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चीन को करारा जवाब देते हुए भारत ने पाकिस्तानी प्रोपगेंडा की भी खोली पोल, कहा- घरेलू नाकामियों को छिपाने का है प्रयास

भारत ने लद्दाख पर दिए चीन के बयान का गुरुवार (अक्टूबर 15, 2020) को दो टूक जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से आज साफ कहा गया है कि भारत के आतंरिक मामलों में दखलअंदाजी करने का अधिकार चीन को बिलकुल नहीं है।

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने चीन का बयान खारिज करते हुए कहा कि सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश हमारा अभिन्न अंग है और चीन को इस मसले पर कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “यह हमारे अंदरुनी मसले में दखलंदाजी है, जिसके बारे में चीन को बार-बार बता दिया गया है।”

बता दें कि भारत के चीन से लगे 7 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 44 नए पुल बनाए जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ लिजिन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि चीन भारतीय पक्ष द्वारा अवैध रूप से स्थापित किए गए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता है और वह सैन्‍य निगरानी व नियंत्रण के लिए किसी भी आधारभूत ढाँचे का चीन विरोध करते हैं।

इसके बाद MEA प्रवक्ता ने पाकिस्तान के NSA के बयान को खारिज करते हुए कहा कि भारत की तरफ से बातचीत की कोई पेशकश नहीं कई गई है। यह सब सिर्फ़ पाकिस्तान का प्रोपगेंडा है। अपनी अंदरुनी नाकामियों को छिपाने के लिए पाकिस्तान ऐसा कर रहा है।

श्रीवास्‍तव ने कहा, “हमने पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के इंटरव्यू की रिपोर्ट देखी है। भारत की ओर से ऐसी बातचीत के संदर्भ में कोई भी संदेश पाक को नहीं भेजा गया है। पाकिस्तान अपनी घरेलू नाकामियों को छिपाने और जनता को गुमराह करने के लिए ऐसा बयान दे रहा है।”

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में पाक अधिकारी को सलाह दी कि अपनी सलाह अपने देश तक सीमित रखें और भारत की घरेलू नीति पर टिप्पणी नहीं करें। प्रवक्ता ने कहा, “उनके बयान जमीनी तथ्यों के विरोधाभासी, भ्रामक और फर्जी हैं।”

उन्होंने आगे दोहराया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर भारत के अखंड भाग थे, हैं और भविष्‍य में भी रहेंगे। चीन को भारत के आंतरिक मामलों किसी भी तरह की बयानबाजी करने का हक नहीं है। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्‍मू-कश्‍मीर भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। 

सुशांत केस पर बॉम्बे टाइम्स समेत कइयों ने फैलाया झूठ, कहा- केस खत्म, तमाशा खत्म: फैक्ट चेक

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मीडिया रिपोर्ट्स में किए जा रहे कुछ दावों को सीबीआई ने खारिज कर दिया है। इन दावों में कहा जा रहा था कि सीबीआई अपने निष्कर्ष पर पहुँच गई है जबकि हकीकत यह है कि अभी इस मामले में जाँच जारी है और यह बात खुद सीबीआई ने बताई है।

इस झूठ को सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलाने में मीडिया गिरोह के लोगों ने भी अपना पूरा योगदान दिया है। इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी बड़े संस्थानों के साथ काम करने वाली स्वाति सूबेदार ने लिखा, “सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में क्लोजर रिपोर्ट जमा करेगी। केस खत्म तमाशा खत्म।”

ऐसे ही ऋचा चड्ढा ने बॉम्बे टाइम्स की रिपोर्ट को शेयर करते हुए पूछा कि आखिर अब माफी कौन माँगेगा। बता दें बॉम्बे टाइम्स की रिपोर्ट में ब्रेकिंग के नाम पर लिखा गया था, “सीबीआई की जाँच पूरी हो गई है। उन्हें कोई साजिश या गलती अभी तक नहीं मिली है। सीबीआई जल्द ही क्लोजर रिपोर्ट जमा कर सकती है।”

इन्हीं दावों को देखने के बाद सीबीआई ने अपना बयान जारी किया। जाँच एजेंसी ने स्पष्ट कहा, “सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले की जाँच सीबीआई अभी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सीबीआई इस मामले में निष्कर्ष पर पहुँच गई है। यह सिर्फ अटकलें हैं और गलत है।”

इससे पहले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर यह जानकारी दी थी कि उनकी सूचना के मुताबिक जिन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि दो दिन में सीबीआई जाँच बंद कर रही है, वो गलत है। आखिर क्यों मुंबई के लोग इस केस को जल्दी बंद करवाना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि सीबीआई का बयान आने से पहले मीडिया में खबरें चलाई जा रही थीं कि सुशांत सिंह मामले में जाँच पूरी हो चुकी है और वो अपनी रिपोर्ट जल्द ही पटना की सीबीआई कोर्ट में पेश करेगी।

इन रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि सीबीआई ने 8 अक्टूबर को सुशांत के जीजा और फरीदाबाद के कमिश्नर OP सिंह और सुशांत की बहन नीतू से दोपहर बाद पूछताछ की थी। इस पूछताछ के बाद सीबीआई की जाँच अब पूरी हो चुकी है। इसलिए मुमकिन है कि सीबीआई चार्जशीट की शक्ल में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करे और अपनी जाँच में पाए गए तमाम साक्ष्यों के आधार पर रिया को आरोपित बनाने का फैसला कोर्ट के ऊपर छोड़ दे।

बता दें कि 14 जून 2020 को सुशांत का शव उनके घर में लटका पाया था। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की बल्कि उनकी हत्या हुई है। बाद में जब एक्टर के परिवार वालों ने रिया के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया तो सीबीआई जाँच की माँग और तेज हो गई। अंतत: यह मामला सीबीआई को सौपा गया। सुशांत केस में सीबीआई के अलावा ईडी और एनसीबी भी अपनी जाँच कर रहे हैं।

हाथरस मामले में SC ने किया फैसला सुरक्षित: CRPF सुरक्षा सहित यूपी से बाहर केस ट्रांसफर करने की माँग

उत्तर प्रदेश के हाथरस में कथित गैंगरेप केस और मौत के मामले में आज यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस मामले में दायर कई दलीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान, दलीलों में उल्लिखित कई बिंदुओं पर चर्चा की- जिसमें उत्तर प्रदेश के बाहर मामले को स्थानांतरित करना, पीड़ित के परिवार की सुरक्षा, मामले की जाँच में प्रशासन की भूमिका और बहुत सी बातें शामिल हैं।

दिल्ली में ट्रायल की माँग

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया है कि पीड़ित परिवार ने एडवोकेट सीमा कुशवाहा को अपना निजी वकील तय किया है। उन्होंने कहा कि परिवार ने सरकार द्वारा नियुक्त एक अतिरिक्त वकील के लिए भी कहा है। पीड़ित परिवार की ओर से पेश वकील सीमा कुशवाहा ने माँग की है कि जाँच पूरी होने के बाद इस मामले का ट्रायल दिल्ली में हो। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि राज्य सरकार ने गवाहों को प्रदान की गई सुरक्षा के संबंध में अनुपालन हलफनामा प्रस्तुत किया था।

उत्तर प्रदेश राज्य में निष्पक्ष परीक्षण की उम्मीद नहीं: अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह

वहीं इस मामले में अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष परीक्षण की उम्मीद नहीं है। राज्य में जाँच को पहले ही विफल कर दिया गया और पुलिस मामले में दर्ज एफआईआर के लिए एक नंबर लिखने में फेल रही है। इस प्रकार मामले की निगरानी एक संवैधानिक अदालत द्वारा की जानी चाहिए। जयसिंह ने अदालत से मामले को इलाहाबाद से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए कहा और उल्लेख किया कि वकील कुशवाहा ने पहले ही इस संदर्भ में अनुरोध प्रस्तुत कर दिया है।

उन्होंने इस मामले पर बहस के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने की भी माँग की। इसके अलावा उन्होंने उन्नाव मामले का उल्लेख किया और गवाह के लिए सीआरपीएफ सुरक्षा माँगी। वहीं सीआरपीएफ सुरक्षा के अनुरोध को लेकर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक की ओर से पेश अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि गवाह के लिए सीआरपीएफ सुरक्षा को लेकर किए गए अनुरोधों पर राज्य को कोई आपत्ति नहीं है। फिर भी इसे यूपी पुलिस पर प्रतिबिंबित नहीं करना चाहिए और न्यायालय से आदेश में इसे स्पष्ट करने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि 19 वर्षीय पीड़िता का उसके गाँव में 14 सितंबर को चार लोगों द्वारा कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार और हमला किया गया था। हालाँकि, यूपी पुलिस ने बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के आरोपों से इंकार किया था और फोरेंसिक रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई है।

मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा सकती हैं। हाथरस पुलिस ने कहा कि ‘जबरन यौन क्रिया’ की अभी तक भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत को मौत का कारण बताया गया था।

‘मदरसे बंद करने का निर्णय नहीं बदला जाएगा’: डिबेट में ‘सेक्युलरिज़्म’ की दुहाई देने पर हिमांत विश्व शर्मा ने जमकर लताड़ा

असम सरकार द्वारा राज्य संचालित मदरसों को बंद करने के निर्णय से कुछ अपेक्षित वर्गों में हलचल मची हुई है। असम के शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने पिछले महीने असम विधानसभा में बोलते हुए कहा था कि सरकार द्वारा संचालित मदरसे नवंबर से बंद कर दिए जाएँगे क्योंकि राज्य सरकार केवल धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देगी। साथ ही सरमा ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर राज्य में लव जिहाद के मामलों के खिलाफ लड़ाई शुरू करने का भी वादा किया है।

रिपब्लिक टीवी पर कल हुए एक डिबेट में भाजपा नेता और असम के वरिष्ठ मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने ‘इस्लामिक स्कॉलर’ अतीक उर रहमान को उनकी दकियानूसी बातों का करारा जवाब दिया। दरअसल, अतीक यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि कैसे ‘धर्मनिरपेक्षता’ के लिए समुदाय विशेष ने ‘अलग बलिदान’ दिया? कॉलमनिस्ट अजीत दत्ता द्वारा ट्विटर पर साझा की गई रिपब्लिक टीवी की डिबेट के एक छोटी सी क्लिप में, सरमा को तथ्यों के साथ रहमान के प्रतिवादों का मुकाबला करते देखा जा सकता है।

रहमान ने डिबेट के दौरान शर्मा से कहा, “मिस्टर शर्मा, भारत के अल्पसंख्यक समुदाय ने सेक्युलरिज्म को मजबूत करने के लिए, अपने अलग-अलग इलेक्टोरल्स का सैक्रिफाइस किया और सरदार पटेल ने इस सैक्रिफाइस को देखते हुए अल्पसंख्यकों के धार्मिक और उनके सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर संविधान में गारंटी दी थी। अब आप जो कर रहे हैं, क्या यह असंवैधानिक नहीं है सर?” इस पर शर्मा ने जवाब दिया, “मौलाना साब, मुझे सरदार पटेल का कोई भी एक बयान दिखाइए जिसमें यह कहा गया हो कि राज्य को मदरसा चलाना चाहिए।” वहीं शर्मा से लताड़े गए खुद के बयान को लेकर रहमान ने सरमा को धर्मनिरपेक्षता को परिभाषित करने के लिए कहा।

शर्मा ने डिबेट के दौरान बताया कि असम में लगभग 1000 राज्य संचालित मदरसे हैं और इन मदरसों पर राज्य लगभग 260 करोड़ रुपए सालाना खर्च करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्थिति का मूल्यांकन करते हुए फैसला किया कि राज्य को सार्वजनिक धन के उपयोग से कुरान को पढ़ाना या उसका प्रचार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा संचालित मदरसों के कारण, कुछ संगठनों द्वारा भगवद गीता और बाइबल को भी स्कूलों में पढ़ाने की माँग की गई थी, लेकिन सभी धार्मिक शास्त्रों के अनुसार स्कूलों को चलाना संभव नहीं था।

एआईडीयूएफ जैसी पार्टियों के विरोध के बावजूद, शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को नहीं बदला जाएगा। इस बारे में अधिसूचना नवंबर में जारी की जाएगी। गौरतलब है कि राज्य द्वारा चलाए जा रहे मदरसों के साथ-साथ असम सरकार अपने कामकाज में कुप्रबंधन और अनियमितताओं के कारण राज्य द्वारा संचालित संस्कृत टोलों को भी बंद कर रही है।

‘पूजा की बात’ से बंगाल चुनाव का शंखनाद: PM मोदी करेंगे बंगाल के लोगों को संबोधित

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ दुर्गापूजा के शुरुआती दिनों में ही देखने को मिल रही हैं। बीजेपी कोलकाता में एक दुर्गा पूजा का आयोजन करने वाली है। इस आयोजन की खास बात यह है कि इसका उद्घाटन 22 अक्टूबर को स्वयं प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान प्रधानमंत्री मन की बात की तर्ज पर एक विशेष वेबकास्ट ‘पूजा की बात’ शीर्षक से बंगाल के लोगों को संबोधित करेंगे।

साल्टलेक में ईस्टर्न जोनल कल्चरल सेंटर में आयोजित होने वाली दुर्गा पूजा को बंगाली मतदाताओं को पार्टी के साथ जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह संभवत: पहली बार है कि किसी राजनीतिक दल के बैनर तले पूजा का आयोजन किया जाएगा।

प्रदेश भाजपा की महासचिव व सांसद लॉकेट चटर्जी, जो पूजा के आयोजन की प्रभारी हैं, ने कहा कि यह किसी भी अन्य पूजा की तरह होगी, जो घर में मनाई जाती है। उन्होंने कहा, “कई परिवार अपने घर पर दुर्गा पूजा मनाते हैं। इसी तरह यह भाजपा परिवार की पूजा होगी।” वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने बताया कि पूजा का आयोजन सीधे पार्टी द्वारा नहीं किया जा रहा है, यह पार्टी की महिलाओं और सांस्कृतिक मंडलों द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

बीजेपी ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) ने बीजेपी नेताओं को पूजा में भाग लेने की अनुमति नहीं दी, जहाँ उन्हें आयोजकों द्वारा आमंत्रित किया गया था। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुर्गा पूजा को लेकर संकीर्ण राजनीति की जा रही है और कई बीजेपी नेताओं को बड़ी टिकट पूजा समितियों से बाहर रखा गया है।
उन्होंने कहा, “इसलिए इस वर्ष हम अपना दुर्गा पूजा करेंगे। यह बंगाली परंपरा के अनुसार संपन्न होगा।” राज्य में भाजपा नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि पूजा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई पंडालों में दुर्गा पूजा का उद्घाटन करने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह 17 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल जाने वाले थे लेकिन उन्होंने बिहार चुनाव के मद्देनजर अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। उम्मीद की जा रही है कि शाह पूजा समाप्त होने के बाद पश्चिम बंगाल पहुँचेंगे। वह अपनी यात्रा के दौरान राज्य में पार्टी के पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 19 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल जाएँगे और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं सहित भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।

राजस्थान DGP ने लिया VRS और कॉन्ग्रेसी गहलोत सरकार ने बना दिया RPSC अध्यक्ष, लेकिन बवाल सिर्फ गुप्तेश्वर पांडे पर!

बिहार में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे के VRS (Voluntary Retirement Scheme) लेकर राजनीति में शामिल होने की खबरों पर पिछले दिनों बहुत बवाल हुआ जबकि उनको चुनावों में टिकट तक नहीं मिली। अब यही स्थिति राजस्थान में देखने को मिली है और वीआरएस लेकर डीजीपी पोस्ट को अलविदा कहने वाले भूपेंद्र सिंह RPSC का चेयरमैन भी बना दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस VRS पर अब कहीं कोई सवाल नहीं उठ रहे जबकि गुप्तेश्वर पांडे के मामले में ट्रोल करना शुरू कर दिया गया था।

बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले साल अगस्त में ही भूपेंद्र सिंह को डीजीपी के पद पर 2 साल के लिए नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल 30 जून 2021 तक था, मगर उससे पहले ही भूपेंद्र सिंह ने पद छोड़ने की इच्छा जताई। इसके बाद प्रदेश सरकार ने इसे मंजूर कर लिया और उन्हें राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन का अध्यक्ष बनाया गया।

इस खबर के आने के बाद से कई सक्रिय सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल पूछना शुरू कर दिया कि आखिर मीडिया में इतना सन्नाटा क्यों है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमराव ने लिखा, “बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे वीआरएस लेकर राजनीति में शामिल हुए तो बहुत कोहराम मचाया गया। राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह VRS लिए और अशोक गहलोत ने उन्हें राजस्थान लोक सेवा आयोग का चेयरमैन बना दिया। पर मीडिया में एकदम सन्नाटा।”

लोगों का कहना है कि क्या ऐसी स्थितियों में सवाल केवल भाजपाइयों पर उठाया जाता है। यूजर कॉन्ग्रेस पर तंज मारते हुए कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता क्योंकि उन्होंने आजादी दिलवाई है, इसलिए वे नियम बदल सकते हैं व बना भी सकते हैं। उनसे कोई सवाल नहीं करेगा, सबको एकदम चुप रहना होगा।

पंडित दिलीप शर्मा लिखते हैं कि राजस्थान में सेकुलर सरकार है और यूपी में कम्युनल। उत्तर प्रदेश में रेप का मतलब रेप होता है और राजस्थान में रेप का अर्थ रेप नहीं होता। जो सेकुलर लोग गुप्तेश्वर पांडे के लिए गला फाड़कर चिल्ला रहे थे, वह भूपेंद्र सिंह के मामले में फेविकोल लगाकर बैठ गए हैं।

यहाँ बता दें कि भूपेंद्र सिंह के अलावा RPSC पदों की नियुक्तियों में एक और जो चौंकाने वाला नाम आया है, वो कवि कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा सैनी का है। मंजू शर्मा को राज्य सरकार ने राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य बनाने का फैसला लिया है।

अब मंजू शर्मा का नाम RPSC सदस्यों में जुड़ने के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनकी उपलब्धियों को लेकर सवाल खड़ा किया जा रहा है। कई लोग इस घोषणा का यह कहकर मजाक उड़ा रहे हैं कि जिनके पति ने राहुल गाँधी को पप्पू की उपाधि दी, उन्हीं मंजू शर्मा को RPSC का सदस्य बना दिया गया।

वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि गहलोत सरकार ने कुमार विश्वास की पत्नी को RPSC का सदस्य तो बना दिया मगर यह भी बता दें कि आखिर कैसे प्रोफेसर होने भर से मंजू शर्मा के पास RPSC की सदस्य बनने की योग्यता मिल जाती है?

उल्लेखनीय है कि कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा अजमेर सिविल लाइंस में भौंपो का बड़ा की निवासी हैं और 1994-95 में वह हिंदी की प्राध्यापक नियुक्त हुई थीं।

‘फेक TRP स्कैम’ के बीच BARC का बड़ा फैसला: न्यूज चैनलों के रेटिंग पर 12 हफ्ते तक रोक, होगी समीक्षा

TRP को लेकर एजेंसी ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल BARC ने बड़ा फैसला लिया है। BARC ने कहा कि अगले 12 हफ्ते तक न्यूज चैनलों की टीआरपी नहीं आएगी। टीआरपी से छेड़छाड़ का मामला फिलहाल अदालत में है। BARC ने कहा है कि वह फेक रेटिंग के दावों के बीच अपने सिस्टम की फिर से समीक्षा करेगी। इस दौरान BARC चैनलों की इंडिविजुअल रेटिंग भी जारी नहीं करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, टेलीविजन चैनलों की व्यूअरसिप यानी टीआरपी से जुड़े आँकड़े जारी करने वाली संस्था (BARC) ने 8-12 हफ्ते तक न्यूज चैनलों की टीआरपी नहीं जारी करने का फैसला किया है। BARC फिलहाल टेक्निकल कमेटी रेटिंग नापने के तरीके का रिव्यू करेगी और उसके बाद रेटिंग में हो रही गड़बड़ी को ठीक किया जाएगा। BARC ने कहा है कि रिव्यू के लिए उसे 8-12 हफ्ते का समय लगेगा। रिव्यू के बाद BARC फिर से टेलीविजन न्यूज चैनलों की रेटिंग जारी करेगा।

देश के निजी न्यूज चैनलों के संगठन (NBA) ने BARC के इस कदम का स्वागत किया है। NBA ने BARC के इस कदम को सही दिशा में उठाया गया आवश्यक कदम बताया है। NBA ने कहा है कि BARC इन 12 हफ्तों का इस्तेमाल अपने सिस्टम को ठीक करने के लिए करे। NBA के चेयरमैन रजत शर्मा ने BARC के इस कदम को एक साहसी फैसला बताया है। हालाँकि, NBA अध्‍यक्ष रजत शर्मा ने यह भी कहा कि BARC को महत्‍वपूर्ण फैसले करते वक्‍त उससे सलाह लेनी चाहिए।

यह कवायद हिंदी, अंग्रेजी और बिजनस समाचार चैनलों पर तत्‍काल रूप से लागू की जाएगी। इसमें 8 से 12 हफ्तों का समय लग सकता है। बता दें कि बार्क ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) टेलीविजन रेटिंग बताने वाली एक एजेंसी है। यह दुनिया का सबसे बड़ा टेलीविजन मेजरमेंट निकाय है। BARC India साल 2010 में शुरू हुआ था। इसका हेड ऑफिस मुंबई में ही है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते मुंबई पुलिस कमिश्नर (सीपी) परमबीर सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके दावा किया था कि विज्ञापनों से बेहतर राजस्व जुटाने के लिए रिपब्लिक टीवी, बॉक्स सिनेमा और फक्त मराठी चैनलों ने टीआरपी के साथ छेड़छाड़ की थी। हालाँकि, रिपब्लिक टीवी ने उनके दावे को पूरी तरह खारिज किया है।

अर्नब गोस्वामी ने आरोपों को फर्जी बताते हुए कहा था, “मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी पर झूठे आरोप लगाए हैं क्योंकि हमने उनसे सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच से जुड़े कई सवाल किए थे। रिपब्लिक टीवी मुंबई पुलिस कमिश्नर पर आपराधिक मानहानि का दावा करेगी। BARC ने ऐसी एक भी रिपोर्ट जारी नहीं की है जिसमें रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल हो। सुशांत सिंह राजपूत मामले में परमबीर सिंह द्वारा की जाँच पर खुद शक के बादल मंडरा रहे हैं।”

वहीं फर्जी व्यूअरशिप को लेकर BARC ने इंडिया टुडे को 5 लाख रुपए का फाइन भरने को कहा गया था, क्योंकि उन्होंने अपनी व्यूअरशिप बढ़ने के पीछे जो स्पष्टीकरण BARC Disciplinary Council (BDC) को सौंपा, वह उन्हें संतोषजनक नहीं लगा। इस एक्सक्लुसिव जानकारी को लेकर ऑपइंडिया ने पहले भी एक रिपोर्ट प्रसारित की थी।

रिपब्लिक TV के प्रदीप भंडारी को मिली अग्रिम जमानत: मुंबई पुलिस ने किया था गैरजमानती धाराओं में केस दर्ज

सुशांत सिंह मामले में रिपोर्टिंग करने वाले रिपब्लिक टीवी पत्रकार प्रदीप भंडारी की अग्रिम जमानत याचिका आज (अक्टूबर 15, 2020) स्वीकार कर ली गई। उनके ख़िलाफ़ गैर जमानती धाराओं में मुंबई पुलिस ने समन जारी किया था

प्रदीप भंडारी ने ट्वीट पर अग्रिम जमानत की सूचना देते हुए बताया कि कोर्ट में इसका करीब 2 घंटे तक विरोध हुआ और आखिरकार अर्नब गोस्वामी की लीगल टीम के उल्लेखनीय प्रयासों से अग्रिम बेल स्वीकार कर ली गई।

पत्रकार ने लिखा, “माननीय न्यायालय द्वारा मेरी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई है। इसका कोर्ट में करीब 2 घंटे तक विरोध किया गया, लेकिन अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक की शानदार लीगल टीम ने हमें बड़ी जीत दिलाई। सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा संकल्प दृढ़ हो गया है। आप सब का आभार।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिक भारत का नाम सामने आने के बाद मीडिया चैनल पर बहुत सवाल खड़े किए गए थे। हालाँकि, बाद में यह पता चला कि उस मामले में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं है मगर, बावजूद इसके चैनल के कंसल्टिंग एडिटर व पत्रकार प्रदीप भंडारी को पूछताछ के लिए समन भेज दिया गया।

इससे पहले प्रदीप भंडारी लगातार सुशांत मामले में पूरी रिपोर्टिंग को कवर कर रहे थे जिसे देखते हुए अर्नब गोस्वामी ने परम बीर सिंह पर आरोप लगाया कि वो उनके चैनल को सुशांत सिंह मामले और पालघर लिंचिंग केस में सवाल उठाने के कारण निशाना बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस को डर है कि सुशांत सिंह केस में तथ्य सामने आ जाएँगे।

बता दें कि हाल ही में भंडारी के खिलाफ़ पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने की अवज्ञा), 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और बॉम्बे पुलिस कानून की धारा 37 (1), 135 के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसी के बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाने में हाजिर होने को कहा गया था और प्रदीप भंडारी ने केस दर्ज होने के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर को निशाने पर लिया था।  

प्रदीप भंडारी ने पुलिस कमिश्नर को उनके राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करने और पुलिस की वर्दी का सम्मान नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी और उनका इस्तीफा माँगा था। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास में है, इसके लिए उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत आरोप दायर करने की योजना बना रही है।

NDTV ने फैलाई फेक न्यूज़, ऑल्टन्यूज़ ने दोष गुजरात के गृहमंत्री पर मढ़ दिया

NDTV द्वारा गुजरात के तनिष्क स्टोर पर ‘भीड़ द्वारा हमला’ करने की फेक न्यूज़ फैलाने के बचाव में आख़िरकार एक इस्लामी प्रचार वेबसाइट और स्वघोषित फैक्ट चेकर गिरोह ‘ऑल्टन्यूज़’ का संस्थापक प्रतीक सिन्हा भी आ गया है। प्रतीक सिंहा का तर्क है कि गुजरात के गृहमंत्री को NDTV द्वारा फैलाई गई साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील फेक न्यूज़ पर उन्हें दण्डित करना ‘गलत प्राथमिकता’ का चुनाव है।

ऑल्टन्यूज़ के संस्थापक प्रतीक सिंहा ने गुजरात के गृहमंत्री का ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा है, “गुजरात के गृह मंत्री, जो कानून और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं, की प्राथमिकताएँ वास्तविकता से ताल्लुक नहीं रखती हैं। उन्होंने गुंडों की हरकतों की पूरी तरह से अनदेखी की, जिन्होंने तनिष्क के कर्मचारियों को धमकी दी, और वो एनडीटीवी के बारे में अधिक परेशान हैं जिन्होंने अपनी रिपोर्ट की गलतियाँ सुधार लीं।”

दरअसल, तनिष्क के विज्ञापन पर जारी विवाद के बीच NDTV द्वारा गुजरात के तनिष्क स्टोर पर हमला होने की फेक न्यूज़ के प्रसारण के बाद सोशल मीडिया पर सभी लोग ऑल्टन्यूज़ पर यह दबाव बना रहे थे कि क्या वह इस खबर का फैक्ट चेक सिर्फ इस वजह से नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह NDTV ने फैलाई है?

लेकिन प्रतीक सिन्हा ने NDTV का फैक्ट चेक करने के बजाए गुजरात के गृहमंत्री के बयान को ही गलत साबित करने और उन्हें उनका दायित्व याद दिलाने का बचकाना प्रयास किया है। प्रतीक सिन्हा यहाँ पर निष्पक्ष रहने की अदाकारी सही तरीके से नहीं कर पाया और फैक्ट चक्र तो वो कभी था ही नहीं।

क्या है मामला?

तनिष्क द्वारा विज्ञापन वापस लेने के बाद वामपंथी मीडिया चैनल एनडीवी ने ब्रेकिंग चलाते हुए दावा किया कि विवाद के चलते गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क के एक स्टोर पर हमला हुआ है।एनडीटीवी के मुताबिक, हमलावरों की भीड़ ने कथित तौर पर स्टोर मैनेजर को माफी पत्र लिखने के लिए कहा था।

अब गुजरात के गृहमंत्री ने इसका खंडन करते हुए कहा, “NDTV द्वारा गाँधीधाम (गुजरात) के तनिष्क स्टोर पर हमले की फैलाई गई खबरें पूर्णतः झूठ और फ़र्ज़ी हैं। यह बिलकुल ही गलत मंशा से गुजरात में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के उद्देश्य से किया गया कार्य है। मैंने इन लोगों पर मामला दर्ज करने को कहा है और फेक न्यूज चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।”

NDTV की रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात के गाँधीधाम में तनिष्क स्टोर पर हमला हुआ है। हमला होने के बाद स्टोर मैनेजर के माफी पत्र में कथित तौर पर सेक्युलर विज्ञापन प्रसारित करके हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए कच्छ जिले के लोगों से माफी माँगवाई गई।

तनिष्क के विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म को दिखाया गया था। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई थी। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया था। 

विज्ञापन को लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लगने और सोशल मीडिया पर तनिष्क के बहिष्कार की अपीलों के बाद कंपनी ने विज्ञापन को वापस ले लिया। कुछ इसी तरह का विवाद होली के दौरान सर्फ एक्सेल के एक विज्ञापन को लेकर भी हुआ था।

जब आपको पता भी नहीं था कि हैदराबाद में बाढ़ आई है, ‘चड्डी वाले संघी’ लोगों की मदद करने में जुटे हुए थे

‘अनपढ़’, ‘जाहिल’, ‘गवार’, ‘संघी’, ‘धार्मिक कट्टरपंथी’, ‘चड्ढी पहनने वाला’ और न जाने क्या-क्या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े लोगों को अक्सर सुनने को मिलता रहता है मगर सच तो यह है कि प्राकृतिक आपदा आने पर प्रभावित क्षेत्रों में जितना स्वयंसेवक सक्रिय होकर पीड़ितों की मदद करते हैं, उतनी सहायता शायद ही कोई और संगठन करता हो। इसका हालिया उदाहरण हैदराबाद में बाढ़ आने के बाद भी देखने को मिला।

जब अधिकांश लोगों को यह तक ज्ञात नहीं कि हैदराबाद बाढ़ जैसी मुसीबत से गुजर रहा है, उस समय आरएसएस के ‘चड्ढी पहनने वाले संघी’ अपनी जान को खतरे में डालकर लोगों की बुनियादी जरूरतों को उन तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं।

जी हाँ आरएसएस से जुड़ी सेवाभारती नाम की संस्था ने ट्विटर पर कुछ वीडियोज डाली हैं। इनमें देखा जा सकता है कि स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों को खाने पीने का सामान मुहैया करवा रहे हैं।

इस संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव वाई सत्यकुमार ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि कोई भी प्राकृतिक आपदा में आरएसएस के स्वयंसेवक बिना जाति, धर्म और विचारधारा देखे, जरूरतमंदों की मदद करने पहुँचते हैं। ये दृश्य उन लोगों के चेहरे पर थोड़ी शर्म लेकर आए जो निराधार ही आरएसएस पर जातिवाद और सांप्रदायिक होने का आरोप मढ़ते हैं।

सेवाभारती तेलंगाना के ट्विटर अकॉउंट पर किए गए ट्वीट के मुताबिक कल तक (14 अक्टूबर) वहाँ लोगों को 7,329 किट वितरित की जा चुकी है। इनमें बिस्किट, राशन, कंबल, पका खाना, तिरपाल, पानी की बोतलें, कपड़े, बर्तन और फर्स्ट एड किट्स शामिल हैं।

अकॉउंट पर शेयर की गई वीडियो में नजर आ रहा है कि खुद बाढ़ से जूझकर स्वयंसेवक घरों में दूध पहुँचा रहे हैं। साथ ही नौकाओं के जरिए कई पीड़ितों को बचा भी रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अभी तक मेडिपल्ली में 130 पीड़ितों को सेवाभारती स्वंय सेवकों ने बचा लिया है।

200 खाने के पैकेट भी पीड़ितों में बाँटे जा चुके हैं। ट्वीट के समय के मुताबिक यह आँकड़े कल तक के हैं। सक्रिय स्वंयसेवकों के प्रयासों से इनमें बढ़ौतरी भी हो सकती है।

शैकपेट नाला के पास एमजी नगर बस्ती में तो महिला स्वयंसेवकों ने 113 लोगों को खाना पहुँचाया।

बता दें कि बाढ़ प्रभावित लोगों को स्वयंसेवक रहने को छत, पेट भरने को खाना और आपदा से उभरने के लिए काउंसलिंग भी दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बरसात के कारण हैदराबाद में बाढ़ की आफत आ गई है। कई लोगों से उनके आशियाने छिन गए हैं और कइयों के वाहनों तक को पानी का तेज प्रवाह अपने साथ बहा कर ले गया है।

आज भी भारी बारिश के कारण प्रदेश के उपनगरों में बहुत पानी भरा रहा। जिसके कारण सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवानों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी रखा।