नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने महाकुंभ को लेकर एक जहरीला बयान दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने हिन्दू विश्वास पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि उनका खुदा पानी में नहीं बसता है। फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई है। लोगों ने मक्का मदीना की उनकी पुरानी तस्वीरें भी दिखाई हैं।
मीडिया से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मेरा खुदा पानी में नहीं बसता। मेरा खुदा ना मंदिर में है, ना मस्जिद में है और ना ही गुरूद्वारे में है। मेरा खुदा मेरे दिल में बसता है।” उन्होंने यह बयान महाकुंभ में जाने को लेकर प्रश्न पूछे जाने पर दिया।
जम्मू, जम्मू-कश्मीर: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने महाकुंभ में जाने के सवाल पर कहा, "मैं तो घर में नहाता हूं, मेरा खुदा पानी में नहीं है। मेरा खुदा न मस्जिद में है, न मंदिर में है, न गुरुद्वारे में है…" pic.twitter.com/XcB01YxQPv
फारूक अब्दुला के इस बयान के बाद बवाल हो गया है। उनकी एक पुरानी तस्वीर अब सामने आई है। इसमें वह बेटे फारूक अब्दुल्ला के साथ मक्का की मस्जिद-अल-हरम में खड़े हैं। मस्जिद अल हरम वही है जहाँ दुनिया भर के मुस्लिम उमरा करने जाते हैं। लोगों ने इसी के साथ उने इस सेक्युलर टाइप दावे पर प्रश्न उठाए हैं।
फारूक अब्दुल्ला हिंदुओं के पवित्र महाकुंभ पर बेहद अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं लेकिन खुद वह हज यात्रा पर जाते हैं pic.twitter.com/i4RueD7iYC
जहाँ फारूक अब्दुल्ला अभी कह रहे हैं कि उनका खुदा पानी या फिर किसी मस्जिद में नहीं बसता, वहीं वह कुछ ही दिन पहले बेटे समेत सऊदी अरब पहुँच गए थे। यह यात्रा भी तब हुई थी जब उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गए थे।
ऐसे में उनके ‘खुदा मस्जिद’ में नहीं रहता वाले उनके दावे को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। उनके इस बयान से उन हिन्दुओं को भी धक्का पहुँचा है, जो प्रकृति के हर तत्व में भगवान को मानते हैं। फारूक अब्दुल्ला का बयान पवित्र नदी गंगा के महत्त्व को कम करके आंकने वाला भी मालूम होता है।
फारूक अब्दुल्ला पहले ऐसे नेता नहीं हैं, जिन्होंने महाकुंभ को लेकर ऐसा कोई बयान दिया ही। उनसे कुछ ही दिन पहले सपा सांसद जया बच्चन ने महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी कुंभ में है। वहाँ शवों को उठा कर फेंक दिया गया है। उसकी वजह से पानी प्रदूषित हो गया है।
पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में अपने सारे पैंतरे फेल होता देख अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने की जुगत में है। पाकिस्तान इसे पूरी दुनिया के मुस्लिमों की समस्या बताना चाहता है। इसके लिए वह कश्मीर समस्या को फिलिस्तीन विवाद के बराबर खड़ा करना चाहता है। वह इसके लिए उम्माह की एकता चाहता है।
इस काम के लिए उसने हमास कमांडर को पाक अधिकृत कश्मीर में तक़रीर देने को बुलाया है। हमास वही संगठन है जिसने इजरायल की महिलाओं को अगवा करके नग्न परेड करवाई थी। वहीं जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। वह हाल ही में हुई एक पूर्व सैनिक की हत्या पर अब एक्शन में है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुलगाम में आतंकी हमले में मारे गए पूर्व सैनिक मंजूर अहमद वागे के हत्यारों के अब सुरक्षा एजेंसियाँ पीछे पड़ गई हैं। इस हमले में उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं जबकि उनकी भतीजी को भी भर्ती करवाया गया था।
इस हमले के बाद से जम्मू कश्मीर पुलिस और सेना मिलकर बड़ा सर्च अभियान चला रही हैं। मामले में लगभग 27 लोगों को हिरासत में लिया गया है। दूसरी रिपोर्ट बताती है कि जाँच का दायरा 500 लोगों तक है।
इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिनके परिवार का कोई व्यक्ति आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है। कई ऐसे भी घेरे में लिए गए हैं जिनके कोई रिश्तेदार पाक अधिकृत रिश्तेदार (PoK) में रहते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को समन भेजे गए हैं और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
यह ऑपरेशन कुलगाम के साथ ही शोपियां और अनंतनाग में भी चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियाँ ओवरग्राउंड वर्करों के लिंक भी तलाश हो रही है। सुरक्षा एजेंसियाँ जल्द ही इन आतंकियों को पकड़ सकती हैं।
कश्मीर में इस बीच सुरक्षा चिंताएँ और भी बढ़ गई हैं। पाकिस्तान अपना नेटवर्क वापस बढ़ाने और कश्मीर को वैश्विक मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह कश्मीर मुद्दे को फिलिस्तीन जैसा बताना चाह रहा है, वह चाहता है कि जिस तरह दुनिया भर के मुस्लिम फिलिस्तीन को लेकर भावनात्मक रुख रखते हैं, वैसा ही कश्मीर को प्रदर्शित किया जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इसके लिए फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास की मदद ले रहा है। हमास के मिलिट्री कमांडर खालिद कद्दूमी की इस तक़रीर में पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा और दूसरे इस्लामी आतंकी संगठनों के लोग शामिल होंगे।
इस कायर्क्रम को ‘अल अक्सा फ्लड’ नाम से किया जा रहा है। यह नाम जानबूझ कर चुना गया है। यह नाम हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 के इजरायल पर किए गए हमले को दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार (4 फरवरी 2025) को नेक्रोफिलिया (महिला के मृत शरीर से यौन क्रिया) को बलात्कार मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत बलात्कार के तहत अपराध नहीं है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने कर्नाटक सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।
जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे की जाँच करना और जरूरी होने पर कानून में प्रासंगिक बदलाव करना संसद का काम है। अदालत ने कहा कि कानून नेक्रोफीलिया को अपराध नहीं मानता। इसलिए हाई कोर्ट द्वारा आरोपित को बलात्कार के आरोप से बरी करने के लिए आदेश में वह हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
कर्नाटक सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन पंवार ने तर्क दिया कि धारा 375(सी) के तहत ‘शरीर’ शब्द में मृत शरीर को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बलात्कार की परिभाषा के 7वें विवरण कहा गया है कि ऐसी स्थिति जहाँ महिला सहमति नहीं दे सकती है, उसे बलात्कार माना जाएगा। इस प्रकार, यहाँ भी मृत शरीर सहमति नहीं दे पाएगी।
पंवार ने कहा कि कोर्ट को धारा 375 में शवों को शामिल करने के लिए उदारतापूर्वक इसकी व्याख्या करनी चाहिए। उन्होंने पंडित परमानंद कटारा बनाम भारत संघ मामले में शीर्ष न्यायालय के 1995 के निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सम्मान और उचित व्यवहार का अधिकार शवों पर भी लागू होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्टेट बनाम ब्रोबेक मामले में टेनेसी के सर्वोच्च न्यायालय सहित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों ने शवों को बलात्कार के दायरे में लाने के लिए इसी तरह के दंडात्मक प्रावधानों का विस्तार किया है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन पंवार की दलील से संतुष्ट नहीं हुई थी और अपील को खारिज कर दिया।
दरअसल, यह मामला कर्नाटक का है। इस मामले में आरोपित ने 21 साल की एक महिला की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने शव के साथ यौन संबंध बनाए थे। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या और आईपीसी की धारा 375 के तहत बलात्कार के लिए दोषी ठहराया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट में गया।
इस मामले में सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने मई 2023 में कहा कि नेक्रोफीलिया भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत बलात्कार या धारा 377 के तहत अप्राकृतिक सेक्स वाले अपराध के दायरे में नहीं आता। इसलिए आरोपित को रेप का दोषी नहीं नहीं माना जा सकता है। इसके बाद हाई कोर्ट ने आरोपित को हत्या का दोषी माना, लेकिन रेप के आरोप से मुक्त कर दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि नेक्रोफीलिया एक ‘मनोवैज्ञानिक विकार’ है, जिसे DSM-IV (मानसिक विकारों का नैदानिक और सांख्यिकीय मैनुअल) ‘पैराफीलिया’ नामक विकारों के समूह में वर्गीकृत किया जाता है। इसमें पीडोफीलिया (बच्चों का यौन शोषण), एग्जिबिशनिज्म (किसी अनजान व्यक्ति को अपना जननांग दिखाना) और यौन आत्मपीड़ा (दर्द, प्रताड़ना या तिरस्कार में यौन उत्तेजना महसूस करना) शामिल है।
न्यायालय ने कहा, “यह हमारे संज्ञान में लाया गया है कि अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों में, विशेष रूप से युवा महिलाओं के शवगृह में रखवाली के लिए नियुक्त परिचारक शव के साथ संभोग करते हैं। इसलिए राज्य सरकार के लिए यह सुनिश्चित करने का समय आ गया है कि ऐसा अपराध न हो, जिससे महिला के शव की गरिमा बनी रहे।”
कर्नाटक हाई कोर्ट ने आगे कहा, “दुर्भाग्य से भारत में महिला के शव के प्रति अपराध और उसके अधिकारों की रक्षा करने तथा उसकी गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों सहित कोई विशिष्ट कानून नहीं बनाया गया है।” हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि शवों से दुष्कर्म की घटना को बलात्कार की श्रेणी में शामिल करने के लिए कानून बनाने के लिए कहा।
आरोपित को रेप के केस से मुक्त करने के हाई कोर्ट के फैसले को कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद इसे रेप मानने से इनकार कर दिया और कर्नाटक सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित कानून के लिए संसद को मार्ग बताया।
यूरोपीय देश स्वीडन के ऑरेब्रो शहर में मंगलवार (4 फरवरी 2025) को बंदूकधारी हमलावर ने एक स्कूल में अंधाधुन फायरिंग की, जिसमें कम-से-कम 10 लोग मारे गए हैं। मृतकों में हमलावर भी शामिल है। मृतकों के पहचान के बारे में अभी तक पुलिस ने नहीं बताया है। पुलिस का कहना है कि वह हमले के संभावित मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
गोलीबारी स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से लगभग 200 किलोमीटर (125 मील) पश्चिम में स्थित ऑरेब्रो में कैंपस रिसबर्गस्का सेकेंड्री स्कूल हुई। इसमें प्राइमरी और अपर सेकेंडरी की पढ़ाई होती है। इसके साथ ही इस विद्यालय में आप्रवासियों के लिए स्वीडिश कक्षाएँ, व्यावसायिक प्रशिक्षण और बौद्धिक विकलांग लोगों के लिए कार्यक्रम भी प्रदान किए जाते हैं।
इस स्कूल के छात्रों की उम्र 20 साल से अधिक है। जिस समय गोलीबारी हुई, उस समय वहाँ कई स्कूली बच्चे, टीचर एवं अन्य लोग उपस्थित थे। ऑरेब्रो के पुलिस प्रमुख रॉबर्टो ईद फॉरेस्ट ने बताया, “करीब 10 लोग मारे गए हैं। संख्या के बारे में हम अभी स्पष्ट नहीं हैं।” पुलिस को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, इसे आतंकी घटना मानने से भी इनकार किया है।
इस हमले के कई प्रत्यक्षदर्शी भी सामने आए हैं। उनमें से एक 28 वर्षीय एंड्रियास सुंडलिंग ने कहा कि उसने तीन धमाके और तेज चीखेें सुनीं। इसके बाद वह जान बचाने के लिए एक कक्षा में जाकर छिप गई। स्कूल के अधिकारियों का कहना है कि हमले के वक्त घटनास्थल पर बहुत कम बच्चे थे। अधिकांश बच्चे घर जा चुके थे। माना जा रहा है कि हमला ऑटोमेटिक राइफल से की गई है।
वहीं, स्कूल की 54 वर्षीय टीचर मारिया पेगाडो ने बताया कि लंच ब्रेक के ठीक बाद किसी ने उनकी कक्षा का दरवाज़ा खोला और चिल्लाते हुए सभी को बाहर निकलने के लिए चिल्लाया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने सभी 15 छात्रों को बाहर हॉलवे में ले जाकर भागना शुरू कर दिया। फिर मैंने दो गोलियाँ सुनीं, लेकिन हम बच गए। हम स्कूल के प्रवेश द्वार के करीब थे।”
टीचर मारिया ने आगे कहा, “मैंने लोगों को घायलों को घसीटते हुए बाहर निकलते देखा। पहले एक को देखा, फिर दूसरे को। मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत गंभीर स्थिति है।” पुलिस ने मृतकों की उम्र, लिंग या निवास स्थान आदि को लेकर कोई जानकारी नही दी है। पुलिस का मानना है कि हमलावर अकेला था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुलिस ने हमलावर के घर पर छापेमारी की है।
कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि संदिग्ध हमलावर की उम्र करीब 35 साल है और उसके पास हथियार रखने का लाइसेंस है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन उसकी पहचान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस ने इस जानकारी की पुष्टि नहीं की है। बता दें कि मुस्लिमों के दीनी किताब कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की भी कुछ दिन पहले स्वीडन में हत्या कर दी गई थी।
स्वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने इस घटना की निंदा की है। वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इस हमले को देश के इतिहास में सबसे भयानक सामूहिक गोलीबारी बताया है। इस देश में संगठित अपराधिक गिरोहों को लेकर क्रिस्टरसन ने कहा, “यह स्वीडन को विरासत में मिली समस्या है। वे बहुत लंबे समय से विकसित हो रहे हैं। हिंसा पर हमारा नियंत्रण नहीं है, यह बिल्कुल स्पष्ट है।”
स्वीडन में गिरोह अपराध की समस्या के कारण गोलीबारी और बम विस्फोट की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हालाँकि स्कूलों में घातक हमले अभी भी दुर्लभ हैं। स्वीडिश नेशनल काउंसिल फॉर क्राइम प्रिवेंशन के अनुसार 2010 से 2022 के बीच स्कूलों में घातक हिंसा की सात घटनाओं में दस लोग मारे गए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू पर करारा हमला किया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव बोलते हुए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति को लेकर उठाए गए क़दमों की आलोचना की। पीएम मोदी ने इस दौरान विपक्ष के सांसदों को सलाह दी कि वह ‘JFK’s फॉरगॉटेन क्राइसिस’ किताब पढ़ने की सलाह दी। यह किताब अमेरिकी विदेश नीति एक्सपर्ट ब्रूस रिडेल ने लिखी है और इसमें जॉन एफ केनेडी के कार्यकाल में आए राजनीतिक और वैश्विक संकटों पर बात की गई है।
#WATCH | PM Narendra Modi says, "While discussing the President's Address, foreign policy was also discussed here. A few people think that they don’t appear mature if they don’t speak on foreign policy. They think that they should definitely speak on foreign policy, even if it… pic.twitter.com/LDXPl0c3q4
पीएम मोदी ने यह सुझाव तब दिया जब वह भारत-चीन सीमा विवाद पर अपनी सरकार के क़दमों को लेकर बोल रहे थे। उन्होंने इस दौरान विपक्ष की आलोचना का भी उन्होंने जवाब दिया। इससे पहले सोमवार को कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने भारत-चीन विवाद को लेक सरकार को घेरा था।
पीएम मोदी ने इस किताब के हवाले से बताया कि नेहरू ने देश की सुरक्षा के साथ क्या खेल खेला और उनके लिए विदेश नीति का क्या मतलब था। उन्होंने कहा, “जो लोग सही में विदेश नीति में रुचि रखते हैं, मैं उन्हें JFK’s की फॉरगॉटन क्राइसिस पढ़ने का सुझाव देता हूँ।”
उन्होंने कहा, “विदेश नीति के एक विशेषज्ञ द्वारा लिखी गई इस किताब में भारत के पहले प्रधानमंत्री का जिक्र है, उन्होंने विदेश मामले भी देखे थे। इस किताब में इसमें उस क्राइसिस के दौरान उनकी जॉन एफ केनेडी की पत्नी के साथ उनकी बातचीत भी शामिल है, जिसे विदेश नीति के नाम पर लिए गए एक्शन कहा गया था।”
नेहरू के बारे में कई खुलासे करती है किताब
जिस किताब का पीएम मोदी ने जिक्र किया उसमे केनेडी की पत्नी की भारत यात्रा और पीएम नेहरू के विदेशी सम्बन्धों पर लिए गए एक्शन को लेकर बातें लिखी गई हैं। किताब के अनुसार, भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत जॉन केनेथ गैलब्रेथ के साथ बातचीत में, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने कथित तौर पर उनसे कहा कि पीएम नेहरू उनके बजाय उनकी पत्नी जैकी के साथ बातचीत में ज्यादा दिलचस्पी रखते थे।
इस किताब में यह भी बताया गया है कि केनेडी की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी दूतावास ने उनकी पत्नी के लिए एक विला किराए पर लिया था। लेकिन इसी दौरान नेहरू इस बात जोर दिया कि केनेडी की पत्नी प्रधानमंत्री आवास में एक कमरे में रुकें। गौरतलब है कि यह वही कमरा है जिसका उपयोग एडविना माउंटबेटन द्वारा किया गया था। एडविना अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी थीं, जो इस देश का बँटवारा होने के समय वायसराय थे।
किताब में यह भी बताया गया है कि नेहरू को केनेडी या उनकी पत्नी बॉबी की अपेक्षा JFK की 27 वर्षीय बहन पैट कैनेडी में खूब दिलचस्पी ले रहे थे। यह यात्रा 1962 में हुई थी। पंडित नेहरू तब 73 साल के थे।
यह सारी बातें पीएम मोदी ने राहुल गाँधी के सदन में किए गए दावे के बाद कही। राहुल गाँधी ने कह़ा कि भारत ने चीन के हाथों 4,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाका खो दिया है। राहुल ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री इसबात को नहीं मानते, लेकिन सेना के बयान इसके विपरीत हैं। उनकी इस बात का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जवाब दिया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई हैं। उन्होंने इसी के साथ कॉन्ग्रेस और AAP समेत विपक्ष पर हमला बोला है। उन्होंने देश के कुछ नेताओं पर अर्बन नक्सलों की भाषा बोलने का आरोप लगाया है और इसे देश का दुर्भाग्य बताया है। पीएम मोदी ने आयकर सीमा को ₹12 लाख तक बढ़ाने को घावों पर बैंडेज बताया है। जाति की राजनीति करने को लेकर भी उन्होंने कॉन्ग्रेस को घेरा है।
मंगलवार (4 फरवरी, 2025) को लोकसभा में पीएम मोदी ने धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार रखे हैं। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को नए भारत का आत्मविश्वास जगाने वाला बताया। पीएम मोदी ने गरीबी पर काम करने को लेकर भी कॉन्ग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने गरीबी हटाने को झूठे नारे नहीं दिए बल्कि सच्ची सेवा की।
पीएम मोदी ने कहा, “जो लोग गरीबों की झोपड़ियों में फोटो खिंचा कर अपना मनोरंजन करते रहते हैं, उन्हें गरीबों की बात बोरिंग ही लगेगी।” पीएम मोदी ने यह जवाब राहुल गाँधी की राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘बोरिंग’ वाली टिप्पणी को लेकर दिया। पीएम मोदी ने राजीव गाँधी के ‘₹1 में 15 पैसे’ वाले बयान के सहारे कॉन्ग्रेस को घेरा।
लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष में हताशा फैली हुई है, इसलिए वह कुछ भी बोलते है। पीएम मोदी ने बताया कि सरकार का कबाड़ ही बेचने से ₹2300 करोड़ मिले हैं। उन्होंने गाँधी जी के सिद्धांतों को भी लोकसभा में बताया। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार में एक भी घोटाला नहीं हुआ, इससे पैसा विकास में लगा।
पीएम मोदी ने गिनाया कि हर साल जल जीवन मिशन से ही एक परिवार को ₹40 हजार का फायदा ले रहा है। वहीं आयुष्मान कार्ड से ₹1.20 लाख करोड़ का फायदा लोगों को हुआ है। पीएम मोदी ने सूर्य घर योजना से होने वाले ₹25 हजार तक का लाभ भी गिनाया। पीएम मोदी का भाषण आप नीचे लगे लिंक में सुन सकते हैं।
उन्होंने कहा, “2014 से पहले ऐसे बमगोले फेंके गए थे कि देश वासियों का जीवन छलनी हो गया था। हम धीमे-धीमे वह भरते हुए आगे बढ़े थे। ₹2 लाख की इनकम टैक्स की लिमिट 2014 में थी। अब यह बढ़ कर ₹12 लाख हो चुकी है। रास्ते में लगातार घाव भरते गए, अब बैंडेज लगाया गया है।”
पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष के कुछ दल देश पर आप-दा बन कर गिरे हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वह संविधान को जीने वाले लोग हैं। उन्होंने 2014 के बाद विपक्ष की कम सीटें होने के बावजूद उसे संसदीय प्रक्रियाओं में हिस्सा दिए जाने की बात याद दिलाई। पीएम मोदी ने लोकसभा में अरविन्द केजरीवाल का नाम लिए बिना शीशमहल को लेकर उन्हें घेरा।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन अर्बन नक्सल की भाषा बोल रहे हैं, जो देश को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब जाति की बात करना फैशन हो गया है। गाँधी परिवार से तीन सांसद होने की बात होने को लेकर उन्होंने हमला किया। पीएम मोदी ने पूछा कि किस SC-ST परिवार से अभी तक तीन सांसद एक साथ हुए हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार (5 फरवरी 2025) को मतदान होना है। दिल्ली इस दिन अपने अगले पाँच वर्ष का भविष्य तय कर देगी। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी इस बार जहाँ हैट्रिक के प्रयास में है, तो वहीं भाजपा बीते ढाई दशक का सूखा खत्म करना चाहती है। कॉन्ग्रेस भी पुनर्जीवित होने का प्रयास कर रही है। मुख्य लड़ाई में AAP और भाजपा ही है। कौन अगले पाँच साल दिल्ली पर राज करेगा, इस बात का फैसला 8 फरवरी को हो जाएगा।
2025 का चुनाव पिछले 2 चुनाव से काफी अलग है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो, AAP को पहली बार करारी हार का डर सता रहा है। उसे 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में एकतरफा वोट और जीत मिली थी। भाजपा के लाख प्रयासों के बावजूद जनता ने केजरीवाल को ऐतिहासिक बहुमत दोनों बार दिया। हालाँकि, 2025 आते-आते उसकी छवि मटियामेट हो गई है। AAP इस बार 10 वर्षों की एंटी इनकम्बेंसी से जूझ रही है।
नए तरह की राजनीति का वादा करके आई AAP से अब लोगों को जवाब देते हुए नहीं बन रहा है। दिल्ली के विकास के संबंध में किए गए पुराने वादों का जिन्न भी अब उसे सता रहा है। AAP के साथ समस्या केवल 10 साल की एंटी इनकम्बेंसी की ही नहीं है। पहली बार ऐसा है कि वह चेहरे की समस्या से भी जूझ रही है। शराब घोटाले के चलते पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल की लोकप्रियता धड़ाम हो चुकी है। उनके जेल जाने से जनता के मन में उनके प्रति विश्वास नहीं रहा है।
वहीं दूसरी तरफ आतिशी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बावजूद वह जनता में लोकप्रियता नहीं हासिल कर सकी हैं। कम समय मिला और पार्टी द्वारा उनको अस्थायी मुख्यमंत्री बताया जाना और नुकसान पहुँचा चुका है। ऐसे में वह इस मोर्चे पर भी काफी कमजोर है। इन सबके अलावा पार्टी संगठन भी कमजोर हुआ है। चुनाव से ठीक पहले 8 विधायकों ने पार्टी छोड़ी है। इसके पहले भी कई विधायक और बड़े मंत्री पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। ऐसे में उसके पास संगठन चलाने वाले लोगों की भी कमी है।
दूसरी तरफ भाजपा ने इस बार AAP को घेर रखा है। शीशमहल से लेकर यमुना की सफाई और शराब घोटाला तक, AAP बैकफुट पर है। दिल्ली में भाजपा ने इस बार अपने उम्मीदवार भी काफी खोजबीन के बाद उतारे हैं। उसका मेन फोकस इस बार जमीन पर काम करना रहा है। चुनाव के बढ़ने के साथ ही वह एक-एक करके पत्ते खोलती गई है। चाहे वह ₹2500/महीने महिलाओं के लिए ऐलान हो या फिर झुग्गी बस्ती वालों को फ़्लैट का वादा, इन सब से उसे जमीन पर फायदा होने की उम्मीद है।
RSS और बाकी संगठनों का जमीनी ढाँचा उसे डोर टू डोर कैम्पेन में सहायता कर रहा है। केंद्र सरकार के बजट से भी दिल्ली में बड़ा वोट भाजपा की तरफ मुड़ सकता है। भाजपा ने ₹12 लाख तक इनकम टैक्स में छूट को बढ़ा कर मिडल क्लास को राहत दी है। दिल्ली में यह वोट लगभग 40% है, यदि यह भाजपा की तरफ आया तो उसे उन विधानसभा पर बढ़त मिलेगी जहाँ मिडल क्लास वोटर अधिक हैं। इन सबके अलावा AAP के कई नेताओं के भाजपा में आने से भी फर्क पड़ा है।
AAP की परेशानी केवल भाजपा ही नहीं है। उसको इस बार लोकसभा चुनाव में सहयोगी रही कॉन्ग्रेस से भी टक्कर मिल रही है। 2015 और 2020 में उसे खुला रास्ता देने वाली कॉन्ग्रेस इस बार उस पर हमलावर है। डी फैक्टो कॉन्ग्रेस मुखिया राहुल गाँधी तक सीधे हमले केजरीवाल पर कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस चाहती है कि दिल्ली में उससे छिटका मुस्लिम और दलित वोट उसके पास वापस आए। इसके लिए सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पंजाब के भी कॉन्ग्रेस नेताओं ने जोर लगाया है।
यह सब फैक्टर मिल कर AAP को चुनाव में पीछे कर सकते हैं। अगर जमीनी गुस्से को भाजपा भुना ले जाती है, तो उसे इन चुनाव में सफलता देखने को मिल सकती है। दिल्ली में AAP हारती है, तो यह केजरीवाल और पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका होगा। तब पार्टी के पास केवल पंजाब ही बचेगा, जहाँ दूसरे संकट मंडरा रहे हैं। कॉन्ग्रेस से रिश्ते खराब करना उसकी मुश्किलें और भी बढ़ा देगा।
दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 2 फरवरी 2025 को उप-राष्ट्रपति पॉल मशाटाइल के हाथों देश के सबसे बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ। इस दौरान सैंकड़ों श्रद्धालु वहाँ पहुँचे। साउथ अफ्रीका में रहने वाले हिंदुओं ने इस मौके पर जमकर उत्साह मनाया।
? Deputy President Paul Mashatile addresses the Official Opening of the first phase of the Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha (BAPS) Hindu Mandir (Temple) and Cultural Complex, in Northriding, Johannesburg, Gauteng Province.#GovZAUpdatespic.twitter.com/UXJaUDXpaW
14.5 एकड़ भूमि पर फैला यह मंदिरबोछासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) द्वारा स्थापित किया गया है। इसमें एक सांस्कृतिक केंद्र, 3,000 सीटों वाला ऑडिटोरियम, 2,000 सीटों वाला बैंक्वेट हॉल, शोध संस्थान, कक्षाएँ, प्रदर्शनी और मनोरंजन केंद्र सहित कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ शामिल हैं।
2 फरवरी को इसके उद्घाटन से पहले और 92 वर्षीय महंत द्वारा मंदिर में अनुष्ठान शुरू किए जाने से पूर्व 1 फरवरी को जोहान्सबर्ग में लगभग 12 हिंदू भिक्षुओं द्वारा बैंड और नर्तकों द्वारा भक्ति संगीत के साथ एक छोटी नगर यात्रा निकाली गई थी। वहीं उद्घाटन वाले दिन उपराष्ट्रपति माशाटाइल ने कहा कि हिंदू समुदाय ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उनके पास एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने BAPS के मानवता सेवा और सामाजिक उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
हिंदू मंदिर के भीतर की तस्वीरें
वहीं BAPS प्रवक्ता ने बताया कि भविष्य में इस स्थान को अंतर-सांस्कृतिक और अंतर-धार्मिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए एक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, दूसरे चरण का निर्माण जल्द ही शुरू होगा जिसमें प्राचीन हिंदू वास्तुकला को दर्शाने वाले अधिक सजावटी तत्व शामिल होंगे।
बता दें कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2023 में ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने दक्षिण अफ्रीका गए थे, तब प्रवासी भारतीयों ने उन्हें इस मंदिर की 3डी तस्वीरें दिखाई थीं। यह मंदिर केन्या के नैरोबी में स्थित मंदिर जैसा ही है। इसके निर्माण की शुरुआत साल 2011 में हुई थी और ये 2025 में जाकर पूरा हुआ। इस मंदिर के निर्माण में दुनिया भर के 12,500 स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मालूम हो कि ये मंदिर का बनना इसलिए भी खास है क्योंकि अफ्रीका में हिंदुओं की आबादी 2% है, लेकिन उनकी आबादी का प्रभाव वहाँ बहुत ज्यादा है। यही वजह है कि इतने बड़े मंदिर का निर्माण संभव हो सका।
बांग्लादेशी घुसपैठिए दिल्ली के आर्थिक-सामाजिक और यहाँ तक कि राजनीतिक ढाँचे को नुकसान पहुँचा रहे हैं। स्थानीय लोगों की नौकरियाँ इनके चलते जा रही हैं और सरकारी सुविधाओं पर भी दबाव पड़ रहा है। इस घुसपैठ से दिल्ली के सीलमपुर, जामिया नगर, सुल्तानपुरी और जाफराबाद जैसे इलाकों से डेमोग्राफी बदल गई है। बांग्लादेशी घुसपैठिए कुछ मजहबी समूहों और राजनीतिक लोगों से समर्थन भी पा रहे हैं। यह सारी बातें एक रिपोर्ट में खुली हैं।
यह रिपोर्ट जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) ने जारी की है। रिपोर्ट का नाम ‘दिल्ली में अवैध अप्रवासी: सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिणामों का विश्लेषण’ है। 114 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे बांग्लादेशी घुसपैठियों का देश और विशेष कर राजधानी दिल्ली पर प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट में टाटा इंस्टीट्यूट फॉर सोशल साइंस का भी योगदान है।
पहले अकेले आते हैं, फिर दिल्ली में बसाते हैं परिवार
रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश बांग्लादेशी घुसपैठिए ‘फैमिली फर्स्ट’ नीति अपनाते हैं। पहले परिवार का एक आदमी दिल्ली के भीतर आकर बस जाता है, पैसा कमाता है और रहने की जगह ढूँढता है। इसके बाद वह एक-एक कर पर परिजनों को भी बांग्लादेश से लाना शुरू कर देता है।
रिपोर्ट बताती है कि यह घुसपैठिए पहले कुछ दिन सीमाई राज्यों में रुकते हैं और फिर दिल्ली की तरफ बढ़ते हैं। बीते कुछ दिनों में अवैध महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। दिल्ली आने वाले 43% से अधिक घुसपैठिए पश्चिम बंगाल में रुकते हैं।
रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि वो घुसपैठिए, जो दिल्ली में 10 साल से ज्यादा से रह रहे हैं, उनका नए घुसपैठियों को भारत लाने और यहाँ बसाने में अहम् रोल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में इन घुसपैठियों को मदद करने में इनके खुद के कुछ समूह और मजहबी समूहों का बड़ा हाथ है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बसने के बाद क्षेत्रीय या धार्मिक पहचानों के इर्द-गिर्द बनाए गए समूह इन्हें मदद करते हैं। इसमें बड़ा काम ईद, मुहर्रम और बाकी मजहबी त्योहारों पर होने वाले आयोजन करते हैं। इनमे कुछ राजनीतिक लोग भी शामिल रहते हैं।
NGO-मजहबी ग्रुप कर रहे सपोर्ट
रिपोर्ट ने कहा गया, “दिल्ली में घुसपैठियों को सहायता देने और छत, भोजन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कानूनी सहायता और यहाँ तक कि बैंकिंग तक पहुँच जैसी सेवाएँ देने बिना रजिस्टर किए गए NGO और मजहबी समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कानूनी रूप से इनका दायरा साफ़ नहीं है। ये लोग अवैध प्रवासियों को रोजगार पाने और स्थानीय समुदायों में मिलने-घुलने में मदद करते हैं, कभी-कभी यह सरकारी नियम भी दरकिनार करते हैं।”
रिपोर्ट बताती है, “NGO द्वारा दी जाने वाली सहायता के अलावा, स्थानीय कई राजनीतिक हस्तियों की भी इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। यह अक्सर राजनीतिक वफ़ादारी के बदले में अवैध प्रवासियों को सहायता देते हैं। ये राजनीतिक हस्तियाँ इन्हें घर ढूँढने के लिए फर्जी कागज तक दे सकती हैं। चुनावों के दौरान इन घुसपैठियों की कमज़ोर स्थिति का फ़ायदा उठाया जा सकता है।”
रोजगार छीन रहे, पैसे पहुँचा रहे बांग्लादेश
रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि यह घुसपैठिए स्थानीय लोगों का रोजगार छीन रहे हैं। इनमें से अधिकांश अकुशल क्षेत्रों में लगे हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह घुसपैठिए दिल्ली में कम पैसों पर भी काम करने को राजी हैं। यह दिल्ली के भीतर निर्माण, घरेलू काम, सफाई और रेहड़ी जैसे कामों में जुड़े हैं। इससे दिल्ली के भीतर बेरोजगारी भी बढ़ रही है। यह लोग अपराध और गैर कानूनी धंधों में भी जुड़े हैं। यह दिल्ली की ब्लैक इकॉनमी को बढ़ावा दे रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 80% बांग्लादेशी वापस घर पैसा भेजते हैं
रिपोर्ट बताती है कि यह घुसपैठिए सिर्फ भारत में कमा कर अपना ही काम नहीं चला रहे बल्कि पैसा बांग्लादेश भी भेज रहे हैं। रिपोर्ट ने पाया है कि भारत में रहने वाले 80% बांग्लादेशी घुसपैठिए वापस अपने घर यहाँ कमाया हुआ पैसा भेजते हैं।
लगभग 50% बांग्लादेशियों ने भारत में खाते भी खुलवा लिए हैं। 20% बांग्लादेशी घुसपैठिए जमीन भी खरीद चुके हैं, जो चिंता की बात है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में इस काम से अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ रहा है।
सीलमपुर, जामिया नगर और जाफराबाद जैसे इलाकों में बस रहे
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में रहने वाले 96.3% घुसपैठिए मुस्लिम हैं। इनके चलते दिल्ली के उन इलाकों की जनसांख्यिकी भी बदल गई है, जहाँ यह आकर बसे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी घुसपैठिए सीलमपुर, जामिया नगर, जाकिर नगर, सुल्तानपुरी, मुस्तफाबाद, जाफराबाद, द्वारका, गोविंदपुरी आदि जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में बस जाते हैं। इनके चलते यहाँ रहने वाले निवासियों को मिलने वाली सुविधाओं पर दबाव पड़ता है।
दिल्ली में 1951 के मुकाबले हिन्दू घटे हैं, मुस्लिम दोगुने हुए हैं
दिल्ली में लगातार आ रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के चलते यहाँ की जनसांख्यिकी बिगड़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 1951 में दिल्ली की जनसंख्या में हिन्दू 84% थे जो 2011 तक घट कर 81% हो गए। लेकिन इसी बीच मुस्लिम आबादी 5.7% से बढ़ कर 12.8 के आसपास पहुँच गई।
इसका अर्थ है कि बाकी कारणों के सहित अवैध घुसपैठियों से दिल्ली में मुस्लिम दोगुने हो गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में रहने वाले 75% अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ उठा रहे हैं, इसके चलते स्थानीय लोगों को इलाज नहीं मिलता।
अपराध से जुड़े, इनसे लोकतंत्र को खतरा
रिपोर्ट इनके अपराध और जाली कागजों में जुड़े होने को लेकर भी चिंता जताती है। रिपोर्ट में कहा गया है, “दिल्ली में घुसपैठियों से निपटने में एक महत्वपूर्ण चुनौती फर्जी पहचान दस्तावेजों का उपयोग है। यह अक्सर नकली आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड बनवाते हैं जिससे उन्हें शहर की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में शामिल होने का मौका मिलता है। यह कई मौकों पर पहचान चुराते भी हैं।
रिपोर्ट कहती है कि इनसे देश के लोकतंत्र पर भी प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट कहती है, “इन नकली दस्तावेजों की उपलब्धता भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बारे में चिंताएँ बढ़ती हैं। अगर गैर नागरिक छोटे तौर पर भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं तो यह संभावना एक बड़ा मुद्दा है, इसके चलते प्रवासियों के विरुद्ध कड़ी जाँच की भी बात उठती है।”
पाकिस्तानी हिंदुओं का एक समूह वाघा-अटारी बॉर्डर होते हुए सोमवार (3 फरवरी 2025) को 480 अस्थियाँ लेकर भारत आया है। ये अस्थियाँ पाकिस्तानी हिंदुओं के परिजनों की हैं जिनकी इच्छा थी कि ये गंगा नदी में ही प्रवाहित की जाएँ। भारत आने वाले समूह में कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा भी हैं जो इस काज के लिए चुने जाने पर खुद को धन्य और सौभाग्यशाली मानते हैं।
मीडिया से बातचीत में रामनाथ मिश्रा ने कहा,
“पाकिस्तान में कई हिंदुओं की इच्छा होती है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियाँ गंगा में विसर्जित की जाएॉँ। उनके परिजन उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते हैं। ऐसे में अस्थियों को मंदिरों में कलश में सुरक्षित रखा जाता है। जब पर्याप्त संख्या में कलश इकट्ठे हो जाते हैं, तो भारत का वीजा लेने का प्रयास किया जाता है। इस तरह मृतक या उनके परिवारों की अंतिम इच्छा पूरी होती है। हम लगभग 400+ कलश लेकर आए हैं। ये अस्थियाँ पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित की गई हैं। इन्हें मोक्ष के लिए गंगा में विसर्जित किया जाएगा।”
जानकारी के मुताबिक, इस समूह को महाकुंभ के वक्त अस्थियाँ लेकर भारत आने का वीजा मिला। इनके पास अभी लखनऊ और हरिद्वार जाने का वीजा है, लेकिन इन्हें प्रयागराज जाने की अनुमति मिलने का भी इंतजार है। इसे पाकर वह न केवल लखनऊ और हरिद्वार घूमेंगे बल्कि प्रयागराज जाकर संगम में डुबकी भी लगाएँगे।
वहीं अस्थियाँ विसर्जन की बात करें तो जानकारी यही है कि ये अस्थियाँ 4 से 21 फरवरी तक दिल्ली के सबसे पुराने और बड़े श्मशान घाट, निगम बोध घाट पर रखी जाएँगी। फिर यहाँ कई लोग आकर इन्हें श्रद्धांजलि देंगे और 21 फरवरी को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अस्थियों को हरिद्वार ले जाया जाएगा। 22 फरवरी को सीता घाट पर इनका विसर्जन होगा। इस दौरान 100 किलो दूध की आहुति दी जाएगी।
बता दें कि पाकिस्तान में लोग आर्थिक मजबूरी और अन्य वजहों के कारण अपने परिजनों की अस्थियाँ खुद भारत लाने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में उन्हें इंतजार रहता है कि कोई ऐसा मिले तो इस काम में उनकी मदद कर दे। वैसे उनके पास सिंधु नदी का विकल्प होता है मगर फिर भी कोशिश होती है कि अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित की जाएँ।
ये तीसरी बार है जब पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियाँ भारत लाई गई हैं। इससे पहले ऐसा साल 2011 और फिर साल 2016 में हुआ था। कराची मंदिर के संरक्षक रामनाथ ही 2011 में करीबन 135 अस्थियाँ और 2016 में 160 अस्थियाँ लेकर भारत आए थे। इनमें कुछ को तो 64 साल से संभालकर रखा गया था। इस बार 480 अस्थियाँ लाते हुए राम नाथ मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अस्थियों को 8 साल से श्मशान में रखा हुआ था। जब सरकार से इन्हें भारत लाने की अनुमति दी तो उन्होंने सुरक्षा सुनश्चित करते हुए उन्हें सफेद प्लास्टिस जार में रख दिया था, फिर इनपर लाल रंग के ढक्कन लगाए गए थे।