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एनकाउंटर के डर से विकास दुबे का साथी गले में तख्ती लटकाकर UP पुलिस के सामने हुआ दंडवत, कहा- मुझ पर रहम करो

कानपुर में दबिश देने गए पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या करने वाले खूँखार अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उसके साथी उमाकांत को भी पुलिस की कार्रवाई का डर सता रहा था। जिस वजह से आज (8 अगस्त, 2020) उसने खुद सरेंडर कर दिया। उमाकांत के सर पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा था। नाटकीय अंदाज में हुए इस सरेंडर में उमाकांत के साथ उसके बच्चे और पत्नी भी थी।

फोटो साभार: अमर उजाला

उमाकांत उन 21 वांछित अपराधियों में शुमार था, जिनकी यूपी पुलिस बिकरू हत्याकांड के बाद से तलाश कर रही थी। महीने भर से ज्यादा की फरारी काटने के बाद उमाकांत ने आखिरकार सरेंडर कर दिया। उसे एनकाउंटर का खौफ इस कदर था कि वह अपने परिवार के साथ थाने पहुँचा और दंडवत लेट गया।

इस दौरान उमाकांत शुक्ला ने गले में तख्ती लटकाई थी। जिसमें खुद के विकास दुबे का साथी होने और कानपुर कांड के बाद आत्मग्लानि की बात कही गई थी। तख्ती लटकाएँ हुए उमाकांत शुक्ला ने पुलिस से रहम की भीख माँगते हुए कहा कि मैं सरेंडर करने आया हूँ।

उमाकांत शुक्ला ने पुलिस से कहा मेरा नाम उमाकांत शुक्ला उर्फ गुड्डन है। कानपुर कांड में मैं विकास दुबे के साथ शामिल था। मुझे पकड़ने के लिए रोज पुलिस छापेमारी कर रही है, जिससे मैं बहुत डरा हुआ हूँ। हम लोगों द्वारा जो घटना की गई थी, उसकी हमें बहुत आत्मग्लानि है। मैं खुद पुलिस के सामने हाजिर हो रहा हूँ। मेरी जान की रक्षा की जाए, मुझ पर रहम किया जाए।

बता दें उमाकांत भी 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में नामजद किया गया था। आत्मसमर्पण के दौरान उमाकांत शुक्ला की बेटी ने पुलिस से हाथ जोड़कर गुजारिश की कि उसके पापा सरेंडर करने आए हैं, पुलिस उस पर रहम करे।

फोटो साभार: अमर उजाला

विकास दुबे के गाँव बिकरू में 2-3 जुलाई की दरम्यानी रात को 8 पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में विकास दुबे समेत उसके कई साथी शामिल थे। पुलिस ने हत्याकांड के बाद 21 वांछितों के पोस्टर जारी किए थे। उनमें से उमाकांत भी एक था। हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत 6 लोगों को पुलिस एनकाउंटर के दौरान मौत के घाट उतार चुकी है।

गौरतलब है कि विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उससे संबंधित कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। गैंगस्टर विकास दुबे के राइट हैंड कहे जाने वाले अमर दुबे की 29 जून को हुई शादी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में चौकी इंचार्ज केके शर्मा भी दिखाई दिए थे। यह केके शर्मा वहीं दारोगा थे जिसे विकास दुबे के लिए मुखबिरी के शक मे निलंबित कर दिया गया है।

वीडियो में दरोगा वर वधू को आशीर्वाद देते हुए नजर आए थे। उसी दौरान विकास दुबे दरोगा केके शर्मा से कह रहा था कि डरो नहीं पास आओ। वहीं विकास दुबे एक नवविवाहिता के साथ फोटो खिंचवाता दिख रहा है, जिसमें नवविवाहिता उसे मामा कहते हुए संबोधित करती है। और कहती है कि उसके साथ एक फोटो खिंचवा लो। जिस पर विकास दुबे जवाब देता है कि, वो बैठकर नहीं, खड़े होकर ही फोटो खिंचवाता है। यह वीडियो विकास के गुर्गे अमर दुबे और खुशी की शादी का है।

‘आधी उम्र की लड़कियों से रोमांस..’: अक्षय कुमार ने राम मंदिर का किया स्वागत तो भड़की AltNews की पत्रकार

स्वघोषित फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ (AltNews) जिसका स्टाकिंग, डॉकिंग, और सांप्रदायिक अपराधों को सुविधानुसार तोड़-मरोड़ कर पेश करने का इतिहास रहा है। यह वही वेबसाइट है जिसने जामिया हिंसा मामले में पत्थर को पर्स बता कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। जो अब राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद हिंदू घृणा के निम्नतम स्तर पर उतर आया है।

ऑल्ट न्यूज़ उन सभी कलाकारों को निशाना बना रहा है जिन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर शिलान्यास पर अपनी ख़ुशी जाहिर की। इसी कड़ी में अक्षय कुमार, कार्तिक आर्यन, वरुण धवन आदि को निशाना बनाया गया है।

गौरतलब है कि ऑल्ट न्यूज़ के संपादकों में से एक, पूजा चौधरी अब बॉलीवुड के उन कलाकारों के चारित्रिक हरण और मानसिक शोषण पर उतर आई है, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने धार्मिक विचारों को अभिव्यक्त किया।

अक्षय कुमार पर ऑल्ट न्यूज़ की पत्रकार ने साधा निशाना

अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद, अभिनेता अक्षय कुमार ने इस ऐतिहासिक दिन की तुलना दिवाली से करते हुए लिखा, “इस साल की दिवाली जल्दी आ गई। ऐतिहासिक दिन वास्तव में ! जय सिया राम।” वहीं अक्षय की ट्वीट के बाद ऑल्ट न्यूज़ की एक पत्रकार पूजा चौधरी इतनी चिढ़ गई कि अपनी नफरत को बाहर निकालते हुए उन्होंने अक्षय की फिल्मों का बहिष्कार करने का आह्वान तक कर डाला।

इसके साथ यह भी कहा कि राममंदिर भूमिपूजन का जश्न मनाना आधी उम्र की लड़की से रोमांस करने से भी ज्यादा घटिया है।

जहर का डोज कम न हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए उन्होंने ट्वीट किया, “अगली बार एक और फ़िल्म रिलीज़ होगी जहाँ अक्षय कुमार अपनी उम्र से आधी उम्र की महिला से रोमांस करेंगे, याद रखें कि उन्हें ना देखने के लिए यही सबसे बदतर कारण हैं।”

पूजा ने सिर्फ अक्षय कुमार के चरित्र पर ही ऊँगली नहीं उठाई। उन्होंने ‘प्यार का पंचनामा’ फेम अभिनेता कार्तिक आर्यन पर भी निशाना साधा। जिन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए लंबे समय से चली आ रही लड़ाई में ‘धैर्य’ के महत्व को समझाया था। कार्तिक ने तरबूज खाते हुए एक तस्वीर साझा की और लिखा, “आज नाश्ते में सब्र का फल खाया…आप लोगों ने क्या खाया?

जघन्य अपराधों में लिप्त मुस्लिमों को बचाने के लिए फर्जी फैक्ट चेकर के रूप में प्रसिद्ध ऑल्ट न्यूज़ की यह हिन्दू घृणा से सनी पत्रकार ने कार्तिक के भी ट्वीट पर आपा खो बैठीं। उन्होंने दावा किया कि सेक्सिस्ट एक्टर (कार्तिक आर्यन) के पास तरबूज से भी कम टैलेंट है। उन्होंने ट्वीट किया, “थाली में रखे तरबूज में इस आदमी से अधिक टैलेंट हैं, जिसका पूरा करियर सेक्सिज्म के गुल्लक से बनाया गया है।”

हिन्दुफोबिया से ग्रसित पूजा ने इनके अलावा अभिनेता वरुण धवन को भी निशाना बनाया। अभिनेता ने भगवान राम और हनुमान की एक-दूसरे को गले लगाते हुए एक तस्वीर साझा की थी। ऑल्ट न्यूज़ की इस तथाकथित पत्रकार ने ट्वीट किया, “इस दोस्त के बारे में कुछ नहीं कहना है। आखिरी बार मुझे याद नहीं कि मैंने उनकी कोई फिल्म कब देखी थी।”

हालाँकि, वरुण धवन ने उनसे अपनी फिल्मों को देखने के लिए नहीं कहा था। फिर भी उन्होंने अपनी बात स्पष्ट कर दी कि जो कोई भी राम मंदिर के निर्माण की इच्छा रखता है या उसका जश्न मनाता है और उसे अपनी हिंदू विरासत पर गर्व है, उसकी निंदा करनी चाहिए। हिंदूधर्म के प्रति पूजा के नफ़रत भरे ट्वीट से यह भी पता चलता है कोई खुद को सेक्युलर तभी बना सकता है, जब वह हिंदुओं के प्रति घटिया मानसिकता को पोषित और प्रोत्साहित करने वाले इकोसिस्टम का हिस्सा हो।

ऑल्ट न्यूज़ एडिटर द्वारा नाबालिक लड़की का इस्तेमाल कर उसके दादा को निशाना बनाना

गौरतलब है कि ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया यूजर के साथ अपने ट्विटर लड़ाई में एक नाबालिग लड़की को निशाना बनाया। मोहम्मद जुबैर शुक्रवार को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रहा था, जब उसने एक नाबालिग बच्ची की तस्वीर को ही सार्वजानिक कर दिया। नाबालिक लड़की जगदीश सिंह की पोती है।

दरअसल, आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें सड़क पर एक बड़े गड्ढे पर वाहन उछल रहे थे। इस पर मोहम्मद जुबैर ने उन्हें जवाब में अपना एक कथित ‘फैक्ट चेक’ लेख के बारे में बताया।

जुबैर ने ‘ऑल्टन्यूज़’ द्वारा किया हुआ एक ‘फैक्ट चेक’ पोस्ट किया, जिसमें कहा गया था कि यह चीन का एक पुराना वीडियो है। हालाँकि, दीपांशु काबरा ने यह दावा कहीं भी नहीं किया था कि यह वीडियो हाल ही का है, या यह किसी विशेष शहर का है।

आईपीएस काबरा ने इस वीडियो में सिर्फ शहर का अनुमान लगाने के लिए कहा था। लेकिन आदत से मजबूर ज़ुबैर ने मान लिया कि वह इसे भारत का होने का दावा कर रहे हैं, और लगे हाथ इस पर ‘फैक्ट चेक’ तैयार करते हुए कहा कि यह वीडियो चीन का है।

इस पर एक ट्विटर यूजर जगदीश सिंह मोहम्मद जुबैर की इस फर्जी के फैक्ट चेकर से सहमत नहीं थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑल्टन्यूज़ के लिए प्रचलित जुमले का इस्तेमाल करते हुए जुबैर के ट्वीट के जवाब में ‘ल*डे का फैक्ट चेकर’ कह दिया।

यह जुमला ऑल्टन्यूज़ के कथित ‘फैक्ट चेक्स’ के फर्जीवाड़ों के लिए इन्टरनेट पर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। ट्विटर यूजर जगदीश सिंह के इस कमेंट पर मोहम्मद जुबैर ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उन्हें सीधे तौर पर जवाब देने के बजाए, उनकी ट्विटर डीपी (डिस्प्ले इमेज) निकाल ली, जिसमें जगदीश सिंह कथित तौर पर अपनी पोती के साथ नजर आ रहे थे।

बच्चों से अधनंगे बदन पर पेंटिंग करवाने वाली रेहाना फातिमा ने किया आत्मसमर्पण: SC ने खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका

केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में घुसने की कोशिश करने और साजिशन अपनी सोशल मीडिया पोस्ट से श्रद्धालुओं की भावनाओं को भड़काने को लेकर विवादों में आई एक्टिविस्ट रेहाना फातिमा ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) की शाम को एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया

एर्नाकुलम साउथ पुलिस ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को रेहाना फातिमा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। मामला अर्ध नग्न शरीर पर अपने बच्चों से पेटिंग करवाते हुए एक वीडियो जारी करने से जुड़ा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया में यह अश्लीलता फैलाने का मामला है। इससे नाबालिग बच्चों पर देश की संस्कृति को लेकर क्या प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या वह सामाजिक कार्यकर्ता होते हुए कोई भी तर्कहीन हरकत करेंगी। इससे बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली एक शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा था, “आप यह सब क्यों करती हैं? आप एक कार्यकर्ता हो सकती हैं लेकिन यह किस प्रकार की बकवास है? यह अश्लीलता फैला रही है क्या आप? यह समाज में एक बहुत बुरा असर छोड़ देगा।”

रेहाना फातिमा ने 19 जून 2020 को ही यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था।

रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंँ सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।

हालाँकि, एक भाजपा नेता की शिकायत के बाद फातिमा को पॉक्सो एक्ट की धारा 13, 14, 15, आईटी एक्ट की धारा 67 (B) और धारा 75 के तहत एर्नाकुलम पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

जिसके बाद सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमेटेड (BSNL) ने नोटिस जारी कर विवादित कार्यकर्ता और बर्खास्त कर्मचारी रेहाना फातिमा को सरकारी आवास खाली करने को कहा था। सरकारी दूरसंचार कंपनी का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई से उसकी छवि को धक्का लगा है। 

गौरतलब है कि केरल के पथनमथिट्टा जिले की रहने वाली रेहाना फातिमा ने दो साल पहले सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी। हालाँकि, उनके इस कदम की काफी आलोचना हुई थी। उन्हें अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए अयप्पा श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए 18 दिन जेल में भी बिताने पड़े थे।

रेहाना ने यूट्यूब पर एक कुकिंग वीडियो भी डाली थी। वीडियो में रेहाना बीफ की रेसेपी बताती नजर आई थीं। मगर, वीडियो की शुरुआत के 20 सेकेंड में उन्हें बीफ की जगह गौ माता बोलते सुना गया था।

दिशा सालियान की आखिरी रात की पूरी कहानी: ‘मौत’ से 1 घंटे पहले का वीडियो आया सामने, सुसाइड थ्योरी पर उठे कई नए सवाल

सुशांत सुसाइड केस में खुलासों के बीच उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुशांत की मौत के साथ उनकी एक्स मैनेजर दिशा सानियान केस को जोड़ा जा रहा है। इस बीच आज एक वीडियो सामने आया है, जिसे दिशा का आखिरी वीडियो बताया जा रहा है। दावा है कि दिशा के 14 वें माले से गिरने से पहले का ये वीडियो हो सकता है।

गौरतलब है कि 34 वर्षीय सुशांत ने 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में फाँसी लगाकर सुसाइड किया था। वहीं उनकी मौत से ठीक 6 दिन पहले दिशा सालियान का निधन हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या से पहले दिशा एक पार्टी में गई थी। वायरल हुए वीडियो में दिशा दोस्तों के साथ खुश दिख रही हैं। वीडियो में दिशा अपने दोस्तों के साथ डांस करती हुई भी नजर आ रही हैं।

बता दें यह वीडियो दिशा ने ही रिकॉर्ड कर उसे अपने दोस्तों के WhatsApp ग्रुप पर भेजा था। सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि यह वीडियो 8 जून की रात रात 11 बजकर 48 मिनट पर दिशा द्वारा अपने दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किया गया था। इसके तकरीबन एक घंटे के भीतर उन्होंने सुसाइड कर लिया था। यह वीडियो खुद दिशा ने ही बनाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देख कर हर किसी के मन में यहीं सवाल है कि इतनी खुश दिखने वाली दिशा ने आखिर क्यों कुछ समय बाद सुसाइड कर लिया?

वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद मीडिया में तमाम तरह की बातें सामने आ रहीं हैं। एक मीडिया रिपार्ट में दिशा के दोस्त ने पार्टी की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 9 जून को एक गेट टूगेदर पार्टी थी। जिसमें दिशा उसका मंगेतर और कुछ दोस्त भी शामिल थे। दिशा पार्टी में शराब पी कर सभी को लेकर कुछ कुछ शिकायतें कर रही थी। उसने बोला कि कोई उसका ख्याल नहीं रखता है किसी को उसकी परवाह नहीं है। इतना कहते ही दिशा पार्टी छोड़ कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

काफी देर तक जब वह नहीं आई तो दोस्तों ने दरवाजा पीटा और उसे बुलाने की बहुत कोशिश की। लेकिन कमरे से कोई आवाज नहीं आने पर सबने दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा टूटने के बाद पार्टी में मौजूद सभी लोगों को इस बात का पता चला कि दिशा ने छत से कूद कर आत्महत्या कर ली है। जब तक सब नीचे पहुँचते वॉचमैन ने पुलिस को खबर कर दी थी। हॉस्पिटल ले जाते समय दिशा जिंदा थी। लेकिन बाद में उसे डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर हर दिन नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। दिवंगत अभिनेता के वकील, परिवार के सदस्यों, दोस्तों के बाद, अब उनके पूर्व कर्मचारी अंकित आचार्य ने चौंकाने वाला दावा किया है। अंकित बतौर सुशांत के निजी सहायक ने यह दावा है कि यह सुसाइड न होकर मर्डर है।

अंकित आचार्य ने एक इंटरव्यू में बताया, “सुशांत भैया खुश और सकारात्मक इंसान थे। वह हमेशा एक्टिव रहना चाहते थे। जब मैंने उनके साथ 2017 से 2019 तक काम किया, तब वह कभी उदास या परेशान नहीं रहते थे। वह कभी-कभी गुस्से में आ जाते थे, लेकिन 5 मिनट में शांत हो जाते थे। वह हमारे साथ परिवार और अपने भाइयों की तरह व्यवहार करते थे।”

आचार्य ने यह भी बताया कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के जिंदगी में आने के बाद से सुशांत पूरी तरह से बदल गए थे। उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया। उनका पूरा स्टाफ भी बदल दिया गया। अंकित ने कहा कि जब वे अपनी 2 माह की सैलरी लेने के लिए सुशांत से मिलना चाहते थे तो उन्हें मिलने से रोक दिया गया था।

पिछली सरकारों ने नहीं दिया अयोध्या पर ध्यान, CM योगी के नेतृत्व में होगा राम जन्मस्थान का विकास: अयोध्या के शाही सदस्य

अयोध्या में राजवंश का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। शाही परिवार के सदस्य बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा एक जानी-मानी शख्सियत हैं। हाल ही में उन्होंने टाइम्स नाउ के पद्मजा जोशी को इंटरव्यू दिया। इस दौरान मिश्रा ने पवित्र शहर अयोध्या को लेकर अपनी पुरानी यादें ताजा की।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर नहीं होने के कारण इसे इसकी महिमा से वंचित कर दिया गया था। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या अपने पवित्रता और वर्चस्व को पुनः प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने अफसोस जताते हुए कहा कि तीन दशकों से सत्तारूढ़ सरकारों ने प्राचीन शहर को विकसित करने के लिए बहुत कम काम किया।

मिश्रा ने कहा, “अब यहाँ (यूपी) भाजपा की सरकार है, योगी आदित्यनाथ हमारे मुख्यमंत्री बने हैं, उनका पूरा ध्यान अयोध्या पर है। वह शहर का समग्र विकास चाहते है। अब इस बात की पूरी संभावना है कि अयोध्या एक विकसित शहर बनने की राह पर है।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे पहले अन्य लोग सरकार में थे, उन्होंने अयोध्या पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। यहाँ किसी तरह का विकास कार्य नहीं हुआ करता था। अब पूरे अयोध्या और यहाँ तक ​​कि भारत को भी उम्मीद है कि यह एक सुंदर शहर बनकर उभरेगा।” मिश्रा ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा, “मुझे उम्मीद है कि अयोध्या वैटिकन सिटी के समान कद हासिल करेगा।”

उनसे जब अयोध्या में दशकों से चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “राम मंदिर का मुद्दा काफी वास्तविक था। प्रभु राम का कहाँ जन्म हुआ था। उनका जन्म अयोध्या में हुआ था, वहाँ एक मंदिर का निर्माण होना बहुत आवश्यक था।”

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने कहा कि बाबरी मस्जिद एक विवादित ढाँचा था जिसे एक मंदिर के विध्वंस के बाद बनाया गया था और इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या का गौरव बहाल हुआ है, इसका सम्मान वापस लौटा है।

मिश्रा ने कोरियाई शाही परिवार के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंध के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शाही परिवार द्वारा दक्षिण कोरिया में आमंत्रित किया गया था क्योंकि उनका मानना ​​था कि वे अयोध्या की एक राजकुमारी के वंशज हैं। किम जोंग-पिल्म दक्षिण कोरिया के तत्कालीन प्रधान मंत्री, गराक साम्राज्य के राजा किम सुरो की 72 वीं पीढ़ी के वंशज थे।

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने कहा कि कोरियाई शाही परिवार द्वारा उन्हें सरयू नदी के तट पर स्थापित रानी का एक स्मारक उपहार में दिया गया था। हर साल कोरियाई डेलिगेट्स रानी के रूप में कोरिया आने वाली अयोध्या की राजकुमारी को सम्मान देने के लिए उनके स्मारक जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब यूपी सरकार साइट को और विकसित करने के लिए धन आवंटित कर रही है।

सुशांत सिंह राजपूत इतने बड़े स्टार नहीं थे कि मुंबई पुलिस पर इतना दबाव डाला जाए: राजदीप सरदेसाई

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच अब सीबीआई के पास पहुँच गई है। वहीं उनके लाखों फैंस और करीबी सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर #warriors4ssr के लगातार मुहिम छेड़े हुए हैं। सुशांत की मौत के पीछे किसी की संदिग्ध भूमिका की बात कही जा रही है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का केंद्र बिंदु बनने के साथ मीडिया संगठनों ने ट्रायल शुरू कर दिया है और वो स्वयं के आकलन के साथ सामने आ रहे हैं। जबकि कई लोग और मीडिया के कुछ वर्ग अभी भी सवाल उठा रहे हैं कि असल में हुआ क्या था और क्या अभिनेता की असामयिक मृत्यु ‘आत्महत्या’ थी, वहीं कई लुटियन पत्रकार हैं जो अब सामने आ रहे सबूतों पर लीपापोती करने में व्यस्त हैं।

शनिवार (अगस्त 8, 2020) को पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लल्लनटॉप के शो में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मुद्दे पर बोलते हुए मृतक अभिनेता के खिलाफ चौंकाने वाली घिनौनी टिप्पणी की, जिसमें दावा किया गया, “सुशांत वैसे भी कोई बड़े अभिनेता नहीं थे जिसके लिए मुंबई पुलिस को इतने दबाव में होना चाहिए।”

शो के दौरान एंकर सौरभ द्विवेदी ने राजदीप सरदेसाई से सुशांत सिंह मामले पर उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा, “लोगों ने पुलिस पर अपना भरोसा खो दिया है। सार्वजनिक संस्थानों, IPS अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं, चाहे वह मुंबई हो या बिहार पुलिस। क्या वे वास्तव में निष्पक्ष जाँच कर रहे हैं? चलिए इसके बारे में बहुत ईमानदारी से बात करते हैं। सुशांत सिंह राजपूत इतने बड़े स्टार नहीं थे कि मुंबई पुलिस पर इतना दबाव डाला जाए।”

राजदीप सरदेसाई से पूछा गया, “वह कौन है जो पुलिस बल पर जाँच करने के लिए दबाव डाल रहा है?”

राजदीप सरदेसाई के बयान चौंकाने वाले थे। यदि कोई राजदीप द्वारा दिए गए तर्क पर गौर करे तो इसका मतलब होगा कि वह कह रहे है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच कम ध्यान और समर्पण की हकदार है क्योंकि वह “वह बड़े स्टार” नहीं थे।

इसके अलावा, पहले भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच को ‘सर्कस’ करार देते हुए, राजदीप सरदेसाई ने दावा किया कि यह मुद्दा अब मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस के बीच एक दूसरी लड़ाई बन गई है। ‘वरिष्ठ पत्रकार’ ने आगे कहा कि व्यक्तिगत स्कोर तय करने के लिए कुछ लोगों के खिलाफ मीडिया ट्रायल चल रहा है।

बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को जगह देने वाले मीडिया चैनलों पर विलाप करते हुए, राजदीप सरदेसाई ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर यह कहते हुए हमला किया कि उन्होंने बिना किसी सबूत के निराधार आरोप लगाए हैं। जाँच को लेकर दोनों राज्यों के पुलिस के बीच हो रही असामंजस्य को देखते हुए राजदीप सरदेसाई का सोचना है कि केस ने राजनीतिक एंगल ले लिया है और दोनों राज्यों की पुलिस अपनी अपनी सरकार के साथ साइडिंग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेता नारायण राणे ने हाल ही में कहा था कि सुशांत सिंह ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या हुई थी। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत केस जुड़े कई सवालों को उठाया और मुंबई पुलिस पर आरोप लगाया कि आदित्य ठाकरे को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस सबूत छुपाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में कहीं न कहीं आदित्य ठाकरे भी शामिल हैं। मुंबई पुलिस आदित्य को बचाने के लिए ऐसा कर रही है। राजदीप सरदेसाई ने नारायण राणे पर हमला किया और उन्हें सबूत पेश करने की चुनौती दी।

आजमगढ़ के कबीरुद्दीनपुर में क्षतिग्रस्त कर दी गई भगवान शिव की प्रतिमा: फरार हुए आरोपित, क्षेत्र में तनाव

आजमगढ़ स्थित एक शिव मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की ख़बर आई है। अराजक तत्वों ने शुक्रवार (अगस्त 7,2020) को भगवान शिव की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। जैसे ही ग्रामीणों को मंदिर में तोड़फोड़ की सूचना मिली, वो आक्रोशित हो गए। तनाव की खबर मिलते ही कई थानों की पुलिस के साथ पहुँचे वरिष्ठ अधिकारियों ने नई प्रतिमा लगाने का आश्वासन दिया।

‘न्यूज़ 18’ की ख़बर के अनुसार, पुलिस ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार करके कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्राम प्रधान ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। ये घटना अतरौलिया थाना क्षेत्र के शेखपुरा कबीरूद्दीनपुर गाँव की है, जहाँ ग्राम समाज की ही जमीन पर 15 वर्ष पहले शिव मंदिर की स्थापना की गई थी। श्रावण मास में यहाँ श्रद्धालुओं का मेला भी लगता था।

शिव मंदिर में फ़िलहाल कोई पुजारी नहीं था। ग्रामीण ही मंदिर के दरवाजे को खोलने और बंद करने का काम किया करते थे। श्रावण के महीने में मंदिर में ताला नहीं बंद किया जाता था। शुक्रवार की देर रात बदमाशों ने मंदिर में शिव प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर फरार हो गए। सुबह जब महिलाएँ वहाँ पूजा करने पहुँची तो उन्होंने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त पाया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वहाँ पहुँचे।

ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने इस मामले का विरोध किया। पुलिस ने ग्रामीणों से वार्ता कर के मामले को शांत कराया। खंडित शिव प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा लगवाने की बात भी कही गई है। बुढ़नपुर सीओ शीतला प्रसाद ने कहा कि किसी ने क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए इस तरह की करतूत की है। पुलिस दोषियों की पहचान कर के उनकी गिरफ़्तारी के प्रयास में लगी हुई है। फ़िलहाल वहाँ शांति बनी हुई है।

इसी तरह नवम्बर 2019 में आज़मगढ़ में ही महाराजगंज थाना क्षेत्र के सहदेव गंज रोड पर स्थित मुंडीलपुर प्राइमरी विद्यालय के पास स्थित शिव मंदिर में तोड़फोड़ कर के प्रतिमा को खंडित किया गया था। वहाँ शराब बोतलें भी पड़ी हुई मिली थी। पूजा करने गए ग्रामीणों ने इसे देख कर विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस ने मूर्ति की मरम्मत कराई थी। अब फिर से ऐसी घटना सामने आना चिंता का विषय है।

अयोध्या राम मंदिर 1000 साल तक रहेगी पूरी तरह सुरक्षित: भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा भी कुछ बिगाड़ नहीं पाएगी

अयोध्या में बनने जा रहा राम मंदिर भूकंप रोधी होगा साथ ही 1000 सालों तक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करेगा। राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला पिलर काफी विशाल और मजबूत होगा। ये पिलर जितना जमीन के उपर होंगे उतनी ही गहरी इनकी नींव होगी। ये सभी भूकंप रोधी होंगे। भूकंप का एक भी झटका इनको छू भी नहीं पाएगा।

राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को ये बातें कही। उन्होंने बताया कि राम मंदिर का डिजाइन जल्द बन कर तैयार हो जाएगा। अयोध्या में कारसेवकपुरम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह होगा कि इस पर किसी प्रकार के कोई प्राकृतिक आपदाओं का असर नहीं होगा। हजारों सालों तक इस पर भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं का कोई असर नहीं होगा।

चंपत राय ने बताया कि मंदिर के लिए जिस उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, उससे ये मंदिर 1000 साल तक आँधी तूफान सहने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित होगा। जिस तरह नदियों का पुल बनता है, उसी तरह नींव के पिलर खड़े होंगे। बस अंतर इतना होगा कि नींव में लोहे का प्रयोग नहीं होगा, बीम पत्थर की बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राम भक्तों को राम मंदिर के परिसर में खुदाई में मिले पुरातत्वों के भी दर्शन प्राप्त होंगे।

राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए फंड के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अकाउंट में फिलहाल 42 करोड़ रुपए हैं जो लोगों की तरफ से मिले दान हैं। लोगों ने 1 रुपए से लेकर 1 करोड़ तक दान दिए हैं। देश भर से करीब 20,000 संतों ने राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया था और ऐसे में हर किसी को भूमिपूजन में आमंत्रित करना संभव नहीं था।

उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण का प्रोजेक्ट लार्सन एंड टर्बो कंपनी को दिया गया है। चंपत राय ने कहा, “राम मंदिर निर्माण का मैप अपने अंतिम चरण में है। इस मैप को जल्द ही अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी से पास करा लिया जाएगा।”

पीएम मोदी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “इतने मुश्किल समय में भी चारों तरफ से आलोचना झेलने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या का दौरा किया और राम लला को साष्टांग प्रणाम किया और मंदिर का शिलान्यास किया। पूरे भारत के लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को सेलिब्रेट किया।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान “सियावर रामचंद्र की जय” से सम्बोधन शुरू किया था। पीएम मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।

उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।

कर्नाटक: मंदिरों से दानपेटी हटाते पुजारियों का वीडियो फिर वायरल, सरकारी नियंत्रण का कर रहे थे विरोध

मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के खिलाफ लगातार आवाज उठती रही है। इसी कड़ी में वह वीडियो फिर से वायरल हो रहा है जब कर्नाटक के मंदिरों में पुजारियों ने दानपेटी हटा दी थी।

उस समय दानपेटी हटाते हुए पुजारियों ने कहा था कि अगर भक्तों का पैसा हिंदुओं के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता है तो फिर इन दानपेटियों का औचित्य ही क्या है? यह वीडियो पहली बार प्रजा टीवी ने 31 अक्टूबर 2015 को शेयर किया था।

अब यह फिर से वायरल हो रहा है। लेखिका अद्वैत काला ने भी ट्विटर पर इसे शेयर किया है। आप इसमें देख सकते हैं कि कैसे उस वक्त पुजारियों ने मंदिरों की कमाई पर सरकारी कब्जे का विरोध किया था। दानपेटी हटाते हुए उनका कहना था कि जब भक्तों का दान हिंदुओं या मंदिर पर खर्च नहीं हो रहे हैं तो फिर दानपेटी का फायदा ही क्या है?

असल में मंदिरों और उसकी आय पर सरकारी नियंत्रण किसी विशेष राज्य की ही समस्या नहीं है। भारत की सेकुलर-धर्मनिरपेक्ष सरकारों ने सबसे ज्यादा जमीनों वाले चर्च और वक्फ बोर्ड को तो सरकारी नियंत्रण से मुक्त रखा है, लेकिन मंदिरों की जमीनें समय-समय पर, किसी न किसी बहाने से बेचती रही है। पुजारियों को उचित वेतन भी नहीं मिलता।

गौरतलब है कि हाल ही में केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन और उसकी संपत्तियों के अधिकारी को लेकर 13 जुलाई 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मंदिर के प्रबंधन का अधिकार त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार को दिया था। इसके बाद से यह मुद्दा फिर से चर्चा में है।

जाकिर नाइक को निकालना चाहते हैं, लेकिन कोई भी देश उसे कबूल करने को तैयार नहीं है: मलेशिया के पूर्व PM महातिर मोहम्मद

ऐसा लगता है कि इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक की जहर से मलेशिया भी आजिज आ चुका है। पूर्व मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा है कि उनका देश भारत को छोड़ किसी अन्य देश की तलाश में है जहाँ नाइक को भेजा जा सके। लेकिन कोई भी देश उसे कबूल करने को तैयार नहीं है।

बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग और घृणा फैलाने वाले भाषणों से चरमपंथ को उकसाने के आरोपित कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक नाइक की भारतीय अधिकारियों को तलाश है। 

वह 2016 में भारत से भाग गया था। बाद में वह मुस्लिम बहुल मलेशिया चला गया, जहाँ उसे स्थायी निवास की सुविधा दी गई थी। उस समय महातिर प्रधानमंत्री थे। महातिर एक समय में दुनिया में सबसे ज्यादा समय तक पीएम की कुर्सी पर रहने वाले नेता थे। फिलहाल वह सत्ता में वापसी करने की कोशिश में हैं। राजनीतिक वापसी के लिए प्रयासरत 95 वर्षीय महातिर ने दावा किया कि भगोड़ा उपदेशक ‘भारतीय जनता से सुरक्षित नहीं रहेगा।’

उन्होंने कहा कि वह उसे किसी सुरक्षित देश में भेजना चाहते हैं। डब्ल्यूआईओएन समाचार चैनल से बातचीत में महातिर ने कहा, “वह अभी यहाँ रह सकता है लेकिन हम उसे किसी अन्य देश में भेजना चाहेंगे, जहाँ वह सुरक्षित रहे। लेकिन कोई भी देश उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।” 

यह पूछे जाने पर कि अगर वह फिर से प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह क्या नाइक को प्रत्यर्पित करेंगे, महातिर ने कहा, “हम उसे किसी ऐसे देश में भेजना चाहेंगे, जहाँ हमें लगता हो कि वह सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने एक बार फिर नाइक को भारत भेजने से इनकार करते हुए कहा, “इस समय हमें लगता है कि वह भारतीय जनता से सुरक्षित नहीं रहेगा।’’

गौरतलब है कि भारत में जाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग और कट्‌टरता को बढ़ाने के आरोप में केस दर्ज है। गिरफ्तारी की डर से वह 2016 में मलेशिया भाग गया। जून 2017 में कोर्ट ने नाइक को अपराधी घोषित किया था। उस पर मलेशिया में अल्पसंख्यक हिंदुओं और चीन के लोगों की भावनाएँ आहत करने का भी आरोप है।

मलेशिया में नाइक ने एक भड़काऊ भाषण दिया था। उसने कहा था कि मलेशिया में हिंदुओं को भारत के मुस्लिमों के मुकाबले 100 गुना ज्यादा अधिकार मिले हैं।

पिछले दिनों इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक ने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर तोड़ने का समर्थन करते हुए कहा था कि पाकिस्तान अपनी राजधानी में श्रीकृष्ण मंदिर बनवाने के लिए पैसे देकर पाप कर रहा है। उसने कहा था कि एक मुस्लिम व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम पूजा स्थल के निर्माण में दान नहीं कर सकता है। इसके अलावा जाकिर ने कहा वह ऐसे किसी निर्माण का समर्थन भी नहीं कर सकता।