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देश दहलाने की साजिश रचने वाले सोढ़ा खान, जिया सहित 10 आरोपितों को उम्रकैद की सजा: 11 साल बाद आया फैसला

राजस्थान के बाड़मेर की एक विशेष अदालत ने पाकिस्तान से विस्फोटक पदार्थ, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी के 11 साल पुराने मामले में 10 लोगों को दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन दोषियों में से एक, आंतकी संगठन बब्बर खालसा का सदस्य भी शामिल है। जो विस्फोटकों की खेप लेने के लिए बाड़मेर आया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सदर थाना पुलिस ने सितंबर 2009 सीमा पार पाकिस्तान से आतंकी संगठन बब्बर खालसा के लिए आए आरडीएक्स और हथियार सदर थाना पुलिस ने बरामद कर 10 आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। इस मामले में 11 साल तक चले इस ट्रायल के बाद एससी-एसटी कोर्ट न्यायधीश वमिता सिंह ने आज सभी 10 आरोपितों को विस्फोटक अधिनियम एवं आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में पैरवी विशिष्ट अभियोजक कमाल खान ने की।

इस दौरान सभी 10 आरोपी कोर्ट में मौजूद रहे। बता दें इस पूरे मामले में चार अन्य आरोपित अभी भी फरार हैं। जिसमें दो पाकिस्तानी कुख्यात तस्कर फोटिया उर्फ़ लंबू और अली उर्फ़ आलिया पाकिस्तान में हैं। वहीं हरजोत सिंह और परमजीत उर्फ पंपा लंदन में छिपे है।

8 सितम्बर 2009 में पुलिस को बाड़मेर में हथियार और आरडीएक्स की सीमा पार से बड़ी खेप आने की सूचना मिली थी। इस मामले में जब्त हथियारों व बारुद की आपूर्ति कथित तौर पर आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा को की जानी थी। पुलिस ने बाड़मेर जिले के मारुड़ी के निकट सोढिया खान उर्फ सोबदा खान, नजीर मिरु खान व नजीर जिम्मा खान को गिरफ्तार किया था। निशानदेही पर एक खेत से 8 विदेशी पिस्टल, 140 राउंड बॉल कॉटेज, 280 राउंड कॉटेज, 720 ग्राम के वायर, 6 किलोग्राम आरडीएक्स, 2 बैटरियाँ बरामद की गई थी।

इन्हें हुई उम्रकैद

आरोपितों के खिलाफ 11 साल चली इस सुनवाई की बाद आखिरकार मंगलवार को गुनहगारों को सजा दी गई। बाड़मेर में एससी/एसटी अदालत की विशेष न्यायाधीश वामिता सिंह ने अपने फैसले में सोढ़ा खान उर्फ सोबदार उर्फ लूणिया, नजीर पुत्र मीरू, नजीर पुत्र जिया, खानु खाँ उर्फ खानिया, जगमोहन सिंह, रमधा पुत्र मूसा, मूसा पुत्र सदीक, कलिया उर्फ कलाखां, मुबारक पुत्र हाजी और मीरू पुत्र बाबल को धारा 20 विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 2008 के दोषसिद्ध अपराध के लिए आजीवन कारावास (14 वर्ष) और दस-दस हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई।

‘इस्लाम शांति का धर्म नहीं है’: लेखक रॉबर्ट स्पेंसर की जिहाद के वैश्विक खतरे के बारे में ऑपइंडिया से बातचीत

हाल ही में ऑपइंडिया ने जिहाद वॉच के संस्थापक और निदेशक रॉबर्ट स्पेंसर के साथ बातचीत की। स्पेन्सर इस्लामिक जिहाद को लेकर अपने अनुभवों और विचारों को साझा करते हुए अब तक 19 किताबें लिख चुके हैं। उनकी दो पुस्तकों को एफबीआई ने ट्रेनिंग मेटेरियल के रूप में सूचीबद्ध किया है। 

पाकिस्तान सहित कई इस्लामिक देशों ने उनकी किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस्लाम पर उनके विचारों के परिणामस्वरूप यूनाइटेड किंगडम में उनके प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। वह Stop Islamization of America ग्रुप के सह-संस्थापक भी हैं, जिसे American Freedom Defense Initiative के रूप में भी जाना जाता है।

फिलहाल वह संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे हैं। ऑपइंडिया के संपादक नूपुर जे शर्मा से बात करते हुए, स्पेंसर ने कहा कि उनका परिवार ओटोमन साम्राज्य से है। उन्हें 1916 में वहाँ से निर्वासित कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने इस्लाम में धर्मांतरण से इनकार कर दिया था।

जब उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि उनके दादा-दादी को अपनी जन्मभूमि क्यों छोड़नी पड़ी, तो उनके परिवार ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसकी वजह से उन्होंने इतिहास का गहन अध्ययन किया।

स्पेंसर और नूपुर ने कई बिंदुओं पर विस्तार से बात की। इस दौरान जो पहली बात सामने आई, वो यह था कि क्या इस्लाम शांति का धर्म है। इस पर रॉबर्ट स्पेंसर ने हँसते हुए कहा कि हर गलत धारणा का कोई न कोई स्रोत होता है। उन्होंने कहा कि SLM सलाम शब्द का मूल है जिसका अर्थ होता है शांति। इसी वजह से अधिकांश लोग सोचते हैं कि यह धर्म शांति को बढ़ावा देता है।

हालाँकि, SLM इस्लाम शब्द का भी मूल है, जिसका अर्थ है अधीन होना। कुरान कहता है कि आप केवल तभी शांति प्राप्त कर सकते हैं जब आप खुद को अल्लाह को सौंप देते हैं। समाज में सच्ची शांति केवल गैर-इस्लामी लोगों को इस्लाम मानने वाले को सौंपने से आती है। उन्होंने कहा कि शांति की परिभाषा जो अन्य धर्म सोचते हैं, वह इस्लाम से पूरी तरह से अलग है। अन्य धर्म जहाँ शांति को सह-अस्तित्व से जोड़ते हैं, वहीं इस्लाम का मानना है कि शांति केवल तभी संभव है जब इस्लाम पर विश्वास न करने वाले खुद को उनके अधीन कर दे। इस तरह के विश्वास का मूल कारण कुरान में गैर-इस्लामी लोगों की जहालत है।

भारत में धर्मांतरण की समस्या

संप्रदाय विशेष और ईसाइयों द्वारा भारत में धर्मांतरण की समस्या पर चर्चा करते हुए, स्पेन्सर ने कहा कि ईसाई और संप्रदाय विशेष जिस तरह से उपदेश देते हैं, उसमें बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि ईसाई आएँगे और आपको चर्च में बुलाने की कोशिश करेंगे ताकि वे आपको यीशु के बारे में बता सकें। यदि आप उनसे कहते हैं कि आपको इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है, तो वे आपको छोड़ देंगे। वहीं दूसरी तरफ, यदि आप संप्रदाय विशेष के लोग से कहते हैं कि आप अल्लाह के बारे में जानने के लिए मस्जिद में नहीं जाएँगे, तो वे आपके घर को जला देंगे।

वामपंथी इस्लामी साँठगाँठ

चर्चा के दौरान, लेफ्ट-इस्लामी साँठगाँठ के बारे में विस्तार से बात की गई थी। स्पेंसर ने कहा कि हालाँकि वामपंथी इस बात से इनकार करते हैं कि वे सत्तावादी हैं, मगर दुनिया के हर हिस्से में जहाँ वो अभी तक सत्ता में हैं, वे लोगों को स्वतंत्र भाषण के अधिकार से वंचित करते हैं। उन्होंने कहा कि मार्क्सवादी, इस्लाम का समर्थन करते हैं, जबकि उनके बीच कोई अनुकूलता नहीं है, क्योंकि दोनों सत्तावादी हैं और वे अपने तरीके से एक नया आदेश स्थापित करने की कोशिश करते हैं।

इस्लाम को नियंत्रित करने में राज्य की भूमिका

स्पेंसर ने जोर देकर कहा कि वह यह नहीं मानते हैं कि राज्य को देश के धर्म को परिभाषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर संविधान सभी धर्मों को अनुमति देता है, तो समस्या तब पैदा होती है जब इस्लामवादियों जैसे सत्तावादी राज्य में वो अपने धर्म को स्थापित करने की कोशिश करते हैं। वे सभी अधिकारों का उपयोग करेंगे, लेकिन जैसे ही उन्हें मौका मिलेगा, वे देश में धार्मिक कानून स्थापित करेंगे। उनके मुताबिक भारत तभी इस्लामिक देश बनने से बच सकता है, जब हिंदू अपने धर्म में आस्था बनाए रखने के साथ ही इसे बचाने की इच्छा जागृत रखे।

सुशांत सिंह राजपूत के मौत के दिन एक्टर के घर के बाहर दो मिस्ट्री वीमेन के साथ दिखे थे संदीप सिंह: वीडियो से हुआ खुलासा

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह केस में संदीप सिंह का नाम अचानक से सुर्खियों में आ गया। एक्टर की मौत के बाद हर मौके पर उनकी तस्वीरें सामने आने लगीं। संदीप खुद को सुशांत का करीबी दोस्त बताते हैं। उन्होंने कई इंटरव्यूज में सुशांत के फिल्मी करियर और उनकी निजी जिंदगी को लेकर कई बयान दिए हैं, लेकिन अब सुशांत केस को लेकर संदीप खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं।

इसी कड़ी में मीडिया चैनल टाइम्स नाऊ ने एक वीडियो एक्सेस किया है, जिसमें संदीप सिंह को मिस्ट्री महिला के साथ देखा जा सकता है। वीडियो में संदीप सिंह को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के दिन एक्टर के घर के बाहर दो महिलाओं के साथ देखा गया। शिबानी दांडेकर के अनुसार फुटेज में दिखने वाली महिला राधिका निलानी और रिया की सहायक है।

लेकिन सवाल यह है कि जब संदीप सिंह 10 महीने तक सुशांत सिंह राजपूत के संपर्क में नहीं थे, तो संदीप सिंह इस घटना के आसपास कैसे आ गए, कैसे उन्हें अचानक से अस्पताल, एम्बुलेंस सहित सभी जगह देखा गया।

इधर सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग एंगल सामने आने के एक दिन बाद, बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को ‘बॉलीवुड कार्टेल’ की कथित उपस्थिति की बात की। स्वामी ने ट्विटर पर एक बार फिर से अपना दावा दोहराया कि बॉलीवुड अभिनेता की हत्या कर दी गई थी।

सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “9 जुलाई को ही मैंने कहा था कि सुशांत की हत्या हुई है, ऐसे में सीबीआई के द्वारा इस की जाँच होनी चाहिए। पुलिस उलझी हुई थी और मामले का दुबई कनेक्शन भी था। अब मैंने जोर दिया है कि बॉलीवुड कार्टेल की पहचान की जाए और उसे मर्डर के पहले के सहायक के रूप में चिन्हित किया जाए।”

स्वामी का यह ट्वीट इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ड्रग सिंडिकेट कनेक्शन की जाँच करने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) से मदद माँगने के बाद आया है।

इससे पहले एक ट्वीट में स्वामी ने फिल्म निर्माता संदीप सिंह की भूमिका पर सवाल उठाया था। संदीप, सुशांत के करीबी दोस्त होने का दावा करते हैं और उनकी मौत के दिन वह अभिनेता के निवास पर भी मौजूद थे।

स्वामी ने लिखा था, “संदीप सिंह से पूछताछ होनी चाहिए कि वह कितनी बार दुबई गया और क्यों गया?” एक अन्य ट्वीट में इस अनुभवी राजनेता ने दावा किया था कि अभिनेता को उनकी मौत से पहले जहर दिया गया था और उसके शव परीक्षण में जानबूझकर देरी की गई थी।

इससे पहले भी स्वामी ने सुशांत की मौत के मामले में दुबई कनेक्शन और पोस्टमार्टम लेट होने का मुद्दा उठाया था। सोमवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा था, “जैसे एम्स के डाक्टर्स को सुनंदा पुष्कर के पेट में असली जहर मिला था। वैसा श्रीदेवी और सुशांत के केस में नहीं हुआ। सुशांत के मौत के दिन दुबई के ड्रग डीलर अयाश खान ने उनसे मुलाकात की थी? आखिर क्यों?”

छात्रों को पीटती रही महाराष्ट्र पुलिस, गाड़ी में बैठकर ‘तमाशा’ देखते रहे शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार: देखें वीडियो

महाराष्ट्र के धुले शहर से शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार की एक छवि सामने आई है। यह छवि दर्शाती है कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद पर बैठे होने के बावजूद अब्दुल सत्तार को अपने राज्य के युवाओं से कोई लेना-देना नहीं है। फिर चाहे वह उनके सामने लाठी, मुक्के, घूँसे ही क्यों न खाते रहें।

एबीपी न्यूज के एंकर विकास भदौरिया के ट्विटर से शेयर हुई एक वीडियो में हम देख सकते हैं कि एक ओर देश के युवा को महाराष्ट्र पुलिस बेहरमी से पीटे जा रही है। उन पर लाठी डंडे बरसा रही है। वहीं पास में ही अब्दुल अपनी महंगी गाड़ी में बैठे रहते हैं। वह न तो मामले की जानकारी लेते हैं और न ही पुलिस को छात्रों को पीटने से रोकते हैं।

विकास इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखते हैं, “सत्ता का नशा: मंत्री जी अपनी लग्ज़री, डेढ़ करोड़ की गाड़ी में बैठे रहे और पुलिस उनकी आँखों के सामने छात्रों पर लाठियाँ, मुक्के, घूँसे, लातें बरसाती रही। मंत्री का नाम अब्दुल सत्तार है और तस्वीर महाराष्ट्र के धुले की हैं। ‘वाह मंत्री जी वाह’।”

गौरतलब है कि ये घटना महाराष्ट्र के धुले शहर में उस समय घटी जब ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कम फीस की माँग कर रहे एबीवीपी के कुछ छात्र आज सुबह पालक मंत्री अब्दुल सत्तार की गाड़ी के सामने आ गए।

इनकी माँग थी कि इस वर्ष का शैक्षणिक शुल्क कम से कम 30 फ़ीसदी कम लिया जाए। क्योंकि अब ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है और छात्र कॉलेज नहीं जाते, मगर फिर भी लाइब्रेरी की फीस जा रही है।

एबीवीपी के छात्रों ने इसी माँग के आधार पर मंत्री अब्दुल सत्तार की गाड़ी के सामने जमकर हंगामा किया। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटाने की कोशिश की लेकिन छात्र हटने को तैयार नहीं हुए और पुलिस ने इसी कारण उन पर लाठी चार्ज कर दिया। इतने के बावजूद मंत्री अब्दुल सत्तार को कोई फर्क नहीं पड़ा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिकायत की कि सरकार छात्रों की समस्या पर बिलकुल ध्यान नहीं दे रही।

चोरी छिपे बेच दी PAK के पूर्व राजदूत ने इंडोनेशिया में दूतावास की इमारत: 19 साल बाद मामला पहुँचा कोर्ट

पाकिस्तान की एंटी करप्शन बॉडी नेशनल अकॉउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के अपने पूर्व राजदूत को चोरी छिपे दूतावास की एक इमारत भेजने का मुल्जिम पाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, द नेशनल अकॉउंटेबिलिटी ब्यूरो ने कोर्ट में इस संबंध में रेफरेंस दायर किया है। अपनी शिकायत में उन्होंने इंडोनेशिया के पूर्व राजदूत व मेजर जनरल सैयद मुस्तफा अनवर के ख़िलाफ़ कहा है कि उन्होंने साल 2001-2002 के दौरान जकार्ता में पाकिस्तान दूतावास की इमरात को बेच दिया।

द ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट के अनुसार, अनवर पर अवैध रूप से इमारत बेचने और पाकिस्तान के राष्ट्रीय खजाने को 13.20 लाख डॉलर का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। रजिस्ट्रार को प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, अनवर ने विदेश मंत्रालय की मंजूरी के बिना इमारत की बिक्री के लिए एक विज्ञापन जारी किया था। वो भी इंडोनेशिया में अपनी तैनाती के तत्काल बाद।

इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से इजाजत लिए बिना एक विज्ञापन भी जारी कर दिया था। बिक्री की प्रक्रिया चालू होने के बाद अनवर ने इससे जुड़ा प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेजा था। लेकिन विदेश मंत्रालय ने बिल्डिंग की बिक्री पर रोक लगा दी थी और अनवर को कई लेटर भेज जानकारी भी दी थी।

यहाँ बता दें कि जकार्ता में पूर्व राजदूत की तैनाती जनरल परवेज मुशर्रफ के शासन में हुई थी। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ ने अनियमितताओं के लिए पूर्व राजदूत के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय, एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की थी जिसने इस धोखाधड़ी के संबंध में विदेश मंत्रालय को शिकायत की थी।

पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो जनरल अनवर ने दूतावास की इमारत को प्रमुख स्थान से बेच दिया था और दूतावास के लिए कम कीमत वाले क्षेत्र में स्थित नई संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। इन्हीं अनियमतताओं को एनएबी की धारा 9(ए) 6 के तहत बिक्री शक्तियों का दुरुपयोग कहा गया है। साथ ही दावा किया गया है कि उन्होंने 2001-2002 के दौरान जकार्ता स्थित पाकिस्तानी दूतावास की इमारत को ‘कौड़ियों के मोल’ बेचा

इसके अलावा यह भी पाक मीडिया की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मुशर्रफ ने साल 2007-2008 में अपनी सेवानिवृत्ति तक अधिकारी को OSD के रूप में रखा हुआ था। केवल इसलिए ताकि वे विदेशी कार्यालय से दूर रहें और मुशर्रफ ने मेजर जनरल सैयद मुस्तफा अनवर को ये बड़ा पद भी इसलिए दिया था क्योंकि वह उनकी पत्नी के रिश्तेदार थे।

कन्नौज में आपत्तिजनक हालात में मिले प्रेमी युगल: गाँव वालों ने सिर मुंडवाया, कालिख पोत कर पहनाया जूते की माला, Video वायरल

कन्नौज के गुरसहायगंज के बनियानी गाँव से इंसानियत को शर्मसार करने वाली वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि ग्रामीण एक महिला और एक दिव्यांग व्यक्ति का सिर मुंडवाकर उनके चेहरे पर कालिख पोत रहे हैं और जूते चप्पल की माला पहना कर उन्हें गाँव में घुमा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो में नजर आ रहे दोनों पीड़ितों को ग्रामीणों ने आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। इसके बाद सभी ने मिल कर उनका ये हाल किया। बाद में जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुई तो हर जगह हड़कंप मच गया।

हालाँकि, पुलिस से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ऐसे कोई जानकारी होने से इंकार किया। लेकिन लाइव हिंदुस्तान के पत्रकार सूरज शुक्ला ने जब इस वीडियो को शेयर किया तो कानपुर के आईजी रेंज ने उसी ट्वीट पर कन्नौज पुलिस को टैग करते हुए इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर आगे की जानकारी मँगवाई।

एडीजी जोन ने भी प्रकरण में जाँच करके कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, घटना की जानकारी प्रधान को होते ही उन्होंने तुरंत इस संबंध में ग्रामीणों को फटकार लगाई और दोनों पीड़ितों को उनके घर भिजवाकर पंचायत शुरू की।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय पहले 30 वर्षीय पीड़िता के पति की मौत हो गई थी। उसके बाद से ही दिव्यांग युवक उसके घर आने जाने लगा। दिव्यांग होने के चलते घर वालों और गाँव वालों ने पहले उनकी बातचीत पर ध्यान नहीं दिया। मगर, कुछ समय बाद दोनों के बीच बतचीत का सिलिसला प्यार में बदल गया।

गाँव वालों के अनुसार दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा है। दोनों को अक्सर गाँव के बाहर भी मिलते देखा गया है, कई बार दोनों को अकेले खेतों में भी पकड़ा गया जहाँ गाँव के युवाओं ने इन्हें देखा तो डाँटकर भगाया भी।

ऐसे में मंगलवार की रात जब दिव्यांग व्यक्ति महिला के घर पहुँचा, तो अगली सुबह गाँव वालों ने उसे महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया। देखते ही देखते पूरे गाँव में बात फैल गई। सब इकट्ठा हुए और इनका सिर मुंडवा दिया गया। इनके चेहरे पर कालिख पोत दी गई। फिर जूते की माला पहना कर इन्हें गाँव में घुमाना शुरू किया गया। वायरल वीडियो में हम देख सकते हैं कि मौके पर खड़े सभी लोग केवल यह तमाशा देखते रहे और छोटे-छोटे बच्चे उन पर फब्तियाँ कसते सुनाई दिए।

‘कुमकुम भाग्य’ की इस एक्ट्रेस को पिता ने दी जान से मारने की धमकी: वीडियो जारी करके माँगी मदद

जी टीवी के मशहूर शो कुमकुम भाग्य में नजर आने वाली एक्ट्रेस तृप्ति शंखधर ने अपने पिता पर संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी करके बताया है कि उनके पिता उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और किसी 28 साल के लड़के से उनकी शादी करवाना चाहते हैं जबकि अभी वह खुद केवल 19 साल की हैं।

यूपी के बरेली में रहने वाली तृप्ति की इस वीडियो में उनकी माँ भी नजर आ रही हैं। वह भी इस वीडियो में अपने पति पर मारपीट के आरोप लगाती हैं। तृप्ति की मानें तो उनके पिता ने उनके हाथ काटने की कोशिश की है। साथ ही मारने की धमकी भी दी है। इसके अलावा पिता का विरोध करने पर उनसे वह सारे रुपए वापस माँगे गए हैं जो उन्हें बॉम्बे भेजने में खर्च हुए।

तृप्ति शंखधर के इन आरोपों के बाद यूपी पुलिस ने उनके पिता को कस्टडी में ले लिया है। एसपी सिटी ने एएनआई से कहा कि तृप्ति के पिता कस्टडी में हैं। तृप्ति भी स्टेशन में ही मौजूद हैं। पिता के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि छोटी सी उम्र में तृप्ति शंखधर कई बार छोटे पर्दे पर नजर आ चुकी हैं। उन्होंने एकता कपूर के सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा उन्होंने ‘देव-2’, ‘परमावतार श्री कृष्ण’, ‘जिंदगी यू टर्न’, ‘कसौटी जिंदगी के 2’ सीरियल में काम किया। बड़े पर्दे पर भी उन्हें राजकुमार राव और कंगना रनौत की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ में देखा गया था।

शेयर की गई वीडियो में तृप्ति क्या कह रही हैं।

सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो में तृप्ति कहती हैं, “मेरे पापा राम रतन शंकर ने एक बार मुझे जान से मारने की कोशिश की। मुझे बाल पकड़कर मारा। ये मेरे निशान देखिए। उन्होंने मुझे ऐक्ट्रेस बनने के लिए मुंबई भेजा था। अभी मेरी बस एक ही मूवी रिलीज हुई है और अब वह मुझे और बाकी सबको टॉर्चर कर रहे हैं। कह रहे हैं कि शादी कर लो नहीं तो मार डालूँगा। अभी मैं बस 19 साल की हूँ और कोई 28 साल का अजीब सा लड़का है जिसके साथ वह शादी करने के लिए कह रहे हैं। आज उन्होंने साफ कहा कि वो मुझे और पूरे परिवार को मार डालेंगे। मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा है। मैंने पुलिस से भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन नहीं हो पाया। वो हर दिन सबको प्रताड़ित करते हैं।”

वीडियो में तृप्ति अपनी माँ को दिखाती हैं और कहती हैं कि उनके पिता ने उनकी माँ को भी बहुत मारा है। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस उनकी मदद नहीं कर रही है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अब वो क्या करें। एक अन्य वीडियो में तृप्ति ने बताया, “हम लोग अपनी मर्जी से भागे हैं। मेरे पिता कुछ भी कह सकते हैं कि हमें किडनैप कर लिया गया है। वो हमें ढूँढ सकते हैं और हमारी हत्या कर सकते हैं। हम अपनी मर्जी से खुद अकेले भागे हैं।” तृप्ति ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर दो वीडियो पोस्ट किए थे हालाँकि बाद में उन्हें हटा लिया गया।

NEET-JEE के आयोजन के खिलाफ SC जाएँगे 7 राज्यों के CM , उद्धव ठाकरे ने कहा- हम केंद्र से लड़ें या डरें..

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं और NEET-JEE परीक्षा के मुद्दे को नरेंद्र मोदी की सरकार ने बिना ध्यान दिए ही निपटा दिया है। यह वर्चुअल बैठक इंजीनियरिंग और मेडिकल के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) और राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) का कोरोना काल में आयोजन समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ पूरे विपक्ष को एकजुट करते हुए आयोजित की गई।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक मूल्यों के लिए बड़ा झटका है, इससे सरकार की संवेदनहीनता का पता चलता है।

वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कॉन्ग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, कॉन्ग्रेस समर्थित सरकारों के मुख्यमंत्रियों और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक बैठक को संबोधित करते हुए, सोनिया गाँधी ने कहा, “हमें केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा और साथ ही उनसे लड़ना होगा। छात्रों की समस्याओं, NEET और JEE परीक्षा के मुद्दों को केंद्र द्वारा अनजाने में निपटा दिया गया है।”

इस कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद सभी मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार से परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। ममता बनर्जी के अलावा इस बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल थे। सोनिया गाँधी के साथ हुई इस मीटिंग में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस वर्चुअल बैठक में NEET और JEE एग्जाम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है।

परीक्षा स्थगित कराने के लिए हों एकजुट – ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वर्चुअल मीटिंग में मौजूद मुख्यमंत्रियों से JEE और NEET की परीक्षा स्थगित करवाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “सभी राज्य सरकारों से मेरा आग्रह है कि जब तक हालात नहीं सुधरते तब तक हम एग्जाम कैंसल करवाने के लिए एक साथ सुप्रीम कोर्ट जाएँ, ताकि छात्र JEE और NEET की परीक्षा में बैठ सकें। सितंबर में परीक्षा है। छात्रों की जिंदगी खतरे में क्यों डाली जाए? हमने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है।”

हमें तय करना होगा कि हम केंद्र से डरें या मुकाबला करें – उद्धव ठाकरे

वर्चुअल मीटिंग में ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बोलने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे जी आप अच्छा लड़ रहे हैं। इस पर उद्धव ने कहा कि मैं लड़ने वाले बाप का लड़ने वाला बेटा हूँ। इसके अलावा उन्होंने सोनिया गाँधी को अध्यक्ष पद जारी रहने के लिए बधाई देते हुए कहा कि पहले हमें तय करना चाहिए कि डरना है या लड़ना है।

वहीं, इस बैठक में मौजूद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कोरोना से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए केंद्र से जीएसटी की हिस्सेदारी न मिलने का मुद्दा उठाया।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विपक्ष कमजोर होता दिखाई दे रहा है, जिस तरह से एकजुट होकर काम करना चाहिए, वो हो नहीं पा रहा है। सोरेन ने भी जीएसटी को लेकर केंद्र पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्य सरकारों की मदद कर रही है, लेकिन बाकी राज्यों को छोड़ दिया जा रहा है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोरोना के खिलाफ राज्य सरकारें लड़ाई लड़ रही हैं, और केंद्र सरकार की तरफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अलावा कुछ नहीं हुआ है। बैठक में मौजूद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश सिंह बघेल ने कहा कि पिछले चार महीनों से केंद्र सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन का भुगतान नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि NTA ने JEE और NEET परीक्षा के आयोजन का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इन दोनों परीक्षाओं को कराने के फैसले पर सहमती दी है। जबकि कॉन्ग्रेस समेत शिवसेना और TMC ने छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए एग्जाम स्थगित करने की माँग कर रहे हैं।

TMC नेता ने महिला के पेट में मारी लात, 3 महीने की बच्ची को भी पीटा: पति की हत्या करने आए थे गुंडे

पश्चिम बंगाल में अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं ने महिलाओं और बच्चियों के साथ भी हिंसा शुरू कर दी है। ऐसी ही एक घटना सामने आई है, जहाँ बंगाल में TMC के नेता ने न सिर्फ अपने गुंडों के साथ मिल कर एक महिला को जम कर पीटा बल्कि उसकी 3 महीने पहले जन्मी बच्ची तक को भी नहीं बक्शा। ये घटना साउथ 24 परगना के जीबनताला स्थित रबिन्द्रनगर गाँव की है, जिसकी जम कर निंदा हो रही है।

26 वर्षीय पीड़िता का नाम मधुमिता हलदर है, जिसके साथ TMC नेता बापी मंडल ने बदतमीजी की। सोमवार (अगस्त 24, 2020) की रात अचानक से पहुँच गए और महिला के पति को खोजने लगे। जब पति घर पर नहीं मिला तो उन्होंने घर में ही तोड़फोड़ शुरू कर दी। फिर महिला की पिटाई शुरू कर दी गई। गुंडे खिड़की तोड़ कर घर में घुसे थे, ताकि पीड़िता के पति की हत्या कर सकें। बापी मंडल ने महिला के पेट पर भी लात मारी।

3 महीने पहले ही महिला की सर्जरी हुई है, ऐसे में उसे पेट में लात मारे जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मधुमिता किसी तरह अपने घर से निकल कर भागने में सफल रही। वो अपनी बच्ची को लेकर किसी तरह पुलिस थाने पहुँची। पश्चिम बंगाल के जीबनताला पुलिस स्टेशन स्थित घुटियरी शरीफ पुलिस आउटपोस्ट में TMC नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अभी तक हमले के पीछे की मंशा स्पष्ट नहीं है।

ये कोई राजनीतिक मामला भी हो सकता है क्योंकि पश्चिम बंगाल में TMC के गुंडों द्वारा भाजपा नेताओं की हत्या का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। अभी तक कई भाजपा नेताओं की हत्या हो चुकी है। महिला के घर में भी गुंडे हत्या की मंशा से भी घुसे थे, ऐसे में इस घटना में भी राजनीतिक बदले की भावना हो सकती है। पुलिस ने इस मामले की शिकायत दर्ज कर ली है। बापी मंडल स्थित सभी गुंडों की तलाश जारी है।

हाल ही में एक और घटना सामने आई थी, जब स्वतंत्रता दिवस के दिन दौलतचक में भाजपा और तृणमूल के कार्यकर्ता झण्डा फहरा रहे थे। अचानक सुबह 9 बजे दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। बाद में संघर्ष हिंसक हो गया। स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि बमबारी भी शुरू हो गई थी। इसी दौरान भाजपा सुदर्शन प्रमाणिक पर हमला किया गया और वे जमीन पर गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई।

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आज आत्मा की डकैती करने वाली संस्था और उसकी सबसे बड़ी आदर्श मदर टेरेसा का जन्मदिन है। चर्च और ईसाई मिशनरीज ने भ्रांतियाँ फैलाई कि ये बहुत महान व्यक्तित्व थी। इन्हें नोबेल प्राइज तक दिलवा दिया गया। वेटिकन ने इन्हें ‘संत’ घोषित कर दिया। कैथोलिक चर्च बलात्कार, यौन शोषण, बच्चों के साथ जबरन समलैंगिक संबंध जैसे तमाम अपराधों का अड्डा बन चुका है। ये लोग बच्चे को बेचते भी हैं।

ये बीमारियों को पापों का फल बताती थी और उसे भोगने के लिए कहती थी। शायद यही वजह है कि मिशनरी और चैरिटी के क्लीनिक में उस समय भी और अभी भी पीड़ादायक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को एक पेन किलर तक नहीं दिया जाता। उनसे कष्ट को सहने के लिए कहा जाता है। उनसे कहा जाता है कि जब ईसा मसीह क्रॉस पर चढ़े तो उन्हें भी तकलीफ हुई थी, तुम भी उसे महसूस करो।

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