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‘मैं आदमी हूँ, औरत बनकर रहना अच्छा लगता है’: बंगाली शुभम माँ काली की अश्लील तस्वीर बनवा रहा लोगों की DP

सोशल मीडिया पर एक बार फिर कुछ हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरों को लेकर अपमानजनक पोस्ट सामने आए हैं। एथीस्ट रिपब्लिक के संस्थापक अर्मिन नवाबी द्वारा शेयर की गई माँ काली की अश्लील तस्वीर के बाद @AtheistRonnie नाम का एक ट्विटर अकॉउंट लोगों से इसे अपनी प्रोफाइल फोटो बनाने की अपील कर रहा है। शुभम बिस्वास नाम का यह युवक कोलकाता का निवासी है।

‘एथीस्ट रॉनी’ नाम के इस अकॉउंट से माँ काली की अभद्र तस्वीर पर न केवल कमेंट किया गए है, बल्कि ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ ग्रुप का सदस्य होने के नाते इसके माध्यम से लोगों से अपील की गई है कि जो भी कोई भारत में ईशनिंदा कानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना चाहते हैं वह उस तस्वीर को अपनी डीपी पर लगा ले।

सोशल मीडिया पर हिन्दुओं की आराध्य माँ काली की अपमानजनक तस्वीर शेयर करने के मामले में भारत के ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ संस्था के कॉर्डिनेटर के ख़िलाफ़ ‘हिंदू आईटी सेल’ नामक ट्विटर अकॉउंट केस दर्ज कराने जा रहा है। उन्होंने अपने ट्विटर पर जानकारी दी है कि जो कोई भी इस समूह के ख़िलाफ़ एफआईआर या शिकायत दर्ज करवाना चाहाता है, वह उनसे संपर्क करे।

हम सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे कुछ स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि यह ट्विटर अकाउंट माँ काली की इस अभद्र तस्वीर को प्रोफाइल फोटो बनाने के लिए लोगों को उकसा रहा है और जब कुछ ओछी मानसिकता के लोग बिना सोचे-समझे यह काम कर रहे हैं तो उनका स्वागत ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ समूह में कर रहा है।

Hate Patrol Squad के मुताबिक इस लड़के का नाम शुभम बिस्वास है। यह कल्याणी यूनिवर्सिटी में पढ़ता है और उसी समूह का सदस्य है, जिसके संस्थापक ने अभी हाल में माँ काली की अभद्र तस्वीर को शेयर करते हुए उनके लिए ‘सेक्सी’ शब्द का प्रयोग किया था।

गणेश भगवान पर शेयर किया गया अपमानजनक ट्वीट

इसी शुभम बिस्वास ने लड़कियों के लिबास में अपने अकॉउंट पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इसके अलावा, उसके ट्विटर पर अधिकतर हिंदू देवी-देवताओं की ऐसी तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं, जिनमें उनका चित्रण बेहद आपत्तिजनक रूप से किया गया है। ‘माँ काली’ के सम्बन्ध में भी इस युवक की वॉल पर कई घटिया पोस्ट हैं। साथ ही, अभद्रता से चित्रित की गई भगवान गणेश की तस्वीरें भी शेयर की गई हैं।

‘हेट पैट्रोल स्कॉड’ के ट्विटर पर इसी ‘एथीस्ट रॉनी’ की तस्वीर शेयर करते हुए उसके ही नाम से एक बयान लिखा गया है, “हाँ मैं दिमागी तौर पर बीमार, डिप्रेस्ड आदमी हूँ जिसे, औरत बनकर रहना अच्छा लगता है, ताकि मैं महिलाओं के वॉशरूम में जा सकूँ, क्योंकि मैं अब भी उनकी ओर आकर्षित होता हूँ। और हाँ, मैं आर्ट डिग्री पढ़ते हुए 3 विषयों में फेल भी हुआ लेकिन ऑनलाइन मैं साइंस का विशेषज्ञ बनता हूँ।”

यह कथन ‘हेट पैट्रोल स्कॉड’ ने तंज में लिखा है या ये वाकई शुभम बिस्वास का कथन है, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता है। मगर, इसी शुभम बिस्वास द्वारा ही शेयर की गई एक पोस्ट में यह कैप्शन लिखा देखा जा सकता है, “समाज मुझे मर्द बनाना चाहता है। लेकिन मैं नहीं बनना चाहता।”

वहीं, एक अन्य पोस्ट भी मौजूद है, जिसमें यही शुभम बिस्वास जीसस, मुहम्मद और कृष्णा पर मीम बनाने को लेकर अपनी बात रखता है। इसमें यह लिखता है, “क्या कोई जीसस, मुहम्मद और कृष्ण, इन तीनों पर मीम (MEME) बना सकता है। ताकि इन तीनों सबसे बड़े धर्मों को एकसाथ आहत किया जा सके?

बता दें कि ‘हेट पैट्रोल स्कॉड’ द्वारा सोशल मीडिया पर यह ‘ज्ञानवर्धक’ पोस्ट शेयर किए जाने के बाद शुभम ने इसका स्क्रीनशॉट ट्वीट किया है और कहा है, “अगर तुम्हें ये जानकारी मिल पाई है, तो तुम्हारे कनेक्शन बिलकुल अच्छे नहीं हैं।”

मगर यदि हम उसके ही 6 सितंबर के ट्वीट को देखें, तो ‘एथिस्ट रिपब्लिक’ ग्रुप के साथ शुभम बिस्वास वीडियो कॉल करता दिख रहा है। इस फोटो में उसके नाम पर शुभम के साथ ही ‘पूर्व हिंदू’ लिखा नजर आ रहा है।

‘मैं भक्त हूँ, बुरे से बुरे सपने में भी लिबरल नहीं बनूँगी: गोडसे प्रेमी कहने वाली आरफा खानम को कंगना ने धोया

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को शिवसेना नेताओं से मिल रही धमकियों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा Y-कैटेगरी सुरक्षा दी गई है। जिसकी पुष्टि करते हुए अभिनेत्री ने केंद्र सरकार और अमित शाह का आभार जताया।

कंगना रनौत के इस ट्वीट पर प्रोपेगेंडा वेबसइट ‘दी वायर’ की ही पत्रकार आरफा खानम ने उन्हें ‘गोडसे प्रेमी’ कहते हुए ‘लिबरल मूल्यों’ पर ज्ञान देने की कोशिश की। जवाब में कंगना रनौत ने उन्हें बताया कि वो उदारवादी नहीं बल्कि ‘भक्त’ हैं।

दी वायर की प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने कंगना रनौत का ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा, “यह उदारवादी मूल्यों की ताकत है। तुम आत्ममुग्ध, घृणा से भरे हुए, बहुलवादी, फ़ासिस्ट समर्थक हो सकते हो, लेकिन फिर भी तुम खुद को एक फासिज़्म से लड़ाई लड़ रहे इंसान के तौर पर ही दिखाना चाहते हो। तुम गोडसे के बड़े प्रेमी हो सकते हो. लेकिन आखिर में गाँधी ही तुम्हें सामाजिक स्वीकार्यता दिलाएँगे।”

आरफा खानम के इस बिन माँगे ज्ञान के जवाब में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने आरफा को जवाब दिया, “आरफा मैम, सालों तक अध्ययन के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँची हूँ कि गाँधीवादी और कुछ नहीं बल्कि भगवान राम के ही मूल्यों का बेहद छिछला संस्करण है। खुद गाँधी ने भी स्वीकार किया था कि वह राम राज्य की अवधारणा का ही अनुसरण करते हैं। मैं अपने बुरे से बुरे स्वप्न में भी लिबरल बनने का हौसला नहीं करूँगी। मैं बस एक भक्त हूँ।”

गौरतलब है कि इससे पहले गृह मंत्रालय द्वारा कंगना रनौत को Y-श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने के फैसले पर कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये इस बात का प्रमाण है कि अब किसी देशभक्त आवाज़ को कोई फ़ासीवादी नहीं कुचल सकेगा।

कंगना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए कहा कि वो चाहते तो हालातों के चलते उन्हें कुछ दिन बाद मुंबई जाने की सलाह देते। मगर उन्होंने भारत की एक बेटी के वचनों का मान रखा, हमारे स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लाज रखी। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर ‘जय हिन्द’ भी लिखा।

बेबाकी के कारण कंगना रनौत से नाराज है ‘लिबरल वर्ग’

यूँ तो कंगना रनौत बॉलीवुड को लेकर अपने नजरिए के कारण अक्सर ही इस इंडस्ट्री के लोगों की नजरों में रहा करती थीं, लेकिन दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से वह पत्रकारिता के लोगों की आँखों में भी चुभने लगी हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कंगना रनौत के मैदान में उतरते हुए एक के बाद एक कर कई तरह के खुलासे होने लगे।

ऐसे में, बॉलीवुड में व्याप्त नेपोटिज़्म पर जब बहस छिड़ी तो इस डिबेट में कई बड़े नाम भी शामिल हो गए। धीरे-धीरे सुशांत सिंह की मौत में ड्रग्स का एंगल निकल आया तो समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ जैसे संस्थान और इसके जैसे ही अन्य लोगों ने भी मानो सुशांत सिंह राजपूत की मौत में आरोपित उनकी पूर्व प्रेमिका रिया चक्रवर्ती की जगह कंगना रनौत को ही निशाने पर ले लिया।

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ की पत्रकार आरफा खानम ही नहीं बल्कि उनके साथ ही रोहिणी सिंह भी कंगना रनौत को घेरने का विफल प्रयास कर चुकी हैं। सबसे दिलचस्प तो इस पूरे प्रकरण में यह देखना है कि निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता की दुहाइयाँ देते रहने वाले यह तमाम गिरोह कंगना रनौत के मुँह खोलते ही बौखला गए हैं।

इन सभी पत्रकारों, विचारकों, महिला अधिकारों के ध्वजवाहकों के दोहरे चरित्र को अकेले कंगना रनौत ने जगह दिखा दी है। यदि इसी वर्ग से नागरिकता कानून के विरोध-प्रदर्शनों की तख्तियाँ वापस टटोलने के लिए कहा जाए तो वहाँ शायद अभी भी वो पोस्टर कहीं पड़े होंगे, जहाँ कुछ दिनों पहले तक ये फैज को पढ़ते हुए उन्हें गा रहे थे। इन्हीं कुछ तख्तियों में से किसी एक में जरूर लिखा होगा, “बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़बाँ अब तक तेरी है, तेरा सुत्वाँ जिस्म है तेरा, बोल कि जाँ अब तक तेरी है।”

यह भी कमाल की बात है कि इस गिरोह की समस्या ही यही बन गई कि कंगना बोल रही है। उनका दफ्तर बिना किसी पूर्व सूचना के उजाड़ा जा रहा है। महाराष्ट्र की सत्ता कंगना को खुली धमकियाँ दे रही है। एक मुखर महिला को हरामखोर कह दिया गया। महाराष्ट्र सरकार डीके फासिज्म चरम पर है लेकिन लिबरल गिरोह और प्रोपगेंडाबाज़ गाँधीवाद का पाठ कंगना रनौत को पढ़ा रहे हैं।

काशी-मथुरा की मुक्ति के लिए अखाड़ा परिषद का प्रस्ताव, कहा- बात से नहीं सुलझा मामला तो होगी कानूनी लड़ाई

प्रयागराज में सोमवार (सितम्बर 7, 2020) को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक हुई। इसमें 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है काशी और मथुरा की मुक्ति का प्रस्ताव। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस कार्य में विश्व हिन्दू परिषद का भी सहयोग माँगा है। संगमनगरी में हुई इस बैठक में इस कार्य के लिए सभी पक्षों की सहमति लेने की बात भी कही गई।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में माँग की गई कि अब जब अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन हो गया है, काशी में बाबा विश्वनाथ और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को मुक्त कराने की ओर प्रयास किया जाए। बता दें कि बाबा विश्वनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल हैं। बाघंबरी मठ में आयोजित इस बैठक में 13 प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस बैठक में संगम तट पर माघ मास में लगने वाले माघ मेला, प्रयागराज की परिक्रमा और हरिद्वार में कुंभ की तैयारियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई। हर मुद्दे की धार्मिक और पौराणिक महत्वों पर भी चर्चा की गई। इन प्रस्तावों को पीएम नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भेजा जाएगा। सभी मुद्दों पर निगरानी रखी जाएगी।

प्रस्ताव पास हुआ कि काशी और मथुरा की मुक्ति के लिए रणनीति तैयार की जाए और उसी हिसाब से आगे के क्रियाकलाप हों। कहा गया कि इसके लिए पहले तो बातचीत के जरिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन अगर सभी पक्ष राजी नहीं होते हैं तो कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। अखाड़ा परिषद ने सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की गई और अपराध व कोरोना से निपटने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की गई।

रविवार को ही वीडियो जारी कर के महंत नरेंद्र गिरि ने काशी विश्वनाथ मंदिर में ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण को अवैध करार दिया था। उन्होंने ये भी कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि में मस्जिद जबरन बनाई गई है। उन्होंने दोनों स्थलों को हिन्दुओं की आस्था का केंद्र करार देते हुए कहा कि इन्हें जल्द से जल्द मुक्त कराया जाए। संतों ने एक सुर में कहा कि माघ मेले पर रोक न लगे और संस्थाओं पर रोक लगाकर संत-महात्माओं और कल्पवासियों को मेले में स्थान दिया जाए।

ज्ञात हो कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव रखी थी, तब मंदिर का भूमि पूजन कराने वाले आचार्य पंडित गंगाधर पाठक की बातों में सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय था प्रधानमंत्री मोदी से दक्षिणा का निवेदन। आचार्य गंगाधर पाठक ने दक्षिणा में गोहत्या पर पाबंदी और काशी तथा मथुरा की मुक्ति की माँग रख दी थी। उन्होंने पीएम मोदी को अपना यजमान करार देते हुए ये संकल्प कराया था।

तब कठुआ पर बाल्टी भर आँसू और अब जुबैर का समर्थन: बच्चे को गाली देने वाली स्वरा भास्कर का पाखंड

प्रोपेगेंडा वेबसाइट आल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर एक बच्ची को ऑनलाइन प्रताड़ित करने के आरोप में FIR दर्ज को गई है। यह जुबैर के साथी प्रतीक सिन्हा सहित पूरे लिबरल गैंग को नागवार गुजरा है। गैंग जुबैर के समर्थन में अभियान चला रहा है। इसे 4 साल के बच्चे को गाली देने वाली स्वरा भास्कर का समर्थन भी मिला है।

स्वरा भास्कर ने मोहम्मद जुबैर के समर्थन में ट्वीट कर उनसे हिम्मत बनाए रखने का कहा है। स्वरा के इसी पोस्ट के बाद यूजर्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोग जुबैर पर लगे आरोपों के बाद भी उनके समर्थन में खड़े नजर आए तो कुछ ने स्वरा भास्कर को पाखंडी बताया।

एक यूजर ने स्वरा भास्कर के दो चेहरों की पोल खोलते हुए दो तस्वीरें शेयर की। एक उनके हालिया ट्वीट की जिसमें उन्होंने जुबैर को समर्थन दिया। दूसरी कठुआ रेप के दौरान उनकी प्रतिक्रिया की। क्रिश नाम के यूजर ने लिखा कि स्वरा भास्कर के 2 चेहरे हैं। पहला कठुआ रेप केस में वह प्लेकार्ड लिए दिखती है और दूसरी तरफ एक बच्ची को प्रताड़ित करने वाले का समर्थन करती हैं। यूजर लिखता है कि अब स्वरा अपने पाखंड के माउंट एवरेस्ट पर पहुँच चुकी हैं।

कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनकी वह वीडियो भी शेयर कर रहे हैं जिसमें स्वरा भास्कर कसम खाकर कहती हैं कि उन्हें पाकिस्तान में बहुत प्यार मिलता है। वह न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस, इस्तांबुल जैसी बहुत जगह घूमी हैं, लेकिन उन्हें लाहौर के सामने सब फेल लगते हैं।

इसके अलावा एक यूजर पूछता है कि आखिर यह कैसा दोग@#* है कि आज स्वरा भास्कर उस बच्ची के साथ न खड़े होकर, बच्ची का इस्तेमाल करने वाले भेड़िए के साथ खड़ी है।

वहीं एक अन्य यूजर लिखता है, “एक बच्ची को अब्यूज करने वाले के साथ आप खड़ी हैं। वैसे कोई हैरानी भी नहीं हुई। आप हमेशा टुकड़े-टुकड़े गैंग, आतंकवादियों और देश के खिलाफ बोलने वालों के साथ ही खड़ी पाई गई हैं।”

गौरतलब है कि 5 सितंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई

इससे पहले प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा छोटी बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक करने, धमकियाँ देने और टॉर्चर करने के आरोप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ट्विटर को नोटिस भेजा था। आयोग ने कहा था कि वह इस मामले में स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और इसके लिए ट्विटर के सीनियर मैनेजर्स को 4 सितम्बर को उपस्थित होना होगा। अब उन्हें 10 दिन का फिर से समय दिया गया है।

प्रयागराज: करोड़ों की जमीन पर बाहुबली अतीक अहमद का था कब्जा, 4 बुलडोजर से निर्माण ध्वस्त

पूर्व सांसद अतीक अहमद की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलने का सिलसिला लगातार जारी है। प्रयागराज के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस के नवाब यूसुफ रोड पर स्थित उसकी अवैध संपत्तियों को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया है।

यहाँ सरकारी जमीन पर कई सालों से बहुबली अतीक अहमद ने कब्ज़ा जमा रखा था। उसने इस जमीन पर निर्माण करा कर इसे रेस्टॉरेंट संचालक को गोदाम बनाने के लिए दे दिया था। 500 वर्ग गज की इस जमीन की कीमत करोड़ों में है। विकास प्राधिकरण, नगर निगम और पुलिस की टीम ने चार बुलडोजरों के साथ पहुँच कर इसे ध्वस्त कर दिया।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। अतीक अहमद ने जमीन को ‘फ्री होल्ड’ करने के लिए अर्जी भी दी थी, लेकिन डीएम ने इसे रिजेक्ट कर दिया था। बिना प्रमाणित नक़्शे बनवाए गए ऐसे भवनों को चिह्नित करने का काम प्रशासन पहले ही कर चुका है।

अतीक अहमद की सम्पत्तियों को जब्त करने और उन पर बुलडोजर चलाने का काम गैंगस्टर एक्ट के तहत किया जा रहा है। उसकी जिन 7 सम्पत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है, उसकी अनुमानित कीमत 60 करोड़ रुपए है।

इससे पहले प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने शनिवार को पुलिस की मदद से अतीक के करीबी रिश्तेदार इमरान के सिविल लाइंस इलाके में स्थित करोड़ों रुपए की नजूल की जमीन पर कब्जे वाली बिल्डिंग को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया था। बता दें आईएस 227 गैंग के सरगना अतीक अहमद का साढू इमरान 25 हजार का इनामी है। उसने बिना पीडीए से नक्शा पास कराए जमीन पर निर्माण कराया था। अतीक अहमद पर 38 मामले दर्ज हैं।

5 साल की बच्ची को अगवा कर रेप किया, हत्या कर अधजला शव कूड़ेदान में फेंका: सड़कों पर उतरे लोग, कराची की घटना

पाकिस्तान के कराची में एक 5 साल की मासूम के रेप और हत्या का मामला सामने आया है। बच्ची का अधजला शव कल कूड़ेदान से बरामद हुआ। शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को उसका अपहरण किया गया था। पुलिस ने इस संबंध में 1 युवक को हिरासत में लिया है। पूरे कराची में इस समय घटना के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, मासूम का शव बरामद होने के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिन्ना पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सेंटर में भेजा गया। रिपोर्ट में सामने आया कि जलाने से पहले उसके सिर पर जोरदार हमला किया गया था, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई। इसके बाद उसे कूड़ेदान में फेंका गया।

डॉन की खबर के अनुसार, बच्ची का अपहरण कराची की पुरानी सब्जी मंडी इलाके से हुआ था। 2 दिन बाद सीधे उसका शव रविवार की सुबह उसी इलाके के एक खाली प्लॉट में कूड़ेदान के अंदर अधजली अवस्था में बरामद हुआ।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के लिए एक युवक को हिरासत में लेकर उसका डीएनए टेस्ट कराने को भेज दिया गया है। बता दें 5 साल की बच्ची के साथ हुई बर्बरता के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पर लोग प्रदर्शन करके आरोपित की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। साथ ही उसे बिलकुल वैसी ही सजा देने की गुहार लगा रहे हैं, जैसे साल 2018 में जैनब अंसारी के दोषी को मिली थी।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में 2 साल पहले भी ऐसा एक केस सामने आया था। जब 6 साल की जैनब का अपहरण कर रेप किया गया और फिर उसे मार डाला गया। इस वारदात को अंजाम देने वाले को अक्टूबर 2018 में फाँसी हुई थी।

सोशल मीडिया पर वकार जाका ने भी बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों के ख़िलाफ़ आवाज उठाई है। वहीं सांसद आलमगीर खान ने भी इंसाफ के लिए आरोपित को जनता के सामने फाँसी देने की माँग की है। कुछ लोगों ने इस घटना को सुनने के बाद पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था को घटिया बताया है।

‘कल मेरी संपत्ति ध्वस्त करेंगे’: धमकियों के बाद कंगना के ऑफिस पर शिवसेना की BMC का धावा

पहले तो महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन, खासकर शिवसेना नेताओं ने अभिनेत्री कंगना रनौत को धमकाने की कोशिश की। इसके आगे वे नहीं झुकीं तो शिवसेना शासित वृहन्न मुंबई नगरपालिका (BMC) के कुछ अधिकारियों ने सोमवार (सितंबर 7, 2020) को कंगना के मुंबई स्थित दफ्तर पर रेड मारी। अभिनेत्री ने वीडियो ट्वीट करते हुए इसे बदले की कार्रवाई बताया है।

कंगना रनौत ने ट्वीट कर लिखा, “ये मुंबई में मणिकर्णिका फ़िल्म्स का ऑफ़िस है। इसे मैंने पंद्रह साल मेहनत कर कमाया है। मेरा ज़िंदगी में एक ही सपना था कि मैं जब भी फ़िल्म निर्माता बनूँ, मेरा अपना खुद का ऑफ़िस हो। मगर लगता है ये सपना टूटने का वक़्त आ गया है। आज वहाँ अचानक बीएमसी के कुछ लोग आए हैं।”

कंगना ने फिर दूसरा वीडियो शेयर किया, जिसमें बीएमसी के लोग कंगना के ऑफिस में सब कुछ नाप रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए कंगना ने लिखा, “वे जबरदस्ती मेरे ऑफिस में घुस गए और सब कुछ नापने लगे। जब मेरे पड़ोसियों ने आपत्ति जताई तो उन्हें भी परेशान किया। अधिकारियों की भाषा कुछ इस तरह थी, “वो जो मैडम है उसकी करतूत का परिणाम सबको भरना होगा। मुझे सूचित किया गया कि वे कल मेरी संपत्ति को ध्वस्त कर रहे हैं।”

अभिनेत्री ने तीसरा ट्वीट करते हुए लिखा, “मेरे पास सभी कागज हैं और बीएमसी की परमिशन भी। मैंने अपनी प्रॉपर्टी में कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है। बीएमसी को स्ट्रक्चर प्लान भेजना चाहिए यह दिखाने के लिए कहाँ गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन हुई है, वो भी नोटिस के साथ। लेकिन उन्होंने आज मेरे ऑफिस पर रेड मारी बिना किसी नोटिस के और कल वह सब कुछ ध्वस्त कर देंगे।”

गौरतलब है कि कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार का विवाद बढ़ता जा रहा है। शिवसेना नेता संजय राउत के साथ कंगना रनौत की बयानबाजी के बाद केंद्र सरकार ने एक्ट्रेस को Y-कैटेगरी की सुरक्षा दे दी। इसके चंद घंटे बाद मुंबई महानगर पालिका ने कंगना रनौत के ऑफिस पर छापा मार दिया।

इससे पहले कंगना रनौत ने ट्वीट कर संजय राउत से कहा था कि यह उनका देश है और वे कहीं भी जा सकती हैं। कंगना सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में परिवारवाद, ग्रुपिज्म व ड्रग एंगल की बात लगातार उठाती रही हैं। वे इस मामले में लगातार सुशांत की मौत को साजिश बताती रही हैं।

संजय राउत ने कंगना को हरामखोर कहा था। गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को धमकी देते हुए कहा था कि वह फिल्म ‘माफिया’ से ज्यादा शहर के पुलिस बल से डरने वाले अपने बयान के बाद वापस मुंबई जाने से परहेज करें।

HSTDV : इस अत्याधुनिक तकनीक के सफल प्रयोग के साथ ही विश्व का चौथा देश बना भारत, राजनाथ सिंह ने दी बधाई

भारत ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह परीक्षण स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करके किया गया। इससे पहले जून 2019 में इसका पहला परीक्षण किया गया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार (सितंबर 07, 2020) को HSTDV के सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “DRDO ने आज स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रपल्शन प्रणाली का उपयोग करते हुए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर वाहन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस सफलता के साथ, सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियाँ अब अगले चरण की प्रगति के लिए स्थापित हो गई हैं।”

उल्लेखनीय है कि HSTDV का भविष्य में न केवल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा, बल्कि इसकी मदद से काफी कम लागत में सैटेलाइट लॉन्चिंग की जा सकेगी। HSTDV हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए यान के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक दोहरे उपयोग की तकनीक है और कई असैन्य कार्यों में भी इसका प्रयोग किया जाएगा।

हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने के लिए एक मानव रहित HSTDV माख 6 (Mach 6) की गति से क्रूज कर सकता है और महज 20 सेकंड में 32.5 किमी की ऊँचाई तक जा सकती है और एक बार इसे सफलतापूर्वक हासिल करने के बाद, भारत उन देशों के चुनिंदा क्लब में प्रवेश करेगा, जिनके पास ऐसी तकनीक है।

यह विमान हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली विकसित करने संबंधी देश के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ओडिशा के बालासोर में एपीजे अब्दुल कलाम परीक्षण रेंज (व्हीलर द्वीप) से हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने और सफलतापूर्वक परीक्षण करने के बाद भारत अब संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया। यह स्वदेशी तकनीक ध्वनि की गति (माख 6) की छह गुना गति से यात्रा करने वाली मिसाइलों के निर्माण का रास्ता आसान करेगी।

DRDOद्वारा विकसित HSTDV का परीक्षण आज सुबह 11.03 बजे अग्नि मिसाइल बूस्टर का उपयोग कर के किया गया और पाँच मिनट तक चला।

इस आधुनिक तकनीक के सफल प्रयोग और इसकी भविष्य की संभावनाओं से अवगत लोगों का कहना है कि इस परीक्षण का मतलब है कि DRDO में अगले पाँच वर्षों में स्क्रैमजेट इंजन के साथ एक हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की क्षमता होगी, जिसमें दो किलोमीटर प्रति सेकंड से अधिक की क्षमता होगी।

सोमवार सुबह 11.03 बजे, अग्नि मिसाइल बूस्टर इस हाइपरसोनिक वाहन को 30 किमी की ऊँचाई तक ले गया, जिसके बाद वे अलग हो गए। इसके बाद, वाहन का एयर इनटेक खुल गया और जिसके कारण परीक्षण स्क्रैमजेट इंजन को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाहन ने सभी पूर्व-निर्धारित पैरामीटर्स पर सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिसमें 2500 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और हवा की गति को संभालने की क्षमता भी शामिल है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण के तुरंत बाद DRDO को बधाई दी और स्वदेशी रूप से एक स्क्रैमजेट इंजन बनाने के उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

पहले संजय राउत ने कंगना को हरामखोर कहा और अब शिवाजी की दुहाई देकर कह रहे ‘हम महिलाओं का सम्मान करते हैं’

संजय राउत ने कंगना रनौत को ‘हरामखोर’ कह कर संबोधित किया था। एक महिला पर ऐसी अभद्र टिप्पणी के चलते संजय राउत की जम कर आलोचना हुई। बड़े पैमाने पर विरोध होने के बाद संजय राउत अब उस बयान का डैमेज कंट्रोल करते हुए नज़र आ रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे लोगों में ऐसा संदेश जाए कि वह एक महिला का सम्मान नहीं करते हैं। 

कंगना रनौत के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करने वाले के बाद संजय राउत ने परिस्थितियों को अपने हित में करने के लिए शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक हिंदूवादी चेहरों का उल्लेख किया। उन्होंने इतना कुछ इसलिए किया जिससे ऐसा लगे कि शिवसेना महिलाओं का सम्मान करती है। इसके पहले भी शिवसेना और उनके प्रवक्ता संजय राउत को अमर्यादित और असंसदीय भाषा का उपयोग करने के चलते आलोचना का सामना करना पड़ा है। 

क्षेत्रवाद का अहंकार दिखाते हुए संजय राउत ने लिखा जो शिवसेना पर महिलाओं के अपमान का आरोप लगा रहे हैं वह खुद मुंबई और मुंबई देवी का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “लोगों को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि वह इस तरह के आरोप लगा कर मुंबई और मुंबई देवी का अपमान कर रहे हैं।” इसके बाद संजय राउत ने लिखा शिवसेना महिलाओं के सम्मान के लिए लगातार लड़ती रहेगी। शिवसेना सुप्रीमो ने भी हमें यही सिखाया है।

संजय राउत की तरफ से किया गया इतना बड़ा दावा कि शिवसेना महिलाओं का सम्मान करती है कंगना रनौत पर की गई टिप्पणी से आधार पर बिलकुल सही साबित नहीं होता है। दरअसल हाल ही में कंगना ने इस बात पर चिंता जताते हुए बयान दिया था कि मुंबई पाक अधिकृत कश्मीर जैसा लगने लगा है। ख़ासकर जब से मुंबई में ‘आज़ादी के नारे’ नज़र आने लगे हैं। कंगना ने मुंबई की दीवारों पर लिखे गए आज़ादी के नारों पर आपत्ति जताई थी। इस पर संजय राउत ने उन्हें मुंबई में कदम नहीं रखने की धमकी दे दी थी। 

इस पर कंगना ने कहा था कि उन्हें मुंबई आने से कोई नहीं रोक सकता है। कंगना के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा था, “महाराष्ट्र के बाप छत्रपति शिवाजी महाराज हैं, मुझे लगता है ऐसे व्यक्ति के बाप को इधर लाकर दिखाना पड़ेगा। आप भी (रिपोर्टर) अपना बाप दिखाइये अगर है तो।”

इस बात पर न्यूज़ नेशन के पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या आप कोई गैर क़ानूनी कार्रवाई करेंगे जिससे कंगना रनौत मुंबई में दाखिल न हों पाएँ। इस बात का जवाब देते हुए संजय राउत ने कहा, “क़ानून क्या है? उस लड़की ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है क्या वह क़ानून का सम्मान था? आप उस ‘हरामखोर लड़की के वकील की तरह क्यों बात कर रहे हैं?”       

4 ईसाई संगठनों सहित 6 NGO के विदेशी चंदा लेने पर रोक, 2 US दानदाता भी शक के घेरे में

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल चार ईसाई संगठनों के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया है। बता दें कि किसी भी संगठन के लिए विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए गृह मंत्रालय से एफसीआरए मँजूरी होना अनिवार्य है।

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, जिन चार ईसाई समूहों का FCRA सस्पेंड किया गया है, उनमें झारखंड का Ecreosoculis North Western Gossner Evangelical, मणिपुर का Evangelical Churches Association (ECA), झारखंड का Northern Evangelical Lutheran Church और मुंबई स्थित New Life Fellowship Association (NLFA) शामिल हैं। इसके अलावा दो अमेरिकी दानदाता Seventh Day Adventist Church और Baptist Church भी मंत्रालय के शक के घेरे में हैं। ये दोनों यूएस बेस्ड हैं।

न्यूजीलैंड में न्यू लाइफ चर्चों के मिशनरियों के आगमन के बाद 1964 में न्यू लाइफ फैलोशिप एसोसिएशन भारत में अस्तित्व में आया। सरकार ने 10 फरवरी, 2020 को इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इससे पहले, बजरंग दल ने अप्रैल और सितंबर 2019 में एसोसिएशन द्वारा ‘प्रार्थना सभाओं’ में खलल डाली थी और लोगों का धर्मांतरण करने के लिए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज की थी।

इसी प्रकार, Evangelical Churches Association की उत्पत्ति वेल्श प्रेस्बिटेरियन मिशनरी से हुई, जो 1910 में भारत आया था। यह 1952 में एक पूर्ण एसोसिएशन बन गया। इसे मणिपुर से संचालित किया जाने लगा। द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है कि Ecreosoculis North-Western Gossner Evangelical, जिसका FCRA लाइसेंस हाल ही में निलंबित कर दिया गया है, को छोटानागपुर, जर्मनी के गॉसनर मिशन से ट्रेस किया जा सकता है। चौथा एसोसिएशन, Northern Evangelical Lutheran Church 1987 में भारत में स्थापित किया गया था और इससे 99 देशों के लगभग 7.7 करोड़ ईसाई जुड़े हुए हैं।

इन चार ईसाई एसोसिएशनों के अलावा सरकार ने दो अन्य संगठनों के भी FCRA लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इन संगठनों के नाम राजनांदगाँव लेप्रोसी हॉस्पिटल एंड क्लीनिक और डॉन बॉस्को ट्राइबल डेवलपमेंट सोसायटी हैं। गृह मंत्रालय ने अब तक 20,674 लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। फिलहाल 22,457 गैर-सरकारी संगठनों के पास FCRA लाइसेंस हैं और लगभग 6,702 संगठनों के लाइसेंस की समय सीमा समाप्त हो गई है। मोदी सरकार के पहले पाँच वर्षों में, 14,800 से अधिक गैर सरकारी संगठनों को FCRA नियमों के उल्लंघन के लिए अपंजीकृत किया गया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल रिपोर्टों में बताया गया कि दक्षिण भारत के कई पेंटेकोस्टल ने आर्थिक सहायता के कारण अपने धार्मिक अभियानों को रोक दिया है। पादरी को अब ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार के काम के लिए वेतन नहीं मिल रहा। वो अब बैंक का लोन चुकाने में भी असमर्थ हैं, जो कि उन्होंने अपने घर और वाहन खरीदने के लिए बैंक से लिए थे। सिर्फ केरल की ही बात करें, तो वहाँ पर 100 से अधिक पेंटेकोस्टल मिशन सार्वजनिक स्थानों और सड़क के किनारे प्रचार करते हैं।

पेंटेकोस्टल मिशन मुख्य रूप से विदेशी फंडों पर निर्भर हैं। कड़े विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के मानदंडों सहित मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों से इन विदेशी फंडों में भारी कमी आई है। 2014 तक केरल को प्रति वर्ष 100 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि प्राप्त हुई, जो केंद्र सरकार द्वारा धन के विवरण और स्रोत की माँग के बाद अचानक बंद हो गई। ऑर्गनाइज़र की रिपोर्ट के मुताबिक FCRA क्रैकडाउन के परिणामस्वरूप धन के विदेशी प्रवाह में अचानक 40% की अचानक गिरावट आई है।