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पैगंबर पर कार्टून छापने वाली ‘शार्ली एब्दो’ के पुराने कार्यालय के पास चाकू से हमला: 4 घायल, 2 गंभीर

फ्रांस की व्यंग्य मैग्जीन ‘शार्ली एब्दो’ के पुराने ऑफिस के बाहर एक बार फिर हमले की खबर सामने आई है। धारदार हथियार से शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को हुए इस हमले में 4 लोग घायल हो गए। दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पेरिस पुलिस का कहना है कि वह हमलावरों की तलाश में जुटी है। संदिग्ध पैकेट मिलने के बाद पूरे एरिया को बंद कर दिया गया है। हमला पेरिस के रिचर्ड लेनोरो मेट्रो स्टेशन के पास हुआ। हमले के बाद से क्षेत्र में स्कूल और केयर होम बंद हैं। अभी तक पुलिस ने हमलावरों और पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं की है।

पत्रकार लुकास ब्यूरेल ने ट्विटर पर इस बात की पुष्टि की है कि इलाके में एक संदिग्ध पैकेट देखा गया है। एक गवाह ने BFMTV को बताया, “मैंने एक युवा महिला को देखा। उसके सिर पर गहरी चोट थी और पूरे मुँह पर खून ही खून था।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शार्ली एब्दो मैग्जीन के दफ्तर पर साल 2015 में हमला हुआ था। यह हमला पैगंबर का एक कार्टून छापने के कारण हुआ था। इस घटना के करीब 5 साल बाद मैग्जीन ने दोबारा उस कार्टून को हाल में पब्लिश करने का फैसला किया, जिसके कारण विश्व भर के मुस्लिमों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया और कई जगहों से हिंसा की घटना भी सामने आई।

फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक पत्रिका शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर किसी भी प्रकार की निंदा नहीं की। मैक्रों ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बल देते हुए कहा था कि कोई भी प्रेसिडेंट पत्रकार या न्यूज़ रूम के संपादकीय की पसंद को लेकर कोई जजमेंट पास नहीं कर सकता।

मोइनुद्दीन चिश्ती पर अमीश देवगन की माफी राजस्थान सरकार को नहीं कबूल, कहा- धार्मिक भावनाएँ आहत हुई है

न्यूज 18 के पत्रकार अमीश देवगन के ख़िलाफ जाँच कराने के लिए राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने असाधारण तत्परता दिखाई है। बता दें अमीश देवगन ने 15 जून को आर-पार शो के दौरान सूफी संत मोहम्मद चिश्ती पर कथिततौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

प्रदेश की ओर से मामले की पैरवी करते हुए वकील मनीष सिंघवी ने अदालत में दलील पेश की। उन्होंने अमीश देवगन के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का विरोध किया। साथ ही कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से की गई टिप्पणी पर पत्रकार के ख़िलाफ़ जाँच हो।

उल्लेखनीय है कि देवगन की ओर से चिश्ती पर की गई टिप्पणी को ‘जुबान फिसलना’ बताते हुए अपील की गई थी कि उनकी माफी को मद्देनजर रखते हुए अलग-अलग प्राथमिकियों को रद्द किया जाए। इसी अपील के ख़िलाफ़ राजस्थान सरकार की ओर से मनीष सिंघवी ने दलीलें दी और कहा कि इससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है।

सिंघवी ने कहा, “जाँच के लिए एफआईआर ही एक मशीनरी है। पड़ताल होनी चाहिए और चार्जशीट भी फाइल किए जाने की जरूरत है। कोर्ट को प्रथम दृष्ट्या चार्जशीट और गवाहों पर विचार करना होगा।”

यहाँ बता दें कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना में पत्रकार के ख़िलाफ़ 7 एफआईआर दर्ज की गई है। पत्रकार के वकील सिद्धार्थ लुथरा ने न्यायाधीश एएम खानविल्कर व न्यायाधीश संजीव खन्ना के सामने पेश होते हुए कहा कि सभी एफआईआर में आईपीसी की धारा 153ए, 153जी, 295ए, 298, 5050(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(फ) के तहत मामला दर्ज है। मगर, इनमें से कोई भी धारा इस मामले में उपयुक्त नहीं है।

इस पर सिंघवी ने कहा कि आईपीसी की धारा 295ए (जान-बूझकर अपराध करना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) भी इन एफआईआर में है, इसलिए जाँच होनी चाहिए और देवगन के ख़िलाफ़ दायर मुकदमे रद्द नहीं हो सकते।

कोर्ट की सुनवाई में यह भी कहा गया कि अमीश देवगन ने गलती करने के 30 घंटे बाद माफी माँगी थी, इसलिए यह भी जाँच का विषय है कि बाद में माँगी गई उनकी माफी वास्तविक है या नहीं। बता दें इस सुनवाई से पहले अमीश देवगन के वकील लुथरा कोर्ट को बता चुके थे कि उनके मुवक्किल ने अपने खिलाफ़ पहली एफआईआर होने से पहले ही माफी माँग ली थी, इसलिए उनकी अपील है कि उनके ख़िलाफ़ दायर एफआईआर रद्द की जाए।

उल्लेखनीय है कि 15 जून को अपने शो ‘आर-पार’ पर पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम के संबंध में पीआईएल के बारे में एक बहस की मेजबानी करते हुए, अमीश ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के रूप में जाना जाता है, उन्हें “हमलावर” और “लुटेरा” कहकर बुलाया था। हालाँकि, अमीश देवगन ने सूफी संत को “लुटेरा” के रूप में संदर्भित करने के लिए भी माफी माँगी थी और इसे “अनजाने” में हुई गलती बताया था।

इसके बाद  26 जून को सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर टिप्पणी के बाद न्यूज 18 एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर पर जाँच और कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगा दी थी। देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि उनके मुवक्किल ने अपने शो के दौरान अनजाने में गलती की थी, जिसके लिए उन्होंने बाद में सार्वजनिक माफी माँगी थी। लूथरा ने कहा था, “अगर ऐसा होने लगे, जहाँ लोगों को जुबान फिसलने के कारण समस्या से सामना करना पड़े तो क्या होगा? लोग गलती करते हैं। उन्होंने माफी भी माँगी है।”

ड्रग्स चैट वाले ग्रुप की एडमिन थी दीपिका पादुकोण, दो नंबरों का करती थी इस्तेमाल

ड्रग्स और बॉलीवुड के बीच संबंधों की लंबी कड़ी को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। दीपिका पादुकोण को लेकर एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। टाइम्स नाउ के अनुसार दीपिका उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थी, जिसमें ड्रग्स को लेकर बॉलीवुड से जुड़े लोग बात करते थे।

ख़बरों के अनुसार यह खुलासा एनसीबी की बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से पूछताछ के ठीक पहले हुआ है। एनसीबी कल यानी शनिवार (26 सितंबर 2020) को दीपिका पादुकोण से ड्रग्स के मामले में पूछताछ करने वाली है। ख़बर के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थीं जिसमें ड्रग्स के सेवन और लेन-देन को लेकर चर्चा होती थी। इस व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए कई बड़े कलाकारों का नाम सामने आने की संभावना है।

टाइम्स नाउ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि दीपिका के अलावा करिश्मा और जाया साहा भी इस ग्रुप की एडमिन थीं। इस व्हाट्सग्रुप में दीपिका पादुकोण के कुल 2 नंबर शामिल थे। इस हफ्ते की शुरुआत में एक व्हाट्सएप चैट वायरल होने के बाद दीपिका पादुकोण का नाम ड्रग्स मामले में सामने आया था। व्हाट्सएप चैट में दीपिका पादुकोण ‘K’ नाम के व्यक्ति से कथित तौर पर हैश की माँग कर रही थी। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2017 को हुई यह बातचीत इस प्रकार है:

10:03AM (+91-992——-) D(D मतलब दीपिका माना जा रहा है):K।।तुम्हारे पास माल है?

10:05 AM (+91-961——-) ‘K’: मेरे पास है लेकिन घर पर है। मैं बांद्रा में हूँ। मैं अमित से पूछ सकती हूँ अगर आपको चाहिए।

10:07, दीपिका:हाँ!! प्लीज

10:08, K: अमित के पास है, वो इसे ला रहा है।

10:12, दीपिका: हैश न?

10:12, दीपिका: वीड नहीं।

10:14, K: आप कोको किस समय आ रहे हो?

10:15: दीपिका: 11:30/12:00

10:15: दीपिका: शाल किस समय तक है वहाँ?

K: मुझे लगता है कि उसने 11:30 तक कहा है, क्योंकि उसे 12 बजे कहीं और जाना है

इसके पहले दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने पूछताछ के लिए समन भेजा था। यह जानकारी तब सामने आई जब रिया चक्रवर्ती की टैलेंट मैनेजर जाया साहा का नाम कई टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए सामने आया। रिपब्लिक टीवी द्वारा प्रकाशित ख़बर के अनुसार ‘D’ और ‘K’ दोनों ही उस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे, जिसमें ड्रग्स पर चर्चा हुई थी। 

एनसीबी फिलहाल बॉलीवुड में फैले ड्रग्स नेटवर्क के मामले में जाँच कर रही है। दीपिका पादुकोण के अलावा ड्रग्स मामले में सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर को भी समन भेज चुकी है।         

मीडिया रिपोर्टों के अनुसा एनसीबी के सामने पूछताछ में रकुल प्रीत ने बताया है कि उनके घर से बरामद ड्रग्स रिया चक्रवर्ती के थे। रिपोर्ट के अनुसार, रकुल प्रीत ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती ही उनके घर में ड्रग्स रखती थी और एजेंसी को जो ड्रग्स मिले हैं वो रिया के हैं। अभिनेत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उसका ड्रग पेडलर्स के साथ कोई संबंध नहीं है।

छद्म नारीवाद और हिंदू घृणा का जोड़: भारतीय संस्कृति पर हमला बोल कर कहा जाएगा- ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स’

प्रोपगेंडा वाले फेमिनिज्म का असली मतलब क्या होता है, इसका एक चेहरा कल सोशल मीडिया पर दोबारा देखने को मिला। एक फोटोग्राफर द्वारा खींची गई दो तस्वीरें कल अचानक हर जगह वायरल होना शुरू हुईं। एक में मॉडल ने सज धज कर साड़ी पहनी है और दूसरे में लड़की नन की ड्रेस में नजर आ रही है।

फोटोग्राफर की तस्वीरें वायरल होने की वजह सिर्फ़ साड़ी वाली फोटो है। इसमें नजर आ रहा है कि उसने हिंदुओं की पारंपरिक पोशाक साड़ी का कैसे अपमान किया। तस्वीर में देख सकते हैं कि साड़ी को नीचे से काटकर अलग कर दिया गया है और मॉडल कैंची अपने हाथ में लेकर कैमरे की ओर देख रही है। 

यामी नाम की फोटोग्राफर ने सोशल मीडिया पर यह तस्वीर 8 मार्च 2020 को अपलोड की थी। वही दिन, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। वही, दिन जब हर जगह महिला सशक्तिकरण की बात होती है।

यामी ने इसी दिन इस फोटोशूट की कुछ तस्वीर इंस्टाग्राम पर डालीं और एक तस्वीर के नीचे महिला दिवस, की शुभकामनाएँ देते हुए कैप्शन में लिखा- “ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स।” वहीं दूसरी तस्वीर में लिखा, “Why fit in when you were able to stand out “

सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों की बहुत आलोचना की जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि सीधे-सीधे हिंदुओं की संस्कृति पर प्रहार है। कुछ लोगों का पूछना है कि आखिर फोटोग्राफर को लेकर इतना बवाल क्यों हो रहा है, तस्वीर में नजर आने वाली महिला तो बस एक मॉडल है।

बता दें, जिन लोगों का इस तस्वीर को देखने के बाद यह सवाल है कि आखिर तस्वीर को लेकर हुआ बवाल बेवजह है या आधुनिक दौर में उसे इतना हाइलाइट नहीं किया जाना चाहिए। वो यामी के ही अकॉउंट पर अपलोड दूसरी फोटो को देखें। यह भी सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर हो रही है। इसमें लड़की, एक नन की ड्रेस पहने हुए है और चेहरे पर मुस्कान के साथ फोटो खिंचवा रही हैं। 

बात सिर्फ़ फोटो की नहीं है। कैप्शन में भी अंतर देखिए। साड़ी को घुटनों के ऊपर तक काटकर जहाँ यामी उसे ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप’  मानती और समझती हैं कि जब आप बाहर नजर आ सकते हैं तो अंदर क्यों रहना । वहीं नन की ड्रेस वाली तस्वीर पर लिखती हैं, “उनकी कृपा से.. तब तक जीवन का आनंद लेंगे और एक दूसरे से प्यार करेंगे जब तक उनका राज (किंगडम) नहीं आता।”

विचार योग्य बात यह है कि दोनों पोशाकों को लेकर एक फोटोग्राफर की राय इतनी भिन्न कैसे है? जिन्हें लगता है कि यह काम अब भी केवल प्रोफेशन के लिहाज से हुआ है। उन्हें सोचना चाहिए कि एक तस्वीर में मॉडल को जहाँ धार्मिक पोशाक पहना कर ईश्वर की तलबगार दिखाया जा रहा है। वहीं दूसरी तस्वीर में मॉडल को, ऐसी पोशाक जिसका संबंध सीधे हिंदू संस्कृति व भारतीय सभ्यता से है, उसे रूढ़िवाद का बिंब तोड़ने वाली बताया जा रहा है।

इस तरह के नारीवाद में गौर करें कि इनके लिए किसी पहनावे में खुद को सिर से लेकर पाँव तक ढके रखना तब तक ही बंदिश नहीं है, जब तक उसका संबंध हिंदू धर्म से न हो। जैसी ही किसी पोशाक का संबंध हिंदू संस्कृति से जुड़ जाए तो इस तरह के छद्म नारीवाद के लिए उस पहनावे को कैंची से काटने का अर्थ पितृसत्ता से लड़ना बन जाता है।

इसलिए, ऐसी तस्वीरें देखकर सवाल तो पूछा जाना चाहिए क्या ऐसी मॉडल्स, या ऐसी फोटोग्राफर्स इस पितृसत्ता के ख़िलाफ़ लड़ाई को आगे बढ़ाने से पहले अपने अकॉउंट पर स्पष्ट तौर पर यह लिख सकती हैं कि उनके नारीवाद में केवल हिंदू धर्म से संबंधी धारणाओं की छीछालेदर की जाती है।

अगर, नहीं लिख सकतीं। तो यह स्टिरियोटाइप हर पोशाक की कतरनों के साथ क्यों नहीं ब्रेक किए जाते? हिंदुओं के पहनावे पर ही ऐसा प्रहार क्यों? क्यों नन की ड्रेस में मॉडल आदर्श होती है? क्यों बुर्के को स्टिरियोटाइप का हिस्सा नहीं माना जाता? क्यों केवल रूढ़िवाद की परिभाषा साड़ी और घूँघट तक सीमित हो जाती है?

वर्तमान समय की बात करें तो आज साड़ी ने विदेशों में भी अपना सौन्दर्य बिखेरा है। वह महिलाएँ जिन्हें वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना होता है, वह सभी साड़ी को अपनी प्राथमिकता में रखती हैं। मतलब तो साफ है न कि यह पोशाक केवल हिंदुओं की संस्कृति को ही नहीं बल्कि भारत की सभ्यता को भी दर्शाती है। फिर नारीवाद के नाम पर या महिला सशक्तिकरण के नाम पर ऐसा घिनौना प्रयास क्यों? आखिर कैसे एक नन की ड्रेस में लड़की का सशक्तिकरण मुमकिन है और साड़ी जैसे लिबास में नहीं।

भारत ने कई विदेशी संस्कृतियों को अपने भीतर समाहित किया है। यहाँ पाश्चत्य संस्कृति का सृजन भी वर्तमान में अपने चरम पर है। बावजूद इसके ऐसी कोशिशों को यदि एंटी हिंदू प्रोपगेंडा न कहा जाए तो क्या कहा जाएगा। साड़ी को रिग्रेसिव मानना किसी के विचार का हिस्सा जरूर हो सकता हैं, लेकिन उसी इंसान का यह समझना कि अन्य संस्कृतियों से जुड़़े ऐसे लिबास प्रोग्रेसिव हैं और महिला को खुशी देते हैं, केवल प्रोपगेंडा युक्त स्यूडो फेमिनिज्म का उदहारण हैं और उसे दिक्कत रूढ़िवाद से नहीं हिंदू धर्म से है।

सोचने वाली बात है क्या अगर सिर्फ़ पैरों को दिखाकर स्टिरियोटाइप्स तोड़ना है तो हमारे पास विकल्प के तौर पर शॉर्ट्स और स्कर्ट्स बाजार में उपलब्ध नहीं है क्या? हम उन्हें पहनकर क्यों नहीं सशक्त हो जाते। इसके लिए हमें क्यों जरूरत पड़ती है भारत की हजारों साल पुरानी सभ्यता से खिलवाड़ करने की?

पिछले दिनों याद करिए सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुईं थी। इनमें एक दुल्हन ब्लाउज के नीचे शॉर्ट्स पहन कर शादी से पहले डांस करती नजर आई थी। लेकिन, जैसे ही वह अपने शादी के मंडप पर पहुँची, तो वहाँ उसकी पोशाक वही थी, जिसमें आम दुल्हनें होती हैं। इसका अर्थ साफ है कि मॉर्डन से मॉर्डन लड़कियाँ भी भारतीय लिबास के मायने जानती हैं। उस दुल्हन ने भी वीडियो जारी करके कई स्टिरियोटाइप्स तोड़े थे मगर उसने अपने लहँगे को शॉर्ट्स बना कर शादी नहीं की। लड़की जानती थी कि भारतीय लिबास की खूबसूरती के अर्थ क्या है।

ध्यान रखिए लोकतांत्रिक भारत में किसी भी महिला को पुरुषों के बराबर स्वतंत्रता है। यहाँ उनका सशक्तिकरण केवल उस पितृसत्ता से लड़कर होगा जो उन्हें चार दीवारी से बाहर न निकलने की वस्तु मानता है। ऐसे छद्म नारीवाद से नहीं। वेशभूषा से निजात पाना अगर पितृसत्ता को हराना है तो इस तरह का प्रयोग बुर्के या हिजाब पर भी होना जरूरी है। लेकिन, शायद ऐसा कभी होगा नहीं, क्योंकि ऐसी तथाकथित प्रोग्रेसिव महिलाएँ जानती हैं कि यदि अपनी ऐसी रचनात्मकता किसी मजहब विशेष के तौर-तरीकों के साथ दिखा दी गई तो हश्र क्या होगा। इन्हें मालूम है कि कहाँ चोट करना सबसे सेफ हैं और किससे इन्हें अन्य समुदाय में ख्याति मिलेगी।

विराट के खराब प्रदर्शन पर सुनील गावस्कर ने नहीं की गंदी बात, अनुष्का शर्मा ने यूँ ही दे दिया ज्ञान

अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज रहे सुनील गावस्कर (25 सितंबर 2020) शुक्रवार को विवादों में फँस गए। दावा किया जा रहा है कि आईपीएल में विराट कोहली के खराब प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कॉमेंट्री के दौरान उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा पर भद्दी टिप्पणी की।

इसको लेकर सोशल मीडिया में गावस्कर की तीखी आलोचना हुई। यहाँ तक कि अनुष्का ने भी एक इंस्टाग्राम स्टोरी में गावस्कर को जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “मिस्टर गावस्कर, आपने इतने साल तक लोगों की निजी जिंदगी का सम्मान किया और क्या आपको नहीं लगता कि यह बात आपको हमारे-मेरे बारे में भी कायम रखनी चाहिए थी।”

असल में, गुरुवार को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मैच में विराट के कैच छोड़ने और खराब प्रदर्शन को लेकर कॉमेंट्री के दौरान गावस्कर ने उनकी आलोचना की थी। विराट कोहली जब दूसरी पारी के तीसरे ओवर में बल्लेबाजी करने आए, तब गावस्कर कॉमेंट्री कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने एक टिप्पणी की जिसमें विराट कोहली की पत्नी अनुष्का का भी जिक्र था।

विराट कोहली के खराब परफॉर्मेंस का जिक्र करते हुए गावस्कर ने कहा, “लॉकडाउन था तो सिर्फ अनुष्का की बॉलिंग की प्रैक्टिस की इन्होंने, वो वीडियो देखी है, उससे तो कुछ नहीं होना है।”

दरअसल, गावस्कर इस साल मई में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का जिक्र कर रहे थे। इसमें विराट कोहली और अनुष्का शर्मा अपने घर की छत पर क्रिकेट खेलते नजर आए थे। उस वक्त पूरे भारत में सम्पूर्ण लॉकडाउन था और खिलाड़ियों को खेल के मैदान में जाने की अनुमति नहीं थी।

गावस्कर की कॉमेंट्री के एक दिन बाद शुक्रवार को मीडिया नेटवर्क और टीवी चैनलों ने भ्रामक दावा किया कि महान बल्लेबाज ने विराट कोहली के खिलाफ भद्दे कमेंट किए। सिर्फ मीडिया चैनल ही नहीं, सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी ट्विटर पर अनुष्का शर्मा पर कथित सेक्सिस्ट कमेंट के लिए गावस्कर की आलोचना की। इसके अलावा उन्होंने बीसीसीआई से कॉमेंट्री टीम से सुनील गावस्कर को बर्खास्त करने की माँग भी की।

फैक्ट चेक

मीडिया भले दिग्गज बल्लेबाज की टिप्पणी को गलत ढंग से पेश कर नाराजगी व्यक्त कर रही है, लेकिन गावस्कर ने बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक या अश्लील टिप्पणी नहीं की थी। वास्तव में उन्होंने लॉकडाउन के दौरान वायरल हुए उनके वीडियो का जिक्र किया था।

नीचे आप वह वीडियो देख सकते हैं जिसका गावस्कर ने हवाला दिया था;

सुनील गावस्कर इस वीडियो का जिक्र कर रहे थे। इसमें आप देख सकते हैं कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा कोरोनो वायरस लॉकडाउन के दौरान अपने घर की छत पर खेल रहे थे। यह वीडियो प्रमाण है कि सोशल मीडिया और कुछ चैनलों द्वारा गावस्कर की टिप्पणी पर किया गया दावा सरासर गलत है। जिसमें लोगों ने पूर्व भारतीय कप्तान को अश्लील टिप्पणी करने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

NDTV को भी नहीं मिले कृषि कानून के विरोधी किसान; प्रदर्शनकारी ‘नकली किसान’ बोले: माँग बाद में बता देंगे

संसद में कृषि विधेयक पास हो जाने के बाद से विपक्ष लगातार मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा कर रहा है। ऐसे में उनके ‘निष्पक्ष’ प्रोपेगेंडा न्यूज चैनल एनडीटीवी ने ही उनके निराधार प्रश्नों का जवाब अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग से दे दिया है।

एनडीटीवी की इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इनमें वह दो अलग-अलग तरह के किसानों के पास जाकर अपने सवाल पूछ रहे हैं। एक जो वाकई किसान हैं और उन्हें नए कानून से कोई आपत्ति नहीं है। वहीं, एक वो किसान बनकर प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें यही नहीं मालूम कि उनकी माँग क्या है।

सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियोज को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि कृषि विधेयक किसानों के लिए इतने फायदेमंद हैं कि खुद एनडीटीवी भी ऐसे किसान नहीं ढूँढ पाया जो इसका विरोध करें। इन दावों के साथ एनडीटीवी पत्रकार श्रीनिवासन की वीडियो वायरल हो रही है। श्रीनिवासन किसानों से पूछते हैं कि जो किसानों के लिए कानून लागू हुआ है, उसके कारण कुछ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। तो क्या वह लोग भी उस कानून के विरोध में हैं?

इस पर वहाँ खड़ा किसान साफ सिर हिलाकर मना करता है और कहता है कि वह उसके विरोध में नहीं हैं। पत्रकार के आसपास खड़े लोग भी इससे मना कर देते हैं कि वह भी उस कानून के विरोध में नहीं हैं। वह कहते हैं कि इससे तो अब बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी। मंडी तक जाने का समय बचेगा। अपनी फसल किसान कहीं भी बेच पाएगा।

बीच में एक किसान कहता है कि उनके पास प्राइवेट सेंटर हैं और वह चाहते हैं कि उनके इलाके में और भी सेंटर्स खुलें। इससे उन्हें ही फायदा होगा। वहीं अन्य किसान कहते हैं कि उनके इलाके के आस पास कई कलेक्शन सेंटर हैं जिनको सामान देने से उनकी मजदूरी भी नहीं कटती। कैश भी सीधा हाथ में मिलता है।

गौरतलब है कि उक्त बातें तो उन किसानों की है जिनके खेतों के पास जाकर एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्टिंग की। अब एक नजर उस रिपोर्टिंग पर भी डालिए, जहाँ रिपोर्टर प्रदर्शन कर रहे ‘नकली’ किसानों से उनकी माँग जानने पहुँचा। एनडीटीवी रिपोर्टर ने सवाल किया कि सरकार कह रही है यह बिल आपके हित में है? इस पर प्रदर्शनकारी प्रदर्शन की ओर इशारा करके कहता है कि हाँ अभी फैसला होगा। इसके बाद रिपोर्टर पूछता है आप किसान ही हैं न? जवाब मिलता है- हाँ। रिपोर्टर फिर पूछता है- आपकी माँग क्या है? इस पर कुछ वाजिब जवाब देने की जगह प्रदर्शनकारी कहता है कि बता देंगे बाद में।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर एनडीटीवी की इन वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये कॉन्ग्रेस के पेड कार्यकर्ता ‘नकली’ किसान बनकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनसे सवाल पूछो कि आपकी माँग क्या है? तो जवाब मिलता है- बता देंगे बाद में। ऐसे ही दूसरी वीडियो को लेकर राहुल गाँधी पर टिप्पणी की जा रही है और कहा जा रहा है कि बिग बास्केट, रिलायंस फ्रेश, मोर आदि के बुरे परिणाम गिनाने वाले अपने पारिवारिक चैनल की रिपोर्ट देखें जिसमें इनके लाभ किसान खुद बता रहे हैं।

रिया मेरे घर में ड्रग्स रखती थी, रकुल प्रीत ने NCB की पूछताछ में कबूला: मीडिया रिपोर्ट में दावा

ड्रग्स केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने आज बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत से पूछताछ की। अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने पूछताछ में दावा किया कि उनके निवास से बरामद ड्रग्स रिया चक्रवर्ती की हैं। हालाँकि, खुद नशीले पदार्थों का सेवन करने से अभिनेत्री ने इनकार किया है।

रिपब्लिक भारत की रिपोर्ट के अनुसार, रकुल प्रीत ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती ही उनके घर में ड्रग्स रखती थी और एजेंसी को जो ड्रग्स मिले हैं वो रिया के हैं। अभिनेत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उसका ड्रग पेडलर्स के साथ कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीबी की पूछताछ के दौरान, रकुल प्रीत सिंह ने दावा किया कि रिया चक्रवर्ती को उसके घर पर ड्रग्स रखा करती थी। रकुल प्रीत ने कहा कि उसके घर से बरामद किया गया ‘सामान’ उसका नहीं था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रग्स को लेकर रकुल प्रीत ने अपनी और रिया के बीच व्हाट्सएप पर हुई बातचीत को भी स्वीकार किया है। जब एनसीबी के अधिकारियों ने उसे चैट दिखाया, जिसमें दोनों ड्रग्स पर चर्चा कर रहे थे और रिया को प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के बारे में पूछते हुए देखा गया, तो रकुल प्रीत ने चैट को सही बताया।

कल, NCB ने रकुल प्रीत सिंह के घर पर छापा मारा, जिसके बाद एजेंसी द्वारा दूसरा समन जारी किया गया था। रकुल प्रीत सिंह आज शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) को लगभग चार घंटे की पूछताछ के बाद अपने घर पहुँची। ।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बॉलीवुड और टीवी स्टार्स के खिलाफ एक्शन लेने शुरू कर दिए हैं। एजेंसी पिछले दो दिनों से टीवी की मशहूर जोड़ी अबीगेल पांडे और सनम जौहर से ड्रग्स केस में पूछताछ कर रही है और उनके घर छापा भी मार चुकी है जहाँ से उन्हें चरस मिला है।

एक अफसर जिसने बक्से में बंद कर दिया लालू का ‘जिन्न’, खत्म कर दिया बिहार में जंगलराज का बूथ लूट

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (25 सितंबर 2020) को बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। तीन चरणों में मतदान होगा और 10 नवंबर को नतीजे आएँगे। बिहार में चुनावों की चर्चा के साथ ही जंगलराज और चुनावों के दौरान बूथ कैप्चरिंग का भयावह अतीत भी चर्चा में आ जाता है।

लालू प्रसाद यादव चुनाव के दौरान दावा करते रहते थे कि जब बक्सा खुलेगा तो उनका जिन्न निकलेगा। यानी, जब गिनती होगी तो नतीजे उनके ही हक में रहेंगे। लेकिन, 2005 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव ने बूथ कैप्चरिंग के इतिहास को दफन कर दिया। जब नतीजे आए तो कोई जिन्न नहीं निकला और लालू का 15 सालों से चला आ रहा राजपाट खत्म हो गया।

बिहार को बूथ कैप्चरिंग से निजात दिलाने वाले अफसर का नाम है, केजे राव। उन्हें 2005 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षक बनाकर भेजा था। इसके बाद राव ने जो कुछ किया वह एक इतिहास है।

असल में राजनीतिक जोड़-तोड़ से 1990 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले लालू ने ऐसा समीकरण गढ़ा कि अगले डेढ़ दशकों तक वही बिहार की राजनीति के धुरी बने रहे। उन्होंने एमवाई समीकरण (मुस्लिम-यादव) बनाया था। 1995 में जब विधानसभा के चुनाव आए तो उन्होंने कहा, “बक्सा (मतदान पेटी) से जिन्न निकलेगा और सब पलट जाएगा।” जब नतीजे आए तो लालू के कहे अनुसार जिन्न बाहर निकला और उनकी पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। ये वो दौर था जब बिहार में चुनाव और बूथ कैप्चरिंग एक-दूसरे का पर्याय बन गए थे।

साल 2005 के पहले बिहार विधानसभा चुनावों में बाहुबलियों का प्रभाव अपने चरम पर था। राजनीतिक नुमाइंदे बेख़ौफ़ होकर बूथ पर कब्ज़ा करते थे और जनता मन मुताबिक मतदान करने में भी डरती थी।

ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि 2005 के चुनाव निष्पक्ष और नियमबद्ध तरीके से कराए जाएँ। चुनाव आयोग ने केजे राव को बिहार चुनाव के दौरान पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया। बिहार में फैले राजनीतिक आतंक को देख कर देख कर राव समझ चुके थे कि यहाँ राजनैतिक हालातों का ढाँचा अन्य क्षेत्रों जैसा नहीं है। अक्टूबर 2005 में होने वाले चुनाव से ठीक पहले उन्होंने राजधानी पटना में अधिकारियों की एक बैठक आयोजित की। दुबली पतली काया, चेहरे पर मोटा चश्मा, चेक शर्ट और गोल चेहरा। कुर्सी पर बैठने कुछ ही देर बाद उन्होंने एक कागज़ उठाया, जो चुनाव की तैनाती में शामिल अधिकारियों ने तैयार किया था। 

उन्होंने एक दरोगा से अंग्रेजी भाषा में कहा, “ह्वाट इज़ द स्टेट ऑफ़ नॉन बेलेबल वारंटी।” दरोगा जी शांत, बल्कि पूरी सभा ही शांत! इसके पहले बैठक में शामिल होने वाला कोई और शख्स अपनी राय पेश करता राव ने चुनाव को लेकर एक गाढ़ी लकीर खींच दी। उन्होंने कहा “इस चुनाव में लुटेरों और बाहुबलियों मनमानी नहीं चलेगी। चुनाव का पैमाना केवल एक होगा, संविधान और क़ानून।”

उनके जीवन का एक किस्सा बहुत उल्लेखनीय है, 2005 बिहार चुनाव के दौरान वह गया स्थित पहाड़ी मतदान केंद्र पहुँचे। बूथ की छत पर एक जवान एलएमजी लेकर खड़ा था। राव ने उससे पूछा तो उसने स्थानीय बोली में जवाब दिया, “ई बार त बूथ लुटेरवन डरे झांकियों न मारतौ, गोली खाएला हई का।” एक पंक्ति में यही था 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव। बिहार की जनता के लिए यह परिवर्तन अविस्मरणीय था। आलम यह हुआ कि जब केजे राव हेलिकॉप्टर से निकलते तो जनता उनके नारे लगाने लगती थी।   

इस चुनाव पर राव ने कितनी गहरी छाप छोड़ी थी इसका अंदाजा आप एक सर्वे से लगा सकते हैं। चुनाव के बाद बिहारटाइम्स डॉट कॉम ने यह सर्वे किया। बिहार के लोगों ने उन्हें बदलाव का हीरो चुना था। राव को 62 फीसदी वोट मिला था, जबकि राजनीतिक बदलाव के चेहरे बने नीतीश कुमार को 29 फीसदी वोट ही इस सर्वे में मिले थे।

साल 2015 में एक समाचार समूह को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “चुनाव से जुड़े हर रोग की एक ही दवा है। चुनाव आयोग के प्रस्तावों को सही तरीके से लागू  किया जाए। यह बड़ी चुनौती है लेकिन इसके लिए युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं को आगे आना होगा। जिन बूथों पर सेना के जवान नहीं मौजूद होंगे, वहाँ असल लोकतंत्र नज़र आएगा। 2005 से 2015 के बीच बहुत बदलाव नहीं आए हैं, अभी तक कई मूलभूत समस्याएँ हैं। मतदाता को निडर होकर घरों से बाहर निकलना होगा और बेहतर उम्मीदवार का चुनाव करना होगा। कोई उचित विकल्प न हो तो नोटा दबाएँ जो बाहुबली जनता को डराए, जनता उसे नोटा से डराए।”

चीन के बाद भारत में जाकिर नाइक के मोबाइल ऐप को भी बैन करने की तैयारी, जिस पर होता है प्रतिबंधित पीस टीवी का प्रसारण

केंद्र सरकार इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के मोबाइल ऐप को धार्मिक घृणा फैलाने के कारण प्रतिबंधित करने की योजना बना रही है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, नाइक के ऐप तथा सोशल मीडिया हैंडल भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं तथा इनके माध्यम से मजहब विशेष के युवाओं को भर्ती करने और कट्टरपंथी बनाने का कार्य किया जा रहा है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि जाकिर नाइक की संस्था के सम्बंध जिहादी समूहों से हैं तथा इसे भारत में जिहादी प्रोपेगेंडा को बढ़ाने के लिए अरब मुल्कों से आर्थिक मदद मिलती है।

आईबी व एनआईए के शीर्ष अधिकारियों की एक बैठक केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिल्ली स्थित कार्यालय में हुई, जिसमें इस विषय पर चर्चा की गई की जाकिर नाइक द्वारा अभद्र भाषा में पोस्ट किए गए विभिन्न भड़काऊ वीडियो देश के सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा है।

नफरत फैलाने वाले भाषण प्रसारित करने तथा बार-बार अपने चैनलों के माध्यम से हिंसा भड़काने के कारण ब्रिटेन के मीडिया वॉचडॉग ऑफकॉम द्वारा नाइक के चैनलों पीस टीवी और पीस टीवी उर्दू पर 2.75 करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया गया। जाकिर नाइक हवाला कारोबार तथा अतिवादी विचारों को उकसाने वाले भड़काऊ भाषण देने के कारण भारत में वांछित अपराधी है, जिसका नाम एनआईए की मोस्ट-वांटेड सूची में भी शामिल है।

पिछले वर्ष, उसने फ्री पीस टीवी ऐप नाम से एक मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया था, जिसको गूगल प्ले स्टोर पर एक लाख से अधिक बार डाउनलोड किया गया था, जिसका 3 वर्ष से अधिक आयु वाले उपयोग कर सकतें है। इस ऐप पर चार भाषाओं, अंग्रेजी, उर्दू, बंगला तथा चीनी में चौबीसों घण्टे भड़काऊ कंटेंट टेलीकास्ट किया जाता है। इस ऐप के माध्यम से, नाइक के टीवी चैनल का प्रसारण पूरे भारत में आसानी से होता है भले ही उसका चैनल प्रतिबंधित हो। पड़ोसी देशों बांग्लादेश तथा श्रीलंका में नाइक का यह ऐप पहले से ही बैन है।

गौरतलब है कि इससे पहले लव जिहाद के मामले में भी एनआईए ने जाकिर नाइक को नामजद किया था। एनआईए ने चेन्नई के एक व्यवसायी की बेटी तथा बांग्लादेश के एक राजनेता के बेटे, जो पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री खालिदा जिया के दल से सम्बद्ध है से जुड़े लव जिहाद के मामले में जाकिर नाइक को नामजद किया है। इसी मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी द्वारा पाकिस्तान के भी दो कट्टरपंथी प्रचारकों को नामजद किया गया है।

हाल ही में, इस फरार इस्लामिक उपदेशक ने एक वीडियो वीडियो अपलोड किया था। जिसमें उसने भारत के समुदाय विशेष से आईएएस/आईपीएस की नौकरियों में जाने के अपील की थी ताकि वे इस्लाम की रक्षा के लिए पर्याप्त मजबूत हो सकें।

गौरतलब है कि इससे पहले भारत सरकार ने चीन के सैकड़ों मोबाइल ऐप बैन कर दिए हैं। जिससे चीन भारी नुकसान के कारण बौखलाया हुआ है।

सरकार की स्पष्ट सोच है, जिन्हें सरकार नहीं चाहिए उन पर नहीं बल्कि वंचितों के लिए संसाधन का उपयोग करना चाहिए: PM मोदी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। संबोधन के दौरान उन्होंने हाल ही में किसानों के लिए पारित किए गए विधेयकों से होने वाले सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विपक्ष की आलोचना करते हुए इस बात की ओर भी इशारा किया कि पहले किस तरह किसानों के साथ अत्याचार होता था। 

इसके अलावा उन्होंने संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं से निवेदन किया कि वह किसानों के पास जाएँ और उन्हें नए विधेयक से होने वाले लाभ की जानकारी दें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “एक राष्ट्र, समाज के रूप में भारत को बेहतर बनाने के लिए दीन दयाल जी का योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला है।”

किसानों पर अब तक हुए अत्याचार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा, “आजादी के अनेक दशकों तक किसान और श्रमिक के नाम पर खूब नारे लगे, बड़े-बड़े घोषणा पत्र लिखे गए, लेकिन समय की कसौटी ने​ सिद्ध कर दिया है कि वो सारी बातें कितनी खोखली थीं, सिर्फ नारें थे। देश अब इन बातों को भली भाँति जानता है। किसानों को ऐसे कानूनों में उलझाकर रखा गया।” 

“जिसके कारण वो अपनी ही उपज को, अपने मन मुताबिक बेच भी नहीं सकता था। नतीजा ये हुआ कि उपज बढ़ने के बावजूद किसानों की आमदनी उतनी नहीं बढ़ी। हाँ, उन पर कर्ज जरूर बढ़ता गया। किसानों से जिन्होंने हमेशा झूठ बोला है वो लोग इन दिनों अपने राजनीतिक स्वार्थ की वजह से किसानों के कंधे पर बंदूक फोड़ रहे हैं। किसानों को भ्रमित करने में लगे हैं, ये लोग अफवाहें फैला रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “हमारी सरकार इस मामले में हमेशा से स्पष्ट रही है कि ऐसे लोगों के जीवन में हस्तक्षेप नहीं करना है, जिन्हें सरकार की ज़रूरत नहीं है। सरकार को अपने संसाधनों का उपयोग वंचित और हाशिए पर मौजूद लोगों के लिए करना चाहिए।”

इसके अलावा उन्होंने किसानों से कई अन्य पहलुओं पर भी अपना विचार रखा। देश के सामान्य वर्ग को जितनी बार पार्टी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी उतनी बार हम अपने देशव्यापी संपर्क से लोगों की सेवा में जुट गए। चाहे भाजपा की केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, उसका प्रयास हमेशा से यही रहा है कि समाज के हर वर्ग से आने वाले नागरिक को बराबर अवसर मिले। 

भाजपा के हर कार्यकर्ता की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह हर किसान को इस विधेयक के बारे में सरल भाषा में समझाए। जिससे किसान इस विधेयक से होने वाले फायदे समझ पाएँ। 

यूपीए सरकार ने 5 साल के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड के ज़रिए किसानों को लगभग 20 लाख करोड़ रूपए का कर्ज़ दिया था। वहीं भाजपा सरकार ने 5 सालों में किसानों को 35 लाख करोड़ रूपए का कर्ज़ दिया।  

एनडीए सरकार की शुरू से कोशिश रही है कि ज़्यादा से ज्यादा किसान भाइयों को बैंकिंग की सुविधा मिले। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 10 करोड़ किसानों को 1 लाख करोड़ रूपए दिए जा चुके हैं।    

हमारे सामने कई बड़े लक्ष्य हैं, 130 करोड़ की आबादी वाले देश के लोगों को बेहतर जीवनशैली देना। इस संबंध में जितने प्रयास लगातार हो रहे हैं, वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे दिव्य पुरुषों के आशीर्वाद का नतीजा है। 

दीनदयाल जी ही थे, जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति, समाजनीति, राजनीति सभी पहलुओं पर भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात मुखरता से कही थी।

ऐसे बहुत लोग बचे हैं जिन्होंने दीनदयाल को सुना, समझा और उनके साथ काम किया हो। उनकी स्मृतियाँ और उनका मार्गदर्शन हमेशा प्रेरणा देता है और ऊर्जा का अनुभव कराता है।