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नए साल के पहले दिन अमेरिका में आतंकी हमला, भीड़ में गाड़ी घुसा लोगों को कुचला: पुलिस-बचाने वालों पर की फायरिंग, 12 की मौत

अमेरिका के लुसियाना में नए साल का जश्न मना रहे लोगों पर आतंकी हमला हुआ है। हमला करने वाले ने एक मिनी ट्रक को भीड़ में घुसा दिया और लोगों को कुचल दिया। इसके बाद ट्रक ड्राईवर ने गोलीबारी भी की। रिपोर्ट लिखे जाने तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 30 के घायल होने की सूचना है। घटना बुधवार (1 जनवरी, 2025) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना लुसियाना के न्यू ऑरलियंस शहर की है। यहाँ बोरबन स्ट्रीट पर जमा हो कर बुधवार की सुबह सैकड़ों लोग साल 2025 का स्वागत कर रहे थे। इसी दौरान एक मिनी ट्रक भीड़ में से लोगों को कुचलते हुए घुस गया। कोई कुछ समझ पाता इस से पहले ट्रक के नीचे कई लोग दब गए।

इसके बाद यह ट्रक रुक गया। जब तक लोग हादसे में घायल हुए कुचल चुके लोगों की मदद के लिए दौड़े तब तक ट्रक ड्राइवर उतर कर लोगों पर गोलियाँ बरसाने लगा। इसमें भी कई लोग मारे गए। उसने 2 पुलिसवालों पर भी गोलियाँ बरसाई। रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रक ड्राइवर भी मारा गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी पुलिसकर्मी की गोली से मरा या खुद ही गोली मार ली।

इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में लोगों को हमले से बच कर भागते और चीखते-चिल्लाते देखा जा सकता है। हमले की सूचना के बाद पुलिस और फायर डिपार्टमेंट समेत बाकी एजेंसियाँ पहुँच गए थे। घटनास्थल पर FBI भी पहुँच गई है।

इसे आतंकी हमला बता कर शहर की मेयर ने लोगों से फिलहाल सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वो जाँच एजेंसियों सहित व्हाइट हॉउस के सम्पर्क में हैं। पुलिस ने हमले में इस्तेमाल किए गए ट्रक को भी जब्त कर लिया है। FBI द्वारा की गई वाहन की जाँच के दौरान उसमें बम बरामद हुआ है। इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट कर दिया गया।

अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 30 से अधिक लोग घायल हैं। इनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है जिसकी वजह से मृतकों की तादाद में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। बताते चलें कि इस से पहले वाहनों को हथियार बना कर फ़्रांस और जर्मनी में भी हमले हो चुके हैं। ऐसे हमलों को ‘लोन वुल्फ अटैक’ कहा जाता है।

नासर पठान वाली आईडी से महाकुंभ में 1000 हिंदुओं के सर कलम की धमकी: इंस्टाग्राम पर मैसेज में कहा- मा@र9द… ब्लास्ट होगा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ में हिन्दुओं के सर कलम करने और बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई है। यह धमकी नासर पठान नाम की एक इंस्टाग्राम आईडी से दी गई है। आईडी चलाने वाला शख्स खुद को कट्टर मिया और बिहार निवासी बता रहा है। सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चल रहा है।

एक्स पर वायरल एक पोस्ट के अनुसार, नासर पठान नाम से चल रही इस आईडी से एक और व्यक्ति को एक मैसेज भेजा गया। यह मैसेज इंस्टाग्राम पर भेजा गया। इसमें लिखा गया, “रे मा@र9@ हिन्दू तुम सब का सर कलम करूँगा इंशाअल्लाह। तुम लोग का कुंभ मेला आ रहा है ना उसमें देखो कम से कम 1000 सर कलम होगा। ऐसा ब्लास्ट होगा, अल्लाह हू अकबर।”

यह आईडी नासर पठान के नाम से बनी है जबकि इसका यूजर नेम नासर कट्टर मिया (Nasar_kattar_miya) है। आईडी चलाने वाले शख्स से जब उसका पता पूछा गया तो उसने धमकाते हुए खुद को पूर्णिया के भवानीपुर गाँव का निवासी बताया। उसने यह भी कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

इसके बाद इस आईडी के स्क्रीनशॉटस को एक्स (पहले ट्विटर) पर शेयर किया गया। इन स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए प्रयागराज पुलिस से कार्रवाई की माँग की गई है। इसके अलावा बिहार पुलिस से भी इस व्यक्ति पर कार्रवाई के लिए लगातार माँग की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में इस मामले का पुलिस ने संज्ञान लेकर आईडी चलाने वाले की जानकारी जुटाना चालू कर दिया है। पुलिस आईडी किस नम्बर और इमेल से बनाई गई, इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस इसके बाद कार्रवाई करेगी।

महाकुंभ को लेकर इससे पहले खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने भी धमकी दी थी। पन्नू ने दावा किया था कि वह इस महाकुंभ में 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी, 2025 को हमला करेगा। पन्नू ने दावा किया था कि यह हमला पीलीभीत में मारे गए खालिस्तानी आतंकियों की मौत का बदला होगा।

महाकुंभ में आए साधु संतो को इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ की सुरक्षा के लिए 35,000 से भी अधिक पुलिस और होमगार्ड के जवानों को तैनात किया है। महाकुंभ क्षेत्र के भीतर 56 चौकियाँ बनाई गई हैं। पूरा क्षेत्र कैमरे से लैस है।

सजग-जागृत-समृद्ध हिंदू और अखंड भारत: 1 जनवरी 2025 का संकल्प और बाकी 364 दिन भी यही

गणित में समय-दूरी-गति वाला सवाल सबने बनाया होगा। बना कर सही उत्तर मिलने पर इठलाए भी होंगे। अफसोस यह स्कूल तक ही चलता है। आगे की पढ़ाई करने वालों के लिए नोबेल विजेता हाइजनबर्ग भाई साहब ने यह खुशी भी छीन ली। अनिश्चितता का सिद्धांत दे दिया।

भौतिकी की शब्दावली में फँसने के बजाय मोटामोटी यह समझिए कि ‘एक समय में एक ही काम’ सटिक ढंग से हो सकता है, यही है हाइजनबर्ग की अनिश्चितता का सिद्धांत। जिस समय जो कार्य कर रहे हैं, ठीक उसी समय कोई और कार्य 100% सफलता के साथ हो जाए – यह असंभव है।

हर हिंदू हाइजनबर्ग के इसी सिद्धांत पर चले, यही अभी के समय की माँग है। हिंदू सिर्फ और सिर्फ हिंदू होकर सोचे, शत्रु-शक्तियों ने यही माहौल पैदा कर दिया है। जाति-भाषा-बोली-शैली-क्षेत्र-राज्य-देश के नाम पर आपको बाँटने का षड्यंत्र रचा जा चुका है, आपको हिंदू बने रहना है। इससे ध्यान भटकने पर असफलता की गारंटी है।

विकासशील से विकसित होते हिंदू पर हमले और तेज होंगे। समाज पर षड्यंत्र का असर और भी घातक होगा अगर बचाव हिंदू से परे होकर करने की रणनीति अपनाई तो। भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है, कोई नहीं जानता। भूतकाल से लेकिन यह सबक हमें बार-बार मिला है कि जब-जब हम हिंदू टुकड़े-टुकड़े बँट कर सोचे हैं, प्रतिकार/व्यवहार किए हैं – हम मुँह की खाए हैं, गुलाम तक बने हैं।

हर एक हिंदू को सजग रहना होगा। सजग रहेंगे तभी जागृत वाली प्रक्रिया में जाएँगे। जागृति आएगी तो वो समृद्धि की ओर ले जाएगी। नागरिक के तौर पर हर ईकाई की समृद्धि ही परिवार-समाज-गाँव-देश की उन्नति का रास्ता तैयार करेगी। विकसित भारत का सपना नागरिक विकास की कड़ी-दर-कड़ी से जुड़ा हुआ है, इस बात को हम सभी को गाँठ बाँध लेना चाहिए।

किसी RSS, किसी BJP ने अखंड भारत का सपना देखा, इसलिए आप भी मत देखिए। वो सिर्फ दिवास्वप्न होगा। सपना देखिए क्योंकि यह सभी हिंदुओं के अस्तित्व की लड़ाई है। आप सपना देखिए क्योंकि आपके निर्माण से अखंड भारत का निर्माण होगा। आपकी नींव जितनी मजबूत होगी, अखंड भारत उतनी तेजी से हकीकत में बदलेगा।

लेकिन कैसे? ऊपर दिए हाइजनबर्ग के उदाहरण से। रास्ता यही है। मंदिर जाकर पूजा कर लेने भर से आप हिंदू हो गए, इस भूलावे से बाहर आना होगा। समय की माँग इससे अधिक है।

दैनिक जीवन, सोशल मीडिया या फिर कहीं किसी के साथ बात-व्यवहार-प्रतिकार – हर समय आपको हिंदू बने रहना है – पढ़िए तो हिंदू बन कर, लड़िए तो हिंदू होकर। तन-मन-धन… विकसित हो रहे हिंदू समाज को इन तीनों की जरूरत है।

सजग-जागृत-समृद्ध हिंदू की आवश्यकता क्यों है अभी? पहले नहीं थी? आगे नहीं होगी? उत्तर है – पहले भी थी। हमने उसके उलट काम किया। फलस्वरूप हम गुलाम हुए। अभी पहले के मुकाबले जरूरत ज्यादा है, दुश्मन क्योंकि शातिर है, कुछ घर के भेदी भी हैं। सबसे बचते-लड़ते हुए आगे जाना है।

भविष्य में तो हम हिंदुओं को और भी इसकी जरूरत पड़ेगी। क्योंकि तब हमले डायरेक्ट होंगे। लड़ाई डायरेक्ट ताकत की होगी। इसलिए पहले की गलतियों से सीखते हुए, भविष्य में और मजबूती से डटे रहने के लिए… वर्तमान में हमें हिंदू बने रहना है, सजग रहना है, समृद्धि की ओर बढ़ते जाना है।  

हिंदुओं के सामने वर्तमान में जो लड़ाई है, वो किसी तीर-धनुष, गोली-बंदूक या मिसाइल से नहीं जीती जा सकती। हिंदू सिर्फ हिंदू होकर सोचे-जिए-बोले-लड़े, तभी हम सशक्त भी होंगे, अखंड भारत का हिस्सा भी होंगे।

  • बांग्लादेशी/रोहिंग्या घुसपैठियों की खबरें नहीं मिले।
  • इस्लामी मुल्कों में रह रहे हिंदू भाइयों-बहनों-माताओं की स्थिति सुधरे।
  • इस्लामी मुल्कों की ज्यादतियों से तंग आकर भारत भाग आए लोगों, विस्थापितों की भाँति यहाँ रह रहे लोगों को नागरिकता मिलने में और भी आसानी हो।
  • न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आए, ऐसा कोई सिस्टम विकसित हो। आम लोगों को न्यायालय से न्याय की जगह जो नाउम्मीदी मिलती है, वो दूर हो।
  • अयोध्या में जैसे रामलला आ गए, वैसे ही काशी-मथुरा में भी हिंदू समाज अपने आराध्य को बिना रोक-टोक देख पाएँ।
  • ईसाई मिशनरियों का काला-जादू और षड्यंत्र हिंदुओं के धर्मांतरण से पहले ही छू-मंतर हो जाए।
  • लव-जिहाद और इस्लामी कंवर्जन माफिया के जाल में कोई बहन-बेटी-भाई न फँसे।
  • जो भाई-बहन कभी किसी कारण से सनातन से दूर चले गए, उन सभी की घर-वापसी हो।

हिंदुओं और हिंदुस्तान का उत्थान बँटने से नहीं होगा। न ही यह एक दिन का संकल्प है। 1 जनवरी 2025 हो या 31 दिसंबर 2025 या अगली सदी… हम हिंदुओं को हिंदू बन कर ही रहना होगा!

मणिपुर पर CM बिरेन सिंह ने दिखाया कॉन्ग्रेस को आईना, 1992-97 के बीच हुई सैकड़ों मौत को लेकर माँगा जवाब: कहा- आपके पाप ही आज के लिए जिम्मेदार

मणिपुर में हिंसा की हालत को लेकर पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही कॉन्ग्रेस को मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने आईना दिखाया है। बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को जवाब देते हुए बताया है कि कैसे कॉन्ग्रेस ने राज्य में लगातार म्यांमार के घुसपैठियों को बसने दिया और साथ म्यांमार में अड्डा बनाकर भारत में आतंक फैलाने वाले आतंकी समूहों से भी समझौते किए। उन्होंने कॉन्ग्रेस से कहा है कि वह राज्य की स्थिति पर राजनीति करना छोड़ कर मुद्दे सुलझाने में सहायता करे।

मणिपुर की स्थिति कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान क्या थी, यह बताते हुए बिरेन सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “आप और बाकी सारे लोग जानते हैं कि में मणिपुर के आज उथल पुथल में होने का कारण कॉन्ग्रेस के अतीत के पाप हैं। जैसे कि मणिपुर में बर्मी (म्यांमार) शरणार्थियों को लगातार बसाना और म्यांमार के लड़कों के साथ SOO समझौते पर हस्ताक्षर करना, इसकी अगुवाई पी चिदंबरम ने भारत के गृह मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में की थी।”

बिरेन सिंह ने आगे लिखा, “आज मैंने जो माफी माँगी है, वह उन लोगों के लिए है जो जिन्हें इस हिंसा जो विस्थापित हो गए हैं और बेघर हुए हैं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मेरी यह अपील थी कि जो हुआ उसे भोऊ जाएँ और माफ़ कर दें। हालाँकि, आप इसमें भी राजनीति घसीट लाए।”

इसके बाद बिरेन सिंह ने जयराम रमेश को याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस के राज के दौरान मणिपुर जलता रहा था। उन्होंने लिखा, “मैं आपको याद दिला दूँ कि मणिपुर में नागा-कुकी संघर्ष के चलते लगभग 1,300 लोग मारे गए और हज़ारों लोग बेघर हुए थे। यह हिंसा कई सालों तक जारी रही थी। 1992 और 1997 के बीच समय-समय पर हिंसा भड़कती रही थी। सबसे ज्यादा हिंसा 1992-93 के दौरान हुई थी। यह पूरी हिंसा 1992 में शुरू हुई थी और लगभग पाँच वर्षों 1992-1997 तक जारी रही थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह दौर पूर्वोत्तर भारत में सबसे हिंसक संघर्षों में से एक था। इसके चलते मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच संबंधों प्रभावित हुए। क्या पीवी नरसिम्हा राव, जो 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और इस दौरान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी थे, तब माफी माँगने मणिपुर आए थे? कुकी-पाईते की लड़ाई में राज्य में 350 लोगों की मौत हुई थी। कुकी-पाईते हिंसा (1997-1998) के दौरान, IK गुजराल भारत के प्रधानमंत्री थे। क्या उन्होंने मणिपुर का दौरा किया और लोगों से माफ़ी माँगी?

बिरेन सिंह ने पूछा कि कॉन्ग्रेस मणिपुर मामले को हल करने में प्रयास करने के बजाय इस पर राजनीति क्यों कर रही है। बिरेन सिंह का यह जवाब जयराम रमेश के उस सवाल पर आया जिसमें उन्होंने पूछा था कि पीएम मोदी खुद मणिपुर आकर माफी क्यों नहीं माँगते। जयराम रमेश ने दावा किया था पीएम मोदी जानबूझकर मणिपुर नहीं जा रहे। उन्होंने यह बात सीएम बिरेन सिंह के राज्यवासियों से माफी माँगने के बाद कही थी। बिरेन सिंह ने 31 दिसम्बर, 2024 को वर्ष 2024 में हुई हिंसा के लिए दुख जताया था और माफ़ी माफी माँगी थी।

गौरतलब है कि कुकी और नागा समुदाय के बीच वर्ष 1990 के दशक से लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कुकी समुदाय की कुकीलैंड को पाने के लिए चालू किए गए आंदोलन के बाद शुरू हुई थी। इस कथित कुकीलैंड का बड़ा हिस्सा मणिपुर की पहाड़ियों में है, यहाँ पर नागाओं का कब्जा था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह लड़ाई तब चालू हुई जब जब कुकी लड़ाकों ने नागाओं पर हमला किया, उनके गाँव जलाए और नागा समुदाय के सैकड़ों लोगों को मार डाला या उन्हें बेघर कर दिया।”

तब नागाओं ने कूकी समुदाय को चेतावनी भी दी थी कि वह हिंसा बंद कर दें लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद, नागाओं ने कूकी समुदाय पर हमले करना शुरू कर दिया और अगले 3 वर्षों में, कुकी समुदाय के 230 से अधिक लोग मारे गए। कई हजार लोग नागा इलाके से बाहर भी कर दिए गए। यह संघर्ष 1997 में जाकर रुका जब कूकी और पाईते के बीच लड़ाई चालू हुई। कुकी और पैती एक ही समूह से संबंधित हैं, लेकिन दोनों अपनी भाषा के आधार पर खुद को अलग करते हैं।

1992 में जब नागाओं ने जबरदस्ती बस रहे कूकी समुदाय के लोगों को भगाया तो वह पाईते के इलाकों में बसने लगे। इनमें से एक चुराचांदपुर भी है जो पाईते का मूलनिवास रहा है। कुकी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में बसने लगे, जो पैतियों का गृहस्थान है। यहाँ आकर बसने वाले लोगों को कूकी उग्रवादियों ने समर्थन दिया और पाईते को परेशान करना चालू कर दिया। उन्हें अपने ही इलाके छोड़ने को कहा गया। बाद में पाईते ने सुरक्षा के लिए एक उग्रवादी समूह भी बनाया।

इसके बाद यहाँ हालात लगातार खराब होते रहे। कूकी उग्रवादी समूह ने जून 1997 में सैकुल नामक पाईते के गाँव पर हमला किया और 13 पाईते को मार डाला। इसके बाद दोनों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुईं, जिसमें लगभग 15000 लोग मारे गए और बेघर हुए। दोनों समुदाय के बीच शान्ति तब आई जब अक्टूबर 1998 में एक ‘शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत 2 अलग-अलग संप्रदायों कुकी और ज़ोमिस को मान्यता मिली।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने जिस समझौते के विषय में बात की वह 2005 में कॉन्ग्रेस सरकार ने किया था। यह समझौता कूकी लड़ाकों और भारतीय सेना के बीच सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन था। इसके तहत कूकी लड़ाकों को संघर्ष रोकना था। इसके अलावा केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और 25 कूकी लड़ाका संगठनों के बीच एक और समझौता हुआ था। शांति समझौते के अनुसार लड़ाका समूहों को हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया था, लेकिन इसके बाद भी कई बार झड़प और वसूली के चलते चिंता की स्थिति बनी रही।

मुस्लिम ऑर्केस्ट्रा संचालक ने हिंदू देवी-देवताओं पर की अभद्र टिप्पणी, अश्लील इशारे कर उड़ाया मजाक: आजमगढ़ में बीजेपी नेताओं ने दर्ज कराई FIR

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक स्थलों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और अश्लील इशारे करने का मामला सामने आया है। यह घटना ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम के दौरान हुई, जहाँ आरोपित ने मंच से ऐसी हरकतें कीं, जिसने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वह व्यक्ति हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बातें कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति ‘लंगड़ा ग्रुप ऑर्केस्ट्रा’ का मालिक है।

कार्यक्रम में मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने जब यह सब सुना, तो वह गुस्से में आ गए और आरोपित को जमकर फटकार लगाई। बुजुर्ग ने उसे गालियाँ देकर उसकी हरकतों का विरोध किया। लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। मामला तब सामने आया जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग और धार्मिक संगठनों के सदस्य नाराज हो गए।

भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताते हुए मुबारकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने माँग की कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। भाजपा नेताओं ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपित के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नेताओं ने इसे पुलिस की निष्क्रियता और हिंदू धर्म का अपमान बताते हुए विरोध जताया और थाने के प्रभारी से तत्काल कार्रवाई की माँग की।

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी देखने को मिली। एक सोशल मीडिया यूजर ने इस घटना पर पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग की। इसके जवाब में आजमगढ़ पुलिस ने कहा कि मुबारकपुर थाना प्रभारी को मामले की जाँच करने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

‘हम 4 बीवियाँ रखते हैं…’: अमित बन हिंदू छात्रा से कॉन्स्टेबल बादशाह खान ने दोस्ती की, रेप के बाद ब्लैकमेल कर ₹55 लाख ऐंठे; कपड़े मँगाकर कराता था झाड़-फूँक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बादशाह खान नाम के एक पुलिस कॉन्स्टेबल पर लव जिहाद का आरोप लगा है। उसके खिलाफ विभागीय जाँच भी शुरू कर दी गई है। बादशाह पर नर्सिंग का कोर्स कर रही हिन्दू छात्रा से खुद को अमित बता कर मेलजोल बढ़ाने और बाद में शारीरिक संबंध बना कर पैसे ऐंठने का आरोप है। पीड़िता ने यह भी बताया कि उसे इस्लाम कबूल करने का दबाव भी दिया जा रहा था।

यह घटना लखनऊ के थानाक्षेत्र चिनहट की है। मूल रूप से शाहजहाँपुर की रहने वाली पीड़िता एक कॉलेज में नर्सिंग का कोर्स कर रही है। सोमवार (30 दिसंबर 2024) को पीड़िता ने शाहजहाँपुर जिले में तैनात कॉन्स्टेबल बादशाह के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि 2014 में उसकी मुलाकत बादशाह खान से हुई थी। तब बादशाह खान ने खुद को अमित बताया था।

पीड़िता बताती है कि अमित बना बादशाह खान दोस्ती होने के बाद उसे कई जगह घुमाने ले गया। साल 2015 में बादशाह खान का चयन UP पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर हो गया। सिपाही बनने के बाद बादशाह ने एक मुस्लिम लड़की से निकाह भी कर लिया। जब पीड़िता को अमित बने बादशाह की शादी के बारे में पता चला तो उसने बातचीत बंद करनी चाही। आरोप है कि तब बादशाह ने कुछ ही दिनों में अपनी बीवी को तलाक देने का झाँसा दिया।

बात न बनने पर बादशाह पीड़िता के कॉलेज के आसपास भी चक्कर लगाने लगा। ऐसा करके कॉन्स्टेबल खान ने 6 साल तक पीड़िता को अपने झाँसे में रखकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। दैनिक भास्कर को पीड़िता ने बादशाह को झाड़-फूँक और टोना टोटका करने वाला बताया है। इसके लिए वह पीड़िता व उसके परिजनों के कपड़े मँगवाता था। थोड़े ही समय में उसने पीड़िता के परिवार में कलह करवानी शुरू कर दी। नतीजा यह रहा कि पीड़िता अपने परिजनों से दूर हो गई।

इसी बीच बादशाह खान ने एक बार पीड़िता से 50 हजार रुपयों की डिमांड की। ये पैसे पीड़िता ने बादशाह को ऑनलाइन दिए। दावा है कि तब पहली बार पीड़िता को उसके मुस्लिम होने की जानकारी हो पाई थी। जब इस बाबत पीड़िता ने सवाल-जवाब किया तो बादशाह ने उसे इस्लाम कबूल करने का दबाव दिया। बादशाह ने कहा कि उसके मजहब में 4 निकाह जायज है और वह मुस्लिम बन जाती है तो उसे अपनी दूसरी बीवी बनाकर रखने को तैयार है।

फिलहाल बादशाह एक बेटे का अब्बा बन चुका है, लेकिन उसकी पीड़िता से ब्लैकमेलिंग 2024 तक जारी रही। 27 दिसंबर 2024 को सिपाही खान ने पीड़िता से 10 लाख रुपयों की डिमांड की। इनकार करने पर पीड़िता के अश्लील वीडियो को वायरल करने की धमकी दी। बादशाह ने पीड़िता को हड़काते हुए यहाँ तक कहा कि उसके परिवार को भी खत्म कर दिया जाएगा।

पैसे न मिलने पर बादशाह ने पीड़िता छात्रा के मोबाइल नंबर से उसकी लोकेशन ट्रेस करवा ली। वह अपनी बीवी के साथ पीड़िता के पास पहुँचा। यहाँ मियाँ-बीवी ने पीड़िता को बेरहमी से पीटा। शिकायत में पीड़िता का दावा है कि बादशाह खान अब तक उससे लगभग 55 लाख रुपए ऐंठ चुका है। पैसे ऐंठने में बादशाह खान के साथ उसके भाई भी शामिल बताए जा रहे हैं।

शिकायत के अंत में पीड़िता ने सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बादशाह खान के खिलाफ दर्ज इस शिकायत पर विभूति खंड के ACP राधारमण सिंह ने मीडिया को बताया कि पूरे मामले की गहराई से जाँच की जा रही है। सामने आए सबूतों व तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

मुस्लिम नाबालिग ने बजरंग बली की प्रतिमा को तोड़कर जमीन में गाड़ा: जबलपुर में तनाव, भड़के लोगों ने अखाड़े पर लिखी चेतावनी- गैर हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन तहसील के जय बजरंग अखाड़े में बजरंगबली की प्रतिमा को तोड़ कर जमीन में गाड़ दिया गया। इसके बाद अखाड़े की दीवारों पर “मुस्लिमों का प्रवेश पूर्णतः मना है, अंजाम कुछ भी हो सकता है” लिखकर हिंदुओं ने चेतावनी जारी की है, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाटन तहसील के जय बजरंग बली अखाड़े में घुसकर 14 साल के नाबालिग मुस्लिम लड़के ने बजरंगबली की प्रतिमा को खंडित कर जमीन में गाड़ दिया। आरोप है कि उसने प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ के अलावा अखाड़े में रखे डंबल इत्यादि उपकरणों को भी इधर-उधर फेंक दिया। इस कृत्य की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने मौके पर पहुँचकर प्रदर्शन किया और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

पुलिस ने आरोपित नाबालिग को तुरंत हिरासत में ले लिया। जाँच में यह पता चला है कि वह मानसिक रूप से अस्थिर है, जिसके चलते उसके इलाज की भी व्यवस्था की जा रही है।

इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अखाड़े की दीवारों पर चेतावनी लिखवाई। संगठन के जिला संयोजक राजा ठाकुर ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड अध्यक्ष दिलीप श्रीवास ने भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी कृत्य के खिलाफ सख्त कदम उठाने की माँग की।

एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। घटना के बाद पाटन थाना क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से धार्मिक सौहार्द्र प्रभावित होता है। वहीं, हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि यह उनकी आस्था पर सीधा हमला है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

नशेड़ी थे पीलीभीत में मारे गए खालिस्तानी, खरीदे थे नशे के कैप्सूल: पाकिस्तान की ISI से मिल रही है आतंकियों को ट्रेनिंग, गुरदासपुर हमले से भी जुड़े हैं तार

पीलीभीत के पूरनपुर में मारे गए 3 खालिस्तानी आतंकियों का पाकिस्तान लिंक सामने आया है। इन तीनों के आतंकी समूह खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स (KZF) का सरगना पाकिस्तान से ही ऑपरेट कर रहा है। यह तीनों आतंकी पंजाब में एक चौकी पर ग्रेनेड फेंकने के बाद भाग कर उत्तर प्रदेश आए थे। ऐसे हमले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ₹2000-₹3000 देकर करवा रहा है। इन नशेड़ी आतंकियों की तरह बाकी युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ISI और पाकिस्तान पंजाब में हथियार भी लगातार भेज रही है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के गुरदासपुर में चौकी पर हुआ आतंकी हमला उस प्लानिंग की एक कड़ी है जो कनाडा और अमेरिका में हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कनाडा में अमेरिका में भारत में पुलिस को निशाना बनाने और हथियार सप्लाई के साथ आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए तीन बैठकें आयोजित की गईं थी। यह तीनों बैठकें 2023 में हुई हैं। इस बैठक के बाद से चौकियों और थानों पर हमलों में तेजी आई है। बीते दो वर्ष में पंजाब में लगभग 20 ऐसी घटनाएँ हुई हैं।

पीलीभीत के एसपी ने बताया है कि KZF ने इन लड़कों से मात्र ₹2000-3000 में यह काम करवाया है। उन्होंने कहा कि यह आतंकी संगठन पाकिस्तान से ही ऑपरेट हो रहा है और इसका मुखिया रंजीत नीता भी पाकिस्तान में अपनी गतिविधि बढ़ाए हुए है। ISI हथियार भेजने के अलावा पाकिस्तान के भीतर अलग-अलग जगह पर सिख युवाओं को आतंकी ट्रेनिंग भी दे रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस काम के लिए पाकिस्तान में कई ट्रेनिंग पैड बनाए गए हैं। ISI इसके साथ ही खालिस्तान की मदद पैसा जुटाने में कर रहा है।

यह पैसा इकट्ठा करने के लिए वसूली, फिरौती और ड्रग जैसे काम किए जाते हैं। ISI और पाकिस्तान की बाकी एजेंसी पंजाब में ड्रग्स गिराने और हथियार गिराने में भी जुटी हुई है। बीते 2 साल में 200 बार से अधिक ड्रोन पंजाब की सीमा पर मंडरा चुके हैं। कई बार इन्हें BSF मार गिराती है तो कई बार यह बच जाते हैं। इनमें ड्रग्स के साथ ही हथियार की भी खेप होती है। पीलीभीत में मारे गए आतंकियों के पास से जो हथियार मिले हैं, वह विदेशी हैं। इनके भी इसी रूट से आने की आशंका है।

ISI ने भारत के 7 राज्यों और 30 शहरों तक यह नेटवर्क फैलाया है। इसमें पंजाब के अलावा हरियाणा और यूपी-उत्तराखंड के सिख आबादी वाले जिले शामिल हैं। जो भी काम सीमापार तस्करी से नहीं हो पाता, उसके लिए यहाँ पैसा भेज दिया जाता है। इस काम के हवाला रूट इस्तेमाल किया जाता है। इस काम में ISI के साथ ही वाधवा सिंह और नीता जैसे आतंकी शामिल हैं। कई खालिस्तानी पाकिस्तान में मारे भी जा चुके हैं। पंजाब पुलिस, यूपी पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस को लेकर चौकन्नी हैं।

इस बीच पीलीभीत मामले में स्थानीय स्तर पर पुलिस जाँच के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। पुलिस ने हाल ही में उस युवक सनी को पकड़ा था, जिसने पूरनपुर में कमरा दिलाने में आतंकियों की मदद की थी। पुलिस इनके अलावा भी कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। यह भी सामने आया है कि मारे गए तीनों आतंकी नशेड़ी थे और उन्होंने पूरनपुर में एक मेडिकल से नशे के कैप्सूल खरीदे थे। पुलिस मेडिकल पर भी पूछताछ के लिए पहुँची थी।

गौरतलब है कि 23 दिसंबर 2024 को खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स के तीन आतंकियों को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया था। ये आतंकी कुछ समय पहले पंजाब के गुरदासपुर पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला करने में शामिल थे। इस ऑपरेशन को यूपी और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया था। मारे गए आतंकियों की पहचान गुरविंदर सिंह, वीरेंद्र सिंह उर्फ रवि और जसप्रीत सिंह उर्फ प्रताप सिंह के रूप में हुई थी।

‘मुझे पता है ये क्या करती हैं…’: अरशद ने अम्मी और 9 से 19 साल की 4 बहनों को उतारा मौत के घाट, नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने के बाद काट दी गर्दन, घटना में फरार अब्बू भी शामिल

लखनऊ के हजरतगंज इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक महिला और उसकी 4 बेटियों की हत्या कर दी गई। महिला अपने शौहर, बेटे और 4 बेटियों के साथ लखनऊ आई थी, जिसमें उसका शौहर फरार है, वहीं बेटे को बतौर हत्यारा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपित का नाम अरशद (24) है। पता चला है कि ये परिवार आगरा का रहने वाला है। इस मामले में अरशद के अब्बू की भी भूमिका सामने आ रही है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित 24 वर्षीय अरशद ने अपनी माँ और चार बहनों की हत्या कर दी। यह वारदात लखनऊ के होटल शरणजीत के कमरे नंबर 109 में हुई, जहां पूरा परिवार 30 दिसंबर से ठहरा हुआ था। अरशद ने पहले अपनी माँ और बहनों को खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश किया। इसके बाद धारदार हथियार से उनकी कलाई और गले पर वार किया। घटनास्थल पर किसी संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं, जिससे पुष्टि होती है कि मृतकों ने प्रतिरोध नहीं किया।

मृतकों में माँ- अस्मा (45), कॉलेज में पहले वाली बहन अलशिया (19), दूसरे नंबर की बहन रहमीन (18) इंटरमीडिएट की छात्रा, तीसरे नंबर की बहन अक्सा (16) कक्षा 10वीं की छात्रा और आलिया (9) सबसे छोटी बहन हैं।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) (मध्य लखनऊ) रवीना त्यागी ने कहा है कि चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटनास्थल से पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। होटल के कमरे से नशीले पदार्थ के अवशेष और खून से सना चाकू बरामद किया गया है।

प्रारंभिक जाँच में घरेलू विवाद और परिवार के चरित्र पर शक हत्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस पूछताछ में आरोपित अरशद ने हत्या की वजह स्पष्ट रूप से नहीं बताई, लेकिन बार-बार यही कहा, “मुझे पता है ये लोग क्या करती हैं।” उसने पूछताछ करने पर बताया है कि उसका अब्बू भी इस हत्याकांड में शामिल था, और वो अपनी जान देने के लिए यहाँ से चला गया है।

आरोपित अरशद का परिवार आगरा जिले के कुबेरपुर, तेहड़ी बगियार के इस्लाम नगर का रहने वाला है। पुलिस इस मामले में अरशद के बयान और साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जाँच कर रही है। होटल में आए परिवार के अन्य दो सदस्यों से भी पूछताछ जारी है। पुलिस होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि हत्या से पहले और बाद की गतिविधियों की पुष्टि हो सके।

इस मामले में परिवार का मुखिया यानी अरशद का अब्बू फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही इस हत्याकांड के राज खुलने की उम्मीद है। वहीं, पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या का सही समय और तरीके का खुलासा हो सकेगा।

‘… तो बीवी भाग जाएगी’: गौतम अडानी ने दिया नारायणमूर्ति के 70 घंटे काम वाले आइडिया का जवाब, कहा- ‘आपका वर्क-लाइफ बैलेंस मुझ पर ना थोपा जाए, ना मेरा आप पर’

काम के घंटे और परिवार को दिए गए समय (वर्क-लाइफ बैलेंस) को लेकर चल रही बहस पर अडानी अमूह के मुखिया गौतम अडानी ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा है कि एक का वर्क लाइफ बैलेंस का आइडिया दूसरे पर थोपा ना जाए। उन्होंने इस बीच मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर कोई आठ घंटे फैमिली के साथ बिताएगा तो ‘बीवी भाग जाएगी।’ गौतम अडानी का यह जवाब इंफोसिस के फाउंडर नारायणमूर्ति की देश के युवाओं को 70 घंटे काम करने की सलाह पर आया है।

ANI के साथ एक बातचीत में गौतम अडानी ने कहा, “जो आपको आनंद देता है, वो करते हो तो आपका वर्क-लाइफ बैलेंस है। बाकी आपका वर्क-लाइफ बैलेंस मुझ पर ना थोपा जाए और मेरा वर्क लाइफ बलेंस आप पर ना थोपा जाए। आपको सिर्फ इतना ही देखना है कि मैं चार घंटा परिवार के साथ बिता रहा हूँ, उसका आनंद मुझे आ रहा है और कोई आठ घंटा बिता रहा है। अब ये आदमी आठ घंटा बिताएगा तो वो बीवी भाग जाएगी।” गौतम अडानी से जुड़ी यह बातचीत आप नीचे लगे वीडियो में देख सकते हैं।

गौतम अडानी ने इसके बाद अपने वर्क-लाइफ बैलेंस पर भी बात की। गौतम अडानी ने बताया कि उनके लिए काम और परिवार के अलावा और कोई प्राथमिकताएँ नहीं थी। उन्होंने कहा, “हमारी दुनिया यही है और बच्चे लोग भी यही देखते हैं। उनके संस्कार भी मेहनत से काम करने के हैं और यह तीसरी पीढ़ी तक गए हैं।”

गौतम अडानी ने कहा कि हर व्यक्ति की आदतें भी अलग होती हैं और किसी का चरित्र कैसा तथा उसके अंदर मानवता कितनी है, यह बातें भी फर्क डालती हैं। उन्होंने कहा कि आगे चल कर सारी चीजें अपनी जगह पर आ जाती हैं। गौतम अडानी ने ANI से अपनी कठिन यात्रा के विषय में भी बताया।

उन्होंने कहा, “मैंने मेरे मामले में देखा है, मैंने कॉलेज छोड़ दिया था 10वीं के बाद। मुझे बोलना नहीं आता था। एक गाँव से पढ़ कर आया, परिवार भी काफी सामान्य था। अब जब मैं कभी बैठता हूँ तो आँखों के सामने से पूरी यात्रा गुजरती है कि वहाँ से यहाँ कैसे पहुँचे।”

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले इंफोसिस के फाउंडर नारायणमूर्ति ने कहा था कि यदि भारत को आगे बढ़ना है और गरीब-अमीर के बीच का भेद मिटाना है तो हमें बिना वर्क लाइफ बैलेंस की चिंता किए हुए काम करना होगा। उन्होंने कहा था कि देश के युवाओं को सप्ताह में 70 घंटे काम करने के लिए तैयार रहना होगा।

नारायणमूर्ति ने बाद में इस बयान पर पीछे हटने से भी इनकार किया था। उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। उनके आलोचकों ने कहा था कि नारायणमूर्ति लोगों की निजी जिन्दगी का ख्याल रखे बिना यह बात कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ लोगों ने उनका समर्थन भी किया था।