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10 माह से सुशांत के सम्पर्क में नहीं थे संदीप सिंह, कॉन्ग्रेस के संजय निरुपम और जरीना वहाब से की थी बात: कॉल रिकॉर्ड से खुलासा

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में संदिग्धों पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। वहीं, इस मामले में हर रोज नए-नए खुलासे भी हो रहे हैं। समाचार चैनल टाइम्स नाऊ के हाथ सुशांत सिंह राजपूत के कथित करीबी दोस्त संदीप सिंह के मोबाइल फोन का कॉल रिकॉर्ड्स लगा है।

बताया जा रहा है कि इस कॉल रिकॉर्ड के अनुसार, संदीप सिंह पिछले 10 महीनों से सुशांत के साथ संपर्क में नहीं थे। सुशांत सिंह के साथ संदीप की अंतिम बार बातचीच सितंबर, 2019 में हुई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि संदीप यदि सुशांत सिंह के इतने करीबी दोस्त थे तो वह अभिनेता के संपर्क में क्यों नहीं थे? 

रिपब्लिक टीवी के अनुसार, ये भी पता चला है कि संदीप सिह ने एंबुलेस के ड्राइवर को कॉल किया था। संदीप ने 14 जून को 3 बार और 16 जून को एक बार ड्राइवर को कॉल किया था। कुल मिलाकर संदीप और एंबुलेंस ड्राइवर के बीच 4 बार बात हुई थी। एंबुलेंस ड्राइवर से जब इस बारे में पूछा गया तो उसने कुछ भी बोलने से मना कर दिया है।

कॉल डिटेल से यह भी खुलासा हुआ है कि संदीप सिंह द्वारा कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम और अभिनेता सूरज पंचोली की माँ जरीना वहाब को भी कॉल किए गए थे।

जानकारी के मुताबिक, नवंबर 16, 2019 और जुलाई 29, 2020 की अवधि के बीच संदीप सिंह ने संजय निरुपम को 28 कॉल किए थे। इससे पहले संजय निरुपम ने दावा किया था कि जब सुशांत की मौत की खबर सामने आई थी, तब वह संदीप सिंह के साथ थे।

दूसरी तरफ, सूरज पंचोली की माँ जरीना वहाब के साथ उनकी कॉल डिटेल्स भी सामने आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों के बीच सितंबर 4, 2019 से जून 20, 2020 तक 5 बार कॉल पर बातचीत हुई है।

कॉल रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि 14 जून को, एम्बुलेंस ड्राइवर अक्षय बंडगर ने शाम 6.40 बजे संदीप सिंह को कॉल किया और 48 सेकंड तक बातचीत की। इसके बाद उसने 7.57 बजे दूसरी कॉल की और 51 सेकंड तक उनसे बात की।

कॉल रिकॉर्ड के अनुसार, संदीप ने एम्बुलेंस ड्राइवर को तीसरी कॉल 9 जून को सुबह 9.59 बजे की थी। इसके बाद संदीप सिंह ने 16 जून को फिर से 104 सेकंड तक एंबुलेंस ड्राइवर से बात की थी। कॉल डिटेल के सामने आने के बावजूद एंबुलेंस ड्राइवर का कहना है कि वो संदीप सिंह को नहीं जानता। उसे तो मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है। ड्राइवर ने कहा कि उसने पहली बार संदीप सिंह का नाम सुना है।

कॉल डिटेल्स के मुताबिक, संदीप सिंह ने पिछले 10 महीने से सुशांत को एक भी बार फोन नहीं किया। बावजूद इसके वे सुशांत को अपना करीबी दोस्त बताते आए हैं। सुशात का परिवार पहले दिन से ये दावा कर रहा है कि वे संदीप सिंह को नहीं जानते। उन्हें ये भी नहीं मालूम कि संदीप सुशांत के करीबी थे।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह की मौत के बाद संदीप सिंह फ्रंट पर काम करते दिखे थे। अस्पताल से लेकर श्मशान घाट तक संदीप सिंह सबसे आगे नजर आए थे। कूपर अस्पताल में सारा काम संदीप सिंह की देखरेख में हुआ था। सुशांत की बहन के साथ भी संदीप सिंह दिखे थे।

लेकिन अब जिस तरह से संदीप सिंह को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या संदीप सिंह को अस्पताल में किसी ने भेजा था, क्योंकि सुशांत संग तो उनकी पिछले 10 महीने में कोई बात ही नहीं हुई थी, तो क्यों वे आगे आकर सब लीड कर रहे थे। संदीप सिंह के दुबई कनेक्शन की भी बात सामने आ रही है।

केरल सचिवालय में वहीं लगी आग जहाँ थे गोल्ड स्मगलिंग काण्ड के साक्ष्य, सबूत मिटाने की होगी कोशिशें, कहा था विपक्ष ने

तिरुवनंतपुरम में केरल सचिवालय में मंगलवार (अगस्त 25, 2020) को आग लग गई, जिसे विपक्ष ने ‘सोने की तस्करी मामले से जुड़े सबूतों को नष्ट करने की साजिश’ कहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने केरल सरकार के खिलाफ सचिवालय के समक्ष धरना दिया। 5 जुलाई को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से 30 किलोग्राम सोना जब्त होने के बाद से केरल सोना तस्करी कांड गर्माया हुआ है।

केरल के भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि यह सुनियोजित तोड़फोड़ और सोने की तस्करी मामले में मंत्रियों की भागीदारी को छिपाने का एक प्रयास था। रहस्यमयी तरीके से लगी इस आग को साजिश बताने के चलते भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन को विरोध प्रदर्शन के बाद मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने कहा, “लोकतंत्र का कत्लेआम किया गया है।” उनकी पार्टी के प्रदर्शनकारी नेताओं ने आग प्रभावित क्षेत्रों की फोरेंसिक जाँच की माँग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, सचिवालय में लगी आग पर नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन इससे पहले कई फाइलें नष्ट होने की सूचना सामने आई हैं, जिसके कारण कई विपक्षी नेताओं को साजिश का संदेह हुआ है। सचिवालय में हाउसकीपिंग सेल के अतिरिक्त सचिव पी हनी ने कहा कि एक कंप्यूटर के शॉर्ट सर्किट से लगी आग से गोल्ड तस्करी मामले की जाँच कर रहे प्रोटोकॉल अधिकारी के कार्यालय को नुकसान हुआ है।

मौके पर अग्निशमन कर्मियों के आने तक, कांग्रेस और भाजपा ने इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है। मुख्य सचिव विश्वास मेहता घटनास्थल पर पहुँचे और उन्होंने इस घटना की विस्तृत जाँच का आश्वासन दिया। हालाँकि, एक टीवी चैनल से उन्होंने कहा कि कोई महत्वपूर्ण फाइल नष्ट नहीं हुई हैं और वे सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि घटना के समय कार्यालय में केवल दो लोग थे और वे सुरक्षित हैं।

पहले भी लगे हैं सुबूतों को नष्ट करने के आरोप

उल्लेखनीय है कि केरल के विपक्षी नेता रमेश चेन्निथला ने जुलाई 22, 2020 को आरोप लगाया था कि राज्य सरकार सचिवालय में सीसीटीवी कैमरे बदलकर सोने की तस्करी मामले में सबूत नष्ट करने की कोशिश कर रही है।

चेन्निथला ने कहा कि सभी सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें मुख्य सचिव भी इसमें शामिल हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार चेन्नीथला ने सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा था, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार सोने की तस्करी से जुड़े सभी सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए बिजली की गड़गड़ाहट का हवाला देकर सचिवालय में सीसीटीवी कैमरे बदले गए। हमने हाल ही में कोई गड़गड़ाहट या बिजली की आवाज़ नहीं सुनी है। मुझे वास्तव में शक है। चेन्निथला ने कहा कि सभी सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य सचिव भी इसमें शामिल हैं।”

केरल गोल्ड स्मगलिंग केस

गौरतलब है कि यूएई वाणिज्य दूतावास की पूर्व कर्मचारी स्वप्ना सुरेश और दो अन्य लोगों के खिलाफ तिरुवनंतपुरम में ₹14.82 करोड़ कीमत के 30 किलो गोल्ड स्मगलिंग के हाई प्रोफाइल मामले में केस दर्ज किया गया था। यह घटना 5 जुलाई तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट की है।

ED की कस्टडी में स्वप्ना सुरेश ने NIA की पूछताछ में बताया कि विभिन्न बैंकिंग और गैर बैंकिंग चैनल के जरिए निवेश करके इस अपराध को अंजाम दिया गया। एनआईए मामले की जाँच कर रही है।

‘3 महीने नहीं, 3 साल से बम बना रहा था मेरा बेटा युसूफ’: ISIS आतंकी के अब्बू-भाई-बीवी के बाद अब अम्मी आई सामने

दिल्ली से गिरफ्तार ISIS आतंकी अबू युसूफ का उत्तर प्रदेश स्थित बलरामपुर में रहने वाले परिवार के सदस्य एक-एक कर सामने आ रहे हैं और अलग-अलग बातें कर रहे हैं। अब उसकी अम्मी कहकशाँ सामने आई है, जिन्होंने कहा है कि उनके बेटे अबू युसूफ का राम मंदिर से कोई सरोकार नहीं था क्योंकि भूमिपूजन तो 20 दिन पहले ही हुआ है जबकि, अबू युसूफ तो 3 साल से बम बना रहा था।

गौरतलब है कि ISIS आतंकी अबू युसूफ ने खुद स्वीकार किया है कि वो राम मंदिर भूमिपूजन का बदला लेना चाहता था। अब इस खुलासे से स्थानीय पुलिस का सिरदर्द और बढ़ गया है कि वो 3 सालों से बम बना रहा था और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। हालाँकि, अबू युसूफ की अम्मी की मानें तो वो बाबरी मस्जिद के बारे में बातें करते हुए कहता था कि अगर वहाँ मस्जिद बन भी गई तो इबादत करने कौन जाएगा?

उसकी अम्मी का कहना है कि वो हमेशा यूट्यूब वीडियो देखता रहता था और अपने मोबाइल फोन पर ही व्यस्त रहता था। उन्होंने दिल्ली पुलिस के समक्ष हुए पूछताछ में भी बताया है कि युसूफ उर्फ मुस्तकीम यूट्यूब पर भड़काऊ वीडियो देखा करता था और पिछले 3 सालों से बम बनाने के काम में जुटा हुआ था। ISIS आतंकी युसूफ की अम्मी का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि उसके इरादे इतने खतरनाक हो चुके हैं।

अबू युसूफ की अम्मी कहकशाँ ने ये भी बताया कि युसूफ खुद में ही व्यस्त रहता था और किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता था। 2010 में जब वह सऊदी से लौटा था, तभी से वो इसमे कट्ट्टरता की राह पर चल पड़ा था और ISIS के संपर्क में आने लगा था। कहकशाँ ने ये भी बताया कि उसकी इस्लामी कट्टरता के कारण पूरे गाँव ने उससे और उसके परिवार से किनारा कर रहा था।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, उसके पड़ोस में रहने वाले एक बुजुर्ग महिला ने भी इस बात की पुष्टि की है कि युसूफ उर्फ मुस्तकीम के परिवार से गाँव के सभी लोगों ने सबंध समाप्त कर लिए थे। शादी-विवाह ये अन्य समारोहों में उन्हें नहीं बुलाया जाता था। उसने कब्रिस्तान में विस्फोटक का ट्रायल भी किया था। उस समय धुएँ के गुबार से आसमान भर गया था, जिससे गाँव में दहशत का माहौल हो गया था।

ज्ञात हो कि इससे पहले उसके परिवार के अन्य लोग भी अलग-अलग किस्म के बयान दे चुके हैं। उसकी बीवी ने कहा कि उसका शौहर लगभग दो साल से थोड़ा-थोड़ा कर के सामान (बारूद) लाता था और एक खाली बक्से में रखता था। उसके अब्बू का कहना है कि उसके बेटे की रीढ़ की हड्डी खिसकी हुई है, जिसका 2 साल से लखनऊ में इलाज चल रहा है। वो मामाँ के बीमार बेटे को देखने लखनऊ गया था।

वहीं उसके भाई ने कहा कि उसे ISIS के झंडे की पहचान नहीं है पर रात को झंडा देखा। काले रंग के झंडे पर सफेद रंग से अरबी में ‘अल्लाह हू अकबर ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह‘ लिखा था। आकिब ने बताया कि उसका भाई सऊदी और अन्य जगहों पर रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुक्रवार देर रात एनकाउंटर के बाद वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के अबू यूसुफ खान को गिरफ्तार किया था।

सुशांत की ऑटॉप्सी में जानबूझकर हुई देरी, पेट में जहर घुलने का किया गया इंतजार: सुब्रमण्यम स्वामी

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत का मामला सीबीआई के पास पहुँचने के बाद अब इस केस में बहुत तेजी से कई खुलासे हो रहे हैं। इसी कड़ी में, भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी इस मामले पर लगातार टिप्पणियाँ कर रहे हैं।

मगंलवार (अगस्त 25, 2020) को भी सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट किया और सुशांत सिंह राजपूत के दोस्त और फिल्ममेकर संदीप सिंह से पूछताछ की माँग उठाई। इसके अलावा बीजेपी नेता स्वामी ने सुशांत सिंह को जहर दिए जाने की बात भी अपने ट्वीट में की।

सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने एक ट्वीट में संदीप सिंह का उल्लेख करते हुए लिखा, “संदिग्ध संदीप सिंह से भी सवाल-जवाब होने चाहिए कि वो कितनी बार दुबई गया और क्यों गया?”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने सुशांत सिंह को जहर दिए जाने का आरोप लगाते हुए कहा, “हत्यारों और उनकी शैतानी मानसिकता की पहुँच धीरे-धीरे सामने आ रही है। ऑटॉप्सी को जानबूझकर लेट किया गया, ताकि सुशांत सिंह के पेट में जहर घुल जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि जो जिम्मेदार हैं, उन पर नकेल कसने की जरूरत है।

इससे पहले भी स्वामी ने सुशांत की मौत के मामले में दुबई कनेक्शन और पोस्टमार्टम लेट होने का मुद्दा उठाया था। सोमवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा था, “जैसे एम्स के डाक्टर्स को सुनंदा पुष्कर के पेट में असली जहर मिला था। वैसा श्रीदेवी और सुशांत के केस में नहीं हुआ। सुशांत ने मौत के दिन दुबई के ड्रग डीलर अयाश खान ने उनसे मुलाकात की थी? आखिर क्यों?”

गौरतलब है कि सुशांत केस में सीबीआई लगातार अपनी जाँच को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में सुब्रमण्यम स्वामी भी लगातार इस केस पर अपना मत साझा कर रहे हैं। उनके अलावा सुशांत सिंह राजपूत के भाई नीरज सिंह भी माँग कर रहे हैं कि सिद्धार्थ पिथानी और संदीप सिंह को थर्ड डिग्री देकर पूछताछ की जाए। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत का निधन 14 जून को हुआ था। सीबीआई उनकी मौत की जाँच कर रही है। 

भगवान राम-सीता को गाली देने वाली हीर खान गिरफ्तार: पुलिस के डर से रिश्तेदार के घर छुपी थी

माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ बताने वाली विवादित हीर खान को प्रयागराज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस विवादित वीडियो को बनाने के बाद हुई शिकायतों से डर से हीर खान अपने एक रिश्तेदार के घर छुपी हुई थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इसकी सूचना अपने ट्विटर अकाउंट से दी है।

शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट में लिखा है, “अल्लाह के अलावा किसी से ना डरने का दावा करने वाली हीर खान को फ़िलहाल यूपी पुलिस के होमगार्ड्स से भी खौफ लग रहा है, हमारे देवी देवताओं के लिए बेहद घटिया बयान देने वाली हीर खान मुक़दमा दर्ज होते ही फ़रार हो गई है, गिरफ़्तारी के लिए यूपी पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।”

इसके अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “प्रयागराज पुलिस ने हीर खान को गिरफ़्तार कर लिया है। ये अपने एक रिश्तेदार के घर छुपी हुई थी।”

यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर एक इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने ऐसा वीडियो शेयर किया है, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई हैं। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की है।

सोशल मीडिया पर #ArrestHeerKhan सुबह से टॉप ट्रेंड कर रहा है, लोग हीर खान की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। इस मामले में लखनऊ पुलिस के पास मुकदमा दर्ज किया गया और साइबर टीम मामले की पड़ताल में जुट गई थी।

हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।”

उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछार लगा दी। उसने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए कहा, “श्रीराम भ#वे की औलाद, श्रीराम ₹#डी की औलाद, तुम्हारे 33 करोड़ देवी-देवताओं की माँ का भों#ड़ा। तेरे गणपति की $%त में आग लगा देंगे। तुम सब मा$रचो# हो। तुम्हारी मीडिया की माँ का भों#ड़ा।”

यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में जबरदस्त आक्रोश का माहौल है। हीर खान ने अपनी बदजुबानी जारी रखते हुए आगे कहा, “सेकुलरिज्म की माँ का भों#ड़ा, भाईचारा निभाने वालों की माँ का भों#ड़ा। साथ में उनकी भी माँ का भों#ड़ा जो कहते हैं कि भगवानों को गाली मत दो। उनकी भी माँ-बहनों को $#द डालेंगे। सीता, दुर्गा और काली – सबको कोठे पर बिठा कर चु#$ डालेंगे।”

अपनी हर वीडियो में ज़हर उगलने वाली हीर खान ने उस वीडियो में कहा है, “वो नाजायज थी और मात्र 6 साल की थी, जब रावण ने उसका ख़ून निकाल दिया था। जितने भी सेक्युलर पत्रकार हैं, तेरी माँ का भों#ड़ा। तुमलोग सोच रहे थे कि तुम इस्लाम को गाली दोगे और हम सुनते रहेंगे?”

महिला ने लगातार माँ सीता और माँ दुर्गा के लिए अपशब्द कहे। साथ ही उसने ये भी धमकी दी कि जिसे मन हो, वो जाकर एफआईआर करा दे। हीर खान के इस यूट्यब चैनल पर कई वीडियो हैं। वो वहाँ जनवरी 2020 से वीडियो डाल रही है। उसका कहना है कि उसका पुराना यूट्यूब चैनल डिलीट हो गया है। कुछ वीडियो में तो वो पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर के लिए भी अपने ‘प्यार’ का प्रदर्शन करती रहती है।

एसेंबल इन इंडिया: भारत में शुरू हुई iPhone SE की एसेम्बलिंग, 20% आयात शुल्क घटने से बेहद कम होगी कीमत

गैजेट्स निर्माता कम्पनी एप्पल (Apple) ने भारत में कम कीमत वाले सेकंड जेनेरेशन iPhone SE (2020) को एसेम्बल करना शुरू कर दिया है, जो कि बहुत जल्द ही अधिकृत रिटेल स्टोर्स और ऑनलाइन चैनलों तक पहुँच जाएगा। iPhone SE (2020) की भारत में प्रोडक्शन शुरू होने के कारण अब Apple को इस पर 20% आयात शुल्क नहीं देना पड़ेगा, जिसके कारण कंपनी इसकी कीमतों को कम कर सकती है। केंद्रीय संचार और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्विटर पर इस बात की जानकारी दी है।

केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपने ट्वीट में लिखा, “Apple का नवीनतम और सबसे सस्ता स्मार्टफोन iPhoneSE अब भारत से निर्यात किया जा रहा है। COVID-19 द्वारा लाए गए व्यवधानों के बावजूद बेंगलुरु में सुविधा से इसका उत्पादन रिकॉर्ड समय में शुरू हुआ। हम भारत को एक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (मेन्युफेक्चरिंग) केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

iPhone SE (2020) अब ‘एसेंबल इन इंडिया’ के टैग के साथ आएँगे। यानी, Apple का यह किफायती iPhone भारत में ही एसेंबल किया जाएगा। iPhone SE (2020) के बाद उम्मीद है कि भविष्य में और भी आईफोन भारत में ही एसेंबल किए जाएँगे। इसके साथ ही सम्भावनाएँ यह भी बढ़ रही हैं कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के अभियान में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ iPhone चाहने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए आईफ़ोन एप्पल (Apple) ने नए iPhone SE को भारत में लाया है, जो कि iPhone 11 की सामर्थ्य के साथ Apple iPhone 8 जैसा दिखता है। भारतीय बाजार में यह सिर्फ 42,500 रुपए में उपलब्ध होगा। यह फोन 128 जीबी और 256 जीबी स्टोरेज वेरिएंट में भी उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन कंपनी ने फिलहाल अपने बाकी दो वेरिएंट की कीमत से पर्दा नहीं उठाया है।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईफ़ोन निर्माता कंपनी एप्पल ने एक बयान में कहा, “नया iPhone SE (आईफोन एसई) हमारी सबसे ताकतवर चिप को हमारे सबसे ताकतवर साइज और सस्ती कीमत पर पैक करता है और हम इसे अपने स्थानीय ग्राहकों के लिए भारत में बनाने के लिए उत्साहित हैं।”

iPhone SE में एप्पल ए13 बायोनिक चिपसेट है। Apple ने इसी चिपसेट का इस्तेमाल iPhone 11 series में भी किया था। गौरतलब है कि iPhone SE को Apple सप्लायर Wistron (विस्ट्रोन) द्वारा अपने बेंगलुरु प्लांट में असेंबल किया जा रहा है।

सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स का नया ऐंगल: ED ने CBI को सौंपी रिया चक्रवर्ती की ड्रग डीलर से चैट

बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत स‍िंह राजपूत की आत्‍महत्‍या मामले में अब ड्रग्स का ऐंगल सामने आया है। उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की एक व्हाट्सऐप चैट सामने आई है, ज‍िसमें वह ड्रग्स के डीलर के संपर्क में नजर आ रही हैं। टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के मुताबिक, रिया की चैट से पता चला है कि वह ड्रग्स का ‘इस्तेमाल और डीलिंग’ करती थीं। ईडी ने इस चैट को सीबीआई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को जाँच के लिए सौंप दिया है।

सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स का ऐंगल सामने आने पर अब नारकोटिक्स ब्यूरो इस मामले की जाँच करेगा। मंगलवार (अगस्त 25, 2020) को सीबीआई की टीम ने ईडी के अधिकारियों से मुलाकात की और फोन रिकार्ड्स उनसे ले ल‍िए हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल से जाँच कर रही ईडी ने रिया और उनके परिवार के मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिए थे। उन्‍हीं मोबाइल से अब ड्रग्स का ऐंगल सामने आया है।

फिलहाल सीबीआई की टीम सीए संदीप श्रीधर, फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी, कुक नीरज सिंह, अकाउंटेंट रजत मेवाती और हाउस हेल्प केशव से पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि सीबीआई की टीम जल्द ही मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। जाँच एजेंसी ने इसके लिए 24 सवालों की लिस्ट भी तैयार की है।

बता दें कि सुशांत केस में दुबई कनेक्शन का दावा कर चुके भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ड्रग डीलर का मामला उठाया था। उन्‍होंने कहा था कि दुबई का ड्रग डीलर अयाश खान सुशांत से उनकी मौत के दिन क्‍यों मिला था! सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया था कि ऐसी क्‍या वजह थी सुशांत की मौत वाले दिन ड्रग डीलर अयाश खान की उनसे मुलाकात हुई।

सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमॉर्टम और विसरा रिपोर्ट की जाँच सीबीआई ने एम्स की एक फरेंसिक टीम से कराई है। इस जाँच के जरिए सुशांत की असल मौत की वजह, उसका वक्त और पोस्टमॉर्टम में बरती गई लापरवाही भी सामने आ सकती हैं। एम्स की फरेंसिक टीम इस रिपोर्ट को शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को सीबीआई को सौंप सकती है। एम्स की टीम डॉक्टर सुधीर गुप्ता की अध्यक्षता में यह जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत स‍िंह राजपूत की आत्‍महत्‍या के मामले में रोज नया पहलू सामने आ रहा है। केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई इस मामले की खोजबीन में जुट गई है। इस घटना को दो महीने से ज्‍यादा वक्‍त हो चुका है ले‍किन अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्‍महत्‍या क्‍यों की। 14 जून को जब यह खबर सामने आई थी तो कहा गया था कि वह डिप्रेशन में थे और इसी वजह से उन्‍होंने यह कदम उठाया। सीबीआई ने इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है जिसमें र‍िया चक्रवर्ती को मुख्‍य आरोपित बनाया गया है। 

हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र मीम बनाने वाला एंजियो फर्नांडिस हुआ गिरफ्तार, लंबे समय से कर रहा था अपमानजनक पोस्ट

सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के ऊपर अभद्र टिप्पणी करके समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गोवा की वास्को पुलिस ने 20 साल के एंजियो फर्नांडिस को गिरफ्तार किया है।

वास्को के पुलिस अधिकारी नीलेश राणे ने शिकायतों का हवाला देते हुए बताया कि फर्नांडीस ने सोशल मीडिया पर संप्रदाय विशेष की और हिंदू देवाताओं की विभिन्न अपमानजनक तस्वीरें पोस्ट की थीं, जिससे कई लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची थी।

उन्होंने बताया कि वह इस मामले में आगे की जाँच कर रहे हैं और ये पता लगाने की कोशिश हो रही है कि कहीं एंजियों के साथ इन सबमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल तो नहीं था।

गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी दो दिन पहले हुई थी और शिकायतकर्ताओं ने माँग उठाई थी कि एंजियो के ख़िलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई हो, ताकि दोबारा कोई ऐसी हरकत न कर सके। इससे पहले गोवा के हिंदवी स्वराज संगठन के अध्यक्ष ने इस फर्नांडीस के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। इसके बाद संप्रदाय विशेष के लोगों ने भी एंजियों के खिलाफ़ केस दर्ज करवाया था।

जानकारी के मुताबिक, एंजियो फर्नांडिस फेसबुक पर अपने असली नाम के साथ और इंस्टाग्राम पर zb.dark आईडी से अकॉउंट संचालित कर रहा था। इन्हीं प्लेटफॉर्म पर वह देवी-देवताओं का अपमान करते हुए तस्वीरें पोस्ट करता था। नीचे वाली तस्वीर में हम देख सकते हैं उसने मुख्यत: हिंदुओं के भगवानों का मजाक बनाया।

हिंदू देवी देवताओं पर एंजियो की टिप्पणी

फर्नांडिस द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर की गई कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही हैं। यूजर्स उसकी हरकत पर ध्यान आकर्षित करवाने के लिए इन्हें आगे बढ़ा रहे हैं। इन्ही में से एक तस्वीर में हम देख सकते हैं कि भगवान गणेश से गज-मुख से जुड़ी कहानी की तुलना ISIS की बर्बरता से करता है।

हिंदू देवी देवताओं का अपमान

इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उस फोटो पर तंज कसता है जिसमें माता लक्ष्मी भगवान के चरणों के पास बैठी नजर आती हैं। एक अन्य फोटो में वह हिंदुओं की देवी का चित्रण ‘Fucking virus’ लिख कर करता है और उस तस्वीर में दर्शाता है कि वह कोरोना के कारण अपने कई हाथों को धुल रही हैं।

इसी प्रकार साई बाबा की तस्वीर पर भी, “fu*k it SHY BABA” लिखता है और ‘गणपति बप्पा’ की तस्वीर के नीचे एक लड़की की अर्धनग्न तस्वीर लगाता है, साथ ही ‘गणपति मोरया’ की जगह मीम के नाम पर अभद्रता पेश करता है।

गणपति बप्पा की तस्वीर पर अभद्रता फैलाने की कोशिश

UP: प्रियंका ने की योगी सरकार को ट्रोल करने की कोशिश, 12 पुलिस थानों ने दिए सटीक जवाब

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने आज, मंगलवार (अगस्त 25, 2020) उत्तर प्रदेश के बलिया में पत्रकार की हत्या समेत अन्य वारदातों का हवाला देते हुए योगी सरकार पर कटाक्ष किया और उत्तर प्रदेश के ‘अपराध मीटर’ का एक पोस्टर ट्वीट कर अपने दिन की शुरुआत की।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने इस ट्वीट में लिखा, “यूपी के सीएम सरकार की स्पीड बताते हैं और अपराध का मीटर उससे दोगुनी स्पीड से भागने लगता है। प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्। ये यूपी में केवल दो दिनों का अपराध का मीटर है। यूपी सरकार बार-बार अपराध की घटनाओं पर पर्दा डालती है मगर अपराध चिंघाड़ते हुए प्रदेश की सड़कों पर तांडव कर रहा है।”

लेकिन प्रियंका गाँधी ने शायद ही इन अपराधों को सामने रखते वक़्त इस बात पर ध्यान दिया होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस इन सभी मामलों पर कार्रवाई कर चुकी है, जिनमें आधे से अधिक में आरोपित गिरफ्तार भी कर लिए गए हैं जबकि कुछ मामले आत्महत्या और पड़ोसियों के आपसी विवाद को लेकर थे।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में घटित रविवार को 9 और सोमवार को हुई 12 वारदातों का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी में केवल दो दिनों का अपराध का मीटर है। प्रियंका गाँधी ने उत्तर प्रदेश पुलिस के जिस-जिस थाना क्षेत्र के अपराध का इस पोस्टर में जिक्र किया था उन सभी ने अपने अपने थानान्तर्गत हुए इन अपराधों का विवरण देकर प्रियंका गाँधी वाड्रा की चिंता (चिंताओं) का बड़े रोचक तरीके से समाधान किया।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन अपराधों का विवरण ट्वीट के जरिए दिया –

4599 मंदिर, 31250 हिंदू घर-दुकान को कट्टरपंथियों ने किया ध्वस्त… ‘बाबरी’ की आड़ में मीडिया छुपाता है ये आँकड़े

हिंदुओं द्वारा अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि पर एक बार फिर अपना अधिकार प्राप्त कर लेने के बाद वामपंथी मीडिया और इस्लामिक विचारधारा समर्थक गिरोह हिंदुओं के खिलाफ युद्ध के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। मार्क्सिस्ट-लेफ्टिस्ट मीडिया ने इस झूठ को स्थापित करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी कि यहाँ पर श्रीराम मंदिर था ही नहीं। ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के नेता सैय्यद शाहबुद्दीन ने वर्ष 1990 में एक बार कहा था कि अगर वहाँ पर राम मंदिर के अवशेष मिले तो वो बाबरी को बड़े हथौड़े से गिरा देंगे।

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि स्थल के इतिहास को लेकर वर्ष 1989 तक कोई सवाल नहीं किया गया था। सभी लिखित स्रोत, चाहे हिंदू, मुस्लिम या यूरोपीय हों, सभी उस स्थल पर पहले से श्रीराम मंदिर के अस्तित्व को लेकर सहमत थे। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका, वर्ष 1989 संस्करण में ‘अयोध्या’ चैप्टर के अनुसार, “अयोध्या में राम के जन्मस्थान पर एक मस्जिद बनाई गई। जिसे मुगल सम्राट बाबर द्वारा 1528 में पहले से निर्मित मंदिर की ज़मीन पर बनाया गया।”

बेल्जियम के विश्व प्रसिद्ध विद्वान डॉ कोनराड एल्स्ट (1959-) ने लिखा है:

“दिसंबर 1990 में, चंद्रशेखर की सरकार ने इस मामले की ऐतिहासिक सच्चाई पर चर्चा के लिए विद्वानों के एक दल को शामिल करने के लिए विश्व हिंदू परिषद और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (BMAC) में शामिल दो समूहों को आमंत्रित किया। BMAC के पदाधिकारी यह सोचकर बिना किसी तैयारी के उस चर्चा में पहुँचे कि हिंदुओं द्वारा किए जा रहे दावे काल्पनिक हैं। लेकिन जब वीएचपी टीम ने श्रीराम मंदिर जन्मभूमि मामले का समर्थन करते हुए दर्जनों दस्तावेज पेश किए तो वे दंग रह गए।”

BMAC ने तब मार्क्सवादी प्रोफेसर आरएस शर्मा की अध्यक्षता में इतिहासकारों की एक टीम को आमंत्रित किया। शर्मा इस माँग के साथ अगली बैठक में पहुँचे कि उन्हें ‘स्वतंत्र विद्वानों’ के रूप में मान्यता दी गई है, जो विवादित फैसले में शामिल होने जा रहे थे यानी, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के आकाओं और VHP विरोधियों के बीच एक निर्णय पारित करने के लिए शामिल होने जा रहे थे। सरकार के प्रतिनिधियों ने इस हास्यास्पद माँग को मंजूरी नहीं दी।

अगली बैठक में, मार्क्सवादी इतिहासकारों ने घोषणा की कि उन्होंने अभी तक सबूतों का अध्ययन नहीं किया है और उन्हें छह और हफ्तों की ज़रूरत है। उनके द्वारा दिया गया यह बयान बहुत ही अजीब था। इन्हीं लोगों ने मंदिर के अस्तित्व को नकार देने वाली याचिका पर हस्ताक्षर करने में 42 शिक्षाविदों का नेतृत्व किया था। जनवरी 24, 1991 को होने वाली इस बैठक में वे मौजूद ही नहीं थे।

1990-91 के विद्वानों की बहस में हिंदू पक्ष की शानदार जीत हुई थी। इससे यह भी पता चला कि वामपंथी इतिहासकार केवल भोले, अनजान दर्शकों या ऐसे दर्शकों से झूठ बोल सकते हैं, जो उनका विश्वास करते हैं और वही सुनना चाहते हैं, जो वो कहते हैं। वास्तविक विद्वानों के तथ्यों के सामने उनके तर्क कहीं नहीं टिकते।

हमने ये सभी चीजें सुप्रिया वर्मा जैसे लोगों के मामले में भी देखा, जो कि अक्सर नकारने के ही भाव में रहा करते हैं। सुप्रिया वर्मा ने अपने लेखों और प्रकाशनों में, एएसआई की रिपोर्ट का खंडन करते हुए किसी भी मंदिर के अस्तित्व होने से इनकार किया। फिर जब अदालत ने पूछताछ कि तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे राम मंदिर साइट पर कभी नहीं गई थी और उन्होंने जो कहा वह केवल उनकी ‘राय‘ थी।

दिसंबर 1990 – जनवरी 1991 में हिंदू पक्ष द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों के साथ जब विद्वानों की बहस में यह तथ्य साबित हो गया कि बाबरी मस्जिद वास्तव में एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाई गई थी, तब सैयद शहाबुद्दीन और मुस्लिम पक्ष अवाक रह गए और सभी ने यू-टर्न ले लिया।

बाद में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2003 में अदालत के आदेशों पर खुदाई की थी। खुदाई करने वाले मजदूरों में कई संप्रदाय विशेष के भी शामिल थे। इन संप्रदाय विशेष के मजदूरों को जानबूझकर मुस्लिम पक्ष की माँग के अनुसार काम पर रखा गया था। वहीं, एएसआई की रिपोर्ट के 20 लेखकों में से 4 लेखक भी संप्रदाय विशेष के थे। उन्हें भी मुस्लिम पक्ष की माँग पर रखा गया था। उन्होंने भी इस बात को स्वीकार किया था कि वहाँ खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष पाए गए थे।

एएसआई की खुदाई में संप्रदाय विशेष के मजदूरों और संप्रदाय विशेष के लेखकों को शामिल किए जाने और मंदिर बनने के साक्ष्य मिलने और उनकी सभी माँगों के बावजूद, मुस्लिम पक्ष ने इस सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि इस स्थान पर मंदिर पहले से मौजूद था और उन्होंने अपने दावे को वापस नहीं लिया।

1989 के बाद सभी मार्क्सवादियों और संप्रदाय विशेष के लोगों ने दावा किया था कि उस जमीन पर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी। बाद में जब एक संरचना (स्पष्ट रूप से मंदिर) का अस्तित्व सिद्ध हुआ, तो उनमें से कुछ ने दावा करना शुरू कर दिया कि पहले से मौजूद संरचना बौद्ध सम्प्रदाय की थी, न कि किसी मंदिर की! वहीं सुप्रिया वर्मा जैसों ने यह भी कह दिया था कि ये संरचनाएँ पुरानी मस्जिदों की ही थीं।

फिर कथित तौर पर ‘खाली जमीन पर बनी बाबरी’ के उनके दावे का क्या मतलब हुआ? संक्षेप में, दुनिया में मौजूद कोई भी सबूत इन लोगों को दे दिया जाए, तब भी वे कभी यह स्वीकार नहीं करेंगे कि बाबरी मस्जिद का निर्माण उस स्थल पर एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद किया गया था। जिसका सबूत एएसआई की रिपोर्ट के लेखकों सहित, विशिष्ट साहित्यिक साक्ष्य, निर्णायक पुरातात्विक साक्ष्य और संप्रदाय विशेष के लोगों सहित मजदूरों ने खुदाई के बाद दिए हैं।

डॉ कोनराड एल्स्ट ने अपनी पुस्तक ‘बीजेपी विस-अ-विस हिन्दू रेसर्जेंस’ (BJP vis-à-vis Hindu Resurgence) (वॉयस ऑफ इंडिया, 1997) में भी लिखा है :

आप इसका अनुमान उनके पॉलिश की हुई कॉन्वेंट-स्कूल की अंग्रेजी, उनकी फैशनेबल शब्दावली या उनके दूसरों से ऊपर होने के भाव से नहीं लगा सकते हैं, लेकिन रोमिला थापर, इरफ़ान हबीब या ज्ञानेंद्र पांडे [हमारी टिप्पणी: भारत में मार्क्सवादी इतिहासकारों ने इस्लामी शासकों के अपराधों को नकारने में आनाकानी की है, और इस बात से इनकार किया है कि विवादित ढाँचे के स्थान पर एक मंदिर मौजूद था] जैसे शख्स हमेशा हिंदुओं के विरोध में रहे हैं। अयोध्या विध्वंस के बाद संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा की गई हिंसा को विशेषज्ञों द्वारा समाज से छिपाया गया था।

इन्हीं लोगों ने इस बात से इनकार किया कि विवादित इमारत [हमारी टिप्पणी: बाबरी मस्जिद] हिंसक बुतशिकनों के इतिहास का हिस्सा था [हमारी टिप्पणी: अर्थात एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया था] और आरोप लगाया कि हिंदुओं ने ‘पाक मस्जिद’ पर हमला कर मनगढ़ंत इतिहास रचा है।

इनके दुष्प्रचार ने इस्लामी आतंकवादियों को बदला लेने, हिंदुओं के खिलाफ अभियान चलाने और हिंसा के कृत्यों के लिए संप्रदाय विशेष के सभ्य लोगों को भड़काने का काम किया है। अगर इन लोगों ने अयोध्या में इस्लाम द्वारा किए गए अपराध के बारे में बताया होता, या संप्रदाय विशेष ने सच्चाई को जाना होता, तो वे कभी हिंसा नहीं करते।

वहीं, अब एक और खतरा हमारे सामने है कि छद्म धर्मनिरपेक्षता, बाबरी विध्वंस का विरोध और अयोध्या राममंदिर भूमिपूजन के विरोध में पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं पर अधिक हमले किए जाएँगे। जैसा कि अतीत में वे भारत में कर चुके हैं। इसलिए 6 दिसंबर 1992 में बाबरी विध्वंस से पहले और बाद में, बांग्लादेश, पाकिस्तान और कश्मीर में हिंदू घरों और 5000 मंदिरों को इस्लामिक विचारधारा के समर्थकों द्वारा ध्वस्त की गई घटनाओं को उजागर करने की तत्काल आवश्यकता है।

बांग्लादेश में हिंदुओं की लूटपाट और हत्याएँ, मुंबई, चेन्नई, अन्य स्थानों पर बम विस्फोट जैसी घटनाओं पर संज्ञान लेना चाहिए। एक तथ्य यह भी है कि अयोध्या में अलग जगह पर एक मस्जिद का फिर से निर्माण होने जा रहा है।

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के अवैध ढाँचे को ढहाने से पहले लगभग 100 मंदिर कश्मीर में और बांग्लादेश में 400 मंदिर ध्वस्त किए गए थे। बांग्लादेश में वर्ष 1989 में अयोध्या आंदोलन को देखते हुए लगभग 400 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था। जिसमें 9 नवंबर 1989 के शिलान्यास के बाद अक्टूबर-नवंबर 1989 में लगभग 200 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था। हजारों हिंदू घरों और व्यवसायों को नष्ट कर दिया गया था। हिन्दुओं की कई दुकानों को लूट लिया गया और जला दिया गया था।

वहीं 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को कारसेवा के संदर्भ में बांग्लादेश में 1990 में कम से कम 45 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था। जिसमें ढाका जिले में कम से कम 34 और चटगाँव जिले में कम से कम 11 मंदिर थे। इस हिंसा में बांग्लादेश में हिंदू दुकानों और सैकड़ों घर भी (550 से ज्यादा) लूटे गए या जला दिए गए थे।

चूँकि ये हमले बांग्लादेश में इतने बड़े पैमाने पर वर्ष 1989 और 1990 में हुए थे, इसलिए यह पूरी तरह से निश्चित है कि इस तरह की हिंदू-विरोधी हिंसा पाकिस्तान में भी हुई होगी। हालाँकि, लेखक इस बात का पता नहीं लगा पाए कि 1989 या 1990 में पाकिस्तान में ध्वस्त किए गए मंदिरों और हिंदुओं पर किए गए हमलों का सही आँकड़ा क्या था। उन्होंने एक रिपोर्ट में पाया कि पाकिस्तान में नवंबर 1990 में कम से कम एक हिंदू की मौत हो गई थी और 4 मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए थे।

वहीं 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद, यह बताया गया था कि पाकिस्तान में कम से कम 245 मंदिरों को तोड़ दिया गया था, और 3600 मंदिरों को बांग्लादेश में ध्वस्त कर दिया गया था। 1992 में बाबरी मामले के बाद बांग्लादेश में हुए हिंदुओं के नरसंहार में, 28000 गैर-इस्लामी घरों को नष्ट कर दिया गया था। इसके अलावा 2,700 हिंदू व्यवसाय और 3,600 मंदिर और अन्य पूजा स्थल ध्वस्त कर दिए गए थे।

बांग्लादेश करेंसी के अनुसार, कुल नुकसान का अनुमान 2 बिलियन (200 करोड़) लगाया गया था। कश्मीर में सौ से अधिक मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया गया था। साथ ही, भारत के कुछ अन्य स्थानों, जैसे – भोपाल, असम में भी मंदिरों को तोड़ दिया गया।

1990 से 95% पाकिस्तान के सभी हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया या उन्हें मस्जिद या फिर किसी अन्य स्वरूप में तब्दील कर दिया गया। ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट (APHRM) की 2014 की सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, 1990 के बाद देश में कुल 428 अल्पसंख्यक पूजा स्थलों में से, 408 मंदिरों को खिलौने की दुकान, रेस्तराँ, सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में परिवर्तित कर दिया गया है। वहाँ अब केवल 20 हिंदू मंदिर ही शेष हैं।

यह संभव है कि 6 दिसंबर 1992 के बाद बांग्लादेश की तुलना में पाकिस्तान में कम संख्या में मंदिरों पर हमला किया गया था। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पाकिस्तान अधिक सहिष्णु था, बल्कि इसका कारण यह था कि 1992 तक वहाँ मौजूद मंदिरों की संख्या कम थी। 1947 में पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के तुरंत बाद ही हजारों मंदिरों को पहले ही उस समय तक नष्ट कर दिया गया था।

सिखों के धर्मस्थल को भी पाकिस्तान में तोड़ा गया

बता दें कि सिर्फ हिंदू ही नहीं, पाकिस्तान द्वारा सिखों के भी कई धार्मिक स्थलों को नष्ट कर दिया गया। उनमें से सबसे प्रमुख सिख धार्मिक स्थल गुरुद्वारा गली था, जिसे ऐबोटाबाद (Abbottabad) में एक कपड़े की दुकान में परिवर्तित कर दिया गया है। पाकिस्तान में लगभग 171 गुरुद्वारे या तो नष्ट हो गए या फिर ढहने के करीब हैं। वहीं, कुछ गुरुद्वारों को मस्जिदों (या स्कूलों, पुलिस स्टेशनों, आदि) में भी बदल दिया गया, या फिर उन्हें घरों के निर्माण के लिए ध्वस्त कर दिया गया।

जम्मू और कश्मीर सरकार ने आधिकारिक तौर पर 2012 में कहा था कि 1990 के दशक की शुरुआत से 20 वर्षों में कश्मीर में 208 मंदिरों को नष्ट कर दिया गया। लेकिन इसकी सही संख्या कहीं अधिक हो सकती है। कश्मीरी पंडित संगठन कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) के अनुसार, नष्ट मंदिरों की वास्तविक संख्या लगभग 550 है।

जम्मू और कश्मीर की सरकार ने स्वीकार किया कि उसकी ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सबसे ज्यादा मंदिरों को ध्वस्त किया गया है। जहाँ नष्ट किए गए मंदिरों की संख्या 57 है। हालाँकि, इस बर्बरता में कोई भी मस्जिद नष्ट नहीं हुई। इनमें से कई मंदिर अब मस्जिदों में परिवर्तित हो गए हैं।

गौरतलब है कि इस लेख में बाबरी विध्वंस के बाद सिर्फ 1 दिन में पाकिस्तान में हुई घटनाओं का ही जिक्र है। पाकिस्तानियों ने 30 हिंदू मंदिरों पर हमला किया। उसके बाद भी बहुत कुछ घटित हुआ। मंदिरों पर हमला होने पर पुलिसबलों ने हस्तक्षेप नहीं किया, न ही तब कार्रवाई की, जब एयर इंडिया के दफ्तर पर भीड़ ने धावा बोल दिया था। सड़कों पर फर्नीचर फेंक कर तोड़ दिया गया था। साथ ही, ऑफिस में भी आग लगा दी गई थी।

15 दिसंबर 1992 को ‘द डलास मॉर्निंग न्यूज़’ की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 24 लोग (ज्यादातर हिंदू) पाकिस्तान में मारे गए और कम से कम 100 मंदिरों पर संप्रदाय विशेष के लोगों ने हमला किया। पाकिस्तानी पत्रकार रीमा अब्बासी और फ़ोटोग्राफर मदीहा ऐज़ाज़ ने पूरे पाकिस्तान की यात्रा कर पाकिस्तान में मौजूद हिंदू मंदिरों को लेकर डॉक्यूमेंट तैयार किया था। जिस पर रीमा ने ‘हिस्टोरिक टेम्पल्स इन पाकिस्तान: ए कॉल टू कॉन्शियस’ नामक एक पुस्तक लिखी।

रीमा ने लिखा कि पाकिस्तान में हिंसा के दौरान लगभग 1000 हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया गया था, जो कि 1990 के दशक की शुरुआत में बाबरी मस्जिद के विनाश के बाद ध्वस्त हुए थे। वहीं एक वेबसाइट द्वारा भी 1,000 मंदिरों पर हमले के बारे में बताया गया है। यह जानकारी पाकिस्तान के हिंदुओं के संबंध में दी गई है।

बांग्लादेश में संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा मंदिरों को नष्ट किए जाने और हिन्दू-विरोधी हिंसा पर 31 अक्टूबर 1990 को एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट पढ़ें :-

“गवाहों ने कहा, चटगाँव, बांग्लादेश में संप्रदाय विशेष के एक गैंग ने, जिसमें कई चाकू और हथियारों से लैस हैं, उन लोगों ने हिंदू मंदिरों पर हमला किया, मूर्तियों को तोड़ा और भारत में हुए विवाद के जवाब में सैकड़ों घरों में आग लगा दी। भारत में हिंदुओं द्वारा एक मस्जिद पर कब्जा करने और इसे अयोध्या में एक मंदिर से बदलने की कोशिश की खबर सुनकर गुस्साए लोग मंगलवार देर रात सड़कों पर उतर गए। इस विवाद में भारत के 150 से अधिक लोग मारे गए हैं। लगभग 100 लोगों की भीड़ ने आज सुबह एक हिंदू मंदिर में हमला कर दिया। अधिकारियों और गवाहों के अनुसार, मंगलवार से अब तक कम से कम 11 मंदिरों में तोड़फोड़ की गई है। चटगाँव के सबसे बड़े मंदिर स्थल कैबलाधाम में सबसे ज्यादा बबर्बरतापूर्ण हमला किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि चाकू और लोहे की छड़ों के साथ 2,000 लोगों ने आधी रात को मंदिर के आसपास एक आवासीय जिले में तोड़फोड़ की और कम से कम 300 घरों को जला दिया। पुलिस ने इलाके में आग लगाने वाली हिंसक एक भीड़ को हटाने के लिए हवा में फायरिंग की। 500 विस्थापितों में से एक सुशील गोश (जिन्होंने मंदिर के ऊपर एक पहाड़ी पर एक शिविर स्थापित किया था) ने कहा कि इस दौरान चार लोग गायब हो गए थे। पुलिस ने रिएजुद्दीन बाजार और चटगाँव मेडिकल कॉलेज में भी फायरिंग की। जब 200 से अधिक लोग मंदिरों को उड़ाने और हिंदू स्वामित्व वाले दुकानों को जलाने की कोशिश कर रहे थे। एक समूह ने लगभग 50 झोपड़पट्टी वाले घरों को नष्ट कर दिया, जो निम्न-जाति के हिंदुओं द्वारा बसाए गए थे। जिनमें मुख्य रूप से मछुआरे थे। एक अन्य समूह ने एक हिंदू के स्वामित्व वाले गैरेज पर हमला किया और पाँच वाहनों को नुकसान पहुँचया। पुलिस ने कहा कि सेंट्रल चौकबाजार जिले में लगभग 1,500 हिंदू मछुआरे रात के हमले के दौरान अपने घरों से भाग गए, लेकिन सुबह जब स्थिति को नियंत्रण में लाया गया तो वे वापस लौट आए थे।”

यदि मीडिया ने बार-बार हिंदुओं पर किए गए हमलों (24 लोगों की हत्या, ज्यादातर हिंदू, पाकिस्तान में), बाबरी विध्वंस के पहले और बाद में हजारों मंदिरों को नष्ट करने, हजारों हिंदू घरों को नष्ट करने, 6 दिसंबर 1992 के बाद 200 करोड़ की हिंदुओं की संपत्ति को हुए नुकसान का उल्लेख किया होता, तो यह बहुत संभव है कि मार्च 1993 के मुंबई और कोलकाता के बम विस्फोटों और आतंकवादी कृत्यों से बचा जा सकता था।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और कश्मीर में हिंदू विरोधी हिंसा के बाद, मुंबई में 1993 के घातक बम धमाके हुए, जिसमें 257 लोग मारे गए, 1400 घायल हुए और 100 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ। वहीं, कोलकाता में भी संप्रदाय विशेष द्वारा किए बम विस्फोट में 69 लोगों की जानें गईं थीं।

इसके बाद अगस्त 1993 में चेन्नई के आरएसएस कार्यालय में संप्रदाय विशेष के आतंकियों द्वारा बम विस्फोट किया गया। जिसमें 6 उच्च-स्तरीय प्रचारक सहित 11 लोग मारे गए थे। फिर 6 दिसंबर 1993 को विभिन्न ट्रेनों में विस्फोट हुए। 6 दिसंबर 1997 को तमिलनाडु में ट्रेनों में फिर से विस्फोट हुए जिसमें 10 लोग मारे गए और 70 घायल हो गए थे।

लेकिन भारतीय मीडिया ने मंदिरों को ध्वस्त करने, साथ ही साथ भारत में इस्लामिक कट्टरपंथी द्वारा किए गए इन बम विस्फोटों (1993 के मुंबई विस्फोटों को छोड़कर) को प्राथमिकता देना उचित नहीं समझा और अपना ध्यान सिर्फ बाबरी मस्जिद पर ही केंद्रित किया। इस तथ्य को भी अनदेखा किया कि यह मंदिर के विध्वंस के बाद बनाया गया था। जो कि हिंदुओं (भगवान राम की जन्मभूमि) के लिए बहुत पवित्र स्थल है। उल्लेखनीय है कि मंदिर को ध्वस्त करने से पहले वर्ष 1528 में बाबर के सैनिकों द्वारा उस स्थान पर सैकड़ों हिंदुओं का वध किया गया था।

इसके अलावा, यह भी स्पष्ट है कि पवित्र स्थल (अयोध्या) हिंदुओं का है। चाहे कोई धर्म हो, पश्चिमी या पूर्वी एशियाई या संप्रदाय विशेष ही क्यों न हो, कभी भी अपने पवित्र स्थलों को दूसरों को देने के लिए सहमत नहीं होगा। अयोध्या में दर्जनों मस्जिदें हैं। मंदिरों को भूल जाओ, मक्का और मदीना में तो गैर-इस्लामी लोगों की प्रवेश तक की अनुमति भी नहीं है।

अगर देखा जाए, तो हमने हजारों मंदिरों के विध्वंस के ऐतिहासिक संदर्भ पर कभी विचार तक नहीं किया है। जिनमें सोमनाथ, पुरी आदि पवित्र मंदिरों के साथ ही मध्यकालीन भारत में लाखों हिंदुओं का किया गया वध भी शामिल है। वहीं, 6 दिसंबर 1992 के पहले और बाद के इस्लामिक आक्रान्ताओं की क्रूरता को देखा जाए, तो अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण इस्लामिक विचारधारा के कृत्यों के लिए एक बहुत ही छोटा प्रायश्चित है।

इन घटनाओं में 1990 में अयोध्या कारसेवकों के बलिदान को भी भूला नहीं जा सकता है। साथ ही, 1992 में अयोध्या आए कारसेवक और 27 फरवरी 2002 के गोधरा नरसंहार में अपनी जान गँवाने वाले कारसेवकों पर किए गए अत्याचार को भी भुलाया नहीं जा सकता। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण इस्लामिक आक्रांताओं की बर्बरता और हैवानियत के सामने एक बहुत ही छोटा सा उपहार नजर आता है।

कोनराड एल्स्ट के अनुसार, अगर वास्तव में देखा जाए तो संप्रदाय विशेष इस सच्चाई को जानते तो बाबरी मस्जिद के विध्वंश में आक्रोशित होने जैसा कुछ भी नहीं था। यह सिर्फ संप्रदाय विशेष के लोगों की घुसपैठ थी। लेकिन यहाँ की मीडिया ने संप्रदाय विशेष के लोगों को भड़काने का काम किया है। इसके अलावा, उनके द्वारा की गई गलत और भ्रामक रिपोर्टिंग के चलते संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा किए गए कृत्यों के लिए भी वही लोग दोषी हैं।

ऐसा नहीं है कि आक्रोश की कोई भावना ही नहीं होती। क्योंकि आतंकी हमला करने वाले और लोगों को मारने वाले आतंकवादी यही सोचते हैं कि सभी गैर-इस्लामी लोगों को मारना उनका कर्तव्य है। और विशेष रूप से उनका यह मानना ​​है कि मूर्तियों की पूजा और एक से अधिक भगवान होना यानी, बहुदेववाद अक्षम्य पाप है। इस विचारधारा के अनुसार, जो हिंदू मूर्तिपूजक और बहुदेववादी हैं, उनका बुरी तरह से दमन कर दिया जाना चाहिए।

पूर्व IAS अधिकारी भूरे लाल, जिन्होंने सेना में विजिलेंस कमीशन में भी सेवा की, ने अपनी पुस्तक ‘आईएसआई का राक्षसी चेहरा’ (1999 के कारगिल युद्ध के ठीक बाद वर्ष 2000 में प्रकाशित) के पेज क्रमांक 44-45 में लिखा है:

आईएसआई निम्न बातों का समर्थन करता है :

5 – घुसपैठ और बड़े पैमाने पर मीडिया पर कब्जा करने और इस्लाम-समर्थक समाचार पत्रों की पहचान कर उन्हें पाकिस्तान-समर्थक और इस्लाम-समर्थक लेख लिखने को कहना।

6 – मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार फैलाना, जिसका शिकार भारतीय संप्रदाय विशेष के लोग होते हैं।

7 – बांग्लादेशी मुस्लिम वोट बैंक पर राज करने वाले भारतीय राजनेताओं को चिन्हित करना, ताकि उन्हें पुलिस और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से बचाया जा सके।

12 – एजेंसी ने भारत को बदनाम करने के लिए एक ‘डिसइंफोर्मेशन’ सेल स्थापित किया और भारत को बदनाम करने के लिए कहानियाँ तैयार कीं। आईएसआई समाचारों में हेरफेर करने के लिए फंड भी देता है।

15 – आईएसआई ने हजारों एजेंटों को नौकरी पर रखा है, जिनमें हर दूसरे किसी न किसी अखबार के रिपोर्टर के तौर पर काम कर रहे हैं।

तो बार-बार संप्रदाय विशेष के लोगों को पीड़ित और प्रताड़ित के रूप में दर्शाने का काम कौन करते हैं? मीडिया उनकी कहानियों को घुमा-फिरा कर दिखाकर उन्हें मजबूर होने का एहसास कराते हैं। यह सीमा के पार बैठे हमारे दुश्मन और देश मे रह रहे इस्लामी कट्टरपंथियों की ही मदद करता है।

हमें अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मुद्दे और बाबरी मस्जिद के विध्वंस पर पीड़ितों के रूप में चित्रित किए जा रहे संप्रदाय विशेष के लोगों और पाकिस्तान, बांग्लादेश, कश्मीर के मामलों में की जा रही हिंसा के साथ-साथ अन्य सभी हिंदू-विरोधी कृत्यों में उनके के अपराध को उजागर करते हुए उन्हें बेनकाब करना होगा।

1993 के मुंबई बम धमाकों, 1993 के कोलकाता विस्फोटों, 1993 के RSS चेन्नई कार्यालय विस्फोटों, 1997 के तमिलनाडु ट्रेन विस्फोटों आदि मामलों पर संप्रदाय विशेष को उनके अपराधों की याद दिलाते रहनी होगी। यह इसलिए याद दिलाते रहा जाना चाहिए, ताकि बाबरी के विध्वंश को श्रीराम जन्मभूमि के साथ सदियों तक हुए अन्याय के सामने कहीं बड़ा दिखाने के उनके कारनामे सफल ना हो सकें।