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पाकिस्तान ने माना कराची में रहता है दाऊद इब्राहिम, 88 आतंकी समूहों पर लगाया प्रतिबंध: विदेश यात्रा पर भी बैन

आतंकी फंडिंग की निगरानी रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्‍तान ने एक और कवायद की है। पाकिस्तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और हाफिज सईद, मसूद अजहर और दाऊद इब्राहिम समेत उनके आकाओं पर और तथाकथित कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। 

सबसे बड़ी बात यह कि पाकिस्‍तान आज तक अपने यहाँ दाऊद इब्राहिम के मौजूद होने की बात को नकारता रहा है। पहली बार है जब पाकिस्‍तान ने खुले तौर पर स्‍वीकार किया है कि दाऊद उसके यहाँ है। पाकिस्तान की सरकार ने इस बात को मान ल‍िया है कि भारत के मोस्ट वांटेड लोगों में से एक दाऊद इब्राहिम कराची में रहता है।

माना जा रहा है कि पाकिस्‍तान ने यह कार्रवाई एफएटीएफ द्वारा ब्‍लैक लिस्‍ट किए जाने की आशंका से घबराकर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और हाफिज, मसूद और दाऊद जैसे आतंकी आकाओं की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश जारी किए हैं। उनकी विदेश यात्रा पर भी बैन लगा दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 18 अगस्त को दो अधिसूचनाएँ जारी करते हुए 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ता और जमात-उद-दावा के सरगना हाफ‍िज सईद, जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर प्रतिबंधों का ऐलान किया था। 

भारत बार बार कहता रहा है कि 1993 के मुंबई बम धमाकों का गुनहगार दाऊद पाकिस्‍तान में ही छिपा है लेकिन पाकिस्‍तानी हुक्‍मरान इसे नहीं मानते थे। अब जब पाकिस्‍तान ने दाऊद की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश जारी किए हैं। यह बात जगजाहिर हो गई है कि भारत का दावा सौ फीसद सही था कि दाऊद पाकिस्‍तान में ही दुबका बैठा है।

1993 मुंबई बम धमाकों का गुनहगार दाऊद इब्राहीम भारत का मोस्‍ट वांटेड आतंकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने हाल ही में पाकिस्‍तान को इन आतंकियों पर एक्‍शन लेने के निर्देश दिए थे। 

खबर के अनुसार सरकार ने इन संगठनों और आकाओं की सभी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने और उनके बैंक खातों को सील करने के आदेश दिए है। सईद, अजहर, मुल्ला फजलुल्ला (उर्फ मुल्ला रेडियो), जकीउर रहमान लखवी, मुहम्मद यह्या मुजाहिद, अब्दुल हकीम मुराद, नूर वली महसूद, उजबेकिस्तान लिबरेशन मूवमेंट के फजल रहीम शाह, तालिबान नेताओं जलालुद्दीन हक्कानी, खलील अहमद हक्कानी, यह्या हक्कानी और इब्राहिम और उनके सहयोगी सूची में हैं।

गौरतलब है कि पेरिस स्थित एफएटीएफ ने जून, 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक कार्ययोजना लागू करने को कहा था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इस समय सीमा बढ़ा दी गई थी।

सुशांत की मौत से पहली वाली रात जल्दी बंद हो गई थी घर की लाइट, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, नहीं थी कोई पार्टी: पड़ोसी का खुलासा

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में हुई मौत इस वक्त लोगों के सामने एक पहेली बनी हुई है। इस मामले में केन्द्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई की तरफ से बारीकी से की जा रही पूछताछ और हो रहे नए-नए खुलासों ने शक को और गहरा दिया है कि किसी चीज को छिपाने की कोशिश लगातार की जा रही है।

बांद्रा में जिस किराए के मकान में सुशांत सिंह राजपूत का 14 जून को शव लटका हुआ मिला था, वहाँ पर पड़ोसी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि 13 जून की रात करीब 10.30-10.45 के बीच सुशांत राजपूत के कमरे की सभी लाइट्स बंद हो गई थी। सिर्फ किचन की लाइट जल रही थी।

सुशांत की बिल्‍ड‍िंग में रहने वाली उनकी पड़ोसी महिला पहली बार शनिवार (अगस्त 22, 2020) को मीडिया के सामने आई। उन्‍होंने कहा, “सुशांत के घर की लाइट 13 जून की रात को 10.30-10.45 बजे अचानक बंद हो गई थी। ऐसा अमूमन नहीं होता था, क्‍योंकि वह देर तक जागते थे। लेकिन उस दिन किचन की लाइट को छोड़कर बाकी सारी लाइट्स जल्‍दी बंद हो गई थीं।”

इतना ही नहीं, लगातार यह कहा जा रहा था कि सुशांत की जिस दिन मौत हुई उससे पहली वाली रात को घर में पार्टी हुई थी। लेकिन पड़ोसी ने इस बात को भी खारिज कर दिया। सुशांत की पड़ोसी ने बताया कि उस रात सुशांत सिंह के घर में किसी तरह की कोई पार्टी नहीं हुई थी। महिला का कहना है कि लाइट्स का बंद होना जरूर मामले में संदेह पैदा करता है कि ऐसा क्‍यों हुआ था।

सुशांत के फ्लैट पर क्राइम सीन तैयार करने पहुँची सीबीआई

इस बीच सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच कर रही सीबीआई की टीम फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ शनिवार की दोपहर को अभिनेता के बांद्रा स्थित फ्लैट पर पहुँची। एक अधिकारी ने बताया कि राजपूत के फ्लैट में सीबीआई की टीम फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिल कर वारदात की क्राइम सीन तैयार करेगी, जहाँ वह 14 जून को लटकते पाए गए थे।

केंद्रीय एजेंसी की टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञ दोपहर ढाई बजे मों ब्लां अपार्टमेंट पहुँचे। अधिकारी ने बताया, ”वे घटना की उन कड़ियों को जोड़ने के लिए फ्लैट में पहुँचे जिनके कारण अभिनेता की मौत हुई थी।” सीबीआई के अधिकारी और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) के विशेषज्ञ सात से अधिक वाहनों में उनके आवास पर पहुँचे।

अधिकारी ने कहा, ”राजपूत के रसोइया नीरज और फ्लैट में उनके साथ रहने वाले सिद्धार्थ पिठानी भी सीबीआई की टीम के साथ थे।” अधिकारी के मुताबिक सीबीआई के अधिकारियों ने सांता क्रूज में आईएएफ के अतिथि गृह में पिठानी के बयान दर्ज किए। इसी स्थान पर केंद्रीय एजेंसी के सदस्य ठहरे हुए हैं। केंद्रीय एजेंसी ने शुक्रवार को नीरज से पूछताछ की।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सीबीआई की एक दूसरी टीम ने शनिवार को कूपर अस्पताल का दौरा किया जहाँ दिवंगत अभिनेता का पोस्टमार्टम हुआ था। उन्होंने कहा कि टीम ने कूपर अस्पताल के डीन से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि अधिकारी उन चिकित्सकों से भी मिलेंगे जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने कॉन्ग्रेस समर्थकों और वामपंथियों के दबाव में दिल्ली दंगे से जुड़ी किताब के प्रकाशन का फैसला लिया वापस

प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया ने मोनिका अरोरा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ के प्रकाशन को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने इसके पीछे का एक कारण उनकी जानकारी के बिना लेखकों द्वारा आयोजित किए गए वर्चुअल प्री-पब्लिकेन इवेंट लॉन्च करने को बताया। प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया ने यह बातें एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने कहा कि उन्होंने लेखकों द्वारा की गई जाँच और इंटरव्यू के आधार पर सितंबर 2020 में पुस्तक को जारी करने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उन्होंने अपने फैसले को रद्द कर दिया है।

पब्लिकेशन हाउस ने आगे कहा, “लेखकों द्वारा हमारी जानकारी के बिना आयोजित एक वर्चुअल प्री-पब्लिकेन इवेंट लॉन्च सहित हाल ही की घटनाओं को देखते हुए, हमने पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने का फैसला किया है।”

पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने का निर्णय सोशल मीडिया पर प्रमुख ’बुद्धिजीवियों’ के नेतृत्व वाली वामपंथी उग्र भीड़ के विरोध के बाद आया, जिसने पब्लिकेशन हाउस पर ऐसा निर्णय लेने के लिए पर दबाव डाला था। आक्रोशित वामपंथी भीड़ में विवादास्पद अभिनेत्री स्वरा भास्कर और अन्य प्रख्यात ‘पत्रकारों’ और ‘बुद्धिजीवियों’ जैसे कई व्यक्तित्व शामिल थे।

दक्षिण एशिया सॉलिडैरिटी इनिशिएटिव ने भी ब्लूम्सबरी इंडिया को पुस्तक का प्रकाशन वापस लेने के लिए धमकी दी। बता दें कि दक्षिण एशिया सॉलिडैरिटी इनिशिएटिव के इस्लामवादियों से संबंध हैं। इसने हाल ही में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में राम मंदिर भूमि पूजन के अवसर पर ‘हिंदू फासीवादियों’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

कॉन्ग्रेस समर्थकों ने भी ब्लूम्सबरी इंडिया को किताब वापस लेने के लिए उकसाया।

बता दें कि पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने के कारणों में से एक के रूप में उद्धृत किए जाने वाले कार्यक्रम में भाजपा नेता कपिल मिश्रा और ऑपइंडिया इंग्लिश की एडिटर-इन-चीफ नूपुर शर्मा ने भाग लिया था, जिससे वामपंथी भीड़ के बीच भारी रोष था।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने लिबरलों, कॉन्ग्रेस समर्थकों और इस्लामवादियों की उग्र भीड़ के दबाव में रहते हुए दावा किया कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करता है। उनका कहना है कि उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन का फैसला इसलिए वापस ले लिया, क्योंकि वो ‘समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर काफी सचेत हैं।’

रिया के बाद अब महेश भट्ट और जिया खान का वीडियो वायरल: दिखे काफी क्लोज, हाथ पकड़े असहज आए नजर

बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे है। जहाँ एक तरफ रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट को लेकर शक गहराता जा रहा है। वहीं अब सोशल मीडिया पर महेश भट्ट का दिवंगत अभिनेत्री जिया खान के साथ एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूजर्स महेश भट्ट पर निशाना साध रहे हैं। वीडियो में महेश भट्ट, जिया खान का हाथ पकड़े नजर आ रहे हैं। दोनों काफी क्लोज भी दिखाई दे रहे हैं। वहीं कमेंट बॉक्स पर नजर डाले तो यूजर्स का मानना है कि जिया इस दौरान काफी असहज दिखाई दे रही हैं। हालाँकि, इस वीडियो में आवाज क्लीयर नहीं है। साथ ही यह भी नहीं पता चल पाया है कि वीडियो कब का है।

दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट का नाम काफी सुर्खियों में आ गया है। ऐसे में जहाँ दोनों की चैट और पुरानी तस्वीरें, वीडियो वायरल हो रहे हैं तो वहीं अब महेश भट्ट और भी दूसरी एक्ट्रेसेस के साथ तस्वीरें और वीडियो वायरल कर यूजर्स अपने विचार शेयर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग महेश भट्ट को इस वक्त काफी ट्रोल कर रहे है। सुशांत की मौत के बाद फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट के सितारे गर्दिश में चल रहे है।

बता दें, जिया खान की मौत भी रहस्यमय तरीके से हुई थी। उनकी मौत के पीछे भी कई बॉलीवुड के दिग्गजों का नाम सामने आया था। यहाँ तक कि उनकी मौत के बाद सबूतों के साथ भी काफी छेड़छाड़ की गई थी। अभी तक उनकी मौत के पीछे का राज सामने नहीं आया है।

सुशांत की मौत के बाद से जिया खान सुसाइड केस भी सुर्खियों में आ गया है। एक्ट्रेस की माँ लगातार माँग कर रही हैं कि इस केस की भी फिर से जाँच की जाए। वे लगातार सूरज पंचोली पर भी निशाना साध रही हैं। उनके मुताबिक सूरज ने जाँच में ना सहयोग किया और ना ही कभी सच बताया। वहीं सूरज भी जिया की माँ पर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं। अब इस केस की फिर जाँच होती है या नहीं, ये तो समय बताएगा।

वहीं महेश भट्ट की बात करें तो इस समय उनकी रिया संग एक चैट वायरल है सुशांत की मौत वाले दिन यानि 14 जून को भी रिया और महेश भट्ट के बीच बातचीत हुई थी। रिया ने भट्ट से मॉर्निंग कोट्स भेजने की बात कही जिसके जबाव में उन्होंने एक मैसेज भेजा। रिया ने फिर जवाब दिया, लव यू सर, मेरे एंजेल। फिर 14 जून दोपहर 2.35 बजे भट्ट ने रिया को मैसेज किया है, मुझे कॉल करो। बता दें कि इस वक्त तक हर जगह सुशांत की आत्महत्या की खबर फैल चुकी थी।

उन्होंने फिर शाम को 4.01 और 5.13 पर रिया को कॉल की, लेकिन एक्ट्रेस ने फोन नहीं उठाया। बता दें केंद्रीय जाँच एजेंसी की टीम फिलहाल मुंबई में ही अभिनेता की मौत की जाँच में जुट गई हैं, जो 14 जून को अपने घर में मृत पाए गए थे।

सुशांत केस: क्राइम सीन रीक्रिएट, डॉक्टरों से पूछताछ में कई खुलासे, एक्टर की बिल्डिंग में पानी पीने पहुँची मुंबई पुलिस भी शक के घेरे में

सुशांत सिंह राजपूत खुदकुशी मामले में सीबीआई फुल एक्शन में है। टीम क्राइम सीन को रीक्रिएट करने के लिए सिद्धार्थ पिठानी और कुक नीरज को साथ लेकर एक्टर के बांद्रा स्थित घर पहुँची है। सीबीआई के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौजूद है। सुशांत के पोस्टमॉर्टम को लेकर डॉक्टर्स ने भी एक बड़ा खुलासा किया है। वहीं अब मुंबई पुलिस भी शक के घेरे में आ चुकी है।

शनिवार सुबह से सुशांत के कुक नीरज और सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ हो रही थी। दूसरी तरफ जाँच के लिए एक टीम कूपर अस्पताल और दूसरी टीम बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुँची थी। सीबीआई की टीम सुशांत के फ्लैट पर क्राइम सीन को दोबारा रीक्रिएट कर रही है। ताकि घटनास्थल की जाँच व तमाम जानकारी कंफर्म हो सके और हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं पर जाँच की जा सके। फ्लैट पर बेडरूम में डमी टेस्‍ट भी किया गया।

मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि सुशांत की मौत के बाद अपार्टमेंट के मालिक ने उसके फ्लैट में काफी बदलाव कर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है। उन्होंने सुशांत के फ्लैट में मौजूद फर्नीचर को भी हटवा दिया है।

सीबीआई ने की डॉक्टरों से पूछताछ

सीबीआई की एक टीम ने शनिवार को कूपर अस्‍पताल में सुशांत की अटॉप्‍सी करने वाले डॉक्‍टरों से भी सवाल-जवाब किया है। सीबीआई के अधिकारियों ने जब सुशांत का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से पूछा कि पोस्टमार्टम जल्दी में क्यों किया गया, तो उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा।

सीबीआई ने कूपर अस्पताल के पाँच डॉक्टरों की एक टीम से पूछताछ की जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था। इसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। सीबीआई ने डॉक्टरों से पूछने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों की एक सूची तैयार की थी। सीबीआई ने पूछा, “कोविड 19 की रिपोर्ट आने से पहले पोस्टमार्टम क्यों किया गया था?” डॉक्टरों में से एक ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया, “यह मुंबई पुलिस के आदेश पर देर रात में पोस्टमार्टम किया गया था।”

सीबीआई ने कूपर अस्पताल के पाँच डॉक्टरों की एक टीम से पूछताछ की जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था। इसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। सीबीआई ने डॉक्टरों से पूछने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों की एक सूची तैयार की थी। सीबीआई ने पूछा, “कोविड 19 की रिपोर्ट आने से पहले पोस्टमार्टम क्यों किया गया था?” डॉक्टरों में से एक ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया, “यह मुंबई पुलिस के आदेश पर देर रात में पोस्टमार्टम किया गया था।”

ज़ी न्यूज़ के अनुसार, कूपर अस्पताल के डॉक्टरों से सीबीआई को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जब उनसे पूछा गया कि कोरोना वायरस की रिपोर्ट का इंतजार क्यों नहीं किया गया तो डॉक्टरों में से एक ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कोरोना रिपोर्ट आने से पहले पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डेथ का टाइम भी नहीं बताया गया है।

सीबीआई के पहुँचने से पहले मुंबई पुलिस पहुँची सुशांत के फ्लैट पर

शनिवार को सुशांत के बांद्रा वाले घर के पास मुंबई के कुछ पुलिसकर्मियों को बिल्डिंग के वॉचमैन से बात करते हुए देखा गया। मुंबई पुलिस सीबीआई के पहुँचने से पहले बिना किसी को बताए और बिना किसी काम के सुशांत के अपार्टमेंट में पहुँची थी। रिपब्लिक न्यूज़ के अनुसार जब इस बारे में उनसे पूछा गया तो मुंबई पुलिस ने कहा कि वो यहाँ पानी पीने के लिए आए थे। ये सारी हरकतें मुंबई पुलिस पर कई सवाल खड़े करती है।

गौरतलब है कि हॉस्पिटल में मौजूद चश्मदीद सुरजीत सिंह ठाकुर ने रिया को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया, “15 जून को रिया चक्रवर्ती कूपर अस्पताल के मॉर्चरी में पहुँची थी। मैं वहाँ पर मौजूद था। तभी सूरज सिंह ने आकर मुझसे कहा कि रिया चक्रवर्ती यहाँ आना चाहती हैं तो प्लीज थोड़ा कॉरपोरेट करें, पुलिस को थोड़ा समझा दें और उन्हें शव को देखने दें। मैंने उसके बाद वहाँ मौजूद अधिकारियों से बात की और कहा कि रिया चक्रवर्ती आई है उसको सुशांत सिंह की बॉडी को देखना है। जिसके बाद उन्होंने हमें परमिशन दी।”

उन्होंने आगे बताया, “10 मिनट बाद मैं और रिया चक्रवर्ती शवगृह में गए थे। रिया के साथ उसका भाई, माँ और एक और सदस्य भी शायद उसके पिता थे। मैंने सुशांत के चेहरे से सफेद कपड़े को हटाया, उनके गले में एक निशान था। उसी वक्त मुझे कुछ गड़बड़ लगा था। चश्मदीद सुरजीत सिंह राठौर ने कहा कि रिया चक्रवर्ती पाँच से सात मिनट तक शव गृह में मौजूद थी। इस दौरान मैंने ही रिया को कफन उठा कर सुशांत को दिखाया था। रिया ने सुशांत के चेस्ट पर हाथ रखकर कहा था- सॉरी बाबू। ये सुनकर मैं चौंक गया। इसके अलावा रिया ने और कुछ नहीं बोला और वो रोने लगी।

बाबरी विध्वंस केस: SC ने CBI कोर्ट को दिया 30 सितंबर तक फैसला सुनाने का समय, आडवाणी सहित कई बड़े नेता आरोपित

अयोध्या के विवादित ढाँचे बाबरी के विध्वंस के आपराधिक मामले में लखनऊ की विशेष अदालत 30 सितंबर तक फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज एस. के. यादव की रिपोर्ट देखने के बाद ट्रायल को पूरा करने की समय सीमा को और एक महीना बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है।

बता दें कि इस केस में भाजपा के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और अन्य कई नेताओं को आरोपित बनाया गया है। विशेष अयोध्या न्यायाधीश के अनुरोध पर पिछली समय सीमा को न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा बढ़ाया गया है। न्यायाधीश ने मामले में प्रगति रिपोर्ट SC में दाखिल करने के साथ ही आवेदन पत्र देते हुए मुकदमे को समाप्त करने के लिए कुछ और समय देने की माँग की थी।

पीठ ने 19 अगस्त को अपने आदेश में कहा, “विद्वान विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव की रिपोर्ट को पढ़कर, और यह देखते हुए कि प्रोसीडिंग अपने अंतिम चरण में पहुँच रही हैं, हम एक महीने का समय देते हैं। जिसका मतलब है, 30 सितंबर, 2020 तक का समय कार्यवाही पूरी करके निर्णय देने के लिए दिया जाता है।”

इस संबंध में आखिरी आदेश मई में आया था, जब पीठ ने सीबीआई अदालत को विशेष न्यायाधीश के एक ऐसे ही अनुरोध पर ध्यान देने के बाद 31 अगस्त, 2020 तक निर्णय देने का निर्देश दिया था।

बता दें कि 24 जुलाई को वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना बयान दर्ज कराया था। खुद को निर्दोष बताते हुए आडवाणी ने कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

इस मामले में मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं और खुद को निर्दोष भी बता चुके हैं। जोशी ने उस वक्त केंद्र की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए झूठे सबूत पेश करने की बात भी कही।

गौरतलब है कि अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ‘कारसेवकों’ ने विवादित बाबरी मस्जिद के ढाँचे को गिरा दिया था। उनका दावा था कि मस्जिद की जगह पर राम का प्राचीन मंदिर हुआ करता था। राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों में आडवाणी और जोशी भी शामिल थे।

बलरामपुर के आतंकी अबू को अफगानिस्तान से मिल रहे थे ऑर्डर, राम मंदिर का लेना था बदला: 6 ठिकानों पर रेड

दिल्ली में गिरफ्तार किए गए ISIS आतंकी अबू यूसुफ खान राम मंदिर को लेकर गुस्से में था और इसीलिए आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। पुलिस से पूछताछ में उसने खुलासा किया है कि वो दिल्ली और यूपी में धमाके की फिराक में था। उसने बताया कि राम मंदिर को लेकर आतंकियों के भीतर गुस्सा है। वो अफगानिस्तान में बैठे अपने आकाओं के लगातार संपर्क में था और उनसे निर्देश ले रहा था।

एनसजी की टीम फ़िलहाल इस बात की जाँच में लगी हुई है कि आतंकी के पास से जब्त प्रेशर कूकर में मौजूद विस्फोटक किस प्रकार का था और उसमें कौन से केमिकल का प्रयोग किया गया था। इससे पहले ही ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा जारी किए गए अलर्ट में कहा गया था कि राम मंदिर को लेकर आतंकियों का गुस्सा उबाल पर है और वो किसी हमले को अंजाम दे सकते हैं। बताया गया था की राजधानी दिल्ली और वीआईपी उसके निशाने पर हैं।

पूछताछ में उसने बताया कि दिल्ली में हमले के बाद फिदायीन हमला उसका अगला कदम होता। दरअसल, जिस आतंकी ने उसे परिवार सहित अफगानिस्तान बुलाने का वादा किया था, वो मारा गया। उसका दूसरा हैंडलर भी एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया। नए हैंडलर ने उसे भारत में ही रह कर काम करने को कहा था। वो 2010 से पहले काम करने सऊदी अरब गया था लेकिन वो ISIS के संपर्क में आकर आतंकी बन गया।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीएसपी ने बताया कि अबू यूसुफ खान कोरोना के कारण कम सक्रिय हो गया था, वरना वो पहले ही किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने दिल्ली आता। बाद में उसने स्वतंत्रता दिवस के दिन हमले की योजना बनाई पर कामयाब नहीं हुआ। वह गाँव में कॉस्मेटिक की दुकान चलाता था। उसे लगा था कि अब दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी नहीं होगी, इसीलिए वो फिर से आया था।

एनएसजी को भी इस मामले की जाँच में शामिल किया गया है। उससे ये पूछा जा रहा है कि उसने दिल्ली के किन-किन इलाकों की रेकी की थी और उसकी जानकारी किसे उपलब्ध कराई थी। नोएडा में उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सीमा पर जाँच अभियान चलाया जा रहा है। अब यूपी के अलावा उत्तराखंड में इस मामले से जुड़ी छापेमारी चल रही है। अब तक दिल्ली गाजियाबाद और उत्तराखंड के 6 ठिकानों पर छापा हो चुका है।

साथ ही बलरामपुर में भी दिल्ली पुलिस की एक टीम पहुँची हुई है। वहाँ पूरे इलाके को घेर कर छापेमारी अभियान चलाया गया है और कुछ क्षेत्रों में पुलिस की तैनाती बढ़ा कर आमजनों का प्रवेश वर्जित किया गया है। ज्ञात हो कि  राष्ट्रीय राजधानी के रिंग रोड में हुए एक मुठभेड़ के बाद खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के आतंकी अबू युसूफ खान को शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) आधी रात को गिरफ्तार किया गया। 

उक्त आतंकी के बारे में ये भी पता चला है कि वो ‘इस्लामिक स्टेट इन खोरासन प्रोविंस (ISKP)’ के भी संपर्क में था और अफगानिस्तान के आतंकियों की मदद से भारत में हमला करने वाला था। वो कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों से भी संपर्क में था। उसे यूपी पुलिस आगे की जाँच के लिए उसके पैतृक क्षेत्र बलरामपुर लेकर आएगी। वो साइबरस्पेस के जरिए देश-विदेश के आतंकियों के साथ संपर्क में था।

इससे पहले भी खबर आई थी कि इस्लामिक आतंकी इस बार भी साल 1993 जैसा साम्प्रदायिक माहौल बनाने की फिराक में हैं। केंद्र ने इसी कारण 2 राज्यों को रेड अलर्ट पर भी रखा है।

इजरायल के गेट से अल-अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले गद्दार, लोग उन पर थूकेंगे: फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती का फतवा

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा है कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समझौते के बाद अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना यूएई वालों के लिए हराम है। अल-अक्सा मस्जिद में केवल उन्हीं को नमाज की इजाजत है, जो इस्लामिक सीरिया से होकर आते हैं। 

फतवे के अनुसार, जो लोग अल-अक्सा मस्जिद में इजरायल के साथ दोस्ती के माध्यम से इबादत करते हैं, उनको इबादत की इजाज़त नहीं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की तथाकथित शांति योजना, सेंचुरी डील में भी, अल-अक्सा मस्जिद को इजरायल के साथ दोस्ती का स्रोत बनाने का कुत्सित प्रयास किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती ने घोषणा की है कि संयुक्त अरब अमीरात के माध्यम से इज़राइल की ओर से अल अक्सा मस्जिद में आने वाला कोई भी गद्दार और ‘अवांछित’ हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही इस तरह की यात्राओं को प्रतिबंधित करने का फतवा जारी कर रखा है।

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि जो अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना चाहते हैं, उन्हें ईमानदारी से फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करना चाहिए और अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति के लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लोग इजरायल के दोस्त हैं, वे अल-कुद्स और अल-अक्सा मस्जिद को दुश्मन के कब्जा में देने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में समझते हैं, वे कैसे अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति के बारे में बात कर सकते हैं?

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मुहम्मद हुसैन ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद और उसके संपत्ति के संरक्षक केवल इस्लाम को मानने वाले हैं। इजरायल की मदद करने वाले का कोई अधिकार नहीं है।

बता दें कि फतवा में इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच इजरायल की यात्रा और यरुशलम अल-अक्सा मस्जिद में प्रार्थना करने के बीच इस्लाम को मानने वालों के सामान्यीकरण का लाभ लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

यूएई-इजरायल शांति समझौते के तहत यरुशलम में इस्लाम मानने वाले सभी के लिए अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल को खोलने की अनुमति देता है। हालाँकि, फिलिस्तीनी प्राधिकरण इस समझौते को विश्वासघात मानता है। इसलिए साइट पर आने वाले किसी भी संप्रदाय विशेष के लोग को देशद्रोही माना जाता है।

मीडिया से बात करते हुए, शरिया जस्टिस के लिए पीए सुप्रीम काउंसिल के अध्यक्ष महमूद अल-हबश ने कहा, “जो कोई भी फिलिस्तीन के द्वार के माध्यम से अक्सा मस्जिद का दौरा करना चाहता है, उनका स्वागत है, हम खुशी मनाएँगे। लेकिन जो कोई भी इजरायल के द्वार से आना चाहता है, वह अवांछित है, और उसे यरूशलेम के लोगों के जूते और उसके चेहरे पर यरूशलेम के लोगों के थूक के अलावा और कुछ नहीं मिलेगा।”

अल-हबश ने कहा कि इजरायल / यहूदियों के साथ सामान्यीकरण का मतलब पैगंबर मुहम्मद के दुश्मनों के साथ सामान्य संबंधों के लिए सहमत होना था।

सुप्रीम शरिया न्यायाधीश महमूद अल-हबश ने आगे कहा, “हम (यूएई) के देशद्रोह को स्वीकार नहीं करते। पवित्र फिलिस्तीन की मिट्टी और अल-अक्सा मस्जिद की मिट्टी से रेत का एक एक दाना हमारे खून और हमारे जीवन से अधिक कीमती है।”

इस बीच, फिलिस्तीन प्राधिकरण ग्रैंड मुफ्ती और फिलिस्तीनी सुप्रीम फतवा परिषद के अध्यक्ष मुहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा, “एक मुस्लिम के लिए बेन-गुरियन एयरपोर्ट स्थित अल-अस्का मस्जिद तक पहुँचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के विमान में प्रवेश करना वर्जित है।”

गौरतलब है कि हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक आश्चर्यजनक घोषणा करते हुए कहा कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने वेस्ट बैंक में भूमि के अधिग्रहण को रोकने के लिए एक समझौते के हिस्से के रूप में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी।

इस बीच फिलिस्तीन स्थित आतंकवादियों ने गाजापट्टी से इजराइल पर 12 रॉकेट दागे। रात भर चले इस हमले के नौ रॉकेट को इजराइल ने विफल कर दिया और जवाबी कार्रवाई में हमास आतंकवादी संगठन के ठिकानों पर तीन हवाई हमले किए। इजराइल की सेना ने शुक्रवार ( अगस्त 21, 2020) तड़के यह जानकारी दी। 

वहीं इजराइली सेना की जवाबी कार्रवाई में एयर स्ट्राइक के दौरान आतंकवादी संगठन हमास के ठिकानों पर 3 हवाई हमले हुए। पिछले कुछ महीनों में गाजा सीमा के पास होने वाली यह सबसे बड़ी झड़प है, हालाँकि हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

भगोड़ा नित्यानंद लाया ‘रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा’, अपनी मुद्रा चलाएगा; अमेरिका सहित 3 महाद्वीपों में फैला है जाल

कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया भीड़भाड़ से बच रही है। लेकिन, भारत से हजारों किलोमीटर दूर एक द्वीप पर भगोड़ा नित्यानंद अपने अनुयायियों के साथ ‘रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा’ और अपनी मुद्रा के उद्घाटन के मौके पर जश्न में डूबा हुआ है। कैलासा उसी ‘देश’ का नाम है, जहाँ का नित्यानंद खुद को प्रधानमंत्री बताता है।

उसने एनजीओ और कंपनियों का एक ऐसा नेटवर्क बिछाया है, जिससे पूरे अमेरिका से लेकर कई देशों में अपना जाल फैलाने में कामयाब रहा है। वह फंड्स को चैनलाइज करने के लिए भी इन संस्थाओं का उपयोग करेगा। उसने कहा कि लोग दान कर रहे हैं और सरकारों के साथ मिल कर काम किया जा रहा है, जिसका पूरा ढाँचा तैयार है।

‘आजतक/इंडिया टुडे’ मे प्रकाशित अंकित कुमार की एक एक्सक्लूसिव खबर में नित्यानंद से जुड़े 13 संगठनों से संबंधित जानकारियों के हवाले से बताया गया है कि कैसे सामाजिक-आर्थिक समूहों के जरिए ‘कैलासा’ का गड़बड़झाला चल रहा है। वह बैंकों और शिक्षण संस्थानों को अपने ढाँचे का आधार बना रहा है। उसका नेटवर्क 3 महाद्वीपों में फैला हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों को बताया गया है कि वह एक हिन्दू दूतावास बना रहा है।

नित्यानंद का कहना है कि पूरी दुनिया मे वास्तविक रूप से हिंदुओं के अभ्यास के लिए कोई जगह नहीं है, इसीलिए वो ‘कैलासा’ के जरिए ऐसा करना चाहता है। ‘इंडिया टुडे/आजतक’ ने कॉर्पोरेट फाइलिंग के हवाले से जानकारी दी है कि पूरे अमेरिका में इसके फुटप्रिंटस का फैलाव है और वहाँ उसने पिछले साल ही ‘कैलासा’ से जुड़े 10 संगठनों की स्थापना की है। इनमें से 9 एनजीओ हैं और 1 घरेलू प्रॉफ़िट कॉर्पोरेशन है।

अमेरिका के सैन जोस, मिशिगन, मिनेसोटा, पेंसिल्वेनिया, पिट्सबर्ग, टेनेसी, डलास, ह्यूस्टन और सिएटल मे ‘कैलासा’ से जुड़े एनजीओ स्थापित किए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष भी नित्यानंद किसी अन्य देश की तरह बातें रखता है और उसने बताया है कि वो हिंदुओं के वैश्विक प्रतिनिधित्व के लिए एक दूतावास बनाना चाहता है। वो देशों की अर्थिक व राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण कर ‘कैलासा’ के ‘मंत्रालय’ को रिपोर्ट करेगा।

नित्यानंद ध्यानपीठम और नित्यानंद मिशन उर्फ ​​यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा के साथ निगम ने अपनी संबद्धता स्वीकार की है। यहाँ तक कि हॉन्गकॉन्ग के ग्लोबल फाइनेंशियल हब में एक प्राइवेट कंपनी ‘कैलासा लिमिटेड’ के नाम से पंजीकृत कराया गया है। अप्रैल 2020 में ब्रिटेन में भी उसने कुछ संगठनों को इनकॉर्पोरेट किया है। ब्रिटेन में तो संगठनों को कॉम्पलिमेंट्री करेंसी के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

कैलासा को अब एक अलग मुद्रा बनाने की तैयारी है। कॉम्पलिमेंट्री करेंसी और प्राइवेट करेंसी पहले भी आते रहे हैं। सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण समूहों को ऐसी करेंसी का इस्तेमाल करने की इजाजत है। इसीलिए, नित्यानंद अपने अनुयायियों के बीच अपनी करेंसी के इस्तेमाल करने बढ़ावा दे सकता है। ये लीगल टेन्डर हो न हो लेकिन नित्यानंद इससे अपना वर्चुअल बैंक कहता रहेगा। नित्यानंद ई-पासपोर्ट भी देता रहा है।

इससे पहले जनवरी 2020 में बच्चियों से दुष्कर्म के आरोपी और हाईप्रोफाइल बाबा नित्यानंद के ख़िलाफ़ इंटरपोल ने गुजरात पुलिस के अनुरोध के बाद ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया था। हालाँकि, आरोप के बाद देश छोड़कर भागे नित्यानंद का अभी तक एजेंसियाँ सुराग नहीं लगा सकी हैं। नित्यानंद अलग देश ‘कैलासा’ बनाने वाली खबरों के बाद चर्चा में रहा था।

बेंगलुरु दंगों में शामिल 40 आरोपितों के आतंकी संगठनों से कनेक्शन: RSS कार्यकर्ता की हत्या और बम विस्फोटो से लिंक भी आया सामने

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 11 अगस्त की रात हुए दंगों की जाँच में आतंकी कनेक्शन भी सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दंगों में शामिल गिरफ्तार किए 40 संदिग्धों का 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या, 2014 में चर्च स्ट्रीट विस्फोट और 2013 में मल्लेश्वरम में भाजपा कार्यालय विस्फोट जैसे मामलों में गिरफ्तार अभियुक्तों के साथ नजदीकी संबंध होने का पता चला हैं।

पुलिस सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि समीउद्दीन जो खुद को सोशल वर्कर बताता है, उसे बुधवार को गिरफ्तार किया गया है। समीउद्दीन से पूछताछ में पता चला है कि वह अक्टूबर 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या के मुख्य आरोपित के संपर्क में था और एक बार उससे मिलने के लिए जेल भी गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु हिंसा को भड़काने और साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार 380 आरोपितों में से 40 अभियुक्त ऐसे हैं जिनके संबंध चर्च स्ट्रीट ब्लास्ट, मल्लेश्वरम बम विस्फोट और सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामलों के आरोपितों से हैं। इन मामलों में से कुछ की जाँच एनआईए द्वारा की जा चुकी है तो कुछ में जाँच जारी है।

बेंगलुरु में दंगों की रात सोशल मीडिया पर कथिततौर पर मुदस्सिर नाम के एक युवक ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लोगों से पुलिस स्टेशन पर इकट्ठा होने की अपील की थी। फिलहाल वह फरार है और पुलिस अभी भी उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस अब 380 आरोपितों में से उन 27 लोगों के फोन रिकॉर्ड खंगाल रही है जिन्होंने दंगा भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई है।

बता दें बेंगलुरु हिंसा में जाँच कर रही एनआईए टीम को ऐसे कई सबूत मिले है, जिनसे दंगों के पीछे आतंकी संगठनों और दंगा फैलाने वाले नेटवर्क का हाथ होने का पता चलता है। इन लोगों में पिछले कुछ सालों में साम्प्रदयिक हिंसा को बढ़ाते हुए अपने संगठन को काफी मजबूत कर लिया है। पुलिस ने अब तक दंगों में शामिल 380 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई लोगों के संबंध सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और अल हिंद आतंकी समूह जैसे संगठनों से भी हैं।

वहीं एक सेवारत IPS अधिकारी ने News18 को बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ज्यादातर मैंगलोर, मैसूर और बेंगलुरु में सक्रिय है। एक दशक पहले बेंगलुरु में इसकी स्थापना की गई थी जब केजी हल्ली से भी इसका संचालन किया जाता था। इस संगठन पर कर्नाटक की पिछली कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान भी प्रतिबंध लगाए जाने की तैयारी की गई थी लेकिन कानूनी झंझट के कारण इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका था।

पुलिस को जाँच के दौरान हिंसा के पीछे की वजह का भी पता चला है। उनके अनुसार 11 अगस्त को डीजे हल्ली और आस-पास के इलाकों में हुई हिंसा को पुलकेशीनगर के कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के एक रिश्तेदार द्वारा कथित रूप से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने के बाद अंजाम दिया गया था। जिसके चलते इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा किए हिंसा में 3 लोगों की जान चली गई थी और सैंकड़ों लोग घायल हुए थे।