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भास्कर ने जमातियों की सच्चाई दिखाई, ‘वायर’ और ‘न्यूजलॉन्ड्री’ छाती कूट कर रोने लगे कि चीटिंग है!

कोरोना वायरस के संक्रमण का देश-विदेश में सबसे बड़ा हॉट-स्पॉट बनकर उभरे तबलीगी जमात के सदस्य अब मीडिया के गिरोह-विशेष के लिए सरदर्द बन गए हैं। दुखद बात यह है कि मीडिया का यह गिरोह विशेष इस बात से चिंतित नहीं है कि संक्रमित होने के बावजूद तबलीगी जमात के लोग डॉक्टर्स, नर्स, पुलिस और प्रशासन से अभद्रता करते रहे हैं, बल्कि उनका दर्द यह है कि उनकी हरकतों पर बात ही क्यों की जा रही है?

21 दिन के लॉकडाउन के कारण घर पर बैठे लोगों के समय बिताने के लिए दैनिक भास्कर समाचार पत्र ने एक बेहद रचनात्मक तरीका ढूँढा। दैनिक भास्कर ने एक ऐसा क्रॉसवर्ड अपने पाठकों को दिया, जिसमें कोरोना के संक्रमण से जुड़ी समसामयिक घटनाओं पर जानकारी से जुड़े तथ्य थे। हास्यास्पद बात यह रही कि दैनिक भास्कर ने जिन स्थानों को रिक्त छोड़कर पाठकों से भरने की बात कही, उसमें ‘द वायर‘ और ‘न्यूज़लॉन्ड्री‘ ने अपनी समझ के अनुसार ‘तबलीगी जमात’ भर दिया और इसका आरोप दैनिक भास्कर पर लगा दिया। द वायर और न्यूजलॉन्ड्री का आरोप है कि दैनिक भास्कर ने इस क्रॉसवर्ड के जरिए देश में कोरोना का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरे तबलीगी जमात संगठन की छवि खराब कर घटना को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया है।

न्यूज़लॉन्ड्री के जहरीले ‘टैग्स’ –

दैनिक भास्कर ने इस क्रॉसवर्ड में जो सवाल पूछे थे वो आप इस चित्र में देख सकते हैं। इन सवालों में से कुछ इस प्रकार हैं –

1. किस संगठन की लापरवाही की वजह से देशभर में कोरोना प्रभावितों की संख्या बढ़ी?
2. दिल्ली में हजारों लोगों के एकत्रित होने के बाद किस बिल्डिंग को सील किया गया है?
3. दिल्ली में हजारों लोगों को एकत्रित करने वाले इस्लामिक संगठन का मुखिया कौन है?

वो क्रॉसवर्ड जिसने वायर और न्यूज़लॉन्ड्री की एकसाथ सुलगा दी –

इसके साथ ही इस क्रॉसवर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से जुड़ी योजनाओं के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से जुड़े सवाल भी पूछे गए हैं। आखिर इस सब से समस्या का कारण क्या हो सकता है?

वजह एक ही है, सरकार और संस्थाओं से घृणा में मीडिया गिरोह इतने ज्यादा डूब चुके हैं कि इन्हें जनकल्याण के उद्देश्य से जारी की गई योजनों से भी समस्या होने लगी है। कोरोना महामारी के दौरान भी इन मीडिया संस्थानों का अपना एजेंडा जारी है। लेकिन इसमें वह यह बात भूल गए कि यह क्रॉसवर्ड भरकर दैनिक भास्कर ने नहीं दिया था बल्कि इसमें उचित उत्तर को रिक्त स्थानों में भरने का काम पाठकों पर छोड़ा गया था। न्यूजलॉन्ड्री और द वायर ने इसमें ‘तबलीगी जमात’ भर दिया।

मीडिया गैंग ने फैलाया झूठ, लोटन निषाद की हत्या पर मुँह में दही जमाए बैठे भीम आर्मी चीफ को भी हुआ जुलाब

देश में लिबरल सेकुलर मीडिया गैंग किस कदर झूठ बेचता है, प्रोपेगेंडा फैला सही खबरों को दबाता है और झूठ की उल्टियाँ करता है, इसका एक नमूना दिल्ली के बवाना इलाके में हुई घटना की रिपोर्टिंग है। पिछले दिनों मीडिया गैंग ने रिपोर्ट किया कि कोरोना संक्रमण फ़ैलाने के शक में बवाना के 22 वर्षीय महबूब अली की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। महबूब अली भोपाल में हुई तबलीगी कॉन्फ्रेन्स में 45 दिन रह कर लौटा था।

सच इस दावे के ठीक विपरीत है। लेकिन न तो किसी ने सच जानने की जरूरत समझी न ही झूठ पकड़े जाने पर माफ़ी माँगना या भूल सुधार करना ही ठीक समझा।

THE WEEK ने पीटीआई की खबर चलाते समय सच की पड़ताल करना जरूरी नहीं समझा।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी कतई कोताही नहीं बरती और बेशर्मी के साथ झूठ परोसा। जब कथित निष्पक्ष मीडिया संस्थानों को झूठ फैलाने में संकोच नहीं हुआ तो प्रोपेगेंडा साइट क्विंट के कारनामों पर कहना ही क्या।

OUTLOOK ने भी शुरुआत में यही झूठ चलाया, लेकिन बाद में उसने सुधार कर लिया।

बाद में उसने अपनी नई रिपोर्ट में सच बताते हुए लिखा कि जिस 22 साल के महबूब अली की हत्या की बात की जा रही वह दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में भर्ती है, क्योंकि उसके कोरोना संक्रमित होने का संदेह है।

मीडिया गैंग की तरह ही दलितों की राजनीति का दावा करने वाले भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ़ रावण ने भी बेशर्मी दिखाई। उसने इस फर्जी खबर पर मोदी-शाह को जिम्मेदार बताने में जरा भी देरी नहीं की। लेकिन प्रयागराज में हुई लोटन निषाद की हत्या पर वह चुप्पी साध कर बैठा रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटना के संबंध में अबतक 3 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वहीं महबूब अली स्वस्थ है और उसे एहतियातन आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रखा गया है।

झारखंड के जो आदिवासी कभी दिल्ली नहीं गए उनके नाम पर जमातियों ने ले लिए सिम

हर बीतते दिन के साथ तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के नए-नए कारनामे सामने आए हैं। अब पता चला है कि झारखंड के कुछ ऐसे आदिवासियों के नाम पर जमातियों ने सिम ले रखा है जो अपनी जिंदगी में कभी दिल्ली गए ही नहीं। दैनिक जागरण ने विशेष शाखा की रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया है।

असल में निजामुद्दीन स्थित मरकज जब से कोरोना वायरस संक्रमण का केंद्र बनकर उभरा है यहॉं से गए जमात के सदस्यों की देशभर में तलाश की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि कौन-कौन से लोग वहॉं मजहबी आयोजन में शामिल हुए थे ताकि उनकी जॉंच कराई जा सके। इसी क्रम में झारखंड पुलिस को लोहरदग्गा के तीन लोगों की तलाश है। ये आदिवासी हैं।

विशेष शाखा की रिपोर्ट में इनके मोबाइल नंबर दर्ज हैं। इन नंबरों की जॉंच से पता चला है कि जिनके नाम से सिम हैं वे कभी दिल्ली गए ही नहीं हैं। इनमें से दो मोबाइल नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हो रहा है। एक नंबर पर दिल्ली में कॉल रिसीव हो रहा है। अब पुलिस यह गुत्थी सुलझाने में लगी है कि जब तीनों दिल्ली गए नहीं तो उनके नाम और मोबाइल नंबर वहॉं के लोगों की लिस्ट में कैसे शामिल हो गया।

आशंका जताई जा रही है कि जमात के लोगों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए आदिवासियों के नाम पर फर्जी तरीके से सिम लिया होगा। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की जॉंच चल रही है और अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। बता दें कि इससे पहले दिल्ली पुलिस की जाँच से पता चला था कि मरकज में हर दिन देश-विदेश से पाँच हजार लोग आते थे। बीते साल नवंबर में 21 दिन के लिए मरकज में ठहरे तेलंगाना के एक शख्स ने हाल ही में खुलासा किया है कि वहॉं दिनचर्या कुछ ऐसी थी जिससे संक्रमण फैलना ही था। मरकज में एक ही थाली में बैठकर 6-7 लोग खाना खाते थे। इस व्यक्ति के अनुसार तबलीगी जमात पूरी दिनचर्या तय करता है। खाने-पीने से लेकर मल-मूत्र त्याग करने तक सब कुछ। यहाँ तक कि सेक्स कैसे करना है, ये भी जमात ही सिखाता था।

इसके अलावा झारखंड के रांची सहित 6 जिलों में अभी भी कई विदेशी नागरिकों के छिपे होने की खबरें मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि विशेष सत्यापन दल की नजर ये लोग बचे हो सकते हैं। इनमें रांची के अलावा धनबाद, बोकारो, कोडरमा, देवघर तथा गोड्डा जिले शामिल हैं। गृह विभाग ने इन सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को विदेशी नागरिकों की सूची सौंपते हुए जाँच के आदेश दिए हैं।

वायरस आपसे कितना दूर, जानना हुआ आसान: कोरोना संक्रमित मरीज अब गूगल मैप पर चिन्हित, गुजरात में तकनीक का सहारा

गुजरात के सूरत और अहमदाबाद शहर प्रशासन ने अपने प्रतिदिन के कोरोना वायरस बुलेटिन में उन लोगों के बारे में जानकारी देना शुरू किया है, जो COVID-19 से संक्रमित पाए गए हैं। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के रिहायशी पतों को गूगल मैप्स पर पिन करना भी शुरू के दिया है, जिससे आस-पास रहने वाले लोग सतर्क रह सकें।

सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने मैप पर कोरोना वायरस पॉजिटिव केसेस को पिन किया है

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी प्रकार अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने भी कोरोना पॉजिटिव केसेस की जानकारी देनी शुरू कर दी है। क्योंकि कॉर्पोरेशन के पास कोई आधिकारिक मैप नहीं है, इसलिए अहमदाबाद में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों ने बतौर वॉलंटियर कोरोना संक्रमित लोगों की लोकेशंस को गूगल मैप पर पिन करना शुरू कर दिया है।

गूगल मैप्स पर कोरोना वायरस लाइव पॉजिटिव केसेस , अहमदाबाद

इन वॉलंटियर्स में से एक अभय जानी हैं, जिन्होंने उपरोक्त मैप बनाया है, वो कहते हैं कि उन्होंने यह मैप अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा रिलीज किए गए डेटा से तैयार किया है।

कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी इस तरह पब्लिक डोमेन में साझा करने से कुछ सवाल भी उठे हैं, जो मरीजों के सामुदायिक जीवन में इस मर्ज के कारण लग सकते कलंक की तरफ इंगित करते हैं। हालाँकि जानी के अनुसार इस कदम से एक साझा हित सधता है। उन्होंने कहा, “मैं इन डेटा को डिलीट कर दूँगा यदि ऑथॉरिटीज इस विषय में चिंता जाहिर करती हैं, पर इस तरह कोरोना संक्रमित लोगों को मैप पर पिन करने से आसपास मौजूद व्यक्तियों के लिए यह समझना और आसान हो जाता है कि यह खतरा कितना वास्तविक और कितना नजदीक है।

उन्होंने बताया, “मैंने यहाँ अथॉरिटीज के साथ काम कर रहे लोगों और जर्नलिस्ट्स वगैरह से बात की है और उन्होंने मुझे बताया है कि नागरिकों की निजता सबसे अहम है। हालाँकि जब वे जानकारियों को पब्लिक के साथ साझा कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि वे सख्त कदम उठा रहे हैं और चाहते हैं कि ऐसे लोग सामने आएँ जो कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आए हैं। सबसे अच्छा तो यह है कि ‘रेड जोंस’ यानी ऐसे इलाके जहाँ से ज्यादा मामले आए हैं, में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर मत निकलें।”

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने किराने के सामान की होम डिलीवरी के लिए कुछ हेल्पलाइन्स भी बनाई है, जिससे लोगों को घरों से बाहर निकलने की जरूरत न पड़े।

अधिकारी हवाई निगरानी के लिए ड्रोन्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे जो लोग धारा 144 का उल्लंघन कर रहे हैं और अपने घरों की छतों पर एकत्र हो रहे हैं, उन पर केस दर्ज किए जा सकें।

अहमदाबाद में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। वहाँ 1000 से ज्यादा टीमों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है।

देश के दूसरे भागों में भी प्राधिकारी कोरोना संक्रमित मरीजों पर नजर रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इस महामारी को रोका जा सके। उदाहरण के लिए दिल्ली पुलिस होम क्वारंटीन किए गए 25000 लोगों के फोनों को ट्रैक कर रही है। अभी हाल ही में दिल्ली पुलिस ने होम क्वारंटीन किए गए 198 लोगों पर होम क्वारंटीन भंग करने के कारण एफआईआर दर्ज करवाई है, जिसमें से 176 पर एफआईआर फोन ट्रैकिंग और आकस्मिक निरीक्षण के आधार पर दर्ज हुई।

कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में अधिकारियों की मदद कर रहे एक दूसरे वॉलंटियर ने बताया कि निगरानी वगैरह के कारण जिन इलाकों में ज्यादा खतरा है कोरोना से संक्रमित होने का, लोगों ने मैप की वजह से उन इलाकों की तरफ जाना बंद कर दिया है। इसी तरह के स्टेप विश्व के कई हिस्सों में उठाए गए हैं, जिनमें से दक्षिण कोरिया ने ताजा आँकड़ों के अनुसार चाइनीज कोरोना वायरस से संबंधित ग्राफ को ‘फ्लैट’ करने में काफी सफलता हासिल की है।

राशन चाहिए तो कलमा पढ़ो: इनकार किया तो लॉकडाउन में जरूरत का सामान नहीं दिया

पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही है। पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है। वहॉं भी इस पर काबू पाने के लिए कई हिस्सों में लॉकडाउन है। इस दौरान लोगों को जरूरत का सामान मुहैया कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है। लेकिन, गैर मुस्लिमों को राशन देने में भेदभाव किया जा रहा है। उनके सामने मदद पाने के लिए कलमा पढ़ने की शर्त रखी जा रही है।

घटना कराची के कोरंगी इलाके की है। कलमा पढ़ने से इनकार किए जाने के बाद यहॉं ईसाइयों को जरूरत का सामान देने से मना कर दिया गया। एक स्थानीय ईसाई महिला के मुताबिक, “उन्होंने (प्रशासन ने) हमें राशन नहीं दिया। कहा कि राशन तभी मिलेगा जब आप ‘ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह’ पढ़ेंगे। जब हमने इससे मना किया तो उन्होंने राशन देने से इनकार करते हुए चले जाने को कह दिया।”

उल्लेखनीय है कि कलमा-तैयब इस्लाम मजहब का सूत्र है जिसे धर्मांतरण के दौरान बुलवाया जाता है। कहते हैं कि इस्लाम कबूलने के लिए कलमा पढ़ना जरूरी है।

पाकिस्तान शायद अकेला मुल्क है जहॉं इस महामारी के वक्त भी धर्म के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव के आरोप प्रशासन पर लग रहे हैं। जानकारी के मुताबिक प्रशासन इस समय सिर्फ़ मुस्लिमों की मदद कर रहा है। हिंदू और इसाइयों को खाने की सामग्री ये कहकर नहीं पहुँचा रहा है कि वे लोग गैर मुस्लिम हैं। यह सब तब हो रहा है जब कई प्रांतों की सरकार ने स्थानीय एनजीओ और प्रशासन को दिहाड़ी मजदूरों को राशन मुहैया कराने का निर्देश दे रखा है। इसके बाद खाद्य आपूर्ति का वितरण तो जिला प्रशासन कर रहा है, लेकिन गैर मुस्लिमों के साथ भेदभाव भी कर रहा है।

इससे पहले भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ महामारी में हो रहे भेदभाव का एक वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति लाचार होकर बता रहा था कि सिंध प्रांत में प्रशासन ने हिंदू-ईसाई समुदाय के लोगों को राशन देने से मना कर दिया है। उनकी मदद नहीं की जा रही है। उन्हें खाना नहीं दिया जा रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दशा किसी से छिपी नहीं हैं। वहाँ की कुल आबादी में अब केवल 4 फीसदी हिंदू और 2 फीसद ईसाई ही बचे हैं। इन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से भी वंचित रखा जाता है।

भूखी महिला से खुली केजरीवाल की पोल: मंत्री से राशन माँगने पहुँची तो थमा दिया ‘सेवा भारती’ का नंबर

देश में जारी लॉकडाउन के बीच दिल्ली में चार लाख लोगों को हर रोज भोजन कराने का केजरीवाल सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब एक महिला दिल्ली सरकार के मंत्री के पास राशन की माँग को लेकर पहुँची थी। इसके बाद मंत्री ने महिला को ‘सेवा भारती’ से जुड़े एक व्यक्ति का नंबर थमा दिया।

पाञ्चजन्य की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार (8 अप्रैल 2020) को दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र से एक मजदूर महिला अपने विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय के दफ्तर राशन की माँग को लेकर पहुँची। जहाँ महिला ने बताया कि उसके पास पिछले कई दिनों से खाने का राशन नहीं है। इस पर मंत्री गोपाल राय ने ‘सेवा भारती’ से जुड़े एक व्यक्ति का मोबाइल नंबर थमा दिया।

मजनू का टीला गुरुद्वारा में फँसे हुए हैं 400 सिख: नहीं सुन रहे केजरीवाल और कैप्टेन, कोरोना फैलने का ख़तरा

पहले बुलाया और जहाँ से चले थे, बसों में ठूँस फिर वहीं पहुँचाया: केजरीवाल के धोखे से बिलख-बिलख कर रोए प्रवासी मजदूर

‘दिल्ली ही नहीं रही तो कहॉं बेचोगे अपना झूठ’: लॉकडाउन में पलायन पर चौतरफा घिरे CM केजरीवाल

गोपाल राय के दफ्तर से बैरंग लौटी महिला ने मंत्री द्वारा दिए नंबर पर फोन करके राशन की माँग की और उधर से राशन पहुँचाने की बात सुनने के बाद महिला ने अपने घर का पता दे दिया। इस दौरान उक्त व्यक्ति द्वारा महिला से पूछा गया कि आपको नंबर कहाँ से मिला है तो महिला ने तत्काल मंत्री गोपाल राय का नाम लेते हुए सारी बात बता दी। इसके कुछ देर बाद ही मजदूर महिला के घर सेवा भारती से जुड़े कुछ स्वयंसेवक पहुँच गए और महिला को राशन उपलब्ध कराया।

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा होते ही दिल्ली से बड़ी संख्या में यूपी, बिहार सहित कई राज्यों के रहने वाले गरीब-मजदूर अपने गाँव की ओर पलायन करने के लिए यूपी बार्डर सहित आनंद बिहार बस अड्डे पर जमा हो गए थे। दिल्ली से पलायन कर लोगों के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में रहने वाले 4 लाख लोगों को हर रोज भोजन कराने की घोषणा की थी।

अरविंद केजरीवाल ने कहा था, “दिल्ली में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होगी। जो लोग लॉकडाउन के चलते काम नहीं कर पा रहे हैं उनको दिल्ली सरकार सुबह-शाम का भोजन उपलब्ध कराएगी।” उस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा राजनीति से प्रेरित होकर किए दावों की पोल अब खुलती चली जा रही है, क्योंकि इससे पहले एक आजतक चैनल ने झंडेवालान मंदिर में सेवाभारती के स्वयंसेवकों द्वारा चलाई जा रही रसोई को दिखाते हुए इसे दिल्ली सरकार की रसोई बता दिया था।

मंदिर और सेवा भारती के कम्युनिटी किचेन को ‘आज तक’ ने बताया केजरीवाल का, रोज 30 हजार लोगों को मिल रहा खाना

गौरतलब कि ‘सेवा भारती’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संग की प्रेरणा से देशभर में सेवा के कार्य करता है। देश में लागू लॉकडाउन के बीच पिछले दिनों में कई स्थानों से संघ स्वयंसेवकों द्वारा लोगों को भोजन वितरण और कोरोना से बचाव सामग्री वितरित करने की खबरें आई हैं। इतना ही नहीं संघ के स्वयंसेवकों ने दिल्ली के रेडलाइट एरिया में रहने वाले परिवारों को भी खाद्य सामग्री वितरित की थी।

सिखों ने मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल सरकार सौंपने की पेशकश की, कहा- यहाँ करिए कोरोना संक्रमितों का उपचार

कोरोना वायरस से जारी जंग के बीच दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एक महत्वपूर्ण फैसला किया। उसने सरकार को गुरु हरिकिशन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सौंपने की पेशकश की है। सरकार से कहा है कि उसकी छह मंजिला अस्पताल की इमारत का सरकार जब तक चाहे कोविड-19 पीड़ितों और संदिग्धों के इलाज के इस्तेमाल कर सकती है।

यह अस्पताल गुरुद्वारा बाला साहिब में है। डीएसजीएमसी के प्रमुख मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक ​वीडियो ट्वीट कर कहा है कि कोरोना से निपटने के लिए दिल्ली सरकार को गुरु हरकिशन हॉस्पिटल का इस्तेमाल कर सकती है। इस अस्पताल में 50 बेड हैं। हॉस्पिटल की पूरी इमारत में 500 बेड की व्यवस्था है।

सिरसा ने कहा है, “महामारी के मद्देनजर दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी लोगों की मदद करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। चाहे लोगों को खाना पहुँचाना हो या डॉक्टरी मदद। हम उन्हें हर तरह की सुविधा पहुँचाते रहे हैं। हमने गुरु हरकिशन अस्पताल सरकार को देने की पेशकश की है। दिल्ली सरकार कोरोना के उपचार के लिए बैंक्वेट हॉल और होटल का इस्तेमाल करना चाहती है। इसके लिए वहॉं जो संसाधन लगाए जाएँगे उनका बाद में कोई इस्तेमाल नहीं रहेगा। लेकिन यही संसाधन अस्पताल में लगाए गए तो उनका स्थायी इस्तेमाल हो सकता है। सरकार को सोच कर संसाधन लगाने चाहिए ताकि बाद में दिल्ली में इलाज के लिए एक बड़ा अस्पताल तैयार हो सके। गुरु हरिकिशन अस्पताल का सरकार जब तक चाहे इस्तेमाल कर सकती है।”

गौरतलब है कि गुरु हरकिशन अस्पताल का संचालन गुरुद्वारा बाला साहिब द्वारा किया जाता है। 500 बेड वाली जो इमारत देने की पेशकश DSGMC ने की है वह 11 एकड़ में फैला है। इसके फर्निंशिंग का कुछ काम अभी बाकी है।

सिरसा की ओर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा गया है कि अगर सरकार चाहे, तो वह उस जगह पर जाए और उसके इस्तेमाल की संभावना को देखे। होटल और बैंक्वेट हॉल में पैसा खर्च कर संसाधन जुटाने की बजाए इसका सही जगह उपयोग होना चाहिए। इससे संसाधन और उसमें किया गया निवेश बर्बाद नहीं होगा और बाद में भी दिल्ली के लोगों के काम आएगा। दिल्ली सरकार को लिखे गए पत्र में कमेटी ने इस महामारी के समय को मानवता के लिए मुश्किल समय बताया है।

एक प्रोफेसर ऐसा भी: विदेश गए, जमात के आयोजन में शरीक हुए, सच्चाई छिपा छात्रों का जीवन खतरे में डाला

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर शाहिद अंसारी ने अपनी करतूत से करीब 144 छात्र-छात्राओं और सहकर्मियों के लिए भी कोरोना संक्रमण का खतरा पैदा कर दिया है। दरअसल कुछ महीने पहले विदेश से लौटे इस प्रोफेसर ने तबलीगी जमात के आयोजन में शरीक होने की बात छिपा रखी थी। यह आयोजन निजामुद्दीन के उसी मरकज में हुआ था जो इस वक्त देश में कोरोना संक्रमण का केंद्र बनकर उभरा है।

देश भर में यहॉं से लोगों की तलाश की जा रही है। सरकार ने यहॉं आए लोगों से खुद आगे आकर जॉंच करवाने की अपील भी कर रखी है। लेकिन, इलाहाबाद विवि के प्रोफेसर शाहिद अंसारी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। अब मामला सामने आने के बाद प्रोफेसर साहब पूरे परिवार के साथ क्वारंटाइन हो गए हैं। सच्चाई छिपाने को लेकर उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

प्रोफेसर शाहिद अंसारी के जमात के आयोजन में शामिल होने का खुलासा बुधवार की रात हुआ। इंटेलीजेंस की सूचना पर गोविंदपुर मेहदौरी कॉलोनी स्थित उनके घर पुलिस पहुॅंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम की सहायता से प्रोफेसर, उनकी पत्नी और गोद लिए हुए एक बच्चे को करेली के महबूबा गेस्ट हाउस में क्वारंटाइन कराया गया। एसपी सिटी ने बताया कि तथ्य छिपाने के आरोप में प्रोफेसर पर महामारी अधिनियम के तहत शिवकुटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित संबंधित खबर

इसकी जानकारी मिलते ही आस-पड़ोस में रहने वाले लोगों के साथ ही विश्वविद्यालय में पढ़ने वालों छात्र-छात्राओं के बीच हड़कंप मच गया है। इसके पीछे की वजह ये कि जमात के आयोजन में हिस्सा लेने के बाद प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय के करीब 150 छात्र-छात्राओं को पढ़ाया था। विश्वविद्यालय में चल रही परीक्षाओं में उनकी कक्ष नियंत्रण के तौर पर तैनाती थी। विश्वविद्यालय के अन्य प्रोफेसरों सहित शहर के कई प्रमुख लोगों से मुलाकात भी की। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम इन लोगों की तलाश में जुट गई है।

प्रोफेसर शाहिद अंसारी इसी साल इथोपिया गए थे। वहाँ से मार्च में लौटने के बाद दिल्ली में जमात के आयोजन में हिस्सा लिया। इसके बाद 10 मार्च को वह गरीब रथ से प्रयागराज वापस आ गए। चौंकाने वाली बात यह कि इससे पहले पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में प्रोफेसर ने जमात के किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।

नर्सों के फोटो लेना, वीडियो बना वायरल करने की धमकी देना: जमातियों ने सहरसा में पार कर दी सारी हदें

तबलीगी जमातियों की नर्सों के साथ बद्तमीजी और अभद्र व्यवहार का ताजा मामला बिहार के सहरसा से आया है। मिली जानकारी के अनुसार सहरसा के सदर अस्पताल में तबलीगी जमात के तीन लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने के संदेह में आइसोलेशन सेंटर में रखा गया था। आरोपों के मुताबिक आइसोलेशन सेंटर में भर्ती इन जमातियों ने नर्स के साथ बदतमीजी की, उसकी फोटो खींच वायरल करने की धमकी दी।

जानकारी के अनुसार नर्सों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि जब भी वे आइसोलेशन केंद्र में काम करने जातीं हैं तो उनका वीडियो बनाया जाता है। इसके साथ-साथ अस्पताल प्रशासन ने तबलीगी जमात के इन जमातियों पर गंदगी फैलाने का आरोप भी लगाया है। पीड़ित नर्स ने अपनी शिकायत में कहा है कि ड्यूटी के दौरान ये संदिग्ध मरीज उन पर अश्लील फब्तियाँ भी कसते हैं। इसके अलावे खाने में मनपसंद भोजन की डिमांड करते हैं। जब ये लोग नर्सों का वीडियो बनाने लगे तो वो सभी केंद्र से बाहर निकल गए।

सवाई माधोपुर में पुलिस ने रोका तो पहले थूका फिर पत्थरबाजी, राजस्थान में आज 43 नए कोरोना+ निकले

एक ही थाली में 6-7 लोग खाते थे, सेक्स करना भी सिखाते थे: मरकज में 21 दिन रहे शख्स का खुलासा

हस्तमैथुन, समलैंगिकता, सबके सामने शौच-पेशाब: ‘इस्लाम ऑन द मूव’ किताब में तबलीगियों की पूरी ट्रेनिंग की कहानी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जमातियों का ये खेल लगभग एक घंटे तक चलता रहा। जिसके बाद नर्सों की शिकायत पर एक्शन लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने इस वाकये की जानकारी जिला प्रशासन व पुलिस को दी। जिस पर तुरंत कार्यवाही करते हुए जिला एसपी ने एसडीओ के साथ एक पुलिस टीम आइसोलेशन केंद्र भेजी, जहाँ पुलिस को देखते ही जमातियों ने नमाज पढ़ने का नाटक शुरू कर दिया।

मामले की जाँच करने के बाद पुलिस ने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तबलीगी जमात के आरोपितों के मोबाइल जब्त कर लिए तथा दोबारा ऐसा करने पर घर न भेज जेल में डालने की धमकी दी। अस्पताल प्रबंधक अमित कुमार चंचल ने बताया कि आरोपितों की कोरोना संक्रमण की जाँच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बुधवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

याद रहे कि जमातियों के उत्पात और मेडिकल स्टाफ खासकर नर्सों के साथ अश्लील हरकतें करने की ये खबरें केवल बिहार के सहरसा से ही नहीं आ रहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके पहले गाजियाबाद में भी नर्सों ने आरोप लगाया था कि जमाती उनके सामने कपड़े उतार कर घूमते हैं। वहीं इन पर असभ्य जाहिल और वहशी होने का आरोप कानपुर मेडिकल कॉलेज ने भी लगाया था, जहाँ भर्ती जमातियों पर आरोप था कि वे हाथों में थूक लेकर आइसोलेशन केंद्र की दीवारों, रेलिंग आदि पर चिपका रहे हैं। अभी हाल में ही दिल्ली के आइसोलेशन केंद्र में भर्ती इन जमातियों पर जहालत के आरोप लगे हैं, जिनके अनुसार वो बोतल में पेशाब भरकर उसे बाहर फेंक रहे हैं।

एक तरफ देश कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, दूसरी तरफ हमारे मेडिकल स्टाफ और पुलिस को इन उत्पाती तबलीगी जमातियों से भी निपटना पड़ रहा है। पहले तो पुलिस को इनका पता लगाने में, समाज के लिए दुश्मन बन गए इन लोगों को खोज-खोज जाँच करवाने और क्वारंटीन करने में मशक्क्त करनी पड़ी, अब अस्पतालों और क्वारंटीन सेंटर्स पर जारी इनके उपद्रव और बदसलूकी को भी नियंत्रित करने में पसीना बहाना पड़ रहा है।

सवाई माधोपुर में पुलिस ने रोका तो पहले थूका फिर पत्थरबाजी, राजस्थान में आज 43 नए कोरोना+ निकले

कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच समुदाय विशेष की बदसलूकियॉं भी बढ़ती जा रही है पुलिसकर्मियों पर थूकना, पत्थरबाजी और हमले आम हो गए हैं। ताजा घटना राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले की है। यहॉं के शिवाड़ कस्बे के पास कँवरपुरा चेकपोस्ट पर 2 युवकों को लॉकडाउन उल्लंघन करते देख पुलिस ने रोका। दोनों युवक पुलिसकर्मियों पर थूककर और धमकी देकर भाग गए। इससे पहले की पुलिस एक्शन लेती मौके पर 30 से 40 लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और पत्थर बरसाने लगे।

यह सब कुछ ऐसे वक्त में हो रहा जब राजस्थान में आज (गुरुवार, 9 अप्रैल 2020) को दोपहर 2 बजे तक कोरोना संक्रमण के 43 नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि इसके साथ ही राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 430 हो गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पत्थरबाजी की सूचना मिलने पर शिवाड़, बरवाड़ी, सवाई माधोपुर सहित कई इलाकों से जवान और प्रशासनिक अधिकारी मौक़े पर पहुँचे। इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया। 3 लोगों को गिरफ्तार किया। बाकी बस्ती खाली हो गई थी। हालात देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है।

सवाई माधोपुर के जिला पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, कँवरपुरा रेलवे फाटक के पास चेक पोस्ट पर पुलिसकर्मियों पर पथराव की घटना के बाद 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर एफआईआर दर्ज की गई है। शेष आरोपितों की तलाश की जा रही है।

मीडिया खबर के अनुसार, पुलिस प्रशासन तथा मौके पर मौजूद ग्रामीणों के अनुसार बुधवार सुबह 9 बजे दो युवक मोटरसाइकिल से कँवरपुरा स्थित चेकपोस्ट से गुजरने लगे। वहाँ मौजूद पुलिस तथा होमगार्ड के जवानों ने उन्हें रोका। लेकिन वे विवाद करने लगे। बात बढ़ने पर युवकों ने पुलिस से बदतमीजी की, उन पर थूका और उन्हें धमकाया। बाद में मौका देखकर मोटरसाइकिल छोड़कर वहाँ से फरार हो गए और पास स्थित हसनपुरा ढाणी में पहुँच गए।

इसके बाद, करीब 15 मिनट में 30-40 लोग वहाँ पहुँचे और पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए पथराव से बचने के लिए पुलिसकर्मियों ने मौके पर लोहे के बैरियर की आड़ में छिपकर बचाव किया। फिर पुलिस के जवानों ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। शिवाड़, ईसरदा, बरवाड़ा तथा कोबरा की टीम मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक बस्ती से लोग भाग गए। बाद में तीन लोगों काे गिरफ्तार किया गया।

जानकारी के मुताबिक, भीड़ ने पथराव के लिए पास ही स्थित रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाए। पथराव के दाैराेन मौके पर तैनात 2 कर्मचारियों को चोट लगी है। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसमें लाेग रेलवे ट्रैक से गिट्टियाँ उठाते हुए दिख रहे हैं। पुलिसकर्मी पथराव से बचने के लिए बेरिकेड्स के पीछे छिपते दिख रहे हैं।

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बता दें, घटना के बाद कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया तथा एसपी सुधीर कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया। कलेक्टर-एसपी ने पुलिस अधिकारियों से आपसी सांमजस्य के साथ कार्य करने तथा दोषियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने टोंक-सवाई माधोपुर सीमा का जायजा भी लिया।

बरवाड़ी थाना पुलिस के मुताबिक कि पथराव मामले में आरोपित हमीद राजूद्दीन व कालू को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को राजकार्य में बाधा व लॉकडाउन की पालना नहीं करने पर धारा 332, 353, 188 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की धारा 51 के तहत गिरफ्तार किया है। मामले में अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।