Home Blog Page 4393

बिहार चुनाव 2020: जमुई की 4 सीटों पर ‘बंगला’ और ‘बागी’ से उलझे समीकरण

बिहार के 14 जिलों की जिन 71 सीटों पर पहले चरण यानी 28 अक्टूबर को वोट डाले जाने हैं, उनमें जमुई की भी चार सीटें हैं। ये हैं: जमुई, सिकंदरा, झाझा और चकाई। 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इनमें से केवल एक सीट झाझा में सफलता मिली थी। दो सीटें (जमुई और चकाई) तत्कालीन महागठबंधन की साझेदार राजद और एक सीट (सिकंदरा) कॉन्ग्रेस के खाते में गई थी।

हालाँकि इस बार समीकरण बदले-बदले से दिख रहे हैं। इसके तीन बड़ी वजहें जमीन पर दिख रही हैं। पहली वजह, पिछला चुनाव राजद और कॉन्ग्रेस के साथ लड़ने वाली जदयू इस बार एनडीए में है। दूसरी, पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ रही लोजपा अकेले लड़ रही है। ध्यान रहे कि यह वह इलाका है जहाँ लोजपा का प्रभाव है। बीते साल जमुई (सुरक्षित) लोकसभा सीट से लोजपा के चिराग पासवान ने महागठबंधन के प्रत्याशी को करीब 2.41 लाख मतों के अंतर से पराजित किया था। अंतिम नतीजों के लिहाज से जो तीसरा कारण निर्णायक साबित हो सकता है, वह है इस इलाके में प्रभाव रखने वाले पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटों का मैदान में होना।

जमुई की सीट से बीजेपी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की शूटर बेटी श्रेयसी सिंह को मैदान में उतारकर इसे इस चरण की सबसे चर्चित सीट में बदल दिया है। श्रेयसी हाल ही में बीजेपी में शामिल हुईं थी। लेकिन उनकी पारिवारिक सियासी पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। जमीन पर युवाओं और महिलाओं के बीच उनका आकर्षण भी जनसंपर्क के दौरान देखने को मिल रहा है।

2015 में चकाई छोड़ शेष तीन सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के प्रत्याशी के बीच सीधा मुकाबला था। इस बार सभी सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला दिख रहा है। जीत और हार के बीच का फर्क इसी तीसरे कोण के प्रदर्शन से तय होगा।

जमुई सीट पर राजद ने मौजूदा विधायक विजय प्रकाश पर ही दाँव लगाया है। विजय इस सीट से कई बार लड़ चुके हैं। पहली बार फरवरी 2005 में जीते। उसके बाद लगातार दो बार बड़े अंतर से हारे। लेकिन 2015 में जदयू के साथ होने का लाभ उन्हें मिला और उन्होंने करीब आठ हजार वोटों के अंतर से यह सीट जीती। महागठबंधन की सरकार में वे मंत्री भी थे। उनकी पत्नी विनीता प्रकाश जुमई जिला परिषद की अध्यक्ष है, जबकि बड़े भाई जय प्रकाश नारायण यादव बगल की बाँका सीट से सांसद और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं।

पिछली बार इस सीट से हारे बीजेपी के अजय प्रताप इस बार रालोसपा की तरफ से मैदान में हैं। पराजित होने से पहले अजय लगातार दो बार यहाँ से विधायक रहे थे। वे नरेंद्र सिंह के बेटे हैं। विजय और अजय अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, पर जमुई की कोई भी राजनीतिक चर्चा आजकल सिमट कर श्रेयसी सिंह पर ही आती है। उनके पक्ष में यहाँ से लोजपा के उम्मीदवार का नहीं होना भी है। इसे खुद श्रेयसी ने भी ऑपइंडिया के साथ बातचीत में स्वीकार किया।

ठीक इसके विपरीत झाझा की सीट पर लोजपा के उम्मीदवार का होना एनडीए की परेशानी बढ़ा रहा है। पिछला चुनाव यहाँ से बीजेपी के रवींद्र यादव जीते थे। उन्हें 65,537 वोट मिले थे। जदयू के दामोदर रावत 43,451 वोट पाकर दूसरे नंबर पर थे। इस बार यह सीट जदयू के खाते में गई है और दामोदर रावत एनडीए उम्मीदवार हैं। रवींद्र यादव लोजपा के चुनाव निशान ‘बंगला’ पर मैदान में हैं। लोजपा के उम्मीदवार जिन सीटों पर मजबूत बताए जा रहे हैं, उनमें से एक झाझा भी है। हालाँकि क्षेत्र के सुदूर ग्रामीण इलाकों में मतदान से करीब दो हफ्ते पहले भी अपने भ्रमण के दौरान हमने पाया कि मतदाताओं का एक वर्ग रवींद्र यादव की पार्टी और चुनाव निशान को लेकर भ्रम में हैं। राजद से राजेंद्र प्रसाद प्रत्याशी हैं। लेकिन जीत और हार के बीच का फैक्टर रवींद्र यादव हैं।

चकाई की सीट पर निर्णायक फैक्टर एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं। इनका नाम सुमित सिंह है। ये भी नरेंद्र सिंह के बेटे हैं। पिछली बार बतौर निर्दलीय करीब 35 हजार वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे। करीब 47 हजार वोट पाकर राजद की सावित्री देवी जीती थीं। इस बार भी राजद ने उन्हें मौका दिया है। एनडीए में यह सीट भी जदयू के खाते में गई है और उसने संजय प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। यहाँ से 2015 में लोजपा के विजय कुमार सिंह 28,535 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार लोजपा ने संजय मंडल को मैदान में उतारा है। जाहिर है इस सीट पर भी लोजपा का अच्छा-खासा प्रभाव है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सुमित सिंह की है।

हमें स्थानीय लोगों ने बताया कि चुनाव हारने के बावजूद सुमित सिंह 5 साल इलाके में लगातार सक्रिय रहे। पिता के प्रभाव के अलावा उन्हें इसका फायदा होता दिख रहा है। वैसे यह कहना मुश्किल है त्रिकोणीय मुकाबले में जीत किसकी होगी पर यह बिहार की उन सीटों में से एक होगी जहाँ 10 नवंबर को नतीजे सामने आने के बाद जीत-हार बेहद मामूली अंतर से होगा।

सिकंदरा की सीट सुरक्षित है। यहाँ कॉन्ग्रेस से सुधाीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी मैदान में हैं। 2015 में उन्हें करीब 59 हजार वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर लोजपा के सुभाष पासवान करीब 51 हजार वोट लाकर रहे थे। बंटी इन पाँच सालों में अपने काम की बजाए अन्य वजहों से चर्चा में रहे हैं। इस बार लोजपा ने रविशंकर पासवान को उतारा है। एनडीए में यह सीट जीतनराम माँझी के ‘हम’ को मिली है। ‘हम’ पार्टी के प्रत्याशी प्रफुल्ल माँझी हैं। पिछली बार लोजपा के उम्मीदवार रहे सुभाष पासवान इस बार बागी हैं। शुरुआत में इस सुरक्षित सीट से खुद चिराग पासवान के भी विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा थी। यहाँ लोजपा की मजबूत पैठ मानी जाती है। रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी के पक्ष में मतदाताओं के एक वर्ग में सहानुभूति भी देखने को मिल रही है।

दिलचस्प यह है कि जमीन पर मतदाता सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने और भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत कर रहे हैं। लॉकडाउन से जीवन प्रभावित होने का दुखड़ा सुनाते हैं। लेकिन हर चर्चा आखिर में उम्मीदवार के नाम पर ही खत्म हो रही है। जिले के जिस एकमात्र सीट पर बीजेपी की उम्मीदवार हैं, वहां लोजपा एनडीए के लिए एक्स फैक्टर है। अन्य तीन सीटों पर वह एनडीए की सँभावनाओं पर असर डाल सकती है।

जैसा कि स्थानीय पत्रकार मुरली दीक्षित कहते हैं, “कागज के समीकरण और जमीनी हकीकत अलग-अलग हैं। इसका बड़ा कारण जदयू का इस बार महागठबंधन से अलग होना और लोजपा का एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ना है। जदयू के एनडीए में आने से पिछली बार राजद और कॉन्ग्रेस को मिले वोट में से उसका आधार खिसकना तय है। इसी तरह जिन सीटों पर लोजपा लड़ रही है, उसका भी प्रभाव पड़ना तय है। साथ ही सुमित सिंह और अजय प्रताप जैसों की दावेदारी भी आसानी से खारिज नहीं की जा सकती।”

झारखंड से सटे इसे पिछड़े जिले में एक नाम जो हर जगह चर्चा में है, वह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। आश्चर्यजनक तौर पर जिन मतदाताओं को यह भी नहीं पता है कि राजद और जदयू अब साथ नहीं रहे वह भी नरेंद्र मोदी और बीजेपी के चुनाव चिह्न को पहचानते हैं।

रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पांडेय को मिला कॉन्ग्रेस टिकट, कॉन्ग्रेस नेता की नाबालिग दलित बेटी से रेप का लगा था आरोप

3 चरणों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियाँ लगभग अपने अंतिम चरण में हैं। इसी कड़ी में, कॉन्ग्रेस ने भी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है जिसमें एक नाम चौंकाने वाला है। ये और कोई नहीं बल्कि NDTV के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार का भाई ब्रजेश पांडेय है। कॉन्ग्रेस ने ब्रजेश पांडेय को मोतिहारी की गोविंदगंज सीट से टिकट दिया है

ये वही ब्रजेश पांडेय है जो बिहार सरकार में पूर्व कॉन्ग्रेसी मंत्री की नाबालिग बेटी के साथ यौन शोषण और बलात्कार के मामले में आरोपित रह चुका है। जिसके चलते उन्हें बिहार कॉन्ग्रेस उपाध्‍यक्ष के पद से भी इस्तीफ़ा देना पड़ गया था। यही नहीं, इस आरोप के कारण रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पर POCSO Act (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज), SC/ST Act ( पीड़ित लड़की दलित थी) का केस दर्ज हुआ। 

कॉन्ग्रेस द्वारा जारी की गई चुनावी प्रत्याशियों की सूची में ब्रजेश पांडेय का नाम गोविंदगंज सीट से है। मोतिहारी के गोविंदगंज विधानसभा सीट पर चुनाव दूसरे चरण में होने हैं। हालाँकि ब्रजेश इसके पहले भी इसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उस चुनाव में उन्हें जीत हासिल नहीं हुई थी। साल 2017 में जिस दौरान उन पर यौन शोषण का आरोप लगा उस वक्त वह कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर थे। इस मामले के सामने आने के बाद उन्हें पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा भी देना पड़ा था। 

दरअसल साल 2017 में ब्रजेश पांडेय पर कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता की नाबालिग दलित बेटी के साथ यौन शोषण और बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा उन पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने सम्बंधी अधिनियम और अनुसूचित – अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत पटना में मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता ने मीडिया के सामने आकर धमकी दी थी कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्मदाह करके अपनी जान दे देगी। 

घटनाक्रम पर विवाद बढ़ने के कई दिनों बाद जाँच करने वाले विशेष दल ने ब्रजेश पांडेय का शामिल किया था। ब्रजेश पांडेय के अलावा पूर्व आईएएस के बेटे निखिल प्रियदर्शी और संजीत कुमार शर्मा भी इस मामले में आरोपित थे। फ़िलहाल कॉन्ग्रेस के इस कदम की काफी आलोचना हो रही है और लोग इस पर जम कर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।

कॉन्ग्रेस ने भले ही साल 2017 के विवाद के बाद ब्रजेश पांडेय को किनारे कर दिया था लेकिन अब एक बार फिर उसी बलात्कार और यौन शोषण के आरोपित को चुनाव लड़ने का अवसर दिया है।

सुशांत सिंह मामले में ‘बड़ा खुलासा’ करने पर मुंबई पुलिस ने वकील विभोर आनंद को किया गिरफ्तार

सुशांत सिंह राजपूत मामले में न्याय माँग रहे वकील विभोर आनंद को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया रिपोर्ट्स और वकील विभोर आनंद के समर्थकों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2020 की दोपहर मुंबई पुलिस साइबर सेल ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार किया। इसके बाद रात के लगभग 8 बजे मुंबई पुलिस साइबर सेल के अधिकारी उन्हें फ्लाइट से मुंबई लेकर गए थे।

बीते दिन यानी 15 अक्टूबर को ही विभोर ने ट्वीट किया था कि मुंबई पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके आवास पहुँच चुकी है। 

उनकी गिरफ्तारी किन आरोपों के तहत हुई है यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के साइबर सेल में हिरासत में रखा जाएगा। 

पिछले महीने मुंबई की सिविल कोर्ट ने विभोर आनंद समेत कई लोगों को सुशांत सिंह मामले में अरबाज़ खान का नाम शामिल करने से मना किया था। अदालत की तरफ से यह प्रतिक्रिया ठीक उस वक्त आई थी जब अरबाज़ खान ने सुशांत सिंह राजपूत मामले में अपना नाम घसीटे जाने पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके अलावा अभिनेता ने यह भी कहा था कि इस मामले में सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर कोई टिप्पणी या विचार नहीं साझा किए। 

इन बातों के बावजूद, विभोर आनंद ने कल यानी 15 अक्टूबर को सुशांत सिंह राजपूत मामले में अरबाज़ खान का नाम लिया था। एक लाइव यूट्यूब सेशन में उन्होंने दावा किया कि 7 जून को मुंबई स्थित जुहू के फार्महाउस में एकता कपूर द्वारा आयोजित की गई पार्टी में दिशा सालियान को लाया गया था। इसके बाद विभोर ने आरोप लगाया कि उस पार्टी में अरबाज़ खान, शोविक चक्रवर्ती, आदित्य ठाकरे समेत अन्य कई मौजूद थे। 

इसके अलावा भी वकील विभोर आनंद ने कई हैरान कर देने वाले आरोप लगाए जिनका उल्लेख यहाँ नहीं किया जा रहा है क्योंकि उनकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही अदालत ने भी सुशांत सिंह राजपूत मामले में ‘खान’ नाम का ज़िक्र करने पर रोक लगाई है। लिहाज़ा इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि विभोर आनंद की गिरफ्तारी इस बात के लिए हुई है कि उन्होंने सुशांत सिंह मामले में अरबाज़ खान का उल्लेख किया। हालाँकि उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का भी नाम लिया, यह भी गिरफ्तारी का एक कारण हो सकता है।           

मुताह निकाह: ‘कुछ दिन के मजे’ वाली मजहबी संस्कृति के नाम पर ‘अमीना-शबानाओं’ का उत्पीड़न

क्या आपको अमीना याद है? हैदराबाद आज दूसरी वजहों से चर्चा में है। उस 1990 के दशक के शुरुआती दौर में ये दूसरी वजहों से चर्चा में था। घटना एक एयरोप्लेन में घटी थी। हमेशा की तरह हैदराबाद से दिल्ली जाने वाली उस फ्लाइट में उस दिन अरबियों वाला साफा पहने एक व्यक्ति के साथ कोई बुर्कानशीं थीं। ये कोई अनोखी बात नहीं थी, अनोखा ये था कि वो लगातार रोए जा रही थी। एयरहोस्टेस अमृता अहलुवालिया को उसकी आवाज और लगातार रोते रहने पर कुछ शक हुआ। विमान के आगे के तरफ बाथरूम था और वहाँ वो बुर्कानशीं को चेहरा वगैरह धुलवाने ले गई।

नकाब हटते ही अमृता अहलुवालिया चौंक पड़ी! जिसे वो इतनी देर से बूढ़े अरबी शेख की बेगम समझ रही थी, वो मुश्किल से दस साल की कोई बच्ची थी। पूछने पर बच्ची ने बताया कि उसका नाम अमीना है और वो दस साल की ही है। उसकी बड़ी बहन बूढ़े शेख को काली और बदसूरत लगी थी, इसलिए वो उसे निकाह करके अपने साथ सऊदी लिए जा रहा था जबकि अमीना आगे पढ़ाई करना चाहती थी, उसे बूढ़े अरबी से निकाह नहीं करना था। अमृता अहलुवालिया ने ये बात पायलट को बताई, पायलट ने दिल्ली एअरपोर्ट पर खबर की और बूढ़े शेख को वहीं रोक लिया गया। बूढ़ा शेख चीख-चीख कर निकाहनामे के कागज़ दिखाता रहा लेकिन उसे और अमीना को रोक लिया गया।

अदालती कार्रवाई में बाद में पता चला कि वो बूढ़ा अरबीराव शेख साठ साल का याहया एमएच अल सगिह था जो हैदराबाद में बेगम खरीदने गया था। उसने लड़की के बदले उसके बाप बदरुद्दीन को 6 हजार रूपए दिए थे और 4 हजार रूपए बाद में देने की बात थी। उस दौर में प्रधानमंत्री नरसिम्हा ने भी मुक़दमे की लगातार सूचना देते रहने को कहा था। बाद में सब अमीना को भूल गए। उसे वक्फ बोर्ड या कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। उसने बाद में निकाह किया और मुर्शिदाबाद में रहने लगी।

इस किस्म के तथाकथित निकाह, जिसमें अमीर शेख गरीब मोहम्मडन लड़कियों को खरीदकर ले जाते हैं, का नतीजा अच्छा नहीं होता। इनमें से अधिकतर लड़कियाँ कुछ ही वर्षों में दोबारा कहीं और बेच दी जाती हैं। इस तरह के मुताह निकाह करने वाले लगातार तब से अब तक पकड़े जाते रहे हैं।

इन सब से ये घटनाएँ थमी हों, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कम उम्र की लड़कियों की शादी को अगर आप अपराध मान रहे हैं तो जरा ठहरिए! अट्ठारह वर्ष से कम उम्र की लड़की की शादी करना मोहम्मडन के लिए कोई जुर्म नहीं होगा। कानून सभी के लिए एक जैसा नहीं चलता।

हादिया उर्फ़ अखिला अशोकन के शफिन जहान से निकाह के मामले में केरल हाई कोर्ट के फैसले को पलटकर सर्वोच्च न्यायलय ने ये फैसला दिया था कि अट्ठारह से पहले भी मोहम्मडन हो जाने पर, लड़की अपने पति के साथ रह सकती है।

इस शफिन जहान और अशोकन के मामले को इस्तेमाल करते हुए दूसरी लड़की जिसे मुहम्मडेन पति के साथ रहने की इजाजत नहीं मिल रही थी वो भी सर्वोच्च न्यायलय पहुँची।

इस किस्म के कॉन्ट्रैक्ट मैरिज में अक्सर लड़की से एक कोरे कागज़ पर दस्तखत भी करवा लिए जाते हैं ताकि मुल्क छोड़ते वक्त उनका बूढ़ा अरबी शेख पति उन्हें तलाक भी दे सके। आम लोगों को जब ऐसा करवाने वाले मौलानाओं का पता चलता है तो अक्सर भीड़ उनके अड्डे पर तोड़-फोड़ भी करती है। पुलिस भी मानती है कि ऐसी शादियाँ कोई शादी नहीं होती बल्कि कुछ दिन के मजे लेने के लिए की जाती हैं।

ऐसा माना जाता है कि इस्लामी कानूनों के हिसाब से ऐसे निकाह हराम हैं लेकिन कुछ मक्कार मौलाना कानूनों को तोड़ मरोड़ कर ऐसा करते रहते हैं। हैदराबाद में ऐसे मामलों के लिए सरकार की तरफ से 18 काज़ी नियुक्त किए गए थे, जिनके नीचे कुछ और काजी होते हैं।

वक्फ बोर्ड का मानना है कि ऐसा होता है और वो विदेशियों से होने वाले निकाह के मामलों पर कड़ी नजर रखने की हिदायत भी देते हैं लेकिन ओमान और सऊदी अरब के अलावा बाकी जगहों के लोगों के लिए उतनी सख्त पाबन्दी नहीं है। 2004 में ही इसके लिए शोर मचने पर कई दिशानिर्देश भी वक्फ बोर्ड ने जारी किए थे।

इन सब के वाबजूद इस किस्म की घटनाएँ होती रहती हैं। कभी वो बच्ची अमीना थी, कभी शबाना, आलिया, रुखसाना या कोई और हो जाएगी। सवाल ये है कि शादी के नाम पर लड़कियों के भविष्य से ये खिलवाड़ बंद क्यों नहीं होता? हम अपने कानून सुधारेंगे कब?

रिया, दीपिका, सारा अली खान सहित 15 फ़िल्मी सितारों के फ़ोन भेजे गए DFS: ड्रग्स मामले में NCB कर रही है गहन पड़ताल

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच शुरू होने के बाद सामने आए ड्रग्स कनेक्शन में NCB अब बॉलीवुड के 15 दिग्गज सेलिब्रिटीज के मोबाइल फ़ोन की जाँच कर रही हैं। जाँच के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने हटाए गए चैट और वीडियो को हासिल करने के लिए मोबाइल फोनों को गुजरात के गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक साइंसेज के निदेशालय (डीएफएस) को भेजा हैं। बता दें 15 मोबाइल फोनों में रिया चक्रवर्ती, दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर के भी फोन शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रग नेक्सस के उजागर होने के बाद दावा किया गया है कि फ़िल्मी सितारों के फ़ोन क्लोन करने से पहले उनमें से मैसेज वगैरह डिलीट किए गए हैं। वीडियो और व्हाट्सएप चैट के अलावा कॉन्टैक्ट लिस्ट, एसएमएस, रिकॉर्ड की गई बातचीत भी जाँच के दायरे में आने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले यह रिपोर्ट सामने आई थी कि बॉलीवुड ड्रग्स कनेक्शन के तार गोवा से जुड़े हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बॉलीवुड के कई ए ग्रेड सितारे गोवा डिटॉक्स के लिए जाते हैं, ताकि जाँच होने पर ड्रग्स सेवन का पता नहीं चले। बॉलीवुड स्टार्स शूटिंग या छुट्टियों के नाम पर गोवा में स्पेशल विला बुक करते हैं। लेकिन असल में वहाँ वे डिटॉक्स करते हैं। रिपब्लिक टीवी को ऐसे ही एक ‘स्पेशल विला’ के केयरटेकर ने बताया, “सेलिब्रिटीज एजेंट के साथ आते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ये सुरक्षित रहेगा और उन्हें ज्यादा पर्सनल स्पेस मिलेगा।”

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मीडिया रिपोर्ट्स में जाँच को लेकर कुछ भ्रामक दावे किए जा रहे थे, जिन्हें आज सीबीआई ने खारिज कर दिया है। इन दावों में कहा जा रहा था कि सीबीआई अपने निष्कर्ष पर पहुँच गई है जबकि हकीकत यह है कि अभी इस मामले में जाँच जारी है और यह बात खुद सीबीआई ने बताई है।

इस झूठ को सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलाने में मीडिया गिरोह के लोगों ने भी अपना पूरा योगदान दिया है। इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी बड़े संस्थानों के साथ काम करने वाली स्वाति सूबेदार ने लिखा, “सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में क्लोजर रिपोर्ट जमा करेगी। केस खत्म तमाशा खत्म।”

समाज के टुकड़े करने वाले लोग, एकता नहीं बर्दाश्त कर पाएँगे: RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में दतोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह में सामाजिक समरसता विषय पर आयोजित व्याख्यान माला में अपनी बात रखते हुए कई सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डाला है।

अपने एक बयान में उन्होंने आरक्षण को लेकर कहा, “देश में आरक्षण के लिए कानून तो बने हैं लेकिन इसका लाभ सभी को नहीं मिल पा रहा है। जिनका जहाँ प्रभुत्व है वो इसका लाभ ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे माना है। वैसे समाज में जब तक जरूरत है आरक्षण लागू रहना चाहिए। इसको मेरा पूरी तरह से समर्थन है।”

आरएसएस संघ चालक ने कहा कि जिन लोगों को देश के टुकड़े करना है वह समाज में एकता लाना बर्दाश्त नहीं करेंगे। क्रांति के रास्ते समाज में समरसता नहीं लाई जा सकती है। डॉ. बाबा साहेब ने भी कहा था कि विधि सम्मत रास्ते से ही समस्या का समाधान संभव है।

मोहन भागवत ने देश की जनता से समाज में फैली विषमता को उखाड़ फेंकने की अपील की। वह बोले कि सामाजिक समरसता के लिए अपने आचरण में बदलाव लाना होगा। हमें करके दिखाना होगा। उन्होंने देश में सामाजिक समरसता के लिए चल रहे अभियान को लेकर कहा कि क्रांति से परिवर्तन नहीं आता, परिवर्तन लाने के लिए संक्रांति चाहिए।

संघ प्रमुख ने कहा, “राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए कुछ लोग समाज के दोषों को आधार बनाकर समाज में दूरियाँ बढ़ाने और झगड़े लगाने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोग भ्रम का जाल उत्पन्न करते हैं। इनसे सावधान रहना होगा। सामाजिक समरसता का काम करने वालों की जिम्मेदारी है कि देश का समाज दोष मुक्त हो कर एक बने। संविधान की प्रस्तावना सब लोगों के आचरण में आए। सामाजिक समरसता का काम करने वालों की यह परीक्षा है।”

मोहन भागवत ने कहा, “हमारे यहाँ कम से कम पानी, मंदिर और श्मशान में कोई भेद नहीं होता। इसको लेकर हमको पूछने की जरूरत ही नहीं है। संघ ने इस दिशा में एक बड़ी रेखा खींचने का काम किया है। सामाजिक विषमता नहीं रहेगी, यह राष्ट्रीय लक्ष्य है। सबको इस दिशा में प्रयास करना होगा। विषमता हटनी चाहिए, यह सब चाहते हैं।”

मोहन भागवत ने कहा, “हम सब एक हैं। अपने स्वार्थ के कारण एक दूसरे को ऊँच-नीच कर दूर रखा गया। हमें उस कलंक को हटाना है। हम एक हैं, हमको एक होना है। विषमता बहुत दिनों की बीमारी है, बुद्धि से जाएगी। विषमता धर्म नहीं हो सकती।”

संघ प्रमुख कहते हैं, “समरसता के बिना समता संभव नहीं है। इसके लिए हमें तैयार रहना होगा। झुकना पड़े तो पीछे नहीं हटूँगा। जो ऊपर है उन्हें झुकना पड़ेगा और जो नीचे है उन्हें हाथ बढ़ाना पड़ेगा तभी समाज का उत्थान होगा।”

वह बताते हैं, “सारा समाज अपना है। सारी विविधताओं को साथ लेते हुए एक माता के पुत्र के नाते, एक राष्ट्र के राष्ट्रीय घटक के नाते हमें राष्ट्र के लिए एक साथ खड़े होना है। ऐसा नहीं करेंगे तो फिर से यह स्वतंत्रता चली जाएगी। बाबा साहब की मशाल हाथ में लेकर हमें काम करना चाहिए।”

उन्होंने लोगों से एकजुट होने को लेकर अपील की। वह बोले कि समाज में समरसता लाने के लिए अपने आचरण का उदाहरण लोगों के सामने पेश करना होगा। पहले करके दिखाना होगा, फिर दूसरे को बताना। संघ के स्वयंसेवक कर रहे हैं, सामाजिक समरसता मंच के लोगों को भी करना चाहिए। हमें मिलकर पर्व, त्योहार व उत्सव मनाना चाहिए। अपनी भाषा को ठीक करनी चाहिए। न्याय के पक्ष में उठने वाली आवाज के साथ खड़ा होना चाहिए।

सारा समाज अपना है इस भाव को लेकर काम करना है संविधान की प्रस्तावना सबके आचरण में आए इसके लिए वाणी का दिया जलाकर समरसता को लोगों के हृदय में उतारना है और बाबा साहेब को यह बता देना होगा कि वह दिन नहीं आएगा कि फिर से हमारी स्वतंत्रता चली जाए।

UP में फिल्म सिटी बनाने के ऐलान के बाद CM उद्धव को सताया बॉलीवुड शिफ्ट हो जाने का डर, कहा- बर्दाश्त नहीं करेंगे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आज (अक्टूबर 15, 2020) कहा है कि बॉलीवुड को जिस तरह से मुंबई से खत्म करने या शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है, उसे वह बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे

गुरुवार (अक्टूबर 15, 2020) को मल्टीप्लेक्स और सिनेमा थिएटर मालिकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई न केवल भारत की वित्तीय राजधानी है, बल्कि यह सांस्कृतिक राजधानी भी है। बॉलीवुड और सिनेमा बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार पैदा करते हैं।”

उन्होंने बताया कि बॉलीवुड अपने सिनेमा के लिए दुनियाभर में बहुत प्रसिद्ध है और हॉलीवुड की फिल्मों की तरह ही शानदार तथा अच्छी फिल्में बनाता है। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से यह देखा गया है कि एक निश्चित वर्ग के लोग इसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और कष्टपूर्ण है।

उन्होंने मल्टीप्लेक्स व सिनेमा थिएटर मालिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार जल्द ही मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों को खोलने के लिए SOP पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ठाकरे ने बताया कि सिनेमा हॉल्स को 50 फीसदी सीटों के साथ फिर से खोला जाएगा। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग और सैनेटाइजेशन का भी ख्याल रखा जाएगा।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को मुंबई से बॉलीवुड शिफ्ट हो जाने का डर सताने लगा है। वहीं उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री अपने राज्य में फिल्म सिटी बनाने का ऐलान कर चुके हैं। शायद यही कारण है कि गुरुवार को हुई बैठक में सीएम ठाकरे ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

याद दिला दें कि अभी कुछ दिन पहले आला अफसरों के साथ बैठक में यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वर्तमान परिस्थितियों में देश को एक अच्छी फिल्म सिटी की आवश्यकता है। प्रदेश यह जिम्मेदारी को लेने के लिए तैयार है। यहाँ पर एक बेहतरीन फ़िल्म सिटी बनाई जाएगी। इसके लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे का क्षेत्र बेहतर होगा।

योगी आदित्यनाथ ने इस घोषणा के साथ यह भी कहा था कि ये फ़िल्म सिटी फ़िल्म निर्माताओं को एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगी। साथ ही, रोजगार सृजन की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी प्रयास होगा। उन्होंने इस सिलसिले में भूमि के विकल्पों के साथ यथाशीघ्र कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

14 वर्षीय छात्रा से फुजैल, रिजवान, फरहान ने किया गैंगरेप: चेहरा-शरीर नोंचा, अश्लील वीडियो बनाकर कर रहे थे ब्लैकमेल

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक नाबालिग के साथ बेरहमी से रेप करने के मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों से लड़की ऑनलाइन गेम पबजी के जरिए संपर्क में आई थी। इसके बाद इन्होंने लड़की को पहले मिलने बुलाया और फिर उसका अलग-अलग इलाकों में ले जाकर रेप किया। जानकारी होने पर लड़की की माँ ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई और तीनों गिरफ्तार हुए।

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों की पहचान  फुजैल, रिजवान और फरहान के रूप में हुई है। इन्होंने लड़की के साथ हैवानियत दिखाते हुए उसका चेहरा और शरीर नोच डाला। इसके अलावा इन्होंने दुष्कर्म करते हुए उसकी अश्लील वीडियो भी बनाई। 

पुलिस ने बताया कि बच्ची अशोका गार्डन के पास रहती है और छठी कक्षा की छात्रा है। उसके माता पिता अलग रहते हैं। पीड़िता को ऑनलाइन पबजी गेम खेलने का शौक था। इसी वजह से उसकी पहचान रंभा नगर निवासी फुजेैल से हुई। कुछ दिन में इनकी आपस में दोस्ती हो गई और दोनों फोन पर बातचीत करने लगे। 

सितंबर में एक दिन फुजेल ने उसे बहला फुसला कर अशोका गार्डन के पेट्रोल पंप के पास बुला लिया। फिर वहाँ रिजवान और रईस भी पहुँच गए। बाद में तीनों ने उसे एक फ्लैट पर ले जाकर उसका रेप किया और इस वारदात की वीडियो भी बना ली। घटना को अंजाम देने के बाद लड़की को ब्लैकमेल किया जाने लगा। पिछले एक महीने में उसके साथ कई बार रेप हुआ।

अशोका गार्डन के एसएचओ आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि लड़की ने डर के कारण किसी को कुछ नहीं बताया था, मगर बुधवार को बेटी के बर्ताव में बदलाव देख कर उसकी माँ ने उसकी काउंसलिंग की और बच्ची ने आपबीती अपनी माँ को सुना दी। 

बच्ची की माँ ने फौरन पुलिस से संपर्क किया और तीनों के ख़िलाफ केस दर्ज हुआ। बच्ची ने बताया कि उसे बस तीनों का पहला नाम व फोन नंबर ही मालूम है। पुलिस ने आगे इसी आधार पर अपनी जाँच की व तीनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों की पहचान 18 साल के फुजैल, 19 साल के रिजवान और 19 वर्षीय फरहान के रूप में हुई। सभी गौतम नगर के रहने वाले हैं। 

इनमें फुजैल एसी मैकेनिक है, फरहान सफेदी का काम कॉन्ट्रैक्ट पर लेता है, और रिजवान एक आर्किटेक्ट के दफ्तर में काम करता है। तीनों ने पकड़े जाने के बाद अपना अपना जुर्म कबूल लिया है। इनके ख़िलाफ पुलिस ने आईपीसी की धाराओं समेत पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया है

गौरतलब है कि इस केस में आरोपितों का नाम स्पष्ट तौर पर सामने आने के बावजूद एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में यह लिखा कि 18 से 19 साल के लड़कों ने बच्ची का बलात्कार किया। जबकि कई मीडिया रिपोर्ट्स पुलिस के उसी बयान के साथ यह बताती है कि आरोपितों के नाम क्या थे। इसी कारण सोशल मीडिया पर एनडीटीवी की पत्रकारिता पर एक बार दोबारा सवाल उठाए गए हैं। यूजर्स ने लिखा है कि इस घटना में एनडीटीवी सेकुलरिज्म के कारण आरोपितों के नाम नहीं बताएगा क्योंकि वह हिंदुओं को असहिष्णु कहने में व्यस्त है।

एनडीटीवी की खबर का स्क्रीनशॉट

नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, अमेज़ॅन प्राइम जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स की निगरानी याचिका को SC ने दी मंजूरी: नोटिस जारी करने का आदेश

सर्वोच्च न्यायालय ने नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, अमेज़ॅन प्राइम जैसे अन्य ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफार्मों पर कंटेंट की निगरानी और सही प्रबंधन की माँग वाली याचिका को स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की एक पीठ ने अधिवक्ता मंजू जेटली शर्मा के माध्यम से शशांक शेखर झा द्वारा दायर जनहित याचिका में नोटिस जारी किए।

याचिकाकर्ता ने याचिका में माँग की है कि कोर्ट सरकार को सेंट्रल बोर्ड फ़ॉर रेग्युलेशन एंड मॉनिटरिंग ऑफ ऑनलाइन वीडियो कंटेंट्स (CBRMOBC) नाम की एक स्वायत्त संस्था के गठन का आदेश दे। इसकी अध्यक्षता सचिव स्तर के वरिष्ठ IAS अधिकारी करें। बोर्ड में सिनेमा और वीडियो कार्यक्रम निर्माण से जुड़े लोगों, शिक्षाविद, कानूनविद और रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का भी उचित प्रतिनिधित्व रखा जाए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि अदालत को यह पता नहीं है कि इस तरह रेगुलेशन संभव है या नहीं। हालाँकि, अदालत ने उन पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया है जो मामले में शामिल हो सकते हैं।

याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से अभी देश में सिनेमाघर जल्दी खुलने की उम्मीद नहीं है और ओटीटी-स्ट्रीमिंग और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को किसी प्रकार की मंजूरी के बगैर ही इसे प्रदर्शित करने का रास्ता दे दिया है।

याचिका में आगे कहा गया है कि इस प्रकार, इन प्लेटफार्मों पर उपलब्ध सामग्री को ठीक से विनियमित और मॉनिटर किया जाना चाहिए। इस समय डिजिटल सामग्री की निगरानी या प्रबंधन के लिए कोई कानून या स्वायत्त संस्था नहीं है और कई ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म द्वारा इसे बगैर किसी जाँच परख के ही जनता को परोसी जा रही है। क्योंकि इसे विनियमित करने के लिए कोई स्वायत्त निकाय नहीं है।

इनको नियंत्रित करने के लिए कोई कानून नहीं होने के कारण ही रोज कोई न कोई मामला दायर हो रहा है। कानून में इस तरह की खामियों की वजह से सरकार को रोजाना जनता की नाराजगी झेलनी पड़ रही है, इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारियों ने कोई उपाय नहीं किए।

गाइडलाइंस की कमी

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 में, घोषणा की थी कि वे निषिद्ध सामग्री की एक सूची प्रकाशित करेंगे। जनवरी 2020 में, आठ वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस Netflix, Hotstar, Voot, ZEE5, Arre, SonyLIV, ALT Balaji और Eros ने एक स्व-नियामक कोड पर हस्ताक्षर किया था ताकि यह तय किया जा सके कि कौन से कंटेंट ओटीटी प्लेटफार्मों से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। हालाँकि, MIB ने अब तक कोई भी दिशानिर्देश जारी नहीं किया है।

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने कुम्भ के खर्च पर की टिप्पणी: लोगों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया के साथ समझाया ‘अर्थशास्त्र’, ट्वीट डिलीट

हाल ही में असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा ने मदरसों पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक शिक्षा सरकारी पैसों पर प्रदान नहीं की जा सकती है। उनके मुताबिक़ अगर सरकारी पैसे से कुरान पढ़ाई जा रही है तो गीता और बाइबल भी पढ़ाई जानी चाहिए। इस पर अक्सर अपने बयानों के चलते विवादों में बने रहने वाले कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इस हिसाब से उत्तर प्रदेश सरकार का 4200 करोड़ रुपए खर्च करके कुम्भ मेले का आयोजन कराना भी गलत है। 

ट्विटर पर उदित राज ने लिखा, “सरकार द्वारा किसी भी धार्मिक शिक्षा या अनुष्ठान का खर्च वहन नहीं किया जाना चाहिए। सरकार का खुद का कोई धर्म नहीं होता है। यूपी सरकार इलाहाबाद में कुंभ मेले के आयोजन में 4200 करोड़ रुपये खर्च करती है, वह भी गलत है।”

(साभार – ट्विटर)

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज द्वारा इस ट्वीट के कुछ ही समय बाद इसकी जम कर आलोचना हुई और अंत में उन्होंने खुद अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया। ट्वीट डिलीट करने के बाद उदित राज ने कहा कि धर्म को राजनीतिक ताकतों से दूर रखना चाहिए और सरकार को किसी भी धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके अलावा न तो उसे बढ़ावा देना चाहिए और न ही उसे हतोत्साहित करना चाहिए। मैंने कुम्भ मेले का उदाहरण इसलिए दिया था क्योंकि इसका खर्च बहुत ज़्यादा था।

फिर इस मुद्दे पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों के पास विकास के लिए न तो कोई अवधारणा है और न ही इच्छाशक्ति। जब एक ऐसे धार्मिक आयोजन में करोड़ों लोग शामिल होते हैं तब सरकार को इसके लिए बुनियादी संरचना प्रदान करनी ही होगी। इस तरह के व्यापक आयोजन आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने में मददगार साबित होते हैं।”

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बृजेश पाठक ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “कुम्भ एक वैश्विक आयोजन बन चुका है। किसी को ऐसे धार्मिक आयोजन पर इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जिसमें देश और दुनिया से करोड़ों लोग शामिल होते हैं।”

उनके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी इस पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “इस प्रश्न का उत्तर भाजपा को नहीं बल्कि प्रियंका गाँधी वाड्रा और कॉन्ग्रेस को देना चाहिए कि सरकार को कुम्भ पर खर्च करना चाहिए या नहीं। हमने साल 2019 के कुम्भ में जितना भी खर्च किया हमें उस पर गर्व है, अगला कुम्भ और व्यापक होगा और उसमें दोगुना खर्च किया जाएगा।” 

क्योंकि कॉन्ग्रेस नेता ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था, इसके पहले और बाद में तमाम ट्विटर यूज़र ने प्रतिक्रिया दी।  

इस पर एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “उदित जी, वह पर्व गरीब हिन्दू दलितों के लिए भी है। आप नहीं जाते इसका मतलब, अन्य भी आपके भाँति अपनी आस्था त्याग दें?”

वहीं अन्य ट्विटर यूज़र्स ने बताया कि भले कुम्भ के आयोजन में इतनी बड़ी राशि खर्च होती है लेकिन इससे होने वाले फ़ायदे की राशि भी कई गुना ज़्यादा है।  

यह बात वाकई में हैरान करने वाली थी कि इतने बड़े हिन्दू आयोजन से होने वाला मुनाफ़ा इसमें होने वाले खर्च से कहीं ज्यादा है