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राम का गुणगान, अब परशुराम की मूर्ति और ब्राह्मण सम्मलेन: जानिए 11% ब्राह्मणों को लुभाने के लिए क्यों पगलाई सपा-बसपा

किन्तु, कौन नर तपोनिष्ठ है यहाँ धनुष धरनेवाला?
एक साथ यज्ञाग्नि और असि की पूजा करनेवाला?
कहता है इतिहास, जगत् में हुआ एक ही नर ऐसा,
रण में कुटिल काल-सम क्रोधी तप में महासूर्य-जैसा!

मुख में वेद, पीठ पर तरकस, कर में कठिन कुठार विमल,
शाप और शर, दोनों ही थे, जिस महान् ऋषि के सम्बल।
यह कुटीर है उसी महामुनि परशुराम बलशाली का,
भृगु के परम पुनीत वंशधर, व्रती, वीर, प्रणपाली का।

रामधारी सिंह दिनकर के ‘रश्मिरथी’ की ये पंक्तियाँ आज इसीलिए और ज्यादा प्रासंगिक हो गई हैं, क्योंकि भगवान विष्णु के अंशावतार माने जाने वाले भगवान परशुराम की उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक से वापसी हो गई है। यदा-कदा ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणों को गाली देकर राजनीति करने वाले सपा-बसपा अब उनकी आराधना में लगी है। यहाँ हम इसी बदलाव का पोस्टमॉर्टम करने की कोशिश करेंगे।

उत्तर प्रदेश में अब राजनीति की धुरी फिर से ब्राह्मणों पर ही आकर टिक गई है। राज्य की दोनों स्थानीय पार्टियाँ सपा और बसपा ब्राह्मणों को रिझाने के लिए एक से बढ़ कर एक वादे कर रही हैं। राज्य की 60 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहाँ ब्राह्मण जनसंख्या 20% के पार है। ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए कि सपा-बसपा ब्राह्मणों को रिझाने और भगवान परशुराम की मूर्ति बनवाने की बात कर रही है। लेकिन, आखिर उन्हें इसका एहसास कैसे हुआ कि ब्राह्मण उनके लिए ज़रूरी हैं?

सबसे पहले बात समाजवादी पार्टी की। सपा ने वादा किया है कि वो भगवान परशुराम की 108 फीट ऊँची प्रतिमा का निर्माण करवाएगी। इसके लिए जगह ढूँढने की बात भी कही जा रही है। बताया गया है कि प्रतिमा बनवाने के लिए समाजवादी पार्टी देश के लोकप्रिय मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में लगी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य मूर्ति बनाने वाले राजकुमार के संपर्क में है।

इतना ही नहीं, सपा हर जिले में भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने और ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कराने की योजना बना रही है। मंगल पांडेय से भी पार्टी का प्रेम उमड़ा हुआ है। पहले स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानी मंगल पांडेय की मूर्ति लगाने पर विचार किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कई ब्राह्मण नेताओं के साथ बैठक की है। पार्टी गरीब ब्राह्मण घर की बेटियों की शादी भी कराएगी। सपा अब प्रदेश के 11% जनसंख्या वाले ब्राह्मणों को साधने में जुटी है।

अब बात बहुजन समाज पार्टी की, जिसकी पूरी विचारधारा ही दलितों के इर्द-गिर्द घूमती है। पार्टी की मुखिया मायावती ने तो यहाँ तक कहा कि वो सपा से भी ऊँची परशुराम की प्रतिमा लगवाएँगी। उन्होंने भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनवाने से लेकर साधु-संतों के ठहरने के लिए स्थल बनाने तक की बात कही। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज को बसपा ने पूरा प्रतिनिधित्व दिया है और ब्राह्मणों का बसपा पर पूरा विश्वास है।

मायावती का पूरा जोर इस बात पर है कि वो ब्राह्मण हितों की रक्षा के मामले में सपा से ऊपर हैं। उन्होंने सपा से पूछा कि जब वो सत्ता में थी तब उसने परशुराम की मूर्ति क्यों नहीं लगवाई? उन्होंने कहा कि किसी भी महापुरुष को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। साथ ही ये इशारा किया कि सपा ब्राह्मणों को इसीलिए लुभा रही है, क्योंकि राज्य में उसकी स्थिति अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा के शासन में ही ब्राह्मणों का सबसे ज्यादा शोषण और उत्पीड़न हुआ।

दोनों ही दलों की बेचैनी को देख कर ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एक ब्रेक के बाद ब्राह्मण फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में इतने महत्वपूर्ण कैसे हो गए कि कथित अल्पसंख्यक और दलित तुष्टिकरण करने वाली पार्टियाँ उनके पास भाग रही हैं? इसके पीछे 2 सबसे स्पष्ट कारण नज़र आते हैं। पहला, राम मंदिर और दूसरा, विकास दुबे का एनकाउंटर। इन दोनों ही मुद्दों का सपा-बसपा ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहती है।

बिकरू गाँव में विकास दुबे ने 8 पुलिसकर्मियों को मार गिराया था। ये एक बड़ा मुद्दा बना। विकास दुबे नाटकीय तरीके से पकड़ा गया और उससे भी बड़े नाटकीय अंदाज़ में एनकाउंटर में मारा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसके समर्थन में कई पोस्ट हुए। इसमें जातिवाद घुसा और योगी आदित्यनाथ को ठाकुर बताते हुए ब्राह्मणों का विरोधी करार दिया गया। इसमें कॉन्ग्रेस समर्थक ट्रोल सबसे ज्यादा सक्रिय रहे।

बस यहीं पर सपा-बसपा के कान खड़े हो गए। यूपी में प्रियंका गाँधी के कारण कॉन्ग्रेस का वोट प्रतिशत जरा भी बढ़ता है तो खास मजहब के वोटों का बँटवरा होना तय है। हो सकता है कि इसके 3 हिस्से हो जाएँ। ऐसे में उन पर दाँव न लगा कर प्रदेश की 11% जनसंख्या को साधने की कोशिश हो रही है। नॉन-यादव ओबीसी भाजपा के पक्ष में दिख रहा है। हालाँकि दलितों का एक वर्ग अभी भी बसपा के साथ है, लेकिन चंद्रशेखर उर्फ रावण ने मायावती की नींद उड़ा रखी है।

प्रियंका गाँधी ने जिस तरह से अस्पताल जाकर रावण से मुलाकात की थी, उसके बाद मायावती बिफर पड़ी थीं। न तो सपा सिर्फ यादवों के सहारे सरकार बना सकती है और न ही बसपा दलितों के खंडित वोटों से जनादेश ला सकती हैं। ऐसे में ब्राह्मणों को लुभाना उन्हें कारगर लग रहा है। सामान्य वर्ग और नॉन-यादव ओबीसी की भाजपा की गोलबंदी तोड़ने के लिए ये जुगत अपनाई जा रही है।

मायावती के हालिया बयानों को देखिए। उन्होंने कहा कि विकास दुबे की आड़ में सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज का शोषण किया जा रहा है। विकास दुबे के एनकाउंटर के तुरंत बाद भी उन्होंने कहा था कि एक गलत व्यक्ति के करतूतों को सज़ा पूरे समुदाय को दिए जाने के कारण ब्राह्मण समाज भयभीत और प्रताड़ित नज़र आ रहा है। 2007 में ब्राह्मण-दलित वाला फॉर्मूला अपना चुकीं मायावती ने कहा कि ये समुदाय आतंकित महसूस कर रहा है।

सपा को लगा था कि कहीं इस मुद्दे का फायदा बसपा और कॉन्ग्रेस न उठा ले, इसीलिए उसने परशुराम की प्रतिमा का दाँव खेल दिया। सपा नेताओं के साथ विकास दुबे की तस्वीरें वायरल होने पर भी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कोई सफाई नहीं दी। इसके पीछे ब्राह्मणों के समर्थन का दिखावा भी हो सकता है। बेचैन सपा-बसपा के नेता योगी आदित्यनाथ को अजय सिंह बिष्ट भी कहते रहे हैं।

अब बात राम मंदिर की। जब भी बात मंदिर और पूजा-पाठ की आती है, कुछ दल इसे ब्राह्मणों से जोड़ते हैं। शायद सपा-बसपा को धीरे-धीरे ये पता चल रहा है कि भाजपा को आँधी में कर्मकांड अब हर जाति तक पहुँच चुका है और इससे भावनाएँ जुड़ती जा रही हैं लोगों की। साधु-संतों के लिए स्थल बनाने के पीछे यही सोच हो सकती है। सैकड़ों सालों से अटके राम मंदिर निर्माण की काट शायद किसी दल के पास नहीं है।

प्रियंका गाँधी, मायावती और अखिलेध यादव को राम और राम मंदिर के पक्ष में बोला पड़ा। इससे पता चलता है कि वो जनभावनाओं को समझ तो रहे हैं, लेकिन ये नहीं समझ रहे कि जनता अब दिखावे और श्रद्धा के बीच का अंतर समझने लगी है। मायावती भले अखिलेश से सवाल पूछें लेकिन उन्होंने अपनी सत्ता रहते कांशीराम की मूर्तियों की झड़ी लगा दी थी। अब ये पार्टियाँ और असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

जिस महिला ने खुले सीवर के पास 7 घंटे खड़े होकर दिखाया रास्ता, मुंबई में उन्हें अधिकारियों ने दी गाली

भारी बारिश के कारण मुंबई की सड़कों की हालत बेहद खराब है। ऐसे में एक महिला को बीच रोड पर खड़े होकर गाड़ियों को दिशा दिखाते देखा गया। उस महिला का नाम कांता मूर्ति है, जिनकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई।

वीडियो में हमने देखा था कि कैसे महिला खुले सीवर के पास खड़े होकर लोगों को उधर आने से रोक रही हैं और उन्हें दूसरी ओर से जाने का इशारा कर रही हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर बहुत शेयर किया गया।

एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, यह वीडियो 4 अगस्त को मुंबई के मतुंगा के एक रोड की है। जहाँ भारी बारिश के कारण पानी भर गया था और कांता ने उस पानी को निकालने के लिए सीवर खोल दिया। लेकिन जिम्मेदारियों को समझते हुए वह उस जगह पर 7 घंटे खड़ी रहीं। उन्होंने वाहनों को किसी भी दुर्घटना से बचाने के लिए उन्हें हाथ से इशारा करके अलग से जाने को कहा।

रिपोर्ट के अनुसार कांता ने कहा, “मैंने पानी निकालने के लिए सीवर का ढक्कन खोला और फिर वहाँ लोगों को चेतावनी देने के लिए खड़ी भी रही। लेकिन बीएमसी अधिकारी बाद में आए और मुझे इसके लिए गाली दी।”

कांता बताती हैं कि वह अपने जीवनयापन के लिए फूल बेचती हैं और उसी से अपने तीन बच्चों की शिक्षा का खर्च भी उठाती हैं। वे कहती हैं कि उनके 5 बच्चे और भी हैं, लेकिन सबकी शादी हो गई है। अभी फिलहाल वही घर में कमाने वाली हैं। पति हैं लेकिन एक रेल दुर्घटना के बाद उन्हें लकवा मार गया और अब वह कोई काम करने में अक्षम हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मुंबई में बारिश का भयंकर रूप देखने को मिला है। वहाँ से आई वीडियो में यह देखने को मिला कि सड़कों पर इकट्ठा पानी ने और उसके बहाव ने लोगों के घरों को काफी नुकसान पहुँचाया, जिससे घरों के सामान तक बाहर तैरने लगे। इसके अलावा ऐसी बारिश के कारण मुंबई में कई हादसे भी हुए।

अधिकारियों को डराने के लिए 4-5 गुंडे साथ लेकर जाएँ: कार्यकर्ताओं से महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

बाला साहेब थोराट महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं। राज्य की उद्धव सरकार में मंत्री भी। वो कोरोना वायरस के कारण पैदा हालात की समीक्षा करने सोलापुर पहुॅंचे। यहॉं उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को अधिकारियों के साथ सख्ती से पेश आने को कहा। इसके लिए अपने साथ 4-5 गुंडे लेकर चलने का सुझाव दिया।

थोराट ने कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “सरकारी अधिकारियों को हमसे डरना चाहिए। प्रशासन पर हमारी पकड़ होनी चाहिए। इस डर को मन में बैठाने के लिए अपने साथ 4-5 लोगों को ले जाएँ।”

थोराट से पहले, बैठक में मौजूद कॉन्ग्रेस विधायक यशोमति ठाकुर ने भी इसी तरह की विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने संबोधन में, अधिकारियों से निपटने के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को अत्यधिक आक्रामक होने के लिए कहा।

यशोमति ठाकुर ने कहा, “अगर आपका काम पूरा नहीं हो रहा है, तो हंगामा करें। अनुरोध की भाषा कोई नहीं समझता। आपको इसे छीनने का अधिकार मिला है। हर नेता को अपने तालुका का ध्यान रखना होगा। आपकी तरफ से कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए। हम आपका समर्थन करेंगे।”

इस बैठक में महिला और बाल विकास मंत्री, यशोमति ठाकुर, मंत्री दत्तात्रेय भारें, कलेक्टर मिलिंद शंभरकर, पुलिस आयुक्त अंकुश शिंदे, नगर आयुक्त पी शिवशंकर, जिला पुलिस अधीक्षक मनोज पाटिल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश वैचल उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान बालासाहेब थोराट ने यह भी कहा कि राज्य कोरोना महामारी के प्रकोप से गुजर रहा है और विदेशी नागरिकों के कारण इसका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हालाँकि मुंबई में कोरोना वायरस के प्रसार में सुधार है, लेकिन यह राज्य के अन्य क्षेत्रों में बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी की सरकार में मतभेद के संकेत देते हुए थोराट ने कहा था, “महाविकास अघाड़ी के सहयोगियों में कुछ मुद्दे हैं, जिनका समाधान बातचीत से निकल आएगा। लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस को सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिकार मिलना चाहिए।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में निर्णय लेने की भूमिका में नहीं है। उन्होंने कहा था कि सरकार चलाने और राज्य में सरकार का समर्थन करने के बीच अंतर है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में निर्णय लेने वाली भूमिका में माना जा सकता है, लेकिन महाराष्ट्र में नहीं।

ऑटो में महिलाओं से रेप करने वाले नदीम और इमरान को मारी गोली: ‘जान बच गई पर विकलांग हो सकते हैं’

यूपी पुलिस ने नदीम और इमरान नाम के दो अपराधियों को पकड़ा है। ये ऑटो में महिला सवारी को बिठाकर उनके साथ दुष्कर्म करते थे।

असल में 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा में 19 साल की एक युवती के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। पुलिस ने देर रात मुठभेड़ के बाद नदीम और इमरान को पकड़ा था।

पीड़िता मूल रूप से हाथरस की रहने वाली है और सूरजपुर में काम करती है। 4 अगस्त को उसने ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर से परी चौक के लिए ऑटो लिया। ऑटो में चालक के अलावा एक और आदमी बैठा था। थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ कि ऑटो उसे दूसरी जगह लेकर जा रहा है। उसने विरोध किया तो दूसरे व्यक्ति ने बंदूक निकाल कर दुष्कर्म की धमकी दी। इसके बाद उस व्यक्ति ने कपड़े की मदद से युवती के हाथ और पैर बॉंधे। फिर दोनों ने एक-एक कर उसके साथ दुष्कर्म किया।

वह ऑटो के भीतर से मदद के लिए लगातार चीख लगा रही थी। कुछ समय बाद नदीम और इमरान को समझ में आया कि पुलिस उनका पीछा कर रही है। फिर उन्होंने पुलिस पर फा​यरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वे घायल हो गए।

नदीम बिजनौर का तो इमरान गौतमबुद्ध नगर का रहने वाला है। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों महिला सवारी को ऑटो रिक्शा में बैठाते थे। इसके बाद बंधक बनाकर उन्हें सुनसान जगह पर ले जाते और उनके साथ बलात्कार करते थे।  

पुलिस उपायुक्त ज़ोन तृतीय विशाल पाण्डेय ने यह जानकारी दी। धानाध्यक्ष वरुण पंवार ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ हिंडन नदी के पुस्ता पर चेकिंग कर रहे थे। तभी रात एक बजे के करीब एक ऑटो सफीपुर गाँव के रास्ते आया। रुकने का इशारा किए जाने के बाद भी ऑटो नहीं रुका।   

ऑटो रिक्शा से एक महिला की चिल्लाने की आवाज़ आने पर पुलिस ने उसका पीछा किया। कुछ दूरी के बाद बदमाश स्वयं को घिरा देखर ऑटो छोड़कर भागने लगे। फिर बदमाशों ने पुलिस पर गोली चलाई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई। बदमाशों के पैर में गोली लगी है। जानकारी के मुताबिक़ आरोपित ऑटो के भीतर से चिल्ला रहे थे ‘मारो सालों को पुलिस वाले हैं।’ दोनों के पास से अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी इस घटना का वीडियो साझा किया। समें साफ नज़र आ रहा है कि पुलिस नदीम और इमरान को गिरफ्तार करके ले जा रही है।

नदीम और इमरान पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इउन पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ में पता चला कि नदीम पर पहले भी महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने के आरोप लग चुके हैं।   

4 Sec में 160GB की फिल्म डाउनलोड: अंडमान एवं निकोबार में समुद्र के नीचे बिछाया जाएगा OFC, PM मोदी ने किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लोगों के लिए बहुत ही स्पेशल दिन बताया क्योंकि इस दिन ‘सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC)’ को लॉन्च किया गया। इसके द्वारा चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से कनेक्ट किया जाएगा। पीएम मोदी ने वीडियो कॉल के जरिए सुबह साढ़े 10 बजे OFC को लॉन्च किया।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि OFC से न सिर्फ हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी बल्कि इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के विकास में भी बड़ा उछाल आएगा। उन्होंने बताया कि वहाँ के लोगों को तेज़ और विश्वस्त टेलीकॉम सेवाएँ मिलने लगेंगी। इससे डिजिटल गवर्नेंस, टेली मेडिसिन और टेली शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। OFC के द्वारा पोर्ट ब्लेयर, स्वराज द्वीप, लिटिल अंडमान, कार निकोबार, कमोर्टा, ग्रेट निकोबार, लॉन्ग आइलैंड और रंगत को जोड़ा जाएगा।

भारत ने चेन्नई से लेकर पोर्ट ब्लेयर के बीच ‘अंडर सी केबल लिंक’ तैयार कर लिया है। इसके बाद उसे अब OFC बिछाने के लिए किसी और देश की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने 2300 किलोमीटर लम्बे इस लिंक का उद्घाटन किया। दिसंबर 2018 में पीएम मोदी ने ही इस लिंक की नींव रखी थी। ये केबल चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर के बीच 2*200 गीगाबाइट प्रति सेकंड (Gbps) की गति से इंटरनेट सेवा देगा।

वहीं पोर्ट ब्लेयर और उसके बीच की बैंडविड्थ इसकी आधी होगी। इन केबल्स के जरिए अधिकतम 4000 Gbps स्पीड मिलने की बात कही जा रही है। इसे इस तरह से समझिए। आप 4K गुणवत्ता में 2 घंटे की कोई फिल्म डाउनलोड करना चाहते हैं और ये 160 जीबी का है। ऐसा करने में मुश्किल से 3-4 सेकण्ड्स से ज्यादा नहीं लगेंगे। इतनी देर में ही 40,000 गानों को डाउनलोड किया जा सकेगा।

OFC को अंडमान एवं निकोबार में बिछाने के लिए खास तरह की जहाजों का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे एक जहाज अपने साथ 2000 किलोमीटर लम्बा केबल लेकर जा सकते हैं। हल जैसे एक उपकरण का भी प्रयोग किया जाता है, जो जहाज के साथ-साथ चलते हैं। फ्लोर केबल के जरिए पहले ज़मीन तैयार की जाती है और फिर समुद्रतल पर जहाज से इसकी निगरानी की जाती है। बिछाने के लिए भी इसका प्रयोग होता है।

टेलीकॉम केबल बिछाने के लिए रिपीटर का प्रयोग किया जाता है। इससे सिग्नल स्ट्रेंथ बढ़ाने में मदद मिलती है। दो केबल्स को आपस में क्रॉस कराने के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। जहाँ केबल ख़त्म होता है, वहीं पर उसे उठा कर समुद्रतल से ऊपर खींच कर ले आया जाता है। आखिर में एक अंडरवॉटर व्हीकल ROV के जरिए इस बात की अच्छी तरह से जाँच की जाती है कि कहीं कोई गलती तो नहीं हुई।

ट्विटर पोल में भी पास नहीं हुए राहुल गाँधी: इंडिया टुडे ने फिर दिया मौका, पर नहीं बदल पाए नतीजे

2019 के आम चुनावों में राहुल गॉंधी प्रधानमंत्री बनने की लड़ाई बुरी तरह हारे थे। यहॉं तक कि अपनी परंपरागत सीट अमेठी भी नहीं बचा पाए थे। अब एक बार फिर उन्हें करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।

इंडिया टुडे के हालिया ट्विटर पोल में अगला प्रधानमंत्री बनने की लड़ाई भी उन्हें नरेंद्र मोदी के हाथों हारनी पड़ी। इस सर्वेक्षण के नतीजों ने राजदीप सरदेसाई को भी हैरान कर दिया था। वे विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि देश के आम लोगों की पसंद अभी भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही हैं।

इस सर्वेक्षण में लोगों से पूछा गया कि आने वाले समय में वे किसे प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि यह सर्वेक्षण कॉन्ग्रेस के दबाव में कराया गया था। उन्हें बेहतर नतीजे की आस थी। लेकिन इसके ठीक उलट परिणाम आए। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगर सर्वेक्षण उनके पक्ष में आता तो वह इसे ख़बर में तब्दील कर देते। लेकिन राहुल गाँधी इस सर्वेक्षण में बहुत पीछे नज़र आए।   

इंडिया टुडे और राहुल गांधी

इंडिया टुडे ने भले इस सर्वेक्षण और राहुल गाँधी के मोनोलॉग का ‘आलोचना’ बताने का प्रयास किया हो। लेकिन अंत में इसका भी उन्हें कोई फ़ायदा नहीं हुआ। यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब इंडिया टुडे ने ऐसा कुछ किया हो। 

इसके पहले इंडिया टुडे ने बहुत बारीकी से राहुल गाँधी को अगला या आगामी प्रभावी चेहरा दिखाने का पूरा प्रयास किया है। नीचे मौजूद इंडिया टुडे पत्रिका की कवर से साफ़ है कि उन्होंने अक्सर राहुल गाँधी को बतौर चेहरा स्थापित करने का पूरा प्रयास किया है।   

इंडिया टुडे के कवर पर राहुल गाँधी

इन सारी बातों से यह भी साफ़ है कि इंडिया टुडे ने हमेशा इस बात का इंतज़ार किया है कि राहुल गाँधी की तरफ से कुछ ऐसा हो जिसकी किसी ने कल्पना न की हो। जो राहुल के राजनीतिक कद के लिए बेहद ही अप्रत्याशित हो। लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हासिल हुई है। यहाँ तक कि इंडिया टुडे खुद इसके लिए जितनी बार कोशिश करता है उन्हें भी असफलता ही हासिल होती है।    

दरअसल राहुल गाँधी ने 27 जुलाई 2020 को एक वीडियो साझा किया था। इसमें उन्होंने केंद्र सरकार को तमाम मुद्दों पर घेरने का प्रयास किया था। इसमें उनसे सवाल किया जाता है कि उन लोगों के बारे में आपका क्या ख्याल है जो कहते हैं कि प्रधानमंत्री से चीन पर आपके सवाल, भारत को कमजोर कर रहे हैं? वीडियो में उनका कहना था उनकी पहली प्राथमिकता यह देश और जनता है। इसके बाद राहुल ने कहा, ”यह बात एकदम साफ है कि चीनी हमारे इलाके में घुस आए हैं। यह बात मुझे परेशान करती है। इससे मेरा खून खौलने लगता है कि कैसे एक दूसरा देश हमारे इलाके में घुस आया?”

India today conducted a poll regarding upcoming PM of the nation Rahul gandhi lost this poll too

4.66 करोड़+ फूड पैकेट, 44.86 लाख मजदूरों की मदद… और अब नौकरी दिलाने में सहायता: ऐसे मदद कर रहा RSS

कोरोना वायरस महामारी की मुश्किल घड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) लोगों की मदद के लिए आगे आया है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बेंगलुरु, गुवाहाटी और सूरत में प्लाज्मा डोनशन (Plasma Donation) अरेंज करना हो, या बिहार में प्रवासियों के लिए शेल्टर खोलने हों, संघ हर काम बढ़-चढ़कर कर रहा है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल में फूड पैकेट्स बाँटने से लेकर कर्नाटक में मास्क और सेनेटाइजर प्रदान करने, केरल में छात्रों की वर्चुअल क्लासेज के लिए टीवी सेट दान करने, छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन में प्रवासियों के लिए गाड़ियों का इंतजाम करने और साथ ही महाराष्ट्र में पीड़ितों के अंतिम संस्कार तक का प्रबंध संघ द्वारा किया जा रहा है।

जमीनी स्तर पर शाखा की गतिविधियाँ पकड़ रही हैं जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके राष्ट्रव्यापी नेटवर्क ने लॉकडाउन के दौरान एक रणनीति के तहत काम किया है। जमीनी स्तर पर शाखा की गतिविधियाँ जोर पकड़ रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस के सेवा विभाग के प्रमुख पराग अभयंकर ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान, 5.07 लाख स्वयंसेवकों ने 4.66 करोड़ से अधिक फूड पैकेट वितरित किए और 44.86 लाख प्रवासी मजदूरों की मदद की। और लॉकडाउन खत्म होने के बाद से हम मजदूरों को उनकी नौकरी वापस दिलाने में मदद कर रहे हैं।”

सेवा एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य

पराग के अनुसार, लॉकडाउन लागू किए जाने के एक महीने बाद 26 अप्रैल को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राहत कार्य चालू करने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा था, “हमारी सेवा बिना पक्षपात के होनी चाहिए। सेवा एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है।”

संघ का कहना है कि सेवा विभाग ने पाँच महीने में 92 हजार राहत केंद्र खोले हैं। इसके अलावा 483 मेडिसिन डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर, 60 हजार कार्यकर्ताओं ने ब्लड डोनेट किया और करीब 73.8 लाख राशन किट बाँटी गईं। इस दौरान कई कार्यकर्ता और नेता, जिसमें ज्वॉइंट पब्लिसिटी चीफ सुनील अंबेकर कोरोना वायरस संक्रमित हुए और चार की मौत भी हुई। जिन लोगों की कोरोना वायरस के कारण मृत्यु हुई, उनमें दो मध्य प्रदेश, एक महाराष्ट्र और एक बिहार के शामिल हैं।

बंगाल से केरल तक, आरएसएस और उसके सहयोगियों, जैसे सेवा भारती और भारतीय मजदूर संघ के नेताओं का कहना है कि उनका ध्यान पूरी तरह से राहत कार्यों की तरफ स्थानांतरित हो गया है।

संघ के काम की एक झलक

महाराष्ट्र: 6,277 स्थानों पर 26,000 से अधिक स्वयंसेवक लगाए गए। 10 लाख से अधिक राशन किट, 87 लाख से अधिक भोजन और 5 लाख से अधिक मास्क एवं सेनेटाइजर प्रदान किए गए। 1 लाख से अधिक खानाबदोश परिवारों के लिए सहायता उपलब्ध कराई गई। शिविरों में 24,000 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया।

2 लाख लोगों को 1,000 से अधिक अस्थायी स्वास्थ्य सुविधाएँ दी गईं। क्षेत्र के कल्याण प्रमुख उपेंद्र कुलकर्णी ने कहा, “100 से अधिक स्वयंसेवकों ने उन लोगों का अंतिम संस्कार करने में मदद की, जिनके पास कोई पारिवारिक समर्थन नहीं था।”

पश्चिम बंगाल: 2.5 लाख परिवारों के लिए खाद्य पदार्थ, पका हुआ भोजन, मास्क और सेनेटाइजर उपलब्ध कराए गए गए। इसके साथ ही वहाँ पर जागरूकता कैंप भी लगाए गए। रेड लाइट वाले एरिया में 500 से अधिक महिलाओं को 5 पैकेट चावल, 1 किलो दाल, 3 किलो आलू, 250-300 ग्राम नमक और तेल के साप्ताहिक पैकेट वितरित किए गए। दक्षिण बंगाल के सचिव जिष्णु बसु ने बताया कि स्वयंसेवकों ने प्रवासी श्रमिकों, और मेडिकल हेल्पलाइन के लिए 80 से अधिक शिविर खोले।

बिहार: राज्य के पदाधिकारी रामदत्त चक्रधर ने कहा, “हमने विशेष ट्रेनों में लौटने वाले प्रवासियों को भोजन के पैकेट और बोतलबंद पानी प्रदान किया। हमारे स्वयंसेवकों ने मास्क, सैनिटाइज़र और अनाज भी वितरित किए।”

राजस्थान: राशन और खाने के पैकेट बाँटे गए, मास्क तैयार किया गया, प्रवासियों के लिए आश्रय और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। एक अधिकारी ने कहा, “हमने फलों और सब्जियों, छोटे व्यवसायों और किसानों के समूहों के स्टॉल लगाने में भी मदद की है।” जयपुर में, 12,600 से अधिक कार्यकर्ताओं ने 22 लाख से अधिक लोगों को भोजन के पैकेट, 2 लाख परिवार के राशन किट और होम्योपैथिक दवाओं का वितरण किया।

छत्तीसगढ़: 2 लाख से अधिक लोगों को भोजन, राशन, मास्क, साबुन और सेनिटाइजर उपलब्ध कराए गए। जागरूकता अभियान, रक्तदान अभियान और परामर्श सत्र के अलावा लॉकडाउन के दौरान घर पहुँचने के लिए 1,000 से अधिक लोगों के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई। राज्य प्रचार प्रमुख सुरेंद्र कुमार ने कहा, “हमने राजमार्ग पर और आदिवासी गाँवों और शहरों में लोगों की मदद की।”

कर्नाटक: 8,400 से अधिक स्वयंसेवकों ने 3.17 लाख से अधिक लाभार्थियों को 71,667 राशन किट, 1,04,377 खाद्य पैकेट और 51,920 मास्क वितरित किए। बेंगलुरु, बागलकोट, मैसूरु, मंगलुरु, हुबली और शिवमोगा में भोजन और राशन वितरण किया गया और रक्तदान शिविर आयोजित किए गए।

केरल: सेवा भारती के 42,000 स्वयंसेवकों ने भोजन के पैकेट, किराना किट और दवा का वितरण किया। उन्होंने स्थानीय निकायों को कोविड केंद्रों को तैयार करने में मदद की और स्वच्छता अभियानों में भाग लिया। सेवा भारती ने छात्रों को वर्चुअल क्लासेस के लिए टीवी सेट भी वितरित किए। राज्य महासचिव गोपालंकुट्टी मास्टर ने कहा, “अब तक केरल में 42 लाख परिवारों को हमारे स्वैच्छिक काम से लाभ मिला है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों भारतीय कप्तान विराट कोहली ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संगठन ‘सेवा भारती’ के कदमों की सराहना की थी। बता दें कि ‘सेवा भारती’ दिल्ली में लगातार जरूरतमंदों तक मदद पहुँचा रही है।

‘वो नशेड़ी है, कुछ भी बोलता रहता है’ – राहुल गाँधी का वो इंटरव्यू, जिसे कॉन्ग्रेस और तरुण तेजपाल ने दबा दिया

“मुझे एक सम्पूर्ण राजनीतिज्ञ बनना है। इसके लिए मुझे एकाध चुनाव हारने पड़ेंगे। अगर मैं चुनाव नहीं हारता हूँ तो मैं एक अच्छा नेता नहीं बन पाऊँगा। मैं हार से डरता नहीं हूँ। ये मेरी ज़िंदगी का हिस्सा है।“- ये पंक्तियाँ पहली बार सांसद बने एक ऐसे व्यक्ति की है, जो इसके 12 साल बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी का अध्यक्ष बना। ये इंटरव्यू उन्होंने ‘तहलका’ में दिया था, जिससे कॉन्ग्रेस की फजीहत हुई थी और तरुण तेजपाल को कहा गया कि वो इसे फेक साबित कर दें।

क्या कहा था पत्रकार विजय सिम्हा ने

ये इंटरव्यू ‘तहलका’ के लिए विजय सिम्हा ने लिया था। बाद में ‘ज़ी न्यूज़’ से बात करते हुए उन्होंने बताया था कि ‘तहलका’ के संपादक तरुण तेजपाल ने राहुल गाँधी के 2005 के इस इंटरव्यू को दबा दिया था। सेक्स स्कैंडल में फँसे तरुण तेजपाल फ़िलहाल जेल में हैं। विजय सिम्हा ने कहा था कि शुरुआत में तरुण तेजपाल की आवाज़ में दम होता था और बैठक वगैरह में वो काफी प्रभाव डालते थे।

उन्होंने बताया कि वो 2005 में राहुल गाँधी से मिले थे, जो उस समय नए-नए राजनीति में आए थे और उन्होंने कॉन्ग्रेस व राजनीति के बारे में काफी चीजें कही थीं। कॉन्ग्रेस की समस्याओं पर भी उस इंटरव्यू में बात हुई थी। बकौल विजय सिम्हा, उस समय कई लोग कॉन्ग्रेस में इस चिंता में पड़ गए थे कि उनकी ‘नौकरी’ चली जाएगी और वो कहने लगे थे कि ये किस व्यक्ति से बात कर लिया, ये तो नशेड़ी है।

उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद तरुण तेजपाल दबाव में आ गए। पहले तो उन्होंने डिफेंड किया कि उनके पत्रकार ने कुछ भी गलत नहीं किया है और सब ठीक है लेकिन बाद में वो अचानक से पलट गए। सिम्हा बताते हैं कि इस प्रकरण के कारण ही उनके मन में पहली बार तेजपाल को लेकर शंका हुई। बाद में पत्रकार विजय सिम्हा पर ही आरोप लगाए गए कि उन्होंने स्टिंग कर दिया या फिर काल्पनिक बातचीत को छाप दिया।

कैसे तरुण तेजपाल ने दबा दी राहुल गाँधी की स्टोरी: पत्रकार का आरोप (सभी: ज़ी न्यूज़)

जबकि सिम्हा इन बातों को नकारते हैं। वो कहते हैं कि इन आरोपों की कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया था कि तरुण ने इस स्टोरी को ‘किल’ कर दिया, दबा दिया। उनके अनुसार ऐसे कई पत्रकार थे, लेकिन हाथ में चीजें न होने के कारण वो कुछ कर नहीं पाते थे। ऊपर संलग्न किए गए ‘ज़ी न्यूज़’ के वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे विजय सिम्हा ने उस इंटरव्यू को दबाए जाने के बारे में खुलासा किया।

राहुल गाँधी ने क्या कहा था ‘तहलका’ के इस इंटरव्यू में

ट्विटर पर ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ट्रेजरर शीला भट्ट ने इस इंटरव्यू के स्क्रीनशॉट्स शेयर किए और कहा कि उनकी आलमारी से ये राहुल गाँधी का पुराना इंटरव्यू निकल आया है, जो काफी प्रभावी है। सितम्बर 2005 के इस इंटरव्यू के बारे में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के पत्रकार दीप्तिमान तिवारी ने याद दिलाया कि कैसे इस इंटरव्यू को दबाने के लिए कॉन्ग्रेस ने ‘तहलका’ पर भारी दबाव बनाया था।

तिवारी ने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी के आगे झुकते हुए ‘तहलका’ ने इसे पहले अनौपचारिक बातचीत करार दिया। तब मैगजीन की ओर से कहा गया था कि ये तो सिर्फ एक बातचीत है, जिसे इंटरव्यू समझा जा रहा है लेकिन ये इंटरव्यू तो है ही नहीं। और तो और, इंटरव्यू लेने वाले विजय सिम्हा को बेइज्जत तक किया गया। दरअसल, उस इंटरव्यू में राहुल गाँधी ने ऐसी-ऐसी बातें की थीं कि कॉन्ग्रेस पार्टी की खासी फजीहत हुई थी।

राहुल गाँधी ने इस इंटरव्यू की शुरुआत भारत को नंबर-1 बनाने की बात से की थी और कहा था कि इसके लिए 30 से कम उम्र वाले हर युवा को कोशिश करना होगा और वो इतिहास दोहराने का रिस्क नहीं ले सकते। नीचे हम बिंदुवार तरीके से राहुल गाँधी द्वारा दिए गए बयानों को उनके शब्दों में हूबहू पेश कर रहे हैं। इसके बाद आप समझ सकते हैं कि कॉन्ग्रेस ने इसे दबाने के लिए क्यों इतना प्रयास किया:

  • अमेठी में काफी मुद्दे हैं। मैं तो सिर्फ एक सांसद हूँ। मुझे MPLAD फण्ड में 2 करोड़ रुपए मिलते हैं। इससे मैं ज्यादा से ज्यादा 8 किलोमीटर सड़क बना सकता हूँ। लेकिन हम अमेठी में 500 किलोमीटर सड़क बनाने में सक्षम हुए हैं। इससे ज्यादा हम क्या कर सकते हैं? कुछ भी तो नहीं। मैं अपने प्रभाव का उपयोग कर के मंत्रियों के सामने हाथ जोड़ कर कह सकता हूँ कि ‘भैया, ये कर दो’ और काम हो सकता है।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार अलग ही कैटेगरी में आते हैं। यहाँ सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। (ये पूछे जाने पर कि कॉन्ग्रेस फिर भी मुलायम सिंह यादव की सरकार का समर्थन क्यों कर रही है): ये ऐसा नहीं चलेगा। मैं इसका समर्थन नहीं करता। मैं इसे लेकर कुछ करूँगा।
  • (मुलायम और लालू के समर्थन पर): मैं घूम-घूम कर लोगों को नहीं कह सकता कि मुलायम और लालू का क्या करना है। इसमें कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल हैं। वही ये सब निर्णय लेते हैं। ये एक जटिल मुद्दा है। इसे छोड़ कर विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • (अमेठी में कैसे काम करते हैं): मैं NGO के माध्यम से काम करता हूँ और मीडिया की इसमें कोई रूचि नहीं है। भारत 150 करोड़ लोगों का देश है। मीडिया चाहता है कि सब कुछ कल ही चुटकियों में हो जाए। ऐसा नहीं होता है। आप एक महीने बाद अमेठी आएँगे तो पाएँगे कि हर कॉन्ग्रेस नेता एक-दो छात्रों को पढ़ा रहा है। मेरा यही तरीका है।
  • (शिक्षा में आईटी के उपयोग पर): आईटी को लेकर मीडिया में कुछ ज्यादा ही हाइप है। मुझे इसका प्रभाव एक सीमित क्षेत्र में ही दिख रहा। कर्नाटक व तमिलनाडु में अच्छे कार्य हो रहे लेकिन हर जगह ऐसी स्थिति नहीं है।
  • मुझे कोई कहता है कि आप फेल हो रहे हो तो मैं कहता हूँ कि ये ठीक है। उत्तर प्रदेश में कहीं कुछ भी अच्छा हो रहा है तो ये मेरी सफलता है। देश में कोई भी सांसद इतना काम नहीं कर रहा, जितना मैं कर रहा हूँ।
  • दम्भ को लेकर मेरा पहला पाठ मुझे यूके में एक बाथरूम में मिला, जब मैं एक कम्पनी में काम करता था। (एक अजीब कहानी जो समझ नहीं आई।)
  • कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी का सदस्य होकर मैं प्रधानमंत्री को नहीं बोल सकता कि आप क्या करो और क्या नहीं। मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को कुछ करने, न करने नहीं बोल सकता हूँ।
  • लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं विदेश क्यों जाता हूँ। मैं बने-बनाए ढर्रे पर राजनीति करने नहीं बल्कि उसे बदलने आया हूँ। मैं अलग-अलग देशों के लोगों से मिलूँगा, वो हमसे हमारी समस्याओं के बारे में पूछते हैं, उसके समाधान पर बात होती है।

राहुल गाँधी इस इंटरव्यू में काफी कन्फ्यूज नज़र आ रहे हैं। वो खुद को लाचार दिखाने के लिए कहते हैं कि उनके पास फंड्स नहीं है, वो विदेश आना-जाना जारी रखेंगे क्योंकि इससे भारत का फायदा है, पीएम व मंत्रियों को वो कुछ करने, न करने को नहीं बोल सकते। वो ये भी कहते हैं कि हाथ जोड़ के निवेदन कर सकते हैं। लालू-मुलायम के समर्थन पर भी वो कुछ-कुछ बोलते हैं। बाथरूम वाली कहानी क्या थी, ये हमारे समझ में अब तक नहीं आई।

इन्हीं कारणों से कॉन्ग्रेस ने इसे दबा दिया और इसके लिए तरुण तेजपाल का सहारा लिया। विजय सिम्हा ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वो सीनियर एडिटर थे लेकिन रिपोर्ट तो तेजपाल को ही करते थे, इस कारण वो कुछ नहीं कर पाए। एक पत्रकार की मेहनत को एक पार्टी विशेष को खुश करने के लिए दबा दिया गया। हालाँकि खुलासा तो यह भी होना चाहिए कि किन कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल गाँधी को नशेड़ी बताते हुए कहा था कि ये कुछ भी बोलते रहते हैं।

राजस्थान: 2 महीने में छठे पुलिसकर्मी ने की आत्महत्या, घर की टंकी में तैरता मिला कॉन्स्टेबल का शव

राजस्थान में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बीते दो महीने के कम समय में 6 पुलिसकर्मी अपनी जान ले चुके हैं। ताजा मामला सीकर के डोढ थाना क्षेत्र का है। कॉन्स्टेबल योगिन्द्र सिंह का शव रविवार (अगस्त 9, 2020) को पानी के टैंक में तैरता मिला।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्सटेबल योगिन्द्र सिंह अपने रूम से लापता थे। इसके बाद उनका शव पानी के टैंक से मिला। डोढ थाने के एसएचओ अमित कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कॉन्स्टेबल 6-7 महीने से मेडिकल लीव पर थे। उनका डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। रविवार को परिवार वाले उनके कमरे में गए तो वह वहाँ नहीं मिले। इसके बाद उन्हें ढूँढने की कोशिश की गई। अंत में उनका शव घर की टंकी में मिला।

लीव पर जाने से पहले मृतक की पोस्टिंग भनक्रोटा पुलिस थाने में थी। वह पिछले 6 साल से ड्यूटी में थे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस फौरन घटनास्थल पर पहुँची। उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहाँ मृत घोषित कर दिया गया।

परिजनों ने बताया कि योगिन्द्र चार भाई थे। एक भाई बीएसएफ में है जबकि वह खुद राजस्थान पुलिस में थे। परिजन कहते हैं कि योगिन्द्र की सगाई हो चुकी थी और आने वाले समय में उनकी शादी होनी थी।

गौरतलब है कि राजस्थान में पुलिसकर्मियों की मौत का सिलसिला जारी है। लगभग दो महीने के समय में 6 पुलिसकर्मी अपनी जान ले चुके हैं। ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इन घटनाओं को लेकर चिंता है। क्योंकि अभी तक किसी मामले में सुसाइड का पक्का कारण नहीं मालूम चल सका है। पुलिस अलग-अलग कोणों से इन मामलों की तहकीकात कर रही है।

23 मई को सबसे पहले एसएचओ विष्णुदत्त बिश्नोई की आत्महत्या का मामला सामने आया था। उन्होंने अपने सरकारी क्वार्टर में पँखे से फाँसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली थी। घटना की जानकारी होते ही पुलिस खेमे में हड़कंप मच गया था। इस मामले कॉन्ग्रेस नेता व विधायक कृष्णा पूनिया पर भी सवाल उठे थे।

26 मई को श्रीगंगानगर में गार्ड कमांडर जसविंदर सिंह ने ड्यूटी के दौरान सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। वहीं 30 मई को दौसा में हेडकॉन्सटेबल गिरिराजसिंह ने अपने क्वार्टर में फाँसी लगा ली। 31 मई को जयपुर जिला पुलिस के जवान सुरेश यादव ने पुलिस लाइन के वाटर टैंक के पास फंदे पर लटक कर जान देने की कोशिश की। हालाँकि, अन्य जवानों की नजर पड़ने के कारण सुरेश को बचा लिया गया।

इसके बाद 31 मई को ही जैसलमेर के पोकरण में को कॉन्स्टेबल मायाराम मीणा ने होटल में ख़ुदकुशी कर ली और फिर 4 जुलाई को राज्य के टोंक जिले में अदालत परिसर के अंदर कथित तौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

सुशांत केस: ‘आदित्य ठाकरे और संजय राउत से पूछताछ करे CBI, दोनों का हो नार्को टेस्ट’

भाजपा ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे के नार्को टेस्ट की माँग की है। भाजपा ने कहा है कि इन दोनों नेताओं से सीबीआई को पूछताछ करनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा है कि इस मामले में सबूतों के साथ साथ जबरदस्त छेड़छाड़ हो रही है और उन्हें नष्ट किया जा रहा है।

निखिल आनंद ने इस दौरान शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में उसके संपादक संजय राउत द्वारा लिखे लेख की भी आलोचना की और उसे बेतुका बताया। उन्होंने कहा कि इस लेख में सुशांत सिंह राजपूत के फैंस, बिहार सरकार और बिहार पुलिस का अपमान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना के नेता सीबीआई जाँच से भाग रहे हैं और घबरा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि इस मामले में एनसीपी, शिवसेना और कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने पूछा कि केवल आदित्य ठाकरे से ही स्पष्टीकरण क्यों माँगा जा रहा है, क्या राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को इस मामले में चुप्पी नहीं तोड़नी चाहिए? उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर भी गन्दी राजनीति में संलिप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो रही है।

बता दें कि मुंबई पुलिस भी सीबीआई जाँच का विरोध कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में शनिवार (अगस्त 8, 2020) को मुंबई पुलिस ने कहा कि वो पेशेवर और निष्पक्ष तरीके से इस मामले की जाँच कर रही है। बिहार के पटना में दर्ज किए गए केस को मुंबई ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिस पर सुनवाई चल रही है। मुंबई पुलिस के कहना है कि सीबीआई जाँच से पहले इस फैसले का इन्तजार करना चाहिए था।

ज्ञात हो कि ‘सामना’ के लेख में संजय राउत ने कहा था कि अगर ये मामला मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो इससे आसमान नहीं टूट पड़ता। लेकिन इस मामले में राजनीतिक दबाव और रुचि के कारण इसे सीबीआई को दिया गया है। उन्होंने आरोप लगया कि इस मामले की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी और परदे के पीछे कुछ भी हुआ हो सकता है ताकि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रची जाए। उन्होंने मुंबई पुलिस को दुनिया की सर्वोच्च जाँच तंत्र बताते हुए कहा कि वो प्रोफेशनल है और दबाव में नहीं आती।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में शिवसेना की सरकार को गिरा नहीं पा रही है, इसीलिए पार्टी ने समाचार चैनलों के साथ मिल कर ‘गॉसिपिंग’ कर इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके। उन्होंने लिखा कि सुशांत सिंह राजपूत का बिहार से कोई संबंध नहीं था और वो पूरी तरह मुंबईकर बन गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष के दिनों में बिहार उनके साथ नहीं था, उन्हें सारा वैभव मुंबई ने दिया।