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1 सप्ताह, 3 हिंसक वारदातें: नागा साधुओं की मॉब लिंचिंग को चोरी की घटना साबित करने में लगी थी मीडिया व महाराष्ट्र पुलिस

महाराष्ट्र के पालघर में गुरुवार (अप्रैल 16, 2020) को दो नागा साधुओं सहित 3 व्यक्ति की भीड़ द्वारा पुलिस के सामने ही निर्मम हत्या के बाद बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। उस इलाक़े में अलग-अलग तरह की कई हिंसा की वारदातें होती रही हैं लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इस घटना वाले सप्ताह भी कुल मिला कर 3 ऐसी घटनाएँ हुईं, जिनमें भीड़ द्वारा हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया गया। साधुओं की हत्या तो घृणा के एक नए माहौल की ओर इशारा करती ही हैं, लेकिन कुछ अन्य प्रकार की घटनाएँ भी हैं जो महाराष्ट्र पुलिस की पोल खोलती हैं।

इस घटना के अगले ही दिन शुक्रवार की रात दहानु में एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को जम कर पीटा गया। अगर गुरुवार को इतनी क्रूर और निर्मम वारदात हो चुकी थी तो फिर भीड़ की हिम्मत कैसे हुई कि वो अगले ही दिन अन्य आपराधिक कृत्य को अंजाम देने निकले? पुलिस ने किसी तरह समय पर पहुँच कर उस व्यक्ति को बचा लिया। ये वही पुलिस है, जिसने साधुओं की कोई मदद नहीं की। वृद्ध साधु जब पुलिसकर्मी के हाथ पकड़ता, तो उसका हाथ झटक दिया गया था। लगातार दो दिन अलग-अलग तरह की हिंसक वारदात हुई लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर पाई।

मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को भी इतना पीटा गया कि उसके सिर में गहरी चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भीड़ यहाँ न सिर्फ़ पत्थरबाजी करती है, बल्कि लाठी-डंडों से भी वार करती है। हर घटना में ऐसा करने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। साधुओं की हत्या कासा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत गडचिंचले गाँव में हुई थी, लेकिन गिरफ़्तार होने वालों में अधिकतर दहानु तालुका के गडचिंचले के ही हैं। ऊपर वाली घटना की बात करें तो ज़ाईदुबलपाड़ा में भी एक व्यक्ति को 15 लोगों ने घेर लिया और पुलिस के दावे के अनुसार उसे चोर बता कर उसकी पिटाई करने लगे। साधुओं वाली घटना में भी न सिर्फ़ पुलिस, बाकी मीडिया ने भी यही एंगल चलाया। सवाल पूछा जा सकता है कि क्या ऐसा करके कुछ छिपाया जा रहा है, ताकि इसे बाकी घटनाओं की तरह ही दिखाया जा सके?

जिस व्यक्ति को चोर बता कर उसकी पिटाई की गई, वो मराठी भी नहीं समझता था। उसे तमिल भाषा आती थी। उसकी भी पिटाई के समय पुलिस ने वहाँ पहुँच कर उसे बचा लिया लेकिन साधुओं को बचाने में पुलिस नाकाम साबित हुई। पुलिस ने एक तमिल बोलने वाले को बात समझने के लिए बुलाया लेकिन पीड़ित ने कुछ ख़ास जानकारी नहीं दी थी। इस मामले में भी वीडियो सबूत के आधार पर आरोपितों को चिह्नित तो किया गया लेकिन शनिवार तक किसी की भी गिरफ़्तारी नहीं हुई थी।

इसी तरह सारणी गाँव में स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर विश्वास वलवी की गाड़ी को घेर लिया गया था लेकिन पुलिस ने उन्हें बचा लिया। तुलनात्मक रूप से साधुओं की निर्मम हत्या के सामने ये घटनाएँ ख़बर नहीं बन पाई लेकिन ऐसी घटनाओं को नज़रअंदाज़ किया गया पुलिस द्वारा। साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना भी आम जनमानस के बीच तभी पहुँची, जब इसके वीडियो 3 दिन बाद वायरल हुआ, वरना इसे भी तो ‘चोरी से जुड़ा मामला’ ही बताया जा रहा था। अगर ऐसा है तो साधुओं की मॉब लिंचिंग में एनसीपी और सीपीएम नेताओं की मौजूदगी की बातें क्यों सामने आ रही हैं?

सैकड़ों लोगों द्वारा तीन लोगों की हत्या एक बहुत बड़ी ख़बर होती है और अगर इसे छिपाया गया है तो ज़रूर दाल में कुछ काला है। इससे पहले चोर बता कर हुई मारपीट या फिर डॉक्टर की गाड़ी में तोड़फोड़ वाली घटना में न तो भीड़ इतनी संख्या में थी और न ही किसी की हत्या हुई। पुलिस ने भी समय पर पहुँच कर बीच-बचाव कर लिया। ये सभी बातें साधुओं की हत्या को इन घटनाओं से अलग बनाती है। इलाक़े में मुस्लिम और ईसाई मिशनरियों के प्रभाव की बातें भी कही जा रही हैं।

बेंगलुरु में स्वास्थ्य कर्मियों की टीम पर हमला: 59 गिरफ्तार, फिरोजा नाम की महिला उकसा रही थी भीड़ को

कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन लगातार अपनी कोशिशों में जुटा है, लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में जुटे वॉरियर्स को कुछ लोगों के हमले का शिकार होना पड़ा है। ताजा मामला है बेंगलुरु के पदरायनपुरा इलाके का। रविवार (अप्रैल 19, 2020) की शाम स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और बीबीएमपी अधिकारियों की एक टीम पर कोरोना वायरस हॉटस्पॉट पदरायननपुरा इलाके में हिंसक भीड़ द्वारा बेरहमी से हमला किया गया। यह टीम कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आने वाले 58 लोगों को क्वारंटाइन करने के लिए वहाँ पहुँची थी।

मामले में अब तक 59 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें फिरोजा नाम की एक महिला भी शामिल है, जिसे भीड़ को उकसाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के लिए 100 से अधिक हिंसक उपद्रवियों की भीड़ इकट्ठी हुई थी। 

इस पूरी घटना के बारे में प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाए। मैंने अपने अधिकारियों को भी इस बाबत निर्देश दिया है। हम इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमने 59 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 5 FIR दर्ज की गई है। हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि अन्य लोगों को भी क्वारंटाइन किया जाए।”

इस पूरी घटना का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि लोग स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसवालों पर हमला कर रहे हैं। जिसमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे। ताजा जानकारी के अनुसार, पदरायनपुरा में हिंसा पूर्व नियोजित थी। टीवी 9 की एक रिपोर्ट बताती है कि भीड़ ने 4 टीमों में बँट कर इस वारदात को अंजाम दिया। पहली टीम को मुख्य सड़क पर हिंसा करते हुए देखा गया, जबकि दूसरी टीम चेक पोस्ट पर बर्बरता कर रही थी, वहीं तीसरी टीम पुलिसकर्मियों पर पथराव कर रही थी और चौथी टीम सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचा रही थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पदरायनपुरा इलाका बेंगलुरु के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक है, जहाँ अब तक 17 कोरोना पॉजिटिव मामलों की पुष्टि हो चुकी है। 10 अप्रैल को पदरायनपुरा और मैसूरु रोड इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया था। इसे एक हॉटस्पॉट घोषित किया गया था और लॉकडाउन का पूर्ण रूप से पालन करवाने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए थे। हिंसक भीड़ ने बैरिकेड भी तोड़ दिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक तबलीगी जमात के दो सदस्य, जो दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से लौटे थे, कोरोना पॉजिटिव पाए गए और फिर उनके संपर्क में आने वाले 15 लोगों को भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया था।

पहले भी हो चुके हैं स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले

गौरतलब है कि बंगलुरू में आशा वर्कर और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की ये पहली घटना नहीं है। इससे पहले बेंगलुरु के सादिक मोहल्ले में कोरोना संक्रमण के लक्षणों के बावत जाँच पड़ताल करने और नमूने लेने के लिए गई नर्स और आशा कार्यकर्ता पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था।

केरल सरकार ने लॉकडाउन में दी ढील: कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय ने लगाई फटकार

केरल सरकार ने लॉकडाउन में आज से कुछ छूट देने का एलान किया है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। गृह मंत्रालय ने कहा कि शहरों में रेस्तरां खोलने, बस यात्रा की अनुमति देने और निगम के इलाकों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (MSME) उद्योगों को खोलने की अनुमित देना लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों को कमजोर करने के बराबर है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पत्र लिखकर जताई आपत्ति

गृह सचिव अजय भल्ला ने केरल के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर गाइडलाइंस में अधिक छूट दिए जाने पर फटकार लगाई। इस पत्र में लिखा गया कि केंद्र की गाइडलाइन से अधिक छूट देने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है, केंद्रीय गाइडलाइन का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

केरल ने इन गतिविधियों में दी छूट

बता दें कि केरल सरकार ने ऑड-ईवन के आधार पर वाहनों को चलाने की अनुमति दी है। सोमवार से रेस्टोरेंट खोलने की भी इजाजत दी है। सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन में लोकल वर्कशॉप, किताबों की दुकान और बारबर शॉप खोलने, कार की पिछली सीट में दो लोगों के बैठने और टू-व्हीलर (सिर्फ चलाने वाला व्यक्ति) चलाने की अनुमति दी है। राज्य सरकार की ओर से नियमों में ढील देने के बाद सोमवार को सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए। इस पर गृह मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की है। गृह मंत्रालय ने इसे लॉकडाउन का उल्लंघन बताया है।

गृह सचिव अजय भल्ला द्वारा लिखा गया पत्र

गृह मंत्रालय के सचिव अजय भल्ला ने केरल के मुख्य सचिव टॉम होसे को चिट्ठी लिखकर कहा, “केरल सरकार द्वारा लॉकडाउन नियम संबंधी जारी गाइडलाइन केंद्र द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। केंद्र द्वारा दी गई गाइडलाइन डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत जारी की गई है। आपसे अपील करते हैं कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में तत्काल बदलाव किया जाए ताकि लॉकडाउन के नियमों का पालन किया जा सके।”

हमने केन्द्र के दिशानिर्देशों के अनुरूप ही ढील दी है: केरल

गृह मंत्रालय के नोटिस का जवाब देते हुए राज्य के पर्यटन मंत्री कदमपल्ली सुरेन्द्रन ने बंद के दिशा-निर्देशों में ढील के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा, “हमने केन्द्र के दिशानिर्देशों के अनुरूप ही ढील दी है। मुझे लगता है कि कहीं कुछ गलतफहमी है जिसके कारण केन्द्र ने स्पष्टीकरण देने को कहा है। एक बार हम जवाब दे दें तो फिर सब ठीक हो जाएगा। महामारी से लड़ने के संबंध में केन्द्र और राज्य का रुख एक समान है। जो कदम उठाए गए हैं उनमें कोई विरोधाभास नहीं है। यह सिर्फ एक गलतफहमी है और हम इसे दूर कर देंगे।”

जरूरत पड़ने पर जरूरी संशोधन किए जाएँगे

वहीं केरल के मुख्य सचिव टॉम जोस ने कहा, “केरल को केंद्र से एक पत्र मिला है (लॉकडाउन दिशानिर्देशों के कमजोर पड़ने के बारे में)। हम चर्चा कर रहे हैं कि क्या किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर जरूरी संशोधन किए जाएंगे। राज्य सरकार कोरोना लॉकडाउन को लेकर गंभीर है।”

बता दें कि केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे सभी कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए किए गए लॉकडाउन गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करें और उसे कहीं से भी ना तोड़ें। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से बातचीत में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि कुछ राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ऐसे आदेश जारी कर रहे हैं, जो आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं है।

कोरोना+ डॉक्टर की मौत, कब्रिस्तान में दफनाने गए तो भीड़ ने किया हमला: चेन्नई में 20 गिरफ्तार

देश में सुरक्षाकर्मियों व स्वास्थ्यकर्मियों के सामने इस समय दो चुनौती है। पहला कोरोना वायरस और दूसरा वे लोग जो सब जानने-समझने के बावजूद भी इन योद्धाओं के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। ताजा मामला तमिलनाडु से है। यहाँ एक डॉक्टर की कोरोना संक्रमित होने के कारण मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सोमवार को जब डॉक्टर के शव को दफनाने के लिए कब्रिस्तान ले गए, तो वहाँ पर 50 से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने एम्बुलेंस पर हमला बोल दिया और देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस मामले के संबंध में बाद में 20 लोग गिरफ्तार किए गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब डॉक्टर के शव को दफनाने से रोकने के लिए हिंसक हुई भीड़ पर वहाँ मौजूद पुलिस काबू नहीं पा पाई, तो उन्होंने डॉक्टर के परिजनों से अपील करते हुए शव को किसी दूसरे कब्रिस्तान में ले जाने के लिए कहा। जिसके बाद दूर किसी कब्रिस्तान में डॉक्टर के शव को दफनाया गया।

जानकारी के अनुसार, चेन्नई के अस्पताल में कोरोना के कारण जिंदगी की जंग हारने वाले न्यूरोसर्जन की उम्र 55 वर्ष थी। अस्पताल ने मीडिया को जानकारी दी कि उनकी हालत काफी दिनों से नाजुक बनी हुई थी और वे वेंटिलेटर पर थे। वे बीमारी की चपेट में आने से पहले न्यूरोसर्जन होने के साथ-साथ मुख्य डॉक्टर और निदेशक भी थे। उनकी बेटी का भी फिलहाल कोरोना संक्रमित होने के कारण उसी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मगर उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब तमिलनाडु से इस प्रकार का मामला सामने आया हो। बीते दिनों 13 अप्रैल को भी एम्बातुर के नागरिकों ने कब्रिस्तान के बाहर हंगामा किया था। तब एक 62 वर्षीय डॉक्टर की मौत कोरोना वायरस की वजह से हो गई थी और उसे जब कब्रिस्तान में दफनाने के लिए ले गए तो लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया था।

हत्यारी भीड़ के साथ मौजूद थे NCP, CPM के नेता: पालघर मॉब लिंचिंग में स्थानीय लोगों के हवाले से बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं सहित 3 लोगों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 16, 2020) को हुई इस घटना का वीडियो 3 दिन बाद रविवार को वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों को सच्चाई पता चली थी। पालघर मॉब लिंचिंग का ये वीडियो दिल दहला देने वाला है। उस वीडियो को देख कर कोई भी काँप उठे। इस वीडियो में दिख रहे एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने जानकारी माँगी थी। पता चला है कि वो शरद पवार की पार्टी का आदमी है।

संबित पात्रा ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर के पूछा था कि पालघर के इस भयावह वीडियो में सफ़ेद और पीले रंग की टीशर्ट पहना व्यक्ति कौन है? उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों से कहा था कि अगर किसी को उसकी पहचान पता हो तो वो बताएँ। उनका कहना था कि उक्त व्यक्ति की पहचान सामने आने के बाद गुत्थी सुलझ सकती है। वो भीड़ को निर्देशित करता हुआ भी दिखता है। भाजपा के महासचिव सुनील देवधर ने स्थानीय लोगों के हवाले से बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति का नाम काशीनाथ चौधरी है।

काशीनाथ चौधरी शरद पवार की ‘नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी’ का जिला सदस्य है। देवधर की मानें तो हत्यारी भीड़ में वामपंथी पार्टी सीपीएम के पंचायत सदस्य व उसके साथ विष्णु पातरा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी शामिल थे। हत्यारी भीड़ में एनसीपी और सीपीएम नेताओं की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। एनसीपी महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी है और शिवसेना के साथ गठबंधन में मिल कर सरकार चला रही है। संबित पात्रा ने इसे पालघर केस में बड़ा खुलासा करार दिया।

पात्रा ने कहा कि ये घटना और इससे जुड़े खुलासे एक बहुत बड़ी साज़िश की ओर इंगित करते हैं। उन्होंने कहा कि उस जगह पर राजनेताओं की मौजूदगी का क्या अर्थ समझा जाए? वो क्या कर रहे थे? पात्रा ने पूछा कि कहीं वो भीड़ को भड़का तो नहीं रहे थे? उन्होंने ये भी याद दिलाया कि वहाँ उन्हीं पार्टियों के लोग मौजूद हैं, जो भाजपा से घृणा करते हैं, भगवा से घृणा करते हैं। बता दें कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने भी पालघर में साधुओं की मॉब-लिंचिंग पर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे से रिपोर्ट तलब की है।

पालघर में संतों को किसने मारा: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Palghar Sadhus Mob Lynching

महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं समेत 3 लोगों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या कर दी जाती है। लगभग 200 लोगों की भीड़ से घिरा साधु पुलिस के पास मदद के लिए जाता है, लेकिन पुलिस उसका हाथ छिड़क देती है और खुद उस भीड़ से बचती नजर आती है। 2-3 दिन तक इसे लूट-पाट और बच्चा चोर की घटना कहकर बरगलाया गया। फिर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सच्चाई सामने आई।

एक धर्म को लेकर लोगों की घृणा भीड़ को किस उतावलेपन तक भेज देती है कि वो ऐसा करने पर मजबूर हो जाती है, जहाँ 3 निर्दोषों की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। ये भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने डर की वजह से उन्हें आदिवासियों के हवाले कर दिया। जहाँ पर ये घटना हुई, वहाँ की जनसंख्या पिछली जनगणना के अनुसार 1208 है, जिसमें से 1198 अनुसूचित जाति/जनजाति के लोग थे। ये ईसाई मिशनरियों का इलाका है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

लॉकडाउन के चलते पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे CM योगी, माँ को लिखा भावुक पत्र, भीड़ न बढ़ाने की अपील

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का सोमवार (अप्रैल 20, 2020) को निधन हो गया। वह अंतिम बार अपने पिता के दर्शन भी नहीं कर सके। योगी आदित्यनाथ ने फैसला लिया है कि वह लॉकडाउन के नियमों का पालन करेंगे और अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे।

उन्होंने कहा, “अंतिम क्षणों में पिता जी के दर्शन की हार्दिक इच्छा थी पर देशहित के कारण मैं नहीं कर सकता। लॉकडाउन की सफलता के लिए और महामारी को परास्त करने के लिए मैं कल होने वाले अपने पूज्य पिताजी के अंतिम संस्कार में भाग नहीं लूँगा।”

सीएम योगी ने अपने घरवालों से भी अपील की है कि लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग ही अंतिम संस्कार में शामिल हों। उन्होंने इस दुख की घड़ी में अपनी माँ को एक भावुक पत्र लिखा है और उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के ऊपर अपने कर्तव्य को रखा है। ये बात बताई।

CM योगी का माँ के नाम भावुक पत्र

उन्होंने पत्र में लिखा है, “अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दु:ख एवं शोक है। वह मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं। जीवन में ईमानदारी, कठोर परिश्रम और निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परंतु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ की जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता तथा महामारी कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूँ।”

सीएम ने आगे लिखा, “पूजनीय माँ, पूर्वाश्रम से जुड़े सभी सदस्यों से भी अपील है कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूँ। लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊँगा।”

पिता के निधन के खबर के बाद भी जारी रखी मीटिंग

बता दें कि यूपी सीएम के पिता आनंद सिंह विष्ट ने सोमवार को दिल्ली के एम्स में अंतिम साँसे लीं। सीएम योगी को जब पिता के मौत की सूचना मिली तो वह कोरोना महामारी से निपटने के लिए मीटिंग कर रहे थे। सीएम ने मीटिंग जारी रखी।

पिता के निधन की सूचना के बाद भी मुख्यमंत्री करीब 45 मिनट तक बैठक करते रहे। अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी कि सीएम अब अपने पिता के दाह संस्कार में शामिल होंगे। उनके जाने के इंतजाम होने लगे लेकिन सीएम ने दिल्ली या उत्तराखंड जाने से इनकार कर दिया।

योगी के पिता आनंद सिंह की तबीयत पहले से खराब चल रही थी। कुछ समय पहले भी उन्‍हें देहरादून के अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। उस वक्‍त उन्‍हें डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। उन्‍हें पहले से बीपीसी समेत एक गैंग्रीन जैसी गंभीर बीमारी थी।

पालघर में नागा साधुओं की हत्या पर अमित शाह सख्त: CM उद्धव से तलब की रिपोर्ट, योगी ने भी की फोन पर बात

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित 3 लोगों की हत्या के सम्बन्ध में रिपोर्ट तलब की है। गृह मंत्रालय ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इस घटना के सम्बन्ध में रिपोर्ट माँगी है। ये घटना गुरुवार (अप्रैल 16, 2020) की है। रविवार को महाराष्ट्र सरकार ने इस सम्बन्ध में उच्च-स्तरीय जाँच कराने का आदेश दिया। पालगढ़ कासा पुलिस ठाणे के दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। जिला एसपी गौरव सिंह ने इस निर्णय की पुष्टि की है। महाराष्ट्र सरकार की अपील है कि इस घटना को सांप्रदायिक रंग न दिए जाएँ।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दावा किया कि हमला करने वाले और पीड़ित अलग-अलग धर्म के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को इस बात के लिए कड़े आदेश दिए गए हैं कि इस घटना की आड़ में धार्मिक विवाद पैदा करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए। पालघर पुलिस ने बताया है कि इस मामले में 110 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इनमें से अधिकतर दहानू तालुका के गडचिंचले गाँव के निवासी हैं। गिरफ़्तार किए गए लोगों में से 9 नाबालिग हैं।

ये घटना तब हुई, जब कांदिवली से 3 लोग एक गाड़ी से निकले थे। ये सभी एक अंतिम संस्कार में भाग लेने जा रहे थे। वो लोग सूरत जा रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उन्हें पालघर में घेर लिया गया। उन पर छड़ी और लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया। पुलिस वहाँ तमाशबीन बन कर सब कुछ देखती रही। एक वृद्ध साधु ने पुलिस का हाथ पकड़ कर सुरक्षा की गुहार लगाई लेकिन वो बार-बार हाथ पकड़ के झटक दे रहा था। पुलिसकर्मियों ने साधुओं को भीड़ के हवाले कर दिया, जिसके बाद उन्हें मार डाला गया।

ये घटना तीन दिन तक दबी रही क्योंकि मीडिया ने इसे ‘चोरी के इल्जाम में हत्या’ बता कर चलाया। जब इसका वीडियो वायरल हुआ और लोगों को इस हत्याकांड की नृशंसता की बात पता चली, जब लोगों ने महाराष्ट्र सरकार और मीडिया को उसके रवैये के लिए कोसा। तब सीएम उद्धव ने दुःख जताते हुए इस घटना में दोषियों को न बख्शने की बात कही। उधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत की।

सीएम योगी ने बताया कि उन्होंने पालघर में हुई जूना अखाड़ा के संतों स्वामी कल्पवृक्ष गिरि, स्वामी सुशील गिरि और उनके ड्राइवर नीलेश तेलगड़े की हत्या के संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की और घटना के जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए आग्रह किया है।

इधर पिता के निधन के बावजूद बैठक करते रहे CM योगी, उधर HaHa रिएक्ट कर कट्टरपंथियों ने मनाया जश्न

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पैतृक परिवार उत्तराखंड में रहता है। सोमवार (अप्रैल 20, 2020) को सीएम योगी के पिता आनंद सिंह बिष्ट का निधन हो गया। अब इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वो समूह सक्रिय हो गया है, जो हिंदूवादी नेताओं के साथ भी दुःखद हो तो जम कर जश्न मनाता है। इसी तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन होने पर भी फेसबुक पर कुछ लोगों ने जम कर ‘हाहा’ रिएक्ट किया, जिनमें अधिकतर ख़ास मजहब वाले लोग थे। इन्हें सीएम योगी के पिता के निधन से ख़ुशी हुई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बचपन में ही संन्यास ले लेने के कारण अपने परिवार के साथ नहीं रहते हैं लेकिन अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान वो परिवार से कभी-कभी मुलाक़ात करते रहे हैं 89 वर्षीय आनंद सिंह बिष्ट लम्बी बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज कई दिनों से एम्स दिल्ली में चल रहा था। जब उनके निधन की ख़बर आई, तब मुख्यमंत्री योगी लखनऊ में टीम-11 की बैठक में व्यस्त थे लेकिन उन्होंने बैठक नहीं रोकी। बैठक ख़त्म होने के बाद ही उन्होंने परिवार से सम्पर्क किया। बिष्ट की तबियत रविवार से ही गंभीर हो गई थी।

एबीपी न्यूज़ ने फेसबुक पर जब सीएम योगी के पिता के निधन की ख़बर पोस्ट की, तो उस पर 30 लोगों ने ‘हाहा’ रिएक्ट किया, जिसमें लुकमान मिर्ज़ा, फैज़ रजा हाशमी, सोहैल शेख, आकिब जुनैद, शाहरुख़ पठान, मोहम्मद आदिल, सैयद नावेद रहमान और सादिक अली शामिल थे। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की ख़बर वाली पोस्ट पर एक निसय किलाम नामक व्यक्ति ने लाफिंग इमोजी देते हुए लिखा कि उसे लगा कि योगी आदित्यनाथ की ही मृत्यु हो गई है। इसी तरह अन्य मीडिया पेजों की ख़बरों पर भी ‘हाहा’ रिएक्शन दिया गया।

इससे पहले जब कमलेश तिवारी की इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी, तब भी बड़ी संख्या में ‘हाहा’ रिएक्ट किया था। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में जब सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे, तब भी ‘हाहा’ रिएक्शन देने वालों की फ़ौज सामने आई थी। हिंदूवादी नेताओं के साथ कुछ भी बुरा हो तो सोशल मीडिया पर जम कर जश्न मनाया जाता है। ये सब तब हो रहा है, जब देश महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की निर्मम मॉब-लिंचिंग से उबल रहा है, जिसे मीडिया ने छिपाने की भरसक कोशिश की।

बता दें कि जब योगी आदित्यनाथ की माँ ने अपने बेटे को पहली बार संन्यासी की वेशभूषा में देखा था तो वो गोरखनाथ मंदिर में फूट-फूट कर रोने लगी थीं, तब योगी के पिता ने उन्हें समझाया था कि अब यहीं से लोक कल्याण होना है, ये रोने का समय नहीं है। इसके चार साल बाद योगी आदित्यनाथ अपने माता-पिता से भिक्षा लेने के लिए पंचूर पहुँचे थे। योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने कहा था कि संन्यासी होने का ये मतलब नहीं है कि परिवार से कभी नहीं मिल सकते।

‘वुहान’ कोरोना वायरस के लिए चीन जिम्मेदार: जर्मनी ने देश में हुए नुकसान के लिए भेजा 130 बिलियन पाउंड का बिल

चीन के वुहान प्रांत से पूरी दुनिया में फैला कोरोना वायरस संक्रमण अब तक डेढ़ लाख से अधिक लोगों की जान ले चुका है, जबकि 20 लाख से अधिक लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। दुनिया के कई देश कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अमेरिका खुले तौर पर कह चुका है कि चीन को इस संक्रमण के परिणाम भुगतने पड़ेंगे। वहीं जर्मनी ने चीन को वैश्‍विक महामारी फैलाने का आरोप लगाते हुए 130 बिलियन पाउंड का बिल भेजा है।

जर्मनी के प्रतिष्ठित अखबार ‘बिल्ड’ ने कोरोना वायरस से देश को हुए नुकसान का पूरा बिल छाप दिया है और इस नुकसान का जिम्मेदार चीन को ठहराया है। जर्मनी के सबसे बड़े टैबलॉयड न्यूजपेपर बिल्ड में एक संपादकीय छपा, जिसमें 130 बिलियन पाउंड का अनुमानित नुकसान बताया गया है।

इस लिस्ट में 27 मिलियन यूरो का नुकसान पर्यटन को हुआ है, 7.2 मिलियन यूरो का नुकसान फिल्म इंडस्ट्री को हुआ, एक मिलियन यूरो का नुकसान जर्मन एयरलाइंस लुफ्त्साना, 50 बिलियन यूरो का नुकसान जर्मनी के छोटे उद्यमियों को हुआ। बिल्ड के अनुसार कुल 1784 यूरो का नुकसान प्रति व्यक्ति को हुआ है और देश की जीडीपी 4.2 फीसदी गिर गई, ऐसे में इन तमाम नुकसान के लिए चीन जिम्मेदार है।

बिल्ड के एडिटर-इन-चीफ जूलियन रीचेल्ट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने अपने अखबार बिल्ड में पूछा कि क्या चीन को भारी आर्थिक क्षति के लिए भुगतान करना चाहिए, जिससे दुनिया भर में कोरोना वायरस का प्रसार हो रहा है।”

इसके साथ ही उन्होंने चीन के राष्ट्रपति पर हमला करते हुए कहा, “शी जिनपिंग, आपकी सरकार और आपके वैज्ञानिकों को बहुत पहले पता था कि कोरोना वायरस अत्यधिक संक्रामक है, लेकिन आपने इसके बारे में किसी को नहीं बताया। आपने दुनिया को अंधेरे में रखा।”

आगे जूलियन रीचेल्ट ने कहा, “जब पश्चिमी रिसर्चर ने आपके टॉप विशेषज्ञों से पूछा कि वुहान में क्या चल रहा है तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। आपको सच बताने में बहुत गर्व होना चाहिए था, लेकिन आपको ये देश का अपमान लगा।”

बता दें कि इससे पहले फ्रांस, यूके और अमेरिका ने कोरोना वायरस का जिम्मेदार सीधे तौर पर चीन को बताया है। दरअसल, हाल में जिस तरह के खुलासे सामने आए हैं कि चीन ने कोरोना वायरस के संक्रमण की भयावहता को छिपाने की कोशिश की और इसकी उत्पत्ति को लोगों के सामने नहीं आने दिया। इससे पहले शनिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर चीन ने यह जानबूझकर किया है तो उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

ट्रंप ने कहा कि इसे चीन में ही रोका जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिसकी वजह से पूरी दुनिया को इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है। अगर यह गलती थी, तो गलती होती है। लेकिन अगर इसे जानबूझकर किया गया है तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। डोनाल्ड ट्रंप और उनके वरिष्ठ सहयोगी लगातार चीन पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने इस पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरती।