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‘ये आँकड़े हैरान करने वाले हैं’: PM मोदी का समर्थन देख इंडिया टुडे के सर्वे से राजदीप सरदेसाई हुए हक्के-बक्के

शुक्रवार का दिन ‘वरिष्ठ जर्नलिस्ट’ राजदीप सरदेसाई के लिए बेहद मुश्किल रहा होगा। उन्होंने उसी चैनल के आँकड़ों को गुमराह करने वाला और अविश्वसनीय बताया जिसमें खुद काम करते हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार को लेकर किए गए एक सर्वे के आँकड़ों पर उन्हें यह कारनाम करना पड़ा। सर्वे में भाग लेने वाले लोगों ने मोदी सरकार के काम करने के तरीकों को उत्कृष्ट और पूर्ववर्ती UPA सरकार से कहीं अधिक बेहतर बताया था।

2019 के लोकसभा चुनाव के एक साल बाद, समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ पर ‘मूड ऑफ द नेशन’ पोल शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को प्रकाशित किया गया। कोरोना महामारी के बाद किए गए इस बेहद महत्वपूर्ण सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन से जनता बेहद संतुष्ट है।

क्या था सर्वे?

इंडिया टुडे द्वारा कराए गए ‘मूड ऑफ़ द नेशन पोल’ में भाग लेने वाले लगभग दो-तिहाई लोग मोदी सरकार के आर्थिक संकट से निपटने को लेकर किए गए कार्यों से खुश थे। कम से कम 71% नागरिकों ने मोदी सरकार को कोरोना महामारी के कारण होने वाले आर्थिक संकट से निपटने के लिए ‘शानदार’ या ‘अच्छा’ माना।

चित्र साभार- इंडिया टुडे

इंडिया टुडे के सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि भाग लेने वाले कुल लोगों में से 43% ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछली मनमोहन सरकार की तुलना में आर्थिक संकट को बेहतर तरीके से सँभाला है। सर्वेक्षण से पता चला कि कम से कम 88% प्रतिभागियों ने कहा कि आर्थिक संकट से निपटने में पिछली सरकार की तुलना में मोदी सरकार बेहतर या बराबर थी।

चित्र साभार- इंडिया टुडे

पीएम मोदी को मिली ज्यादा रेटिंग तो बौखलाए राजदीप सरदेसाई

जैसे ही इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कंवल ने अपने शो में सर्वे के इन आँकड़ों को प्रकाशित किया, राजदीप सरदेसाई के चेहरे पर मायूसी छा गई। राजदीप के लिए मोदी सरकार को लेकर जनता की इस प्रतिक्रिया पर विश्वास करना बेहद मुश्किल था। खासकर, ऐसे समय में, जब लगभग पूरा विश्व ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है, अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी सरकार को लेकर राजदीप कुछ और ही नतीजों की उम्मीद में थे, लेकिन परिणाम एकदम विपरीत रहे।

सर्वेक्षण पर टिप्पणी करते हुए, राजदीप सरदेसाई ने कहा कि वह सर्वेक्षण से ‘हैरान’ हैं। उन्होंने कहा कि वह चीन के साथ हाल ही में हुए झड़पों के मोदी सरकार पर इंडिया टुडे के सर्वेक्षण पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी सरकार को लेकर अनुकूल परिणाम दिखाने वाले पर नहीं।

अपने ही समाचार चैनल द्वारा किए गए सर्वे के नतीजों से हतप्रभ और निराश राजदीप ने कहा, “मैं कुछ हद तक चीन के नंबरों को समझ सकता हूँ, लेकिन मैं इन नंबरों को भयावह मानता हूँ। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर आम आदमी को हमलावर होना चाहिए। यदि 24% लोग इसे उत्कृष्ट, और 48% अच्छा कहते हैं, तो यह कुल 72% है! चलो इसे समझने की कोशिश करते हैं!”

क्या रहा इंडिया टुडे के सर्वे का नतीजा

सर्वेक्षण में शामिल 78% लोगों ने पीएम मोदी के प्रदर्शन को उत्कृष्ट या अच्छा पाया। पीएम मोदी के समर्थन में यह रेटिंग वर्तमान में सबसे अधिक है। इंडिया टुडे का सर्वेक्षण ऐसे समय में आया है जब भारत कोरोना वायरस महामारी, आर्थिक संकट के साथ-साथ चीन के साथ बढ़ते सीमा तनाव के कारण कई संकटों से मुकाबिल है।

‘उन्होंने हमें बचा लिया’: कप्तान दीपक साठे की समझदारी की वजह से नहीं लगी विमान में आग, IAF में रह चुके थे विंग कमांडर

केरल में कोझिकोड एयरपोर्ट पर एअर इंडिया का विमान (AXB1344, B737) रनवे पर फिसल गया। रनवे पर विमान के फिसलने के बाद विमान क्रैश हो गया और दो हिस्सों में टूट गया। शुक्रवार (7 अगस्त, 2020) हादसे में 18 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में मुख्य पायलट कैप्टन दीपक साठे और उनके सह-पायलट अखिलेश कुमार भी शामिल हैं।

कप्तान दीपक वसंत साठे भारतीय वायुसेना में पहले विंग कमांडर रह चुके थे। शुक्रवार के विमान दुर्घटना में जीवित बचे लोगों ने कहा कि यह कैप्टन साठे ने आखिरी समय तक विमान को बचाने की पुरजोर कोशिश की। पायलट के समझदारी के कारण हादसे के बाद विमान में आग नहीं लगा। जिसकी वजह से वे जीवित बच सके।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही कैप्टन साठे को पता चला कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा, उन्होंने विमान क्रैश होने से ठीक पहले इंजन को बंद कर दिया। जिससे उनके यात्रियों और केबिन क्रू की जान बच गई। प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि करिपुर टेबलटॉप एयरपोर्ट पर विमान लैंडिंग करते समय रनवे से फिसलकर खाई में गिर गया। इस हादसे में विमान को दो टुकड़े हो गए हैं।

इस भयानक हादसे से बचे लोगों ने बताया कि कि बहादुर पायलटों और स्थानीय निवासियों की वजह से विमान में सवार यात्री जिंदा बच सके है। हादसे का पता चलते ही राहत और बचाव के लिए तेज बारिश के बीच, स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। और हादसे में घायल लोगों को तुरंत विमान में लगी थोड़ी आग और धुएँ के बावजूद बचाना शुरू किया।

इस हादसे में सुरक्षित बाहर निकलने के बाद वी इब्राहिम नाम के यात्री ने बताया, “मूसलाधार वर्षा हो रही थी। पायलट ने मौसम खराब होने की बात कहते हुए विमान उतारने से पहले चेतावनी दी थी। उन्होंने दो बार सुरक्षित लैंडिंग की कोशिश की लेकिन नियंत्रण खो दिया। विमान रनवे से फिसल गया और उसके दो टुकड़े हो गए। इस भयानक हादसे में जिनकी जान बच गई है, वे बहुत ही भाग्यशाली है।

कैप्टन दीपक साठे भारत के पूर्व वायु सेना के पायलट थे। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र थे। उन्होंने जूलियट स्क्वाड्रन से एनडीए पुणे के 58 वें पाठ्यक्रम में पहला स्थान हासिल किया। इसके अलावा 1981 में AFA उन्होंने ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ जीता था।

दिलचस्प बात है कि कैप्टन दीपक साठे ने मिग-17 स्क्वाड्रन (गोल्डन एरो) के साथ भी काम किया है, जिसकी सिफारिश हाल ही में राफेल फाइटर जेट्स के साथ की गई थी। कैप्टन साठे जून 1981 में वायु सेना में शामिल हुए थे और जून 2003 में भारतीय वायुसेना को निर्धारित समय से पहले छोड़ दिया था।

कैप्टन डीवी साठे एक अनुभवी पायलट थे। वह भारतीय वायुसेना में भी एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट थे। उन्होंने बोइंग 737 उड़ान भरने के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस में जाने से पहले एयर इंडिया के लिए एयरबस 310 को उड़ाया था।

रिटायर्ड एयर टेस्ट मार्शल मनमोहन बहादुर ने कहा, यह दुख की बात है। साठे मेरे साथ एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग इस्टैब्लिशमेंट (IAF की फ्लाइट टेस्टिंग इस्टैब्लिशमेंट) में हथियारों के कमांडर थे। उन्होंने आगे कहा- “RIP Tester.”, मनमोहन बहादुर ने बताया कि टेस्ट पायलट के कॉल साइन के तहत नाम के आगे ‘टेस्टर’ लगाया जाता है।

उनके सह-पायलट कैप्टन अखिलेश कुमार ने पिछले साल शादी की थी। इस वक्त दोनों पायलटों के शव कोझिकोड के MIMS अस्पताल में रखे गए हैं।

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने बताया बोइंग 737 दुबई से कालीकट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वंदे भारत मिशन के तहत आ रहा था। विमान में 190 लोग सवार थे। यात्रियों में 10 बच्चे भी शामिल थे। भारी बारिश के कारण रनवे पर उतरने के बाद विमान फिसल गया और घाटी में गिर गया। बोर्ड पर मौजूद 190 लोगों में से 123 लोग घायल हुए हैं, और 20 लोग गंभीर स्थिति में हैं और कुछ लोगों की रीढ़ की हड्डी में भी चोट है।

अच्छी बेगम बनो, जिसने मुस्लिम बनाया उसके पास जाओ: 14 साल की ईसाई बच्ची के आँसू से भी नहीं पसीजा लाहौर हाईकोर्ट

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय का उत्पीड़न लगातार जारी है। इस बार अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले इस अत्याचार का ज़िम्मेदार कोई और नहीं बल्कि वहाँ की अदालत है। लाहौर हाई कोर्ट ने एक हैरान करने वाले फैसले में ईसाई नाबालिग लड़की को उस व्यक्ति के पास लौटने का हुक्म दिया है जिसने उसे अगवा किया। अपहरणकर्ता ने जबरन धर्मांतरण कर उससे निकाह कर लिया था।

14 साल की इस लड़की का नाम है मारिया शहबाज़ (Maria Shahbaz)। इस साल अप्रैल में मोहम्मद नक्श और उसके साथियों ने फैसलाबाद में उसे अगवा कर लिया था। काम पर जाते वक्त उसे अगवा किया गया था। इस मामले में फैसलाबाद की अदालत ने कहा था कि लड़की को पुनर्वास केंद्र भेजा जाए। साथ ही उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। लेकिन लाहौर की हाईकोर्ट ने इस आदेश को ही बदल दिया।   

लाहौर हाई कोर्ट द्वारा जारी आदेश के मुताबिक़ लड़की को पुनर्वास केंद्र नहीं भेजा जाएगा। उसे उसी मोहम्मद नक्श के पास वापस जाना पड़ेगा जिसने उसे अगवा किया था। WION में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि लड़की ने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म कबूल किया। उसने अपनी मर्ज़ी से ही अपहरण करने वाले व्यक्ति से शादी भी की। इसलिए उसे एक ‘अच्छी बेगम’ होने के नाते अपने पति के साथ रहना चाहिए।

कोर्ट ने उन दस्तावेज़ों को देखने और स्वीकार करने से साफ़ मना कर दिया था जिनमें यह साफ़ तौर पर लिखा था कि जब लड़की का अपहरण हुआ तब वह नाबालिग थी। ख़बरों के अनुसार, जब अदालत ने मोहम्मद नक्श के हक़ में फैसला सुनाया तब लड़की की आँखों में आँसू थे। रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान में हर साल लगभग 1000 लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है। इसके बाद उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ उनसे निकाह रचाया जाता है।   

इस मामले के तीन चश्मदीदों (परवेज़ मसीह, यूनुस मसीह और नईम मसीह) ने भी अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि मारिया का अपहरण किया गया था। उसने विरोध भी किया था लेकिन कुछ लोग उसे उठा कर गाड़ी में ले गए। उन सभी लोगों के पास हथियार भी थे, इसलिए कोई मारिया की मदद नहीं कर पाया। अगवा करने वालों ने लोगों में डर कायम करने के लिए हवाई गोलीबारी भी की थी। 

पीड़िता की माँ ने इस बारे में इंटरनेश्नल क्रिश्चयन कंसर्न से बातचीत भी की थी। उन्होंने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म होने की आशंका जताई थी। इसके अलावा उसके जबरन धर्म परिवर्तन पर दुःख जताया था। उनका कहना था कि जिस तरह के हालात हैं उन्हें देख कर हत्या का डर भी लगता है।

National Database and Registration Authority (NADRA) द्वारा जारी किए गए प्रमाण-पत्र के अनुसार मारिया की उम्र 18 साल से कम है। लेकिन मोहम्मद नक्श ने शादी के दस्तावेज़ों में उसे 18 से ज़्यादा का दिखाया है। इसके अलावा लड़की को भी अपना पक्ष सही से नहीं रखने दिया गया था।   

यह पहली ऐसी घटना नहीं है जब पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों के साथ अत्याचार किया गया हो। हुमा यूनुस नाम की लड़की का पिछले साल 10 अक्टूबर को अपहरण किया गया था। लड़की को आरोपित अब्दुल जब्बार नाम के युवक ने कराची स्थित उसके घर से उठा लिया गया था। कुछ समय बाद ख़बर आई थी कि शारीरिक रूप से शोषण किए जाने के बाद वह गर्भवती हो गई थी। आरोपित ने पीड़ित को एक कमरे में बंद करके रखा था। यहाँ तक कि उसे अपने माता-पिता से भी नहीं मिलने देता था।  

सुशांत सिंह मामले में क्या छिपा रही मुंबई पुलिस, रिया ने किसको दिए पैसे: बिहारियों के लिए इसके मायने बता रहे अजीत भारती

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को आत्महत्या कहना इस घटना का बेहद सतही आँकलन कहा जा सकता है। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, इसमें हर दिन और हर पल नया खुलासा हो रहा है। इस केस में अभी तक मौन रहने का कारण यह भी था कि महज कॉन्सपिरेसी थ्योरी के आधार पर बॉलीवुड में व्याप्त नेपोटिज्म, माफियाराज आदि निष्कर्ष पर पहुँचना भी जायज नहीं था।

इस प्रकरण में अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत से भी ज्यादा महत्वपूर्ण दो बातें होतीं चली गईं – सुशांत सिंह राजपूत का ‘बिहारी’ होना, और मुंबई पुलिस का बिहार पुलिस के साथ ‘बिहारी पुलिस’ जैसा बर्ताव किया जाना! उन्हें ‘बिहारियों’ के साथ होते रहने वाले सदियों पुराने माइंडसेट के चलते ही नीच और घटिया समझकर उनके साथ हेय बर्ताव करते हुए उन्हें जाँच से रोका गया, लेकिन बिहार पुलिस की जाँच में समस्या क्या थी?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को पीछे रखकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को ही मुख्य विषय बनाने में मीडिया ने पूरी भागीदारी निभाई है। जस्टिस लोया की मौत, जो कि उनके परिवार द्वारा भी नैसर्गिक बताई गई थी, रवीश कुमार जैसे प्रपंचकारी आज तक सवाल खड़े करते हैं, तो फिर जिस सुशांत सिंह की मौत पर, और अब इसकी जाँच पर इतना बवाल है, उस पर रवीश कुमार क्यों सवाल नहीं कर रहे?

इस पूरे प्रकरण में सुशांत सिंह राजपूत की मौत, नेपोटिज्म पर बहस, सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत, महाराष्ट्र सरकार का हस्तक्षेप, बिहार और मुंबई पुलिस के बीच टकराव, सुशांत की पुरानी मित्र अंकिता लोखंडे के खुलासे, इन सभी बातों पर विस्तार से ऑपइंडिया के सम्पादक अजीत भारती का विवरण आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं।

शिव भक्तों को काशी मिले-कृष्ण भक्तों को मथुरा, गोहत्या पर रोक के लिए बने कानून: यजमान मोदी से माँगी दक्षिणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की नींव रखी। मंदिर का भूमि पूजन कराने वाले आचार्य पंडित गंगाधर पाठक ने इस बारे में कई बातें कही है। उनकी बातों में सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय था प्रधानमंत्री मोदी से दक्षिणा का निवेदन।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को यजमान बताते हुए कहा कि अपने यजमान से दक्षिणा की माँग करना गलत नहीं होता है। आचार्य गंगाधर पाठक ने दक्षिणा में गोहत्या पर पाबंदी और काशी तथा मथुरा की मुक्ति की माँग रखी।

आचार्य गंगाधर ने कहा यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी कि मेरे यजमान प्रधानमंत्री मोदी हैं। अपने यजमान से दक्षिणा की माँग करना अपराध नहीं है। ट्रस्ट के लोगों ने मौके पर माहौल को देखते हुए मुझे दक्षिणा की माँग करने से मना कर दिया था। इसलिए मैंने भी उनसे इशारों में दक्षिणा माँगी थी। लेकिन अब मैं यह बात खुल कर कहना चाहता हूँ। यह मेरे लिए एक विलक्षण अनुभव था, इसकी व्याख्या नहीं की जा सकती है।    

उन्होंने कहा कि वह केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि एक सात्विक पुरुष भी हैं। काफ़ी प्रसन्नता हुई, लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री सनातन परंपरा का निर्वहन कर रहा है। यह वाकई खुशी की बात है। दक्षिणा के सवाल का जवाब देते हुए पंडित गंगाधर ने कहा मैं प्रधानमंत्री से नहीं बल्कि अपने यजमान से दक्षिणा की अपेक्षा रखता हूँ। प्रधानमंत्री से तो वेतन लिया जाता है, मैं प्रधानमंत्री रूपी अपने यजमान से दक्षिणा की अपेक्षा रखता हूँ।   

मेरा उनसे निवेदन है कि भारत में गोहत्या बंद हो। प्रधानमंत्री जल्द गोहत्या पर पाबन्दी से जुड़ा कानून बनाएँ और इसे लागू करें। गौहत्या से देश की धरती दूषित हो जाती है। प्रधानमंत्री ने कई बड़े काम किए हैं। जो काम असंभव नज़र आते थे उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे काम भी पूरे किए हैं। अगर वह देश में गोहत्या बंद करवाते हैं तो मेरे लिए यही सबसे बड़ी दक्षिणा होगी। इसके अलावा वह श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ को मुक्त करवाएँ। इन दोनों दिव्य स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।   

इसके बाद उन्होंने भूमि पूजन के बारे में भी कई बातें कहीं। उन्होंने कहा समारोह के दौरान भारत के मूर्धन्य व्यक्ति मौजूद थे। पूजन समारोह पूरे विधि-विधान से किया गया था और 22 विद्वान इसका हिस्सा बने थे। मौके पर उपस्थित लगभग हर व्यक्ति ने स्वेच्छा और श्रद्धा से भरपूर दान किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि नई शिलाओं का पूजन किया गया। वहाँ कुल 9 शिलाएँ थीं जिनका पूजन किया गया।   

कुछ शिलाएँ हीरे और पन्ने की भी थीं और इनका प्रयोग भगवान के गर्भ गृह में होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी भी अपने साथ एक कलश लेकर आए थे। उस कलश में क्या था इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी। उन्होंने खुद इस बारे में प्रधानमंत्री से पूछना उचित नहीं समझा। जानकारी के मुताबिक़ वह प्रधानमंत्री मोदी की गुप्त संकल्पना थी। उस कलश की स्थापना आचार्य ने खुद कराई थी।           

मुहूर्त पर अपना पक्ष रखते हुए आचार्य गंगाधर ने कहा उनकी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द गिरी से इस बारे में बात हुई थी। उनके अनुरोध पर करीब एक महीने पहले शास्त्र सम्मत होकर 5 अगस्त पर स्वीकृति बनी थी। लेकिन इसकी जानकारी सार्वजनिक होने पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई।   

वह पूरे देश के आराध्य हैं लेकिन तिथि तय हो चुकी थी। नतीजतन मुझे उनकी बातों का खंडन करना पड़ा। वह खुद चलने में सामर्थ्यवान नहीं है ऐसे में स्वाभाविक है कि उनके आस-पास मौजूद लोगों ने उन्हें उकसाया हो।

मस्जिद में कुरान पढ़ती बच्ची से रेप का Video आया सामने, मौलवी फरार: पाकिस्तान के सिंध प्रांत की घटना

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त स्थित कंदियारो की एक मस्जिद में बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित मौलवी अब्बास फरार बताया जा रहा है। पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने इस खबर को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

राहत ऑस्टिन ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “सिंध-पाकिस्तान के नंदशहरो फिरोज, कंदियारो में इस्लामिक मौलवी ने मस्जिद में एक बच्ची के साथ कुरान पढ़ते हुए बलात्कार किया। यह देशभर (पकिस्तान) में हर रोज होता है। लेकिन इस्लाम में इसे ईशनिंदा नहीं माना जाता है। यहाँ 1000 लोग दूसरे धर्म वालों की लिंचिंग कर उन्हें मार देते हैं, या फिर झूठे आरोपों में मौत की सजा देते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, मासूम के साथ मस्जिद में बलात्कार करने वाले आरोपित का नाम अब्बास है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद से वह फरार है। अब्बास के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

राहत ऑस्टिन ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “बलात्कार, अल्लाह के घर में यौन गतिविधियाँ ईशनिंदा नहीं है? छोटी-छोटी बातों पर दूसरे धर्म वालों को मारने वालों को सजा क्यों नहीं दी जाती? क्या कुरान और अल्लाह की मौजूदगी में ऐसा करना ठीक है? ऐसी जगह पर इस्लामिक प्रार्थना और नमाज का क्या? क्या एक ऐसी जगह पर नमाज़ करना ठीक है जहाँ एक मौलवी ने अपना वीर्य गिराया हो?”

‘जाँच केवल सबूतों पर आधारित’: दिल्ली पुलिस ने दंगों पर TOI के दावों का किया खंडन

दिल्ली पुलिस ने समाचार समूह टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) के एक संपादकीय पर आपत्ति जताई है। यह संपादकीय दिल्ली दंगों पर था। इसमें दंगों और दिल्ली पुलिस की जाँच से संबंधित कई बातें लिखी गई थी।

दिल्ली पुलिस ने साफ़ शब्दों में इस संपादकीय का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जाँच सिर्फ सबूतों पर आधारित है। अखबार में जिस तरह की बातें लिखी हैं उसका सीधा असर लोगों के जेहन पर पड़ता है।   

यह संपादकीय (Capitol Aberration) 6 अगस्त के दिन टाइम्स ऑफ़ इंडिया के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित हुआ था। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि पूरे संपादकीय में ऐसे तमाम आरोप लगाए गए हैं जिनका खंडन करने की ज़रूरत है। ऐसा नहीं करने पर जाँच से संबंधित रिकॉर्ड प्रभावित होंगे। इसके शुरूआती हिस्से में 1984 दंगों का ज़िक्र है। लेकिन इसके बाद लेखक अपना उद्देश्य स्पष्ट कर देता है। अगले हिस्से में फरवरी के दौरान हुए दंगों के मामले में प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद की जाँच का उल्लेख है।    

दिल्ली पुलिस ने लिखा कि लेखक इतने पर ही रुकता नहीं है। इसके बाद लेखक ने न जाने किन वजहों को आधार बनाते हुए जाँच एजेंसियों पर भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया है। यह समझना मुश्किल है कि आखिर एक व्यक्ति की कानूनी जाँच गलत कैसे हो सकती है। दिल्ली पुलिस ने पूछा है कि अपूर्वानंद को न तो समन जारी किया गया है और न इस संबंध में कोई जानकारी सार्वजनिक की गई है, फिर किस आधार पर आरोप लगाए गए हैं।

इन बातों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कई सवाल भी खड़े किए हैं, 

  • जब जाँच की कोई जानकारी सामने नहीं आई है, तब लेखक ने किस आधार पर ऐसे आरोप लगाए हैं?
  • लेखक के इन दावों और जानकारियों का आधार क्या है?
  • क्या जाँच अधिकारी को लेखक से दिशा-निर्देश लेने पड़ेंगे कि किसकी जाँच करनी है या किसकी नहीं?
  • क्या लेखक पुलिस पर कार्रवाई के दौरान दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है?

पुलिस ने कहा है कि असल मायनों में इन दंगों की वजह से पूरे समाज को शर्मिंदा होना पड़ा था। पुलिस ने अपनी तरफ से जितना कुछ करना चाहिए था वह सब किया। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। जिससे असल आरोपित सामने आएँ और कार्रवाई अभी तक जारी है। लेकिन इससे बहुत से लोग असहज होते हैं, लेख की मंशा से ऐसा ही समझ आता है।   

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि लेखक को एक बात बहुत अच्छे से समझने की ज़रूरत है कि दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस मामले में इंसाफ़ हो। पुलिस से ज़्यादा चिंता किसे होगी जिसने 750 मामले दर्ज किए हैं और 1500 लोगों को गिरफ्तार किया है।   

इस मामले की जाँच में दिग्गज अधिकारी शामिल हैं और वह उपलब्ध दस्तावेज़ों, सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि मामले के आरोपित भी अपना पक्ष रख रहे हैं और बचाव कर रहे हैं। अधिकारियों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन यही देश का लोकतंत्र है। यहाँ क़ानून सबसे ऊपर है, उसके आगे कुछ नहीं है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह जाँच प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। दिल्ली पुलिस सबूतों के आधार पर निष्पक्ष रूप से कार्रवाई कर रही है।

केरल विमान हादसा: अब तक 18 के मरने की पुष्टि, IAF के विंग कमांडर रह चुके थे पायलट डीवी साठे

केरल विमान हादसे का शिकार होने वाले दो मृतक पायलट्स में से एक कैप्टन डीवी साठे भी थे, जो कि इंडियन एयरफोर्स में विंग कमांडर रह चुके थे। एयर इंडिया में शामिल होने से वह पहले भारतीय वायुसेना में एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट थे।

कैप्टन दीपक साठे मिग 21 के भी पायलट थे, जो 17 स्क्वाड्रन (गोल्डन एरो) अंबाला में रहे। स्क्वाड्रन 1999 कारगिल युद्ध में भी गया था। कैप्टन साठे वायुसेना प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षक भी रहे।

गौरतलब है कि केरल में शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) शाम दुबई से आ रहा एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया था। इस विमान में 190 लोग सवार थे। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसे में 18 लोगों की मौत हुई है।

मृतकों में दो पायलट भी शामिल हैं और हादसे में घायल 127 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी लोगों को घर जाने दिया गया है। केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसकी जानकारी दी। वह फिलहाल, केरल के लिए रवाना हो गए हैं।

उड्डयन मंत्री पुरी ने हादसे का संभावित कारण बताते हुए कहा कि ‘वंदे भारत मिशन’ के अंतर्गत यह विमान 190 यात्रियों को दुबई से लेकर आ रहा था। पायलट ने टेबलटॉप एयरपोर्ट के रन-वे के अंत तक विमान को रोकने की कोशिश की होगी, जहाँ मानसून से बनी स्थिति के कारण विमान फिसल गया होगा।

पुरी ने कहा, “हादसे में हुई एक भी मौत दुखद होती है। शुक्र है कि विमान में आग नहीं लगी। जाँच के लिए दो टीमें रवाना हो गई हैं। मैं खुद भी वहाँ जा रहा हूँ। हादसे में राहत और बचाव कार्य पूरा हो चुका है। मलबे को हटाने और ब्लैक बॉक्स की खोज की तैयारी हो रही है।”

ग्लोबल फ्लाइट ट्रैकर वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24‘ के अनुसार, केरल में एयर इंडिया के विमान ने कोझिकोड एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले कई बार ऊपर चक्कर लगाए थे और दो बार और उतरने की भी कोशिश की थी, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई थी। विमान रन-वे पर फिसल गया और घाटी में गिरने से उसके दो टुकड़े हो गए।

रिया के आने के बाद बदल गए थे सुशांत भैया, कुत्ते के बेल्ट से गला घोंटा गया होगा: पूर्व कर्मचारी का दावा- यह मर्डर है

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर हर दिन नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। दिवंगत अभिनेता के वकील, परिवार के सदस्यों, दोस्तों के बाद, अब उनके पूर्व कर्मचारी अंकित आचार्य ने चौंकाने वाला दावा किया है। अंकित बतौर निजी सहायक हमेशा उनके साथ रहते थे। उनका दावा है कि यह सुसाइड न होकर मर्डर है।

मनोरंजन और फिल्मों से जुड़ी ख़बरों की नामी मीडिया पोर्टल ‘पिंकविला’ को दिए साक्षात्कार में अंकित ने यह दावा किया है। अंकित आचार्य ने कहा, “सुशांत भैया खुश और सकारात्मक इंसान थे। वह हमेशा एक्टिव रहना चाहते थे। जब मैंने उनके साथ 2017 से 2019 तक काम किया, तब वह कभी उदास या परेशान नहीं रहते थे। वह कभी-कभी गुस्से में आ जाते थे, लेकिन 5 मिनट में शांत हो जाते थे। वह हमारे साथ परिवार और अपने भाइयों की तरह व्यवहार करते थे।”

इंटरव्यू में अंकित आचार्य ने बताया कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के जिंदगी में आने के बाद से सुशांत पूरी तरह से बदल गए थे। उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया। उनका पूरा स्टाफ भी बदल दिया गया। अंकित ने कहा कि जब वे अपनी 2 माह की सैलरी लेने के लिए सुशांत से मिलना चाहते थे तो उन्हें मिलने से रोक दिया गया था।

अंकित आचार्य के अनुसार, बाद में जब एक दिन वे सुशांत से मिले तो उन्होंने उनकी सैलरी के अलावा 50 हजार रुपए भी दिए। अंकित ने कहा कि उस समय सुशांत बिल्कुल भी सामान्य नहीं थे, उनके चेहरे पर उदासी थी, आँखों में डार्क सर्कल और वो बेहद तनाव में नजर आ रहे थे।

बकौल अंकित, “मैं सुशांत भैया को अच्छी तरह से जानता था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि यह आत्महत्या है। यह निश्चित रूप से एक हत्या है। मान लो कि सुशांत भैया खुद को फाँसी से लटका लेते हैं, लेकिन जब इस तरह से आत्महत्या की जाती है, तो निशान हमेशा ‘U’ आकार में होता है। लेकिन जब कोई आपका गला घोंटता है, तो यह हमेशा ‘O’ के आकार में होता है। सुशांत भैया के मामले में, ‘O’ का निशान है। आत्महत्या करने वालों की आँखें बाहर निकलती हैं, जीभ बाहर निकलती है, वहाँ झाग होता है। इसमें से कुछ भी सुशांत भैया के शरीर में नहीं था। इसलिए यह निश्चित रूप से हत्या का मामला है।”

पिंकविला के साथ बातचीत में अंकित आचार्य ने एक चौंकाने वाला खुलासा ये भी किया कि सुशांत का गला जिस बेल्ट से घोंटा गया, वो उनके पालतू कुत्ते फ़ज (Fudge) की बेल्ट थी। अंकित ने कहा कि उनके पास सुशांत की तस्वीरें अभी तक भी हैं और वो उन्हें बार-बार देखते रहते हैं।

अंकित का मानना है कि अपराधियों ने सुशांत के पालतू कुत्ते Fudge की बेल्ट से उनका गला घोंटा होगा, जिससे उनकी मौत हो गई। सुशांत की मौत की जाँच सीबीआई को सौंपे जाने से वे खुश हैं। अंकित का कहना है कि वे चाहते हैं कि सुशांत को न्याय मिले ओर दोषियों को फाँसी की सजा हो।

‘मथुरा-काशी बाकी है’: 1947 का वो यज्ञ जब 3 दोस्तों ने खींचा हिंदुओं के 3 पवित्र स्थल को वापस पाने का खाका

यह तो पहली झाँकी है, मथुरा-काशी बाकी है। ये नारा तो बहुत बाद में बुलंद हुआ। उससे बरसों पहले तीन दोस्तों ने अयोध्या के साथ-साथ इन दो हिंदू पवित्र स्थलों को वापस पाने का एक विस्तृत खाका तैयार कर लिया था। हालाँकि राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए पहले से ही संघर्ष जारी था। पर इनकी योजना की वजह से आजाद भारत में यह सिरे चढ़ा।

5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के बाद फिर से मथुरा-काशी को वापस पाने की बातें जोर-शोर से होने लगी है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए तो बकायदा एक ट्रस्ट भी बनाया गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट से 14 राज्यों के 80 संत-महामंडलेश्वर जुड़े हैं। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की योजना बनाई गई है।

असल में हिंदुओं के इन पवित्र स्थलों को वापस पाने की योजना एक खेल से भी जुड़ी हुई है। यह खेल है 12वीं सदी में उत्तरी फ्रांस से शुरू हुआ ‘जिउ दी पौमे’ (हथेली का खेल), जो 16वीं सदी में इंग्लैंड पहुँच टेनिस हो गया। 78 फीट लंबे और 27 फीट चौड़े कोर्ट में खेले जाने वाले लॉन टेनिस को अंग्रेज 1880 के दशक में हिंदुस्तान लेकर आ गए थे। 1920 आते-आते भारत ने डेविस कप में भाग लेना भी शुरू कर दिया था। हालाँकि भारतीय लॉन टेनिस का इतिहास भले 100 साल से भी पुराना हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ने वाले हम चुनिंदा खिलाड़ी ही पैदा कर पाए हैं।

लेकिन, इस खेल ने हिंदू जीवन दर्शन के तीन पैरोकारों को इतनी प्रगाढ़ता से जोड़ा कि इसने आजाद भारत में अयोध्या के राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की नींव डाल दी। ये तीन दोस्त थे, बलरामपुर स्टेट के महाराजा पटेश्वरी प्रसाद सिंह, नाथपंथी कनफटा साधुओं की शीर्ष पीठ गोरक्षपीठ के महंत दिग्विजय नाथ और इंडियन सिविल सर्विस (आईसीएस) के अधिकारी केकेके नायर। महाराजा घुड़सवारी और लॉन टेनिस में पारंगत थे। महंत लॉन टेनिस के माहिर और नायर का भी इस खेल से लगाव था।

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महाराजा हिंदू जीवन दर्शन के प्रचार-प्रसार को समर्पित थे। महंत तो बकायदा हिंदू महासभा के अधिकारी ही थे। नायर भी हिंदू महासभा के संपर्क में थे। लेकिन, कहते हैं कि तीनों की दोस्ती का आधार लॉन टेनिस के प्रति इनका लगाव ही था।

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखा है कि 1947 के शुरुआती दिनों में महाराजा ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया। केरल के एलप्पी के रहने वाले नायर जो 1930 में सिविल सर्विस से जुड़े थे, उस समय सरयू के उस पार फैजाबाद से सटे गोंडा जिले में तैनात थे। यज्ञ में महाराजा के गुरु स्वामी करपात्री जी भी शामिल हुए।

अंजुल भर भिक्षा लेने के कारण करपात्री कहलाए स्वामी जी सिद्ध दंडी संन्यासी, उद्भट विद्वान और प्रखर वक्ता थे। ‘रामराज्य और मार्क्सवाद’ नामक बहुचर्चित किताब उनकी ही लिखी है। 1940 में बनारस में हिंदू परंपराओं की रक्षा के लिए उन्होंने ‘धर्मसंघ’ की स्थापना की और 1941 में बनारस से दैनिक अखबार ‘सन्मार्ग’ शुरू किया। राजनीति में धर्म को उचित स्थान दिलाने के लिए ‘रामराज्य परिषद’ बनाया। 1951 में इस परिषद के 24 सदस्य राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए थे। कई लोग इस राजनीतिक दल के बैनर तले संसद भी पहुॅंचे।

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शर्मा के मुताबिक उन्हें खुद स्वामी करपात्री ने बताया था कि राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की नींव उसी यज्ञ में पड़ी थी। नायर वहाँ पहले से थे और यज्ञ समाप्ति से एक दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ भी पहुँच गए। उन हिंदू धर्म स्थलों की मुक्ति पर चर्चा हुई, जिन पर इस्लामी अक्रांताओं ने कब्जा किया था।

इसके बाद नायर एक विस्तृत योजना के साथ स्वामी करपात्री और महंत दिग्विजय नाथ से मिले। उन्होंने अयोध्या के साथ-साथ वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को दोबारा हासिल करने का खाका पेश किया। नायर ने वादा किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे अपना सब कुछ दाँव पर लगाने को तैयार हैं। नौकरी भी।

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संयोग से 1 जून 1949 को नायर फैजाबाद के कलेक्टर बने। वहाँ सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह और अभिराम दास पहले से ही राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए प्रयासरत थे। मैथिल ब्राह्मण अभिराम दास नागा वैरागी यानी रामानंद संप्रदाय के 15 साल पुराने खाड़कू थे। हिंदू महासभा से जुड़े होने के कारण महंत दिग्विजय नाथ के करीबी थे। उनकी ख्याति राम जन्मभूमि के ‘उद्धारक’ के तौर पर थी। कहते हैं कि 3 दिसंबर 1981 को जब अभिराम दास की अंतिम यात्रा निकली तो ‘राम नाम’ की जगह ‘राम जन्मभूमि के उद्धारक अमर रहे’ की गूँज हर ओर से आ रही थी।

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नायर के फैजाबाद में तैनाती के कुछ महीने बाद ही 22-23 दिसंबर 1949 की दरम्यानी रात रामलला भाइयों के साथ विवादित गुंबद के भीतर प्रकट हुए। नायर ने उस समय के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के दबाव के बावजूद मूर्तियों को हटाने से इनकार कर दिया था। 1952 में जब फैजाबाद से उनका तबादला कर दिया गया तो उन्होंने नौकरी ही छोड़ दी।