झारखंड के गोड्डा जिले में पहाड़िया जनजाति की नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई है। कथित तौर पर कुल 4 लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है। इस मामले में अभी तक पुलिस महताब अंसारी नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है। अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।
गोड्डा जिले के पुलिस अधीक्षक वाईएस रमेश ने जानकारी देते हुए बताया कि सामूहिक बलात्कार की यह घटना सुंदर पहाड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घटियारी गाँव की है। पुलिस अभी तक इस घटना के मामले में महताब अंसारी नाम के युवक को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपित महताब अंसारी मूल रूप से घटियारी गाँव का ही रहने वाला है।
घटना बुधवार (23 सितंबर 2020) शाम के वक्त की है जब पीड़िता घटियारी से अपने गाँव जा रही थी। आरोपितों ने मौक़ा देख कर उसके साथ बलात्कार किया। ख़बरों के अनुसार पुलिस पर भी शुरुआत में मामले को दबाने का आरोप है। कहा जा रहा है कि सुंदर पहाड़ी थाना क्षेत्र की पुलिस शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज करने से आनाकानी करते हुए पीड़िता पर समझौता करने का दबाव बना रही थी।
पुलिस का यह रवैया देख कर पीड़िता ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक वाईएस रमेश से मुलाक़ात की। गुरुवार (24 सितंबर 2020) दोपहर में हुई इस मुलाक़ात के दौरान पीड़िता ने उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक रमेश के आदेश पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। फ़िलहाल पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की जाँच कर रही है और अन्य आरोपितों को तलाश रही है।
अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े मामले में NCB की पूछताछ के दौरान धर्मा प्रोडक्शंस से जुड़े रहे क्षितिज रवि प्रसाद का नाम लिया, जिसके बाद एजेंसी ने उनके ठिकानों की तलाशी ली। इधर फिल्म निर्देशक करण जौहर ने बयान जारी कर कहा है कि क्षितिजउनके धर्मा प्रोडक्शंस के अधिकारी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि क्षितिज ने नवम्बर 2019 में काफी कम समय के लिए उनकी कम्पनी के लिए काम किया था।
NCB ने शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) को रकुल प्रीत सिंह से पूछताछ की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस पूछताछ में बॉलीवुड के 4 बड़े अभिनेता-अभिनेत्रियों के नाम लिए और साथ ही करण जौहर के करीबी रहे क्षितिज प्रसाद का भी नाम लिया। हालाँकि, रकुल ने खुद ड्रग्स लेने की बात से इनकार किया। उन्होंने बताया कि क्षितिज ने उनके कुछ क़रीबियों को ड्रग्स की सप्लाई की थी।
उन्होंने कहा है कि उन्हें क्षितिज की गतिविधियों की जानकारी है। उन्होंने बॉलीवुड के 4 बड़े नाम NCB को दिए हैं और कहा है कि क्षितिज ने उन्हें अपने ड्रग्स नेटवर्क का चैनल बनाने के लिए सम्पर्क किया था। रकुल का नाम रिया चक्रवर्ती से पूछताछ में सामने आया था। ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ की खबर में दावा किया गया है कि क्षितिज करण जौहर का दाहिना हाथ है।
उसका नाम सामने आते ही NCB उसके वर्सोवा स्थित घर पर पहुँची और वहाँ तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसके ठिकाने से मारिजुआना और कुछ मात्रा में गाँजा आदि बरामद किया था। इसके बाद NCB उसे लेकर अपने दफ्तर तक गई। हालाँकि, एजेंसी ने फिलहाल उसकी गिरफ़्तारी या उसे हिरासत में लेने की बात से इनकार किया है। लेकिन कहा है कि उसे जल्द ही कस्टडी में लिया जाएगा। उसका नाम ड्रग पेडलर अंकुश अरनेजा ने भी लिया था।
इधर करण जौहर ने भी बयान जारी करते हुए कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स में भ्रामक दावा किया जा रहा है कि जुलाई 28, 2019 को उनके यहाँ हुई पार्टी के दौरान ड्रग्स का इस्तेमाल हुआ था। बता दें कि इस पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए इसे अपने खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार और कम्पनी पर झूठा कलंक लगाने के मीडिया ऐसा कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि जिन क्षितिज प्रसाद और अनुभव चोपड़ा को मीडिया उनका करीबी बता रहा है, उन दोनों को वो व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं। उन्होंने कहा कि ये दोनों अपनी व्यक्तिगत ज़िन्दगी में क्या करते हैं, इससे उनका या धर्मा प्रोडक्शंस का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुभव चोपड़ा को धर्मा प्रोडक्शंस ने नवंबर 2011 से जनवरी 2012 तक बतौर ‘सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर’ बहाल किया था।
वहीं उन्होंने क्षितिज प्रसाद के बारे में बताया कि उसे धर्मा प्रोडक्शंस से जुड़ी कम्पनी धर्मेटिक एंटरटेनमेंट में एक कंटेंट के लिए बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर बहाल किया गया था, जो पूरा ही नहीं हो सका। उन्होंने मीडिया के आरोपों को अप्रिय, विकृत और गलत करार देते हुए कहा कि उनके खिलाफ बिना किसी आधार के जो हमला किया जा रहा है, उसके विरुद्ध उन्हें अपने क़ानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।
वहीं ड्रग्स मामले में शनिवार का दिन काफी बड़ा होने वाला है, क्योंकि इस दिन NCB बॉलीवुड की तीन बड़ी अभिनेत्रियों, दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से पूछताछ करेगी। इन तीनों पर ही फिल्म इंडस्ट्री के सैकड़ों करोड़ रुपए दाँव पर लगे हुए हैं। दीपिका पादुकोण से पूछताछ के दौरान उनके पति रणवीर सिंह ने उपस्थित रहने की अपील की थी, ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया था। NCB दीपिका और उनके साथ 8 साल से जुड़ी करिश्मा को आमने-सामने बिठा कर पूछताछ करेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी सामने आया था कि दीपिका उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थी, जिसमें ड्रग्स को लेकर बॉलीवुड से जुड़े लोग बात करते थे। इस व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए कई बड़े कलाकारों का नाम सामने आने की संभावना है। दीपिका के अलावा करिश्मा और जाया साहा भी इस ग्रुप की एडमिन थीं। इस व्हाट्सग्रुप में दीपिका पादुकोण के कुल 2 नंबर शामिल थे।
दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद लगातार एक लॉबी दिल्ली पुलिस पर, सरकार की मंशा पर तरह-तरह के सवाल उठा रही है। ऐसे में कुछ दिन पहले 15 पूर्व जजों ने अपना साझा बयान जारी करके इस लॉबी को करारा जवाब दिया।
अपने बयान में इन पूर्व न्यायाधीशों ने सिविल सोसायटी की नुमाइंदगी का दावा करने वाले कुछ लोग को लताड़ा और उमर खालिद मामले में चल रही न्यायिक प्रक्रिया में अड़ंगे लगाने के लिए खरी-खरी सुनाई। बयान में पूर्व जजों ने लिखा, “ये वही लोग हैं जो संसद, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसे संस्थानों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।”
15 former judges of High Court have slammed the lobby which is supporting the nefarious attempts to disrupt the institutions involved in investigation of the devastating riots that happened in Delhi in Feb 2020. pic.twitter.com/xPTZGGiVq0
पूर्व न्यायाधीशों ने बयान में कहा कि ऐसे लोग खुद संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया से भली-भाँति परिचित है, मगर फिर भी विभाजनकारी एजेंडे को समर्थन दे रहे हैं। ऐसे लोग इस खयाल में जीते हैं कि देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनके हिसाब से काम करना चाहिए।
इस बयान में पूर्व न्यायाधीशों ने यह भी कहा है कि दिल्ली दंगों के संबंध में एक के बाद देश विरोधी गतिविधियों का खुलासा हो रहा है। लेकिन इसी बीच बार-बार जाँच प्रक्रिया और ट्रायल पर सवाल खड़े कर अड़ंगे लगाने की कोशिश की जा रही है। उमर खालिद के संदर्भ में ये समझा जाना चाहिए कि बेल के लिए न्याय व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया दी हुई है। न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी को दोषी सिर्फ सबूतों के आधार पर ही सिद्ध किया जा सकता है।
फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का मतलब ये नहीं कि इससे किसी भी अपराध को करने या उसे बढ़ावा देनी की छूट मिल जाती है। राष्ट्रीय एकता को कुछ लोगों की विशेष सोच की कीमत पर बलिदान नहीं किया जा सकता है। कानून को अपना रास्ता अपनाना चाहिए। उमर खालिद भारत में नियम कानून के लिए अपवाद नहीं है।
बता दें कि उमर खालिद के समर्थन में उतरे लोगों को जवाब देने के लिए पूर्व न्यायधीशों द्वारा जारी किए गए बयान में जम्मू-कश्मीर व दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीसी पटेल, मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के आर व्यास, राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अनिल दियो सिंह, सिक्किम हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस प्रमोद कोहली का नाम भी शामिल है। इनके अलावा 11 अन्य पूर्व न्यायाधीश ने भी इस बयान पर हस्ताक्षर किया है। इनके नाम नीचे सूची में लिखे हैं:
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली दंगों में पुलिस की जाँच पर सवाल उठाने वाले लोगों पर पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों ने भी खत लिख कर नाराजगी जाहिर की थी। अधिकारियों का मत था कि बाहरी दबाव बनाकर जाँच की प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
बता दें कि जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने 13 सितंबर 2020 को दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैरक़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने उमर खालिद से लगभग 11 घंटे तक पूछताछ करने के बाद उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद ही सोशल मीडिया पर खालिद को रिहाई दिलवाने के लिए बकायादा अभियान चला दिया गया, जिसमें मीडिया गिरोह के लोगों से लेकर कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवि भी शामिल रहे।
हरियाणा पुलिस ने पानीपत ट्रिपल मर्डर केस का पर्दाफाश करते हुए आरोपित नूर हसन को गिरफ्तार कर लिया है। हसन ने अपनी पत्नी, साली और सास की हत्या कर उनके शवों से दुष्कर्म किया। आरोपी पानीपत के समालखा का रहने वाला है।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 27 वर्षीय नूर हसन ने पुलिस के सामने 25 वर्षीय पत्नी मधु, 18 वर्षीय साली मनीषा, 48 वर्षीय सास जमीला की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपित हसन ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने तीनों महिलाओं की हत्या करने के बाद उनके शवों के साथ बलात्कार किया था।
बता दें आरोपी नूर हसन अपनी पत्नी मधु और दो बेटों के साथ समालखा में किराए के मकान में रह रहा था। घटना के समय मधु की बहन भी उनके घर में ही थी।
हसन ने 5 सितंबर को तेज धार वाले हथियार से पत्नी और साली की हत्या कर उनके शरीर को रजाई में लपेटकर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया। उसने पत्नी मधु का शव चुलकाना रेलवे क्रॉसिंग के पास फेंका और साली मनीषा का शव नाले में फेंक दिया। शवों की पहचान ना हो सके इसलिए चेहरे जला दिए थे।
इसके बाद 8 सितंबर को उसने बरशाम गाँव के पास अपनी सास को भी गला दबाकर मार दिया था। हसन ने अपनी सास के शरीर को जलाने की कोशिश भी की थी।
डीएसपी सतीश वत्स ने बताया कि हसन ने अवैध संबंध होने के संदेह पर पत्नी की हत्या की थी। उन्होंने कहा कि नूर हसन ने कुल्हाड़ी से पत्नी मधु और साथ रह रही साली मनीषा को मौत के घाट उतारा था।
हत्या के बाद उसने उनके चेहरे को डीजल डालकर जला दिया, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके और दोनों शवों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर फेंक दिया। जागरण की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हसन ने पहले से ही हत्या की योजना बनाई थी। हत्या के बाद वह अपने दो बेटों को काम पर भी ले गया था।
हसन ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि उसने हत्या की योजना बनाई थी, क्योंकि महिलाओं ने उसका जीना मुश्किल कर दिया था। मधु हसन की दूसरी पत्नी थी। उसकी पहली पत्नी से उसके तीन बच्चे भी हैं।
पुलिस ने एक सप्ताह बाद तीन अलग-अलग स्थानों से शवों को बरामद किया था। हरियाणा पुलिस द्वारा 11 सितंबर को पानीपत के उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के नेतृत्व में मामले की जाँच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया था। हरियाणा पुलिस द्वारा हसन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है। नूर हसन को गुरुवार को अदालत में पेश किया गया था। जिसके बाद उसे चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
चौथी के एक बच्चे ने अनजाने में एक फेसबुक पोस्ट किया। इस पोस्ट को लेकर सैकड़ों की संख्या में मुस्लिमों ने हिंदू परिवार पर दिनदहाड़े हमला कर दिया। घटना कानपुर के मकनपुर गाँव की है।
18 सितंबर को यह हमला हुआ। इस्लामी भीड़ ने तीन घंटे से ज्यादा बवाल काटा। हिंदू परिवार के घर पर पथराव किया गया। सीढ़ियों के सहारे घर की छत पर चढ़कर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। परिवार के बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।
हमले में घर के मालिक आलोक गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी माँ और लकवाग्रस्त पिता को भी चोटें आई।
बिल्होर थाने में इस संबंध में 58 लोगों के खिलाफ 21 सितंबर को एफआईआर दर्ज कराई गई।
मकनपुर थाने में दर्ज एफआईआर
घटना के बाद बजरंग दल के प्रदेश सचिव रामजी तिवारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने इस घटना का उल्लेख करते हुए इलाके के हिंदुओं की दयनीय स्थिति से उन्हें अवगत कराया है।
ऑपइंडिया के पास इस पत्र की कॉपी है। इसमें बताया गया है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान आलोक गुप्ता के नाबालिग बच्चे ने अनजाने में अपने पिता के फेसबुक प्रोफाइल से एक पोस्ट कर दी। इससे इलाके के कुछ कट्टरपंथी भड़क उठे।
बजरंग दल के नेता ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र
अगली सुबह परिवार को इसका एहसास होता उससे पहले सैकड़ों की संख्या में इस्लामी कट्टरपंथी आलोक के घर के बाहर जुट गए। ‘मारो, काटो’ सहित अन्य भड़काऊ नारे लगाते हुए भीड़ ने उनके घर पर पथराव शुरू कर दिया।
पलक झपकते ही कुछ उन्मादी आलोक की घर पर चढ़ गए और लूटपाट तथा तोड़फोड़ शुरू कर दी। कोई भी बात सुने बिना उन्मादी भीड़ ने आलोक की बुजुर्ग माँ और लकवाग्रस्त पिता को एक कोने में धकेल दिया और आलोक की बुरी तरह से पिटाई शुरू कर दी। महिलाओं से गहने छीन लिए। घर में रखे पैसे ले गए और आलोक को लहूलुहान छोड़ दिया।
रामजी तिवारी का कहना है कि यह सबकुछ दिनदहाड़े पुलिस की मौजूदगी में हुआ। घटना को फिल्मा रहे कुछ स्थानीय पत्रकारों और युवाओं के मोबाइल भी भीड़ ने तोड़ दिए। लवकुश कटियार नामक एक स्थानीय पत्रकार की भीड़ ने बुरी तरह पिटाई की। गंभीर चोटों के कारण कटियार को कानपुर के अस्पताल के आईसीयू में दाखिल कराना पड़ा।
तिवारी के अनुसार इस घटना से आसपास के हिंदू परिवार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भी मकनपुर छोड़ने का फैसला किया। इस इलाके में हिंदू पहले से अल्पसंख्यक हैं और डर के साए में जीते हैं। तिवारी ने मुख्यमंत्री से घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ, जिनका नाम एफआईआर में दर्ज है, पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।
मुस्लिमों द्वारा किया गया तांडव तीन घंटे तक चलता रहा : पीड़ित हिन्दू परिवार
ऑपइंडिया के पास वे वीडियो भी हैं, जिसमें पीड़ित परिवार घटना की भयावहता बयाँ कर रहे हैं। आलोक की मॉं ने बताया कि सुबह 8 बजे अचानक से भीड़ उनके घर के पास जुट गई और वे समझ पाते कि क्या हुआ है, उससे पहले उनका घर लूट लिया गया। परिवार ने बताया, “पूरा तांडव तीन घंटे तक चलता रहा”। आलोक की मॉं ने बताया कि घर के भीतर घुसने वाली भीड़ ने उन्हें और उनके पति को धकेल दिया तथा उनके बेटे की बुरी तरह पिटाई की। घर के मंदिर और मूर्तियों को तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि बंदूक की गोली जैसी आवाज भी अपने घर के बाहर से उन्होंने सुनी थी।
उन्होंने आगे बताया कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। आलोक के बुरी तरह पिटाई होने के बाद दो पुलिस कॉन्स्टेबल घर के अंदर गए और उन्हें बाहर निकाला।
परिवार के एक अन्य सदस्य ने कहा कि बिल्होर पुलिस स्टेशन के अधिकारी, निरीक्षक हर कोई वहाँ मौजूद था लेकिन किसी ने मदद नहीं की। घटना के बाद वे आलोक को ले गए उसे भी कुछ दिन पुलिस हिरासत में रखा।
वहीं वीडियो में मौजूद तीसरे व्यक्ति ने पुष्टि की कि घटना को रिकॉर्ड करने का प्रयास करने वाले लोगों को भी पीटा गया था और उन्मादी इस्लामी भीड़ द्वारा उनके मोबाइल को भी तोड़ दिया गया था।
ऑपइंडिया ने की पीड़ित के भांजे से बात
ऑपइंडिया ने आलोक के भांजे कुणाल से भी बात की तो उन्होंने बताया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के लगातार दबाव बनाने के बाद आरोपितों को बचाने की कोशिश के आरोप में बिल्होर थाने के एसएचओ संतोष कुमार अवस्थी और मकनपुर थाने के प्रभारी वेद प्रकाश मिश्रा का ट्रांसफर कर दिया गया है। कुणाल के अनुसार एक सप्ताह बाद भी उपद्रवियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बिल्होर पुलिस ने मामले में कुछ गिरफ्तारी की थी, लेकिन उनके खिलाफ आईपीसी की धाराएँ इतनी कमजोर थीं कि उन्हें तुरंत जमानत मिल गई।
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि थाने लाए गए कुछ और उपद्रवियों को बिना सवाल पूछे ही जाने दिया गया। कुणाल ने आरोप लगाया कि भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस को रिश्वत दी थी, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई।
ऑपइंडिया ने कानपुर के सिटी एसपी राजकुमार अग्रवाल और ग्रामीण एसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो सका। पुलिस के बयान प्राप्त होने पर हम दोबारा से लेख को अपडेट करेंगे।
साल 2017 से लेकर अब तक चीन की सरकार ने शिनजियांग प्रांत में लगभग 16,000 मस्जिदों को नष्ट किया है। इनमें से करीब 8500 मस्जिद पूर्ण रूप से ध्वस्त किए गए हैं। ये जमीनें अभी तक खाली पड़ी हैं। यह जानकारी ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) ने दी है। ऑस्ट्रेलिया के इस थिंक टैंक ने यह दावा सैटेलाइट इमेजरी और स्टैटिस्टिकल मॉडलिंग ( statistical modelling) के आधार पर किया है।
थिंक टैंक ने दावा किया है कि प्रांत में करीब 28% मस्जिदों को क्षतिग्रस्त किया गया है या उन्हें किसी और चीज में तब्दील कर दिया गया। वहीं, धार्मिक मार्ग, इबादतगाहों और कब्रिस्तानों सहित 30% महत्वपूर्ण इस्लामी स्थलों का शिनजियांग में समूल विनाश किया गया है। अनुमान के मुताबिक साल 2017 के बाद प्रांत में हर तीन मस्जिदों में से एक को ध्वस्त किया गया।
24000 मस्जिदों के होने का चीन प्रशासन का दावा
इस थिंक टैंक ने प्रांत में मौजूद मस्जिदों और चीनी प्रशासन द्वारा दावे किए जा रहे मस्जिदों के आँकड़े में भी विरोधाभास पाया। एक तरफ जहाँ चीनी सरकार का कहना है कि शिनजियांग में 24000 से ज्यादा मस्जिद हैं, वहीं उनकी रिपोर्ट कहती है कि आज के समय में वहाँ 15,500 मस्जिद हैं। इसमें भी दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा मस्जिदों में से भी लगभग 7500 मस्जिद कुछ हद तक क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
एएसपीआई ने इस बात पर जोर दिया है कि 2012-2016 के बीच कई मस्जिदों का रेनोवेट किया गया था, लेकिन 2017 के बाद से ऐसा प्रतीत होता है कि ‘चीजों को सुधारने’ के लिए नीति में परिवर्तन हुआ।
मस्जिदों में कमी और क्षतिग्रस्त इस्लामिक स्थलों में इजाफा (साभार-Australian Strategic Policy Institute)
एएसपीआई ने अनुमान लगाया है कि शिनजियांग में लगभग 8,450 मस्जिदें नष्ट हो गई थीं और अनुमानित 7,550 मस्जिदों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था या फिर इस्लामी शैली की वास्तुकला और प्रतीकों को हटाने की आड़ में उनमें ‘सुधार’ किया गया। यह गौर करने वाली बात है कि शिनजियांग में बहाली या नवीकरण कार्य के नाम पर सांस्कृतिक विनाश का काम अक्सर किया जाता रहा है।
थिंक टैंक ने सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल करते हुए, 2017 से पहले मौजूद मस्जिदों का एक नया डेटा-सेट बनाया है। इसके जरिए उन्हें साल 2017 से पहले 900 से अधिक इस्लामी स्थलों का पता चला है। उन्होंने हालिया तस्वीरों का उपयोग करते हुए, अव्यवस्थित, कम क्षतिग्रस्त, काफी क्षतिग्रस्त और नष्ट कर दिए गए मस्जिदों को वर्गीकृत किया। इसके बाद विश्लेषण करके उन्होंने इस्लामी स्थलों की संरचना में किए गए बदलाव को आसानी से देखा।
संगठन ने यह भी पाया कि मस्जिदों के अलावा, चीनी सरकार के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण पवित्र मजहबी जगहों, कब्रिस्तानों और इबादतगाहों को भी खंडित किया है। डेटा और विश्लेषण से पता चलता है कि उन पवित्र स्थलों में से 30% को ध्वस्त कर दिया गया है। वहीं, बाकी के 27.8% किसी अन्य वजहों से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुल मिलाकर चीनी कानून के तहत संरक्षित 17.4% स्थल नष्ट हो गए और 61.8% असुरक्षित स्थल क्षतिग्रस्त या ध्वस्त कर दिए गए।
इस दौरान ऑस्ट्रेलिया की इस थिंक टैंक को एक तरह का पैटर्न भी देखने को मिला, जिससे मस्जिदों को ध्वस्त करने का काम हुआ। उन्होंने पाया कि जिन क्षेत्रों में कम टूरिस्ट आते थे, वहाँ विध्वंस की दर कम थी, जैसे कि उरुमकी। थिंक टैंक ने अपने विश्लेषण में यह भी देखा कि जो मस्जिद क्षतिग्रस्त नहीं हुए, उनमें पहले कोई इस्लामिक वास्तुशिल्प का काम नहीं है, इसलिए ‘उनको ‘सुधार’ अभियान के नाम पर ध्वस्त नहीं किया गया। फिर कई मस्जिदों को नागरिक और कमर्शियल स्थानों जैसे कि कैफे-बार और सार्वजनिक शौचालयों में बदल दिया गया। मौजूदा मस्जिदों में से 75% में ताला जड़ा है या आज उनमें कोई आता-जाता नहीं है।
गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि चीन ने उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में बने कॉन्सन्ट्रेशन कैंप में करीब 1 लाख उइगरों को रखा हुआ है, जहाँ उन्हें उनके मजहबी रिवाजों का छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। थिंक टैंक ने यह भी देखा कि अप्रैल 2016 में चीन प्रधानमंत्री के भाषण के बाद मस्जिदों में नवीनीकरण का काम बंद हो गया था, इसके बाद केवल चीनी संस्कृति का वहाँ विस्तार हुआ। जिनपिंग के ही नेतृत्व में ‘सांस्कृतिक आत्मसात’ और ‘अंतर जातीय मिलन’ (Inter-ethnic mingling) शुरू हुआ।
चीन के whitepaper ने खोली प्रांत में उइगरों की हकीकत
स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफ़िस द्वारा प्रकाशित एक श्वेतपत्र में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने कहा है कि चीन जो कर रहा है उसके लिए उइगर ज़िम्मेदार हैं। चीन ने एक चौंकाने वाले दावा करते हुए खुलासा किया कि उसने शिनजियांग के उइगर-बहुल प्रांत में 2014 और 2019 के बीच शिक्षा शिविरों में 1.29 मिलियन से अधिक लोगों को रखा है।
श्वेतपत्र में यह भी दावा किया गया कि उइगर आतंकवादी थे, जो ‘आफ्टरलाइफ’ में विश्वास करते थे। मजहबी शिक्षा के कारण उन्होंने आधुनिक विज्ञान को खारिज कर दिया। इसके साथ ही वे अपने व्यावसायिक कौशल, आर्थिक परिस्थितियों और अपने स्वयं के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता में सुधार करने को तैयार नहीं थे।
बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप के ख़िलाफ अभिनेत्री पायल घोष ने साल 2013 की एक घटना पर एफआईआर दर्ज करवाई है। मुंबई वर्सोवा थाने में दिए अपने बयान में उन्होंने बताया है कि अनुराग से उनकी मीटिंग उस साल 3 बार हुई थी। अभिनेत्री के अनुसार, तीसरी मुलाकात अनुराग के घर पर हुई थी। वहीं मशहूर निर्देशक ने उन्हें सोफे पर धक्का दिया और अपनी पैंट खोल कर जबरदस्ती करने लगे।
अपने बयान में घोष ने यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने चिल्लाने की कोशिश की मगर, अनुराग ने उनका मुँह दबाकर उनका रेप किया।
पहली मुलाकात अनुराग के ऑफिस में
अभिनेत्री पायल घोष के अनुसार, साल 2013 के अगस्त महीने में उनकी कुछ ही दिनों में तीन मुलाकातें हुईं। पहली मीटिंग में वह अपने मैनेजर के साथ कश्यप से अंधेरी के आराम नगर स्थित उनके ऑफिस में मिलीं। बाकी दो मुलाकातें निर्देशक के घर पर हुई, जहाँ पायल घोष उनसे अकेले मिलने गईं।
दूसरी मुलाकात घर पर
दूसरी मुलाकात के बारे में बताते हुए घोष ने पुलिस को कहा उस दौरान अनुराग बड़े सलीके से पेश आए थे। वह कहती हैं, “दूसरी मुलाकात में मेरी उनसे दो घंटे से ज्यादा बातचीत चली। तभी उन्होंने मुझे अपने फिल्म करियर और उपलब्धियों के बारे में भी बताया। मैंने उनके साथ डिनर किया, फिर उन्होंने मुझे कुछ देर और रुकने को कहा। मगर मैं चली गई, क्योंकि ड्राइवर इंतजार कर रहा था।”
तीसरी मुलाकात में रेप
तीसरी मुलाकात का खुलासा करते हुए घोष ने बताया है कि कश्यप से दूसरी बार मिलने के बाद उन्हें कुछ दिन बाद मैसेज आया। इस मैसेज में कश्यप ने अभिनेत्री को एक रोल ऑफर करते हुए उनसे घर आकर मिलने को कहा। मैसेज में अनुराग कश्यप ने पायल घोष से अलग से कहा कि वह सलवार-कमीज पहनकर उनसे मिलने आए ताकि कोई उन्हें पहचान न पाए।
पायल घोष का बयान
पायल घोष ने बयान में कहा है, “लगभग 7:30 बजे मैं अपनी होंडा सिटी कार में अनुराग कश्यप के घर पहुँची। वह अंदर बैठकर स्मोक कर रहा था। घर से वाकई बहुत बदबू आ रही थी और जब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा कि वह मारिजुआना का सेवन कर रहा था। उसने मुझे भी स्मोक करने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। वह मुझे अपने फिल्मों के संग्रह को दिखाने के लिए दूसरे कमरे में ले गया। अपनी पुरानी फिल्मों के कैसेट दिखाते हुए, उसने अचानक मुझे सोफे पर धकेल दिया। फिर उसने अपनी पैंट खोली और मुझसे जबरदस्ती करने लगा। मैंने बहुत चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन उसने मेरा मुँह दबा दिया और मेरा बलात्कार किया।”
पायल के अनुसार, इसके बाद उसे जैसे ही मौका मिला वह वहाँ से भाग निकली। पहले तो उसने आपबीती किसी के साथ साझा नहीं की, लेकिन कुछ दिनों बाद, उसने अपने मैनेजर और ड्राइवर को यह सब बताया।
पायल उस समय को याद करते हुए कहती हैं कि वह उस समय निर्देशक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए बेचैन थीं, लेकिन उनके कुछ करीबी दोस्तों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर वह अनुराग कश्यप जैसे बड़े निर्देशक के खिलाफ बोलती हैं तो शायद उन्हें फिल्म में काम नहीं मिलेगा।
पायल ने अपने बयान में कहा, “मीटू आंदोलन ने मुझे हिम्मत दी। मैंने इस महीने अपनी बहन और चचेरे भाई के साथ इसे साझा किया और अपने परिजनों से सलाह-मशविरा करने के बाद शिकायत दर्ज करने का फैसला किया।”
पुलिस को दिए अपने बयान में अभिनेत्री ने कहा है कि उनके मैनेजर ने साल 2013 में अनुराग कश्यप से उनकी पहली मीटिंग करवाने के लिए फेसबुक पर उन्हें रिक्वेस्ट भेजी थी।
गौरतलब है कि करीब एक हफ्ते पहले अभिनेत्री पायल घोष ने दावा किया था कि फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप द्वारा उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। उन्होंने बताया कि अनुराग कश्यप ने उन्हें सहज करने के लिए उनसे कहा था कि इंडस्ट्री में फिल्म निर्माताओं और अभिनेत्रियों के बीच शारीरिक संबंध आम बात है। पायल घोष ने आगे कहा कि ऐसा आदमी अब महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए बोल रहा है, वह एक ‘f***ing hypocrite’ है।
पायल घोष ने यह गंभीर आरोप एबीएन तेलुगू को दिए इंटरव्यू में लगाए थे। इसके बाद एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने अभिनेत्री को उन्हें सारी जानकारी और उनकी शिकायत भेजनी की सलाह दी थी। शुरुआत में तो इस मामले में मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री की शिकायत नहीं लिखी। मगर बाद में आईपीसी की धारा 376, 354, 342, 342 के तहत मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी थी। कहा जा रहा है कि इस 7 साल पुराने मामले में अनुराग को जल्द ही पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए बॉलीवुड ड्रग्स स्कैंडल का दायरा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के रडार पर कई बड़े सितारे हैं। ऐसे में शिवसेना सांसद संजय राउत ने बॉलीवुड सितारों का बचाव करते हुए एनसीबी पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने बयान से ‘शराबी’ फिल्म में अमिताभ बच्चन पर फिल्माए उस गाने की यादें भी ताजा कर दी है, जिसमें वह पूछते हैं कि नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ जरा।
Narcotics Control Bureau’s job is to prevent drug smuggling, but here they are calling one person after the other. In which field, there is no addiction? Some have an addiction to money, some have other addictions: Shiv Sena leader Sanjay Raut pic.twitter.com/vOH3zLRrY2
शिवसेना नेता राउत ने बॉलीवुड में ड्रग्स केस पर हो रही जाँच पर एनसीबी को उसकी जिम्मेदारियाँ याद दिलाई है। साथ ही बताया है कि उनका काम क्या है और वह क्या कर रहे हैं। राउत ने कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का काम ड्रग्स की तस्करी को रोकना है। लेकिन वे एक के बाद दूसरे लोगों को बुला रहे हैं। किस क्षेत्र में लत नहीं है? किसी को पैसे का लत है तो किसी को कुछ और चीज का।
उन्होंने कहा, “एनसीबी का काम देश के बाहर से आने वाले ड्रग के बड़े-बड़े कनसाइनमेंट को पकड़ना और उसकी जड़ तक पहुँचकर उसे खत्म करना है। फिर चाहे वो सामान हवाई मार्ग से आता हो या दूसरे किसी माध्यम से। लेकिन अभी एनसीबी क्या कर रही है?”
वह आगे कहते हैं, “अभी एनसीबी एक-एक आदमी को पकड़कर पूछताछ कर रही है। जबकि इसके लिए प्रत्येक शहर और राज्य में सरकार द्वारा गठित एक पुलिस डिपार्टमेंट होता है।” राउत ने आरोप लगाया कि सुशांत केस में सीबीआई के हाथ कुछ नहीं लगा, इसलिए एनसीबी से जाँच शुरू करवा दी गई। सुशांत के मामले में जाँच कहाँ तक पहुँची है, ये भी मालूम होना चाहिए।
यहाँ बता दें कि एक ओर जहाँ संजय राउत बॉलीवुड कलाकारों के पक्ष में उतर आए है, वहीं एनसीबी कल यानी शनिवार (26 सितंबर 2020) को दीपिका पादुकोण से ड्रग्स मामले में पूछताछ करने वाली है। ख़बर के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थीं, जिसमें ड्रग्स के सेवन और लेन-देन को लेकर चर्चा होती थी। इस व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए कई बड़े कलाकारों का नाम सामने आने की संभावना है।
एनसीबी जहाँ बॉलीवुड के काले सच को उजागर करने की कोशिश कर रही है, वहीं शिवसेना नेता नामी हस्तियों का नाम मामले में आने के बाद ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे लोगों को अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘शराबी’ की याद आए। इसलिए, अब जब तक संजय राउत कोई नया ज्ञान या बयान नहीं देते, ऑपइंडिया की टीम यह गाना संजय राउत को समर्पित करती है।
राज्य में एक विशाल फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब कानपुर में गंगा किनारे रिवर फ्रंट बनाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रेटर नोएडा के पास फिल्म सिटी परियोजना सहित कई विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा हैं। विकास परियोजनाओं की सूची में कानपुर में बनने वाली गंगा रिवर फ्रंट को हाल में जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (24 सितंबर 2020) को कानपुर क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट पीएम मोदी के लिए एक उपहार होगा, जिन्होंने यहाँ गंगा नदी की सफाई को लेकर प्रशंसा की थी। वर्तमान में कानपुर रेंज में प्रत्येक डिवीजन में 50 करोड़ रुपये की लागत वाली 30 विकास परियोजनाएँ चल रही हैं। इनमें कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, औरैया और इटावा शामिल हैं।
कानपुर में हुए बैठक में राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप सिंह साही और पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी भाग लिया था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कानपुर में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और मेट्रो परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि इटावा और औरैया जिलों से गुजरने वाला अंडर कंस्ट्रक्शन बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे राज्य की आर्थिक स्थिति को और मजबूती देगा। गंगा नदी पर विकास कार्य नमामि गंगे परियोजना के तहत लागू किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को नमामि गंगे के शीघ्र इम्पलीमेंटेशन के अलावा रिवर फ्रंट के तत्काल निर्माण के लिए एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
सीएम योगी ने अधिकारियों को कानपुर मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से फर्रुखाबाद जिले में कोविड-19 की मृत्यु दर को कम करने के लिए कहते हुए यह भी निर्देश दिया कि अस्पतालों में प्रत्येक बिस्तर पर उचित ऑक्सीजन की सप्लाई होनी चाहिए।
उन्होंने पीएम आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालयों की सौ प्रतिशत जियो-टैगिंग का भी निर्देश दिया।
बाहुबली अतीक अहमद की अवैध प्रॉपर्टी पर कार्रवाई के बाद अब उससे इस पर आया खर्च भी वसूलने की योगी सरकार तैयारी कर रही है। इसमें मजदूरों की दिहाड़ी, जेसीबी का किराया, अधिकारियों और पुलिस बलों का खर्च शामिल है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) इस पूरी कार्रवाई का एक लेखा-जोखा तैयार कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, PDA ने इस पूरे खर्चे का अनुमान लगभग 25 लाख रुपए लगाया है। योगी सरकार ने अतीक अहमद को फरमान जारी करते हुए साफ कर दिया है कि ध्वस्तिकरण की कार्रवाई का खर्च अतीक अहमद को वहन करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, फूलपुर के सांसद रह चुके अतीक अहमद की अब तक करीब 300 करोड़ रुपए की अवैध सम्पतियों को जमींदोज किया गया है। सरकार द्वारा पहले से बेनामी सम्पतियों की पूरी कार्रवाई का ब्यौरा तैयार कर लिया गया था। जिसके बाद पुलिस की मदद से ताबड़तोड़ एक्शन लिया गया।
कार्रवाई में आधा आधा दर्जन अधिकारी, प्रवर्तन दल की पूरी टीम, लगभग 50 की संख्या में पुलिसकर्मी, हर कार्रवाई में 4 से 6 जेसीबी मशीनों का प्रयोग और 70 से अधिक मजदूर लगाए गए थे।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में माफिया घोषित किए गए पूर्व सांसद अतीक अहमद की बेनामी सम्पत्तियों को योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एक-एक कर के जमींदोज किया गया है। सिर्फ अतीक ही नहीं योगी सरकार द्वारा उसके गुर्गों, परिजनों और करीबियों की अवैध सम्पतियों को भी बख्शा नहीं गया है।