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जमशेदपुर: हनुमान मंदिर में बजी रामधुन तो झारखंड सरकार ने पुलिस भेज उतरवा लिए लाउडस्पीकर

5 अगस्त के दिन अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था। वहीं झारखंड के जमशेदपुर में एक हनुमान मंदिर में रामधुन बजाने पर पुलिस ने लाउडस्पीकर ही उतरवा लिया।

बीते दिन पूरे देश में उल्लास का माहौल था। मंदिर में सजावट की गई थी और घरों में दीपक जलाए गए थे। ऐसा ही नज़ारा झारखंड के जमशेदपुर में भी था, मंदिरों में उत्सव का माहौल था और हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था। 

शहर के कदमा पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले शास्त्री नगर स्थित हनुमान मंदिर में एक ऐसा ही धार्मिक आयोजन कराया गया था। मंदिर में लगे लाउडस्पीकर के ज़रिये रामधुन बजाई जा रही थी, जिसे देख कर कदमा पुलिस थाने की पुलिस वहाँ पहुँची। इसके बाद मंदिर में लगे सारे लाउडस्पीकर उतरवा लिए। मंदिर समिति और भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस घटना का विरोध किया। 

पुलिस वालों ने इनकी आपत्ति यह कहते हुए अनसुनी कर दी कि इसकी वजह से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। घटना पर भाजपा नेता देवेन्द्र सिंह ने कहा इससे यह साबित होता है कि झारखंड सरकार श्रीराम विरोधी है। मंदिर के स्पीकर में कैसेट के ज़रिये रामधुन बजाई जा रही थी। जिसे कदमा पुलिस थाने के थानेदार ने उतरवा लिया। 

इस मुद्दे पर थाने के दरोगा का यह भी कहना था कि सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है। इसलिए रामधुन नहीं बजाई जाएगी। इससे माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ती है। जिस पर भाजपा नेता देवेन्द्र सिंह ने कहा “हम झारखंड सरकार के इस असंवैधानिक कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हैं। झारखंड सरकार की बाबरी नीति और औरंगज़ेब मानसिकता को हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।” 

उन्होंने कहा कि इस फैसले की वजह से भारी विरोध का सामना करना पडेगा। अब लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की इस कार्रवाई का विरोध होगा। सरकार अपनी इस अ-लोकतांत्रिक कार्रवाई के लिए अब सावधान हो जाए।

हालाँकि, एक स्थानीय समाचार समूह की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस घटना की जानकारी किसी व्यक्ति ने ट्विटर पर साझा कर दी थी। जिस पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी एमवी राव ने शहर जमशेदपुर एसएसपी को मामले पर कार्रवाई के आदेश दिए।

साथ ही उनका यह भी कहना था कि अगर ऐसी किसी घटना की वजह से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। जिस पुलिसकर्मी ने ऐसे कदम को अंजाम दिया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मामले से जुड़ी जानकारी लेने के लिए हमने जमशेदपुर के कदमा थाना से 6572221670 इस नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन कई बार फोन व्यस्त गया और कई बार कॉल जाने पर पर भी फोन नहीं उठा।

थाने से संपर्क न होने के बाद हमने इस थाने के सब इन्स्पेक्टर के नंबर 9431706490 पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन यह नंबर शुरू से ही बंद था। हम पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर उनका पक्ष जानना चाहते थे लेकिन उनके द्वारा प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इससे पहले जमशेदपुर के कदमा में 6 फल विक्रेताओं पर सिर्फ़ इसलिए केस दर्ज कर दिया गया था क्योंकि वे अपनी दुकानों में ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ का बैनर लगा कर और ‘हिन्दू’ लिख कर फल बेच रहे थे। पुलिस कार्रवाई के बाद पूर्व सीएम रघुबर दास पीड़ित फल विक्रेताओं की दुकान पहुॅंचे थे और उन्होंने आश्वासन दिया था कि इन फल विक्रेताओं के खिलाफ कोई केस नहीं दर्ज होने दिया जाएगा।

हर बात पर बक-बक करने वाले भूमिपूजन पर गूँगे, फिर भी कुछ सेलेब्रिटी थे जिन्होंने कहा- जय श्रीराम

राम मंदिर भूमि पूजन का दिन यानी 5 अगस्त विश्व भर के हिंदुओं के लिए किसी दीवाली से कम नहीं था। कई कलाकारों ने इस अवसर पर अपनी कला से भगवान राम की तस्वीरों को बनाया। उन्हें नमन किया।

उधर, अयोध्या में मौजूद रहे पीएम मोदी समेत सभी धर्माचार्य व नेता भी इस अवसर पर बेहद खुश दिखाई दिए। लेकिन भारतीय सेलेब्रिटीज का लगभग पूरा तबका बिलकुल मौन रहा। हर मुद्दे पर राय रखने वालों ने इस अवसर पर कुछ भी टिप्पणी नहीं की। लेकिन, इस बीच फिर भी, कुछ एक थे जिन्होंने इस मौके पर खुल कर अपनी भावनाओं को प्रकट किया।

क्रिकेटर शिखर धवन ने 5 अगस्त को उत्सव का दिन बताया और उन लोगों को शुभकामनाएँ दीं जो इसमें शामिल थे।

अक्षय कुमार ने इस दिन को ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने लिखा, “दीवाली इस साल जल्दी आ गई। वास्तव में यह एक ऐतिहासिक दिन है। जय सिया राम”

वरुण धवन ने भगवान राम और भगवान हनुमान की फोटो डाली। उन्होंने लिखा, “श्री राम जय राम जय जय राम, हरे राम हरे राम हरे राम, हनुमान जी की तरह जपते जाओ, अपनी सारी बाधाएँ दूर करते जाओ।”

निकितिन धीर ने टाइम्स स्क्वायर पर नजर आई राम मंदिर की तस्वीर को शेयर किया और उसके साथ जय श्री राम लिखा।

क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सभी भारतीयों को भूमि पूजन की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा, “समस्त भारतीयों को श्री राम मंदिर के निर्माण के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई। यह बड़े गर्व की बात है, कि इस स्वर्णिम अवसर के हम साक्षी बन रहे हैं। यह सुअवसर हमारे देश भारत में परस्पर प्रेम,मैत्री, करुणा और उच्चतम मानवीय मूल्यों की अभिवृद्धि करने वाला हो, जय श्री राम।”

स्टार प्लस की महाभारत में भीम का रोल करने वाले सौरव गुर्जर ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएँ दी। उन्होंने एक वीडियो को शेयर किया और कहा, “राम मंदिर हिंदुओं के विश्वास का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि श्रीराम लंबे समय से टेंट में थे और अब वो दिन आ गया है कि उनके लिए भव्य मंदिर निर्माण की शुरूआत हो। आज हिंदुओं के लिए बहुत महत्तवपूर्ण दिन है।

रणवीर शौरी ने भी अपने ट्वीट पर जय श्रीराम-जय श्रीराम लिखा। साथ ही मुगल आक्रमण, लिबरलों का जिक्र करते हुए कहा कि अब दोबारा घर लौटने का समय आ गया है।

ऐसे ही कार्तिक आर्यन ने 5 अगस्त के मौके पर लिखा, “आज ब्रेकफास्ट में सब्र का फल खाया।”

कंगना रनौत के ऑफिशियल टीम अकॉउंट से लिखा गया, “500 साल में जो नहीं हो पाया वो इस साल हुआ। ये एक दिन की तस्वीर नहीं है। ये कई सदियों का पल है।”

टेनिस प्लेयर सायना नेहवाल ने भी एएनआई की खबर को शेयर करते हुए और बॉलीवुड कलाकार रितेश देशमुख ने हैशटैग के साथ, “जय श्री राम” लिखा।

इस बीच कई सोशल मीडिया यूजर्स ने यह सवाल उठाया कि कई कलाकार ऐसे हैं जो अन्य मुद्दों पर बोलने से नहीं चूकते और त्योहारों पर भी बधाइयाँ देते हैं लेकिन कल के दिन जब पूरे विश्व में हिंदू खुशी मना रहे थे तब सभी कलाकार शांत थे।

बता दें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, राम मंदिर का निर्माण साढ़े 3 साल में पूरा होगा। ट्रस्ट जल्द ही फंड जुटाने के लिए प्रोग्राम चलाएगा। अगर आप मंदिर निर्माण में सहयोग देना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रिया को पढ़ सकते हैं

राम मंदिर भूमिपूजन दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में शुमार, पाकिस्तान को लताड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में अयोध्या में हुए राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट हुआ और पूरी दुनिया में भारी संख्या में लोगों ने इसे लाइव देखा। बुधवार (अगस्त 5, 2020) को हुए इस कार्यक्रम को यूके, अमेरिका, कनाडा, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और नेपाल सहित कई देशों में विभिन्न टीवी चैनलों द्वारा इसका लाइव प्रसारण किया गया। राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम का दूरदर्शन ने लाइव प्रसारण किया था।

दूरदर्शन ने कई कैमरों का प्लेसमेंट कर इस कार्यक्रम का भव्य प्रसारण किया। आउटसाइड ब्रॉडकास्टिंग (OB) और डिजिटल सैटेलाइट न्यूज़ गैदरिंग (DSNG) वैन्स के जरिए प्रसारण को और भव्य बनाया गया। यूट्यूब पर भी करोड़ों लोगों ने इस प्रसारण को देखा। यूएसए, यूके, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जपान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, नेपाल, पकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, फिलीपींस में इसे सबसे ज्यादा लोगों ने देखा

दूरदर्शन ने बताया कि भारत में 200 चैनलों ने राम मंदिर भूमिपजन कार्यक्रम का प्रसारण किया। इस कार्यक्रम के सिग्नल को ANI के माध्यम से 1200 स्टेशनों को डिस्ट्रीब्यूट किया गया और APTN के माध्यम से विश्व के 450 मीडिया संस्थानों को दिया गया। एशिया पैसिफिक देशों को दीदी न्यूज़ ने इस कार्यक्रम के फुटेज अलग से उपलब्ध कराए। अयोध्या में हुए इस कार्यक्रम का साक्षी पूरा देश बना और पूरे विश्व में इसका प्रसारण हुआ।

इधर पाकिस्तान को भी भारत ने राम मंदिर भूमिपूजन पर उँगली उठाने के लिए कड़ी लताड़ लगाई है। भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कहा है कि उसे भारत के आंतरिक मुद्दों पर बोलने से बचना चाहिए और सांप्रदायिकता को शह नहीं देना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो देश सीमा पर आतंकवाद को बढ़ावा देता है और अपने ही देश के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते है, उसके द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना अफसोसजनक है, लेकिन ये आश्चर्यजनक नहीं है।

बता दें कि पाकिस्तान ने राम मंदिर भूमिपूजन के विरोध के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी त्रुटिपूर्ण करार दे दिया था। उसने इसे बहुसंख्यकवाद और न्याय पर आस्था की जीत के रूप में प्रदर्शित किया था। पाकिस्तान ने कहा था कि आज के भारत में मजहब और मस्जिदों पर हमले बढ़ रहे हैं। कोरोना की चर्चा करते हुए पाकिस्तान ने कहा था कि भारत में मजहब विशेष को हाशिए पर धकेला जा रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि ये हमारा अंदरूनी मामला है।

उधर पाकिस्‍तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने कहा है कि भारत अब धर्मनिरपेक्ष देश नहीं रहा बल्कि राम नगर में तब्‍दील हो गया है। रशीद हमेशा विवादों में रहने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय के धर्मनिरपेक्ष देश अब दुन‍िया भर में खत्‍म हो गए हैं और भारत अब ‘श्रीराम के हिंदुत्‍व’ के देश में तब्दील हो गया है। उन्होंने राम मंदिर भूमिपूजन की तारीख को अनुच्छेद 370 के 1 वर्ष पूरे होने से जोड़ते हुए कहा कि पीएम मोदी ने जानबूझ कर ऐसा किया।

असम: राम मंदिर का जश्न मना रहे बजरंगदल कार्यकर्ताओं से मुस्लिमों ने की हिंसक झड़प, 25 को बनाया बंधक, कर्फ्यू

असम के सोनितपुर जिले में थेलामारा और ढेकियाजुली पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन समारोह को लेकर दो समुदायों के बीच बुधवार (अगस्त 05, 2020) रात 10 बजे के करीब हुई झड़प में कई लोगों के घायल होने के बाद 5 अगस्त (बुधवार) की रात से ही कर्फ्यू लगा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि जब भूमिपूजन की ख़ुशी में स्थानीय बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने नजदीकी शिव मंदिर तक ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए रैली निकाली। इसी रास्ते के बीच एक मुस्लिम समुदाय की बस्ती भी पड़ती है। यहाँ पर मुस्लिम युवकों, जिनमें कथित तौर पर बांग्लादेशी भी शामिल थे, ने उन्हें धार्मिक नारे लगाने और डीजे बजाने से भी रोका।

यही नहीं, पाकिस्तान के समर्थन में भी नारे लगाए गए और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प शुरू कर दी और उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त भी करना शुरू कर दिया। मुस्लिम युवकों ने बजरंगदल के करीब 25 कार्यकर्ताओं को बंधक भी बना दिया और पुलिस अधिकारियों तक को वहाँ पहुँचना पड़ा।

सोनितपुर में इस झड़प में बजरंग दल कार्यकर्ता, विश्व हिन्दू परिषद और राम सेना के तकरीबन 12 घायल हो गए जबकि, कई बाइक और चौपहिया वाहन जल गए हैं। संघर्ष में सोनितपुर के उपायुक्त (डीसी) मानवेंद्र प्रताप सिंह का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट मानवेन्द्र प्रताप ने कहा कि थलपारा और ढेकियाजुली पुलिस थानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र ‘गोरूडूबा और भारहिंगोरी’ वर्तमान परिस्थितियों के कारण कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

परिस्थितियों को देखते हुए सेना ने जिला प्रशासन के अनुरोध पर बृहस्पतिवार (अगस्त 06, 2020) को अशांत इलाकों में फ्लैग मार्च किया। जिले के थेलामारा और ढेकियाजुली पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है।

सोनितपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नुमल महता ने कहा कि पहले ही दो व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। कल रात से किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं थी और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।

बजरंग दल कार्यकर्ताओं की रैली पर विशेष समुदाय ने जताई आपत्ति

दरअसल, बुधवार को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन समारोह का जश्न मनाने के लिए बाइक रैली का आयोजन करने वाले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर हमला करने के बाद असम में तनाव बढ़ गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “स्थानीय लोगों ने अपने क्षेत्र में जोर से संगीत बजाने वाले लोगों पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी पूछा कि जब लोग COVID​​-19 महामारी से लड़ रहे थे, तो रैली का आयोजन क्यों किया गया? इससे बहस शुरू हुई, जो अंततः भयानक हिंसक झड़प में तब्दील हो गई।”

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुँचे सोनितपुर जिले के उपायुक्त मानवेन्द्र प्रताप सिंह पर भी दोनों समूहों द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झड़प के साम्प्रदायिक टकराव में बदलने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और फिर हवा में गोलीबारी की।

सिंह ने कहा कि वाहनों के जलने पर वहाँ अतिरिक्त पुलिसबल तैनात किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, जिला मजिस्ट्रेट कीर्ति जल्ली ने कहा कि चरमपंथी तत्वों को बांग्लादेश से कछार तक जाने से रोकने और कानून और व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए धारा 144 लगाई गई है।

मौलाना ने दी मंदिर तोड़ने की धमकी, BJP प्रवक्ता ने कहा- यूपी के चौराहों पर सरकारी पोस्टर में चिपक जाओगे

5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ। इसके एक दिन बाद ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के मुखिया ने राम मंदिर पर विवादित बयान दिया। मौलाना साजिद राशिदी ने राम मंदिर को तोड़ने की धमकी दी। राशिदी के मुताबिक़, आने वाले समय में मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनाई जा सकती है। विवादित ज़मीन पर मस्जिद था और वहीं रहेगी। इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी ने राशिदी को जवाब दिया है।

त्रिपाठी ने कहा, “यही भावना रही तो टीवी स्क्रीन से निकल कर कभी भी यूपी के चौराहों पर सरकारी पोस्टरों में चिपक जाओगे।” भाजपा प्रवक्ता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा,

“यह 500 साल पुराना भारत नहीं है। यह मोदी जी का नया भारत है, UP, योगीजी, सीएए प्रदर्शन, पोस्टर, कुर्की, सरकारी वसूली यह सब याद है ना। वही जिससे बचने के लिए गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट तक दौड़े थे। यही भावना रही तो टीवी स्क्रीन से निकल कर कभी भी यूपी के चौराहों पर सरकारी पोस्टरों में चिपक जाओगे।”  

मौलाना साजिद रशिदी ने राम मंदिर पर अपने बयान में कहा था,

“एक मस्जिद हमेशा एक मस्जिद ही रहती है। यह कुछ और बनाने के लिए तोड़ी नहीं जा सकती है। हम ऐसा मानते हैं और भरोसा करते हैं कि वहाँ मस्जिद थी और मस्जिद ही रहेगी। वह मस्जिद एक मंदिर को तोड़ कर नहीं बनाई गई थी, लेकिन अब ऐसा हो सकता है कि कभी मंदिर तोड़ कर उस जगह पर मस्जिद बनाई जाए। प्रधानमंत्री ने अयोध्या के मंदिर निर्माण कार्यक्रम में शामिल होकर संविधान की अवहेलना की है। उस ज़मीन पर बाबरी मस्जिद थी जिसे हिटलर की फ़ौज से मिलते -जुलते लोगों ने तोड़ा था। जो लोग इंसाफ में भरोसा रखते हैं वह किसी न किसी दिन उस मंदिर को मस्जिद में तब्दील कर देंगे।” 

लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लीमीन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर जहर उगला था। ओवैसी ने कहा था कि बाबरी मस्जिद थी और वही रहेगी। बुधवार की सुबह ट्वीट करते हुए ओवैसी ने कहा “बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी इंशाअल्लाह #BabriZindaHai।”

इसके अलावा ओवैसी ने यह भी कहा प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान की शपथ का उल्लंघन किया है। हिंदुत्व की कामयाबी धर्मनिरपेक्षता की हार है। यह सिर्फ और सिर्फ हिंदू राष्ट्र की नींव रखी गई है। जहाँ लोगों ने नमाज़ पढ़ी उसे सर्वोच्च न्यायालय में झूठ बोल कर तबाह किया गया। ओवैसी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भूमि पूजन को सिम्बल ऑफ़ इंडिया बताया, जबकि देश का सिम्बल कोई भी धार्मिक जगह नहीं हो सकती है। 

4 अगस्त के दिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से भी राम मंदिर मुद्दे पर बयान जारी किया गया था। बोर्ड द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था, “बाबरी हमेशा एक मस्जिद ही रहेगी। हागिया सोफ़िया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी और शर्मनाक तरीके से ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया। बहुसंख्यक समाज के तुष्टिकरण वाले इस निर्णय से मस्जिद का दर्जा नहीं बदल सकता। दिल तोड़ने की ज़रूरत नहीं है, हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते हैं।”

भूमिपूजन पर इस्लाम छोड़ 250 लोग बने हिंदू, कहा- मुगलों ने डरा-धमकाकर पूर्वजों को बनाया था मुस्लिम

5 अगस्त 2020 यानी बुधवार को जब अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था तो राजस्थान के करीब 50 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की। मामला बाड़मेर जिले पायला कल्ला पंचायत के मोतीसारा गाँव की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन परिवारों के करीब 250 लोगों ने बुधवार को हवन-पूजन किया। पुरुषों ने जनेऊ धारण कर हिंदू धर्म अपनाया। इन लोगों ने कहा है कि ऐसा करने के लिए उन पर किसी ने दबाव नहीं बनाया था।

हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम परिवार के बुजुर्गों का कहना है कि उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्हें जैसे ही इतिहास का ज्ञान हुआ इसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय स्वेच्छा से लिया गया है।

हिंदू धर्म स्वीकार करने वाले सुभनराम ने मीडिया वालों से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी। सुभनराम ने कहा मुग़ल शासन में मुस्लिमों ने हमारे पूर्वजों (हिंदुओं) को डरा धमका कर उनका धर्म परिवर्तन करा लिया था। 

सुभनराम ने कहा सच यही है कि हम हिंदू धर्म से संबंध रखते थे। शायद इसलिए मुस्लिम हमसे दूरी बना कर रखते हैं। हमने अपने इतिहास के बारे में जानना शुरू किया और तब हमें पता चला कि हम असल में हिंदू हैं। हमें आभास हुआ कि अभी तक हम कितने भ्रम में जी रहे थे। नतीजतन हमें अपने धर्म में वापस लौट आना चाहिए। इतना कुछ पता चलने और समझ आने के बाद हमने अपने धर्म में वापस आने का फैसला लिया।  

इसके बाद उन लोगों के घर पर हवन हुआ और परिवार के लगभग 250 सदस्यों ने हिंदू धर्म अपना लिया। हरजीराम ने बताया कि ये परिवार कंचन ढाढ़ी जाति से संबंध रखते हैं। इन परिवारों के सदस्य पिछले कई सालों से हिंदू धर्म के रीति-रिवाज़ों का पालन कर रहे थे।

विंजाराम के मुताबिक़ परिवार का कोई भी व्यक्ति मुस्लिम रीति रिवाज़ों का पालन कभी नहीं करता था। राम मंदिर के शिलान्यास समारोह में भी हम सभी ने पूजा-पाठ का आयोजन कराया था और हमने पूरी स्वेच्छा से हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।  

गाँव में लगभग 50 परिवार ढाढ़ी जाति के हैं जिसमें से लगभग एक दर्जन घरों के आस-पास मंदिर बने हुए हैं। इतना ही नहीं परिवारों में ज़्यादातर लोगों के नाम भी हिंदू धर्म से ही प्रेरित हैं। परिवार के बुजुर्गों का दावा है कि औरंगज़ेब के दौर में उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्होंने मुग़ल शासक के डर से हिंदू धर्म अपनाया। लेकिन अब उनके परिवार के शिक्षित लोगों को इस बात का ज्ञान हुआ, जिसके बाद उन्होंने वापस हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। 

कोरोना महामारी के चलते परिवार वालों ने राम मंदिर शिलान्यास के मौके पर सरपंच को सूचित करके खुद हवन करवाया। हरुराम ने बताया कि राम मंदिर के शिलान्यास पर उन्हें बहुत खुशी हुई। इसके लिए उन्होंने अपने घर में दीपक जला कर हवन भी करवाया। 

वहीं गाँव के पूर्व सरपंच प्रभुराम कलबी ने कहा कि ढाढ़ी जाति के सदस्यों पर ऐसा करने के लिए किसी ने दबाव नहीं बनाया। उन्होंने यह सब अपनी मर्ज़ी से किया है। संविधान भी यही कहता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ धर्म अपना सकता है और इन परिवारों ने वही किया। उनके इस निर्णय से किसी को कोई आपत्ति नहीं है। गाँव का हर व्यक्ति उनके इस फैसले का सम्मान करता है।   

उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर महाराष्ट्र पुलिस ने किया ट्विटर यूजर को गिरफ्तार, शिवसेना नेता ने की थी शिकायत

महाराष्ट्र पुलिस ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर सुनैना होले नाम की एक ट्विटर यूजर को गिरफ्तार कर लिया है। सुनैना के खिलाफ़ शिवसेना की यूथ विंग के नेता रोहन चव्हाण ने नालासोपारा के तुलिंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

अपनी शिकायत में चव्हाण ने कहा था कि सुनैना ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया। शिकायत में सुनैना के रियल अकॉउंट के अलावा @NidarNaari अकाउंट का उल्लेख किया गया। उन्होंने बताया कि सुनैना बैकअप अकॉउंट के रूप में इसे चलाती हैं।

चव्हाण ने शिकायत में कहा कि सुनैना ने अपने बेहद आक्रामक पोस्ट के जरिए शिवसेना प्रमुख और उनके बेटे की छवि को सोशल मीडिया पर बिगाड़ने का प्रयास किया।

उन्होंने पुलिस से सुनैना के ख़िलाफ़ धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल), धारा 499 (मानहानि), धारा 506 (आपराधिक धमकी) और आईटी एक्ट 2000 की धारा 66ए समेत अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत 48 घंटों में कार्रवाई करने की माँग की।

अब सोशल मीडिया के कई यूजर्स का कहना है कि पुलिस ने सुनैना को गिरफ्तार कर लिया है और उसे आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। ऑपइंडिया ने इस मामले में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस से संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन वहाँ बात नहीं हो पाई। जैसे ही इस संबंध में कोई सूचना आएगी हम यह खबर अपडेट करेंगे।

फिलहाल, सोशल मीडिया पर यूजर्स सुनैना की गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ आवाज बुलंद कर रहे हैं। शिवसेना के पूर्व कार्यकर्ता रमेश सोलंकी लिखते हैं, “गणपति बप्पा का अपमान करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन यदि आपने महाविकास अघाड़ी नेताओं के ख़िलाफ़ कुछ भी बोला तो आपको हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

भाजपा नेता किरीट सोमैय्या ने मामले की जानकारी होते ही सुनैना को मदद पेशकश की। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि अगर मुंबई पुलिस उनके ख़िलाफ़ कोई एक्शन लेती है, तो वह उन्हें संपर्क कर सकती हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं कि शिवसेना ने ट्विटर पर कोई पोस्ट करने पर नागरिकों के ख़िलाफ़ एक्शन लिया हो। अप्रैल 2020 में शिवसेना ने सुनैना होले पर एक कार्रवाई और की थी। इसके अलावा उस दौरान शेफाली वैद्य के ख़िलाफ़ भी एक्शन लिया गया था।

इन दोनों की गलती ये थी कि इन्होंने तबलीगी जमात पर सवाल उठा दिया था। इन दोनों के अतिरिक्त एक डॉक्टर पर भी शिकंजा कसा गया था। जबकि 2019 में शिवसैनिकों ने एक आदमी को उद्धव ठाकरे के ख़िलाफ़ लिखने पर गंजा कर दिया था।

POK स्थित शारदा पीठ की मिट्टी भी अयोध्या भूमिपूजन के लिए पहुँची: हनुमान की जन्मस्थली के दम्पति का कमाल

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में पूरे देश भर के कई तीर्थ स्थलों से मिट्टी लाइ गई। सम्पूर्ण भारत में कई तीर्थ स्थलों से जल भी यहाँ लाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति वाले इस भूमिपूजन कार्यक्रम में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) स्थित शारदा पीठ से भी पवित्र मिट्टी मँगाई गई। भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण ये आसान नहीं रहा, क्योंकि POK में किसी भारतीय की एंट्री पर प्रतिबन्ध है।

इन सब मुश्किलों के बावजूद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) स्थित शारदा पीठ से मिट्टी लाने का काम एक भारतीय दम्पति ने ही पूरा किया। उसने चीन के पासपोर्ट पर ये कमाल कर दिखाया और हॉन्गकॉन्ग के रास्ते वहाँ की मिट्टी लेकर यहाँ पहुँचा। ये दम्पति मूल रूप से कर्नाटक का निवासी है, जहाँ रामभक्त हनुमान जी का भी जन्म हुआ था। इस दम्पति की तुलना लोग हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाने से कर रहे हैं।

कर्नाटक के वेंकटेश रमन और उनकी पत्‍नी ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (POK) में स्थित शारदा पीठ से मिट्टी लाकर राम मंदिर भूमिपूजन में समर्पित किया। ये दम्पति चीन में ही रहता है। ‘सेव शारदा पीठ कमिटी’ ने उनसे संपर्क किया था। चूँकि POK में भारतीय नागरिकों के घुसने पर पाबन्दी लगी हुई है, इसीलिए इन दोनों ने चीन के पासपोर्ट पर वहाँ जाकर मिट्टी लाए।

दोनों ने हॉन्गकॉन्ग के रास्ते शारदा पीठ का रास्ता तय किया। वे सीधे POK की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद पहुँचे, जहाँ से वो शारदा पीठ के लिए रवाना हुए। फिर उन्होंने वहाँ से न सिर्फ प्रसाद लिया बल्कि पवित्र मिट्टी भी ली। उन्होंने ‘सेव शारदा पीठ कमिटी’ के सदस्य अंजना शर्मा को मिट्टी सौंपी। उन्होंने बताया कि वे शारदा पीठ के मुख्य पुजारी रवींद्र पंडित के कहने पर अयोध्या पहुँचे हैं।

इतना ही नहीं, ये दम्पति अपने साथ अंजना पर्वत का जल लेकर भी पहुँचा। कर्नाटक स्थित अंजना पर्वत ही हनुमान जी की जन्मस्थली है। उन्होंने बताया कि गोकर्ण से भी पवित्र जल एवं मिट्टी मँगाई गई है। श्रीलंका और नेपाल से जल एवं मिट्टी लाकर यहाँ उपयोग किया गया। बता दें कि शारदा पीठ को हिन्दुओं, खासकर कश्मीरी पंडितों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। नीलम नदी के किनारे स्थित ये स्थल उरी से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

अयोध्या मामले की तरह ही POK स्थित शारदा पीठ का मामला भी कई दशकों से विवादों में है। रवींद्र पंडित का कहना है कि अगर अयोध्या मामला हल हो सकता है तो इसका भी समाधान हो सकता है। उन्होंने करतारपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में यहाँ भी कोई समाधान निकलेगा। कश्मीरी साधु स्वामी नन्दलाल ने वहीं अपना आश्रम बनाया था, लेकिन विभाजन के बाद उन्हें जम्मू कश्मीर के टिक्कर में बसना पड़ा।

IANS में कार्यरत नवनीत मिश्रा ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए POK की मिट्टी भी मँगाने की बात चली। वहाँ 500 साल पुराना प्रसिद्ध शारदा पीठ है। श्रीनगर से करीब 100 KM दूर इस पीठ के पुजारी की भी मिट्टी भेजने की इच्छा थी। लेकिन, संघ परिवार के सामने सवाल था कि मिट्टी मँगाई कैसे जाए? वहाँ तो कोई भारतीय जा नहीं सकता? उन्होंने इस प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुए लिखा:

“संघ, VHP, ट्रस्ट ने देश में संचालित शारदा पीठ फाउंडेशन से चर्चा की। फाउंडेशन के अंजना शर्मा ने फिर कमान सँभाली। उन्होंने चेन्नई के मूल निवासी और चीन में बस चुके वेंकटेश रमन से बात की। वेंकटेश रमन इससे पहले कांची और श्रृंगेर मठ को शारदा पीठ की मिट्टी दे चुके थे। POK में चीनी नागरिकों को जाने की छूट के कारण वेंकटेश आसानी से वहाँ जा सकते थे। वेंकटेश ने अंजना शर्मा से कहा- रामकाज का मौका मिलने से बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। वह चीन से हॉन्गकॉन्ग पहुँचे और फिर वहाँ से इस्लामाबाद होते हुए POK की राजधानी मुजफ्फराबाद गए। फिर शारदा पीठ पहुँचे और मंदिर से मिट्टी, प्रसाद लेकर वापस हॉन्गकॉन्ग लौटे। यहाँ से फिर दिल्ली पहुँचे और अंजना शर्मा से भेंटकर उन्हें सब सौंप दिया।”

नवनीत मिश्रा ने जानकारी दी कि अंजना शर्मा शारदा पीठ की पवित्र मिट्टी लेकर अयोध्या पहुँचे और ट्रस्ट को मंदिर की नींव में डालने के लिए उपलब्ध कराया। उन्होंने आशावान होकर कहा कि जब राम मंदिर की मिट्टी लाने के लिए इतना बेहतरीन ऑपरेशन चल सकता है तो फिर लगता है कि मोदी सरकार में एक न एक दिन पीओके भी आएगा। बता दें कि बुधवार (अगस्त 5, 2020) को राम मंदिर का भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।

शमी की बीवी हसीन जहाँ ने श्रीराम की तस्वीर के साथ दी भूमिपूजन की बधाई: कट्टरपंथियों ने की गालियों की बौछार, रेप की धमकी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमि पूजन के बाद सोशल मीडिया पर बधाइयों की भरमार लग गई। हर ओर से राम भक्तों ने अपनी खुशी जाहिर की। इसी बीच भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहाँ ने भी हिंदू समाज के समस्त लोगों को मुबारकबाद दी।

अपने बोल्ड फोटोशूट और डांस वीडियोज के कारण सुर्खियों में रहने वाली हसीन जहाँ ने जो पोस्टर शेयर किया, उसमें श्रीराम और राम मंदिर की तस्वीर बनी हुई है। साथ ही उसपर लिखा है, “अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन के लिए समस्त हिंदू समाज को दिली मुबारकबाद। ढेर सारी शुभकामनाएँ। हसीन जहाँ।”

अब इस पोस्टर पर कई लोगों की प्रतिक्रियाएँ आई हैं। अधिकांश हिंदुओं ने इस बधाई को स्वीकारते हुए बदले में इस फोटो पर जय श्री राम लिखा है। लेकिन वहीं कुछ कट्टरपंथी ऐसे भी हैं जिन्होंने हसीन जहाँ के लिए बेहद घिनौने शब्दों का प्रयोग किया।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार तो उन्हें रेप और जान से मारने की धमकियाँ भी दी गईं। इसके अलावा कुछ समुदाय विशेष के लोगों ने हसीन जहाँ पर निराशा जताई और कुछ ने गाली ने देकर पूछा कि क्या बस यही रह गया था।

एक यूजर ने उन्हें डूब कर मरने की सलाह दी और एक सलमान सिद्दकी नाम के यूजर ने फैज अहमद फैज की उस विवादित कविता को ही लिख दिया जिसमें हर जगह से बुत उठवाने की बात है। सलमान लिखता है, “जब अर्जे खुदा के काबे से सब बुत उठवाये जाएँगे, बस नाम रहेगा अल्लाह का, लाजिम है कि हम भी देखेंगे”

कुछ अन्य यूजर भी उनकी पोस्ट पर कमेंट करते दिखे। एक साहिब नाम का युवक कहता है कि उसे राम मंदिर मामले पर बोलने वालों में सिर्फ़ एक आदमी पसंद आया है- वो है ओवैसी। क्योंकि ओवैसी ही एक ऐसा शख्स है जिसने छाती ठोंक कर कहा कि उस जगह बाबरी थी और बाबरी ही रहेगी।

एक ने हसीन को गाली देते हुए लिखा कि अल्लाह उसे ऐसा सबक सिखाएगा कि वह हमेशा उसे याद रखेगी। एक ने उनकी तुलना वेश्या से की और उन्हें वेश्या की औलाद बताया। इसी तरह एक ने शमी की पत्नी को हिंदू बनने की सलाह दी और उनके पारिवारिक जीवन पर टिप्पणी करते हुए उन्हें कहा कि वे वैसे भी अपने बच्चों और पति को छोड़ चुकी हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी हसीन जहाँ को कुर्बानी वाले उनके एक पोस्ट पर कट्टरपंथियों की प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी थी। एक ने उन्हें इस्लाम के मायने न समझने वाली कहते हुए लिखा था कि वह अपना जिस्म दिखाकर पैसे कमाती हैं। इसी तरह samhitler5892 वाली आईडी से हसीन जहाँ के लिए लिखा गया था, “तेरा रेप करूँगा कहीं भी मिल जाओ….तेरा गैंगरेप करूँगा।”

पालघर मॉब लिंचिंग के कई महीने हो गए, पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की: SC ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वह अप्रैल में पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग मामले में आरोपित पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका की जाँच और कार्रवाई की स्थिति के बारे में अवगत कराए।

जस्टिस अशोक भूषण और आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने राज्य सरकार से संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष दायर की गई चार्जशीट को पेश करने का आदेश देते हुए कहा है कि वो इसकी जाँच करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि इस बात पर अदालत को विचार करना है कि क्या इस मामले में कोई पुलिसकर्मी शामिल था या क्या कर्तव्य का पालन करने में कोई ऐसी लापरवाही हुई है, जिसके कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए? पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई को तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। इस घटना में तीन लोग मारे गए थे।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई करते हुए पूछा है कि पालघर केस में कई महीने हो गए हैं, आपने पुलिसकर्मियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की? आप इस मामले में क्या कर रहे हैं?

इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह देखना चाहिए कि इस मामले में जाँच कैसे की गई है। सीबीआई जाँच तभी की जाए, जब कोर्ट राज्य सरकार की जाँच से संतुष्ट न हो।

पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग मामले की जाँच सीबीआई या एनआईए को सौंपने का महाराष्ट्र पुलिस विरोध कर चुकी है। महाराष्ट्र पुलिस का कहना था कि अभी जाँच जारी है और वह जाँच की डिटेल सार्वजनिक नहीं कर सकती।

पालघर मॉब लिंचिंग मामले की जाँच सीबीआई या एनआईए से कराने की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हुई थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

पालघर में पुलिस के ही सामने तीन साधुओं की भीड़ ने की थी हत्या

यह घटना राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान 16 अप्रैल की रात की है, जब मुंबई के कांदिवली के रहने वाले 2 साधू और एक ड्राइवर लॉकडाउन के बीच अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गुजरात के सूरत जा रहे थे। रास्ते में पालघर के कासा पुलिस स्टेशन के आदिवासी इलाके में गडचिंचले गाँव में लोगों ने साधुओं और उनके ड्राइवर को बुरी तरह पीटा और पुलिस तमाशा देखती रही। मॉब लिंचिंग में तीनों की मौत हो गई।