राजस्थान पुलिस ने कॉन्ग्रेस पार्टी के पदाधिकारी को सोशल मी़डिया पर भड़काऊ संदेश पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। कॉन्ग्रेस पदाधिकारी की पहचान मोहसिन राशिद टोंक के रूप में हुई। कोतवाली पुलिस ने 19 अप्रैल को राशिद के ख़िलाफ़ शिंकजा सका। रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहसिन राशिद टोंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोरोनावायरस महामारी से संबंधित संदेश और वीडियो पोस्ट किए थे, जो समुदायों के बीच नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा देते थे। जिसके संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया।
खबरों के मुताबिक, राशिद को पहले मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और फिर बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत के लिए भेज दिया गया। मोहसिन कॉन्ग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य महासचिव हैं। वे पार्टी की वेबसाइट के अनुसार, राजस्थान कॉन्ग्रेस की वेबसाइट के प्रभारी भी हैं।
हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि 17 अप्रैल को किस पोस्ट के लिए मोहसिन को गिरफ्तार किया गया। मगर बताया जा रहा है कि 17 अप्रैल को टोंक के कसाई मोहल्ले में जो पुलिस पर हमला हुआ था, उस वाकये को लेकर मोहसिन ने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने टोंक में पुलिसकर्मियों पर हुए क्रूर हमले को सही ठहराया था।
मोहसिन ने अपनी वीडियो में पुलिस पर हमलावर हुए भीड़ के हमले को जस्टिफाई करने की कोशिश की थी और ये भी बताने का प्रयास किया था कि जहाँ हमला हुआ, वहाँ स्थानीय लोगों में अफवाह थी कि आरएसएस और बजरंग दल वाले सामान्य कपड़ों में घूम रहे हैं। इसलिए भीड़ ने पुलिसकर्मियों को आरएसएस व बजरंगदल वाला समझकर हमला कर दिया।
इतना ही नहीं, राशिद ने अपनी बात कहते हुए आरएसएस और बजरंग दल पर हमले की सोच को अप्रत्यक्ष रूप से सही ठहराते हुए और पुलिस पर हमला करने की घटना पर सभी स्थानीय लोगों की ओर से माफी माँगते हुए ये भी कहा कि अगर स्थानीय लोगों को मालूम होता कि वे पुलिसकर्मी हैं, तो वे उन पर कभी हमला नहीं करते।
यहाँ बता दें कि मोहसिन राशिद की अन्य तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर घूम रही हैं, जिनमें वह NDTV इंडिया के संपादक रवीश कुमार के साथ तो कभी अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। साथ ही राज्य के सीएम गहलोत के साथ भी वे नजर आ रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जिस संबंध में मोहसिन राशिद ने वीडियो के जरिए सफाई पेश की है। वो घटना 17 अप्रैल को राजस्थान के टोंक में घटी। जब इलाके की गश्त करने कई पुलिस टीम पर कसाई मोहल्ले के लोगों ने लाठी-डंडे और तलवार से हमला किया। इस घटना में तीन पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। जिन्हें बाद में टोंक के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इंदौर के टाटपट्टी बाखल में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हमले का आरोपित व कोरोना पॉजिटिव जावेद रविवार (अप्रैल 19, 2020) को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड से फरार होने के बाद आज (अप्रैल 20, 2020) नरसिंहपुर के मदनपुरा से गिरफ्तार किया गया। जानकारी के मुताबिक, जबलपुर में उसकी निगरानी के लिए वार्ड और अस्पताल में 15 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। बावजूद इतनी कड़ी निगरानी के वो पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। अस्पताल से भागने के बाद वो ट्रक से राजमार्ग तक गया और वहाँ से बाइक चोरी करके इंदौर की तरफ भाग रहा था। तभी चेकिंग कर रही पुलिस ने उसे पकड़ा और गिरफ्तार कर लिया।
जावेद को पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी के आरोप में रासुका के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जावेद जिस वार्ड से फरार हुआ है, उसके बाहर ताला लगा रहता था। लेकिन, सुबह 4 बजे के बाद वार्ड के दरवाजे पर लगा ताला टूटा पाया गया है। इस लापरवाही के मद्देनजर 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया गया और आशंका जताई गई कि जावेद को भागने में बाहर से मदद पहुँचाई गई।
•He is Javed Khan from Indore. •He had attacked doctors when they came to check him. •Later, He was tested positive for COVID19. •Then again he beat up doctors in hospital and ran away. •Police had put bounty on him. •Today he was caught by police. pic.twitter.com/gU4L7N4zb5
कहा जा रहा है कि पुलिस अधिकारी पूछताछ में ये नहीं बता पाए कि घटना के समय जावेद हथकड़ी में था या नहीं। लेकिन खबर है कि सुरक्षा के लिहाज से पुलिसकर्मियों को आइसोलेशन वार्ड से दूर रहने के निर्देश मिले थे, जिसका फायदा उठाकर जावेद भाग गया। जिसकी खबर मिलते ही हड़कंप अस्पताल में हड़कंप मच गया और उसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया।
खबरों के अनुसार, पहले एसपी अमित सिंह ने जावेद की गिरफ्तारी पर 10 हजार का इनाम घोषित किया। फिर आईजी भगवत सिंह चौहान ने 25 हजार का इनाम घोषित किया। लेकिन आरोपित के देर रात तक नहीं मिलने पर डीजीपी ने आरोपित की सूचना देने वाले को 50 हजार का इनाम देने की घोषणा की।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में शासकीय कर्मचारियों पर पत्थरबाजी और हमले के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) के तहत जबलपुर जेल भेजे गए चार आरोपितों में से एक जावेद भी था। जिसकी गिरफ्तारी के बाद वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया और उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया। इसके बाद उसकी निगरानी के लिए 15 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
रविवार को वो पुलिसकर्मियों की आँखों में धूल झोंककर वार्ड से भाग निकला। सूचना मिलने पर सुरक्षा ड्यूटी में लगे आरक्षक सूरज शर्मा, आरक्षक राहुल देवड़ा, आरक्षक मुकेश कुमार, आरक्षक अखिलेश को एसपी अमित सिंह ने निलंबित कर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए। वहीं फरार आरोपित पर भी मामला दर्ज किया गया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का आज (अप्रैल 20, 2020) निधन हो गया। 89 साल की उम्र में सीएम योगी के पिता आनंद सिंह बिष्ट ने एम्स में इलाज के दौरान आज सुबह सोमवार को 10 बजकर 40 मिनट पर आखिरी साँस ली। जानकारी के मुताबिक, उन्हें किडनी और लीवर की समस्या के कारण बीते 13 मार्च को एम्स (AIIMS) में लाया गया था, जहाँ वरिष्ठ डाक्टरों की टीम इलाज में लगी हुई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिता के निधन की सूचना योगी आदित्यनाथ तक पहुँचा दी गई है। बताया जा रहा है जब यह खबर सीएम योगी को दी गई, तब वह कोरोना संकट पर बनी टीम-11 की मीटिंग कर रहे थे। जिसे उन्होंने खबर मिलने के बाद भी नहीं रोका।
साभार: दैनिक जागरण
बैठक में उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोटा से उत्तर प्रदेश लौटे सभी बच्चों का होम क्वारंटाइन कराना सुनिश्चित कराएँ। इसके साथ ही सभी बच्चों के मोबाइल में आरोग्य सेतु डाउनलोड कराने के बाद उनको घर भेजा जाए।
The news of his father breathing his last came to him in midst of the meeting . Unfazed by the news @myogiadityanath stood up only after completing the meeting on COVID-19.
बता दें कि यूपी सीएम के पिता उत्तराखंड में फॉरेस्ट रेंजर थे। वह 1991 में रिटायर हो गए थे। रिटायरमेंट के बाद से ही वह अपने गाँव में आकर रहने लगे थे। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, जिस कारण उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।
डॉ. अकरम ने बताया कि आंनद सिंह बिष्ट को मुख्य रूप से पेट की तकलीफ के चलते भर्ती किया गया था। इसके अलावा डिहाइड्रेशन, लो-बीपी और पैरों में गैंगरीन की समस्या थी। अस्पताल में भर्ती करने के बाद उनकी स्वास्थ्य संबंधी जाँच कराई गई। रिपोर्ट के आधार उनका उपचार किया जा रहा था।
उल्लेखनीय है कि बीते महीने ज्यादा तबीयत खराब होने के बाद योगी आदित्यनाथ के पिता को दिल्ली के एम्स लाया गया था, यहाँ उन्हें एम्स के एबी वॉर्ड में रखा गया था, जहाँ उनका इलाज गेस्ट्रो विभाग के डॉक्टर विनीत आहूजा की टीम कर रही थी।
मगर, रविवार को उनकी अचानक तबीयत फिर से खराब हो गई। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उन्हें जवाब दे दिया। रविवार को गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा उनके हालचाल लेने गए थे और उन्हें घर लेकर जाने का विचार बन रहा था।
देश भर में मस्जिदों में छिपे कोरोना संदिग्धों के मामले थम नहीं रहे हैं। पुलिस को ऐसे संदिग्ध मामलों में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे ही एक मामले में झारखंड में धनबाद की एक अदालत ने रविवार (अप्रैल 19, 2020) को इंडोनेशिया के 10 नागरिकों को 14 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन की अवधि पूरा करने बाद जेल भेज दिया है। ये लोग दिल्ली के तबलीगी जमात इज्तिमा से वापस आने के बाद यहाँ एक मस्जिद में छुपे मिले थे।
झारखंड के धनबाद में गोविंदपुर आसनबनी मस्जिद में छुप कर रहने वाले सभी 10 इंडोनेशियाई नागरिकों के खिलाफ गोविंदपुर थाने में वीजा उल्लंघन के मामले में 9 अप्रैल को केस दर्ज किया गया था। टूरिज्म वीजा पर भारत आकर यहाँ बगैर अनुमति के धर्म प्रचार करने के आरोप सहित आईपीसी की धारा 175, 176, 188, 269, 270, 271 एवं 34 और विदेश अधिनियम तथा महामारी अधिनियम की धारा 3 के तहत रविवार को इन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
बता दें कि विदेशी नागरिकों के साथ ही महाराष्ट्र के ठाणे से आए दो गाइड व आसनबनी मस्जिद के सदर और सचिव को आरोपित बनाया गया है। हालाँकि फिलहाल इन चारों को जेल नहीं भेजा गया है। लेकिन पुलिस इन्हें भी जल्द जेल भेजने की तैयारी में है।
धनबाद में विदेशी मुस्लिमों के खिलाफ FIR
इंडोशिया से आए अंधिका फहमी, मोहम्मद रिजकी हिदायह, मोहम्मद यूसुफ इस्कंदर, सतरिया बायु आदिक पुतरा, अहमद ओंटे, अब्दुल्लो सुदियाना, उनदाग सुपरमैन, अखमद हमजाह, नसरुद्दीन तथा तौफीक सगाला लबाबा को रविवार को जेल भेजा गया। महाराष्ट्र ठाणे डाइगर शिवड़ी नगर से आए गाइड जफ्फार इस्लामुद्दीन मुंशी इशाक तथा मसूद खान एवं आसनबनी के सदर गुलाम मुस्तफा व सचिव शौकत अंसारी को भी जल्द ही पुलिस जेल भेजेगी।
पुलिस को सूचना नहीं देना पड़ा महँगा
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इंडोनेशिया के नागरिक दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के इज्तिमे में शामिल हुए थे और वहाँ से वापस आने पर धनबाद के गोबिंदपुर ब्लॉक की एक मस्जिद से 24 मार्च को छुपे मिले थे। इसकी जानकारी मस्जिद के सदर गुलाम मुस्तफा और सचिव गोविंदपुर रंगडीह निवासी शौकत अंसारी ने थाने में नहीं दी। उन्होंने पुलिस को अपना कोई दस्तावेज नहीं दिखाया। लॉकडाउन के बावजूद इन्होंने कई मस्जिदों में जमात लगाकर मजहब का प्रचार किया।
जेल भेजने से पूर्व कराई गई कोरोना जाँच
जेल भेजने से पूर्व सभी इंडोनेशिया नागरिक IIT (ISM) में 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किए गए थे। 15 अप्रैल को ही इन लोगों की क्वारंटाइन अवधि समाप्त हो गई। जिसके बाद पुलिस ने दोबारा 16 मार्च को सभी इंडोनेशिया नागरिकों के कोरना संक्रमण की जाँच कराई। सभी की रिपोर्ट नेगेटिव मिले। जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया।
शनिवार को 11 विदेशी भेजे गए थे जेल
24 मार्च को राँची के तमाड़ इलाके के रड़गाँव मस्जिद से 11 विदेशी मुस्लिमों को शनिवार (अप्रैल 18, 2020) को जेल भेज दिया गया। सभी को 25 दिनों तक क्वारंटाइन सेंटर में रखने के बाद सबोंको जेल भेज दिया गया। जेल भेजने से पूर्व उनकी स्वास्थ्य जाँच की गई। सभी की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई।
जादूगोड़ा थाने में इन लोगों के खिलाफ वीजा एवं लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के दर्ज मामले में यह कार्रवाई की गई है। जाँच के बाद पुलिस ने बताया कि ये लोग टूरिस्ट वीजा पर आकर धर्म का प्रचार कर रहे थे। यह वीजा कानून का उल्लंघन है।
भारतीय मीडिया का दोहरा स्वरूप इन दिनों अपनी चरम पर है। मीडिया चैनलों से लेकर अखबारों तक हर जगह ये केवल अपने पाठकों/दर्शकों को बरगलाने का काम कर रहा है। बीते दिनों द टेलीग्राफ और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों की ओछी हरकतें हमने देखी ही कि आखिर किस तरह एक तबलीगी जमात के किए धरे का ठीकरा उन्होंने आरएसएस के मत्थे फोड़ दिया। अपने इसी रवैये पर आगे बढ़ते हुए इन मीडिया हाउस ने महाराष्ट्र के पालघर में हुई साधुओं की हत्या पर जो रिपोर्टिंग की, वो न केवल निंदनीय है, बल्कि शर्मसार करने वाली भी है।
एक ऐसी घटना जहाँ स्पष्ट तौर पर भीड़ ने साधुओं की मॉब लिंचिंग की और उन्हें क्रूरता से मार दिया, उस घटना को हमारे ‘निष्पक्ष मीडिया’ ने किस प्रकार अपने पाठकों को पेश किया, इसे प्रमाण सहित देखिए।
महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को हुई घटना निस्संदेह ही झकझोरने वाली थी। लेकिन इसको लेकर सोशल मीडिया पर आक्रोश कल यानी 19 अप्रैल को देखने को मिला। इस बीच ऐसा नहीं था कि हम तक मीडिया ने ये खबर नहीं पहुँचाई। लेकिन जिस प्रकार उन्होंने इसे संप्रेषित करने का तरीका चुना, उसने पाठकों को कुछ देर के लिए ही सही, इस पर प्रतिक्रिया देने से रोके रखा।
वामपंथी मीडिया संस्थानों ने 17 अप्रैल को इस खबर को कवर तो किया लेकिन उस तरह नहीं जैसे वो अन्य मामलों पर अपनी रिपोर्टिंग करते हैं। उदाहरण देखिए। जिस इंडियन एक्प्रेस ने अभी हाल में आरएसएस को बदनाम करने के लिए अपनी एक खबर में हिंदू दंपत्ति की तस्वीर लगाई, उसी ने घटना पर केवल ये लिखा कि पालघर में चोरी के संदेह में 3 लोगों की मॉब लिंचिग कर दी गई।
It’s not like the major newspapers did not cover the #palgharlynching two days ago. They did.
Just that the victims, two of whom belonged to the revered Juna Akhara, were introduced as just “men” or “three” pic.twitter.com/7y1GmAs1IK
द हिंदू ने भी अपनी रिपोर्ट के शीर्षक में किसी जगह पर साधू शब्द का इस्तेमाल करना उचित नहीं समझा। इन्होंने भी 3 लोगों की लिंचिंग को ही अपनी खबर में प्राथमिकता दी।
इसी प्रकार टाइम्स ऑफ इंडिया की भी खबर इसी एंगल पर चली। इसके बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने भी 200 लोगों की भीड़ का उल्लेख कर पूरी घटना की भर्त्सना को जरा सा दर्शाया लेकिन मुख्य बात यानी साधुओं की हत्या की बात उनके शीर्षक से भी नदारद रही।
The same English print media that uses sadhus’ images for rapes done by Deen Mohammad and Asif Noori, simply writes “three killed” when sadhus are mob-lynched pic.twitter.com/e9UKcfMJdN
यहाँ हैरानी की बात है कि ये वही मीडिया है, जो मुस्लिम के पीड़ित होने पर या तो अपनी हेडलाइन में मुस्लिम शब्द का प्रयोग विशेषत: करता है या फिर उस भीड़ को हिंदुओं की भीड़ जरूर बताता है, जो मॉब लिंचिंग की आरोपित होती है।
इस बात को समझने के लिए बहुत दूर उदाहरणों को देखने मत जाइए। पिछले साल हुए तबरेज की खबरों को खँगाल कर पढ़ लीजिए, समझ आ जाएगा कि भारतीय मीडिया धर्म/मजहब के बीच फर्क करते-करते किस गर्त में जा गिरा है कि इनके लिए मुस्लिम युवक यदि आरोपित हो तो वो शीर्षक के लायक नहीं है, मगर यदि वो पीड़ित हो तो उसकी पूरी कुंडली वे कोशिश करते हैं कि हेडलाइन में ही पेश कर दें।
भारतीय मीडिया का ये रवैया हाल में इतना नहीं बदला है। इसने एक लंबे समय तक इसी प्रकार कभी भ्रामक तस्वीर तो कभी भ्रामक शीर्षक के जरिए लोगों को बरगलाया है। साल 2018 में भी एक खबर आई थी। जहाँ एक मुस्लिम रेप का आरोपित था। मगर, रेप जैसी घटनाओं में मौलवियों या मुस्लिमों की संलिप्ता देखकर इसी मीडिया ने अपनी फीचर इमेज में साधुओं की प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई थी और दीन मोहम्मद व आसिफ नूरी के दोषी होने पर उनके लिए अपने शीर्षक में ‘गॉडमैन’ शब्द का प्रयोग किया था।
अफसोस! आज जब वास्तविकता में रिपोर्ट में साधू शब्द और उससे जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीरों की जरूरत पड़ी तो इन्ही संस्थानों की आर्काइव गैलरी और शब्दावली में भारी कमी आ गई। इन्होंने साधुओं की हत्या को मात्र 3 लोगों की लिंचिंग बताया, वो भी यह कहकर कि उन पर चोरी करने का संदेह था।
महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु और एक ड्राइवर की मॉब लिंचिंग के मामले में FIR दर्ज कर 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 101 लोगों को 30 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है, जबकि 9 नाबालिगों को जुवेनाइल सेंटर होम में भेज दिया गया है।
Maharashtra: 3 people were beaten to death by villagers in Palghar on suspicion of theft on 17th April. FIR filed against villagers & 110 people have been arrested, of which 101 have been sent to police custody till 30 April & 9 minors have been sent to a juvenile shelter home.
साधुओं की निर्मम हत्या को लेकर साधु-संतों सहित नेताओं ने रोष जताया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने रविवार को इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और चेतावनी दी कि अगर हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं की गई तो महाराष्ट्र सरकार के विरुद्ध आंदोलन किया जाएगा।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पालघर में जिस क्रूरता के साथ मॉब लिंचिंग हुई, वह मानवता को शर्मसार करने वाली है। पालघर में भीड़ हिंसा की घटना का वीडियो हैरान करने वाला और अमानवीय है। ऐसे संकट के समय इस तरह की घटना और भी ज्यादा परेशान करने वाली है। मैं राज्य सरकार से गुजारिश करता हूँ कि वह इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच करवाएँ और जो दोषी हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।”
भाजपा उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा ने घटना को बताया शर्मनाक
Horrific video of a mob lynching in cops’ presence in #Palghar Maharashtra, run by @OfficeofUT whr a few days ago a cop & doctor had been assaulted.
Media downplayed, said “mistaken suspicion as robbers” & suppressed that they were in Hindu religious robes.
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रवक्ता बैजयंत पांडा ने भी घटना को लेकर रोष जताया है। उन्होंने इस घटना को शर्मनाक बताया और उद्धव सरकार को निशाने पर लिया। पांडा ने ट्वीट किया, “पालघर में पुलिस के सामने भीड़ हिंसा की घटना का वीडियो दहला देने वाला है। वह भी तब, जब कुछ ही दिन पहले उद्धव सरकार के शासन में एक पुलिसकर्मी और डॉक्टर पर हमला हुआ था। मीडिया के एक वर्ग ने इसे ‘संतों के भेष में चोरों’ का मामला बताकर घटना को कमतर दिखाया।”
महाराष्ट्र के पालघर में हुई इस हत्या को क्या कहें? स्टेट स्पॉन्सर्ड? या पुलिस स्पॉन्सर्ड? महाराष्ट्र सरकार की शान में आए दिन क़सीदे पढ़ने वाले फ़िल्मी सितारों में से कितनों ने इस बारे में ट्वीट किया?#Palghar_Incident#PalgharMobLynchingpic.twitter.com/TNljKDpX6C
आज तक के पत्रकार रोहित सरदाना ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल खड़े किए। उन्होंने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “महाराष्ट्र के पालघर में हुई इस हत्या को क्या कहें? स्टेट स्पॉन्सर्ड? या पुलिस स्पॉन्सर्ड? महाराष्ट्र सरकार की शान में आए दिन कसीदे पढ़ने वाले फिल्मी सितारों में से कितनों ने इस बारे में ट्वीट किया?”
एक वृद्ध साधु वर्दी से उम्मीद लगाए पीछे छिपे। तो उसने खुद उन्हें भीड़ को सौंप दिया! ‘चोर समझकर’ मारने वाली पूरी रिपोर्ट मनगढ़ंत दिख रही है। ये विडियो तो प्रायोजित हत्या का है। https://t.co/HwnUymAE6L
वहीं आज तक की पत्रकार श्वेता सिंह ने भी इसे प्रायोजित हत्या बताते हुए कहा, “एक वृद्ध साधु वर्दी से उम्मीद लगाए पीछे छिपे। तो उसने खुद उन्हें भीड़ को सौंप दिया! ‘चोर समझकर’ मारने वाली पूरी रिपोर्ट मनगढ़ंत दिख रही है। ये वीडियो तो प्रायोजित हत्या का है।” बता दें कि मीडिया गिरोह साधुओं की मॉब लिंचिंग कर हत्या की खबर की रिपोर्टिंग ‘चोर समझकर’ पीट-पीट कर हत्या के रूप में की है।
महाराष्ट्र के पालघर का एक और विडीओ सामने आया है ..हृदयविदारक ..बेबस संत पुलिस के पीछे अपनी जान बचाने भाग रहा है और ऐसा साफ़ दिख रहा है की पुलिस न केवल अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हट रही है अपितु ऐसा लगता है की बेचारे संत को भीड़ में धकेला जा रहा है। ये महाराष्ट्र में क्या हो रहा है? pic.twitter.com/6KC3gJQPgn
भाजपा नेता संबित पात्रा ने भी इस दर्दनाक वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “महाराष्ट्र के पालघर का एक और वीडियो सामने आया है… हृदयविदारक… बेबस संत पुलिस के पीछे अपनी जान बचाने भाग रहे हैं और ऐसा साफ दिख रहा है कि पुलिस न केवल अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हट रही है अपितु ऐसा लगता है की बेचारे संत को भीड़ में धकेला जा रहा है। ये महाराष्ट्र में क्या हो रहा है?”
आज भगवा के साथ हुए नरसंहार पर मुझे भारत का मौन खल रहा ?
क्या संन्यासी साधु संत का कोई मानवाधिकार नहीं होता?
हिंदुत्व का राग अलापने वाली भगवान ध्वज लेकर चलने वाली सरकार क्या मर चुकी है ?
एक्टर मुकेश खन्ना ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “आज भगवा के साथ हुए नरसंहार पर मुझे भारत का मौन खल रहा? क्या संन्यासी साधु संत का कोई मानवाधिकार नहीं होता? हिंदुत्व का राग अलापने वाली भगवा ध्वज लेकर चलने वाली सरकार क्या मर चुकी है? क्या सनातन के संहार के बाद देश खड़ा रह सकेगा? कोई अन्य संप्रदाय का धर्मगुरू होता फिर?”
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रियाएँ दीं। एक ने लिखा, “अगर पालघर ग़लती से यूपी में होता और मरने वाला तबरेज या अखलाक होता तो चूड़ियाँ टूटने की इतनी आवाज़ आती कि कोरोना मर जाता।”
अगर पालघर ग़लती से यूपी में होता और मरने वाला तबरेज या अखलाक होता तो चूड़ियाँ टूटने की इतनी आवाज़ आती कि कोरोना मर जाता? #Palghar#moblynching
आहत इंदौरी नाम के एक यूजर ने लिखा, “हिन्दुओं ने बेवजह किसी मौलवी की पुलिस के सामने पीट पीट कर हत्या कर दी होती तो ये अब तक अंतराष्ट्रीय खबर बन गई होती और कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा आदि दलों का रो-रो कर बुरा हाल होता।”
एक यूजर ने लिखा, “इससे यही साबित होता है कि हिंदुत्व को तोड़ा जा रहा है। अगर यही यूपी में होता तो योगी जी इनको औकात बता देते। पता नहीं ठाकरे साहब कब जागेंगे देश के लिए या उनको सिर्फ कुर्सी प्यारी है?”
इससे यही साबित होता है कि हिंदुत्व को तोड़ा जा रहा है अगर यही यूपी में होता तो योगी जी इनको औकात बता देते पता नहीं ठाकरे साहब कब जागेंगे देश के लिए या उनको सिर्फ कुर्सी प्यारी है
एक अन्य यूजर ने लिखा, “बालासाहेब होते तो आज संतों को मारने वालों के हाथों को काट देते, लेकिन दुर्भाग्य से आज उनके बेटे की सरकार है जो कॉन्ग्रेस की गोदी में खेल रहा है।”
बालासाहेब होते तो आज संतों को मारने वालों के हाथों को काट देते, लेकिन दुर्भाग्य से आज उनके बेटे की सरकार है जो कांग्रेस की गोदी में खेल रहा है
एक ने लिखा, “अखलाक ओर पहलू खान पर आँसू बहाने वाले लिबरल्स महाराष्ट्र के पालघर में 2 संत और उनके ड्राइवर को बड़े ही बेरहमी से लिंचिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया तब चुप क्यों हैं?? कहाँ हैं लोकतंत्र के ठेकेदार?? क्यों… ये तो संतों की मृत्यु हुई है, कौन पूछता है संतों को?”
अखलाख ओर पहलू खान पर आँसू बहाने वाले लिब्र्ल्स महाराष्ट्र के पालघर में 2 संत और उनके ड्राइवर को बड़े ही बेरहमी से लिंचिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया तब चुप क्यों है??
कहाँ है लोकतंत्र के ठेकेदार?? क्यों ..ये तो संतो की मृत्यु हुई है कौन पूछता है संतो को?
— Jani Kalpesh ?? राम भक्त ? (@Real_jani1) April 19, 2020
पालघर साधु मॉब लिंचिंग: पूरा मामला
गौरतलब है कि जूना अखाड़ा के 2 महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज (70 वर्ष), महंत सुशील गिरी महाराज (35 वर्ष) अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे (30 वर्ष) के साथ मुंबई से गुजरात अपने गुरु भाई को समाधि देने के लिए जा रहे थे। दरअसल, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा 13 मढ़ी मिर्जापुर परिवार के एक महंत राम गिरी जी गुजरात के वेरावल सोमनाथ के पास ब्रह्मलीन हो गए थे। दोनों संत महाराष्ट्र के कांदिवली ईस्ट के रहने वाले थे और मुंबई से गुजरात अपने गुरु की अंत्येष्टि में शामिल होने जा रहे थे।
इसी दौरान रास्ते में उन्हें महाराष्ट के पालघर जिले में स्थित दहाणु तहसील के गडचिनचले गाँव में पालघर थाने के पुलिसकर्मियों ने पुलिस चौकी के पास रोका। इसके बाद ड्राइवर के साथ दोनों संतों को भी गाड़ी से बाहर निकलने के लिए कहा गया और उन लोगों को पुलिस वालों ने, सड़क के बीच में ही बैठा दिया, कहा जा रहा है वहाँ गाँव के करीब 200 के आस पास लोग अचानक ही इकट्ठे हो गए।
फिर भीड़ ने, पुलिस वालों के सामने ही डंडे और पत्थरों से मार-मार कर दोनों सन्तों और ड्राइवर की बेरहमी से हत्या कर दी। बता दें कि यह गाँव और इलाका आदिवासी बहुल है और ग्रामीणों में ज़्यादातर ईसाई और कुछ के मुस्लिम समुदाय का होने का दावा भी संत समाज के कुछ लोगों द्वारा किया गया है।
बंगाल के एक छोटे से गाँव की तरह दिखने वाले, एक जगह पर ‘मानवतावादियों’ ने गरीबों के एक समूह को भोजन व राशन वितरित करने के लिए इकट्ठा किया। उसके बाद एक आदमी एक सूची से नाम पढ़ना शुरू करता है। एक-एक करके, गाँव के गरीब लोग उठते हैं और अपने नाम से दी गई अनाज की बोरी इकट्ठा करते हैं। ऐसे कठिन समय में लोगों का आगे बढ़कर गरीबों के प्रति संवेदना देख, ऐसा लगा कि इंसानियत अभी भी जिंदा है।
तभी से कुछ होता है। अचानक, सूची देखकर नाम पढ़ने वाला व्यक्ति रुक जाता है और देखता है कि कुछ व्यक्ति भोजन प्राप्त करने के लिए लाइन के पीछे शामिल हो गए हैं। उसके बाद वह चिल्लाते हुए कहता है, “तुम सब हिंदू हो, चले जाओ। यह तुम्हारे लिए नहीं है। अपने आप को इस सूची में शामिल न करो।”
आप सभी ने अक्सर सुना होगा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है। लेकिन कुछ लोगों के लिए, भूख का निश्चित रूप से यह है। फिर से पीछे वाली घटना पर चलते हैं। थोड़ी देर के लिए, आपको यह जानकर राहत मिल सकता है कि यह पूर्वी बंगाल के किसी गाँव में हो रहा है, जिसे अब बांग्लादेश कहा जाता है। पश्चिम बंगाल से ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। कम से कम अभी तक तो नहीं ही।
पाकिस्तान बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति
सीमाओं का भी अजीब रूप है। खासकर प्राचीन भारत में मनमाने ढंग से खिंची गई रेखा, और फिर उसे टुकड़ों में बाँट दिया जाना। करने को हम सब दिखावा कर सकते हैं कि ऊपर वाली घटना का वीडियो हमारे लिए मायने नहीं रखता क्योंकि यह बंगलादेश का है और भारत के किसी हिस्से से ऐसी बात सामने नहीं आई है। हम अपनी आँखें भी बंद कर सकते हैं। या फिर हम इसे एक गम्भीर भविष्य की चेतावनी भी समझ सकते हैं, जिसको हमने इतिहास से नहीं सीखा।
कोरोना का इस्तेमाल कर हिन्दुओं का उत्पीड़न
भारत से नफ़रत करने वाली अरुण***ती रॉय जैसी भी है, लेकिन उसकी एक बात तो सही है। वो यह कि यह बीमारी (कोरोना) एक द्वार है। फर्क सिर्फ इतना है कि जिस रूप में वो हमें इसे समझाना चाहती है वैसे नहीं देखना है इस द्वार के पार। इस समय द्वार के माध्यम से हम देख सकते हैं कि असल भारत में “गंगा जमुनी तहज़ीब” की दूसरी तरफ का आइना क्या है।
पिछले दो महीनों से, दुनिया वुहान से फैली कोरोना वायरस की महामारी जूझ रही है। ऐसे में मानवता के खिलाफ़ एक घोर अपराध पर किसी का ध्यान ही नहीं गया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने हिंदू अल्पसंख्यकों को भूखा रखने के लिए इस महामारी का इस्तेमाल कर रहा है। एक पल के लिए भी विश्वास नहीं होता कि दुनिया केवल गरीब देशों की देखभाल और अन्य चीजों को देखने मे व्यस्त है।
यदि मीडिया के पास मूर्खतापूर्ण लेखों के लिए समय और स्थान है, जो यह कहता है कि “इंडिया” के बजाय “भारत” कहना दुनिया के खिलाफ एक साजिश हो सकती है, तो उनके पास निश्चित रूप से पाकिस्तान या बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों को कवर करने का समय भी है। पश्चिमी मीडिया में सिर्फ हिंदूफोबिया का जहर टपक रहा है और ऐसा लग रहा है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। भारत के एक आम अस्पताल पर फर्ज़ी खबर चला कर, हिंदू बहुमत पर ‘असहिष्णुता’ का आरोप लगाया गया। भारत को टारगेट बनाया जाता है।
और फिर यह कहानी कुछ ही घंटों में दुनिया भर में छा जाती है। ये कोई अभी के दिनों की बात नही है। आम दिनों में भी पाकिस्तान या बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की परवाह कौन सी दुनिया करती थी, यह सर्वविदित है। दुनिया जानबूझकर हिंदुओं की दुर्दशा को अनदेखा कर रही है।
दिलचस्प सवाल यह है कि भारत के हिन्दुओं को भी इस बात से कोई लेना-देना नहीं। सीमा पार की सारी बातों से वाकिफ होने के बाद भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। हिंदुओं की नैरेटिव यहीं मात खाती है। क्योंकि दूसरे नैरेटिव को देखें तो भारतीय लिबरल्स अच्छी तरह जानते हैं कि कोई भी नागरिक किसी भी भारतीय को धमकी नहीं दे सकता, चाहे सीएए के नाम पर या किसी और तरीके से। वो यह भी जानते हैं कि भारत ‘लिंचिस्तान नहीं है’। फिर भी वो कहानियाँ गढ़ते हैं, खबरें फैलाते हैं।
भारतीय लिबरलों के कान पर जूँ तक नहीं रेंगता
हाल ही में दिल्ली में हुए दंगों में ‘मजहब विशेष का नरसंहार’ नहीं हुआ था। फिर भारत के लिबरल्स क्यों हमेशा इन झूठों का सहारा लेते हैं? इसका एक सीधा मकसद है सिर्फ अपना मतलब निकलना। जितना हो सके भारत के बारे में गलत सोचना और ज़हर उगलना। जिस तरह भारत अन्य देशों की बराबरी कर आगे बढ़ रहा है, यह इनसे बर्दाश्त ही नहीं हो रहा। लेकिन इनका असली मकसद कुछ और ही हैं।
इनके झूठ का एक अलग ही उद्देश्य है। ये हमेशा हिंदुओं को अपने बचाव में रखते हैं। वास्तव में क्या हो रहा, ये बात ये देख ही नहीं पाते या देखना ही नहीं चाहते। इन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं से आ रही हिंदुओं की चीखें सुनाई ही नहीं देतीं।
In Bangladesh Hindus were denied groceries & minorities in East Bengal starving to death
The mu$l!m in the video distributes groceries to M community he realizes Hindus have joined and he says You are Hindus,” Go away. This is not for you.Don’t put your names on the list pic.twitter.com/lJiypopTEt
असल में वो मृतको की चीखें हमें बुला नहीं रही होती हैं, बल्कि आज़ादी से साँस ले रही होती हैं। ये बता रही होती हैं कि मर तो हम पहले ही गए थे। अब इंसान बन रहे हैं। मगर इन लिबरल्स को दुख-दर्द तो सिर्फ कुछ ही लोगों के दिखाई देते हैं। इनके आँसू सिर्फ खास मकसद पर ही निकलते हैं। वो भी तब, जब इन्हें नफ़रत की आग लोगों के अंदर पैदा करनी होती है।
याद रखें, हर पल जब हम हनुमान स्टिकर, साड़ी या रसम पर इन लिबरल्स से बहस करते हैं, उस पल हम एक बड़े तस्वीर को नहीं देख पाते कि हमारे साथ क्या हो रहा है। लिबरल्स अच्छी तरह से जानते हैं कि साड़ियों का तथाकथित हिंदू राष्ट्रवाद से कोई लेना-देना नहीं है। वे सिर्फ हमें तंग कर रहे हैं, हमें चारों ओर से परेशान कर रहे हैं, हमें थका रहे हैं।
जब हम अपने दिमाग को छोटी चीजों पर केंद्रित करते हैं, तो हम बड़ी तस्वीर को याद नहीं करते हैं। यही उनकी असली रणनीति है। अगर भारत के एक अरब हिंदुओं ने एक स्वर में बात करनी शुरू कर दी कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ क्या हो रहा है, तो क्या दुनिया तब भी इसे अनदेखा कर पाएगी? बिलकुल नहीं।
यही कारण है कि वे हमारे पैर खींचते हैं, हमें फासीवाद और असहिष्णुता के बेतुके आरोपों में व्यस्त रखते हैं। उदाहरण के लिए सीएए। वे हमारे सामने ऐसी चीजों को बार-बार दोहराते हैं। दरअसल वे हमारा समय बर्बाद करते हैं, हमें भटकाते हैं। हर गुजरते दिन के साथ, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू विलुप्त होने के करीब एक कदम बढ़ते जा रहे हैं। और हमें अहसास भी नहीं कि एक दिन हमारे साथ भी ऐसा हो सकता है!
कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देशभर में जारी बंद (Lockdown) के दौरान मुस्लिम समुदाय के कई लोग सोशल मीडिया पर निरंतर ऐसे वीडियो बनाकर पोस्ट करते हुए देखे गए, जिनमें उन्होंने या तो कोरोना को अल्लाह की एनआरसी बताया, या फिर कहा कि नमाजियों को कोरोना से कुछ नहीं हो सकता और उन्हें खुलकर बाहर निकलना चाहिए।
ऐसे ही कासिफ़ अली नाम का एक युवक का कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो शकूर नगर, मेरठ (जैसा कि ट्विटर पर इस वीडियो के साथ बताया गया था) के अलग-अलग बाजार में जाकर यह साबित करते हुए देखा गया कि लॉकडाउन का उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला और सब कुछ सामान्य तरीके से चलता रहेगा।
— Tajinder Pal Singh Bagga (@TajinderBagga) April 19, 2020
कासिफ़ अली इस वीडियो में अस्सलाम वालेकुम कहते हुए कहता नजर आता है कि किसी को मुर्गा चाहिए या चूड़ियाँ चाहिए, किस चीज की कोई कमी नहीं है और बाजारों में खूब भीड़ है कौन कहता है कि लॉकडाउन रहेगा? यह वीडियो आज दिन में ही भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्विटर पर शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और मेरठ पुलिस को टैग किया था।
इसके कुछ ही घंटों बाद मेरठ पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें यही युवक एकदम अलग अंदाज में अपने कर्मों की माफ़ी माँगता हुआ नजर आ रहा है। उसका कहना है कि कुछ दिन पहले लॉकडाउन के दौरान उसके भाई की दुकान को पुलिस ने जबरन बंद करवा दिया था और इसी कारण भावनाओं में बहकर उसने यह वीडियो बनाया था।
आज जारी किए गए नए वीडियो में कासिफ़ अली के सुर एकदम बदले हुए नजर आए। नमस्कार दोस्तों कहते हुए उन्होंने आज के वीडियो की शुरुआत की और वीडियो देखकर यह स्पष्ट पता चल रहा है कि कासिफ़ अली अपनी हरकत पर वास्तव में शर्मिंदा हैं और उन्हें मुर्गे की दुकान वाला वीडियो नहीं बनाना चाहिए था। उन्हेओं अपनी इस हरकत के लिए माफ़ी माँगी है।
ज्ञात हो कि इसी तरह से सोशल मीडिया पर बॉलीवुड कलाकार एजाज खान अक्सर भड़काऊ बातें करते हुए देखे जाते हैं। कल ही उन्हें मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत बन चुके तबलीगी जमात पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी का कहना है कि तबलीगी जमात पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
इकबाल अंसारी का आरोप है कि तबलीगी जमात के लोगों ने देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तबलीगी जमात के लोगों को पहले ही चेतावनी दी थी कि वह भीड़ न इकट्ठा करें, फिर भी जमात के लोगों ने एज्तेमा आयोजित किया और इसके बाद पूरे देश में कोरोना संक्रमण को फैलाया।
घुमंतू होते हैं तबलीगी, जहाँ जगह मिले वहीं सोते हैं
इकबाल अंसारी रविवार (अप्रैल 19, 2020) को लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा- “हम देश के प्रति वफादार हैं। जमाती घुमंतू होते हैं। जगह-जगह घूमते रहते हैं। जहाँ जगह मिली, वहीं सो जाते हैं। जहाँ खाना मिला, वहाँ खा लेते हैं। लेकिन, मौजूदा समय में यही जमाती कोरोना फैलने की वजह बन रहे हैं। यह बीमारी खासतौर पर जमातियों में पाई जा रही है।”
अयोध्या विवाद में बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि तबलीगी के जमाती देश के गद्दार हैं, वे देश में कोरोना जैसी महामारी को फैलाने की साजिश रच रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण किसी जाति धर्म को देख कर नही संक्रमित कर रहा है। ऐसे में जमात के लोगों को देश के बारे में सोचना चाहिए था। लेकिन जमात के लोगों ने जो किया वह देशद्रोह है।
इकबाल अंसारी का कहना है कि सरकार ने जमात के लोगों को इलाज के लिए बुलाया लेकिन उसके बाद भी जमात के लोग सामने नहीं आए। आज पूरे देश में जमात की वजह से संक्रमण फैला है। ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार को देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
‘हम देश के वफादार हैं, हम कोरोना नहीं फैलने देंगे’
धर्म और मजहब को बीच में ना लाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि देश बचाने के लिए मजहब की दीवारें नहीं आनी चाहिए। सभी धर्मों के लोगों को एक साथ जुड़कर कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। इकबाल अंसारी ने कहा कि हम देश के वफादार हैं और हम कोरोना का संक्रमण अपने देश में नहीं होने देंगे।
उन्होंने कहा कि जमाती अगर गलत कर रहे हैं, तो हम उनका समर्थन बिल्कुल भी नहीं करते। आए दिन जमातियों के संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। सरकार के निर्देशों का उल्लंघन कर ये लोग देश विरोधी काम कर रहे हैं।
कोरोना के खिलाफ मोदी-योगी सरकार ने लगा रखी है पूरी ताकत
इकबाल अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ की। इकबाल का कहना है कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ सरकार ने पूरी ताकत लगा रखी है और कोरोना संक्रमण देश से जल्दी ही समाप्त होगा।
इकबाल अंसारी का यह बयान आप इस लिंक पर देख सकते हैं –
अंसारी ने तबलीगी के जमातियों को इंसानियत का दुश्मन बताते हुए कहा कि ऐसे जमातियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ये जहाँ भी मिलें, इन्हें सजा दी जानी चाहिए।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया है कि राज्य अब कोरोना से मुक्त हो गया है क्योंकि वहाँ एक भी नेगेटिव मामला नहीं है। अर्थात, गोवा में अब कोरोना वायरस से संक्रमण का कोई भी सक्रिय केस नहीं है। मुख्यमंत्री डॉक्टर सावंत ने कहा कि ये गोवा के लिए संतुष्टि और राहत की बात है। उन्होंने जानकारी दी कि सभी कोरोना पॉजिटिव मरीज का टेस्ट नेगेटिव आया है। उन्होंने सभी डॉक्टरों, मेडिकल और पैरा मेडिकल कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि वो इन सभी का धन्यवाद करते हैं।
गोवा में पिछले 16 दिनों से कोरोना वायरस का कोई भी नया मामला नहीं आया है। सीएम सावंत ने बताया कि 3 अप्रैल से लेकर अब तक गोवा में कोरोना का कोई केस नहीं निकला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग कर के इस बात की जानकारी दी और ‘गोवा फाइट्स कोरोना’ का नारा दिया। कई लोगों ने भी डॉक्टर सावंत को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने राज्य के रक्षक की तरह 24 घंटे लग कर राज्य को ये उपलब्धि दिलाई है। कइयों ने लिखा कि इन परिस्थितियों में ये काफ़ी अच्छी ख़बर है।
बता दें कि अब तक वामपंथियों द्वारा केरल मॉडल की खूब चर्चा होती थी, जबकि जनसंख्या और मरीजों के अनुपात को देखें तो उत्तर प्रदेश कोरोना से निपटने में बेहतर कर रहा है। लेकिन, महाराष्ट्र और केरल की सरकारों की वाहवाही के लिए दोनों राज्यों का मॉडल रचा गया, जिसमें सेलेब्रिटीज से ट्वीट करवाए गए। अनजाने में अभिनेत्री उर्वशी रौतेला के खुलासे के बाद महाराष्ट्र की पोल खुल गई क्योंकि ये साबित हो गया कि सभी ट्वीट्स ठाकरे सरकार ने करवाए थे। केरल सरकार का गुणगान शुरू कर दिया गया, ताकि योगी सरकार के कामकाज की चर्चा न हो।
A moment of satisfaction and relief for Goa as the last active Covid-19 case tests negative. Team of Doctors and entire support staff deserves applause for their relentless effort. No new positive case in Goa after 3rd April 2020.#GoaFightsCOVID19@narendramodi
गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने भी डॉक्टरों और सभी कोरोना वारियर्स की प्रशंसा करते हुए राज्य के कोरोना फ्री होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शून्य की भी अपनी ही महत्ता होती है, गोवा में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या शून्य पर है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि कोरोना का एक भी मामला होने का मतलब ये नहीं कि लॉकडाउन का फिर सोशल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा जाएगा। ये सब चलता रहेगा। यानी, राज्य व केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन यूँ ही जारी रहेगा।
Zero indeed has great value! Immensely happy to announce that all the COVID-19 positive cases in the state are now NEGATIVE. Very grateful to our Doctors & frontline workers who worked tirelessly & risked their lives to save others. #GoaFightsCovid19#COVIDfreepic.twitter.com/ZiUlAmDh25
बता दें कि गोवा में कोरोना वायरस के कुल 7 मामले आए थे। राहत की बात ये है कि इनमें से किसी की भी मौत नहीं हुई और अब होकर घर जा चुके हैं। केरल में कोरोना वायरस के अब तक 400 मामले आए हैं, जिनमें से 2 की मौत हो गई। हालाँकि, वहाँ 257 लोग ठीक हो चुके हैं, जो कि काफी राहत की बात है। 140 सक्रिय मामले भी भी बचे हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। महारष्ट्र अभी भी टॉप पर बना हुआ है, जो गोवा के पड़ोस में ही है।