महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर लंबे समय से चल रही उठा-पटक पर अब विराम लग गया है। भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और NCP के अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस बीच, महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चारों ओर से प्रतिक्रियाओं का दौर भी चल निकला है।
इसी कड़ी में जहाँ एक तरफ़ राजनीतिक गलियारे में आरोप-प्रत्यारोप का माहौल देखने को मिल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ़ ‘लिबरल गैंग’ ने भी अपना विलाप करना शुरू कर दिया है।
फ़ेक न्यूज़ फैलाने को लेकर हमेशा ट्रोल होने वाली पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने NCP नेता अजित पवार (अब डिप्टी सीएम) पर निशाना साधते हुए लिखा कि महाराष्ट्र में सरकार गठन के सन्दर्भ में लिखा, “हो गया, पवार ने उद्धव ठाकरे और कॉन्ग्रेस को धोखा दिया।”
भाजपा-विरोधी और उसमें भी मोदी-विरोधी पत्रकारिता करके नाम कमाने वाले राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर लिखा कि देवेन्द्र फडणवीस ने ‘अजीत पवार’ के कथित सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार को उजागर करके एक भ्रष्टाचार विरोधी धर्मयुद्ध के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बनाई थी। आज फडणवीस सीएम और अजीत पवार उनके डिप्टी के रूप में !! यह एक महा ट्विस्ट है !! अब देखना यह है कि शरद पवार क्या कहते हैं !!
Devendra Fadnavis made his reputation as an anti corruption crusader by ‘exposing’ Ajit Pawar’s alleged irrigation dept corruption!! Today, Fadnavis CM and Ajit Pawar as his deputy!! This is a Maha twist if ever there was one!! Now to wait to see what Sharad Pawar has to say!!
पत्रकारिता के समुदाय विशेष का हिस्से के रूप में ख्याति प्राप्त निखिल वागले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा, “सलाम @narendramodi पूरी तरह से बेशर्म राजनीति को बढ़ावा देने के लिए!”
अपने एक अन्य ट्वीट में निखिल वागले ने मुख्यमंत्री फडणवीस को घेरते हुए लिखा, “प्रिय देवेन्द्र फडणवीस, आपने सिंचाई घोटाले को लेकर अजित पवार और NCP के ख़िलाफ़ एक अभियान चलाया था। अब आप उन्हीं पर भरोसा कर रहे हैं। क्या आपने अपनी तथाकथित नैतिकता और भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे को डुबो दिया? क्या यह पाखंड नहीं है?”
Dear @Dev_Fadnavis, you ran a campaign against @AjitPawarSpeaks and NCP on irrigation scam. Now you are allying with him. Did you dump your so-called morality and anti-corruption plank? Is this not hypocrisy? #Maharashtragovernmentformation
हमेशा कॉन्ग्रेस का गुणगान करने की ताक में रहने वाली वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार पल्लवी घोष ने कॉन्ग्रेस के सूत्रों के हवाले से ट्वीट किया, “कल देर रात उन्होंने (NCP) हमें (कॉन्ग्रेस) बताया कि हम आज दोपहर को मिलेंगे.. NCP ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है।”
“ they told us late last night we would meet this afternoon .. we have been backstabbed by ncp “ cong sources
पत्रकार वीर सांघवी ने सोनिया गाँधी पर चुटकी लेते हुए लिखा कि छ: साल पहले राहुल गाँधी के कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष बनने से पहले उनकी माँ ने उन्हें चेतावनी दी थी कि ‘पवार ज़हर हैं’। लेकिन, राहुल गाँधी ने उनकी चेतावनी को ठीक से न समझते हुए ‘पावर ज़हर है’ पर भाषण दिया। लेकिन, अब उन्हें पता चल गया होगा।
Around six years ago before Rahul became Congress Vice President his mother warned him ‘Pawar is poison’. He misunderstood completely & made a speech quoting her as saying “power is poison”. Now they know.? pic.twitter.com/SggNuu9frZ
ग़ौरतलब है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी और किसके साथ सरकार बनेगी, इस पर लंबे समय से सियासी दाँव-पेंच का खेल चल रहा था। लेकिन, आज सुबह एकाएक बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते इस पर विराम लग गया। अंतत: देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए राज्य को नई सरकार दी। और इस तरह शिवसेना के ढाई साल के मुख्यमंत्री पद की शपथ पर अड़े रहने की शर्त और NCP-कॉन्ग्रेस की बैठकों के दौर पर पूरी तरह से विराम लग गया।
शिवसेना सांसद संजय राउत का ट्वीट उन्हीं पर उल्टा पड़ गया। राउत के ट्वीट के तकरीबन एक घंटे बाद ही महाराष्ट्र की रानीतिक तस्वीर बदल गई। राज्य में जारी सियासी गतिरोध के बीच शिवसेना के नेता संजय राउत ने शनिवार (नवंबर 23, 2019) सुबह भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसा, लेकिन उनके ट्वीट के एक घंटे बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए उसे पलट दिया।
संजय राउत कभी क्लर्क थे, फिर एडिटर बन कर राजनीति में आए। पिछले कुछ दिनों से उन्होंने शायरी में भी जमकर हाथ आजमाए – रायता फैलाने की जिद तक। आज उनका खुद का रायता फैल गया!
बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कॉन्ग्रेस की सरकार का खाका तकरीबन तैयार हो चुका था। साथ ही बतौर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम पर अनौपचारिक मुहर भी लग चुकी थी। हालाँकि स्पीकर समेत मंत्रालय बँटवारे का पेंच फंसा हुआ था, जिसे जल्दी ही सुलझाने की बात कही जा रही थी।
इस बीच, शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को ट्वीट कर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा था, “जिस-जिस पर ये जग हँसा है, उसी ने इतिहास रचा है।” संजय राउत के इस ट्वीट के एक घंटे बाद देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली, और इस तरह महाराष्ट्र में राजनीति की तस्वीर बदल गई।
संजय राउत ने इससे पहले भी कई अन्य ट्वीट किए। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कभी शायरी पोस्ट किया तो कभी शायरी का सहारा लेकर श्राप तक दिया। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कभी-कभी कुछ रिश्तों से बाहर आ जाना ही अच्छा होता है। अहंकार के लिए नहीं…स्वाभिमान के लिए।”
शिवसेना सांसद ने लिखा, “आहुति बाकी, यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा, अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।आओ फिर से दीया जलाएँ। अटल बिहारी वाजपेयी।”
राउत ने शायराना अंदाज में बीजेपी पर निशाना साधते हुए हबीब जालिब की शायरी ट्वीट करते हुए लिखा था, “तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था। उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था :- हबीब जालिब”
महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच राउत काफी शायराना मूड में नजर आ रहे थे। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था, “यारों नए मौसम ने ये एहसान किया है। याद मुझे दर्द पुराने नहीं आते- बशीर बद्र।”
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में महाराष्ट्र में शिवसेना के सरकार बनाने की तरफ इशारा करते हुए कहा था, “अब हारना और डरना मना है.. हार हो जाती है जब मान लिया जाता है। जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है।”
“लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशीश करने वालों की कभी हार नही होती ।’ बच्चन. हम होंगे कामयाब.. जरूर होंगे…
एक अन्य ट्वीट में भी उन्होंने सरकार बनाने को लेकर विश्वास दिखाते हुए लिखा, “लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती- बच्चन। हम होंगे कामयाब..जरूर होंगे…”
रास्ते की परवाह करूँगा तो मंजिल बुरा मान जाएगी………!
संजय राउत ने दुष्यंत कुमार के एक और शायरी को ट्वीट किया था, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”
उसूलों पर जहाँ आँच आये, टकराना ज़रूरी है जो ज़िन्दा हो, तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है …. जय महाराष्ट्र…
राउत महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे थे और उन्होंने इसी विश्वास को दिखाते हुए एक और ट्वीट किया था, “उसूलों पर जहाँ आँच आए, टकराना ज़रूरी है, जो ज़िन्दा हो, तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है ….जय महाराष्ट्र।”
*साहिब…* *मत पालिए, अहंकार को इतना,* *वक़्त के सागर में कईं,* *सिकन्दर डूब गए..!*
शनिवार (नवंबर 23, 2019) को महाराष्ट्र बड़े राजनीतिक उलटफेर का गवाह बना। तमाम अटकलों और कयासों के बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी सरकार गठन में कामयाब हो गई है। बीजेपी नेता देवेंद्र फड़णवीस ने दोबारा सीएम पद की शपथ ली है। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद पद की शपथ ली है। सुबह करीब आठ बजे राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दोनों नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
BJP-NCP govt in Maharashtra takes charge after President’s Rule revoked at 5.47 am on Saturday: Notification.
राज्य में बीजेपी और एनसीपी की गठबंधन सरकार बनने के बाद अब राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि सुबह 5:47 बजे इसे खत्म कर दिया गया।
जैसा कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जलमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर इशारों में बड़ा बयान देते हुए कहा था कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। राजनीति और क्रिकेट में कुछ असंभव नहीं, वैसा ही आज सुबह देखने को मिला। उन्होंने कहा था कि कई बार आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन नतीजा उसके ठीक उलट होता है। उन्होंने इस तरफ इशारा भी किया था कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी, इसके बारे में वो नहीं बता सकते।
कहाँ तो आज शनिवार को शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस के नेताओं की ओर से महाराष्ट्र में नई सरकार का ऐलान होना था। इन तीनों दलों के नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा भी पेश करने वाले थे, लेकिन शनिवार सुबह बीजेपी ने ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की, जिससे शिवसेना और कॉन्ग्रेस तो क्या, जिसने सुना, हैरान रह गया। बता दें कि शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीन दिवसीय सम्मेलन के लिए दिल्ली की अपनी सप्ताहांत यात्रा रद्द कर दी और मुंबई में ही रहने का फैसला किया।
किसी को अंदाजा नहीं लग पाया कि आखिर शुक्रवार रात को ऐसी कौन सी खिचड़ी पकी कि शनिवार सुबह होते-होते वहाँ बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बन गई। लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र में बीजेपी ने खिचड़ी तभी से पकानी शुरू कर दी थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा की 250वें सत्र में एनसीपी के बारे में तारीफ के पुल बाँधे थे।
लोग तो यह भी कह रहे हैं कि यह पीएम नरेंद्र मोदी की सोची-समझी रणनीति थी। उसके बाद एनसीपी नेता शरद पवार ने बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से संसद भवन में मुलाकात की थी। अब तीन दिन बाद उस मुलाकात का जो रिजल्ट आया है, उससे कॉन्ग्रेस का डर सही प्रतीत हो रहा है।
दरअसल कॉन्ग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह से शरद पवार की मुलाकात की टाइमिंग पर सवाल उठाए थे। शायद कॉन्ग्रेस समझ गई थी कि महाराष्ट्र में राजनीति जिस मोड़ पर है, वैसे में पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले गृह मंत्री से शरद पवार की मुलाकात से बाजी पलट सकती है।
बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में क्या कुछ होना है, यह सब परदे के पीछे चल रहा था। सामने शरद पवार, उद्धव ठाकरे के नाम पर कॉन्ग्रेस को एकमत करने में जुटे थे और पर्दे के पीछे अजित पवार के नेतृत्व में काम चल रहा था। शरद पवार कॉन्ग्रेस और एनसीपी से बात कर रहे थे तो एनसीपी की बी टीम बीजेपी के संपर्क में थी। एनसीपी ने आखिरकार बीजेपी के साथ जाना मुनासिब समझा। जैसा कि अजीत पवार ने बताया, तीन दलों के गठबंधन से बेहतर था बीजेपी के साथ जाकर स्थिर सरकार बनाएँ। उन्होंने किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला लिया।
सीएम फडणवीस ने राष्ट्रवादी पार्टी के नेता अजित पवार को साथ आने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके साथ कई अन्य लोग भी आए। जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया। फड़णवीस ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से राष्ट्रपति जी से अनुशंसा की कि वह राष्ट्रपति शासन वापस लें। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया और उन्होंने एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाया। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वो महाराष्ट्र में स्थिर और स्थाई सरकार दे पाएँगे।
महाराष्ट्र में राजनीतिक अटकलों ने एकाएक करवट बदली, सूबे में भाजपा-एनसीपी (फिलहाल अजित पवार) ने नई सरकार गठित की। देवेंद्र फडणवीस जहाँ मुख्यमंत्री बने, वहीं अजित पवार ने डेप्युटी सीएम के नाम का शपथ ग्रहण लिया। लेकिन, NCP पार्टी प्रमुख शरद पवार ने इस निर्णय पर नाख़ुशी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि भाजपा को समर्थन देने का अजीत पवार का निर्णय उनका व्यक्तिगत निर्णय है न कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) का। शरद पवार ने कहा, “हम उसके इस फ़ैसले का समर्थन नहीं करते हैं।”
Ajit Pawar’s decision to support the BJP to form the Maharashtra Government is his personal decision and not that of the Nationalist Congress Party (NCP). We place on record that we do not support or endorse this decision of his.
वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने महाराष्ट्र में अचानक बदले राजनीतिक समीकरणों पर अश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि NCP ने यूटर्न क्यों लिया हमें नहीं पता। अनवर ने कहा, “देश में सिद्धांत-विचारधारा की राजनीति बची नहीं है। साजिश थी जिसको गुप्त रखा गया। पीएम और भाजपा अपने साजिश में कामयाब हुए।” वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अजित पवार के निर्णय पर वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह निर्णय पार्टी का नहीं है और न ही इस निर्णय को शरद पवार का समर्थन प्राप्त है।
इस बीच, शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स आयोजित की, इसमें उन्होंंने कहा कि बैठक में अजित पवार हमसे बात नहीं करते थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी थी – वो बाहर निकले और अपना फोन बंद कर दिया। राउत ने कहा कि इन सारी बातों से शरद पवार का कोई संबंध नहीं। अजित पवार ने जो निर्णय लिया है, भाजपा की ओर से तोड़ने की कोशिश हुई है, उसे जनता जवाब देगी। उसने शरद पवार को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि अगर देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री नहीं बनते तो अजित पवार आर्थर रोड जेल में होते।
संजय राउत ने कहा कि जो महागठबंधन करने जा रहे थे उससे देश की दिशा बदलने वाली थी। रात में ये पाप हुआ है। दिन में सब के सामने शपथ क्यों नहीं लिया? चोरी की है, डाका डाला है, जनता के साथ दगा किया है। पैसा और सत्ता का दुरुपयोग करके ये धोखा हुआ है। आँखे खुलने के पहले ये पाप नष्ट होगा। राउत ने आगे कहा, “अजित पवार पर बोलने की ज़रूरत नहीं। कल नौ बजे तक हमारे साथ बैठे थे, बात भी कर रहे थे। फिर ग़ायब हो गए। लेकिन वो नज़रों से नज़र नहीं मिला रहे थे क्योंकि उनकी नज़रों में चोरी थी। भाजपा ने राजभवन का दुरुपयोग किया है।”
#WATCH Sanjay Raut, Shiv Sena: Kal 9 baje tak ye mahashaye (Ajit Pawar) hamare saath baithe the, achanak se gayab ho gaye baad mein. Vo nazro se nazre mila kar nahi bol rahe the, jo vyakti paap karne jata hai uski nazar jaise jhukti hai, waise jhuki nazro se baat kar rahe the. pic.twitter.com/dL6olqXFK9
प्रेस कॉन्फ्रेन्स में शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, “मैं मानता था कि राज्यपाल ऐसे व्यक्ति हैं जो आरएसएस से आए हैं, संस्कारी हैं, लेकिन ये अंधेरे में पाप हुआ है, धोखा हुआ है। अजित पवार और उनके साथ जो विधायक हैं उन्होंने छत्रपति शिवाजी और महाराष्ट्र का नाम खराब किया है। जनता जवाब देगी।”
ताजा जानकारी के अनुसार, दोपहर 12:30 बजे उद्धव ठाकरे और शरद पवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस होगी।
महाराष्ट्र में चुनावी नतीजों के बाद से सरकार गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे रहे राजनीतिक घमासान पर रातों-रात विराम लग गया। इसके परिणामस्वरुप महाराष्ट्र में आज सुबह देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की दोबारा शपथ ली। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “जनता ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था, शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया है। महाराष्ट्र की जनता को स्थिर और स्थाई सरकार चाहिए, खिचड़ी सरकार नहीं चाहिए।”
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए एनसीपी के साथ मिलकर काम करेंगे।
Devendra Fadnavis after taking oath as Maharashtra CM again: People had given us a clear mandate, but Shiv Sena tried to ally with other parties after results, as a result President’s rule was imposed. Maharashtra needed a stable govt not a ‘khichdi’ govt. pic.twitter.com/6Zmf9J9qKc
महाराष्ट्र में अब तक राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP), कॉन्ग्रेस और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर कोशिशें की जा रही थी। इसके लिए शुक्रवार (22 नवंबर) को तीनों पार्टियों के बीच दो घंटे तक बैठक भी हुई। इस बैठक में उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी। लेकिन, शनिवार को राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए और महाराष्ट्र में बीजेपी और NCP ने मिलकर नई सरकार का गठन किया।
हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जलमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर इशारों में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने एक समारोह में कहा था कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। कई बार आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन नतीजा उसके ठीक उलट होता है। जो आज वास्तविकता में तब्दील हो गया।
ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को चुनाव हुए थे और नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। राज्य में किसी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करने की वजह से राज्य में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की माँग को लेकर बीजेपी से 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद से राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।
महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ। कल रात तक चले राजनीतिक समीकरण को चौंकाते हुए बीजेपी-एनसीपी ने मिलकर सरकार बना ली है। देवेंद्र फडणवीस को बतौर मुख्यमंत्री दोबारा राज्य की कमान मिल गई है।
Ajit Pawar after taking oath as Deputy CM: From result day to this day no party was able to form Govt, Maharashtra was facing many problems including farmer issues, so we decided to form a stable Govt pic.twitter.com/GucfUVBCnm
शपथ ग्रहण के बाद एनसीपी नेता अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में किसानों की समस्या प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हम किसानों की समस्या को हल करने के लिए साथ आए हैं। नतीजे आने के दिन से लेकर आज तक कोई भी पार्टी सरकार बनाने में सक्षम नहीं थी, महाराष्ट्र किसान मुद्दे सहित कई समस्याओं का सामना कर रहा था, इसलिए हमने एक स्थिर सरकार बनाने का फैसला किया।”
Maharashtra Chief Minister, Devendra Fadnavis: I would like to express my gratitude to NCP’s Ajit Pawar ji, he took this decision to give a stable government to Maharashtra & come together with BJP. Some other leaders also came with us and we staked claim to form government. pic.twitter.com/eq1v9syg8z
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी एनसीपी और अजित पवार का आभार व्यक्त किया है। फडणवीस ने कहा, “मैं एनसीपी के अजीत पवार जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ कि उन्होंने महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार देने और बीजेपी के साथ आने का यह फैसला लिया। कुछ अन्य नेता भी हमारे साथ आए और हमने सरकार बनाने का दावा पेश किया।”
BJP President & Union Home Minister, Amit Shah congratulates Devendra Fadnavis & Ajit Pawar on taking oath as Maharashtra Chief Minister and Deputy Chief Minister, respectively. pic.twitter.com/DBX3gBdPOU
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री एवं अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं। अमित शाह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्हें विश्वास है कि यह सरकार महाराष्ट्र के विकास और कल्याण के प्रति निरंतर कटिबद्ध रहेगी और प्रदेश में प्रगति के नए मापदंड स्थापित होंगे।
इससे पहले फडणवीस ने कहा था, “लोगों ने हमें एक स्पष्ट जनादेश दिया था, लेकिन परिणाम के बाद भी शिवसेना ने अन्य दलों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति शासन लगाया गया। महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार की जरूरत है, एक ‘खिचड़ी’ सरकार की नहीं।”
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को चुनाव हुए थे और नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। राज्य में किसी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करने की वजह से राज्य में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की माँग को लेकर बीजेपी से 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद से राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।
महाराष्ट्र में शनिवार (नवंबर 23, 2019) सुबह भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला।बीजेपी नेता देवेंद्र फड़णवीस ने दोबारा सीएम पद की शपथ ली है। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद पद की शपथ ली है। सुबह करीब आठ बजे राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दोनों नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
Mumbai: Devendra Fadnavis takes oath as Maharashtra Chief Minister again, oath administered by Governor Bhagat Singh Koshyari at Raj Bhawan pic.twitter.com/PiRuq9SkYh
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फड़णवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर भरोसा जताया है।
PM Modi: Congratulations to Devendra Fadnavis ji and Ajit Pawar ji on taking oath as the CM and Deputy CM of Maharashtra respectively. I am confident they will work diligently for the bright future of Maharashtra. pic.twitter.com/ZLFR3D0Jeh
सीएम पद की शपथ लेने के बाद फड़णवीस ने कहा, “लोगों ने हमें एक स्पष्ट जनादेश दिया था, लेकिन परिणाम के बाद भी शिवसेना ने अन्य दलों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति शासन लगाया गया। महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार की जरूरत है, एक ‘खिचड़ी’ सरकार की नहीं।”
Devendra Fadnavis after taking oath as Maharashtra CM again: People had given us a clear mandate, but Shiv Sena tried to ally with other parties after results, as a result President’s rule was imposed. Maharashtra needed a stable govt not a ‘khichdi’ govt. pic.twitter.com/6Zmf9J9qKc
यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ है जब एक दिन पहले ही शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के नेताओं के बीच उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने को लेकर सहमति बनी थी। शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच हुई साझा बैठक के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि शिवसेना सुप्रीमो उद्धव महाराष्ट्र के नए सीएम होंगे। पवार ने यह भी कहा था कि शनिवार (नवंबर 23, 2019) को भी बैठक प्रस्तावित है। मगर इस बीच महाराष्ट्र में बड़ी राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला।
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को चुनाव हुए थे और नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। राज्य में किसी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करने की वजह से राज्य में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की माँग को लेकर बीजेपी से 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद से राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।
नॉर्वे में इस्लाम के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। लोगों का आरोप है कि नॉर्वे का इस्लामीकरण हो रहा है। इस्लाम के ख़िलाफ़ हुई रैली में एक व्यक्ति ने कुरान जला दी, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। प्रदर्शन में लगे एक समूह के नेतृत्व कर रहे लार्स थोर्सन ने पवित्र कुरान की पुस्तक में आग लगा दी। इसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे गुट और इस्लाम समर्थक गुट के बीच जम कर झड़प हुई। ये घटना नार्वे के क्रिस्टियानालैंड की है। पुलिस ने ही इस्लाम विरोधी रैली की इजाजत दी थी। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुरान जलाने की इजाजत माँगी, जिसे पुलिस ने अस्वीकार कर दिया।
इंटरनेट पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि जब थोर्सन कुरान जला रहे होते हैं, तब एक व्यक्ति उन पर अचानक से झपटता है और ऐसा करने से रोकता है। ये घटना शनिवार (नवंबर 16, 2019) की है। इसके बाद पुलिस ने दोनों के बीच चल रहे संघर्ष में हस्तक्षेप किया। पुलिस ने कुरान जलाने वाले थोर्सन और उनपर हमला करने वाले लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की चेतावनी के बावजूद कुरान को जला डाला। कुरान की एक प्रति को जलाया गया और 2 अन्य पुस्तकों को कूड़ेदान में डाल दिया गया।
Utterly condemn the desecration of the Quran in Norway & demand strict action against the criminals & terrorists. Has any Muslim ever desecrated the holy book of any other faith? Then why has Islam been consistently been targeted? https://t.co/lUtmrHNbUV#Norway#JummahMubarak
प्रदर्शनकारियों ने इस्लाम को हिंसा का मजहब बताते हुए पैगम्बर मुहम्मद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक नारेबाजी की। जब थोर्सन ने कुरान जलाया, उसके बाद एक मुस्लिम व्यक्ति उन पर झपट पड़ा और उनकी पिटाई की। मुस्लिम व्यक्ति ने थोर्सन पर अंधाधुंध घूसे बरसाने शुरू कर दिए। थोर्सन ने कुछ दिनों पहले मुस्लिमों को ‘कुख्यात यौन व्यभिचारी’ बताते हुए कई पोस्टर्स बाँटे थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था। उन्हें 30 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था।
Another Quran burning protest was held in Norway, and this time it took place in the largely-Muslim populated city of Kristiansand pic.twitter.com/76VZFY0xKE
नॉर्वे में मुस्लिम शरणार्थियों को लेकर हंगामा मचा हुआ है। नॉर्वे के कई लोगों का मानना है कि इस्लाम तानाशाही वाला मजहब है और जहाँ भी जाता है, वहाँ के लोकतंत्र और क़ानून की इज्जत नहीं करता। कई मुस्लिम नेताओं ने कहा कि कुरान जलाने की घटना के बाद उनकी और उनके समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर को ही लेबोरेटरी में घुसने से रोक दिया गया। आनंद रंगनाथन ने ख़ुद के साथ हुए इस व्यवहार के बारे में ट्विटर पर जानकारी शेयर की। रंगनाथन ने लिखा कि ये उनके लिए काफ़ी बुरा दिन रहा। उन्होंने बताया कि उन्हें उनके ही विभाग व लैब में घुसने से रोका जा रहा है। विरोध प्रदर्शन कर रहे जेएनयू के छात्रों ने एंट्रेंस गेट को चैन से बाँध कर उसपर ताला लगा दिया। इस दौरान वहाँ उपस्थित सिक्योरिटी गार्ड्स देखते रहे और कुछ नहीं कर पाए।
आनंद रंगनाथन ने इसका वीडियो ट्विटर पर शेयर नहीं किया लेकिन यूट्यूब पर ये वीडियो वायरल हो गया। रंगनाथन ने कहा कि वो इस अवैध गतिविधियों में संलग्न छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते, इसीलिए वो इसका वीडियो नहीं अपलोड कर रहे हैं। हालाँकि, आप इस वीडियो को यहाँ देख सकते हैं:
जेएनयू में छात्रों ने प्रोफेसर को अपने ही विभाग में घुसने से रोका
इस दौरान छात्रों ने सिक्योरिटी गार्ड को भी धमकी दी। जब गार्ड ने छात्रों के बात करने के रवैये पर ऐतराज जताया तो एक छात्रा ने उसे चुप रहने की हिदायत देते हुए कहा कि सिक्योरिटी गार्ड बात नहीं करेगा। छात्रों ने लैब के एंट्रेंस पर पोस्टर भी चिपका रखे थे। जब रंगनाथन ने छात्रों से पूछा कि उन्हें 35,000 रूपए मिलते हैं और तब भी वो हॉस्टल फी 10 रुपए से बढ़ाने को लेकर हंगामा कर रहे हैं तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।
Terribly sad day. My colleagues and I were barred from entering our department and labs at JNU by protesting students who chain-locked the entrance. The Security looked on.
Not uploading the clip as don’t want the students’ post-doctoral prospects hurt by their unlawful action.
छात्रों ने कहा कि चाहें तो रंगनाथन पुलिस को बुला लें लेकिन वो अड़े रहेंगे। छात्रों ने आनंद रंगनाथन के साथ बदतमीजी भी की। उन्होंने वहाँ उपस्थित सिक्योरिटी गार्ड के साथ भी दुर्व्यवहार किया।
पिछले सात दिनों से हमने लगातार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे छात्रों की बात आप तक पहुँचाई है। कल तक, ऑपइंडिया के अलावा एक भी संस्थान बच्चों का पक्ष रखने का तो छोड़िए, सुनने को भी तैयार नहीं थे। हमने अपने विस्तृत कवरेज में पूरी कोशिश की कि इसमें छात्रों की बातें, पूर्व छात्रों की बातें, शोध छात्रों की बातें आप तक लाने की। और इस मुद्दे पर मीडिया द्वारा फैलाए गए कई भ्रमों और झूठ का पर्दाफाश करते हुए आपके सामने सच्चाई प्रस्तुत की।
इसी शृंखला में हमने फैकल्टी के कई प्रोफेसरों से भी बात की। अभी हमने विशेष तौर पर बात की सौरभ द्विवेदी जी से जो कि इसी संकाय के साहित्य विभाग के पूर्व शोध छात्र रहे हैं और अभी सहायक प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवा कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत महाविद्यालय, रामटेक, नागपुर, महाराष्ट्र में कार्यरत हैं। सौरभ द्विवेदी के गाइड वहीं हैं जो इस मामले में अभी फोकस में हैं साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर उमाकांत चतुर्वेदी। सौरभ जी ने पहले भी हमसें इस मुद्दे पर बात की है। लेकिन विशेष तौर पर एक बार फिर ऑपइंडिया संपादक अजीत भारती ने उनसे फिरोज काण्ड पर विस्तृत चर्चा की। पेश है उसी इंटरव्यू के मुख्य अंश जो इस पूरे मामले में आपकी ऑंखें खोलने के लिए ज़रूरी है।
ऑपइंडिया: लोग कह रहे हैं संस्कृत को जातिवादी बनाकर रखा है आप लोगों ने। ब्राह्मणों के सिवाय किसी को बोलने देना नहीं चाहते। क्या यह ब्राह्मणवादी भाषा है, इसलिए फ़िरोज खान का विरोध हो रहा है।
सौरभ द्विवेदी: पूरे BHU में एक दूसरे मजहब के टीचर की नियुक्ति का विरोध हो रहा है। ऐसा बिलकुल नहीं है। यह विरोध एक गैर-हिन्दू का ‘धर्म-विज्ञान संकाय’ में नियुक्ति का विरोध है। अगर यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के ही किसी अन्य संकाय में संस्कृत अध्यापक के रूप में होती तो विरोध नहीं होता। विरोध का मूल इस विशेष संकाय में गैर-हिन्दू की नियुक्ति में निहित है और विरोध करने वाले छात्र परम्परावादी हिन्दू हैं जो सनातन हिन्दू परम्पराओं, वेद, वेदांग, कर्मकाण्ड, ज्योतिष के प्रति पूरी श्रद्धा और भाव से समर्पित हैं और अब इस प्रकरण के बाद अपने भविष्य को लेकर आशंकित भी।
फ़िरोज खान के मजहब से होने का उन्हें कोई नुकसान नहीं है, बल्कि फायदा ही है। कुछ लोग मानवीय मूल्यों, संविधान और मुस्लिम होने की बात को लेकर अधिक भ्रमित हैं। आपको बता दूँ कि किसी भी संस्था की स्थापना के पीछे उसके संस्थापक का एक उद्देश्य होता है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ‘हिन्दू’ शब्द और संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ‘धर्म’ शब्द में संस्थापक की बहुत सारी अवधारणाएँ निहित हैं। हमारी परम्परा नामकरण संस्कार करने की रही है, और हम सबसे सार्थक नाम चुनने की कोशिश करते हैं, यह सभी को समझना चाहिए।
देखिए अभी तो बस शुरुआत हो रही है। अगर हमने आज विरोध नहीं किया तो 15 साल बाद इस संकाय में एक दूसरे मजहब का प्रोफेसर होगा, विभागाध्यक्ष होगा, डीन होगा। जो उसी मजहब के कई अन्य लोगों की नियुक्ति करेगा, और एक ऐसा दौर भी आएगा जब हिन्दू विश्वविद्यालय के ‘हिन्दू धर्म संकाय’ का संचालन गैर-हिन्दू करेंगे। वे जिनका इन विषयों से, सनातन परंपरा से, यज्ञ और ज्योतिष से कोई आत्मीय लगाव नहीं होगा, बस यह उनकी जीविका का साधन होगा तो महामना मालवीय जी के इस बगिया में इस संकाय की स्थापना का मूल उद्देश्य ही छिन्न-भिन्न हो जाएगा।
सौरभ द्विवेदी का इंटरव्यू:
ऑपइंडिया: आपके हिसाब से ये मालवीय मूल्य क्या हैं जिनके लिये आप आवाज़ उठा रहे हैं। क्या मालवीय जी धर्म-निरपेक्ष नहीं थे!
सौरभ द्विवेदी: बार-बार डॉ. फिरोज खान के इस नियुक्ति के विरोध में ‘मालवीय मूल्यों’ का हवाला दिया जा रहा है तो समझिए हिन्दू धर्म के सन्दर्भ में मालवीय मूल्य क्या हैं इसकी बानगी बस इससे समझ लीजिए कि 1906 में ‘मुस्लिम लीग’ की स्थापना और उनकी अनावश्यक माँगों को देखकर 1915 में महामना मालवीय कॉन्ग्रेस में अपनी ऊँची साख होने के बावजूद कॉन्ग्रेस से अलग हुए और हिन्दू-हित की बात के लिए 1915 में ‘अखिल भारतीय हिन्दू महासभा’ की स्थापना की। अपने जीवनकाल में 4 बार कॉन्ग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष रहे, जिसमें से दो अधिवेशनों के समय महामना जेल में भी रहे। जब ब्रिटिश हुकूमत में कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग ने 1916 के ‘लखनऊ पैक्ट’ के तहत मजहब विशेष के लिए अतिरिक्त एवं पृथक प्रतिनिधित्व की बात की, तब मालवीय जी ने कॉन्ग्रेस के इस प्रस्ताव का तीखा प्रतिरोध किया। आज वही प्रतिरोध कहीं न कहीं ‘धर्म संकाय’ के छात्र कर रहे हैं।
ऑपइंडिया: यह संस्कृत विभाग और संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में क्या अंतर है। इस संकाय में क्या ऐसी विशेषता है कि आप लोग एक ख़ास मजहब वाले को नहीं आने देना चाहते। इससे धर्म को क्या नुकसान हो सकता है!
सौरभ द्विवेदी: डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति संस्कृत विभाग में हुई, स्पष्ट कर दूँ कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग कला संकाय के अंतर्गत आता है और फिरोज खान की नियुक्ति ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय’ में हुई है। हम यहाँ अपनी परम्पराओं और मालवीय मूल्यों की रक्षा हेतु विरोध कर रहे हैं। हमारा विरोध सिर्फ किसी मजहब का विरोध नहीं है। यहाँ हुई नियुक्ति सिर्फ संस्कृत भाषा से नहीं जुड़ी इस संकाय का मूल ‘धर्म विज्ञान’ में छिपा है।
ऑपइंडिया: कोई दूसरे मजहब वाला कर्मकांड की शिक्षा क्यों नहीं दे सकता? कुछ लोग यही पूछ रहे हैं कि क्या बुराई है इसमें?
सौरभ द्विवेदी: आज मीडिया के वो तमाम लोग जो इस मुद्दे को हिन्दू-मुस्लिम में समेटते हुए इसे ब्राह्मणवाद से जोड़ कर ध्वस्त करने में जी-जान से लगे हुए हैं। आज उदारवाद के नाम पर वामपंथी और उनका गिरोह जो जहर हर जगह बोने का काम कर रहे हैं वस्तुतः उनकी उदारवादिता एक ढोंग है, अदूरदर्शिता है। बनारस में आप कहीं भी निकल जाइए संस्कृत के श्लोक बच्चा-बच्चा पढ़ता और बोलता नजर आ जाएगा है, वैदिक मन्त्रों और ऋचाओं से घाट गुंजायमान मिलेंगे लेकिन उन्हें कभी इसे किसी दूसरे मजहब वाले से पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ी। या उनसे जिनकी उन श्लोकों और मंत्रो के प्रति न भाव हो, न श्रद्धा हो, वह उनके लिए शब्दों संयोजन भले हो सकता है लेकिन उसके प्राण को वो कभी महसूस नहीं कर सकते। क्योंकि उनके अंदर इन मन्त्रों, श्लोकों के प्रति समर्पण और भक्ति का भाव कभी नहीं आएगा।
ऑपइंडिया: इस पूरे मुद्दे को जान बूझकर या अनजाने में ही, लोगों ने संस्कृत भाषा और इस्लाम तक उतार दिया है। ऐसे में लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि कोई हिन्दू धर्म को जानता-समझता है, तो उसे हमें वसुधैव कुटुम्बकम के नाम पर स्वाकारना चाहिए न कि बवाल कर के सनातन धर्म की परंपरा का अपमान करना चाहिए। इस पर आप क्या कहेंगे?
सौरभ द्विवेदी: यहाँ सिर्फ संस्कृत पढ़ने-पढ़ाने का मसला है ही नहीं, उन्हें आज की चिन्ता भी नहीं है। लेकिन जब 20 साल बाद ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय’ में वैदिक मंगलाचरण की जगह कुरान और हदीस की आयतें गूँजेगी, विश्व हिन्दू पंचांग की जगह कुरान और बाइबिल का प्रकाशन होगा, तो बुढ़ापे में आप इस कुण्ठा से जरूर गुजरेंगे कि जब मालवीय मूल्यों और हिन्दू सनातन धर्म और संस्कृति के रक्षार्थ कुछ छात्र लड़ रहे थे, जब संविधान की कोई एक पंक्ति उनके पक्ष में नहीं थी, शायद एक ढंग का तर्क भी उनके पास नहीं था, और महामना के नाम पर जीवनयापन करने वाले अधमर्ण मौन थे, तब भावनाओं के बल पर, अन्तरात्मा की आवाज पर, महामना के आदर्शों और मूल्यों की रक्षा के लिए पुलिस की लाठी खाने और खून का कतरा गिरने तक कुछ निहत्थे एक धर्मयुद्ध लड़ते रहे थे। और हम मौन थे तो आज की अपनी दुर्गति के लिए जिम्मेदार कोई और नहीं हम खुद हैं।
ऑपइंडिया: आप वहीं से पढ़ कर निकले हैं और अध्यापन का कार्य कर रहे हैं, क्या आपके कुछ मित्र हैं जो वहाँ से पढ़ने के बाद जीवनयापन हेतु पुरोहित आदि का काम कर रहे हों? क्या आपसे उनकी कोई बातचीत हुई है? वो इसे कैसे देखते हैं?
सौरभ द्विवेदी: विश्वविद्यालय के दीवारों और पत्थरों पर मालवीय जी के संदेश पढ़ते हुए हम जवान हुए हैं। हिन्दू विश्वविद्यालय के हम जैसे छात्र उन विचारों को आत्मसात् करने की कोशिश करते हैं। विश्वविद्यालय की दीवारों पर वेदों उपनिषदों के मन्त्र पढ़े हैं हमने। विश्वनाथ मंदिर में खुदे 18 अध्याय गीता को देखकर नतमस्तक हुए हैं। हिन्दू मूल्यों के संरक्षण में मालवीय जी जैसा बनने का सपना देखा है। हमेशा आदर्श माना है। जो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ा है, या पढ़कर भी श्रद्धाविहीन हैं, हम उनसे इस आस्था की उम्मीद बिल्कुल नहीं करते। उनकी धर्म-निरपेक्षता ईमानदार है। लेकिन जो लोग इस आस्था से जुड़े हैं, उनका चुप रहना आज जरूर अखर रहा है।
ऑपइंडिया: डॉ फिरोज की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी कुछ सवाल आपने उठाए हैं। उन बातों का आधार क्या है?
सौरभ द्विवेदी: SVDV में फिरोज खान की यह नियुक्ति पैसों और नेक्सस के सिवाय और किसी आधार पर नहीं हुई है। पैसों के लालची साहित्य विभागाध्यक्ष ने अपने 5 साल पुराने विश्वसनीय स्टूडेंट को पैसे लेकर नियुक्त किया है, बस इतनी सी बात है। समझिए, साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमाकान्त चतुर्वेदी हैं। मेरे शोध-निर्देशक हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 5 साल पहले एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में आए। इसके पहले राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के जयपुर कैम्पस में कार्यरत थे। पूर्व संस्था से इनका लगाव भी है और इनके विश्वस्त लोग आज भी वहीं हैं। इनका व्यक्तित्व धनलोलुपता की पराकाष्ठा है। इनकी धनलोलुपता को समझने के लिए इनसे किसी भी विषय पर 15 मिनट बात करना ही पर्याप्त है। अगर इनका वश चले तो BHU के शोधार्थियों के JRF के पैसों में भी अपना हिस्सा निश्चित कर लें।
इस नियुक्ति की सारी फिल्डिंग इन्होंने ही सेट की है। 6 महीने पहले से, मेरा मानना है कि अगर निष्पक्ष जाँच हो जाए तो ये रंगे हाथ पकड़े भी जा सकते हैं। इस नियुक्ति का सबसे बड़ा कारण है पैसा। सुरक्षित और गोपनीय ढंग से पैसे लेने के लिए प्रोफेसर उमाकान्त चतुर्वेदी के लिए सबसे उपयुक्त अभ्यर्थी हैं डॉ फ़िरोज खान, जो कि संस्थान के जयपुर कैंपस के छात्र हैं, OBC केटेगरी से हैं। 10 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हुआ उनमें से कई हिन्दू विश्वविद्यालय के भी पूर्व शोधछात्र थे। लेकिन इन 5 वर्षों में विभागाध्यक्ष को किसी पर इतना विश्वास न था कि पैसे की बात चला सकें। विभागाध्यक्ष को इस बात का भी अंदेशा नहीं था कि बस चयनित अभ्यर्थी के मजहब विशेस से होने की वजह से भी विवाद हो सकता है।
इन्होंने इंटरव्यू एक्सपर्ट के रूप में जयपुर के ही एक प्रोफेसर ताराशंकर शर्मा पाण्डेय को बुलाया, जो संभवतः इनके सबसे विश्वस्त और हाँ में हाँ मिलाने वाले मित्र हैं। इनके बारे में मैं अधिक नहीं जानता। दूसरे एक्सपर्ट एक्स प्रोफेसर राधावल्लभ त्रिपाठी को बुलाया गया। विचारधारा के संदर्भ में अवसरवादी रूप से कभी ‘वामपंथी-कॉन्ग्रेसी’ कभी ‘पारंपरिक विद्वान’ कभी संस्कृत साहित्य के ‘आधुनिक समालोचक’ हैं। कॉन्ग्रेस के शासनकाल में ये राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति रहे हैं। बहुत सारे पदों को अलंकृत कर चुके हैं। इनका वैदुष्य निर्विवाद है। इन्होंने संस्कृत साहित्य को समृद्ध करने के लिए बहुत परिश्रम भी किया है। लेकिन स्याह पक्ष यह है कि इन्होंने अपने सम्पूर्ण विद्वत्ता और पद-प्रतिष्ठा का दुरुपयोग विश्वविद्यालयों में ‘अपने’ लोगों की नियुक्तियों में किया है।
लगभग 20 वर्षों से विश्वविद्यालय स्तर की सभी नियुक्तियों पर इनके ‘गैंग’ का एकाधिपत्य है। संस्कृत के हर संस्थान में इनके नियुक्त किए हुए लोगों का एक नेक्सस है। यह नेक्सस अपने झुण्ड से इतर किसी अन्य को संस्कृत प्रोफेसर बनने की मान्यता नहीं देता। इनकी तुलना एक समय के जाने माने हिन्दी समालोचक से कुछ अंश तक की जा सकती है।
इसी नेक्सस के ये तीनों लोग विद्वान हैं, योग्य हैं। इसलिए इनके द्वारा नियुक्त अभ्यर्थी की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाना तार्किक रूप से सामान्य व्यक्ति की दृष्टि में गलत है। और इनका पूरा गैंग किसी भी अपने गुट के व्यक्ति को प्रोफेसर बनने के लिए सर्वाधिक योग्य मानता है, साबित भी करता है। प्रोफेसर उमाकान्त चतुर्वेदी के अध्यक्ष रहते यह नियुक्ति बिना पैसे के नहीं हो सकती थी, लेकिन यह अभ्यर्थी एक ‘हिन्दू OBC’ होता तो विरोध नहीं होता, यह बात भी सच है। दिलचस्प यह भी है कि सरकार किसी की भी हो विश्वविद्यालय की नियुक्तियाँ एक विशिष्ट विचारधारा (वामपंथी) के लोग ही करते हैं।
इस नियुक्ति का विश्वविद्यालय प्रशासन से इतर किसी स्वतंत्र संस्था से जाँच होनी चाहिए, फिर अपने आप सारा कच्चा चिट्ठा खुल जाएगा। देखिए, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग के एक OBC पद हेतु 27 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। 26 हिन्दू OBC थे – यादव, पटेल, चौधरी आदि आदि। एक मुस्लिम OBC था – खान और हिन्दू विश्वविद्यालय के नास्तिक कुलपति राकेश भटनागर और भ्रष्ट साहित्य विभागाध्यक्ष और उनके गैंग ने मुस्लिम OBC को ज़्यादा योग्य माना। 26 OBC हिन्दू मूर्ख साबित किए गए। और OBC-SC/ST के हक़ के लिए लड़ने वाले प्रोपोगंडावादी झुण्ड ने एक स्वर में उसका धर्म देखकर 26 हिन्दू OBC को लात मार दिया।