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डोनाल्ड ट्रंप नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित, UAE-इजराइल में शांति समझौते कराने के लिए आगे बढ़ाया गया नाम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल के नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। कथिततौर पर नॉर्वे के सांसद ने इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते कराने के लिए ट्रंप का नाम आगे बढ़ाया है।

फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वेजियन संसद के सदस्य और नाटो (NATO) संसदीय विधानसभा के अध्यक्ष क्रिश्चियन टाइब्रिंग-ग्जेडे Tybring-Gjedde ने नामांकन भरा है।

टाइब्रिंग-ग्जेडे ने कथिततौर पर दुनियाभर के देशों के बीच कई विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए ट्रंप की तारीफ भी की है। उन्होंने पहले भी ट्रम्प के लिए 2018 में सिंगापुर शिखर सम्मेलन के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए नामांकन भरा था। इस सम्मेलन की मेजबानी किम जोंग-उन ने थी।

नॉर्वे के नेता ने एक विशेष साक्षात्कार में फॉक्स न्यूज से कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए इस पुरस्कार के किसी भी दूसरे नामित सदस्य की तुलना में अधिक काम किया है।”

चार बार के सांसद टाइब्रिंग-ग्जेडे ने नोबेल शांति पुरस्कार समिति को अपने नामांकन पत्र में लिखा कि ट्रंप प्रशासन ने इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रिश्तों की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने फॉक्स न्यूज़ को आगे कहा कि, वैसे भी वह “ट्रम्प के बहुत बड़े समर्थक नहीं” है, “समिति को तथ्यों को देखना चाहिए और तथ्यों के अनुसार ही उनको जज करना चाहिए। न कि उस तरह से जैसा व्यवहार वह कभी-कभी करते है।”

नॉर्वे के नेता ने यह भी कहा कि हाल ही के वर्षों में जिन लोगों को शांति पुरस्कार मिला है, उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प की तुलना में बहुत कम काम किया है। जैसे कि, “बराक ओबामा ने कुछ नहीं किया।”

कंगना के समर्थन में आईं नामी हस्तियाँ: छोटे पर्दे, बॉलीवुड, पत्रकारों से लेकर राजनेता भी उठा रहे आवाज

कंगना रनौत की संपत्ति पर बीएमसी की कार्रवाई ने महाराष्ट्र सरकार को एक बार फिर सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। ट्विटर पर लोग लगातार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग कर कर पूछ रहे हैं कि ये सब आखिर कितना उचित था? राजनीति से लेकर बॉलीवुड से जुड़े कई मशहूर नाम BMC की इस ‘गुंडागर्दी’ की खुल कर आलोचना कर रहे हैं।

बॉलीवुड कलाकार अनुपम खेर ने इस कार्रवाई को बिलकुल गलत बताया है। उन्होंने लिखा, “ग़लत ग़लत ग़लत है!! इसको bulldozer नहीं #Bullydozer कहते हैं। किसी का घरोंदा इस बेरहमी से तोड़ना बिल्कुल ग़लत है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव या प्रहार कंगना के घर पर नहीं बल्कि मुंबई की ज़मीन और ज़मीर पर हुआ है। अफ़सोस अफ़सोस अफ़सोस है।”

वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस ने वीडियो जारी कर इस कदम का विरोध किया है और कहा है कि ऐसा इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि अपने खिलाफ बात करने वालों को हम रास्ते में रोक के मारेंगे और ऐसा सरकार के समर्थन से होगा, ऐसा महारष्ट्र के इतिहास में कभी भी नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के इस कार्रवाई के कारण महाराष्ट्र का देश में अपमान हो रहा है।

वह कहते हैं, “अगर अवैध निर्माण है तो जरूर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन सबके साथ ये कार्रवाई होती तो सही कार्रवाई होती। किसी ने जब आपके ख़िलाफ़ बात कही तब जो आप कार्रवाई करते हो तो ये कायरता है, बदले की भावना है और महाराष्ट्र में इस प्रकार की भावना का कोई सम्मान नहीं हो सकता।”

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय लिखते हैं, “कोरोना प्रबंधन में ऐसे रिकॉर्ड होने के बावजूद शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस का गठबंधन सोचता है कि उनके लिए कंगना रनौत के कार्यालय को ध्वस्त करना सबसे पहली प्राथमिकता है। राज्य मिशनरी का इस तरह का दुरुपयोग सिर्फ़ इसलिए हो रहा है कि क्योंकि एक महिला के पास अपना दिमाग है और वो बोलने से डरती नहीं है। “

छोटे पर्दे की मशहूर कलाकार देवोलीना उर्फ गोपी बहू ने भी कंगना के साथ हुई घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा, “एक जाना-पहचाना चेहरा होने के चलते, मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कोई अवैध निर्माण किया होगा और उन्होंने ये भी कहा है कि उनके पास बीएमसी द्वारा दी गई परमीशन के सबूत भी हैं। ऐसे में उनके मुंबई पहुँचने और कागजात दिखाने से पहले बिल्डिंग गिराना, सही नहीं है। मुझे लगता है कि उन्हें इंतजार करना चाहिए था और उन्हें एक अल्टीमेटम देना चाहिए था, अगर कुछ गलता था और उसे फिक्स किया जाना था तो लेकिन उनकी अनुपस्थिति में ऑफिस का तोड़ा जाना गलता है।”

देवोलीना का कहना है, “ये उनके द्वारा किया गया बहुत अजीब काम है और मैं इसे बिल्कुल सपोर्ट नहीं करती हूँ। अगर कुछ मौखिक रूप से शुरू हुआ है तो उन्हें इस पर मौखिक रूप से ही जवाब देना चाहिए था।”

इसी तरह न्यूज नेशन के एंकर दीपक चौरसिया लिखते हैं, “वो लोग जो दिनभर फ़ासीवाद और तानाशाही का राग अलापते रहते हैं, उन्हें महाराष्ट्र सरकार के फ़ैसले पर फ़ासीवाद नहीं दिख रहा है। कंगना रनौत के घर पर बुलडोजर चलना मतलब एक महिला से डरकर पूरी सरकार हिल रही है।”

समाचार चैनल ‘आज तक’ के पत्रकार रोहित सरदाना बीएमसी की इस कार्रवाई पर कहते हैं, “फ़ासिज़्म-फ़ासिज़्म चिल्लाने वाले अब कहाँ घुस गए? असली फ़ासिज़्म देख के साँप सूँघ गया क्या?”

बता दें, आज मुंबई पहुँचने के बाद कंगना ने अपने ट्विटर पर कुछ वीडियोज साझा की है। इन वीडियोज में हम देख सकते हैं बीएमसी ने उनके कार्यालय के भीतर किस तरह तोड़फोड़ मचाई है। हर जगह सामान टूटे पड़े हैं। दीवारें गिरी हुई हैं। शीशे चकनाचूर हैं। तारें भी काट दी गई हैं। ऐसे में उन्होंने उद्धव ठाकरे को संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा:

“उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है, तूने फिल्म माफिया के साथ मिल कर मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है। आज मेरा घर टूटा है। कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक्त का पहिया है। याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता। मुझे लगता है तुमने मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है। क्योंकि मुझे पता तो था कि कश्मीरी पंडितों पे क्या बीती होगी, लेकिन आज मैंने महसूस किया है। और आज मैं इस देश को वचन देती हूँ कि मैं सिर्फ़ अयोध्या पर ही नहीं कश्मीरी पंडितों पर भी एक फिल्म बनाऊँगी। मैं अपने देशवासियों को जगाऊँगी क्योंकि मुझे पता था हमारा साथ होगा तो होगा। लेकिन ये मेरे साथ हुआ है। इसका कोई मतलब है इसके कोई मायने हैं और उद्धव ठाकरे ये जो क्रूरता और आतंक है। अच्छा हुआ ये मेरे साथ हुआ क्योंकि इसके कुछ मायने हैं। जय हिंद! जय महाराष्ट्र!“

देशद्रोही पत्रकार, सुपारीबाज कलाकार का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’: शिवसेना के मुखपत्र सामना में कंगना-अर्नब पर निशाना

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत और मुंबई अस्मिता का मामला उठाते हुए शिवसेना ने मुखपत्र ‘सामना’ में अभिनेत्री कंगना रनौत और रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी पर निशाना साधा है।

बिना नाम लिए अर्नब और कंगना पर निशाना

सामना में फिर एक बार आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए शिवसेना ने लिखा है कि राजनीतिक एजेंडे को सामने लाने के लिए देशद्रोही पत्रकार और सुपारीबाज कलाकारों के राजद्रोह का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’ ही है। इससे पहले दोनों के खिलाफ दो विधायक एक दिन पहले विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लाए थे।

‘मुंबई का अपमान बिगड़ी मानसिकता के लक्षण’

कंगना के मुंबई की तुलना पाक अधिकृत कश्मीर से करने वाले बयान पर सामना में लिखा है कि मुंबई किसकी? यह सवाल कोई न पूछे। मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी और देश का सबसे बड़ा आर्थिक लेन-देन का केंद्र भी है। इसी मुंबई के लिए 106 मराठी लोगों ने बलिदान दिया है। मुंबई ईमान से रहने वाले सब लोगों की है। मुंबई की तुलना ‘पाक अधिकृत’ कश्मीर से करना और मुंबई पुलिस को माफिया बोलकर खाकी वर्दी का अपमान करना बिगड़ी हुई मानसिकता के लक्षण हैं।

बेईमानों के साथ खड़े लोगों को लगेगी बद्दुआ

संपादकीय में यह भी लिखा गया कि जो लोग महाराष्ट्र के बेईमानों के साथ खड़े हैं, उन्हें 106 शहीदों की बद्दुआ तो लगेगी ही। साथ ही, राज्य की 11 करोड़ जनता भी उन्हें माफ नहीं करेगी। छत्रपति शिवाजी के महाराष्ट्र पर नशे की पिचकारी फेंकने वाले को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा का सम्मान दे रही है।

कंगना को वाई श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र की 11 करोड़ मराठी जनता और मुंबई का अपमान देशद्रोह जैसा अपराध है। लेकिन जब ऐसा अपराध करने वाले लोगों के साथ राष्ट्रभक्त मोदी सरकार का गृह मंत्रालय सुरक्षा कवच देकर खड़ा होता है, तब हमारे 106 शहीद स्वर्ग में आँसू बहा रहे होंगे।

पीओके से तुलना कर हमारी देवी का अपमान

इसमें आगे कहा गया है कि मुंबई पर अपना हक जताने वाले बहुत सारे लोग आगे आए हैं। लेकिन मुंबई मुंबा देवी का ही प्रसाद है। मुंबई या मुंबा देवी कोली लोगों की कुलदेवी हैं। ‘मुंग’ नामक एक कोली ने इस देवी की स्थापना की इसलिए उसका नाम पहले ‘मुंगाची आई’ पड़ा और ‘महा-अंबाआई’ और फिर उसके बाद ‘मुंबाई’ का आसान नाम देवी को मिला, ऐसा कई लोगों को लगता है। कोई कहता है कि मुंबई ‘मृण्मयी’ का ही रूप है। ऐसी ‘देवी’ स्वरूप माँ की तुलना पाक अधिकृत क्षेत्र से करके हमारी देवी का अपमान किया गया।

कंगना के बहाने चीन पर केंद्र को घेरा

कंगना विवाद के बहाने शिवसेना ने चीन से जारी सीमा विवाद को लेकर भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की है। सामना ने लिखा, “आज जिस प्रकार से सारे भाजपा वाले महाराष्ट्र द्रोहियों के साथ खड़े हैं, उसी विश्वास से हमारी सीमा में घुसे चीनी बंदरों के बारे में हिम्मत दिखाई होती तो लद्दाख और अरुणाचल की सीमा पर देश की बेइज्जती ना होती।”

‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम’ होगा अयोध्या एयरपोर्ट का नाम: अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की भी तैयारी

भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में बनने जा रहे एयरपोर्ट का नाम ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम’ होगा। इसके साथ ही सरकार ने एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की भी कवायद शुरू कर दी है। यह उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का 5वाँ एयरपोर्ट होगा एयरपोर्ट का निर्माण 2021 में दिसंबर माह तक पूरा करने की योजना है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अयोध्या तैयार हो रही है। अयोध्या के कायाकल्प के लिए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार कोई कमी नहीं कर रही है।

एक अधिकारी ने बुधवार (सितंबर 9, 2020) को बताया कि श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने एयरपोर्ट के विस्तार की योजना बनाई है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2017 तक अयोध्या एयरपोर्ट का विकास दो चरणों में करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए हुए टेक्नो-इक्नोमिक सर्वे में पहले चरण में एटीआर-72 विमानों के लिए विकसित किया जाना था। इसमें रन-वे की लंबाई 1680 मीटर रखी जानी थी। दूसरे चरण में ए-321, 200 सीटर विमानों के संचालन के लिए एयरपोर्ट विकसित होना था।

इसमें रन-वे की लंबाई 2300 मीटर प्रस्तावित थी। बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एयरपोर्ट को बोइंग-777 विमानों के योग्य बनाने और उसका नाम बदलने की घोषणा की थी। इसके बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने पिछले साल पाँच मई को भौतिक सर्वे करने के बाद संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।

उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा, “योगी सरकार ने अयोध्या स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए 525 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 300 करोड़ रुपए अब तक खर्च किया जा चुका है। जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, इस बारे में जल्दी ही एक समीक्षा बैठक भी अधिकारियों की बुलाई जाएगी।”

रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में ए-321 विमानों के संचालन के लिए 463.10 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। इसमें रन-वे की लंबाई 3,125 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। दूसरे चरण में बाइंग 777 जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए 122.87 एकड़ जमीन की अतिरिक्त आवश्यकता होगी।

इसमें रन-वे की लंबाई 3,750 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। वहीं, एयरपोर्ट के संचालन व सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्र के लिए आसपास 15 एकड़ भूमि की जरूरत बताई गई। इस तरह एयरपोर्ट के लिए कुल 600 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी।

मौजूदा समय में पर्यटन विभाग की ओर से समेकित पर्यटन के लिए विकास के कई काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। इसके अलावा सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर थीम बेस्ड गेट के निर्माण, परिक्रमा पथों के विकास, कुंडों का जीर्णोद्घार, टूरिस्ट फैसिलिटेशन के निर्माण, पार्किंग, यात्री सुविधाओं और फूडकोर्ट के निर्माण आदि के लिए केंद्र सरकार को 200 करोड़ का प्रस्ताव भी विभाग की ओर से शीघ्र ही केंद्र को भेजा जाना है।

मुख़्तार अंसारी से जुड़े 25 वाहनों को किया गया जब्त, ₹4.29 करोड़ है कीमत: गैंगस्टर एक्ट के तहत वसूली गैंग पर शिकंजा

उत्तर प्रदेश में पूर्व सांसद मुख़्तार अंसारी पर कार्रवाई लगातार जारी है और उसकी व उसके गुर्गों की संपत्ति को एक-एक कर जब्त किया जा रहा है। उसके गिरोह IS-191 के लिए काम करने वाले करीबियों पर मऊ जनपद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक उसकी 25 वाहनों को सीज किया जा चुका है। सभी सीज किए वाहनों की कीमत 4.29 करोड़ रुपए बताई गई है। मऊ में हो रही इस कार्रवाई से हिस्ट्रीशीटर नेता की कमर टूट गई है।

हालिया कार्रवाई में मुख़्तार अंसारी के वसूली गैंग के करीबी सुरेश सिंह के नाम से चलने वाले 2 ट्रकों को जब्त किया गया, जिनकी कीमत 68 लाख रुपए है। सुरेश पर पिछले 10 दिनों से कार्रवाई जारी है और लगातार वाहनों को जब्त किया जा रहा है। मऊ में पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चला रही है और इसी क्रम में उसके अवैध वसूली गैंग के सहयोगी सुरेश सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, उसके दो ट्रकों को थाना कोतवाली पुलिस द्वारा 14(1) गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्त करने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। ट्रक यूपी 54 टी 8109 और ट्रक यूपी 54 एटी 1231को जब्त किया गया। दोनों की कीमत 34-34 लाख रुपए है। इससे पहले सितम्बर 1 को भी 86 लाख रुपए की कीमत वाली 4 बसों को जब्त किया गया था। इसके बाद सितम्बर 3 को 1.54 करोड़ रुपए की 9 वाहनों को सीज किया गया।

इसके बाद सितम्बर 7 को 1.7 करोड़ रुपए की कीमत वाले 10 वाहनों को भी इसी एक्ट के तहत जब्त किया गया। अब तक के कुल आँकड़ों को देखें तो 4 करोड़ 28 लाख और 95 हज़ार रुपए की कीमत वाली 25 वाहनों को जब्त किया जा चुका है। सुरेश सिंह ने अवैध वसूली के धन से ये वाहन खरीदे थे। एसपी मनोज कुमार सोनकर ने जानकारी दी है कि सुरेश सिंह मुख्तार के वसूली गिरोह डी-34 का सक्रिय सदस्य है।

गौरतलब है इससे पहले मऊ में जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कहे जाने वाले रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर बुलडोजर चलवाया था। इसकी कुल कीमत करीब 40 लाख रुपए थी। पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ इसे ध्वस्त कर दिया गया था। लखनऊ में प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को भी ध्वस्त किया था।

उधर मुख़्तार अंसारी के गुर्गे मेराज अहमद खान का शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है। मेराज अहमद खान गाजीपुर का निवासी है और काफी समय से मुख्तार गैंग से जुड़ा हुआ है। जैतपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर के पुलिस कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। दरअसल, फर्जी तरीके से पिस्टल का लाइसेंस रिनुअल कराने के मामले में मेराज अहमद खान के खिलाफ जाँच चली थी, जिसमें आरोप को सही पाया गया। 

मैं इस देश को वचन देती हूँ, अब न सिर्फ़ अयोध्या पर फिल्म बनाऊँगी, बल्कि कश्मीर पर भी बनाऊँगी: CM उद्धव को कंगना का संदेश

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत आज दोबारा मुंबई लौट आईं। उन्हें कड़ी सुरक्षा में एयरपोर्ट से बाहर निकाल कर उनके घर पहुँचाया गया। घर जाते ही कंगना ने अपने ट्विटर पर कुछ वीडियो साझा कीं। इन वीडियोज को शेयर करते हुए उन्होंने बीएमसी की कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया। अपनी हर वीडियो पर उन्होंने #DeathOfDemocracy लिखा।

इन वीडियोज में हम देख सकते हैं बीएमसी ने उनके कार्यालय के भीतर किस तरह तोड़फोड़ मचाई है। हर जगह सामान टूटे पड़े हैं। दीवारें गिरी हुई हैं। शीशे चकनाचूर हैं। तारें भी काट दी गई हैं।

इन वीडियोज के बाद अपनी एक अन्य वीडियो में उन्होंने उद्धव ठाकरे को संदेश दिया है। कंगना ने कहा, “उद्धव ठाकरे, तुझे क्या लगता है, तूने फिल्म माफिया के साथ मिल कर मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है। आज मेरा घर टूटा है। कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक्त का पहिया है। याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता। मुझे लगता है तुमने मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है। क्योंकि मुझे पता तो था कि कश्मीरी पंडितों पे क्या बीती होगी, लेकिन आज मैंने महसूस किया है। “

वह आगे कहती हैं, “और आज मैं इस देश को वचन देती हूँ कि मैं सिर्फ़ अयोध्या पर ही नहीं कश्मीरी पंडितों पर भी एक फिल्म बनाऊँगी। मैं अपने देशवासियों को जगाऊँगी क्योंकि मुझे पता था हमारे साथ होगा तो होगा। लेकिन ये मेरे साथ हुआ है। इसका कोई मतलब है इसके कोई मायने हैं और उद्धव ठाकरे ये जो क्रूरता और आतंक है। अच्छा हुआ ये मेरे साथ हुआ क्योंकि इसके कुछ मायने हैं। जय हिंद! जय महाराष्ट्र!”

बता दें, कंगना ने घर पहुँचने से पहले कहा था, महाराष्ट्र सरकार और उसके गुंडे अवैध रूप से उनकी संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जारी रखो, इससे उनके आत्मबल में और वृद्धि ही होती जाएगी। कंगना ने भावुक होकर ट्विटर पर लिखा कि ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में पहली फ़िल्म ‘अपराजित अयोध्या’ की घोषणा हुई थी। कंगना रनौत ने कहा कि यह उनके लिए एक इमारत नहीं बल्कि राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

कंगना रनौत ने आगे कहा कि राम मंदिर फिर टूटेगा मगर बाबर को ये याद रखना चाहिए कि यह मंदिर फिर बनेगा। साथ ही उन्होंने बीएमसी और मुंबई पुलिस की वो तस्वीरें भी शेयर की, जो उनके दफ्तर के हिस्सों को तोड़ने की प्रक्रिया में लगी हुई थी।

कंगना के दफ्तर में तोड़फोड़ करने वाला BMC दाऊद से जुड़े खतरनाक इमारत पर चुप क्यों? हाईकोर्ट लगा चुका है फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज कंगना रनौत के दफ्तर के हिस्सों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी। बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC) और मुंबई पुलिस की टीम बुलडोजरों के साथ कंगना रनौत के दफ्तर पहुँची थी, जहाँ उसके कई हिस्सों को तोड़ भी डाला गया। इसके बाद कंगना रनौत भी मुंबई पहुँचीं। अब जब BMC पर कई सवाल उठ रहे हैं, ये भी याद करना ज़रूरी है कि उसने भिंडी बाजार में आतंकी दाऊद इब्राहिम से इमारत को लेकर हाईकोर्ट से डाँट सुनी थी।

जून 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC और महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) को फटकार लगाते हुए पूछा था कि उन्होंने भिंडी बाजार में स्थित जीर्ण-शीर्ण इमारत को क्यों नहीं ध्वस्त किया? हाईकोर्ट की एकल पीठ ने तभी चेताया था कि मानसून आने पर अगर ये इमारत या इसका कोई हिस्सा गिरता है तो इससे जानमाल की क्षति हो सकती है। उस इमारत का नाम है- हाजी इस्माइल मुसाफिरखाना।

उन इमारतों की मरम्मत और प्रबंधन का काम देखने वाली SBUT ने तब कोर्ट में बताया था कि वो उसमें रह रहे किराएदारों को कहीं और शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है। अधिवक्ता फज़ल महमूद के जरिए इस इमारत में निचले फ्लोर पर रह रहे लोगों ने अर्जी दी थी कि इस इमारत को इसीलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि एक तो इसके भीतर मस्जिद है और ऊपर से ये वक़्फ़ की संपत्ति है। वहीं MHADA ने लॉकडाउन में कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर इसे बाद में ध्वस्त करने की बात कही थी।

हालाँकि, अदालत ने कहा था कि अगर इस इमारत के भीतर मस्जिद है फिर भी जनता की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करनी ही पड़ेगी। जज ने आश्चर्य जताया था कि BMC और MHADA के पास पूरी ताकत होने के बावजूद इसे गिराया क्यों नहीं जा रहा? बता दें कि मुसाफिरखाना बिल्डिंग को अंडरवर्ल्ड आतंकी दाऊद इब्राहिम के भारत में अंतिम पते के रूप में जाना जाता है। वो यहीं पर रहा करता था। ये पकमोडिया स्ट्रीट के प्लाट नंबर 33 पर स्थित है।

दाऊद इब्राहिम 1986 में इसके दूसरे फ्लोर पर रहा करता था। उसने पूरे फ्लोर पर ही कब्जा किया हुआ था। उसके बाद उसकी अम्मी अमीनाबाई ने यहाँ कब्जा किया। बाद में टाडा कोर्ट ने इस पूरी संपत्ति को अटैच करने का आदेश दिया क्योंकि 1993 बम ब्लास्ट केस में दाऊद इब्राहिम भगोड़ा सिद्ध हो चुका था। दिसंबर 2019 में ही हाईकोर्ट ने इस इमारत को ध्वस्त करने की इजाजत दे दी थी। ये इमारत 80 साल पुराना है।

इधर BMC की करतूत पर कंगना रनौत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और उसके गुंडे अवैध रूप से उनकी संपत्ति को ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये सब जारी रखो, इससे उनके आत्मबल में और वृद्धि ही होती जाएगी। कंगना ने भावुक होकर ट्विटर पर लिखा कि ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ में पहली फ़िल्म ‘अपराजित अयोध्या’ की घोषणा हुई थी। कंगना रनौत ने कहा कि यह उनके लिए एक इमारत नहीं बल्कि राम मंदिर ही है, आज वहाँ बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

‘फेक न्यूज़’ फैलाने वाली पत्रकार राणा अय्यूब का कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव, नवी मुंबई में तलाश रहीं बेड

विवादास्पद पत्रकार एवं फेक न्यूज़ पेडलर राणा अय्यूब का कोरोना वायरस टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने इस बात की जानकारी बुधवार (9 सितंबर, 2020) को ट्वीटर के जरिए दी है। राणा ने ट्वीट किया कि बीती रात उनका ऑक्सीजन लेवल काफी डाउन हो गया, जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में इस बात का दावा किया वह खुद को किसी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए नवी मुंबई में एक बेड की तलाश कर रही है।

गौरतलब है कि मार्च 2020 में चीन से पूरी दुनिया मे फैले कोरोना वायरस महामारी के समय राणा अय्यूब का कहना था कि नैतिक रूप से भ्रष्ट होने के कारण भारत में हर कोई अंदर से इतना ‘मरा’ है, कि एक वायरस इन्हें (भारतीयों को) क्या मार सकता है?

इतना ही नहीं अयूब को काफी बार महामारी के दौरान गलत सूचना और फर्जी खबरें फैलाते हुए पकड़ा गया है। महामारी के दौरान उन्होंने एक वीडियो साझा किया था। जिसमें उन्होंने फर्जी दावा किया था कि भुखमरी की वजह से श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि उसकी मौत स्वास्थ्य स्थिति के कारण हुई थी।

वहीं राणा तबलीग़ी जमातियों का भी महिमामंडन करते हुए नजर आई थी जब कोरोना वायरस के शुरुआती दौर में इन लोगों ने वायरस के प्रसार में हॉटस्पॉट का काम किया था। इसके अलावा उन्होंने प्रवासी मजदूरों की फर्जी तस्वीरों को फैलाने और लोगों को गुमराह करने का काम भी किया था।

उच्च कोटि का मादक पदार्थ लेते हैं The Print वाले, सुषमा स्वराज की तुलना सुब्रमण्यम स्वामी से करने पर कम से कम यही महसूस होता है

सुशांत सिंह आत्महत्या के सिलसिले में हाई-प्रोफाइल ड्रग एंगल निकलने का बाद गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती, शोविक और अन्य ने गाँजा (मारिजुआना) के सेवन की बात कबूली। लेकिन ऐसा लगता है कि शेखर गुप्ता के The Print में काम कर रहे लोग भी किसी उच्चतम क्वालिटी के मादक पदार्थ का सेवन करते हैं। शेखर गुप्ता की वेबसाइट The Print पर हाल ही में प्रकाशित हुए लेख इस बात के प्रमाण हैं।

इससे पहले कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो उनके कार्यालय में जाकर The Print के साथ काम करने वाले कर्मचारियों का परीक्षण करने लगें, हम शुरुआत में ही यह स्पष्ट करना चाहेंगे कि हमारे द्वारा शेखर गुप्ता के ‘दी प्रिंट’ के पत्रकारों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले वीड के नशे लेने की बात पूरी तरह से आलंकारिक है।

क्योंकि अगर ऐसा यह उच्च-गुणवत्ता वाले वीड का सेवन नहीं कर रहे हैं, तो फिर ‘दी प्रिंट’ ने क्यों एक ऐसा लेख प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया है कि भाजपा आईटी सेल अपने ही नेताओं के साथ निष्ठुरता से पेश आ रही है?

‘दी प्रिंट’ ने सुब्रमण्यम स्वामी की आलोचना की तुलना सुषमा स्वराज से की है

‘दी प्रिंट’ के इस लेख ने भाजपा के दो नेताओं द्वारा ऑनलाइन आलोचना को एक समान बताने की कोशिश की है। लेखक के अनुसार, इन दोनों नेताओं को बीजेपी आईटी सेल के उपहास और आलोचना का शिकार होना पड़ा।

लेख में कहा गया है कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी पर भाजपा आईटी सेल के सदस्यों द्वारा उसी तरह से हमला किया जा रहा है, जैसे पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 2018 में एक हिंदू-मुस्लिम दंपति को पासपोर्ट देने के फैसले के लिए ऑनलाइन मजाक उड़ाया गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि उन्हें भाजपा आईटी सेल के सदस्यों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ऑनलाइन ट्रोल किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने JEE-NEET परीक्षा को स्थगित करने के समर्थन में बात की है, जो कि इस पर सरकार के रुख के विपरीत है। दी प्रिंट के इस लेख का कहना है कि भाजपा आईटी सेल के सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी पर अमित मालवीय के इशारे पर हमला कर रहे हैं।

2018 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को हिंदू-मुस्लिम दंपति को पासपोर्ट देने के उनके फैसले पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस दंपति ने आरोप लगाया था कि चूँकि वह शादी के बाद भी अलग-अलग धर्म को मानते हैं, इसलिए उन्हें पासपोर्ट ऑफिस द्वारा पासपोर्ट जारी नहीं किया गया और उन्हें तंग भी किया जा रहा है। तन्वी सेठ नामक महिला ने आरोप लगाया था कि लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय में तैनात अधिकारी विकास मिश्र ने उनके साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया। तन्वी सेठ और अनस सिद्दिकी ने 2007 में शादी की थी और इसके बाद उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला था।

वहीं, महिला के पति सिद्दिकी ने बताया कि पासपोर्ट ऑफिस के अधिकारी विकास मिश्र ने उनसे अपना नाम और धर्म बदलने को कहा था। हालाँकि इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी का तबादला कर दिया गया था। अधिकारी के तबादले के बाद कुछ लोगों ने विदेश मंत्रालय के इस फैसले पर सवाल खड़े किए थे। यहाँ गौर करने वाली बात है कि सुषमा स्वराज की आलोचना आईटी सेल द्वारा नहीं, बल्कि आम लोगों द्वारा किया गया था।

भाजपा के दोनों नेताओं की आलोचना के बीच अंतर बहुत गहरा है। लेकिन उस अंतर को समझने के लिए, यह आवश्यक है कि यह शांति और मर्यादा बनी रहे। हालाँकि, प्रतीत तो ये होता है कि मोदी घृणा से ओत-प्रोत ये पत्रकार अच्छी क्वालिटी का गाँजा लेने के बाद इससे कोसों दूर रहते हैं।

राजनाथ सिंह को भी किया गया था ट्रोल

यह लेख उस ट्रोलिंग का भी उल्लेख करता है, जिसे भारत के वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद उनके द्वारा किए गए ट्वीट के बाद सहना पड़ा था। तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया था कि कश्मीर के लोगों ने अमरनाथ यात्रियों पर हमले की निंदा की थी, यह दर्शाता है कि कश्मीरियत की भावना अभी भी जीवित है।

‘दी प्रिंट’ सुशांत सिंह के बहाने बिहारी परिवारों को भी कर चुका है अपमानित

लेकिन यह एकमात्र उदाहरण नहीं है जो दर्शाता है कि ‘द प्रिंट’ के लोग संभवतः मादक पदार्थ गाँजे के प्रभाव में हैं। कुछ दिनों पहले शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘दी प्रिन्ट’ के एक लेख में कहा गया था कि ‘टॉक्सिक’ बिहारी परिवारों में बच्चों पर ‘श्रवण कुमार’ बनने की जिम्मेदारी होती है। इस कथित लेख में सुशांत सिंह राजपूत के बहाने लिखा गया था कि सासें अपनी बहुओं को ‘डायन’ और ‘गोल्ड डिगर’ तक कहती हैं। साथ ही, दावा किया गया है कि युवाओं की शहरी गर्लफ्रेंड को सभी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

इस लेख में बताया गया था कि परिवार के लोग बड़े होने पर भी युवाओं को ‘मेरा लाड़ला’ समझते हैं और शादी के मामले में उसके विचारों को नहीं मानते। लिखा गया था कि गर्लफ्रेंड या पत्नी पुरुष को उसके परिवार से अलग कर देती है, बिहार में ऐसी धारणा है। साथ ही इसमें बिहारी लोकगीतों को भी लपेटा गया था और बाद में इसका दायरा बढ़ा कर उत्तर बिहार कर दिया गया। सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को भी बदनाम किया गया।

सुशांत सिंह राजपूत एक बिहारी थे और इस हिसाब से बॉलीवुड में ‘आउटसाइडर’ थे। यही कारण है कि बिहार में उनकी मौत एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। विवाद में सलमान खान का नाम आने पर उन्हें गाली देते हुए भोजपुरी गाने भी बने और राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। ये सब इसके बावजूद हुआ कि बिहार सलमान खान के बड़े बाजारों में से एक है।

इसलिए जिस स्तर तक गिरकर शेखर गुप्ता का दी प्रिंट ख़बरें प्रकशित कर रहा है, हर कोई एक बार के लिए यही संदेह करने पर विवश है कि कहीं दी प्रिंट के कर्मचारी किसी उच्चकोटि के भाँग का नशा तो नहीं करते हैं!

AltNews के मो. जुबैर को नाबालिग लड़की की डॉक्सिंग केस में दिल्ली HC से राहत, 8 हफ्ते के अंदर दिल्ली सरकार से माँगा गया जवाब

नाबालिग बच्ची की ऑनलाइन डॉक्सिंग करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज (सितंबर 9, 2020) ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर को राहत प्रदान की है। कोर्ट ने जुबैर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।

इस याचिका में जुबैर ने अपने ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 509बी, आईटी धारा 67 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग उठाई थी। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय बाल आयोग को भी निर्देश दिया है।

अदालत ने NCPCR से कहा कि वह याचिकाकर्ता की जानकारी सार्वजनिक करके जुबैर के ख़िलाफ़ लगे आरोपों पर जवाब दें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की एफआईआर में pocso एक्ट नहीं डाली गई थी।

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को लेकर इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।

NCPCR के अध्यक्ष ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए बताया था कि आयोग की ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ के अनुसार, नाबालिग लड़की की ऑनलाइन प्रताड़ना के आरोप में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई।

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में ट्विटर को भी नोटिस भेजा गया था। ट्विटर के निवेदन के बाद NCPCR ने उसे मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के सम्बन्ध में और अधिक जानकारी देने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया। जुबैर के ट्वीट के बाद उसे फॉलो करने वाले ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar ने भी बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था, इसीलिए एफआईआर में उनका नाम भी शामिल है।

यहाँ बता दें फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए नाबालिग बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। बताया गया था कि यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी।