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किसान आंदोलन को अब डीटीएच कनेक्शन भी मिला: मसाज, पिज्जा, जिम, टैटू… पहले से ही हैं सारे इंतजाम

नए कृषि कानूनों को लेकर प्रदर्शन कर रहे पंजाब और हरियाणा के परेशान किसान जिंदगी का असली मजा लेते हुए देखे जा रहे हैं। जिस तरह की तस्वीरें धरना प्रदर्शन स्थलों से आ रही हैं, ऐसा लगता नहीं है कि ये किसान जल्दी ही किसी नतीजे पर पहुँचने के मूड में हैं।

हाई-टेक मसाज और टैटू पार्लर, जिम लंगर, लाइब्रेरी, पिज्जा और बिरयानी के बाद, अब कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जहाँ प्रदर्शनकारी किसान अपने ट्रैक्टरों में आराम से बैठे टेलीविजन देख रहे हैं। यही नहीं, अपने टीवी देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए, ‘किसानों’ ने अपने ठिकानों के छत पर ‘टाटा स्काई’ भी लगा रखे हैं।

प्रदर्शनकारी आराम से टीवी देखते हुए (YouTube Screengrab/Lallantop)

‘हिटलर के लिंग’ की माप बताकर चर्चा में आई वेबसाइट ‘दी लल्लनटॉप’ के एक एंकर से जलंधर से प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे एक किसान ने बात करते हुए कहा कि वे सिंघु सीमा पर कम से कम 6 महीने तक रहने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि वो पर्याप्त राशन, कपड़े और अगले 6 महीनों तक जरूरत के लगभग सभी साधन अपने साथ लेकर आए हैं।

किसान विरोध प्रदर्शन के बीच किसानों के ठिकानों पर लगे ‘टाटा स्काई’ (YouTube Screengrab / Lallantop)

उन्होंने अपने ठिकानों के भीतर मोबाइल फोन, टीवी और डीटीएच कनेक्शन के साथ-साथ पोर्टेबल चार्जर, इलेक्ट्रिक चार्जर एक्सटेंशन आदि का इंतजाम कर रखा है।

सिंघु सीमा पर कम्युनिस्ट लीडर्स की पुस्तकों वाली लाइब्रेरी

इससे पहले, ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सिंघु बॉर्डर पर लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी, जिसमें कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को पढ़ने की सामग्री, जैसे- किताबें और अखबार दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस पुस्तकालय में आंदोलनकारियों को वर्तमान विषयों पर चर्चा करने और झुग्गी के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने और उनके सिलेबस को पूरा करने में मदद करेगा।

किसानों को शिक्षित करने के लिए लॉन्च हुए डिजिटल न्यूज़लेटर

किसानों के विरोध के बीच, ‘ट्रॉली टाइम्स’ के नाम से एक द्वि-साप्ताहिक (माह में दो सप्ताह) समाचार पत्र लॉन्च किया गया। इस डिजिटल समाचार पत्र में क्यूआर कोड की मदद से डिजिटल रूप से भी पढ़ा जा सकता है। लोगों का तर्क है कि किसानों को सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए मंच आसानी से नहीं मिलता और इस समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें एक ऐसा मंच देने की कोशिश की गई है, जिससे किसान अपनी बातों को सरकार तक पहुँचा सकें, साथ ही सरकार की योजनाएँ और विचार किसानों तक आसानी से पहुँच सके।

किसानों के लिए मसाज केंद्र

हाल ही में हमने एक रिपोर्ट में बताया था कि ‘किसानों’ ने सार्वजनिक सड़कों को पिकनिक स्पॉट में बदल दिया है। प्रदर्शन स्थलों पर एक सिख संगठन ‘खालसा एड’ द्वारा लगाए गए खास फुट मसाजर के जरिए किसान प्रदर्शनकारियों को पैरों की मालिश करवाते हुए और आराम करते हुए देखा गया।

मसाज पार्लर के अलावा किसान प्रदर्शनकारियों के लिए पिज्जा, टैटू बनाने की व्यवस्था के साथ-साथ जिम की भी व्यवस्था ने सभी लोगों को हैरान कर रखा है।

जेल में कैदी मुझे पीटते हैं, आतंकवादी कहते हैं: दिल्ली दंगों में गिरफ्तार इशरत जहाँ ने कोर्ट से लगाई बचाने की गुहार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून के तहत गिरफ्तार पूर्व कॉन्ग्रेस पार्षद इशरत जहाँ ने मंगलवार (दिसंबर 22, 2020) को अदालत के सामने आरोप लगाया कि मंडोली जेल में कैदियों ने उनके साथ बुरी तरह से मारपीट की और उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जेल अधिकारियों को इशरत जहाँ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत ने जेल अधिकारियों से बुधवार (दिसंबर 23, 2020) को विस्तृत रिपोर्ट देने और बताने को कहा कि इस मुद्दे के हल के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और क्या इशरत को किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करने की जरूरत है।

जब अदालत ने मंडोली जेल की सहायक अधीक्षक से पूछा कि क्या ऐसी कोई घटना हुई है, तो उन्होंने इसकी पुष्टि की और कहा कि जरूरी कदम उठाए गए हैं। इस पर अदालत ने जेल अधिकारी से कहा कि वह (इशरत जहाँ) पूरी तरह से डरी हुई हैं। तुरंत उनसे बात करें और स्थिति को समझें। उनकी आशंका और डर को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दायर करें।

न्यायाधीश ने जेल अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जहाँ को बुधवार को अदालत में पेश करने का भी निर्देश दिया। इशरत जहाँ ने अदालत में सीधे दलीलें पेश करते हुए कहा कि यह एक महीने के भीतर दूसरी घटना थी और वह लगातार शारीरिक एवं उत्पीड़न के कारण काफी तनाव में हैं।

इशरत जहाँ ने आरोप लगाया कि एक महीने में यह दूसरी घटना है। उन्होंने कहा, “आज सुबह 6:30 बजे, उन्होंने (कैदियों ने) मुझे बुरी तरह पीटा और गाली-गलौज की। उनमें से एक ने अपना हाथ भी काट लिया ताकि झूठी शिकायत करने पर मुझे सजा दी जाए। सौभाग्य से, जेल अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। मैंने लिखित शिकायत भी की है। वे मुझे आतंकवादी कहते रहते हैं। उन्होंने मुझसे कैंटीन में पैसे की भी माँग की।”

इशरत की ओर से पेश वकील प्रदीप तेवतिया ने आरोप लगाया कि पहले भी कैदियों ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद कैदियों में से एक को दूसरी जेल भेज दिया गया। सुनवाई के दौरान मौजूद वकील मिस्बाह बिन तारिक ने अदालत से तत्काल कार्रवाई करने और इशरत जहाँ की स्थिति पर तत्काल गौर करने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के बाद इशरत जहाँ को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। इशरत जहाँ लगातार भड़काऊ भाषण देकर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के मुस्लिमों को भड़का रही थी।

इशरत जहाँ ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा था- “हम मर भी जाएँ लेकिन यहाँ से नहीं हटेंगे। हम आज़ादी लेकर रहेंगे।” इशरत के समर्थक खालिद ने भीड़ से पुलिस पर जम कर पत्थरबाजी करने को कहा था। साबू अंसारी उस भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जिसने पुलिस को खदेड़ते हुए पत्थरबाजी की थी।

न वो निर्भया थी, न मंदिर में मिली थी लाश: 28 साल बाद आया ये ‘इंसाफ’ बताता है कि चर्च के गुनाहों के प्रति हम कितने सहिष्णु

वो भी 1 दिसंबर था, लेकिन वो निर्भया थी। इसलिए उसका नाम तो आपने सुना होगा, लेकिन किसी ने सिस्टर अभया का नाम नहीं सुना। कठुआ कांड में जब शव मंदिर में मिला था तो हिन्दुओं के धर्म को निशाना बनाते कार्टून भी आपने देखे ही होंगे।

इस घटना में वैसे कोई कार्टून नहीं बने थे। न तो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई हंगामा मचा, न ही कोई प्रदर्शन दिल्ली में दिखाई दिए। केरल में अपने ही कॉन्वेंट में जब सिस्टर अभया का शव मिला तो ये भी तय नहीं हो पाया कि ये हत्या है भी या नहीं। उनकी लाश 27 मार्च 1992 को कॉन्वेंट के ही कुएँ में पाई गई थी। पायस टेंथ कॉन्वेंट में उस वक्त 123 लोग रहते थे, जिनमें से 20 कैथोलिक नन थीं। इस मामले में गवाही देने वालों में से कई पलटते भी रहे।

मामले को 28 वर्ष, यानी कि करीब तीन दशक बीत जाने के बाद उस 19 वर्षीय किशोरी नन की हत्या के मामले में फैसला आया है। इस मामले का फैसला उतना आसान नहीं था। हत्यारों की पहुँच और रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस जाँच में जो नार्को टेस्ट हुआ, उसकी सीडी तक बदल दी गई थी।

जाँच में तकनीकी विशेषज्ञों (सी-डीआईटी की थिरुवनंतपुरम टीम) को पता चला कि गिरफ़्तारी से पहले जिन तीन लोगों का नार्को टेस्ट लिया गया है, उनकी सीडी से छेड़छाड़ की गई है। पादरी थॉमस की सीडी जो कि 32 मिनट 50 सेकंड की थी, उसे 30 जगह एडिट किया गया था। पूथरुकायिल की सीडी को 19 जगह से, जबकि सिस्टर सेफी की 18 मिनट 42 सेकंड की सीडी को 23 जगह से एडिट किया गया था।

जाँच पर जब सिस्टर लेस्सुइए को शक हुआ तो इस मामले की जाँच का काम स्थानीय पुलिस से लेकर सबसे पहले तो केरल पुलिस की ही क्राइम ब्रांच को 13 अप्रैल 1992 को दिया गया। हत्यारे ऐसे थे कि क्राइम ब्रांच ने भी 30 जनवरी 1923 को अपनी रिपोर्ट देकर कहा कि सिस्टर अभया ने आत्महत्या की है। उनके हाथ से मामला 29 मार्च 1993 को सीबीआई को दे दिया गया।

उस समय के मुख्यमंत्री के. करुणाकरण ने 65 से अधिक ननों के कहने पर जाँच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई के एसपी एके ओहरी की रिपोर्ट को अदालत ने खारिज कर दिया। मामला अब डिप्टी एसपी सुरिंदर पाल के हाथ में गया और उन्होंने कहा कि ये हत्या तो है, लेकिन अपराधियों को अब ढूँढा नहीं जा सकता। इसलिए मामले को बंद कर दिया जाए। अदालत ने सीबीआई की इस रिपोर्ट को भी मानने से इनकार कर दिया और अब मामला एक तीसरे अधिकारी आरआर सहाय के हाथ में गया।

आरआर सहाय ने 25 अगस्त 2005 को अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा कि इस मामले को अनसुलझा कहकर बंद किया जाना चाहिए लेकिन अदालत ने उसे भी मानने से इनकार कर दिया। मामले की जाँच 4 सितम्बर 2008 को सीबीआई की कोच्चि स्थित केरल यूनिट के हाथ में दी गई। डिप्टी एसपी नंदकुमारण नायर ने पता लगा लिया कि पादरी थॉमस को सिस्टर अभया की मौत से एक दिन पहले कॉन्वेंट में देखा गया था।

इसके बाद 19 नवम्बर 2008 को पादरी थॉमस, पूथरुकायिल और सिस्टर सेफी को गिरफ्तार कर लिया गया। करीब एक साल बाद 17 जुलाई 2009 को जब सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की तो मामले की सुनवाई शुरू हुई। शक की वजह से नार्को टेस्ट 2007 में ही हो चुका था और पिछले वर्ष अदालत ने नार्को टेस्ट को सबूत के तौर पर स्वीकारने से मना भी कर दिया।

कातिल पकड़े कैसे गए? कह सकते हैं कि इन अपराधियों को दण्डित करने की इच्छा स्वयं भगवान की ही थी। जिस वक्त ये हत्या हुई, करीब-करीब उसी वक्त राजू उर्फ़ अदकाका बिजली का सामान चोरी करने के लिए चर्च में घुसा था। उसने दोनों अपराधियों पादरी थॉमस और पादरी जोश को देख लिया था।

पादरी थॉमस और पादरी जोश के सिस्टर सेफी से संबंध थे। उस सुबह जब सिस्टर अभया पानी पीने गई थी तो उसने पादरी थॉमस और पादरी जोश को सिस्टर सेफी के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया। वो औरों को बता ना दे इसलिए पादरी थॉमस ने सिस्टर अभया का गला घोंटा और सिस्टर सेफी ने उस पर कुल्हाड़ी से वार किया। सिस्टर अभया जीवित ही थी जब तीनों ने मिलकर उसे कुँए में फेंक दिया। सिस्टर अभया का नकाब, उसके चप्पल, खुले हुए फ्रिज, बहे हुए पानी, गिरी हुई बोतल वगैरह से पता चला था कि सिस्टर अभया पर हमला कहाँ हुआ था।

उस कमरे से खून के निशान शायद साफ कर दिए गए थे। सायरो मालाबार कैथोलिक चर्च की नन, सिस्टर अभया की हत्या के मामले में सबूत मिटाने का आरोप केरल पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अफसर केटी माइकल पर भी था, लेकिन पिछले वर्ष वो छूट गया।

इस मामले में कुल 177 गवाह थे, जिनमें से कई की मामले के दौरान ही मृत्यु हो गई। मुख्य गवाह राजू (जो चोरी करने के लिए घुसा था) उसने भी कहा था कि पुलिस ने मारपीट कर हत्या का आरोप उसी से स्वीकार करवाने की कोशिश की थी। इस मामले में हत्या के आरोपित अभी अपराधी तो सिद्ध हो गए हैं, लेकिन उन्हें सजा बाद में सुनाई जाएगी।

बाकी करीब तीस साल बाद आए इस फैसले पर ‘जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड (justice delayed is justice denied)’ कहा जाए, या ‘भगवान के घर देर है अंधेर नहीं’, ये समझ में नहीं आता। चर्च से जुड़े अपराधों की दूसरी घटनाओं की ही तरह, ये पहले पन्ने की खबर नहीं होगी, इतना तो पक्का कहा जा सकता है।

जिस ‘केरल मॉडल’ का लिबरलों ने बजाया था झुनझुना, उसका दम घुटा: कोरोना संक्रमण में महाराष्ट्र को पीछे छोड़ा

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नवीनतम COVID-19 आँकड़ों के अनुसार, भारत में 2,92,518 सक्रिय मामलों में से अकेले केरल राज्य में 60,670 सक्रिय मामले हैं, जो कि महाराष्ट्र से भी ज्यादा है। महाराष्ट्र में वर्तमान में कोरोना वायरस के सक्रीय मामले 60,593हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MOHFW) ने रविवार को कहा कि देश में कुल सक्रिय मामलों में से 40 फीसदी केस केरल और महाराष्ट्र राज्यों में हैं।

COVID -19 महामारी के प्रबंधन में केरल राज्य का प्रदर्शन पिछले कुछ महीनों से फिर बिगड़ रहा है, और यह कोरोना वायरस संक्रमण के शीर्ष पाँच राज्यों में बना हुआ है और अब यह सक्रिय मामलों की अधिकतम संख्या में पहले स्थान पर है।

केरल सरकार द्वारा जारी COVID -19 मामलों की जानकारी के अनुसार, राज्य जुलाई के अंतिम सप्ताह तक बेहतर कर रहा था, जिसके बाद से स्थिति बिगड़ने लगी। केरल में पहला मामला जनवरी, 2020 में दर्ज किया गया था। 10 सितंबर तक यह आँकड़ा 1,00,000 पार करते ही राज्य के लिए चुनौती बन गया। अक्टूबर माह में, राज्य कुल कोरोना वायरस मामलों के मामले में तीसरे स्थान पर था। 1,00,000 मामलों तक पहुँचने में केरल को जहाँ 6 महीने लगे, वहीं 10 सितंबर के बाद महज तीन महीने से भी कम समय में, राज्य में 6,00,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए।

केरल में COVID-19 मामलों का ग्राफ (चित्र: केरल सरकार COVID डैशबोर्ड)

वामपंथी मीडिया लगातार करती रही है केरल की प्रशंसा

केरल के ‘COVID-19 मॉडल’ की लगातार ही देशभर में सराहना की गई। वामपंथी मीडिया ने हर संभव तरीके से वामपंथी सत्ता वाली केरल सरकार की प्रशंसा की, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों द्वारा इस बीमारी को रोकने के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की अनदेखी की गई। यहाँ तक ​​कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जुलाई माह में केरल के COVID प्रबंधन पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की। उस अवधि के दौरान, शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार इस बीमारी को रोकने के लिए संघर्षरत था और सबसे अधिक मामलों के साथ महाराष्ट्र अभी भी शीर्ष पाँच राज्यों में है।

केरल मॉडल और अंतरराष्ट्रीय मामला

केरल मॉडल की प्रशंसा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जमकर की गई और कहा गया कि सभी देशों को केरल मॉडल से सीखना चाहिए –

यहाँ तक कि समाचार नेटवर्क ‘अलजज़ीरा’ ने भी केरल की तारीफों के पुल बाँधे और बताया कि वामपंथियों का केरल ‘कोरोना मॉडल’ किस तरह बन गया-

14 मई, 2020 को ब्रिटिश दैनिक समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ ने केरल के स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को ‘रॉकस्टार’ कहा था –

शैलजा केके ने इस साल जून माह में संयुक्त राष्ट्र की बैठक में ‘केरल मॉडल’ भी प्रस्तुत किया। वास्तव में, विदेशी मीडिया से प्रशंसा प्राप्त करने के लिए, केरल की स्वास्थ्य मंत्री शैलजा केके ने अन्य भारतीय राज्यों के बारे में बीबीसी के पास चुगली की। शैलजा ने दावा किया कि गोवा में कोई अस्पताल ही नहीं है।

कहाँ चूक गया केरल?

केरल में प्रवासी भारतीयों की बड़ी आबादी है। राज्य में पहला मामला 30 जनवरी को दर्ज किया गया था और 20 दिसंबर 2020 की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के मामलों ने 7 लाख के आँकड़े को पार कर लिया था।

केरल राज्य ने शुरुआत में ही देशव्यापी बंद के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया था और प्रशासन ने हालातों प्रकोप पर काबू पा लिया। हालाँकि, जैसे-जैसे सख्ती में कमी आई और लोगों में सुरक्षा की भावना पैदा होने लगी, दिशानिर्देशों की अनदेखी की जाने लगी। इसका नतीजा यह हुआ कि कोरोना के मामलों की संख्या में वृद्धि हुई, और आँकड़े राज्य की छवि के विपरीत होते गए। यह ध्यान रखना होगा कि जब मई में केरल में मामलों की संख्या बढ़ रही थी, सीएम ने समुदाय विशेष के त्यौहार ईद के दौरान कोरोना के कारण जारी प्रतिबंधों को कम करने का फैसला किया था।

नवंबर माह में जब केरल राज्य से नए कोरोना मामले सबसे ज्यादा आ रहे थे, केरल के स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने कहा कि जनसांख्यिकीय और महामारी विज्ञान इन आँकड़ों में उछाल के पीछे जिम्मेदार कारक थे। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में त्यौहारों और कई राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण इन मामलों में उछाल आया। यही नहीं, उन्होंने अन्य राज्यों और विदेश से प्रवासियों की वापसी को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों के आँकड़ें मिलाकर कुल मामलों का 7% हैं जबकि महाराष्ट्र और केरल राज्यों में पूरे कोरोना मामलों के 40% केस मौजूद हैं। यहाँ पर यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि अगर महाराष्ट्र और केरल की जनसंख्या को भी मिला दिया जाए, तब भी अकेले उत्तर प्रदेश की जनसंख्या इनसे अधिक ही है।

23846 मंदिरों पर आंध्र सरकार का नियंत्रण, चर्च-मस्जिदों की तरह ​हिंदुओं को मिले: पूर्व IAS/IPS की CM जगन से डिमांड

मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मु​क्त करने की माँग लगातार उठती रहती है। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टी हनुमान चौधरी ने कुछ रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ मुहिम शुरू की है। राज्य की जगनमोहन सरकार से इन लोगों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मॉंग की है।

इस संबंध में क्राउडकैश (CrowdKash) की याचिका को डॉ. चौधरी सहित कई नामचीन व्यक्तियों मसलन पूर्व आईएएस अधिकारी आईवाईआर कृष्णा राव, के पद्मनाभैया और पूर्व IPS अधिकारियों एम नागेश्वर राव और के अरविन्द राव का समर्थन हासिल है। इन्होंने मंदिरों का प्रबंधन हिन्दुओं के हवाले करने की माँग की है।

याचिका में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश सरकार 23,846 हिंदू मंदिरों और उनकी संपत्तियों को नियंत्रित करती है। इनकी कीमत हजारों करोड़ रुपए है। डॉ. चौधरी का कहना है कि हिंदुओं को अपने मंदिरों के प्रबंधन में उतनी ही स्वतंत्रता होनी चाहिए जितनी कि मस्जिदों और चर्चों के प्रबंधन के लिए दी गई है।

डॉ. चौधरी कहते हैं, “हिंदू मंदिरों के प्रबंधन और प्रशासन से खुद को अलग कर लें। आप (मंदिरों) को सौंपने की तिथि घोषित करें और हिंदुओं से सुझाव माँगे कि मंदिरों को किसे सौंपा जाना चाहिए।” उन्होंने जगन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार से अपील की कि वह 31 दिसंबर 2021 तक मंदिरों का नियंत्रण हिंदुओं को सौंप दे।

इस याचिका पर अब तक 7,000 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में यह भी माँग की गई है कि आंध्र प्रदेश धर्मार्थ और हिंदू धार्मिक संस्था अधिनियम, 1987 को निरस्त किया जाए और इसके स्थान पर एक नया कानून बनाया जाए।

याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं को हिंदू मंदिरों और उनकी संपत्तियों को धार्मिक व्यक्तियों और सरकार के साथ हिंदू प्रतिनिधियों को शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि धन, संपत्ति और मंदिरों के सभी संसाधनों का उपयोग केवल हिंदू मंदिरों के रखरखाव एवं विकास के लिए, हिंदुओं और हिंदू समुदाय की धार्मिक भलाई के लिए, हिंदू धर्म के संरक्षण, प्रचार और प्रसार के लिए किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश सरकार ईसाइयों पर काफी मेहरबान रहती है। पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के सत्ताधारी दल के ही एक सांसद ने ईसाई धर्मांतरण को सरकारी संरक्षण दिए जाने का खुलासा किया था। इसके बाद ऐसे इलाके में चर्च का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया जहॉं केवल हिंदू ही रहते हैं। इतना ही नहीं जब ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई तो प्रशासन ने उनका कथित तौर पर उत्पीड़न किया। 

धर्मांतरण को लेकर मिशनरीज की हकीकत का खुलासा करने वाले YSRCP नेता रघु रामकृष्णा राजू ने प्रदेश की सच्चाई बताते हुए खुलेआम कहा था कि सरकारी रिकॉर्ड में भले ही ईसाइयों की संख्या 2.5% है मगर, हकीकत में ये आँकड़ा 25% से कम नहीं है।

वहीं आंध्र प्रदेश में NGO ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ ने अपनी रिसर्च में पाया था कि राज्य में 29841 ईसाई पादरियों को 5000 रुपए का एकबारगी मानदेय दिया गया। ये रुपए ‘डिजास्टर रिलीफ फण्ड’ से दिए गए। साथ ही इनमें से 70% ऐसे हैं, जिनके पास SC/OBC जाति प्रमाण-पत्र थे। जिसके बाद केंद्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस मामले में कार्रवाई के लिए आंध्र प्रदेश के अधिकारी को पत्र लिखा था।

सुजैन खान, सुरेश रैना और गुरु रंधावा समेत 34 गिरफ्तार, भाग निकला रैपर बादशाह: उद्धव सरकार को अँगूठा दिखा कर रहे थे मौज-मस्ती

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए 5 जनवरी तक नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर रखा है। लेकिन, पहले ही दिन इस नियम का उल्लंघन करते हुए पार्टी करने के आरोप में कई सेलिब्रिटी गिरफ्तार किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मुंबई पुलिस ने एक नाइट क्लब में छापेमारी के दौरान मशहूर गायक गुरु रंधावा, ऋतिक रौशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान, भारतीय क्रिकेटर सुरैश रैना समेत कई नामी हस्तियों को आज (दिसंबर 22, 2020) सुबह गिरफ्तार किया। इन सभी के ख़िलाफ़ पुलिस ने कोविड-19 नियमों को तोड़ने के आरोप में केस दर्ज किया है।

मिली जानकारी के अनुसार नाइट कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर मुंबई पुलिस ने नाइट क्लब पर छापा मारकर सेलिब्रिटीज सहित 34 लोगों को गिरफ़्तार किया।

मिड डे में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई की सहार पुलिस ने रात के क़रीब 2.30 बजे एयरपोर्ट के नज़दीक स्थित ड्रैगन फ्लाई क्लब पर रेड मारी। छापे में पुलिस ने पाया कि क्लब में महाराष्ट्र सरकार के नाइट कर्फ्यू का उल्लंघन चल रहा था। इसके बाद वहाँ से 34 लोग गिरफ्तार किए गए। इनमें से 19 लोग दिल्ली और पंजाब के थे। अन्य साउथ बॉम्बे के निवासी थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार रैपर बादशाह भी इस पार्टी में मौजूद थे। लेकिन मौका मिलते ही वह भागने में कामयाब हो गए। पुलिस का कहना है कि उन्हें कई नाइट क्लबों को लेकर शिकायत मिली थी कि वे कोरोना नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग आदि कुछ पालन नहीं कर रहे। इसी जानकारी पर नाइट क्लब में छापा मारा गया था।

मुंबई पुलिस ने गिरफ्तारी पर जानकारी देते हुए बताया कि सुरेश रैना और अन्य 33 आरोपियों के खिलाफ धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आज्ञा का उल्लंघन), धारा 269, आईपीसी और NMDA के प्रावधानों के तहत धारा 34 में मामला दर्ज हुआ है, मगर फिलहाल इन्हें रिहा कर दिया गया है।

किसानों ने पत्रकार अजित अंजुम को दम भर मारा, वायरल हो गया वीडियो: Fact Check

सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम को किसानों द्वारा कूटे जाने की बातें जोरों पर हैं जबकि खुद अजित अंजुम ने इस बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है। दरअसल, ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें लोगों द्वारा दावा किया जा रहा है कि किसान धरना प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम को कुछ असामाजिक तत्वों ने पीट दिया और उनके कपड़े भी फाड़ दिए।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि अजित अंजुम का कैमरा भी छीना गया जब वो गाजीपुर बॉर्डर पर किसान धरना कवरेज करने गए थे। विनय कुमार नाम के ट्विटर यूजर ने ये वीडियो शेयर करते हुए कहा कि किसान नेता राकेश टिकैत ने मंच से किसानों को इस मामले को लेकर फटकार भी लगाई।

वहीं, एक अन्य ट्विटर यूजर ने भी भीड़ द्वारा किसी आदमी को पीटने की इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, “अजीत अंजुम को किसानों ने धोया एक्सक्लुसिव तस्वीरें देखिए इस क्रांतिकारी पत्रकार के स्वागत की।”

एक अन्य यूजर ने लिखा है – “अजित अंजुम जी की बिचौलियों द्वारा ऐसी कुटाई की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।”

क्या है सच्चाई

अजित अंजुम ने अपने ट्विटर अकाउंट से इन खबरों को फर्जी बताया है। अजित अंजुम ने इस वीडियो को लेकर चल रही अफवाह पर सफाई देते हुए लिखा, “कुछ लोग गलत जानकारी के साथ ये वीडियो वायरल कर रहे हैं। किसी फोटोग्राफर के साथ किसी बात पर कुछ लड़कों की बहस हुई। फिर झगड़े जैसी नौबत देख मैं और मेरे जैसे कई लोग भागकर बीच बचाव करने पहुँचे। उसी वक्त का ये वीडियो है।”

किसानों के समर्थन में सिंघु बॉर्डर पर Jazzy B, गानों में कर चुका है भिंडरावाले का महिमामंडन

कृषि कानूनों के समर्थन में जारी कथित किसान आंदोलन में खालिस्तानी समर्थकों की घुसपैठ की खबरें शुरुआत से ही आती रही है। अब अपने गाने से खालिस्तान का समर्थन कर चुके भारतीय-कनाडाई पंजाबी गायक जसविंदर सिंह (Jazzy B) किसानों के समर्थन में सिंघु बॉर्डर पर नजर आया है।

समाचार एजेंसी ANI अनुसार जैजी बी ने आज (22 दिसंबर 2020) दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर पहुँच कर किसानों को संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों की माँगों को जायज बताते हुए सरकार से उन्हें मानने की अपील की। इससे पहले उसने प्रदर्शन से आई तस्वीरों को देख सोशल मीडिया पर लिखा था, “वाहेगुरु जी कृपा करिए, पंजाब के अन्नदाता के ऊपर। किसानों को हमारा समर्थन, किसान एकता जिंदाबाद, सभी लोग 26 व 27 को दिल्ली पहुँचो।”

जैजी बी ने इंस्टाग्राम पर किसानों के समर्थन में जो पोस्ट लिखा था उसमें कहा था कि उसने प्रदर्शन स्थल पर बैठे किसानों की तस्वीर साझा की थी, जिसमें उनके उपर वॉटर कैनन से पानी की बौछार की जा रही थी। जैजी बी की इस पोस्ट को हजारों लोगों ने लाइक किया था।

जैजी बी ने किसान आंदोलन के समर्थन में हाल में एक गाना भी इंस्टाग्राम पर जारी किया था। इस गाने का नाम ‘बगावताँ (Bagawatan)’ था। जिसका म्यूजिक हर्ज नागरा ने दिया और इसके लिरिक्स वरिंदर सीमा ने लिखे। इस सॉन्ग में भी जैजी बी किसान आंदोलन की कई तस्वीरें पेश करते दिखा था।

खालिस्तान के समर्थन में बनाया था गाना

उल्लेखनीय है कि ‘जिन्ने मेरा दिल लुटिया गाने’ से नेम और फेम कमाने वाले Jazzy B ने 6 माह पहले अपने गाने “Putt Sardara De”  के जरिए ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन किया था।

इस गाने में उसने सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की माँग का भी समर्थन किया था। गाने को लिखने वाले का नमा अमित बोवा है। यूट्यूब पर अब तक इस गाने को 6,389,676 व्यू मिल चुके हैं। इसके अलावा 70 हजार लाइक हैं इस पर और करीब साढ़े 7 हजार डिस्लाइक मिले हैं।

RevolutionRecordsLtd नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड जैजी बी के गाने में नजर आता है कि वीडियो में लोगों ने बड़े-बड़े हथियार थाम रखे हैं। गाने के बोल के जरिए सिखों को बताया जा रहा है कि भारत में उनके साथ जो भी हुआ, उसके लिए वह कैसे अपना बदला ले सकते हैं।

गाने में कहा जाता है कि किसी को भी सिखों से ख़िलवाड़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका इतिहास आक्रमक रहा है। वह भिंडरावाले की तरह हमेशा शिकार के भूखे रहते है। इस गाने में एक जगह भिंडरावाले की भी वीडियो क्लिप है। साथ ही गाने में उन सिखों को भी इंगित किया गया है जो भारतीय जेलों में बंद हैं। करीब 5 मिनट की वीडियों में जैज़ी बी नाम से मशहूर इस गायक ने हर प्रकार से भारत के ख़िलाफ़ माहौल बनाने की कोशिश की है।

सबके सामने गाय काटने वाली आसिया अंद्राबी पर अब राजद्रोह का केस, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की रची थी साजिश

कश्मीरी महिला अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलेगा। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अंद्राबी के खिलाफ भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, राजद्रोह और आतंकी साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। आसिया के साथ ही दो सहयोगियों नाहिदा नसरीन और सोफी फहमीदा के खिलाफ भी इन आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा।

इन धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश

विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने सोमवार (दिसंबर 21, 2020) को अंद्राबी और उनकी सहयोगियों-सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन पर गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (UAPA) के तहत और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

अदालत ने आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने), 121 ए (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश), 124 ए (राजद्रोह), 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच रंजिश बढ़ाने), 153 बी (राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ बयानबाजी) और 505 (शांति भंग करने के लिए आपत्तिजनक बयान) के तहत आरोप तय करने के आदेश दिए।

गंभीर धाराओं में केस के आदेश

अदालत ने यूएपीए की धारा 18 (आतंकी कृत्य को भड़काने, साजिश), 20 (आतंकी संगठन का सदस्य होना), 38 (आतंकी संगठन की सदस्यता से जुड़े अपराध) और 39 (आतंकी संगठन का समर्थन करना) के तहत भी आरोप तय करने के निर्देश दिए। औपचारिक रूप से आरोप 18 जनवरी को तय किए जाएँगे।

आसिया अंद्राबी अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत से जुड़ी हुई हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने अंद्राबी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की दो अन्य महिलाओं को राजद्रोह के आरोप में 5 जुलाई 2018 को गिरफ्तार किया था। आसिया अंद्राबी और उसकी सहयोगियों के खिलाफ कश्मीर में टेरर फंडिंग करने से लेकर पत्थरबाजी के लिए महिलाओं को उकसाने तक के गंभीर आरोप हैं।

आसिया वही हैं, जिन्होंने 2015 में गाय काटी थी, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। एजेंसी ने बताया है कि आसिया, पाक फौज में काम करने वाले एक अधिकारी के जरिए जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज़ सईद के संपर्क में भी थीं।

गौरतलब है कि अलगाववादी समूह की संस्थापक आसिया भारत से कश्मीर के अलगाव के लिए काम कर रही हैं। आसिया को राष्ट्र के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के मामले में पिछले वर्ष जुलाई में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

जाँच और पूछताछ में मालूम चला था कि आसिया के कुछ रिश्तेदार दुबई और सउदी अरब में भी रहते हैं। इन लोगों ने भी आसिया को भारत में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए पैसे पहुँचाए थे। यह धन पत्थरबाजों और हुर्रियत के समर्थकों में बाँटे गए थे, जिन्होंने श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। आसिया अंद्राबी के साथ ही दो सहयोगी नाहिदा नसरीन और सोफी फहमीदा फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं।

1500 साल से था कैथेड्रल, 2020 में बना ​दी मस्जिद; अब बुर्के में न्यूड फोटो शूट पर मॉडल को हो सकती है जेल

तुर्की की हागिया सोफिया (Hagia Sophia) हाल में काफी चर्चा में रही है। इस्तांबुल में स्थित 1500 साल पुराने ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन कैथेड्रल को इसी साल मस्जिद में बदल दिया गया था। कुछ जानकारों का मानना है कि इसकी वजह से ही केरल के हालिया स्थानीय चुनावों में वामपंथी पार्टियों को जीत भी मिली है। अब खबर आ रही है कि हागिया सोफिया के सामने न्यूड फोटो शूट कराने वाली प्लेबॉय मॉडल मारिसा पापेन को सात साल जेल की सजा हो सकती है।

बता दें कि मारिसा पापेन ने हागिया सोफिया के दरवाजे पर खड़े होकर न्यूड फोटो शूट कराया था। इसके अलावा उसने तुर्की के झंडे पर नग्न लेटकर फोटशूट करवाया था। इसकी बहुत से लोगों ने निंदा की थी। यह वाकया साल 2018 का है।

‘द सन’ के अनुसार, उन पर तुर्की के अभियोजकों द्वारा ‘राज्य की संप्रभुता के संकेतों का अपमान करने’ का आरोप लगाया गया है, जिन्होंने ‘भड़कीले कृत्यों’ और ‘अश्लील’ तस्वीरों की ब्रांडिंग की है। मारिसा पापेन कथित तौर पर हैरान हैं कि तुर्की के अधिकारी तस्वीरों के लिए उनके पीछे पड़े हैं।

मारिसा ने हाल ही में  ‘नेक्ड एटलस’ नाम की अपनी वेबसाइट लॉन्च की। जिसके बाद ये मामला गरमा गया है। वेबसाइट में वे सभी देश शामिल हैं जहाँ मारिसा पापेन ने नग्न तस्वीरें खींची हैं। उसने दुनिया भर में प्रतिष्ठित संरचनाओं के सामने नग्न होकर फोटोशूट करवाया। 

मारिसा ने इस्तानबुल की मशहूर हागिया सोफाया मस्जिद के दरवाजे पर खड़े होकर भी एक न्यूड फोटो लिया था। यह उल्लेख करना उचित है कि जब हागिया सोफिया ने यह किया था वह एक मस्जिद नहीं थी

इस फोटो पर सोशल मीडिया में काफी हंगामा हुआ। इसके बाद तुर्की प्रशासन ने मारिसा को एक नोटिस भेजकर सफाई माँगी थी। मारिसा ने सिर्फ मस्जिद ही नहीं कैपाडोशिया वैली और अन्य कई जगहों पर भी ऐसी तस्वीरें लीं थीं।

बेल्जियम की मॉडल को 2018 में वेटिकन के सामने न्यूड पोज देने के लिए भी गिरफ्तार किया गया था। मिस्र में कुक्सर के कर्णक मंदिर में उसे इसी कारण से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा उसने यरुशलम की सेलिंग वॉल के पास नग्न पोज दिया, जिसकी वजह से वहाँ के लोगों में नाराजगी देखने को मिली।

लेकिन इसने उसके दुनिया भर में न्यूड पोज़ देने के उसके उत्साह को कम नहीं किया। द सन ऑनलाइन के साथ एक साक्षात्कार में उसने कहा, “यह स्वतंत्रता के लिए एक चीख है। मैं ऐसे समय में वापस जाना चाहती हूँ जब महिलाएँ रानियाँ थीं। इसलिए मैं उन सभी देशों में जाना चाहती हूँ जहाँ महिलाओं का दमन होता है। जैसा कि मैंने कहा कि यह स्वतंत्रता के लिए एक चीख है और मैं चाहती हूँ कि वे मेरा मैसेज देखें।”