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D मतलब दीपिका पादुकोण ही, तलब करने की तैयारी में एनसीबी, मैनेजर को पहले ही भेज चुकी है समन

बॉलीवुड में ड्रग्स रैकेट को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ड्रग चैट जिन लोगों के बीच बात हो रही थी, उसमें D का मतलब दीपिका पादुकोण ही है। बताया जा रहा है कि श्रद्धा कपूर और सारा अली खान के साथ ही दीपिका को भी एनसीबी इसी हफ्ते समन भेज सकती है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एनसीबी ड्रग्स ऐंगल की जाँच कर रही है। इससे पहले खबर आई थी कि दीपिका की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने समन भेजा है। करिश्मा से मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को पूछताछ हो सकती है।

इससे पहले इस मामले में रिया चक्रवर्ती, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आ चुका है। खबर है कि सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 67 के तहत इसी हफ्ते समन भेजा जाएगा। इनके साथ सिमोन खंबाटा और रकुलप्रीत का नाम भी आ रहा है। 

रिया चक्रवर्ती ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया था कि उन्होंने सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुलप्रीत सिंह और सुशांत के साथ लोनावला में पार्टी की थी। NCB ने सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व बिजनेस मैनेजर श्रुति मोदी और टैलेंट मैनेजर जया शाह से भी पूछताछ की है।

जया शाह के कई एक्ट्रेस के साथ चैट सामने आए हैं, जिसमें वो ड्रग्स की बात कर रही हैं। दीपिका पादुकोण के मैनेजर करिश्मा प्रकाश का जया शाह के साथ एक फोटो सामने आया है। हालाँकि फिलहाल ये साफ नहीं हो पाया है कि करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने क्यों तलब किया है।

वहीं कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का भी खुलासा किया था। इसमें बॉलीवुड के कई सितारे जाँच के घेरे में आ सकते हैं। इस चैट में बॉलीवुड के 5 टॉप ऐक्टर्स के नाम सामने आए हैं। चैट के दौरान जो नाम दिख रहे हैं वह सब एक अक्षर (जैसे- N,J,S,D,K) में हैं। इस चैट में ड्रग्स के लेन-देन की बात हुई है। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। अब बताया जा रहा है कि ड्रग चैट की D यानी दीपिका पादुकोण हैं और जिस K से ‘माल’ यानी ड्रग्स मॉंग रही हैं, वह असल में करिश्मा हैं।

ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती 8 सितंबर को गिरफ्तार हुई थीं। उसके बाद से वे मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। 2 बार उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। रिया पर आरोप है कि वे सुशांत के लिए ड्रग्स का प्रबंध करती थीं। दावा है कि रिया ने करीब 25 बॉलीवुड सेलेब्स का नाम एनसीबी के सामने लिया है, जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। सुशांत केस में ड्रग्स कनेक्शन का खुलासा रिया के व्हाट्सएप चैट सामने आने के बाद हुआ था।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को मुंबई के बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। सुशांत की मौत के मामले में सीबीआई, ईडी और एनसीबी जैसी एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। वहीं, इस केस में बड़ा खुलासा हुआ है कि सुशांत ने मौत से पाँच दिन पहले यानी 9 जून को अपनी बहन मीतू को फोन कर अपने डर को लेकर बात की थी। एक्टर की बातों से लगा कि उनकी जान खतरे में हैं। सुशांत ने कहा था, “मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे।”

सुशांत को यह चिंता तब हुई जब रिया चक्रवर्ती 8 जून को उनका घर छोड़कर और लैपटॉप, कैमरा, हार्ड ड्राइव जैसी चीजें अपने साथ लेकर चली गईं थीं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत सिंह राजपूत ने मौत से 5 दिन पहले अपनी बहन मीतू सिंह को 9 जून को एसओएस (SOS) किया।

सुशांत ने अपनी बहन से कहा, “ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे।” रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुशांत ने रिया चक्रवर्ती से भी संपर्क करने की कोशिश की, जो उन्हें 8 जून को छोड़कर चली गई थीं और ब्लॉक कर दिया था।

खबर के अनुसार इस मैसेज में सुशांत ने पहले यह मेंशन किया था कि उन्होंने रिया को भी कई बार कॉल करने की कोशिश की थी। लेकिन रिया ने उनका कॉल रिसीव नहीं किया। इसमें लिखा था, “मेरा उससे बात करना बहुत जरूरी है, क्योंकि मुझे डर है कि वे लोग मुझे किसी चीज में फँसा देंगे।”

सुशांत सिंह राजपूत के द्वारा अपनी बहन मीतू से कॉल के दौरान की गईं बातों से सवाल उठता है कि आखिर उनको किन लोगों से डर था और उन्हें किन चीजों में फँसाए जाने का डर था। सुशांत ने अपनी जान के खतरे को लेकर भी आशंका जताई थी।

पिछले दिनों सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी ने सीबीआई के सामने कबूल किया है कि सुशांत, दिशा सालियान की मौत के बारे में सुनकर डर गए थे। सिद्धार्थ पिठानी ने कहा था, “सुशांत दिशा की मौत की खबर सुनकर बेहोश हो गए थे। जब होश में आए तो उन्होंने कहा था कि वे लोग मुझे मार डालेंगे। बाद में उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की भी बात कही थी। इतना ही नहीं रिया को लगातार फोन भी लगाते रहे थे, क्योंकि वे उनका लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और कैमरा ले गईं थीं और सबके पासवर्ड जानती थीं।”

गौरतलब है कि सिद्धार्थ पिठानी ने जाँच टीम को पूछताछ के दौरान बताया था कि 8 जून को रिया ने फ्लैट छोड़ने से पहले 8 हार्ड ड्राइव नष्ट करवाई थी। सिद्धार्थ ने बताया था कि हार्ड ड्राइव के लिए बाकायदा आईटी प्रोफेशनल को बुलवाया गया था। लेकिन यह साफ नहीं किया कि उसे बुलाया किसने था। पिठानी के अनुसार, इस दौरान सुशांत और रिया दोनों कमरे में मौजूद थे और सब कुछ देख रहे थे। उनके अलावा डोमेस्टिक हेल्पर दीपेश सावंत और बावर्ची नीरज भी कमरे में थे।

ऑपइंडिया का असर: ‘UN लिंक्ड’ संगठन से प्रशंसा-पत्र मिलने वाला ट्वीट TMC ने डिलीट किया

20 अगस्त को 2020 को हमने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के बारे में एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके तहत हमने ‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़े एक जापान आधारित गैर-लाभकारी संगठन से कोरोना वायरस महामारी के बीच ममता सरकार के काम को सराहने और राज्य मंत्री निर्मल माजी को प्रशंसा-पत्र भेजने की पड़ताल की थी। इस ‘अच्छी खबर’ को सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया गया था।  

ऑपइंडिया की स्टोरी के बाद, TMC ने पश्चिम बंगाल सरकार को मिले प्रशंसा-पत्र वाला ट्वीट चुपके से डिलीट कर दिया। हालाँकि, डॉ. निर्मल माजी के ट्विटर टाइमलाइन पर अभी भी यह पत्र उपलब्ध है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने UNWPA को ‘UN से जुड़े एनजीओ’ के रूप में प्रकाशित किया और यही दावा कई अन्य मीडिया संस्थानों द्वारा भी किया गया। यह पत्र TMC और ममता बनर्जी के समर्थकों द्वारा बड़े स्तर पर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा था। हालाँकि हमने अपनी पड़ताल के समय ऐसा कोई प्रमाण नहीं पाया।

इस संस्था ने खुद को ‘यूनाइटेड नेशन’ से जुड़ा हुआ बताया था, जबकि जिस यूनाइटेड नेशंस की प्रशंसा का कोई व्यक्ति या देश या फिर राज्य इन्तजार कर सकता है, वह ‘यूनाइटेड नेशंस’ (United Nations) है, ना कि ‘यूनाइटेड नेशन (United Nation)!’

सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ को कोरोना वायरस महामारी में अच्छे काम के लिए ‘प्रमाण-पत्र’ मिला था। हालाँकि, यह पत्र जापान के संगठन द्वारा नहीं, बल्कि इसके भारत के प्रतिनिधि यानी, महामहिम पिंकी दत्ता उर्फ ​​प्रिया दत्ता, जो मोदी विरोधी और ममता बनर्जी की बड़ी समर्थक हैं, द्वारा बेहद खराब भाषा में लिख कर दिया गया था। इसके अलावा, यह संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़ा नहीं है, लेकिन उसके जैसा प्रतीत जरूर होता है।

जब ऑपइंडिया ने इन सम्बन्ध में UNWPA से सम्पर्क कर पूछा कि क्या यूनाइटेड नेशन ने वास्तव में ममता बनर्जी सरकार को पत्र लिखकर उन्हें सम्मानित किया, तो उन्होंने बताया कि मीडिया में चलाई जा रही इस इस प्रकार की बातें एकदम फर्जी हैं और ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। दो घंटे बाद, संगठन ने फिर से ऑपइंडिया को जवाब दिया। इस बार यह दावा करते हुए लिखा कि हालाँकि, उन्होंने (जापान कार्यालय) पत्र नहीं लिखा था, लेकिन सम्भवतः भारत स्थित कार्यालय, जो कि एचई पिंकी दत्ता उर्फ ​​प्रिया दत्ता द्वारा चलाया जाता है, ने जारी किया हो।

यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड और आउटलुक सहित कई समाचार पोर्टलों और कई अन्य लोगों द्वारा कवर की गई। पीटीआई का दावा था कि ममता बनर्जी के ‘साम्राज्य’ की प्रशंसा करने वाला यह ‘एनजीओ’ एक गैर-लाभकारी संगठन (नॉन प्रोफिटेबल आर्गेनाइजेशन) है, जो संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के नागरिक विभाग के साथ पंजीकृत है।

इस NGO की वेबसाइट पर भी कोई लिंक, रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ ही UN से इसकी वैधता सम्बन्धी किसी भी प्रकार का कोई दस्तावेज मौजूद नहीं था। इसके अलावा इस संस्था की वेबसाइट पर इसके सोशल मीडिया एकाउंट्स की आधे से ज्यादा लिंक काम नहीं कर रही थे या फिर वो अकाउंट मौजूद ही नहीं थे।

इन सब चीजों को देखकर मन में संदेह होना चाहिए था, सवाल उठना चाहिए था, लेकिन ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सराहना करने की उत्सुकता में मीडिया ने इसे नजरअंदाज कर दिया था।

‘क्या तुम्हारे पास माल है’: सामने आई बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस के बीच हुई ड्रग चैट

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जाँच में कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स फँसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में हाल ही में सारा अली खान और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आया है। वहीं सोमवार (सितंबर 21, 2020) को कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का खुलासा भी किया।

इन ड्रग चैट्स में जिन बॉलीवुड सेलेब्स के नाम सामने आए हैं, उनके नाम D, K, N, J, S से शुरू होते हैं। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। ये सभी ड्रग्स को लेकर आपस में व्हाट्सएप के जरिए बात कर रहे हैं। रिपब्लिक टीवी ने जिन दो टॉप एक्ट्रेसेस के बीच ड्रग्स चैट दिखाई है, उनके नाम D और K से शुरू होते हैं।

बताया जा रहा है कि इनमें से D अक्षर वाली एक्ट्रेस वर्तमान की टॉप एक्ट्रेस है, वहीं K अक्षर वाली एक्ट्रेस 90 के जमाने की टॉप एक्ट्रेस है। दोनों के बीच हुई ये बातचीत 28 अक्टूबर 2017 की बताई जा रही है।

D ने K से पूछा क्या तुम्हारे पास ‘माल’ है?

सुबह 10.03 बजे- (+91-992——-) D ने लिखा- K क्या तुम्हारे पास ‘माल’ है? 

सुबह 10.05 बजे- (+91-961——-) K ने लिखा- है, लेकिन घर पर है। मैं अभी बांद्रा में हूँ। 

सुबह 10.05 बजे- K ने लिखा- अगर तुम्हें चाहिए तो मैं अमित से बोल देती हूँ। 

सुबह 10.07 बजे- D ने लिखा- हाँ, जरूर। 

सुबह 10.08 बजे- K ने लिखा- अमित के पास है, वो ला रहा है। 

सुबह 10.12 बजे- D ने लिखा- ‘हैश’ (Hash) ला रहा है ना? 

सुबह 10.12 बजे- D ने फिर लिखा- ‘वीड’ नहीं चाहिए। 

सुबह 10.14 बजे- K ने लिखा- तुम कोको के यहाँ कितनी बजे आ रही हो? 

सुबह 10.15 बजे- D ने लिखा- 11.30 से 12 के बीच।

सुबह 10.15 बजे- D ने फिर से लिखा- शैल वहाँ कब तक रहेगी? 

K ने लिखा- मुझे लगता है उसने 11.30 तक का कहा है, क्योंकि उसे 12 बजे कहीं और पहुँचना है।

अन्य चैट में N,J और S से हुई बातें

वहीं टाइम्स नाऊ के हाथ लगी पर एक अन्य चैट में N, J और S अक्षर से शुरू होने वाली एक्ट्रेस के बीच बातचीत हुई है। 

जिसमें N ने J से कहा- तुमने मुझसे अच्छी MD (ड्रग्स) देने का वादा किया था। हम लोग पार्टी करेंगे। 

जवाब में J ने S से कहा- तुम मुझे पेडलर कैसे बना सकती हो। मैं CBD ऑयल भेज रही हूँ।

सामने आई ये चैट हंगामा मचा देने वाली है। सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जाँच कर रही सीबीआई की पड़ताल के इधर ड्रग्स मामले में काफी कुछ है जो सामने आ रहा है। इससे पहले जया साहा और रिया चक्रवर्ती की लीक हुई व्हाट्सएप चैट से ये राज खुला था कि दोनों ड्रग्स के मामले में न सिर्फ लिप्त है, बल्कि जया साहा ने ही रिया को कुछ बूँदे चाय या कॉफी के साथ सुशांत को पिलाने की बात भी कही थी। जिससे 30-40 मिनट में एक्टर पर इसके असर होने का इशारा भी दिया था।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को अभिनेता की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी और उनकी टैलेंट मैनेजर जया साहा को पूछताछ के लिए बुलाया। इनसे पूछताछ के माध्यम से बॉलीवुड में ड्रग्स के कई पहलू सामने आ सकते हैं। जया साहा के फोन से प्राप्त आँकड़ों से पता चलता है कि बॉलीवुड सितारे उन्हें CBD तेल और ड्रग्स की आपूर्ति करने के लिए कहते थे।

सेना में महिलाओं को नया मोर्चा: नौसेना के युद्धपोत पर पहली बार तैनाती, राफेल भी उड़ाएँगी

भारतीय वायु सेना बहुत जल्द राफेल स्‍क्‍वाड्रन में महिला पायलट की तैनाती करने वाली है। फ़िलहाल महिला पायलट की अंबाला में ‘कनवर्ज़न ट्रेनिंग’ जारी है ताकि वे जल्द राफेल उड़ाने के लिए तैयार हो जाएँ। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी आज (21 सितंबर 2020) दो महिला अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनात किया गया है। इन्हें हेलीकॉप्टर स्ट्रीम में ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है।

इंडिया टुडे में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ जो महिला पायलट पहले MiG-21 लड़ाकू विमान उड़ाती थी, उन्हें अब फुल फाइटर प्रक्षिक्षण कोर्स में शामिल किया गया है। बहुत जल्द ही वह 17 स्क्वाड्रन में सक्रिय भूमिका निभाती हुई नज़र आएँगी। ख़बरों में इस बात की पुष्टि की गई है कि महिला और पुरुष दोनों के लिए प्रशिक्षण नियमावली एक जैसी होगी। चाहे महिला हो या पुरुष, उन्हें लड़ाकू विमान बदलते समय कनवर्ज़न ट्रेनिंग के हर चरण से गुज़रना होगा। फ़िलहाल भारतीय वायु सेना में कुल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली 10 महिला पायलट हैं। 

इन महिला पायलटों ने अभी तक कई श्रेणी के लड़ाकू विमान उड़ाए हैं, जिसमें Su-30 MKI और MiG-29 मुख्य हैं। केंद्र सरकार ने इस संबंध में साल 2016 के दौरान ही अनुमति का आदेश जारी किया था। तत्कालीन राज्य रक्षा मंत्री सुभाष भामरे ने कहा था, “रणनीतिक आवश्यकताओं को मद्देनज़र रखते हुए महिला पायलटों को भारतीय वायु सेना में विमान उड़ाने संबंधी गतिविधियों के लिए शामिल किया जा रहा है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी होती रहेगी।”       

वहीं दूसरी तरफ दो महिला अधिकारियों सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी और सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह को ‘ऑब्जर्वर’ का पद दिया गया। इस पद के ज़रिए महिला अधिकारियों को नौसेना में ‘वॉरशिप फ्रंटलाइन’ की अगुवाई करने का मौक़ा मिलेगा। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता (कमांडर) विवेक अग्रवाल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा “बहुत जल्द दोनों महिला अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी निभाती हुई नज़र आएँगी। यह वॉरशिप से बतौर एयरबोर्न कॉम्बटेंट काम करने वाला महिला अधिकारियों का पहला दस्ता है। पहले महिला अधिकारियों का विंग एयरक्राफ़्ट में प्रवेश प्रतिबंधित था, खासकर जो तट से उड़ान भरते और उस पर उतरते हैं।”

सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह और लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी भारतीय नौसेना के कुल 17 अधिकारियों के समूह का हिस्सा होंगी। इसमें 4 महिलाएँ और इंडियन कोस्ट गार्ड के कुल 3 अधिकारी (रेगुलर बैच के 13 अधिकारी और शॉर्ट सर्विस कमीशन की कुल 4 महिला अधिकारी) शामिल होंगी। इन महिला अधिकारियों को आज आज यानी 21 सितंबर को आईएनएस कोच्चि में ‘विंग्स’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

₹1100 अरब सिर्फ एक साल में, दाऊद का Pak फाइनेंसर अल्ताफ ऐसे करता है आतंक और ड्रग तस्करों की फंडिंग

अमेरिका की फ़ाइनेंशियल क्राइम्स एन्फोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) ने एक बड़ा ख़ुलासा किया है। FinCEN ने दाऊद इब्राहिम के मुख्य फाइनेंसर और पाकिस्तानी मूल के अल्ताफ खनानी को 14 से 16 बिलियन डॉलर [103088 लाख करोड़ रुपए से लेकर 117819 लाख करोड़ रुपए तक (21 सितंबर 2020 के करेंसी एक्सचेंज की दर से)] की सालाना लॉन्ड्रिंग के मामले गिरफ्तार किया है। इन रुपयों की मदद से वह ड्रग कार्टेल, तालिबान, हिजबुल्लाह और अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों की फंडिंग करता था। 

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने इस मामले में सस्पीशियस एक्टिविटी रिपोर्ट (SARs) दायर की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हुई। FinCEN ने अपनी 20 पन्नों की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि आखिर कैसे खनानी मज़ाका जनरल ट्रेडिंग एलएलसी और 54 शेल कंपनियों (मास्को नेटवर्क) के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग करता था। इन कंपनियों की मदद से वह फंड्स रूस से अन्य देशों में यूरोपियन सिक्यॉरिटी मार्केट के रास्ते भेजता था।     

इस प्रक्रिया को आम तौर पर मिरर ट्रेडिंग भी कहते हैं। ट्रेडिंग की इस प्रक्रिया में एक व्यक्ति किसी अधिकार क्षेत्र में चीज़ें (सिक्यॉरिटी) खरीदता है और उन्हें दूसरे अधिकार क्षेत्र में बेचता है। इस प्रक्रिया में भले कोई आर्थिक लाभ नहीं है लेकिन फंड का स्रोत और अंतिम जगह ज़रूर छुपा सकता है।

इस प्रक्रिया में ऐसे कई लोग हैं, जो खनानी का साथ दे रहे हैं और वह कोई और नहीं पाकिस्तान में रहने वाले खनानी के रिश्तेदार हैं। उसे मार्च 2013 से अक्टूबर 2016 के बीच मास्को नेटवर्क से लगभग 49.78 मिलियन डॉलर मिले थे। 

उसकी पेरेंट ट्रेडिंग कंपनी मजाका जनरल ट्रेडिंग एलएलसी सिंगापुर की मिरर ट्रेडिंग कंपनी ‘आस्क ट्रेडिंग पीटीई’ की फंडिंग भी करती है। मिरर ट्रेड का पूरा लेन-देन न्यू यॉर्क के जेपी मॉर्गन चेज़ बैंक, सिंगापुर के यूनाइटेड ओवरसीज़ बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ोदा की दुबई शाखा की मदद से हुआ था।

इस मामले में उसके वकील मेल ब्लैक ने कहा था, “खनानी दोषी साबित हुए थे और उन्हें लंबे समय तक दंड दिया गया। इस दौरान उनके भाई की मृत्यु हुई, वह अपने परिवार से अलग हुए और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। उनकी माली हालत भी तब से बदतर है, जब से उन्हें ओएफएसी से प्रतिबंधित किया गया है और उनके खाते बंद किए गए हैं। वह पिछले 5 सालों में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हुए हैं। वह आगे चल कर क़ानून के अनुसार स्थायी जीवन जीना चाहते हैं।” 

खनानी ने 2009 में बनी नई दिल्ली स्थित रंगोली इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के साथ 10.65 मिलियन डॉलर का ट्रेड किया था। इस मामले में पूरा लेन-देन पंजाब नेशनल बैंक, सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, विजया बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, ओरिएण्टल बैंक ऑफ़ कॉमर्स और सहकारी बैंक की मदद से हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ 18 जून 2014 को पंजाब नेशनल बैंक की ज़रिए 1,36,254 डॉलर का ट्रेड हुआ था। 

ख़बरों की मानें तो 339.19 करोड़ रुपए के सेल्स रेवेन्यू (बिक्री मुनाफ़ा) के बावजूद रंगोली समूह को 74.87 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इतना कुछ होने के बाद कंपनी को फरवरी 2020 में विलफुल डिफॉल्टर की सूची में रखा गया था।

इलाहाबाद बैंक ने रंगोली को मार्च 2015 में टॉप-50 एनपीए की सूची में रखा था। पंजाब नेशनल बैंक ने भी 2016 से 2019 के बीच रंगोली की गिरवी संपत्ति की ‘ई-मॉर्गेज’ प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके अलावा सहकारी बैंक ने अक्टूबर 2019 में कंपनी की अचल संपत्ति की नीलामी का ऐलान किया था।   

ठीक इसी तरह की कार्रवाई यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने लोन वापस प्राप्त करने के लिए की थी। ख़बरों के मुताबिक़ बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र ने फरवरी 2020 में कंपनी को विलफुल डिफॉल्टर की सूची में रखा था।

इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए रंगोली कंपनी के एमडी ने कहा था, “तथाकथित रूप से साल 2013 से 2014 के बीच रंगोली इंटरनेशनल के ज़रिए हुए 70 लेन-देन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जिसका कोई डेटा ही मौजूद नहीं है। इस पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना विरोधाभास से कम नहीं होगा।”

इसके बाद उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक की मदद के ज़रिए खनानी की मिरर ट्रेडिंग कंपनी से मिले 1,36,254 मिलियन डॉलर वाले दावे को भी ख़ारिज कर दिया था। 

खनानी को साल 2015 में ओवरसीज लेन-देन के मामले में अमेरिका के हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2020 तक उसे मायामी की जेल में रखा गया था। खनानी और दाऊद के बीच संबंध अमेरिका के ऑफिस ऑफ़ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) की मदद से बना था, जब उसे नोटिस जारी किया गया था।

जारी किए गए नोटिस में साफ़ तौर पर लिखा था कि कैसे खनानी ने मनी लॉन्ड्रिंग आर्गेनाईजेशन (MLO) के ज़रिए आतंकवादी समूहों, ड्रग्स तस्कर और आपराधिक संगठनों की फंडिंग में मदद की। नोटिस में लिखा था,

“खनानी MLO और अल ज़रूनी का मुखिया अल्ताफ खनानी तालिबान के साथ लेन-देन के मामले में शामिल था। उसके लश्कर-ए-तैय्यबा, दाऊद इब्राहिम, अल कायदा और जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध थे।”

महाराष्ट्र के धुले से लेकर यूपी के कानपुर तक, किसान ऐसे कर रहे हैं कृषि बिलों का समर्थन

कृषि सुधार बिलों पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम का प्रोपेगेंडा छिपा नहीं है। किसानों के नाम पर सड़क से संसद तक हंगामा करने की कोशिशों के बीच इस बिल करे अलग-अलग हिस्सों के कृषकों का समर्थन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर महाराष्ट्र के धुले तक, किसानों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि वे सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। 

उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के एक किसान ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस मुद्दे पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के इस विधेयक का स्वागत करते हैं। लेकिन सरकार को किसानों के बारे में और सोचने की ज़रूरत है। बेशक सरकार का यह कदम किसानों के हित के लिए ही उठाया गया है और हम इसके लिए सरकार का समर्थन करते हैं। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि खरीद की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हो जाए। इसके अलावा सरकार को आने वाले समय में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसान आत्महत्या जैसे कदम न उठाए।”

इसके बाद किसान ने कहा, “फ़िलहाल जिस तरह के हालात हैं उसमें आधे से ज़्यादा मुनाफ़ा बिचौलियों को होता है। हम उम्मीद करते हैं कि कृषि सुधार विधेयक की मदद से इसे रोकने में मदद मिलेगी। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगर ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगती है तो आने वाले पीढ़ियाँ इस पेशे में आगे नहीं बढ़ेंगी। इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि सरकार के बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन हो। हमारा सरकार से एक और निवेदन है कि किसानों को कम से कम उनकी लागत का भुगतान किया जाए।” 

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अलावा महाराष्ट्र के धुले जिले में भी किसानों ने इस विधेयक का स्वागत किया। उनका कहना है कि हम सरकार के इस विधेयक को स्वीकार करते हैं, लेकिन सरकार को कई बातें सुनिश्चित करनी होंगी। जिसमें सबसे अहम है कि किसानों की आत्महत्या का आँकड़ा कम से कम किया जाए। यह पूरी तरह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अन्नदाता को ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा हो और उन्हें सशक्त बनाया जाए।    

रविवार (सितंबर 20, 2020) को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को उच्च सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया था

विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधार संबंधी विधेयकों को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया था। उन्होंने कहा था, “भारत के कृषि इतिहास में आज एक बड़ा दिन है। संसद में अहम विधेयकों के पारित होने पर मैं अपने परिश्रमी अन्नदाताओं को बधाई देता हूँ। यह न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे।”

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा था, “मैं पहले भी कहा चुका हूँ और एक बार फिर कहता हूँ: MSP की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। हम यहाँ अपने किसानों की सेवा के लिए हैं। हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे।”

रोहिणी सिंह, रबी में भी होता है धान: यह PM पर तंज कसने से नहीं, जमीन पर उतरने से पता चलता है

किसानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट क्या किया, लिबरल गैंग के कुछ पत्रकारों को लगा कि उन्हें पीएम मोदी को नीचा दिखाने का मौका मिल गया है। ताज़ा विवाद रबी और खरीफ फसलों को लेकर शुरू हुआ। पीएम मोदी पर कटाक्ष करने वाली पत्रकार का नाम रोहिणी सिंह हैं। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया है कि रबी में धान की फसल? इस पर चर्चा करने से पहले कुछ बातें जाननी ज़रूरी हैं।

भारत में अलग-अलग इलाक़ों की भौगोलिक परिस्थितियाँ भिन्न हैं और इस हिसाब से फसलों की बुआई-कटाई होती है। फसलों के लिए रबी और खरीफ सीजन के रूप में पूरे साल को विभाजित किया जाता है। इनके अलावा ‘समर क्रॉप्स’ के रूप में भी कहीं-कहीं अलग से फसलों को उपजाया जाता है। ध्यान रखें, रबी और खरीफ क्रॉप सीजंस के नाम हैं, जिसमें होने वाले फसलों को रबी क्रॉप्स और खरीफ क्रॉप्स कहते हैं।

रबी फसलों में सामान्यतः गेहूँ, जौं, चना, सरसो, मटर, मसूर और आलू की गिनती होती है। इसमें अधिकतर आपको दलहन और तिलहन मिलेंगे। वहीं खरीफ फसलों में धान, बाजरा, मक्का, कपास, ज्वार और गन्ना को लिया जाता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात ये है कि कुछ फसलें ऐसी भी होती हैं, जो रबी और खरीफ- दोनों ही सीजन में उगाई जाती हैं। जैसे, धान को ही ले लीजिए। दक्षिण के राज्यों में रबी सीजन में भी धान उगाया जाता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बड़े स्तर पर इसकी फसलें लहलहाती हैं।

अगर आप बिहार से पश्चिम बंगाल में ही घुसेंगे तो आपको धान की फसलों की समयावधि और उसकी टाइमिंग में फर्क मिल जाता है। ऐसा बारिश और मॉनसून को ध्यान में रख कर तय किया जाता है। जैसे 2017-18 के ही रबी रिपोर्ट कार्ड की बात करते हैं। उस साल 257.47 लाख हेक्टेयर में गेहूँ की फसल की गई थी। लेकिन, साथ ही 14.58 हेक्टेयर में धान की भी खेती की गई थी, जिसे हम ‘रबी राइस’ कहते हैं।

2018-19 में ये आँकड़ा क्रमशः 253.52 और 9.98 लाख हेक्टेयर था। सरकारी आँकड़े हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलावा तमिलनाडु में भी रबी सीजन में बड़े स्तर पर धान की खेती की जाती है। इसी तरह इस साल अक्टूबर-नवंबर में सरकार 75 लाख टन ‘रबी राइस’ के खरीद की योजना बना रही है। इसी तरह 2018-19 में सरकार ने 61 लाख टन ‘रबी राइस’ की खरीद की थी। इस बार उससे ज्यादा की खरीद की जाएगी।

अब वापस आते हैं नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने की रोहिणी सिंह की कोशिश पर। हाल ही में संसद के दोनों सदनों से सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े बिलों को पास कराया, जिससे किसानों को अपने उत्पाद सीधे प्राइवेट प्लेयर्स को बेचने की अनुमति होगी। साथ ही पुरानी व्यवस्था भी लागू रहेगी। एमएसपी से छेड़छाड़ नहीं होगी। लेकिन कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने किसानों को भड़काया और विरोध-प्रदर्शन चालू कर दिया।

इसी बीच पीएम मोदी ने हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में ट्वीट कर के किसानों को भ्रम से बचाते हुए सरकार का पक्ष रखा और उन्हें झाँसे में न आने की सलाह दी। पीएम मोदी ने ऐसी ही एक ट्वीट में लिखा कि इस साल कोरोना संक्रमण के दौरान भी रबी सीज़न में किसानों से गेहूँ की रिकॉर्ड खरीद की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि इस साल रबी में गेहूँ, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर, किसानों को 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपए MSP पर दिया गया है।

पीएम मोदी ने बताया कि ये राशि भी पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत से ज्यादा है। यहाँ रोहिणी सिंह ने ‘रबी’ और ‘धान’, इन दोनों शब्दों को पकड़ के बात का बतंगड़ बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने लिखा, “रबी की फसल में धान? फिर कहते हैं मेरी बात पर भरोसा करो।” साथ ही उन्होंने सिर पर हाथ रखे एक इमोजी भी डाली, जिससे लगे कि उन्हें कितनी ज्यादा जानकारी है और पीएम मोदी को कृषि के बारे में कुछ पता ही नहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कृषि से पुराना नाता है। गुजरात खुद एक कृषि प्रधान राज्यों में से एक है और वहाँ कृषि क्षेत्र की छवि बदलने के लिए उन्होंने काफी कुछ किया है। गुजरात की कृषि जीडीपी 2002 से लेकर 2014 तक प्रतिवर्ष 8% की दर से आगे बढ़ी। आपको पता है कि इस दौरान देश का औसत क्या रहा? 3.3%. ऐसे व्यक्ति को रोहिणी सिंह जैसे लोग रबी और खरीफ सिखाने चले हैं।

यहाँ दो और राज्यों की बात करनी ज़रूरी है, जहाँ रबी सीजन में धान का अच्छा-खासा उत्पादन होता है। वो राज्य हैं पश्चिम बंगाल और असम। दोनों ही राज्यों में 40-50 लाख टन ‘रबी राइस’ के उत्पादन का लक्ष्य रखा जाता है। लेकिन, हिंदी पट्टी के किसी इलाक़े में किसी 2-3 BHK फ्लैट में बैठ कर कृषि को लेकर ट्वीट करना आसान है लेकिन इन्हें ये पता होना चाहिए कि दुनिया इसके इतर भी है। दक्षिण है, उत्तर-पूर्व है।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी रबी के सीजन में धान की खेती होती है। रोहिणी सिंह के लिए ये कोई नई बात नहीं है। वो पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुकी हैं। पीएम मोदी द्वारा बोले-लिखे गए एक-एक शब्दों का इस्तेमाल उसे गलत साबित कर के नैरेटिव बनाने के लिए किया जाता है। अगर जबान फिसल जाए तब तो कहना ही क्या! वो ये नहीं समझते कि प्रधानमंत्री भी एक मनुष्य ही होता है।

रोहिणी सिंह वही हैं, जिन्होंने दीपक चौरसिया पर शाहीन बाग़ में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुए हमले को सही ठहराया था और उन्हें एक पत्रकार मानने तक से इनकार कर दिया था। रोहिणी सिंह के इसी ट्वीट का जवाब देते हुए पत्रकार दीपक चौरसिया ने लिखा था, “मैंने एक ग़रीब पृष्ठभूमि से आकर अपने दम पर पत्रकारिता की। मेरा कसूर सिर्फ़ इतना है कि मैं आप की तरह डिजाइनर पत्रकार नहीं हूँ! मेरा वित्त मंत्रालय में परिचय नीरा राडिया ने नहीं कराया! ना ही मैंने आज तक किसी सरकार से 3BHK फ़्लैट लेकर खबरें लिखी है!”

इसी तरह लॉकडाउन के दौरान पत्रकार रोहिणी सिंह ने दावा किया था कि सरकार ट्रेन से मजदूरों को घर पहुँचाने के लिए उनसे 50 रुपए अतिरिक्त ले रही है, ताकि उन्हें घर पहुँचाया जा सके। उन्होंने ‘पीएम केयर्स’ लिख कर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा था। जबकि सच्चाई ये थी कि यात्रियों को रेलवे को एक रुपया भी देने की ज़रूरत नहीं थी।

प्रशांत महासागर में अमेरिकी नौसैनिक बेस पर चीन के H-6 ने बरसाए बम? PLAAF ने जारी किया हमले का नकली Video

चीन ने प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए एक नकली वीडियो जारी किया है। इसमें चीनी वायु सेना के परमाणु सक्षम H-6 बॉम्बर्स को प्रशांत महासागर स्थित अमेरिकी नौसैनिक बेस गुआम पर एक बम गिराते दिखाया गया है।

यह वीडियो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) के वीबो अकाउंट पर शनिवार (सितंबर 19, 2020) को जारी किया गया। गुआम बेस एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का प्रमुख सैन्य ठिकाना है। 

चीन की वायु सेना ने 2 मिनट 15 सेकेंड का जो वीडियो जारी किया है, उसका टाइटल दिया है ‘The god of war H-6K goes on the attack!’ वीडियो में दिखाया गया है कि आधे रास्ते के बीच से, एक पायलट एक बटन दबाता है और एक समुद्र तटीय रनवे पर मिसाइल छोड़ देता है। एक सैटेलाइट पिक्चर दर्शाने की कोशिश की गई है, जो बिल्कुल एंडरसन के लेआउट जैसा दिखता है। ब्लास्ट के हवाई दृश्यों के बाद अचानक नाटकीय अंदाज में म्यूजिक आता है और जमीन हिलने लगती है। कुल मिलाकर बारीकी से देखने पर यह हॉलीवुड की किसी फिल्म के ट्रेलर की तरह दिखता है। 

PLAAF ने वीडियो के साथ एक संक्षिप्त विवरण में लिखा है, “हम मातृभूमि की हवाई सुरक्षा के रक्षक हैं; हमारे पास हमेशा मातृभूमि की आसमान में सुरक्षा का भरोसा और क्षमता है।”

वीडियो पर न तो चीन के रक्षा मंत्रालय और न ही अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया दी है। ताइवान की वायु सेना के अनुसार, H-6 ताइवान और उसके आसपास कई चीनी उड़ानों में शामिल रहा है। H-6K बॉम्बर का नवीनतम मॉडल है, जो 1950 के पुराने सोवियत TU-16 पर आधारित है।

सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज के एक रिसर्च फेलो कोलिन कोह का कहना है कि चीन ने इस वीडियो को एक खास मकसद से जारी किया है। चीन के इस वीडियो को जारी करने का उद्देश लंबी दूरी तक मार करने की उसकी क्षमताओं का प्रदर्शन करना है। इस वीडियो के जरिए चीन ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि वह ताइवान और साउथ चाइना सी में विवादों से दूर रहे।

नुसरत जहां की फोटो दिखा लुभा रहा था वीडियो चैट ऐप, TMC सांसद के कंप्लेन पर हरकत में आई पुलिस

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद व अभिनेत्री नुसरत जहां ने सोमवार को अपनी तस्वीर के गलत इस्तेमाल पर कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने यह शिकायत एक वीडियो चैट एप्लीकेशन के ख़िलाफ़ करवाई है। उनका कहना है कि एप्लीकेशन ने बिना उनकी रजामंदी के उनकी फोटो का इस्तेमाल किया।

सांसद नुसरत जहां ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर अनुज शर्मा को अपने ट्वीट में टैग करते हुए उस विज्ञापन का स्क्रीनशॉट शेयर किया और कानूनी कार्रवाई की माँग की।

उन्होंने लिखा, “यह बिलकुल अस्वीकार्य है। तस्वीर को बिना रजामंदी के इस्तेमाल किया गया। कोलकाता पुलिस की साइबर सेल से अनुरोध है कि वह इस पर गौर करें। मैं इस पर कानूनी रूप से कार्रवाई के लिए तैयार हूँ।”

इस शिकायत पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि साइबर सेल ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। बता दें जिस ऐप के विज्ञापन को देख कर नुसरत जहां भड़की हैं, उसका नाम fancy-u video chat App है। इसमें अभिनेत्री व सासंद की फोटो शेयर करते हुए लिखा गया है, “लॉकडाउन में घर पर बैठे बनाएँ नए दोस्त।” इसके अलावा उनकी फोटो पर लिखा है, “फाइंड आउट मोर अबाउट हर।”

गौरतलब है कि इस घटना से पहले भी नुसरत जहां अपनी एक फोटो के कारण चर्चा में कुछ दिन पहले ही आईं थी। उस तस्वीर में वह माँ दुर्गा जैसी वेशभूषा में दिख रही थीं। हालाँकि वो तस्वीर उन्होंने खुद ही शेयर की थी, मगर कट्टरपंथियों को उसे देख गुस्सा आ गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें उनकी उस तस्वीर के लिए बहुत घेरा गया और कई सवाल किए गए।

उस तस्वीर में उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। अपने केश खुले रखे थे और हाथ में त्रिशूल लेकर लोगों को महालया की शुभकामना दे रही थीं। इस तस्वीर को देख कट्टरपंथी उनसे सवाल करने लगे कि वह हिंदुओं जैसा आचरण करके इस्लाम का अपमान क्यों कर रही हैं। जब वह हिंदुओं की तरह रहती हैं तो उनका मजहब इस्लाम कैसे?

याद दिला दें, पिछले साल जून में निखिल जैन से शादी करने के बाद भी कट्टरपंथियों ने उन्हें घेरा था। उस समय कट्टरपंथियों ने उनकी खूब आलोचना की थी। उन्होंने जब दुर्गा पूजा में ढाक बजाया तब भी मामला बहुत गर्माया था। मजहबी ठेकेदारों ने इसे अपराध कहा था, जिनके जवाब में नुसरत ने कहा था कि वह बंगाल में पैदा हुई हैं और परंपरा और संस्कृति के हिसाब से सही काम कर रही हैं।