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मुनीर ने नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर रेप किया, मौलवियों ने जबरन इस्लाम कबूल करवा निकाह करवाया

पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले अत्याचार कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी जारी हैं। गरीब नाबालिग हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर उनका जबरन निकाह करवाकर इस्लाम में उनका धर्म परिवर्तन करने की घटनाएँ आम हो चुकी हैं।

पाकिस्तान के बहावलपुर में एक और हिंदू नाबालिग लड़की को अगवा कर जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने का नया मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते 13 मार्च को बहावलपुर के मुनीर अहमद ने 15 वर्षीय नाबालिग हिन्दू लड़की को अगवा कर लिया। इसके बाद फैसलाबाद ले जाकर मुनीर ने उसके साथ बलात्कार किया।

इस घटना के बाद मौलवियों ने उस बच्ची को जबरन इस्लाम कबूल कराकर उसकी शादी बलात्कारी मुनीर अहमद के साथ शादी करा दी। नाबालिग पीड़िता के पिता नहीं है। ट्विटर पर वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान नामक एक अकाउंट ने विडियो शेयर किया है जिसमें पीड़ित बच्ची की माँ कहा रही हैं, “हम मजदूर हैं। मेरे 6 बच्चे हैं। मुनीर अहमद ने जबरन ने मेरी बेटी को अगवा किया है।”

पीडिता की माँ का कहना है कि उन्हें डर था कि मुनीर उनकी दूसरी बेटियों को भी अगवा कर सकता है, इसलिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और अब वो एक रिश्तेदार के घर पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि 15 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन पुलिस-प्रशासन हम गरीब हिंदूओं की मदद नहीं कर रहा है।

पीड़िता की माँ ने बताया कि जब मुनीर अहमद ने उनकी बच्ची को अगवा किया तब उन्होंने इसकी सूचना गाँव के मुखिया को दी। लेकिन गाँव के मुखिया ने उनकी मदद करने और पुलिस को बताने की बजाए उनसे कहा कि आरोपित मुनीर अहमद बेटी को वापस करने के लिए 4 लाख रुपए माँग रहा है। उन्होंने कहा हम गरीब हैं। फिरौती नहीं दे सकते थे। मेरी बेटी को छुड़ाने के लिए मेरे भतीजे ने हिंदू समुदाय से मदद माँग कर रुपए इकट्ठे किए। लेकिन आरोपित मुनीर अहमद ने फिरौती की रकम लेकर भी बच्ची को नहीं छोड़ा। बच्ची को वापस लौटाने की बजाए आरोपित मुनीर अहमद ने कहा कि बच्ची ने इस्लाम कबूल कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के अनुसार 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में एक हजार से ज्यादा ईसाई और हिंदू लड़कियों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया जाता है। पीएम इमरान खान भी इन घटनाओं पर हमेशा चुप रहते हैं और कोई ठोस कदम नहीं उठाते है। अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर पीएम इमरान खान कहते हैं कि उनके देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति अच्छी है, लेकिन वास्तविकता नाबालिग हिन्दू लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएँ बयान करती है।

काबुल गुरुद्वारा अटैक: मास्टरमाइंड ISKP सरगना मौलवी अब्दुल्ला गिरफ़्तार, 4 अन्य पाकिस्तानी भी दबोचे गए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के गुरुद्वारे पर हुए हमले का मास्टरमाइंड दबोचा गया है। अफ़ग़ानिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऑपरेशन में आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट खोरासन प्रोविंस (ISKP) के सरगना मौलवी अब्दुल्ला उर्फ़ असलम फ़ारूक़ी को गिरफ्तार किया। उसी ने पूरे हमले की साजिश रची थी। वह पाकिस्तानी नागरिक है और पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वो तहरीक-ए-तालिबान में सक्रिय रहा। फिर आईएसकेपी का प्रमुख बना। उससे पहले ये जिम्मेदारी अबू उमर खोरासनी निभा रहा था।

अब्दुल्ला ने ISKP की कमान अप्रैल 2019 में सँभाली थी। अफ़ग़ानिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ‘नेशनल डायरेक्टरेट ऑफ़ सिक्योरिटी (NDS)’ ने एक प्रेस रिलीज का जरिए खोरासन के सरगना के गिरफ़्तारी की पुष्टि की है। एजेंसी ने बताया कि असलम फ़ारूक़ के तार लश्कर के साथ-साथ हक्कानी और पाकिस्तान के अन्य आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। उसके अलावा 4 अन्य पाकिस्तानी आतंकियों को भी गिरफ़्तार किया गया। ये भी आईएसआईएस से जुड़े हैं। इनमें मोसदुल्लाह और ख़ान मोहम्मद खैबर पख्तूनख्वा का है, वहीं सलमान कराची का और अली मोहम्मद इस्लामाबाद का रहने वाला है।

बता दें कि काबुल में गुरुद्वारा पर 25 मार्च को हमला किया गया था। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस्लामिक स्टेट ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। हमले के दौरान एक फिदायीन ने खुद को उड़ा लिया था। इसके बाद उसके साथी अंधाधुंध फायरिंग करते हुए गुरुद्वारे में घुस गए और लोगों को बंधक बना लिया। जवानों ने आतंकियों को ढेर कर लोगों को मुक्त कराया था। हमले के बाद ISKP ने फिदायीन हमलावर का नाम अबू खालिद-अल-हिन्दी बताया था। अबू खालिद कोई और नहीं केरल दुकानदार मोहम्मद साजिद था, जो चार साल पहले चौदह लोगों के साथ ISIS ज्वाइन करने निकल गया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी जिसका एक और नाम अब्दुल खयूम भी है, केरल के कासरगोड का रहने वाला है, जो साल 2015 में अफगानिस्तान में जाकर इस्लामिक स्टेट का आतंकी बन गया था।

कुछ मीडिया रिपोर्ट में खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि ये आतंकी पहले भारतीयों को मारने के लिए काबुल स्थित इंडियन एंबेसी को निशाना बनाने आए थे। लेकिन वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखकर गुरुद्वारे को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने इस तरह के हमले को लेकर आगाह कर रखा था। इसमें कहा गया था कि अफगानिस्तान से भारत को बाहर ​निकालने के मकसद से आतंकी साजिशें रची जा रही है। इन इनपुट के आधार पर एंबेसी की सुरक्षा के इंतजाम सख्त कर दिए गए थे। इसके कारण आतंकी अपने मूल उद्देश्य को अंजाम नहीं दे पाए।

इस मुश्किल वक्त बिहारी मजदूरों का सहारा बना सब्जी बेजने वाला IIM का वो लड़का

जहाँ एक तरफ लोग आईआईएम से निकलने के बाद महँगी मौकरी और ऐशो-आराम की ज़िन्दगी चुनते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा भी शख्स है जिसने यहॉं से निकलकर सब्जी बेचना पसंद किया। जी हाँ, कौशलेन्द्र कुमार ने किसी बड़ी कम्पनी को ज्वाइन करने की जगह बिहार जाकर अपने जड़ों को और मजबूत करने में ध्यान लगाया। वहाँ उन्होंने एक एग्री-बिजनेस कम्पनी खोली। आज उनकी कम्पनी का टर्नओवर 5 करोड़ है और वो 20 हज़ार किसानों के रोजगार का माध्यम भी बने हैं।

अब कौशलेन्द्र कोरोना वायरस की आपदा के बीच भी जनसेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने उन मजदूरों की और उनके परिवारों की मदद करने का निश्चय लिया है, जो इस महामारी के प्रकोप के बीच अपनी रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने में भी विफल रहे हैं। इनमें से बहुतों को तो ठीक से पता भी नहीं है कि देश-दुनिया में क्या हो रहा है? ये वो लोग हैं जो अस्थायी टेंटों औ रफुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं। लॉकडाउन के बीच उन्हें काम भी नहीं मिल पा रहा है और परिवार भी चलाना है। ऐसे में उनकी मदद के लिए कौशलेन्द्र का कौशल्या फाउंडेशन आगे आया है।

कौशल्या फाउंडेशन न सिर्फ़ उनलोगों को हाइजेनिक भोजन पहुँचा रहा है, बल्कि उन्हें कोरोना वायरस के ख़तरों के प्रति जागरूक भी कर रहा है। उन्हें सुरक्षा और बचाव के सामान भी दिए जा रहे हैं। इस काम में कई स्वयंसेवक लगाए गए हैं। उनके बचाव की भी व्यवस्था की गई है और उन्हें इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। कौशल्या फाउंडेशन इस दौरान लोगों के सहयोग का भी आकांक्षी है और आप इस लिंक पर जाकर अपनी क्षमतानुसार वित्तीय सहयोग कर सकते हैं। फाउंडेशन ने कहा है कि लोगों द्वारा सहयोग की गई राशि का उपयोग इन गरीबों की सहायता में किया जाएगा।

कौशल्या फाउंडेशन ने बताया है कि कैसे ग़रीबों की मदद की जा रही है

इस समय जब पूरा देश इस महामारी से जूझ रहा है, हमें कौशलेन्द्र जैसे लोगों का सहयोग करने की ज़रूरत है जो गरीबों के बारे में सोच रहे हैं और उनके भले के लिए काम कर रहे हैं। कौशलेन्द्र ने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। कौशलेन्द्र अपने भाई के साथ मिल कर कौशल्या फाउंडेशन का सञ्चालन करते हैं। उन्होंने इसकी स्थापना बिहार के किसानों के सशक्तिकरण के लिए की थी। उनकी कम्पनी में फ़िलहाल 700 लोग काम करते हैं।

5 लाख गाय, 1.5 लाख बंदर और कुत्ते: सबके खाने की व्यवस्था कर रही योगी सरकार, बनाए 5000 काउ शेल्टर

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की 23 करोड़ जनसंख्या तक प्रतिदिन दूध पहुँचा कर एक रिकॉर्ड कायम किया है। यूपी में सिर्फ़ इंसानों का ही ध्यान नहीं रखा जा रहा, बल्कि जानवरों के खाने-पीने का बीड़ा भी सरकार ने उठाया है। क़रीब 5 लाख गायों के लिए चारे का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा 1.5 लाख कुत्तों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की गई है। इतनी ही संख्या में बंदरों के लिए भी रोज भोजन का प्रबंध किया जा रहा है। ये वो जानवर हैं, जिनमें से अधिकतर मंदिरों के श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए भोजन पर आश्रित थे।

डेयरी और एनिमल हसबेंडरी के प्रधान सचिव भुवनेश कुमार ने बताया कि उन्हें ग्रामीण और शहरी इलाक़ों के बीच दूध की आपूर्ति बिना किसी अवरोध के सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। लॉकडाउन के दौरान जानवरों को खिलाने के लिए कई कर्मचारियों व एनजीओ के स्वयंसेवकों को लगाया गया है, जो प्रतिदिन उन्हें विडियो मैसेज भेज कर बताते हैं कि आवारा जानवरों को खिलाने का काम सुचारू रूप से चल रहा है। 5 लाख गायों के रहने की व्यवस्था के लिए 5000 शेल्टर बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी ‘डेली ब्रीफिंग’ के दौरान इन गायों के बारे में ज़रूर पूछते हैं।

एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमिश्नर के दफ्तर में 24 घंटे चालू रहने वाला कंट्रोल रूम बनाया गया है। यूपी में एक करोड़ किसान और 3 करोड़ दुधारू जानवर हैं। प्रतिदिन 8 करोड़ लीटर दूध के उत्पादन के साथ यूपी इस मामले में देश में सबसे अव्वल राज्य है। ऐसे में अधिकारियों पर जिम्मेदारी है कि दूध बेकार न जाए और इसकी सप्लाई व डिमांड में कोई अवरोध न आए। चूँकि आईएएस जगत में ‘कर्फ्यू कुमार’ के नाम से जाने जाने वाले भुवनेश को अलीगढ़ सहित अन्य जिलों में तनाव के बीच स्थिति के प्रबंधन में दक्षता हासिल है, ऐसी आपदा की घड़ी में उनकी ये क्षमता उनके काम आ रही है।

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के पहले ही दिन सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया था कि वो साइकिल या बाइक पर दूध ले जाने वाले लोगों को न रोकें। इसी कारण कहीं से भी दूध की कमी की शिकायतें नहीं आईं और न ही कहीं दूध के बेकार जाने की ख़बर आई। प्राइवेट और सरकारी लोगों को मिला आकर 17,000 लोग रोज दूध की डिलीवरी में लगे हुए हैं। गौशालाओं में सारी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री का उससे सीधा इमोशनल जुड़ाव है।

‘दिल्ली में ग़रीबों को दिया जा रहा अधपका, गंदा और कीड़ों वाला खाना’: देखें Video

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कई बार दावा कर चुके हैं कि उनकी सरकार लाखों लोगों को रोज खाना खिला रही है, जिनमें अधिकतर ग़रीब मजदूर हैं। लेकिन, तस्वीरें कुछ और ही हकीकत बयान करती हैं। वेस्ट दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने एक विडियो शेयर किया है, जो केजरीवाल के दावों की पोल खोलता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गरीबों को खिचड़ी के नाम पर उल्टी जैसा दिखने वाला पीला पानी परोसा जा रहा है। वर्मा ने कहा कि ये भोजन कीड़ों से भी भरा हुआ है।

सांसद ने दिल्ली के मुखिया से कहा कि जो खाना उनकी सरकार गरीबों को खिला कर अपनी पीठ थपथपा रही है, वो आम आदमी पार्टी के नेताओं और विधायकों को खा कर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कोरोना वायरस संक्रमण के प्रकोप के बीच भी भ्रष्टाचार और निराशा ही परोस रही है, ये कृत्य क्षमा योग्य नहीं है। इससे पहले आरोप लगे थे कि दिल्ली सरकार द्वारा गरीबों को खाना खिलाने में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। कई तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिनमें लोग एक ही जगह पर इकट्ठे बैठ कर खाते नजर आ रहे थे।

कई पीड़ितों ने भी दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। संसद वर्मा द्वारा शेयर किए गए विडियो में एक महिला ने कहा कि एक तरफ़ कोरोना वायरस से संक्रमण का प्रकोप है, दूसरी तरफ़ कोई मरने के लिए कीड़ों वाला खाना क्यों खाएगा? महिला ने कहा कि खाना अधपका है, जिससे बच्चों के भी बीमार होने का ख़तरा है। कई अन्य लोगों ने भी इस खाने पर आपत्ति जताई। बता दें कि दिल्ली सरकार कई जगह पर ‘कम्युनिटी किचेन’ के माध्यम से ग़रीबों को भोजन कराने का दावा करती रही है।

इससे पहले दिल्ली सरकार पर आरोप लगे थे कि मजदूरों के घरों का बिजली-पानी काट उन्हें रातोंरात दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर जाकर छोड़ दिया गया था। आनंद विहार इलाक़े में इन मजदूरों की भीड़ इकट्ठी हो गई थी, जिसके बाद कोरोना वायरस के संक्रमण का ख़तरा बढ़ गया था। बाद में योगी सरकार ने इन मजदूरों के रहने-खाने व आवागमन की व्यवस्था की। इसके बाद आप विधायक राघव चड्ढा ने आरोप लगाया था कि यूपी की योगी सरकार मजदूरों को दिल्ली वापस न जाने की धमकी देते हुए लाठी से पिटवा रही है।

गुजरात: ड्यूटी छोड़ मस्जिद में नमाज पढ़ने चले गए इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर, गिरफ्तारी के बाद निलंबित

कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए लॉकडाउन के दौरान पूरा पुलिस और प्रशासन अमला कायदों को सुनिश्चित करवाने में जुटा है। लेकिन, कुछ के लिए मजहब ही सब कुछ है। गुजरात में ऐसे ही दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। दोनों ड्यूटी छोड़कर मस्जिद में नमाज अदा करने चले गए थे। उन्होंने यह हरकत तब की जब डांग जिले में ड्यूटी पर तैनात किए गए थे।

दोनों को मस्जिद में सामूहिक नमाज में भाग लेने के चलते गिरफ्तार किया गया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया गया है। ये दोनों पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान सामूहिक नमाज पढ़ने मस्जिद गए थे, जिस कारण इन पर तुरंत कार्रवाई की गई।

पुलिस द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि इंस्पेक्टर आईबी अजमेरी और सब इंस्पेक्टर एसएस डरैया शुक्रवार को ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान दोनों आहवा कलेक्टर कार्यालय के निकट की मस्जिद में मौलवी और अन्य के साथ सामूहिक नमाज पढ़ने चले गए।

यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार हर किसी से घर पर रहने की अपील कर रही है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोका जा सके। लेकिन तबलीगी जमात में शामिल लोगों के कारण पहले ही देश में संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

हिन्दू %ट कबाड़ रहे हैं, तुम्हारी पीठ पर… छाप दूँगा: जमातियों की ख़बर से बौखलाए ज़ीशान की धमकी

उत्तर प्रदेश के चंदौली के रहने वाले एक युवक ने बताया कि ज़ीशान नाम के एक शख्स से उसे धमकियाँ मिल रही है। पीड़ित हेमंत ने व्हाट्सप्प पर तबलीगी जमात की सच्चाई को उजागर करते हुए कुछ लेख शेयर किए थे। इसके सैयद ज़ीशान को बुरा लगा और उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। उसने कहा कि मीडिया और तुम जैसे लोगों ने पूरा कचरा बना कर रख दिया है, जो लगातार इस कोशिश में लगे थे कि कोरोना का आरोप कैसे समुदाय विशेष पर लगाया जाए। साथ ही ज़ीशान ने भद्दी-भद्दी गालियाँ भी दी।

हेमंत ने जिन ख़बरों को शेयर किया था, उनमें से एक में बताया गया था कि यूपी के कन्नौज में लॉकडाउन के बाजवूद कई नमाजी इकट्ठे हो गए। साथ ही घरों की छतों से पुलिस टीम पर पत्थर भी फेंकी गई, जिससे कई जवान हॉस्पिटलाइज हो गए। उन्होंने इस ख़बर को शेयर करते हुए पूछा था कि आखिर उन पुलिसकर्मियों की क्या ग़लती थी? साथ ही उन्होंने जमातियों द्वारा नर्सों के साथ बदसलूकी किए जाने वाली ख़बर भी शेयर की थी। जमात के आतंकी संगठनों के साथ संबंधों का भी पर्दाफाश हुआ है। इस ख़बर को शेयर करने से भी ज़ीशान बौखला गया और उसने मारने-पीटने की धमकी दी।

जब हेमंत ने ज़ीशान को बताया कि ये एक लोकतान्त्रिक देश है और सभी को अपने विचार प्रकट करने का अधिकार है, तो ज़ीशान ने कहा कि ‘%ड मराओ’ और साथ ही धमकी दी कि वो शाम को आएगा और हेमंत के शरीर पर डेमोक्रेटिक राइट का छाप लगा के जाएगा। वो मारने-पीटने की धमकी दे रहा था। साथ ही उसने इन्तजार करने को भी कहा। उसने भद्दे मैसेज करते हुए लिखा:

“अभी थैंक्स मत बोलो। शाम में जब काम हो जाएगा तब बोलना। अपनी पीठ मजबूत करके रखो। चिंता मत करो, तुम्हारी सारी राजनीति मैं निकाल दूँगा। और जितनी %ट तुम्हारी होगी, उतना उखाड़ लेना मेरा। जब बात से समझ न आए तो लात का यूज कर लेना चाहिए। क्योंकि तुम ऐसे नहीं मानोगे।”

साथ ही उसने हेमंत को चुपचाप घर में बैठे की सलाह देते हुए गालियाँ दी। उसने कहा कि मीडिया भी पूरी तरह बिकी हुई है। हेमंत ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए बताया कि ज़ीशान और वो साथ में ही पढ़ते थे। मुगलसराय स्थित ‘आइडियल पब्लिक स्कूल’ में वो साथ पढ़ा करते थे। वो स्कूल एक मजहब विशेष के व्यक्ति का ही है, जिसके प्रिंसिपल वगैरह भी मजहब विशेष से ही थे। हेमंत ने बताया कि उस दौरान भी हिन्दू छात्रों को वहाँ काफ़िर कह कर प्रताड़ित किया जाता था।

ज़ीशान ने हेमंत को गाली देकर धमकाया

स्कूल में ज्यादातर दूसरे मजहब के छात्र ही थे और ज़ीशान उनमें से ही एक था, जो आज मारने-पीटने की धमकी दे रहा है और गाली बक रहा है। वो भी सिर्फ़ इसीलिए, क्योंकि हेमंत ने ऑपइंडिया के एक लेख का लिंक शेयर कर दिया, जिसमें तबलीगी जमात के लोगों के बारे में ख़बर थी। बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद में छिपे हजारों जमातियों ने पूरे देश भर में कोरोना फैला दिया है और लगातार सैकड़ों मामले रोज सामने आ रहे हैं। कई जगह उन्हें खोजने गए पुलिस पर हमला भी किया गया।

इन्हें भला इलाज की क्या जरूरत, गोली मार देनी चाहिए: जमात की करतूतों पर राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने तबलीगी जमात के लोगों की उद्दंडता पर सख्त कार्यवाही की माँग की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते क्वारन्टाइन किए गए लोगों द्वारा नर्सों और दूसरे मेडिकल स्टॉफ के साथ जारी अभद्र व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को गोली मार देनी चाहिए।

राज ठाकरे ने ऐसे लोगों को दिए जा रहे उपचार पर सवाल करते हुए कहा, “इस तरह के लोगों का इलाज करने की जरूरत ही क्या है? इन्हें बुरी तरह पीटते हुए विडियो बना कर उसे वायरल कर देना चाहिए। जिससे लोगों में सरकार के प्रति कुछ भरोसा पैदा हो।”

प्रधानमंत्री मोदी के 5 अप्रैल को 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की लाइट बंद कर, दीया/मोमबत्ती/मोबाइल फोन टॉर्च जला, कोरोना के खिलाफ देश की संयुक्त पहल दर्शाने की अपील पर राज ठाकरे ने कहा कि बेहतर होता कि प्रधानमंत्री कोरोना के संदर्भ में देश की वर्तमान स्थिति और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश कहाँ खड़ा है, इस पर कोई बात कहते।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा, “दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में यह तबलीगी जमात वाली मीटिंग लॉकडाउन के वक्त हुई। जमात के इस जमावड़े से कोरोना से जंग को नुकसान पहुँचा। ऐसे लोगों को तो गोली मारकर खत्म कर देना चाहिए। उन्हें भला इलाज की क्या जरूरत? एक अलग कानून बनाकर उन लोगों का इलाज रोक देना चाहिए। यदि वे सोचते हैं कि उनका धर्म देश से बड़ा है और वे कुछ साजिश कर रहे हैं… वे लोगों पर थूक रहे हैं… वे नर्सों से अभद्रता कर रहे हैं… तो उन्हें सबक सिखाने की जरूरत है।”

राज ठाकरे ने मीडिया से बात करते आगे कहा कि यह समय एक दूसरे पर दोषारोपण का नहीं है। न ही ये समय धर्म की बात करने का है। लेकिन मुस्लिम समुदाय के भीतर मौजूद कुछ सेक्शन जिस तरह की बात कर रहे हैं, वो पिटाई माँगते हैं। ठाकरे ने कहा, “उन्हें याद रखना चाहिए कि लॉकडाउन केवल कुछ दिनों के लिए है और उसके बाद हम उनके पीछे होंगे।” ठाकरे ने उन मौलवियों के भी लापता हो जाने की बात कही जो चुनाव के समय तो अपने लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते खूब दिखते हैं, किन्तु आज अपने लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने की जगह गायब हो रखे हैं।

लॉकडाउन बढ़ने की आशंका भी राज ठाकरे ने जताई। उन्होंने कहा कि यदि लोगों ने अनुशासित व्यवहार नहीं किया तो लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है जो आर्थिक संकट को बढ़ाने वाला होगा। साथ ही ठाकरे ने डॉक्टरों, पुलिस और पानी, बिजली, अनाज आदि की व्यवस्था में लगे दूसरे सरकारी विभागों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ये सभी अपने जीवन को संकट में डालकर लोगों की सेवा कर रहे हैं।

दिव्यांगों-मजदूरों के लिए रोजाना भोजन और अस्पतालों में ब्लड डोनेशन के लिए आगे आया ‘सक्षम’

जब पूरा देश और दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, हर ओर से मदद के हाथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी प्रयास में सभी 21 तरह की दिव्यांगता में काम करने वाले अखिल भारतीय संगठन समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम) ने भी दिव्यांगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर जारी 21 दिन के लॉकडाउन के पहले दिन से ही ‘सक्षम’ ने दिव्यांगों की मदद के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन सेवा 1800111090 शुरू की। इसके माध्यम से दिल्ली में रहने वाले दिव्यांगों को न सिर्फ भोजन बल्कि मेडिकल हेल्प भी दी जा रही है। इसके साथ ‘सक्षम’ गरीब दिहाड़ी मजूदरों को भी दो समय का भोजन उपलब्ध करा रहा है।

‘सक्षम’ द्वारा 24 मार्च से लगातार विभिन्न क्षेत्रों में दिव्यांगों को दोनों पहर का भोजन उनके निवास स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह कार्य ‘सक्षम’ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ललित आनंद के मार्गदर्शन में दिल्ली प्रांत अध्यक्ष सतीश अग्रवाल, सचिव गोपाल कृष्ण और ‘सक्षम’ दिल्ली प्रांत कार्यकारिणी के सहयोग से किया जा रहा है।

प्रतिदिन 523 दिव्यांगों और 1200 से अधिक दिहाड़ी मज़दूर, जरूरतमंदों के छोटे-छोटे समूहों में दोनों समय का भोजन वितरित किया जा रहा है। संगठन मेडिकल हेल्प भी जरूरतमंदों तक पहुँचाने का काम कर रहा है। एम्स अस्पताल से इलाज ले रहे लक्ष्मी नगर निवासी रामानुज शर्मा लॉकडाउन की वजह से रूटीन चेकअप के लिए नहीं जा पा रहे थे। उनकी बीपी और पैरालिसिस की दवाएँ खत्म हो गईं थीं। ऐसे में ‘सक्षम’ के वॉलेंटियर्स ने उन्हें उनके घर पर दवाएँ मुहैया कराईं।

‘सक्षम’ के 20 कार्यकर्ताओं की टीम, संगठन की मोबाइल वैन्स के द्वारा दिल्ली के अलग-अलग कोनों में स्थित होस्टल्स में जाकर वहाँ रहने वालों को जरूरी सेवाएँ पहुँचा रहे हैं। जहाँगीरपुरी, बुराड़ी, संतनगर, अमन विहार, पूठ गाँव, जोंती गाँव, संगम विहार, मालवीय नगर झुग्गी बस्ती, कराला, नजफगढ़, नागलोई, रामा विहार, रजापुर गाँव आदि क्षेत्रों में भोजन वितरित किया जा रहा है।

‘सक्षम’ द्वारा किए जा रहे इस पुनीत कार्य में पंचशील क्लब के अध्यक्ष हिमांशु वैश्य, उपाध्यक्ष रज़्जी राय और दिल्ली लंगर सेवा सोसायटी के सरदार गुरविंदर सिंह ढींगरा (विक्की) द्वारा अहम भूमिका निभाई जा रही है। हिमांशी, हरेन्द्र, पूनम और वरुण पंवार का योगदान भी सराहनीय है। ‘सक्षम’ द्वारा किए जा रहे इस पुनीत कार्य की दिल्ली प्रदेश में सराहना की जा रही है।

ब्लड की कमी को दूर करने के लिए ‘प्राणदा’

सक्षम ने कोरोना महामारी के समय में अपने नए प्रकल्प ‘प्राणदा’ की शुरुआत की। दरअसल कोरोना महामारी फैलने की वज़ह से स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का आयोजन बंद हो गया था। इस वजह से ज्यादातर अस्पतालों के ब्लड बैंकों में खून की कमी होने लगी थी।

दिलशाद गार्डन स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल और AIIMS से जानकारी मिली कि ब्लड बैंकों में खून की कमी की वज़ह से थैलेसीमिया और ऐसे ही रुटीन में खून की जरूरत वाले मरीजों के आगे संकट मंडराने लगा है। इसे देखते हुए दिल्ली प्रांत ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल में ब्लड बैंक की हेड डॉक्टर प्रियंका गोगोई से बात की। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की वजह से डोनेशन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जो लोग मदद करना चाहते हैं, उन्हें ब्लड बैंक डोनर्स को लॉकडाउन के दौरान ‘मूवमेंट पास’ उपलब्ध कराएगा।

इसी कड़ी में सक्षम की ओर से 3 अप्रैल को 2 यूनिट ब्लड डोनेट करवाया गया। ‘प्राणदा’ के लिए सबसे पहले दो डोनर्स बीटेक कर रहे आकांक्षा गौड़ और आदित्य गौड़ बने। उन्होंने जीटीबी अस्पताल जाकर जरूरतमंदों के लिए ब्लड डोनेट किया। आदित्य ने कहा कि पहली बार ब्लड डोनेट करके अच्छा लग रहा है। वह भी ऐसी आपदा के समय में यह पुण्य काम करके सुकून मिला। आदित्य ने कहा कि वो अब नियमित रूप से ब्लड डोनेट करेंगे।

वहीं, आकांक्षा ने कहा कि यह अलग तरह का अनुभव है। ऐसे में, जब दुनिया घर से निकलने में भी डर रही है, ब्लड डोनेशन के लिए घर से निकलने में गर्व महसूस हो रहा है। आज 4 वॉलेंटियर डोनर्स ने और ब्लड डोनेट किया। आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या कर रही है सरकार?

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने लॉकडाउन में दिव्यांग समुदाय को ध्यान में रखते हुए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए। जैसे;

  • क्वारंटाइन या आइसोलेशन में रह रहे दिव्यांगों के लिए ज़रूरी खाना, पानी और दवाइयाँ उनके घर तक पहुँचाई जाएँ।
  • दिव्यांगों के परिजनों या उनके लिए काम करने वाली संस्थाओं को ई-पास उपलब्ध कराए जाएँ।
  • कोविड-19 से जुड़ी हर जानकारी स्थानीय और एक्सेसिबल भाषा (ऑडियो, सांकेतिक भाषा और ब्रेल) में उपलब्ध हो।
  • अस्पताल में काम करने वाले और अन्य आपातकालीन सेवाएँ देने वाले लोगों को दिव्यांगों के प्रति संवेदनशील किया जाए।
  • हर सरकारी और निजी संस्थान में ज़रूरी सेवाएँ देने वाले दिव्यांगजनों को पूरे भुगतान के साथ छुट्टी दी जाए।
  • दुकानों में एक तय अवधि में सिर्फ़ दिव्यांगों और बुजुर्गों को खरीदारी की सुविधा दी जाए।
  • किसी भी तरह की मानसिक परेशानी के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग 0804611007।
  • 24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन 011-23978046, 9013151515 जहाँ एक्सेसिबल तरीके से जानकारी मिल सके।

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के सोशल मीडिया हैंडल्स (Disability Affairs, @socialpdws) पर सांकेतिक भाषा, ऑडियो और वीडियो के ज़रिए कोविड-19 से जुड़ी कुछ जानकारियाँ भी समय-समय पर दी जा रही है।

धर्मनिरपेक्ष-महाकाव्यमिदं रामायणं धर्मव्यतिरिक्तं न विद्यते अपितु सर्वश्रेष्ठधर्मण: शिक्षक:

यावत् स्थास्यन्ति गिरय: सरितश्च महीतले।
तावद् रामायाणी गाथा लोकेषु प्रचरिष्यते।।

नेदं कविगुरोर्दम्भोक्तिरपितु त्रिकालाबाधितदृष्टे: महर्षेर्भूतार्थकथनमिदम्। अन्यूनद्विसहस्रवर्षेभ्यो न केवलं भारते वर्षे अपितु द्वीपान्तरेषु अनेकेष्वियं रामायणकथा मनुष्यहृदयानि आवर्जयति। विश्वेऽस्मिन् लौकिकवाङ्मये न दृश्यते ग्रन्थान्तरं यस्य जनानां चरित्रे चिन्तने च इयान् गभीर: प्रभावोऽनुभूयतेति। युक्तमेव आह विपश्चिन्मैक्डोनल महोदय:-

“Probably no work of world literature, secular in origin, has ever produced so profound an influence on the life and thought of a people as the Ramayana.”

रामायणं जनसामान्यस्य आदिमं काव्यम्। वाल्मीकिपूर्ववर्तिसमग्रमपि साहित्यं धर्मप्रवणत्वाद् धार्मिकम् आध्यात्मिकं चाभवत्। रामायणम् आदिमहाकाव्यं महर्षिवाल्मीकिश्चादिकवि: कवीनां गुरु: तथ्यमेतद् उत्तररामचरिते प्रकृष्टतया उद्धृतम्- “ऋषे! आद्य: कविरसि। आम्नायादन्यत्र नूतनश्छान्दसामवतार:”

धर्मनिरपेक्षमहाकाव्यमिदं धर्मव्यतिरिक्तं न विद्यते अपितु सर्वश्रेष्ठधर्मण: शिक्षक:। रामायणमहाकाव्यं मानवताधर्मं शिक्षयति। रामायणस्य नायको मर्यादापुरुषोत्तमश्रीरामचन्द्र: शबर्या: हस्तेन बदरीफलं भुक्त्वा शिक्षयति यत् नास्ति जगति कोऽपि जन: अस्पृश्य:। सर्वेऽपि मनुष्या: समानताधिकारिण:।

विपुले संस्कृतवाङ्मये रामायणं बीजरूपमहाकाव्यम्। उत्तरवर्तीनां काव्यानाम् उपजीव्य अयं ग्रन्थ:। न केवलं संस्कृतभाषायां अपितु अनेकासु भाषासु रामायाणमाश्रित्य काव्यानि प्रवृत्तानि। वस्ततस्तु रामायणमेव गीतिकाव्यस्य आधारभूतं काव्यं महाकाव्यानां विकासपरम्परायां आदिमं सोपानम्।

वाल्मीकिरेव तादृशो प्रगतिशीलो लोकभावाभिज्ञ: सरसभावानुविद्धो मानवमनोविज्ञानविदग्ध: कविरासीद् यो रामचरितं आश्रित्य लौकिकभावमयं महाकाव्यं रचितवान्। सहजतया एव उपदेशं कृतवान् – रामादिवत् वर्तितव्यं न रावणादिवत्। नवरसरुचिरा इयं कृति: रसानां समावेशाद् जनसामान्यस्य चित्तं आकर्षति। प्रमुखतया करुणरसस्य चाभिव्यक्तौ चरमोत्कर्षत्वं लक्ष्यते। किमधिकं रामायणस्य आविर्भाव: करुणरसादेव-

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगम: शाश्वती: समा:।
यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधी: काममोहितम्।।


करुणरसप्राधान्यादेव रामायणं जनानां हृत्प्रियं काव्यम्। रामायणं न केवलं रामचरितमेव प्रस्तौति अपितु रामायणे दर्शन-उपनिषद्-स्मृति-नीतिशास्त्र-विज्ञान-मनोविज्ञान-आयुर्वेद-धनुर्वेदानां सार: तत्संबद्धा उपयोगिनो विषयाश्च प्रकीर्णरूपेण परिचर्चां भजन्ते।

रामायणं परमपवित्रं महाकाव्यं भारतीयसाहित्यस्य विश्वजनीनवाङ्मयस्य च कीर्तिस्तंभरूपम्। परमपूता अयोध्यानगरी भगवत्पादन्यासनिर्मला भारतवर्षस्य शोभां वर्धयति। रामायणस्य पवित्रतामनुभूय केचन मनीषिणः मन्यन्ते- “एकैकमक्षरं पुन्सां महापातकनाशनम्”।

रामायणस्य तादृशी लोकप्रियता यथा न केवलमेतद् विदुषामेव विभूषणं अपि तु सामान्यरूपेण सर्वजनानां धनिनां-निर्धनानां विदग्धानामज्ञानाम्, पुरुषाणां स्त्रीणां आबालवृद्धानां कण्ठाभरणतां आपद्यते। भारतीयमहापुरुष-चरित्रचित्रणात् सर्वेषां पूज्येयं कृति:। न केवलं भारते सकलेऽपि विश्वे श्रीरामचन्द्र: आदर्शरूपेण मूर्धास्थानं भजते। आचारसंहितारूपेण इदं सर्वत्र आद्रियते, भक्तानां भवनेषु च प्रतिदिनं पारायाणिक्रियते, अत एव उच्यते त्रिविक्रमभट्टेन-

सदूषणामपि निर्दोषा, सखरापि सुकोमला।
नमस्तस्मै कृता येन, रम्या रामायाणी कथा।।

रामायाणी कथा गङ्गासदृशी जनानां क्लेशकष्टनिवारणी। रामायणस्य पाठेनैव जना: स्वजीवनं वाक्साफाल्यं च मन्यन्ते। महाकवितुलसीदासोऽपि अवधिभाषामाध्यमेन रामचरितस्य लेखनं चकार। तस्य रामचरितस्य पाठ: आवर्षं भक्तगृहेषु श्रोतुं शक्यते। अनेन ज्ञायते यत् रामचन्द्रस्य चरित्रं मनुष्येषु तावद् उन्नतं स्थानं प्राप्तवदस्ति न तावत् अन्यस्य कस्यापि महापुरुषस्य।

न केवल: भगवान् श्रीरामचन्द्र: अपितु मिथिलानरेशस्य पुत्री सीता अपि जनेषु मातृतुल्या आदृता। पतिव्रतेयं सर्वासां स्त्रीणां मध्ये आदर्शरूपा। तस्या: जीवनं स्वच्छशुभ्रहिमसदृक्पवित्रं जन्मस्थानमपि यज्ञभुमिरेव मन्यते । अत एव पवित्रताशिरोमणिं तां जना:”सीता माता” इति सादरं व्यवहरन्ति। अत एव इयं रामायाणी गङ्गा भुवनत्रय पावनीति प्रशस्यते –

वाल्मीकिगिरिसंभूत, रामाम्भोनिधिसंगता।
श्रीमद् रामायाणी गङ्गा, पुनाति भुवनत्रयम्।।