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बैंक में चपरासी था डायरेक्टर, चेयरपर्सन को मिलते थे ₹1000 हर माह: RBI ने प्रतिबंध बढ़ाया

पुलिस जाँच में सामने आया है कि 'द नीड्स आफ लाइफ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड' के अधिकारियों ने कथित तौर पर डायरेक्टर के पद पर एक चपरासी का नाम दिया हुआ था। चेयरपर्सन के तौर पर एक ऐसी महिला की नियुक्त थी, जो खुद इस बात से अंजान थी।

मुंबई स्थित द नीड्स आफ लाइफ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर लागू प्रतिबंधों को भारतीय रिजर्व बैंक ने छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। प्रतिबंध अब 31 अक्टूबर 2020 तक लागू रहेंगे। रिजर्व बैंक ने बैंक पर नया कर्ज देने और पुराने कर्ज का नवीनीकरण करने पर रोक लगा दी है। साथ ही बैंक से धन निकासी पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

बैंक को उसकी वित्तीय स्थिति में सुधार होने के साथ प्रतिबंधों के तहत ही बैंकिंग कारोबार करने की अनुमति दी गई है। केन्द्रीय बैंक ने अपने आदेश में कहा है कि उसके द्वारा 26 अक्टूबर 2018 को जारी किए गए निर्देश बैंक पर और छह माह (30 अप्रैल 2020 से 31 अक्टूबर 2020 तक) लागू रहेंगे।

दरअसल बैंक पर लगाए गए प्रतिबंधों के पीछे अभी तक पुलिस जाँच में जो बातें सामने आई हैं, वह बेहद चौंकाने वाली हैं। पुलिस जाँच में सामने आया है कि ‘द नीड्स आफ लाइफ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड’ के अधिकारियों ने कथित तौर पर डायरेक्टर के पद पर एक चपरासी का नाम दिया हुआ था। चेयरपर्सन के तौर पर एक ऐसी महिला की नियुक्त थी, जो कि खुद ही इस बात से अंजान थी।

अमिता महाजन नाम की महिला ने पुलिस को बताया कि बैंक की सीईओ मनीषा जाधव के साथ उसकी दोस्ती एक लोकल ट्रेन में हुई थी। इस बीच मनीषा ने महिला से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए, जिसके बदले मनीषा ने महिला को प्रति माह एक हजार रुपए देने की बात कही थी, जबकि महिला इस बात से एकदम अनजान थी कि वह उस बैंक की चेयरपर्सन है।

वहीं मुंबई मिरर से बात करते हुए बैंक की सीईओ मनीषा जाधव ने कहा है कि हमने अपने ग्राहकों को नहीं ठगा है, बल्कि हमने सिर्फ फंड को विभिन्न एनपीए खातों में भेजा है। बैंक वित्तीय तौर पर मजबूत है और कोई धोखाधड़ी नहीं हुई है। जब मनीषा से अमिता महाजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि केस दर्ज होने के बाद अमिता महाजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अब वह इस बैंक का हिस्सा नहीं है।

इसी बीच बैंक के वाइस चेयरमैन घनशानी और मनीषा जाधव की अंतरिम जमानत सत्र न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई है और उन्हें फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा 7 दिसंबर तक अंतरिम संरक्षण प्राप्त है। आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ने मडगांव अर्बन को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड पर लागू प्रतिबंधों को भी तीन माह बढ़ाकर दो अगस्त तक कर दिया गया है। बैंक पर लागू प्रतिबंध दो मई 2020 को समाप्त हो रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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