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कश्मीर उच्च न्यायालय के वकील बाबर कादरी को आतंकियों ने गोली से भूना: दो दिन पहले ही जताई थी हत्या की आशंका

जम्मू कश्मीर में आतंकी लगातार आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। गुरूवार को आतंकवादियों ने श्रीनगर में कश्मीर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता बाबर कादरी की गोली मार कर हत्या कर दी। खबरों के मुताबिक, वकील कादरी श्रीनगर के हवाल इलाके में थे, जब आतंकियों ने पॉइंट ब्लैंक रेंज से उनपर गोलियों की बौछार कर दी। जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद उन्हें फ़ौरन शेर-आई-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया था। स्थानीय समाचार एजेंसी जीएनएस ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. फारूक जान के हवाले से कहा कि बाबर कादरी को गोली लगी थी और अस्पताल में जब उन्हें लेकर आए थे तभी उनकी मौत हो चुकी थी।

बता दें, एक वकील होने के अलावा बाबर कादरी एक लेखक और एक टीवी पैनलिस्ट भी थे, जो नियमित रूप से टीवी समाचार चैनलों पर चर्चा में दिखाई देते थे।

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले कादरी ने आशंका व्यक्त की थी कि एजेंसियों के साथ काम करने का आरोप लगने के बाद उनकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने 2 दिन पहले एक मैसेज का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया था जहाँ शाह नजीर नामक एक व्यक्ति ने कहा था कि उन्हें एजेंसियों द्वारा प्रोजेक्ट किया जा रहा है, और इसीलिए उन्हें टीवी डिबेट में आने का चांस दिया गया था। बाबर कादरी ने संदेश का जवाब देते हुए कहा था कि वह एफआईआर दर्ज करने के लिए मैसेज का स्क्रीनशॉट साइबर सेल को भेजेंगे।

ट्विटर पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा था, “मैं राज्य पुलिस प्रशासन से इस शाह नजीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आग्रह करता हूँ, जिन्होंने मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया है कि मैं एजेंसियों के लिए काम करता हूँ। यह झूठा बयान मेरे जीवन के लिए खतरा बन सकता है।”

गौरतलब है कि कुछ साल पहले बाबर कादरी को कश्मीर बार एसोसिएशन ने निलंबित कर दिया था। वह वकीलों के क्लब ऑफ कश्मीर के अध्यक्ष थे। इस महीने की शुरुआत में बार एसोसिएशन ने निलंबन हटाने के उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। विकास पर टिप्पणी करते हुए क़ादरी ने कहा था, “जब मैंने ‘वकील क्लब’ का गठन किया, तो मुझ पर भारतीय एजेंसियों की इशारों पर नाचने का आरोप लगाया गया था और अब जब मैं एकता के लिए काम करता हूँ और उनसे जुड़ना चाहता हूँ तो मेरे लिए रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया है।”

बेंगलुरु दंगा मामले में NIA ने 30 जगहों पर की छापेमारी: मुख्य साजिशकर्ता सादिक अली गिरफ्तार, आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त

बेंगलुरु हिंसा मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने दंगे के मुख्य साजिशकर्ता सयैद सादिक़ अली को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें पिछले महीने डीजे हल्ली और केजी हल्ली क्षेत्रों में हुई हिंसा के संबंध में NIA ने बेंगलुरु के 30 स्थानों पर छापेमारी की थी।

NIA ने 44 वर्षीय सादिक अली के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, जानलेवा दंगा भड़काने के बाद सब ही सादिक पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। लगातार एजेंसी और स्थानीय पुलिस द्वारा उसकी खोजबीन जारी थी। 30 जगहों पर मारी गई छापेमारी को लेकर एनआईए ने बताया, तलाशी के दौरान एयरगन, छर्रों, तेज हथियार और लोहे की छड़ों को बरामद किया गया है। यह भी कहा कि छापों में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कुछ डिजिटल डिवाइस और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए।

गौरतलब है कि इससे पहले NIA ने अपने बयान में कहा था, “SDPI के राज्य सचिव मुजम्मिल पाशा ने पहले एक मीटिंग बुलाई थी और इसमें उसने PFI/SDPI के सदस्यों को भीड़ को भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उग्र भीड़ ने बेंगलुरु शहर के अंतर्गत आने वाले डीजे हल्ली, केजी हल्ली और पुलकेशी नगर इलाकों में दंगा भड़काया।”

NIA ने आगे मामले में यह भी कहा, कॉन्ग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के कावेल बारासंडा में 11 अगस्त को उनके भतीजे नवीन द्वारा फेसबुक पर अपलोड किए गए कथित अपमानजनक पोस्ट के बाद 1000 से अधिक लोग वहाँ पर हो गए थे। नवीन के फेसबुक पोस्ट ने कथित तौर पर ‘मजहब विशेष की धार्मिक भावनाओं का अपमान’ किया था।

वहीं पिछले दिनों यह रिपोर्ट भी सामने आई थी कि बेंगलुरु में हुए दंगे पूर्व नियोजित थे, जिसमें जानबूझकर कर हिंदुओं और उनके घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था। दंगों में सुरक्षित बचे लोगों में से एक का दावा था कि उन्हें उर्दू में चेतावनी देते हुए कहा गया था कि वे अपने घरों के अंदर चले जाएँ वरना वे मारे जाएँगे। दंगों के दौरान, खास मजहब की किसी भी कार जिसमें चाँद या HKGN (हज़रत ख्वाजा ग़रीब नवाज़) का प्रतीक लगा था, उसपर हमला नहीं किया गया। हमला करने से पहले दंगाइयों ने सड़क पर खड़ी कारों के कवर तक को उठाकर यह पता लगाने की कोशिश की थी कि कार किसकी थी।

उन्होंने कहा, “दंगाइयों ने खासकर उस जगह हमला किया था जहाँ सीसीटीवी नहीं लगे थे। इसका साफतौर यह मतलब हुआ कि दंगों में स्थानीय लोग शामिल थे, जिन्हें पहले से पता था कि सीसीटीवी कहाँ-कहाँ लगे है। दंगाइयों ने पहले से यह सुनिश्चित किया था कि केवल दूसरे धर्म वालों को ही निशाना बनाना है। मजहब विशेष की गाड़ियों को छोड़कर,दूसरे धर्म से संबंधित सभी वाहनों पर हमला किया गया और क्षतिग्रस्त किया गया था।”

संसद के इतिहास में सबसे उत्पादक रहा यह मानसून सत्र: 10 दिन में पास हुए 25 विधेयक, उत्पादकता रही 167%

कोरोना वायरस के कारण संसद का मानसून सत्र 10 दिन में ही खत्म कर दिया गया। लोकसभा और राज्यसभा भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले 14 सितंबर से 23 सितंबर तक बिना किसी साप्ताहिक छुट्टी के संसद में रोज कार्यवाही चली। इस बीच 25 बिल पास किए गए।

इन विधेयकों के पास होने के साथ ही 17वीं लोकसभा के दूसरे मानसून सत्र ने संसद में एक नया इतिहास रच दिया। बता दें, इस सत्र की उत्पादकता 167 फीसद रही। अब से पहले केवल 8 वीं लोकसभा के तीसरे मानसून सत्र की उत्पादकता 163 फीसदी पहुँची, जिसे आज तक रिकॉर्ड माना जाता था।

आइए बताते हैं कि इस सत्र में पास होने वाले ये बिल कौन-कौन से हैं व इन्हें कौन सी तारीख को पास किया गया?

14 सितबंर 2020:

लोकसभा के मानसून सेशन में आयुष मंत्रालय (Ayush Ministry) के दो बिल सर्वसम्मति से पास कर दिए गए। लोकसभा में नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी बिल 2020 और नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन बिल 2020 को पास कर दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आयुष मंत्री श्रीपद नायक की अनुपस्थिति में दोनों बिल निचले सदन में पेश किए थे।

15 सितंबर 2020

लोकसभा में द सैलरी एंड अलाउंस ऑफ मिनिस्टर्स अमेंडमेंट बिल- 2020 पास किया गया। इस बिल के अनुसार अब मंत्रियों व सांसदों के वेतन और भत्तों में 30 फीसदी की कटौती की जा सकती है।

16 सितंबर 2020

बैंकिंग रेगुलेशन बिल 2020, इस नए कानून के तहत अब देशभर के सहकारी बैंक आरबीआई की देखरेख में काम करेंगे। इस बिल में यह संशोधन जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए लाया गया है, ताकि पीएमसी बैंक घोटाला जैसे स्कैम से बचा जा सके।

केंद्र सरकार ने देश में co-operative banks की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति और घोटाला (Scam) के मामले सामने आने के बाद बैंकिंग रेगुलेशन ऐक्ट, 1949 में संशोधन का फैसला किया था।

17 सितंबर 2020

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020: इस विधेयक के तहत सरकार की योजना है कि एक फसल उत्पाद को लेकर ऐसा तंत्र विकसित हो जहाँ किसान मनचाहे स्थान पर फसल बेच सकें। इसके जरिए किसान अपनी फसल का सौदा सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य के लाइसेंसी व्यापारियों के साथ भी कर सकते हैं।

कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक में, किसानों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था का प्रावधान है। भुगतान सुनिश्चित करने हेतु प्रावधान है कि देय भुगतान राशि के उल्लेख सहित डिलीवरी रसीद उसी दिन किसानों को दी जाएँ। मूल्य के संबंध में व्यापारियों के साथ बातचीत करने के लिए किसानों को सशक्त बनाने हेतु प्रावधान है कि केंद्र सरकार, किसी भी केंद्रीय संगठन के माध्यम से, किसानों की उपज के लिए मूल्य जानकारी और मंडी आसूचना प्रणाली विकसित करेगी।

18 सितंबर 2020

इस संसद सत्र में विनियोग विधेयक (संख्या 3), विनियोग विधेयक (संख्या 4) भी पारित किए गए। विनियोग (संख्या 4) विधेयक, 2020 वित्त वर्ष 2020-21 की सेवाओं के लिए भारत की संचित निधि से कुछ और धन के भुगतान को अधिकृत करता है। वहीं विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2020 भारत की संचित निधि से 31 मार्च, 2017 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान कुछ सेवाओं पर खर्च राशि की पूर्ति के लिए धन के विनियोजन को अधिकृत करता है। ये राशि इन सेवाओं के लिए और उस वर्ष के लिए प्रदान की गई राशि के अतिरिक्त है।

19 सितंबर 2020

कराधान और अन्य कानून विधेयक 2020: इसमें विधेयक में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कानूनों में नियमों के अनुपालन संबंधी कुछ बदलाव किए गए हैं। विधेयक में आयकरदाताओं को पिछले वित्त वर्ष (2019- 20) की रिटर्न दाखिल करने के मामले में समयसीमा को बढ़ाया गया है।

इसके साथ ही स्थायी खाता संख्या (पैन) को आधार से जोड़ने की समयसीमा को भी बढ़ा दिया गया है। विधेयक में प्रधानमंत्री के आपात स्थिति नागरिक सहायता एवं राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) में दिए गए अनुदान पर कर लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है।

कंपनी (संशोधन) विधेयक, मॉनसून सत्र के छठे दिन लोकसभा में कंपनी संशोधन विधेयक 2020 भी पास हुआ। यह कंपनी अधिनियम में संशोधन कर तकनीकी और अन्य छोटी गलतियों को फौजदारी अपराध की श्रेणी से हटाकर दीवानी अपराध की श्रेणी में डालने, छोटी कंपनियों पर जुर्माना कम करने और उनके लिए कारोबार आसान बनाने के लिए पास हुआ।

20 सितंबर 2020

सत्र के एक हफ्ते बाद राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 को संक्षिप्त चर्चा के बाद मंजूरी मिली। इस विधेयक में गुजरात में एक राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।

इसी प्रकार राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 में गुजरात फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के रूप में उन्नयन करने का प्रस्ताव किया गया है।

इसके अलावा मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन) विधेयक, अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय नेटिंग विधेयक को भी इसी दिन मंजूरी मिली।

21 सितंबर 2020

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक; दि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (दूसरा संशोधन) विधेयक; महामारी रोग (संशोधन) विधेयक; फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक पास किए गए।

22 सितंबर 2020

सत्र के 9वें दिन कई विधेयकों को पारित किया गया। इनमें केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक; भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक; जम्मू और कश्मीर आधिकारिक भाषा बिल व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य की स्थिति कोड; औद्योगिक संबंध कोड; सामाजिक सुरक्षा कोड शामिल थे।

23 सितंबर 2020

महापत्तन प्राधिकरण विधेयक (The Major Port Authorities Bill) 2020 को मंजूरी दे दी जिसमें देश में बंदरगाहों के विनियमन, प्रचालन और योजना के लिए तथा महापत्तन प्राधिकरण के बोर्डों में ऐसे बंदरगाहों के प्रशासन, नियंत्रण और प्रबंधन के संबंध में प्रावधान हैं।

महिलाओं को समानता, फिक्स्ड टर्म रोजगार, रिस्किलिंग फंड सहित मोदी सरकार द्वारा श्रम कानून में सुधार के बाद उठ रहे 5 सवालों के जवाब

वर्तमान संसद सत्र में मोदी सरकार ने श्रम कानून सुधार के लिए तीन विधेयक राज्यसभा में पास कर दिए । इनके नाम- ‘व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कोड (OSH Code), औद्योगिक संबंध कोड (Industrial Relations Code), सामाजिक सुरक्षा कोड (Code on Social Security) हैं।

केंद्र सरकार ने कहा है कि 100 से ज्यादा राज्य और 40 से ज्यादा केंद्र के कानून हैं जो श्रम के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करते हैं जैसे औद्योगिक विवाद, कार्य करने की स्थिति, सामाजिक सुरक्षा और मजदूरी का संकल्प आदि। उन्होंने बताया कि श्रम पर बने दूसरे राष्ट्रीय आयोग (2002) ने मौजूदा कानूनों को पुराने प्रावधानओं और असंगत परिभाषा के साथ बहुत जटिल पाया, इसलिए इनमें सुधार लाने के लिए आयोग ने केंद्र से इस संबंध में सिफारिश की।

साल 2019 में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 29 कानून को खत्म करने के लिए 4 बिल बनाए। इनमें वेतन सुरक्षा संहिता साल 2019 में संसद से पास हो गई थी जबकि अन्य को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा गया। इसके बाद कमेटी ने तीनों विधेयकों पर अपनी रिपोर्ट जमा की और मोदी सरकार ने उन विधेयकों को नए बिल के साथ 19 सितंबर को रिप्लेस कर दिया और फिर उपरोक्त तीनों संहिताएँ भी पास हो गईं।

अब इन्हीं संहिताओं को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसीलिए आज हम आपको इनसे जुड़े पाँच सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

औद्योगिक संबंध संहिता 2020: यह संहिता श्रम कानून के मुख्य तीन कानून को रिप्लेस करती है

  1. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947।
  2. द ट्रेड यूनियंस एक्ट, 1926।
  3. औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946।

प्रश्न-1: 300 से ज्यादा श्रमिक रखने वाली यूनिटें बिना सरकार की अनुमति के श्रमिकों को नियुक्त और बर्खास्त कर सकती हैं, इसलिए हो सकता है इससे श्रमिकों की नियुक्ति और उनकी बर्खास्तगी में बढ़ोतरी हो?

आईआर संहिता में छटनी, क्लोजर या जबरन छटनी में थ्रेसहोल्ड को 100 श्रमिक से बढ़ाकर 300 श्रमिक करने की बात है। इस पर श्रम मंत्री ने खुद बताया है कि श्रम एक समवर्ती सूची का विषय है और संबंधित राज्य सरकारों को भी अपनी परिस्थितियों के अनुरूप श्रम कानूनों में परिवर्तन करने का अधिकार है।

इसी अधिकार का उपयोग करते हुए 16 राज्य, पहले ही अपने यहाँ यह सीमा बढ़ा चुके हैं। संसदीय स्थायी समिति ने भी यह सिफारिश की थी कि इस सीमा को बढ़ा कर 300 कर दिया जाए।

इसके अतिरिक्त इस प्रावधान का एक पक्ष यह भी होता है कि ज्यादातर संस्थान, 100 से अधिक श्रमिकों को अपने संस्थान में नहीं रखना चाहते हैं, जिससे अनौपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलता है।

श्रम मंत्री ने इस विषय में बताते हुए उल्लेख किया कि आर्थिक समीक्षा-2019 के अनुसार राजस्थान राज्य में इस सीमा को 100 से 300 करने के बाद, बड़ी फैक्ट्रियों की संख्या के साथ-साथ, श्रमिकों के रोजगार सृजन में भी बढ़ोत्तरी हुई है तथा छटनी के मामलों में अभूतपूर्व कमी आई है।

इसलिए इससे यह स्पष्ट होता है कि इस एक प्रावधान को बदलने से देश में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों को स्थापित करने के लिए निवेशक प्रेरित होंगे और ज्यादा संख्या में बड़ी फैक्ट्रियों के स्थापित होने से, रोजगार के कहीं ज्यादा अवसर, हमारे देश के श्रमिकों के लिए उत्पन्न होंगे।

यहाँ यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि इसमें ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि 300 श्रमिकों तक संख्या बढ़ाने से श्रमिकों की नियुक्ति और उनका निलंबन में बढ़ोतरी होगी। हाँ, इसमें यह जरूर स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी भी श्रमिक की नौकरी छूट जाती है तो दोबारा उसके रोजगार की संभावना बढ़ाने के उद्देश्य से आईआर संहिता में पहली बार पुनः कौशल (रि स्किलिंग) फंड का प्रावधान किया गया है। इन श्रमिकों को इसके लिए 15 दिन का वेतन दिया जाएगा।

प्रश्न- 2: क्या ‘फिक्सड टर्म एंप्लॉयमेंट’ से नियुक्ति और बर्खास्तगी की शुरुआत नहीं होगी?

कई लोगों द्वारा, ‘फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट’ की शुरुआत को एक नए नियम के रूप में देखा जा रहा है, जिसे मोदी सरकार लेकर आई। हालाँकि, बता दें कि केंद्र सरकार और 14 अन्य राज्यों द्वारा फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है। इन राज्यों में असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, एमपी, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, यूपी, और उत्तराखंड शामिल हैं।

पहले एक नियोक्ता केवल पर्मानेंट एंप्लॉय या कॉन्ट्रैक्ट पर एंप्लॉय को रख सकता था। इससे कई बाध्यता उत्पन्न होती थीं। कई बार नियोक्ता को अकुशल श्रमिक को बिना किसी कमिटमेंट के भी रखना पड़ता था। इसके अलावा यह भी आरोप लगते थे कि ठेकेदार न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, और ईएसआईसी जैसे लाभों के मामले में खुद तो पूरी राशि ले लेता मगर कॉन्ट्रैट वाले श्रमिकों को वही चीज पास नहीं करता।

हालाँकि, अब फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट की शुरुआत के साथ, नियोक्ता सीधे बिचौलिए के बिना कर्मचारी के साथ एक निश्चित अवधि का कॉन्ट्रैक्ट कर सकता है। एक फिक्सड टर्म कर्मचारी को नियमित कर्मचारी जैसे फायदे देने की बात भी इसमें है। इसलिए फिक्सड टर्म एंप्लॉयमेंट श्रमिकों या कर्मचारियों के हित में हुआ सुधार है, जिसे इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड ने प्रस्तावित किया है।

Fixed Term Employment को मान्यता से, अब श्रमिकों को ठेका मजदूरी के स्थान पर Fixed Term Employment का विकल्प मिलेगा। यानी अब उन्हें Regular Employee के समान काम के घंटे, वेतन वा सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।

व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कोड

इस संहिता ने 13 कानूनों को अपने में समेकित किया है जो स्वास्थ्य सुरक्षा और काम करने की स्थिति आदि को नियंत्रित करते थे। इनमें फैक्ट्रीज एक्ट 1948, द माइन्स एक्ट 1952 और कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट, 1970 मुख्य रूप से शामिल हैं।

प्रश्न-3: अंतर-राज्य प्रवासी कर्मचारी की परिभाषा अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक अधिनियम, 1979 अधिनियम और नए कोड में भिन्न है – क्या यह भ्रम पैदा करेगा?

अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक अधिनियम, 1979 को व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कोड में रखा गया है। वहीं, पूर्ववर्ती अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को OSH कोड में और मजबूत किया गया है। ऐसे ही अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक की परिभाषा सामाजिक सुरक्षा कोड और OSH कोड में समान है।

अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक की परिभाषा अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक अधिनियम, 1979 में बहुत ही सीमित थी। यह बताता था कि एक व्यक्ति जो एक राज्य में एक ठेकेदार के माध्यम से दूसरे राज्य में रोजगार के लिए भर्ती किया जाता है, एक ‘अंतर-राज्य’ प्रवासी कर्मचारी’ है।

वहीं, OSH कोड प्रवासी कार्यकर्ता की परिभाषा को उन श्रमिकों को शामिल करने के लिए विस्तारित करता है, जिन्हें कॉन्ट्रैक्टर के अलावा नियोक्ता द्वारा सीधे नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा, अब यह भी संभव हो गया है कि एक प्रवासी, जो किसी राज्य में अपने दम पर आता है, आधार की मदद से इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल पर पंजीकरण करके खुद को एक प्रवासी श्रमिक घोषित कर सकता है। ये प्रक्रिया बेहद आसान है और इसके लिए आधार के सिवा कोई डॉक्यूमेंट की आवश्यकता नहीं होती।

इतना ही नहीं, इसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डाटा बेस बनाया जाएगा, जहाँ पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन करना होगा। इस संहिता में प्रवासी मजदूरों के लिए हेल्पलाइन का कानूनी प्रवाधान है। इन्हें राशन, भवन निर्माण कामगारों के लिए ईपीएफओ, ईएसआईसी, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा फंड से संबंधित उपबंध शामिल हैं।

प्रश्न-4: महिलाओं के लिए रात की शिफ्ट रखना क्या उनकी सुरक्षा से समझौता नहीं है।

कार्यस्थलों पर लिंग समानता की माँग बहुत लंबे समय से उठ रही थी। OSH कोड यह सुनिश्चित करता है कि कार्यस्थलों और महिलाओं में लैंगिक समानता बनी रहे। श्रम एवं रोजगार मंत्री ने कहा है कि महिलाओं को पुरुषों के समान ही कार्य करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए तब ही हम नवीन भारत का निर्माण कर पाएँगे। इसलिए पहली बार हमने यह प्रावधान किया है कि महिलाएँ किसी भी प्रकार के संस्थान में अपनी स्वेच्छानुसार रात में भी काम कर सकेंगी। परन्तु, नियोक्ता को इसके लिए, उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित, सभी आवश्यक सुरक्षा प्रबंध करने पड़ेंगे।

प्रश्न 5: क्या नई संहिताओं में कल्याणकारी प्रावधान कम किए गए हैं?

नई संहिता को लेकर कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि इसमें कल्याणकारी प्रावधानों को कम कर दिया गया है। या इससे श्रमिकों के अधिकार और कल्याण प्रभावित होंगे। हालाँकि यह सभी आरोप सच्चाई से बहुत दूर हैं क्योंकि इन सुधार विधेयकों के जरिए नए कर्मचारियों के कल्याण का ही काम हुआ है

संहिताओं में कल्याणकारी प्रावधान

  • ESIC का विस्तार किया जाएगा।
  • देश के 740 जिलों में ESIC की सुविधा होगी, अभी ये सुविधा फिलहाल 566 जिलों में ही है।
  • खतरनाक क्षेत्र में काम कर रहे संस्थानों को अनिवार्य रूप से ESIC से जोड़ा जाएगा, चाहे 1 ही श्रमिक काम क्यों ना करता हो।
  • पहली बार 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को ESIC से जोड़ा जाएगा। 
  • बागान श्रमिक भी ESI के दायरे में आएँगे।
  • दस से कम श्रमिक वाले संस्थानों को भी स्वेच्छा से ESI का सदस्य बनने का विकल्प होगा।
  • बीस से अधिक श्रमिकों वाले संस्थान EPFO की कवरेज में आएँगे।
  • असंगठित क्षेत्र के स्वरोजगार से जुड़े श्रमिकों को भी EPFO में लाने की योजना बनाई जाएगी।
  • जिस भी कंपनी में 20 से अधिक श्रमिक काम कर रहे हैं। उस संस्थान को रिक्त पदों की जानकारी Online Portal पर देनी अनिवार्य होगी।

आंध्र प्रदेश में 6 हिंदू मंदिरों पर हुए हमले, क्या यह सब जगन रेड्डी सरकार की मर्जी से हो रहा: TDP नेता ने लगाए कई गंभीर आरोप

तेलुगु देशम पार्टी के नेता जयदेव गल्ला ने राज्य में हिंदू मंदिरों पर हालिया हमलों के लिए आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ युवजन श्रमिक रायथू (YSR) कॉन्ग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया है। गल्ला ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वाईएसआर पार्टी ऐसे हमलों से लाभान्वित हो रही है।

TDP नेता जयदेव गल्ला ने कहा, “इस साल फरवरी महीने के बाद से आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिरों पर 6 हमले हुए हैं। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। अपराधी अब डर नहीं रहे हैं। क्या यह सब राज्य सरकार की मर्जी से हो रहा है? क्या YSR पार्टी इस प्रकार की हिंसा का लाभ उठा रही है? हाँ, वह लाभ उठा रही है।”

राज्य में हाल ही में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ बढ़ रही हैं। अभी कुछ दिन पहले कृष्णा जिले के वत्सवई मंडल में मककपेटा गाँव में ऐतिहासिक काशी विश्वेश्वर स्वामी मंदिर के अंदर नंदी की मूर्ति को कुछ बदमाशों ने खंडित कर दिया था।

आए दिन हो रहे हमलों को रोकने में नाकामयाब वाईएसआर सरकार पर विपक्ष ने हमला किया था। पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू ने मंदिरों पर हमलों की निंदा नहीं करने के लिए सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी की आलोचना की थी। वहीं विपक्षी नेताओं द्वारा मंदिरों पर हमले की अनुमति देने के आरोपों से घिरे सीएम रेड्डी ने आज तिरुमाला चित्तूर में बालाजी मंदिर का दौरा किया।

पवन कल्याण और बीजेपी कार्यकताओं द्वारा भूख हड़ताल

इस महीने की शुरुआत में, आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के अंटारवेडी में प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के परिसर में 62 साल पुराने प्राचीन रथ को आग लगा कर नष्ट कर दिया गया था। जिस पर सख्त कार्रवाई की माँग को लेकर टॉलीवुड अभिनेता और जन सेना प्रमुख पवन कल्याण कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।

कल्याण ने आरोप लगाया था कि राज्य में रेड्डी शासन के तहत हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़ गए है। उन्होंने कहा कि सरकार ने समय पर कार्रवाई की होती तो ऐसे हमलों से बचा जा सकता था। राज्य सरकार ने बाद में इस मामले में सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे।

अक्षरधाम मन्दिर हमला: 18 साल पहले जब 2 आतंकवादियों ने हमारी आस्था पर किया था प्रहार

इस हमले में 30 श्रद्धालुओं, एक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी व एक कमांडो ने अपनी जान की आहुति दी थी। गंभीर रूप से घायल एक और कमांडो ने दो वर्षों तक अस्पताल में अपने जीवन के लिए संघर्ष करते हुए मृत्यु का वरण किया। 

आज से 18 वर्ष पहले 24 सितम्बर 2002 को, दो आतंकवादियों ने गुजरात के गाँधीनगर स्थिति अक्षरधाम मन्दिर पर हमला किया था, जिसमें 30 व्यक्ति मारे गए तथा 80 घायल हुए थे। माना जाता है कि इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तोयबा का हाथ था। यहाँ उन घटनाओं का क्रमानुसार वर्णन पढ़िए, जो हमले के समय घटित हुई थी।

24 सितम्बर को 2 आतंकियों का मन्दिर परिसर में प्रवेश 

रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले के दिन शाम 4 बज कर 45 मिनट पर अक्षरधाम मंदिर परिसर के द्वार संख्या 3 पर दोनों आतंकियों को छोड़ा गया। जहाँ से उन्होंने परिसर में घुसने का प्रयास किया लेकिन उन्हें वहाँ BAPS के स्वयंसेवकों द्वारा सुरक्षा जाँच हेतु रोक लिया गया। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) वो संस्था है, जो मंदिर का प्रबंधन संभालती है। 

आतंकवादी सुरक्षा जाँच को छोड़ कर एक ऊँची बाड़बंदी को फाँद कर मंदिर परिसर में दाखिल हुए। वे मंदिर परिसर में निर्मित मनोरंजन पार्क से होते हुए गोलीबारी करते हुए आगे बढ़े। वे निर्दोष श्रद्धालुओं पर गोलाबारी करते हुए, ग्रेनेड फेंकते हुए तेजी से मंदिर के मुख्य मार्ग की ओर बढ़ने लगे। इस हमले को देखते हुए मंदिर के पर्यवेक्षक खोद सिंह जाधव व बीएपीएस स्वयंसेवकों ने मुख्य मंदिर में स्थिति स्वयंसेवकों को सम्पर्क किया तथा तुरंत मुख्य मंदिर का द्वार बंद करने के लिए कहा। 

मुख्यमंत्री कार्यालय को हमले की सूचना दी गई 

लगभग 4 बज के 48 मिनट पर मुख्यमंत्री कार्यालय को इस हमले की सूचना दी गई। इसके 15 मिनट बाद राज्य पुलिस तथा कमांडो इकाइयाँ मंदिर परिसर में पहुँच गई। उन्होंने मंदिर में स्थिति सैकड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला तथा अनेक स्थानीय लोग भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सहायता के लिए आगे आए, जिन्होंने घायलों को अस्पताल पहुँचाने में मदद की।

आतंकियों ने बदला अपना लक्ष्य

जब आतंकियों को यह लगने लगा कि वो मंदिर के मुख्य दरवाजे को नहीं खोल सकते तो वो प्रदर्शनी हॉल संख्या 1 में पहुँचे, जहाँ एक मल्टीमीडिया शो चल रहा था। उन्होंने हॉल में मौजूद पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे कइयों की मृत्यु हुई, कुछ घायल हुए। प्रदर्शनी हॉल में मारकाट मचाने के बाद वे परिक्रमा मार्ग में छुप गए। 

फँसे हुए श्रद्धालुओं को निकालने का काम जारी रहा 

सुरक्षा बलों के जवानों ने मंदिर में परिसर में छिपे आतंकियों को खोजने के साथ हमले में फँसे श्रद्धालुओं को धीरे-धीरे सुरक्षित निकालना प्रारंभ किया। मुख्य मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को भी लगभग 7:30 बजे तक सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जब आतंकियों को ये लगा कि अब उनके बचने का कोई मार्ग शेष नहीं है, तो वो परिक्रमा क्षेत्र से बाहर कूद कर मौजूदा कमांडो बल पर गोलाबारी करने लगे।

NSG को बुलाया गया

शाम के लगभग 5:15 बजे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब के उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी से बात की तथा इस स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवानों की माँग की। रात के लगभग 10:10 बजे तक NSG गार्ड्स अक्षरधाम पहुँचे तथा करीब 11:30 बजे से उन्होंने अपना ऑपरेशन प्रारंभ कर दिया। आतंकी आधी रात के समय अपनी जान बचाने के लिए परिसर में निर्मित शौचालय में छिप गए। तब तक रैपिड एक्शन फ़ोर्स, सीमा सुरक्षा बल, राज्य रिजर्व पुलिस तथा आतंकवाद निरोधक दस्ते सहित कई सुरक्षा एजेंसियाँ मंदिर परिसर में पहुँच चुकी थीं। 

अगले दिन सुबह मारे गए आतंकी

सूरज के उगते ही आतंकियों की अधीरता बढ़ने लगी। वे सुरक्षा बलों पर लगातार गोलीबारी करने लगे। सुबह के लगभग 6:45 बजे कमांडो इन आतंकियों को मारने में सफल रहे, जो प्रदर्शनी हॉल संख्या 3 के समीप झड़ियों में छिपे हुए थे। 

अनेक जानें चली गईं

इस हमले के दौरान 30 श्रद्धालुओं, एक राज्य पुलिस अधिकारी तथा एक कमांडो ने अपनी जान गँवाई। एक अन्य कमांडो गंभीर रूप से घायल हुए, जो दो वर्षों तक अस्पताल में जीवन-मृत्यु का युद्ध लड़ने के बाद अंततः वीरगति को प्राप्त हुए।

अक्षरधाम मन्दिर को पुनः खोला गया 

राज्य सरकार व मंदिर प्रबंधन द्वारा मंदिर की सुरक्षा हेतु विभिन्न नए उपाय करने तथा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के बाद 7 अक्टूबर 2002 को मंदिर परिसर पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

इस मामले में अदालत ने 6 व्यक्ति को दोषी ठहराया और उन्हें सजा भी दी लेकिन 2014 में सबूतों की कमी के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें छोड़ दिया। इस मामले में फरार एक अन्य आरोपी को ATS ने बाद में 2019 में जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया।

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट, OpIndia के हाथ आए एक्सक्लुसिव सबूत से समझिए क्या हुआ 24 फरवरी को

दिल्ली में हुआ हिंदू विरोधी दंगा स्वतःस्फूर्त नहीं था। इसके लिए साजिश रची गई थी। यह साजिश रची गई थी सड़क पर, घरों में हुए मीटिंग में और डिजिटल मीडियम में भी। ऑपइंडिया को इन दंगों की प्लानिंग को लेकर वॉट्सऐप ग्रुप का एक चैट सबूत कै तौर पर हाथ लगा है।

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट-1

विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त इन दो वॉट्सऐप चैट को देख कर यह स्पष्ट है कि दंगों की प्लानिंग की गई थी। स्पष्ट यह भी है कि इसी ग्रुप में कुछ लोग हिंसा और दंगों की प्लानिंग को लेकर नाराज थे और लोगों को समझाने की कोशिश भी कर रहे थे।

दिल्ली दंगों की प्लानिंग का वॉट्सऐप चैट-2

पहले ऊपर के दो स्क्रीनशॉट को देखिए। यह 24 फरवरी 2020 की बातचीत है। इसमें अतहर युसूफजाई नाम का आदमी पहले कह रहा है, “नूर-ए-इलाही एरिया में बुरी तरह दंगा भड़क चुका है, दंगाई बसों में भरकर लोनी और पड़ोस के क्षेत्रों से लाए गए हैं। ‘क्या सभी सोच रहे है कि यह आइडिया (हिंसा का) सही है?’ ‘मुझे नहीं लगता है।” आगे अतहर मैसेज में कह रहा है, “CAA-समर्थक ग्रुप और पुलिस काफी सख्ती दिखा रही है, इसलिए बड़ा नुकसान हो सकता है।”

इसके बाद अनस तनवीर नाम का आदमी भी हिंसा की प्लानिंग को लेकर ग्रुप के अन्य लोगों को समझा रहा है। प्रोटेस्ट और हिंसा की प्लानिंग को लेकर वो एक तरह से लोगों को जगजाहिर कर धमकी भी दे रहा है। पुलिस मुख्यालय को घेरने की बात पर भी अनस तनवीर ने दिल्ली में रेड अलर्ट होने का तर्क देते हुए इसे बढ़िया आइडिया नहीं बताया। अनस की बात पर सहमति जताते हुए चिराग पटनायक ने भी हामी भरी है।

24 फरवरी से पहले वॉट्सऐप ग्रुप में क्या?

24 को हिंसा नहीं करने, हिंसा की प्लानिंग करने वालों को उजागर करने की बात होती है। इसका अर्थ क्या है? स्पष्ट है कि इससे पहले इसी ग्रुप में हिंसा की योजना बनाई गई होगी। जो इससे सहमत होंगे, वो खुश होंगे। जो असहमत रहे होंगे, उनके स्क्रीनशॉट बाहर आ रहे हैं।

दिल्ली दंगों में हिंसा की प्लानिंग इससे पहले भी इन्हीं ग्रुपों में से बाहर आ चुका है। ओवैस सुल्तान खान (Owais Sultan Khan) की एक पोस्ट के मुताबिक, पिंजरा तोड़ की लड़कियों ने वहाँ का महिलाओं को भड़काया कि वो सड़क जाम कर दें। खान ने यह भी लिखा कि वो इसके पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इन लड़कियों ने पहले भी दरियागंज में मजहब विशेष की महिलाओं को विरोध में आगे कर दिया, पुलिस से लड़ गईं और फरार हो गईं, जिस कारण वहाँ की महिलाओं को पुलिस उठा कर ले गई।

ओवैस खान का फेसबुक पोस्ट

इन लड़कियों के समूह को अभिजात्य वर्ग का बताते हुए ओवैस खान ने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि इनकी फंतासियों के चक्कर में सीलमपुर और ट्रांस-यमुना का इलाका काफी तनावपूर्ण स्थिति में है। ध्यान रहे कि दंगों की पूरी तैयारी इस समय हो चुकी थी और इन इलाकों में अगले दिन व्यवस्थित तरीके से आगजनी, हत्या और रक्तपात होना तय था।

इसी तरह के एक अन्य चैट में ओवेस सुल्तान खान का मैसेज पढ़कर यही समझ आ रहा है कि ओवेस लगातार साजिशकर्ताओं को समझाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं थी।

उक्त अनस तनवीर के बारे में हमारे सूत्र ने बताया कि वह एक वकील है जो कि CAA विरोधी आंदोलनों में आंदोलनकारियों को बचाने में, उन्हें कानूनी सहायता देने में अग्रणी रहा है। यहाँ पर, जब उसे लग गया कि दंगाइयों की योजना बड़ी है, और शायद नियंत्रण से बाहर जा सकती है तब वह बगुला भगत बनने की कोशिश करता पाया गया। यही बात उसके चैट्स में मौजूद है।

ऑपइंडिया लगातार ऐसे सबूत इकट्ठा कर रहा है ताकि लोगों को पता चले कि लाशों की संख्या गिनने वाले लोग सतही तौर पर भले ही हिन्दुओं और दिल्ली पुलिस के ऊपर यह दंगा थोप दें, लेकिन जिस तरह की गहन योजना बन रही थी, वह बताती है कि दंगे पूर्वनियोजित ही नहीं, बल्कि वृहद तौर पर प्लान किए गए थे।

जैसा कि कई चार्जशीटों में खुलासा हुआ है, कि दंगों की प्लानिंग लगातार अलग-अलग जगहों पर चल रही थी। ताहिर हुसैन की चार्जशीट में 8 जनवरी 2020 को उमर खालिद और खालिद सैफी से बातचीत का जिक्र है। उसी तरह भजनपुरा में रतनलाल जी की हत्या वाली चार्जशीट में चाँद बाग वाली मीटिॉग का जिक्र है। हम चार्जशीट पढ़ते जा रहे हैं और पता चलता जा रहा है कि प्लानिंग कई स्तर पर, सटीक और क्लिनिकल तरीके से चल रही थी।

लेकिन, इन स्क्रीनशॉट्स से यह पता चलता है कि वास्तव में ये लोग दंगा करने के लिए आतुर थे और जमीनी मीटिंग से ले कर डिजिटल तक, इनके ग्रुप में बस यही बात चल रही थी कि कैसे दंगे कराने हैं, कैसे पुलिस पर ही ब्लेम डालना है और कैसे लोकल लोगों का उपयोग कर के कुछ लोगों की राजनैतिक, मजहबी और वैचारिक घृणा को अंजाम तक पहुँचाना है। उन्हें यह भी पता होगा कि इस हिंसा में लाशें गिरेंगी। कुछ लोग सँभल गए जब उन्हें इसके विस्तार का पता चला, लेकिन कुछ नासमझ और मजहबी उन्माद से ग्रस्त दंगाई नहीं रुके क्योंकि उन्हें लगा था कि वो दिल्ली में आग लगा कर सत्ता पलट देंगे।

भला हो दिल्ली पुलिस का जिसने समय रहते इन पर काबू पा लिया, वरना यह दंगा क्या रूप लेता, और इसकी विभीषिका कितनों को लील जाती, शायद हम कल्पना नहीं कर सकते।

टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियाँ देती हैं ऑफर, पार्टियों में ट्रे में लेकर घूमते हैं ड्रग्स: मुकेश खन्ना और शिल्पा शिंदे ने किए कई चौकाने वाले खुलासे

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जब से बॉलीवुड और ड्रग्स कनेक्शन का खुलासा किया है तभी से कई सेलेब्रेटी आमने-सामने आ गए हैं। इसी कड़ी में शक्तिमान फेम मुकेश खन्ना और बिगबॉस फेम शिल्पा सिंदे ने ड्रग्स माफियाओं पर खुलकर अपनी राय दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश खन्ना ने युवाओं द्वारा ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर कहा, “न्यू जनरेशन कूल दिखने के लिए ‘ड्रग्स का सेवन’ करते हैं।” बॉलीवुड में ड्रग्स पार्टियों का जिक्र करते उन्होंने बताया, ”मैं कभी उन पार्टियों में गया तो नहीं हूँ लेकिन लोग कहते हैं कि ‘कभी-कभी पार्टियों में ट्रे लेकर घूमते है’ और पूछते हैं कि आपको कौन सा ड्रग्स चाहिए।”

ड्रग्स माफिया गैंग पर खुलासा करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ये 2-4 लोगों का खेल नहीं है, बॉलीवुड में ग्रुप बने हुए है, आज कल पार्टियों में खाना देना बड़ी बात नहीं है, बल्कि बड़ी बात है कौन सा ड्रग्स देते है। कभी-कभी पार्टियों में ट्रे लेकर घूमते है कि आपको कौन सा ड्रग्स चाहिए। ईमानदारी से जाँच हो, ये हमारे यूथ को इफेक्ट कर रहे हैं। इसे छिपाना नहीं जाना चाहिए। आर्टिस्ट को सोचना चाहिए, ये बहुत कड़वी दवाई है।”

मुकेश खन्ना ने आगे कहा, ”शाहरुख ने एक बार कहा था कि हम मसीहा नहीं है, मैं होता तो कहता कि शाहरुख आप मसीहा हो, आपको लोग मानते है फॉलो करते है, लोग गुलशन को नहीं लेकिन शक्तिमान को फॉलो करते है। लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।”

वहीं इस मामले पर पॉपुलर टीवी एक्ट्रेस शिल्पा सिंदे ने टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियों और ड्रग्स में उनके रोल को लेकर चौकाने वाली बात कही है। टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में शिल्पा शिंदे ने बताया कि टैलंट मैनेजमेंट कम्पनियाँ जब किसी आर्टिस्ट को देश के बाहर ले जाती हैं तो उसकी हर जरूरत का ख्याल रखती हैं और क्लाइंट भी उन्हें जॉइन करने से पहले मिलने वाली ‘सुविधाओं’ के बारे में पूछते हैं। शिल्पा ने यह दावा भी किया कि अगर क्लाइंट की डिमांड पूरी न की जाए तो फिर वे किसी और मैनेजमेंट कंपनी के पास चले जाने की बात कहते हैं।

शिल्पा ने कहा, “टैलंट मैनेजमेंट कम्पनियाँ जब किसी आर्टिस्ट के पास जाती हैं तो आर्टिस्ट पूछता है कि आप मुझे क्या सुविधाएँ दोगे। लेकिन यह पर्सन टु पर्सन पर डिपेंड करता है। ऐसा नहीं है कि कंपनी बोलेगी कि आपको ये-ये चीजें मिलेंगी। वह एक पर्सन की डिमांड पर निर्भर करता है कि डिमांड क्या है। मैं मैनेजिंग कंपनियों को इसके लिए ब्लेम नहीं करना चाहती। अब क्वॉन वाला तो बाहर आ गया है। पर सिर्फ क्वॉन ही नहीं है ना और भी कई मैनेजमेंट कम्पनियाँ हैं जो आर्टिस्ट को अगर इंडिया के बाहर कहीं लेकर जाती हैं तो उन्हें आर्टिस्ट का ख्याल रखना होता।”

उन्होंने खुद इस बात को उजागर किया उन्होंने कई यंग एक्टर्स को गैरकानूनी काम करते हुए देखा है, बॉलीवुड में ऐसा माहौल ही होता है कि हो सकता है लोग वहाँ के लोगों के साथ में आकर वे ड्रग्स का सेवन करने लगते है।

‘ऑपरेशन दुराचारी’ के तहत यौन अपराधियों के सरेआम चौराहों पर लगेंगे पोस्टर: महिला सुरक्षा पर सख्त हुई योगी सरकार

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज (24 सितंबर, 2020) निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं, लड़कियों और बच्चियों से छेड़खानी, दुर्व्यवहार, अपराध, यौन अपराध करने वालों के पोस्टर सरेआम चौराहों पर लगाए जाएँ। सरकार ने इसका नाम ‘ऑपरेशन दुराचारी’ रखा है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महिलाओं से किसी भी तरह का अपराध करने वालों को महिला पुलिसकर्मियों से दंडित करवाया जाए साथ ही उनका नाम सार्वजनिक किया जाए।

महिलाओं या बच्चियों के साथ अपराध करने वाले आदतन अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर के बारे में समाज को जानना चाहिए, इसलिए उनके पोस्टर चौराहों-सड़को-दीवारों पर लगाए जाएँ। ताकि उनका समाज से बहिष्कार हो सके। साथ ही सीएम ने ऐसे अपराधियों और दुराचारियों की मदद करने वालों के नाम उजागर करने के भी निर्देश दिए हैं। ऐसा करने से उनके मददगारों में भी बदनामी का डर पैदा होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बलात्कारियों में उन्हीं के नाम का पोस्टर छपेगा जिन्हें अदालत द्वारा दोषी करार दिया जाएगा। मिशन दुराचारी के तहत महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मा दिया जाएगा। महिला पुलिस शहर के चौराहों पर नजर रखेगी। इसके अलावा सीएम ने यह भी निर्देश दिया है कि महिलाओं या बच्चियों के साथ किसी भी प्रकार का दुराचार होता है तो इसकी जवाबदेही के लिए संबंधित बीट इंचार्ज, चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और सीओ जिम्मेदार होंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरेराह छेड़खानी करने वाले शोहदों और आदतन दुराचारी के खिलाफ सख्ती से पेश आया जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदेश में महिला अपराध के कई मामले सामने आने के बाद सीएम योगी ने ये फैसला लिया है। ताकि अपराधियों में डर पैदा किया जा सके।

गौरतलब है कि इससे पहले योगी सरकार सीएए के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन करने वालों के पोस्टर भी लखनऊ में लगवाए थे। पिछले साल 19 दिसंबर को लखनऊ के कई स्थानों पर उपद्रवियों ने सीएए विरोध के नाम पर हिंसा की थी, जिसमें करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया था। हिंसा में शामिल 57 लोगों के नाम और पते के साथ लखनऊ शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर कुल 100 होर्डिंग्स लगाए गए थे। प्रशासन ने इससे पहले आरोपितों पर 1.55 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाते हुए नोटिस जारी किया है, जिसके तहत 8 अप्रैल तक जुर्माने की रकम को जमा करवाना था।

भड़काऊ भाषण के लिए गए थे कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, कविता कृष्णन: दिल्ली दंगो पर चार्जशीट में आरोपित ने किया बड़ा खुलासा

दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कई बड़े नेताओं का नाम सामने आया है। इसमें कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, सीपीआई – एमएल पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन, छात्र नेता कवलप्रीत कौर, वैज्ञानिक गौहर रज़ा और प्रशांत भूषण का नाम शामिल है। दिल्ली पुलिस ने बेहद स्पष्ट तौर पर इन लोगों को दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोपित बताया है।

दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित खालिद सैफी और पूर्व कॉन्ग्रेस पार्षद इशरत जहाँ द्वारा दिए गए बयान के आधार पर खुर्शीद को आरोपित बनाया गया है। सैफी ने 30 मार्च को दिए गए अपने बयान में कहा था, “प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रखने के लिए मैंने और इशरत ने कई लोगों को बुलाया था जिसमें एक व्यक्ति सलमान खुर्शीद भी थे। इन सभी को वहाँ पर भड़काऊ भाषण देने के लिए बुलाया गया था। जितने भी लोग धरने पर बैठे रहते थे वह सिर्फ और सिर्फ भड़काऊ भाषणों के लिए बैठते थे। इन भाषणों की मदद से ही वह अपने मज़हब को आधार बना कर प्रदर्शन जारी रखने वाले थे।”

सुरक्षा में रखे गए एक चश्मदीद ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था (जिसे सीआरपीसी की धारा 164 के आधार पर तैयार किया गया था)। उसने भी अपने बयान में सलमान खुर्शीद का ज़िक्र किया था और उनके द्वारा दिए भड़काऊ भाषणों के बारे में भी बताया। 

सलमान खुर्शीद ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “अगर आप सब कुछ समेटने जाएँगे तो पूरी चार्जशीट लगभग 17 हज़ार पन्नों की है। एक चार्जशीट विश्वसनीय और प्रभावशाली होनी चाहिए क्योंकि वह किसी अपराध का पुख्ता सबूत होती है। अगर कोई ऐसा कहता है कि 12 लोगों ने आकर भड़काऊ भाषण दिया तो ऐसा संभव नहीं है कि सभी ने एक तरह के भड़काऊ भाषण दिए। उकसावा और लामबंदी हमारे देश में आपराधिक गतिविधि नहीं है।”    

वहीं वैज्ञानिक रज़ा का नाम खुरेजी क्षेत्र के नज़दीक मुस्लिम भीड़ को भड़काने के आरोप में सामने आया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चश्मदीद ने बताया, “रज़ा ने कई अन्य लोगों के साथ मिल कर सीएए और एनआरसी को लेकर कई आपत्तिजनक बातें कहीं। इसके अलावा उन्होंने वर्तमान सरकार को लेकर भी कई गलत बातें कहीं और मुस्लिमों को जम कर भड़काया।”

इन आरोपों पर रज़ा ने कहा था, “मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूँ, मैंने सीएए के विरोध में कुछ भी गलत नहीं कहा। मैं हमेशा इसका विरोध करता रहूँगा क्योंकि यह संविधान पर हमला है। मैंने हमेशा हिंसा का विरोध किया है इसलिए भड़काने का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।” 

इनके अलावा सैफी और इशरत के बयान पर प्रशांत भूषण का नाम भी सामने आया था। प्रशांत भूषण पर भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने खुरेजी क्षेत्र में भड़काऊ भाषण दिया था। इस पर प्रशांत भूषण ने कहा था, “मैं कई जगहों पर गया था और विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। लेकिन मैंने इस तरह का कोई भाषण नहीं दिया था जो लोगों में हिंसा की भावना को बढ़ावा देता हो। हाँ मैंने सरकार के विरोध में बहुत कुछ कहा था और उससे वह भड़क गए तो इसके लिए कुछ नहीं किया जा सकता।” 

25 मई को दिए गए बयान में सैफी ने कवलप्रीत कौर का नाम भी लिया था। उसने यह भी बताया कि वह काफी समय से कौर के संपर्क में था। बयान के मुताबिक़ कौर ने कई लोगों के साथ मिल कर योजना बनाई थी कि वह ट्विटर पर भड़काऊ बातें साझा करेंगे जिससे मुस्लिम समुदाय की भावनाएँ आहत हों और वह सरकार के विरुद्ध सड़कों पर उतरें। 

दिल्ली दंगों के कुल 15 आरोपितों में शादाब अहमद ने 27 मई को एक बयान दिया था। उस बयान में कुल 38 लोगों का नाम मौजूद था। इन नामों में मुख्य रूप से कृष्णन, कौर, उमर खालिद के पिता एसक्यूआर इलियास शामिल थे जिन्होंने चाँद बाग़ में भड़काऊ भाषण दिए थे। ख़बरों के मुताबिक़ इसके पहले सीपीआई के जनरल सेक्रेटी सीताराम येचुरी, स्वराज्य इंडिया के मुखिया योगेंद्र यादव, जयती घोष, प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद और फिल्म निर्माता राहुल रॉय जैसे लोगों का नाम भी दिल्ली पुलिस की पूरक चार्जशीट में शामिल है। 

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता अनिल मित्तल ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति को सिर्फ गवाही के आधार पर आरोपित नहीं बना दिया जाता है। हमारे पास लगाए गए आरोपों के अतिरिक्त तमाम ऐसे सबूत हैं जिनके आधार पर हम अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं।”