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पुलवामा हमले में NIA ने दायर की 13500 पन्नों की चार्जशीट: मसूद अजहर मास्टरमाइंड, 29 आरोपितों में से 12 कश्मीरी

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (अगस्त 25, 2020) को चार्जशीट दायर की। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के नेटवर्क द्वारा किए गए इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। 13,500 पन्नों की ये चार्जशीट जम्मू की एक विशेष अदालत में दायर की गई। इसमें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े सरगना मसूद अजहर को मुख्य आरोपित बनाया गया है। साथ ही उसके भाई अब्दुल रउफ अशर का भी नाम है, जिसने पूरी साजिश रची।

पाकिस्तानी आतंकियों ने किस तरह से एक बड़ी साजिश के तहत पुलवामा में हुए इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया, NIA की चार्जशीट में इसका पूरा कच्चा चिट्ठा खोला गया। इस हमले को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। बता दें कि आतंकी संगठन जैश ने एक वीडियो जारी कर के इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। पुलिस महानिरीक्षक सोनिया नारंग और पुलिस अधीक्षक राकेश बलवाल की एक टीम ने गहन जाँच-पड़ताल के बाद इस मामले में सबूत जुटाए।

जाँच में वैज्ञानिक और डिजिटल तथ्यों का सहारा लिया गया। कुल 18 महीने तक चले इंवेस्टिगेशन में पाकिस्तानी नेटवर्क और भारत में उन्हें मिली मदद को लेकर पड़ताल हुई। पुलवामा हमलों पर NIA की चार्जशीट में कुल 29 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिनमें 12 कश्मीरी हैं। आत्मघाती हमलावर आबिद अहमद डार के अलावा इसमें पाकिस्तान के आतंकी शामिल हैं। अब तक इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके नाम इस चार्जशीट में शामिल हैं।

याद दिलाते चलें कि इस हमलें में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। भारत ने इस हमले का 14 दिनों के भीतर बदला ले लिया था। 14 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर 1000 किलो का बम बरसाया था, जिससे करीब 200-300 आतंकी मारे गए थे।

अज़हर, अशगर, उसका संबंधी फारूकी (जो मारा जा चुका है) सहित उन 6 को NIA की जम्मू में स्थित विशेष अदालत में दायर चार्जशीट में आरोपित बनाया गया है। इसमें पाकिस्तान का रोल हाइलाइट करने के लिए कॉल डिटेल्स का सहारा लिया गया है। जैश ने कैसे रुपयों का अवैध ट्रांजैक्शन किया, इसके भी पूरे डिटेल्स खँगाले गए। मोहम्मद इकबाल राथर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। इंशा जान और उसके पिता तारिक अहमद का भी इसमें नाम है।

ये दोनों पुत्री और पिता जैश के जमीनी आतंकी के रूप में काम कर रहे थे। इकबाल को जुलाई 2020 में ही गिरफ्तार किया गया था। उसने आतंकी उमर फारूक को पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ कराने में मदद की थी। इसके अलावा भी जो हैं वो सब जैश के जमीनी आतंकी थे। NIA की चार्जशीट से अभी और डिटेल्स सामने आना बाकी है, जिसके आधार पर अदालत आतंकियों के खिलाफ सुनवाई करेगी और उन्हें सजा सुनाएगी। इसमें मुख्य मास्टरमाइंड मसूद अजहर ही था।

कॉन्ग्रेस के 76,000 कार्यकर्ताओं ने थामा BJP का दामन: सिंधिया के इलाके में मात्र 3 दिन में मिली बड़ी सफलता

मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है, ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया का कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में आने से पार्टी को बड़ा फायदा होता हुआ दिख रहा है। मध्य प्रदेश भाजपा ने एक आँकड़ा जारी कर के बताया है कि अकेले ग्वालियर-चम्बल संभाग में कॉन्ग्रेस के 76,361 कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन थामा है। इसे ज्योतिरादित्य सिंधिया इफ़ेक्ट के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भाजपा को फायदा होना तय माना जा रहा है।

पार्टी द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, ग्वालियर, मुरैना, गुना और भिंड से इतनी बड़ी संख्या में कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन थामा है। ग्वालियर और गुना शुरू से ही सिंधिया परिवार का गढ़ रहा है, जहाँ से इस परिवार के लोग जीतते रहे हैं। मध्य प्रदेश में पार्टी के हैंडल ने कहा है कि इन सभी कार्यकर्ताओं का आत्मीय अभिनन्दन है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि हम सभी एकाकार होकर मध्यप्रदेश को नई ऊँचाई तक ले जाएँगे, यह मेरा अटल विश्वास है।

क्षेत्रभाजपा ज्वाइन करने वाले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या
ग्वालियर 18,334
मुरैना 24,989
गुना 19,563
भिंड 13,475
कुल संख्या76,361
भाजपा में बड़ी संख्या में शामिल हुए कॉन्ग्रेसी

सबसे बड़ी बात ये है कि ये आँकड़े केवल 3 दिन के हैं, जब पार्टी ने मेगा सदस्यता अभियान चलाया। वहीं कॉन्ग्रेस ने भाजपा के इन दावों को सफ़ेद झूठ करार दिया है। ग्वालियर में 22 अगस्त से जारी मेगा सदस्यता अभियान के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित कई नेताओं ने प्रचार अभियान के लिए डेरा डाला हुआ था।

वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि वो इस आँकड़े के लिए जनता के समक्ष नतमस्तक हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनके लिए कार्यकर्ताओं का सम्मान सर्वोपरि है और कहा कि उनके खून का एक-एक कतरा उन्हीं कार्यकर्ताओं को समर्पित है। चम्बल बेल्ट को इसीलिए भी सबसे प्रमुख माना जा रहा है क्योंकि जिन 27 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से 16 इसी क्षेत्र में आते हैं।

भाजपा ने जानबूझ कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में मेगा सदस्यता अभियान चलाया, ताकि कॉन्ग्रेस पार्टी पर चुनाव से ऐन पहले मानिसक दबाव बनाया जा सके। साथ ही अगले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी इसका पूरा फायदा उठाना चाहेगी। इसीलिए, आयोजन कर-कर के कॉन्ग्रेस के सदस्यों को भूतपूर्व कॉन्ग्रेसी बनाया जा रहा है और उन्हें भाजपाई में तब्दील किया जा रहा है। सिंधिया के साथ आए विधायकों का भी इसके लिए सहारा लिया गया।

वहीं राज्य की विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस इन आँकड़ों को फर्जी करार दे रही है। पार्टी ने अजोबोग़रीब दावा किया है कि भाजपा अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को सदस्यता दिलवा कर उन्हें पूर्व कॉन्ग्रेसी बता दे रही है। लेकिन, भाजपा ने कहा है कि वो ज़रूरत पड़ने पर आँकड़े पूरी सूची के साथ भी सार्वजनिक कर सकती है। बता दें कि इन चुनावों पर सीएम शिवराज का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है।

‘दिल्ली दंगा- 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ किताब अब तमिल में भी, फुटप्रिंट्स प्रकाशन का ऐलान

गरुड़ प्रकाशन के बाद चेन्नई की फुटप्रिंट्स पब्लिकेशन ने दिल्ली दंगों पर आधारित मोनिका अरोड़ा की किताब प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। इसकी घोषणा पब्लिकेशन हाउस ने अपने ट्विटर हैंडल पर की है।

उनके अलावा किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने भी इस खबर की पुष्टि की है। फुटप्रिंट्स प्रकाशन की ओर से यह किताब तमिल में आएगी। इसका नाम “Delhi Riots 2020: The Untold Story in Tamil” होगा।

लेखिका मोनिका अरोड़ा ने फुटप्रिंट्स पब्लिकेशन की इस घोषणा को रीट्वीट करते हुए अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि किताब के तमिल में प्रकाशन की बात जानकर वह सम्मानित महसूस कर रही हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले ब्लूम्सबरी (Bloomsbury) प्रकाशन समूह दिल्ली दंगों पर आधारित किताब Delhi Riots 2020: The Untold Story को प्रकाशित करने वाला था। लेकिन इस्लामी और वामपंथियों के दबाव में आकर उसने किताब का प्रकाशन रोक दिया। जिसके बाद इस किताब को गरुड़ प्रकाशन समूह ने प्रकाशित करने का ऐलान किया। इस किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितालकर और प्रेरणा मल्होत्रा हैं।

गरुड़ प्रकाशन से किताब आने की घोषणा होने के बाद तमिलनाडू के भाजपा प्रवक्ता एसजी सूर्य ने फुटप्रिंट्स पब्लिकेशन से इस किताब को तमिल में लाने का प्रस्ताव उनके सामने रखा। जिसे गरुड़ प्रकाशन के निदेशक संक्रांत सानु ने स्वीकार कर लिया। अपने ट्वीट में उन्होंने इस किताब को स्थानीय भाषा में लाने के प्रस्ताव को मानते हुए कहा कि हर भारतीय भाषा में इंडिक किताबों के अनुवाद और वितरण के लिए नेटवर्क होना चाहिए।

बता दें कि बीते दिन (22 अगस्त 2020) इस किताब के वर्चुअल विमोचन के दौरान ब्लूम्सबरी यूके मुख्यालय से दबाव बनाया गया और प्रकाशन समूह ने अचानक ही किताब प्रकाशित करने से मना कर दिया था। किताब की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोगों की भावना देखते हुए उन्होंने फैसला किया है कि गरुड़ प्रकाशन समूह के साथ जाएँगे। यह फ़िलहाल स्टार्टअप की तरह चल रहा है।

लेखिका ने ब्लूम्सबरी प्रकाशन समूह को इस संबंध में मेल भी किया था। लेकिन वहाँ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला किया। मेल में उन्होंने साफ़ तौर पर पूछा कि क्या वह इस किताब का प्रकाशन रोक रहे हैं? वह इस बात को लिखित में दें लेकिन ब्लूम्सबरी ने फोन पर ही इस बात की जानकारी दी। यानी समझौता ख़त्म करने के लिए कोई लिखित कार्रवाई नहीं की गई।

मौत के कुछ घंटे बाद ही किचन में खाना बना रहे थे फ्लैटमेट्स, जैसे कहीं कुछ हुआ ही नहीं: सुशांत सिंह राजपूत का परिवार

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत कथित सुसाइड केस में सीबीआई जाँच कर रही है। सीबीआई ने सुशांत सिंह के करीबियों के बयान लेने से लेकर उनके फ्लैट से कई आवश्यक सामान भी इकट्ठे किए हैं। महाराष्ट्र पुलिस से केस ट्रांसफर किए जाने के बाद अब सीबीआई की टीम जाँच के लिए कई बार सुशांत के घर पर भी गई।

सुशांत की फैमिली से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि जिस दिन सुशांत का निधन हुआ था, उसके बाद उनके फ्लैटमेट्स किचन में खाना बना रहे थे। टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत की फैमिली से जुड़े कुछ सूत्रों ने बताया है कि 14 जून को सुशांत के निधन के बाद जब उनकी फैमिली रात को उनके फ्लैट पर पहुँची थी तो वहाँ मौजूद सभी लोग बेहद सामान्य नजर आ रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत के सभी फ्लैटमेट्स रात को किचन में खाना बना रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही न हो। परिजनों ने बताया कि वो रात के 11:00-11:30 के आस-पास फ्लैट पर पहुँचे थे, जहाँ पर दोपहर में तकरीबन 1 बजे एक्टर को मृत पाया गया था।

जब सुशांत का परिवार वहाँ पहुँचा तो उन्होंने कुक को किचेन में खाना बनाते देखा। अन्य फ्लैटमेट्स भी काफी सामान्य दिख रहे थे। वो बाकी दिनों की तरह ही अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। कोई खाना खा रहा था, तो कोई सफाई कर रहा था। परिवार के लोगों का कहना है कि आखिर सुशांत की मौत के कुछ घंटों बाद ही घर में मौजूद चारों लोग इतना सामान्य व्यवहार कैसे कर सकते हैं। शायद इसीलिए सीबीआई लगातार पिछले 5 दिनों से कुक नीरज और सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा सीबीआई लगातार सुशांत के स्टाफ दीपेश सावंत और केशव से भी पूछताछ कर रही है।

सवाल उठ रहे हैं कि मुंबई पुलिस ने इस एंगल की जाँच क्यों नहीं की? पड़ोसियों का दावा है कि सुशांत सिंह राजपूत के फ्लैट में रोशनी जल्दी बंद हो गई थी और कुछ असामान्य था। तो क्या 13 जून को ही सुशांत सिंह राजपूत की हत्या हुई थी?

गौरतलब है कि जिस मकान में सुशांत सिंह राजपूत का 14 जून को शव लटका हुआ मिला था, वहाँ पर पड़ोसी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि 13 जून की रात करीब 10.30-10.45 के बीच सुशांत राजपूत के कमरे की सभी लाइट्स बंद हो गई थी। सिर्फ किचन की लाइट जल रही थी।

उन्‍होंने कहा, “सुशांत के घर की लाइट 13 जून की रात को 10.30-10.45 बजे अचानक बंद हो गई थी। ऐसा अमूमन नहीं होता था, क्‍योंकि वह देर तक जागते थे। लेकिन उस दिन किचन की लाइट को छोड़कर बाकी सारी लाइट्स जल्‍दी बंद हो गई थीं।” पड़ोसी ने यह भी बताया था कि उस रात सुशांत सिंह के घर में किसी तरह की कोई पार्टी नहीं हुई थी। पड़ोसी महिला का कहना था कि लाइट्स का बंद होना जरूर मामले में संदेह पैदा करता है कि ऐसा क्‍यों हुआ था।

82 वर्षीय सास को बेहरमी से मारने वाली महिला हुई गिरफ्तार, Video वायरल होने के बाद उठी थी कार्रवाई की माँग

सोशल मीडिया पर पिछले दिनों इंसानियत को शर्मसार करती एक वीडियो वायरल हुई। इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला को दूसरी औरत डस्टपैन से मारती देखी गई। वीडियो को लेकर दावा किया गया कि वह औरत वृद्धा की बहु है। इस बर्बरता को देख सोशल मीडिया पर बहु की गिरफ्तारी की माँग उठने लगी। अब ताजा खबर है कि हरियाणा पुलिस ने आखिरकार इस महिला को गिरफ्तार कर लिया है।

अपनी 82 वर्षीय सास को प्रताड़ित करने वाली इस बहु का नाम सरोज है और ये सारी घटना हरियाणा के सोनिपत सेक्टर 23 की है। महिला के अलावा उसकी माँ को भी गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संबंध में महिला के पति ने ही अपनी माँ को प्रताड़ित करने के आरोप में उसके ख़िलाफ़ शिकायत करवाई थी। इसके बाद इस मामले को कई आईपीसी धाराओं के तहत दर्ज किया गया।

मीडिया सूत्रों से यह पता चला है कि महिला ककरोई रोड पर बनी एक डिस्पेंसरी में एएनएम के तौर पर काम करती है। अपनी सास को पीटते हुए उसकी यह वीडियो उसके बच्चे ने मोबाइल फोन पर बनाई थी और बाद में इसे उसने अपने पिता को भेज दिया।

कई जानी-मानी हस्तियों ने इस मामले पर संज्ञान लिया। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी इसे अपने ट्विटर पर शेयर किया और इस पर अधिक जानकारी माँगी। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रताड़ित महिला की मदद करने का आश्वासन दिया।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट वकील प्रतीक सोम ने भी इस मामले को उठाया है। सरोज की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने इस संबंध में ट्वीट भी किया। उन्होंने बताया कि यह वीडियो सरोज के बच्चे ने एक्सीडेंटली बना ली थी।

गौरतलब है कि इस वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ आई थी। यूजर्स ने इस महिला को जेल में डालकर वृद्धा की मदद और पुनर्वास की गुहार लगाई थी।

लोगों का कहना है कि जो महिला घर में बुजुर्गों का स्वास्थ्य नहीं देख पा रही, वो स्वास्थ्य विभाग में बैठी है। इसी तरह एक महिला लिखतीं हैं कि ऐसी महिलाएँ समाज में यातनाओं को जन्म देती हैं, अगली पीढी भी इनके दिखाए कदमों पर ही चलेगी। बुढापे में अकेलापन ऐसी यातना और घुटन से बहुत बेहतर हैं।

प्रशांत भूषण के पास 30 मिनट का और समय, अपनी टिप्पणी के जवाब में जो बयान दिया, वह ज्यादा अपमानजनक: SC

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने आज प्रशांत भूषण को लेकर कहा कि उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाना चाहिए और उन्हें सजा नहीं दी जानी चाहिए। इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशांत भूषण ने अपनी टिप्पणी के जवाब में जो बयान दिया है, वह ज्यादा अपमानजनक है। बता दें कि प्रशांत भूषण ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे पर सुप्रीम कोर्ट में अपने ट्वीट्स के लिए माफी माँगने से इनकार कर दिया है।

ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई में प्रशांत भूषण ने वर्ष 2009 में दिए अपने बयान पर खेद जताया था लेकिन बिना शर्त माफ़ी नहीं माँगी थी। उन्होंने कहा था कि तब मेरे कहने का तात्पर्य भ्रष्टाचार कहना नहीं था, बल्कि सही तरीक़े से कर्तव्य न निभाने की बात थी। दरअसल, वर्ष 2009 में एक इंटरव्यू में वकील भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के 8 पूर्व चीफ़ जस्टिस को भ्रष्ट कहा था।

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि न्यायपालिका में करप्शन को लेकर कई पूर्व जज बोल चुके हैं। इस लिहाज से प्रशांत भूषण को भी एक चेतावनी देकर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान सिर्फ कोर्ट को ये बताने के लिए दिए जाते हैं कि आप अस्पष्ट दिख रहे हैं और आप में भी सुधार की जरूरत है। सरकारी वकील ने कहा कि उन्हें सिर्फ ऐसे बयान दोबारा नहीं देने की चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए।

अटॉर्नी जनरल के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने कहा, “लेकिन वह यह नहीं सोचते कि उन्होंने जो भी किया, वह गलत था। उन्होंने माफी नहीं माँगी… लोग गलती करते हैं, कभी-कभी तो गलती से भी गलती हो जाती है। यह मत सोचो कि उसने कुछ गलत किया है। क्या करें जब कोई यह नहीं सोचता कि उन्होंने कुछ गलत किया है?”

जस्टिस मिश्रा के सवाल पर केके वेणुगोपाल ने जवाब दिया, “मैं खुद प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना ​​दायर करना चाहता था, जब दो सीबीआई अधिकारी लड़ रहे थे, और उन्होंने कहा कि मैंने दस्तावेजों से छेड़खानी की है। लेकिन बाद में उन्होंने खेद व्यक्त किया, तो मैं पीछे हट गया। ऐसे में लोकतंत्र का पालन कर उन्हें फ्री स्पीच के नाम पर छोड़ दिया जाना चाहिए।”

जस्टिस मिश्रा ने इसके जवाब में कहा कि जब वो यही नहीं मानते हैं कि उन्होंने कुछ गलत किया है तो फिर ऐसे में चेतावनी देने का भी क्या औचित्य रह जाता है? जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कोर्ट प्रशांत भूषण और उनके वकील धवन को 30 मिनट का और समय देती है ताकि वो इस पर ‘विचार’ करें।

ठेले पर बेचना पड़ा समोसा-चाट तो सुहैल और शोएब ने दरगाह के पास ऑफिस वाले बाबू को मारी गोली

बेंगलुरु में केआर पुरम पुलिस ने शनिवार (अगस्त 22, 2020) रात एक उद्योगपति पर गोली चलाने वाले दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान मोहम्मद सुहैल पाशा (23) और शोएब (19) के रूप में हुई। इन पर आरोप है कि इन्होंने बाबू नाम के व्यक्ति पर देशी कट्टे से गोली दागी और धारधार हथियार से उन पर हमला बोला।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद कर लिए हैं। इसके साथ ही इनके पास से एक कार भी मिली है। दोनों केआर पुरम के रहने वाले हैं। उद्योगपति से विवाद के बाद इन्होंने उस पर हमला बोला था।

पुलिस ने बताया कि सुहैल और उसका साथी मिर्जा केआर पुरम में दरगाह के पास अरुधंती कॉलनी में समोसे चाट चाय की दुकान चलाते थे। वहीं बाबू का पास में ऑफिस था। एक दिन इन दोनों ने बहुत देर तक अपनी दुकान खोले रखी और ग्राहकों के वाहनों के कारण बाबू के दफ्तर का रास्ता ब्लाक हो गया। जिससे उसे गुस्सा आया और उसकी मिर्जा से बहस हो गई। इस बीच पुलिस ने दोनों पक्षों को झगड़ा न करने की सलाह दी और चेतावनी देकर छोड़ दिया।

बाबू ने इस बहस के बाद बिल्डिंग के मालिक को शिकायत की, जिसकी वजह से मिर्जा के व्यवसाय पर फर्क पड़ा। दोनों से वह दुकान खाली करवा दी गई और सुहैल को फुटपाथ पर ठेला में चाट समोसे बेचने पड़े। बाबू ने यह देखकर उनका मजाक भी उड़ाया। इसके कारण फिर दोनों पक्षों में जोरदार झगड़ा हुए।

अब सोहेल ने मिर्जा के साथ मिलकर बदला लेने का प्लान बनाया। सुहैल ने अपने साथी शोएब के साथ पूरे प्लान तैयार किया और मौका देखते ही शनिवार रात बाबू पर हमला बोल दिया। घटना में बाबू का बायां हाथ जख्मी हो गया। बाद में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर है।

दोनों की गिरफ्तारी चामराजनगर जिले के कोल्लेगल के पास एक गाँव से हुई। पुलिस अब पूरे मामले में मिर्जा की खोजबीन करने में लगी हुई है। इसके साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस हमले में कोई और भी शामिल था और साथ ही ये जानने की कोशिश हो रही है कि आरोपितों ने बंदूक का इंतजाम कहाँ से किया।

दूसरे राज्यों से आए नेताओं से नहीं मिलते हैं सोनिया-राहुल: लाल बहादुर शास्त्री के बेटे ने कहा- प्रियंका बनें अध्यक्ष

कॉन्ग्रेस में बढ़ती कलह के बीच अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि पार्टी नेतृत्व में कुछ कमी है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी पार्टी नेताओं से नहीं मिलते हैं। उन्होंने सलाह दी कि अगर सोनिया-राहुल नेताओं से मिलना-जुलना शुरू कर दें तो आधी समस्या अपने-आप हल हो जाएगी। अनिल शास्त्री कॉन्ग्रेस के हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं।

हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि प्रियंका गाँधी या राहुल गाँधी में से किसी एक को पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। उन्होंने गाँधी परिवार से ही किसी को अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें हैं, जो पार्टी नेतृत्व में कमी की ओर इशारा करती है और नेताओं के बीच बैठकें ही नहीं होती हैं। उन्होंने कहा कि जब दूसरे राज्यों से कोई नेता दिल्ली आता है, तो राहुल-सोनिया से उनका मिलना मुश्किल हो जाता है।

अनिल शास्त्री का बयान ऐसे समय में आया है, जब वर्किंग कमिटी की बैठक में सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बने रहने का फैसला किया गया और कॉन्ग्रेस का अधिवेशन होने तक उनकी मदद के लिए नेताओं की एक टीम गठित करने की बात कही गई। बैठक में उन नेताओं के प्रति नाराजगी जताई गई, जिन्होंने पत्र लिख कर पार्टी में सुधार की माँग की थी। कॉन्ग्रेस अधिवेशन में राहुल गाँधी के फिर से अध्यक्ष बनने की बात तय मानी जा रही है।

अनिल शास्त्री दिल्ली, बरेली, इंदौर और प्रयागराज में लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर स्थापित शिक्षण संस्थानों के अध्यक्ष हैं। वो काफी समय से राजनीति में सक्रिय हैं। 1989 में उन्होंने वाराणसी से लोकसभा का चुनाव जीता था, जिसके बाद वो केंद्रीय मंत्री भी बने थे। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस में एक सिंडिकेट उभर रहा है, ऐसे में प्रियंका गाँधी को अध्यक्ष बनाना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रियंका गाँधी की पूरे कॉन्ग्रेस कैडर में गजब की स्वीकार्यता है और वो पहले ही साबित कर चुकी हैं कि वो एक परिपक्व नेता हैं। उन्होंने 23 नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पत्र लिख कर उसे सार्वजनिक करना मतलब पार्टी को मजबूत करना नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की वापसी से डरे लोग उन्हें रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गाँधी परिवार के बिना कॉन्ग्रेस अस्तित्व में ही नहीं रहेगी।

कॉन्ग्रेस में कलह पर अनिल शास्त्री ने रखी अपनी बात

ज्ञात हो कि बगावत के ये तेवर जो आज दिख रहे हैं, इसकी नींव 5 महीने पहले ही पड़ गई थी। कॉन्ग्रेस में रिफॉर्म की माँग के लिए एजेंडा शशि थरूर द्वारा आयोजित एक डिनर पार्टी में ही तैयार कर लिया गया था, जिसमें कई कॉन्ग्रेस नेता शामिल हुए थे। इसका ही परिणाम सोनिया गाँधी को पत्र भेजे जाने के रूप में सामने आया। थरूर के डिनर में इस बात पर चर्चा हुई थी कि पार्टी का जीर्णोद्धार कैसे किया जाए और इसकी सेक्युलर विचारधारा की तरफ कैसे लौटा जाए। 

चायनीज लोगों और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ POK में विरोध प्रदर्शन: लगे ‘हमें जिंदा रहने दो’ जैसे नारे

चीन और पाकिस्तान का बढ़ता याराना अब प्रकृति पर खतरा बन रहा है। यही कारण है कि POK के मुजफ्फराबाद में लगातार प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार (अगस्त 24, 2020) को भी वहाँ की सड़कों पर लोगों में गुस्सा देखने को मिला।

नीलम-झेलम नदी पर विशाल बाँध निर्माण को रुकवाने के लिए ‘दरिया बचाओ, मुजफ्फराबाद बचाओ’ (सेव रिवर, सेव मुजफ्फराबाद) कमिटी के प्रदर्शनकारियों ने ‘नीलम-झेलम बहने दो , हमें जिंदा रहने दो’ जैसे नारे लगाए। इस प्रदर्शन में सैंकड़ों लोग शामिल हुए। मुजफ्फराबाद को छोड़ दें, तो POK के अन्य शहरों से भी इस प्रदर्शन में काफी लोग थे।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने भारत के डर से चीन को POK के कुछ हिस्से दे रखे हैं और वहाँ के खनिज संसाधनों को भी चीन के हवाले कर दिया है, जो POK का जम कर दोहन तो कर ही रहा है, साथ ही वहाँ कई सारे प्रोजेक्ट्स भी चला रहा है। इससे स्थानीय लोगों मे आक्रोश का माहौल है। 

अभी हाल में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आज़ाद पट्टन और कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी ने निर्माण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के हिस्से के रूप में 700.7 मेगावाट बिजली की आजाद पट्टन हाइड्रो प्रॉजेक्ट पर 6 जुलाई, 2020 को हस्ताक्षर किए गए थे।

जानकारी के अनुसार, ये 1.54 बिलियन डॉलर की परियोजनाएँ चीनी जियोझाबा कंपनी द्वारा प्रायोजित की जाएँगी और कोहारला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट जो झेलम नदी पर बनाया जाएगा, वह पीओके के सुधनोटी जिले में आज़ाद पट्टन पुल से लगभग 7 किमी और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किमी दूर है।

कहा जा रहा है कि ये परियोजना साल 2026 तक पूरी होगी। जिसके बाद देश में बिजली सस्ती हो पाएगी। लेकिन वहाँ स्थानीय लोग इस समझौते के सख्त ख़िलाफ़ हैं। वह वहाँ पर चीनियों की उपस्थिति, बांधों के बड़े पैमाने पर निर्माण और नदियों के बहाव मोड़ने से उनके अस्तित्व पर पड़ रहे खतरे को लेकर खासा नाराज हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन और पाकिस्तान मिलकर पीओके और गिलगित बाल्टिस्टान के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं में इसे लेकर अक्सर रोष देखने को मिलता है।

याद दिला दें कि ये विरोध प्रदर्शन पहली बार देखने को नहीं मिला है। इससे पहले भी मुजफ्फराबाद की जमीन पर ऐसे विरोध हुए हैं। 6 जुलाई को ऐसा ही नजारा क्षेत्र में देखने को मिला था। दरअसल, तब भी लोगों का यही आरोप था कि चीन द्वारा बनाए जा रहे बाँधों से वहाँ के वातावरण पर भी काफ़ी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण पर्यावरण संबंधी कई समस्याओं के खड़े होने की आशंका है। इसके बाद 13 अगस्त को एक बार फिर ऐसा ही माहौल मुजफ्फराबाद में फिर बना। तब भी लोगों ने विरोध करके अपना गुस्सा जाहिर किया था और जमकर नारेबाजी की थी।

हीर खान ने YouTube वीडियो में हिन्दुओं को बताया मा$रचो#: अयोध्या को कहा ₹#डीखाना, माता सीता के लिए बहुत गंदा शब्द

यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर एक इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने ऐसा वीडियो शेयर किया है, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई हैं। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की है।

हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।”

उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछाड़ लगा दी। उसने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए कहा, “श्रीराम भ#वे की औलाद, श्रीराम ₹#डी की औलाद, तुम्हारे 33 करोड़ देवी-देवताओं की माँ का भों#ड़ा। तेरे गणपति की $%त में आग लगा देंगे। तुम सब मा$रचो# हो। तुम्हारी मीडिया की माँ का भों#ड़ा।”

यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में जबरदस्त आक्रोश का माहौल है। हीर खान ने अपनी बदजुबानी जारी रखते हुए आगे कहा, “सेकुलरिज्म की माँ का भों#ड़ा, भाईचारा निभाने वालों की माँ का भों#ड़ा। साथ में उनकी भी माँ का भों#ड़ा जो कहते हैं कि भगवानों को गाली मत दो। उनकी भी माँ-बहनों को $#द डालेंगे। सीता, दुर्गा और काली – सबको कोठे पर बिठा कर चु#$ डालेंगे।”

लखनऊ पुलिस कमिश्नर के ट्विटर हैंडल ने सूचना दी है कि उक्त मामले में साइबर सेल को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दे दिया गया है। अपनी हर वीडियो में ज़हर उगलने वाली हीर खान ने उस वीडियो में कहा है, “वो नाजायज थी और मात्र 6 साल की थी, जब रावण ने उसका ख़ून निकाल दिया था। जितने भी सेक्युलर पत्रकार हैं, तेरी माँ का भों#ड़ा। तुमलोग सोच रहे थे कि तुम इस्लाम को गाली दोगे और हम सुनते रहेंगे?”

महिला ने लगातार माँ सीता और माँ दुर्गा के लिए अपशब्द कहे। साथ ही उसने ये भी धमकी दी कि जिसे मन हो, वो जाकर एफआईआर करा दे। हीर खान के इस यूट्यब चैनल पर कई वीडियो हैं। वो वहाँ जनवरी 2020 से वीडियो डाल रही है। उसका कहना है कि उसका पुराना यूट्यूब चैनल डिलीट हो गया है। कुछ वीडियो में तो वो पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर के लिए भी अपने ‘प्यार’ का प्रदर्शन करती रहती है।