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महिलाओं की ड्राइविंग के लिए आवाज उठाने वाली एक्टिविस्ट को आतंकवाद सम्बन्धी धाराओं में 6 साल की जेल

सऊदी अरब की एक अदालत ने महिला अधिकार कार्यकर्ता लुजैन अल-हथलौल (Loujain al-Hathloul) को सोमवार (दिसंबर 28, 2020) के दिन पाँच साल और आठ महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह सजा ऐसे समय पर सुनाई गई है, जब तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों द्वारा उनकी रिहाई के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

सऊदी मीडिया के अनुसार, अदालत ने मानवाधिकार कार्यकर्ता को ‘आतंकवाद विरोधी कानून द्वारा निषिद्ध विभिन्न गतिविधियों’ का दोषी ठहराया। हथलौल की दो साल और 10 महीने की सजा को निलंबित कर दिया गया है। हथलौल पर उस अदालत में मुकदमा चलाया जाए जो आतंकवादी मामलों को देखती है। सऊदी के अधिकारियों ने कहा कि हथलौल की गिरफ्तारी सऊदी के हितों को नुकसान पहुँचाने और विदेशों में शत्रुओं को समर्थन देने के संदेह में की गई थी।

वहीं, मानवाधिकार समूहों ने हाल ही में यह भी खुलासा किया था कि हथलौल सहित कुछ महिलाओं को महीनों तक एकांत कारावास में रखा गया और उन्हें बिजली के झटके दिए गए, उनके साथ मारपीट और यौन उत्पीड़न जैसे दुर्व्यवहार किए गए। हालाँकि, सऊदी अरब के अधिकारी इन तमाम आरोपों को फर्जी बता रहे हैं।

31 वर्षीय लुजैन अल-हथलौल को मई 2018 में सऊदी अरब द्वारा महिलाओं के ड्राइविंग करने पर लगाए गए दशकों पुराने प्रतिबंध को हटाने से कुछ हफ्ते पहले एक दर्जन अन्य महिला कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनमें से ज्यादातर महिलाएँ ड्राइव करने के अधिकार के लिए अभियान चला रहीं थीं। उन पर आतंकवाद सम्बन्धी आरोप लगे हैं।

सऊदी अरब दुनिया में अकेला देश हुआ करता था, जहाँ महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी थी। इस देश में महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए जाते। ऐसे में, गाड़ी चलाने वाली महिलाओं पर ज़ुर्माना लगता है और पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है।

सऊदी अरब की महिलाओं द्वारा इस रोक को हटाने के लिए कई अभियान चलाए गए। लुजैन अल-हथलौल को दिसंबर 01, 2014 में भी गाड़ी चलाकर देश की सीमा में घुसते वक्त गिरफ़्तार किया गया। आख़िरकार 73 दिनों की क़ैद के बाद लुजैन को रिहा कर दिया गया था।

सऊदी अरब में महिलाओं के ड्राइविंग के अधिकार के लिए पहली बार नवंबर, 1990 में 47 महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया था। उन्होंने इस कानून के विरोध में रियाद प्रांत की सड़कों पर गाड़ी चलाई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया।

महिलाओं के आवाज उठाने के बाद वरिष्ठ इस्लामिक विद्वानों की परिषद ने फ़तवा तक जारी किया और महिलाओं के ड्राइविंग पर रोक लगा दी। इस फ़तवे में महिलाओं की ड्राइविंग करने को अशुभ और नकारात्मक परिणामों को आमंत्रण देने वाला बताया गया था। यहाँ तक कहा गया कि इस तरह महिलाओं की नजदीकी पुरुषों के साथ बढ़ेगी और वे विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित होंगी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष सऊदी अरब में कैद लुजैन अल-हथलौल ने अपनी आजादी की पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। उनके भाई ने बताया था कि हथलौल को एक वीडियो टेप में यह कहने की शर्त दी गई थी कि कैद के दौरान उन पर अत्याचार नहीं किया गया।

हर बड़े मौके पर ‘रणछोड़दास’ साबित हुए राहुल गाँधी: जानिए कब, किस मौके पर पार्टी को मझधार में छोड़ गए ‘युवराज’

मौका चाहे नए साल का हो, संसद सत्र का हो, चुनाव का हो या फिर राहुल गाँधी के जन्मदिन का… वो हर बड़े मौके पर विदेश की यात्रा पर होते हैं। मौका कॉन्ग्रेस स्थापना दिवस का है, लेकिन राहुल गाँधी इस मौके पर विदेश चले गए हैं। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि राहुल गाँधी विदेश दौरे पर इटली गए हैं। कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल एक छोटे से ट्रिप पर विदेश गए हैं। वहीं अब पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा है कि राहुल गाँधी अपनी नानी को देखने इटली गए हैं।

इस विदेश यात्रा की खबर आते ही सोशल मीडिया पर राहुल के राजनीति को लेकर गंभीर न होने की चर्चा शुरू हो गई। पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है और उसके पास स्‍थाई अध्‍यक्ष तक नहीं है। राहुल की विदेश यात्राओं की टाइमिंग पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आइए जानते हैं कि हाल के दिनों में ऐसा कब-कब हुआ।

कोरोना काल में इटली से आए थे राहुल

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी इसी वर्ष फरवरी में भी विदेश दौरे पर थे। उस वक्त भाजपा ने राहुल को खूब टारगेट किया था। उसी वक्त इटली दुनिया में कोरोना का हॉटस्‍पॉट बन गया था। जिसके बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गाँधी की जाँच कराने की माँग की थी। सांसद हनुमान बेनीवाल ने तो इस मुद्दे को संसद में भी उठा दिया था। जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने इस बात की जानकारी दी थी कि राहुल की स्‍क्रीनिंग हुई थी और उन्हें कोरोना नहीं हुआ है।

जन्‍मदिन विदेश में मनाते रहे हैं राहुल गाँधी

एक तरफ जहाँ नरेंद्र मोदी अपना जन्‍मदिन ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाते हैं, राहुल विदेश में बर्थडे सेलिब्रेट करते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के सिर्फ 44 सीटों पर सिमटने के बाद राहुल, जून 2014 में विदेश चले गए थे। 2015 की शुरुआत में राहुल करीब दो महीने तक देश से बाहर रहे। वह वियतनाम, कम्‍बोडिया, थाइलैंड के अलावा म्‍यांमार भी गए थे। अप्रैल 2015 में लौटे राहुल ने 19 जून 2015 को अपना बर्थडे दिल्‍ली में मनाया था। मगर अगले ही दिन वो माँ सोनिया गाँधी और बहन प्रियंका गाँधी के साथ विदेश चले गए। सभी 10 दिन बाद लौटकर आए। जून 2016 में राहुल ने अपना जन्‍मदिन तुर्की में मनाया। 2017 में इटली जाकर नानी संग बर्थडे मनाया।

महाराष्‍ट्र, हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले राहुल की फॉरेन ट्रिप

पिछले साल महाराष्‍ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव थे। राहुल मतदान से कुछ समय पहले विदेश दौरे पर रवाना हो गए थे। बीजेपी ने इसे लेकर राहुल पर खूब हमला बोला था। जिसके बाद पार्टी के प्रवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्विटर पर लिखा था कि किसी के निजी जीवन को सार्वजनिक जीवन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

हालाँकि, इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी कि वो कहाँ गए थे। राहुल गाँधी 2014 से 2018 तक एक्सटर्नल अफैयर्स की स्टैंडिंग कमिटी के कुल 76 में से मात्र 9 मीटिंग में शामिल हुए। सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक की सारी मीटिंग में वो अनुपस्थित रहे। स्टैंडिंग कमिटी ऑन डिफेंस में इस साल एक में गए भी तो काफी लेट। यहाँ पर भी वो मुद्दे से इतर ही बोलते नजर आए। 

सितंबर 2020 में पूरा मानसून सत्र गायब रहे

संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर 2020 को शुरू हुआ और 1 अक्टूबर को समाप्त हुआ। इस पूरे सत्र के दौरान राहुल गाँधी नदारद रहे। सत्र शुरू होने से ठीक पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी मेडिकल टेस्ट के लिए अमेरिका रवाना हो गईं। सोनिया गाँधी के साथ उनके बेटे राहुल गाँधी भी गए। सोनिया-राहुल गाँधी के विदेश यात्रा पर जाने से लोगों ने सवाल भी उठाए कि क्या संसद के मानसून सत्र में चीन के खिलाफ बोलने से बचने के लिए सोनिया- राहुल अमेरिका निकल गए हैं? 

ये सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि गलवान में चीन से साथ झड़प के बाद से ही राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के सभी नेता काफी जोर-शोर से मोदी सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे थे। चीन मामले पर तकरीबन रोज कुछ ना कुछ ट्वीट कर रहे थे। लेकिन ठीक सत्र शुरू होने से पहले देश से बाहर जाने पर लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि सत्र से दौरान चीन के खिलाफ कुछ बोलना ना पड़े या उसकी आलोचना ना करनी पड़े, इसलिए अमेरिका चले गए। 

किसान आंदोलन को समर्थन देने वाले स्वयं गायब हैं

कॉन्ग्रेस नेता और सांसद राहुल गाँधी ने देश में जारी किसान आंदोलन का एक बार फिर से शनिवार (दिसंबर 26, 2020) को एक ट्वीट करते हुए किसानों को अपना समर्थन दिया। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने शनिवार को कहा कि सरकार को नए कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों की बात सुननी होगी। राहुल गाँधी ने किसानों के विरोध का एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा- “मिट्टी का कण-कण गूँज रहा है, सरकार को सुनना पड़ेगा, सरकार को (किसानों को) सुनना होगा।” किसानों का समर्थन करने वाले राहुल गाँधी अब खुद गायब हैं। वो छुट्टियाँ मनाने विदेश दौरे पर निकल गए हैं।

2019 में शीतकालीन सत्र में अनुपस्थित

राहुल गाँधी ने 18 नवंबर 2019 से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में एक दिन भी हिस्सा नहीं लिया। विपक्ष खासतौर से कॉन्ग्रेस ने सत्र के दौरान 370 हटाए जाने के बाद के कश्मीर के हालात, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद फारूक अब्दुल्ला की रिहाई, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और गाँधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा में कटौती और इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इस सत्र में एक बार भी संसद नहीं आए।

2018 की होली इटली में मनाई

02 मार्च को देश में होली मनाई जा रही थी और 03 मार्च को त्रिपुरा, नागालैंड व मेघालय के परिणाम आए, जिसमें कॉन्ग्रेस को करारी शिकस्त मिली। तब वह अपनी नानी को ‘सरप्राइज’ देने गए थे। उन्‍होंने ट्विटर पर ऐलान करते हुए लिखा था कि उनकी नानी 93 साल की हैं और वे होली पर उन्‍हें सरप्राइज देने जा रहे हैं। राहुल ने लिखा था कि वे अपनी नानी को गले लगाने के लिए बेताब हैं। इसके बाद उन्‍होंने मलेशिया और सिंगापुर की यात्रा भी की थी।

2017 में ओस्लो, नार्वे की यात्रा

जब 27 अगस्त को बिहार में विपक्षी दलों की एकता दिखाने के लिए लालू प्रसाद रैली कर रहे थे और चीन के साथ डोकलाम विवाद भी चल रहा था, तब भी राहुल गाँधी विदेश दौरे पर थे। पटना में लालू यादव की अगुवाई में आयोजित विपक्ष की एकता रैली में उनकी नामौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। उस समय मंदसौर में कॉन्ग्रेस का किसानों को लेकर आंदोलन चल रहा था और राष्ट्रपति पद के लिए कॉन्ग्रेस की ओर से मीरा कुमार को नामाकंन करना था।

2016 के विधानसभा चुनाव अधर में छोड़ गए थे राहुल गाँधी

दिसंबर 2016 में राहुल गाँधी नए साल का जश्‍न मनाने विदेश गए थे। उस वक्‍त अमरिंदर सिंह दिल्‍ली में डेरा डाले हुए थे ताकि राहुल लौटें और टिकट वितरण को अंतिम रूप दें। इसी समय नोटबंदी भी हुई थी और कॉन्ग्रेस पार्टी नोटबंदी को लेकर विरोध कार्यक्रमों की धार तेज कर रही थी। विदेश से लौटने के बाद वह अगले चार साल बाद तक इस मुद्दे पर बोलते रहे। इसी समय पंजाब के अलावा गोवा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले थे। राहुल दिसंबर-जनवरी के बीच 10 दिन तक विदेश में रहे।

दिसंबर 2015 में किया यूरोप का दौरा

अप्रैल 2016 में असम के विधानसभा चुनाव होने वाले थे। राहुल दिसंबर 2015 में यूरोप गए थे। उन्होंने यूरोप में ही नया साल मनाया था। असम चुनाव की तैयारियों को दरकिनार कर विदेश जाने पर खूब सवाल उठे थे। राहुल हर साल 2-3 बार छुट्टियों पर जाते रहे हैं। 2015 में ही बजट सत्र के दौरान अचानक 57 दिनों के लिए देश से बाहर चले गए। कहाँ गए थे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया था, “राहुल गाँधी को आत्मचिंतन, आत्ममंथन के लिए समय दिया गया है।” वह सप्ताह के अंत तक दिल्ली से बाहर रहेंगे और बजट के दौरान उपस्थित नहीं हो पाएँगे।” कॉन्ग्रेस की ओर से आए बयान के मुताबिक राहुल गाँधी ने चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार पर आत्मचिंतन और पार्टी की भविष्य की योजनाओं पर विचार करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से छुट्टी ली थी। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने राहुल की अनुपस्थिति के सवाल पर कहा था कि राहुल को कुछ वक्त चाहिए। राहुल कुछ हफ्तों में वापस आएँगे।

शुभेंदु अधिकारी की ‘नंदीग्राम चलो’ रैली से घबराई ममता: CM बनने के बाद पहली बार छोड़ा 7 जनवरी का कार्यक्रम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने 7 जनवरी को नंदीग्राम में होने वाली अपनी बैठक रद्द कर दी है। ममता की जगह अब उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी बैठक में हिस्सा लेंगे। रामनगर से TMC विधायक अखिल गिरी ने ममता की अनुपस्थिति का कोई कारण बताए बिना सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को यह घोषणा की।

ममता बनर्जी द्वारा नंदीग्राम में इस बैठक का हिस्सा होने से इंकार करने का फैसला नंदीग्राम में ही कभी ममता बनर्जी के ‘सिपाही’ कहे जाने वाले शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में जाने के बाद आया है।

वर्ष 2008 से ही प्रत्येक वर्ष 07 जनवरी के दिन नंदीग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और ग्रामवासी उन्हें याद कर शोक मनाते हैं। इस अवसर पर प्रत्येक वर्ष शुभेंदु अधिकारी भी वहाँ मौजूद रहते हैं। वर्ष 2007 में 7 जनवरी को भरत, शेख सलीम और विश्वजीत इस आंदोलन में शहीद हो गए थे।

नंदीग्राम में एक रासायनिक केंद्र स्थापित करने के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के लिए भूमि अधिग्रहण करने के वामपंथी सरकार के कदम के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 11 लोग मारे गए थे।

हर साल, TMC द्वारा 2007 के इस नरसंहार की याद में ‘शहीदों के स्मरण कार्यक्रम’ में बड़ी सभाएँ आयोजित की जाती हैं, जिस कारण 2011 में बंगाल में वाम सरकार का पतन हुआ और मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी की ताजपोशी हुई। यह पहला मौका है, जब ममता बनर्जी ने इस कार्यक्रम को छोड़ने का फैसला लिया है।

बंगाल में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा में हाल ही में शामिल हुए नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा ‘नंदीग्राम चलो’ रैली शुरू करने की घोषणा की है। संयोग से, शुभेंदु नंदीग्राम के पूर्व विधायक भी हैं। उन्होंने भाजपा में शामिल होने से पहले विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया।

गौरतलब है कि गत 17 दिसंबर को ही शुभेंदु अधकारी ने आधिकारिक रूप से तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ दी, और सत्ताधारी पार्टी में उनका 22 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपने विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया, जिसे अब स्पीकर बिमन बनर्जी द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।

फ्रांस में मुस्लिम युवक ने शेयर की क्रिसमस की तस्वीरें: ईसाई त्यौहार में शामिल होने मात्र से हिंसा पर उतरे कट्टरपंथी

कुछ कट्टरपंथी इस्लामियों ने अपने परिचित मुस्लिम पर इसलिए हमला कर दिया क्योंकि उसने एक तस्वीर साझा की जिसमें वह क्रिसमस पार्टी में शामिल हुआ था। घटना फ्रांस के बेलफोर्ट स्थित उत्तर पूर्वी शहर में हुई, जहाँ 20 साल के मुस्लिम युवक को सिर्फ इसलिए अपनी कौम की हिंसा का शिकार होना पड़ा क्योंकि वह एक क्रिसमस पार्टी में शामिल हुआ था।

RT.com में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जैसे ही पीड़ित ने क्रिसमस पार्टी की तस्वीरें साझा की वैसे ही उसके कट्टरपंथी कौमी साथी धमकी देने लगे। कट्टरपंथी इस बात से गुस्से में थे कि एक मुस्लिम व्यक्ति किसी अन्य धर्म के आयोजन में शामिल हुआ, जबकि पीड़ित के माता-पिता दोनों स्वयं पुलिस अधिकारी (law enforcement officers) हैं। 

आरोपितों ने पीड़ित युवक को फटकार लगाते हुए कहा, “श्वेत की गंदी औलाद, साँप की औलाद, पुलिस वाले के बेटे” और ‘असल अरब’ होने का मतलब समझाया। बातचीत की शैली उग्र होने के बावजूद पीड़ित हमलावरों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए तैयार हो गया, जिससे उनके बीच हर विवाद ख़त्म हो जाए।  

फ्रांस के अधिकारियों ने की हिंसा की निंदा, इस्लामी अलगाववाद के विरुद्ध बोलने की ज़रूरत 

RT की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य आरोपित 4 अन्य लोगों के साथ आया और उसने पीड़ित की साथ मारपीट की और धमकाते हुए कहा कि अगर उसने घटना की जानकारी पुलिस को दी तो इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। इस धमकी के बावजूद 20 वर्षीय युवक ने मारपीट करने वालों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई और उसकी माँ ने आरोपितों की गिरफ्तारी का वादा किया। स्थानीय मीडिया समूह से बात करते हुए पीड़ित युवक की माँ ने कहा, “इसके बाद से वह कहीं छिप गए।”

फ्रांस पिछले कुछ समय से इस्लामी कट्टरपंथ का सामना कर रहा है, ऐसे में इस घटना ने बहुत जल्द फ्रांस के शीर्ष अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने इस घटना की सार्वजनिक तौर पर निंदा की और इस्लामी ‘अलगाववाद’ से लड़ने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। 

आंतरिक मंत्री गेराल्ड दरमैनिन (Interior Minister Gérald Darmanin) ने पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना हुई थी और इस मामले पर जाँच शुरू हो गई है। संदिग्धों द्वारा अक्सर दिखाया जाने पुलिस विरोधी रवैया जिसे इस्लामी ‘अलगाववाद’ कहा जा सकता है, यह अस्वीकार्य है। मंत्री ने ट्वीट करते हुए भी इस घटना की निंदा की जिसमें एक मुस्लिम युवक के साथ क्रिसमस पार्टी में शामिल होने की वजह से मारपीट हुई। 

उन्होंने शनिवार (26 दिसंबर 2020) को किए गए ट्वीट में लिखा, “बेलफोर्ट में एक व्यक्ति के साथ इसलिए हिंसा की गई क्योंकि उसने क्रिसमस मनाया और वह इस वजह से वह ‘अच्छा अरबी मुस्लिम’ नहीं रहा। एक पुलिस अधिकारी का बेटा होने के बावजूद उसके इस कदम से हालात बिगड़ गए।” गौरतलब है कि 20 वर्षीय पीड़ित युवक की माँ मूल रूप से अरबी है और उसके सौतेले पिता गैर मुस्लिम हैं। पीड़ित व्यक्ति के माता-पिता दोनों ही पुलिस अधिकारी हैं और उसने अपने परिवार के साथ किए गए क्रिसमस लंच की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी। 

इस्लामी आतंकी हमलों की मार झेलता फ्रांस 

फ्रांस पिछले कुछ समय से इस्लामी कट्टरपंथियों के सिलसिलेवार आतंकी हमले झेल रहा है, जिसमें एक शिक्षक की पेरिस में गला काट कर हत्या करना भी शामिल है। सैमुएल पैटी, जिसका सिर उग्र इस्लामी कट्टरपंथी व्यक्ति ने धड़ से अलग कर दिया था, उन्होंने पढ़ाने के दौरांन चार्ली हेब्दो द्वारा प्रकाशित पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था। 

इस घटना के ठीक बाद फ्रांस में एक और हमला हुआ था जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। नीस (nice) स्थित नोट्रे डेम (Notre Dame) चर्च में हुए एक आतंकवादी हमले में 2 लोगों की गला काट कर हत्या कर दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जिन इस्लामी आतंकवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया था वह ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्ला रहे थे। 

सैमुएल पैटी की हत्या के बाद फ्रांस की सरकार ने कट्टरपंथ के विरुद्ध देशव्यापी अभियान चलाया और देश में मौजूद तमाम मस्जिदें बंद करवा दी गई, जिनकी भूमिका हमेशा ही संदिग्ध रहती है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मेक्रों ने भी इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर सख्त रवैया अपनाया और इसका सामना करने के लिए हर संभव कदम उठाए जिसकी वजह से तमाम मुस्लिम देश फ्रांस के विरोध में भी नज़र आए।   

केरल में चाइल्ड पोर्न गैंग: शेयर करते थे 6 से 15 साल के बच्चों के फोटो-वीडियो, IT प्रोफेशनल और डॉक्टर सहित 41 गिरफ्तार

केरल में ऑनलाइन बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में राज्य पुलिस ने पूरे प्रदेश से 41 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये सभी सोशल मीडिया और इनक्रिप्टिड वेबसाइट्स के जरिए बच्चों की अश्लील तस्वीरें शेयर करते थे। ऑपरेशन पी-हंट (Operation P-Hunt) का रविवार को तीसरा चरण था। इस पूरे अभियान के लिए 465 जगहों को चिह्नित किया गया था।

साइबरडोम के नोडल ऑफिसर मनोज इब्राहिम ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक इस केस में 339 मुकदमे दर्ज हुए हैं और 394 डिवाइस छापेमारी में सीज की गई है। बता दें कि गिरफ्तार हुए आरोपितों में कई आईटी विशेषज्ञ है और एक डॉक्टर भी। कइयों पर संदेह है कि वो चाइल्ड ट्रैफिकिंग का हिस्सा हैं, क्योंकि छापेमारी में इनके पास से कुछ इन्क्रिप्टिड चैट मिली है।

छापेमारी के दौरान सामने आई सबसे भयावह बात यह पता चली है कि स्थानीय बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की सामग्री व्यापक रूप से डार्कनेट साइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपलोड और शेयर की जा रही थी। छापे के दौरान पता चला कि 6 से 15 साल तक के बच्चों से संबंधित सामग्री अपराधियों के पास थी।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सबसे अधिक गिरफ्तारी कन्नौर से हुई है। यहाँ से 6 आरोपित पकड़े गए हैं। मनोज अब्राहिम ने बताया कि संदिग्धों की पहचान विशेष सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके और नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइड चिल्ड्रन की मदद से की गई। उन्होंने बताया कि पहले इन सभी लोगों से जुड़ी जानकारियाँ एकत्रित की गईं, फिर इन्हें जिला पुलिस प्रमुख के साथ शेयर किया गया और बाद में आईटी विशेषज्ञों और महिलकर्मियों की टीम बनाई गई।

गौरतलब हो कि इससे पहले केरल में बढ़ रहे चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों का खुलासा करते हुए प्रदेश पुलिस की साइबर विंग ने 41 लोगों को अक्टूबर माह में गिरफ्तार किया था। इन 41 आरोपितों में DFYI का एक नेता इसा रियाज भी शामिल था। सब पर आरोप था कि इन्होंने छोटे बच्चों की नग्न तस्वीरें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट की।

एडिशनल डीजीपी मनोज अब्राहम ने बताया था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में उन्होंने 268 मामले दर्ज किए हैं। गिरफ्तार हुए लोगों पर ऐसी सामग्री अपलोड, डाउनलोड और उन्हें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने का आरोप है। इन लोगों के पास से पुलिस ने कई इलेक्ट्रानिक डिवाइस और फोन भी जब्त किए हैं।

असम में बंद होगी मदरसे और अरबी कॉलेज को मिलने वाली सरकारी मदद: बिल तैयार, विधानसभा में होगा पेश

असम विधानसभा का तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र सोमवार (दिसंबर 28, 2020) से शुरू हो रहा है। विधानसभा में सरकार आज मदरसों को मिलने वाली मदद को निरस्त करने का विधेयक पेश करेगी। इसकी जानकारी शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने दी। 

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “मैं आज मदरसे के प्रांतीयकरण को निरस्त करने के लिए विधेयक पेश करुँगा। एक बार बिल पास होने के बाद असम सरकार द्वारा मदरसा चलाने की प्रथा खत्म हो जाएगी। इस प्रथा की शुरुआत स्वतंत्रता-पूर्व असम में मुस्लिम लीग सरकार द्वारा की गई थी।”

बता दें कि सरकार के इस फैसले से राज्य के सभी सरकारी मदरसों और अरबी कॉलेजों को मिलने वाली सरकारी मदद बंद कर दी जाएगी। अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और उसकी सभी शैक्षणिक गतिविधियों को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। 

मदरसों में मजहबी पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले शिक्षकों को सामान्य विषयों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसे लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री शर्मा ने कहा था, “यह राज्य की शिक्षा प्रणाली को धर्मनिरपेक्ष बनाएगा। हम स्वतंत्रता पूर्व भारत के दिनों से इस्लामी धार्मिक अध्ययनों के लिए सरकारी धन का उपयोग करने की प्रथा को समाप्त कर रहे हैं। मदरसों को सामान्य स्कूलों में परिवर्तित कर दिया जाएगा।”

पिछले दिनों ही मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान सरकारी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद सरकार ने विधेयक को विधानसभा में पेश करने का प्लान बनाया था।

शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने अक्टूबर में कहा था कि असम में कुल 614 सरकारी और 900 निजी मदरसे हैं। सरकार इन संस्थानों पर प्रति वर्ष 260 करोड़ रुपए खर्च करती है। राज्य में लगभग 100 सरकारी संस्कृत टोल्स (संस्कृत विद्यालय) और 500 से अधिक निजी टोल्स हैं। सरकार प्रतिवर्ष मदरसों पर लगभग 3 से 4 करोड़ रुपए खर्च करती है और लगभग 1 करोड़ रुपए संस्कृत टोल्स पर खर्च करती है। अब राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड असम को भंग कर दिया जाएगा। सभी सरकारी मदरसे को उच्च विद्यालयों में तब्दील कर दिया जाएगा और वर्तमान छात्रों के लिए नया नामांकन नियमित छात्रों की तरह होगा।

उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार ने स्थिति का मूल्यांकन करते हुए फैसला किया कि राज्य को सार्वजनिक धन के उपयोग से कुरान को पढ़ाना या उसका प्रचार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा संचालित मदरसों के कारण कुछ संगठनों द्वारा भगवद गीता और बाइबल को भी स्कूलों में पढ़ाने की माँग की गई थी, लेकिन सभी धार्मिक शास्त्रों के अनुसार स्कूलों को चलाना संभव नहीं है। एआईडीयूएफ जैसी पार्टियों के विरोध के बावजूद शर्मा ने कहा था कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को नहीं बदला जाएगा।

मरने के बाद क्या होगा आपके गूगल-फेसबुक अकॉउंट का, ट्विटर-इंस्टाग्राम सब कैसे और कौन करेगा मैनेज?

कोरोना महामारी के कारण विश्व भर में असमय कई मौतें होने के बाद लोगों में इसे लेकर डर लगातार बना हुआ है। आज यदि हम देखें तो ये दौर वही है जब किसी को अपने कल का नहीं मालूम कि क्या हो जाएगा। ऐसे में जो कोरोना से ग्रस्त हो रहे हैं उन्हें उनके परिवार की चिंता, बैंक अकॉउंट में जमा रकम के अलावा सबसे बड़ी चिंता गूगल अकॉउंट पर सेव जानकारी और सोशल मीडिया अकॉउंट को लेकर जरूर होती होगी। और उन्हें ही क्या, जो कोई भी मृत्यु की कल्पना करता होगा वह आज के समय में यह जरूर सोचता होगा कि आखिर उसके अकॉउंट का क्या होगा?

तो, आइए आज इस अनिश्चितता के दौर में हम आपको यह जानकारी देते हैं कि आखिर मरने के बाद आपके गूगल अकॉउंट्स या सोशल मीडिया का क्या होगा?

सामान्य तौर पर ऐसी कोई टेक्निक नहीं है जो गूगल अकॉउंट को आपके सिवा ये परमिशन दे सके कि वो आपका अकॉउंट एक बार बनने के बाद उसके साथ क्या करेगा। रही बात मौत की कल्पना स्वयं करके उसे बंद करने की तो वो बहुत दूर की बात है। इसके लिए परमिशन या तो गूगल को आप खुद देते हैं या फिर आपके जाने के बाद आपके परिजन गूगल से यह अनुरोध करते हैं कि आपके अकॉउंट का क्या होगा।

गूगल को कैसे परमिशन दे सकते हैं कि आपकी मृत्यु के बाद आपके अकॉउंट का क्या होगा?

  • इसके लिए पहले आपको गूगल लॉग इन करना होगा।
  • फिर myaccount.google.com पर जाना होगा
  • आपके सामने एक इंटरफेस ओपन होगा।
  • बाएँ ओर आपको कुछ ऑप्शन नजर आएँगे। इसमें से आपको data and personalization को सिलेक्ट करना होगा।
  • इस ऑप्शन के भीतर आपको अपने अकॉउंट के लिए प्लॉन तैयार करने का विकल्प मिलेगा। स्क्रॉल डाउन करने पर एक जगह make an plan for your account लिखा दिखेगा। आपको इसी पर क्लिक करना होगा और अपने अकॉउंट के लिए प्लान तैयार करना होगा।
  • जब आप इस पर क्लिक करेंगे तो Inactive account manager खुलेगा। यहाँ आपको स्टार्ट क्लिक करना होगा।
  • फिर आपको ऑप्शन मिलेगा कि आखिर गूगल कब समझे कि आपका अकॉउंट इनएक्टिव है और उसे आपकी परमिशन से इसे बंद कर देना है। गूगल आपके सामने 3 माह का समय रखेगा। आप चाहें तो इसे 3 से 6 या 12 और 18 महीनों में भी एक क्लिक से इसे बदल सकते हैं।
  • गूगल इस समय सीमा के बाद आपके अकॉउंट को खुद से इन्एक्टिव समझने में सक्षम होगा। वह आपके अकॉउंट पर कोई एक्शन लेने से पहले आपके द्वारा मुहैया कराए गए कुछ कॉन्टैक्ट्स को संदेश भेजेगा  और कन्फर्म करेगा कि इस अकॉउंट पर कोई गतिविधि नहीं दर्ज की गई है। क्या यह मान लिया जाए कि अकॉउंट बंद है?
  • फोन और ईमेल अपडेट करने के लिए भी नीचे ऑप्शन होंगे।
  • आगे आपको मैक्सिमम 10 लोगों के नाम देने की छूट देनी होगी जिनसे आप बताना चाहें कि आपका अकॉउंट डिएक्टिवेट हो चुका है।
  • आप चाहें तो इन लोगों को अपने कुछ डेटा एक्सेस करने की छूट भी दे सकते हैं।
  • नीचे ऑटोरिप्लाई का ऑप्शन आएगा। यदि आप इस पर क्लिक करेंगे तो आपको भविष्य में मेल करने वाले को गूगल अपने आप बता सकेगा कि आपका अकॉउंट बंद हो चुका है। आप इसमें जो संदेश लिखेंगे, गूगल उसी को आगे फॉर्वर्ड करेगा। ध्यान रहे ये सर्विस सिर्फ उन लोगों के लिए होगी जो आपके कॉन्टैक्ट में होंगे, इसके अतिरिक्त कोई नहीं।
  • इन सबको कंप्लीट अपडेट करने के बाद आपके सामने एक ऑप्शन आएगा कि आप इस बात का निर्णय लें कि अकॉउंट इंएक्टिव होने के बाद आपका डेटा डिलीट होगा या नहीं। आपको इसके लिए विकल्प ऑन करना होगा। यदि आप इसे नहीं ऑन करते हैं तो ये डेटा हमेशा ऐसा ही रहेगा।
  • बस इसके बाद एक बार रिव्यू प्लान पर क्लिक करें और फिर कन्फर्म प्लान कर क्लिक करें।

मुश्किल से 10 मिनट की इस पूरी प्रक्रिया में आप अपने गूगल अकॉउंट को लेकर सुनिश्चित हो सकेंगे कि आपके अकॉउंट से संबंधित जानकारी का आपके न रहने पर क्या होगा। कई बार हम अपनी गूगल हिस्ट्री, गूगल फोटोज, गूगल मैप्स, गूगल आईडी पर बने सोशल मीडिया अकॉउंट्स की जानकारी नहीं साझा करना चाहते। लेकिन हमारी ना समझी के कारण ये चीजें एक प्लेटफॉर्म पर हमेशा के लिए बची रह जाती हैं। हालाँकि, हमारे मरने के बाद इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि गूगल अकॉउंट का क्या हुआ लेकिन हमारे परिजन इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में बेहतर है कि गूगल  अकॉउंट के साथ क्या करना है इसे आप अपने जीते जी तय करें।

इसके अलावा एक स्थिति गूगल अकॉउंट्स को लेकर तब भी उत्पन्न होती है जब हमारे कुछ ऐसे डॉक्यूमेंट उसमें सेव होते हैं जो हमारे मरने के बाद परिवार के लिए अत्यंत महत्तवपूर्ण हो जाते हैं, लेकिन हमारी छोटी सी लापरवाही के कारण उन्हें उसके लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। यदि हम थोड़ी सी सतर्कता बरतें तो आपकी सारी जानकारी शेयर किए गए बिना वह महत्तवपूर्ण डॉक्यूमेंट आपके परिजन आसानी से एक्सेस कर सकते हैं।

सोशल मीडिया अकॉउंट: फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर का आपके मरने के बाद क्या होगा?

वैसे तो गूगल आईडी डिएक्टिवेट होने के बाद वह कहीं भी उपयोग में नहीं लाई जा सकती । लेकिन यदि आप अलग से अपने सोशल मीडिया अकॉउंट को लेकर विचार करते हैं कि उसका क्या हो सकता है, तो बता दें कि फेसबुक आपके अकॉउंट को बंद नहीं करता, बल्कि उसे ‘मेमोरियलाइज’ कर देता है। यानी उनका अकाउंट प्लेटफॉर्म से डिलीट नहीं होता, बल्कि यूजर के ऑनलाइन फ्रेंड्स को मौका देता है कि वो उसकी सभी यादों को सहेज सकें।

मेमोरियलाइज्ड अकाउंट में व्यक्ति के नाम के आगे ‘रिमेंबरिंग’ जुड़ जाता है। अगर मृत व्यक्ति ने अपनी टाइमलाइन लोगों की पोस्ट के लिए ओपन रखी हो, तो लोग उनकी टाइमलाइन पर पोस्ट भी कर सकते हैं। इस अकॉउंट के लोग न तो सजेशन में दिखाई पड़ते हैं, न ही उनसे जुड़ा कोई नोटिफिकेशन किसी को भेजा जाता है। इसी प्रकार व्यक्ति अगर किसी पेज का एडमिन होता है तो उसे भी डिलीट करने का काम फेसबुक अपने आप कर देता है।

मगर, ध्यान रहे फेसबुक ये सब तभी कर सकता है जब आपने लिगेसी कॉन्टैक्ट पर किसी को सेट किया हुआ है। इसका अर्थ है कि कोई ऐसा विश्वसनीय जो आपके जाने के बाद आपका अकॉउंट मैनेज कर सके। आपकी प्रोफाइल पिक आदि बदल सके। रिक्वेस्टों का जावब दे सके। लीगेसी कॉन्टैक्ट को सेट करते हुए अपनी निजता के लिए बिलकुल निश्चिंत रहें, क्योंकि ये उसे आपकी टाइमलाइन पर पोस्ट करने या संदेश पढ़ने की इजाजत नहीं देता। अगर आपकी इच्छा है कि मरने के बाद आपका अकॉउंट डिलीट हो तो लिगेसी कॉन्टैक्ट में ‘रिक्वेस्ट अकाउंट डिलीशन’ सेलेक्ट कर लें।

बता दें कि इंस्टाग्राम की भी पॉलिसी मृत व्यक्ति के लिए बिलकुल सेम है। इंस्टाग्राम पर मृत व्यक्ति के अकॉउंट को रिपोर्ट की जा सकती है और फिर उसे मेमोराइज बना दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त व्यक्ति के परिवार के सदस्य भी अनुरोध कर सकते हैं कि अकॉउंट डिलीट कर दिया जाए। बस इंस्टा पर मौत का सबूत देने के लिए उससे जुड़ा कोई दस्तावेज या न्यूज आर्टिकल उसके सामने सबूत के तौर पर पेश करता होता है।

वहीं, ट्विटर पर प्रक्रिया थोड़ी अलग है। यहाँ मृत व्यक्ति के अकॉउंट डिएक्टिवेट उसके जाने के बाद हो तो जाते हैं। मगर यदि उसके परिजन ट्विटर को रिक्वेस्ट भेजते हैं तो उन्हें अपना आईडी और मृतक की मौत का प्रमाण देना होता है। पिटंरेस्ट पर भी व्यक्ति के जाने के बाद यदि परिवार वाले उसे बंद करने की अपील करें तो अकॉउंट डिएक्टिवेट कर दिया जाता है। साइट यह सुनिश्चित करती है कि वो कोई निजी या लॉग इन से संबंधी जानकारी किसी से शेयर नहीं करेगी।

गंदे नाले पर रखा मंदिर का नक्काशी वाला प्राचीन स्तम्भ, ट्विटर पर लोगों में आक्रोश

दक्षिण भारत हिन्दू सभ्यता से जुड़े कई प्राचीन साक्ष्यों का एक बड़ा स्रोत रहा है। खासकर प्राचीन मंदिरों और वास्तुकला की धरोहर के लिए कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्य पर्यटकों के लिए भी एक कौतुक का विषय रहते हैं। वास्तुकला का एक ऐसा ही उदाहरण सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन गलत कारणों से।

दरअसल, ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की जा रही हैं, जिसमें मंदिर के स्तम्भ जैसा नजर आ रहा एक प्राचीन बड़ा पत्थर एक नाले के ऊपर रखा नजर आ रहा है। इस पत्थर पर कुछ नक्काशियाँ देखी जा सकती हैं जिन पर कुछ आकृतियाँ नजर आ रही हैं। दक्षिण भारत के कई प्राचीन मंदिरों पर लगे स्तम्भों पर भी ऐसे चित्र देखे जाते हैं। लोगों का दावा है कि यह तमिलनाडु के काँचीपुरम स्थित पेरिया के पास की तस्वीरें हैं।

रविवार (दिसंबर 27, 2020) शाम ‘धर्म रक्षक’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने कुछ तस्वीरें ट्वीट करते हुए लिखा, “ऐतिहासिक शहर काँचीपुरम में, भारत की विरासत ड्रैनेज चैनल पर सपोर्ट का काम कर रही है।”

इस तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ लोगों ने अनुमान लगाया है कि यह किसी 600 साल पुराने शिव मंदिर के पत्थर लग रहे हैं।

आदित्य नाम के ट्विटर यूजर ने एक लोकेशन शेयर करते हुए बताया है कि तस्वीरों में नजर आ रही जगह तमिलनाडु स्थित पेरिया, काँचीपुरम की है।

कुछ लोगों ने ASI को टैग करते हुए इन तस्वीरों की पुष्टि कर उचित कार्रवाई करने की भी माँग की है। तस्वीरों से आक्रोशित ट्विटर यूजर्स ने लिखा है कि ASI को मुगलों के किलों से समय निकलकर इन पर ध्यान देना चाहिए।

हिन्दू मंदिरों के बारे में जानकारी देने वाले ‘लॉस्ट टेम्पल’ नाम के ट्विटर अकाउंट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को इन तस्वीरों के साथ टैग करते हुए लिखा है, “क्या यही हमारी प्राचीन विरासत के प्रति सम्मान है? एक सदियों पुराना स्तम्भ नाले पर पुल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। आदरणीय मुख्यमंत्री, जितनी जल्दी हो सके कृपया कार्रवाई करें।”

तस्वीरों से निराश एक ट्विटर यूजर ने आपत्ति दर्ज करते हुए लिखा है कि तमिलनाडु राज्य हिन्दू विरोधी जहर के लिए प्रसिद्ध होता जा रहा है।

इन तस्वीरों की वास्तविकता के लिए हमने जिनसे सम्पर्क किया उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को बताई गई जगह पर भेज दिया गया है। इस सम्बन्ध में अन्य जानकारी मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।

‘2014 में 4 शहरों में मेट्रो थी, आज 18 में है’: ड्राइवरलेस ट्रेन के उद्घाटन पर PM मोदी, देश की पहली ऐसी सर्विस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को भारत की पहली ड्राइवरलेस ट्रेन ऑपरेशन का उद्घाटन किया। 37 किलोमीटर लंबी मेजेंटा लाइन पर जनकपुरी वेस्ट से बोटैनिकल गार्डन तक ये मेट्रो ट्रेन चलेगी। साथ ही एयरपोर्ट एक्सप्रेस लेन पर ‘नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC)’ सेवा की शुरुआत भी हुई। अब मजलिस पार्क से शिव विहार के बीच पिंक लाइन पर 57 किलोमीटर तक एक और ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन सेवा 2021 के मध्य तक शुरू हो जाएगी।

3 वर्ष पहले मेजेंटा लाइन का उद्घाटन भी पीएम मोदी ने ही किया था। अब इसी लाइन पर उन्होंने ऑटोमेटेड मेट्रो ट्रेन की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत तेजी से स्मार्ट सिस्टम की तरफ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अब नेशनल कॉमन मॉबिलिटी कार्ड से भी मेट्रो जुड़ रही है। पिछले साल अहमदाबाद से इसकी शुरुआत हुई थी और अब इसका विस्तार दिल्ली मेट्रो की एयर पोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दशक पहले जब शहरीकरण का असर और इसका भविष्य, दोनों ही बिल्कुल साफ था, तो उस समय एक अलग ही रवैया देश ने देखा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे भविष्य की ज़रूरतों को लेकर उतना ध्यान नहीं था, आधे-अधूरे मन से काम होता था, भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। इस सोच से अलग, आधुनिक सोच ये कहती है शहरीकरण को चुनौती ना मानकर एक अवसर की तरह इस्तेमाल किया जाए।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक ऐसा अवसर पैदा करना है, जिसमें हम देश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बना सकते हैं। एक ऐसा अवसर, जिससे हम ‘इज ऑफ लिविंग’ बढ़ा सकते हैं। सोच का ये अंतर शहरीकरण के हर आयाम में दिखता है। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि 2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो रेल थी, जबकि आज 18 शहरों में मेट्रो रेल की सेवा है। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2025 तक इसे 25 से ज्यादा शहरों तक विस्तार देने की योजना है।

बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RRTS- (दिल्ली मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) का शानदार मॉडल दिल्ली और मेरठ की दूरी को घटाकर एक घंटे से भी कम कर देगा। उन शहरों में जहाँ यात्री संख्या कम है, वहाँ मेट्रोलाइट वर्जन पर काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि ये सामान्य मेट्रो की 40 प्रतिशत लागत से ही तैयार हो जाती है। जिन शहरों में सवारियाँ और भी कम हैं वहाँ पर मेट्रो नियो पर काम हो रहा है।

ये सामान्य मेट्रो की 25 प्रतिशत लागत से ही तैयार हो जाती है। इसी तरह ही वाटर मेट्रो पर काम चल रहा है, जो आउट ऑफ द बॉक्स सोच का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेट्रो सर्विसेस के विस्तार के लिए मेक इन इंडिया महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लागत कम होती है, विदेशी मुद्रा बचती है और देश में ही लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिलता है। उन्होंने जानकारी दी कि रोलिंग स्टॉक के मानकीकरण से हर कोच की लागत अब 12 करोड़ से घटकर 8 करोड़ पहुँच गई है। प्रधानमंत्री ने कहा:

“आज चार बड़ी कंपनियाँ देश में ही मेट्रो कोच का निर्माण कर रही हैं। दर्जनों कंपनियाँ मेट्रो कंपोनेंट्स के निर्माण में जुटी हैं। इससे ‘Make in India’ के साथ ही आत्मनिर्भर भारत के अभियान को मदद मिल रही है। आधुनिकीकरण के लिए एक ही तरह के मानक और सुविधाएँ उपलब्ध कराना बहुत जरूरी है। राष्ट्रीय स्तर पर कॉमन मोबिलिटी कार्ड इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। आप जहाँ कहीं से भी यात्रा करें, आप जिस भी सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करें, ये एक कार्ड आपको इंटीग्रेटेड एक्सेस देगा। आज तमाम व्यवस्थाओं को एकीकृत करके देश की ताकत को बढ़ाया जा रहा है, एक भारत-श्रेष्ठ भारत को मजबूत किया जा रहा है। वन नेशन, वन मोबिलिटी कार्ड की तरह ही बीते वर्षों में हमारी सरकार ने देश की व्यवस्थाओं का एकीकरण करने के लिए अनेक काम किए हैं।”

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि ‘One Nation, One Fastag’ से देशभर के हाइवे पर ट्रैवल सीमलेस हुआ है। ‘वन नेशन, वन टैक्स’, अर्थात GST से देशभर में टैक्स का जाल समाप्त हुआ है । ‘वन नेशन, वन पावर ग्रिड’ से देश के हर हिस्से में पर्याप्त और निरंतर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है और बिजली का नुकसान कम हुआ है। ‘वन नेशन, वन गैस ग्रिड’ से उन हिस्सों की सीमलेस गैस कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो रही है, जहाँ गैस आधारित जीवन और अर्थव्यवस्था पहले सपना हुआ करता था।

उन्होंने बताया कि इसी तरह ‘वन नेशन, वन हेल्थ एश्योरेंस स्कीम’, यानी आयुष्मान भारत से देश के करोड़ों लोग, पूरे देश में कहीं भी इसका लाभ ले रहे हैं। ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ से एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले नागरिकों को नया राशनकार्ड बनाने के चक्करों से मुक्ति मिली है। पीएम मोदी ने गिनाया कि इसी तरह नए कृषि सुधारों और e-NAM जैसी व्यवस्थाओं से वन नेशन, वन एग्रीकल्चर मार्केट की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने ये भी जानकारी दी कि सरकार ऐसे ब्रेकिंग सिस्टम का भी प्रयोग कर रही है, जिनमें ब्रेक लगाने पर 50 प्रतिशत उर्जा वापस ग्रिड में चली जाती है। उन्होंने ऐलान किया कि आज मेट्रो रेल में 130 मेगावाट सोलर पावर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 600 मेगावाट तक ले जाया जाएगा। ड्राइवरलेस ट्रेन के बारे में उन्होंने कहा कि आज इस उपलब्धि के साथ ही हमारा देश दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जहाँ इस तरह की सुविधा मिलेगी।

‘राहुल गाँधी नानी की सेवा करने गए हैं’: कॉन्ग्रेस की पुष्टि के बाद सोशल मीडिया ट्रोल्स की हुई बेइज्जती

अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि राहुल गाँधी विदेश दौरे पर इटली गए हैं। कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल एक छोटे से ट्रिप पर विदेश गए हैं। वहीं अब पार्टी के महासचिव किसी वेणुगोपाल ने भी कहा है कि राहुल गाँधी अपनी नानी को देखने इटली गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी को व्यक्तिगत रूप से यात्रा का अधिकार है।

इस मुद्दे पर वेणुगोपाल ने पूछा कि आखिर इसमें गलत क्या है? उन्होंने भाजपा पर निम्न स्तरीय राजनीति करने का आरोप लगाते हुए वो राहुल गाँधी के खिलाफ इसलिए बयान दे रही है, क्योंकि उसे सिर्फ एक नेता को निशाना बनाना है। कॉन्ग्रेस नेताओं की इस स्वीकारोक्ति से पार्टी के सोशल मीडिया पिट्ठुओं को गहरा धक्का लगा है, जो अब तक ये कह कर बचाव कर रहे थे कि वो विदेश नहीं गए हैं। सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को कॉन्ग्रेस का स्थापना दिवस भी है।

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने इसे ‘कोरी बकवास’ बताते हुए कहा कि क़तर और भारत उन देशों की सूची में ही नहीं हैं, जहाँ से लोगों को इटली में हवाई यात्रा की अनुमति हो – ऐसे में राहुल गाँधी वहाँ जा ही नहीं सकते हैं। उन्होंने इटली सरकार के दस्तावेज का लिंक तक शेयर कर डाला और लोगों से कहा कि वो ‘झूठ’ फैलाने से पहले गूगल कर लें। साकेत गोखने ने ट्विटर पर घूम-घूम कर इसे फेक न्यूज़ बताया।

प्रशांत नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा कि लोग ‘क़तर एयरलाइन्स’ का नाम ले रहे हैं, ये व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के ज्ञान पर निर्भर हैं। कुछ ने दावा किया कि ‘क़तर एयरलाइन्स’ नामक की कोई कम्पनी ही नहीं है। संघमित्रा नामक ट्विटर यूजर ने इसे ‘फेक न्यूज़ प्रोपेगंडा’ बताते हुए पूछा कि मोदी कहाँ हैं और वो किसानों से बातचीत करने क्यों नहीं आ रहे हैं? कुछ ट्विटर यूजरों ने इसकी तुलना पीएम मोदी के विदेश यात्राओं से कर डाली।

कॉन्ग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने लिखा कि ‘किसानों की मौत’ को लेकर ‘अम्बानी-अडानी का मीडिया’ दुष्प्रचार फैला रहा है और साथ ही पूछा कि अपनी नानी की सेवा करना कोई गुनाह है क्या? पंजाब यूथ कॉन्ग्रेस भी इस बहस में कूद पड़ा और उसने कहा कि देश में 553 लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में एक की ही ट्रेवल हिस्ट्री को निकाल कर क्यों हंगामा किया जा रहा है? साथ ही राहुल गाँधी को शक्तिशाली बताते हुए लिखा कि उनका हर कदम खबरों में आता है।

इधर राहुल गाँधी दूसरे विवाद में भी फँस गए हैं। ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में उन्होंने एक कविता ट्वीट की थी, जिसके बाद इस कविता की रचना करने वाले दिवंगत कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी के परिजनों ने ही उनसे माफ़ी माँगने को कहा है। दिवंगत कवि के बेटे डॉक्टर विनोद माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी रचना को पैरोडी के रूप में प्रस्तुत किए जाने से उन्हें और उनके परिवार को पीड़ा हुई है। साथ ही पूछा कि क्या यह कविता और कवि की आत्मा के साथ न्याय है?