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केजरीवाल को एंटी नेशनल क्यों कहा, हम पर क्यों कराई FIR, संदीप दीक्षित को चुनाव क्यों लड़ाया… कॉन्ग्रेस को AAP का अल्टीमेटम, कहा- INDI गठबंधन से निकाल देंगे

दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले INDI गठबंधन के साथी आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस के बीच खींचतान बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि गठबंधन से कॉन्ग्रेस को हटाने के लिए वह इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों से बातचीत करेगी। दरअसल, दिल्ली विधानसभा चुनावों में अलग-अलग मैदान में उतरी कॉन्ग्रेस ने AAP पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। इतना ही नहीं, हाल ही में कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने कहा अरविंद केजरीवाल को राष्ट्र विरोधी कह दिया। माकन ने कहा कि साल 2013 में AAP को समर्थन देने के कारण दिल्ली में पार्टी का पतन हुआ।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल को राष्ट्र विरोधी कहने वाले अजय माकन के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने के लिए कॉन्ग्रेस को अल्टीमेटम दिया है। संजय सिंह ने कहा कि कॉन्ग्रेस के अजय माकन भाजपा की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं। दिल्ली का चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस अब भाजपा से मदद ले रही है।

वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों की सूची भाजपा कार्यालय से तय हो रही है। आतिशी ने दावा किया कि संदीप दीक्षित सहित कांग्रेस उम्मीदवारों का चुनाव खर्च भाजपा द्वारा वहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस ने दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा के साथ मिलीभगत की है। भाजपा कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों को धन मुहैया करा रही है। संदीप दीक्षित को भाजपा से धन मिल रहा है।”

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा, “अगर कॉन्ग्रेस सोचती है कि हम (AAP) राष्ट्र विरोधी हैं तो उन्होंने हमारे साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनाव क्यों लड़ा? यह स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) को हराने और दिल्ली में भाजपा को जिताने के लिए भाजपा के साथ कुछ आपसी समझौता किया है।” उन्होंने ऐसे कई सीटों के नाम लिए, जहाँ कॉन्ग्रेस नेताओं को बीजेपी द्वारा फंडिंग की गई।

मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि संदीप दीक्षित के अलावा जंगपुरा से पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कॉन्ग्रेस प्रत्याशी फरहाद सूरी को भी भाजपा फंडिंग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सूरी को करोड़ों रुपए का फंड दे रही है। उन्होंने कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल देश विरोधी हैं तो लोकसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल से प्रचार क्यों करवाया?

दरअसल, AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ युवा कॉन्ग्रेस ने जनता को धोखा देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल, केजरीवाल ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ और ‘संजीवनी योजना’ के प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान दिल्ली सरकार के दो विभागों ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा था कि ये दोनों योजनाएँ अस्तित्व में नहीं हैं। इसके बाद यह शिकायत दी गई।

पोस्टर पर राहुल-सोनिया-प्रियंका और नक्शे से Pok गायब, जिस बेलगावी में CWC की बैठक वहाँ लगाए: बीजेपी बोली- भारत को छिन्न-भिन्न करना चाहती है कॉन्ग्रेस

कर्नाटक के बेलगावी में कॉन्ग्रेस कार्यसमिति (CWC) की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में भारत का गलत मानचित्र लगाया गया है। इसमें अक्साई चिन और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग दिखाया गया है। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कहा कि राहुल गाँधी की मोहब्बत की दुकान चीन के लिए हमेशा खुला रहता है। कॉन्ग्रेस देश को तोड़ देंगे। वे एक बार ऐसा कर चुके हैं और फिर वे ऐसा करेंगे।

कॉन्ग्रेस की बैठक में जो भारत का नक्शा दिखाया गया है, उसमें जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में दिखाया गया है। अब कॉन्ग्रेस ने बैकफूट पर आते हुए कहा कि जिस बैनर पर भारत का गलत मानचित्र दिखाया गया है, वह पार्टी की आधिकारिक बैनर नहीं है। बता दें कि बेलगावी में कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की 26 दिसंबर और 27 दिसंबर को बैठक है।

कर्नाटक भाजपा ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने बेलगावी में अपने कार्यक्रम में एक विकृत नक्शा प्रदर्शित करके भारत की संप्रभुता के प्रति घोर अनादर दिखाया है, जिसमें कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया है। यह सब सिर्फ़ अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए किया गया है। यह शर्मनाक है।”

कर्नाटक के पूर्व सीएम और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने कहा, “कॉन्ग्रेस की बैठक को कर्नाटक सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है। यह पूरी तरह से अनुचित है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग करना मनमानी है। सीएम को कर्नाटक के लोगों को बताना चाहिए कि किस प्रावधान के तहत धन मंजूर किया गया है और जारी किया जा रहा है। यह निंदनीय है।”

कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों के बलिदान के इस पावन अवसर पर देश वीर बलिदान दिवस मना रहा है। इस अवसर पर एक दूसरी तस्वीर सामने आई है, जो पीड़ादायक है। बेलगावी में कॉन्ग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में एक नक्शा सामने आया, जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर (POK) और अक्साई चिन गायब है।”

उन्होंने आगे कहा, “कई बार इन लोगों (कॉन्ग्रेस) ने ऐसा किया है। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ लगाई गई है। भारत को छिन्न-भिन्न करने का स्वप्न देखने वाली शक्तियाँ… भारत को तोड़ने का ख्वाब देखने वाली ताकतों के साथ कॉन्ग्रेस के गठजोड़ की साजिश अब एकदम साफ हो गई है।”

त्रिवेदी ने कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए कहा, “क्या ये वही भारत देश है, जिसके लिए महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाई थी? इसके लिए शिवाजी ने जान की बाजी लगाई थी? जिसके कारण रण में कूदी रानी लक्ष्मीबाई थी। जिसके कारण भगत सिंह ने फाँसी गले लगाई थी। जिसके कारण गुरुपुत्रों ने अपनी जान लुटाई थी। जिस भारत माँ के टुकड़े करते, तुम्हें लाज ना आई थी, उस भारत भारत माँ की छवि तुमने आज दिखाई थी।”

ठेके की नौकरी, ₹13000 की सैलरी… पर BMW में चलता था, गर्लफ्रेंड को गिफ्ट में दे दिया 4BHK फ्लैट: डायमंड का चश्मा बनवाया, महाराष्ट्र सरकार के खजाने से चुराए ₹21.59 करोड़

13000 रुपए कमाने वाले के पास लग्जरी कार, हीरे जवाहरात और 4 बीएचके वाला फ्लैट शुरुआती करियर में एक सपने जैसा होता है… लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ट्रैक्ट पर 13000 रुपए की सैलरी में काम करने वाले एक युवक के पास ये सब मिला। उसकी लग्जरी लाइफ देख बड़े-बड़े लोग भी हैरान रह गए और उससे भी ज्यादा उन्हें ये देखकर धक्का तब लगा जब सबको पता चला कि उसने ये सब हासिल कैसे किया।

आरोपित का नाम हर्ष कुमार अनिल क्षीरसागर है। उसने और उसके साथी ने मिलकर इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से महाराष्ट्र सरकार को 21 करोड़ 59 लाख और 38 लाख रुपए का चूना लगाया। बाद में इन पैसों से इन्होंने एक बीएमडब्लू कार और बाइक खरीदी और बाद में एयरपोर्ट के पास एक 4 बीएचके फ्लैट भी खरीदा जो कि आरोपित ने अपनी गर्लफ्रेंड के लिए लिया था। इसके बाद जो पैसे बचे उससे वो हीरा जड़ित चश्मा बनवाने पहुँचा था।

हर्ष ने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर खोले गए खाते का दुरुपयोग किया। उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और बैंक को धोखा देकर इंटरनेट बैंकिंग सक्रिय की। इसके बाद, उसने अपने व्यक्तिगत खातों में पैसे ट्रांसफर किए। यह घोटाला जुलाई 2024 से दिसंबर 2024 के बीच हुआ और इसकी जानकारी तब मिली जब विभागीय अधिकारियों ने लेनदेन में अनियमितताओं को देखा।

जाँच में पता चला कि आरोपितों ने खेल परिसर के लिए सरकार से मिलने वाली धनराशि को जमा करने के लिए खेल परिसर के नाम से इंडियन बैंक में खाता खोला था। इस खाते में लेनदेन डिप्टी स्पोर्ट्स डायरेक्टर द्वारा साइन किए गए चेक के जरिए किया जाता है, लेकिन आरोपित हर्ष कुमार क्षीरसागर, ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके बैंक को दिए और इंटरनेट बैंकिंग के लिए अपना नंबर एक्टिव करने के बाद रकम को अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया।

धोखाधड़ी का ये मामला 6 महीने बाद जाकर खुला। हाल में इस मामले की शिकायत नंदीग्राम कॉलोनी के खेल अधिकारी तेजस दीपक कुलकर्णी द्वारा दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने जाँच शुरू की और हर्ष सहित अन्य आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए अपने एक्शन लेने शुरू कर दिए। बताया जा रहा है कि इस मामले में एक आरोपित अभी भी फरार है।

द सैटेनिक वर्सेस: जिस किताब के कारण 13 लोग मारे गए, जामिया से निकाल फेंका गया वाइस-चांसलर… फिर से बिक रही भारत में, कट्टरपंथी मुस्लिम दे रहे ‘बर्दाश्त नहीं’ करने की धमकी

भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी की किताब ‘द सैटेनिक वर्सेस’ भारत में लौट आई है। यह किताब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने बैन कर दी थी। इसे इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध के चलते बैन किया गया था। लगभग 40 वर्षों के बाद यह किताब भारत के पाठकों के लिए उपलब्ध हुई है। किताब के वापस लौटने का मुस्लिमों ने विरोध किया है। किताब दिल्ली हाई कोर्ट में हुई एक सुनवाई के चलते भारत लौट सकी है। मुस्लिम मौलानाओं ने माँग है कि किताब पर दोबारा से बैन लगा दिया जाए और इसे भारतीय बाजारों में उपलब्ध ना होने दिया जाए।

क्यों बैन हुई थी किताब?

सलमान रुश्दी की यह किताब 1988 में पहली बार प्रकाशित हुई थी। सलमान रुश्दी जन्मे भारत में थे लेकिन बाद में वह इंग्लैंड चले गए थे और यहीं उन्होंने यह किताब लिखी थी। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि इस किताब का कथानक इस्लाम के विश्वासों का मजाक उड़ाता है और अपमान करता है। इस किताब में पैगम्बर मोहम्मद जैसे एक पात्र, उनकी 12 पत्नियों को लेकर भी लिखा गया है।

सलमान रुश्दी ने किताब में कहीं-कहीं ऐसा दिखाने की कोशिश की थी कि कुरान में पैगम्बर मुहम्मद द्वारा लिखी गई बातें उन्हें अल्लाह के फ़रिश्ते ने नहीं बताई बल्कि उन्होंने खुद लिखी थी। इसके अलावा उनकी 12 पत्नियों के नामों पर भी लिखा गया है। उन 12 पत्नियों के नाम इस किताब में 12 वेश्याएँ रख लेती हैं। इसके अलावा भी किताब में इस्लाम से जुड़ी बहुत सी धारणाओं से मिलती जुलती कहानी बनाकर उन पर प्रहार किया गया था।

इसके बाद सलमान रुश्दी के खिलाफ दुनिया भर में मुस्लिम गुस्सा हो गए थे। मुंबई में इस किताब को लेकर दंगे हुए थे जिसमे 12 लोगों की मौत हुई थी। जामिया के वैस चांसलर मुशीरुल हसन को किताब के बैन की आलोचना के चलते निकाल दिया गया था और इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें बेरहमी से पीटा था।

कश्मीर में भी एक आदमी मारा गया था। यहाँ तक कि 1989 में ईरान के मुल्ला शासक आयतुल्लाह खुमैनी ने लेखक सलमान रुश्दी का सर कलम करने का आदेश दुनिया भर के मुस्लिमों को दिया था। इस किताब को बैन करने का आह्वान तत्कालीन कॉन्ग्रेस सांसद सैयद शहाबुद्दीन और खुर्शीद आलम खान (कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के अब्बा) ने भारत में किया था।

शहाबुद्दीन ने किताब के खिलाफ याचिका दायर कर इस पुस्तक को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया था। इसके बाद राजीव गाँधी की सरकार ने 26 सितंबर 1988 को ब्रिटेन में पहली बार पब्लिश इस किताब पर 10 दिनों के भीतर बैन लगा दिया था। भारत इसे बैन करने वाला पहला देश था। इसे मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में नवम्बर, 1988 में बैन किया गया था।

किताब के भारत में आयात पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद राजीव गाँधी पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगा था। कॉन्ग्रेस सरकार ने बाद में इसके लेख सलमान रुश्दी के भारत आने पर भी रोक लगा दी थी। यह बैन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने हटा दिया था।

कैसे हटा बैन, अब कहाँ मिल रही?

दिल्ली हाई कोर्ट में नवम्बर, 2024 में हुई एक सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ था कि इस किताब के आयात पर रोक लगाने वाली अधिसूचना अब मौजूद ही नहीं है। कोर्ट ने तब कहा था, “अब हमारे पास यह मानने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है कि ऐसी कोई अधिसूचना मौजूद नहीं है। इसलिए हम इसकी वैधता की जाँच नहीं कर सकते।” इस अधिसूचना को साल 2019 में संदीपन खान नाम के व्यक्ति ने कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने न्यायालय को बताया कि वे पुस्तक पर प्रतिबंध होने के कारण इसे आयात नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अधिसूचना न तो किसी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है और न ही किसी प्राधिकरण के पास उपलब्ध है। संदीपन खान ने RTI के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस संबंध में जवाब भी माँगा था। गृह मंत्रालय ने जवाब में कहा था कि ‘द सैटेनिक वर्सेज’ पर प्रतिबंध लगा है। गृह मंत्रालय ने आदेश के मुताबिक, सीमा शुल्क विभाग से भी याचिका का बचाव करने को कहा गया था। वहीं, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क के अधिकारी प्रतिबंध से संबंधित अधिसूचना कोर्ट में पेश नहीं कर पाए।

इसके बाद कोर्ट ने इसे अस्तित्वहीन मान लिया और खान को यह पुस्तक आयात करने की अनुमति दे दी। पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता उक्त पुस्तक के संबंध में कानून के अनुसार सभी कार्रवाई करने का हकदार होगा।” दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सैटेनिक वर्सेज के आयात पर 36 साल से लगा प्रतिबंध खत्म हो गया है। अब इसे कोई भी आयात कर सकता है। इसके बाद स्पष्ट हो गया था कि अब यह किताब भारत में आ सकती है। यह किताब अब दिल्ली के किताब विक्रेताओं के पास आ गई है। किताब का दाम ₹1999 है।

अब मुस्लिम फिर कर रहे विरोध

मुस्लिमों ने इस किताब की भारत में एंट्री को लेकर फिर से विरोध जताया है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द उत्तर प्रदेश के लीगल एडवाइजर मौलाना काब रशीदी ने कहा है कि इस किताब में ईशनिंदा की गई है और इसकी बिक्री मुस्लिमों को भड़काने का प्रयास है। उन्होंने कहा है कि मुस्लिम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। रशीदी ने इस किताब को दोबारा बैन करने की माँग की है। एक और मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा है कि कोई भी मुस्लिम इस किताब को दुकानों में देख कर बर्दाश्त नहीं करेगा।

क्रिसमस पर 17+ ईसाई घरों में बांग्लादेशी इस्लामी भीड़ ने लगाई आग, प्रार्थना करने चर्च गए थे सभी लोग: पीड़ित बोले- पहले से मिल रही थी धमकियाँ

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे। हाल में क्रिसमस के मौके पर ईसाई समुदाय के 17-19 घरों को जला दिया गया। घटना बंदरबन के लामा उपजिला की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला 25 दिसंबर को शाम के वक्त हुआ। उस समय गाँव के लोग दूसरे गाँव में स्थित चर्च में प्रार्थना करने गए थे। उसी दौरान इस कृत्य को अंजाम दिया गया। इस हमले 17-19 घर पूरी तरह नष्ट हो गए। पीड़ितों में से एक गुंगामणि त्रिपुरा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे घर पूरी तरह जलकर राख हो गए हैं। कुछ भी नहीं बचा।”

जानकारी के मुताबिक, बुधवार को रात करीब 12:30 बजे पड़ोसी गाँव में क्रिसमस की प्रार्थना करने गए ग्रामीणों ने अपने गाँव में आग जलती देखी और फौरन अपने घरों की ओर भागे, लेकिन जब तक वह पहुँचते तब तक सारे घर जलकर खाक हो चुके थे। गाँव के सभी घर बांस और घास-फूस से बने थे, इसलिए घर जल्दी जल गए।

ईसाई समुदाय के लोगों ने बताया कि इस घटना में उनका 15 लाख टका (बांग्लादेशी करंसी) से ज्यादा का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें कुछ समय से धमकियाँ मिल रही थीं और इसीलिए वे चर्च जाते समय गांव में किसी को भी नहीं छोड़ते थे। 25 दिसंबर की रात जब वो लोग गए तो इस घटना को अंजाम दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री के रूप में चावल, दाल, तेल और कंबल उपलब्ध कराए हैं। मगर, पीड़ितों की चिंता ये है कि वो लोग रहेंगे कहाँ।

बता दें कि त्रिपुरा समुदाय के ये ईसाई लोग लामा सराय के एसपी गार्डन में रहते थे। गार्डन हसीना सरकार में बड़े अधिकारी रहे बेनजीर अहमद का है। 5 अगस्त को तख्तापलत के लोग बेनजीर के परिवार के लोग ये जगह छोड़ गए और यहाँ त्रिपुरा ईसाई समुदाय के लोग आ गए। उन्होंने दावा किया कि उनके पूर्वज यहीं रहा करते थे, लेकिन कब्जे के बाद उन्हें जाना पड़ा था।

हिंदू महिला को अगवा कर पैरों में बाँध दी लोहे की जंजीर, जबरन मुस्लिम बनाकर करता था रेप: असम पुलिस ने मुनाफ अली को पकड़ा, प्रॉपर्टी के लिए करता था प्रताड़ित

असम के कछार जिले में मुस्लिम युवक द्वारा एक हिन्दू महिला को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। जनजातीय समुदाय की इस पीड़िता के पैरों में लोहे की जंजीर बाँध दी गई थी। उसे लगातार प्रताड़ित करके इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके मुनाफ अली नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना का हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 महीने पहले स्थानीय लोगों द्वारा बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को मुनाफ अली के घर में किसी हिन्दू महिला के बंधक होने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि महिला को जंजीरों में बाँध कर बेरहमी से मारा-पीटा जाता है। इस जानकारी की तस्दीक बजरंग दल के सदस्यों ने करवाई तो सूचना सही पाई गई। इसके बाद मामले की जानकारी फ़ौरन पुलिस को दी गई।

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर पीड़िता को जंजीरों से मुक्त करवाया और मुनाफ अली को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता की प्रताड़ना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में महिला के बाएँ पैर में लम्बी जंजीर बँधी दिख रही है। जंजीर इतनी लम्बी थी कि पीड़िता अधिकतम घर के कुछ हिस्सों में ही पहुँच सकती थी।

हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि महिला का लगभग 12 साल पहले मुनाफ अली ने अपहरण कर लिया था। तब से उसे बंधक बनाकर रखा गया था। जानकारी के मुताबिक, मुनाफ अली ने पीड़िता को डरा-धमका कर इस्लाम कबूल करवा कर निकाह कर लिया था। निकाह के बाद मुनाफ अली बार-बार महिला को उसकी पुश्तैनी जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाता था।

जब पीड़िता मना करती थी तो उसकी बुरी तरह से पिटाई की जाती थी। विगत 12 वर्षों में आरोपित ने पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इस वजह से पीड़िता ने 5 बच्चों को जन्म दिया। ये बच्चे अभी मुनाफ अली के भाई के कब्ज़े में हैं। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मुनाफ अली ने उसके साथ बहुत अत्याचार किया है। उसने उसकी गला घोंटकर मारने का भी प्रयास किया था।

पीड़िता का कहना है कि वह कहीं भाग न जाए इसके चलते मुनाफ अली उसके पैरों में जंजीर बाँध कर रखता था। एक दिन महिला ने शोर मचा कर अपने पड़ोसियों से मदद माँगी थी। पड़ोसियों ने हिन्दू संगठनों से सम्पर्क किया और आखिरकार ये मामला पुलिस तक पहुँच गया। बजरंग दल के सदस्यों ने वैदिक अनुष्ठान से पीड़िता की हिन्दू धर्म में घर वापसी करवाई है।

जम्मू में दंगा भड़काने के लिए मरे हुए गाय-बछड़ों को हिंदू बहुल इलाकों में देते थे फेंक, पुलिस ने मुख्तियार, तारिक और आरिफ को पकड़ा

जम्मू कश्मीर में ऐसे गोतस्कर को पुलिस ने पकड़े हैं, जो गायों को मार करके हिन्दू इलाकों में फेंकते थे। यह इस काम के जरिए लोगों को भड़काना और दंगा करवाना चाहते थे। पुलिस ने इस गिरोह के 3 लोग पकड़े हैं। इन्होने जम्मू कश्मीर के नगरोटा में हाल ही में यही करने का प्रयास किया, जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी हुई।

पुलिस की गिरफ्त में आए इन तीनों गोतस्करों का नाम मुख्तियार अहमद, तारिक हुसैन और आरिफ है। यह तीनों लम्बे समय से गोतस्करी करते थे। गोतस्करी के लिए यह क्रूरता से गोवंशों को ट्रकों में भरते थे। क्रूरता के चलते जो गोवंश पहले ही मारे जाते थे, उनको यह गोतस्कर हिन्दू बहुल इलाकों में फेंक दिया करते थे।

मंगलवार (24 दिसंबर, 2024) को भी इन तीनों ने इसी साजिश को अंजाम देने का प्रयास किया था। इन्होंने नगरोटा के जगटी-राजपुर मार्ग पर गोवंश फेंके थे। मंगलवार की सुबह इसी राह से कुछ स्थानीय लोग सड़क से जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें बदबू आने लगी। आसपास के लोगों ने पास जा कर देखा तो खाई में गाय और बछड़ा मृत अवस्था में पड़े मिले।

कुछ ही देर में यह बात आसपास के इलाकों में फ़ैल गई। स्थानीय लोगों के साथ हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य भी घटनास्थल पर पहुँचने लगे। ये सभी घटना पर नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। जब यह जानकारी पुलिस को मिली तो स्थानीय SHO परवेज सज्जाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे।

लोगों के आक्रोश को देखते हुए उन्होंने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए 24 घंटों का समय माँगा। लोगों को समझा कर वापस भेजा गया। आरोपितों की पहचान के लिए इलाके के CCTV फुटेज खँगाले गए और अन्य सबूतों को जुटाया गया। एक फुटेज में रजिस्ट्रेशन नंबर 2195 का एक ट्रक चिन्हित हुआ। इसी को आधार बना कर पुलिस ने अपनी जाँच आगे बढ़ाई।

पुलिस ने ट्रक के जरिए हुई पड़ताल के आधार पर इन तीनों को दबोच लिया। इनमें से मुख्तियार कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है जबकि आरिफ और तारिक का घर जम्मू के रियासी क्षेत्र में है। इन सभी पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की पूछताछ में इन तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने इनके ट्रक को भी सीज कर दिया है।

पुलिस की पूछताछ में इन्होने बताया है कि 2 महीने पहले भी इन्ही तीनों ने मिल कर जगटी इलाके में एक मृत गाय फेंक दी थी। तब नाराज हिन्दुओं ने इस घटना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया था। इन्होने आगे बताया कि गोवंश फेंक कर वह हिन्दू-मुस्लिम दंगा भड़काना चाहते थे।

वोट के लिए BJP नेता प्रवेश वर्मा के घर पर महिलाओं के बीच बाँटे गए ₹1100 का लिफाफा: दिल्ली की CM ने किया जो दावा, जानिए क्या है उसकी सच्चाई

विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा पर संगीन आरोप लगाए हैं। आतिशी का दावा है कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश वर्मा के आवास पर महिलाओं को ₹1100 के लिफाफे बाँटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का वोटर कार्ड चेक करके उन्हें पैसे दिए गए। आतिशी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई और दिल्ली पुलिस को प्रवेश वर्मा के घर पर तुरंत छापा मारना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्मा के घर पर करोड़ों की नकदी मौजूद है।

प्रवेश वर्मा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि यह रकम उनकी संस्था ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान संस्था’ के जरिए जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए दी जा रही है। वर्मा ने बताया कि यह संस्था उनके पिता ने 25 साल पहले स्थापित की थी, और इसके तहत उन्होंने भूकंप पीड़ितों के लिए मकान, कारगिल शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता और कई सामाजिक कार्य किए हैं। वर्मा ने कहा, “मैंने इन महिलाओं से उनकी समस्याएँ सुनीं। वे बिना पेंशन, राशन कार्ड और स्वास्थ्य सुविधाओं के परेशान हैं। इसीलिए मैंने अपनी संस्था के माध्यम से हर महीने उनकी मदद करने की योजना बनाई।”

बता दें कि प्रवेश वर्मा के आवास पर बड़ी संख्या में महिलाओं को एक कार्ड के साथ लिफाफे में 1100 रुपए कैश देने की खबरें सामने आई। प्रवेश साहिब सिंह की ओर से जो कार्ड महिलाओं को दिया गया है उस पर ऊपर लाडली योजना लिखा है। इस पर लाभार्थी की फोटो, नाम, पिता या पति का नाम, लाभार्थी क्रमांड और हस्ताक्षर है। नीचे लिखा गया है- नारी का सम्मान, राष्ट्रीय स्वाभिमान, 20 विंडरसर पैलेस, नई दिल्ली। कार्ड के ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा की तस्वीर भी लगी है और लिखा गया है- हमारे प्रेरणास्त्रोत।

वर्मा ने आप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह महिलाओं को शराब नहीं बाँट रहे, जैसा कि दिल्ली सरकार ने पिछले 11 वर्षों में किया है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और आतिशी उनकी संस्था के काम को सराहने के बजाय उसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं।

इस बीच, आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से प्रवेश वर्मा की गिरफ्तारी की माँग की है। आतिशी ने आरोपों को जोर देकर कहा कि बीजेपी दिल्ली में धनबल और बाहुबल का सहारा लेकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। आप ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया और वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। केजरीवाल ने भी प्रवेश वर्मा पर हमला बोला था।

विवाद के केंद्र में प्रवेश वर्मा का सरकारी आवास ’20 विंडसर प्लेस’ है, जहाँ कथित रूप से महिलाओं को बुलाकर पैसे बाँटे जा रहे हैं। वर्मा ने इसे झूठा आरोप बताते हुए कहा कि उनकी संस्था हमेशा से गरीबों की मदद के लिए काम करती आई है। उन्होंने कहा कि यह सारा विवाद केवल उनका नाम खराब करने और चुनावी फायदा उठाने के लिए किया जा रहा है।

बहरहाल, दिल्ली की राजनीति में यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। एक तरफ आप इसे चुनाव में धांधली का प्रयास बता रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे जरूरतमंदों की मदद का एक प्रयास करार दे रही है।

जो मजदूर से बना ‘लॉटरी किंग’, TMC-DMK को दिए ₹1000 करोड़… उसके खिलाफ जाँच में सुप्रीम कोर्ट ने ED के बाँधे हाथ: कहा- मोबाइल-लैपटॉप से डाटा नहीं ले सकते

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आदेश दिया है कि वह फ्यूचर गेमिंग और उसके मालिक पर छापे के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से डाटा ना लें। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ED फ्यूचर गेमिंग, उसके मालिक सैंटियागो मार्टिन, उसके परिजन और कर्मचारियों से इकट्ठा किए गए फोन-लैपटॉप समेत बाकी डिजिटल डिवाइस से सबूत नहीं जुटा पाएगी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने फ्यूचर गेमिंग की तरफ से दायर एक याचिका पर दिया है। यह आदेश जस्टिस अभी एस ओका और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने 13 दिसम्बर, 2024 को याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।

ED ने नवम्बर, 2024 में ही सैंटियागो मार्टिन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में ED को ₹12 करोड़ से अधिक कैश मिला था। ED ने इस दौरान मार्टिन, उसकी कम्पनी के कर्मचारियों, परिजनों समेत बाकी लोगों से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इकट्ठा किए थे। इसमें 17 मोबाइल फोन थे और बाकी कई लैपटॉप थे।

ED ने इस दौरान कई हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और ईमेल का डाटा भी लिया था। इन्हीं डिवाइस से ED डाटा लेकर करके फ्यूचर गेमिंग के खिलाफ सबूत इकट्ठा करती। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ना वह इन डिवाइस का डाटा एक्सेस कर पाएँगे और ना ही उसको अपने पास कॉपी कर पाएँगे।

ED ने सैंटियागो मार्टिन पर यह छापेमारी मेघालय पुलिस द्वारा दर्ज एक मामले के बाद की थी। मेघालय में दर्ज इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि फ्यूचर गेमिंग ने राज्य में अवैध तरीके से लॉटरी का धंधा कब्जा लिया। ED ने 6 राज्यों में यह छापेमारी की थी।

इंडियन एक्सप्रेस को ED के कुछ अधिकारियों ने बताया है कि इससे उनकी जाँच पर थोड़ा बहुत फर्क जरूर पड़ेगा लेकिन उनके पास और भी कई सबूत हैं। गौरतलब है कि ED फ्यूचर गेमिंग समेत बाक़ी मामलों में भी लैपटॉप और फोन आदि जब्त करती आई है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जाँच पर सुप्रीम कोर्ट में पहले ही 3 याचिकाएँ पड़ी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सैंटियागो मार्टिन वाली याचिका को इन्हीं याचिकाओं के साथ सम्मिलित करने का आदेश दिया गया है। सैंटियागो मार्टिन और बाकी लोगों के खिलाफ इस मामले में जारी किए गए समन पर भी रोक लगाई गई है। इससे पहले भी सैंटियागो मार्टिन के खिलाफ जाँच हो चुकी है। सैंटियागो मार्टिन की फ्यूचर गेमिंग का नाम मार्च, 2024 में चर्चा में आया था।

दरअसल, मार्च में चुनाव आयोग ने उन कंपनियों के नामों का ऐलान किया था, जिन्होंने राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए चुनावी बॉन्ड खरीदा था। इनमें सबसे अधिक बॉन्ड फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज कम्पनी ने खरीदा था। इसका मालिक सैंटियागो मार्टिन है। इस कम्पनी ने 12 अप्रैल 2019 से 24 जनवरी 2024 के बीच ₹1,368 करोड़ का राजनीतिक चंदा दिया था।

सैंटियागो मार्टिन की फ्यूचर गेंग ने इस ₹1368 करोड़ में से ₹542 करोड़ तृणमूल कॉन्ग्रेस, ₹503 करोड़ DMK और ₹150 करोड़ से अधिक का चुनावी चंदा YSR कॉन्ग्रेस को दिया था। सैंटियागो मार्टिन को लॉटरी किंग कहा जाता है। उसकी कम्पनी का बड़ा साम्राज्य है।

क्या करती है फ्यूचर गेमिंग एंड होटल्स?

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज की स्थापना वर्ष 1991 में सैंटियागो मार्टिन ने की थी। यह कम्पनी तमिलनाडु में शुरू हुई थी, लेकिन जब यहाँ लॉटरी बंद हो गई तो मार्टिन ने अपना अधिकांश धंधा केरल और कर्नाटक में चालू कर दिया।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में रहने वाला सैंटियागो मार्टिन ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ लॉटरी ट्रेड एंड अलाइड इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष हैं। उसकी इस कम्पनी में 1000 से अधिक लोग काम करते हैं। फ्यूचर गेमिंग वर्तमान में 13 राज्यों में लॉटरी चलाती है, इन राज्यों में अभी भी लॉटरी को कानूनी मान्यता है। यह राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और सिक्किम हैं।

मार्टिन की यह कम्पनी ‘डियर लॉटरी’ नाम से लॉटरी चलाती है। उसकी कम्पनी फ्यूचर गेमिंग दक्षिण भारत में अपनी एक अन्य कम्पनी मार्टिन कर्नाटक और पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी एक अन्य कम्पनी सिक्किम लॉटरी के माध्यम से धंधा करती है। बताते हैं कि कभी सैंटियागो मार्टिन म्यांमार के यंगून में मजदूरी करता था। बाद में उसने यह साम्राज्य खड़ा किया। उसके कई पार्टियों से संबंध हैं।

CPI(M) से सैंटियागो मार्टिन का गठजोड़

सैंटियागो मार्टिन ने वर्ष 2007 में कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र देशाभिमानी को ₹50 लाख के चार चुनावी बॉन्ड के माध्यम से ₹2 करोड़ का चंदा दिया था। जब यह मामला खुला तो पार्टी लोगों के निशाने पर आ गई। पार्टी की छवि बचाने के लिए महासचिव प्रकाश करात ने पैसा स्वीकार करने के बाद उसे लौटाने का निर्णय लिया था।

वर्ष 2016 में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के करीबी माने जाने वाले एक वरिष्ठ वकील एमके दामोदरन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर एक मामले में सैंटियागो मार्टिन की तरफ से केस लड़ा था। मुख्यमंत्री विजयन के कानूनी सलाहकार एमके दामोदरन लॉटरी घोटाले के सिलसिले में मार्च 2018 में सैंटियागो मार्टिन के लिए कोर्ट गए थे।

DMK से भी संबंध

DMK को चन्दा देने के अलावा अक्टूबर 2010 में, तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन ने केरल हाई कोर्ट में सैंटियागो मार्टिन का केस लड़ा था। जब इस पर केरल सरकार ने ऐतराज किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री करूणानिधि ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और रमन को इस मामले की पैरवी छोड़नी पड़ी थी।

फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज के मालिक सैंटियागो मार्टिन ने ₹50 करोड़ रुपये खर्च करके करुणानिधि की 75वीं फिल्म के निर्माण में मदद की। उसने इसमें स्क्रिप्ट भी लिखी थी। यह भी कहा जाता है कि ‘इलैगनन‘ नाम की एक फिल्म 3 साल तक अधर में लटकी रही, इसके बाद मार्टिन ने इसे पुनः चालू किया। इस फिल्म की कहानी लिखने के लिए करूणानिधि को ₹45 लाख का भुगतान किया गया था।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, “सिनेमा के बड़े नामों का कहना है कि इसके बदले में उसे (सेंटिआगो) को बिना कोई समस्या के अपना लॉटरी का धंधा चलाने दिया जाता है।” जनवरी 2023 में यह रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सैंटियागो मार्टिन के दामाद आधव अर्जुन को DMK ने 2024 लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी चुनावी रणनीतिकार की भूमिका में नियुक्त किया था।यह भी बताया जाता है कि अर्जुन के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री दामाद सबरीसन के साथ अच्छे सबंध हैं।

कॉन्ग्रेस और TMC से भी जुड़े हैं तार

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी सितंबर 2010 में केरल हाई कोर्ट में घोटाले के दागी सैंटियागो मार्टिन का केस लड़ा था। हालाँकि, उन्हें कम्युनिस्टों के विरोध के चलते मामले से नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। तक कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जनार्दन द्विवेदी ने कहा था, “पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, भले ही सिंघवी इस मामले से हटने की घोषणा की है।”

‘पत्रकार’ रोहिणी सिंह ने सितम्बर 2021 में एक ‘क्षेत्रीय दल’ और एक लॉटरी माफिया के बीच एक गठजोड़ की तरफ इशारा किया था।

इसके बाद दिसंबर, 2021 में उन्होंने ट्वीट किया, ”अडानी और अम्बानी को भूल जाओ। लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन पर नजर रखो और उस पार्टी पर नजर रखो जिसे वह फंड करता है। देश की राजनीति में आगे का समय बड़ा दिलचस्प है।’

G2G न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सैंटियागो की कम्पनी फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज ने वर्ष 2017 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल में ₹12000 करोड़ GST दिया था। इस न्यूज रिपोर्ट में कम्पनी की वेबसाइट को आधार बनाते हुए लिखा गया था, “फ्यूचर गेमिंग देश के बड़े करदाताओं में से एक है। हर बार समय पर बड़ी मात्रा में करों का भुगतान करके, एक मजबूत देश के निर्माण में इसका योगदान प्रशंसनीय है।” सैंटियागो मार्टिन की कंपनी कंपनी लम्बे समय से पश्चिम बंगाल में ‘डियर लॉटरी’ चला रही है।

नवंबर 2022 में, सीबीआई ने बताया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के मंत्री अनुब्रत मंडल और उनकी बेटी ने तीन साल में 5 बार यह लॉटरी जीती है। TMC को सबसे अधिक चन्दा फ्यूचर गेमिंग से ही मिला।

संभल की मुस्लिम हिंसा में जिस DSP को लगी थी गोली, उन्हें CM योगी की धौंस दे इंटरव्यू के लिए हड़का रहा था यूट्यूबर मशकूर रजा: गिरफ्तारी के बाद लंगड़ाते हुए चलते दिखा

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस ने सोमवार (23 दिसंबर 2024) को फोन पर आधिकारियों को हड़काने वाले एक युवक को गिरफ्त्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपित मशकूर रज़ा ट्रांसपोर्ट का काम करने के साथ-साथ एक यूट्यूब चैनल चलाता है। संभल हिंसा में दंगाइयों के हमले में घायल डिप्टी एसपी अनुज चौधरी को मशकूर ने अर्दब में लेने का प्रयास किया था। इस दौरान उसने CM योगी आदित्यनाथ और UP के DGP का नाम लेकर धौंस जमाना चाहा था।

मीडिया से बात करते हुए संभल कोतवाली के थाना प्रभारी ने मशकूर पर हुई कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित पर शांतिभंग की धाराओं में एक्शन लिया गया है। बकौल SHO, मशकूर DSP अनुज चौधरी पर इंटरव्यू का दबाव बना रहा था। जब कई बार मना किया गया तो मशकूर ने DSP को धमकी दी। इसके बाद उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। मामले में आगे की जाँच जारी है।

गिरफ्तारी के बाद मशकूर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो कोतवाली संभल कैम्पस का है, जिसमें मशकूर लंगड़ाता हुआ चल रहा है और एक पुलिसकर्मी उसे सहारा दे रहा है। इसी वीडियो में मशकूर अपने किए पर पछतावा जता रहा है। उसने कहा, “मेरा यूट्यूब चैनल था, इसीलिए मैंने सोचा। वायरल होने के नाते। फेमस होने के लिए। बहुत बड़ी गलती हो गई सर मुझ से।” इस पर साथ चल रहे कांस्टेबल ने पूछा, “हो गए फेमस?”

क्या कहा था मशकूर ने

मशकूर मूल रूप से मुरादाबाद के मैनाठेर थानाक्षेत्र में पड़ने वाले गाँव ताहरपुर का रहने वाला है। संभल हिंसा के बाद वह DSP अनुज चौधरी को लगातार इंटरव्यू के लिए कॉल कर रहा था। अनुज चौधरी के बार-बार मना करने पर उसने पहले खुद को पत्रकार और बाद में भाजपा का सदस्य बताया। सख्ती से बात करने पर मशकूर इन दोनों दावों से मुकर कर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगा।

इस बातचीत का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मशकूर ने अनुज चौधरी से कहा, “तुम इतने बड़े दादा हो क्या जो हर किसी को एक डंडे से हाँकोगे… गोली चलाओगे, गोली मारोगे ?” जवाब में अनुज चौधरी ने कहा था कि अब तेरा असली दर्द निकल कर बाहर आया। मशकूर आगे बोला, “आप कहो तो मैं CM साहब से फोन करा दूँ। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से? किससे कहलवाना होगा? SP साहब से कहलवा दूँ? DGP साहब से कहलवा दूँ?”