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‘फ्लाइट में बैठने से सुशांत को लगता था डर’ – रिया चक्रवर्ती के ‘राजदीप इंटरव्यू’ की अंकिता लोखंडे ने खोली पोल

आजतक पर राजदीप सरदेसाई को ‘सुपर एक्सप्लोसिव इंटरव्यू’ देते हुए रिया चक्रवर्ती ने अपने ऊपर लग रहे कई आरोपों पर जम कर सफाई दी। उन्होंने राजदीप से अपने व सुशांत के यूरोप ट्रिप पर बातें की। 

इस बीच उन्होंने एक जगह ये बोल दिया कि सुशांत को फ्लाइट में बैठने से डर लगता था। वह उसके लिए दवाई भी लेते थे। अब उनके इसी बयान ने तूल पकड़ लिया है। सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता ने एक वीडियो पोस्ट करके रिया पर पलटवार किया है।

अंकिता ने सुशांत की उस वीडियो को ट्वीट किया, जिसमें वह खुद ही प्लेन उड़ा (हालाँकि यह शायद flight simulator हो) रहे थे। उन्होंने लिखा, “क्या यह Claustrophobia है? (सुशांत) तुम हमेशा उड़ना चाहते थे और तुम उड़े भी। हम सभी को तुम पर गर्व है।”

बता दें कि अंकिता लोखंडे सुशांत को लंबे समय से जानती थीं। वह उनके साथ पवित्र रिश्ता में काम करने के दौरान रिलेशन में आईं। बाद में दोनों के बीच 6 साल तक रिश्ता रहा। इसके बाद साल 2016 में दोनों के अलग होने की खबरें मीडिया में आईं। मगर, दोनों ने कभी भी एक दूसरे के लिए कुछ नहीं बोला।

सुशांत के जाने के बाद से ही अंकिता उनके परिवार के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। अंकिता ने ही सुशांत की मौत के पीछे सबसे पहले डिप्रेशन के कारण को नकारा था। उन्होंने सुशांत के भीतर की जिजीविषा को उदाहरण दे देकर सबके सामने रखा था। उन्होंने ही मीडिया को बताया था कि सुशांत जैसा इंसान जिसके सपने इतने ऊँचे हों, वह डिप्रेशन में कैसे हो सकता है।

बता दें कि अंकिता लोखंडे के दावे के अलावा सुशांत के इंटरव्यू भी इस बात साक्ष्य हैं कि सुशांत को ऊँचाइयों से या प्लेन से कभी डर नहीं लगता था। वह अक्सर ये बातें कहते थे कि उनके जीवन का लक्ष्य प्लेन उड़ाने के लिए लाइसेंस पाना था। इसके अलावा वह अंतरिक्ष और चांद पर जाने की इच्छा भी कई बार जाहिर कर चुके थे।

इसके अलावा उन्हें नासा जाने का मौका भी मिला था। उस समय सुशांत ने कहा था “मैंने 2 साल पहले नासा के साथ एक वर्कशॉप की थी, जिन्होंने मुझे ट्रेनिंग दी थी। मुझे वहाँ पर इंस्ट्रक्टर का सर्टिफिकेट भी मिला था। मैं सोच रहा हूँ कि अब मैं अपनी ट्रेनिंग पूरी करने हॉस्टन चला जाऊँ। वह पर स्पेस से जुड़ी काफी बातें बताते हैं।”

सुशांत ने उस दौरान यह भी बताया कि उन्होंने चाँद पर एक प्लॉट खरीदा है और नासा 2024 में कुछ एस्ट्रोनॉट्स को चाँद पर भेजेगा। उन्होंने यह भी कहा था, “मैं भी चाँद पर जाना चाहता हूँ। मैं उसके लिए पूरी तैयारी करूँगा, बाकी मेरी किस्मत पर डिपेंड करता है कि मैं जा पाता हूँ या नहीं।”

जिस हीर खान ने दी थी हिंदू देवी-देवताओं को गाली, वो पाकिस्तानी युवकों से वॉट्सऐप पर करती थी चैट

हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने वाली हीर खान पर राष्ट्रदोह का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद बुधवार को उसे जेल में बंद कर दिया गया। फ़िलहाल उससे पूछताछ के दौरान कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आ रही हैं। सबसे ताज़ा खुलासे में उसने बताया कि वह पाकिस्तान के दो युवकों से व्हाट्सएप पर बातचीत करती थी। इसके अलावा उसने बताया कि आतंकवादी मसूद अज़हर का वीडियो देख कर उसने भी नफ़रत फैलाना शुरू किया था।   

पुलिस के मुताबिक़ रिमांड पर उससे आगे की पूछताछ की जाएगी। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ हीर खान सऊदी अरब, हैदराबाद, दिल्ली, कानपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र और लखनऊ के एक मौलाना के भी संपर्क में थी। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) और खुफ़िया एजेंसी के लोगों ने हीर को जेल भेजने के पहले उससे लंबी पूछताछ की। इस बातचीत में उसने और भी कई बातें बताई।   

उसने कहा कि बीते 2 सालों में वह कई शहरों में आयोजित की गई तक़रीर का हिस्सा बन चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक़ हीर ने यह भी बताया कि उसका एक रिश्तेदार जमात-ए-इस्लाम-ए-हिंद से भी जुड़ा है। इस रिश्तेदार का बेटा स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाईजेशन का सदस्य है। इन दोनों के साथ ही वह मंसूर अली पार्क में सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुई और भाषण भी दिया था।   

अधिकारियों के मुताबिक़ अब मौलाना समेत हीर के संपर्क के लोग भी जाँच के दायरे में आएँगे। हीर खान हाईस्कूल फेल है और एक कोचिंग संचालक से अंग्रेज़ी सीखने के बाद उसने यूट्यूब पर वीडियो शेयर करना शुरू किया था। वह मोबाइल से ही अपने वीडियो एडिट करती थी। उसने अपनी दो ईमेल आईडी भी बनाई थी और परी खान नाम की फेसबुक प्रोफाइल। एक एनजीओ संचालक और अधिवक्ता भी हीर खान के संपर्क में था।     

माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ बताने वाली विवादित हीर खान को प्रयागराज पुलिस ने 25 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था। बताया जा रहा था कि इस विवादित वीडियो को बनाने के बाद हुई शिकायतों से डर से हीर खान अपने एक रिश्तेदार के घर छुपी हुई थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इसकी सूचना अपने ट्विटर अकाउंट से दी थी।

शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट में लिखा, “अल्लाह के अलावा किसी से ना डरने का दावा करने वाली हीर खान को फ़िलहाल यूपी पुलिस के होमगार्ड्स से भी खौफ लग रहा है, हमारे देवी देवताओं के लिए बेहद घटिया बयान देने वाली हीर खान मुक़दमा दर्ज होते ही फ़रार हो गई है, गिरफ़्तारी के लिए यूपी पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।” इसके अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “प्रयागराज पुलिस ने हीर खान को गिरफ़्तार कर लिया है। ये अपने एक रिश्तेदार के घर छुपी हुई थी।”

यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर एक इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने ऐसा वीडियो साझा किया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई थी। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की थी। 

हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।”

उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछार लगा दी। उसने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए कहा, “श्रीराम भ#वे की औलाद, श्रीराम ₹#डी की औलाद, तुम्हारे 33 करोड़ देवी-देवताओं की माँ का भों#ड़ा। तेरे गणपति की $%त में आग लगा देंगे। तुम सब मा$रचो# हो। तुम्हारी मीडिया की माँ का भों#ड़ा।”

अजमल कसाब से भी ज्यादा रिया का मीडिया ट्रायल: सुशांत सिंह की मौत पर स्वरा भास्कर, प्रोड्यूसर ने कहा – ‘शर्म करो’

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिह राजपूत के मामले की मीडिया कवरेज पर कटाक्ष करते हुए ट्विटर ट्रोल और रसभरी वेब सीरीज फेम स्वरा भास्कर ने अपनी नाराजगी जातते हुए इसकी तुलना अजमल कसाब के साथ की है।

स्वरा भास्कर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “मुझे नहीं लगता है कि कसाब भी मीडिया के लिए इस तरह की ‘विच हंट’ (Witch Hunt) का विषय रहा होगा। जिस तरह रिया चक्रवर्ती मीडिया ट्रायल को झेल रही हैं। हम सबको शर्म आनी चाहिए, एक जहरीली तमाशा देखने वाली जनता होने के लिए, जो इस तरह की जगरीली चीजें देख रही है।” ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर ने इस ट्वीट के साथ #RheaDrugChat #SushantSinghRajput जैसे हैशटैग का भी इस्तेमाल किया है।

वहीं, सुशांत के करीबी दोस्त और प्रोड्यूसर विकास गुप्ता ने स्वर भास्कर के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “मीडिया ट्रायल का कारण है कि केस की जाँच सीबीआई कर रही है और सच सामने आ रहा है। सुशांत की ना केवल हत्या हुई है, बल्कि बायपोलर होने की झूठी बात कही गई है और लूटा गया है। तुम जैसे लोगों को खुद पर शर्म आनी चाहिए जो गलत की मदद कर रहे हैं। रिया चक्रवर्ती और कसाब की तुलना कर रहे हो, ज्यादा हो गया।”

गौरतलब है कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल आतंकवादी अजमल कसाब को नवंबर 21, 2012 को पुणे की यरवदा जेल में फाँसी दी गई थी।

स्वरा भास्कर इससे पहले भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर हमेशा की तरह ही लगातार लिखती जा रही हैं। इससे पहले उन्होंने सुशांत केस में सीबीआई जाँच को लेकर भी मुंबई पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा था कि मुंबई पुलिस के काम पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सीबीआई जाँच के बाद अब एनसीबी ( नारकोट‍िक्‍स कंट्रोल ब्‍यूरो) के न‍िदेशक राकेश अस्‍थाना ने इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में आई कुछ अहम फाइंडिंग्‍स का भी खुलासा क‍िया है। ED को इस बात के सबूत म‍िले हैं क‍ि र‍िया च्रकवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्‍स सप्‍लाई क‍िए जाते थे।

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का निधन 34 साल की उम्र में जून, 2020 में मुंबई के बांद्रा में उनके घर पर हुआ। उनकी मृत्यु के बाद से ही इस मामले की जाँच में कई घटनाक्रम देखे गए हैं। आखिरकार यह मामला केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के पास चला गया।

11 अगस्त को, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, जो कथित तौर पर सुशांत की मौत से जुड़े प्रमुख आरोपितों में से एक है, ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह ‘मीडिया ट्रायल’ का शिकार हुई है, मीडिया के एक वर्ग ने उसकी निजता को भी ख़त्म किया है और उस पर आरोप भी लगाए हैं।

ताहिर हुसैन अब नहीं रहा पार्षद, दिल्ली नगर निगम ने निरस्त की सदस्यता: दिल्ली दंगों में है मुख्य आरोपी

आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन के मामले में बड़ी ख़बर आई है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) ने ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द कर दी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए मामले की जानकारी दी। नगर निगम के बयान के अनुसार 26 अगस्त को यह निर्णय लिया गया था।   

वार्ड संख्या 59-ई के पार्षद की सदस्यता निरस्त की जा रही है। दिल्ली नगर निगम ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। आदेश के मुताबिक़ दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 33 की उपधारा 2 में यह प्रावधान है। यदि कोई सदस्य लगातार सदन की 3 बैठकों में बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो सदन उक्त पार्षद की सदस्यता समाप्त करके वार्ड के प्रतिनिधि पद को रिक्त घोषित कर सकता है। 

इसके बाद आदेश में यह भी लिखा है कि यह पार्षद का कर्तव्य है वह लंबी अवधि की अनुपस्थिति हेतु पूर्व सूचना माननीय महापौर अथवा निगम सचिव कार्यालय को दे। ताहिर हुसैन वार्ड संख्या 59 ई का प्रतिनिधित्व कर रहा था। वो जनवरी 2020, फरवरी 2020 (मार्च 2020, अप्रैल 2020 और मई 2020 में कोविड 19 के चलते बैठक हुई नहीं), जून 2020 तथा जुलाई 2020 की बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित था।  

पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश – वार्ड 59 के पार्षद की सदस्यता समाप्ति का घोषणा – संख्या 5
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश

इस मामले में 11 अगस्त को भी ख़बर प्रकाशित हुई थी कि पार्षद ताहिर हुसैन की सदस्यता ख़तरे में पड़ सकती है। जिसमें पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने कहा था ताहिर हुसैन ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली थी। ताहिर हुसैन और पूर्व पार्षद इशरत जहां के खिलाफ़ सदन में निंदा प्रस्ताव भी पारित हुआ था। अब कानूनी प्रक्रिया समझी जा रही है कि किस तरह ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द हो सकती है? महापौर ने यह भी बताया था कि दिल्ली पुलिस की तरफ से नगर निगम को कोई जानकारी नहीं मिली थी। मगर ताहिर हुसैन ने लगातार कई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था।      

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर संप्रदाय विशेष के लोग हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया और उन्हें 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश करने का निर्देश दिया।

पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन, जो इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में हुए भीषण हिंदू-विरोधी दंगों के प्रमुख अभियुक्त है, से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की थी। टाइम्स नाउ द्वारा प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन से दिल्ली हिंसा की फंडिंग को लेकर पूछताछ की जा रही थी। इसके साथ ही, निजामुद्दीन मरकज और दिल्ली दंगों के बीच सम्बन्ध की भी अब जाँच की जा रही है। हुसैन ने दिसंबर, 2019 से फरवरी, 2020 तक दंगा करने वालों और दंगाइयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को 1.02 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए कई शेल कंपनियाँ बनाई थीं।

दंगों कि साजिश ने बारे में भी उसने कई हैरान करने वाली बातें कही थीं। उसने पूछताछ के दौरान कहा “मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”

पिंजरा तोड़ हाइ-क्लास वाले, बेल मत दीजिए… भाग जाएँगे: HC से दिल्ली पुलिस, भड़काऊ वीडियो पर TheWire ने फैलाया झूठ

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को दिल्ली पुलिस को उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में केस डायरी पेश करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलीता और नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को यह निर्देश दिया।

हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस द्वारा 29 अगस्त को केस डायरी प्रस्तुत की जाएगी और सुनवाई 31 अगस्त को होगी। इससे पूर्व, 14 अगस्त को अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की थी।

इस मामले में देवांगना कलिता और समूह की एक अन्य सदस्य नताशा नरवाल को इस साल मई में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत उन पर मामला दर्ज किया, जिसमें दंगा, गैरकानूनी सभा आयोजित करने और हत्या का प्रयास संबंधी धाराएँ शामिल हैं।

उन पर दंगों में ‘पूर्व-नियोजित साजिश’ का कथित तौर पर हिस्सा होने के आरोप में, सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक अलग मामले में कड़े आतंकवाद-रोधी कानून- गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फूटा सड़क को ठप्प करवाया था। दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था। इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर संप्रदाय विशेष के लोगों को भड़काया और नागरिकता कानून की गलत व्याख्या कर संप्रदाय विशेष को दंगों में भाग लेने के लिए भी उकसाया था।

नए नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

देवांगना कलिता के खिलाफ 4 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि नताशा तीन मामलों में आरोपित है। निचली अदालत ने 14 जून को नताशा और देवांगना कलिता की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आवेदनों में कोई ठोस आधार नहीं है और आरोप-पत्र से यह स्पष्ट है कि जाँच अभी लंबित है और इसे अन्य आरोपितों के खिलाफ भी दायर किया गया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना कलीता मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह किया कि देवांगना कलीता और उसके सहयोगी को कुछ आधारों पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने इस दलील में कहा है कि यह हाईक्लास शिक्षित परिवारों से जुड़े लोग हैं, जिन्होंने सोच-समझ कर लोगों को भड़काया और संप्रदाय विशेष की भीड़ का इस्तेमाल किया। और जमानत मिलने पर यह जाँच के पहले ही चरण में भाग भी सकते हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला दंगों की कई घटनाओं में से एक है, जो 23 से 26 फरवरी के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में दर्ज की गईं, जिसमें 53 लोग मारे गए, 581 लोग घायल हुए।

पुलिस ने कहा है कि इन दंगों के संबंध में 751 एफआईआर दर्ज की गई हैं। आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद भी अभियुक्त देवांगना कलीता को इस कारण भी जमानत नहीं दी जा सकती है क्योंकि वर्तमान में हालातों में अभी तक बहुत बदलाव नहीं आया है और जाँच जारी हैं और आरोपित को जाँच के प्रथम चरण में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि जैसा कि चार्जशीट में विस्तृत रूप से कहा गया है, यह स्पष्ट रूप से सामने आया है – वर्तमान आवेदक, देवांगना कलीता दंगों की मुख्य और प्रमुख साजिशकर्ता है और घटना के वक्त प्रदर्शन स्थल पर वह जाफराबाद मेट्रो स्थल के नीचे 66 फुटा स्पॉट रोड ब्लॉक साइट/विरोध प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थी। पुलिस के अनुसार, देवांगना शुरुआत से ही दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे यानी फरवरी 22, 2020 से हिंसक भीड़ के वापस जाने तक यानी, फरवरी 25, 2020 की देर शाम लगभग 7:00 बजे तक भीड़ का नेतृत्व कर रही थी।

पुलिस ने कहा है कि जमानत की वर्तमान आवेदक देवांगना कलीता इस प्रकार इन दंगों का मुख्य चेहरा थी, जिसने संगठित तरीके से अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर भीड़ जुटाई और स्थानीय संप्रदाय विशेष की भीड़ और आम जनता को सक्रियता से दंगे भड़काने के लिए उकसाया। इसीका नतीजा था कि भीड़ ने गोलियाँ चलाईं और पथराव किया, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर बोतलें आदि फेंकीं और यह जमानत की आवेदक देवांगना कलीता द्वारा आपराधिक मानसिकता से लगाए गए बल का ही परिणाम था, जिससे पुलिस और जनता को गंभीर चोटें आईं।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय के सामने अपना पक्ष रखते हुए लिखा है कि आरोपित को जिन कारणों से जमानत नहीं दी जानी चाहिए, वो कुछ इस प्रकार हैं –

  1. जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे 66 फूटा रोड पर विरोध प्रदर्शन स्थल पर वह मौजूद थी, तब तक भी वहाँ पर हालात सामान्य थे।
  2. 24 फरवरी को जिस जगह पर देवांगना कलीता भीड़ का नेतृत्व कर रही थी, वहीं शाहरुख पठान नाम का युवक बन्दूक तानकर पुलिस की ओर बढ़ा और उसने फायरिंग की। जिसे कि जाफराबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया।
  3. 5 जनवरी और 23 फरवरी को दिए गए भाषणों की वीडियो साक्ष्य में पिंजरा तोड़ के सदस्यों को भड़काऊ भाषण देते देखा गया है।
  4. इन्होने लोगों को हिंसक होने, लाठी और फायर आर्म्स से पुलिस से मुठभेड़ करने के लिए लोगों को उकसाया। वह दंगाइयों से लगातार सम्पर्क में थी।
  5. आरोपित देवांगना कलीता और उनके सहयोगी गुल्फिशा, नताशा, सुहैल, अदनान, तस्लीम, शादाब, गुड्डू चौधरी, फैजान और कासिम अंसारी की पहचान की गई है। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। देवांगना की रूममेट नताशा ने मई 05, 2020 को अपने बयान में इस मामले में अपनी उपस्थिति को स्वीकार किया है।
  6. देवांगना और उनके सहयोगियों को दिसम्बर 2019 में ही पूर्वोत्तर दिल्ली में बैठकें और कैंडल मार्च करते हुए देखा गया।
  7. संप्रदाय विशेष के लोगों से सम्पर्क कर नामी चेहरों के जरिए उन्हें नागरिकता कानून के सम्बन्ध में गलत जानकारी दी और कहा कि इस कानून से उनको देश से भगा दिया जाएगा।

हालाँकि, प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देवांगना कलीता की ज़मानत याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट के उनके कथित भड़काऊ भाषण के वीडियो माँगने पर पुलिस ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई वीडियो नहीं है।

जबकि, दिल्ली पुलिस द्वारा देवांगना कलीता की जमानत रद्द करने के लिए जो तर्क दिए गए हैं, उसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र किया गया है कि पुलिस के पास दो अलग-अलग दिनों – जनवरी 05, 2020 और फरवरी 23, 2020 को घटनास्थल के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 05 जनवरी और 23 फरवरी के विरोध प्रदर्शन के वीडियो बरामद कर लिए गए हैं। 5 जनवरी को CAA-NRC के विरोध में दिए गए उसके (देवांगना कलीता) शुरुआती भाषण और विरोध प्रदर्शन के लिए दिए गए भड़काऊ भाषण इसके साथ संलग्न हैं।

इससे पहले की एक सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उनके पास देवांगना कलीता के 24 और 25 फरवरी को हुए दंगों से पहले कथित तौर पर लोगों को भड़काने के वीडियो हैं और उनके 22 तथा 23 फरवरी के भी वीडियो हैं, जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि वीडियो क्लिप्स, चश्मदीदों के बयान और जमानत याचिका दायर करने वाली आरोपित के कॉल रिकॉर्ड विवरण (CDR) से भी यही नतीजे निकले हैं कि वह उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान भी दंगाइयों, मास्टर माइंड, उपद्रवियों, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, विभिन्न विरोध प्रदर्शन स्थलों के सूत्रधारों और दंगों के मुख्य षड्यंत्रकारियों के सम्पर्क में थे।

ऐसे में, द वायर का यह दावा, कि पुलिस ने देवांगना कलीता के वीडियो साक्ष्य होने से इनकार किया, द वायर के इरादों पर संदेह प्रकट करता है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अपने जवाब में लिखा है कि आरोपित देवांगना कलीता ने वीडियो साक्ष्यों की जाँच में भी उनका सहयोग नहीं किया है और अपनी जमानत के लिए दायर याचिका के लिखित जवाब में देवांगना के द्वारा जो वीडियो दिया गया है, उसमें भी घटना के चश्मदीद गवाह इंस्पेक्टर मिथिलेश को देखा जा सकता है। इसके साथ ही, ट्विटर पर मौजूद 23 फरवरी के वीडियो में भी देवांगना की मौजूदगी और भीड़ पुलिस के होने पर भीड़ को भड़काने वाले उसके बयान देखे जा सकते हैं।

पुलिस ने अपने जवाब में कहा है कि देवांगना के मोबाइल फोन से बरामद जानकारी के अनुसार यह भी पता चला है कि वह पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगाइयों के साथ लगातार और सीधे सम्पर्क में थी। पुलिस द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि स्टेटस रिपोर्ट में जिन तथ्यों को वर्णित किया गया है, उससे भी स्पष्ट है कि देवांगना प्रथम दृष्टया आरोपित हैं।

देवांगना कलीता की जमानत याचिका रद्द किए जाने की इस अपील में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उसे इस कारण भी जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि आरोपित को यदि जमानत दे दी जाए, तो वह भाग सकती है।

इसके अनुसार, आरोपित देवांगना असम की निवासी है और उसका पति यूनाइटेड किंगडम में रहता है। वह खुद दिल्ली में बतौर किराएदार रह रही है। यह पाया गया है कि देवांगना का इस सोसायटी में कोई परिवार और सम्बन्धी नहीं है और ऐसे में यदि उसे जमानत दे दी जाती है तो वह दिल्ली दंगों की जाँच के बीच ही भाग सकती है, जिससे कि जाँच प्रक्रिया बाधित होगी।

पुलिस का कहना है कि चश्मदीदों को यह भय है कि आरोपित देवांगना जमानत पर यदि बाहर आती है तो वह और उसका समूह उनके लिए खतरा पैदा कर सकते हैं क्योंकि वह गवाह इस समूह के खिलाफ बयान दे रहा है। उनकी माँग है कि उनकी पहचान गोपनीय रखने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाए। पुलिस ने कहा है कि गवाहों को अपनी सुरक्षा का भय है और उन्हें लगता है कि ये आरोपितों के बाहर आने के बाद उन्हें निशाना बना सकते हैं।

इसके साथ ही, आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने लिखा है कि कॉलम संख्या 11 में वर्णित आरोपित (देवांगना कलीता) हाइक्लास शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने जो कुछ भी किया, वह यह जानते हुए किया कि उनके काम से समाज में हलचल पैदा होगी और साम्प्रदयिक सौहार्द भी ख़राब होगा।

इसके अलावा उन्हें यह भी आभास था कि उनके कारणों से राष्ट्रीय राजधानी की शांति भी भंग होगी। अपने गलत इरादों के साथ ही आरोपितों ने ऐसी जगहों को चुना, जहाँ संप्रदाय विशेष की आबादी निवास करती है, जहाँ मस्जिद भी हैं और हिन्दू आबादी भी उसके पास ही रहती है।

उन्होंने संप्रदाय विशेष के समूह बनाने शुरू किए। इसके लिए सब्जी विक्रेता, संप्रदाय विशेष की महिलाएँ, ढाबा व्यापारी आदि चुने गए और उन तक नागरिकता कानून और जनसंख्या रजिस्टर की गलत व्याख्या की गई, उनसे कहा गया कि यदि ये कानून लागू हो गए तो उन सब को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार, पिंजरा तोड़ समूह की एक्टिविस्ट नताशा और देवांगना ने संप्रदाय विशेष के लोकल लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रभावशाली चेहरों, स्थानीय नेताओं की मदद ली। इसके लिए वो गुल्फिशा खातून और अन्य देश विरोधी तत्वों से मुलाकात की, जहरीले भाषणों से लोगों के मन में डर पैदा किया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय से निवेदन किया है कि इन सभी आधारों पर आरोपित पिंजरा तोड़ संगठन के सदस्यों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, पुलिस ने कहा है कि अभी जाँच जारी है और उन चेहरों को भी सामने लाया जाएगा जो दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल थे और अब तक भी छुपे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि सीएए के विरोध में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में पिंजरा तोड़ की सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कलीता और नताशा नरवाल के अलावा जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और गुलफिशा खातून, कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद शामिल हैं, जिन पर आतंकवाद निरोधक कानून-गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

उमर खालिद को इस मामले में अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया था कि उमर और उसके साथियों ने इलाके में लोगों को दंगा भड़काने के लिए उकसाया था और यह पूर्व नियोजित साजिश थी। हाईकोर्ट ने इससे पहले नताशा नरवाल की जमानत अर्जी को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।

इस सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि उस दौरान हर तरफ मीडिया की मौजूदगी थी और वे रिकॉर्डिंग कर रहे थे। न्यायाधीश ने कहा कि मैं जानना चाहता हूँ कि उन्होंने क्या कहा, जिससे भीड़ भड़की। ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल तथा देवांगना कलीता को मई, 2020 में दंगा मामले में गिरफ्तार किया था।

राजद जिला उपाध्यक्ष की पीट-पीट कर हत्या, BJP नेता की हालत नाजुक: आधे घंटे बाद पहुँची झारखंड पुलिस

राष्ट्रीय जनता दल के झारखंड, गिरिडीह उपाध्यक्ष कैलाश यादव को मंगलवार (25 अगस्त 2020) बेंगाबाद थाना क्षेत्र के मोतीलेदा गाँव में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। इसके अलावा उनके साथ मौजूद भाजपा नेता इंद्रलाल वर्मा (55) को पीट-पीट कर घायल कर दिया। इस घटना को लगभग दो दर्जन से ज्यादा हमलावरों ने अंजाम दिया। ख़बरों के मुताबिक़ ऐसा करने से पहले उन्होंने स्ट्रीट लाइट तक बंद कर दी थी।   

कैलाश यादव राजद के जिला उपाध्यक्ष और सह मानवाधिकार सुरक्षा संघ के जिलाध्यक्ष भी थे। हमलावरों ने दोनों नेताओं पर पूरी तैयारी के साथ हमला किया था। उनके पास डंडे, रॉड और पत्थर भी मौजूद थे। राजद नेता कैलाश यादव की उपचार के लिए धनबाद स्थित अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। वहीं भाजपा नेता इंद्रलाल वर्मा की स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। गिरिडीह में उपचार कराने के बाद उन्हें भी धनबाद भेज दिया गया है। दोनों नेताओं पर यह हमला ठीक उस वक्त हुआ, जब वह बेंगाबाद थाने से एक ही बाइक पर वापसी जा रहे थे।   

राजद नेता कैलाश यादव मोतीलेदा के टोला खैरान गाँव के रहने वाले थे। भाजपा नेता इन्द्रलाल वर्मा टोला बनगाँवा के रहने वाले हैं। जिस जगह पर यह घटना हुई, राजद नेता का घर वहाँ से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

राजद नेता के छोटे भाई छोटेलाल यादव के मुताबिक़ वार्ड संख्या 16 की सदस्य हेमंती देवी के प्रतिनिधि जितेन्द्र वर्मा के साथ निलंबित मुखिया सुखदेव राय का विवाद हुआ था। जितेन्द्र वर्मा पर बालू की रॉयल्टी न देने का आरोप था। इसके बाद जितेन्द्र वर्मा के अनुरोध पर राजद नेता कैलाश यादव और भाजपा नेता इन्द्रलाल वर्मा समेत कई अन्य बेंगाबाद थाने मुखिया के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने पहुँचे थे।   

इसके बाद सभी अपनी अपनी गाड़ी से वापस घर की ओर लौट रहे थे। इस बीच घात लगाए मुखिया सुखदेव राय, पुत्र राजेश राय समेत अन्य 20-25 लोग बैठे थे। जैसे ही कैलाश यादव और इन्द्रलाल वर्मा वहाँ पहुँचे, तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। ख़बरों के मुताबिक़ हमलावरों की संख्या 20 से 25 के बीच थी। इन्होंने हमला करने से पहले मौके पर गोलीबारी भी की थी, जिससे पूरे इलाके में दहशत हो गई थी।   

इसके चलते कोई भी स्थानीय घटना के दौरान अपने घर से बाहर नहीं निकला। यह घटना रात के लगभग 10 बजे की है। इसके अलावा हमलावर घटना को अंजाम देने के बाद मौके से पैदल ही निकल गए थे। हमलावर कैलाश यादव को घसीट कर कुछ दूरी पर ले गए और वहाँ उन्हें पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। घटना के लगभग आधे घंटे के बाद पुलिस को इसकी जानकारी मिली। पुलिस उन्हें लेकर अस्पताल जा रही थी, तभी उनकी मौत हो गई। 

फिर बुधवार को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। राजद नेता की हत्या की ख़बर मिलते ही क्षेत्र में काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। लोगों ने हमलावरों की गिरफ्तारी की माँग की। पुलिस का कहना है कि वह टेक्निकल सेल की मदद से हमलावरों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि हमले से पहले जितेन्द्र वर्मा ने चार के विरुद्ध बेंगाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।   

शिकायत में सुखदेव राय को मुख्य आरोपी बनाया गया था। शिकायत में जितेन्द्र का यह भी कहना था कि उनका एक ट्रेक्टर है। और यह लोग नदी से बालू उठाने पर रंगदारी की माँग करते हैं। रंगदारी देने से मना करने पर उनके साथ पहले मारपीट की गई थी। रात को कैलाश यादव और इन्द्रलाल वर्मा समेत अन्य लोग इस मामले की शिकायत करके थाने लौट रहे थे। तभी उन पर 20-25 लोगों ने एक साथ मिल कर हमला कर दिया था।   

‘2 सितंबर को मस्जिदें नहीं खुली तो सड़क पर पढ़ेंगे नमाज’ – सांसद इम्तियाज जलील ने महाराष्ट्र सरकार को दी चुनौती

एआईएमआईएम के सांसद ने महाराष्ट्र सरकार को खुलेआम धमकी दी है। सांसद इम्तियाज़ ज़लील ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी 2 सितंबर को मस्जिदें खोल दी जाएँ। वह इसके लिए सार्वजनिक रूप से आह्वान करेंगे। लेकिन महाराष्ट्र सरकार अगर इस दिन मस्जिदें नहीं खोलती है तो वह सड़क पर नमाज़ पढ़ने बैठ जाएँगे।   

एक समाचार चैनल से बात करते हुए एआईएमआईएम सांसद ने चेतावनी भरा बयान दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा:

“हम आखिर कब तक इंतज़ार करेंगे? यह लोकशाही है, सरकार के निरर्थक फैसलों को जनता भी कब तक बर्दाश्त करेगी। तो हमने यह फैसला किया है कि एक तारीख़ (सितंबर) को महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन किया जाता है। हिंदुओं के लिए बड़ा दिन होता है। मैं उन तमाम हिंदुओं से अनुरोध करना चाहता हूँ कि वह तमाम मंदिर और पूजा स्थल खुलवाने में लग जाएँ। फिर हम दो तारीख़ (सितंबर) को राज्य में स्थित तमाम मस्जिदों को खुलवाने का आह्वान करेंगे। सरकार अगर इजाज़त दे तो ठीक नहीं तो हम सड़क पर नमाज़ पढ़ेंगे।” 

अपने बयानों के चलते अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाले एआईएमआईएम सांसद ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों को बंद रखने के फैसले का कोई तर्क नहीं है। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर सरकार 2 सितंबर को मस्जिदें बंद रखती है तो वो खुद औरंगाबाद की शाहगंज स्थित मस्जिद में नमाज़ पढ़ने जाएँगे। इसके बाद इम्तियाज़ ज़लील ने हिंदुओं से भी अनुरोध किया कि 1 सितंबर यानी गणेश विसर्जन को वह मंदिर खुलवाने का आह्वान करें।  

नेताओं के ऐसे ही बयानों के कारण आम जनता कैसे भड़क सकती है, इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी में देखने को मिला। वहाँ मंगलवार (अगस्त 25, 2020) के दिन अचानक से माहौल बिगड़ गया था। दरअसल, हुआ यूँ कि एक युवक बिना अनुमति लिए ताजिया लेकर जा रहा था, जिसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर थाने ले गई। जैसे ही संप्रदाय विशेष के समाज के लोगों को यह पता चला कि ताजिया ले जाने वाले युवक को पुलिस ले गई है, सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

संप्रदाय विशेष समाज के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। प्रदर्शन उतना उग्र हो गया कि बाराबंकी पुलिस को भी इसे संभालने में मशक्कत करनी पड़ी। संप्रदाय विशेष समाज के लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। अफवाह फैलने लगी और प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती चली गई। बाराबंकी, गोण्डा, बहराइच और श्रावस्ती को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण बुद्धा मार्ग को संप्रदाय विशेष के प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया, जिससे आवागमन ठप्प हो गया था।

AIMIM सांसद इम्तियाज़ ज़लील के बयान से हैरानी नहीं है। यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब एआईएमआईएम के नेताओं ने इस तरह के विवादित, सांप्रदायिक और अमर्यादित बयान दिए हों। महाराष्ट्र के मालेगाँव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक मो इस्माइल ने सरेआम शांति भंग करने के लिए भड़काऊ बयान दिया था। एक वायरल वीडियो में विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल को कहते देखा जा सकता है कि अगर वो अमन-ओ-अमान बाकी रखना जानते हैं तो यह भी जानते हैं कि ये कैसे जाएगा। अपने इस जहरीले बयान देने के बाद उन्होंने इस पर सफाई भी दी और बताया कि उन्होंने ये बातें अपने शहर के संदर्भ में कहीं थीं। महाराष्ट्र या भारत के संदर्भ में नहीं। मतलब! मतलब शहर महाराष्ट्र या भारत से बाहर है? बताया नहीं उन्होंने।

वायरल विडियो में इस्माइल को कहते सुना जा सकता है, “मेरा सवाल है डिपार्टमेंट से, अगर शहर में गोली चलती है और किसी को गोली लगती है, तो कोई केस क्यों दर्ज नहीं किया गया? FIR क्यों दर्ज नहीं की गई? क्या शहर के लोग बेवकूफ हैं? शहर के लोगों को पता नहीं चलता कि गोली चलती है और एफआईआर दर्ज नहीं होती? साहब हम भी समझते हैं कि क्या हालात हैं… अगर इस तरह होता रहा तो शहर की अवाम खामोश नहीं बैठेगी।” आगे AIMIM नेता बोलते है, “…अगर बात हम पर आएगी तो हम अमन-ओ-अमान रखना जानते हैं, तो ये कैसे जाएगा, ये भी हमें पता है। हमने कोई चूड़ियाँ नहीं पहनी हैं, हमारी शराफत है कि हम आज तक खामोश हैं और शहर के अंदर गुंडागर्दी चल रही है।”

इसके पहले भी एआईएमआईएम के कुछ लोगों द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया था। बता दें कि एआईएमआईएम असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी है। मामला झारखण्ड के सरायकेला का था। यहाँ ओवैसी की पार्टी के नेताओं ने महिलाओं के साथ गाली-गलौज किया और फिर रेप करने की धमकी तक की। एआईएमआईएम के नेताओं ने लूटमार की भी कोशिश की।

बता दें कि सरायकेला में ही तबरेज अंसारी नामक व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। गाँव की 34 महिलाओं ने थाने में आवेदन देकर शिकायत की है कि ओवैसी की पार्टी के लोगों ने उनके साथ गुंडागर्दी की। यह घटना सोमवार (जून 24, 2019) की थी। चारपहिया वाहनों से पहुँचे आरोपितों ने महिलाओं से लूटपाट की, रेप और बम से उड़ा देने की धमकी भी दी।   

‘रिया चक्रवर्ती ने मेरे बेटे सुशांत सिंह राजपूत को दिया जहर, जिससे उसकी मौत हुई’ – पिता ने लगाया हत्या का सीधा आरोप

सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग्स का पहलू सामने आने के बाद कई अहम खुलासे हुए हैं। मामले में फ़िलहाल सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने बयान दिया है। उन्होंने रिया चक्रवर्ती पर सुशांत की हत्या का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रिया ने उनके बेटे सुशांत सिंह को ज़हर दिया, जिसकी वजह से उनके बेटे की मौत हुई। इसके बाद उन्होंने रिया चक्रवर्ती को जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाने पर भी बयान दिया।   

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा, “रिया चक्रवर्ती मेरे बेटे सुशांत सिंह को लंबे समय से ज़हर पिला रही थी। वह मेरे बेटे की हत्यारी है, जाँच एजेंसियों को जल्द से जल्द रिया चक्रवर्ती और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार करना चाहिए। इसके अलावा रिया को गिरफ्तार करके उसे सज़ा दिलाएँ।” 

बीते दिनों सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में अब ड्रग्स एंगल सामने आया था। ड्रग्स को लेकर रिया के व्हाट्सऐप चैट सामने आने के बाद सुशांत की फैमिली और उनके एडवोकेट ने इस मामले में अपने बयान जारी किए थे। इसके बाद सुशांत के पर्सनल असिस्टेंट अंकित आचार्य ने भी इस मामले में खुलासा किया था।

टाइम्स नाऊ की रिपार्ट के अनुसार, अंकित आचार्य ने कहा, “मैंने कभी अपने रहते हुए सुशांत को ड्रग्स लेते हुए नहीं देखा। सुशांत अपनी हेल्थ को लेकर काफी सजग रहते थे। सुशांत अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए ज्यादातर प्रोटीन, कैल्शियम और विटमिन्स युक्त जैसी चीजें ही खाते थे।”

बता दें कि अंकित आचार्य सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व मैनेजर हैं। उनका मानना है कि सुशांत आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते हैं। वहीं इस मामले में अपने द्वारा दिए गए बयान की वजह से अंकित आचार्य को नौकरी से निकल दिया गया है। वहीं उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती के ‘रिट्रीव चैट्स’ के हवाले से ड्रग्स एंगल का खुलासा हुआ था। जिसे अभिनेत्री ने डिलीट कर दिया था। चैट रिया चक्रवर्ती और गौरव आर्या के बीच का है। 

बताया गया था कि गौरव एक ड्रग डीलर है, जो इस कारोबार में कई सालों से लगा हुआ है। मार्च 8, 2020 को भेजे गए मैसेज में रिया ने लिखा था कि अगर हम हार्ड ड्रग्‍स की बात करें तो मैंने ज्‍यादा ड्रग्‍स का इस्‍तेमाल नहीं किया है। वहीं दूसरी चैट में रिया ड्रग डीलर गौरव से पूछ रही हैं कि क्या उसके पास MD है? MDMA को शॉर्ट फॉर्म में MD कहा जाता है। इसका आशय Methylenedioxymethamphetamine से है, जिसे काफी स्ट्रॉन्ग ड्रग माना जाता है।

व्हाट्सऐप चैट में रिया चक्रवर्ती से जया कहती हैं, ”चाय, कॉफी या पानी में 4 बूँद डालो और उसे पीने दो। असर देखने के लिए 30 से 40 मिनट रुको।” दोनों के बीच यह बात 25 नवंबर, 2019 को हुई थी। इसके पहले सीबीआई और ईडी के बाद अब सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में एक और केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसी जुड़ गई थी। 

जाँच के दौरान इस मामले में ड्रग्स का एंगल सामने आने के बाद, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया और अन्य के खिलाफ में एक मामला दर्ज किया था। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के निदेशक राकेश अस्थाना ने मीडिया को बताया कि ईडी को इस मामले में सबूत मिले है कि दिवंगत अभिनेता और उनकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती को ड्रग्स सप्लाई की गई थी। 

प्यार, लेकिन शादी कहीं और… दिलशाद ने अपनी ही प्रेमिका का रेप कर काटा गला: लखीमपुर खीरी रेप-मर्डर केस

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक लड़की की लाश मिलती है। गर्दन कटा होता है। पुलिस की जाँच में धारदार हथियार से हत्या और गर्दन पर चोट के निशान मिलते हैं। रेप की भी पुष्टि होती है। मामला तब राजनीतिक रंग ले लेता है, जब प्रियंका गाँधी इस मामले को लेकर ट्वीट करती हैं।

26 अगस्त को इस मामले को लेकर प्रियंका गाँधी का ट्वीट

26 अगस्त की शाम होते-होते लखीमपुर खीरी की पुलिस ने इस मामले को सॉल्व कर लिया। आरोपित दिलशाद पकड़ा गया। हत्या में उपयोग किया गया चाकू भी बरामद कर लिया गया। आरोपित ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया। मतलब केस 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया गया।

घटना के संबंध में नीमगाँव थाना का प्रेस नोट

रेप और हत्या मामले में एक और ट्विस्ट है। गाँव कनेक्शन की रिपोर्ट के अनुसार मृत लड़की की शादी उसके परिवार द्वारा कहीं और तय कर दी गई थी। प्रेमी दिलशाद को यह फैसला पसंद नहीं आया। मृत लड़की ने अपने परिवार के फैसले के खिलाफ नहीं जाने की बात दिलशाद को बताई। इस बात को लेकर दिलशाद गुस्से में आ गया। फिर उसने पहले अपनी प्रेमिका का रेप किया और बाद में चाकू से गला काट कर हत्या कर दी।

हत्या से एक दिन पहले 13 बार मोबाइल पर बात

लखीमपुर खीरी जिले के एसपी कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार मृतका के शव के पास से उनका मोबाइल व हत्या में उपयोग किया गया चाकू पुलिस ने बरामद कर लिया है। सभी पहलुओं की जाँच में जब मोबाइल कॉल की जाँच की गई तो पाया गया कि मृतका और संदिग्ध दिलशाद के बीच पिछले कई महीने से मोबाइल पर बात हो रही थी। घटना से एक दिन पहले भी दोनों के बीच 13 बार बात हुई थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने जब दिलशाद से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

मृतका के परिजनों के मुताबिक वह सोमवार को घर से निकली थीं। उन्हें पास के शहर में स्कॉलरशिप का ऑनफार्म भरने के लिए जाना था। लेकिन वो लौट कर घर नहीं आईं तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई। मृतका और हत्या आरोपित दिलशाद के बीच संबंध शायद चोरी-छिपे थे क्योंकि लड़की के चाचा शुरुआत में कहा था, ”मैं वास्तव में कुछ नहीं जानता, किस पर संदेह है, कुछ नहीं कह सकता।”

लव जिहाद का एंगल क्यों?

प्रियंका गाँधी द्वारा मामले को राजनीतिक तूल देने और पुलिस द्वारा 24 घंटे के भीतर केस को सॉल्व करने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मुद्दे को उठाया।

शलभ मणि त्रिपाठी ने प्रियंका गाँधी को कहा, “अब एक दलित बेटी हुई लव जेहाद का शिकार। दर्ज़ी दिल़शाद ने कपड़ा सिलने के बहाने दोस्ती की और जुट गया लव ज़ेहाद में। लड़की निकाह को तैयार ना हुई तो दरिंदे ने बेरहमी से रेप और हत्या कर डाली। इस खुलासे के बाद प्रियंका गाँधी एक शब्द लव जिहाद पर भी बोल दें, अगर वोट बैंक का डर ना हो तो।

लव जिहाद मामला कुछ दिन पहले कानपुर में भी नजर आया। 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से भागी 5 लड़कियाँ। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं, इन सबका संबंध जूही कॉलनी से है। IG ने इस संबंध में जाँच के लिए टीम गठित करने को भी कहा है।

शिवसेना सांसद ने दिया इस्तीफा, कहा – ‘अपने कार्यकर्ताओं के साथ नहीं कर पा रहा न्याय, NCP है मूल वजह’

महाराष्ट्र के सत्ताधारी दल शिवसेना में खींचतान का दौर जारी है। वही खींचतान अब सतह पर नज़र आ रही है। परभणी से शिवसेना सांसद संजय जाधव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। इसका कारण जिंतुर नगरपालिका में एनसीपी का दखल बताया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा है। जिसमें उनका कहना है कि वह अपने दल के कार्यकर्ताओं से न्याय करने में असमर्थ हैं।   

संजय जाधव ने अपने पत्र में यह लिखा कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इस आधार पर उन्हें सांसद बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी लिखा कि पिछले 8-10 महीनों से परभणी में जिंतुर नगरपालिका में प्रशासक नियुक्ति का मामला वह देख रहे हैं। वहाँ फिलहाल एनसीपी के एक व्यक्ति को गैर सरकारी प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह शिवसेना के कार्यकर्ताओं के साथ अपमान जैसा है और यह अस्वीकार्य है।  

संजय जाधव ने अपने इस्तीफ़े का पत्र 25 अगस्त को लिखा था। हालांकि संजय जाधव ने यह भी कहा कि भले पार्टी कार्यकर्ताओं को इंसाफ न मिले। लेकिन वो बतौर शिवसैनिक पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। वहीं शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे के मुताबिक़ यह मामला हल हो गया था। उन्होंने कहा था, “अगर सरकार में या पार्टी के भीतर किसी भी तरह के विवाद हैं तो शीर्ष नेतृत्व हल करेगा।”

बीते कुछ समय में शिवसेना और एनसीपी कार्यकर्ताओं के बीच महाराष्ट्र के कई शहरों में पदों के संबंध में विवाद की ख़बरें सामने आई हैं। दोनों ही दलों के कई नेता इस मुद्दे पर अपनी असहमति जता चुके हैं। लेकिन दलों के शीर्ष नेता अक्सर यही कहते हुए नज़र आते हैं कि गठबंधन में सब कुछ सही है। दोनों दलों के नेताओं के बीच किसी भी तरह का मनमुटाव नहीं है। लेकिन सांसद संजय जाधव का इस्तीफ़ा होने के बाद सतह पर ऐसा नहीं नज़र आता है।      

अभी से लगभग साल भर पहले जब विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे ने भाजपा का साथ छोड़ कर एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बनाई थी, तभी से तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इसके पहले तक दोनों दल एक दूसरे के वैचारिक स्तर पर विरोधी रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दृष्टिकोण से अंतिम नतीजे क्या होते हैं, इस पर कुछ भी कहना कठिन!