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असम: कोरोना के बीच अफ्रीकन स्वाइन फीवर से मर रहे हजारों सुअर, 6 जिलों में पोर्क की बिक्री पर बैन

कोरोना के प्रकोप के बीच नॉर्थ ईस्ट के कुछ राज्यों पर एक दूसरा कहर टूटा है। खबर है कि वहाँ हजारों की संख्या में सुअर मरने लगे हैं। इसका कारण अफ्रीकन स्वाइन फीवर है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये खतरनाक बीमारी चीन के तिब्बत से होते हुए अरुणाचल प्रदेश आई है।

इस बीमारी के कारण असम और मेघालय के अलावा कुछ अन्य राज्यों की सरकारों ने भी अपने प्रदेश के लोगों को अलर्ट पर रखा है। साथ ही सुअर पालने वालों को खासतौर पर चेताया है कि वे इस समय सुअरों को इधर-उधर ले जाने से बचें।

असम के कृषि और पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने इस संबंध में कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) के संदिग्ध होने के कारण राज्य के 6 जिलों में 2,260 से अधिक सुअर मारे गए हैं। अब अधिकारियों ने इनके सैंपल भोपाल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-सिक्योरिटी एनिमल डिसीज को भेजे हैं। पुष्टि के लिए रिपोर्ट्स का इंतजार कर रहे हैं। बोरा ने कहा, “सूअर एक विदेशी वायरस से मर रहे हैं और हम अनुमान लगाते हैं कि यह चीन के तिब्बत से आया होगा।”

बोरा ने बताया कि एएसएफ धेमाजी, शिवसागर, लखीमपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और बिश्वनाथ जिलों में भी बीमारी के फैलने की बात कही जा रही। उनकी मानें तो 25 अप्रैल को 1964 से, केवल तीन दिनों में असम में सुअरों के मृत्यु का आँकड़ा 2262 तक पहुँच गया।

ताजा जानकारी के मुताबिक, असम ने अब प्रभावित जिलों में सुअर व सुअर के माँस की खरीद-बिक्री पर और आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही बूचड़खानों को बंद कर दिया है।

मेघायल में भी लगा बैन

इस कहर के मद्देनजर मेघालय सरकार ने असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों के हालात देखते हुए बाहर से सुअरों की आवाजाही पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। बुधवार को मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रिस्टोन तिनसॉन्ग ने इस संबंध में जानकारी दी कि राज्य ने अन्य राज्यों से सुअरों की फेरी पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। इसमें सरकारी व निजी सुअर फार्मों और सुअर मालिकों को स्वच्छता और जैव सुरक्षा के लिए पर्याप्त व सख्त उपाय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इसके अलावा उपमुख्यमंत्री ने लोगों को ये भी सलाह दी कि वे पोर्क को खाने से पहले कम से कम 20 मिनट (70 डिग्री के ऊपर) पकाएँ।

त्रिपुरा, नागालैंड भी हाई अलर्ट पर

त्रिपुरा के पशु संसाधन विकास विभाग के निदेशक और अतिरिक्त सचिव दिलीप चकमा ने भी अपना बयान दिया। उन्होंने कहा कि असम के छह जिलों और अरुणाचल प्रदेश के नौ जिलों में एएसएफ के प्रकोप के बाद, उनके विभाग ने सभी सरकारी और निजी सुअर फार्मों और सुअर मालिकों को सतर्क किया है कि वे रोकथाम के लिए पर्याप्त उपाय करें।

इसके अलावा कि नगालैंड में, अफ्रीकी स्वाइन बुखार के कथित प्रकोप के मद्देनजर, राज्य के बाहर से सुअरों के आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बता दें, सुअरों की बड़ी संख्या में हो रही मौत पर पशु संसाधन विशेषज्ञों के अनुसार, सूअर आमतौर पर ASF के अलावा क्लासिकल फीवर, पोर्सिन रिप्रोडक्टिव एंड रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (PRRS) से प्रभावित होते हैं।

अजान नहीं हो रही है, योगी को गोली मार दो: तनवीर खान ने CM योगी आदित्यनाथ को दी धमकी

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच पवित्र रमजान का महीना शुरू हो चुका है। विभिन्न राज्यों की सरकारें नमाजियों से घर पर ही नमाज पढ़ने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील कर रही हैं। नमाज और अजान पर निर्देशों से गुस्साए तनवीर खान नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की बात कही है।

तनवीर खान ने अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया, “दिलदार नगर और पूरे कामसरोवर (कामसर) में अजान नहीं हो रही है। योगी को गोली मार दो… को।” पोस्ट वायरल होते ही तनवीर खान ने अपना एकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया है। लेकिन कुछ लोगों ने ट्विटर पर उसके पोस्ट के स्क्रीनशॉट लेते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से इस पर संज्ञान लेने की अपील की।

एडिशनल एसपी राहुल श्रीवास्तव ने कहा है कि मामले की जॉंच कर उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अब तक सोशल मीडिया पर उपद्रव मचा रहे 578 से ज्यादा मुकदमे दर्ज कर चुकी है। यह ऐसे केस हैं, जिन पर कोरोना वायरस के दौरान सोशल मीडिया पर फ़ेक न्यूज़ और घृणा फैलाने के आरोप हैं।

रमजान महीने में सरकार ने लोगों से मस्जिद के बजाए घर पर ही नमाज पढ़ने की अपील की है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सके। लेकिन कई लोग सरकार द्वारा जारी इन निर्देशों का निरंतर विरोध कर रहे हैं।

ऋषि कपूर के अंतिम क्षणों का अस्पताल वाला वीडियो वायरल, पास में खड़ा हो गाना गा रहा लड़का – Fact Check

ऋषि कपूर की मौत के बाद एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे कई प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस दावे के साथ प्रकाशित किया है कि ये ऋषि कपूर की मौत से बस एक रात पहले का है और वो इसमें मुस्कुराते हुए देखे जा रहे हैं।

क्या है ऋषि कपूर के वायरल वीडियो में

इस वीडियो में ऋषि कपूर की ही फ़िल्म “दीवाना” के एक गाने को गाता हुआ एक युवक देखा जा रहा है। इसे ‘दी ट्रिब्यून’ नामक मीडिया हाउस से लेकर इंडिया टुडे और एबीपी तक अपने-अपने चैनलों और वेबसाइट पर चला चुके हैं। तमाम सोशल मीडिया यूजर इसे शेयर कर रहे हैं। वीडियो में ऋषि कपूर अस्पताल में बेड पर लेटे हुए देखे जा रहे हैं और उनके पास खड़ा एक युवक गीत गा रहा है।

क्या है सच्चाई

ऋषि कपूर के साथ रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो फरवरी 2020 का है, ना कि ऋषि कपूर की मौत के एक रात पहले का। यह युट्यूब पर फरवरी 2020 को शेयर किया गया था जैसा कि इस स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि आज सुबह ऋषि कपूर की कैंसर की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई है। उनकी उम्र 67 साल थी।

फरवरी 2020 में YouTube पर अपलोड किए गए इस वीडियो को आप नीचे देख सकते हैं।

‘ऋषि और इरफान चले गए, अगला भी जाने वाला है, नाम नहीं बताऊँगा’: मय्यत पर भी नहीं सुधरा KRK

मात्र चौबीस घंटों के भीतर बॉलीवुड ने एक के बाद एक दो सितारों को खो दिया। बुधवार को इरफान खान के निधन ने सबको स्तब्ध कर दिया था। आज सुबह ऋषि कपूर के निधन की खबर सुनकर सब हैरान रह गए। लेकिन, इस बीच कमाल आर खान (KRK) जैसे लोगों ने इंसानियत को शर्मसार करने का काम किया। वे इस मौके पर भी उल-जुलूल बातें करने से बाज नहीं आए।

कमाल खान द्वारा विवादित पोस्ट लिखने का सिलसिला इरफान की मृत्यु की खबर आने के बाद से ही शुरू हो गया था। लेकिन ऋषि कपूर के निधन के बाद तो जैसे कमाल बेहूदगी पर उतर आए और अपने ट्वीट पर लिखा, “मैंने कुछ दिन पहले कहा था कि कोरोना वायरस आसानी से नहीं जाएगा। ये कुछ मशहूर लोगों को अपने साथ ले जाने के बाद जाएगा। नाम मैं इसलिए नहीं बताना चाहता था क्योंकि लोग मुझे गाली देंगे। अब आप देख लो कि ऋषि और इरफान चले गए, अगला भी जाने वाला है नाम नहीं बताऊँगा।”

अब इसी पोस्ट के बाद कमाल खान के सारे ट्विट्स जिसमें उन्होंने ऋषि कपूर और इरफान खान को लेकर टिप्पणी की, वे सोशल मीडिया पर तैरने लगे। लोगों ने उसे इंसानियत पर धब्बा बताते हुए एफआईआर की माँग की। 

कुछ देर में लोग सोशल मीडिया पर कमाल खान के ख़िलाफ़ की एफआईआर की कॉपी भी शेयर करने लगे और उनके ट्विटर को सस्पेंड करने के लिए रिपोर्ट करने लगे। लोगों ने कहा कि चाहे सलमान हो, अक्षय हो, शाहरुख हो, आमिर हो, या अजय हो..इस कमाल खान ने हर किसी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। मगर अब इसके ख़िलाफ़ एक्शन लेने की जरूरत है।

बता दें, ऋषि कपूर के लिए सबसे पहले कमाल खान ने देर रात निहायती बचकाना पोस्ट लिखा। उसने लिखा, “ऋषि कपूर को एचएन रिलायंस अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इसके अलावा मैं कहना चाहता हूँ कि आप वापस जल्दी घर आ जाना। निकल मत लेना। क्योंकि शराब की दुकानें बस 3-4 दिन में खुलने वाली हैं।”

इसके बाद जब उनकी मृत्यु की खबर आई तो शोक जताने की जगह KRK ने लिखा, “मना किया था आपको! लेकिन आप निकल लिए। चलो जहाँ रहो खुश रहो।” 

विवाद सिर्फ़ इन ट्विट्स पर नहीं भड़का। इसके अतिरिक्त भी कमाल ने काफी बेफिजूल की बातें लिखीं। उसने अपने ट्वीट में इरफान खान को एहसान फरामोश और निहायत घटिया इंसान लिखा। साथ ही ये भी लिखा कि इरफान ने बहुत लोगों पर जुल्म किया और अपने प्रोड्यूसर को कुत्ता तक बोला और 80-90% फिल्में पूरी नहीं की।

ट्वीट के स्क्रीनशॉट

कलाम ने ट्वीट में इरफान की मृत्यु के बाद लिखा कि अल्लाह के घर देर है, अँधेर नहीं। इंसाफ दुनिया में ही हो जाता है। जिन निर्माताओं को इसने बर्बाद किया, उन्होंने इसे श्राप तो दिया ही होगा। माँ मर गई देख नहीं पाया। खुद दिल और कैंसर का मरीज है। इस बेचारे को अल्लाह माफ करें।

इसके बाद उसने एक वाकए का जिक्र कर इरफान की छवि को गिराने का प्रयास किया। KRK ने लिखा कि जब वे इरफान के साथ शूटिंग पर बैठा होता था, तो वे निर्माताओं को दूर से आता देख उससे कहते थे कि देख भाई वो आ रहा कुत्ता!

कमाल कहते हैं कि उन्हें इरफान के मुँह से ये सब सुनकर बहुत बुरा लगता था। लेकिन इरफान उनके दोस्त थे वो निर्माता नहीं, इसलिए वे ये सब सुनकर चुप रहते थे।

उल्लेखनीय है कि ज्यादातर समय विवादों में रहने वाले कमाल खान की इस समय सोशल मीडिया पर बहुत निंदा हो रही है। यूजर उसे सबसे घटिया इंसान बता रहे हैं। साथ ही एफआईआर की कॉपी शेयर कर रहे हैं।

लॉकडाउन में तबलीगी उपद्रव के बाद ही क्यों बढ़ते गए भगवा-हिंदुओं पर हमले?

सब्जी वालों की दुकान से भगवा झंडे उतरवाने से लेकर हिन्दू आस्था के प्रतीकों को अपमानित करने का काम कोरोना वायरस के बीच देशव्यापी बंद के दौरान भी खूब हुआ है। महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग ने मानो उन सभी राज्यों में हिंदुओं के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका दे दिया जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार के विरोध में रहते हैं।

झारखंड में सब्जी वालों की दुकानों से हटाया भगवा झंडा

एक ओर जहाँ देश की अधिकतर जनता कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अपने घरों में बन्द है, वहीं दूसरी ओर लिबरल गिरोह और बौद्धिक दैन्य वामपंथी-उदारवादी वर्ग घर बैठे अपने इस्लामिक एजेंडे को हवा-पानी देता रहा। सोशल मीडिया पर झारखंड में फल बेचने वाले दुकानदारों की तस्वीरों पर झारखंड पुलिस को टैग करते हुए ‘शिकायत‘ दर्ज की गईं।

हालाँकि, पुलिस ने भी यह पूछने के बजाए कि दुकान पर हिन्दू संगठन के नाम से किसी की धार्मिक भावनाएँ कैसे आहत हो सकती हैं? सीधे यह सूचना दी कि दुकानों से ऐसे बैनर हटवा दिए गए हैं।

हालाँकि इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर मुस्लिमों की दुकान और हलाल जैसे विषयों पर भी आपत्ति जताई गई लेकिन दुर्भाग्य यह है कि ऐसे विषय कुछ दिन की चर्चा के बाद अगली किसी घटना के दोहराए जाने तक फिर शान्त हो जाते हैं और यह रोष मात्र सोशल मीडिया तक ही सीमित हो जाता है।

पालघर में साधुओं पर हमला और अर्नब पर आरोप

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्या के बाद देशभर में इस तरह की घटनाएँ बढ़ती गईं जिनमें हिंदुओं को किसी न किसी तरह से निशाना बनाया जा रहा है। पालघर मॉब लिंचिंग पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर तीखे सवाल पूछने पर रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी पर हमला किया गया।

हिन्दू देवताओं का अपमान

इंस्टाग्राम पर हिन्दू देवी-देवताओं को गालियाँ देने वाले कुछ एकाउंट भी हाल ही में सामने आए हैं। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है, लेकिन यह देखा गया है कि कोरोना वायरस के बीच मुस्लिम समुदाय और तबलीगी जमात के उपद्रव के बाद उन्हें ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है।

फ़ेक एकाउंट की मदद से भी हिंदुओं के प्रतीकों को अपमानित कर हिंदुओं की आस्था को आहत करने का प्रयास किया गया।

दुकान पर भगवा झंडा लगाने पर मुस्लिमों ने किया प्रताड़ित

बिहार के बेगूसराय के एक सब्जी विक्रेता ने जब अपने ठेले पर भगवा झंडा लगाया तो उसके अपने ही मोहल्ले के दूसरे समुदाय के लोगों ने उसे प्रताड़ित किया और भगवा झंडा लगाने पर आपत्ति जताई। दलित सब्जी विक्रेता ने बताया कि जब वो दो लोग ठेले पर भगवा झंडा लगा कर जा रहे थे तो कुछ लोगों ने उन्हें रोका और पूछा कि तुम ये झंडा लगा कर क्या साबित करना चाहते हो? इस आपत्ति के बाद उसने साहस दिखाते हुए फिर अपनी दुकान पर भगवा झंडे लगा दिए।

हरियाणा में महंत पर जानलेवा हमला और धमकी

कल बुधवार (अप्रैल 29, 2020) को हरियाणा के मेवात जिले कि एक घटना सामने आई, जहाँ दुकान पर दवा लेने गए महंत रामदास महाराज को मुस्लिमों ने घेर लिया और उन पर धार्मिक कटाक्ष किए। यही नहीं उनसे कहा गया कि साधु-संत सिर्फ गुंडागर्दी करते हैं और इस वजह से इन्हें जिंदा जला दिया जाना चाहिए। इस सबका विरोध करने पर मुस्लिमों की भीड़ उनके पीछे हमला करने दौड़ी और महंत ने किसी तरह वहाँ से भागकर अपनी जान बचाई।

क्यों बढ़ रहे हैं भगवा पर हमले?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भगवा और हिंदुओं को निशाना बनाए जाने के पीछे कोरोना वायरस की महामारी के दौरान मुस्लिम समुदाय द्वारा डॉक्टर्स और पुलिस के साथ कि गई तमाम बदसलूकी और तबलीगी जमात के कारनामों ने कट्टरपंथियों को आत्मविश्लेषण करने के बजाए हिंदुओं पर हमला करने के लिए उकसाया है।

इस काम मे ऐसे राज्यों ने भी इन घटनाओं को भुनाने का प्रयास किया है, जिनकी पहली पहचान हिन्दू-विरोध और मुस्लिम तुष्टिकरण है।

इतने FIR होंगे कि एमएफ हुसैन की तरह सिर छुपाने की जगह नहीं मिलेगी: जफरुल इस्लाम पर VHP

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद (VHP) देश भर में FIR दर्ज करवाएगी। विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि देश के कोने-कोने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी ताकि एमएफ हुसैन की तरह इस्लाम को भारत में सिर छुपाने की जगह न मिले।

ज़फरुल इस्लाम ने एक पोस्ट में भारत के हिन्दुओं को अरब के लोगों की धमकी दी थी। इस पोस्ट के कारण कल हिंदू सेना ने उनके ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। अब VHP भी इस्लाम के ख़िलाफ़ एक्शन में आ गया है। परिषद का कहना है कि ज़फरुल के ख़िलाफ वे देश भर के अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज कराने का विचार कर रहे हैं। कोशिश की जाएगी कि इस्लाम के ख़िलाफ़ संगीन धाराओं में मामला दर्ज हो, क्योंकि वे विदेशी मुस्लिमों का डर दिखाकर देश के हिंदुओं को धमका रहे हैं।

बता दें, ज़फरुल के ख़िलाफ़ देश के अलग-अलग थानों में एफआईआर की बात, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान कही। इसके अलावा इसका जिक्र उन्होंने अपने एक ट्वीट में भी किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग करके इस्लाम के ख़िलाफ एक्शन की माँग की और लिखा, “ऐसे देशद्रोहियों के विरुद्ध देश भर के थानों में इतनी शिकायतें दर्ज होनी चाहिए कि एमएफ हुसैन की तरह इसे भी भारत में सिर छुपाने को जगह ना मिले।”

इसके अलावा उन्होंने दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “कुछ तो बोलो माननीय अरविंद केजरीवाल जी। यह तो आपकी ही कृपा से संवैधानिक पद पर बैठकर एक अरबी दलाल की तरह भारत को धमकियाँ दे रहा है और आप चुप हैं?”

गौरतलब है कि इससे पहले विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मामले पर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था, “जाकिर नाइक जैसे आतंकियों के अनुयायी दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने हिंदुओं के विरुद्ध इस्लामिक देशों के तूफान की सीधी धमकी दी है।”

वीएचपी ने अपने इस ट्वीट में सुरेंद्र जैन का सक्षात्कार भी डाला था। जिसमें उन्होंने कहा, “दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान की देश में तूफान लाने की धमकी 1947 की याद दिला रही है। संवैधानिक पद पर बैठा आदमी आतंकी भाषा में बोल रहा है। केजरीवाल समेत सभी सेकुलर बिरादरी चुप कैसे है? क्या इन्हें ऎसे ही लोग मिलते हैं?”

बता दें ज़फरुल के जिस पोस्ट पर इतना विवाद खड़ा हुआ है। उसमें उन्होंने लिखा था कि कट्टर हिन्दू ये भूल गए थे कि अरबी मुस्लिमों की आँखों में भारतीय मुस्लिमों की साख काफ़ी ऊँची है। बकौल ज़फरुल, भारत के मुस्लिमों ने इस्लाम के लिए जो किया है, उसे देखते हुए अरबी उन्हें सिर-आँखों पर रखते हैं। भारतीय मुस्लिम अरबी और इस्लामी अध्ययन में पारंगत हैं और दुनिया भर में इस्लामी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी विरासत में अहम योगदान दिया है।

ज़फरुल ने इन लोगों को शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक का नाम गिनाया। बता दें कि मलेशिया में रह रहे ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं। भारत में कई जगह युवा कट्टर मुस्लिमों के यहाँ से ज़ाकिर नाइक की सीडी मिली, जिसे देख कर वो आतंक की राह अपनाते रहे हैं

ज़फरुल ने कहा था कि शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है। जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुस्लिम एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

उत्तर भारतीय कर रहे पंचायती राज को कमजोर: दक्षिण से सांसद बने राहुल गाँधी ने फेंका डिवाइड & रूल का पासा

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि उत्तर भारतीय राज्य अपने लोगों को दक्षिण भारतीय राज्यों के मुकाबले ज्यादा सशक्त नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि उत्तर भारतीय राज्य सत्ता के केंद्रीकरण में अधिक विश्वास करते हैं, जबकि दक्षिण भारतीय राज्य पंचायती राज जैसे विचारों में विश्वास करते हैं।

राहुल गाँधी ने यह टिप्पणी भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के साथ बातचीत के दौरान की। यह बातचीत कोरोनावायरस महामारी के चलते विशेषज्ञों के साथ बातचीत की उनकी नई सीरीज के दौरान हुई। इस सीरीज को राहुल गाँधी की कमिंग ऑफ ऐज के रूप में देखा जा रहा है, जिसके बाद वह विश्व स्तर पर भारत का नेतृत्व करने के लिए तैयार होंगे।

“यदि आप दक्षिणी राज्यों को देखते हैं, तो वे बेहतर काम कर रहे हैं क्योंकि वे वास्तव में अधिक विकेंद्रीकृत हैं। जबकि उत्तरी राज्य सत्ता का केंद्रीकरण कर रहे हैं, जिसके चलते वे पंचायतों और जमीनी संगठनों से सत्ता छीन रहे हैं, ”राहुल गांधी ने अपनी बातचीत के दौरान कहा।

यह टिप्पणी तब की गई, जब राहुल गाँधी ने रघुराम राजन से पूछा कि “केंद्रीकरण का संकट” क्या अब वायरस के खिलाफ लड़ाई में बाधा बन रहा है। इस सवाल पर राजन ने विकेंद्रीकरण की आवश्यकता पर अपनी सहमती जताईृ। उन्होंने राहुल के पिता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी पंचायती राज वापस लाने का श्रेय दिया, जिससे सत्ता को विकेंद्रीकरण में मदद मिली।

पंचायती राज अधिनियम

पंचायती राज अधिनियम को 1992 में 73वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से लागू किया गया था। तब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे। हालाँकि, राजीव गाँधी को इसके लिए व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है, क्योंकि उन्होंने पहले इस तरह के एक अधिनियम को पारित करने की कोशिश की थी, लेकिन उसमें असफल रहे थे।

कॉन्ग्रेस पार्टी पर पहले भी भारत में उत्तर बनाम दक्षिण की बहस को भड़काने का आरोप लगा है। उत्तर भारत की अधिक आबादी और कथित तौर पर टैक्स में कम योगदान को लेकर इसे दक्षिण भारत पर एक तरह का बोझ बताते आई है कॉन्ग्रेस। 2019 में जब नरेंद्र मोदी की सत्ता में वापसी हुई तब तो कॉन्ग्रेस के एक प्रवक्ता ने उत्तर भारतीयों में शिक्षा की कमी को इसके लिए जिम्मेदार भी ठहरा दिया था।

विकेंद्रीकरण के मुद्दे के अलावा राहुल गाँधी और रघुराम राजन ने आधे घंटे की लंबी चर्चा में कई अन्य विषयों पर भी चर्चा की। इसमें गरीबों, सामाजिक सद्भाव, और चायनीज कोरोना वायरस से लड़ने के आसपास अन्य चुनौतियों से राहत प्रदान करना भी शामिल रहा।

ASI हरजीत सिंह का निहंगों ने काट दिया था हाथ, पंजाब पुलिस में कॉन्स्टेबल बना बेटा

बीते दिनों पंजाब के पटियाला सब्जी मंडी में कर्फ्यू पास माँगने पर निहंगों के एक दल ने ASI हरजीत सिंह का हाथ काट दिया था। उनकी बहादुरी को देखते हुए पंजाब पुलिस ने उनके बेटे को कॉन्स्टेबल बनाया है। पंजाब पुलिस के डीजीपी ने खुद अस्पताल जाकर हरजीत सिंह को बेटे की नियुक्ति का पत्र सौंपा।

जानकारी के मुताबिक ASI हरजीत सिंह के बेटे अर्शप्रीत सिंह को पंजाब पुलिस में कांस्टेबल बना दिया गया है। साथ ही पंजाब पुलिस ने हरजीत सिंह को उनकी बहादुरी के लिए सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन दिया है। पुलिस के मुताबिक पिछले दिनों निहंगों का एक समूह सफेद गाड़ी से मंडी आया था। इस दौरान मंडी बोर्ड के अधिकारियों ने उन्हें गेट पर रोका और कर्फ्यू पास दिखाने के लिए कहा।

इस पर निहंगों ने बैरीकेड तोड़ दिया और लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ गए। इसी बीच पुलिस पर भी हमला कर दिया था, जिसमें हरजीत सिंह का हाथ काट दिया गया था। आपको बता दें कि इसके बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ पीजीआई के डॉक्टरों ने करीब आठ घंटे के ऑपरेशन में हरजीत सिंह के हाथ को दोबारा जोड़ दिया था।

वहीं हरजीत सिंह को शुक्रवार को पीजीआई से छुट्टी भी मिल गई थी। इसके पहले पंजाब के मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने एक ट्वीट के जरिए कहा था कि पीजीआई में ASI हरजीत सिंह के हाथ का ऑपरेशन हुए 2 हफ्ते हो चुके हैं। मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि वह ठीक हो रहे हैं और उसका हाथ फिर से हिलना शुरू हो गया है।

गौरतलब हो कि पंजाब के पटियाला में 12 अप्रैल को निहंग सिखों (परंपरागत हथियार रखने वाले और नीली लंबी कमीज पहनने वाले सिख) द्वारा पुलिस पर किए गए हमले में ASI हरजीत सिंह की कलाई कट गई थी और इसके साथ ही कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे।

एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया था कि हमले के बाद ये लोग भाग कर बलबेरा के पास एक गुरुद्वारे में छिप गए थे। पुलिस ने उनका पीछा किया, जिस पर गुरुद्वारे से आरोपितों ने कथित तौर पर पुलिस पर फायरिंग भी की और पुलिसवालों को वहाँ से चले जाने के लिए भी कहा था। इस मामले में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। साथ ही इन लोगों के पास से पुलिस ने हथियार, बंदूक और पेट्रोल बम भी बरामद किये थे।

जियो-फेसबुक डील: 788 मिलियन ग्राहक और अंतरराष्ट्रीय बाजार – जरूरत है प्रतिस्पर्धा और निजता के संरक्षण का

जियो-फेसबुक सौदे (Jio FaceBook Deal) पर सभी की निगाह अकड़ी हुई है। इस सौदे की नज़र भारत के रिटेल सेक्टर पर है। इस सेक्टर के काफी हिस्से आज भी असंगठित हैं। लेकिन यह इसकी अप्रयुक्त क्षमता ही तो है, जो इसे पारस्परिक रूप से आकर्षक बनाती है। इस सौदे के चलते फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर्स में 9.99% इक्विटी 43,574 करोड़ रुपए में खरीदी है। जहाँ एक तरफ अर्थशास्त्रियों को भारत की आर्थिक वृद्धि नज़र आ रही है, वही दूसरों को उपयोगकर्ता की निजता की सुरक्षा का डर सता रहा है। सब मींज माँज के असल मुद्दा ये बैठता है कि यह सौदा भारतीय अर्थव्यवस्था और नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करेगा?

आर्थिक प्रभाव

COVID-19 महामारी से जूझते हुए भी, टेक्नॉलजी सेक्टर में अपना सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त करना, भारत की आर्थिक प्रगति का प्रारंभिक संकेत है। इस सौदे से एक तरफ समस्त उपभोक्ताओं को अत्यंत सहज एवं उच्च टेक्नॉलजी की सुविधा होगी तो दूसरी तरफ छोटे और मध्यम वर्गीय व्यापारियों के लिए बेहतर व्यवसाय के अवसर खुलेंगे, जिनको इ-कॉमर्स के माध्यम से बड़े बाजार की पहुँच प्राप्त होगी।

जियो मार्ट को इस सौदे से एक बहुत महत्वपूर्ण फायदा होगा। वह एक ऐसी वटवृक्ष बन जाएगी, जिसकी छाया में ग्राहक खरीदारी, भुगतान, त्वरित सन्देश एवं सोशल मीडिया का लाभ एक साथ उठा सकेंगे। यह सारी चीज़ें एक जगह होने से कुछ नवांकुर कंपनियों ने अपने गहन विचार व्यक्त किए हैं। नवांकुर कम्पनियों ने बड़ी-बड़ी कम्पनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थता दिखाई है और जब देश में दो बड़ी कंपनियाँ एक साथ आ जाए तो यह उनके लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। बाजार में इस बात की भी हलचल है कि यह जोड़ी एकाधिकार (मोनोपोली) उत्पन्न करने में सक्षम है, जिसकी वजह से बाकी कम्पनियों को काफी नुक्सान हो सकता है।

अत: अब यह प्रश्न उठता है कि क्या यह सौदा जो विश्व की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी और देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी के बीच है, वह भारतीय बाजार की प्रतिस्पर्धा पर कितना और किस प्रकार से असर डालता है? इन सभी बातों को मद्देनज़र रखते हुए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग एवं भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण का काम बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग इस सौदे पर कड़ी नज़र रखेगा ताकि किसी भी तरह से यह सौदा बाजार को हानि न पहुँचाए।

पारस्परिक लाभ

रिलायंस रिटेल को अपने किराने की डिलीवरी प्लेटफॉर्म जियो-मार्ट पर अधिक ग्राहक पाने में व्हाट्सएप अत्यंत मददगार साबित होगा। यह सौदा दोनों खिलाड़ियों के लिए एक जीत है। फेसबुक को ई-कॉमर्स की दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाजारों में से एक में अपना झंडा गाड़ने का मौका मिला है, वहीं रिलायंस को अपने साझेदार फेसबुक की सोशल मीडिया जगत में लोकप्रियता का लाभ उठाते हुए उसके उपयोगकर्ताओं को अपने रिटेल प्लेटफॉर्म की तरफ आकर्षित करने का। कई और भी रिश्ते हैं, जो इस साझेदारी के माध्यम से सँजोए जा सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय टेक्नॉलजी दिग्गज और भारतीय टेलिकॉम दिग्गज के हाथ मिलाने से ऑनलाइन दुनिया के अन्य क्षेत्रों जैसे- वर्चुअल रियलिटी, फिनटेक, मोबाइल गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के दरवाज़े भी इनके लिए खुल गए हैं। इस दोस्ती ने भारत और अमेरिका के लिए द्विपक्षीय स्तर पर एक साथ आने और एक मज़बूत डेटा एवं टेक्नॉलजी पर साझेदारी हेतु चर्चा करने के लिए नींव तैयार कर दी है। भारत के लिए अमेरिकी डेटा का लाभ उठाने के लिए, CLOUD एक्ट के तहत एक व्यवस्था में प्रवेश करना अनिवार्य है। यह सौदा उस मंज़िल को पाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

निजता पर प्रकोप

जहाँ फेसबुक के पास 400 मिलियन ग्राहक हैं, जियो के पास भी 388 मिलियन ग्राहक हैं। दोनों कंपनियों द्वारा उत्पन्न डेटा की विशाल मात्रा अपने आप में चिंताजनक है। इस डेटा के आदान-प्रदान और एकत्रीकरण का डर सामाजिक चर्चा में उत्पन्न हुआ है। यहाँ पर इतना कहना काफी होगा कि डेटा-शेयरिंग इस सौदे का भाग नहीं है। मल्टी-नेशनल कंपनी होने के कारण फेसबुक के पास उपभोक्ता-डेटा के संरक्षण का अनुभव है। फिर बड़ी कंपनियों के पास निजता बनाए रखने के लिए आधुनिक टेक्नॉलजी इस्तेमाल करने की क्षमता भी तो होती है।

इसके अलावा, भारत में एक मजबूत सिविल सोसाइटी की उपस्थिति एक पहरेदार के स्वरूप में किसी भी उल्लंघन का संकेत देती रहती है। इसके अतिरिक्त भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस पुट्टास्वामी के निर्णय में निजता के मौलिक अधिकार के संरक्षण हेतु कई नियम पारित किए, जिनका उल्लंघन एक दण्डनीय अपराध बताया गया है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट भी एक स्वतंत्र डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी की आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता है। जैसे कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के उल्लंघन की जाँच करती है उसी प्रकार से डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी उपयोगकर्ता की निजता के उल्लंघन पर सरकार एवं निजी कंपनियों पर मुकदमा चलाने का अधिकार रखती है। इस टेक्नॉलजी के दौर में, भारत की आर्थिक वृद्धि और नागरिकों की निजता के संरक्षण के लिए सरकार को जल्द से जल्द एक प्रगतिशील डेटा संरक्षण कानून पारित करने की ज़रूरत है।

जियो-फेसबुक की इस जोड़ी का योग भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभदायक साबित होगा। यह सौदा भारतीय उपभोक्ताओं और व्यापारियों के सशक्तिकरण में अत्यंत प्रगतिशील होने के साथ साथ भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दरवाज़े खोलने की क्षमता रखता है। आर्थिक एवं सामाजिक वृद्धि के मार्ग पर चलते रहने के लिए इस जोड़ी पर प्रतिस्पर्धा और निजता को संरक्षित रखने का दारोमदार भी रहेगा।

इस लेख के दूसरे लेखक हैं: प्रणव भास्कर तिवारी (नीति अनुसंधान सहयोगी – द डायलॉग)

बंगाल: ममता बनर्जी ने पत्रकारों को दी कार्रवाई करने की धमकी, गवर्नर धनखड़ ने दिया करारा जवाब

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मीडिया और भाजपा पर निशाना साधे जाने के बाद राज्य के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने उन्हें करारा जवाब दिया है। राज्यपाल धनखड़ ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सभी पार्टियों से एकजुट होने की अपील की है। साथ ही ममता बनर्जी के बयान,’विपक्ष गिद्धों की तरह मौत का इंतजार कर रहा है’ के मद्देनजर कहा है कि इस समय राजनीति करने से दूर रहना चाहिए।

गौरतलब है कि बुधवार (अप्रैल 30, 2020) को ममता बनर्जी ने पत्रकारों को ढंग से बर्ताव करने की सलाह देते हुए चेताया था। उन्होंने कहा था कि अगर वे सही से बर्ताव नहीं करते, तो उन पर वे आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केस कर सकती हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि वे कोरोना वायरस के प्रकोप के दौरान भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने कहा था, “मेरा मीडिया से एक अनुरोध है। जब कोई घटना होती है, तो आप सरकार की प्रतिक्रिया लेने की जहमत नहीं उठाते। बल्कि भाजपा की सुनकर एक तरफा, नकारात्मक और विनाशकारी वायरस वाहक बन जाते हैं।”

इसके बाद उन्होंने मीडिया को कहा, “वर्तमान में हम आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत, कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। लेकिन हम नहीं कर रहे, क्योंकि बंगाल की संस्कृति है; हम मानवता में विश्वास करते हैं। सहिष्णुता हमारा धर्म है। ”

अब ममता बनर्जी के इन्हीं बयानों को लेकर गवर्नर ने अपने ट्वीट में लिखा, “सभी पार्टियों से कोविड-19 की लड़ाई में एकजुट होने की अपील करता हूंँ। ममता के कथन ‘विपक्ष उस तरह का बर्ताव कर रहा है जैसे गिद्धों को मौत का इंतजार रहता है’ से दुख है। हम पर छत गिरने जैसी स्थिति है। हमें राजनीति से दूर रहना चाहिए। जब लोगों को अनकहे दुखों का सामना करना पड़ता है, तो ऐसे समय में ये मुसीबत क्यों बढ़ जाती है?”

अपने दूसरे ट्वीट में राज्यपाल ने लिखा कि मुख्यमंत्री विभिन्न माध्यमों से मीडिया को नियंत्रित करने और डराने धमकाने की कोशिश कर रही हैं। मीडिया को डर में क्यों रखा जाएगा? आखिर एक सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं होना चाहिए। मीडिया लोकतंत्र का रीढ़ है। स्वतंत्र मीडिया आवश्यक तत्व है और इस तरह मीडिया कर्मियों को दबाव में रखना ठीक नहीं।

उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, “जेम्स मैडिसन ने कहा था कि एक लोकप्रिय सरकार बिना किसी लोकप्रिय जानकारी या जानकारी प्राप्त करने के संसाधन के बिना एक त्रासदी होती है। मिस्र, लीबिया, ट्यूनीशिया में लंबे समय तक शासन करने वाले तानाशाह को 2011 में बाहर करने में मीडिया की भूमिका बड़ी रही है। क्या यही खबर है कि आप कुछ छिपाना चाहती हैं?”

राज्यपाल धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार की ओर से मीडिया पर निशाना साधने पर भी सवाल खड़े किए। राज्यपाल ने ट्वीट कर लिखा, “चिंतित ममता बनर्जी ने मीडिया को ‘सही से बर्ताव’ करने की चेतावनी दी है। मीडिया को भय में क्यों रखना? छिपाने के लिए कुछ भी नहीं होना चाहिए।”

गौरतलब है कि ममता बनर्जी सरकार पर कोरोना संक्रमण की हकीकत को छिपाने के आरोप लग रहे हैं। हालाँकि सीएम बनर्जी ने दावा किया है कि उनके यहाँ लोगों के स्वास्थ्य का सबसे बेहतर ख्याल रखा जा रहा है। उन्होंने वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा है कि यह सब कुछ सरकार को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोग ऐसी खबरें चला रहे हैं कि पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं है। वे जानबूझकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं राज्यपाल का कहना है कि संकट की घड़ी में ममता बनर्जी उपयुक्त काम नहीं कर रही हैं।