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‘सत्ता के लिए अपने विचारों से समझौता करने वाले कम से कम छत्रपति शिवाजी की बात न करें’

महाराष्ट्र की सियासत शनिवार सुबह कुछ ऐसी बदली जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। बीजेपी ने रातोंरात बाजी पलटते हुए एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली और शिवसेना को इस गठबंधन की खबर तक नहीं लगी। सुबह राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फडणवीस को सीएम पद शपथ दिलाई। अजित पवार डेप्युटी सीएम बने।

इस राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी पार्टी का पक्ष रखने के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना ने जब बहुमत प्राप्त किया तो ये भाजपा गठबंधन की नैतिक और चुनावी विजय थी। उन्होंने पूछा, “चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना किसके इशारे पर उत्तेजक हो गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “शरद पवार और कॉन्ग्रेस ने चुनाव परिणाम के बाद बयान दिया था कि हमें विपक्ष में बैठने का जनमत मिला है। तो ये विपक्ष में बैठने का जनमत कुर्सी के लिए मैच फिक्सिंग कैसे हो गया था? महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मैनडेट मिला था भाजपा और शिवसेना को, लेकिन बड़ी पार्टी कौन थी – भाजपा। और मुख्यमंत्री का मैनडेट था योग्य और ईमानदार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी के लिए।”

रविशंकर प्रसाद ने विपक्षियों पर निशाना साधते हुए तंज किया कि कहा जा रहा है कि लोकतंत्र की हत्या की हो गई है। जब शिवसेना स्वार्थ भाव से प्रेरित होकर अपनी 30 साल की दोस्ती तोड़कर अपने घोर विरोधियों का दामन थाम ले तो ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है क्या? और एक स्थाई सरकार के आग्रह पर देवेन्द्र फडणवीस की अगुवाई में अजित पवार के साथ बड़ा तबका आकर सरकार को सहयोग करे तो इसे लोकतंत्र की हत्या कहा जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि जो आदरणीय बाला साहब ठाकरे के आदर्शों को जीवित नहीं रख सके उनके विषय में कुछ नहीं कहना है। उनका प्रमाणिक कॉन्ग्रेस विरोध जग जाहिर है, उनकी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रवाद और भारत की संस्कृति-संस्कार के प्रति समर्पण प्रमाणिक है। उन्होंने उद्धव ठाकरे के बयान को निशाने पर लेते हुए कहा, “कुछ लोग छत्रपति शिवाजी की विरासत की बात कर रहे हैं, उनसे मैं बस इतना कहूँगा कि सत्ता के लिए अपने विचारों से समझौता करने वाले तो कम से कम छत्रपति शिवाजी की बात न करें।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने तीनों पार्टियों को बुलाया था। NCP और शिवसेना को बुलाया तो उन्होंने कहा कि और समय दीजिए। आज सुबह भाजपा और अजित पवार के साथ NCP के तबके ने आवेदन दिया कि हमारे पास बहुमत है। क्या शिवसेना और NCP का कोई आवेदन राज्यपाल के पास अब तक था।

रविशंकर प्रसाद ने कहा, “महाराष्ट्र की जनता का सवाल था कि हमने जनादेश दिया तो आप सरकार क्यों नहीं बना रहे हैं। क्या इतने बड़े राज्य को ऐसे ही छोड़ दिया जाता? हम एक स्थिर, प्रभावी और प्रमाणिक सरकार देंगे। हमारे पीएम और गृह मंत्री के खिलाफ स्तरहीन भाषा का प्रयोग किया गया, हमने इसे सहा है। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि गठबंधन में रहकर कोई ऐसा बोले।”

आगे उन्होंने कहा कि यह देश की आर्थिक राजधानी पर कब्जा करने की कोशिश थी। एक बड़ा जनादेश और बहुमत मिला था, शिवसेना ने क्यों 360 डिग्री का टर्न ले लिया। वहीं जब उनसे पूछा गया कि महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद कॉन्ग्रेस अपने विधायकों को भोपाल भेज रही है। क्या कॉन्ग्रेस को अब भी विधायकों को छुपाने की जरूरत है, तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि क्या भोपाल और जयपुर के अलावा उनके विधायक कहीं और सुरक्षित नहीं हैं क्या?

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हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे, लेंगे अजित पर फैसला: शरद पवार

धोखा, बेशर्म, पाखंड… विलाप कर रहे लिबरल गैंग की बहुत बुरी जली, शब्दों से दे रहे खुद को तसल्ली

अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है, वे लौट आएँगे: शिवसेना सांसद संजय राउत सामना में करेंगे खुलासा

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर शनिवार (23 नवंबर) की सुबह हुआ, वो भारतीय राजनीति की अब तक की शायद सबसे अप्रत्याशित घटना है। पिछले कई दिनों से शिवसेना-कॉन्ग्रेस और NCP नेताओं की बैठक चल रही थी। शुक्रवार (22 नवंबर) देर रात तक तीनों पार्टियों के बीच मंत्रालयों के बँटवारे को लेकर बातचीत हो रही थी, लेकिन शनिवार की सुबह सब धरा का धरा ही रह गया।

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन और ताजा घटनाक्रम को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। राउत ने कहा कि अजित पवार की भी वापसी की संभावना है। उन्होंने कहा कि अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है। राउत ने कहा कि जिसने भी यह काम किया है, उसके बारे में जल्द ही शिवसेना के मुखपत्र सामना में खुलासा किया जाएगा।

संजय राउत ने कहा, “हम धनंजय मुंडे के सम्पर्क में हैं और अजित पवार के वापस आने की भी संभावना है। अजित को ब्लैकमेल किया गया है, इसके पीछे कौन है जल्द ही सामना अख़बार में ख़ुलासा किया जाएगा।” एनसीपी के विधायक धनंजय मुंडे भाजपा नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। इस बार चुनाव में उन्होंने मुंडे की बेटी और फड़णवीस सरकार में मंत्री रहीं पंकजा मुंडे को हराया था।

इससे पहले, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ”अजित पवार के साथ गए आठ विधायकों में से पाँच वापस आ गए हैं। उनसे भी झूठ बोला गया और इस तरह कार में बैठाया गया जैसे किसी को अगवा किया जाता है। अगर हिम्मत है तो विधानसभा में बहुमत साबित करके दिखाएँ।”

वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,

”जो खेल चल रहा है, उसे पूरा देश देख रहा है। पहले ईवीएम खेल चल रहा था और अब यह नया खेल चल रहा है। इसके बाद से मुझे नहीं लगता कि चुनावों की भी जरूरत है। हमने जनादेश का सम्मान किया, हम जो भी करते हैं खुलेआम करते हैं। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए सुबह-सुबह केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई थी, ऐसी जानकारी मिली है। संविधान के अनुसार काम होना चाहिए। मुझे कोई चिंता नहीं, मेरे साथ पहले भी ऐसा हुआ है। इन लोगों ने बिहार, हरियाणा में भी यही किया। वो लोगों को तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।”

इस दौरान शरद पवार ने शिवसेना, कॉन्ग्रेस और NCP के बारे में बात करते हुए कहा कि तीनों दलों ने सरकार बनाने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, ”मुझे कुछ लोगों ने सुबह बताया कि हमें यहाँ लाया गया है, वे शायद राजभवन की बात कर रहे थे। अजित पवार के डिप्टी सीएम बनने का अचानक पता चला। एनसीपी का जो भी प्रमाणिक कार्यकर्ता है, वह उनके (अजित पवार) के साथ नहीं जाएगा। अजित पवार ने खुद समर्थन का फैसला लिया। अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है। यह अनुशासन तोड़ने वाला है। एनसीपी का कोई भी कार्यकर्ता एनसीपी-बीजेपी की सरकार के समर्थन में नहीं है।”

ग़ौरतलब है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी और किसके साथ सरकार बनेगी, इस पर लंबे समय से सियासी दाँव-पेंच का खेल चल रहा था। लेकिन, आज सुबह एकाएक बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते इस पर विराम लग गया। अंतत: देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए राज्य को नई सरकार दी। 

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‘मोदी सरकार में मंत्री बन सकती हैं पवार की बेटी सुप्रिया सुले, शाह ने पहले ही कहा था- सब ठीक हो जाएगा’

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले शनिवार (नवंबर 23, 2019) को काफ़ी प्रफुल्लित नज़र आए। महाराष्ट्र में तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद भाजपा के साथ बने रहने वाले उसके साथी दल ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया’ के अध्यक्ष रामदास आठवले ने अपना पुराना बयान याद दिलाया है। आठवले ने बताया था कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनसे पहले ही कह चुके थे कि सब ठीक हो जाएगा। अब जब एनसीपी के अजित पवार गुट ने पार्टी से बगावत करने के बाद भाजपा को समर्थन दे दिया, आठवले ने कहा कि आज ही वो दिन है जब सब ठीक हो गया है। वे काफ़ी ख़ुश नज़र आए।

जहाँ एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार भाजपा को समर्थन देने से पल्ला झाड़ चुके हैं, आठवले ने उनकी बेटी सुप्रिया सुले को लेकर बड़ा दावा किया है। पवार के गढ़ बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के बारे में आठवले ने कहा कि वो मोदी कैबिनेट में मंत्री बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि शरद पवार को और प्रफुल्ल पटेल को भी केंद्रीय मंत्री का पद दिया जा सकता है, बशर्ते वो भाजपा के साथ आ जाएँ। ये दोनों ही नेता पहले भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। आठवले ने बताया कि एनसीपी से 2 कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

आरपीआई के अध्यक्ष रामदास आठवले ने अपना पुराना बयान याद दिलाते हुए कहा कि अमित शाह ने तो पहले ही कह दिया था कि चीजें सही दिशा में जा रही हैं, समझने वाले समझ भी गए थे। उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास भी भी समय है, वो अपना रुख बदल सकती है क्योंकि कॉन्ग्रेस उसे समर्थन देने के लिए तैयार थी ही नहीं। वहीं, सुप्रिया सुले का कुछ और ही बयान आया है। उनके व्हाट्सप्प स्टेटस से पता चलता है कि एनसीपी के अजित धड़े द्वारा बगावत किए जाने से वो नाराज़ हैं।

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने अपने ताज़ा व्हाट्सप्प स्टेटस में लिखा है कि परिवार और पार्टी टूट गई है। शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले द्वारा अजित पवार के क़दम से पल्ला झाड़ने के बाद अब एनसीपी में टूट की बात स्पष्ट होती दिख रही है।

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NCP ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया, शरद पवार ने कहा- एक्शन लेगी पार्टी

शरद पवार से बगावत के बाद एनसीपी के नेता अजित पवार को पार्टी के विभिन्न पदों से हटा दिया गया है। महाराष्ट्र के नव-निर्वाचित उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने पार्टी के मुखिया शरद पवार से अलग रुख अख्तियार करते हुए अपने धड़े के साथ भाजपा को समर्थन दे दिया। वो एनसीपी के लेजिस्लेटिव समिति के अध्यक्ष थे। उन्हें पार्टी ने तत्काल प्रभाव से अपदस्थ कर दिया है। हालाँकि, अजित पवार को अभी तक पार्टी से नहीं निकाला गया है। शरद पवार ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी नियमानुसार उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेगी।

अजित पवार अपने धड़े के साथ भाजपा से मिल गए और इस तरह देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा शपथ ली। शुक्रवार की रात तक एनसीपी और कॉन्ग्रेस के समर्थन से शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही जा रही थी और ख़ुद शरद पवार ने कहा था कि उद्धव के नाम पर सहमति बन गई है। सुबह फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के साथ ही महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का भी अंत हो गया। ख़बरों के अनुसार, अजित पवार ने 54 एनसीपी विधायकों का समर्थन-पत्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सौंपा।

शुक्रवार की रात को भी अजित पवार ने एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना की बैठक में हिस्सा लिया था। संजय राउत ने फडणवीस के शपथग्रहण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रात की बैठक के दौरान भी अजित पवार का रुख कुछ अलग-अलग लग रहा था और वो राउत से नज़रें नहीं मिला पा रहे थे। राउत ने कहा कि अजित पवार बैठक में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। रात को बैठक में हिस्सा लेने वाले अजित पवार का सुबह भाजपा के साथ मिल जाना अभी भी चर्चा का वषय बना हुआ है।

जम्मू-कश्मीर को 2 केंद्र शासित प्रदेश में बॉंटने के बाद अब दो UT को एक करेगी मोदी सरकार

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटने के बाद केंद्र की मोदी सरकार अब एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। सरकार दो केंद्र शासित प्रदेशों दमन-दीव और दादरा-नगर हवेली को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को लोकसभा में कहा कि इस संबंध में अगले हफ्ते एक बिल संसद में पेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव (केंद्रशासित प्रदेशों का विलय) बिल 2019 अगले हफ्ते के लिए प्रस्तावित सरकारी कामकाज का हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि गुजरात के पास पश्चिमी तट पर स्थित इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का विलय बेहतर प्रशासन और विभिन्न कार्यों के दोहराव की जाँच और निगरानी के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों का विलय बेहतर प्रशासन और कई चीजों के दोहराव पर रोक लगाने में सहायक होगा। बता दें कि दादरा-नगर हवेली में एक, जबकि दमन-दीव में 2 जिले हैं।

महज 35 किलोमीटर दूर स्थित दोनों प्रदेशों के अपने-अपने सचिवालय और बजट हैं। एक जिले वाले दादरा-नगर हवेली एवं दो जिलों वाले दमन-दीव के विलय से प्रशासनिक खर्चों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। पुनर्गठित केंद्र शासित प्रदेश को दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव नाम दिए जाने और साथ ही दमन-दीव को इसका मुख्यालय बनाए जाने की संभावना है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को UT बनाए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी। अब जब दो केंद्र शासित प्रदेशों का विलय होगा तो यह संख्या घटकर 8 हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इसी साल अगस्त महीने में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही 5 अगस्त को संसद में जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल पेश किया था। इस बिल के माध्यम से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त कर प्रदेश को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।

हँसी के ठहाके, मीम्स और चुटकलों की भरमार: महाराष्ट्र ने CM के अलावा आज हँसने का मौका भी दिया!

बड़े पैमाने पर राजनीतिक तख़्तापलट करते हुए, आज सुबह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर और NCP के अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेकर सबको अश्चर्यचकित कर दिया। एक महीने की लंबी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद कल रात तक यह साफ हो चुका था कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे राज्य में अगले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे।

आज सुबह की ख़बर जैसे ही सोशल मीडिया पर प्रचारित-प्रसारित हुई, लोगों ने तालियाँ बजानी शुरू कर दी और इसी के साथ अचानक बदले इस राजनीतिक समीकरण से ट्विटर पर कई चुटकुलों और मीम की बाढ़ आ गई।

संजय राउत भारतीय राजनीति के राहुल गाँधी! आश्चर्य है कि यह किसके लिए अधिक अपमानजनक है।

बॉलीवुड की फ़िल्म के दृश्य को महाराष्ट्र में सरकार गठन से जोड़ा गया।

ग़जब!

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की हँसी भी बहुत कुछ बयाँ करती है। 

क्योंकि, जब आप सिंहासन का खेल खेलते हैं…

झारखंड: BJP की रैली स्थल से 2 किमी दूर नक्सलियों का हमला, 4 पुलिसकर्मी शहीद

झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए जारी तैयारियों के बीच नक्सलियों ने बड़ा हमला किया है। 30 नवंबर को राज्य में पहले चरण का मतदान होना है। उससे पहले नक्सलियों ने लातेहर ज़िले में पुलिसकर्मियों पर हमला किया है। हमले में 4 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। चंदवा में भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के सभास्थल से महज दो किलोमीटर दूर ही हमला किया गया।

मारे गए पुलिसकर्मियों की पहचान सब-इंस्पेक्टर सुकिया उरांव, कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार, कॉन्स्टेबल सिकंदर सिंह, वाहन चालक यमुना राम के रूप में हुई है। इस घटना पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दुख जताते हुए कि कहा कि पूरा देश शहीदों के परिवार के साथ खड़ा है।

ख़बर के अनुसार, शुक्रवार रात क़रीब आठ बजे पुलिस की पीसीआर वैन पर नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में एक सहायक पुलिस उपनिरीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। हमले के बाद एक जवान लापता हो गया था। हालाँकि बाद में जख्मी हालत में वह मिला।

राज्य के भाजपा सचिव सुबोध सिंह गुड्डू ने बताया कि हमने नारे लगाने की आवाज़ सुनी थी। शुरू में हमने माओवादी हमलावरों को किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यकर्ता समझा। उन्होंने मेरी कार और एक अन्य वाहन जो हमसे आगे था उस पर गोलीबारी की।

नक्सलियों ने पुलिस पर यह हमला लातेहार ज़िले के चंदवा थाना से महज़ दो किलोमीटर की दूरी पर किया। इस दौरान पुलिस और नक्सलियों में मुठभेड़ भी हुआ।

गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को घटना स्थल से 30 किलोमीटर दूर लातेहार के मनिका में एक रैली को संबोधित किया था। पीएम मोदी सोमवार को 80 किमी दूर पड़ोसी पलामू ज़िले में एक रैली को संबोधित करने वाले हैं।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कमल नयन चौबे ने इसे नक्सलियों की क़ायराना हरक़त बताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के वक्त लोगों की आवाजाही को देखते हुए शुक्रवार की रात विशेष पेट्रोलिंग की जा रही थी। रास्ता क्लियर कराने के दौरान ही नक्सलियों ने छुपकर पुलिस बल पर हमला कर दिया। नक्सलियों की इस कायराना हरक़त का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उनकी तलाश में सर्च अभियान जारी है।

ख़बर के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ऑपरेशन) एमएल मीणा ने बताया, “अतिरिक्त बलों को तलाशी अभियान चलाने के लिए क्षेत्र में भेजा गया है।” राज्य में मतदान के पहले चरण में लातेहार विधानसभा क्षेत्र में 30 नवंबर को मतदान होना है।

हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे, लेंगे अजित पर फैसला: शरद पवार

महाराष्ट्र में सुबह-सुबह आए सियासी भूचाल के बाद एनसीपी और शिवसेना साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और शरद पवार पहुँचे थे। वहीं शिवसेना-एनसीपी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस शामिल नहीं हुई।

इस दौरान शरद पवार ने शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के बारे में बात करते हुए कहा कि तीनों दलों ने सरकार बनाने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, “मुझे कुछ लोगों ने सुबह बताया कि हमें यहाँ लाया गया है, वे शायद राजभवन की बात कर रहे थे। अजित पवार के डिप्टी सीएम बनने का अचानक पता चला। एनसीपी का जो भी प्रमाणिक कार्यकर्ता है, वह उनके (अजित पवार) के साथ नहीं जाएगा। अजित पवार ने खुद समर्थन का फैसला लिया। अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है। यह अनुशासन तोड़ने वाला है। एनसीपी का कोई भी कार्यकर्ता एनसीपी-बीजेपी की सरकार के समर्थन में नहीं है।”

उन्होंने कहा कि पार्टी विधायक दल के नेता के चयन के दौरान विधायकों के हस्ताक्षर लिए गए थे, आशंका है कि इस हस्ताक्षर वाली चिट्ठी को ही राजभवन में दिया गया होगा। उन्होंने आगे कहा, “सदन में वो (फडणवीस और अजित पवार) बहुमत पेश नहीं कर पाएँगे, हम फिर से सरकार बनाने का प्रयास करेंगे। सरकार का नेतृत्व शिवसेना के पास हो ऐसा हमारा प्रयास होगा। बहुमत साबित होने तक हम साथ रहेंगे। आज शाम 4 बजे नए एनसीपी विधायक दल के नेता को चुना जाएगा। अजित पवार पर कार्रवाई के बारे में पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। 30 नवंबर तक बहुमत साबित करने का वक्त। हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे।”

वहीं उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जो खेल चल रहा है, उसे पूरा देश देख रहा है। पहले ईवीएम खेल चल रहा था और अब यह नया खेल चल रहा है। इसके बाद से मुझे नहीं लगता कि चुनावों की भी जरूरत है। हमने जनादेश का सम्मान किया, हम जो भी करते हैं खुलेआम करते हैं। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए सुबह-सुबह केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई थी, ऐसी जानकारी मिली है। संविधान के अनुसार काम होना चाहिए। मुझे कोई चिंता नहीं, मेरे साथ पहले भी ऐसा हुआ है। इन लोगों ने बिहार, हरियाणा में भी यही किया। वो लोगों को तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।” अपने विधायकों को तोड़ने के सवाल पर बोले उद्धव ठाकरे ने कहा, “कोशिश करके देखें, महाराष्ट्र सोने वाला नहीं है।”

प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग में किया आवेदन, 29 नवंबर को होगा इंटरव्यू

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म-विज्ञान संकाय में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर काफ़ी दिनों से विरोध चल रहा है। इस बीच ख़बर आ रही है कि BHU में विवाद के बाद अल्पसंख्यक प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग के संस्कृत प्रोफ़ेसर के लिए आवेदन किया है। आयुर्वेद विभाग में 29 नवंबर को इंटरव्यू होगा।

दरअसल, कला संकाय में वैकेंसी नहीं है, केवल एक पद आयुर्वेद विभाग में खाली है। संभवतः वहाँ उन्हें चुन लिया जाएगा। इसके बाद फ़िरोज़ ख़ान SVDV से त्यागपत्र दे देंगे, क्योंकि उनकी जॉइनिंग वाइस चांसलर ऑफ़िस में हो चुकी है। इस क़दम के ज़रिए विवाद पर विराम लगाने की योजना बनाई जा रही है। फ़िलहाल, रैली के रूप में छात्र यूनिवर्सिटी के सिंह द्वार से रविन्द्र पुरी स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय तक रैली निकाल कर PMO को ज्ञापन देंगे।

कयास यह लगाया जा रहा है कि हो सकता है यह फ़िरोज़ ख़ान का निजी फ़ैसला हो और उन्होंने ख़ुद ही इस विवाद से उबरने के लिए यह निर्णय लिया हो। वहीं BHU में प्रदर्शन कर रहे छात्र यह भी मान रहे हैं कि प्रशासन ने विवाद को सुलझाने के लिए यह रास्ता निकाला हो।

बता दें कि शुक्रवार (22 नवंबर) को छात्रों ने PMO के दखल के बाद 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन पर विराम लगा दिया था। प्रशासन लगातार छात्रों पर दबाव बना रहा था कि छात्र धरना ख़त्म कर दें। लेकिन, छात्र विराम देने के बाद भी अपनी माँगों पर बने हुए हैं। PMO और BHU प्रशासन ने छात्रों से इस मुद्दे के समाधान के लिए 10 दिन का समय माँगा था।

छात्रों ने गुरुवार (21 नवंबर) को प्रशासन को अपना माँग पत्र सौंपते हुए कई सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा था। जिसे लेकर देर रात SVDV के संकाय प्रमुख, अन्य विभागाध्यक्षों और VC के बीच मीटिंग चली थी, लेकिन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा गया। छात्रों का कहना है जब तक हमारी माँगों का समाधान नहीं होता और फ़िरोज़ ख़ान को यहाँ से हटाया या स्थान्तरित नहीं किया जाता तब तक छात्र कक्षा और 2 दिसंबर से होने वाली परीक्षाओं का बहिष्कार जारी रखेंगे।

ग़ौरतलब है कि पहली बार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफ़ेसर डॉ फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई थी। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसका पता चला, उन्होंने इस नियुक्ति के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

शेर, लोमड़ी और भेड़िए में सत्ता संघर्ष… बुरी मौत मरा लोमड़ी: महाराष्ट्र में आज की कहानी

जंगल में सूखा पड़ा था और खाने की कमी होने लगी। शाकाहारी पशु मरने लगे या पलायन कर गए तो शेर, भेड़िये और लोमड़ी को भी खाना मिलना मुश्किल होने लगा। आखिर लोमड़ी ने शेर और भेड़िये के साथ मिलकर बैठक की। तय हुआ कि पूरा एक जानवर तो तीनों में से कोई खाता नहीं, इसलिए अगर तीनों मिलकर शिकार करें, और उसे आपस में बाँट ले तो भी काम चल सकता है। चुनांचे लोमड़ी ने शिकार के लिए हिरणों के झुण्ड की खबर ली, भेड़िये ने एक तरफ से झुण्ड को खदेड़ा और घात लगाए शेर ने झपट्टा मारकर एक हिरण को मार गिराया।

अब बारी थी शिकार के बँटवारे की तो शेर ने लोमड़ी से कहा कि वो बँटवारा कर दे। लोमड़ी शेर से बोली आप सरदार हो, इसलिए सिर आपका। भेड़िये ने दौड़ लगाई इसलिए टाँग भेड़िये की, और जो धड़ बचा उससे मैं गुजारा कर लूँ! शेर को लोमड़ी की चालाकी भाँपते देर नहीं लगी। उसने पंजा उठाया और धर दिया लोमड़ी पर। बस लोमड़ी भी साफ़! एक के बदले अब दो-दो शिकार मौजूद थे। अब शेर बोला चलो भेड़िये अब तुम बँटवारा करो। भेड़िया लोमड़ी की हालत देख चुका था, बोला आप सरदार हो इसलिए सिर भी आपका, शिकार पर छलाँग आपने मारी इसलिए टाँग भी आपकी, और आपकी वजह से हमारा पेट पलता है, इसलिए धड़ भी आपका! जो बची खुची लोमड़ी है हुजूर उससे मैं काम चलाता हूँ!

महाराष्ट्र चुनावों के बाद शिवसेना भी काफी हद तक लोमड़ी वाला बँटवारा करती ही नजर आ रही थी। मेरा ख्याल है कि उसे नतीजे भी वैसे ही झेलने पड़े हैं। 1978 में कॉन्ग्रेस पार्टी की वसंतदादा की सरकार से अलग होकर शरद पवार ने कॉन्ग्रेस तोड़ सोशलिस्ट कॉन्ग्रेस बना ली थी। कॉन्ग्रेस की सरकार गिरा दी और खुद सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बन गए थे। उनके भतीजे अजित पवार ने वही कड़वी दवा शरद पवार को पिला दी है। राजनैतिक तौर पर देखें तो यहाँ ऐसा कुछ नहीं हुआ जो नहीं होता, या नहीं होना चाहिए। हाँ, इसके बाद भी नैतिकता के ऊँचे पायदान पर जा चढ़े बुद्धिपिशाच कहेंगे कि ये सही नहीं।

ऐसे लोगों को कभी कभी फ़िल्में देखनी चाहिए। कुछ वर्षों पहले आई एक अंग्रेजी फिल्म “हल्क” को वैसे तो वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ कल्पनाशीलता मिलाकर बनी मार-धाड़ से भरपूर फिल्म कहा जा सकता है, लेकिन उसमें सीखने का काफी कुछ और भी है। फिल्म का नायक और खलनायक दोनों बिलकुल करीबी सम्बन्धी होते हैं लेकिन उनके चरित्र में बड़ा अंतर था। नायक जहाँ गलती से एक दवा के प्रयोग के कारण अत्यंत शक्तिशाली बन जाता है, वहीं खलनायक शक्ति पाने और उसके उपभोग के लालच में ही उस दवा के पीछे पड़ा होता है। शक्ति बढ़ते ही नायक के भले स्वभाव में वृद्धि होती है, तो दूसरी तरफ खलनायक की विनाश की क्षमता भी उतनी ही तेजी से बढ़ जाती है।

शक्ति और सत्ता के साथ हमेशा से ऐसा होता आया है। बुरे लोगों की नुकसान करने की क्षमता, शक्ति पाते ही कई गुना बढ़ जाती है। हाल ही में राजस्थान से हिन्दू शरणार्थियों को भगाए जाने के प्रयासों को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने रोका है। बहुसंख्यक समुदाय के नुकसान की मंशा अगर महाराष्ट्र जैसे धनी राज्य की शक्ति के साथ आए तो परिणाम कैसे भयावह होते? एक व्यक्ति के तौर पर या दल के तौर पर लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे, इस निजी स्वार्थ के लिए जनता का हित ठुकराया जाना चाहिए क्या? व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए कई बार राजाओं को वीरगति तो मिली, लेकिन उनके मारे जाने पर प्रजा को अतातायियों के कैसे जुल्म झेलने पड़े ये भारतीय इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है।

ये बिलकुल उचित है कि सत्ता और शक्ति जैसे साधनों को दुष्टों से यथासंभव दूर रखा जाए। बुरे लोग शक्तिशाली ना हों, इसके लिए अच्छे लोगों को हर संभव प्रयत्न करने ही चाहिए। महाराष्ट्र की जनता ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा मानकर जिन्हें समर्थन दिया था, वो अगर छल पर आमादा हों, तो उनसे उन्हीं के तरीकों से निपटना आवश्यक है। महाराष्ट्र की नई सरकार को जनादेश का सम्मान करने के लिए हर प्रयास करने का साधुवाद दिया जाना चाहिए!