प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर अभद्र व अपमानजनक टिप्पणी करने वाले आरोपित को उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर पुलिस ने आज (सितंबर 22, 2020) गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित युवक की पहचान सोनू खान के रूप में हुई है। सोनू पर आरोप था कि इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अपमानजनक व अभद्र टिप्पणी वाला संदेश व्हॉट्सएप पर वायरल किया।
मिर्जापुर पुलिस ने यह जानकारी ट्विटर पर शेयर करके दी। उन्होंने आरोपित की गिरफ्तारी होने के बाद की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र व अपमान जनक टिप्पणी व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने वाला अपराधी गिरफ्तार।”
ट्वीट में साझा जानकारी के अनुसार, सोनू खान को आज उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से उसका वह फोन भी बरामद किया गया है, जिससे उसने प्रधानमंत्री मोदी पर अपमानजनक संदेश वायरल किया। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 153ए, 501, 505 (2) और आईटी एक्ट धारा 66 में मामला दर्ज किया है।
गौरतलब है कि इससे पहले मिर्जा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में वॉट्सऐप पर वायरल की गई अभद्र टिप्पणी का समर्थन करने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया था। उससे पहले पुलिस अभद्र टिप्पणी करने वाले एक आरोपित को जेल भेज चुकी थी।
थाना मिर्जापुर एसओ वीरेशराज गिरी ने बताया था कि गाँव मिर्जापुर के रहने वाले अनुज सेन ने बेहट के गाँव बबैल के बुजुर्ग निवासी तालिब मलिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तालिब मलिक पर आरोप था कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हुए वॉट्सऐप पर अभद्र और अमानवीय टिप्पणी की थी। पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
तालिब से पहले पुलिस ने इसी मामले में बहेड़ा निवासी आरोपित राजेश को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और उनके मोबाइल भी अपने पास ले लिए थे। इसी तरह अभी हाल में एक आबिद हुसैन नाम का युवक भी गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि उसने फेसबुक पर पीएम मोदी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की। जिस पर कई स्थानीय लोगों ने शिकायत दर्ज करवाते हुए उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की थी।
उत्तर प्रदेश (यूपी) के नोएडा में फिल्म सिटी के निर्माण के लिए कवायद तेज हो गई है और इसके लिए ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहल कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास से ही भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों से बातचीत की, जिनमें कई फिल्म निर्देशक, अभिनेता-अभिनेत्री और संगीतकार शामिल थे। सीएम योगी ने इस दौरान फिल्म सिटी को लेकर सभी की राय जानी और सभी को काफी ध्यान से सुना।
इस बैठक में सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी सौंदर्या, फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, अभिनेता अनुपम खेर व परेश रावल, गायक अनूप जलोटा, कैलाश खेर व उदित नारायण और गीतकार मनोज मुंतसिर शामिल थे। इस बैठक में वरिष्ठ वयोवृद्ध कहानीकार के विजयेंद्र प्रसाद भी शामिल हुए, जिन्होंने ‘बाहुबली’, ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘मणिकर्णिका’ जैसी सुपरहिट फिल्मों की कहानियाँ लिखी हैं। वो देश के सबसे बड़े निर्देशकों में से एक एसएस राजामौली के पिता हैं।
फिल्म उद्योग से जुड़े विनोद बच्चन और ‘तान्हाजी’ के निर्देशक ओम राउत भी इस बैठक में शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन दिग्गज फ़िल्मी हस्तियों ने सीएम योगी के समक्ष अपनी बात रखी, जो अधिकारियों की पूरी टीम के साथ उनलोगों को सुन रहे थे। बताते चलें कि नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा प्रशासन की तरफ से सीएम योगी को जमीन की उपलब्धता का पूरा ब्यौरा भेज दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी सम्बद्ध लोगों से राय लेकर ये तय करेंगे कि इन तीनों स्थलों में से फिल्म सिटी के निर्माण कहाँ किया जाए। मुंबई सहित सभी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों ने इस घोषणा का स्वागत किया है। मंगलवार (सितम्बर 22, 2020) को हुई बैठक में राजू श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण से हिंदी पट्टी को ज्यादा प्रमुखता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सतीश कौशिक ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा सिनेमा हॉल्स बनाने से ये होगा कि जो फ़िल्में बनेगी, वो लोगों तक अच्छे तरीके से पहुँचेंगी। वहीं अनूप जलोटा ने कहा कि हिंदी पट्टी के जो महान लोग हैं, उनपर इधर और फ़िल्में बन सकती हैं जो मुंबई में नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि ये फिल्म सिटी कमाल की बनेगी और दूसरी से अच्छी बनेगी क्योंकि यहाँ दक्षिण से भी लोग आ जाएँगे। राजू श्रीवास्तव ने भी अपने चुटकुलों के जरिए अपनी बात रखी।
हमने ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ जैसी फ़िल्में बना चुके विवेक अग्निहोत्री से बात की, जो इस बैठक में न सिर्फ मौजूद थे बल्कि उन्होंने सीएम योगी को अपने विचारों से भी अवगत कराते हुए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि काफी कुछ करने की घोषणाएँ तो बहुत लोग करते हैं लेकिन सीएम योगी ने इन चीजों से आगे बढ़ते हुए घोषणाओं को जल्द से जल्द अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू की है।
विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि वो उनलोगों में थे, जिन्हें यूपी सरकार की तरफ से सबसे पहले ही इस बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने सभी उपस्थित हस्तियों से उनके सुझाव माँगे, जिसके बाद ववेक अग्निहोत्री ने बैठक में कहा कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में हिंदी पट्टी की कहानियाँ ठीक से नहीं आ पाती हैं और यहाँ से फिल्म इंडस्ट्री में जाने वालों को मुंबई ही जाना पड़ता है, जिसमें से अधिकतर इतना खर्च करने में सक्षम नहीं हैं।
बकौल विवेक अग्निहोत्री, उन्होंने बैठक में कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को संघर्ष करने के लिए मुंबई जाने की बाध्यता ख़त्म हो जाएगी और वो यहीं फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बना सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि एक राजनीतिक समस्या भी खड़ी हो गई है, जिसमे एक गिरोह विशेष के लोगों का आधिपत्य भी टूटेगा क्योंकि गाँवों से जो लोग आएँगे, वो ग्रामीण जगत की अच्छी कहानियाँ लेकर आएँगे, जिन्हें मुंबई के शहरी मानसिकता वाले फ़िल्मकार पसंद नहीं करते।
उन्होंने कहा कि वो पिछले 7 वर्षों से इसके लिए संघर्ष कर रहे थे और उन्होंने कई लोगों को इससे जोड़ा है। उन्होंने बताया कि सीएम योगी ने सभी लोगों की बातों को न सिर्फ ध्यान से सुना, बल्कि सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी। कई अन्य लोगों ने भी अपनी राय रखी। किसी ने यूपी में सिनेमा हॉल्स बढ़ाने की व्यवस्था करने की बात की तो किसी ने सिनेमा को लेकर एक यूनिवर्सिटी बनाने का सुझाव दिया। यूपी में वीएफएक्स के लिए सेंटर बनाने की भी माँग उठी।
विवेक अग्निहोत्री ने बैठक में सीएम योगी के रुख के बारे में बात करते हुए कहा कि वो कम से कम समय में उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए 1000 एकड़ की भूमि की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही गई है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि ये फिल्म सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। इसके लिए पूरी योजना तैयार कर ली गई है। बैठक में उपस्थित लोगों को नक्शों और डायग्राम्स के जरिए इसका पूरा ब्लूप्रिंट दिखाया गया।
इसके लिए ब्लूप्रिंट बनाने से आगे भी कदम बढ़ा दिया गया है और अधिकारियों को इस काम के लिए लगा भी दिया गया है। फिल्म सिटी के निर्माण के सम्बन्ध में निर्देशक मधुर भंडारकर और भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रहे रवि किशन ने सीएम आवास जाकर योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही बॉलीवुड में प्रतिभाओं को दबाने की बातें चल रही है, जिसके आलोक में इस फिल्म सिटी की घोषणा से सभी उत्साहित हैं।
जल्द ही इस फिल्म सिटी के लोकेशन को लेकर घोषणा होगी। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कई लोगों ने आवाज़ उठाई थी कि यूपी-बिहार जैसे राज्यों से मुंबई जाने वालों को वहाँ उचित सम्मान नहीं मिलता है और कई तो वहाँ के माहौल में घुल-मिल भी नहीं पाते हैं। जिस तरह से बॉलीवुड में ड्रग्स के जंजाल को लेकर एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं, यूपी में फिल्म सिटी से हिंदी पट्टी को एक नई पहचान मिलनी तय है।
बेंगलुरु हिंसा मामले में जाँच को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को SDPI नेता मुजम्मिल पाशा को ‘भीड़ को उकसाने’ के लिए नामित किया। पाशा ने पूर्वी बेंगलुरु के इलाकों में हिंसा भड़काई और डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर हमला किया।
NIA ने मंगलवार को जारी अपने बयान में कहा, “SDPI के राज्य सचिव मुजम्मिल पाशा ने पहले एक मीटिंग बुलाई थी और इसमें उसने PFI/SDPI के सदस्यों को भीड़ को भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उग्र भीड़ ने बेंगलुरु शहर के अंतर्गत आने वाले डीजे हल्ली, केजी हल्ली और पुलकेशी नगर इलाकों में दंगा भड़काया।”
NIA ने आगे यह भी कहा, कॉन्ग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के कावेल बारासंडा में 11 अगस्त को उनके भतीजे नवीन द्वारा फेसबुक पर अपलोड किए गए कथित अपमानजनक पोस्ट के बाद 1000 से अधिक लोग वहाँ पर हो गए थे। नवीन के फेसबुक पोस्ट ने कथित तौर पर ‘मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं का अपमान’ किया था।
बेंगलुरु सिटी पुलिस द्वारा गठित एक जाँच दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की भूमिका की जाँच कर रही है। NIA ने दो मामले भी दर्ज किए हैं। एक मामला डीजे होली में दर्ज किया गया है, जबकि दूसरा मामला कदुगोदानाहल्ली (केजी हल्ली) पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।
कॉन्ग्रेस के पूर्व शहर महापौर अरुण प्रताप और स्थानीय नागरिक वार्ड पार्षद संपत राज के निजी सहायक सहित 300 से अधिक लोगों पर दंगे भड़काने और बर्बरता करने का आरोप लगाया गया था।
गौरतलब है कि पिछले दिनों पुलिस को पता चला था कि पाशा दंगाइयों के बीच रुपए बाँट रहा था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। सीसीटीवी फुटेज से ये भी पता चला था कि पुलिस पर किए गए हमले की साजिश पहले ही अच्छी तरह से रच ली गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए पहले ही दंगाइयों को पूरी साजिश के बारे में बता दिया गया था और वो व्यवस्थित तरीके से वहाँ आए थे।
कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने भी कहा था कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया दंगा था। उनकी मानें तो फेसबुक पोस्ट के 1 घंटे के भीतर ही हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने 200-300 गाड़ियाँ फूँक डाली व विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। मंत्री ने कहा था कि साजिशन इस हिंसा को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे SDPI का हाथ है।
सीएम येदियुरप्पा ने कहा था कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
दिल्ली के संगम विहार इलाके से एक दुकानदार पर जानलेवा हमले की घटना सामने आई है। पीड़ित का नाम वीरेंद्र है। 19 सितंबर 2020 को दोपहर 12 बजे के आसपास वीरेंद्र के कपड़े की दुकान में घुस कर उन पर हमला बोला गया। यह हमला उनकी दुकान के पास कपड़े की ही दुकान करने वाले अकरम, शेर खान और आशु समेत 10-12 लोगों ने किया।
इस हमले में वीरेंद्र की टाँग टूट गई, कंधा फ्रैक्चर हो गया और उँगली में भी चोट आई। उनके अलावा हमलावरों ने उनके भाई बृजेश पर भी हमला किया। दोनों फिलहाल एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। अस्पताल ने उन्हें बताया है कि वीरेंद्र की टाँग में रॉड डाली जाएगी।
अकरम और शेरख़ान ने मेरे कपड़ों के दुकान को हटाने की लगातार धमकियां दी,मैंने इनके बात को जब नही सूना तो मुझे मेरे ही दुकान में आकर मारा मेरे कंधे के रॉड से मारकर तोड़ दिया पैर तोड़ डाला,घटना दिल्ली के संगम विहार की है,अंतहीन यात्रा पर दिल्ली का हिंदू परिवार बचाव की गुहार में। pic.twitter.com/HZonSvZ7Zd
एम्स में भर्ती घायल वीरेंद्र का कहना है कि संगम विहार में उनकी कपड़ों की दुकान है और उसी के सामने दूसरी दुकान आशू और अकरम की है। वह लोग कई बार उन्हें दुकान बेचकर वहाँ से जाने की धमकी दे चुके हैं। वीरेंद्र ने ऑपइंडिया को घटना वाले दिन की जानकारी देते हुए बताया कि 19 सितंबर को उन्होंने अपनी दुकान के बाहर से जाते हुए एक कस्टमर को देखा, तो उसे अपनी दुकान में बुला लिया।
इसके बाद जब ग्राहक वहाँ से कपड़े लेकर चले गए, तो सामने वाली अकरम की दुकान से अकरम, आशू और शेरखान उनकी दुकान पर 10-12 लोगों के साथ आ गए और ग्राहक बुलाने के नाम पर मारपीट शुरू की। उनके पास लाठी-डंडे व सरिया था। सबने मिल कर वीरेंद्र पर हमला बोल दिया और कहने लगे ग्राहक बुलाता है।
अस्पताल में भर्ती वीरेंद्र
वीरेंद्र के मुताबिक, उनका घर दुकान से दो किलोमीटर दूर है जबकि अकरम का घर भी दुकान के पास है और उसके कई रिश्तेदार भी वहीं आस पास रहते हैं। ऐसे में दूसरे पक्ष ने इस बात का फायदा उठाया और उन्हें जान से मारने के इरादे से हमला किया। दूसरे माले पर बैठे वीरेंद्र के भाई बृजेश ने जब आवाजें सुनीं, तो वो नीचे बचाने आया, मगर उसे भी हमलावरों ने सरिया मार दिया।
वीरेंद्र कहते हैं, “वे कम से कम 12-15 लोग थे, हम दो मिल कर क्या कर लेते। उन्होंने टाँगो, कंधों और उंगली पर मारने के बाद हमारी दुकान से 30-40 हजार रुपए की नकदी भी गल्ले से निकाली। बाद का हमें कुछ भी याद नहीं है क्योंकि हम बेहोश हो गए थे।” वह कहते हैं कि जिन लोगों ने उन पर हमला किया उनमें से वह सिर्फ़ अकरम आशू और शेरखान को पहचानते हैं। मगर, यदि बाकी सबको सामने लेकर आया जाए, तो वह सबको पहचान लेंगे।
वीरेंद्र के भाई बृजेश भी पूरी घटना पर अपनी शिकायत में लिखते हैं कि जब हमला हुआ वह दूसरे माले पर ग्राहक को कपड़े दिखा रहे थे, तभी उन्हें चिल्लाने की आवाज आई। उन्होंने जाकर देखा तो दूसरी दुकान के लोग उनके भाई को मार रहे थे। उन्होंने बीच में जब रोकना चाहा तो उन पर भी हमला हुआ। शेरखान ने उन्हें सरिया मारी और अकरम ने हाथ-पैर में मारा। इसके अलावा आशू ने भी उनपे हमला किया। अब वह इस मामले पर सिर्फ़ कानूनी कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर उस दिन उन्हें बीट वाले नहीं बचाते तो वह सब मिलकर उन दोनों भाइयों को मार डालते।
घटना के 2 दिन बाद शिकायत दर्ज
हमले में घायल वीरेंद्र की एम्स में भर्ती होने के बाद एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया था कि पूरा मामला 19 सितंबर का है लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। कोई उनका बयान लेने भी नहीं आया है। हालाँकि जब ऑपइंडिया ने उनको संपर्क किया तब पुलिस वहाँ पहुँच चुकी थी और उनका बयान दर्ज हो रहा था।
एफआईआर में बयान
शिकायत में कल ही इस मामले में एफआईआर की गई है। पुलिस ने पूरे मामले को धारा 323, 341 और 34 दर्ज किया है। यह एफआईआर वीरेंद्र के भाई बृजेश की शिकायत उपर्युक्त बयान पे हुई है। मामले में एक्शन को लेकर ऑपइंडिया ने संगम विहार थाने में संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई।
2006 में स्वामीनाथन कमिटी की एक रिपोर्ट आई थी, जो किसानों की समस्या का हल बताना चाह रही थी कि कहाँ-कहाँ पर सुधारों की आवश्यकता है। संसद में तीन बिल पास हुए हैं, जिसमें से दो को लेकर काफी विवाद हो रहा है।
इसमें से एक बिल किसानों को अपनी उपज अपने मन मुताबिक बेचने की आजादी देता है। वो चाहे तो आढ़त में बेचे, बगल वाली मंडी में बेचे या फिर कहीं और, जहाँ उन्हें अधिक दाम मिलने की उम्मीद हो। दूसरा बिल APMC से संबंधित है।
इन तीनों बिलों ने 5 जून 2020 को ही अधिनियम का रूप ले लिया था, लेकिन तब से लेकर पिछले सप्ताह संसद में लाए जाने तक किसी भी राजनीतिक दल, किसान संगठन अथवा राज्य सरकार ने कोई विरोध नहीं जताया। क्यों? क्योंकि राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक पतन होने वाली पार्टियाँ संसद में नौटंकी करके अस्तित्व में रहने की कोशिश करते हैं।
मैं अमूमन सुबह देर से उठता हूँ। आज (22 सितंबर 2020) सुबह आँख खुली तो पता चला कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश संसद परिसर के भीतर धरने पर बैठे सांसदों के लिए चाय लेकर पहुँचे थे। धरने पर बैठे सांसद अपने निलंबन का विरोध कर रहे थे। इन सांसदों को सदन के भीतर उपसभापति के खिलाफ असंसदीय व्यवहार के कारण ही निलंबित किया गया था। फिर भी हरिवंश का विशाल हृदय देखिए।
ऐसा नहीं है कि रविवार को सदन में जो कुछ हुआ था, उसने हरिवंश को आहत नहीं किया होगा। उन्होंने तीन पन्नों की एक चिट्ठी भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को लिखी है। इसमें कहा है, “राज्यसभा में जो कुछ हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, तनाव और मानसिक वेदना में हूँ। मैं पूरी रात सो नहीं पाया।” इतनी पीड़ा से गुजर रहे हरिवंश ने 24 घंटों के लिए उपवास रखने का फैसला किया है।
To personally serve tea to those who attacked & insulted him a few days ago as well as those sitting on Dharna shows that Harivansh Ji has been blessed with a humble mind & a big heart. It shows his greatness. I join people of India in congratulating Harivansh Ji, tweets PM Modi https://t.co/epVZ21DsdG
इन सब खबरों से गुजरते हुए मेरे मन में वे स्मृतियाँ ताजा हो गईं, जब मैं प्रभात खबर के धनबाद संस्करण में काम करता था। हरिवंश उस समय हमारे समूह संपादक हुआ करते थे। वे बैठते राँची में थे। लेकिन धनबाद खबरों के लिहाज से बड़ा सेंटर था। मेरे बीट भी ऐसे थे, जिनकी उस समय झारखंड से लेकर केंद्र तक सरकार थी। पर मैं बड़ा ही उद्दंड कर्मचारी था। सुबह की बैठक में शायद ही कभी जाता था। बरसों से जमे जमाए सिटी चीफ से अलग पंगा चल रहा था। सिटी चीफ से ही कुछ बीट लेकर मुझे दिए गए थे। टशन की एक वजह यह भी थी।
सिटी चीफ अक्सर मुझे सस्पेंड कर देते थे। कहते थे- राँची से आदेश आया है। यह सिलसिला दीपक अंबष्ठ के स्थानीय संपादक बनकर आने के बाद थमा था। हर बार जब-जब मैं सस्पेंड हुआ, काम पर कुछ दिन बाद हरिवंश जी बुला लिया करते थे। सस्पेंड लोगों के प्रति उनके मन में सद्भावना तभी से रही है। चाहे वह मुझ जैसा छोटा कर्मचारी हो या फिर संसद के ‘माननीय’।
मुझे 2009 के सितंबर की वह घटना भी याद आई, जब मैंने दिल्ली में दैनिक भास्कर ज्वाइन कर लिया। दिसंबर में मैं राँची गया था। मेरा एक महीने का वेतन बचा था। पैसा धनबाद से मिलना था। पर पहले राँची यह सोचकर चला गया कि हरिवंश जी और विजय भैया से मिल लूँगा। धनबाद आने पर मुझे 5 महीनों का पैसा मिला था। वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि हरिवंश जी का फोन आया था। उन्होंने कहा था कि इन पैसों से दिल्ली में जमने में मुझे सहूलियत होगी।
मैंने दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, नई दुनिया, आउटलुक जैसे बड़े संस्थानों में काम किया है। एक से एक संपादक देखे हैं। पर ऐसा दूसरा संपादक नहीं देखा, जो पुराने कर्मचारी के लिए इतना सोचता हो। असल में संपादक अपने कर्मचारियों के लिए भी इस तरह का बड़प्पन नहीं दिखा पाते।
2008 की बात होगी। बोकारो स्टील प्लांट का विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण होना था। राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत कुछ गाँवों में बिजली पहुॅंचाने का उद्घाटन होना था। तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों यह हुआ था। बोकारो में ब्यूरो ऑफिस था। पर बड़े आयोजनों के वक्त उस दफ्तर से रिपोर्टर और फोटोग्राफर भेजे जाते थे, जिसके अधीन उस जगह का एडिशन आता था। बोकारो, धनबाद संस्करण के तहत ही था। असल में इस तरह के अवसर स्थानीय अखबारों के लिए बड़े मौके होते हैं। इन आयोजन को कई पन्ने समर्पित कर दिए जाते हैं। इसलिए अतिरिक्त लोग लगाए जाते हैं कि कवरेज में सहूलियत हो।
धनबाद वाले संपादक के लिए उस जमाने में एक एंबेसडर हुआ करती थी। रिपोर्टर, फोटोग्राफर भी अमूमन उसी गाड़ी से बाहर भेजे जाया करते थे। जब रिपोर्टर कार्यक्रम को कवर कर लौट रहा था तो पता चला कि जिन गाँवों में बिजली पहुँचने का उद्धाटन हुआ है, उनमें से कुछ सड़क से थोड़ा नीचे उतरते ही है। दफ्तर से आदेश नहीं होने के बावजूद रिपोर्टर ने फैसला किया कि कुछ गाँव हो आए। वह इन गाँवों में पहुॅंचा तो पता चला कि कहीं ट्रांसफर्मर तो लगा है, पर घरों तक तार नहीं पहुँचे हैं। कहीं पोल ही लगे थे। जिन तीन या चार गाँव में रिपोर्टर और फोटोग्राफर गए, उनमें से कहीं भी घरों में बिजली नहीं पहुँची थी। कुछ तस्वीरें ली गईं। कुछ स्थानीय लोगों से बात की गई और रिपोर्टर व फोटोग्राफर धनबाद लौट आए।
लौटने पर सिटी चीफ को बताया गया कि ऐसा मामला है। उन्होंने सुनते ही खारिज कर दिया। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। ये सब तो बाद में भी होता रहेगा। उस समय के स्थानीय संपादक का स्वभाव था कि सबको अलग-अलग सहला दो। इसकी वजह से उन गाँवों की रिपोर्ट छपने की उम्मीद नहीं थी। हरिवंश जी को फोन किया गया। उन्होंने कहा कि ठीक है खबर और तस्वीरें भेजिए। मैं देखता हूँ। एक-एक कर संस्करण फाइनल होकर छपने जा रहे थे, पर उस खबर की कहीं कोई चर्चा नहीं थी।
मुझे याद है उस देर रात बेहद मायूस होकर अपने घर गया था। सुबह आँख खुली तो धनबाद संस्करण में आठ कॉलम में वह खबर लीड छपी थी। तब के धनबाद के सांसद ददई दुबे ने लोकसभा में प्रभात खबर की वह रिपोर्ट भी दिखाई थी और प्रधानमंत्री से फर्जी उद्धाटन करवाने के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की माँग की थी।
यानी, सुबह-सुबह सरप्राइज देना हरिवंश जी की पुरानी आदत है। कभी खबर प्रकाशित कर छोटे कर्मचारियों को सरप्राइज करना, कभी चाय से खुद के साथ अनुचित व्यवहार करने वालों सांसदों को सरप्राइज करना।
Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh writes to President Ram Nath Kovind against the unruly behaviour with him in the House by Opposition MPs during the passing of agriculture Bills on 20th September https://t.co/T2fStyBmkC
राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को लिखी उनकी तीन पन्ने की चिट्ठी देखकर, एक-एक पन्ने की उन दो चिट्ठी की भी याद आई, जो कुछ समय के अंतराल में आई थी और जिन्हें दफ्तर के नोटिस बोर्ड पर लगाया गया था। एक उनके बेटे की शादी के प्रीतिभोज में आमंत्रण का। दूसरा, पत्रकारिता की जिम्मेदारियों का उल्लेख करता हुआ, जिसे पढ़कर कोई उस प्रीतिभोज में जाना नहीं चाहता था। जबकि इस चिट्ठी के आने से पहले सिटी चीफ रोज लिस्ट तैयार करते थे कि कौन जाएगा और किसको ड्यूटी करनी है उस दिन।
दूर बैठकर भी कर्मचारियों के मन को बखूबी पढ़ लेने वाले हरिवंश जी, अब आसन पर बैठ संजय सिंह से लेकर डेरके ओ ब्रायन के मन की ‘राजनीति’ को पढ़ते होंगे। हँसते होंगे। आज वे संपादक होते तो अखबार के पहले पन्ने का बॉटम जरूर ईशान करण की चिट्ठी होती। ईशान करण एक ‘पाठक’ थे। पता नहीं अब उनकी चिट्ठी छपती है या नहीं। उस जमाने में खूब छपती थी। जब-जब वह चिट्ठी छपती यह चर्चा भी होती थी कि असल में ईशान करण, हरिवंश जी का ही छद्म नाम है। वो चिट्ठियाँ होती ही इतनी बेबाक थी कि काटो तो खून नहीं।
दिल्ली सीएए विरोधी दंगों की फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, एक्टिविस्ट खालिद सैफी, आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा उर रहमान और जामिया के ही मीरान हैदर को हिन्दू-विरोधी दंगों के लिए 1.61 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली थी। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में ये खुलासा हुआ है।
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों को लेकर पुलिस ने 15 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, जिन्होंने इस पूरे वारदात की साजिश रची। दिसंबर 10, 2019 को ही इशरत जहाँ के बैंक अकाउंट में एक कॉर्पोरेशन बैंक अकाउंट से 4 लाख रुपए पहुँच गए थे। जाँच में पता चला कि ये अकाउंट मूल रूप से महाराष्ट्र के महादेव विजय कस्ते के नाम से रजिस्टर्ड है। महादेव को इस बारे में कुछ पता नहीं था। वो समीर अब्दुल साई नामक व्यक्ति के पास बतौर ड्राइवर कार्यरत थे।
महादेव ने बताया कि उन्होंने समीर अब्दुल साई के कहने पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.137 लाख का गोल्ड लोन लिया और बैंक द्वारा इतनी ही रकम उनके कॉर्पोरेशन बैंक अकाउंट में डाली गई। इसके बाद साई ने उसमें से 4 लाख रुपए इशरत जहाँ को भेजे। साई ने पूछताछ में खुलासा किया कि गाजियाबाद का इमरान सिद्दीकी उसका बिजनेस पार्टनर है। दिसंबर 2019 में उसने इशरत जहाँ, गुलजार अली और बिलाल अहमद के बैंक अकाउंट डिटेल्स देकर उनमें तुरंत 10-10 लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा था।
जब साई ने इतनी रकम भेजने में असमर्थता जताई तो फिर उसने इशरत जहाँ के अकाउंट में 5 लाख रुपए तुरंत डालने को कहा। वहीं इमरान रिश्ते में इशरत का देवर लगता है और उसने इशरत से 4 लाख रुपए लिए थे। उसने दावा किया कि ये रकम उसने बिजनेस के लिए ली थी। हालाँकि, उसे अपने आईटी रिटर्न में न सिर्फ ये बातें छिपाई, बल्कि पूछताछ में उन रुपयों के खर्च का हिसाब-किताब भी नहीं दे पाया।
वहीं जाँच में आगे पता चला कि इशरत जहाँ ने जनवरी 10, 2020 को खुद ही अपने बैंक अकाउंट से 4.609 लाख रुपए की निकासी कैश के रूप में की थी। जाँच में पता चला कि इस रकम का इस्तेमाल उसने अपने परिचित अब्दुल खालिद के माध्यम से हथियार खरीदने और सीएए विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग में की थी। इन हथियारों का दंगों में इस्तेमाल हुआ। दिसंबर 1, 2019 से फ़रवरी 26, 2020 तक ताहिर हुसैन से जुड़े एक बैंक अकाउंट से भी 17.25 लाख रुपए निकाले गए।
साथ ही ‘श्री साई ट्रेडर्स’ को आरटीजीएस के जरिए जनवरी 7 को 20 लाख रुपए, जनवरी 13 को 10 लाख रुपए और जनवरी 14 को 14 लाख रुपए और फिर उसी दिन 16 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। ताहिर हुसैन ने 60 लाख रुपए को कैश में बदलने के लिए ये सब किया और इसके लिए उसने कमीशन चैनल का सहारा लिया। ताहिर हुसैन ने लोगों को दंगों के लिए जुटाने, हथियार व अन्य चीजों की व्यवस्था करने और विरोध प्रदर्शनों को संचालित करने में बड़ी रकम खर्च की।
जामिया मिल्लिया इस्मालिया के एलुमनाई असोसिएशन ने इसमें बड़ा किरदार अदा किया। AAJMI के दो बैंक एकाउंट्स थे। ऊपर दी गई अवधि में इनमें से एक बैंक अकाउंट में 87.5 हजार रुपए डाले गए। शिफा उर रहमान ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए 70,000 रुपए निकाले थे। AAJMI को इन कार्यों के लिए कुल 7.6 लाख रुपए मिले थे। इनमें से 5.55 लाख रुपए विदेश में कार्यरत जामिया के पूर्व छात्रों ने भेजे।
इस मामले में और जाँच जारी है लेकिन इतना खुलासा हुआ है कि इस फंडिंग को छिपाने के लिए अलग-अलग खर्चों का फेक बिल भी तैयार किया गया था। सऊदी, यूएई, ओमान और क़तर से जामिया के पूर्व छात्रों ने रुपए भेजे थे। मीरान हैदर के अकाउंट में भी इस अवधि में 86,644 रुपए ट्रांसफर हुए थे। उसके पास से मिले रजिस्टर के हिसाब से उसे दंगों को भड़काने के लिए 4.825 लाख रुपए प्राप्त हुए थे। इससे साफ़ है कि दिल्ली दंगों की फंडिंग के लिए ताहिर और इशरत सहित इन पाँचों ने जम पर फंडिंग का जुगाड़ किया था।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती को अभी जेल में ही रहना होगा। स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की न्यायिक हिरासत की अवधि 6 अक्टूबऱ तक बढ़ा दी है। वहीं, जमानत के लिए रिया चक्रवर्ती और उनेक भाई शौविक चक्रवर्ती ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर 23 सितंबर को सुनवाई होगी।
Judicial custody of actor Rhea Chakraborty extended till 6th October by Special NDPS court https://t.co/1EaWYwaGTC
सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स केस में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती के 14 दिनों की न्यायिक हिरासत का आज आखिरी दिन था। एनसीबी की गिरफ्तारी के बाद रिया चक्रवर्ती को 22 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। वह मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। बता दें कि रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका दो बार कोर्ट से ठुकरा दी जा चुकी है।
एनसीबी की जाँच में अब बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण का भी नाम सामने आया है। NCB के हाथ एक व्हाट्सएप चैट लगी है, जिसमें ड्रग्स के खरीद-फरोख्त की बात की जा रही है। एनसीबी ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को फिर से सुशांत सिंह राजपूत की टैलेंट मैनेजर जया शाह को पूछताछ के लिए बुलाया है। इस पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
#Exclusive on @thenewshour | Navika Kumar reveals the biggest name in the latest WhatsApp chat. ‘D’ in the drug chats with ‘K’ is Deepika Padukone. ‘K’ is Karishma who is the KWAN Talent Management Agency employee.
ड्रग्स केस में कई और फिल्मी सितारों के नाम जुड़ रहे हैं। जया शाह के एक कथित चैट में D और K नाम का जिक्र है। NCB के सूत्रों के मुताबिक, D का मतलब है दीपिका पादुकोण और K का मतलब है करिश्मा। करिश्मा को NCB ने समन भेजा था।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ड्रग्स कनेक्शन की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती को 8 सितंबर को मुंबई से कई दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। अगर रिया चक्रवर्ती इस मामले में दोषी पाई जाती हैं तो उन्हें करीब 10 साल तक की सजा हो सकती है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे।
अभी तक की जाँच में बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों के नाम सामने आ चुके हैं जिनको जल्द ही समन देकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, श्रद्धा कपूर और डिजाइनर सिमोन खंबाटा ये वो नाम हैं जो अभी तक की जाँच में सामने आए हैं।
बता दें कि 28 वर्षीय रिया चक्रवर्ती को सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े ड्रग्स मामले गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपितों के बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। NCB ने इस मामले में सभी आरोपितों से कड़ी पूछताछ की थी और कथित ड्रग रैकेट में इन सबकी भूमिका का पता लगाने के लिए NCB ने रिया चक्रवर्ती का सामना सुशांत सिंह राजपूत के घर के मैनेजर सैमुअल मिरांडा, उसके घर के कर्मचारी दीपेश सावंत और शोविक चक्रवर्ती के साथ कराया था।
11 सितंबर को एक विशेष अदालत ने रिया चक्रवर्ती को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो वह दूसरों को सतर्क कर सकती हैं और वे सबूत नष्ट कर सकते हैं। रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में कहा था कि वह निर्दोष हैं और उसे झूठा फँसाया गया है। बता दें कि रिया को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के कई धाराओं के तहत बुक किया गया है।
दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को 15 आरोपितों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की। चार्जशीट में सबूत के तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप चैट और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) को भी शामिल किया गया है।
आरोप पत्र में कहा गया कि व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए दिल्ली को जलाने की साजिश रची गई। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया कि साजिशकर्ताओं ने दंगों के लिए बसों का इंतजाम किया और 300 महिलाओं समेत कई लोगों को इकट्ठा किया।
इतना ही नहीं, इसमें यह भी बताया गया कि आरोपितों ने दंगे करवाने के लिए 16-17 फरवरी की देर रात चाँद बाग में मीटिंग करने का निर्णय लिया था। यहीं इनके बीच यह बात हुई कि दिल्ली में चल रहे प्रोटेस्ट के अंतिम चरण को उत्तरपूर्वी दिल्ली के इलाकों में अंजाम दिया जाएगा। इसमें नार्थ ईस्ट, शाहदरा, साउथ डिस्ट्रिक्ट, चाँद बाग, जफराबाद एरिया को प्रदर्शन के हॉटस्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया।
हलफनामे में इस बात का उल्लेख है कि बैठक में शामिल प्रमुख लोगों को यह मालूम था कि जो प्रोटेस्ट मुस्लिम बहुल इलाकों में साइड लेन पर चल रहा है उसे बड़ी सावधानी से मिश्रित जनसंख्या वाले इलाकों में ‘चक्का जाम’ में बदलने की आवश्यकता है ताकि सामान्य आवाजाही बाधित हो और दंगे हो सकें।
यहाँ बता दें कि इसी चक्का जाम के बाद से उत्तरपूर्वी दिल्ली में दंगे होना शुरू हुए थे। दंगाइयों ने पुलिस पर हमला बोला था और सार्वजनिक संपत्तियों को आग के हवाले किया गया था। इसके अलावा इसी चक्का जाम के बाद कॉन्सटेबल रतन लाल समेत कई लोगों की मृत्यु हुई थी।
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उन सभी लोगों के नाम का उल्लेख किया है जो उस बैठक में शामिल हुए और बाद में दंगों के मामले में व रतन लाल की हत्या के केस में उनकी गिरफ्तारी भी हुई। पुलिस ने चार्जशीट के साथ कई कॉल डिटेल्स का हवाला दिया है।
इसके अलावा कुछ चैट्स ऐसी हैं जो इस समय व्हॉट्सएप पर वायरल हो रही है। इनमें कुछ चैट सफूरा जरगर से संबंधित हैं जिनकी गर्भावस्था में हुई गिरफ्तारी को लेकर कुछ दिन पहले तक हाय-तौबा मचा हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसी ही एक चैट में सफूरा जरगर ने उस दौरान ग्रुप में लिखा था, “जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास चक्का जाम कर दिया गया है और लोगों को वहाँ पर चक्के जाम के सपोर्ट के लिए इकठ्ठा करना है। यह भी तय किया गया कि 23 फरवरी को चाँद बाग से इकठ्ठा होकर बाकी साइट्स पर जाकर चक्का जाम करना है क्योंकि चक्का जाम होगा तभी दंगा होगा। क्योंकि जब तक दंगा नही होगा तब तक हमारी बात कोई नही सुनेगा।”
फिर जेसीसी-जेएमआई ग्रुप में हुई एक चैट में सफूरा जरगर को एक शहजर नाम के लड़के को चुप कराते देखा जा सकता है। वह कहती हैं कि यहीं सारे प्लॉन लिख दोगे तो एग्जिक्यूट क्या करोगे।
पुलिस ने अपने हलफनामे में उन लोगों का भी खुलासा किया है जिनकी निगरानी में पूरी साजिश रची गई। यूनाइटेड हेट अगेंस्ट के नदीम खान को एक राशिद नाम के व्यक्ति ने रात के 2:36 पर कॉल किया था। यह कॉल उस समय की गई थी जब दंगों से पहले मीटिंग चल रही थी। वहीं अत्थर खान (आम आदमी पार्टी नेता और बैठक का आयोजन करने वाले) को भी फिल्ममेकर राहुल रॉय ने 23 फरवरी को 12:18 कॉल किया था।
यहाँ बता दें, कि अभी तक जो व्हॉट्सएप चैट सामने आई हैं उनमें से एक में देखा जा सकता है कि अब्दुल अजीज नाम का व्यक्ति कहता है कि जहाँगीरपुरी से कुछ लोग बसों में बैठकर शाहीन बाग जा रहे हैं, जिनकी गेदरिंग 250-300 है जिनमें करीब 80% औरतें हैं इस्त्राफिल, तबरेज की लीडरशिप में शाहीन बाग चली गई हैं।
इस चैट में जो 250-300 महिलाओं का उल्लेख है उन्हें लेकर चार्जशीट में दावा है कि 23 फरवरी 2020 की सुबह 8.41 मिनट पर तरबेज नाम के युवक ने जाह्नवी मित्तल को कॉल किया और उसे अपने पास उपलब्ध मैन पावर और लॉजिस्टिक्स की जानकारी दी।
फिर जाह्नवी मित्तल ने इन महिलाओं को पहले बड़ी चालाकी से शाहीन बाग ले जाने की बात की। उसके बाद 1:03 मिनट पर जब इनकी गाड़ियाँ मोरी गेट पहुँची तो उसने तबरेज को कहा कि उन सबको शाहीन बाग से जाफराबाद ले आया जाए।
पुलिस के हलफनामे के मुताबिक शाम 4:30 बजे 1 घंटे 15 मिनट का सफर तय करके तबरेज की देख रेख में इन महिलाओं को 6 बस और 1 ट्रक में भर कर शाहीन बाग से जाफराबाद लाया गया। इसकी जानकारी राहुल रॉय को टेलीफोन पर पिंजरा तोड़ की देवांगना कालिता ने स्वयं दी और यह भी बताया जाफराबाद में हमले के बाद इन महिलाओं को जहाँगीर पुरी छोड़ा गया। बता दें हिंसा के लिए लाई गई महिलाओं की गाड़ियों का किराया देवांगना कलिता और नताशा नरवाल ने चुकाया था।
इसके अलावा इसमें से एक चैट में ओवेस सुल्तान खान नामक व्यक्ति का भी सामने आया है। हर चैट में इसका मैसेज पढ़कर यही समझ आ रहा है कि ओवेस लगातार साजिशकर्ताओं को समझाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं थी।
वह एक DPSG ग्रुप में लिखता है, “मैं शिक्षित नहीं हूँ लेकिन मैं इतना बता सकता हूँ कि पिछली रात में रोड ब्लॉक करने का जो तुम्हारा प्लान था उसके बारे में स्थानीय लोग सब जानते हैं। तुम्हारा जो प्लान है उससे हिंसा भड़क सकती है। इसलिए आग से मत खेलो, ये केवल तुम्हें ही नहीं बल्कि हम सबको नुकसान पहुँचाएगा। हमारा प्रदर्शन अहिंसात्मक होगा। हम विचारों के जरिए लोगों को प्रभावित करेंगे।”
इसके बाद यही ओवेस सुल्तान एक मैसेज में यह भी कहता है, “तुम्हारी इच्छाओं के कारण सीलमपुर के स्थानीय लोग बड़ी मुश्किल में है। हर स्थानीय चिंता में है। हमारे पास अब भी 1992, 2006 और हालिया हिंसा के जख्म हैं जहाँ तुम में से कोई भी हमारे लिए खड़ा नहीं हुआ। बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया है।”
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान शोएब और गुल नवाज के रूप में हुई है। इनमें से शोएब केरल के कन्नूर का निवासी है जबकि नवाज उत्तर प्रदेश का। एनआईए की स्पेशल टीम इन्हें अरब के रियाद से लेकर आई है। इससे पहले सऊदी अरब प्रशासन की मदद से इन्हें 2 हफ्ते पहले हिरासत में लिया गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल निवासी शोएब साल 2008 में बेंगलुरु सीरियल ब्लास्ट केस का आरोपित है, जो धमाके के बाद से फरार था। उसके संबंध भारतीय मुजाहिद्दीन से भी हैं। वहीं गुल नवाज पाकिस्तान के लश्कर ए तैयबा आतंकी संगठन से संबंध रखता है। वह दिल्ली में हुए बम धमाकों का आरोपित है।
NIA arrests two terrorists, including 2008 Bengaluru blast accused, from Riyadh, Saudi Arabiahttps://t.co/uoId2ksZEg
बता दें, इस कार्रवाई से पहले इन दोनों आतंकियों के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका था। रियाद में इनके ख़िलाफ़ लुक आउट नोटिस जारी होने के बाद इन्हें भारत लाया गया। यहाँ इनसे रॉ के अधिकारियों और अन्य एजेंसियों ने कई घंटे पूछताछ की।
आगे की कार्रवाई के लिए शोएब को बेंगलुरु और गुल नवाज को दिल्ली लाया जाएगा। फिलहाल शोएब से कोच्चि स्थित एनआईए के मुख्यालय में पूछताछ हुई है। वहीं गुल नवाज से तिरुवनंतपुरम स्थित आईबी मुख्यालय में सवाल किए गए।
उल्लेखनीय है कि शोएब भारतीय मुजाहिद्दीन का सक्रिय सदस्य है। इस संगठन का संस्थापक नसीर फिलहाल जेल में बंद है। वहीं, शोएब 2014 में पाकिस्तान चला गया था। वहाँ उसने कथिततौर पर निकाह किया और अपना बिजनेस करने लगा। वह रियाद में आता जाता रहता था। उसकी जानकारी जुटाने के बाद एनआईए ने रियाद प्रशासन से संपर्क किया और शोएब को गिरफ्तार किया।
इन दोनों की गिरफ्तारी से पहले एनआईए ने अल कायदा के आतंकियों को शुक्रवार को हिरासत में लिया था। इनकी पहचान इयाकूब बिस्वास, मुर्शीद हसन और मुशर्रफ हसन के रूप में हुई थी। इनके अलावा अल कायदा के 6 आतंकी नजमुस साकिब, अबु सूफिया और मैनुल मंडल, लियो यीन अहमद, अल मामून कमल, अतितुर रहमान को बंगाल के मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार किए गए थे।