Home Blog Page 4939

क्या ट्रम्प ने वास्तव में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर दी भारत को धमकी या मीडिया गिरोह ने फैलाया भ्रम?

खुशबूदार मसाले देखकर जिस तरह कोई भी लजीज खाना बनाने के लिए उत्सुक हो उठता है। वैसे ही मीडिया गिरोह के लोग एक शब्द को भी अपने पक्ष में देखकर उसे अपना एंगल देने के लिए आतुर हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही कल डोनॉल्ड ट्रंप की स्पीच के बाद हुआ। जिसमें उन्होंने रिटैलिएट शब्द का प्रयोग किया। इस शब्द का हिंदी मतलब ‘बदला लेना’ होता है। इस शब्द का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति ने एंटी मलेरिया ड्रग ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की सप्लाई बंद करने की बात सुनकर भारत के संदर्भ पर किया।

अब इसके बाद मीडिया में खबरें चलीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को धमकाया है कि अगर सप्लाई रोकी तो इसका बदला लेंगे और इसी आधार पर लिबरल गिरोह ने इस शब्द को खूब भुनाया। साथ ही इसे मोदी सरकार की विफलता के रूप में प्रदर्शित किया। लेकिन आपको बता दें जहाँ मीडिया गिरोह अपनी रूचि दिखाता है, उसका वास्तविकता में सच या तो सरकार के ख़िलाफ़ होता है या फिर किसी के सीधे से बयान का ऑल्टर्ड वर्जन।

सोमवार को भी डोनॉल्ड ट्रंप ने ऐसा कुछ नहीं कहा, जैसे मीडिया में प्रेषित हुआ। उन्होंने एक रिपोर्टर के सवाल पर अपनी टिप्पणी की। जिसमें डोनॉल्ड ट्रंप से एक रिपोर्टर ने पूछा था कि
यदि मोदी सरकार ने ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो क्या वे भारत के खिलाफ प्रतिशोध दिखाएँगे?

एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक रिपोर्टर द्वारा पूछे गए इस सवाल का जवाब देते हुए, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह आश्चर्यचकित होंगे यदि भारत दवा के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हटाता है और ये भी कहा कि उन्होंने दवा की आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी से भी इस मुद्दे पर बात की थी। इसके अलावा सबसे दिलचस्प ये दिखा कि ट्रम्प ने भी अपने संबोधन में कई बार दोहराया और बताया कि आखिर भारत अमेरिका के लिए कैसे एक महत्वपूर्ण साझेदार है और उम्मीद करता है कि भारत अमेरिका को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति करेगा।

अपने बयानों के अंत में, डोनाल्ड ट्रम्प ने एकदम सामान्य तरह से कहा कि यदि भारत ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हटाता तो किसी प्रकार का तो रिटैलियट होगा।

यहाँ याद दिला दें कि डोनॉल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनका फर्ज इस समय अपने लोगों को आश्वास्त करना हैं। ऐसे में यदि कोई पत्रकार ऐसे सवाल करेगा तो उन्हें इसके बदले जवाब देना होगा। पत्रकार के सवाल के बदले जो प्रतिक्रिया दी थी। वो ये थी कि आखिर प्रतिशोध क्यों नहीं होगा। ये जवाब अपने आप में संकेत हैं कि उन्होंने भारत पर आक्रमण या उससे कोई सुविधा छीनने जैसी बातें नहीं की थी। बल्कि उन्होंने एक गैर-गंभीर सवाल का जवाब स्थिति को परखते और अपने पद को देखते हुए दिया था।

अब यहाँ पर डोनॉल्ड ट्रंप और पत्रकार के बीच हुई बातचीत का अंश है। खुद समझिए कि आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति और पत्रकार ने किस तरह बात की और इसे सोशल मीडिया पर किस तरह संप्रेषित किया गया।

रिपोर्टर:धन्यवाद महोदय। क्या आप मेडिकल सामानों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने निर्णय के प्रति चिंतित हैं, जैसे कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’का निर्यात नहीं करने का निर्णय लिया है?

ट्रंप- अगर वे ऐसा निर्णय लेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मुझे अभी उनका निर्णय नहीं पता। मुझे मालूम है कि उन्होंने दवाई अन्य देशों के लिए प्रतिबंधित की हैं। मैंने उनसे कल बात की। हमारी अच्छे से बात हुई। हम देखेंगे कि अब आगे क्या होगा। मुझे बहुत हैरानी होगी कि अगर ऐसा होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि भारत हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छा व्यवहार करता है। कई वर्षों से, वे यहाँ के व्यापार का लाभ उठा रहे हैं। इसलिए मुझे आश्चर्य होगा कि अगर ये उनका निर्णय होगा। वह मुझे फोन करके बताएँगे।

ट्रंप- मैंने रविवार सुबह उनसे बात की। मैंने उन्हें फोन किया और कहा, “अगर आप हमारे लिए दवाइयों की आपूर्ति करेंगे तो हम इसकी सराहना करेंगे।” इसके बावजूद अगर वे दवाई नहीं भेजते, तो भी कोई बात नहीं। लेकिन हाँ, इसके मद्देनजर बदला लिया जाएगा। आखिर क्यों नहीं लेंगे?

इसके अलावा यदि बाकी की बातचीत आपको सुननी है तो आप नीचे दिए लिंक पर पूरी बात को सुन सकते हैं। उक्त अंश सिर्फ़ ये बात स्पष्ट करने के लिए हैं कि बदला लेने की कोई बात ट्रंप ने भारत के लिए नहीं की।

यहाँ बता दें कि ट्रंप से पूछे गए सवालों का पर्याय रिपोर्टर के लिए यह जानना था कि ट्रंप के लिए दवाई पर बैन लगना एक चिंता का विषय है या फिर नहीं। जिसपर ट्रंप ने सीधे रीटैलिएशन की बात नहीं की। बल्कि उसके बदले पीएम मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत का उल्लेख किया।

हालाँकि, यदि सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियोज को बिना संदर्भ के देखा जाए तो बिलकुल यही लगेगा कि उन्होंने धमकी ही दी। मगर, इसपर यदि पूरी बातचीत सुनी जाए। सवाल संदर्भ और जवाब के क्रम पर गौर किया जाए तो स्पष्ट होगा कि रिपोर्टर द्वारा पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में ट्रम्प वास्तव में अपने स्वयं के निर्णय के खिलाफ संभावित प्रतिशोध के संबंध में उत्तर दे रहे थे। इसलिए ये कह सकते हैं कि डोनॉल्ड ट्रंप को मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया सही फ्रेम में देनी चाहिए थी। मगर ये नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने प्रतिशोध की बात की।

उल्लेखनीय है कि जब से कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ तब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दवा के उपयोग की वकालत कर रहे हैं और ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ को एक “गेम-चेंजर” के रूप में पेश किया है, भले ही स्वास्थ्य सलाहकारों ने महामारी के खिलाफ इसकी प्रभावकारिता के बारे में अनिश्चितता की बात की है।

बता दें कि मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक पुरानी और सस्ती दवा ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ है। जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प कोरोनोवायरस के लिए एक व्यवहार्य चिकित्सीय समाधान के रूप में देखते हैं। वे इसे इस समय इसलिए भी महत्तवपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस से अब तक वहाँ 10,000 से अधिक अमेरिकी मर चुके हैं और 3.6 लाख से अधिक संक्रमित हैं। ऐसे में भारत ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जो एक मलेरिया-रोधी दवा है, जिसकी इस महामारी से रोगियों की मदद करने में संभावित उपयोगिता को देखते हुए बहुत माँग है।

शायद, डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद की थी कि भारत, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है, वह अमेरिका में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात मानदंडों में ढील दे सकता है। लेकिन भारत द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद डोनॉल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके मदद माँगी थी ताकि वे अमेरिका अपने देश में कोरोनोवायरस रोगियों की बढ़ती संख्या के इलाज के लिए ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की गोलियों की बिक्री की अनुमति दे सकें।

बता दें, कई देशों की गुहार के बाद भारत ने दवाई के निर्यात का दोबारा फैसला ले लिया है और अब भारत कुछ देशों के मामलों के आधार पर विशिष्ट खेपों के निर्यात की अनुमति देगा।

हनुमान की तरह संजीवनी देने के लिए भारत का शुक्रिया: ब्राजील के राष्ट्रपति ने पत्र लिख की PM मोदी की तारीफ

कोरोना महामारी से जूझ रहे पूरे विश्व के बीच भारत दूसरे कई देशों के लिए अपनी पहचान के अनुरूप मददगार साबित हो रहा है। इतना ही नहीं अपने यहाँ स्थिति तो काबू में किए हुए है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर दूसरे कई देश मोदी सरकार के लॉकडाउन को सरकार का साहसिक फैसला बताते हुए भारत सरकार की नीतियों की प्रशंसा कर चुके हैं। कुछ इसी तरह से ब्राजील के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख ब्राजील को हनुमान की तरह संजीवनी देने के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है।

कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहे कई देशों को भारत द्वारा मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन उपलब्ध कराए जाने के बाद से पूरे विश्व में भारत की प्रशंसा हो रही है। दरअसल, दूसरे देशों की मदद के लिए काफी कारगर मानी जा रही इस दवा के निर्यात पर लगे बैन को भारत सरकार ने हटा लिया है। इसी क्रम में भारत से ब्राजील दवा पहुँचने के बाद राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की सप्लाई के लिए भारत का खूब शुक्रिया अदा किया।

ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिख कर उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि कोरोना वायरस की महामारी के समय में जिस तरह भारत ने ब्राजील की मदद की है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा रामायण में हनुमान जी ने राम के भाई लक्ष्मण की जान बचाने के लिए संजीवनी लाकर की थी।

ब्राजील के राष्ट्रपति द्वारा पीएम मोदी को लिखे गए पत्र का कुछ अंश, साभार- न्यूज 18

आपको बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दवा के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत ने अपनी जरूरत के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई के निर्यात पर रोक लगाई थी, लेकिन पीएम मोदी सही हैं, उन्होंने मदद की। बता दें कि अब तक 30 देश भारत सरकार से इन दवाओं की माँग कर चुके हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले WHO के विशेष दूत डॉक्टर डेविड नाबरो ने कहा था कि समय से पहले पूरे देश में लॉकडाउन लगाना सरकार का एक साहसिक फैसला है। इससे महामारी को स्थानीय स्तर पर रोकने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश में इसे देरी से लागू किया होता तो शायद भारत जैसे देश में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते। उन्होंने अमेरिका जैसे देश की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ देशों में लॉकडाउन का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि कोरोनावायरस महामारी के समय भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे कठिन हालात में पूरे विश्व को एक होकर इससे लड़ना होगा। इसमें मानवीय पहलू के बारे में भी सोचना होगा। भारत ने कहा कि वह इन दवाओं को उन जरूरतमंद देशों को भी भेजेगा जो इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रसित हैं।

पूरे मार्च में 130, अप्रैल के 7 दिन में ही 145 दफन: 4 कब्रिस्तानों के आँकड़ों ने एजेंसियों को चौंकाया

इंदौर में पिछले एक हफ्ते में मुस्लिमों के कब्रगाह पर आने वाले शवों में औचक बढ़ौतरी देखने को मिली है। जानकारी के अनुसार, इंदौर में मुस्लिमों के 4 कब्रिस्तान हैं जिनमें 1 से 6 तारीख के बीच में 127 लोगों के शवों को दफनाया गया और 7 वें दिन तक ये आँकड़ा 145 पहुँच गया। जबकि पुरानी डेटा को देखें तो मालूम पड़ता है कि पूरे मार्च में इन 4 कब्रिस्तान में सिर्फ़ 130 लोगों के शव आए।

भास्कर का दावा है कि एक दिन में ही 18 जनाजे सिर्फ उन्हीं चार कब्रिस्तान में पहुँचे जो क्वारंटाइन एरिया के लिए ही हैं। बता दें 7 अप्रैल तक जितने भी कोरोना के कारण मौत के मामले आए उनमें से अकेले 13 सिर्फ़ इंदौर से हैं। इसलिए प्रशासन के लिए ये खुलासा एक चिंता का विषय है।

रिपोर्ट के अनुसार, खजराना, चंदनगर, रानीपुर-दौलतगंज-हाथीपाला, आज़ादनगर, टाटपट्टी बाखल-सिलावटपुरा और बॉम्बे बाज़ार क्षेत्रों में कोरोनोवायरस पॉजिटिव के सबसे ज्यादा मामले पाए गए।

इसके बाद ही भास्कर ने इन क्षेत्रों के चार प्रमुख मुस्लिम कब्रिस्तानों में अप्रैल के पहले सप्ताह में दफनाए गए शवों की संख्या की पड़ताल की। हालाँकि, कब्रिस्तान में बनाए गए रजिस्टर में इन लोगों के मौत का कारण ब्लडप्रेशर, डायबिटीज़, आदि का उल्लेख किया गया। मगर, यदि मार्च के आँकड़ों के साथ इनकी तुलना करें तो ये काफी खतरनाक है।

रिपोर्ट् के मुताबिक महू नाका मुस्लिम कब्रिस्तान में मार्च माह में 46 शवों को दफनाया गया था, जबकि अप्रैल में ये आँकड़ा केवल 6 दिन में (1-6 अप्रैल) 42 था। इसी तरह टाटपट्टी बाखल और आसपास के इलाकों के लिए मुस्लिम कब्रिस्तान में मार्च में दफन किए गए शवों की संख्या 36 थी और अप्रैल के 6 दिनों में ये संख्या 44 है। अन्य दो मुस्लिम कब्रिस्तानों में भी मार्च माह में 20 और 28 शव दफन किए गए। लेकिन, अप्रैल के 6 दिनों में यहाँ 20 और 21 शव दफन किए गए।

बता दें, एक ओर जहाँ मुस्लिम कब्रगाह में शवों के दफनाए जाने की सूचना इस तरह अचानक बढ़ी है। वहीं श्मशान घाटों में हिंदुओं के दाह संस्कार करने की संख्या पहले जैसी है।

भास्कर की रिपोर्ट से यह पता चलता है कि मृतकों के मामले में, उनके यात्रा के इतिहास और कोरोना लक्षण दिखने के बावजूद उनके नमूने नहीं लिए गए। जैसे, इस बीच ट्रेवल हिस्ट्री का इतिहास रखने वाले 42 वर्षीय नावेद की मृत्यु हुई। मगर, उनका न तो परीक्षण हुआ और न इलाज हुआ।

इसके बाद नावेद के 48 वर्षीय चचेरे भाई इरफान को 26 मार्च को साँस लेने की समस्या हुई। जिसे सीएचएल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें गोकुलदास अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई। बाद में इरफान की टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई। और उनके भाई ने कहा कि इरफान तो दहशत में ही चले गए।

बता दें कि भास्कर की रिपोर्ट में ऐसे चौंकाने वाले नंबर सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियों ने अब इसकी जाँच शुरू कर दी है। साथ ही इन आँकड़ों पर रिपोर्ट माँगी है। भास्कर द्वारा प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को उपरोक्त चार मुस्लिम कब्रिस्तानों में 20 और शवों को दफनाया गया था।

क्वारंटाइन परिसर में मिलीं यूरीन से भरी बोतलें: 200 तबलीगी जमातियों को रखा गया है यहाँ, अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज

दिल्ली मरकज में शामिल हुए जमातियों को खोज-खोजकर लगातार क्वारंटाइन किया जा रहा है, लेकिन इस बीच क्वारंटाइन किए जा रहे लोगों की एक के बाद एक गंदी हरकतें जारी हैं। एक बार फिर दिल्ली के एक क्वारंटाइन सेंटर परिसर में मूत्र से भरी दो बोतने मिलीं है। आशंका जताई जा रही है कि संक्रमण को फैलाने के लिए इस गंदी हरकत को किया गया है। वहीं शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ में मामला दर्ज कर लिया है।

ताजा मामला पश्चिमी दिल्ली में द्वारका नॉर्थ पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। मामले पर दिल्ली पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि यहाँ बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर से मूत्र से भरी दो बोतलें पाई गई हैं। इसके बाद दोनों बोतलों को बरामद कर दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 269 और 270 के तहत एक FIR दर्ज कर ली है। वहीं दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह एफआईआर दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के सिविल डिफेंस कर्मियों की शिकायत पर दर्ज की गई है।

जानकारी के मुताबिक बोर्ड के कर्मचारी सेंटर की साफ-सफाई में लगे हुए थे, इस बीच उन्हें सेंटर से यह दो बोतलें मिली, इतना ही नहीं कर्मचारियों ने इसका वीडियो भी बनाया, जिसे साक्ष्य के तौर पर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया है। वहीं दिल्ली पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने के बाद मामले की जाँच में जुट गई है। मामले की जाँच के लिए पुलिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाल सकती है। दरअसल, सेंटर में 200 लोगों को रखा गया है, जो कि मरकज से जुड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि क्वारंटाइन किए गए लोगों की हरकतों का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले दिल्ली के नरेला क्षेत्र में बनाए गए क्वारंटाइन केन्द्र के बाहर कुछ लोगों ने शौच कर दिया था। इसके बाद सफाईकर्मी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने नरेला क्वारंटाइन केंद्र में उपद्रव करने वाले दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। दरअसल, यहाँ दिल्ली मरकज से निकाले गए जमातियों को क्वारंटाइन किया गया था।

वहीं इससे पहले गाजियाबाद के एक अस्पताल में भी जमातियों द्वारा नर्सों के सामने नग्न घूमने, गंदी हरकतें करने और नियमों की अनदेखी करने की खबरें आई थी। इस पर नर्सों ने सीएमओ को शिकायत की थी। सीएमओ द्वारा पुलिस को की गई लिखित शिकायत के बाद पुलिस द्वारा की गई जाँच में यह सभी आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने योगी सरकार के आदेश के मुताबिक एनएसए के आरोपित जमातियों के खिलाफ में कार्रवाई की थी।

जाँच के लिए गई 2 ANM को NRC सर्वे वाला बताकर मुस्लिम भीड़ ने की मारपीट, निगारा खातून समेत 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

देश के अलग-अलग राज्यों के विभिन्न इलाकों से स्वास्थकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ बदसलूकी की खबरें आने के बाद सोमवार को इस सूची में छत्तीसगढ़ का नाम भी सामने आया। यहाँ भिलाई जिले में स्थित फरीदनगर सुपेला क्षेत्र में ये घटना उस समय घटी, जब होम क्वारंटाइन में रखे गए लोगों का सर्वे करने 2 महिला स्वास्थ्यकर्मी पहुँची और उन्होंने उन लोगों से पूछताछ शुरू की। जिसके बाद वहाँ कुछ लोग उनपर भड़क गए। फिर उनपर हमला कर दिया। इस दौरान बीच-बचाव करने पर भीड़ से भी मारपीट हुई। अब ताजा जानकारी के अनुसार, इस संबंध में पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार की दोपहर करीब 2 बजे विनीता साहू और रश्मि राय नाम की दो ANM फरीदनगर पहुँची। इसके बाद दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने नदीम टेक्सटाइल्स लिखे एक मकान की ओर जाँच के लिए गईं। जहाँ दो लोगों को होम क्वारंटाइन किया गया था। मगर जैसे ही वे वहाँ पहुँची और उनकी व्यक्तिगत जानकारी माँगी। घर की महिलाएँ दोनों स्वास्थ्यकर्मियों पर भड़क उठीं।

उन लोगों ने दोनों स्वास्थ्यकर्मियों को एनआरसी का सर्वे करने वाला बताया। फिर उनसे विवाद शुरू कर दिया। महिला द्वारा जोर-जोर से चिल्लाने पर आरोपित निगारा खातून सहित आसपास की करीब 30 महिलाएँ व कुछ पुरुष वहाँ पहुँच गए। सभी ने मिलकर दोनों स्वास्थ्यकर्मियों को घेर लिया और उनसे मारपीट की।

पुलिस को सूचना मिलने पर सुपेला थाने की पेट्रोलिंग टीम वहाँ पहुँची। लेकिन आरोपितों ने पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस किसी तरह से दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों को भीड़ से निकालकर थाने लाई। दोनों ने लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के बीएमओ व कोरोना वायरस के प्रभारी नोडल अधिकारी संजय जामगाड़े को इस घटना की जानकारी दी।

इसके बाद सीएमएचओ डॉ गंभीर सिंह ठाकुर से निर्देश लेने के बाद बीएमओ संजय जामगाड़े ने इसकी थाने में शिकायत की। जिसके आधार पर सुपेला पुलिस ने आरोपित निगारा खातून व अन्य आरोपितों के खिलाफ शासकीय सेवकों से मारपीट और प्रतिबंध का उल्लंघन करने की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। बता दें इस घटना के बाद महिलाएँ काफी डरी हुई हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें निकाला नहीं जाता तो उनकी जान पर बन आती। क्योंकि लोग गुस्से में उन्हें मारने पर उतारू हो गए थे।

गौरतलब है कि इस समय कोरोना संदिग्धों की तलाश में जुटी पुलिस और उनकी जाँच करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों पर जगह-जगह हमले किए जा रहे हैं। इन घटनाओं में मुख्यत: समुदाय विशेष के लोग शामिल हैं। किसी के बहकावे में आकर कहिए या फिर जान बूझकर कहिए, मगर ये लोग न देश में फैली महामारी को गंभीरता से ले रहे हैं और न ही अपने सरकार की सुन रहे हैं। इन्हें इस आपदा के समय में भी एनआरसी का डर है कि स्वास्थ्यकर्मी उनकी जानकारी उनका नुकसान करने के लिए ले रहे हैं।

क्वारंटाइन सेंटर को डिटेंशन सेंटर बताने वाले MLA अमीनुल इस्लाम के खिलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

कोरोना से जंग लड़ने के लिए देश में जारी लॉकडाउन के बीच क्वारंटाइन सेंटर्स पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने के बाद गिरफ्तार किए गए असम से विधायक अमीनुल इस्लाम के खिलाफ पुलिस ने देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल, विधायक इस्लाम की एक वीडियो क्लिप बीते दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें विधायक ने देश में अलग-अलग स्थानों पर सरकार द्वारा बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर करार दिया था। साथ ही आरोप लगाया था कि यहाँ इंजेक्शन देकर लोगों को मारा जा रहा है।

असम के डीजीपी महंत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विधायक इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके संबंध में असम विधानसभा अध्यक्ष को भी जानकारी दे दी गई है। इसके बाद इस्लाम को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतम डी की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक विधायक को नौगाँव की केन्द्रीय कारागार में भेजा गया है।

उधर नौगाँव के पुलिस अधीक्षक गौरव अभिजीत दिलीप ने बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान इस्लाम ने कुबूल किया कि क्लिप में सुनाई दे रही आवाज उन्हीं की है और उन्होंने स्वीकार किया कि क्लिप उन्होंने ही बनाई थी, जिसे दूसरे कई लोगों को भेजा भी गया था। यह ऑडियों क्लिप विधायक के मोबाइल फोन पर भी पाई गई, इसके बाद पुलिस ने इस्लाम की मोबाइल को भी जब्त कर लिया है।

वहीं बदरुद्दीन अजमल की अगुवाई वाली पार्टी ने विधायक इस्लाम के विवादित बयान से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी का कहना है कि ये विधायक के अपने विचार हैं। पार्टी इनका समर्थन नहीं करती है। वहीं बीजेपी ने इस मुद्दे पर AIUDF को अपने निशाने पर लिया है।

इससे पहले असम के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने बताया कि ऑल इंडिया डेमोक्रैटिक यूनाइटेड फ्रंट (AIUDF) के विधायक अमीनुल इस्लाम को सोमवार को क्वारंटाइन सेंटर्स पर सांप्रदायिक टिप्पणी के करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दरअसल ढिंग क्षेत्र से विधायक अमीनुल इस्लाम के ऊपर लगे सभी आरोप प्राथमिक जाँच के बाद सही पाए गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो क्लिप में विधायक इस्लाम नें सरकार पर समुदाय के खिलाफ साजिश रचने के भी आरोप लगाए थे।

साथ ही क्वारंटाइन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर बताते हुए इस्लाम ने आरोप लगाया था कि वहाँ इंजेक्शन देकर लोगों को मारा जाता है और इसके बाद सरकार ये भी कह सकती है कि इनकी मौत कोरोना से हुई है।

यहाँ बता दें कि इससे पहले ढिंग विधायक ने निजामुद्दीन मरकज़ का भी बचाव किया था। इस दौरान इस्लाम का कहना था कि मरकज़ में कोई भी संक्रमित नहीं पाया गया है और इस बीमारी के फैलने के पीछे मरकज़ का हाथ नहीं है। विवादित टिप्पणी करने पर AIUDF विधायक ने मीडिया पर भी आरोप लगाया था कि निजामुद्दीन मरकज़ पर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। इससे पहले एक फेसबुक पोस्ट में उनका ये भी दावा था कि असम में आया पहला केस दिल्ली के मरकज़ भी नहीं गया था।

हरियाणा में निजामुद्दीन मरकज़ के मुखिया मौलाना साद के छिपे होने के मिले संकेत, केंद्रीय मंत्री अनिल विज का दावा- ढूँढ निकालेंगे 2 दिन में

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ का मुखिया मौलाना साद अब जल्द पुलिस के हत्थे चढ़ सकता है। उसके होने के संकेत हरियाणा में मिले हैं। तबलीगी जमात का मामला उजागर होने के बाद से ही वह फरार है। पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया हुआ है। मगर, उसका कहना है कि उसने खुद को क्वारंटाइन किया हुआ है। लेकिन कहाँ? इसके बारे किसी को कोई जानकारी नहीं हैं। 

मीडिया रिपोर्ट्स में इस समय खूफिया एजेंसियों के सूत्रों का हवाला देकर बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने साद की लोकेशन ट्रेस कर ली है और उसे पकड़ने के लिए एक टीम का गठन भी कर लिया गया है। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियाँ मौलाना साद को पकड़ने के लिए ट्रैप भी लगा रही हैं। 

हरियाणा सरकार द्वारा गठित टीम में कौन-कौन है एवं किसके निर्देशन में यह टीम कैसे काम करेगी, फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। किंतु, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने दावा किया है कि अगर मौलाना साद हरियाणा में हुआ तो उसे दो दिन के भीतर पकड़ लिया जाएगा।

हरियाणा के गृह मंत्री ने इस बात की पुष्टि की है कि मौलाना साद के संबंध में उन्हें सूचनाएँ मिली हैं। उनका कहना है कि मौलाना साद नूंह इलाके में कहीं छिपा हुआ है, लेकिन उनकी खुफिया एजेंसियाँ अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँची हैं। उनकी इंटेलीजेंस को ये भी संदेह है कि वह उत्तर प्रदेश में कहीं छिपा हुआ है, लेकिन यदि साद ने हरियाणा को अपने छिपने का ठिकाना बना रखा है तो ऐसी सूचनाओं को सरकार किसी सूरत में नजर अंदाज नहीं करेगी और जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार करेगी। इसलिए टीम का गठन किया जा चुका है।

यहाँ बता दें कि मौलाना साद के हरियाणा में होने की जानकारी सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियाँ और पुलिस टीम बना कर नूँह के तमाम इलाकों को खंगाल रही हैं। इसके साथ ही कई मस्जिदों में भी मौलाना साद की तलाश की जा रही है। हालाँकि, केंद्रीय जाँच एजेंसियों ने अभी तक हरियाणा से संपर्क नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि वे भी जल्द ही हरियाणा सरकार से संपर्क करेंगी।

गौरतलब है कि मजहब का हवाला देकर कोरोना के कहर को नजरअंदाज करने के लिए एक पूरी भीड़ को उकसाने वाला मौलाना साद कई दिनों से फरार है। उसके अनुयाई उसकी जान बचाने के लिए फेक न्यूज फैला रहे हैं और उसे एक महान व्यक्तित्व बताने का प्रयास कर रहे हैं। मगर, इसी बीच प्रशासन उसे जल्द से जल्द ढूँढने की कोशिशों में लगी है। अभी कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने मौलाना समेत 7 लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें इन सभी से 26 सवालों के जवाब मॉंगे गए हैं। 

अलीगढ़ में दो समुदाय आमने-सामने: पथराव में 12 लोग घायल, प्रधान चमन खाँ सहित 50 नामजद, 100 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज

उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ में दो दिन पुराने विवाद को लेकर दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। इस बीच दोनों ओर से घंटों तक पथराव हुआ, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। वहीं प्रधान पक्ष पर फायरिंग करने का भी आरोप है। सूचना पर पहुँची पुलिस ने फायरिंग के आरोप में प्रधान सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए गाँव में पुलिस फोर्स के साथ आरएएफ को तैनात कर दिया गया है। साथ ही समुदाय विशेष के प्रधान सहित 50 नामजद और 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग

अमर उजाला की खबर के मुताबिक अलीगढ़ शहर से सटे थाना गाँधीपार्क क्षेत्र के गाँव कमालपुर में जारी लॉकडाउन के बीच मंगलवार दोपहर को ग्राम प्रधान चमन खाँ की मौजूदगी में राशन वितरण किया जा रहा था। राशन लेने के लिए गाँव का ही सौरभ पुत्र ओमप्रकाश राशन डीलर के यहाँ पहुँचा। आरोप है कि दो दिन पुराने विवाद का बदला लेने के लिए प्रधान पक्ष के लोगों ने युवक के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस बात की जानकारी पीड़ित युवक ने घर आकर बताई।

इसके बाद ही प्रधान पक्ष के लोगों ने युवक के घर पर हमला करते हुए पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों ओर से जमकर पथराव होने लगा। इस दौरान दोनों समुदाय के बीच घंटों तक पथराव जारी रहा। इस बीच प्रधान पक्ष पर फायरिंग करने का भी आरोप है। इसकी सूचना जैसे ही अलीगढ़ पुलिस को हुई तो प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए। तत्काल बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स के आला अधिकारी गाँव में पहुँच गए और सख्ती के साथ स्थिति को काबू में किया।

दोनों समुदाय के बीच घंटों चले पथराव में सौरभ, विवेक, इंद्रपाल, सुमित, टीटू, शरद, पुनीत, सोनू, पप्पू, माया, कल्लो, पूरन सहित कुल 12 लोग घायल हो गए। सभी को पुलिस ने अलीगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। वहीं पुलिस ने मौके पर पीछा कर प्रधान चमन खाँ पक्ष के 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है। इतना ही नहीं पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कानूनी कार्रवाई करते हुए पूरन सिंह की तहरीर के आधार पर प्रधान चमन खाँ सहित 50 लोगों के नामजद, जबकि 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग

जानकारी के मुताबिक दो दिन पहले राशन वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंस को तोड़ते हुए राशिद नाम का युवक बीच में घुस गया था। इस पर कुछ युवकों ने उसके साथ मारपीट की थी। यह मामला पुलिस चौकी तक भी पहुँचा, लेकिन सभ्रांत लोगों की मौजूदगी में इसे सहमति के बाद रफा-दफा कर दिया गया। वहीं गाँव कमालपुर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस फोर्स के साथ आरएएफ को तैनात कर दिया गया है। साथ ही पुलिस आरोपितों की धरपकड़ में लगातार छापेमारी कर रही है।

Video: मुस्लिम संगठन ने भीड़ इकट्ठा कर BJP पार्षद और कोरोना जाँच के लिए गई मेडिकल स्टॉफ से की बदसलूकी, मारने की दी धमकी

कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप के बावजूद भी समुदाय विशेष के कुछ लोग अभी भी इसे लेकर गंभीर नहीं है। कई राज्यों से खबरें आ रही हैं कि हर जगह ये लोग स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों का विरोध कर रहे हैं। उनसे बदसलूकी कर रहे हैं। ताजा मामला उत्तराखंड के देहरादून का है। जहाँ न केवल मेडिकल टीम को समुदाय विशेष के लोगों ने जाँच करने से रोका। बल्कि उन्हें मारने की धमकी दी और उनपर हमले का प्रयास भी किया।

इस वाकए की सूचना भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष डॉ देवेंद्र भाषिन ने अपने ट्विटर पर शेयर की। उन्होंने वीडियो के जरिए दिखाया कि आखिर कैसे देहरादून के माजरा में भाजपा पार्षद समेत स्वास्थ्यकर्मियों को घेरा गया और फिर गाली-गलौच करके धमकी देकर उन्हें भगाने का पूरा प्रयास हुआ।

इस वीडियो के साथ ट्वीट में उन्होंने लिखा, “देहरादून के माजरा में कोरोना जाँच के लिए गई मेडिकल टीम को मुस्लिम सेवा संगठन के लोगों ने रोका। भाजपा पार्षद आफ़ताब आलम के मेडिकल टीम की मदद व जाँच हेतु समझाने के लिए पहुँचने पर संगठन के लोगों ने उन्हें घेर लिया और मारने की धमकी देते हुए हमले का प्रयास किया।”

वीडियो में हम देख सकते हैं कि एक गली में कुछ लोगों को चारों ओर से घेरकर भीड़ खड़ी है और आसपास के लोगों में काफी हलचल हैं। एक युवक बार-बार स्वास्थ्यकर्मी को मारने के लिए आगे बढ़ रहा है। मगर, कुछ लोग उसे रोककर पीछे ले जा रहे हैं। बाकी लोग वहीं झुंड बनाकर हैं। इसके बाद कत्थई कुर्ते में नजर आ रहा युवक गाली देने लगता हैं। फिर भागकर आगे आता है और पत्थर उठा लेता है। हालाँकि, 2 पुरुष और एक महिला यहाँ उसे रोक लेते हैं।

इस वीडियो में एक और चीज जो देखने वाली है वो ये कि वीडियो में स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा किसी के पास भी (एक दो को छोड़कर) मास्क नहीं हैं। जिसे देखकर समझा जा सकता है कि न तो ये लोग खुद सावधानी बरत रहे हैं और जब कोई इन्हें समझाने आता है तो उससे दुर्व्यवहार करते हैं।

बता दें, ये वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है। कई लोग ये भी कह रहे हैं कि इस दौरान पार्षद को जान से मारने की धमकी दी गई और सरकारी कर्मचारियों को परेशान किया जाता रहा। इसलिए अब इनके ऊपर कोई कार्रवाई होगी या नहीं?

गौरतलब है कि उत्तराखंड में 4 जमातियों के मिलने के बाद प्रशासन वहाँ पर काफी सख्त हो गया है। अभी हाल ही उत्तराखंड सरकार के आग्रह पर देहरादून जिले से ऐसे 64 लोग सामने आए थे, जो देहरादून के उन चार जमातियों के संपर्क में आए थे, जिन्होंने दिल्ली हजरत निजामुद्दीन स्थित तबलीगी मरकज में हिस्सा लिया थ।

लॉकडाउन के बीच शिवलिंग किया गया क्षतिग्रस्त, राधा-कृष्ण मंदिर में फेंके माँस के टुकड़े, माहौल बिगड़ता देख गाँव में पुलिस फोर्स तैनात

एक तरफ कोरोना से जंग जीतने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन जारी है, तो दूसरी ओर कुछ असामाजिक तत्व मौके का फायदा उठाकर माहौल को खराब करने की कोशिश में लगे हुए हैं। कुछ ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से आई जहाँ कुछ असामाजिक तत्वों ने एक मंदिर को अपना निशाना बनाया और पहले तो मंदिर में रखी मूर्तियों को तोड़कर कुँए में फेंका और फिर माहौल को खराब करने के इरादे से दूसरे मंदिर में माँस का टुकड़ा फेंक दिया। फिलहाल गाँव में तनाव को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक बहराइच जिले के कोतवाली नानपारा अंतर्गत लखैया कला गाँव में सोमवार की शाम कुछ लोगों ने गाँव में कोरोना की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगे पोस्टरों को फाड़ दिया। इसके बाद देर रात गाँव में स्थित एक शिव मंदिर में शिवलिंग को तोड़कर उसे पास के ही कुएँ में फेंक दिया। इतना ही नहीं आरोपितों ने गाँव के दूसरे राधा-कृष्ण मंदिर में भी माँस का टुकड़ा फेंक दिया।

इसकी जानकारी सुबह ग्रामीणों को हुई तो बात पूरे गाँव में यह बात आग की तरह फैल गई और सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा होकर रोष व्यक्त करने लगे। देखते ही देखते गाँव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी बीच सूचना मिलने पर थाना प्रभारी कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए। साथ ही घटना से जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया, जिस पर सीओ अरुण चंद्र, एएसपी ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह भी मौके पर पहुँच गए और लोगों को समझाकर टूटी हुई मूर्तियों को ठीक कराया गया।

वहीं राधा-कृष्ण मंदिर की साफ-सफाई कराकर माँस के टुकड़े को जाँच के लिए भेज दिया। हालाँकि, अभी तक आरोपितों का पता नहीं लग सका है। वहीं पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों की तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसी के साथ पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

वहीं पुलिस अधीक्षक विनय मिश्रा ने बताया कि लखैया गाँव में टूटी मूर्तियों को दुरुस्त करा दिया गया है। साथ ही धर्मस्थल को धुलवाया गया है। मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गाँव के माहौल को देखते हुए फिलहाल पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।