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‘तुम्हारा रेप करवाऊँगा, तड़पाऊँगा’: अभिनेत्री दिव्या की मौत के बाद पति गगन गबरू को लेकर खुलासा – तोड़ देता था उँगली

टीवी अभिनेत्री दिव्या भटनागर की हाल ही में कोरोना संक्रमण से ग्रसित होने के बाद मौत हो गई। लेकिन, इस दौरान अभिनेत्री के परिवार वालों ने उनके पति गगन गबरू के खिलाफ घरेलू हिंसा का आरोप लगाया, जिसके बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया। अब दिव्या भटनागर की मित्र रहीं देवोलिना भट्टाचार्जी ने इस मामले में पूरा दोष गगन गबरू पर लगाया है। देवोलिना का कहना है कि गगन अक्सर दिव्या के साथ गाली-गलौज करता था।

देवोलिना की मानें तो गगन ने न सिर्फ दिव्या, बल्कि अभिनेत्री के भाई को भी मार डालने की धमकी दी थी। अपनी दोस्त के साथ वीडियो कॉल पर हुई बातचीत को सार्वजनिक करते हुए दिव्या ने ये खुलासे किए हैं। दावा किया जा रहा है कि इस रिकॉर्डिंग में आवाज़ दिव्या की ही है। इसमें वो कहती नजर आ रही हैं कि गगन ने कहा था कि वो बता देगा कि असली रेप क्या होता है और अपने लोगों से उसका रेप करवाएगा। इस ऑडियो में दिव्या भटनागर कहती हैं:

“वो ये भी कह रहा है कि अगर उसे सज़ा हो गई तो वो हत्या करने के बाद ही अंदर जाएगा। जब 10 वर्ष के लिए ही जेल जाना है तो यही सही। मैंने इस कोरोना लॉकडाउन में भी बहुत कुछ सहा है। बेल्ट से मार खाई है। मैं अब जब तुमसे बात कर रही हूँ तो समझो कि कितना टूट गई हूँ। किसी तरह हिम्मत कर के मैं बात कर रही हूँ। मैं अपने माँ-बाप से काफी अटैच हूँ। आज मैं भागी हूँ तो अपने नहीं, माता-पिता और भाई की वजह से, जिन्हें लेकर वो धमकियाँ दे रहा है।”

इस ऑडियो में दिव्या आगे कहती हैं कि वो खुद तो मार खाती ही रहती थी, लेकिन जब उसने उसके माता-पिता और भाई का नाम लिया, तब वो भागी। इसके बाद वो बुरी तरह रोते हुए कहती हैं कि मेरे दोस्तों ने कई बार कहा कि दिव्या ऐसा मत कर, मत कर, लेकिन मैं किसी की भी नहीं सुनी। साथ ही अपने पति गगन गबरू को लेकर कहा कि वो कहता है कि बच्चा नहीं करूँगा, तुझे तड़पाऊँगा।

दिव्या ने इस ऑडियो में गगन गबरू पर घोर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। देवोलिना ने अपनी दोस्त की मौत के बाद आवाज़ उठाते हुए कहा कि इन सबके बावजूद हम अपराध होने तक इंतजार करते रहते हैं और बस तमाशा देखने बैठे रहते हैं। उन्होंने कहा, “वो अपराधी आज भी इधर-उधर खुला घूम रहा है और अपने समर्थन के लिए अपील कर रहा है।” उन्होंने गगन गबरू को बेशर्म और संवेदनहीन करार दिया।

देवोलिना भट्टाचार्जी ने इंस्टाग्राम पर किया खुलासा

‘साथ निभाना साथिया’ में ‘गोपी बहू’ के किरदार के लिए लोकप्रिय देवोलिना ने दिव्या भटनागर के दोस्तों और उनका ‘भला चाहने वाले’ लोगों से पूछा कि आखिर तुम सब कहाँ हो? उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, “रहने को जगह नहीं तो दिव्या का घर, खाना दिव्या का, सब दिव्या का। आज साँप सूँघ गया है तुम लोगों को? तुम स्वार्थी लोग किसी काम के नहीं हो। मगरमच्छ के आँसू बहा कर सब के सब गुफा में छिप गए।” दिव्या ने फेसबुक मैसेंजर पर भी बताया था कि गगन अक्सर उसके हाथ की उँगली तोड़ देता है, मारता है और शादी भी उसे धमकी देकर ही की थी।

बॉलीवुड में सुशांत सिंह राजपूत की मौर के बाद भी कई ऐसी मौतें हुई हैं, जिन्हें लेकर कुछ न कुछ विवाद रहा है। विभिन्न चैट्स के हवाले से ये भी दावा किया जा रहा है कि दिव्या ने गगन पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाया था। दिव्या ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ सीरियल के कारण लोकप्रिय थीं। दिव्या के परिवार वालों ने भी मीडिया के सामने अभिनेत्री के हाथ और मुँह पर पिटाई की वजह से बने निशान की तस्वीरें शेयर कर न्याय की माँग की।

बैंक, दवा और हथियार बनाने वाली कंपनी… सबमें घुसे हैं चायनीज, भारत में भी: 19.5 लाख लोगों के डेटा लीक से खुलासा

चीन की वामपंथी पार्टी के लोग अब विदेशों में भी अपनी पैठ बना रहे हैं। और यह काम वो विभिन्न संगठनों में तकनीकी दक्षता, कौशल या फिर राजनीतिक साठ-गाँठ के जरिए कर रहे हैं। 19 लाख 50 हजार चायनीज वामपंथियों की लीक हुई डेटाबेस से यह जानकारी सामने आई है।

चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के रजिस्टर्ड और कट्टर कार्यकर्ताओं की दुनिया के टॉप संस्थानों में घुसपैठ का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि वो ब्रिटिश राजदूत ऑफिस, यूनिवर्सिटी और कई नामी कंपनियों तक में ये काम कर हैं।

हाल में सीसीपी के रिकॉर्ड लीक होने के बाद पता चला है कि इनकी घुसपैठ तो भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के वाणिज्य दूतावासों में भी हैं। वो भी छोटे-मोटे पद पर नहीं बल्कि प्रतिष्ठित पदों पर। जैसे कहीं ये सीनियर पद पर हैं तो कहीं विशेषज्ञ के तौर पर या फिर कहीं सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। बेहद सुनियोजित ढंग से इन्हें पिछले एक दशक से इन दूतावासों में शंघाई के जरिए घुसा कर रखा गया है।

लीक हुई लिस्ट में इन चीनी वामपंथियों की पोजिशन (पद), बर्थ डेट (जन्म तारीख) और जातीयता जैसी जानकारियाँ शामिल हैं। द ऑस्ट्रेलियन की पड़ताल बताती है कि कम से कम 10 वाणिज्य दूतावासों में वरिष्ठ राजनीतिक और सरकारी मामलों के विशेषज्ञ, क्लर्क, आर्थिक सलाहकार और कार्यकारी सहायक के रूप में सीसीपी सदस्य कार्यरत हैं।

विदेशी विशेषज्ञों की मानें तो ये स्टेट स्पॉन्सर जासूसों का समूह हो सकता है। लीक डेटा कहता है कि सीसीपी वामपंथी Boeing, Pfizer और Astrazeneca जैसी कंपनियों में भी काम कर रहे हैं। इनमें Boeing अमेरिकन कंपनी है, जो रक्षा संबंधी कॉन्ट्रैक्ट लेती है जबकि Pfizer और Astrazeneca दवाइयों की कंपनी है, जो कोरोना वैक्सीन तैयार करने में लगातार लगी हुई हैं।

ऑस्ट्रेलिया की मल्टीनेशनल बैंकिंग कंपनी, द ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप, की भी कम से कम एक ब्रांच में सीसीपी सदस्यों की घुसपैठ है। बैंकिंग कंपनी का कहना है कि हालाँकि वह कर्मचारियों की राजनीतिक झुकाव में हस्तक्षेप नहीं करता और इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि सीसीपी का हर सदस्य चीनी सरकार का जासूस है, लेकिन अब ये नए खुलासे सुरक्षा संबंधी चिंता को बढ़ाने वाले हैं।

सीसीपी के साथ वर्तमान में 92 मिलियन (9 करोड़ 20 लाख लोग) सदस्य जुड़े हुए हैं और वह पार्टी के हित में काम करने की कसमें खाते हैं। साथ ही साथ खुद को पार्टी के लिए कुर्बान करने के लिए भी हमेशा तत्पर रहते हैं। ऐसे में वॉल्वो, सिटीबैंक, एचएसबीसी, आईकेईए, फॉक्सवेगन, जैगुआर, लैंड रोवर और मर्सेडीज़ बेंज जैसी मशहूर कंपनियों में इनकी भूमिका पाई गई है।

लीक डेटा बताता है कि शंघाई के मिशन में कई देशों में सीसीपी सदस्य नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा रिपोर्ट कहती है कि विदेश मंत्रालय और व्यापार विभाग सीधे चीनी सरकारी एजेंसी शंघाई के माध्यम से स्टाफ को रखता है। चीन की सरकारी एजेंसी, द शंघाई फॉरेन एजेंसी सर्विस डिपार्टमेंट के पास कम से कम 12 सक्रिय सीसीपी ब्रांच हैं, जिनमें 249 सदस्य हैं।

इस एजेंसी की वेबसाइट जुलाई 2020 से शंघाई में ऑस्ट्रेलियाई, यूएस, इथियोपियाई, ब्राजील, चिली और हॉन्गकॉन्ग के वाणिज्य दूतावासों के लिए नौकरी को सूचीबद्ध कर रही है। अपने रेफरेंस से इन जगहों पर नियुक्तियाँ करती है।

द ऑस्ट्रेलियन की रिपोर्ट में सैमुअल आर्मस्ट्रॉन्ग के बयान का हवाला देते हुए इस एजेंसी पर संदेह जताया गया है कि ये एक सुनियोजित और स्टेट स्पॉन्सर जासूसी समूह है। इसके अलावा एक अन्य एजेंसी ने भी कहा है कि जितने भी सीसीपी सदस्य विदेशी दूतावासों में काम कर रहे हैं, वह सब जासूस हैं।

लीक हुए डेटाबेस से यह भी पता चला कि एक CCP सदस्य ने व्यापार और अर्थशास्त्र के नीति सलाहकार के रूप में चार साल तक शंघाई में न्यूजीलैंड के वाणिज्य दूतावास के लिए काम किया। बाकी, 6 सीसीपी सदस्यों ने शंघाई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में एक राजनीतिक विशेषज्ञ, एक पर्यवेक्षक और एक सहायक सहित विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।

इसके अलावा शंघाई में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास में वर्तमान में एक वरिष्ठ अधिकारी है, जो द ऑस्ट्रेलियन के अनुसार, डिप्लोमैटिक कवर के तहत काम करने वाले एमआई 6 अधिकारियों के पास काम करता है। बता दें कि M16 ब्रिटिश की खूफिया एजेंसी है।

ऐसे ही स्विस एंबेसी में भी व्यापार अधिकारी और स्टेशन का डिप्टी हेड सीसीपी सदस्य है जबकि जर्मन दूतावास में सीसीपी सदस्य एक क्लर्क के रूप में है। इटली के दूतावास में 12 साल से एक सीसीपी सदस्य है। वहीं साउथ अफ्रीका में एक सीसीपी सदस्य करीब 16 साल बिता चुका है। एक अन्य सीसीपी सदस्य ने वरिष्ठ राजनीतिक और सरकारी मामलों के विशेषज्ञ होने के नाते यूएस दूतावास में 8 साल बिताए और इसके बाद वह ब्रिटेन दूतावास चला गया।

रिपोर्ट का कहना है कि सीसीपी सदस्यों का डेटा लीक होने से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्य करने के तरीके का खुलासा हुआ है कि कैसे वह कंपनियों और सरकारी एजेंसियों में अपनी ब्रांच स्थापित कर रहे हैं।

बता दें कि ये डेटाबेस साल 2016 के अप्रैल में शंघाई सर्वर से कलेक्ट किया गया था। यही लीक डेटा बाद में कई मीडिया समूहों, जैसे- द ऑस्ट्रेलियन, द मेल ऑन संडे इन ब्रिटेन, डि स्टैंडर्ड इन बेल्जियम और स्वीडन जर्नलिस्ट में बाँटा गया और इसी के आधार पर अब यह जानकारी आई है।

नए लव जिहाद कानून में पकड़ी गई लड़की का गर्भपात? CM योगी पर निशाना साधते विदेशी मीडिया में फेक रिपोर्टिंग

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित काँठ थाना क्षेत्र में एक घटना को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इसकी अगुआई विदेशी मीडिया कर रहा है। ‘टेलीग्राफ यूके’ में प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि यूपी पुलिस ने ‘लव जिहाद’ के आरोप में एक महिला को ‘हिरासत में लिया’, जिसके बाद उसका जबरन गर्भपात करा दिया गया। इस तथाकथित ‘घटना’ के लिए यूपी पुलिस और सीएम योगी को निशाने पर लिया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस नेता श्रीवत्स ने भी टेलीग्राफ की इस खबर को शेयर करते हुए दावा किया कि यूपी में ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने नए कानून के तहत हिरासत में ली गई महिला का यूपी पुलिस की कस्टडी में ही गर्भपात हो गया। इसमें महिला के परिवार के हवाले से यहाँ तक दावा किया गया है कि महिला को जबरदस्ती एक इंजेक्शन दिया गया, ताकि उसका गर्भ गिराया जा सके। श्रीवत्स ने दावा किया कि जिस खबर को ‘Modia’ ने नज़रअंदाज़ किया, उसे विदेशी मीडिया ने रिपोर्ट किया।

उन्होंने इसे फासिज्म भी करार दिया। टेलीग्राफ ने अपनी हेडिंग में ही न सिर्फ यूपी में महिलाओं को बचाने के लिए लाए गए इस कानून को ‘विवादित’ बता दिया, बल्कि ये भी दावा किया कि महिला का जबरन गर्भपात कराया गया। साथ ही लिखा गया कि मुस्लिमों के बीच भारत में ‘डर का माहौल’ है, क्योंकि ‘हिन्दू राष्ट्रवादी सरकार’ उन्हें निशाना बना रही है। इस खबर को मीडिया संस्थान के इंडिया कॉरेस्पोंडेंट जो वैलन ने रिपोर्ट किया।

इसी तरह ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने भी इस खबर को इसी प्रकार से पेश किया। इसमें महिला के सास के हवाले से बताया गया कि मुरादाबाद के शेल्टर होम में महिला का गर्भपात हुआ। महिला का नाम मुस्कान जहाँ (निकाह से पहले हिन्दू थी और नाम पिंकी था) बताया गया है। उसने मुस्लिम युवक से निकाह के बाद इस्लाम अपना लिया था। असल में उसके सास ने भी बयान दिया है कि ‘ऐसा हो सकता है कि उसे एबॉर्शन के लिए इंजेक्ट किया जाए।’

‘टेलीग्राफ यूके’ ने इस खबर को प्रमुखता से चलाया

मुस्कान और राशिद देहरादून में एक-दूसरे से मिले थे। दोनों 6 दिसंबर को अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराने पहुँचे थे। हालाँकि, इस मामले में ‘लव जिहाद’ के भी आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मामला कोर्ट में जाने के कारण महिला को ‘नारी निकेतन’ में सुरक्षित रखा गया। फिर गर्भपात वाली खबर फैली। हालाँकि, इस खबर की सच्चाई कुछ और ही है। आइए, देखते हैं क्या है सच्चाई।

HT ने भी इस खबर को प्रकाशित किया

ऑपइंडिया ने जब काँठ थाना क्षेत्र के प्रभारी निरीक्षक अजय गौतम से संपर्क किया, तो उन्होंने इसे ‘फेक न्यूज़’ करार दिया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की रिपोर्ट भी इस बात को नकारती है। उन्होंने कहा कि महिला तो पुलिस कस्टडी में है ही नहीं, वो तो ‘नारी निकेतन’ में है। सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को महिला का बयान भी रिकॉर्ड किया जाएगा। उन्होंने गर्भपात वाली खबर को पूरी तरह अफवाह बताया।

जैसे ही ये अफवाह फैली, उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर विशेष गुप्ता ने आदेश दिया कि महिला का मेडिकल परीक्षण कराया जाए। मेडिकल रिपोर्ट आई तो पता चला कि महिला 3 महीने की गर्भवती है। यह मामला हिन्दूवादी कार्यकर्ताओं की वजह से जबरदस्ती नहीं दर्ज किया गया (जैसा कि HT की खबर में दावा किया गया है), बल्कि महिला की माँ व परिजनों ने ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

असल में ये अफवाह इसीलिए फैलाई गई क्योंकि महिला ने पेट में दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद त्वरित इलाज के लिए उसे शुक्रवार को तुरंत जिला अस्पताल लाया गया था। रविवार की सुबह में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। इसी बीच अफवाहों के कारण उसकी मेडिकल जाँच भी हुई। शुक्रवार को दोपहर 11 बजे और फिर 2 बजे, दो बार उसे अस्पताल ले जाया गया। बयान दर्ज करने के बाद वो जहाँ मन वहाँ जा सकेगी।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, 22 वर्षीय युवती ने अपने परिजनों के साथ घर जाने से इनकार कर दिया था, इसीलिए उसे ‘नारी निकेतन’ में भेजा गया था। आरोपित और उसके भाई को जेल भेजा गया। अफवाह उड़ने के बाद खुद DPO राजेश गुप्ता ने अपनी निगरानी में मेडिकल परीक्षण कराया। जिला अस्पताल में महिला का अल्ट्रासाउन्ड भी हुआ। चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके हवाले से आयोग के अध्यक्ष ने पुष्टि की कि महिला का गर्भ पूर्णरूपेण सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए ये साजिश रची गई हो। राज्य सरकार को वो इससे सम्बंधित जानकारी व रिपोर्ट जल्द ही सौंपेंगे। उनकी बात सत्य है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसी तरह की खबरों के हवाले से किसी भी सरकार को बदनाम किया जाता है। यूपी में योगी आदित्यनाथ के भाजपा नेता होने और मठाधीश होने की वजह से मीडिया का गिरोह उनके खिलाफ लगातार साजिश रचने में लगा रहता है।

नवंबर 28, 2020 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दी। इसके बाद ये प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू हो गया है। राज्यपाल ने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को इसकी मंजूरी दी। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये अपराध गैर-जमानती हो गया है और इसे 6 महीनों के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।

खेतों के रास्ते राशन लेने जा रहे लोग, मरीजों को पूछने वाला भी कोई नहीं: ‘किसान आंदोलन’ से 50000 ग्रामीण संकट में

जैसे-जैसे ‘किसान आंदोलन’ तेज हो रहा है, वैसे-वैसे दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर स्थित गाँवों के लोगों की परेशानियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। सोनीपत जिले में स्थित कुंडली गाँव की भी यही कहानी है। पिछले 2 दिनों में यहाँ आने वाले किसानों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे ग्रामीण हलकान हैं। लोगों का अपने ही घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। उनके घर में राशन-पानी कम है, लेकिन वो बाहर नहीं निकल सकते।

‘अमर उजाला’ में प्रकाशित अंकित चौहान की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने गाँव में कुछ इस तरह से डेरा डाल रखा है कि जहाँ पहले कम से कम एक बाइक निकलने की जगह बची थी, अब वो भी जगह नहीं है। पूरा सड़क जाम पड़ा हुआ है। बाइक और साइकल तो छोड़िए, पैदल चलने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सिर्फ कुंडली ही नहीं, आस-पास के अन्य गाँवों के लोग भी खेतों के रास्ते राशन-पानी लेने जा रहे हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर स्थित कुंडली गाँव व उसके आस-पास पिछले 16 दिनों से किसानों ने तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की माँग के साथ धरना दे रखा है। पंजाब के 25,000 किसानों के पहुँचने से शुरू हुआ धरना अब और विशाल होता जा रहा है, क्योंकि ये किसान संगठन दूर-दूर से किसानों को उकसा कर बुलाने में लगे हुए हैं। लगभग 7 किलोमीटर तक की दूरी पर किसानों ने अपना डेरा जमा रखा है।

कुंडली व आस-पास के रसोई, नाथूपुर, प्याऊ मनियारी, सफियाबाद और नांगल गाँवों के ग्रामीण पहले बची-खुची जगह का इस्तेमाल कर के ज़रूरी सामान लेने बाहर निकलते थे, अब उनके लिए वो जगह भी नहीं रही। वो खेतों के रास्ते दूसरे गाँवों में जाकर खरीददारी कर रहे हैं। कुंडली के लोगों को ज्यादा मुश्किल है क्योंकि वहाँ तो दुकान, क्लीनिक, मॉल और शोरूम वगैरह उसी दिन से बंद हैं, जिस दिन ‘किसान आंदोलन’ शुरू हुआ था।

पहले कुछ दिनों तक किसानों के डर से स्वतः ही इन प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने सतर्कता बरतने के लिए उन्हें बंद करवा दिया है। करीब 50,000 लोग ऐसे हैं, जिन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक व्यक्ति ने पूछा कि क्लिनिक बंद होने से मरीजों को कहाँ लेकर जाएँगे? एक शिक्षक ने बताया कि अब स्कूल भी जाना संभव नहीं रहा। सफियाबाद के सरपंच ने बताया कि किसानों के बैरियर लगाने से मरीज हलकान हैं।

उधर चिल्ला सीमा पर दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच प्रदर्शनकारी संगठन अब आपस में ही सिर-फुटव्वल पर उतर आए हैं। ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU) के भानु गुट के नेताओं में तकरार की खबर है। प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने किसान नेता व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह की बात मानने से साफ़ इनकार कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए बिना ये आंदोलन किसी भी हाल में ख़त्म नहीं किया जाएगा।

9वीं क्लास की लड़की का 3 दिन तक रेप: समीर खान और मोनू खान बेहोशी का इंजेक्शन लगा कर करता था बलात्कार

झारखंड के पलामू जिले के हुसैनाबाद में 9वीं कक्षा की एक छात्रा का रेप करने के आरोप में पुलिस ने समीर खान और मोनू खान नामक 2 युवकों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों युवकों ने बेहोशी की हालत में लड़की का 3 दिन तक गैंगरेप किया था। अब पुलिस ने इन्हें हिरासत में लेकर पलामू की सेंट्रल जेल भेज दिया है और लड़की को मेडिकल चेकअप के लिए मेदिनीकाय मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला 10 दिसंबर का है। लड़की अपने घर से दोपहर दो-तीन बजे एक बर्थडे पार्टी में जाने के लिए निकली थी, लेकिन दोनों आरोपित उसे बहला-फुसला कर अपने साथ ले गए। जब बहुत रात होने पर लड़की का कुछ पता नहीं चला तब उसके परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। असफलता हाथ लगने पर पुलिस को सूचित किया गया और पूरे प्रकरण में मामला दर्ज हुआ।

12 दिसंबर को लड़की किसी तरह आरोपितों की चंगुल से निकल बदहवास हालत में अपने घर पहुँची और उसकी स्थिति देख कर उसे हड़बड़ी में अस्पताल में भर्ती करवाया गया। देर रात जब इलाज के बाद उसे होश आया तो उसने आपबीती परिजनों को सुनाई। इसके बाद पुलिस में भी उसने अपना बयान दर्ज करवाया।

लड़की ने बताया कि शहर के सैयद टोली निवासी समीर खान और लंबी गली निवासी मोनू हुसैन उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ बाइक पर बैठाकर अनुमंडल कार्यालय के पास कर्पूरी मैदान के एक छोर पर बन रहे निर्माणाधीन सरकारी भवन में ले गए और वहाँ एक इंजेक्शन लगा कर उसका लगातार दुष्कर्म करते रहे। ये भवन एसडीएम और एसडीपीओ के सरकारी आवास से आधे किलोमीटर के दायरे में बना था।

हुसैनाबाद थाना प्रभारी अजय कुमार ने इस मामले के संबंध में बताया कि पीड़िता के बयान के आधार पर दोनों आरोपितों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और रविवार को उन्हें न्यायिक हिरासक में जेल भी भेज दिया गया है। इससे पहले लड़की के पिता की शिकायत पर लड़की के गायब होने का मामला दर्ज हुआ था।

‘सना खान के शौहर इस्लाम से दूर हो गए’ – इस्लाम के लिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री छोड़ने वाली हिरोइन की फोटो पर टूटे कट्टरपंथी

पिछले दिनों बॉलीवुड की चमक-धमक छोड़ कर इस्लाम का रास्ता अपनाने वाली पूर्व अभिनेत्री सना खान अब तक सोशल मीडिया में चर्चा में हैं। कारण है- अपने शौहर मुफ्ती अनस के साथ उनकी फोटोज और उनकी वीडियोज। 

अभी बीते दिनों तक उनकी बुर्के वाली तस्वीरों पर मजहब विशेष के लोग उनकी और मुफ्ती अनस की तारीफ करते नहीं थक रहे थे, लेकिन अब जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इन लोगों ने सना के साथ-साथ मुफ्ती अनस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

दरअसल, बीते दिनों सना ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट के जरिए जानकारी दी थी कि वह अपने शौहर के साथ कश्मीर में हैं और काफी इंजॉय कर रही हैं। इसके बाद से वह लगातार वहाँ से तस्वीरें अपलोड कर रही थीं। हाल में जब उन्होंने अपनी और अनस की तस्वीर अपलोड की, जिसमें अनस ने सना को पकड़ा हुआ है तो इस पर बेहद अजीब कमेंट्स देखने को मिले। 

हैरानी की बात है कि ये कमेंट समुदाय विशेष के लोगों ने ही किए थे। इन कमेंट्स में अनस के मुफ्ती होने पर सवाल उठाए गए थे। उनकी तुलना शैतान से की गई और उन्हें समझाने का प्रयास हुआ था कि वह एक मुफ्ती हैं न कि कोई फिल्मी हीरो। इतना ही नहीं, लोगों ने सना की तुलना भी सनी लियोन से की थी।

एक यूजर ने इस तस्वीर को देखकर सना खान के लिए लिखा, “सना तुमने मुफ्ती साहब को बदल दिया। एक समय था, मैं सना की तस्वीरें नहीं देखता था। लेकिन अब तुम और ज्यादा फेमस हो और अपनी खूबसूरती पब्लिकली दिखा रही हो। कृपया अपना चेहरा ढक कर रखो और मेक अप भी।”

वकील ताहिर अहमद लिखते हैं, “मुस्कुराहट से सना, सनी लियोन लग रही हैं।” फयाज अहमद कहते हैं, “पर्दा रखो, इस्लाम यही सिखाता है, तुम लोग इस्लाम का मजाक मत उड़ाओ।”

मुदस्सिर नजर वार लिखते हैं, “मैंने इसे कभी फॉलो नहीं किया, लेकिन मुझे लगता है ये अब भी बॉलीवुड में है। इन्होंने इंडस्ट्री छोड़ी क्योंकि इन्हें एक घटिया आदमी मिला, जिसे इन्होंने शाहरूख खान का नाम दे दिया।‘

अब्दुल सलाम मुफ्ती अनस के लिए लिखते हैं, “ये एक शैतान है। ये ऐसी चीज के इंतजार में था। पता नहीं, आखिर किसने इसे मुफ्ती का प्रमाण दिया है।”

मजूर भट्ट कहते हैं कि मुफ्ती सना के प्यार में सब कुछ भूल चुका है। वहीं करीम लिखता है कि वह सना में आए बदलाव का आदर करता है लेकिन जब उसने एक्टिंग छोड़ दी है तो मुफ्ती साहब को एक्टिंग क्यो सिखा रही है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले तक यूट्यूब पर या अन्य सोशल मीडिया अकॉउंट्स पर सना खान को मुफ्ती अनस के साथ बुर्के और हिजाब में देख कर सैंकड़ों समुदाय विशेष के लोग माशाल्लाह बोल रहे थे, अनस की तारीफ कर रहे थे कि वह सना को सही रास्ते पर ले आए, लेकिन अब धीरे-धीरे इन प्रशंसकों की संख्या कम हो रही है। यूजर्स कह रहे हैं कि एक मुफ्ती को ये सब काम शोभा नहीं देते, चाहे तो सना बेशक उनकी बीवी हों।

साल 2020 का अंतिम सूर्यग्रहण है आज: जानिए कैसे वैदिक ऋषियों ने पृथ्वी के गोल होने का पता लगाया

सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को साल 2020 का अंतिम सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) लग रहा है, लेकिन ये भारत में नहीं दिखेगा। इस दिन लगने वाले सूर्यग्रहण का विस्तार 1.02 होगा, अर्थात चाँद (Moon) अपनी छाया से सूर्य (Sun) को पूर्णरूपेण ढक लेगा और पृथ्वी (Earth) के कुछ हिस्सों पर अँधेरा छाएगा। ये सूर्यग्रहण 2 मिनट 10 सेकेंड्स तक रह रह सकता है। चिली, अर्जेंटीना, दक्षिण अटलांटिक महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर से ये देखा जा सकेगा। दक्षिणी अमेरिका के लोगों को ये आंशिक रूप से दिखेगा।

हालाँकि, ये सूर्यग्रहण एशिया के किसी भी देश से नहीं देखा जा सकेगा। अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और दक्षिण अमरीका महाद्वीपों के अधिकतर हिस्सों से लोग इसे नहीं देख सकेंगे। इससे पहले जो जून 21, 2020 को सूर्यग्रहण आया था, उसका विस्तार 0.99 था। ये एक चक्राकार सूर्यग्रहण था। अब अगला सूर्यग्रहण सीधा जून 10, 2021 में ही देखा जा सकेगा। आज के सूर्यग्रहण को ब्राजील, पेरू और उरुग्वे के लोग भी देखेंगे।

क्या होता है सूर्यग्रहण (What is Solar Eclipse?)

आखिर सूर्यग्रहण होता क्या है और ये कैसे लगता है? जैसा कि हमें पता है, चाँद (Moon) पृथ्वी का चक्कर लगाता है और पृथ्वी (Earth) सूर्य का। चाँद ऐसे करते-करते कभी-कभी पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। जब ऐसा होता है तो स्वाभाविक है कि सूर्य की किरणों को चाँद पृथ्वी तक पहुँचने से रोक लेता है। इसी कारण सूर्यग्रहण लगता है। सूर्यग्रहण के दौरान पृथ्वी पर जो अँधेरा होता है, वो असल में चाँद की ही छाया होती है।

सूर्यग्रहण भी 3 प्रकार के होते हैं। ‘टोटल’ (पूर्ण) सूर्यग्रहण (Total Solar Eclipse) उसे कहते हैं, जिसे पृथ्वी के एक छोटे हिस्से से ही देखा जा सकता है। जो लोग इसे देख पाते हैं, समझिए कि वो पृथ्वी पर पड़ने वाली चाँद की छाया के मध्य के क्षेत्र में रहने वाले लोग हैं। आकाश में अँधेरा छा जाता है, जैसे रात हो गई हो। इस दौरान सूर्य, चाँद और पृथ्वी एकदम सीधी रेखा में होते हैं। जबकि दूसरे प्रकार के सूर्यग्रहण को आंशिक (Partial Solar Eclipse) सूर्यग्रहण कहते हैं।

इस दौरान इस दौरान सूर्य, चाँद और पृथ्वी एक सीधी रेखा में नहीं होते। देखने पर प्रतीत होता है कि सूर्य के एक छोटे हिस्से पर कोई गहरी छाया प्रदर्शित हो रही है। जबकि तीसरे प्रकार का सूर्यग्रहण है चक्राकार (Annular Solar Eclipse) सूर्यग्रहण। ऐसे सूर्यग्रहण के समय चाँद, पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर रहता है। स्पष्ट है कि तब ये यहाँ से छोटा दिख रहा होता है। तब ये सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढक पाता है।

बड़े सूर्य के सामने छोटा का चाँद ऐसा लगता है, जैसे किसी सफ़ेद डिस्क के ऊपर एक छोटा सा काला डिस्क रखा हुआ हो। यही कारण है कि हमें चाँद के चारों तरफ एक रिंग दिखाई देता है। सूर्यग्रहण के दौरान पृथ्वी पर चाँद की दो छायाएँ पड़ती हैं, जिनमें से पहली को ‘Umbra’ कहते हैं। पृथ्वी पर आते-आते ये छाया छोटी पड़ जाती है। दूसरी वाली छाया को ‘Penumbra’ कहते हैं, और पृथ्वी पर आते-आते ये बड़ी होती चली जाती है।

जो लोग ‘Umbra’ छाया में होते हैं, उन्हें पूर्ण (Total) सूर्यग्रहण दिखाई देता है। ये दुर्लभ है और पृथ्वी के किसी भी हिस्से में औसतन प्रति 18 महीने में एक बार ही देखा जा सकता है। वैज्ञानिक अभी भी ग्रहण पर लगातार अध्ययन कर रहे हैं। चाँद का दिन वाला हिस्सा (जो हमेशा पृथ्वी की तरफ रहता है) कैसे ग्रहण के समय ठंडा पड़ जाता है, इस पर NASA ने अध्ययन किया है। हजारों वर्ष पूर्व वैदिक ऋषियों ने ग्रहण के दौरान ही पृथ्वी, सूर्य और चाँद के गोलाकार होने का पता लगाया होगा।

कोरोना महामारी के बावजूद MGNREGS के तहत रोजगार में 243% की बढ़ोतरी, मजदूरों को ₹76800 करोड़ का पेमेंट

जहाँ एक तरफ कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के कारण दुनिया भर में लॉकडाउन हुए और कई काम ठप्प हो गए, भारत में इन सबके बावजूद MGNREGS (महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत रिकॉर्ड संख्या में मजदूरों को पेमेंट किए गए। मौजूदा वित्तीय वर्ष में मात्र 8 महीनों में ही कुल अलॉट किए गए फण्ड का 90% हिस्सा उपयोग कर लिया गया है, अर्थात अंतिम 4 महीनों के लिए 10% ही बचा है।

भारत का केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय दुनिया की इस सबसे बड़ी रोजगार योजना का संचालन करता है। मार्च 2021 में खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए उसे MGNREGS के तहत खर्च करने के लिए 84,900 करोड़ रुपए का फण्ड अलॉट किया गया था। ये फण्ड दो इंस्टॉलमेंट्स में जारी किया गया था। अप्रैल से लेकर नवंबर (2020) तक इनमें से 76,800 करोड़ रुपए का पेमेंट किया जा चुका है।

वहीं अगर पिछले वर्ष की बात करें तो इन 8 महीनों में 50,000 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इस हिसाब से इसमें 26,800 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। सारे सरकारी मंत्रालयों को मिला दें तो ये अलॉट किए गए फण्ड का सबसे ज्यादा खर्च दर है। बजट में जितना एलोकेशन हुआ था, मंत्रालय ने उससे 12% पॉइंट्स ज्यादा खर्च किए हैं। हालाँकि, ऐसा नहीं है कि बचे हुए फंड्स में से ही आगे का खर्च चलाया जाएगा।

वित्त मंत्रालय के बड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि MGNREGS के तहत खर्च के लिए अभी और बजट अलॉट किया जाएगा। इस योजना के तहत हर गरीब ग्रामीण परिवार के किसी एक सदस्य को वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है, ऐसे में कोरोना महामारी के बीच ये सरकार की बड़ी सफलता है। इस वर्ष 1 करोड़ नए परिवारों को इस योजना के तहत जोड़ा गया। अगर ‘पर्सन डेज’ में देखें तो इसमें 243% की बढ़ोतरी हुई है।

इतना ही नहीं, MGNREGS के तहत इस बार मजदूरी भी पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं ज्यादा दी गई है। इस वर्ष कुल 9.02 करोड़ जॉब कार्ड्स जारी किए गए, जिनमें से 83.09% ने इस रोजगार योजना के तहत काम किया। मई 2020 में सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार दिया गया, लेकिन ओडिशा, बिहार और झारखण्ड जैसे गरीब राज्यों से मजदूर फिर महानगरों की ओर चल पड़े तो इससे काम थोड़ा धीमा हुआ।

झारखण्ड और तमिलनाडु 100 दिन का अनिवार्य काम देने में सबसे पीछे हैं। हालाँकि, 7.5 करोड़ लोगों 13% ऐसे भी थे, जिन्हें कोई काम नहीं मिल पाया। राजस्थान का कहना है कि वहाँ कम ही ऐसे जॉब डिमांड्स थे, जिन्हें नहीं पूरा किया गया। औसत के मामले की बात करें तो इस साल लोगों को औसतन 41.59 दिनों का काम दिया गया, जो 2019-20 के 48.4 और 2018-19 के 50.88 से कम था। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को भी जॉब कार्ड्स दिए जा रहे हैं।

आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए मई 12, 2020 को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़े आर्थिक सुधारों की घोषणा करते हुए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज से अर्थव्यवस्था में नई जान फूँकने की बात कही थी। इसमें से 48,100 करोड़ रुपए वीजीएफ और मनरेगा में खर्च किए जाने का खाका पेश किया गया था। मजदूरों को मुफ्त में अनाज भी दिए जा रहे हैं।

300 ऑटो ड्राइवर और घर-घर पूछताछ, तब 46 दिन बाद मिली नाबालिग: एसके सिन्हा बने शोएब खान के लव जिहाद की हर डिटेल

दिल्ली पुलिस ने शोएब खान (18) को पहचान बदलकर 15 साल की लड़की को झाँसा देने, अपहरण और जबरन निकाह की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। अब इस मामले में हैरान करने वाले डिटेल सामने आए हैं। पता चला है कि शोएब ने एसके सिन्हा नाम से लड़की से संपर्क किया था। सीसीटीवी फुटेज खँगालने और सैकड़ों लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस नाबालिग को बरामद करने में कामयाब रही ।

नाबालिग को दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके से 46 दिन पहले फेसबुक पर एसके सिन्हा बने शोएब खान ने अगवा किया गया था। लड़की की तलाश के लिए पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज खँगाले। 300 से ज्यादा ऑटो ड्राइवर से पूछताछ की। इस पूरे मामले में एएसआई संजीव, एसआई प्रकाश कश्यप और हेड कांस्टेबल शौकत अली की भूमिका सराहनीय रही। उन्होंने नाबालिग का पता लगाने के लिए घर-घर पूछताछ की और 46 दिनों के बाद लड़की को बरामद कर उसके परिवार को सौंपा।

मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, राजस्थान के मेवात के रहना वाला 18 वर्षीय शोएब फेसबुक पर एसके सिन्हा के नाम से लड़कियों से दोस्ती करता था और उन्हें अपने प्रेमजाल में फँसाता था। आरोपित ने जुलाई 2019 में 15 वर्षीय पीड़िता को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। इसके बाद उसने फेसबुक पर उससे चैट शुरू कर दिया। इस साल 22 अक्टूबर को वह दिल्ली नाबालिग से मिलने पहुँचा और उस पर शादी का दबाव बनाया।

आरोपित शोएब लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ बिहार के मुजफ्फरपुर ले गया। वहाँ से वह आजमगढ़ अपने दोस्त के पास आया और कुछ दिन रहा। वहीं लड़की के लापता होने के बाद पीड़ित के पिता ने राजौरी गार्डन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को जाँच के दौरान फर्जी नाम से फेसबुक एकाउंट का पता चला।

पुलिस को आगे की जाँच में शोएब के निवास स्थान राजस्थान जिला अलवर का पता चला। वहीं जब पुलिस की एक टीम ने उसके गाँव में छापा मारा तो पाया कि आरोपित और उसका परिवार कानून प्रवर्तन अधिकारियों की गिरफ्त से पहले ही फरार चल रहे थे। जाँच में पुलिस को पता चला है कि आरोपित 26 अक्टूबर को फरीदाबाद मेट्रो स्टेशन पहुँचा था और फरीदाबाद से बदरपुर के लिए एक ऑटो में सवार हुआ। हालाँकि, पुलिस से बचने के लिए उसने पीड़िता को वाहन में छोड़ दिया और भाग गया। अली द्वारा एकत्र किए गए खुफिया जानकारी के आधार पर खान को बदरपुर से गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने आरोपित के खिलाफ अपहरण, छेड़छाड़, जबरन शादी और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि बाल कल्याण आयोग को पीड़िता द्वारा दिए गए बयान और मेडिकल परीक्षा परिणामों के आधार पर बलात्कार का भी मामला दर्ज किया जाएगा।

जुमे की रात AK-47 से स्कूल पर हमला, 400 छात्र लापता; 6 साल पहले उठाई गई 100 छात्राओं का आज भी सुराग नहीं: बंदूकधारियों से दहशत में नाइजीरिया

नाइजीरिया में बंदूकधारियों ने फिर से एक स्कूल को निशाना बनाया है। एक सेकेंडरी स्कूल पर हुए इस हमले के बाद से सैकड़ों छात्र लापता हैं। नाइजीरिया में 2014 में इसी तरह बोको हरम के आतंकियों ने एक हॉस्टल से 276 लड़कियों को उठा लिया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ताजा हमला नाइजीरिया के पश्चिमोत्तर प्रांत केटसीना के एक स्कूल पर किया गया। शुक्रवार 11 दिसंबर 2020 की रात इस हमले को अंजाम देने वाले बंदूकधारी AK 47 से लैस थे। केटसीना प्रांत की पुलिस के प्रवक्ता गेंबो ईसा ने एक बयान में यह जानकारी दी है।

ईसा ने कहा कि पुलिस और हमलावरों के बीच गोलीबारी चलती रही। उन्होंने कहा कि 400 छात्र लापता हैं, जबकि 200 का पता लगाया जा चुका है। बताया जा रहा है कि स्कूल में 600 से अधिक छात्र पढ़ते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 800 बताई जा रही है।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस, नाइजीरियाई सेना और नाइजीरियाई वायु सेना लापता छात्रों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए स्कूल अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है। खोजी दल लापता छात्रों को खोजने के लिए काम कर रहे हैं। एक स्थानीय निवासी मंसूर बेल्लो ने द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि इस हमले में हमलावर कुछ छात्रों को अपने साथ ले गए हैं। 

नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी ने हमले की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पुलिस और सेना अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने का अपहरण किया गया और कितने लापता हुए हैं। इस घटना के बाद से अभिवावक दहशत में हैं।

नाइजीरिया के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में इस्लामवादी आतंकवादियों द्वारा हमले भी अक्सर होते रहते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि इस हमले को उत्तर पश्चिमी नाइजीरिया में सक्रिय डाकुओं के समूहों ने अंजाम दिया है। समूह फिरौती के लिए लोगों का अपहरण करने के लिए कुख्यात हैं। हालाँकि अभी इस पर स्पष्टता आनी बाकी है। कुछ लड़कों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने पूरी रात आस-पास की झाड़ियों में छिपकर अपनी जान बचाई और सुबह अपने-अपने घर लौट आए।

2014 में 276 लड़कियों का हुआ था अपहरण

नाइजीरिया में इस तरह की घटनाएँ वहाँ पहले भी घट चुकी है। स्कूल पर हमले और छात्रों के अपहरण की सबसे गंभीर घटना अप्रैल 2014 में हुई थी। उस घटना में आतंकी समूह बोको हरम ने पूर्वोत्तर बोर्नो राज्य के चिबोक में स्कूल के छात्रावास से 276 लड़कियों का अपहरण कर लिया था। अपहरण की गई गई 276 लड़कियों में से 100 लड़कियाँ आज भी लापता है। उनसे जुड़ी कोई खबर या सुराग नहीं मिल पाया है।

110 किसानों को उतारा मौत के घाट

नवंबर 2020 के अंत में बोको हरम ने कम से कम 110 किसानों को मौत के घाट उतार दिया था। इनमें से तकरीबन 30 की तो गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। आतंकियों ने यहाँ एक गाँव पर हमला बोला। यहाँ खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों को आंतकियों ने निशाना बनाया। उन्हें पकड़कर पहले उनके हाथ-पाँव बाँध दिए और फिर सबका गला रेत दिया। बेरहमी से की गई इस हत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया था।