Home Blog Page 4879

तहजीब रिपोर्टर राशिद ने कहा- भगवा झंडा लगा कर बेच रहा है सब्ज़ी, मेरठ पुलिस ने कहा- उसे अनुमति है

तहजीब टीवी के रिपोर्टर राशिद ने मेरठ में भगवा झंडा लगाकर सब्जी बेचने वाले की गई शिकायत सोशल मीडिया के जरिए की। शुरुआत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने कार्रवाई की बात कही। बाद में जाँच में मेरठ पुलिस ने पाया कि उस सब्जी बेचने वाले के पास देशव्यापी बंद के दौरान सब्जी बेचने का पास मौजूद था।

दरअसल ट्विटर पर तहजीब टीवी के रिपोर्टर राशिद ने एक ऐसे व्यक्ति की शिकायत कर कार्रवाई की माँग की जिसने अपने सब्जी के ठेले पर भगवा झंडा लगा रखा था। तहजीब रिपोर्टर ने यह वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए तमाम पुलिस अकाउंट को टैग करते हुए लिखा- “कंकरखेड़ा क्षेत्र के गुरु नानक बाजार में ठेले पर सब्जी विक्रेता भगवा रंग का ध्वज लगाकर सब्जी बेच रहे है!”

UP पुलिस ने इस पर जवाब देते हुए मेरठ पुलिस को टैग कर इसकी जाँच करने के निर्देश दिए। इस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने आपत्ति जताते हुए उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि इन पर भी कार्रवाई करें।

इसके कुछ देर बाद ही मेरठ पुलिस ने ट्वीट करते हुए स्पष्ट किया कि सब्जी बेचने वाले के पास लॉकडाउन के दौरान सब्जी बेचने के लिए आवश्यक पास मौजूद हैं। मेरठ पुलिस ने लिखा, “उक्त व्यक्ति को लॉकडाउन में सामान बेचने की अनुमति प्रदान है। सोशल डिस्टेंसिंग व लॉकडाउन का पालन करने हेतु निर्देशित किया गया है।”

उल्लेखनीय है कि हाल में मुस्लिमों ने सोशल मीडिया के जरिए झारखंड जैसे राज्य में हिन्दू प्रतीक और भगवा झंडा देखकर उन पर कार्रवाई करने की माँग की। झारखंड में पुलिस ने कई दुकानों से हिन्दू संगठनों के पोस्टर्स हटा दिए।

सोशल मीडिया पर झारखंड में फल बेचने वाले दुकानदारों की तस्वीरों पर झारखंड पुलिस को टैग करते हुए ‘शिकायत‘ दर्ज की गईं। हालाँकि, पुलिस ने भी यह पूछने के बजाए कि दुकान पर हिन्दू संगठन के नाम से किसी की धार्मिक भावनाएँ कैसे आहत हो सकती हैं? सीधे यह सूचना दी कि दुकानों से ऐसे बैनर हटवा दिए गए हैं।

इसी क्रम में तहजीब रिपोर्टर ने भी आज यह पहल की थी। हालाँकि, पुलिस ने जाँच के बाद स्पष्ट किया कि सब्जी बेच रहे व्यक्ति को सब्जियाँ बेचते टाइम लॉकडाउन के नियमों का पालन करने सम्बन्धी निर्देश दे दिए गए हैं ।

रडार पर मौलाना साद का वह बैंक अकाउंट, जिससे 48 घंटे में करोड़ों होते थे ट्रांसफर, UP में 9 विदेशी जमाती गिरफ्तार

देश में बड़े स्तर पर कोरोना वायरस को फैलाने के जिम्मेदार माने जा रहे तबलीगी जमातियों पर अब लगभग हर राज्य में एक्शन लिया जा रहा है। इस क्रम में आज यूपी पुलिस ने शाहजहाँपुर में थाईलैंड से आए 9 विदेशियों समेत 11 जमातियों को गिरफ्तार किया गया। विदेशी जमातियों पर विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने भी तबलीगी जमात पर अपना शिकंजा कस लिया है। खबर है कि इस समय मौलाना साद से जुड़े एक ऐसे बैंक अकाउंट के बारे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें करोड़ों रुपए की ट्रांसैक्शन होती थी। लेकिन ये करोड़ों रुपए मात्र 48 घंटे में गायब हो जाते थे।

लोकमत की खबर के अनुसार, पुलिस अधीक्षक दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि 2 अप्रैल को शहर के ही मोहल्ला खलील सरकी में जमात से लौटे थाईलैंड के 9 लोगों और तमिलनाडु के 2 लोगों को तथा इन्हें मस्जिद में ठहराने वाले एक व्यक्ति को पकड़ा गया था।

इसके बाद इन सभी का कोरोना टेस्ट कराया गया था। टेस्ट के परिणामों में थाईलैंड से आए एक जमाती को कोरोना से संक्रमित पाया गया था। जिसे पुलिस ने इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया था और बाकियों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया था।

क्वारंटाइन की अवधि पूरी हो जाने और पॉजिटिव पाए गए मरीज के पूरी तरह ठीक हो जाने के बाद सभी का मेडिकल कराया गया और रिपोर्ट आते ही सभी को जेल भेज दिया गया। बता दें जिस अस्थाई जेल में जमातियों को रखा गया है, उसके बाहर पुलिस का कड़ा पहरा लगाया गया है।

एक ओर राज्य सरकारों के आदेश के बाद से तबलीगी जमातियों की धर पकड़ जारी है। वहीं, दूसरी ओर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच तबलीगी मकरज जमात के बैंक ऑफ इंडिया के उस खाते के बारे में जानकारी हासिल करना चाह रही है, जिसमें पैसे आने के 24-28 घंटे के भीतर करोड़ों रुपए गायब कर दिए जाते थे। ये पैसे ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे के भीतर अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे। 

दिलचस्प बात ये है कि मरकज के लिए होने वाली फंडिंग की कमान मौलाना साद, उसके दो बेटे व भांजे के हाथ में थी। ये चारों ही सारे लेनदेन की देख-रेख करते थे।

यहाँ बता दें तबलीग़ी मरकज के मुखिया मौलाना मुहम्मद साद को क्राइम ब्रांच लगातार नोटिस भेज रही है। लेकिन, वह न तो पुलिस को इन नोटिसों का ठीक से जवाब दे रहा है और न ही जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार है। हालत यह है कि क्राइम ब्रांच ने चौथा नोटिस तीन दिन पहले भेजा है। जिसका ठीक से जवाब नहीं मिलने पर अब 5वाँ नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है। दूसरी ओर जगह-जगह से तबलीगी जमातियों के पकड़े जाने का उनपर उपयुक्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है।

प्रशांत भूषण को SC ने फटकारा, कहा- टीवी पर कोई कुछ भी देख सकता है: रामायण-महाभारत को बताया था ‘अफीम’

रामायण-महाभारत को अफीम बताने वाले वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, “जिसको टीवी पर जो देखना है, देख सकता है।” प्रशांत भूषण गुजरात में दर्ज एफआईआर के खिलाफ SC पहुँचे थे। कोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई की। न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने प्रशांत भूषण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे से कहा, “कोई भी व्यक्ति टीवी पर कुछ भी देख सकता है। आप कैसे कह सकते हैं कि लोग इसे और उसे नहीं देख सकते हैं?” जवाब में दवे ने कहा कि हम टीवी पर कुछ देखने वाले लोगों पर नहीं हैं, बल्कि हम एफआईआर पर हैं।

कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद गुजरात पुलिस को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने भूषण के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई और गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है।

इस मामले पर ट्वीट करते हुए पत्रकार दीपक चौरसिया ने लिखा, “प्रशांत भूषण जी, आपको देश से जुड़ी विरासत और संस्कृति से इतनी दिक़्क़त क्यों होती है। आज फिर कोर्ट ने आपकी बचकानी हरकतों के चलते फटकार लगाई है। रामायण और महाभारत हमारी संस्कृति का आधार है।”

दरअसल पिछले महीने गुजरात की राजकोट पुलिस ने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण द्वारा रामायण-महाभारत को लेकर किए गए विवादास्पद ट्वीट मामले में मुकदमा दर्ज किया था। साथ ही प्रशांत भूषण के ट्वीट का समर्थन करने और लोगों को भड़काने के आरोप में पुलिस ने एश्लीन मैथ्यू और कन्नन गोपीनाथन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था।

भारतीय सेना में पूर्व सेनाधिकारी कैप्टन जयदेव जोशी की ओर से की गई शिकायत में कहा गया था कि अदालतों में गवाही से पहले धार्मिक ग्रन्थों की शपथ दिलाई जाती है। अगर इन ग्रन्थों को अफीम का नशा माना जाएगा तो इस गवाही का अर्थ ही खत्म हो जाएगा। शिकायत के आधार पर 13 अप्रैल को राजकोट शहर के भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। एफआईआर के बाद प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

प्रशांत भूषण ने 28 मार्च को ट्वीट करते हुए लिखा था, “लॉकडाउन के कारण करोड़ों भूखे और सैकड़ों घर जाने के लिए मीलों चल रहे हैं, हमारे हृदयहीन मंत्री लोगों को रामायण और महाभारत की अफीम का सेवन करने और खिलाने के लिए मना रहे हैं!”

गौरतलब है कि देश में जारी लॉकडाउन के बीच केन्द्र सरकार द्वारा दूरदर्शन पर प्रसारित किए गए रामायण और महाभारत ने टीआरपी में टीवी के इतिहास में पिछले पाँच साल के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले दिनों प्रसार भारती के CEO ने लिखा था, “मुझे यह बताते हुए काफी ख़ुशी हो रही है कि दूरदर्शन पर प्रसारित हो रहा शो ‘रामायण’ 2015 से अब तक का सबसे अधिक टीआरपी जनरेट करने वाला हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट शो बन गया है।”

महाराष्ट्र: उद्धव सरकार ने प्लाज्मा थेरेपी से जिस कोरोना संक्रमित के ठीक होने का किया था ऐलान, उसकी मौत

प्लाज्मा थेरेपी से जिस कोरोना संक्रमित के ठीक होने का ऐलान महाराष्ट्र में स्वास्थ्य मंत्री राजेश तोपे ने किया था उसकी मौत हो गई है। गुरुवार को इस संक्रमित व्यक्ति ने अस्पताल में आखिरी सॉंसें ली। इसने प्लाज्मा थेरेपी से संक्रमितों के उपचार को लेकर किए जा रहे दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

बुधवार को तोपे ने ऐलान किया था कि प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी का पहला प्रयोग सफल हो गया है। उन्होंने बताया था कि लीलावती अस्पताल में भर्ती एक 53 वर्षीय मरीज पर यह इलाज सफल रहा है। लिहाजा NYL नय्यर अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीज को भी यह उपचार दिया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, 53 वर्षीय व्यक्ति की 19 अप्रैल को रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उसे 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की मानें तो गले में खरास, सूखी खाँसी और बुखार जैसे लक्षण होने के बावजूद मरीज ने अपना टेस्ट कराने में देरी की। इसके कारण उसमें कोरोना संक्रसंक्रमण होने की पहचान बहुत देर से हुई। इसी वजह से उन्हें पहले ही साँस की परेशानी हो गई थी और अस्पताल पहुँचते ही उन्हें आईसीयू में भर्ती कर दिया गया था।

25 अप्रैल को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य में पहली प्लाज्मा थेरेपी की गई। इस तरह से यह मरीज राज्य के लिए उम्मीद की किरण जैसा था क्योंकि राज्य में प्लाज्मा थेरेपी का क्लीनिकल ट्रायल किया गया था। पहले दिन उसे 200 एमएल प्लाज्मा चढ़ाया गया था। इसके बाद थोड़ा सुधार हुआ। लेकिन 27 अप्रैल की सुबह मरीज की सेहत फिर से बिगड़ने लगी। इसके बाद उसको एंटीबॉयोटिक दवाओं की डोज भी दी गई। साथ ही मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए अगले दो ट्रायल को स्थगित करना पड़ा। बाद में यानी कल खबर आई कि वे कोरोना से जंग हार गए हैं।

प्रयोग की इस विफलता को देखसोशल मीडिया पर सवाल उठे हैं। अंकुर सिंह नाम के यूजर ने पूछा है कि आखिर उद्धव ठाकरे सरकार मीडिया प्रचार के लिए इतनी उतावली क्यों रहती है? वह परिणामों का इंतजार क्यों नहीं करती? वह कहते हैं कि मीडिया ने एक ऐसी थेरेपी के लिए तबलीगी जमातियों को हीरो बना दिया है जिसे अभी अप्रूव भी नहीं किया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा था कि प्लाज्मा थेरेपी अभी कारगर साबित नहीं हुई है। यह अभी सिर्फ प्रायोगिक चरण में ही है। साथ ही उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस के उपचार में यदि प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं हुआ तो यह जान के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

बावजूद प्लाज़्मा थेरेपी के चर्चा में आते ही अचानक से ‘सेक्युलर’ राजनेता और ‘वाम-उदारवादी’ लिबरल गिरोह सक्रिय हो उठे। प्लाज्मा डोनेट करते हुए एक तबलीगी की तस्वीर को आधार बनाकर बहस का मुद्दा यह बना दिया गया कि मुस्लिम भी कोरोना वायरस के इलाज के लिए आगे आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो लोग आज तक यह स्वीकार करने में कतराते रहे कि देश में कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत तबलीगी जमात रहा है, वह भी इस बात पर गद्य लिखते नजर आने लगे।

बता दें, महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्या 10 हजार पार कर गई है। बीते 24 घंटे में 583 नए केस सामने आए हैं। राज्य में बीते 24 घंटे के 27 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक कुल 459 लोगों की कोविड-19 महामारी से मौत हो चुकी है। राज्य में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 10498 तक पहुँच गई है।

पुलिस में है योगी को गोली मारने की बात कहने वाला तनवीर खान, अकाउंट किया डिएक्टिवेट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात सोशल मीडिया में लिखने वाले तनवीर खान को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है। तनवीर खान को लेकर मामला इस कारण भी जोर पकड़ रहा है, क्योंकि वह खुद उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत है।

बृहस्पतिवार (अप्रैल 30, 2020) को तनवीर खान का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें उसने लिखा था कि रमजान में अजान नहीं हो रही है, इसलिए योगी को गोली मार देनी चाहिए। सोशल मीडिया पर विवेक भारद्वाज ने ऐसी मानसिकता के लोगों का पुलिस विभाग में होना दुर्भाग्य बताते हुए लिखा है, “इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था, यह जानने के बावजूद इस प्रकार की मानसिकता के लोगों का पुलिस और भारतीय सेना में होना आश्चर्यजनक है। ऐसे लोग सलाखों के भीतर होने चाहिए, ना कि वर्दी में।”

कई अन्य लोगों ने भी पूछा है कि इस प्रकार की कुत्सित विचारधारा के लोग उत्तर प्रदेश पुलिस में कैसे रह सकते हैं?

इस ट्वीट के जवाब में गाजीपुर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के लिए साइबर सेल को सूचना दी जाने की बात कही है।

तनवीर खान ने लिखा- अजान नहीं हो रही, योगी को गोली मार दो

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच मुसलमानों का पवित्र रमजान का महीना शुरू हो चुका है। विभिन्न राज्यों की सरकारें नमाजियों से घर पर ही नमाज पढ़ने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील कर रही हैं। नमाज और अजान पर निर्देशों से गुस्साए तनवीर खान नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कही।

तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो*** को।” पोस्ट वायरल होते ही तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया है। लेकिन कुछ लोगों ने ट्विटर पर उसके पोस्ट के स्क्रीनशॉट लेते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से इस पर संज्ञान लेने की अपील की।

प्रयागराज: पत्रकार यूसुफ अंसारी ने फैलाई झूठी खबर कि प्रशासन सिर्फ दूसरे मजहब वालों के घरों में लगा रही क्वारंटाइन पोस्टर्स, FIR दर्ज

कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण के बीच लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे में इससे जुड़ी निराधार व झूठी खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर फर्जी खबर फैलाने के आरोप में प्रयागराज पुलिस ने कल (30.4.20) एक शिकायत दर्ज की जिसमे यूसुफ अंसारी नामक पत्रकार पर जिला प्रशासन ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर सोशल मीडिया पर झूठ खबर फैलाने का आरोप हैं। जिसके चलते पुलिस ने उसपर कार्रवाई शुरू कर दी है।

यूसुफ अंसारी ने salaamindianews.com नामक वेबसाइट में एक ‘रिपोर्ट‘ प्रकाशित किया था। जिसमें दावा किया गया था कि जिला प्रशासन कुछ घरों के बाहर पोस्टर लगा रहा है, जो उस घर में सदस्य (सदस्यों) की क्वारंटाइन स्थिति घोषित कर रहे हैं, साथ ही परिवार के सदस्यों के पास आने, बाहरी लोगों को घर में आने से बचने और उनसे किसी भी तरह से संपर्क बनाने की चेतावनी दे रहे हैं।

हालाँकि, यूसुफ अंसारी की रिपोर्ट में दावा किया गया कि प्रशासन का दूसरे मजहब वालों को पीड़ित करने के उद्देश्य से यह एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है, क्योंकि ऐसे पोस्टर केवल मजहब विशेष के घरों के बाहर लगाए गए हैं।

रिपोर्ट में, यूसुफ अंसारी ने आगे यह भी दावा किया कि जिला प्रशासन ऐसे घरों पर पोस्टर लगा रहा है, जहाँ संबंधित व्यक्तियों ने पहले ही अपने क़्वारन्टाइन पीरियड को पूरा कर लिया है। उन्होंने लिखा कि यह सरकार द्वारा समुदाय विशेष को अलग-थलग करने और बदनाम करने की कोशिश है। साथ ही एक वकील के नाम का भी हवाला दिया गया और लिखा कि इस तरह के पोस्टर ‘मानव अधिकारों का उल्लंघन’ हैं। यहाँ तक ​​कि उन्होंने सरकार द्वारा दूसरे मजहब के क्वारंटाइन पोस्टरों को ‘उत्पीड़न’ भी कहा।

इन सभी दावों पर तेजी से कार्रवाई करते हुए, एसएसपी प्रयागराज ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह दावे पूरी तरह से झूठे हैं और प्रयागराज पुलिस ने तथाकथित पत्रकार के खिलाफ झूठ फैलाने और सांप्रदायिक कलह को बढ़ावा देने की कोशिश करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रयागराज के एसएसपी ने आगे बताया कि उक्त ’पत्रकार’ युसुफ अंसारी से अधिकारियों द्वारा उनके दावों के आधार के बारे में पूछताछ करने के लिए संपर्क किया गया था, जिसके बाद उन्होंने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया और कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस अधिकारी ने आगे कहा कि पुलिस ऐसे गैर-जिम्मेदार ‘पत्रकार’ को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।

उल्लेखनीय है कि इस तरह के पोस्टर सभी राज्यों में एक सामान्य घटना है, जहाँ स्थानीय प्रशासन ऐसे पोस्टर्स उन सभी के घरों के बाहर लगाता है। जिन्हें विदेश यात्रा के बाद या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद घर में ही क्वारंटाइन किया जाता है। क्वारंटाइन पोस्टर्स के तहत व्यक्तियों और क्वारंटाइन अवधि के विवरण को सूचित किया जाता हैं। क्योंकि आपस में दूरी बनाए रखने पर ही इस महामारी के संक्रमित होने से बचा जा सकता है।

इससे पहले भी TOI, NDTV के कई पत्रकारों ने झूठी खबर चला कर जनता में दर और सनसनी परोसनी चाही जिसे थोड़े ही देर में बेनकाब कर दिया गया है।

शराब से गले का कोरोना साफ होगा, खोल दें दुकानें: राजस्थान के कॉन्ग्रेस MLA ने CM गहलोत को लिखी चिट्ठी

कॉन्ग्रेस विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने राजस्थान में शराब की दुकानें खोलने की मॉंग की है। इस बाबत उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिट्ठी लिखी है। उनका कहना है कि शराब पीने से गले का कोरोना वायरस साफ होगा। साथ ही सरकार को राजस्व भी मिलेगा।

सीएम अशोक गहलोत को लिखे पत्र में सांगोद से विधायक भरत सिंह ने तर्क दिया है कि अगर शराब से हाथ धोने पर कोरोना वायरस को नष्ट किया जा सकता है तो शराब पीने से निश्चित रूप से गले से वायरस को भी समाप्त किया जा सकता है।

विधायक ने पत्र में लिखा है कि कोरोना वायरस के चलते देश में जारी लॉकडाउन के कारण देश भर में शराब की दुकानें बंद हैं। इससे एक तरफ तो प्रदेश के सभी जिलों में अपराध में भारी कमी आई है, लेकिन शराब की बिक्री नहीं होने से लगातार शराब की कालाबाजारी बढ़ रही है। अवैध शराब का धंधा पनप रहा है, इसका धंधा करने वालों के लिए यह स्वरोजगार योजना बन गई है।

शराब माफियाओं के लिए यह पैसा कमाने का सुनहरा अवसर भी है, क्योंकि बाजारों में शराब की माँग है। इसके बाद भी शराब बेचने के लिए केंद्र सरकार कभी अनुमति नहीं देगी, क्योंकि यह एक बदनाम चीज है। इसके कारण सरकार को राजस्व की हानि हो रही है।

भरत सिंह ने पत्र में लिखा है कि राजस्थान सरकार ने वर्ष 2020-21 में शराब की बिक्री से 12,500 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था। लेकिन लॉकडाउन के चलते यह पूरा होता नहीं दिख रहा है। इसलिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है, जबकि अच्छा तो यह है कि सरकार शराब की दुकानों को ही खोल दे। इससे शराब पीने वालों को समय से शराब मिलेगी और सरकार को राजस्व भी मिलेगा।

विधायक ने एक का जिक्र घटना करते हुए बताया कि देशी शराब का सेवन करने से दो लोगों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि हथकड़ शराब पीकर लोग अपनी जान गँवा रहे हैं इससे अच्छा है कि सरकार राज्य में शराब की दुकानों को खोल दे।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कुछ शर्तों के साथ दुकानें खोलने की इजाजत दी थी। इसे लेकर गृह मंत्रालय ने शनिवार (अप्रैल 25, 2020) को स्पष्टीकरण जारी किया था। इसके मुताबिक आदेश में कहा गया था कि बाजार में स्थित दुकानों, मार्केट कॉम्प्लेक्स और शॉपिंग मॉल को खोलने की इजाजत नहीं है। शराब, सिगरेट, तंबाकू समेत सभी नशीली चीजों की बिक्री पर रोक पहले की तरह जारी रहेगी। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियाँ अभी गैरजरूरी सामानों की डिलिवरी नहीं कर सकेंगी। वह सिर्फ जरूरी सामानों की ही डिलीवरी जारी रखेंगी।

केजरीवाल सरकार की लापरवाही के चलते आजादपुर मंडी से अब अन्य राज्यों में हो रही कोरोना की सप्लाई

राजधानी दिल्ली में लगातार कोरोना के बढ़ते मामले सामने आ रहे हैं। वहीं केजरीवाल सरकार की लापरवाही के चलते दिल्ली के आजादपुर मंडी में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण से हड़कंप मच गया है। एशिया की इस सबसे बड़ी मंडी पर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब आजादपुर मंडी से निकली कोरोना की बीमारी से सिर्फ दिल्लीवासी ही नही बल्कि अन्य राज्य के लोगो को भी अपने शिकंजे में ले रही हैं। जिसमें अलवर, झज्जर और बहादुरगढ़ मुख्य रुप से शामिल हैं।

पिछले दिनों मंडी की 13 दुकानें कोरोना के चलते सील कर दी गयी थी। साथ ही 43 लोगों को प्रशासन द्वारा क्वारनटीन भी किया गया। जिनके खाने का इंतजाम मंडी की तरफ से किया जा रहा है।

लॉकडाउन के वक़्त केजरीवाल सरकार द्वारा 24 घण्टे मंडी को खोले रखने के फैसले ने हालात को बद से बदतर बना दिया। कहा जा रहा था कि हालात और जरूरत को देखते हुए मंडी के कामकाज को हरी झंडी दी गई थी। मगर इस दौरान लोगो की आवाजाही बढ़ गई, और लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग को बिल्कुल नज़रंदाज कर दिया। सैनिटाइजेशन और साफ़ सफाई तो ज़मीनी स्तर पर ही धराशाही हो गए। अब बढ़ते संक्रमण को देखते हुए व्यापारियों और मजदूरों में दहशत का माहौल है।

मंडी से पहुँचा अलवर कोरोना वायरस

बहरहाल, आजादपुर मंडी का कोरोना कनेक्शन राजस्थान के अलवर तक पहुँचा गया है। अलवर में सब्जी की खेती करने वाला एक शख्स कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। कोरोना संक्रमित शख्स बानसूर सब्जी मंडी और दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में सब्जियाँ बेचने पर पेमेंट लेने के लिए आता-जाता था। फिलहाल जिला प्रशासन, मेडिकल टीम बनाकर युवक की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रहा है। उसके संपर्क में सब्जी की गाड़ी ले जाने वाले ड्राइवर और उसके परिवार को क्वारनटीन किया गया है। तीन किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है। सब्जियों की खेती करने वाले यूपी से 700 से अधिक लोगों और उनके परिवार की भी स्क्रीनिंग की जा रही है।

बहादुरगढ़ और झज्जर में भी बढ़े आँकड़े

आज़ादपुर मंडी के चलते बहादुरगढ़ और झज्जर में कोरोना बम फूटे है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली से सब्जियाँ लाने और बेचने के दौरान ही संक्रमण 1 जगह से दूसरी जगह फैला है। 10 नए मामलों में 7 का सीधा संबंध सब्जी मंडी से देखते हुए जिला प्रसाशन ने मंडी को अगले आदेशों तक बंद कर दिया है। सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग भी कर दी गई है। नगर परिषद की टीमों ने सैनेटाइजेशन का काम शुरू कर दिया है। दिल्ली सीमा पर भी सख्ती बढ़ाते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कोरोना संक्रमति लोगों के परिजनों, संपर्क में आए लोगों की पहचान का काम शुरू कर दिया है। सब्जी मंडी और अनाज मंडी से जुड़े लोगों की सैम्पलिंग की जा रही है।

दिल्ली मे आँकड़े की बात करे तो अबतक कुल 3,515 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि 59 लोगों की इस जानलेवा वायरस से मौत हो चुकी हैं और 1094 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

दिल्ली बढ़ते मामलों को देखते हुए ये कहा जा सकता है की लॉकडाउन का उल्लंघन और कोरोना को लेकर लापरवाही ही दिल्ली में तेजी से फैलते संक्रमण का कारण हैं। जिसके चलते आज आजादपुर मंडी सब्जी और फलों की सप्लाई की जगह कोरोना वायरस की सप्लाई के लिए जाना जा रहा हैं।

डोडा नरसंहार: गाँव में घुसे 10-12 आतंकी, हिंदुओं को लाइन में खड़ा किया, 3 साल की बच्ची समेत 22 को मारी गोली

जम्मू-कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने समय-समय पर हिन्दुओं का नृशंस नरसंहार किया है। अप्रैल 30, 2006 को जम्मू स्थित डोडा में अंजाम दिया गया नरसंहार एक ऐसी घटना है जिस पर भारतीय मीडिया और लिबरल गिरोह बात करना पसंद नहीं करता है। डोडा और उधमपुर जिलों में दो अलग-अलग आतंकवादी हमलों में कम से कम 35 हिंदू ग्रामीण मार दिए गए थे।

कुल्हड़ और थरवा के पहाड़ पर रहने वाले हिन्दुओं को रात में उनके घरों के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिनमें एक तीन साल की बच्ची भी शामिल थी। इसके अलावा तेरह हिन्दू चरवाहों की हत्या ललन गल्ला के उत्तरी इलाके में की गई थी, यह बसंतगढ़ शहर के ऊपर एक ऊँची घास का मैदान है।

अप्रैल 30, 2020 को इस घटना को चौदह साल पूरे हो चुके हैं।

क्या हुआ था 2006 के डोडा नरसंहार में

अप्रैल 30, 2006 के दिन डोडा ज़िले के थावा गाँव में 10-12 इस्लामिक आतंकवादियों ने निहत्थे गाँव वालों पर हमला कर दिया। रात के अँधेरे में आए आतंकवादी सेना की वर्दी पहने हुए थे। रात के 2:30 बजे आतंकवादी गाँव में घुसे तो सबका धर्म पूछकर उन्हें घर से बाहर निकाला। जो हिन्दू थे उनको बाहर निकालकर लाइन में खड़ा कर दिया गया और फिर इस्लामिक आतंकवादियों ने 22 हिन्दुओ को गोलियों से भून दिया। इसमें एक 3 साल की बच्ची भी थी।

आतंकियों ने तीन साल की बच्ची तक को नहीं छोड़ा

इस घटना के बाद ग्रामीण हिन्दू मदद के लिए पास के एक सेना शिविर में गए। अगली सुबह जब सैनिक वापस आए आतंकी वहाँ से भाग चुके थे।

इसी हमले के साथ उधमपुर ज़िले के बसंतगढ़ क्षेत्र में लालों गाँव में भी आतंकवादियों ने 13 हिन्दू चरवाहों का अपहरण किया और उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। दोनों ही नरसंहारों के लिए पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तय्यबा (Lashkar-e-Taiba) ज़िम्मेदार था। माना जाता है कि इस नरसंहार का ध्येय भारत सरकार और हुर्रियत कॉफ्रेंस के बीच होने वाली वार्ता को रोकना था।

दरअसल, उस दौरान कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था। इसके बावजूद जम्मू क्षेत्र के हिन्दुओं ने चुनाव में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था, जिसका खामियाजा उन्हें इस नरसंहार के रूप में भुगतना पड़ा।

केंद्र में उस दौरान कॉन्ग्रेस की सरकार हुआ करती थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद, दोनों ने इन सामूहिक हत्याओं की निंदा की थी। 1989 में कश्मीर में सशस्त्र अलगाववादी विद्रोह शुरू होने के बाद से 2006 के नरसंहार की घटना तक वहाँ पर 60,000 से अधिक लोग मारे जा चुके थे।

1989 से हुई थी कश्मीर में हिन्दुओं पर अत्याचार की शुरुआत

कश्मीर में हिंदुओं पर अत्याचारों का सिलसिला वर्ष 1989 में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था। इस संगठन ने कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया और नारा दिया – “हम सब एक, तुम भागो या मरो।”

इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने बड़ी संख्या में घाटी छोड़ दी, उन्हें अपने पुश्तैनी जमीन-मकान और परिवार को मजबूरन छोड़ना पड़ा। बड़ी सम्पत्ति के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोड़कर रिफ्यूजी कैंपों में रहने को मजबूर हो गए।

इस दौरान इस्लामिक आतंकियों ने 300 से अधिक हिंदू महिला और पुरुषों की हत्या की। घाटी में कश्मीरी पंडितों के बुरे दिनों की शुरुआत 14 सितंबर 1989 से हुई जब भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और वकील कश्मीरी पंडित, तिलक लाल टपलू की जेकेएलएफ (JKLF) ने हत्या कर दी।

मस्जिदों से घाटी छोड़ने के ऐलान

एक स्थानीय उर्दू अखबार ‘हिज्ब-उल-मुजाहिदीन’ की तरफ से ऐसी प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित की गईं जिसमें लिखा था कि सभी हिंदू अपना सामान बाँधें और कश्मीर छोड़ कर चले जाएँ। इसी के साथ कई अन्य स्थानीय समाचार-पत्र इस निष्कासन के आदेश को दोहराने लगे।

इस्लामिक आतंकवाद की पराकाष्ठा यह थी कि मस्जिदों में भारत एवं हिंदू विरोधी भाषण दिए जाने लगे। सभी कश्मीरियों को इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाने की सलाह दी जाने लगीं ताकि हिन्दुओं को पहचानना आसान रहे। इसके बाद जस्टिस नीलकंठ गंजू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस दौर के अधिकतर हिंदू नेताओं की हत्या एक के बाद एक सिलसिलेवार तरीके से कर दी गई। घाटी में हिन्दू महिलाओं के साथ सरेआम बलात्कार किए जाने लगे।

एक कश्मीरी पंडित नर्स के साथ आतंकियों ने सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। घाटी में मौजूद कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण की घटनाएँ होती रहीं और हिन्दुओं के हालात बदतर होते गए।

घाटी में अब जाकर केंद्र सरकार ने इस्लामिक आतंक पर काबू पाने की दिशा में गंभीरता से प्रयास किए हैं। जम्मू-कश्मीर में वर्षों से चले आ रहे अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त करना केंद्र सरकार की प्रबल इच्छाशक्ति का ही उदाहरण है। हालाँकि, इस पर आज तक भी देशभर में कम्युनिस्ट और वाम-उदारवादियों का विरोध देखने को मिल रहा है। इसके पीछे एक प्रमुख वजह कम्युनिस्टों की आतंकवादियों के लिए दबी हुई निष्ठा और हिन्दुओं से घृणा भी है।

महाराष्ट्र: मालेगाँव में 40 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव, ठाणे में 20 दिन का बच्चा भी संक्रमित, बना नया हॉटस्पॉट

महाराष्ट्र में आए दिन संक्रमितों का आँकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा हैं। उसी क्रम में महाराष्ट्र का मालेगाँव कोरोना वायरस का नया हॉट स्पॉट के रूप में उभर कर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक यहाँ के कंटेनमेंट जोन में ड्यूटी कर रहे 40 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। पुलिसकर्मियों एवं एसआरपीएफ जवानों के कोरोना प्रभावित होने से वहाँ स्थिति और भयावह होती जा रही है। बता दें कि पिछले 24 घंटों में यहाँ 82 नए मामले सामने आए हैं। जिसके चलते अब मरीजों की कुल संख्या 258 पहुँच गई है।

यहाँ बिगड़ती स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्यमंत्री राजेश टोपे, गृहमंत्री अनिल देशमुख एवं नासिक के प्रभारी मंत्री छगन भुजबल को एक समीक्षा बैठक करनी पड़ी। मालेगाँव धुले संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। यहाँ के सांसद डॉ. सुभाष भामरे ने कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे एवं गृहमंत्री अनिल देशमुख को पत्र लिखकर मालेगाँव की कानून-व्यवस्था के प्रति चिंता जताई थी और इसके नया हॉट स्पॉट बनने की आशंका व्यक्त की थी।

गौरतलब है कि यह वहीं मालेगाँव हैं जहाँ कुछ दिन पहले 100-150 लोगों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।

वहीं मालेगाँव के ही आज़ादपुर क्षेत्र में लॉकडाउन के बावजूद एक जनाजे में 500 से 600 की तादाद में लोग मातम मनाने जा रहे थे। फिर पुलिस के समझाने के बाद भीड़ वापस लौटी थी। लगभग छह लाख की आबादी वाले इस कस्बे में 75 फीसद आबादी मुस्लिम समुदाय की है। कस्बे के बिगड़ते हालात को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम वहाँ भेजी जा रही है। कोरोना पीड़ितों के संपर्क में आए लोगों को डॉक्टरों की देखरेख में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के डोज भी देने की तैयारी की जा रही है।

धारावी में नही रुक रहा संक्रमण

वहीं दूसरी ओर मुम्बई के धारावी में अब तक कोरोना वायरस की वजह से 18 लोगों की मौत हो चुकी हैं। बीते दिनों वहाँ कोरोना के 25 नए मामले सामने आए हैं। जिसके चलते अब कुल 369 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण में भी अब तक तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। 162 लोग कोरोना से संक्रमित हैं, जिसमें 20 दिन का एक बच्चा भी कोरोना से संक्रमित पाया गया है। केडीएमसी के चिकित्सा अधिकारी डॉ राजू लवांगरे ने बताया कि कल्याण डोम्बिवली नगर निगम क्षेत्र में इस शिशु समेत कम से कम छह लोग संक्रमित पाए गए हैं।

महाराष्ट्र में कुल मामले

महाराष्ट्र में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 10 हजार के पार पहुँच गई है। पूरे महाराष्ट्र में कुल 733 इलाकों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। जबकि अब तक करीब डेढ़ लाख लोगों का कोरोना टेस्ट कराया जा चुका है। इसी बीच उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने ट्वीट कर एक राहत भरी खबर भी दी है कि महाराष्ट्र का बारामती जिला कोरोना मुक्त हो गया है। यहाँ अब कोरोना का एक भी संक्रमित मरीज नहीं है।