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सेना से जुड़े 101 उत्पादों के आयात पर रोक: रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर, स्वदेशी बनाएगी सरकार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के संबंध में आज कई बड़े ऐलान किए। यह ऐलान मुख्य रूप से रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए किए गए हैं।    ऐलान में सबसे पहले यह कहा गया कि रक्षा क्षेत्र से जुड़े 101 उत्पादों का आयात पूरी तरह बंद होगा। इस कदम का मूल उद्देश्य रक्षा क्षेत्र को ज़्यादा से ज़्यादा स्वदेशी बनाना है। 

प्रधानमंत्री ने कुल 5 स्तम्भों के आधार पर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का मूल मंत्र दिया है। यह चार स्तम्भ अर्थव्यवस्था, आधार भूत संरचना, तंत्र, जनसांख्यिकी और माँग (Economy, Infrastructure, System, Demography & Demand) हैं। प्रधानमंत्री ने इसके लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस सूची में न केवल कुछ उपकरण शामिल हैं बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी वाले हथियार मसलन असॉल्ट राइफलें, सोनार सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, LCH, रडार और कई अन्य चीजें शामिल हैं।  

इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस फैसले से सबसे पहले एक बड़ा बदलाव आएगा। भारत की रक्षा इंडस्ट्री को मौक़ा मिलेगा कि वह अपने तय मानकों, निर्देशों, क्षमता और डिज़ाइन के आधार पर ऐसे उत्पाद तैयार करेंगे, जिनकी भारतीय सेना को असल में ज़रूरत होती है। इस काम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) उनकी पूरी मदद करेगा, जिससे बेहतर नतीजे हासिल हों।    

एक लंबे दौर के विमर्श के बाद रक्षा मंत्रालय ने ऐसे उत्पादों की सूची तैयार की है। सेना के अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को निर्देश दिए जा चुके हैं। वह इसका निरीक्षण करे कि सेना के उपयोग में आने वाली ज़रूरत की चीज़ों का उत्पादन भारत में किस स्तर पर हो सकता है। इस प्रक्रिया के लिए लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए अप्रैल से अगस्त 2020 के बीच जारी किए जाएँगे। आगामी 6 से 7 सालों के दौरान घरेलू इंडस्ट्री (रक्षा) में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए तक के समझौते किए जाएँगे।    

थल और वायु सेना से जुड़े ऐसे उत्पादों में लगभग 1 लाख 30 हज़ार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वहीं दूसरी तरफ नौसेना के उत्पादों में 1 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसमें Armoured Fighting Vehicles (AFVs) भी शामिल हैं। दिसंबर 2021 तक इनके आयात पर रोक लगा दी जाएगी।    

‘भारत को खंडित करके ‘उर्दूस्तान’ बनाओ, लाल किले पर PM मोदी को नहीं फहराने देंगे झंडा’ – UP पुलिस ने दर्ज किया FIR

लखनऊ में शनिवार (अगस्त 8, 2020) की दोपहर तब अचानक से हड़कंप मच गया, जब पत्रकारों को विदेशी नम्बरों से फोन कॉल्स आने लगे। 12 बजे के बाद करीब 3 बजे तक ये सिलसिला चला। फोन कॉल्स का लोकेशन यूनाइटेड स्टेट्स और एटलांटा बता रहा था। साथ ही ये फोन कॉल्स पर ‘यूसुफ अली’ का नाम दिखा रहा था। इन फोन कॉल्स में अयोध्या के राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर धमकियाँ दी जा रही थीं।

साथ ही मजहब विशेष वालों को भी भड़काया जा रहा है। अपील की जा रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध किया जाए और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर लोगों को भी भड़काया जा रहा है। लोगों को किए गए फोन कॉल्स में कहा गया कि भारत के मजहब विशेष वाले मिल कर अब एक अलग देश ‘उर्दूस्तान’ की माँग करें, जो भारत को खंडित कर के बनाया जाएगा। पत्रकारों ने तुरंत इस बात की शिकायत कराई।

लखनऊ स्थित हजरतगंज पुलिस स्टेशन में इसे लेकर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि पत्रकारों के अलावा कई अन्य लोगों को भी फोन कॉल्स से वॉइस मैसेज प्राप्त हुए, जिसमें 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोहों को लेकर धमकाया जा रहा है और साथ ही देश की एकता को खंडित किए जाने वाली बातें की जा रही हैं। इस मामले में FIR दर्ज हो गई है।

पांडेय ने आश्वासन दिया कि इस मामले में पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। यूएपीए और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, कई पत्रकारों ने इंटरनेशनल नम्बर देख कर कॉल नहीं उठाया था। लेकिन, लखनऊ में यूपी इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट से जितने भी पत्रकार जुड़े हुए हैं, उन सभी को फोन कॉल्स आए। उत्तर प्रदेश में सैकड़ों पत्रकारों को ये कॉल्स आए।

कहा गया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर के राम मंदिर बनाया जा रहा है, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर झंडा नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही उदाहरण देते हुए भड़काया गया कि जिस तरह से सिख एक अलग खालिस्तान की माँग कर रहे हैं, उसी तरह से दूसरे मजहब वालों को भारत से कट कर एक अलग देश उर्दूस्तान के लिए प्रयास करना चाहिए। इसमें खालिस्तान का भी समर्थन किया गया।

सुशांत मामला: उद्धव सरकार के वकील बने कॉन्ग्रेसी नेता अभिषेक मनु सिंघवी, रिया चक्रवर्ती के भाई से 18 घंटे पूछताछ

रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की है। शनिवार (अगस्त 8, 2020) को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में आरोपित शौविक ED के समक्ष पेश हुए। इस मामले में सभी आरोपितों के बयान ‘Prevention Of Money Laundering Act’ के तहत दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले में रिया की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी से भी पूछताछ हुई है।

सोमवार को भी ED ने इस मामले में कई आरोपितों को समन किया है। सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने आरोप लगाया है कि कुछ ही समय में उनके बेटे के एकाउंट से 15 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। CBI ने भी जाँच को अपने हाथ में ले लिया है और एजेंसी जल्द ही घटनास्थल का दौरा करेगी। सीबीआई इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर जाँच कर रही है।

सीबीआई इस मामले में पटना पुलिस की एफआईआर के आधार पर जाँच कर रही है। केके सिंह का आरोप है कि आरोपित सुशांत के करीब आ गए और उन्हें झाँसे में लेकर उनकी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करने लगे। साथ ही उन पर विश्वस्त कर्मचारियों को हटाने, घर बदलने और मानसिक रूप से बीमार होने का एहसास दिलाया गया। आरोप है कि उन्हें डेंगू होने की बात कह के ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया। इसके अलावा भी कई आरोप हैं।

बताया गया है कि शौविक चक्रवर्ती से कुल 18 घण्टे तक ED की गहन पूछताछ चली। शुक्रवार को उनसे 2 घण्टे तक पूछताछ चली थी। उस दिन रिया से भी 9 घंटे पूछताछ हुई थी। बिहार पुलिस ने भी इससे जुड़े सारे दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय का आश्वासन दिया।

महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जाँच का विरोध कर रही है। सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी इस मामले में उद्धव ठाकरे की सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेंगे।

उधर दिशा सलियान की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसका शव निर्वस्त्र पाया गया था। जिसका मुंबई पुलिस ने अब तक खुलासा नहीं किया था। रिपब्लिक टीवी द्वारा एक्सेस की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि दिशा सालियान के शरीर पर कपड़े नहीं थे, जब वह एक बिल्डिंग की 14 वीं मंजिल से गिरने के बाद मृत पाई गई थी।

पोस्टमॉर्टम रिपार्ट में सेक्स, स्पष्ट आयु, जाति या कास्ट के हेडिंग के तहत शरीर पर कपड़ों और गहनों का विवरण दिया जाता है। जहाँ दिशा की रिपोर्ट में कहा गया है, “महिला, 28 साल, नग्न शरीर।”

वहीं रिपोर्ट में कपड़ों की स्थिति का उल्लेख किया जाता है जैसे – शव पानी से गीला हो, खून से सना हो या उल्टी और मादक पदार्थ से सना हुआ हो। दिशा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के इस सेक्शन में ‘न्यूड (नग्न) शरीर कहा गया है।

J&K में एक और BJP नेता पर कातिलाना हमला, 5 दिनों में तीसरी घटना: जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद अस्पताल में भर्ती

घाटी में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर होने वाले हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताज़ा मामला जम्मू कश्मीर के बडगाम इलाके का है, जहाँ भाजपा के कार्यकर्ता पर हमला हुआ है। गोली लगने के बाद फ़िलहाल उन्हें श्री महाराजा हरी सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है।    

पुलिस के मुताबिक़ अब्दुल हामिद नजर पर हमला उस वक्त हुआ, जब वह सुबह की सैर पर निकले थे। जैसे ही वह ओम्पोरा के पास पहुँचे, वैसे ही उन पर एक हथियारबंद व्यक्ति ने हमला कर दिया। 38 साल के अब्दुल हामिद नजर अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं और भाजपा जिलाध्यक्ष हैं। यह पिछले 5 दिनों में किसी भाजपा नेता पर हुई तीसरी हमले की घटना है।  

हाल ही में कश्मीर के कुलगाम जिला स्थित काजीगुंड ब्लॉक के वेसू गाँव में आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद खांडे की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया था। सज्जाद अहमद खांडे एक सुरक्षित प्रवासी शिविर में कई सरपंचों के साथ रह रहे थे। वह बृहस्पतिवार (अगस्त 05, 2020) सुबह अपने घर जाने वाले थे और उन्हें आतंकवादियों ने तब गोली का निशाना बनाया, जब जब वह अपने घर से मात्र 20 मीटर दूर थे।

भाजपा पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सभी सरपंचों के लिए सुरक्षा की माँग करते हुए कहा, “यह हताशा के कारण उठाया गया कदम है क्योंकि भाजपा पैर जमा रही है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि लड़ाई वैचारिक होनी चाहिए। आप उन लोगों को मारते हैं, जो गरीबों और वंचितों के लिए लड़ते हैं। मुझे लगता है कि उन सभी सरपंचों को जिन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है, अब उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।”

इससे पहले आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में उसी जिले के पंच आरिफ अहमद की मौत हो गई थी। घाटी में पिछले दो महीनों में, दो अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं को आतंकवादियों ने मार डाला था। वसीम अहमद बारी को उनके भाई और पिता के साथ 9 जुलाई को मार दिया गया था, जबकि, कश्मीरी पंडित समुदाय के सरपंच अजय पंडिता भारती की जून के माह में हत्या कर दी गई थी।

सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सलियान का शव निर्वस्त्र नहीं पाया गया था: मुंबई पुलिस

अपडेट: मुंबई पुलिस इस मामले में एक नई सूचना लेकर आई है। मुंबई जोन-11 के डीसीपी विशाल ठाकुर के अनुसार दिशा सलियान का शव निर्वस्त्र नहीं पाया गया था।

ऊपर आई सूचना से पहले जो खबर थी, उसे आप नीचे पढ़ सकते हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की रहस्यमयी मौत के मामले में एक नया सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दिशा की मौत को जहाँ एक तरफ मुंबई पुलिस आत्महत्या साबित करने में लगी थी। वहीं दिशा की पोस्टमॉर्टम रिपार्ट और वायरल कथित आखरी वीडियो कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी हत्या की गई थी और उनका मामला अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत से जुड़ा है।

दिशा सलियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसका शव निर्वस्त्र पाया गया था। जिसका मुंबई पुलिस ने अब तक खुलासा नहीं किया था। रिपब्लिक टीवी द्वारा एक्सेस की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि दिशा सालियान के शरीर पर कपड़े नहीं थे, जब वह एक बिल्डिंग की 14 वीं मंजिल से गिरने के बाद मृत पाई गई थी।

पोस्टमार्टम रिपार्ट में सेक्स, स्पष्ट आयु, जाति या कास्ट के हेडिंग के तहत शरीर पर कपड़ों और गहनों का विवरण दिया जाता है। जहाँ दिशा की रिपोर्ट में कहा गया है, “महिला, 28 साल, नग्न शरीर।”

वहीं रिपोर्ट में कपड़ों की स्थिति का उल्लेख किया जाता है जैसे – शव पानी से गीला हो, खून से सना हो या उल्टी और मादक पदार्थ से सना हुआ हो। दिशा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इस सेक्शन में ‘न्यूड (नग्न) शरीर कहा गया है।

इस खुलासे ने मुंबई पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिशा ने आत्महत्या की थी। जाहिरतौर पर यह हो ही नहीं सकता कि कोई व्यक्ति आत्महत्या करने के लिए 14 वीं मंजिल से कूदने से पहले शरीर से सारे कपड़े निकाल देगा। मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए इस खुलासे से यह बात स्पष्ट हो चुका है कि दिशा का बलात्कार और हत्या की गई थी।

वहीं इससे पहले एक और विचलित करने वाला तथ्य सामने आया था कि दिशा सालियान का पोस्टमार्टम उनकी मृत्यु के दो दिन बाद किया गया था। 8-9 जून की रात को उसकी मृत्यु हो गई थी। जबकि दस्तावेजों से पता चलता है कि पोस्टमार्टम 11 जून को किया गया था।

बता दें सुशांत सिंह राजपूत की हत्या के बाद मुंबई पुलिस की जाँच पर कई बार संदेह किया जा चुका है। सुशांत के परिवार, फैन और कई राजनेताओं ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने की अपील की थी। लेकिन हर बार उद्धव ठाकरे की सरकार ने इस मामले को मुंबई पुलिस तक ही सीमित रहने की बात कही। लेकिन बिहार पुलिस के अनुरोध पर यह केस CBI को सौंप दिया गया था। अब, दिशा के मामलों को भी सीबीआई को सौंपने की इसी तरह की माँग पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद सामने आई है।

गौरतलब है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद दिशा और सुशांत की मौत का कनेक्शन को लेकर शक और भी गहराता जा रहा है। इस बीच आज एक वीडियो सामने आया है, जिसे दिशा का आखिरी वीडियो बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक आत्महत्या से पहले दिशा एक पार्टी में गई थी। वायरल हुए वीडियो में दिशा दोस्तों के साथ खुश दिख रही हैं। वीडियो में दिशा अपने दोस्तों के साथ डांस करती हुई भी नजर आ रही हैं।

उल्लेखनीय है कि यह वीडियो दिशा ने ही रिकॉर्ड कर उसे अपने दोस्तों के WhatsApp ग्रुप पर भेजा था। सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि यह वीडियो 8 जून की रात रात 11 बजकर 48 मिनट पर दिशा द्वारा अपने दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किया गया था। इसके तकरीबन एक घंटे के भीतर उन्होंने सुसाइड कर लिया था। यह वीडियो खुद दिशा ने ही बनाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देख कर हर किसी के मन में यहीं सवाल है कि इतनी खुश दिखने वाली दिशा ने आखिर क्यों कुछ समय बाद सुसाइड कर लिया।

‘यह अल्लाह की मस्जिद है, अनंत काल तक रहेगा, इससे फर्क नहीं पड़ता कि मंदिर बनता है और पीएम पहला पत्थर रखते हैं’

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) ने चुप्पी साध रखी है, मगर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कैबिनेट के एक मंत्री ने राम मंदिर निर्माण के खिलाफ बात की है।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और जमीयत-उलमा-ए-हिन्द के प्रदेश अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन में भाग लेने के निर्णय को “गलती” बताते हुए कहा, ” मेरे लिए न बोलना गलत होगा।”

चौधरी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी एक वीडियो संदेश में पूछा, “मस्जिद के ऊपर मंदिर कैसे बनाया जा सकता है?”

चौधरी आगे कहते हैं, “हम अपने धैर्य को धारण किए हुए हैं, यह अल्लाह की मस्जिद है। यह अनंत काल तक रहेगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मंदिर बनता है और पीएम जाते हैं और पहला पत्थर रखते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पूरी दुनिया जानती है कि यह एक मस्जिद है।”

भाजपा पर भारतीय समुदाय विशेष को भड़काने का आरोप लगाते हुए सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, “बीजेपी और आरएसएस सोच रहे होंगे कि मुस्लिम सड़कों पर क्यों नहीं निकले हैं, क्योंकि भारतीय मुस्लिम कानून, भारतीय संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता में विश्वास करते हैं। वे घृणा नहीं करते। जिन लोगों ने ऐसा किया है वे नफरत का इस्तेमाल कर देश को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।”

बंगाल के मंत्री ने आगे कहा, “कुछ लोग सोचते हैं कि बल का प्रयोग करने से जीत होगी और इसलिए जबरन मंदिर बनाने की ऐसी कोशिशें हुईं, जहाँ मस्जिद को गिरा दिया गया। इस्लाम शांति, प्रेम, अनुशासन और क्षमा का धर्म है। लेकिन लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि हम कमजोर हैं। हम अपना धैर्य धारण किए हुए हैं।”

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक बार विवादित स्थल पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले पर टिप्पणी करते हुए, सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा, ” हमें न्याय नहीं मिला, हमारे साथ अन्याय हुआ है। पीएम ने गलती की।

बता दें कि इससे पहले सिद्दीकुल्ला चौधरी ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) को धमकी दी थी कि अगर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को फौरन वापस नहीं लिया गया तो जब भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता दौरे पर आएँगे, तो उन्हें एयरपोर्ट से बाहर कदम नहीं रखने दिया जाएगा।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। भूमिपूजन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।

उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।

मथुरा व काशी की मुक्ति के विरोध मे उतरी कॉन्ग्रेस: इसका समर्थन करने वाले BJP नेता को गिरफ्तार करने की माँग

कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा की सिर्फ इसीलिए गिरफ़्तारी की माँग कर दी क्योंकि उन्होंने काशी और मथुरा में इस्लामी आक्रांताओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटा कर हिंदुओं के पक्ष में न्याय की बात कही थी। ईश्वरप्पा ने कहा था कि अयोध्या की ही तरह काशी और मथुरा को भी मुक्त कराया जाएगा। इसी पर कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने उनकी गिरफ़्तारी की माँग कर दी।

डीके शिवकुमार ने कहा कि ईश्वरप्पा को न सिर्फ़ कैबिनेट से इस्तीफा देना चाहिए बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी किया जाना चाहिए। ईश्वरप्पा ने काशी में भव्य विश्वनाथ मंदिर और मथुरा में भव्य कृष्ण मंदिर की बात कही थी। बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का भूमिपजन कर के उसकी आधारशिला रखी थी, जिसके बाद ईश्वरप्पा ने ये बयान दिया था।

डीके शिवकुमार ने कहा कि कारसेवकों को अयोध्या की तरह ही आंदोलन करने की सलाह देकर मंत्री ईश्वरप्पा समाज की शांति को भंग करने का काम कर रहे हैं। बेल्लारी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ये बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए। शिवमोगा में मंत्री ईश्वरप्पा ने कहा था कि आज नहीं तो कल मथुरा और काशी में भव्य मंदिर बनेगा ही।

कर्नाटक भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ईश्वरप्पा ने कहा था कि अयोध्या, काशी और मथुरा हिंदुओं की दासता के प्रतीक रहे हैं, जहाँ क्रमशः राम, शिव और कृष्ण के मंदिरों को ध्वस्त कर के वहाँ मस्जिदों का निर्माण कर दिया गया। डीके शिवकुमार ने ये भी पूछा कि या उनका रुख येदियुरप्पा सरकार के अधिकृत स्टैन्ड को दिखाता है? शिवकुमार ने सलाह दी कि उन्हें याद रखना चाहिए कि वो मंत्री हैं, कोई सामान्य नागरिक नहीं।

ज्ञात हो कि राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान पंडित गंगाधर पाठक ने प्रधानमंत्री मोदी को यजमान बताते हुए कहा था कि अपने यजमान से दक्षिणा की माँग करना गलत नहीं होता है। आचार्य गंगाधर पाठक ने दक्षिणा में गोहत्या पर पाबंदी और काशी तथा मथुरा की मुक्ति की माँग रखी थी। बाद में उन्होंने कहा था कि पीएम श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ को मुक्त करवाएँ। इन दोनों दिव्य स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।   

NCPCR ने AltNews के मो. ज़ुबैर के ट्वीट का लिया संज्ञान, कार्रवाई के दिए आदेश: छोटी बच्ची की तस्वीर कर दी थी पब्लिक

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने एक ऐसे मामले का संज्ञान लिया है, जिसमें माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर एक ट्विटर यूजर द्वारा एक नाबालिग लड़की को धमकाया और प्रताड़ित किया गया था। आयोग के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) शाम ट्विटर पर इसकी जानकारी दी।

कानूनगो ने बताया कि ट्विटर इंडिया और संबंधित कानून प्रवर्तन अधिकारियों को ट्वीट के बारे में सूचित किया गया है, और उन्हें उचित कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

बता दें कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित एक वैधानिक निकाय है। यह भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करता है।

हालाँकि, NCPCR की चेयरपर्सन ने उस ट्वीट का जिक्र नहीं किया है, जिसके खिलाफ आयोग ने कार्रवाई की है, मगर हमारे सूत्रों ने जानकारी दी है कि यह इस्लामिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा पोस्ट किए गए एक ट्वीट से संबंधित है।

Forum for Indigenous Rights- North-East India नामक संस्था ने भी पुष्टि की है कि NCPCR मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। बता दें कि Forum for Indigenous Rights- North-East India पूर्वोत्तर भारत के लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाला एक संगठन है।

ऑल्टन्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा नाबालिग लड़की की तस्वीर सार्वजानिक करने के बाद संगठन ने लड़की के ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने जुबैर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट दर्ज करने के लिए आयोग से अनुरोध किया था, और उसके खिलाफ POCSO और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज करने को कहा था।

गौरतलब है कि फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रहा था, तब उसने एक नाबालिग युवती की तस्वीर को ही सार्वजानिक कर दिया। इस युवती को कथित तौर पर उन्हीं ट्विटर यूजर की जगदीश सिंह की पोती बताया जा रहा है।

हालाँकि, जुबैर ने फोटो में लड़की के चेहरे को धुँधला कर दिया था, लेकिन यह तथ्य अभी भी बना हुआ है कि उसने इन्टरनेट पर एक बहस को जीतेने के लिए एक नाबालिग छोटी लड़की का इस्तेमाल किया। इसके बाद बच्ची को रेप और हत्या की धमकियाँ मिलने लगी।

भारत में बड़े हमले की साजिश नाकाम: J&K से 6 आतंकी गिरफ्तार, टेरर फाइनेंसिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़

जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए टेरर फंडिंग करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। अब तक 6 आतंकवादियों को गिरफ्तार भी किया गया है। बताया जा रहा है आतंकवादी भारत में बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। इस गिरोह का पर्दाफाश कर पुलिस को आज (8 अगस्त, 2020) एक बड़ी कामयाबी आज हासिल हुई है।

आईजी मुकेश सिंह ने बताया, जम्मू में एक टेरर फाइनैंसिंग नेटवर्क जो लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को पैसे पहुँचने की कोशिश कर रहा है, इस खबर पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) जम्मू ने मुदासिर फारूक भट से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने लश्कर के साथ अपने संबंधों को स्वीकारा।

पुलिस महानिरीक्षक ने बताया, हमने एमएफ भट्ट से अधिक जानकारी एकत्र की और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 5 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। जिन आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है उसमें, तौकीर अहमद भट, आसिफ भट, खालिद लतीफ भट, गाजी इकबाल और तारिक हुसैन मीर शामिल हैं।

जम्मू पुलिस महानिरीक्षक ने बताया, हमारे पास 15 अगस्त को लेकर किसी भी आतंकी गतिविधि योजना के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन हाँ यह फिर से सक्रिय करने का प्रयास था और शायद, वे भविष्य में कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे।

वहीं इससे पहले गुरुवार को जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया था कि केंद्रशासित प्रदेश में मानवरहित विमानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद भेजने का पाकिस्तान ने एक नया तरीका अपना लिया है और पिछले कुछ समय में इस तरह की कई घटनाओं का पर्दाफाश हुआ है।

सिंह ने कहा, सीमा पार से 2020 के पहले सात महीनों में 75 प्रतिशत अधिक गोलीबारी हुई है। इस जुलाई तक पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी की 487 घटनाएँ हुईं, जबकि 2019 में इसी अवधि के दौरान इस तरह की 267 घटनाएं हुई थीं। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए इस साल सीमा पार से गोलीबारी में वृद्धि कर दी है। इस साल अब तक सीमा पार से केवल 26 आतंकी ही इस केंद्रशासित प्रदेश में प्रवेश कर पाए हैं।

पुलिस महानिदेशक ने कहा, यहाँ मौजूद आतंकवादियों के लिए हथियारों की भारी कमी हो गई है। इसके साथ ही लगातार चलाए गए आपरेशन की वजह से 300- 350 आतंकी की जगह जम्मू कश्मीर में वर्तमान में 200 से भी कम आतंकवादी सक्रिय हैं।

उन्होंने आगे कहा, इस साल अब तक 80 स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 38 मारे गए और 22 गिरफ्तार किए गए। आतंकवाद में शामिल होने वाले 20 लोग अभी सक्रिय हैं।

सुशांत के नाम पर बिहार को गाली, बिहारी परिवारों को बताया जहरीला: शेखर गुप्ता की वेबसाइट की करतूत पर रवीश भी चुप

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले ने अब मीडिया के एक ख़ास वर्ग को बिहार के खिलाफ ज़हर उगलने का मौका दे दिया है। जहाँ एक तरफ तो लोग रिया चक्रवर्ती के कारण बंगाल और बंगालियों को बदनाम न करने की सलाह दे रहे हैं (जो सही भी है) लेकिन दूरी तरफ लिबरल ब्रीड के कुछ लोग बिहार को भला-बुरा कह रहे हैं। आश्चर्य की बात तो ये है कि बिहार से आने वाले बड़े पत्रकार भी इसका विरोध नहीं कर रहे।

जिस तरह से रिया चक्रवर्ती के बहाने किसी को पूरे बंगाली समुदाय को लपेटे में लेने का कोई अधिकार नहीं है, ठीक उसी तरह सुशांत सिंह राजपूत के बारे में धारणाएँ बना कर बिहार और बिहारियों को लेकर अपनी हीन भावनाओं को प्रदर्शित करने का भी कोई हक नहीं है। और अगर ऐसा होता है तो कम से कम उन बिहारियों को तो कुछ बोलना ही चाहिए, जो मीडिया मे बड़े पदों पर बैठे हैं।

बात शुरू करते हैं शेखर गुप्ता की वेबसाइट ‘द प्रिन्ट’ के एक लेख से, जिसमें कहा गया है कि ‘विषाक्त’ बिहारी परिवारों में बच्चों पर श्रवण कुमार बनने की जिम्मेदारी होती है। सुशांत सिंह राजपूत के बहाने लिखा गया है कि सासें अपनी बहुओं को ‘डायन’ और ‘गोल्ड डिगर’ तक कहती हैं। साथ ही दावा किया गया है कि युवाओं के शहरी गर्लफ्रेंड को सारी चीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

इस लेख में बताया गया है कि परिवार के लोग बड़े होने पर भी युवाओं को ‘मेरा लाड़ला’ समझते हैं और शादी के मामले में उसके विचारों को नहीं मानते। लिखा गया है कि गर्लफ्रेंड या पत्नी पुरुष को उसके परिवार से अलग कर देती है, बिहार में ऐसी धारणा है। साथ ही इसमें बिहारी लोकगीतों को भी लपेटा गया है और बाद में इसका दायरा बढ़ा कर उत्तर बिहार कर दिया गया है। सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को भी बदनाम किया गया है।

इस लेख को लिखने वाली ने शायद टीवी सिरियल्स नहीं देखे हैं। हमने बचपन में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से लेकर अभी ‘कुंडली भाग्य’ तक, साह-बहू के झगड़े अब तक सैकड़ों सीरियलों में दिखाए गए हैं और लड़कियों को ‘गोल्ड डिगर’ कहते हुए भी बताया गया है। लेकिन, इनमें से कितने सीरियल बिहारी परिवारों पर आधारित हैं? बेटे, उसकी गर्लफ्रेंड और माँओं के इस झोलमोल में कितनी कहानियाँ बिहार पर आधारित हैं? न के बराबर।

अब सोचने वाली बात ये है कि अगर बिहारी परिवारों में ही सिर्फ़ ऐसी सोच होती कि ‘लड़कियाँ घर तोड़ देती हैं, गोल्ड डिगर होती हैं, सास द्वारा बहू को अपमानित किया जाता है और बेटा हमेशा लाड़ला रहता है’ तो क्या इन टीवी सीरियलों की कहानियों में अधिकतर बिहारी परिवारों पर नहीं आधारित होते? साहित्य से लेकर सिनेमा तक अनगिनत बार नायक की गर्लफ्रेंड और परिवार में अनबन हुई है, इनमें से कितने बिहार पर आधारित कहानियाँ हैं?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बहाने ‘द प्रिंट’ की बिहार को बदनाम करने की कोशिश

ये तो थी परदे की बात। अब आते हैं वास्तविकता पर। श्रीदेवीं, परवीन बॉबी, गुरुदत्त और दिव्या भारती तक कितनी ही संदिग्ध मौतें हुईं, इनमें से कितनों के राज्यों को इनकी मौत के लिए गाली दी गई? मुंबई से लेकर दिल्ली तक अनगिनत अनसुलझे मामले हैं, क्या उन सभी में राज्यों को गाली दी गई? आरुषि तलवार मामले में पूरी यूपी के माता-पिता को कोसा जा सकता है? इंद्राणी मुखर्जी मामले में पूरे बंगाल को गाली दी गई?

जहाँ तक बिहारी लोकगीतों की बात है, उसमें तो शादी के मंडप पर बैठे दामाद को भी गाली दी जाति है? तो क्या इसके लिए लेख लिख दिया जाएगा कि शादी के लिए गए बेचारे दूल्हे को टॉक्सिक महिलाएँ मिल कर गाली दे रही हैं? लोकगीतों और रीति-रिवाजों में किसी के मरने की बात भी कह दी जाती है, तो क्या इसे सचमुच का मान कर गाली बकी जाएगी? ऐसा वही कर सकते हैं जिन्हें इन चीजों की समझ ही नहीं।

जहाँ तक गर्लफ्रेंड पर आरोप लगने पर आउटरेज मचाने की बात है, बिहार तो छोड़िए बल्कि पूरी दुनिया में ऐसी न जाने कितनी ही घटनाएँ सामने आती रहती हैं जहाँ लड़की द्वारा उसके बॉयफ्रेंड का, या उसके पति की हत्या की गई। इसी तरह किसी पुरुष द्वारा भी उसकी गर्लफ्रेंड या पत्नी की हत्या का मामला सामने आता रहता है। अगर अमेरिका से ऐसी घटनाएँ आ गईं तो क्या वहाँ भी बिहारियों ने जाकर ये सब सिखा दिया?

सुशांत सिंह राजपूत की माँ कि मौत तभी हो गई थी, जब वो टीनेजर थे। उनके वृद्ध पिता मुंबई में उनके साथ नहीं रहते थे। अब शेखर गुप्ता की वेबसाइट के ‘मेरा लाड़ला’ वाली थ्योरी को सही मानें तो उन्हें तो मुंबई में रहना चाहिए था और अपने बेटे के हर काम में हस्तक्षेप करना चाहिए था? लेकिन, वो तो पटना में रहते थे। क्या एक बाप को अपने बेटे की मौत के बाद मिले सबूतों के आधार पर शिकायत तक दर्ज कराने का अधिकार नहीं है?

दिशा सालियान तो बिहारी नहीं थीं? उनकी माँ का कहना है कि उन्हें किसी खास आदमी पर शक तो नहीं है लेकिन बॉलीवुड एक डार्क इंडस्ट्री है जहाँ कुछ भी हो सकता है। अपनी बेटी की संदिग्ध मौत पर शक तो उन्हें भी है। लेकिन, मीडिया और लिबरालों का एक वर्ग चाहता है कि अगर मृतक के पीड़ित परिजनों के पास सबूत हों फिर भी उन्हें चुप रहना चाहिए, राज को दफन कर देना चाहिए, किसी पर शक भी हो तो बोलना नहीं चाहिए।

सुशांत सिंह राजपूत एक बिहारी थे और इस हिसाब से बॉलीवुड में आउटसाइडर थे। यही कारण है कि बिहार में उनकी मौत एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। विवाद में सलमान खान का नाम आने पर उन्हें गाली देते हुए भोजपुरी गाने भी बने और राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। ये सब इसके बावजूद हुआ कि बिहार सलमान खान के बड़े बाजारों में से एक है। बिहार की भावनाएँ उबाल पर हैं।

हैरानी वाली बात ये भी है कि रवीश कुमार जैसे पत्रकार भी चुप हैं जबकि वो बार-बार अपने गृह प्रदेश बिहार की बात करते हुए गर्व करते रहे हैं। शेखर गुप्ता की वेबसाइट पर बिहारी परिवारों को गाली देते हुए लेख छपते हैं और रवीश चूँ तक नहीं करते? खाली नंगे पाँव ‘छठ का दउरा’ उठा कर चलने की तस्वीर डाल खुद के जमीनी बिहारी होने का एहसास दिलाने वाले रवीश को अब तो बोलना चाहिए?