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हिंदू पति को बताए बगैर मुस्लिम पत्नी ने अम्मी-अब्बा से मिलकर करवाया बेटे का खतना: दर्द की शिकायत के बाद सामने आया पूरा कच्चा चिठ्ठा- राजकोट की घटना

राजकोट में एक हिन्दू व्यक्ति की मुस्लिम बीवी ने अपने बेटे का खतना करवा दिया। यह उसने बिना अपने पति की जानकारी के करवा दिया। इस काम में मुस्लिम महिला की अम्मी और अब्बू ने भी मदद की। मामले का खुलासा तब हुआ जब बच्चे ने गुप्तांग में दर्द की शिकायत की। घटना का पता चलने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

यह घटना राजकोट के राया टेलीफोन एक्सचेंज के पास तुलसीपार्क इलाके की है। हिंदू युवक ने पुलिस को बताया है कि साल 2018 में उसका एक मुस्लिम लड़की से प्रेम संबंध हो गया था। इसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया। इस शादी से उनका 4 साल का बेटा है।

21 दिसंबर, 2024 को वह काम के सिलसिले में बाहर गया था और यहाँ से वह एक सप्ताह बाद लौटा। जब वह वापस आया तो उसके बेटे ने बेटे ने गुप्तांग में दर्द की शिकायत की। उसने जब देखा तो बच्चे के गुप्तांग पर पत्तियाँ बंधी हुई थी। जब उसने इस मामले में अपनी पत्नी से पूछा तो उसने खतने की बात कबूली।

उसकी पत्नी ने अपनी माँ के साथ मिलकर खतना करवाने की जानकारी दी। इसी के बाद हिन्दू युवक पुलिस के पास पहुँचा और पत्नी रुक्सार और उसकी सास, खतना करने वाले डॉक्टर या जमात खाने के जमाती के खिलाफ यूनिवर्सिटी थाने में मामला दर्ज करवाया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

हिन्दू युवक ने कहा है कि शादी के बाद पिता का धर्म बेटे पर भी लागू होता है ऐसे में उसके बेटे का खतना करवाना गलत है। हिन्दू युवक ने आरोप लगाया कि उसकी मुस्लिम पत्नी ने उसे अपमानजनक बातें बोलीं और गालियाँ भी दी। यह भी सामने आया है कि उसकी पत्नी बेटे को लेकर कहीं चली गई है। उसकी सास से उसे धमकाया भी है।

मुस्लिम, इस्लाम और पैगंबर को लेकर गंदी-गंदी बात करने वाले कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क भी आए उनके सपोर्ट में

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ मुखर होकर बोलने के बाद अब दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क ने ब्रिटेन के एक दक्षिणपंथी टॉमी रॉबिनसन के पक्ष में आवाज उठाई है। उनके ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोग टॉमी रॉबिनसन के बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा किया क्या है जो ब्रिटेन सरकार ने उन्हें जेल में डाला हुआ है ।

जानकारी के मुताबिक टॉमी रॉबिनसन (असली नाम स्टीफन याक्सली लेनन) दक्षिणपंथी विचारधारा की मुखर आवाज रहे हैं। टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है। उन्हें ब्रिटिश इंग्लिश डिफेंस लीग (EDL) नामक संगठन के संस्थापक के रूप में जाना जाता है, जो खुलकर अप्रावासी मुस्लिमो के खिलाफ, इस्लाम के खिलाफ और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बोलने के लिए जाना जाता है।

इतना ही नहीं यह संगठन अक्सर इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा के खिलप विरोध प्रदर्शन करता है और इसके सदस्यों पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जाता रहा है। स्वयं रॉबिनसन इस मुखर रवैये के कारण इस्लामी कट्टपंथियों के निशाने पर काफी समय तक थे। फिर बाद में उनके ऊपर सीरियाई लड़के से जुड़े मामले में अदालत की अवमानना करने का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया।

रॉबिनसन पिछले 18 महीने से जेल की सजा काट रहे हैं। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अदालती मनाही के बावजूद एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी, जिसमें मुस्लिम युवक के साथ यौन अपराध को दिखाया गया था। ब्रिटिश अदालत ने इस डॉक्यूमेंट्री में किए गए दावों को आधारहीन करार दिया था।

वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी टॉमी रॉबिनसन का हर प्रकार से विरोध करते रहे हैं, लेकिन एलन मस्क ने हाल में रॉबिन्सन को रिहा करने का आह्वान किया है। मस्क ने रॉबिन्सन की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री को सोशल मीडिया पर साझा किया और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिसने रॉबिनसन को जेल मे डाला है उन्हें जेल में होना चाहिए।

पीएम मोदी ने रखी वीर सावरकर कॉलेज की आधारशिला, ₹140 करोड़ में बनेगा: दिल्ली यूनिवर्सिटी को 30 साल बाद मिला नया कॉलेज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार (3 जनवरी, 2025) को दिल्ली को हजारों करोड़ की सौगात दी है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को 29 वर्षों के अंतर के बाद मिल रहे वीर सावरकर कॉलेज का शिलान्यास किया है। पीएम मोदी ने झुग्गी में रहने वालों 1600 से अधिक लोगों के लिए बनाए गए फ्लैट्स का भी उद्घाटन किया है। इन सबके अलावा पीएम मोदी ने CBSE के नए हेडक्वार्टर, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर समेत और कई परियोजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन किया है। पीएम मोदी ने इसे दिल्ली के लिए बड़ा दिन बताया है।

पीएम मोदी ने दिल्ली के नजफगढ़ में वीर सावरकर कॉलेज का शिलान्यास किया है। यह कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय को 30 वर्षों बाद कोई नया कॉलेज मिल रहा है। इससे पहले 1995 में दिल्ली विश्वविद्यालय को आखिरी कॉलेज मिला था। वीर सावरकर कॉलेज को ₹140 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा। यह कॉलेज 18000 स्क्वायर मीटर से अधिक इलाके में फैला है और इसमें अत्याधुनिक सुविधाएँ होंगी।

वीर सावरकर कॉलेज में 24 क्लासरूम जबकि 8 ट्युटोरियल रूम होंगे। इस कालेज में लाइब्रेरी, कैंटीन और शिक्षकों के लिए 40 कमरे होंगे। कॉलेज कैम्पस से नजफगढ़ समेत तमाम आसपास के क्षेत्रों को फायदा होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय को इसके अलावा एक पश्चिमी और पूर्वी कैंपस मिल रहा है। इसमें से एक में कानून की पढ़ाई होगी। दोनों कैम्पस को ₹480 करोड़ की लागत से बनाया जाने वाला है। इसके चलते दिल्ली विश्वविद्यालय शहर के चारों कोनों में फ़ैल जाएगा।

पीएम मोदी ने दिल्ली में शिक्षा क्षेत्र के अलावा लोगों को घरों की सौगात भी दी है। पीएम मोदी ने दिल्ली के अशोक विहार स्लम पुनर्वास परियोजना के बनाए गए अंतर्गत झुग्गी झोपड़ी वालों निवासियों के लिए बनाए गए नए फ्लैटों का दौरा किया है। उन्होंने यहाँ कुछ लाभार्थियों को चाभी भी सौंपी। यहाँ 1600 से अधिक फ्लैट्स बनाए गए हैं। अब लोग झुग्गी को छोड़ कर यहाँ रह सकेंगे। सरकार ने इन फ्लैट पर ₹25 लाख का खर्च किया है।

पीएम मोदी ने दिल्ली के नौरोजी नगर में बनाए गए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर सरोजिनी नगर में बनाए गए 2500 फ्लैट्स का उद्घाटन भी किया है। सरोजिनी नगर में बनाए गए इन फ्लैट्स में कई आधनिक सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। पीएम मोदी ने इसके अलावा दिल्ली के द्वारका में बनाए गए CBSE के नए इंटिग्रेटेड हेडक्वार्टर का भी उद्घाटन किया है। इसके निर्माण में ₹300 करोड़ खर्च हुए हैं। इस हेडक्वार्टर में डाटा सेंटर भी बनाया गया है। पीएम मोदी ने यह सभी योजनाएँ दिल्ली को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सौंपी है।

जिस ‘बंगाल के कसाई’ सुहरावर्दी ने करवाया हिन्दुओं का नरसंहार, उसकी महानता बच्चों को पढ़ाएगी बांग्लादेश की यूनुस सरकार: नई किताबों में लाई स्पेशल चैप्टर

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से लगातार इस्लामी कट्टरपंथ को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। इस पूरी कवायद को बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार खुद बढ़ा रही है। इसी कड़ी में अब बांग्लादेश में बच्चों को पढ़ाई जाने वाली किताबों में बदलाव किए गए हैं। ऐसी ही एक किताब में हिन्दुओं का नरसंहार करवाने वाले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग नेता हुसैन शहीद सुहरावर्दी की बड़ाई की गई है। अब बांग्लादेश इस कसाई के बारे में पढ़ेंगे।

हुसैन सुहरावर्दी को हिन्दुओं के नरसंहार के लिए ‘बंगाल का कसाई’ कहा गया था। सुहरावर्दी ने यह नरसंहार बंगाल का प्रधानमंत्री रहते हुए करवाया था। सुहरावर्दी ही वह शख्स था जिसने 1943 में बंगाल के अकाल को बद से बदतर बना दिया था।

सुहरावर्दी के ही राज में मुस्लिमों ने 1946 में डायरेक्ट एक्शन डे किया था और हजारों हिन्दुओं को मरवा दिया था। अब बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं और यूनुस सरकार सुहरावर्दी का महिमामंडन कर रही है और उसके कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा दे रही है। असल में यह बच्चों में भी उसी कट्टरपंथ को भरने की योजना है।

सुहरावर्दी और 1946 का नरसंहार

16 अगस्त 1946 भारतीय इतिहास में हिन्दू विरोधी हिंसा के सबसे क्रूर दिनों में से एक है। इसे कलकत्ता का नरसंहार नाम से भी जाना जाता है। 5 दिनों तक चले इस नरसंहार की शुरुआत थी जिसमें लगभग 5,000 लोग मारे गए थे। इस नरसंहार में हज़ारों हिंदू घायल हुए थे और 120,000 बेघर हो गए थे। इस नरसंहार के पहले ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ का आह्वान मुस्लिम लीग के सुप्रीमो मुहम्मद अली जिन्ना ने किया था। जिन्ना ने कलकत्ता की हिंदू आबादी के खिलाफ़ लूट, हत्या और यौन हिंसा के लिए लोगों को भड़काया था।

जिन्ना ने अपने ऐलान में साफ़ कर दिया था कि मुस्लिम लीग अंग्रेज (ब्रिटिश) सरकार के साथ सहयोग करना बंद कर देगी और संवैधानिक तरीकों को अलविदा कह देगी। जिन्ना ने ऐलान किया था कि वह पूरे देश में हिंसा करेंगे। जिन्ना के हिंदू समुदाय का नरसंहार करने वाले जिन्ना के इस सपने को साकार करने वाला व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि हुसैन शहीद सुहरावर्दी था।

1946 से पहले बंगाल एक मुस्लिम बहुल प्रांत था। बंगाल की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी केवल 42% थी। लेकिन कलकत्ता शहर में हिंदू बहुसंख्यक थे। उनकी आबादी 64% था। इस ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ ने कलकत्ता को सुहरावर्दी और मुस्लिम लीग के निशाने पर ला दिया। वे हिंदुओं को डराकर बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने के लिए मजबूर करना चाहते थे।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने जून 1946 में सत्ता ट्रांसफर के लिए बातचीत को मिशन भेजा था। यह लोग भारत के बँटवारे पर भी बात करने वाले थे। हालाँकि, कॉन्ग्रेस बँटवारे को लेकर राजी नहीं थी जबकि मुस्लिम लीग चाहती थी कि पाकिस्तान बन जाए। मुस्लिम लीग ने अपनी माँग मनवाने के लिए हिंसक तरीके अपनाने का फैसला लिया और 16 अगस्त, 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे घोषित कर दिया। इस दिन को भी जानबूझकर चुना गया था। दरअसल, यह रमजान का अठारवां दिन था।

इसी दिन बद्र का युद्ध हुआ था। इस बद्र के युद्ध में पैगंबर मोहम्मद की सेनाओं ने कुरैशों से युद्ध किया था और हराया था। इसके चलते इस्लाम का अरब में कब्जा पक्का हो पाया था। इसी को ध्यान में रखते हुए सुहरावर्दी और जिन्ना ने यही दिन चुना। वह हिन्दुओं को कुरैश दिखाना चाह रहे थे और भारत के मुस्लिमों को पैगम्बर मुहम्मद की फ़ौज। उन्होंने अखबारों और सभाओं के जरिए खूब जहर भी उगला। मुस्लिम लीग वालों ने नारा दिया, “लड़ के लेंगे पाकिस्तान, लेकर रहेंगे पाकिस्तान, अल्लाहु अकबर, नारा-ए-तकबीर।”

मुस्लिम लीग के मुखपत्र द स्टार इंडिया ने लिखा, “मुसलमानों को याद रखना चाहिए कि यह रमज़ान ही था जब अल्लाह ने जिहाद की मंजूरी दी थी। रमज़ान में ही बद्र की लड़ाई लड़ी गई थी, जो इस्लाम और बुतपरस्तों के बीच पहला खुला युद्ध था, जिसे 313 मुसलमानों ने जीता था और फिर रमज़ान में ही पैगंबर के नेतृत्व में 10,000 मुसलमानों ने मक्का पर जीत हासिल की थी और अरब में जन्नत और इस्लाम के राज की स्थापना की। मुस्लिम लीग खुशकिस्मत है कि वह इस महीने और दिन पर अपनी कार्रवाई शुरू कर रही है।”

16 अगस्त 1946 की सुबह कलकत्ता में हिंसा भड़क उठी। मुस्लिम लीग के नेताओं के भड़काऊ भाषणों ने हिंसा को और भड़का दिया। हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने सभी मौलवियों को तक़रीर देने का निर्देश दिया था, जिसमें जुम्मा के नमाजियों को पाकिस्तान बनाने के लिए हर कोशिश करने को कहा गया था। यहाँ हिन्दुओं पर हमला करना साफ़ मकसद था। सुहरावर्दी ने मुसलमानों को यह साफ़ कहा था उन्हें कानूनी छूट मिलेगी और पुलिस हस्तक्षेप नहीं करेगी। इससे उन्हें हिंदू इलाकों में उत्पात मचाने का और भी हौसला मिला।

सुहरावर्दी ने पुलिस को काम नहीं करने दिया और इससे मुस्लिम गुंडों को बिना किसी डर अपने हमले करने की छूट मिल गई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, स्थिति तेजी से बिगड़ती गई। लोहे की रॉड, तलवारों और अन्य हथियारों से लैस मुस्लिम भीड़ ने कोलकाता शहर भर में हिंदू घरों और व्यवसायों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कॉलेज स्ट्रीट और बड़ाबाजार जैसे इलाके मुसलमानों के लिए सामूहिक हत्या, बलात्कार और आगजनी करने के लिए मुख्य निशाना बने।

सुहरावर्दी ने इस हिंसा में बड़ा रोल निभाया था। उसने नरसंहार से कुछ साल पहले बंगाल पुलिस में हेरफेर करके पंजाबी मूस्लिमों और पठानों को बड़ी संख्या में भरा था। कलकत्ता पुलिस में इससे पहले पारंपरिक रूप से आरा, बलिया, छपरा और देवरिया के हिंदू शामिल थे। सुहरावर्दी ने इसमें बदला करके यह पका कर दिया कि दंगे के समय कार्रवाई हिन्दुओं के खिलाफ हो और मुस्लिमों के अपराध पर वह आँख मूँद ले। इस हिंसा के लिए लम्बी योजना बनाई गई थी। पेट्रोल इकट्ठा करने और गुंडों को खाना-पानी के लिए भी विशेष इंतजाम था।

ब्रिटिश सरकार ने नरसंहार के 6 दिनों के बाद ही सहाला संभालने के लिए सेना भेजी लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। यह हिंसा बाद में बिहार और पंजाब समेत बाकी इलाकों में फैली। इसी के कुछ दिन बाद बाद में यह बिहार और पंजाब सहित अन्य क्षेत्रों में फैल गया। इसी के कुछ दिनों बाद मुसलमानों ने अक्टूबर और नवंबर 1946 में नोआखली नरसंहार की साजिश रची। सुहरावर्दी के सहयोगी और मुस्लिम लीग का नेता ग़ुलाम सरवर हुसैनी इस नरसंहार के पीछे मास्टरमाइंड था। नोआखली में लगभग 5,000 हिंदुओं की हत्या कर दी गई।

सुहरावर्दी के कुकर्म मिटाने का हो रहा प्रयास

अब सुहरावर्दी के कुकर्मों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। सुहरावर्दी को डायरेक्ट एक्शन डे से अलग करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उसे न केवल महिमामंडित किया जा रहा है, बल्कि इतिहास के प्रमुख आदमी के रूप में भी चित्रित किया जा रहा है। जबकि असल में सुहरावर्दी को कोलकाता में ‘गुंडों के राजा’ के रूप में जाना जाता था। ‘बंगाल के कसाई’ के रूप में उसकी करामातों को विभिन्न इतिहासकारों ने दर्ज किया है, लेकिन फिर भी मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार इसे छिपाने की कोशिश कर रही है।

8 लोग (शक्ल देख कर नाम बताने की जरूरत नहीं)… सब गिरफ्तार: वक्फ प्रॉपर्टी बता हिंदुओं की दुकानों से सड़क पर फेंक दिया था सामान

गुजरात के राजकोट में पुलिस ने फारूक मुसानी समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताकर हिंदू दुकानदारों की दुकानों पर जबरन कब्जा कर लिया था और उनके सामान को सड़कों पर फेंक दिया था।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा है कि सभी दुकानें खुल चुकी हैं और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहन जाँच कर रही है और वक्फ बोर्ड के आदेश की वैधता की भी जाँच की जा रही है। उन्होंने जो तस्वीर साझा की है, उसमें आरोपित फारूक और उसके साथी नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुकानदार वीरेंद्रभाई कोटेचा ने फारूक मुसानी और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया कि यह हमला अचानक किया गया, बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के। कोटेचा ने कहा कि वक्फ बोर्ड के नियमों के अनुसार, कब्जे के लिए तीन महीने पहले नोटिस दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। फारूक मुसानी ने 19 दिसंबर 2024 का एक कथित आदेश दिखाया और इसे आधार बनाकर दुकानों पर कब्जा कर लिया।

ये घटना 31 दिसंबर 2024 की रात को घटी थी, जब फारूक मुसानी के नेतृत्व में करीब 20-25 लोगों की भीड़ ने पुरानी दानपीठ इलाके में दो दुकानों के ताले तोड़ दिए और सामान सड़क पर फेंक दिया। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि ये दुकानें वक्फ बोर्ड की संपत्ति हैं और उन्हें खाली करवाना है। हिंदू दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि ये दुकानें दशकों से पट्टे पर ली गई हैं और वास्तव में ये जमीन PWD विभाग की है, ना कि वक्फ बोर्ड की।

दुकानदारों ने वक्फ बोर्ड के नाम पर हुई इस गुंडागर्दी से बचाव और न्याय की माँग की थी, जिसके बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने उन हिंदू दुकानकारों को दुकानों का कब्जा वापस दिला दिया है। इस मामले में पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि ऐसी अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

6 साल की बच्ची की रेप-हत्या करके फरार हो रहा था इमानविल, UP पुलिस ने किया एनकाउंटर: दोनों पैर में गोली मारी, लंगड़ाते हुए वीडियो आई सामने

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के मामले में आरोपित को 14 घंटे के भीतर पकड़ लिया गया है। यूपी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दरिंदे को दबोचा। इस दौरान आरोपित के दोनों पैरों में गोली लगी। छानबीन में पता चला कि वो असम का रहने वाला है, जिसकी पहचान इमानविल उर्फ सैमुअल के तौर पर हुई है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक सीओ आशीष यादव ने मुठभेड़ वाली जगह पर जाकर घटना की जानकारी ली। उन्होंने बतााया कि आरोपित मंसूरपुर फरार होने की फिराक में था, लेकिन उसे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

घटना को अंजाम बेगराजपुर इंडस्ट्रियल एरिया में बनी लेबर कॉलोनी में दिया गया। बच्ची के माता पिता इंडस्ट्रियल एरिया में ही श्री बालाजी क्रिस्टल की फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। फैक्ट्री के ठीक सामने बाहर से काम करने आए मजदूरों के लिए कॉलोनी बनी हुई है।

2 जनवरी को बच्ची के माता-पिता उसे घर पर अकेले छोड़कर फैक्ट्री में मजदूरी करने गए थे, जिसके बाद बिल्डिंग के निचले हिस्से में रह रहा इमानविल वहाँ आया। उसने पहले बच्ची को बहलाया-फुसलाया, उसके बाद टॉफी देने के बहाने कमरे में बुलाया, फिर उससे दुष्कर्म किया और बाद में हत्या करके फरार हो गया।

शाम में बच्ची के माता-पिता जब काम से वापस लौटे, तो उन्होंने बेटी को गायब पाकर उसकी खोजबीन की। पड़ोसियों से पूछने पर पता चला कि नीचे रहने वाला इमानविल लेकर गया है।

माता-पिता फौरन बिल्डिंग में नीचे गए, लेकिन आरोपित का कमरा बंद था। सबने मिलकर दरवाजा तोड़ा तो बिटिया का शव खून से लथपथ अंदर बेड पर पड़ा था। फौरन घटना की सूचना पुलिस को दी गई और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इधर पुलिस ने आरोपित की तलाश के लिए टीम बनाई और आखिर में हत्यारोपित को बेगराजपुर के पास जंगल में मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया।

दिल्ली में ‘आप-दा’ बनकर टूट पड़ी है AAP, ये कट्टर बेईमान: विधानसभा चुनावों से पहले बोले PM मोदी- मैं भी शीशमहल बनवा लेता, लेकिन मेरा सपना लोगों को पक्का घर देना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों को देखते हुए शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को चुनाव प्रचार की शुरूआत कर दी। अशोक विहार में जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि AAP दिल्ली में आपदा बनकर टूटी है। ये लोग कट्टर बेईमान लोग हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वे चाहते तो अपने लिए भी शीशमहल बनवा लिए होते, लेकिन उनका सपना है कि देशवासियों को अपना घर मिले।

‘आपदा को हटाना है, भाजपा को लाना है’ का नारा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “सत्ता में खुद को कट्टर बेईमान बताने वाले लोग बैठे हैं, जो खुद शराब घोटाले के आरोपित हैं। ये भ्रष्टाचार करते हैं और उसका महिमामंडन करते हैं। ये चोरी भी करते हैं और सीनाजोरी भी। दिल्ली वालों को इस आपदा सरकार को सत्ता से हटाना है। आज हर गली कहती है- आपदा को नहीं सहेंगे, बदलकर रहेंगे।”

पीएम मोदी, “बीते 10 वर्षों से दिल्ली एक बड़ी आप-दा से घिरी है। अन्ना हजारे जी को सामने करके कुछ कट्टर बेईमान लोगों ने दिल्ली को आप-दा में धकेल दिया। शराब के ठेकों में घोटाला, बच्चों के स्कूल में घोटाला, गरीबों के इलाज में घोटाला, भर्तियों के नाम पर घोटाला… ये लोग दिल्ली के विकास की बात करते थे, लेकिन ये लोग आप-दा बनकर दिल्ली पर टूट पड़े हैं। दिल्ली वालों ने आप-दा के विरुद्ध जंग छेड़ दी है। दिल्ली का वोटर, दिल्ली को आप-दा से मुक्त करने की ठान चुका है।”

उन्होंने कहा, “मैं तो दिल्ली वालों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली ‘आयुष्मान भारत’ योजना का लाभ देना चाहता हूँ। आप-दा सरकार को दिल्ली वालों से बड़ी दुश्मनी है। पूरे देश में आयुष्मान योजना लागू है, लेकिन इस योजना को आप-दा वाले यहाँ (दिल्ली) लागू नहीं होने दे रहे। इसका नुकसान दिल्ली वालों को उठाना पड़ रहा है।”

AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी ने कभी अपने लिए घर नहीं बनाया, लेकिन बीते 10 वर्षों में 4 करोड़ से अधिक लोगों का सपना पूरा किया है। मैं भी कोई शीशमहल बना सकता था, लेकिन मेरे लिए तो मेरे देशवासियों को पक्का घर मिले, यही सपना था।” उन्होंने कहा कि अभी भी जो लोग झुग्गी में रहते हैं, आज नहीं तो कल उनके लिए पक्का घर बनेगा मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार देशवासियों को आयुष्मान योजना का लाभ देना चाहती है, लेकिन AAP वालों को दिल्लीवासियों से दुश्मनी है। वह इस योजना को लागू नहीं होने दे रही है। इसके कारण दिल्ली के लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पीएम ने कहा कि दिल्ली में 500 जनऔषधि केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 80 फीसदी दवाओं पर डिस्काउंट मिलता है। 100 रुपए की दवा 15 रुपए में मिलती है।

पीएम मोदी ने आज दिल्ली में 4500 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने दिल्ली के अशोक विहार में बने 1,675 फ्लैट्स का भी उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “स्वाभिमान अपार्टमेंट्स,’ गरीबों के स्वाभिमान को, उनकी गरिमा को बढ़ाने वाले हैं। इन घरों के मालिक भले ही दिल्ली के अलग-अलग जगहों के लोग हों, लेकिन ये सब के सब मेरे परिवार के ही सदस्य हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “दिल्ली राजधानी है, बड़े खर्चों वाले बहुत से काम यहां होते हैं वो केंद्र सरकार के जिम्मे है। सड़कें, मेट्रो, अस्पताल, कॉलेज कैंपस सब केंद्र ही बना रही है। लेकिन यहां की आपदा सरकार के पास ब्रेक लगी हुई है।” उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में CBSE की बड़ी भूमिका है और इसका दायरा बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा भी बढ़ रही है।

इस्लामी ‘ब्लड मनी’ से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को नहीं होगी फाँसी: कौन दलाल लेकिन खा गया ₹30-35 लाख, पीड़ित परिवार के पास क्यों नहीं पहुँचा पैसा – जानिए सब कुछ

केरल की भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। यमनी राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने 2018 में दिए गए इस फैसले को मंजूरी दे दी थी, और उनकी फाँसी अगले एक महीने में तय है। हालाँकि, निमिषा प्रिया को बचाने का एक तरीका मौजूद है। इस्लामी शरिया कानून के तहत मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन कुरान में माफी और मुआवजे (जिसे ‘दिया – Diyya’ या ‘ब्लड मनी – Blood Money’ कहा जाता है) को सजा से बेहतर विकल्प बताया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमिषा प्रिया की रिहाई के लिए ईरान ने मध्यस्थता की इच्छा जताई है, लेकिन माफी मिलने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। निमिषा प्रिया के वकील सुभाष चंद्रन ने बताया कि यमनी जनजातीय नेताओं ने बातचीत शुरू करने के लिए पहले $40,000 (करीब 34 लाख रुपये) की माँग की थी। पहले $20,000 की राशि कुछ महीने पहले ही दी गई थी, लेकिन सकारात्मक जवाब न मिलने के कारण बाकी भुगतान में देरी हुई।

जानकारी के मुताबिक, दिसंबर के अंत में भारतीय राजनयिक मिशन के माध्यम से सऊदी अरब में $20,000 की दूसरी किश्त दी गई। हालाँकि, इसके तीन दिन बाद ही खबर आई कि यमनी राष्ट्रपति ने निमिषा प्रिया की मौत की सजा को मंजूरी दे दी है। यमनी राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद भारत सरकार ने कहा कि वो इस मामले में परिवार के साथ है।

निमिषा प्रिया को बचाने की कोशिश में पैसा जुटा रहे लोग

निमिषा प्रिया के मामले में ब्लड मनी जुटाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल’ सक्रिय है। उनके वकील ने बताया कि निमिषा को बचाने के लिए बातचीत शुरू हो, इसके लिए 20-20 हजार डॉलर की राशि दो बार में भेजी गई थी, लेकिन पीड़ित परिवार को अभी तक ये पैसा नहीं मिला। इसलिए ब्लड मनी पर अभी बातचीत भी शुरू नहीं हो पाई है।

यह भी कहा जा रहा है कि ब्लड मनी की कुल राशि $300,000–$400,000 (2.57 करोड़ रुपये से 3.40 करोड़ रुपये) हो सकती है, जिसे जुटाने के लिए परिवार और समर्थक क्राउडफंडिंग कर रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम के अनुसार, समय पर दूसरा भुगतान न होने के कारण बातचीत का मौका हाथ से निकल गया। अब ईरान की मध्यस्थता और भारत के कूटनीतिक प्रयास ही निमिषा प्रिया की जान बचा सकते हैं।

ब्लड मनी क्या है और कैसे तय की जाती है?

इस्लामिक कानून के मुताबिक, हत्या के मामलों में सजा के 2 विकल्प है किसास और दूसरा दिया। किसास का मतलब ‘जान के बदले जान’ और दिया यानी ब्लड मनी। इस्लामिक कानून में ‘दिया’ यानी ब्लड मनी ऐसा प्रावधान है जो सुलह का अवसर प्रदान करता है। शरिया कानून के अनुसार, हत्या के मामलों में पीड़ित परिवार को यह तय करने का अधिकार होता है कि वे हत्यारे को माफ करेंगे या सजा दिलाएँगे। कुरान के अनुसार, माफी और ब्लड मनी को न्याय और दया का माध्यम बताया गया है।

कुरान की सूरह अल-बकरा, आयत 178 में उल्लेख है: “मगर यदि हत्यारे को पीड़ित के संरक्षक द्वारा क्षमा कर दिया जाए, तो ब्लड मनी को न्यायपूर्वक तय किया जाए और सम्मानपूर्वक भुगतान किया जाए। यह तुम्हारे पालनहार की ओर से एक दया और सुविधा है।”

यमन और कई अन्य इस्लामी देशों में ब्लड मनी का भुगतान परिवारों के बीच आपसी सहमति से तय होता है। हालाँकि यमन जैसे देश, जहाँ गृहयुद्ध और आर्थिक संकट हैं, वहाँ इतनी बड़ी रकम जुटाना एक चुनौती है।

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, निमिषा प्रिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने साल 2017 में एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया था, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, निमिषा ने अपने बचाव में कहा था कि मृतक ने उनका पासपोर्ट छीन लिया था, जिसे वो वापस पाना चाहती थी। निमिषा ने दावा किया था कि उन्होंने महदी को बेहोशी की दवा दी थी। उसकी हत्या करने का इरादा नहीं था।

निमिषा प्रिया शादीशुदा हैं। केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा अपने पति और बेटी के साथ पिछले लगभग एक दशक से यमन में काम कर रही थीं। इस बीच यमन में गृहयुद्ध शुरु हो गया तो उनका परिवार भारत आ गया था। हालाँकि, यमनी नागरिक द्वारा पासपोर्ट ले लेने के कारण निमिषा वापस नहीं लौट पाईं और ये घटनाएँ घट गईं। इस मामले में उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई।

अब, ब्लड मनी के माध्यम से हो सकता है कि निमिषा मौत की सजा पाने से बच जाएँ। हालाँकि क्या समय रहते यह प्रयास सफल हो पाएगा? यह देखना बाकी है।

चंदन गुप्ता हत्याकांड में सभी 28 दोषियों को उम्रकैद की सजा, NIA कोर्ट ने दिया फैसला: तिरंगा यात्रा निकालने पर इस्लामी भीड़ ने कर दी थी हत्या, 7 साल बाद परिवार को मिला न्याय

चंदन गुप्ता हत्याकांड में लखनऊ की NIA कोर्ट ने दोषियों को सजा सुना दी है। NIA कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पहले उन्हें दोषी ठहराया गया था। चंदन गुप्ता की 26 जनवरी, 2018 को उत्तर प्रदेश के कासगंज में हत्या कर दी गई थी। यह फैसला लगभग 7 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ के NIA कोर्ट ने शुक्रवार (3 जनवरी, 2025) को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए 28 लोगों को उम्रकैद की सजा दी है। इससे पहले गुरुवार को इन्हें दोषी ठराया गया था जबकि 2 आरोपितों को बरी कर दिया गया था। इन्हें सबूत ना होने के चलते बरी किया गया था।

NIA कोर्ट ने चंदन गुप्ता हत्याकांड में आसिफ कुरैशी उर्फ हिटलर, असलम, असीम, शबाब, साकिब, मुनाजिर रफी, आमिर रफी, सलीम, वसीम, नसीम, बबलू, अकरम, तौफीक, मोहसिन, राहत, सलमान, आसिफ जिम वाला, निशु, वासिफ, इमरान , शमशाद, जफर, शाकिर, खालिद परवेज, फैजान, इमरान, शाकिर, जाहिद उर्फ जग्गा को यह उम्रकैद की सजा दी है।

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2018) के दिन चंदन गुप्ता बाकी युवाओं के साथ कासगंज में एक बाइक रैली निकाल रहे थे। यह बाइक रैली तिरंगों के साथ निकाली गई थी। जब यह रैली राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पास पहुँची तो यहीं पर मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया। मुस्लिम युवकों ने हिन्दुओं पर फायरिंग की और पत्थर बरसाए।

चंदन गुप्ता को निशाना बना कर गोली मारी गई, इसके चलते उनकी मौत हो गई। इसके बाद कासगंज में काफी हिंसा हुई। मामले में वसीम, नसीम समेत कई आरोपित पुलिस ने पकड़े थे। इनमें से एक को छोड़ कर बाकी को जमानत भी मिल गई थी। चंदन गुप्ता का परिवार इसके बाद कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।

चंदन गुप्ता का परिवार बीते लगभग 7 वर्षों में कई कठिनाइयाँ झेल चुका है। चंदन गुप्ता के भाई और बाकी परिवार को सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी थी। उन पर कई बार समझौते के लिए भी दबाव बनाया गया था। उनके परिवार ने ऑपइंडिया से बातचीत में वादे ना पूरे होने की बात कही थी।

‘काफिर अब तुम्हारा कोई यूज नहीं’: ‘सूरज’ बन कर जाबिर ने हिंदू महिला से बनाया सेक्स-संबंध, फिर किया निकाह… गहने-संपत्ति लेने के बाद घर से निकाला

उत्तराखंड में जाबिर अली नाम के मुस्लिम शख्स ने खुद को सूरज बताते हुए एक हिंदू महिला से दोस्ती कर ली। उसके बाद शादी का झाँसा देते हुए उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान जाबिर ने युवती की अश्लील वीडियो बना ली और बदनाम करने डर दिखाकर उससे जबरन निकाह कर लिया। जाबिर ने महिला की पैसे पर खूब मौज-मस्ती की और जब उसके पैसे खत्म हो गए तो 6 साल बाद उसे छोड़ दिया।

यह मामला उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के किच्छा का है। यहाँ रहने वाली एक महिला ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की है। अपनी शिकायत में महिला ने कहा कि उसके पति जाबिर ने उससे अपनी पहचान छिपाई और अपना नाम सूरज बताया। सूरज बनकर उसने उससे जान-पहचान बढ़ाई। कुछ समय के बाद सूरज बना जाबिर ने उससे प्रेम करने का नाटक किया और शादी के नाम पर शारीरिक संबंध बना लिए।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कठर्रा के गौघाट की रहने वाली अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली 33 साल की पीड़िता ने कहा, “उसने (जाबिर ने) मुझसे प्यार का नाटक किया और एक अश्लील वीडियो भी बना लिया। इसका इस्तेमाल वह ब्लैकमेल कर जबरन निकाह करने के लिए करता था।” बदनामी की आशंका से महिला डर गई। हालाँकि, जाबिर अली अपनी साजिश में लगा रहा।

एक दिन जाबिर अली पीड़िता को जहानाबाद रहने वाली अपनी बड़ी बहन के घर ले गया और वहाँ उससे निकाह करने के लिए पीड़िता को मजबूर करने लगा। पीड़िता ने कहा, “जब मैंने इनकार कर दिया तो जाबिर और उसके भाइयों- अब्बास अली, रियासत, जाकिर और शाकिर ने वीडियो वायरल करने और मुझे जान से मारने की धमकी देने लगे।” आखिरकार पीड़िता निकाह के लिए मजबूर हो गई।

पीड़िता ने बताया कि निकाह के लिए मजबूर करने से पहले वह जाबिर अली को हिंदू समझती थी। हालाँकि, असलियत का पता चलते के बाद काफी देर हो चुकी थी। जाबिर महिला के साथ मारपीट करता था और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालता था। जब पीड़िता इसके लिए तैयार नहीं हुई तो जाबिर और उसके घर वाले उसे जान से मारने की धमकी देने लगे।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि निकाह के समय उसके गले में दो तोला सोने की चेन, एक-एक तोला के दो कान के झुमके, लैपटॉप सहित कई सामान थे। इसके साथ ही उसके पास एक लाख रुपए भी थे। पीड़िता का कहना है कि निकाह के कुछ समय के बाद उसकी संपत्ति खत्म हो गई तो उस पर दहेज लाने का दबाव डाला जाने लगा। आखिरकार पीड़िता को उसके 6 साल के बच्चे के साथ घर से निकाल दिया गया।

महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाबिर अली के खिलाफ और उसके भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आरोपितों के खिलाफ दहेज निवारण अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 498A (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पीड़िता ने ऑर्गनाइजर को बताया कि जाबिर एक फकीर है और वह ‘झाड़-फूँक’ का काम करता है। महिला का कहना है, “सूरज बनकर उसने मुझे सम्मोहित कर लिया। उसने जादू-टोना किया और इस हद तक मेरे साथ छेड़छाड़ की कि मैं ठीक से सोच भी नहीं पाती थी। उसने जो कुछ भी कहा या किया, वह मुझे उस समय सही लगा था।”

पीड़िता ने बताया कि जब वह गर्भवती हो गई तो जाबिर ने उसे जबरन निकाह के लिए मजबूर किया। पीड़िता ने कहा, “मैंने कभी अपना नाम या धर्म नहीं बदला और नवरात्रि के दौरान उपवास, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या भोज का आयोजन जैसी हिंदू प्रथाओं का पालन करना जारी रखा। निकाह के बाद जाबिर ने मेरी सभी मूर्तियाँ और धार्मिक पुस्तकें फेंक दीं।”

पीड़िता ने बताया कि उसके बेटे के जन्म के बाद ही उसे पता चला कि जाबिर पहले से ही शादीशुदा था और उसके बच्चे भी थे। पीड़िता का आरोप है कि जाबिर ने यह सब कुछ उसके गहने और पैसे हड़पने के लिए किया था। पीड़िता ने यह भी कहा कि इस दौरान जाबिर और उसके घरवाले उसे काफिर कहकर बुलाते थे और उसकी जाति को लेकर उसे गाली देते थे।

पीड़िता के अनुसार, “जाबिर ने मुझे घर से निकालते हुए कहा कि मैंने अपना काम कर लिया। अब मेरे लिए तुम्हारा कोई यूज नहीं है।” पीड़िता ने यह भी कहा कि उसके बच्चे का जन्म होने के तुरंत बाद जाबिर ने उसका खतना करवा दिया और उसे नमाज आदि पढ़ाने की बात करते हुए उसे मुस्लिम रीति-रिवाज से पालने लगा। हालाँकि, महिला ने इसका विरोध किया तो उसे घर से निकाल दिया।