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दीमक-चूहों से बचाने के लिए नोटों पर बोरिक पाउडर छींटता था सौरभ शर्मा, जानिए कैश के बदले क्यों सोने-चाँदी की गिल्ली की करता था डिमांड: लुकआउट नोटिस जारी

मध्य प्रदेश के लोकायुक्त की टीम ने 19 और 20 दिसंबर 2024 को RTO (परिवहन विभाग) के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में करोड़ों रुपए कैश सहित भारी मात्रा में सोने के बिस्किट और चाँदी की सिल्लियाँ बरामद हुई थीं। अब तक हुई जाँच में पता चला है कि सौरभ शर्मा रिश्वत में कैश के बजाय सोना और चाँदी लेना ज्यादा पसंद करता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सौरभ शर्मा नकदी के बदले लोगों से सोने और चाँदी लेना ज्यादा पसंद करता था। ऐसा करने के पीछे उसका मोलभाव का दिमाग काम करता था। वह इसी सोने-चाँदी को बाद में और अधिक दामों पर बेच दिया करता था। दूसरे कारण यह भी थे कि सौरभ शर्मा को नोटों की गड्डियाँ सहेज कर रखने में काफी दिक्कत होती थी। इससे नोटों को खराब होने के झंझट से मुक्ति मिल जाती थी।

कैश के बदले सोने-चाँदी को प्राथमिकता

इसके साथ ही सोने-चाँदी में अधिक कैश को खपाया जा सकता था। जाँच में यह भी पता सौरभ शर्मा ढाई-ढाई लाख रुपए की कीमत के नोटों का बंडल बनाकर रखता था। इन बंडलों के खराब होने को लेकर भी वह काफी चिंता में रहता था। दीमक और चूहों से बचाने के लिए वह बंडलों पर बोरिक पाउडर नाम का केमिकल का छिड़काव करता रहता था। वह नोटों का बंडल बनाने के लिए मशीन रखता था।

एक अनुमान के मुताबिक, सौरभ के ठिकानों से लगभग 234 किलो चाँदी बरामद हुई है। इस चाँदी की कीमत 2 करोड़ रुपयों से अधिक आँकी जा रही है। चाँदी के अलावा, उससे संबंधित 54 किलो सोना भी बरामद हुआ है। कुल मिलाकर अब तक सौरभ शर्मा के अनुमानित 8 करोड़ रुपयों की बरामदगी हो चुकी है। सौरभ शर्मा के बंगले और कार की भी कीमत करोड़ों में आँकी गई है।

लोकायुक्त की जाँच में यह भी निकल कर सामने आया है कि सौरभ शर्मा ने सोने और चाँदी के अलावा पैसों को स्कूल, अस्पताल, होटल, रियल स्टेट आदि कई कारोबारों में लगाया है। उसने अपनी माँ, पत्नी, साली एवं कुछ करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर भी निवेश किए हैं। सौरभ शर्मा के परिवार के अलावा इस नेटवर्क में अब तक उसके 2 करीबियों के नाम सामने आ चुके हैं।

सौरभ शर्मा के दोनों करीबियों के नाम शरद जयसवाल और चेतन गौड़ है। सौरभ शर्मा के घर से एक डायरी भी मिली है। कहा जा रहा है कि इसमें उसके सम्पर्क में रहे कई IAS-IPS अधिकारियों तथा नेताओं के नाम और मोबाइल नंबर लिखे हुए हैं। इस डायरी में सालाना 100 करोड़ रुपयों के लेन-देन का हिसाब है। लोकायुक्त की टीम सौरभ शर्मा के बाकी नेटवर्क को खँगालने में जुटी हुई है।

नौकरी से इस्तीफा पर उगाही लगातार जारी

जाँच में यह बात भी सामने आई है कि सौरभ शर्मा ने कुछ दिन पहले अपने तमाम करीबियों को LED टीवी गिफ्ट में दी थी। जाँच एजेंसियाँ सौरभ के विदेश यात्राओं और वहाँ के नेटवर्क को भी खँगालने में जुटी हुई हैं। लोकायुक्त को आशंका है कि सौरभ ने कुछ काला धन दुबई में रियल इस्टेट के काम में भी लगा रखा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल में सौरभ की जायदाद पाई गई है।

जाँच में यह भी पता चला है कि सौरभ जल्द ही भोपाल के शाहपुर में जयपुरिया स्कूल की एक फ्रेंचाइजी खोलने वाला था। सौरभ ने अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन नाम से एक कम्पनी भी बना रखी है। साल 2021 में बनाई गई इस कम्पनी में सौरभ ने अपने साले को एडिशनल डायरेक्ट बना रखा है। इसी में उसके 2 करीबी शरद और चेतन भी साझेदार हैं।

छापेमारी में सौरभ शर्मा के ठिकानों से परिवहन विभाग की कई मुहरें मिली हैं। कई मुहर तो अधिकारियों के नाम सहित हैं। कार्टन में परिवहन विभाग की चालान काटने वाली कई रसीदें भी मिली हैं। माना जा रहा है कि कॉन्स्टेबल की नौकरी से इस्तीफा देने के बावजूद सौरभ शर्मा का चेक पोस्ट पर उगाही का खेल बदस्तूर जारी था। उसने मध्य प्रदेश के 47 चेक पोस्ट में से 23 का ठेका ले रखा था।

सौरभ की माँ, पत्नी और अन्य करीबियों से पूछताछ के लिए इनकम टैक्स विभाग नोटिस जारी करने जा रहा है। माना जा रहा है कि इन सभी से अगले 2 दिनों के अंदर पूछताछ की जा जाएगी। सौरभ शर्मा और उसके अब तक मिले नेटवर्क के खिलाफ ED ने सोमवार को केस दर्ज कर लिया है। कुछ दिन पहले पहले एक कार लावारिस हालत में मिली थी।

इस गाड़ी में 10 करोड़ रुपए नकद और 54 किलोग्राम सोना मिला था। यह गाड़ी और नकदी एवं सोना भी सौरभ शर्मा से संबंधित है। इसी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत उस पर ये FIR दर्ज की है। सौरभ शर्मा फरार है और माना जा रहा है कि वह दुबई में है। वहीं, कुछ लोग उसके मुंबई में छिपे होने की आशंका जता रहे हैं। इसको देखते हुए लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया है।

सौरभ शर्मा की नौकरी में धाँधली के आरोप

अब सौरभ शर्मा की नियुक्ति पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्वालियर हाई कोर्ट के वकील अवधेश तोमर ने आरोप लगाया है कि सौरभ की नियुक्ति के दस्तावेजों में भी हेराफेरी की गई थी। उन्होंने आरटीआई के जरिए नियुक्ति के दस्तावेज भी माँगे थे, जो परिवहन विभाग ने नहीं दिए। उन्होंने अभी कहा कि सौरभ का बड़ा भाई सचिन शर्मा सरकारी नौकरी में है। ऐसे में दूसरे की अनुकंपा नियुक्ति कानून के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी कहा कि सौरभ शर्मा की नौकरी कॉन्ग्रेस के एक कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री की सिफारिश पर लगी थी। यही कारण है कि परिवहन विभाग इस फर्जीवाड़े को छिपाना चाहता है और इसके बारे में जानकारी नहीं दे रहा है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉन्ग्रेस सरकार में सौरभ शर्मा की ताकत बढ़ जाती थी और वह अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में दखल देता था।

ट्रांसपोर्टरों और कॉन्ग्रेस ने खोला मोर्चा

सौरभ शर्मा पर हुए खुलासे के बाद ट्रांसपोर्टरों ने RTO आधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कॉन्ग्रेस नामक समूह ने तमाम RTO अधिकारियों की सम्पत्तियों की जाँच कराए जाने की माँग उठाई है। इसी माँग में यह भी शामिल है कि लाइसेंस, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाए, ताकि उन्हें तंग ना किया जा सके।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे परिवहन घोटाला बताते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की निगरानी में जाँच कराए जाने की माँग उठाई है। इस संबंध में दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने भाजपा नेता गोविंद सिंह राजपूत पर भी आरोप लगाया है। हालाँकि, गोविंद सिंह ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बता दें कि सौरभ शर्मा के पिता आरके शर्मा सरकारी डॉक्टर थे। उनकी मौत के बाद साल 2015 में शर्मा को अनुकंपा पर राज्य परिवहन विभाग में कॉन्स्टेबल की नौकरी मिली। उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के बाद जाँच से बचने के लिए सौरभ शर्मा ने साल 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और चेक पोस्ट का ठेका लेकर वसूली का खुलेआम धंधा करने लगा।

पुर्तगाल के समंदर में समाए 250 जहाजों में लदा है खजाना, 1 में ही 22 टन सोना-चाँदी: आर्कियोलॉजिस्ट ने तैयार किया डूब चुके 8620 जहाजों का डाटाबेस, कहा- लूटेरे अंदर ही अंदर कर सकते हैं गायब

पुर्तगाल के समुद्री तट के पास 250 से अधिक खजाने से भरे जहाजों की खोज ने इतिहास प्रेमियों और पुरातत्वविदों के बीच खलबली मचा दी है। पानी के अंदर पुरातत्व में माहिर अलेक्जेंड्रे मोनटेरो ने हाल ही में एक डेटाबेस तैयार किया है, जिसमें 8,620 जहाजों के डूबने की जानकारी शामिल है। इनमें से लगभग 250 जहाज ऐसे हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि ये जहाज खजाने से भरे हो सकते हैं। ये जहाज मुख्य रूप से पुर्तगाल के मुख्य तट, अज़ोरेस और मदीरा के आसपास पाए गए हैं।

मोनटेरो ने बताया कि पुर्तगाल के ट्रोया क्षेत्र के पास 1589 में डूबे एक स्पेनिश जहाज नोस्सा सेनहोरा दो रोज़ारियो में अकेले 22 टन सोना और चांदी थी। इस जहाज की पूरी कहानी जानने के लिए उन्होंने गहरा शोध किया और यहाँ तक कि जहाज के कप्तान की माँ का नाम भी खोज निकाला। उनके अनुसार, पुर्तगाल के इतिहास में कई ऐसे जहाज हैं जो समुद्र की गहराई में खजाने के साथ दफन हैं।

बता दें कि 15वीं और 16वीं शताब्दी में पुर्तगाल एक प्रमुख औपनिवेशिक शक्ति था, जिसने दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी इंडीज में अपने उपनिवेश स्थापित किए थे। समय के साथ इस साम्राज्य के विघटन के बाद ब्राजील, अंगोला और मोजांबिक जैसे स्वतंत्र राष्ट्र बने। इन व्यापार मार्गों पर समुद्री दुर्घटनाओं के कारण कई जहाज समुद्र में डूब गए, जो आज ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

मोनटेरो ने कहा कि इन जहाजों के बारे में सरकार के पास जानकारी है, लेकिन उनके संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि इन जहाजों को जल्द या बाद में खोजा जाएगा, खासकर बंदरगाह निर्माण या अन्य परियोजनाओं के दौरान। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर इन खजानों को संरक्षित नहीं किया गया, तो वे लुटेरों के हाथ लग सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुर्तगाल को अपने समुद्री इतिहास की रक्षा के लिए एक ठोस योजना बनानी चाहिए।

मोनटेरो ने खुद कई वर्षों तक समुद्र के अंदर गोता लगाकर इन जहाजों का पता लगाया है। उन्होंने नोस्सा सेनहोरा दा लूज़ नामक जहाज की खोज में चार साल लगाए, जो 1615 में अज़ोरेस के पास डूबा था। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने पहली बार गोता लगाया, उन्हें जहाज का ठिकाना मिल गया। हालाँकि, उन्होंने खजाने की लूट की संभावना को कम बताया, क्योंकि कई जहाज रेत की गहराई में दबे हुए हैं। फिर भी उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन जहाजों के लिए संरक्षण योजना नहीं बनाई गई, तो यह पुर्तगाल की सांस्कृतिक धरोहर के लिए बड़ा नुकसान होगा।

पुरातत्वविद् का कहना है कि इन जहाजों की पहचान केवल पहला कदम है। इन जहाजों की खोज और उनके खजाने को संरक्षित करने के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। मोनटेरो का मानना है कि अगर समर्पण के साथ प्रयास किया जाए, तो इन जहाजों को खोजने और संरक्षित करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह खोज पुर्तगाल के समुद्री इतिहास को गहराई से समझने का मौका देती है।

संभल में जिन्होंने बनवाई ‘रानी की बावड़ी’, बाबर से लड़े थे उनके पुरखे: मंदिर तक जाती थी सुरंग, जानिए किनके कारण सामने आया जमीन में दफन इतिहास

संभल के चंदौसी में खुदाई में मिली गहरी बावड़ी का कनेक्शन उस राजपरिवार है जिसने बाबर से लड़ाई लड़ी थी। इस बावड़ी के सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम भी पहुँच गई है। बावड़ी में अब तक कई गलियारे और सुरंगे मिल चुकी हैं। यह बावड़ी कैसे जमीन में दब गई, इसकी भी जानकारी सामने आई है। बावड़ी की खुदाई लगातार जारी है और संभल का प्रशासन इसकी अधिक जानकारियाँ सामने लाने में जुटा है।

कैसे मिली बावड़ी, क्यों हुई खुदाई?

यह बावड़ी चंदौसी के लक्ष्मणपुर मोहल्ले में मिली है। यह मोहल्ला मुस्लिम बहुल है। यहाँ पर बावड़ी वाला इलाकों चारों तरफ से मकानों से घिरा हुआ है। हालाँकि, बावड़ी की जमीन खाली थी और कूड़े वगैरह से पटी हुई थी। इसकी खुदाई की शुरुआत कौशल किशोर की शिकायत पर चालू की गई है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदूवादी कार्यकार्ता कौशल किशोर ने हाल ही में बावड़ी पर अतिक्रमण को लेकर जिले के अधिकारियों को शिकायत की। कौशल किशोर ने बताया कि उन्हें जानकारी थी कि यह बावड़ी 150 वर्ष पुरानी है।

प्रशासन ने इसके बाद एक टीम भेजी और अतिक्रमण को लेकर खुदाई चालू कर करवाई। इसमें बावड़ी के शुरूआती अंश मिले। इसके बाद और भी मजदूर बुला कर ढंग से इस पर काम करना चालू किया गया। स्पष्ट हुआ कि शिकायत में जो बावड़ी की बताई गई थी, वह सही थी और इसकी अधिक खुदाई पर पूरा ढांचा सामने आएगा, जिससे सब कुछ समझने में आसानी रहेगी।

कैसी है बावड़ी?

चंदौसी की यह बावड़ी संभवतः 30 फीट गहरी है। इसमें अभी खुदाई लगभग 14-15 फीट तक ही हुई है। बावड़ी तीन मंजिल की है। डीएम का कहना है कि इसमें दो मंजिल ईंटो जबकि एक मंजिल पत्थर की है। ऊपर के दो मंजिल में कमरे हैं जबकि सबसे नीचे वाली मंजिल पानी से जुड़ी हुई थी। बावड़ी में जमीन से अंदर उतरने के लिए सीढियाँ बनी हुई है। यह पक्के लाल पत्थर की हैं। बावड़ी में दो कमरे भी बने हुए हैं। इनमें जाने के लिए छोटे छोटे दरवाजे भी हैं। बावड़ी के भीतर 5 गलियारे मिले हैं। बताया गया है कि यह गलियारे बावड़ी में चारों तरफ हैं।

बावड़ी में सबसे निचले तल पर एक कुआँ था। यहाँ एक कमरे में सुरंग भी मिली है। इस सुरंग का रास्ता कुछ दूर बने एक राधाकृष्ण मंदिर तक जाता है, ऐसे लोगों ने दावा किया है। इस बावड़ी का इस्तेमाल सैनिक, आसपास के लोग और खेती के लिए होता था, यह आसपास के लोगों ने बताया है। जो इसी इलाके रहने वाले हैं, उन्होंने बताया है कि वह कुछ दशक पहले यहाँ घूमते टहलते थे लेकिन तब यही पूरी तरह से जमीन में दबी नहीं थी।

किसने बनवाई, कौन है मालिक?

इस बावड़ी को सहसपुर के राजपरिवार ने बनवाया था। सहसपुर का यह राजपरिवार मुरादाबाद, बिजनौर, संभल और बदायूँ जैसे इलाकों में बड़े इलाके का मालिक था। यहाँ इनका राज बाबर के पहले का है। भारतीय राजपरिवारों के बारे में बताने वाली एक वेबसाइट के अनुसार, यहाँ के राजा ने बाबर के खिलाफ युद्ध लड़ा था। लेकिन इसमें हार के बाद वह पंजाब चले गए थे। वह औरंगजेब के काल में लौटे और अपना राज वापस कायम किया।

इसी के अनुसार, इसी राजपरिवार के राजा प्रद्युमन कृष्ण सिंह ने 1857 के संग्राम में अंग्रेजों की मदद की, जिसका इनाम भी उन्हें मिला। यह राजा 1839 से 1880 तक यहाँ राज कर रहे थे। संभवतः, इन्हीं के दौर में यह बावड़ी बनी होगी। इनके ही वंश में राजा जगत सिंह हुए। उनकी पत्नी प्रीतम कँवर थीं। प्रीतम कँवर की 1982 में मौत हो गई थी। इससे पहले उन्होंने अपनी बहू सुरेन्द्र बाला को इस बावड़ी समेत तमाम सम्पत्तियाँ दी थी। सुरेन्द्रबाला की पोती शिप्रा गैरा अब यहाँ आई हैं।

शिप्रा गैरा ने भास्कर को बताया है कि 1995 तक वह चंदौसी की इस बावड़ी में आती थीं। शिप्रा गैरा उन रानी सुरेन्द्रबाला की पोती हैं, जिनके पास इस बावड़ी का मालिकाना हक़ हुआ करता था। उन्होंने अपने गोद लिए हुए बेटे विष्णु कुमार को इस बावड़ी समेत तमाम जमीनें दी थी। शिप्रा गैरा ने बताया कि वह जब आती थीं तब यहाँ एक बाग़ हुआ करता था और कुआँ भी चलताऊ हालत में था। सुरेन्द्रबाला के पोते ने भी इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी दादी ने अपने बेटे के बजाय गोद लिए हुए बेटे को इसका मालिकाना हक़ दिया था।

ASI की टीम पहुँची

नगर पालिका टीम ने इस बावड़ी की खुदाई काफी सावधानी से करवाई है। यहाँ पर मशीनों की बजाय नगरपालिका के मजदूरों को लगाया गया है। वह हाथों से खुदाई कर रहे हैं। बावड़ी की खुदाई का काम पाँचवे दिन बुधवार (25 दिसम्बर, 2024) को भी जारी था। यहाँ पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भी एक टीम पहुँची है। उसने खुदाई के काम को देखा है और बावड़ी का निरीक्षण किया है। ASI ने इस बावड़ी के फोटो-वीडियो भी बनाए हैं। यहाँ पर मांग हो रही कि बाकी मंदिरों का भी पता लगाया जाए।

वाजपेयी की 100वीं जयंती पर PM मोदी ने बुंदेलखंड को जल ऊर्जा देने की रखी नींव, जानिए क्या है केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट: कब तक होगी पूरी, कैसे होगा फायदा

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखी। पीएम मोदी दोपहर करीब 12:30 बजे पीएम मोदी खजुराहो पहुँचे, जहाँ उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की आधारशिला भी रखी। ये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के अंतर्गत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है।

साल 2030 तक जुड़ जाएँगी केन और बेतवा नदी

केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत केन नदी के पानी को मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में भेजा जाएगा। केन नदी, जो जबलपुर के पास कैमूर पहाड़ों से निकलती है और उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी में मिलती है, से पानी बेतवा नदी तक ले जाया जाएगा। बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलकर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना से मिलती है। इस परियोजना के अंतर्गत केन नदी पर एक बांध बनाया जाएगा और 221 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से पानी को बेतवा नदी तक पहुँचाया जाएगा।

यह परियोजना कुल 44,605 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। इससे मध्य प्रदेश के 10 जिलों के लगभग 44 लाख लोग और उत्तर प्रदेश के 4 जिलों के 21 लाख लोग, यानी कुल 65 लाख लोगों को लाभ पहुँचेगा। इन इलाकों में सिंचाई की समस्या का समाधान होगा, पीने का पानी उपलब्ध होगा और औद्योगिक विकास के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

इस परियोजना से मध्य प्रदेश के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया जिलों में करीब 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। उत्तर प्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर और बांदा जिलों को भी इससे काफी लाभ होगा। खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र, जो लंबे समय से सूखे की समस्या से जूझ रहा है, इस परियोजना के जरिए जीवनदायिनी सुविधा प्राप्त करेगा।

कैसे पूरा होगा यह प्रोजेक्ट?

  • डैम का निर्माण: परियोजना के तहत दौधन बांध बनाया जाएगा, जो केन नदी के पानी को संग्रहीत करेगा। इस बांध से पानी को बेतवा नदी तक पहुँचाया जाएगा।
  • नहर का निर्माण: केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा। यह नहर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुँचाएगी।
  • जल बंटवारे की व्यवस्था: नवंबर से अप्रैल के बीच पानी का वितरण होगा। इस दौरान उत्तर प्रदेश को 750 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) और मध्य प्रदेश को 1834 MCM पानी मिलेगा।
  • ऊर्जा उत्पादन: परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इससे हरित ऊर्जा में योगदान बढ़ेगा और औद्योगिक विकास के लिए बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। औद्योगिक इकाइयों को भी पर्याप्त पानी की आपूर्ति मिलने से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

हालाँकि, इस परियोजना को पूरा करने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। पर्यावरणीय और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी चिंताओं ने इसकी प्रगति को लंबे समय तक बाधित किया। यह परियोजना पन्ना अभयारण्य से होकर गुजरती है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के सवाल उठे। लेकिन मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इस परियोजना को हरी झंडी दी गई।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का विचार सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में 2002 में आया था। उन्होंने देश में 36 नदियों को जोड़ने की योजना बनाई थी ताकि सूखे और बाढ़ की समस्या का समाधान हो सके। हालाँकि, इस योजना को आगे बढ़ाने में कई प्रशासनिक और पर्यावरणीय अड़चनें आईं। 2014 में मोदी सरकार ने इस योजना को फिर से शुरू किया और अब केन-बेतवा लिंक परियोजना को इसकी पहली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

1858 में पहली बार आया था ऐसा प्रस्ताव

भारत में नदियों को जोड़ने की अवधारणा नई नहीं है। ब्रिटिश काल में भी इस विचार पर चर्चा हुई थी। 1858 में ब्रिटिश सैन्य इंजीनियर आर्थर थॉमस कॉटन ने बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा था ताकि सूखे और बाढ़ जैसी समस्याओं से निपटा जा सके। स्वतंत्रता के बाद भी नदियों को जोड़ने के कई प्रयास हुए, लेकिन यह योजना कभी पूरी तरह से अमल में नहीं लाई जा सकी।

केन-बेतवा परियोजना के तहत जल वितरण को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ है। हर साल नवंबर से अप्रैल के बीच यूपी को 750 एमसीएम और एमपी को 1834 एमसीएम पानी मिलेगा। इस परियोजना की निगरानी राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण (एनडब्ल्यूडीए) और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा की जाएगी।

इस परियोजना के शुरू होने से न केवल जल संकट का समाधान होगा, बल्कि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह परियोजना अटल बिहारी वाजपेयी के उस सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें उन्होंने नदियों को जोड़कर जल संकट का समाधान करने की परिकल्पना की थी।

‘मेरा वोट कभी नहीं कटा, मैं हमेशा वोट डालती हूँ’: जिस महिला का नाम लेकर प्रपंच फैला रहे थे केजरीवाल, उसने ही AAP की ‘झूठ-फरेब’ की राजनीति की खोली पोल

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की राजनीति एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किदवई नगर में आयोजित एक कार्यक्रम में दावा किया कि एक महिला मतदाता चंद्रा का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। उन्होंने इसे अपने भाषण में मतदाताओं को गुमराह करने और अपनी सरकार की ओर ध्यान खींचने करने का जरिया बनाया।

हालाँकि, जब चंद्रा ने खुद इस दावे पर प्रतिक्रिया दी, तो केजरीवाल के बयान की पोल खुल गई। चंद्रा ने साफ कहा, “मेरा नाम कभी वोटर लिस्ट से नहीं कटा। मैंने हमेशा नियमित रूप से अपना वोट डाला है। मुझे नहीं पता कि केजरीवाल ने ऐसा क्यों कहा। हो सकता है उन्हें कोई गलतफहमी हुई हो।” चंद्रा ने यह भी जोड़ा कि शायद केजरीवाल ने किसी और महिला के बारे में बात की हो, लेकिन गलती से उनकी ओर इशारा कर दिया।

चंद्रा के पति एम. रघु ने भी इस मामले में सफाई दी। उन्होंने कहा, “हम दोनों का नाम हमेशा वोटर लिस्ट में था और है। हो सकता है केजरीवाल ने अनजाने में चंद्रा का नाम लिया हो।”

अब बीजेपी ने इस मामले पर आप से जवाब माँगा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने हमला बोलते हुए एक्स पर लिखा, “मतदाता सूची पर भ्रम फैला रहे महाठग को महिला ने दिया मुँहतोड़ जवाब। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी एक सुसंगठित नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध प्रवास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। इस राष्ट्रविरोधी अभियान से ध्यान हटाने के लिए उन्होंने भाजपा पर पूर्वांचलियों के वोटर कार्ड रद्द करने का झूठा आरोप लगाया। उनकी चाल और झूठ दोनों ही पूरी तरह से उजागर हो चुके हैं। अब अरविंद केजरीवाल बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं अपने ही फैलाए जाल में!”

इस घटनाक्रम ने केजरीवाल की राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल ने इस तरह के दावे किए हैं। विरोधियों का कहना है कि वह अक्सर बिना जाँचे-परखे आरोप लगाते हैं, जिससे उनकी राजनीति का असली चेहरा उजागर होता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह सुविधाएँ झूठ और गुमराह करने वाली राजनीति को सही ठहराती हैं? क्या मतदाताओं को भ्रमित करना किसी भी सरकार के लिए सही कदम हो सकता है?

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को 2100 रुपए प्रति माह देने की घोषणा की थी और इसका रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया था। हालाँकि दिल्ली सरकार के ही विभाग ने साफ किया कि ऐसी कोई योजना अभी शुरू नहीं हुई है।

बहरहाल, केजरीवाल के इन दावों से न केवल उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ा है, बल्कि यह भी दिखा है कि कैसे वह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए ऐसे बयान देते हैं। चंद्रा और उनके पति के बयान ने साफ कर दिया कि यह घटना केवल एक राजनीतिक चाल थी।

इस पूरे घटनाक्रम से यह बात साफ हो जाती है कि केजरीवाल की राजनीति केवल लोकलुभावन वादों और झूठे दावों पर आधारित है। जनता के मुद्दों से भटकाने और गुमराह करने की यह कोशिश एक जिम्मेदार नेता के लिए बेहद निराशाजनक है। इससे यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि जनता के मुद्दों को भूलकर केवल सुर्खियाँ बटोरने के लिए झूठे दावे किए जाएँ?

अटल जी का व्यक्तित्व अपनी तरफ खींचता था, उनका रोपा बीज आज वटवृक्ष: PM मोदी ने वाजपेयी की 100वीं जयंती पर लिखा लेख

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं…लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? अटल जी के ये शब्द कितने साहसी हैं…कितने गूढ़ हैं। अटल जी, कूच से नहीं डरे…उन जैसे व्यक्तित्व को किसी से डर लगता भी नहीं था। वो ये भी कहते थे… जीवन बंजारों का डेरा आज यहां, कल कहां कूच है..कौन जानता किधर सवेरा…आज अगर वो हमारे बीच होते, तो वो अपने जन्मदिन पर नया सवेरा देख रहे होते।

मैं वो दिन नहीं भूलता जब उन्होंने मुझे पास बुलाकर अंकवार में भर लिया था…और जोर से पीठ में धौल जमा दी थी। वो स्नेह…वो अपनत्व…वो प्रेम…मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है।आज 25 दिसंबर का ये दिन भारतीय राजनीति और भारतीय जनमानस के लिए एक तरह से सुशासन का अटल दिवस है। आज पूरा देश अपने भारत रत्न अटल को, उस आदर्श विभूति के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता और सहृदयता से करोड़ों भारतीयों के मन में जगह बनाई। पूरा देश उनके योगदान के प्रति कृतज्ञ है। उनकी राजनीति के प्रति कृतार्थ है।

21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए उनकी एनडीए सरकार ने जो कदम उठाए, उसने देश को एक नई दिशा, नई गति दी। 1998 के जिस काल में उन्होंने पीएम पद संभाला, उस दौर में पूरा देश राजनीतिक अस्थिरता से घिरा हुआ था। 9 साल में देश ने चार बार लोकसभा के चुनाव देखे थे। लोगों को शंका थी कि ये सरकार भी उनकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाएगी। ऐसे समय में एक सामान्य परिवार से आने वाले अटल जी ने, देश को स्थिरता और सुशासन का मॉडल दिया। भारत को नव विकास की गारंटी दी।

वो ऐसे नेता थे, जिनका प्रभाव भी आज तक अटल है। वो भविष्य के भारत के परिकल्पना पुरुष थे। उनकी सरकार ने देश को आईटी, टेलीकम्यूनिकेशन और दूरसंचार की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ाया। उनके शासन काल में ही, एनडीए ने टेक्नॉलजी को सामान्य मानवी की पहुंच तक लाने का काम शुरू किया। भारत के दूर-दराज के इलाकों को बड़े शहरों से जोड़ने के सफल प्रयास किये गए। वाजपेयी जी की सरकार में शुरू हुई जिस स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने भारत के महानगरों को एक सूत्र में जोड़ा वो आज भी लोगों की स्मृतियों पर अमिट है।

लोकल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भी एनडीए गठबंधन की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किए। उनके शासन काल में दिल्ली मेट्रो शुरू हुई, जिसका विस्तार आज हमारी सरकार एक वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में कर रही है। ऐसे ही प्रयासों से उन्होंने ना सिर्फ आर्थिक प्रगति को नई शक्ति दी, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों को एक दूसरे से जोड़कर भारत की एकता को भी सशक्त किया।

जब भी सर्व शिक्षा अभियान की बात होती है, तो अटल जी की सरकार का जिक्र जरूर होता है। शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानने वाले वाजपेयी जी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहाँ हर व्यक्ति को आधुनिक और गुणवत्ता वाली शिक्षा मिले। वो चाहते थे भारत के वर्ग, यानि ओबीसी, एससी, एसटी, आदिवासी और महिला सभी के लिए शिक्षा सहज और सुलभ बने। उनकी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े आर्थिक सुधार किए।

इन सुधारों के कारण भाई-भतीजावाद में फँसी देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। उस दौर की सरकार के समय में जो नीतियाँ बनीं, उनका मूल उद्देश्य सामान्य मानव के जीवन को बदलना ही रहा। उनकी सरकार के कई ऐसे अद्भुत और साहसी उदाहरण हैं, जिन्हें आज भी हम देशवासी गर्व से याद करते है। देश को अब भी 11 मई 1998 का वो गौरव दिवस याद है, एनडीए सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद पोकरण में सफल परमाणु परीक्षण हुआ।

इसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ का नाम दिया गया। इस परीक्षण के बाद दुनियाभर में भारत के वैज्ञानिकों को लेकर चर्चा होने लगी। इस बीच कई देशों ने खुलकर नाराजगी जताई, लेकिन तब की सरकार ने किसी दबाव की परवाह नहीं की। पीछे हटने की जगह 13 मई को न्यूक्लियर टेस्ट का एक और धमाका कर दिया गया। 11 मई को हुए परीक्षण ने तो दुनिया को भारत के वैज्ञानिकों की शक्ति से परिचय कराया था। लेकिन 13 मई को हुए परीक्षण ने दुनिया को ये दिखाया कि भारत का नेतृत्व एक ऐसे नेता के हाथ में है, जो एक अलग मिट्टी से बना है।

उन्होंने पूरी दुनिया को ये संदेश दिया, ये पुराना भारत नहीं है। पूरी दुनिया जान चुकी थी, कि भारत अब दबाव में आने वाला देश नहीं है। इस परमाणु परीक्षण की वजह से देश पर प्रतिबंध भी लगे, लेकिन देश ने सबका मुकाबला किया। वाजपेयी सरकार के शासन काल में कई बार सुरक्षा संबंधी चुनौतियां आईं। करगिल युद्ध का दौर आया। संसद पर आतंकियों ने कायरना प्रहार किया। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले से वैश्विक स्थितियां बदलीं, लेकिन हर स्थिति में अटल जी के लिए भारत और भारत का हित सर्वोपरि रहा।

जब भी आप वाजपेयी जी के व्यक्तित्व के बारे में किसी से बात करेंगे तो वो यही कहेगा कि वो लोगों को अपनी तरफ खींच लेते थे। उनकी बोलने की कला का कोई सानी नहीं था। कविताओं और शब्दों में उनका कोई जवाब नहीं था। विरोधी भी वाजपेयी जी के भाषणों के मुरीद थे। युवा सांसदों के लिए वो चर्चाएँ सीखने का माध्यम बनतीं। कुछ सांसदों की संख्या लेकर भी, वो कॉन्ग्रेस की कुनीतियों का प्रखर विरोध करने में सफल होते। भारतीय राजनीति में वाजपेयी जी ने दिखाया, ईमानदारी और नीतिगत स्पष्टता का अर्थ क्या है।

संसद में कहा गया उनका ये वाक्य… सरकारें आएंगी, जाएँगी, पार्टियाँ बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए…आज भी मंत्र की तरह हम सबके मन में गूँजता रहता है। वो भारतीय लोकतंत्र को समझते थे। वो ये भी जानते थे कि लोकतंत्र का मजबूत रहना कितना जरुरी है। आपातकाल के समय उन्होंने दमनकारी कॉन्ग्रेस सरकार का जमकर विरोध किया, यातनाएँ झेली। जेल जाकर भी संविधान के हित का संकल्प दोहराया। NDA की स्थापना के साथ उन्होंने गठबंधन की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित किया।

वो अनेक दलों को साथ लाए और NDA को विकास, देश की प्रगति और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधि बनाया। पीएम पद पर रहते हुए उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब हमेशा बेहतरीन तरीके से दिया। वो ज्यादातर समय विपक्षी दल में रहे, लेकिन नीतियों का विरोध तर्कों और शब्दों से किया। एक समय उन्हें कॉन्ग्रेस ने गद्दार तक कह दिया था, उसके बाद भी उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।

उन में सत्ता की लालसा नहीं थी। 1996 में उन्होंने जोड़-तोड़ की राजनीति ना चुनकर, इस्तीफा देने का रास्ता चुन लिया। राजनीतिक षड्यंत्रों के कारण 1999 में उन्हें सिर्फ एक वोट के अंतर के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा। कई लोगों ने उनसे इस तरह की अनैतिक राजनीति को चुनौती देने के लिए कहा, लेकिन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी शुचिता की राजनीति पर चले। अगले चुनाव में उन्होंने मजबूत जनादेश के साथ वापसी की।

संविधान के मूल्य संरक्षण में भी, उनके जैसा कोई नहीं था। डॉ. श्यामा प्रसाद के निधन का उनपर बहुत प्रभाव पड़ा था। वो आपात के खिलाफ लड़ाई का भी बड़ा चेहरा बने। इमरजेंसी के बाद 1977 के चुनाव से पहले उन्होंने ‘जनसंघ’ का जनता पार्टी में विलय करने पर भी सहमति जता दी। मैं जानता हूँ कि ये निर्णय सहज नहीं रहा होगा, लेकिन वाजपेयी जी के लिए हर राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता की तरह दल से बड़ा देश था, संगठन से बड़ा, संविधान था।

हम सब जानते हैं, अटल जी को भारतीय संस्कृति से भी बहुत लगाव था। भारत के विदेश मंत्री बनने के बाद जब संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देने का अवसर आया, तो उन्होंने अपनी हिंदी से पूरे देश को खुद से जोड़ा। पहली बार किसी ने हिंदी में संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात कही। उन्होंने भारत की विरासत को विश्व पटल पर रखा। उन्होंने सामान्य भारतीय की भाषा को संयुक्त राष्ट्र के मंच तक पहुँचाया। राजनीतिक जीवन में होने के बाद भी, वो साहित्य और अभिव्यक्ति से जुड़े रहे।

वो एक ऐसे कवि और लेखक थे, जिनके शब्द हर विपरीत स्थिति में व्यक्ति को आशा और नव सृजन की प्रेरणा देते थे। वो हर उम्र के भारतीय के प्रिय थे। हर वर्ग के अपने थे। मेरे जैसे भारतीय जनता पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं को उनसे सीखने का, उनके साथ काम करने का, उनसे संवाद करने का अवसर मिला। अगर आज बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है तो इसका श्रेय उस अटल आधार को है, जिसपर ये दृढ़ संगठन खड़ा है।

उन्होंने बीजेपी की नींव तब रखी, जब कॉन्ग्रेस जैसी पार्टी का विकल्प बनना आसान नहीं था। उनका नेतृत्व, उनकी राजनीतिक दक्षता, साहस और लोकतंत्र के प्रति उनके अगाध समर्पण ने बीजेपी को भारत की लोकप्रिय पार्टी के रूप में प्रशस्त किया। श्री लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों के साथ, उन्होंने पार्टी को अनेक चुनौतियों से निकालकर सफलता के सोपान तक पहुँचाया।

जब भी सत्ता और विचारधारा के बीच एक को चुनने की स्थितियां आईं, उन्होंने इस चुनाव में विचारधारा को खुले मन से चुन लिया। वो देश को ये समझाने में सफल हुए कि कॉन्ग्रेस के दृष्टिकोण से अलग एक वैकल्पिक वैश्विक दृष्टिकोण संभव है। ऐसा दृष्टिकोण वास्तव में परिणाम दे सकता है। आज उनका रोपित बीज, एक वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा की नव पीढ़ी को रच रहा है। अटल जी की 100वीं जयंती, भारत में सुशासन के एक राष्ट्र पुरुष की जयंती है।

आइए हम सब इस अवसर पर, उनके सपनों को साकार करने के लिए मिलकर काम करें। हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो सुशासन, एकता और गति के अटल सिद्धांतों का प्रतीक हो। मुझे विश्वास है, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के सिखाए सिद्धांत ऐसे ही, हमें भारत को नव प्रगति और समृद्धि के पथ पर प्रशस्त करनें की प्रेरणा देते रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह लेख अपने ब्लॉग पर लिखा है। आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

रेप केस में ACP मोहसिन खान की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट ने लगा रखी है रोक, कानपुर IIT की पीड़ित छात्रा ने दर्ज कराई एक और FIR: कहा- मुझे बदनाम कर रहे, धमकी दे रहे

पीएचडी छात्रा से रेप के आरोपों से घिरे उत्तर प्रदेश पुलिस के ACP मोहसिन खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पीड़िता ने मंगलवार (24 नवंबर 2024) को मोहसिन के खिलाफ कानपुर में एक नई FIR दर्ज करवाई। इस FIR में मोहसिन और उनके वकील पर पीड़िता को आपराधिक धमकी देने और मानहानि सहित कई आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में भी जाँच शुरू कर दी है। दरअसल, मोहसिन शादी के नाम पर पीड़िता का शोषण कर रहे थे। उनकी बीवी का इंस्टाग्रम हैंडल चेक करके पीड़िता को अपने साथ हो रही धोखाधड़ी की जानकारी हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को पीड़िता कल्याणपुर थाने पहुँची। यहाँ उसने ACP मोहसिन खान और उनके वकील गौरव दीक्षित के खिलाफ थाने में तहरीर दी। तहरीर में पीड़िता ने आरोप लगाया कि मोहसिन और गौरव दीक्षित उसके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। इस बयानबाजी से न सिर्फ पीड़िता का चरित्र हनन हो रहा है, बल्कि उसकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

आरोप लगाया गया है कि हाई कोर्ट से मिले स्टे के बाद मोहसिन खान अपनी ताकत का दुरूपयोग कर रहे हैं और पीड़िता को धमका रहे हैं। मोहसिन खान की तरफ से मिल रही धमकियों की वजह से वो डिप्रेशन में आ गई है। तनाव की वजह से वो IIT कैम्पस से बाहर नहीं निकल पा रही है। उसे घबराहट हो रही है, जिसकी वजह से वो अपनी कानूनी लड़ाई ठीक से नहीं लड़ पा रही है।

वहीं, नई FIR में मोहसिन खान के साथ उनके वकील गौरव दीक्षित को भी नामजद किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता पर निर्दोष बच्चे को मारने का झूठा आरोप लगाया। यहाँ तक कि दीक्षित ने पीड़िता के शादीशुदा होने और कई रिश्तों में रहने के आरोप लगाए। शिकायत में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि पीड़िता पर जल्द ही झूठी FIR दर्ज करवाने की तैयारी है।

पीड़िता ने म्यूजिक कंसर्ट के कुछ वीडियो भी सबूत के तौर पर पेश किए हैं। इन वीडियो में ACP मोहसिन खान पीड़ित छात्रा के साथ डांस कर रहे हैं। पुलिस इस वीडियो को एक अहम सबूत मानकर चल रही है। वह पीड़िता और मोहसिन खान के बीच नजदीकी के सबूत के तौर पर इस वीडियो को अदालत में भी पेश करने की तैयारी कर रही है।

पीड़िता की इस शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) में मानहानि की धारा 356 (2) और नुकसान पहुँचाने की धारा 351(1) के तहत दर्ज हुई है। कल्याणपुर के ACP अभिषेक पांडेय ने मीडिया को बताया कि मामले में जाँच जारी है। सामने आए तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

तेज हुई SIT की जाँच

इस बीच ACP मोहसिन खान पर लगे आरोपों की जाँच के लिए गठित SIT टीम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। विशेष जाँच दल (SIT) ने सोमवार को कानपुर IIT में 4 अन्य लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें 2 गार्ड, 1 प्रोफेसर और पीड़िता का एक दोस्त शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सभी ने ACP मोहसिन और पीड़िता के बीच में पूर्व में रही नजदीकियों को स्वीकार किया है।

पीड़िता के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट आदि भी रिकवर करके जाँच करवाई जा रही है। SIT को दिए गए बयान में पीड़िता ने बताया है कि 27 नवंबर 2024 को ACP मोहसिन खान एक बच्चे के अब्बा बने थे। उस समय उनकी बीवी अस्पताल में भर्ती थी। अगले दिन 28 नवंबर को मोहसिन खान पीड़िता से मिलने IIT कैम्पस पहुँचे। यहाँ ACP मोहसिन खान लगभग 4 से 5 घंटे तक रहे।

इस दौरान पीड़ित छात्रा को मोहसिन खान के व्यवहार में काफी बदलाव दिखा। इसके बाद पीड़िता ने 28 नवंबर 2024 को मोहसिन खान की बीवी के सोशल मीडिया हैंडलों को पहली बार खँगाला था। इस दौरान पीड़िता को पता चला कि मोहसिन खान पहले से ही शादीशुदा हैं और उनका हाल ही में उनका एक बच्चा भी हुआ है।

क्या है पूरा मामला

बताते चलें कि 12 दिसंबर 2024 को कानपुर के IIT में PhD कर रही एक छात्रा ने साल 2013 बैच के UP PCS अधिकारी ACP मोहसिन खान पर शादी का झाँसा देकर लगातार रेप करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने कहा था कि मोहसिन ने खुद को कुँवारा बताकर उससे बातचीत शुरू की थी। मोहसिन का भेद खुला तो उन्होंने अपनी बीवी से तलाक लेने का झाँसा दिया और पीड़िता का शोषण करते रहे।

सँभल में कुएँ की खुदाई कर रही नगरपालिका की टीम को धमकाने लगा मस्जिद का मुतवल्ली आमिर, पुलिस ने भेजा जेल: फरार 7 दंगाई भी पकड़ाए

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध कब्जेदारी के खिलाफ और प्राचीन धरोहरों की तलाश में चल रही खुदाई के काम में अड़ंगा डालने का प्रयास किया गया है। मंगलवार (24 दिसंबर 2024) को यह बाधा शहर की एक मस्जिद के मुतवल्ली ने डाली है। आमिर नाम के मुतवल्ली ने कुओं की खुदाई का विरोध किया। उसकी इस करतूत पर नाराज हिन्दू समुदाय के लोगों ने गुस्सा जताया। पुलिस ने आमिर का चालान कर दिया। वहीं, 24 नवंबर की हिंसा से जुड़े 7 अन्य दंगाइयों को भी पुलिस ने पकड़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है। संभल नगरपालिका शहर के तमाम कुओं का जीर्णोद्धार करवा रही है। इसी कड़ी में नगरपालिका के कर्मचारी मंगलवार लाडम सराय मोहल्ले में पहुँचे। इस मोहल्ले में एक मस्जिद है। मस्जिद के बगल एक खाली जमीन है। इस जमीन पर एक कुआँ है, जिसे मिट्टी में दबा दिया गया था। कर्मचारी कुछ मजदूरों के साथ मिलकर इसकी खुदाई में जुट गए।

कुछ ही देर में पास की मस्जिद का मुतवल्ली आमिर वहाँ आ धमका। वह नगरपालिका के स्टाफ सहित खुदाई कर रहे मजदूरों क हड़काने लगा। वहाँ आसपास के मुस्लिम तबके के लोग भी जमा होने लगे। इसी दौरान हिन्दुओं को भी मुतवल्ली के करतूत की जानकारी मिली। वो आमिर की हरकत के विरोध में मौके पर पहुँच गए। दोनों पक्षों के आमने-सामने होने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई।

पुलिस बल ने हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के लोगों को समझा-बुझा कर घर वापस लौटाया। हालाँकि मुतवल्ली आमिर पर प्रशासन के समझाने का कोई असर नहीं पड़ा। वह घटनास्थल पर हंगामा करता रहा। आखिरकार पुलिस ने आमिर को गिरफ्तार कर लिया। उसका शांतिभंग की धाराओं में चालान कर दिया गया है। मुतवल्ली की गिरफ्तारी के बाद कुएँ की खुदाई का काम फिर से शुरू कर दिया गया।

अब तक 47 दंगाई गिरफ्तार

इस बीच 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान की गई हिंसा के फरार आरोपितों की धरपकड़ में जुटी संभल पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फरार चल रहे 7 अन्य हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शोएब, सुजाउद्दीन, आजम, जावेद अख्तर, शाहद, मुस्तफा हसन और अजहरूद्दीन हैं। ये सभी संभल के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। इनकी पहचान हिंसा के दौरान मिली वीडियो फुटेज के आधार पर हुई है।

पुलिस को इन सभी की लोकेशन शहर की बुलबुली मस्जिद के पास मिली थी। इन 7 नई गिरफ्तारियों के बाद अब संभल हिंसा के 1 माह बाद गिरफ्तार हुए कुल उपद्रवियों की तादाद 47 पहुँच गई है। अन्य 91 हमलावर चिन्हित किए जा चुके हैं। इनको भी पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। फ़िलहाल पुलिस अभी तमाम नामजदों सहित अन्य अज्ञात हमलावरों की पहचान और लोकेशन ट्रेस कर के दबिश दे रही है।

पहले मर्दों के साथ बनाता था यौन संबंध, फिर हत्या कर उनकी लाश के पैर छूकर माँगता था माफी: पकड़ा गया समलैंगिक सीरियल किलर, 11 लोगों की कर चुका है हत्या

पंजाब मे पुलिस ने एक सीरियल किलर को पकड़ा है। उसने अलग-अलग समय पर 11 लोगों की हत्याएँ की थीं। पकड़े गए शख्स ने हत्या, लूट और अप्राकृतिक संबंध बनाने की बात कबूली है। पकड़ा गया हत्यारा एक समलिंगी (गे) है और नशे का आदी भी था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूपनगर जिले की पुलिस ने सोमवार (23 दिसंबर, 2024) को उसे गिरफ्तार किया। आरोपित की पहचान 43 वर्षीय सोढ़ी उर्फ़ रामस्वरूप के तौर पर हुई है। सोढ़ी 3 बच्चों का पिता है। नशा व अन्य गंदी आदतों की वजह से 2 साल पहले उसके परिवार ने उसका बहिष्कार कर दिया था।

घर से निकाले जाने के बाद सोढ़ी इधर से उधर आवारा बन कर घूमा करता था। वह अक्सर लोगों से लिफ्ट ले कर उनके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता था। बाद में वह लोगों से पैसों की माँग करता था। माँग न पूरी होने पर वह सामने वाले की हत्या कर के उनका सामान लूट लिया करता था। उसकी गिरफ्तारी से हालिया कई हत्याओं के बारे में खुलासा हुआ है।

उसने अगस्त, 2024 में कीरतपुर साहिब में भी एक युवक को मारा था। 18 अगस्त इस 37 वर्षीय एक व्यक्ति की लाश मिली थी। उसकी हत्या गला घोंट कर की गई थी। मृतक की तलाश मनिंदर सिंह के तौर पर हुई थी। पुलिस ने इसके बाद इस मामले की जाँच चालू की थी। अब इस मामले में होशियारपुर जिले के रहने वाले सोढ़ी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मनिंदर सिंह को मार कर सोढ़ी ने उसका मोबाइल भी लूट लिया था। वह मृतक की बाइक भी साथ ले जाना चाहता था पर पहिया नाली में फँस जाने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पाया। पूछताछ में सोढ़ी ने कबूल किया कि वह 11 लोगों की हत्याएँ अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग समय में कर चुका है।

ये हत्याएँ रूपनगर के अलावा होशियारपुर और फतेहगढ़ साहिब आदि जिलों में की गईं हैं। पूछताछ में यह भी पता चला है कि कत्ल करने के बाद उसे पछतावा होता था। वह लाश के पैर छू कर माफ़ी माँगता था। सोढ़ी द्वारा मारे गए लोगों में रूपनगर के जगजीत नगर का हरप्रीत सिंह भी शामिल है।

हरप्रीत की नग्न लाश रूपनगर के निरंकारी भवन के पास 24 जनवरी, 2024 को मिली थी। सोढ़ी ने कत्ल के बाद उसकी पीठ पर लिख दिया था। सोढ़ी का ही एक अन्य शिकार रूपनगर के ही घनौली इलाके में पड़ने वाले गाँव बेगमपुरा का मुकन्दर उर्फ़ बिल्ला भी बना था। 43 वर्षीय बिल्ला ट्रैक्टर बनाने का काम करता था। अप्रैल 2024 में उसकी लाश मिली थी।

बिल्ला के शरीर पर भी घाव पाए थे। बिल्ला और हरप्रीत की हत्या में पुलिस अज्ञात आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच कर रही थी। सोढ़ी ने इन दोनों हत्याओं में शामिल होना कबूल कर लिया है। आनंदपुर साहिब में एक व्यक्ति के साथ सोढ़ी ने मारपीट भी की थी।

पुलिस ने सोढ़ी से विस्तृत पूछताछ के लिए कोर्ट से उसका 5 दिनों का रिमांड लिया है। रिमांड अवधि के दौरान उसके द्वारा क़बूले गए सभी केसों की तस्दीक और कुछ नए अपराधों में सोढ़ी की संलिप्तता मिलने की आशंका है।

न संजीवनी, न महिला सम्मान… अपने दस्तावेज न दें, हो सकता है फ्रॉड: केजरीवाल की स्कीम को दिल्ली सरकार के ही विभागों ने बताया फर्जी, AAP चला रही रजिस्ट्रेशन अभियान

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार विधानसभा चुनावों से पहले अपनी ‘महिला सम्मान योजना’ और ‘संजीवनी योजना’ को खूब प्रचारित कर रहे हैं। वहीं, AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल सहित AAP कार्यकर्ता इन योजनाओं के लिए घूम-घूम कर पंजीकरण करा रहे हैं। अब दिल्ली सरकार के दो विभागों- स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास ने नोटिस जारी करके दोनों योजनाओं को फर्जी बताया है।

दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि उसे मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी मिली है कि ‘एक राजनीतिक दल’ ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ के तहत दिल्ली की महिलाओं को 2100 रुपए प्रतिमाह देने का दावा कर रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं की गई है।

नोटिस में आगे कहा गया है कि अगर ऐसी योजना आती है तो उसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा। विभाग ने इस योजना को भ्रामक बताया है और कहा है कि जो भी राजनीतिक दल इस योजना के नाम पर फॉर्म भरवा रहा है, यह धोखाधड़ी के सिवाय और कुछ नहीं है। इसलिए ऐसी धोखाधड़ी से बचें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।

नोटिस में आगे लिखा है, “नागरिकों को सावधान किया जाता है कि इस योजना के नाम पर व्यक्तिगत विवरण जैसे कि बैंक खाता, वोटर आईडी, फोन नंबर आदि के लीक होने का खकतरा हो सकता है और इसका फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं। दिल्ली के सामान्य नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इस गैर-मौजूद योजना के झूठे वादों को ना मानें, क्योंकि ये भ्रामक हैं।”

वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ‘संजीवनी योजना’ को भी धोखाधड़ी बताया है और जनता को सचेत रहने के लिए कहा है। केजरीवाल या आम आदमी पार्टी सरकार की इस कथित योजना में दिल्ली के सभी अस्पतालों में 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। अब विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि इस तरह की कोई योजना ही मौजूद नहीं है।

विभाग का कहना है कि अवैध व्यक्तियों ने पंजीकरण अभियान चलाया है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों से आधार और बैंक खाता जानकारी सहित व्यक्तिगत जानकारी माँगी जा रही है। इसके साथ ही नकली स्वास्थ्य योजना कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने जनता को इस योजना पर विश्वास नहीं करने तथा व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी है।

बता दें कि इससे एक दिन पहले ही भाजपा ने आम आदमी पार्टी की इन योजनाओं को लेकर AAP सरकार पर हमला बोला था। भाजपा ने कहा था कि ये योजनाएँ सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं हैं। दरअसल, AAP ने पहले इन दोनों योजनाओं के लिए अपने वॉलंटियर्स के माध्यम से पूरे दिल्ली में रजिस्ट्रेशन का काम शुरू किया है।

इन नोटिसों के बाद AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राजनीति शुरू कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहा, “महिला सम्मान योजना और संजीवनी योजना से ये लोग (BJP) बुरी तरह से बौखला गए हैं। अगले कुछ दिनों में फ़र्ज़ी केस बनाकर आतिशी जी को गिरफ्तार करने का इन्होंने प्लान बनाया है। उसके पहले “आप” के सीनियर नेताओं पर रेड की जाएँगी।”