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कॉन्ग्रेसी सुरजेवाला ने रसोई गैस की कीमत पर फैलाया झूठ, ₹247 की कमी को बताया ₹302 का इजाफा

मोदी सरकार को घेरने के लिए आँकड़ों को गलत तरीके से पेश कर झूठ फैलाने के हुनर का रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक बार फिर प्रदर्शन किया है। हालिया हरियाणा विधानसभा चुनाव में धूल चाटने वाले सुरजेवाला कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन सेल के मुखिया हैं। उन्होंने घरेलू गैस यानी एलपीजी की कीमतों में इजाफे को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए हेराफेरी की कोशिश की है। बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 76. 50 रुपए की वृद्धि की गई है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की इंडेन ब्रांड एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत ₹605 से बढ़कर ₹681.50 रुपए हो गई है।

इस इजाफे को लेकर राहुल गॉंधी के करीबी सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि आज 14.2 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की क़ीमत ₹716.50 है, जबकि 16 मई 2014 को इसकी क़ीमत ₹414.00 थी। यानी, तब से अब तक कीमतों में ₹302.50 का इजाफा हो चुका है। लेकिन, सुरजेवाला का यह दावा सरासर झूठ है। उन्होंने आरोप गढ़ने के लिए दो अलग-अलग कीमतों की तुलना की है।

मूल्य में यह अंतर बताने के लिए सुरजेवाला ने बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की मौजूदा कीमत की तुलना सब्सिडी वाले सिलेंडर के 2014 की कीमत से की है। लेकिन, यदि बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की आज की कीमत की तुलना 2014 से की जाए तो पता चलता है कि कीमतों में कमी आई है। IOCL की वेबसाइट पर सूचीबद्ध क़ीमतों के अनुसार, दिल्ली में 1 मई 2014 को ग़ैर-सब्सिडी वाले LPG की क़ीमत ₹928.50 थी और उसी साल जनवरी में इसकी क़ीमत ₹1241.00 थी। मौजूदा कीमत (₹681.50) से तुलना करें तो पता चलता है कि 2014 से यह ₹247.00 सस्ती है न कि ₹302.50 महॅंगी, जैसा सुरजेवाला ने दावा किया है।

LPG prices in 2014

2014 में LPG की क़ीमत

ग़ौर करने वाली बात यह है कि यूपीए सरकार के दौरान सालाना सब्सिडी वाले 9 सिलेंडर मिलते थे जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर 12 कर दिया है। डीबीटीएल योजना के तहत, LPG खरीदने के लिए पूरे पैसे का भुगतान करना होता है और सब्सिडी की राशि सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में आ जाती है।

अन्य सभी पेट्रोलियम उत्पादों की तरह LPG की क़ीमतें भी बाज़ार पर निर्भर है। वैश्विक आधार पर तेल की क़ीमतें ऊपर-नीचे होती हैं। पेट्रोल और डीजल के विपरीत, LPG पर केवल 5% GST लागू होता है। इसलिए, ग़ैर-रियायती मूल्य पर सरकार का थोड़ा नियंत्रण है। लेकिन सरकार सब्सिडी राशि बदलती रहती है ताकि उपभोक्ताओं को रसोई गैस के लिए बहुत अधिक भुगतान न करना पड़े।

घर के सामने ही दूरदर्शन के डायरेक्टर को मारी थी जिहादियों ने गोली, अपने ही लोगों ने की थी मुखबिरी

31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर का दो केंद्र-शासित प्रदेशों में बंटना इतिहास में एक बहुत बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गया। भारतीय संविधान के वे सभी वाक्य अब हमेशा के लिए बदल गए हैं, जिनमें कहा जाता था, “यह कानून जम्मू-कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों के लिए है”- यानी केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए सारे कानून अब जम्मू-कश्मीर में लागू होंगे। इसी के साथ भारतीय दंड संहिता की बजाय राज्य में लागू रणबीर दंड संहिता का भी अंत हो गया। इन्हीं बदलावों के बीच ‘रेडियो कश्मीर’ का नाम भी ‘ऑल इंडिया रेडियो’ हो गया है।

हालाँकि रेडियो कश्मीर ‘जम्मू’ और रेडियो कश्मीर ‘श्रीनगर’ दोनों को ही ऑल इंडिया रेडियो के साथ जोड़ पहले ही दिया गया था, मगर इन दोनों ही स्टेशनों का नाम नहीं बदला गया था, क्योंकि इन्हीं के ज़रिए मुज़फ्फराबाद, पीओके से प्रसारित पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को जवाब दिया जाता था।

इनके नाम बदलाव की इस घोषणा के बाद न्यूज़ एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कर्मचारी लस्सा कौल के बारे में ट्वीट किया। बता दें कि कौल की हत्या का आरोप सूबे के जिहादी संगठन जेकेएलएफ यानी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट पर है, जिसके आतंकियों ने उन्हें फरवरी 1990 को उन्हीं के घर के सामने गोली मार दी थी

13 फरवरी, 1990 की शाम करीब 7:15 बजे थे और दूरदर्शन कश्मीर के डायरेक्टर कौल अपने बीमार माता-पिता के पास उनसे मिलने जा रहे थे। जैसे ही घर के बाहर उन्होंने अपनी गाड़ी का दरवाज़ा खोला, जेकेएलएफ के बंदूकधारियों ने उन्हे गोली मार दी। कौल के निर्देशन में दूरदर्शन कश्मीर जिहादियों की अलगाववादी हिंसा का आलोचक था और इसके लिए कौल को जेकेएलएफ़ वालों ने धमकी भी दे रखी थी।

पत्रकार राहुल पंडिता ने अपने ट्वीट्स में जेकेएलएफ द्वारा उनकी हत्या के घटनाक्रम को याद करते हुए उनकी एक तस्वीर शेयर की। कौल की हत्या का मुख्य आरोपित सरगना बिट्टा कराटे है, जो फ़िलहाल जेकेएलएफ़ का मुखिया है और उसे ‘पंडितों का कसाई’ कहा जाता है

अपने ट्वीट में राहुल ने बताया कि कश्मीर में उग्रवाद बढ़ने के वक़्त कौल पहले ही अपनी पत्नी और बेटी को ग़ाज़ियाबाद स्थित एक रिश्तेदार के घर छोड़ गए थे। कौल की हत्या के बाद उनके दो सहकर्मी उनके परिवार को तलाशते हुए श्रीनगर ले जाने के लिए आए मगर उनके पास कोई पता नहीं था। उनका पता तब चला जब पुलिस को एक घर से विलाप की खबर मिली।

कुछ लोगों का मानना है कि कौल के साथी भी उनकी हत्या की साजिश में मिले हुए थे। कहा यह भी जाता है कि उनकी खबरें उनके ही आसपास के लोगों ने आतंकियों तक पहुँचाईं थीं। अपने माँ-बाप की सात संतानों में से इकलौते जिंदा बचे ‘लस्सा’ के नाम का कश्मीरी में अर्थ होता है ‘लम्बी उम्र वाला’, मगर जेकेएलएफ़ ने उनके जीवन की डोर बहुत पहले ही काट दी।

वहाबी सीख देने वाली ‘जमात’ है कश्मीर के लिए सबसे बड़ा खतरा, उसके लोग हर जगह हैं: सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने एक साल के कार्यकाल को पूरा करके हाल ही में गोवा में राज्यपाल का पद संभाला। उनके 2018-2019 के कार्यकाल में ही जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का पावर खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। अपने एक साल के सफर को वे बेहद अच्छा मानते हैं और कहते हैं कि उन्होंने कश्मीर पर कई किताबें पढ़ी थी, दिल्ली में बैठे लोगों को सुना था लेकिन उन्होंने कश्मीर को असल में जैसा पाया वो बिलकुल अलग है। उनके मुताबिक कश्मीर के लिए सबसे बड़ा खतरा जमात है।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में बतौर राज्यपाल 1 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद सत्यपाल मलिक ने आजतक से बात की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि कश्मीर के लिए सबसे बड़ा खतरा जमात है, जो वहाबी सीख देती है। उन्होंने कहा कि ये एक खतरनाक संस्था है, जिससे प्रभावित होकर लोग कश्मीर में हर जगह फैले हुए हैं।

इस बातचीत में मलिक ने बताया कि जमात के 20 प्रतिशत लोग सचिवालय में हैं, अध्यापक हैं, यहाँ तक पीडीपी पार्टी भी इसी जमात की विचारधारा की पार्टी है। जिसके कारण उन्हें लगता है कि महबूबा मुफ्ती के साथ सरकार बनाने के नतीजे वे अब तक भुगत रहे हैं। उनका कहना है कि कश्मीर का युवा पढ-लिखकर आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन कुछ लोग हैं जो स्थिति खराब कर रहे हैं। उनके अनुसार कश्मीर के युवा बहुत प्रतिभाशाली है।

सत्यपाल मलिक ने इस बातचीत में नेताओं और जनता की नाराजगी के बीच फर्क बताते हुए कहा कि दोनों के सवाल अलग हैं। चूँकि, नेताओं ने बहुत करप्शन किया इसलिए लोग मानते हैं कि कश्मीर की बर्बादी के लिए नेता ही जिम्मेदार हैं। उनके भीतर आर्टिकल 370 को लेकर रिएक्शन नहीं हैं। लेकिन हाँ थोड़ी नाराजगी केंद्र शासित राज्य होने से हैं, पर वह भी स्थाई नहीं है।

यूरोपियन यूनियन सासंदों के कश्मीर दौरे पर आजतक से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें मालूम था कश्मीर पर उनका पक्ष मजबूत हैं। नतीजतन डेलीगेशन आया और उन्होंने सबकुछ ठीक बताया।

इस दौरान मलिक ने राहुल गाँधी को कश्मीर न जाने देने की बात पर भी जवाब दिया। उन्होंने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या राहुल किसी के रिश्तेदार हैं, जो सबसे मिलना चाहते हैं। उन्हें वहाँ सिर्फ़ इसलिए नहीं जाने दिया गया क्योंकि ये लोग वहाँ जाते हैं और वापस लौटकर कश्मीर के बारे में झूठ बोलते हैं।

हाफिज सईद के बेटे ने शुरू किया आतंकी ट्रेनिंग कैंप: डर से ISI ने करवाया था बंद

पाकिस्तान के मीरपुर और सियालकोट में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ट्रेनिंग कैंप फिर से शुरू हो गया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के डर से पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कुछ समय पहले इसे बंद कर दिया था। दोबारा से इसे शुरू तलहा सईद ने किया है। वह आतंकी सरगना और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बेटा है।

खुफिया रिपोर्टों के आधार पर इंडिया टुडे ने यह जानकारी दी है। खबर के मुताबिक लश्कर के लिए खोला गया यह कैंप मीरपुर के मांगला और सियालकोट के हेड मराल में है। लश्कर ने इन कैंपों के लिए आतंकियों की भर्ती भी शुरू कर दी है। भर्ती स्वात घाटी के पास पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से सटे कबीलाई इलाकों, पेशावर, क्वेटा और इलाका-ए-घैर में की जा रही है।

बीते दिनों आईएसआई और आतंकी संगठनों के बीच कई बैठकें भी हुईं थी। इनमें POK में सक्रिय कई आतंकी संगठनों के कमांडरों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद तय किया गया कि ‘कश्मीरी जिहाद’ के कंट्रोल रूम पीओके और पाक-अफगान सीमा पर बनाए जाएँगे। साथ ही आतंकियों की नई भर्ती पर भी जोर दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपने संसाधनों को अफगान सीमा से सटे कबीलाई इलाकों को हटा कर जम्मू-कश्मीर की ओर फोकस कर रहा है। साथ ही एलओसी पर भी पाकिस्तानी सेना गतिविधि बढ़ाने में लगी है। अभी हाल ही में इन सबके मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर आतंकी ग्रुपों की बड़ी हरकत नोटिस की गई थी।

जानकारी के अनुसार ISI के निर्देश पर पाकिस्तान में आर्मी यूनिट्स के बीच ही आतंकियों के लिए बंकर बनाए जा रहे हैं। जिन्हें ’10 बलूच’ की ओर से तैयार किया जाना है। आईएसआई ने ‘कूरियर एंड गाइड’ को रेकी करने, नक्शे तैयार करें और आतंकियों की घुसपैठ के लिए रूट तैयार करने को कहा है।

Odd-Even पर केजरीवाल सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, कहा- 5 नवंबर से पहले करें इन याचिकाओं का निस्तारण

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए 4 नवंबर से 15 नवंबर तक ऑड-इवन स्कीम लागू की जाएगी। इसे रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएँ डाली गई थीं। शुक्रवार (1 नवंबर) को इन याचिकाओं को सुनने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि याचिकाकर्ता अपनी बात लेकर दिल्ली सरकार के पास जाएँ। 

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वो ऑड-इवन स्कीम के ख़िलाफ़ याचिकाओं पर विचार करे और इन याचिकाओं का 5 नवंबर से पहले क़ानून के अनुसार निपटारा करे। हालाँकि, सभी याचिकाकर्ता अगर दिल्ली सरकार से संतुष्ट नहीं हुए तो वो दोबारा कोर्ट का रुख़ कर सकते हैं। 

दरअसल, इन याचिकाओं में से कुछ याचिकाएँ ऑड-इवन नियम को लागू होने से रोकने के लिए डाली गई थी। साथ ही कुछ याचिकाएँ CNG कारों को इस नियम से छूट न दिए जाने ख़िलाफ़ थी। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने यह दलील भी दी थी कि महिला चालकों को छूट देकर समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है। इस पर शाश्वत भारद्वाज द्वारा याचिका में कहा गया कि लिंग के आधार पर नियम में भेदभाव करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है, इसलिए यह योजना अदालत को रद्द कर देनी चाहिए क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है।

बता दें कि पहले की तरह इस बार भी दोपहिया वाहनों को को ऑड-इवन नियम में छूट दी गई है, लेकिन 5 लाख CNG वाहनों को दिल्ली सरकार ने छूट नहीं दी है। CNG गाड़ियों को छूट नहीं देने के साथ अन्य माँगों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएँ दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर कोर्ट आगे सुनवाई करेगा।

नगालैंड: शांति बहाली की उम्मीदें बढ़ीं, अलग संविधान पर नरम पड़ा एनएससीएन (आईएम)

नगालैंड में शांति बहाल होने की उम्मीदें बढ़ गई है। वार्ता के आखिरी दिन सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच जारी गतिरोध टूटने की खबर है। केंद्र सरकार के वार्ताकार और नगालैंड के राज्यपाल के साथ एनएससीएन (आईएम) तथा अन्य 7 नगा राजनीतिक समूहों के बीच सिलसिलेवार वार्ता नई दिल्ली में गुरुवार (31 अक्टूबर 2019) को समाप्त हुई। कहा जा रहा है कि इस दौरान शांति प्रक्रिया को लेकर एक आम सहमति कायम करने में कामयाबी मिल गई है।

हालॉंकि आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि एनएससीएन (आईएम) अलग संविधान और ग्रेटर नगालिम बनाने की अपनी मॉंग को फिलहाल ठंडे बस्ते में रखने को राजी हो गया। हालॉंकि अलग झंडे के इस्तेमाल को लेकर कुछ शर्तों के साथ इजाजत दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक नगा अपने कार्यक्रमों में खुद के झंडे का इस्तेमाल कर सकेंगे। लेकिन, सरकारी कार्यक्रमों और इमारतों में यह नहीं लगाया जाएगा। इस संबंध में बाद में बातचीत होगी।

वार्ता के सफल समापन की घोषणा नगालैंड के सीएम नैफिउ रिओ ने की। इसके अलावा राज्य के विपक्ष के नेता ने भी इसकी पुष्टि ट्विटर पर की है।

गौरतलब है कि एनएससीएन (आईएम) नगाओं का सबसे बड़ा और ताकतवर हथियारबंद समूह है। गवर्नर आरएन रवि ने पहले ही कह दिया था कि नगालैंड को खुद का झंडा या संविधान नहीं मिलेगा। साथ ही कहा था कि वार्ता प्रक्रिया समय सीमा (31 अक्टूबर, 2019) के आगे नहीं बढ़ेगी। इसके बाद नगालैंड की सरकार ने सभी नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दीं थी

इसके बाद एनएससीएन (आईएम) के 17 सदस्य नगा नेशनल पोलिटिकल ग्रुप्स (एनएनपीजी) में शामिल हो गए थे। यह विभिन्न नगा राजनीतिक संगठनों का एक समूह है। एनएससीएन (आईएम) छोड़ने वालों में हुकावी येपुतोमि भी थे। वे एनएससीएन (आईएम) की समानांतर सरकार में गृह मंत्री रहे हैं। केंद्र सरकार और गवर्नर आरएन रवि से शांति वार्ता करने वाली टीम में भी वे शामिल थे।

AAP विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी लाखों के फर्जी मेडिकल बिल और दंगे फैलाने के आरोप में गिरफ्तार

आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अखिलेश पर 2013 में दंगा फैलाने का आरोप है। साथ ही अखिलेश पर अपने माता-पिता के नाम पर फर्जी मेडिकल बिल पास कराने का भी आरोप है।

बता दें कि दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अखिलेश पति त्रिपाठी के खिलाफ दोनों मामलों में गैर-जमानती वारंट जारी किया था। कोर्ट की तरफ से यह वारंट अखिलेश पति त्रिपाठी के कोर्ट में नहीं पेश होने पर जारी किया गया था। इस केस में कोर्ट ने शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) को सुनवाई की तारीख दी थी। जैसे ही अखिलेश पति त्रिपाठी कोर्ट पहुँचे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

विधायक पर आरोप है कि उन्होंने दंगे भड़काने की कोशिश की। जिसमें 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक डेड बॉडी को रखकर विरोध प्रदर्शन किया था। मामले में दिल्ली पुलिस की तरफ से कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। दंगे फैलाने के मामले मे पुलिस की तरफ से तीन एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें गवाहों के अपने बयान से पलट जाने के बाद एक केस मे अखिलेश पति त्रिपाठी को कोर्ट ने बरी कर दिया था।

बता दें कि 2013 में दंगा फैलाने के मामले में स्पेशल जज अजय कुमार कुहार की कोर्ट में अभियोजन पक्ष की गवाही होनी थी। लेकिन सुनवाई के दौरान अखिलेश पति त्रिपाठी न तो पेश हुए और न ही उनके वकील की तरफ से पेशी से छूट की माँग की गई। 

सुनवाई के दौरान इसी मामले के और दो आरोपित राहुल कुमार और संजीव कोर्ट में पेश नहीं हुए। तब कोर्ट ने तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। वहीं अखिलेश त्रिपाठी को मेडिक्लेम घोटाले में भी पटियाला हाउस कोर्ट मे पेश होकर जमानत लेनी पड़ी थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने नकली बिल बनाकर धोखाधड़ी से लाखों रुपए के फर्जी बिल पास करवाए।

भारतीय श्रद्धालु बिना पासपोर्ट के जा सकेंगे करतारपुर: एक वैध पहचान पत्र की ज़रूरत, दो दिन शुल्क मुक्त यात्रा

गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नियमों में छूट दी है। इसकी जानकारी उन्होंने ट्विटर के जरिए दी। खान ने लिखा, “भारत से करतारपुर आने वाले सिखों के लिए दो बातें जरूरी हैं। पहला उन्हें पासपोर्ट की जरूरत नहीं है केवल एक वैध पहचान पत्र चाहिए और दूसरा उन्हें 10 दिन पहले रजिस्ट्रेशन कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।”

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि करतारपुर के उद्घाटन के दिन और गुरू नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के दिन कोई शुल्क नहीं लगेगा। बता दें कि इमरान ख़ान करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर को करेंगे। श्रद्धालुओं के पहले जत्थे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल होंगे।

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान ने कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में शामिल होने के लिए ख़ास न्योता दिया है। इस न्योते को स्वीकार करते हुए सिद्दू ने इमरान ख़ान को धन्यवाद कहा है। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान पूछे गए एक सवाल के जबाव में कहा कि जिन भारतीयों को पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर उद्घाटन समारोह में बुलाना चाहता है, उन्हें राजनीतिक मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने उद्घाटन जत्था में शामिल 480 श्रद्धालुओं की सूची पाकिस्तान को दे दी गई है और पाकिस्तान से इसकी मंज़ूरी का इंतज़ार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 नवंबर को पंजाब के बटाला में डेरा बाबा नानक में बने करतारपुर कॉरिडोर पैसेंजर टर्मिनल भवन (PTB) का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही कॉरिडोर औपचारिक रूप से खुल जाएगा। इसके बाद वह सुल्तानपुर लोधी में गुरू नानकदेव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर आयोजित समारोह में शिरक़त करेंगे। 

ग़ौरतलब है कि सिखों के अटूट आस्था के प्रतीक करतारपुर साहिब को भारत से जोड़ने के लिए एक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। यह कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान दोनों की तरफ़ से बनाया जा रहा है, जिसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के लिए भारत की तरफ़ से 26 नवंबर 2018 को नींव रखी गई थी, वहीं पाकिस्तान में यह नींव 28 नवंबर 2018 को रखी गई थी।  

श्रीकांत भाऊ बनना चाहते हैं सीएम, शिवसेना सांसद ने कहा- साहिब! मत पालिए अहंकार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हफ्ते भर से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन, अब तक नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। इसकी वजह मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना की जिद्द है। उसकी जिद्द ने राज्य में कई और लोगों के मन में मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जगा दी है। इनमें केवल नेता ही नहीं हैं। बीड जिले के किसान श्रीकांत वी गदले ने भी सीएम पद पर दावा ठोंका है।

उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिख कर कहा है कि जब तक सीएम पद का मामला नहीं सुलझता है, तब तक उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। गदले ने किसानों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए यह मॉंग की है। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली है। उसकी गठबंधन सहयोगी शिवसेना के पास 56 सीटें है। लेकिन, भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलने के बाद से शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद मॉंग रही है। हालॉंकि उसके दावे को खारिज करते हुए भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को फिर से विधायक दल का नेता चुन लिया है। शिवसेना के नहीं मानने की सूरत में भाजपा निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के साथ अल्पमत सरकार का गठन कर सकती है।

इस बीच, शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से ही होगा और सरकार गठन को लेकर अभी भाजपा से कोई बात नहीं हुई है। उन्होंने ट्वीट किया है, “साहिब…मत पालिए, अहंकार को इतना, वक्त के सागर में कई,सिकन्दर डूब गए!” एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात करने वाले राउत ने कहा है कि भाजपा-शिवसेना को जनादेश “50:50 फॉर्मूले” के आधार पर सरकार बनाने के लिए मिला है।

शिवसेना की इस कवायद से एनसीपी के रुख में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा है। पार्टी नेता नवाब मलिक ने फिर से दोहराया है कि भाजपा शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने का जनादेश मिला है और उन्हें सदन में बहुमत साबित करना चाहिए। एनसीपी विधायक दल के नेता अजीत पवार ने भी विपक्ष में बैठने की बात कही है। ​54 सीटें जीतने वाली एनसीपी के मुखिया पवार ने नतीजों के बाद ही विपक्ष में बैठने का ऐलान कर दिया था।

राजस्थान के CM गहलोत ने भाजपा नेता पर दिया विवादित बयान, कहा- नया मुल्ला

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने भाजपा नेता को नया मुल्ला कहकर बुलाया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूनिया को आदेश दिया है कि वे मुख्यमंत्री को टारगेट करें।

अपनी बात को प्रेस वार्ता में आगे बढ़ाते हुए गहलोत ने इस दौरान कहा कि सतीश पूनिया को उन्हें (गहलोत को) समझने में समय लगेगा। वे नए-नए मुल्ला हैं, जो नया मुल्ला होता है, वो जोर से बांग देता है। उनकी अभी वहीं स्थिती बनी है। उन्हें अमित शाह और नरेंद्र मोदी के इशारे मिले हैं।

हालाँकि इस बयान पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी पलटवार किया है। उन्होंने जवाब दिया है कि मुख्यमंत्री खुद की ही अपनी पार्टी के नेताओं को नहीं पचा पा रहे। इसलिए वे दूसरे नेताओं के बारे में बयानबाजी कर सकते हैं, ये उनका फ्रस्टेशन है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने स्टेट हाईवे पर फिर से टोल वसूली को लेकर एक दिन पहले कहा था कि दीपावली के तोहफे के लिए जनता तैयार रहे, राजकीय टोल नाकों पर फिर से लगेगा टोल!! राजकीय राजमार्गों पर निजी वाहनों का टोल माफ नहीं होगा। उन्होंने इस फैसले को जन विरोधी फैसला बताते हुए सरकार को जनता विरोधी करार दिया था।

जिस पर जवाब देते हुए ही गहलोत ने कहा है कि पूनिया अभी उन्हें समझ नहीं रहे, क्योंकि वे नए मुल्ला है। उनका कहना है कि वसुंधरा राजे की सरकार में लिया गया ये फैसला मेरिट के आधार पर नहीं था। इससे सरकार पर बहुत भार आ रहा था। टोल कंपनी की शर्तों को बिना चर्चा के बदल दिया गया था।

अपने इस फैसले पर गहलोट ने निजी वाहन चलाने वालों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राइवेट गाड़ी चलाने वाले सभी लोग सक्षम हैं, इसलिए वो उम्मीद करते हैं कि प्राइवेट कार चलाने वाले लोग इस फैसले का स्वागत करें ।

गौरतलब है कि इस फैसले से पहले गहलोत सरकार राज्य के सभी दफ्तरों में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की तस्वीर लगाने को भी अनिवार्य कर चुकी है। जिसके लिए खुद मुख्य सचिव ने बाकायदा सभी विभागों को पत्र लिखकर बापू की फोटो लगाने के आदेश दिए हैं। इस कदम के पीछे राजस्थान की वर्तमान सरकार का कहना है कि वे महात्मा गाँधी के आदर्श सिद्धांतों पर चलती है न कि गोडसे या वीर सावरकर के कदमों पर। बता दें कॉन्ग्रेस के इस कदम पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस को नसीहत दी थी कि वे ऐसे फरमानों को जारी करने के बजाए काम करने पर ध्यान दें।