संसद में किसानों के हितों को लेकर किसानों का सर्वकालिक हितैषी वर्ग एकबार फिर सत्ता पक्ष का विरोध कर रहा है। आज का यह विपक्ष, जो कि एक लम्बे समय तक भारत की सत्ता, किसान, युवा का भाग्यविधाता बना रहा, आज फिरसे किसानों के साथ खड़ा नजर आ रहा है। इसका कहना है कि यह कानून किसान विरोधी हैं। लेकिन यदि यह कानून किसान विरोधी हैं तो फिर विपक्ष परेशान क्यों है?
वास्तव में, यदि सत्ता पक्ष कोई भी गलत फैसला लेता है तो इसका प्रत्यक्ष प्रभाव जनता पर ही पड़ता है। लेकिन विपक्ष हर बार केंद्र सरकार की छवि की खातिर मतदाताओं और सत्ता के बीच सत्ता का शुभचिंतक बनकर वकील की भूमिका निभाने के लिए तत्पर नजर आता है।
विपक्ष ने यह ‘कूटनीति’ साल 2015 में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक से शुरू कर दी थी। विपक्ष को तो चाहिए कि वह जितना हो सके केंद्र सरकार की छवि खराब होने दे। विपक्ष को तो सरकार की हर खराब नीति का इन्तजार करते हुए उसे सहमति देनी चाहिए ताकि सरकार की छवि चुपके से खराब होती रहे।
विपक्ष जमकर हो जाने दे लोकतंत्र की हत्या, फासिज़्म का आतंक, पितृसत्ता का नंगा नाच, मनुवाद का उत्कर्ष, इन्टोलेरेंस चली जाए चरम पर.. इस इन्तजार में कि एक दिन जब वो सत्ता में आएँगे तो किसानों के खेतों में सुनहरे टायल्स लगवाएँगे, ताकि किसानों और उनके हितों के बीच मिट्टी न आ सके। और तब तक मारीच की तरह भेष बदलकर जनता को सत्ता के खिलाफ बरगलाता रहे, जब तक जनता इस मारीच रूपी विपक्ष को धोखे से असली तीर मारकर चित नहीं कर देती।
विपक्ष को चाहिए कि सत्ता ऐसे दर्जनों विधेयक रोज लेकर आए, जो कभी किसान विरोधी हो तो कभी युवा विरोधी हों, चाहे वह फैसला फासिस्ट हो, चाहे एनार्किस्ट हो। और जब सरकार के इन फैसलों के परिणाम (दुष्परिणाम) विपक्ष के मन मुताबिक़ आने शुरू हों तो जनता में सरकार के प्रति खूब आक्रोश पैदा हो। जनता सरकार के इन कानूनों से जमकर कुपित हो और अगले चुनाव में जनता हँसी – ख़ुशी विपक्ष को सत्ता सौंप दे।
यह विपक्ष का बड़प्पन ही है कि केंद्र सरकार की इमेज के लिए सदन में खुद लड़ रहा है, दंगा कर रहा है, माइक तोड़ रहा है…संसद में विशेषाधिकारों के बीच गुंडागर्दी और बाहर गाँधीगर्दी कर रहा है और सरकार के बजाए लोगों के बीच अपनी ही इमेज खराब कर रहा है। ऊपरवाला ऐसा विपक्ष डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर ने ‘इलेवन चिनपिंग’ तक को दे।
लेकिन मानो इस विपक्ष की बुद्धि नेहरू के नमक में ऑक्सीकृत होकर घुल चुकी है। यह है कि सत्ता पक्ष की छवि खराब होने ही नहीं देता और फिर कयामत के दिन EVM का रवीश रोना रोता है।
उत्तर प्रदेश में माफिया घोषित किए गए पूर्व सांसद अतीक अहमद की बेनामी सम्पत्तियों को योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एक-एक कर के जमींदोज किया जा रहा है। अब तक उसकी अवैध सम्पत्तियों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा था लेकिन अब इसके लिए डायनामाइट से विस्फोट का सहारा लिया जाएगा। पिछले 2 सप्ताह में प्रयागराज में अतीक अहमद की 11 सम्पत्तियों को ध्वस्त किया जा चुका है।
साथ ही अतीक अहमद की 10 सम्पत्तियों को सीज कर के जब्त भी कर लिया गया है। अब प्रशासन उसकी कुछ इमारतों को डायनामाइट लगा कर बारूद के जरिए ध्वस्त करेगा। इसके लिए तैयारियाँ चालू हैं। उसकी करोड़ों की इमारतों को धूल में मिलाने के लिए डायनामाइट का सहारा लिया जाएगा। इस बात की तैयारी की जा रही है कि इससे आसपास के लोगों को कोई परेशानी न हो और दूसरों की सम्पत्तियों को कोई नुकसान न पहुँचे।
इसके लिए विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई है। उनकी निगरानी में ही इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। प्रयागराज में तमाम जगहों पर अतीक अहमद और उसके परिवार के लोगों की काफी अवैध जमीनें हैं। प्रयागराज से 20 किलोमीटर दूर अंदावा में उसकी 4 बीघा जमीन है। यहाँ 10,000 स्क्वायर मीटर के क्षेत्र में अतीक अहमद ने कोल्ड स्टोरेज बनवा रखे हैं। ये 5 मंजिला कोल्ड स्टोरेज चार हिस्सों में बनाया गया है।
बताया जाता है कि न सिर्फ प्रयागराज बल्कि आसपास के कई जिलों में यही सबसे बड़ा कोल्ड स्टोरेज है। इसे अतीक अहमद और उसके परिजनों का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है क्योंकि इस कोल्ड स्टोरेज की कीमत करोड़ों में है और इसके किराए से हर महीने उन लोगों को लाखों रुपए की आमदनी होती है। ‘एबीपी न्यूज़’ की खबर के अनुसार, ये भूमि अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन के नाम पर रजिस्टर्ड है।
इसके निर्माण के लिए विकास प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। बिना नक़्शे के बने इस कोल्ड स्टोरेज को हाल ही में अवैध घोषित कर के इसे ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए थे। बुलडोजर के इस्तेमाल के बावजूद कई दिनों में इसका 10% हिस्सा भी नहीं गिर पाया है, जिसके बाद अब इसके लिए नई रणनीति बनाई गई है। अब रिमोट के माध्यम से इसे डायनामाइट से मिट्टी के ढेर में बदल दिया जाएगा।
इसके लिए पूरे इलाक़े को खाली कराया जाएगा क्योंकि इसके आसपास कोई नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्र में कुछ दिनों पहले एक इमारत को इसी तरीके से जमींदोज किया गया था, इसीलिए उस कार्य को अंजाम देने वाले विशेषज्ञों से संपर्क साधा गया है। यूपी में ये एक तरह का पहला मौका होगा। बुलडोजर से ज्यादा समय लगेगा, इसीलिए ये रणनीति कारगर होगी। सीएम योगी राज्य में माफियाओं के जाल को ख़त्म करने के मामले में सख्त हैं।
उधर मऊ से भी खबर आई थी कि पूर्व सांसद मुख़्तार अंसारी पर कार्रवाई लगातार जारी है और उसकी व उसके गुर्गों की संपत्ति को एक-एक कर जब्त किया जा रहा है। उसके गिरोह IS-191 के लिए काम करने वाले करीबियों पर मऊ जनपद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक उसकी 25 वाहनों को सीज किया जा चुका है। सभी सीज किए वाहनों की कीमत 4.29 करोड़ रुपए बताई गई है। मऊ में हो रही इस कार्रवाई से हिस्ट्रीशीटर नेता की कमर टूट गई है।
उत्तर प्रदेश में एक दर्जा प्राप्त मंत्री को ही जान से मार डालने की धमकी मिली है। बीज विकास निगम के उपाध्यक्ष और दर्जा प्राप्त मंत्री राजेश्वर सिंह को निगम के ही सहायक भंडार अधिकारी द्वारा धमकी दिए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि अधिकारी शकील अहमद ने राजेश्वर सिंह को धमकाया कि उनका भी हश्र हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी जैसा ही होगा। बता दें कि कमलेश तिवारी की कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी।
बख्शी का तालाब थाने में मंत्री राजेश्वर सिंह ने शकील अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। ये घटना शनिवार (सितम्बर 19, 2020) की है, जब मंत्री बीकेटी क्षेत्र में स्थित बीज निगम के गोदाम का निरीक्षण करने पहुँचे हुए थे। राजेश्वर सिंह का कहना है कि जब से उन्हें जिम्मेदारी मिली है, तब से वो लगातार निरीक्षण के लिए आते हैं। इसी क्रम में वो बीकेटी संयंत्र में भी गए थे। शकील अहमद वहाँ 23 सालों से तैनात हैं।
मंत्री ने बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने सहायक भण्डारण अधिकारी शकील अहमद को गोदाम से अनुपस्थित पाया। परियोजना अधिकारी एके राव ने 8 बार फोन कर के शकील अहमद से बात की और उन्हें उपस्थित होने को कहा। मंत्री ढाई घंटे तक वहाँ रहे लेकिन शकील अहमद लगातार बहानेबाजी करते रहे। वो कभी खुद के ऑफिस में होने तो कभी रास्ते में होने की बात कर रहे थे। बाद में उन्होंने गाड़ी पंक्चर होने का बहाना बनाया।
इसके बाद मंत्री राजेश्वर सिंह ने खुद शकील अहमद से बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त अधिकारी फोन पर ही उनके साथ गाली-गलौज पर उतर आया। उसने धमकाते हुए कहा, “ज्यादा भंडार व माल की जाँच के चक्कर में पड़ोगे तो तुम्हें जान से मारवा दूँगा।” उसने जाँच-पड़ताल बंद करने की धमकी देते हुए मंत्री से कहा कि वो उसका कुछ भी नहीं उखाड़ पाएँगे। इसके बाद उसने धमकाया कि राजेश्वर सिंह का वही हश्र होगा, जो लखनऊ में कमलेश तिवारी का हुआ था।
सरकारी कर्मचारी शकील अहमद दर्जा प्राप्त मंत्री को धमका रहा है कि ज्यादा छानबीन करोगे तो तुम्हारा हाल भी कमलेश तिवारी जैसा कर देंगे। UP: दर्जा प्राप्त मंत्री राजेश्वर सिंह को धमकी, अधिकारी बोला- जो हश्र कमलेश तिवारी का हुआ वही तुम्हारा होगा https://t.co/whGx6zdqYh
मंत्री ने जानकारी दी है कि अभी तक के निरीक्षण में भंडार में 56 करोड़ रुपए के घोटाले की बात सामने आई है। शकील अहमद के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, 506 और 507 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
बीकेटी थाने की पुलिस का कहना है कि जाँच के बाद उसकी गिरफ़्तारी हो सकती है। ‘सुदर्शन न्यूज़’ ने इसे अपने अभियान से जोड़ कर देखते हुए जानकारी दी कि इसकी फाइल सीएम योगी के पास भेज दी गई है और इस मामले में 2 अधिकारी निलंबित हुए हैं।
जून 2020 में इसी तरह से जब पत्रकार अमीश देवगन ने अपने शो में ख्वाजा गरीब नवाज के लिए अनजाने में ‘आक्रांता’ शब्द का प्रयोग कर दिया था तो इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पे असामाजिक तत्वों द्वारा हिंदूवादी नेता का हश्र याद दिलाकर बताया जा रहा था कि पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ बोलकर एक गलती कमलेश तिवारी ने भी की थी। इससे पहले भी कई अन्य लोगों को कमलेश तिवारी का नाम लेकर धमकाया जा चुका है।
मुस्लिम समूह या समूहों द्वारा जब भी कुछ ऐसा किए जाने की खबर आती है, जो लिबरल गैंग को पसंद नहीं आता – तो फैक्ट-चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाला ‘ऑल्ट न्यूज़ (AltNews)’ तुरंत सक्रिय हो जाता है। ऑल्ट न्यूज यह दिखाने लगता है कि अरे वो मुस्लिम थोड़े हैं, वो तो संघ का हिस्सा हैं।
यहाँ सवाल उठता है कि क्या अगर मुस्लिम समुदाय के लोग पीएम मोदी का समर्थन करते हैं या राम मंदिर पर ख़ुशी जताते हैं तो वो मुस्लिम नहीं रहे? AltNews तो यही कहता है। पीएम मोदी का जन्मदिन मनाने वाले मुस्लिम प्रोपेगेंडा पोर्टल AltNews के हिसाब से मुस्लिम नहीं है।
लिबरल गैंग की ओर से जिस तरह से कंगना रनौत और पायल घोष का महिला होने का सर्टिफिकेट कैंसल कर दिया गया है, ठीक उसी तरह AltNews मुस्लिमों के मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट कैन्सल करने में देर नहीं लगाता है। और तो और, इसे फैक्ट-चेक के नाम पर परोस भी देता है, अगर उन्होंने कभी भी कुछ ऐसी चीज का समर्थन किया हो – जो पीएम मोदी या भाजपा द्वारा किया गया है या मीडिया गिरोह के एजेंडे के खिलाफ जाता है।
AltNews में ऐसी ख़बरों को लिखने वाली पत्रकार का नाम पूजा चौधरी है, जो वहाँ सीनियर एडिटर हैं और आजकल अनुराग कश्यप का समर्थन करने में लगी हुई हैं। यहाँ हम ऐसी 4 ख़बरों को दिखा कर बताएँगे कि कैसे उनके द्वारा उन लोगों को मुस्लिम मानने से इनकार किया जा रहा है, जिन्होंने पीएम मोदी का समर्थन किया है। मुस्लिमों को मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट बाँटने वाले AltNews की कारस्तानियों की एक एक बानगी भर है।
गुरुवार (सितम्बर 17, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 70वाँ जन्मदिवस था और उस मौके पर निजामुद्दीन मरकज की इमारत के बाहर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इकट्ठा होकर उनके जन्मदिवस को मनाया। उस दौरान मौलाना सुहैब अंसारी ने कहा कि पिछले 6 वर्षों में पीएम मोदी ने कभी जाति-मजहब की बात न कर के 130 करोड़ भारतीयों की ही सिर्फ बात की है। मौलाना द्वारा पीएम मोदी का जन्मदिन मनाने का वीडियो भी वायरल हुआ।
मुस्लिम महिलाओं ने मनाया पीएम मोदी का जन्मदिन, AltNews ने रद्द किया सर्टिफिकेट
वीडियो वायरल होने के बाद AltNews तुरंत एक खबर के साथ आया। उसने ANI पर इस खबर को प्रकशित करने के लिए निशाना साधा। साथ ही उसने ‘याहू न्यूज़’ और ‘फाइनेंसियल टाइम्स’ की भी इस खबर को प्रकाशित करने के लिए आलोचना की।
AltNews ने उन लोगों को इसीलिए मुस्लिम मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि वो भी ‘भारतीय आवाम पार्टी’ का हिस्सा थे और उस पार्टी ने कभी RSS के साथ मंच साझा किया था और वो पार्टी पीएम मोदी का समर्थन करती है।
मुस्लिम महिलाओं ने राम मंदिर का किया समर्थन, AltNews ने फैलाया प्रोपेगेंडा
इस कथित फैक्ट-चेक में दावा किया गया कि हैदराबाद के मौलाना आज़ाद नेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर फिरोज बख्त अहमद ने भले ही पीएम मोदी को ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाला बताते हुए उनकी बड़ाई की हो लेकिन उनकी बात इसीलिए नहीं मानी जाएगी क्योंकि वो पहले से ही पीएम मोदी के समर्थक रहे हैं। चूँकि वो संघ से जुड़े ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ के लिए लेख लिखते हैं, इसलिए फैक्ट-चेक पोर्टल के लिए वो मुस्लिम नहीं हैं।
मुस्लिमों ने केक काट कर मनाई बकरीद, फिर चला फैक्ट-चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा
इसी तरह कुछ मुस्लिम महिलाओं ने ‘कसम खुदा की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएँगे’ का नारा देते हुए अयोध्या में राम मंदिर का समर्थन किया था। ये खबर नवम्बर 2018 में मेरठ से आई थी। यहाँ भी AltNews ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाली दोनों महिलाओं के ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ और ‘राष्ट्रीय एकता मिशन’ से जुड़े होने की बात करते हुए उनका मुस्लिम होना ही रद्द कर दिया। चूँकि इन महिलाओं ने भाजपा का समर्थन किया था, इसलिए AltNews इन्हें मुस्लिम नहीं मानता?
AltNews की कारस्तानियों का नमूना
इसी तरह लखनऊ में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा केक काट कर बकरीद मनाने की बात सामने आई। बता दें कि बकरीद पर कई लोग जीवहत्या न करने की बात करते हैं क्योंकि उस दिन लाखों जानवरों को काटा जाता है। यहाँ भी प्रोपेगेंडा पोर्टल ने दावा कर दिया कि मीडिया पोर्टल ऐसा दिखाना चाह रहे हैं कि लखनऊ में सारे मुस्लिमों ने ऐसा किया, जबकि सच्चाई ये नहीं है। कारण- इनमें से कुछ ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ से जुड़े थे।
So if Muslims are associated with the RSS, they cease to be Muslims? Must they be necessarily called RSS-Muslims or Sanghi-muslims? Why no objection to farmers associated with CPI being called just farmers? Or to students associated with left parties being called just students? pic.twitter.com/ei9n0tcDFb
इन घटनाओं से पता चलता है कि फैक्ट-चेक के नाम पर ‘वो तो पहले से ही भाजपा समर्थक हैं’ और ‘उनका संगठन तो संघ से जुड़ा हुआ है’ लिख कर मुस्लिमों के मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट रद्द किया जा सकता है- अगर उन्होंने पीएम मोदी का जन्मदिन मनाया हो, बकरीद पर शाकाहार को बढ़ावा दिया हो और राम मंदिर का समर्थन किया हो। ऐसा करने पर उन्हें मुस्लिम नहीं लिखा जाना चाहिए, ये AltNews के फैक्ट-चेक का सार है।
ज्ञात हो कि इस पोर्टल का संस्थापक ज़ुबैर खुद एक बच्ची की प्रताड़ना के मामले में आरोपित है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। बाद में उसे कोर्ट से राहत मिली। इस मामले में ट्विटर को भी बाल आयोग ने नोटिस भेजा था।
अयोध्या में राम जन्मभूमि के हक में फैसला आने के बाद मथुरा में श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के लिए आवाज उठने लगी है। ऐसे में हिंदू आर्मी नामक संगठन ने भी कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन का कुछ दिन पहले ऐलान किया था।
हिंदू आर्मी ने पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी थी। इसमें वह सबको सोमवार को मथुरा पहुँचने की बात कह रहे थे। हालाँकि, इससे पहले ही रविवार की देर रात इस संगठन से जुड़े 22 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
मथुरा के आस-पास पोस्टर चिपका कर यह संगठन आंदोलन को 11 बजे से शुरू करने का ऐलान कर रहा था और हिंदुत्व समूह के सभी समर्थकों से वहाँ पहुँचने की अपील कर रहा था। द टेलीग्राफ ने इस आंदोलन को साल 2022 के चुनावों में भाजपा के एजेंडा से जोड़कर बताया है।
मथुरा के एसपी उदय शंकर ने बताया:
“स्थानीय प्रशासन की अनुमति के बिना, रविवार शाम को बड़ी संख्या में हिंदू सेना के सदस्य मंदिर के पास इकट्ठे होने लगे। वे आपत्तिजनक गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश कर रहे थे। हमने संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए उनमें से 22 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया है।”
इसके अलावा उन्होंने बताया कि इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। अब वहाँ कोई भी आंदोलन नहीं किया जा सकता। गिरफ्तार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही इनके ख़िलाफ़ शांति भंग करने के लिए चालान किया जा रहा है।
बता दें कि हिंदू आर्मी चीफ मनीष यादव और लखनऊ महानगर के अध्यक्ष अस्करन सिंह ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर आंदोलन की शुरुआत करने का आह्वान किया था। सोमवार सुबह 11 बजे सभी को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बुलाया गया था। मगर, प्रशासन से बिना मंजूरी के किए जा रहे आंदोलन को लेकर पुलिस सुबह से अलर्ट थी। मनीष यादव का कहना है कि उन्होंने इस आंदोलन के लिए अनुमति माँगी थी लेकिन मथुरा प्रशासन ने उन्हें अनसुना कर दिया।
उनका कहना है कि वह कृष्ण जन्मभूमि के पास से इस्लामी ढाँचे को हटवाकर चाहते हैं कि वह जमीन उन लोगों को (कृष्ण जन्मभूमि के नाम) सौंप दी जाए। बता दें, कोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद और शादी ईदगाह को लेकर मामले स्थानीय कोर्ट में पेंडिंग हैं। मगर, अयोध्या में राम जन्मभूमि पर फैसला आने के बाद से इस माँग ने फिर जोर पकड़ा है। हिंदू संगठन मथुरा और वाराणसी में भी जमीन वापस पाने की माँग कर रहे हैं।
वामपंथी शासन वाले चीन ने नेपाल की सीमा में घुस कर उसकी जमीन पर कब्जा करने का सिलसिला तेज कर दिया है। नेपाल की जमीन पर चीन द्वारा 9 इमारतें खड़ी किए जाने की बात सामने आ रही है। ताज़ा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये इलाका नेपाल के कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है। शिकायत मिलने के बाद ‘चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (CDO)’ चिरंजीवी गिरी के नेतृत्व में नेपाली अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया।
उनके असिस्टेंट दत्ता राज हमल ने जानकारी दी कि सीडीओ वहाँ 2 दिन का प्रवास करेंगे और चीनी पक्ष से बातचीत करने के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपेंगे। ‘नेपाल 24 Hours’ की खबर के अनुसार, सीडीओ की टीम में नेपाल पुलिस, नेपाली सेना, जाँच एजेंसी के अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। जहाँ चीन ने कब्ज़ा किया है, वो भूमि पहाड़ी क्षेत्र में पड़ती है, जहाँ न तो सड़कें हैं और न ही वहाँ से टेलीफोन से सम्पर्क साधा जा सकता है।
इस मामले में नेपाल और चीन के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। हालाँकि, नेपाली मीडिया के काठमांडू में स्थित सूत्रों का कहना है कि ये एक असामान्य घटना है क्योंकि चीन ने नेपाल की जमीन पर इतनी संख्या में इमारतें खड़ी कर ली हैं। अव्वल तो ये कि नेपाली अधिकारी महीनों तक इस बात से अनजान रहे। इस मामले में नेपाल के बॉर्डर पेट्रोलिंग बल पर भी संदेह जताया जा रहा है, जो इस पर काफी दिनों से चुप है।
विपक्ष सवाल पूछ रहा है कि इतने दिनों से नेपाल सरकार ने इस पर बयान क्यों नहीं दिया? नेपाल में स्थित चीन के दूतावास ने भी इस पर चुप्पी साधी हुई है। नेपाल में ये इमारतें क्यों बनाई गई हैं, इसका कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। सीडीओ गिरी भी जब वहाँ पहुँचे, तो उन्हें चीन के कब्जे वाली जमीन पर नहीं जाने दिया गया और न ही उन्हें तस्वीरें लेने की अनुमति दी गई। नेपाली टीम ने जल्दी-जल्दी में दूर से ही तस्वीरें ली और सिमिकोट लौट आए।
Another case of #China annexing #Nepal‘s territory.
नेपाल की उस जाँच टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर ‘नेपाली 24 Hours’ को बताया कि चीन ने नेपाल की सीमा में 2 किलोमीटर भीतर तक घुसपैठ की है, पिलर संख्या-12 से भी आगे बढ़ कर भूमि कब्जाई है। वहीं पिलर संख्या-11 का तो कोई अता-पता ही नहीं है कि वो कहाँ गायब हो गया। कहा जा रहा है कि वहाँ अवैध चीनी निर्माण 2010 में ही शुरू हो गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वो कई वर्षों से उस तरफ जाने से डरते हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने नेपाली जाँच टीम को बताया कि चीन के लोग अवैध रूप से कब्जाई हुई जमीन के आसपास किसी स्थानीय व्यक्ति को फटकने तक नहीं देते। इसीलिए, स्थानीय लोग अब उधर जाने की कोशिश भी नहीं करते हैं। चीन और नेपाल के विदेश मंत्रालय की चुप्पी पर वहाँ असंतोष है। कई नेपाली अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं।
ज्ञात हो कि हाल ही में नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी ने यूनिफाइड नेपाल नेशनल फ्रंट के साथ हाथ मिलाकर ग्रेटर नेपाल के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान में भारतीय शहरों जैसे देहरादून और नैनीताल को नेपाल का होने का दावा किया है। अपने अवैध दावे में भारतीय शहर उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार और सिक्किम को भी अपने ‘ग्रेटर नेपाल’ अभियान में नेपाल का हिस्सा बताया है।
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगे के एक आरोपित ने तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। सोमवार (सितम्बर 21, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दिल्ली की एक अदालत में पेश होते हुए गुलफिशा फातिमा ने ये आरोप लगाए। गुलफिशा फातिमा दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों की साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद है। वो MBA ग्रेजुएट हैं। उसने पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया।
कोर्ट द्वारा सभी आरोपितों को उसके समक्ष पेश होने को कहा था, जिसके बाद ये सुनवाई शुरू हुई। दिल्ली पुलिस द्वारा चार्जशीट पेश किए जाने के बाद से ये सुनवाई चल रही है। दिल्ली दंगे की आरोपित गुलफिशा फातिमा ने दावा किया कि उसे जब से जेल में लाया गया है, तभी से वो वहाँ भेदभाव का सामना कर रही है। साथ ही दावा किया कि वहाँ उसे ‘शिक्षित आतंकी’ कहा जाता है। एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावल के समक्ष उसने ये बातें कहीं।
अब इस मामले की अग्नि सुनवाई अक्टूबर 3 को होगी। गुलफिशा फातिमा ने धमकी दी थी वो जेल में खुद को नुकसान पहुँचा देती हैं तो इसके लिए सिर्फ जेल प्रशासन ही जिम्मेदार होगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपित के वकीलों को चार्जशीट की एक प्रति दी जाए। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिन्दू-विरोधी दंगा ममले में 17,000 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, जिसमें 15 सीएए विरोधी दंगाइयों को आरोपित बनाया गया है।
“Facing Discrimination, Communal Slur And Mental Harassment By The Jail Staff “: Student Activist Gulfisha Fatima Arrested In Delhi Riot Case Tells Court https://t.co/mCX3xTRvdI
इसमें ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ के एक्टिविस खालिद सैफई, कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, युवा राजद की नेता मीरान हैदर, और ‘पिंजरा तोड़’ की गुलफिशा फातिमा, सफूरा जरगर, नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को आरोपित बनाया गया है। इनके अलावा उमर खालिद, शरजील इमाम, दानिश, परवेज, इलियास और फैजल खान को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनका इस चार्जशीट में नाम नहीं है।
आरोपितों के खिलाफ आईपीसी और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। उधर एक अन्य आरोपित शादाब अहमद ने कोर्ट में याचिका दायर कर के आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे धोखे में रख कर हस्ताक्षर ले लिया, जिसे कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया। जस्टिस रावत ने आरोपित के वकील से कहा कि आपने फोन पर बात भी की थी – फिर भी उसने उस दौरान ये बातें क्यों नहीं कही?
आरोपित ने कहा कि 24-26 अगस्त के दौरान जब वो पुलिस की हिरासत में था, तब पुलिस ने उससे विभिन्न कागजातों पर ही हस्ताक्षर करा लिए। उस दौरान वो जेल में ही क्वारंटाइन था और उसे 2 मिनट ही फोन पर बात कराया गया, ऐसा उसने दावा किया है। उसने दावा किया कि उस दौरान उसे इन दस्तावेजों के बारे में कुछ पता नहीं था और बाद में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात करते हुए उसे ये पता चला कि उनमें क्या था।
अभिनेत्री पायल घोष ने मशहूर निर्देशक अनुराग कश्यप पर यौन शोषण मामले में एफआईआर करवा दी है। यह खबर इंडिया टीवी ने कुछ समय पहले दी है। इससे पहले खबर थी कि एक्ट्रेस अपनी शिकायत दर्ज करवाने अपने वकील के साथ ओशिवारा थाने पहुँची थीं मगर उनकी शिकायत वहाँ दर्ज नहीं हुई थी।
पायल घोष के वकील ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि थाने में महिला अधिकारी मौजूद न होने के कारण शिकायत नहीं हो पाई। इसके अलावा थाने का क्षेत्राधिकार भी तय नहीं था क्योंकि घटना वर्सोवा थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई थी। उनके वकील नितिन सतपूते ने यह भी बताया था कि वह आज दोपहर (कुछ खबरों में मंगलवार तक) तक अपनी शिकायत दर्ज करवा देंगे। इसके अलावा NCW के समक्ष भी शिकायत करेंगे।
नितिन सतपुते ने कहा कि पायल घोष के साथ साल 2014 में छेड़छाड़ की गई और अनुराग कश्यप ने घर पर बुरा व्यवहार किया। ऐक्ट्रेस ने पहले शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें धमकी दी गई थी। उन पर दबाव डाला गया था कि अगर शिकायत दर्ज करोगी तो बहिष्कार कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि एक ओर जहाँ यह मामला दिन पर दिन तूल पकड़ता जा रहा है वहीं अनुराग कश्यप ने कई ट्वीट करके इन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, “क्या बात है, इतना समय ले लिया मुझे चुप करवाने की कोशिश में,चलो कोई नहीं। मुझे चुप कराते कराते इतना झूठ बोल गए कि औरत होते हुए दूसरी औरतों को भी संग घसीट लिया। थोड़ी तो मर्यादा रखिए मैडम। बस यही कहूँगा कि जो भी आरोप हैं आपके सब बेबुनियाद हैं।”
So who will decide which complaint is genuine & which is not?Should it depend on the person against whom the complaint is?Shouldn’t all complaint be investigated properly before we decide on who is right and who is wrong? Women too should take legal route and not only name&shame https://t.co/ljowQLC2m4
उनकी वकील प्रियंका खिमाणी ने भी बयान जारी करते हुए कहा, “मेरे क्लाइंट अनुराग कश्यप को यौन उत्पीड़न के उन झूठे आरोपों को मानसिक आघात पहुँचा है। ये सारे आरोप झूठे हैं और बुरी भावना से लगाए गए हैं। बहुत दुखद है कि मीटू जैसे ज़रूरी सामाजिक मूवमेंट को हथियार बनाकर किसी के चरित्र पर आघात करने की कोशिश की गई है। इस तरह के झूठे आरोप, मी टू से जुड़े उन पीड़ितों के लिए आघात है जो सच में ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुज़रे हैं।”
इसके अलावा अनुराग कश्यप की पूर्व पत्नियों ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अनुराग कश्यप को अपना समर्थन दिया है। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्विटर पर इस मामले पर सवाल पूछा कि शिकायत वास्तविक है, इसका निर्णय कौन लेगा, कौन नहीं? क्या यह इस पर निर्भर करता है कि किसके ख़िलाफ़ शिकायत है? क्या सही व गलत पर निर्णय लेने से पहले हर शिकायत की जाँच सही से नहीं होनी चाहिए? महिलाओं को भी कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए न कि केवल नाम बदनाम करना चाहिए।
यहाँ बता दें, रेखा शर्मा का यह ट्वीट राहुल ईस्वर के ट्वीट पर है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया है, “कल को यह सब आपके साथ, आपके पिता, भाई और बेटे के साथ हो सकता है। कोई पुलिस में जाने के बजाय मीडिया में आरोप लगा सकता है।”
Yes. One should make a formal complaint. और आपने तो दो दिन पहले कह ही दिया था कि शिकायत भेजिए। पता नहीं शिकायत पहुँची कि नहीं https://t.co/UmsESIUsTs
रेखा शर्मा के इस ट्वीट पर विनोद कापड़ी का रिप्लाई आया। उन्होंने लिखा, “हाँ। किसी को भी आधिकारिक रूप से शिकायत करनी चाहिए। और आपने तो दो दिन पहले कह दिया था कि शिकायत भेजिए। पता नहीं शिकायत पहुँची की नहीं” जिस पर रेखा शर्मा ने जवाब दिया कि अभी तक नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर अपने सम्बोधन में कहा कि आज UN ‘विश्वास के संकट’ से जूझ रहा है और बिना सुधारों के इसका समाधान नहीं किया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि विश्व को आज एक व्यापक सुधारों वाले बहुपक्षीय ढाँचे की ज़रूरत है, जो आज की वास्तविकता के हिसाब से हो, सभी हितधारकों को आवाज़ दे, समसामयिक चुनौतियों के समाधान की ओर प्रयास करे और जनहित में काम करे।
बता दें कि भारत ने UN की सुरक्षा परिषद में चुने हुए अस्थायी प्रतिनिधि के रूप में एक सीट प्राप्त करने में कामयाबी पाई है और जनवरी 1, 2021 को उसका कार्यकाल शुरू होगा, जो 2 वर्षों का होगा। इसीलिए, पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा UN में व्यापक सुधारों की बात करना और बहुपक्षीय ढाँचे को नया रूप रूप देने की पैरवी करना महत्वपूर्ण है। पीएम ने स्पष्ट कहा कि हम पुराने ढाँचे को लेकर आज की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (सितम्बर 21, 2020) को संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली की एक उच्च-स्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए उक्त बातें कहीं, जो UN की 75वीं वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित की गई थी। इस अवसर पर 193 सदस्यीय जनरल असेंबली ने आगे के समय को ध्यान में रखते हुए एक राजनीतिक घोषणापत्र को स्वीकृत किया, जिसमें आतंकवाद से लड़ाई के लिए पूरे तंत्र को मजबूत करने की बात की गई है।
इसमें बहुपक्षीय ढाँचे में सुधार, समावेशी विकास और कोरोना वायरस जैसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारियों का खाका तैयार किया गया है। पीएम मोदी ने UN में सुधारों की बात करते हुए कहा कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में ये आवश्यक है। साथ ही आश्वासन दिया कि भारत इस दिशा में सभी देशों के साथ मिल कर काम करेगा। भारत कहता आ रहा है कि 1945 में गठित UN सुरक्षा परिषद आज की चुनौतियों का सामना करने में अक्षम है और इसमें भी सुधार की ज़रूरत है।
अमेरिका, यूके, फ़्रांस और रूस सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे कामकाज के तौर-तरीके तेज होने चाहिए और साथ ही आजकल की परस्थितियों के अनुकूल भी। उन्होंने सेक्रेटरी-जनरल में चल रहे सुधारों का समर्थन करते हुए UN के सभी 3 बड़े संगठनों में बदलाव की अपेक्षा की। उन्होंने इकोनॉमिक और सोशल काउन्सिल में भी सुधारों की बात कर के उन्हें नई ऊर्जा देने को कहा।
पीएम मोदी ने UN की 75वीं वर्षगाँठ पर दिया सम्बोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से 75 साल पहले जब दुनिया युद्ध की विभीषिका से जूझ रही थी कि आशा की नई किरण आई। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार पूरी दुनिया के देशों की एक संस्था का गठन हुआ। उन्होंने बताया कि भारत UN संस्थापक चार्टर का हस्ताक्षरकर्ता है और उसने वो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की विचारधारा में विश्वास रखता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है – इसी सोच के साथ भारत ने इस महान कार्य का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि UN की वजह से आज दुनिया एक बेहतर जगह है। उन्होंने भारत की प्रबल भागीदारी वाले UN ‘पीसकीपिंग मिशन’ के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों सहित उन सभी लोगों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले काम करते हुए बलिदान दिया। 71 में से 50 ‘पीसकीपिंग मिशन’ में भारत ने 2 लाख सैनिकों का सहयोग दिया है। पीएम मोदी ने आधुनिक डिजिटल तकनीक का लाभ उठाने, क्लाइमेट चेंज का समाधान करने और भेदभाव मिटाने की बात की।
UN के तजा सुधारों वाले डिक्लेरेशन में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ने, पृथ्वी को बचाने, अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली के हिसाब से न्याय दिलाने, महिलाओं और बच्चियों को केंद्र में रखने, विश्वास बढ़ाने, डिजिटल सहयोग मजबूत करने, UN को अपग्रेड करने और परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय फंडिंग को मजबूती देने युवाओं की आवाज़ सुनने और उनके साथ काम करने पर बल दिया गया।
सुदर्शन न्यूज़ के कार्यक्रम ‘UPSC जिहाद’ के प्रसारण पर रोक लगाने की माँग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस कार्यक्रम में ज़कात फ़ाउंडेशन पर आरोप लगाए जाने से जिनलोगों को परेशानी हैं वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर उपन्यास पढ़ सकते हैं या फिर टीवी बंद कर सकते हैं।
अभियोजन पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह बात कही। अभियोजन पक्ष कहना था कि ‘UPSC जिहाद’ कार्यक्रम में सुदर्शन न्यूज़ के एडिटर इन चीफ़ सुरेश चव्हाणके ने जो कहा है वह हेट स्पीच की श्रेणी में आता है। अभियोजन पक्ष के वकील ने यह आरोप भी लगाया था कि जो तस्वीरें उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, उसे कार्यक्रम में गलत रूप में पेश कर दिखाया गया है। इतना ही नहीं कार्यक्रम में उन्हें जिहादी षड्यंत्र रचने वाले की तरह दिखाया गया है।
दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी ने दर्शकों पर वह कार्यक्रम देखने का दबाव नहीं बनाया है। जिन लोगों को उस कार्यक्रम से किसी भी तरह की समस्या है, वह उससे किनारा कर सकते हैं। न्यायालय को केवल एक सूरत में इस केस की सुनवाई में समय खर्च करना चाहिए, अगर वह ज़कात फ़ाउंडेशन पर लगाए गए आरोपों से संबंधित है। इसके अलावा मामले की सुनवाई का कोई और आधार नहीं होना चाहिए।
इसके पहले 3 न्यायाधीशों की पीठ जिसमें न्यायाधीश चंद्रचूड़ के अलावा इन्दू मल्होत्रा और केएम जोसफ शामिल हैं, ने कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश दिया था। न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने टोपी, दाढ़ी, हरे रंग और बैकग्राउंड में आन के चित्रण को लेकर आपत्ति जताई थी।
सुदर्शन चैनल का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता ने कहा, कार्यक्रम में ज़कात फ़ाउंडेशन को मिलने वाली फंडिंग पर सवाल उठाया गया था। जिस फंडिंग के ज़रिए परीक्षाओं की कोचिंग की आर्थिक मदद की जाती है। इसके अलावा सुरेश चव्हाणके ने कहा था, “देश हित के लिए इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा होना बहुत ज़रूरी है कि ज़कात फ़ाउंडेशन जैसी संस्थाओं को फंडिंग कैसे मिलती है?” उन्होंने यह भी कहा कि पूरे 4 कार्यक्रम की शृंखला में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक समुदाय के किसी व्यक्ति को UPSC का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
आज इस मामले में ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की थी। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई थी।
‘हस्तक्षेप याचिका’ में कहा गया है, “सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”