्टाफ का निवास मानक के अनुसार नहीं था। 90 बच्चों के लिए केवल 8 बाथरूम थे। स्वच्छता का कोई ध्यान नहीं रखा गया था। सामान्य स्थिति अत्यंत दयनीय थी।

Violations at Khushi Rainbow Home for girls
Violations at Khushi Rainbow Home for girls

NCPCR ने फंडिंग में पाई खामियाँ

बच्चों के आश्रय घरों को कई स्रोतों से वित्त पोषित किया जा रहा था। सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज के अलावा, रेनबो फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (RFI), एसोसिएशन फॉर रूरल एंड अर्बन ज़रूरतमंद (ARUN-India), कैन असिस्ट सोसायटी और अमन बिरादरी के ‘दिल से कैंपेन’ और सीईएस और दिल्ली सरकार के समागम शिक्षा अभियान के बीच एक समझौता ज्ञापन शामिल है।

यह सब थोड़ा भ्रमित करने वाला है लेकिन ‘कैन असिस्ट’ की वेबसाइट के अनुसार, ARUN-India, RFI का मूल संगठन है, हालाँकि RFI की वेबसाइट पर इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता है। कैन असिस्ट वेबसाइट के अनुसार इसमें दिल्ली सरकार से प्राप्त फंड अमन बिरादरी ट्रस्ट भी शामिल है।

एनसीपीसीआर के अनुसार, हर साल लाखों रुपए बाल आश्रय घरों को दिए जाते थे। ‘उम्मीद अमन घर’ ने वित्त वर्ष 2020-21 में सिर्फ ARUN-India से 15 लाख रुपए लिए। इसे RFI से 41 लाख रुपए प्राप्त हुए। वहीं खुशी रेनबो होम को RFI से 38 लाख रुपए मिले। 

₹55 लाख का लोन, 55 सवाल: PMC बैंक घोटाला में ED के सामने संजय राउत की पत्नी की पेशी

शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत पीएमसी बैंक घोटाला मामले में पूछताछ के लिए सोमवार (जनवरी 4, 2020) को मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर पहुँचीं। तीसरी बार समन मिलने पर वर्षा राउत ने ईडी के सामने हाजिरी लगाई है। इससे पूर्व 2 समन भेजे जाने पर वह स्वास्थ्य आधार पर पेश नहीं हुईं थीं। तीसरी बार में भी पेश होने के लिए उन्होंने 5 जनवरी तक का समय माँगा था।

बता दें कि इससे पूर्व खबरों में बताया गया था कि ईडी ने वर्षा राउत से पूछताछ के लिए 55 सवालों की लिस्ट तैयार की है। ईडी का मकसद यह जानना है कि उन्हें जो 55 लाख रुपए का लोन मिला, उसके स्रोत क्या हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खिलाफ जाँच कर रही है। आरोप है कि PMC बैंक स्कैम के आरोपित प्रवीण राउत की पत्नी और एक अन्य कंपनी ने कुल मिला कर वर्षा के अकाउंट में 67 लाख रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी दी थी कि प्रवीण राउत ने हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) के नाम पर अवैध लोन्स और अन्य मद में कुल 95 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।

प्रवीण राउत को किए गए पेमेंट्स के कोई कागजात तक नहीं थे। HDIL के अकाउंट बुक से पता चलता है कि प्रवीण राउत ने पालघर में घर लेने के लिए ये रुपए लिए थे। इस आपराधिक लेनदेन में प्रवीण ने अपनी पत्नी माधुरी के अकाउंट में भी 1.6 करोड़ रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी देते हुए कहा कि इस रकम में से 55 लाख रुपए इंटरेस्ट फ्री लोन के नाम पर वर्षा राउत को ट्रांसफर किए गए। इनमें से 50 लाख रुपए दिसंबर 23, 2010 को ट्रांसफर किए गए थे। बाकी के 5 लाख रुपए मार्च 15, 2011 को भेजे गए थे।

ED ने बताया था कि इस रकम का इस्तेमाल मुंबई के दादर ईस्ट में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया। M/s अवनी कंस्ट्रक्शंस नामक कंपनी में वर्षा और माधुरी पार्टनर्स भी हैं। ओवरड्रॉन कैपिटल को लोन में बदल कर इस कंपनी के द्वारा भी वर्षा राउत को 12 लाख रुपए भेजे गए। मात्र 5625 रुपए के कंट्रीब्यूशन को आधार बना कर ये रकम वर्षा को भेजी गई।

मुनव्वर फारूकी जैसी ‘कॉमेडी कौम’ के बीच नए हिन्दू का असहिष्णु होना कितना आवश्यक है?

मेरे घर में एक बार एक छोटे-से बच्चे को बेवजह, बात-बात पर गुस्सा आने लगा था, वह चिड़चिड़ा होने लगा। कहाँ वह हंसी-मजाक करने वालों को अपनी टॉफ़ी पकड़ा देता, उनके साथ बाकी की अपेक्षा और ज़्यादा खेलता था, और कहाँ इतना ‘इनटॉलरेंट’ हो गया कि हर किसी पर बिफ़र उठता! कोई उसके साथ खेलने आए तो दहाड़ें मार-मार कर चीखने लगता।

बच्चे के इस व्यवहार से हैरान-परेशान उसके माँ-बाप उसे एक बाल मनोवैज्ञानिक के पास ले गए। पता चला कि वह बच्चा ‘चाइल्ड अब्यूज़’ और ‘पीयर अब्यूज़’ का शिकार था। उसके साथ खेलने के बहाने आने वाले बच्चों में से कुत्सित मानसिकता के शिकार, गलत संस्कारों में पले-बढ़े कुछ बच्चे (और कुछ बड़े लोग भी) उसके माँ-बाप की नज़रें बचा कर उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगे थे। वो कभी उसके कान मरोड़ते, तो कभी उसे मारते थे, उसे भद्दी-भद्दी गालियाँ देते थे और डराते थे।

धीरे-धीरे ऐसे ही उस बच्चे का स्वभाव बदलता चला गया। मनोवैज्ञानिक ने बताया कि यदि समय पर इस बच्चे की समस्या का पता न चलता, तो बड़ा होकर ये या तो एकदम ही भीरु और कायर बन जाता, या अति-हिंसक, असहिष्णु वयस्क बन जाता, जिसकी बर्दाश्त करने की क्षमता नगण्य नहीं अपितु एकदम शून्य होती। आज का ‘असहिष्णु’ हिन्दू समाज, आज का नया हिन्दू बारह सौ साल के अनवरत शोषण से कुपित वही वयस्क बनकर उभरा है।

कथित कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूकी के साथ जो हिंसा हुई, वह ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के हर समर्थक के लिए सैद्धांतिक तौर पर जितनी दुखद है, ईमानदारी से अपने दिल के अंदर झाँकने पर उतनी ही अवश्यम्भावी लगेगी। ‘गंगाजल’ फिल्म के साइड विलेन डीएसपी भूरेलाल की ज़ुबानी बोलें तो, “ई तो साला होना ही था।”

क्यों होना था? क्योंकि आज का हिन्दू सामाजिक रूप से पूरी तरह से टूट चुका है। वह केवल चिड़चिड़ा या डरा हुआ नहीं है, बल्कि एक अँधेरे नैराश्य के काले सागर में गोते लगा रहा है। उसके लिए ‘कानून का राज’, ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’, ‘सर्व-धर्म-समभाव’, ‘सहिष्णुता’ आदि कोरी लफ्फाज़ी उतनी ही बेमानी है, जितनी एक डूब रहे आदमी के लिए कागज़ की नाव! वह भी उस देश में, जो उसी के विज्ञान, योग, गणित, भाषाशास्त्र, नृत्य आदि को बेच कर दुनिया के इतिहास में अपनी कॉलर ऊँची करता रहा है।

फिर वही बात- क्योंकि तुम सुनते ही नहीं

यह बात हज़ार बार कही जा चुकी ज़रूर है, पर चूँकि इस देश के हुक्मरानों के कान में जूँ रेंगने का नाम ही नहीं लेती, इसलिए इसे एक करोड़ बार और दोहराए जाने की ज़रूरत है- आखिर इस देश के सारे नियम-कानून, सारे नैतिक मापदण्ड केवल हिन्दुओं के लिए ही क्यों हैं? क्यों मुस्लिमों के हजरत को अपशब्द बोलने पर कमलेश तिवारी को न्यायपालिका से लेकर अपने ऑफिस तक हर जगह खमियाजा भुगतना पड़ता है, लेकिन ‘सेक्सी दुर्गा’ फिल्म बनाने वालों के लिए वही कानून, वही समाजशास्त्र सन्नाटा अपना लेते हैं?

क्यों जिहादियों की एक भीड़ मालदा में घंटों ISIS के राज जैसा माहौल बना कर भी गोलियों का शिकार नहीं होती, लेकिन ज़ाफ़राबाद की सड़क खाली कराने के लिए धरने की बात सुनते ही दिल्ली में दंगा भड़क जाता है? क्यों लव जिहाद पर पर्दा डालते ‘एकत्वं’ का इश्तेहार बनाकर ‘सेक्युलर’ का तमगा लूटने वाली ‘तनिष्क’ की यह हिम्मत नहीं पड़ती कि एक इश्तेहार ऐसा भी दिखा दे, जहाँ एक हिन्दू लड़का किसी मुस्लिम लड़की के साथ ‘वही सब’ कर रहा है, और ‘हिन्दू फ़ासिस्टों’ को गलत साबित कर दे?

हिन्दू आखिर जाए कहाँ?

एक आम हिन्दू हर ओर तो अपने दुश्मन ही पाता है- उसकी तरफ़ से कौन खड़ा है? हिंदूवादी सरकार के राज में बंगाल और कश्मीर से लेकर राजधानी दिल्ली तक वह कट रहा है- कभी दिल्ली दंगों में अंकित शर्मा के नाम से, कभी प्रेमिका के मुस्लिम होने के अपराध में अंकित सक्सेना के नाम से। कभी कश्मीर में सतपाल निश्चल के नाम से कश्मीर का डोमिसाइल बनने पर सज़ा-ए-मौत मिलती है, कभी तमिलनाडु में रामलिंगम नाम से वह हिंदुत्व को गाली देने वाले मजहबी प्रचारकों के हाथों जिबह होता है- केरल और बंगाल में तो आत्मसम्मानी हिन्दू की शायद इंसानों में गिनती ही नहीं होती। और जानवर तो वहाँ ‘वाजिब-उल-क़त्ल’ हैं ही।

मीडिया भी इतने सब के बावजूद ‘देश में बढ़ता हिन्दू आतंकवाद’ पर घंटों के सेमिनार करता है, और कट्टरपंथियों के हाथों हिन्दुओं के कत्ल की खबर नीचे की पट्टी में ‘समुदाय विशेष’ के नाम से आती है।

यह सन्नाटा ‘ब्लैक कॉमेडी’ है

दिल्ली का चर्च बांग्लादेशी मुस्लिमों के हाथों तोड़े जाने पर हिन्दुओं को गाली देने वाली वही ‘स्टैंण्डअप कॉमेडियन’ कौम श्रीराम और भगवान सुब्रमण्यम/कार्तिकेय के मूर्तिभंजन पर मौन रहती है। हिन्दुओं के देवी-देवता, वैध परम्पराएँ भी इनके लिए ‘मैटेरियल’ तो हैं, लेकिन ‘मैटेरियल’ देने वालों के लिए इनके दिल में न ही हमदर्दी है न ही इंसानियत।

नागरिकता कानून (CAA) के ज़रिए सरकार ने जब चंद शरणार्थी, पाकिस्तानी मुस्लिमों के हाथों बलात्कार, अपहरण, लूट, बर्बरता, धर्मांतरण का शिकार होते आ रहे हिन्दुओं को मदद देने का एक कदम उठाया, तो इस ‘कॉमेडी कौम’ ने समुदाय विशेष के साथ मिलकर पूरे देश में आग लगा दी, राजधानी में सामूहिक हत्याकाण्ड के षड्यंत्र रचे और हिन्दुओं के खिलाफ एक किस्म का जिहाद छेड़ दिया गया। इस पर कलाबाजी ये, कि इस हत्याकांड का ठीकरा आँकड़ों की बाज़ीगरी के ज़रिए उसी समूह पर थोप दिया, जो इसका भुक्तभोगी था।

हिन्दू इनके लिए इंसान ही नहीं

हिन्दुओं से यह ‘कॉमेडी कौम’ और इसके अन्य साथी कितनी घृणा करते हैं, इसी का उदाहरण था AMU से निकले शरजील उस्मानी का वह ट्वीट, जिसमें वह सीएए शरणार्थियों की ही तरह इस देश में दर-दर की ठोकरें खाने वाले, 5 लाख लोगों को गँवाने वाले कश्मीरी पण्डितों को ‘पैम्पर्ड माइनोरिटी’ कहता है।

जैसा कि सोशल मीडिया में कई लोगों ने कहा, यह बोल हिन्दुओं से आसुरी वृत्ति तक की नफ़रत की पैदाइश थे। उस्मानी जैसों को ही अपना नेता मानने वाले समुदाय विशेष के समुदाय अधिसंख्य के लिए ‘काफ़िर’ तो इंसान ही नहीं है। यह ऐसा ही है, जैसे पौराणिक क्रूर दैत्यों के लिए मानव पशु-समान थे।

भूमिका ज़रूरी है

लेख में यदि आप यहाँ तक आ गए हैं तो बहुत मुमकिन है आपको लग रहा हो कि बिलावजह की लम्बी-चौड़ी भूमिका बाँधी जा रही है। आप सही भी हैं, और गलत भी। ‘पॉडकास्ट’ की भाषा में बोलें तो ‘यस एंड नो’।

ऊपर की बातें भूमिका अवश्य हैं, पर बिलावजह या नाहक नहीं। इसलिए नहीं क्योंकि हर बार जब हिन्दू हितों और हिन्दू समस्याओं की बात होती है तो हिन्दुओं को 1200 साल के हत्या, बलात्कार, और लूट का लेखा-जोखा देना ही पड़ता है। उसके बिना कोई हिन्दुओं को पीड़ित मानने को तैयार ही नहीं होता।

या तो विभाजन के समय एक बार हुए ‘बराबरी’*** के दंगों के आधार पर 1200 साल का हिन्दुओं का दर्द और मुस्लिमों की स्व-पोषित शिकायतों को एक समान कर दिया जाता है, या फिर पूरी बात ही घुमा कर, हिन्दुओं को अम्बानी और सत्या नडेला दिखा कर पूछा जाता है कि अगर दुनिया भर की ताकतें हिन्दू-विरोधी होतीं तो क्या ये लोग वहाँ पहुँच पाते जहाँ हैं!

हम खुद ही पुरानी बातों को छोड़ कर अभी की, वर्तमान की समस्याओं पर बात करना चाहते हैं- क्यों संविधान में केवल हिन्दू मंदिरों पर सरकारी कब्ज़ा जायज़ है? क्यों देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी ‘अल्पसंख्यक’ की मलाई काट रही है? क्यों सचिव पद पर बैठे ब्राह्मणों की बात करना ‘प्रोग्रेसिव’ है, जबकि यकायक समुदाय विशेष की यूपीएससी में बढ़ती तादाद की ओर ध्यान आकर्षित करना साम्प्रदायिक और हेट स्पीच?

हम खुद ही मुगलों की बात छेड़ने के बजाय उनकी जगह डॉ कलाम और कवि रसखान और अय्यप्पा के मुस्लिम भक्त वावर के नाम पर पुतले और राजमार्ग करना चाहते हैं। लेकिन हमें ऐसा करने से रोकने वालों से अग्रिम पंक्ति में यही कॉमेडियन कौम है।

हवा में नहीं पनपती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

कथित कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूकी पर लौटें तो यद्यपि इसमें कोई दोराय नहीं कि उस पर हुआ हमला और उस पर हुई कार्रवाई, दोनों ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ हैं, लेकिन एक तथ्य यह भी है कि यह ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ ऐसी नाज़ुक चीज़ है जिसके अक्षुण्ण रहने के लिए कुछ मूलभूत चीज़ें पहले आवश्यक होतीं हैं।

पहली बात यह कि इसके लिए सम्पूर्ण समाज का, और खासकर कि बहुसंख्यक तबके का उस सरकार, संविधान और व्यवस्था में विश्वास बने रहना ज़रूरी है, जो कि इस स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं। क्या कॉमेडियन कौम से लेकर न्यायपालिका, पुलिस से लेकर मीडिया और बौद्धिक वर्ग तक हमारी सामाजिक व्यवस्था का एक भी अंग दिल पर हाथ रखकर कह सकता है कि उसके यहाँ हिन्दुओं के साथ, उनके आत्मसम्मान के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं होता?

ऐसे में, हिन्दू कैसे भरोसा करे कि वह अगर मुनव्वर फ़ारूकी के साथ हाथापाई की बजाय शांतिपूर्वक उसके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करेगा, तो उस पर न्यायोचित कार्रवाई होगी?
दूसरी चीज़, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए चाहिए, वह है इसका सदुपयोग।

लोगों को बुरी लगने वाली बातें कहने वाले की अपनी छवि ऐसी होनी चाहिए कि लोगों को यह विश्वास रहे कि यह बात दुर्भावनापूर्वक नहीं कही जा रही। मुनव्वर फ़ारूकी के ही समकालीन और हमकौम, मजहबी कॉमेडियंस में भी और कॉमेडियन कौम में भी, एक दूसरे जनाब हैं अहमद शैरिफ़!

अहमद शैरिफ़ भी हिन्दुओं के मज़े लेते हैं, हिन्दुओं के धर्म पर भी चुटकुले बनाते हैं, लेकिन उन्हें अब तक ऐसी प्रतिक्रिया नहीं झेलनी पड़ी। बल्कि उनके पेज और फ़ेसबुक प्रोफाइल पर हिन्दू ज़्यादा और उनके मजहब के लोग कम ही होते हैं। मज़ाक भी सीधे-सीधे ‘हिन्दू-मुस्लिम’ नाम लेकर होता है। क्यों? क्योंकि (कम-से-कम अब तक) अहमद शैरिफ़ के चुटकुलों में मज़हबी दुर्भावना नहीं आई है।

इसी के उलट, हिन्दू नाम वाले कुणाल कामरा से नफ़रत न करने वाला कोई भी आत्मसम्मानी हिन्दू तलाशना मुश्किल नहीं, शायद नामुमकिन है।

सम्मान ही नहीं, अपमान में भी अग्रणी रहा है हिन्दू

हिन्दू समाज हमेशा से अपमान, निंदा, और आलोचना को लेकर सहिष्णु ही नहीं, स्वागत मुद्रा में रहा है। श्रीराम के दरबार में नास्तिक, चार्वाक सत्यकाम जाबालि मंत्री ही नहीं थे बल्कि उन्हें मुनि की पदवी से भी जाना जाता है। वे वनवास से न डिगने पर उद्यत राम से कहते हैं कि वे (राम) नाहक ही उस पिता के पीछे जीवन नष्ट कर रहे हैं, जिनका अब (मृत्योपरांत) कोई अस्तित्व ही नहीं रहा। राम विचलित और क्रुद्ध अवश्य होते हैं, लेकिन उन्हें दंडित नहीं करते।

शिशुपाल का वध भी श्रीकृष्ण ने इसलिए किया क्योंकि वह दूसरे राजा के यज्ञ में घुस कर अपशब्द बक रहा था और विघ्न पैदा कर रहा था, न कि महज़ इसलिए कि उसने श्रीकृष्ण का अपमान किया।

चाणक्य से लेकर भीष्म और (मृत्युशैया पर दिए गए उपदेश में) रावण तक कदाचित् हर राजनीतिक पंडित ने आलोचकों की रक्षा को राजधर्म का अंग माना है। लोकतंत्र में जनता राजा है तो यह जनता का भी उत्तरदायित्व है।

कबीरदास जी ने भी कहा है-

“निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाए
बिन पानी, बिन साबुन, निर्मल करे सुभाय”

लेकिन जैसा की ऊपर वर्णित है, बोलने वाले का अधिकार और सुनने वाले का कर्त्तव्य, बहुत नाज़ुक परिस्थितयों की पूर्ति की शर्तों पर ही आधारित होते हैं। वर्तमान कॉमेडियन कौम इस कसौटी पर न केवल खरी नहीं उतरती, बल्कि वह उसके आसपास भी नहीं फटकती।

कॉमेडियन कौम का पूरा कॉन्टेंट हिन्दुओं को, और उनके धर्म को इन्सान से, इंसानियत से दोयम दर्जे पर धकेलने की दिशा में होता है, यह ‘डीह्यूमनाइज़िंग’ है। और इतिहास से लेकर मानव स्वभाव तक के जानकार यह जानते हैं कि किसी समाज को इन्सान होने से ही वंचित करना, दोयम दर्ज़े की ओर धकेलना लोमहर्षक सामूहिक हत्याकाण्ड की दिशा में पहला कदम मात्र होता है। हिटलर, स्टॅलिन, माओ, पोल पोट सबने यही किया। आसमानी किताब भी काफ़िरों को लेकर इसी दिशा में हुक्म जारी करती है।

हिन्दू वो लोग हैं, जिनके स्वस्थ धार्मिक वाद-विवाद में ‘तुम्हारे वेद तो बिना ज़हर के साँप हैं’ भी सह्य होता है। लेकिन हम ही वे लोग भी हैं, जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने वाले शिशुपाल को दंडित भी किया जाता है। आज हम उद्वेलित हैं क्योंकि सरकार, राजनीतिक पार्टियों, कानून की चौखट से लेकर निजी कम्पनियों के स्व-अंकुश और ‘सोशल मीडिया गाइडलाइंस’ तक, हर जगह से हमें दुत्कारा जा रहा है, ठगा गया है। घायल जानवर कभी-न-कभी भागने की राह न पाकर जान बचाने के लिए शिकारी पर ही झपट पड़ता है, यह हमें जानवरों की श्रेणी में डालने वालों को याद रखना चाहिए।

75 साल के बीजेपी नेता और 80 साल के उनके साथी की हत्या, ओडिशा के कानून मंत्री सहित 13 पर FIR

ओडिशा के कटक स्थित सालेपुर में एक 75 वर्षीय भाजपा नेता की उनके साथी सहित हत्या कर दी गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने भी पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की तरह बदले की राजनीति में खून-खराबा शुरू कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने राज्य के कानून मंत्री प्रताप जेना सहित 13 के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

भाजपा नेता के साथ-साथ उनके 80 साल के सहयोगी की भी हत्या कर दी गई। ये घटना शनिवार (जनवरी 2, 2021) की है, जब 22 अपराधियों ने माहांगा पंचायत समिति के पूर्व अध्यक्ष व सालेपुर भाजपा प्रभारी कुलामणि बराल व उनके सहयोगी दिव्या सिंह बराल को बेरहमी से मार डाला। ये घटना जनकोटी गाँव के नजदीक तब हुई, तब वो दोनों मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। कुलामणि की मौके पर ही मौत हो गई।

उनके साथी बराल को इलाज के लिए कटक के SCB मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहाँ रविवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। दोनों मृतक आपस में रिश्तेदार भी थे। इस घटना के तुरंत बाद कटक पुलिस ने बीजद नेता एवं मंत्री प्रताप जेना सहित 13 को इस दोहरे हत्याकांड में आरोपित बनाया। इन सबके खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ उपद्रव), 149 (जनसमूह द्वारा समान अपराध), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और 506 (आपराधिक धमकी) का मामला दर्ज किया गया।

ये हमला रात के 7:30 में हुआ था। हमले के कारण दोनों बाइक से गिर गए, जिसके बाद धारदार हथियार से मार-मार कर उन्हें अधमरा कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों के शवों को पीड़ित परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं प्रताप जेना का कहना है कि ये घटना निंदनीय है और बीजद हिंसा में विश्वास नहीं रखती है। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया। याद दिला दें कि माहांगा नृत्तांग पंचायत में भी भाजपा नेता व जाकोटी गाँव के प्रमुख विकास जेना की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

प्रताप जेना ने उलटा भाजपा पर ही इस दोहरे हत्याकांड के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में कुछ भी गलत होने पर बीजद को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जाँच के बाद सब साफ़ हो जाएगा क्योंकि वो व्यक्तिगत रूप से प्रयास करेंगे कि दोषियों को सज़ा मिले। उन्होंने कहा कि अभी सबका लक्ष्य दोषियों को कानूनन सज़ा दिलाना होना चाहिए।

इन सबके अलावा आर्म्स एक्ट की धाराएँ 25 और 27 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। भाजपा ने बीजद पर तृणमूल की तरह ‘कोल्ड-ब्लडेड हत्याएँ’ कराने का आरोप लगाया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजद इन हत्याओं के द्वारा विरोधियों का सफाया करना चाहती है। मृतक बराल नृतंगा ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री जन आवास योजना में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर पिछले कुछ दिनों से मुखर थे। उन्होंने गरीबों की PMAY योजना के तहत बीजद नेताओं के आवास हड़पने पर आपत्ति जताई थी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस ने इस योजना के अयोग्य लाभार्थियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। राज्य में भाजपा के प्रवक्ता गोलक महापात्रा ने बताया कि BJD के नेताओं ने लम्बे समय से उनके खिलाफ दुर्भावना पाल रखी थी। साथ ही उन्होंने माँग की कि अब जब इस मामले में राज्य के कानून मंत्री ही आरोपित हैं, उन्हें अपने पद से तत्काल प्रभाव से हटाया जाना चाहिए। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिस से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।

भाजपा नेता विजयंत जय पांडा ने भी जाँच की माँग करते हुए कार्रवाई न होने पर आंदोलन की बात कही। ओडिशा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने भी आशंका जताई कि राज्य में अब विरोधी नेताओं की राजनीतिक हत्या का सिलसिला शुरू हो गया है और कुलामणि एक मजबूत नेता थे, जिनकी हत्या दुःखद है। मृतक नेता के बेटे रमाकांत ने बताया कि उनके पिता ने पहले ही पुलिस को सूचित कर दिया था कि उनकी जान को खतरा है, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया।

उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। पीएम मोदी को पत्र तक लिखा था। माहांगा पंचायत समिति के एक पूर्व सरपंच के पति को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि मंत्री प्रताप जेना ही आरोपितों को बचा रहे हैं। कटक ग्रामीण के एसपी जुगल किशोर बनोथ ने बताया कि आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस ने 6 टीमें गठित की हैं और जल्द ही उनकी गिरफ़्तारी होगी।

भाजपा अब कटक के हर पुलिस थाने और प्रखंड दफ्तर के समक्ष विरोध-प्रदर्शन की योजना बना रही है। प्रदेश अध्यक्ष समीर मोहंती ने कहा कि प्रताप जेना अगर खुद इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें बरखास्त किया जाना चाहिए। बराल ने हाल ही में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी, जिन्हें उनकी हत्या की वजह बताया जा रहा है। अब भाजपा मंत्री के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन करेगी।

हाल के दिनों में ये पहली घटना नहीं है, जब किसी गंभीर अपराध में बीजद नेता का नाम आया हो। नवंबर 2020 में एक बेरहम हत्या का मामला विधानसभा में भी गूँजा था। इस मामले में मृतक की आँखें फोड़ दी गई थीं और दोनों किडनियाँ गायब थीं। उस मामले में भी मुख्य आरोपित नयागढ़ के BJD नेता और ओडिशा सरकार में मंत्री अरुण साहू का करीबी बताया जाता है। पीड़ित माता-पिता ने न्याय के लिए विधानसभा के बाहर आत्मदाह का प्रयास भी किया था।

‘किसान’ आंदोलन से ₹27000 करोड़ का नुकसान: दिल्ली और आस-पास के राज्यों में 80000 ट्रकों की आवाजाही प्रभावित

दिल्ली और इसके आस पास चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के चलते बीते एक महीने से ज़्यादा समय में दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान को लगभग 27,000 करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हुआ है। ट्रेडर्स बॉडी ने इसकी  जानकारी दी है। 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर किसान एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। इस वजह से दिल्ली से कई राज्यों को जोड़ने वाली सड़कें बंद हैं। 

ट्रेडर्स बॉडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और उसके राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आने वाले माल की आपूर्ति पर काफी फर्क पड़ा है। इन दोनों राज्यों से विभिन्न वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए काम किया जा रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों से दिल्ली में सामान लेकर आने वाले वाहनों को राजमार्ग को छोड़कर अन्य वैकल्पिक मार्गों से काफी लंबा चक्कर लगा कर दिल्ली आना पड़ रहा है।

सीएआईटी प्रमुख ने मीडिया को बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले सामानों की आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 50 हजार ट्रक देश भर के विभिन्न राज्यों से सामान लेकर आते हैं। लगभग 30 हजार ट्रक प्रतिदिन दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों के लिए सामान लेकर जाते हैं। 

किसान आंदोलन के चलते न केवल दिल्ली सामान आने पर बल्कि दिल्ली से पूरे देश में सामानों के जाने पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। ऐसे में जितनी जल्दी सरकार और किसान नेताओं के बीच चर्चा के जरिए समाधान निकल जाए, उतना अच्छा होगा।

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार ने 4 जनवरी को अगले दौर की वार्ता के दौरान उनकी माँगों को पूरा नहीं किया तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। किसान आंदोलन के वरिष्ठ नेता दर्शन पाल ने भी कहा कि पेट्रोल पंप और उनके द्वारा संचालित शॉपिंग मॉल सहित कुछ औद्योगिक समूहों की वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आंदोलन के हिस्से के रूप में प्रमुख राजमार्गों पर टोल प्लाजा को निशाना बनाया जाएगा।

किसान आंदोलन की आगे की रणनीति के बारे में बात करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा था, “23 जनवरी को हम विभिन्न राज्यों में राज्यपालों के घरों की ओर मार्च निकालेंगे और अगर सरकार के साथ बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकला तो आने वाली 26 जनवरी को दिल्ली में ‘ट्रैक्टर किसान परेड’ आयोजित की जाएगी।”

किसानों और केंद्रीय सरकार के बीच आज होगी 7वीं वार्ता

प्रदर्शनकारी किसान और केंद्र सरकार सोमवार (जनवरी 4, 2020) को सातवें दौर की वार्ता करेंगे। गतिरोध खत्म करने के लिए अब तक 6 दौर की वार्ता विफल रही है। छठे दौर की बैठक के बाद केंद्र सरकार और नए किसान कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी किसानों के बीच चार माँगों में से दो पर सहमति बनी थी। हालाँकि, किसानों ने दावा किया है कि वे तब तक विरोध प्रदर्शन को समाप्त नहीं करेंगे जब तक कि उनकी अन्य दो माँगें पूरी नहीं होतीं। वो दो माँगें हैं- नए कृषि कानूनों को रद्द करना और एमएसपी पर कानून बनाना।

‘जहाँ भी बीजेपी को देखो, पीटकर भगा देना’: बंगाल में भाजपा नेता की कार को घेरा, फायरिंग में बाल-बाल बचे

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रविवार (जनवरी 3, 2020) की रात भाजपा नेता कृष्णेंदु मुखर्जी (Krishnendu Mukherjee) की कार पर फायरिंग करने का मामला सामने आया है। उन्होंने इसका आरोप सत्ताधारी टीएमसी के गुंडों पर लगाया है। बीजेपी राज्य समिति के सदस्य कृष्णेंदु मुखर्जी ने बताया कि उन पर उस समय गोलियाँ चलाई गईं जब वह कार से अपने घर लौट रहे थे।

सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि भाजपा नेता पर हमला करीब से किया गया। उनकी गाड़ी में गोली लगने के निशान बन गए हैं। उन्होंने बताया रविवार को लगभग 11 बजे कोलकाता से घर लौट रहे थे। उसी समय तीन बदमाशों ने उनकी कार को घेर लिया और घने कोहरे में उनकी ओर गोली चलाई। 

खबरों के अनुसार, बदमाशों ने कार का दरवाजा खोलने की भी कोशिश की। मगर उनका प्रयास असफल रहा और बीजेपी नेता बाल-बाल बच गए। मुखर्जी ने कहा कि गोली चलने के बाद उनका ड्राइवर मदद के लिए चिल्लाया और उसने लगातार हॉर्न बजा कर स्थानीयों का ध्यान इस ओर करवाया, जिसे देख हमलावर मौके से भाग गए।

मुखर्जी ने इस घटना के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं टीएमसी ने इससे इनकार किया है। टीएमसी के आसनसोल दक्षिण के विधायक तपस बनर्जी ने कहा कि मुखर्जी जबरन वसूली, तस्करी और यहाँ तक ​​कि हत्या के मामलों में आरोपित हैं और लंबे समय से फरार थे। यह घटना उनकी पुरानी रंजिश का नतीजा हो सकती है।

वहीं बीजेपी नेता ने कहा, “मुझे संदेह है कि तृणमूल के उपद्रवियों ने इस घटना को अंजाम दिया। मुझे हटाना उनके हित में है। मैं असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कानून और व्यवस्था की स्थिति कहाँ तक पहुँची है। मैंने शीर्ष नेतृत्व को सूचित किया है। मैंने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज दिए हैं। पुलिस जाँच कर रही है।”

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ भाजपा नेता पर गोलीबारी की घटना सामने आई है। वहीं, दूसरी ओर टीएमसी नेता की भड़काऊ वीडियो को भाजपा ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। इस वीडियो में टीएमसी नेता खुलेआम भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ लोगों को भड़का रहे हैं। वीडियो में सुन सकते है कि टीएमसी नेता कहते हैं, “जहाँ भी तुम बीजेपी को देखो, मै बता रहा हूँ, उन्हें पीटकर भगा देना। उन्हें पता होना चाहिए कि हम उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे।”

बता दें कि 2021 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में अब तक 136 भाजपा कार्यकर्ता अपनी जान गँवा चुके हैं। पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के काफिले पर ईंट और पत्थर फेंके गए थे। हालाँकि उनकी गाड़ी बुलेट प्रूफ थी जिसकी वजह से उन्हें चोट नहीं लगी थी।

बंगाल से केंद्र सरकार का पैसा भेजा गया बांग्लादेश: TMC नेता समसुल अरफिन ने रची थी साजिश, बनवाए थे फर्जी जॉब कार्ड

पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल जिले मुर्शिदाबाद में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा) योजना में धाँधली की खबर सामने आई है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन द्वारा जारी आंतरिक जाँच में पता चला है कि स्थानीय टीएमसी नेता ने मनरेगा स्कीम को चूना लगाते हुए अपने बांग्लादेशी रिश्तेदारों को 7 लाख रुपए भेजा। 

आरोपित टीएमसी नेता और नाबाग्राम ब्लॉक में गुरपशला ग्राम पंचायत के उप प्रमुख समसुल अरफिन ने मनरेगा से पैसा इकट्ठा करने के लिए अपने रिश्तेदारों के नाम से फर्जी जॉब कार्ड बनवाए थे। कथित तौर पर, अरफिन ने समान लाभार्थियों के नाम के वेरिएंट का उपयोग करके नकली जॉब कार्ड बनाए और एटीएम कार्ड का उपयोग करके बैंकों और डाकघरों से पैसे निकाले। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, उसने धोखाधड़ी से प्राप्त धन अपने रिश्तेदारों को ट्रांसफर कर दिया, जिनमें से 13 बांग्लादेशी नागरिक हैं।

लिखित शिकायत के बाद, एक पूर्व खंड विकास अधिकारी (नबाग्राम) ने आंतरिक जाँच की और पाया कि गुरपशला ग्राम पंचायत के उप प्रमुख और अन्य कर्मचारी सदस्य धन के दुरुपयोग में शामिल थे। पूर्व बीडीओ ने अरफिन और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की। जिसके बाद दिसंबर 2019 में नबाग्राम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।

वर्तमान बीडीओ पंकज दास के अनुसार भारती दंड संहिता की धारा 34, 406, 409, 420 और 486 के तहत मामला दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, अरफिन ने अग्रिम जमानत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। अदालत ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन आरोपित अरफिन को गिरफ्तार नहीं किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने गिरफ्तारी का आश्वासन देते हुए माना कि कुछ कर्मचारियों की मदद से अरफिन ने सरकारी धन का गबन किया। 

मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

मामले के बारे में बात करते हुए, TMC के प्रवक्ता अपूर्वा सरकार ने कहा, “अगर उप प्रमुख सरकारी धन के कथित गबन में शामिल है, तो प्रशासन को उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है। हम उसमें ढाल नहीं बनेंगे। ”

बांग्लादेशियों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकारी धन के दुरुपयोग पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मीर बादाम अली ने कहा, “कुछ कर्मचारियों की मदद से अरफिन ने सरकारी धन का गबन किया। कुछ लाभार्थी नाबालिग भी हैं। टीएमसी नेता ने बांग्लादेशी नागरिकों को केंद्र सरकार की एक परियोजना से पैसा बनाने में मदद की।”

चक्रवाती तूफान अम्फान के मुआवजे में भ्रष्टाचार

गौरतलब है कि इस साल जून में पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान अम्फान के दौरान दिए जाने वाले मुआवजे में भी टीएमसी नेताओं पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था, जिसके बाद सीएम ममता बनर्जी को मजबूरन जाँच का आदेश देना पड़ा।

राज्य सरकार ने उन 5 लाख पीड़ितों में से हर एक को, जिनके घर नष्ट हो गए थे, 20000 रुपए देने की घोषणा की थी। लेकिन सीएम के पास 2000 से अधिक शिकायतें भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दर्ज की गई थीं।

कई टीएमसी ग्राम पंचायत सदस्यों और उनके रिश्तेदारों, जिनके पास पक्के मकान थे और उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ था, उन्हें राहत राशि मिली थी, जबकि जो वाकई में पीड़ित थे, उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। कुछ TMC नेताओं ने बिना किसी नुकसान के भी इसका लाभ उठाया और इसे यह कहते हुए जायज ठहराया कि राहत नागरिकों के बीच वितरण के लिए है, इसीलिए उन्होंने भी इसका लाभ उठाया। कई आरोपों के बाद राज्य सरकार ने जाँच का आदेश दिया था। बाद में, उच्च न्यायालय ने CAG से मामले की जाँच करने को कहा था।

शौहर मुफ़्ती अनस ने ही वायरल कर दी सना खान की हनीमून वाली न्यूड तस्वीरें? सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे का सच

अभिनेत्री सना खान हाल ही में निकाह के बाद हनीमून के लिए जम्मू-कश्मीर गई थीं, जहाँ की यात्रा की उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से पल-पल की जानकारी दी थी। सना खान ने इस्लाम का हवाला देते हुए मनोरंजन जगत को अलविदा कह दिया था। अब उनकी कुछ न्यूड व आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इनके बारे में दावा किया जा रहा है कि ये उनके शौहर मौलाना मुफ़्ती अनस ने ही वायरल की है।

इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लोग दावा कर रहे हैं कि सना खान के शौहर ने ही हनीमून की तस्वीरें वायरल कर दी हैं और इन तस्वीरों को उन्होंने ही अपने फोन के कैमरे से क्लिक किया था। एक ट्विटर यूजर ने इन तस्वीरों को कोट करते हुए पूछा, “भला कोई व्यक्ति अपनी बीवी की ही हनीमून वाली तस्वीरें कैसे सोशल मीडिया पर डाल सकता है?” फेसबुक पर एक व्यक्ति ने दावा किया कि सना खान ने ऐसी तस्वीरें वायरल कर इस्लाम को नुकसान पहुँचाया है।

अब आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। असल में जो तस्वीरें शेयर की जा रही हैं, वो सना खान के हनीमून की हैं ही नहीं। फोटो कोलाज को काफी करीब से देखने पर पता चलता है कि उस पर ‘ABP News’ का लोगो लगा दिया गया है। ये इसीलिए किया गया है, ताकि प्रदर्शित किया जा सके कि इन तस्वीरों को लाइव चल रहे न्यूज़ चैनल के वीडियो से स्क्रीनशॉट लिया गया है। जबकि, इसे ABP की ही एक खबर से उठाया गया है।

TOI ने अपनी पड़ताल में पाया कि ABP ने इस सम्बन्ध में दिसंबर 14, 2020 को खबर प्रकाशित की थी, जिसमें सना खान के हनीमून की तस्वीरें थीं, लेकिन इनमें से एक भी आपत्तिजनक नहीं थी। इन्हीं तस्वीरों में से एक को उठा कर उसके साथ अन्य तस्वीरें लगा कर ये दावा वायरल किया गया। असल में ऊपर संलग्न किए गए ट्वीट में जो पहली तस्वीर है, उसे ‘वजह तुम हो’ फिल्म से उठाया गया है।

गाने से उठा कर कोलाज में लगा दी गई थी तस्वीर

बता दें कि सना खान भी इस फिल्म का हिस्सा थीं। मीडिया में अक्सर डिस्प्ले के लिए ‘प्रतीकात्मक चित्र’ का इस्तेमाल किया जाता है और ऐसा सभी संस्थान करते हैं। इसीलिए सना खान वाली खबर में फीचर इमेज को ही उठा कर ये दावा कर दिया गया कि ये हनीमून की है। इसका कोलाज बना कर सोशल मीडिया के कुछ यूजरों ने उठा लिया और फिर दावा करने लगे कि सना खान के शौहर ने ही उनकी न्यूड तस्वीरें वायरल कर दी हैं।

दिसंबर 21, 2020 को सना खान ने एक वीडियो में निकाह के एक माह पूरे होने की जानकारी देते हुए अपनी खुशी जाहिर की थी। सना ने बताया था कि मुफ्ती अनस से निकाह करना उनका अब तक का सबसे बेस्ट निर्णय था। उन्होंने लिखा था, “पिछले महीने इसी दिन मैंने कुबूल है कहा था। आज एक महीना हो चुका है, बस ऐसे ही हँसते-हँसते पूरी जिंदगी निकल जाए। मैंने जिंदगी का बेस्ट फैसला लिया है। ये दुपट्टा मेरी सासू माँ ने मेरे लिए बनाया था।”

कहाँ गए जैक मा, लुसी क्यों बनी फेस? कम्युनिस्ट सरकार की आलोचना के बाद से चीनी अरबपति के साथ क्या हो रहा

चीन की कम्युनिस्ट सरकार और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ख़िलाफ़ बोलने वाले चीनी अरबपति जैक मा के साथ एक अजीब घटना हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अफ्रीकन टैलेंट शो से अचानक गायब कर उनकी जगह किसी और को दे दी गई। शो के वेबपेज से भी उनकी तस्वीर हटा दी गई और प्रमोशनल वीडियो से भी उन्हें अलग कर दिया गया।

अफ्रीकन बिजनेस हीरोज नाम के शो का ग्रांड फिनाले नवंबर में हुआ था। इसके कुछ दिन बाद ही चीन के अरबपति ने चीन के नियामकों और उनके स्वामित्व वाले बैंकों की तीखी आलोचना की थी। उनके भाषण के बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने जैक मा के बयानों के ख़िलाफ़ कड़ी प्रतिक्रिया दी और जैक मा की एंट कंपनी को मिलने वाली 37 बिलियन डॉलर की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (initial public offering) चीन अधिकारियों द्वारा निलंबित कर दी गई। वॉल स्‍ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक जैक मा के एंट ग्रुप के आईपीओ को रद्द करने का आदेश सीधा चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से आया था। 

इस निलंबन के बाद जैक मा सार्वजनिक स्थलों पर नहीं दिखे यानी वह पूरे दो माह से गायब हैं। इधर, चीनी अधिकारियों ने अलीबाबा के ख़िलाफ़ एंटी-मोनोपॉली की जाँच की घोषणा कर दी है। वहीं जैक मा के शो की यदि बात करें तो उससे गायब होने के पीछे अलीबाबा के प्रवक्ता ने बताया कि शो शेड्यूल के कारण जैक मा अफ्रीका के बिजनेस हीरो कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाए। मगर, अलीबाबा के प्रवक्ता के इस बयान से कई लोग सहमत नहीं हैं।

लोग इस बात को नहीं मान पा रहे कि जैक एक ऐसा प्रोग्राम केवल शेड्यूल के कारण छोड़ सकते हैं जिसका प्रमुख चेहरा ही वह खुद थे। सैयद अकबरुद्दीन लिखते हैं कि ये स्थिति बिलकुल ऐसी है जैसे कौन बनेगा करोड़पति से अमिताभ बच्चन गायब हो जाएँ, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि शेड्यूल को लेकर उनका विवाद हो गया हो।

बता दें कि जैक मा को लुसी पेंग से रिप्लेस किया गया है। वह भी अलीबाबा का ही एक हिस्सा है। लेकिन जैक मा के न होने से शो के प्रतिभागी में से एक का कहना है कि जैक मा के साथ चीन में कुछ हो रहा है इसलिए वह यहाँ नहीं आ पाए और उनकी जगह लुसी आई हैं।

56 साल के जैक मा एक समय में कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे बड़े पोस्टर बॉय थे। लेकिन जब उन्होंने चीनी प्रशासन के ख़िलाफ़ बोलना शुरू किया तो दोनों के रिश्तों में खटास आ गई। दुनियाभर में करोड़ों लोगों के आदर्श रहे जैक मा ने सरकार से आह्वान किया था कि ऐसे सिस्‍टम में बदलाव किया जाए जो ‘बिजनस में नई चीजें शुरू करने के प्रयास को दबाने’ का प्रयास करता है। उन्‍होंने वैश्विक बैंकिंग नियमों को ‘बुजुर्ग लोगों का क्‍लब’ करार दिया था। 

गौरतलब है कि इससे पहले शी जिनपिंग की आलोचना करने वाले प्रॉपर्टी बिजनसमैन रेन झिकियांग लापता हो गए थे। उन्‍होंने कोरोना से सही से नहीं निपटने के लिए शी जिनपिंग को ‘मसखरा’ बताया था। बाद में उन्‍हें 18 साल के लिए जेल भेज दिया गया। चीन के एक अन्‍य अरबपति शिआन जिआनहुआ वर्ष 2017 से नजरबंद हैं।

J&K: पत्थरबाजी में 90% गिरावट, 370 हटने से पहले पत्थरबाज खूब मचाते थे हुल्लड़

जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथियों द्वारा सेना और सुरक्षबलों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में साल 2016 से लेकर साल 2020 तक 90% की गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी खुद पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने मीडिया के साथ साझा की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि साल 2019 की तुलना में इस साल हुई पत्थरबाजी की घटनाओं में 87.13% की गिरावट हुई है। साल 2019 में, पत्थरबाजी की 1,999 घटनाएँ हुईं थीं, जिनमें से 1,193 बार यह पत्थरबाजी केंद्र सरकार द्वारा साल 2019 के अगस्त माह में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने की घोषणा के बाद हुईं।

पुलिस महानिदेशक के अनुसार, “साल 2019 में हुई पत्थरबाजी की घटनाओं और वर्ष 2020 की तुलना में 87.13% की गिरावट दर्ज की गई। 2020 में 255 बार पत्थरबाजी की घटनाएँ हुई हैं।”

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 और 2017 में 1,458, और 1,412 बार पत्थरबाजी की घटनाएँ सामने आईं थीं। अधिकारियों के अनुसार, 2016 की तुलना में, 2020 में ऐसी घटनाओं में गिरावट 90% रही है।

वर्ष 2016 में, 2,653 पत्थरबाज़ी के मामलों की सूचना मिली थी। यह वही साल है जब आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के एक कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद पूरे कश्मीर में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। जबकि, 2015 में, जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की 730 घटनाएँ हुईं थीं। सेना ने बताया था कि नोटबंदी के बाद भी पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी आई थी।

5 अगस्त, 2019 को केंद्र ने अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया, जिसके अंतर्गत जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा हासिल था। इस फैसले के साथ ही जम्मू-कश्मीर के विभाजन से 2 केंद्र शासित प्रदेश- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बने हैं।

घाटी में उग्रवाद में गिरावट के बाद, विरोध प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथियों ने पत्थर को एक ‘लोकप्रिय’ हथियार का विकल्प बनाया है। पत्थरबाजी का हथियार जम्मू-कश्मीर में 2008 के अमरनाथ-भूमि आंदोलन के बाद से प्रचलित होती गई।

इसके बाद से देशभर के कई हिस्सों में समुदाय विशेष ने पत्थरबाजी को अपने विरोध का एक सुलभ जरिया बनाया है। यही नहीं, दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में पत्थरों का भारी मात्रा में इस्तेमाल किया गया। पत्थरबाजी का यह चलन साल 2010, 2016 और 2019 में सबसे ज्यादा देखा गया।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, “कानून और व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है। 2021 के लिए हमारा संकल्प जम्मू और कश्मीर में शांति बनाए रखना और स्थिति को नियंत्रित एवं मजबूत करना है।”