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कोरोना के भय से माओवादियों ने सीजफायर कर सरकार से लगाई मदद की गुहार

कोरोना से आम जन-जीवन तो भयभीत है ही, लेकिन इसके संक्रमण के भय का अंदाजा अब शायद माओवादी भी लगा चुके हैं। यही कारण है कि उन्होंने सरकार के सामने सीजफायर की घोषणा की है।

ओडिशा में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वहाँ अब तक कोरोना वायरस के कुल 39 मामले सामने आए हैं। इनमें से 37 सक्रिय मामले हैं। 2 लोग ठीक हो गए हैं लेकिन राहत की बात ये है कि किसी की भी मौत नहीं हुई है।

ओडिशा में माओवादियों ने सीजफायर घोषित किया है औऱ सरकार से अपील की है कि जंगली और रिमोट एरिया में रहने वाले लोगों की मदद करें।

हाल ही में कुछ दिनों पहले सीआरपीएफ के 17 जवानों को मार डाला था। ओडिशा में माओवादियों का कहर पहले भी बरपता रहा है। कुछ दिनों पहले माओवादियों के हमले में तीन बीएसएफ जवानों की मौत हो गई थी। मिली जानकारी के अनुसार माओवादियों ने राज्य के मलकानगिरी के चित्रकोंडा इलाके में घात लगाकर बारूदी सुरंग विस्फोट किया था।

कोरोना से जंग के लिए मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: सांसदों के वेतन में 30% की कटौती, सांसद निधि दो साल के लिए खत्म

आज कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़े निर्णय की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। जिसमें दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पहले फैसले में सांसदों की सैलरी में एक साल के लिए 30% की कटौती का प्रावधान किया गया है। जिसके लिए जरूरी अध्यादेश पर आज कैबिनेट ने मुहर लगा दी। कैबिनेट ने अपने दूसरे फैसले में सांसद विकास निधि यानी एमपीएलएडी फंड को अगले दो सालों के लिए खत्म करने का निर्णय लिया है। सांसद निधि का यह पैसा कोरोना संकट से लड़ने में खर्च किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज की कैबिनेट मीटिंग के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ये जानकारी दीं। उन्होंने बताया कि देश के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और राज्यपालों ने भी स्वेच्छा से अपने वेतन में 30 फीसदी कटौती की सिफारिश की है। सांसद निधि को अगले दो सालों तक खत्म करने का मतलब है कि इस मद की 7900 करोड़ रूपए की राशि देश की संचित निधि में जाएगी जिसका प्रयोग कोरोना से लड़ने में किया जाएगा।

याद रहे कि प्रत्येक सांसद को प्रति वर्ष अपने लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड के लिए 5 करोड़ रूपए मिलते थे यानी प्रत्येक सांसद 10 करोड़ रूपए जो इन दो वित्तीय वर्षों 2020-21 और 2021-22 में नहीं आवंटित किए जाएँगे। इस राशि का उपयोग अब कोरोना महामारी को देखते हुए हेल्थ और डिजास्टर मैनेजमेंट में किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज की बैठक में मोदी ने कोरोना संकट की पृष्ठभूमि में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने पर भी चर्चा की। उन्होंने अपने मंत्रियों से राज्यों और जिला प्रशासन के संपर्क में रहने और इस कोरोना महामारी से लड़ने के दौरान जो समस्याएँ सामने आ रही हैं उनका हल निकालने का निर्देश दिया।

इस महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के 8 दिन पहले हुई इस बैठक में मोदी ने अपने मंत्रियों के साथ रोजगार और मेक इन इंडिया पर विस्तार में बात की। इस बैठक में पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री आवास पर मौजूद थे। वहीं मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य अपने-अपने घरों अथवा कार्यालयों से वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा: अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ तेरा बाप कौन है; ओलंपिक मेडल विजेता ने दिया गरिमामयी जवाब

कॉन्ग्रेस नेताओं ने अब देश के लिए मेडल लाने वाले खिलाड़ियों का भी सम्मान करना बंद कर दिया है। पूर्व-विधायक अलका लाम्बा ने हद पार करते हुए पहलवान योगेश्वर दत्त पर ओछी टिप्पणी की। योगेश्वर न सिर्फ़ भारत के लिए ओलम्पिक से लेकर कॉमनवेल्थ में मेडल ला चुके हैं बल्कि उन्होंने बजरंग पुनिया जैसे अन्य पहलवानों को प्रशिक्षित भी किया है। अलका लाम्बा ने योगेश्वर दत्त पर टिप्पणी करते हुए लिखा:

“अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ कि तेरा बाप कौन है? लगता है कि अपने बाप के साथ तस्वीर लगाने में भी तुझे शर्म आती है? ऐसा क्या? जिसके साथ तूने तस्वीर लगा रखी है, अगर तेरी माँ कहती है कि वही तुम्हारा बाप है तो मान जाना। ऐसा इसीलिए, क्योंकि तेरी माँ झूठ नहीं बोलती। यूँ ही दर्द नहीं हुआ है तुझे?”

साथ ही अलका लाम्बा ने योगेश्वर दत्त का अपमान करते हुए अपनी ट्वीट के साथ हँसने वाली इमोजी का भी प्रयोग किया। दत्त ने धैर्य और संयम का परिचय देते हुए अलका लाम्बा की इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बावजूद गरिमामयी जवाब ही दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच पर ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाली को जब अपनी गरिमा का ध्यान नहीं तो वो इनसे अपने, अपनी माँ के अथवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौरव का ध्यान रखने की आशा कैसे कर सकते हैं?

योगेश्वर दत्त ने कहा कि इस देश में पुरुष होने के कुछ घाटे भी हैं क्योंकि अलका लाम्बा जैसे लोग तुरंत ‘महिला कार्ड’ खेलने लगते हैं। दरअसल, ये सब शुरू हुआ अलका द्वारा भाजपा नेताओं को संघ की नाजायज पैदाइश बताने से। उन्होंने कहा कि संघ का भले राजनीति से कोई लेना-देना नहीं हो लेकिन सारे भाजपा नेता संघ की ही नाजायज औलाद हैं। ऐसा उन्होंने उस तस्वीर को कोट करते हुए लिखा, जिसमें नरेंद्र मोदी 70 के दशक में संघ के गणवेश में एक कार्यक्रम में दिख रहे हैं।

इसी पर योगेश्वर दत्त ने उन्हें पीएम मोदी का अपमान न करने की सलाह दी। इस पर योगेश्वर दत्त ने कहा कि नाजायज पैदाइश कौन है, ये अलका लाम्बा की बातों से ही पता चल रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की सोच से ही उनकी परवरिश का पता चल जाता है। उन्होंने समझाया कि जिस इंसान की फ़ोटो पर लाम्बा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की है, उसके लिए देश वासियो का प्यार सब ने देख भी लिया होगा। उन्होंने ‘9 बजे 9 मिनट्स’ की सफलता की बात करते हुए कहा कि पूरा देश पीएम मोदी के साथ में खड़ा है, बस लाम्बा जैसे कुछ मानसिक रोगियों को छोड़ कर।

जब देशहित के लिए अपनी पहचान खो कर BJP का हुआ निर्माण: सावरकर से लेकर अटल-आडवाणी तक का इतिहास

सोमवार (अप्रैल 6, 2020) को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के 40 वर्ष पूरे हो गए। भारतीय जनता पार्टी के पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ ने 1977 लोकसभा चुनाव जनता पार्टी समूह के अंतर्गत लड़ा था। हालाँकि, दोनों के बीच कोई आधिकारिक विलय नहीं हुआ था। जनता पार्टी ने 405 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 299 जीत कर उसने इतिहास रच दिया और 93 सीटों के साथ जनसंघ इसकी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। लेकिन, इसके नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी या लालकृष्ण आडवाणी ने कभी भी प्रधानमंत्री बनने की अभिलाषा नहीं जताई।

जनसंघ के लिए राष्ट्रहित पहली प्राथमिकता थी, इसीलिए उसने इस गुट की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पीएम पद की लालसा नहीं रखी और निःस्वार्थ भाव से जनता पार्टी एक्सपेरिमेंट का हिस्सा बनी। यही संस्करण है, जिसका अनुसरण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ का नारा देते हुए पार्टी और देश का नेतृत्व किया, कर रहे हैं। 1977 में जनता पार्टी वाला एक्सपेरिमेंट चौधरी चरण सिंह व अन्य नेताओं की पीएम बनने की लालसा के कारण असफल रहा। 1980 के चुनाव में जनता पार्टी मात्र 31 सीटों पर सिमट गई लेकिन जनसंघ फिर भी लगभग आधी यानी 15 सीटें जीत कर इस गुट का सबसे बड़ा दल बना।

1977 और 1980 के चुनावों में जनसंघ के अच्छे प्रदर्शन के बाद जनता पार्टी के ही कुछ नेताओं में असुरक्षा की भावना ने घर कर लिया। वो ‘दोहरी सदस्यता’ का मुद्दा उठाने लगे और कहने लगे कि जनता पार्टी का कोई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य नहीं हो सकता। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने ज़रूर जनसंघ के नेताओं को पार्टी में बनाए रखने के लिए मेहनत की लेकिन अप्रैल 4, 1980 को जनता पार्टी की एग्जीक्यूटिव कमिटी ने जनसंघ के सभी नेताओं को जनता पार्टी से निलंबित कर दिया। हालाँकि, ये वाजपेयी, अडवाणी जैसे कद के नेताओं और उनके अनुयायियों के लिए झटका भी रहा, और इससे राहत भी मिली।

ये झटका इसीलिए था क्योंकि 1977 में जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर जनसंघ ने बाकी सारी चीजों को पीछे रखते हुए जनता पार्टी का हिस्सा बनना स्वीकार किया था, ताकि देश को एक नया और मजबूत राजनीतिक विकल्प मिले। ये राहत इसलिए था क्योंकि उन्हें लगातार दबाव के बाद वहाँ से छुटकारा मिल गया। अप्रैल 5-6, 1980 को जनसंघ के नेताओं ने दिल्ली में दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नई भारतीय जनता पार्टी बनाने का निर्णय लिया और अटल बिहारी वाजपेयी इसके संस्थापक सदस्य बने। इस तरह एक नई पार्टी देश को मिली और वाजपेयी एक सर्वमान्य नेता बन कर उभरे।

वाजपेयी ने उस दौरान अपने सम्बोधन में कहा कि अब जब हम पार्टी को फिर से नवनिर्माण कर के एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं, हमें भूत नहीं बल्कि भविष्य की तरफ़ देखने की ज़रूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि अब हमें अपने वास्तविक सिद्धांतों और सोच को स्थापित करने की दिशा में पूरी मजबूती के साथ बढ़ना होगा। हिंदी में भाषण देने वाले वाजपेयी के सम्बोधन ने सबको उनका कायल बना दिया। उन्होंने ‘अँधेरा छँटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा’ का नारा दिया। उनके सम्बोधन को राजनीतिक और मीडिया जगत से काफ़ी प्रशंसा मिली।

आज अटल-अडवाणी द्वारा स्थापित भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और इसके 18 करोड़ सदस्य हैं। 2019 में इसने देश में 5वीं बार सरकार बनाई। पिछले लगातार दो बार से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। आज देश के 18 राज्यों में इसकी सरकार है (भाजपा व गठबंधन दलों की मिला कर)। केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी इसके वोट शेयर में लगातार वृद्धि हो रही है। इसे पहले ‘काऊ बेल्ट’ की पार्टी या सिर्फ़ उत्तर भारत की पार्टी कहा जाता था, जिस मान्यता को इसने तोड़ दिया है। भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभाध्यक्ष- ये सभी भाजपा से हैं। भारतीय राजनीतिक इतिहास में किसी भी नॉन-कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस तरह की सफलता नहीं प्राप्त की।

अगर सभी मानकों को देखें तो भाजपा आज वहीं खड़ी है, जहाँ कॉन्ग्रेस 1950 के दशक में हुआ करती थी। भारतीय जनता पार्टी का गठन भले ही 1980 में हुआ हो लेकिन इसका इतिहास 1951 में जनसंघ की स्थापना से शुरू होता है। जनसंघ की जड़ें आरएसएस और अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी आन्दोलनों और संगठनों से जुड़ी थीं। इसीलिए, भाजपा का इतिहास समझने के लिए हमें संघ के साथ-साथ आर्य समाज और हिन्दू महासभा के इतिहास को भी देखना पड़ेगा। आज के ‘घर वापसी’ अभियान को ही लें तो इसकी जड़ें आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन में है, जिसमें स्वामी श्रद्धानन्द को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। तबलीगी जमात के एक सदस्य ने उन्हें मार डाला था।

आज जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा का भाजपा अनुसरण कर रही है, उसकी जड़ें वीर सावरकर के चिंतन से जुड़ी हैं। गोरक्षा 1881 के आन्दोलंब से प्रेरणा पाता है। जहाँ तक मुस्लिम तुष्टिकरण की बात है, इसकी नींव सर सैयद अहमद की विभाजनकारी नीतियों में है। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किया जाना, राम मंदिर निर्माण और एनआरसी का लागू होना- ये सब कॉन्ग्रेस द्वारा की गई बड़ी ग़लतियों को सही करने की दिशा में प्रयास है। ‘नीति आयोग’ का गठन भी जनसंघ के शुरुआती घोषणापत्र के अनुसार ही हुआ है।

मेरा तो यही मानना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले भारतवर्ष का राजनीतिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक अस्तित्व हमेशा से रहा है। भारत एक प्राचीन राष्ट्र है और भारतीय राष्ट्रवाद एकता पूरे देश की एकता से जुड़ा है, जो इसे बाकी भूखंडों से अलग बनाता है। भाजपा का आज जो रूप हम देख रहे हैं, वो सदियों से चले आ रहे राष्ट्रवाद के आन्दोलनों का ही परिणाम है। आज भाजपा के 40 वर्ष पूरे होने पर उसी इतिहास को देखने और समझने की ज़रूरत है।

Note: यह लेख मूलतः अंग्रेजी में लिखा गया था, जिसकी हिंदी कॉपी अनुपम ने तैयार की है।

जमात से लौटकर डॉ इदरीस मरीज देखते रहे, ऑपरेशन किया: उन पर सवाल उठाना साथी डॉ को पड़ा भारी, कट्टरपंथी दे रहे धमकियाँ

एक नामी अस्पताल का एक बड़ा डॉक्टर तबलीगी जमात द्वारा आयोजित भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रम में शामिल होता है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद अपने घर लौटता है। ड्यूटी ज्वाइन करता है। ओपीडी में कम से कम सौ मरीजों को रोज देखता है और 100 के करीब सर्जरी करता है। इसके बाद मालूम पड़ता है कि वो तबलीगी जमात गया था और उसने ये बात सबसे छिपाई। प्रशासन उसे फौरन क्वारंटाइन करता है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है। अब ये खबर मीडिया में आती है। एक लड़की इसे लेकर चिंता जताती है और डॉ की लापरवाही उजागर करती है। मगर, डॉक्टर के मजहब के कारण पूरा कट्टरपंथियों का गिरोह उसे गरियाने लगता है। डॉ के परिजन उसे धमकाने लगते हैंं। जिसे देखकर लड़की को एहसास होता है कि उसने भले ही आजीवन हर इंसान को इंसान समझा, उन्हें धर्म के रंग में तोले बिना आँका। मगर ये लोग, उससे अलग है और मजहब को ही सर्वेसर्वा मानते हैं। इसलिए उसे झुंड बनाकर धमकी दे रहे हैं, गाली दे रहे हैं, उससे बदसलूकी कर रहे हैं।

लड़की का नाम डॉक्टर दीपा शर्मा है। दीपा ने 4 अप्रैल को एक खबर की जानकारी देते हुए उसके ऊपर अपनी प्रतिक्रिया ट्वीट की। इस ट्वीट में उन्होंने बताया कि तेलंगाना के आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल में ऑप्थामोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ इंदरीस अकबानी ने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने अपने अधिकारियों से इसकी जानकारी छिपाई। बाद में ये अस्पताल जाने लगे। ओटी में इन्होंने 100 लोगों की सर्जरी की और 100 से ज्यादा मरीजों को एक दिन में ओपीडी में देखा। उन्होंने कई बेगुनाहों को जानबूझकर संक्रमित किया।

अब हालाँकि ये खबर एक दम सच है और मीडिया रिपोर्ट्स ने इसे प्रकाशित भी किया है। मगर मुस्लिम ने इस पर चिंतित होने की बजाय इसे भी अपनी आन पर ले लिया। किसी ने समुदाय को बदनाम करने के लिए एक अजेंडा बताया। तो किसी ने योगी आदित्यनाथ का मुद्दा बीच में ले आते हुए हिंदू धर्म का हवाला दिया और इदरीस अकबानी की लापरवाही को जस्टिफाई किया।

डॉ के कई हितैषियों ने इस ट्वीट को देखकर इदरीस की नेगेटिव रिपोर्ट शेयर की। और डॉ दीपा के लिए लिखा कि पहले तथ्य जान लो, फिर भौंको। कट्टरपंथियों ने लड़की के ख़िलाफ़ शिकायत भी कर डाली और तेलंगाना सीएमओ और डीजीपी को टैग करके उनपर एक्शन लेने के लिए कहा कि वे गलत न्यूज फैला रही हैं।

इसी तरह एक और यूजर ने किया। जिसपर डॉ दीपा ने साफ कर दिया कि वो फाइनल रिजल्ट के बारे में बात नहीं कर रहीं। उनकी चिंता ये है कि अगर वो पॉजिटिव आ जाते तो क्या होता? उनका कहना है कि स्वैब टेस्ट 100% सही नहीं है। चूँकि जो लोग शुरू में नेगेटिव आ रहे हैं, बाद में पॉजिटिव पाए जाते हैं। डॉ दीपा की शिकायत है कि डॉ इदरीस ने जानकारी छिपाई और ड्यूटी जारी रखी। और उनका ट्वीट सिर्फ़ इसी बारे में हैं। और ये 100% सही है।

इसके बाद कुछ कट्टरपंथी कनिका कपूर का मुद्दा उठाते हैं क्योंकि वो हिंदू हैं और इसे मुद्दा बनाते हैं। मगर कुछ अन्य यूजर इसपर साफ करते हैं कि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो चुकी है और उनका कोई सपोर्ट भी नहीं कर रहा। लेकिन फिर भी लोग उन्हें फेक न्यूज फैलाने वाली फेक डॉक्टर आदि कहते रहते हैं।

डॉ लुकमान नाम का यूजर इस ट्वीट पर कई प्रतिक्रिया देता है और एक ट्वीट में पीएम मोदी को कोसने के लिए लिखता है- ये कैसा जिहाद मोदी ने किया? असफल लॉकडाउन से अपने लोगों को मारा और अब एक जमात को दोष दे रहा है। ऐसे 100 अलग-अलग जमात हैं। हमें उन्हें ढूँढना चाहिए और उनपर कार्रवाई करनी चाहिए।

अब इन्हीं ट्वीट्स को देखते हुए और इदरीस में पक्ष में समुदाय विशेष की भीड़ को देखकर डॉ दीपा तंग आ गई। उन्होंने अपने ट्वीट को सही साबित करने के लिए एक खबर को शेयर किया और निवेदन किया कि जो भी समुदाय के लोग उनके पोस्ट पर घटिया कमेंट लिख रहे है, वो कहीं और अपनी नफरत निकालें। ये खबर 100% सच है। अब आखिरी परिणाम कुछ भी निकले। मगर ये बात आदिलाबाद के पुलिस, सरकार, मीडिया सबको मालूम है।

वे आगे लिखती हैं। कृपा करके ये नकारात्मकता यहाँ न फैलाएँ और मुझे सिर्फ इसलिए धमकाना बंद करें क्योंकि मैंने एक डॉक्टर की लापरवाही पर प्रश्न किए।  वे लिखती हैं, “डॉक्टर ने तबलीगी जमात का कार्यक्रम अटेंड किया और किसी को जानकारी नहीं दी। बाद में अस्पताल में कार्य जारी रखा। पुलिस को ये सूचना 1 अप्रैल को मिली। अब इसके परिजन, साथी और मजहबी लोग मुझे डरा-धमका रहे हैं।” 

उनका कहना है कि वे एक आम परिवार से आती हैं और उन्हें किसी राजनैतिक पार्टी का सपोर्ट नहीं है। डॉ इदरीस अकबानी ये बात अच्छे से जानते थे कि यदि वे कोरोना संक्रमित निकले तो कई मासूमों तक ये फैल सकता है। मगर बावजूद इसके उन्होंने मरीजों को देखना जारी रखा। अब उसके परिजन और मुस्लिम मुझे धमका रहे हैं। 

वे कहती है, ”अगर डॉ इदरीस अकबानी हिंदू होता तो भी मैं यही सब लिखती। पर उस समय झुंड बनाकर लोग मुझे धमकाते नहीं। जैसा कि अभी मुस्लिम डॉक्टर के लिए कर रहे हैं। झुंड में लड़की पर बेवजह हमला करना बंद करो कभी हिन्दू मुस्लिम से ऊपर उठके देश के बारे मे सोचो।”

वे ये प्रतिक्रियाएँ देखकर हताश होती हैं और लिखती हैं, ”आप हिंदुओं को इस्लामोफोबिया का शिकार कहते हो, मुस्लिमों के लिए नफरत फैलाने वाला बोलते हो। मेरे जैसा इंसान जिसने इंसान को इंसान समझा, धर्म के रंग से नही तोला, पर आए दिन आप लोग जो मुझपे झुंड बनाकर सोशल मीडिया पर धमकियाँ देते हो उससे मुझे मुस्लिमों से डर लगने लगा है।”

वे आखिर में सभी मुस्लिमों से प्रार्थना करती हैं कि वे सब अपने, अपनों और देश के बारे में सोचे। क्वारंटाइन में रहें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें। साथ ही जो लोग नमाज़ अब भी मस्जिद मे पढ़ रहे हैं या जिन्होंने तबलीगी जमात में भाग लिया उनके खिलाफ खुद रिपोर्ट करें, जिम्मेदार भारतीय बनें, जिससे पूरा देश उनका सम्मान करेगा, प्यार देगा। साथ ही वो यह भी लिखती हैं कि कैसे टेस्ट में निगेटिव आया व्यक्ति भी अचानक से पॉजिटिव आ सकता है। इसलिए 28 दिनों का एकांतवास निहायत जरूरी है।

पड़ोसियों ने पालतू कुत्ते को लेकर सुनाई खरी-खोटी, डॉक्टर ने कहा- कोरोना वायरस की वजह से किया जा रहा परेशान

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें एक आदमी को एक महिला डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार करते देखा जा सकता है। वह आदमी, जो डॉक्टर का पड़ोसी है, ने कथित तौर पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उस पर शारीरिक हमला करने की कोशिश की।

वीडियो में, गुलाबी टी-शर्ट में एक शख्स को महिला को गालियाँ देते हुए सुना जा सकता है। इसके साथ ही वह शख्स कहता है कि क्या हो गया, अगर वो डॉक्टर है तो? वीडियो में आगे एक जगह पर वो महिला की तरफ लपकता है और उसका फोन छीनने की कोशिश करता है, जिससे वह इस घटना को रिकॉर्ड कर रही होती है।

जानकारी के मुताबिक यह विवाद डॉक्टर के पालतू कुत्ते के पड़ोसी पर हमला करने को लेकर शुरू हुआ था। गुलाबी टी-शर्ट में आदमी की पहचान चेतन मेहता के रूप में है, जबकि डॉक्टर का नाम संजीवनी पाणिग्रही है। पड़ोसियों के मुताबिक, रविवार शाम जब मेहता की पत्नी बाहर निकल रही थीं, तो डॉ संजीवनी के पालतू कुत्ते ने उन पर भौंकना शुरू कर दिया और फिर उन पर हमला किया।

इसके बाद मेहता की पत्नी ने पड़ोसी के साथ लड़ाई शुरू कर दी और जल्द ही चेतन भी इस लड़ाई में शामिल हो गया। इसी समय डॉक्टर ने पूरी घटना को रिकॉर्ड किया और विधायक को इसके बारे में सूचित किया। इसके बाद अदजान पुलिस ने मौके पर जाकर मेहता को गिरफ्तार कर लिया।

मेहता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि पालतू कुत्ते को लेकर शुरू होने वाली बहस को कोरोना वायरस तक ले जाया गया। बताया जा रहा है कि चूँकि डॉ संजीवनी सिविल अस्पताल में डॉक्टर हैं, तो उनके कोरोना वायरस के संपर्क में आने को लेकर मेहता पहले भी कई बार सवाल-जवाब कर चुके हैं। 

25 मार्च को दोनों पड़ोसियों में इस बात को लेकर लड़ाई भी हुई थी। रविवार को जब डॉ संजीवनी के पालतू कुत्ते ने मेहता की पत्नी पर हमला किया, तो मेहता उसके बचाव में आए, जिसके बाद पालतू कुत्ता घर के अंदर वापस चला गया। मेहता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि डॉ संजीवनी ने वायरल वीडियो में इस मामले को कोरोना वायरस से जोड़ दिया है। चेतन मेहता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने वीडियो शूट किया और इसे उसके पति को बदनाम करने के लिए वायरल कर दिया।

मौलाना साद सिर्फ छुप कर बैठा नहीं है, खुद के लिए जुटा रहा समर्थन, फैला सकता है हिंसा: रिपोर्ट्स

तबलीगी जमात का सरगना मौलाना साद, जिसने दावा किया था कि वो कोरोना संक्रमण के चलते एहतियात बरतते हुए क्वारंटीन में है, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अपने समर्थकों के यहाँ छुप कर खुद के लिए समर्थन जुटाने में लगा है। TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार साद, जो जाकिर नगर का रहने वाला है, आजकल दिल्ली के बाहरी इलाके में अपने एक समर्थक के घर में छुपा हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया है कि साद खुद के फोन का उपयोग न कर दूसरे फोनों के जरिए लगातार अपने वकीलों से सम्पर्क में बना हुआ है। ये इस्लामिक सरगना अच्छी तरह से जानता है कि किसी घनी बस्ती में छिपकर वो अपनी गिरफ़्तारी से बच सकता है। एक स्रोत के अनुसार पुलिस एक्शन लेने में हुई देरी के कारण साद को छिपने का पर्याप्त मौका मिल गया। पुलिस ने जब उसे नोटिस देते हुए 26 सवालों के जवाब चाहे, उसने खुद के क्वारंटीन में होने का बहाना बनाते हुए उसके बाद ही जवाब देने की बात कही।

रिपोर्ट में एक जमात सदस्य के हवाले से लिखा गया, “हम अपने लोगों को बता रहे हैं कि एक साजिश के तहत हमारे नेता को फँसाया जा रहा है, जिसने इस्लाम के लिए महान काम किए हैं। हम अपने भाइयों से कह रहे हैं कि वो लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहें।”

यह भी आशंका जताई जा रही है कि साद अपनी गिरफ्तारी पर अशांति और हिंसा फ़ैलाने की कोशिश कर सकता है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मौलाना साद ने उन मजहबी धर्मगुरुओं की भी बात नहीं मानी, जिन्होंने उसे निजामुद्दीन क्षेत्र में 13-15 मार्च के बीच धार्मिक जलसा न करने की सलाह दी थी। साद की जिद और 3400 जमातियों की ऐच्छिक भागीदारी के कारण आज आम लोगों की जान पर बन आई है।

तबलीग़ी जमात का एक सदस्य मोहम्मद आलम सीधे तौर पर मौलाना साद को इस सबका जिम्मेदार ठहराते हुए कहता है कि मौलाना साद ने अपने अज्ञान और जिद के कारण समुदाय विशेष को इस महामारी के मुँह में ढकेल दिया है। लियाकत अली खान नाम का दूसरा व्यक्ति सवाल करता है कि वो छिपा क्यों बैठा है, क्यों नहीं अपनी वायरस जाँच करवा रहा?

हालाँकि इस तमाशे के कर्ताधर्ता के एक सहयोगी मौला हैरिस ने सरकार को इस सबका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सरकार ने विदेशियों को भारत आने ही क्यों दिया? यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार ने इन विदेशियों को टूरिस्ट वीजा दिया था, जिन्होंने वीजा नियमों का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए इस जमात के धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। अब एक्शन लेते हुए इस कार्यक्रम से संबंधित 960 लोगों के वीजा को निरस्त तथा ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

शनिवार को स्वास्थ्य सचिव ने जानकारी दी थी कि 17 राज्यों में अब तक 1023 कोरोना संक्रमण के ऐसे केसेस की पुष्टि हुई है, जिनका संबंध तबलीगी जमात के दिल्ली मरकज में हुए कार्यक्रम से है। COVID-19 के कुल मामलों में तबलीगी जमात के कारण हुए संक्रमण की संख्या जहाँ 30% है, वहीं उत्तर प्रदेश के कुल कोरोना पॉजिटिव मामलों में से भयावह ढंग से 50% मामले तबलीगी जमात से ही संबंधित हैं।

इससे पहले व्हाट्सअप पर एक फेक मैसेज वायरल था, जिसमें दावा किया गया था कि 28 मार्च को मौलाना साद ने पीएम मोदी रिलीफ फंड में एक करोड़ रुपए दान किए हैं, इस झूठी रिपोर्ट के अनुसार मौलाना साद ने अपना योगदान गुप्त रखा था। यह झूठा प्रोपेगेंडा एक और साक्ष्य है कि किस प्रकार समाज के कुछ सेक्शन साद के लिए समर्थन जुटाने में जुटे हैंस जिससे उसे गिरफ्तारी से बचाया जा सके।

तब्लीग़ी जमात के मौलाना साद ने एक ऑडियो भी रिलीज किया था, जो शायद किसी स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें वो अपने से समर्थकों से अपील करता हुआ सुना जा सकता है कि प्रशासन और डॉक्टरों से सहयोग करो, और इस बीमारी से डरने की बजाय अल्लाह का नाम लो।

वाराणसी: आइसोलेशन वार्ड में एक ही बिस्तर पर बैठकर बात कर रहे थे तबलीगी जमाती, नर्स-मेडिकल स्टाफ के साथ की अभद्रता, एक को जेल

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नर्सों और मेडिकल स्टाफ के साथ अभद्रता करने के आरोप में एक जमाती को जेल भेज दिया गया है। मामला पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल का है। यह कार्रवाई डीएम के आदेश के बाद की गई।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही कह दिया था कि अगर कोई भी नर्सों या मेडिकल स्टाफ के साथ अभद्रता करेगा तो उसे छोड़ेंगे नहीं। उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाएगा। फिलहाल इस बात की जानकारी नहीं है कि उसके खिलाफ रासुका लगाया गया है या नहीं, लेकिन नर्सों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया गया। वहाँ पर उसे क्वारंटाइन किया गया है।

दरअसल, आदमपुर थाना क्षेत्र के मछोदरी निवासी 49 साल का व्यक्ति अबू धाबी गया था। वहाँ से लौटने के बाद से जाँच नहीं कराया था। विदेश यात्रा होने के कारण उसका सैम्पल लेकर उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। देर शाम वार्ड में डॉक्टर चेकअप के लिए गए थे। वहाँ डॉक्टर से किसी बात पर उलझ गया। अभद्रता शुरू कर दिया। डॉक्टर ने इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी। मौके पर थोड़ी ही देर में डीएम और एसएसपी प्रभाकर चौधरी पहुँचे। वार्ड में डीएम ने उसे समझाने की कोशिश की। इस पर वह डीएम से भी बहस करने लगा। इसके बाद डीएम के निर्देश पर कैंट पुलिस ने उसके खिलाफ महामारी रोकथाम अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया और सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

वाराणसी शहर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या में बढ़ोत्तरी के बाद जिला प्रशासन हरकत में है। पंडित दीनदयाल जिला अस्पताल में कोरोना की जाँच के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में तबगीली जमात से जुड़े लोगों को रखा गया है। अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार देश के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ भी जमातियों का उत्पात जारी है।

जमाती आइसोलेशन वार्ड को छोड़कर अन्य वार्डों में तफरी कर रहे हैं। ये लोग खाने में नॉनवेज और अन्य खानों की माँग कर रहे हैं। वार्ड में थूकने के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग का मखौल उड़ा रहे हैं। डॉक्टरों के लाख मना करने पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

इस बीच रविवार की शाम जिलाधिकारी अचानक अस्पताल पहुँच गए। आइसोलेशन वार्ड में पहुँचते ही डॉक्टरों और नर्सों ने शिकायत की झड़ी लगा दी। इसके बाद तो डीएम का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने खुद देखा कि आइसोलेशन वार्ड में जमाती एक ही बेड पर बैठकर बातें कर रहे थे। जिसके बाद अस्पताल के मेडिकल स्टाफ और नर्सों से बदसलूकी करने वाले जमाती के खिलाफ डीएम ने मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने आदेश दिया।

जो भी जमाती कोरोना पॉजिटिव होंगे, उनके ख़िलाफ़ दर्ज होगा केस: असम में 831 लोग संदेह के दायरे में

कोरोना वायरस से असम अभी तक काफ़ी हद तक बचा हुआ था लेकिन तबलीगी जमात वालों के कारण अब उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी स्थिति बिगड़ रही है। असम के मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी है। केंद्र सरकार द्वारा दी गई सूचनाओं और राज्य सरकार के डेटा का मिलान करने के बाद पता चला है कि असम के 831 लोगों ने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ बिल्डिंग में आयोजित तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में शिरकत की थी। इसके बाद राज्य में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि उन सभी का पता लगाया जा सके।

असम सरकार ने अब तक 491 सैम्पलों को एकत्रित कर लिया है, अर्थात इतने लोगों की पहचान हो चुकी है। बाकी बचे लोगों की पहचान के लिए राज्य सरकार विभिन्न मस्जिद कमिटियों से संपर्क साध रही है। शर्मा ने बताया कि सभी के सैम्पल एकत्रित करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि आगे से जो भी ऐसे कोरोना मरीज मिलेंगे, जिन्होंने तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया होगा, उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया जाएगा।

बता दें कि असम में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 26 मामले सामने आ चुके हैं। राहत की बात ये है कि वहाँ किसी की भी इस संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई है। पूरे भारत की बात करें तो अब तक कोरोना के 4375 मरीज सामने आए हैं। इनमें से 329 ठीक होकर घर जा चुके हैं, जबकि 122 लोगों की मृत्यु हुई है। इस हिसाब से कोरोना वायरस के अभी फ़िलहाल 3924 सक्रिय मामले हैं। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 781 तो तमिलनाडु में 571 मामले आए हैं। दिल्ली 503 मामलों के साथ तीसरे नंबर पर है। तबलीगी जमात वाली घटना के बाद से अचानक से कोरोना के संक्रमण के आँकड़ों में उछाल आया है।

असम सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए सभी पुलिस के जवानों, सरकारी कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख के बीमा कवर की घोषणा की है। पीएम मोदी पहले ही देश भर में ऐसे इंश्योरेंस कवर की घोषणा की है लेकिन सर्वानंद सोनोवाल की सरकार ने पुलिसकर्मियों को भी इसके दायरे में लिया है क्योंकि कोरोना से निपटने वालों में वो भी पहली पंक्ति पर ही खड़े हैं। मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने जनता के विश्वास को जीतने में सफलता प्राप्त की है, जिसके कारण कोरोना से निपटने में आसानी हो रही है।

नामदार चोर है: राहुल गाँधी ने नई कंपनी का कार्टून चुराया, बिना क्रेडिट लोगो हटा कर शेयर किया

‘चौकीदार चोर है’ के नारे पर 2019 का आम चुनाव अभियान चलाने वाले पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रविवार (अप्रैल 5, 2020) को एक कंपनी स्टार्टअप का एक कार्टून चुराया। रविवार को वायनाड के सांसद राहुल गाँधी ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के बत्तियाँ बुझाकर दीये, मोमबत्ती व टॉर्च आदि जलाने के अपील का का मजाक उड़ाने के लिए ‘COVID-19 Survival Kit’ नाम का एक कार्टून शेयर किया।

राहुल गाँधी ने कार्टून शेयर करते हुए यह दावा करते हुए पीएम मोदी के अभियान का मजाक उड़ाने की कोशिश की कि जब दूसरे देश कोरोना वायरस से लड़ने के लिए मास्क, सैनिटाइजर और सफाई देख रहे हैं, वहीं भारत इस महामारी से निपटने के लिए दीये, टॉर्च और ताली-थम्मच सहारा ले रहा है।

राहुल गाँधी आसानी से भूल जाते हैं कि दीया जलाना, ताली बजाना और घंटी बजाना, ये वो प्रतीकात्मक इशारे हैं, जिससे हम महसूस कर सकते हैं कि हम सभी चीनी कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में एक साथ हैं। और जहाँ तर डॉक्टरों की बात है, तो उन्हें युद्धस्तर पर मास्क, पीपीई और अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

हालाँकि, प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते हुए भी, राहुल गाँधी ने किसी और का आर्ट वर्क चुरा लिया। उन्होंने एक स्टार्टअप का आर्ट वर्क चुराने के बाद उसके वॉटरमार्क को क्रॉप करके हटा दिया और कंपनी को क्रेडिट भी नहीं दिया।

बता दें कि यह कार्टून SnapNews द्वारा बनाया गया था। Snap News ने राहुल गाँधी को बिना उनकी अनुमति और क्रेडिट के इस्तेमाल करने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर वह इस कार्टून का इस्तेमाल करने से पहले उनकी अनुमति ले लेते और उनको साभार दे देते तो उचित रहता। 

SnapNews के पार्टनरों में से एक विशाल भार्गव ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “अगर उन्होंने हमारी अनुमति ली होती और हमारे लोगो को नहीं हटाया होता तो हम उनकी सराहना करते। यह लोगो ऊपर से बाईं तरफ होता है। राहुल गाँधी द्वारा शेयर किए गए कार्टून में ऊपर के भाग को एडिट किया गया है और केवल कार्टून के बीच वाले हिस्से को शेयर किया गया है।”

Main Nahin Hum campaign lifted by Congress

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस को दूसरों के क्रिएटिव आइडिया को चुराते हुए और उन्हें ओरिजिनल आइडिया के रुप मे पेश करते हुए पकड़ा गया है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी कई बार इस तरह की हरकतें कर चुकी है। 2017 में कॉन्ग्रेस ने कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के आर्ट वर्क को चुराया था। पार्टी ने इसमें से भी लोगो को हटा दिया था। इससे पहले गुजरात कॉन्ग्रेस को भी इस तरह से कार्टून चुराकर ओरिजिनल आइडिया के रुप में पेश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।