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जम्मू-कश्मीर में इस ‘साहसिक’ कदम के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सांसद ने की मोदी की सराहना

एक प्रभावशाली अमेरिकी सासंद ने जम्मू-कश्मीर में संविधान के अस्थायी अनुच्छेद के प्रावधानों को रद्द करने के ‘साहसी कदमों’ के लिए गुरुवार (31 अक्टूबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की।

गुरुवार को, एक सरकारी अधिसूचना के ज़रिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ गए। 5 अगस्त 2019 को राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने वाले अनुच्छेद-370 को हटाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद दो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

सांसद जॉर्ज होल्डिंग ने गुरुवार को सदन में कहा,

“प्रधानमंत्री मोदी और संसद ने जो कदम उठाए हैं उनकी आवश्यकता थी, वे क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए जरूरी हैं और इनकी सराहना की जानी चाहिए।”

रिपब्लिकन सांसद ने कहा कि भारतीय संसद ने जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलने का कानून पारित करने के साथ ही उन प्रावधानों में भी बदलाव किया है जो “आर्थिक विकास में बाधक थे और अलगाववाद की भावना को बढ़ावा देने वाले लगते थे।”

होल्डिंग ने आगे कहा, “हाल तक, कश्मीर अनुच्छेद-370 से चलता था, जो एक पुराना कानून था जिसे भारतीय संविधान ने अस्थायी तौर पर मान्यता दी थी। अनुच्छेद-370 उन लोगों के लिए भले ही अच्छा हो जिनके राजनीतिक संपर्क थे, लेकिन यह लोगों को आर्थिक अवसर उपलब्ध नहीं कराता था।”

होल्डिंग ने कहा कि भारतीय संविधान के अस्थायी प्रावधान ने ‘ध्रुवीकरण का माहौल’ बनाया जिसका राजनीतिक दोहन किया गया और पिछले कुछ दशकों में हजारों लोगों ने आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान स्थित कई समूह सीमा पार आतंकवाद फैलाने में सक्षम रहे जिससे यहाँ के लोगों और उनके परिवारों को काफी कुछ झेलना पड़ा और अर्थव्यवस्था हमेशा कमजोर रही।”

होल्डिंग ने कहा कि इन्हीं सबके चलते मोदी सरकार को यह फैसला लेना था कि पुरानी नीति के साथ ही चला जाए या फिर क्षेत्र के वैधानिक दर्जे में बदलाव कर प्रगति के रास्ते पर बढ़े। होल्डिंग ने कहा, “मैडम स्पीकर, जम्मू-कश्मीर के लोग बेहतर के हकदार हैं और स्थिति को देखते हुए साहसी कदम उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने सही किया। जम्मू-कश्मीर के दर्जे में बदलाव को संसद द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया जो सुधारों की आवश्यकता की जरूरत पर आम सहमति को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा कि इन बदलावों के बाद भी यहाँ अशांति चाहने वाले लगातार हिंसा को बढ़ावा देने में लगे हैं।

होल्डिंग ने कहा, “पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों ने हाल ही में आम नागरिकों को बाहर निकलने, काम करने या सार्वजनिक स्थलों पर न जाने की चेतावनी देते हुए पोस्टर लगाए।”

उन्होंने कहा कि ये समूह सीमापार आतंकवाद में लिप्त हैं और इन्होंने नागरिकों तथा बच्चों पर हमले भी किए हैं। इन आतंकवादी समूहों ने सेब के कारोबार से जुड़े व्यापारियों और मजदूरों को भी निशाना बनाया।

Fact Check: तेजस में खराब खाना खाकर लोग ICU में हुए भर्ती या ये है महज सरकार को घेरने का प्रोपगेंडा?

एक तरफ जहाँ देश में चलने वाली सबसे अच्छी ट्रेन तेजस का बखान हो रहा है वहीं बीते 2-3 दिनों से सोशल मीडिया पर तेजस ट्रेन में खराब खाने के कारण यात्रियों की तबीयत बिगड़ने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में लगातार बताया जा रहा है कि तेजस में खराब खाना परोसे जाने के कारण कई लोग बीमार पड़ गए, और 3 की स्थिति इतनी गंभीर है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके अलावा इन पोस्ट से भाजपा सरकार को घेरने का भी पूरा प्रयास हो रहा है।

जब तेजस से जुड़ी इस सूचना पर हमारी नजर पड़ी, तो हमने भी इस मामले पर रिपोर्ट बनाने के लिए सच्चाई जानने की कोशिश की। लेकिन मालूम चला वायरल पोस्ट में दी गई जानकारी 2017 की पुरानी खबर की है। जिसे हाल ही में viral in india नाम के फेसबुक पेज ने शेयर किया है।

VIRAL IN INDIA द्वारा शेयर पोस्ट में बताया गया है कि तेजस का खाना खाने से 24 यात्रियों की हालत खराब हो गई और 3 लोग ICU में भर्ती है। इस पोस्ट में एक ओर खाने की तस्वीर दिखाई गई और दूसरी ओर तेजस ट्रेन की। पोस्ट के कैप्शन में लिखा है कि ये हाल है देश की सबसे अच्छी ट्रेन का

हालाँकि, गूगल पर तेजस और खराब खाने जैसे की वर्ड्स डालने पर मालूम चलता है कि पोस्ट में लोगों के बीमार होने की सूचना निराधार नहीं है। लेकिन ये बात बिलकुल गलत है कि इसके कारण लोगों को आईसीयू में भर्ती होना पड़ा।

खबर की सच्चाई की पड़ताल करने के दौरान हमें पता तला कि 2 साल पहले 2017 में कई खबरे छपीं थी जिसमें ट्रेन का खाना खाने के कारण कई लोगों के बीमार होने की पुष्टि थी। लेकिन हमें ये भी पता चला कि तुरंत इन यात्रियों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था और इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया था।

आगे खबर की सच्चाई तलाशते हुए एक मीडिया रिपोर्ट मिली जिसमें घटना के बाद रेलवे का बयान था। रेलवे ने इन लोगों के बीमार होने पर कहा था कि तेजस में लोग खराब खाने से बीमार नहीं हुए थे बल्कि एसी कोच में दो बच्चों की उलटी के बाद कोच में बेचैनी शुरू हुई और लोग बीमार हुए। वहीं सेंट्रल रेलवे की टीम की ओर से आई जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि खाना ‘संतोषजनक’ था।

हालाँकि, इतनी पड़ताल के बाद स्प्ष्ट हो गया कि ये खबर फर्जी नहीं है, लेकिन इसे आज के समय में सरकार के खिलाफ़ इस्तेमाल करने के लिए तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि 30 अक्टूबर को अपडेट किए गए वायरल पोस्ट को अब तक एक हजार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं। इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट करके सरकार को घेरा जा रहा है। बिना सच्चाई खँगाले प्रशासन को कोसने का काम जारी है। लोग इस पोस्ट को आधार बनाकर ट्विटर पर भी अन्य यूजर्स को बरगलाने का काम काम कर रहे हैं। और डेली बिहार नाम की वेबसाइट ने तो इसे खबर का रूप देकर भी पेश किया है।

अंततः इस पूरी पड़ताल से साफ है कि इस समय वायरल तेजस की यह खबर की ख़राब खाने की वजह से यात्री बीमार हुए निराधार है। बस सरकार और उसकी नई व्यवस्था को घेरने की बदनीयत से इस खबर को फैलाया गया और लोगों ने भी बिना सच्चाई परखें इस अफवाह तंत्र के शिकार हुए। हमारी पड़ताल से यह स्पष्ट है कि यह खबर फेक है।

पाकिस्तान 2020 तक ग्रे लिस्ट में: अरबों डॉलर फँसने से तिलमिलाया चीन, भारत-अमेरिका पर लगाए आरोप

फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) की बैठक में पाकिस्तान को फ़रवरी 2020 तक ग्रे लिस्ट में रखे जाने के फ़ैसले से चीन ख़ासा भड़का हुआ है। इस फ़ैसले से पाकिस्तान का नाख़ुश होना तो समझ में आता है, लेकिन इसका असर चीन पर भी दिखाई दे रहा है।

चीन ने आरोप लगाया है कि भारत और अमेरिका FATF का राजनीतिकरण करने में लगे हुए हैं। यह बयान चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से दो दिन पहले ही दिया गया है। चीन की इस तिलमिलाहट की असल वजह पाकिस्तान में अरबों डॉलर निवेश है, जो अब उसे ख़तरे में दिखाई दे रहे हैं। चीन का बयान बताता है कि वह किस तरह दुनिया में पाकिस्तान के नैरेटिव को आगे बढ़ा रहा है, जबकि हक़ीकत यह है कि FATF ने इमरान ख़ान सरकार को आतंकी नेटवर्क ख़त्म करने के लिए गाइडलाइंस जारी की थी, उनमें से किसी में भी वो खरा नहीं उतरा था।

ख़बर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की आम सभा (UNGA) में भाषण देने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अलजजीरा और रशिया टुडे को इंटरव्यू दिया था। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने भारत पर आरोप लगाया गया था कि वो FATF के माध्यम से पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डालने की कोशिश में लगा हुआ है। पाकिस्तान की यह कोशिश थी कि चीन उसे किसी तरह से ब्लैकलिस्ट होने से बचा ले। वहीं, चीन के लिए भी यह किसी मजबूरी से कम नहीं था।

चीन की बौखलाहट का कारण पाकिस्तान में अरबों का निवेश है। इसके अलावा भी चीन के कई प्रोजेक्ट पाकिस्तान में चल रहे हैं। इतना ही नहीं चीन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का क़र्ज भी दिया हुआ है, जिसका ब्याज़ चुकाना भी पाकिस्तान के लिए काफ़ी महँगा सौदा साबित हो रहा है। ऐसे में पाकिस्तान, चीन के कर्ज़ का भुगतान कैसे कर पाएगा, इसकी चिंता चीन को भी सता रही है।

बता दें कि FATF एक अंतर-सरकारी निकाय है जो 1989 में आया, इस संगठन ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देने से साफ़ इनकार कर दिया था क्योंकि उनके मुताबिक पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग को रोकने पूरी तरह विफल रहा है। इसीलिए इस निकाय ने पाकिस्तान को फ़रवरी 2020 तक ग्रे-लिस्ट में रखने का निश्चय किया था।

इससे पहले 10 अक्टूबर को जब इमरान खान को इस बात का अंदेशा होने लगा था कि FATF से पैसे माँगने पर पाकिस्तान को बेईज्ज़त होना पड़ सकता है तो आनन-फानन में दुनिया की नज़र में खुदको पाक-साफ दिखाने के लिए इमरान खान की सरकार ने टॉप 4 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था जिससे दुनिया के सामने यह ढोंग किया जा सके कि पाकिस्तान में आतंक-विरोधी माहौल है और वे इसका समर्थन बिलकुल नहीं करते।

महाराष्ट्र में खींचतान के बीच इस किसान ने राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा- किसानों के लिए मुश्किल वक्त, मुझे बना दो CM

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नतीजे आए लगभग एक हफ्ते हो गए पर अब तक सरकार नहीं बन पाई है। मुख्‍यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच जारी तल्‍खी के बीच महाराष्ट्र के बीड जिले के एक किसान ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की है। किसान ने राज्यपाल को खत लिखकर खुद को मुख्यमंत्री बनाने की माँँग की है। किसान का कहना है कि जब तक मामले का हल नहीं होता, तब तक उसे सीएम बना दिया जाए।

बीड जिले के किसान श्रीकांत वी गदले ने राज्यपाल को लिखा, “जब तक सीएम की पोस्ट का मामला सुलझता नहीं है, तब तक मुझे CM बनाया जाना चाहिए। यह किसानों के लिए बेहद मुश्किल वक्त है। बेवक्त बारिश की वजह से किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचा है। राज्य में सरकार का गठन जल्द से जल्द होना चाहिए।”

बता दें कि 24 अक्‍टूबर को आए चुनाव नतीजों में बीजेपी को 105 तो शिवसेना को 56 सीटों पर जीत हासिल हुई है। 288 सदस्‍यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 145 सीटें चाहिए। शिवसेना ढाई-ढाई साल तक दोनों दलों के सीएम बनाए जाने की माँग पर अड़ी हुई है, जबकि बीजेपी का कहना है कि देवेंद्र फडणवीस ही पूरे पाँच साल तक मुख्‍यमंत्री रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले देवेंद्र फड़णवीस ने कहा था, “बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास स्‍पष्‍ट बहुमत है। इसके अलावा निर्दलीयों का समर्थन भी है, गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीतकर जनादेश हासिल किया है। हम इस जनादेश का सम्‍मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें नहीं लगता कि एक स्थिर सरकार बनाने में कोई बाधा है।”

उन्होंने भरोसा जताया था कि अहम मुद्दों पर जल्‍द ही स्थिति साफ हो जाएगी और सरकार बनाने में देरी नहीं होगी। हालाँकि दोनों ही दलों के बीच सरकार के गठन को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। बता दें कि शिवसेना ढाई-ढाई साल के लिए सीएम का प्रस्ताव रखा है, जिसे बीजेपी ने नामंजूर कर दिया है। जिसके बाद राज्य में सरकार बनाने को लेकर अन्य विकल्पों पर भी चर्चाएँ शुरू हो गई है।

लियाकल मियाँ ने काले जादू के नाम पर बुजुर्ग बुद्धू के ऊपर चढ़ा दिए तीन लोग, गई जान, FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल के अलीपुर द्वार जिले में काले जादू के नाम पर लियाकल मियाँ और उनके साथी मलॉय ने बुद्धू नामक एक बुजुर्ग की जान ले ली। लेकिन मीडिया में इसे इस तरह पेश किया गया कि जैसे इस घटना में कोई हिन्दू तांत्रिक और मन्त्र विधि शामिल हो। पुलिस ने बुद्धू उरांव के बेटे की तहरीर पर दोनों आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया। साथ ही बुद्धू का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले में जाँच जारी है।

गौरतलब है कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले को भाषा के गलत प्रयोग से ट्वीस्ट देते हुए हिंदू तांत्रिक से जोड़कर दिखाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, बुद्धू उरांव अलीपुर द्वार जिले के बोंचुकुमारी का रहने वाले है। जिन्हें उनकी बीमारी के कारण कुछ समय पहले सिलिगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। हालाँकि, यहाँ से वे पूरी तरह ठीक होकर वह अपने घर आ गए थे। लेकिन अगले ही दिन यानी 29 अक्टूबर को पड़ोसियों के कहने पर शरीर की अशुद्धियाँ दूर कराने के लिए उन्होंने मदारीहाट में लियाकल मियाँ को संपर्क किया।

काले जादू के नाम पर लियाकल और उनके साथी ने बुद्धू से 12 हजार रुपए माँगे। इसमें पहले उन्होंने 5 हजार रूपए टोकन अमॉउंट के रूप में लिया। बाद में अपना काले जादू की प्रक्रिया शुरू की। दोनों ने पहले बुद्धू को पेट के बल लेटने के लिए कहा और पीठ पर पान के पत्तों से मालिश की। थोड़ी देर बाद दोनों उसकी पीठ पर आ खड़े हुए और बुद्धू के बेटे राजेश को भी अपने साथ खड़ा कर लिया।

इस प्रक्रिया को कुछ समय बीता कि लियाकल और उनका तेज आवाज में जादू-टोने के लिए कुछ पढ़ने लगे। तभी बुद्धू भी अपने ऊपर तीन लोगों के वजन को न सहने के कारण कराहने लगा, लेकिन काले जादू के नाम पर चिल्ला रहे दोनों लोगों की आवाजें इतनी तेज थी कि बुजुर्ग की आवाज उन्हें सुनाई नहीं पड़ी। करीब 15 मिनट के संघर्ष के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

जब गाँव वालों को इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने काला जादू करने वाले लियाकत और उनके साथी को पीटना शुरू कर लिया। हालाँकि थोड़ी देर बाद मौक़े पर पहुँची पुलिस ने उन्हें गाँव वालों के चंगुल से निकाला और उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

अब फिलहाल लियाकल और मलॉय दोनों पर हत्या के आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले में आगे की जाँच जारी है। पुलिस ने कहा है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का मालूम चल पाएगा, तब तक वे अपनी जाँच में जुटे हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट पर संदिग्ध बैग में RDX की आशंका: CISF ने जाँच शुरू की, बढ़ाई गई सुरक्षा

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और भोपाल के साथ देश के कई शहरों में भी आतंकी हमलों की आशंका के बीच शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर एक संदिग्ध बैग मिला है। इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर छोड़े गए संदिग्ध बैग में RDX होने की आशंका से दिल्ली एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।

ख़बर के अनुसार, दिल्ली पुलिस को रात को लगभग 1 बजे फोन आया कि टर्मिनल-3 के गेट नं-2 के पास एक संदिग्ध बैग मिला है। इसके बाद बैग को पुलिस ने हटा दिया और सामग्री की जाँच की। बैग के आसपास का बड़ा इलाका सुरक्षा बलों ने खाली करवा दिया और लोगों को उस क्षेत्र से दूर रहने को कहा गया। इसके बाद जाँच के लिए पहुँची डॉग स्क्वॉयड की टीम ने पूरी पड़ताल की। किसी बड़ी आशंका के मद्देनजर जाँच के दौरान एक-दो घंटों के लिए टर्मिनल-3 के सामने की सड़क को बंद कर दिया गया था। यह सब जाँच के लिए किया गया था और इसी कड़ी में टर्मिनल-3 पर यात्रियों को कुछ घंटे तक निकलने नहीं दिया गया था। 

बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड को तुरंत मौक़े पर बुलाया गया और टर्मिनल-3 के बाहर की सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया।

विशेष सेल और ख़ुफ़िया ब्यूरो ने जाँच शुरू कर दी और जल्द ही औपचारिक रूप से CISF से जाँच शुरू करवाई जाएगी। विस्फोटक रात में लगभग 3 बजे निष्क्रिय गया था। ग़ौरतलब है कि इससे कुछ दिनों पहले भी इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट पर लावारिस बैग मिलने के बाद हड़कंप मच गया था, हालाँकि उस दौरान कुछ भी ख़तरनाक बैग में नहीं मिला था।

BJP-शिवसेना के बीच जारी गतिरोध से उभरे इन विकल्पों को लेकर महाराष्ट्र में बढ़ी हलचल, ‘मातोश्री’ से हटे पोस्टर

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के गठबंधन को बहुमत तो मिल गया, लेकिन अभी तक राज्य में सरकार नहीं बन पाई है। दोनों पार्टियों के बीच मुख्यमंत्री पद और कैबिनेट में हिस्सेदारी को लेकर खींचतान चल रही है। भाजपा-शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के बीच अन्य विकल्पों को लेकर भी सरगर्मियाँ तेज हो गईं हैं। इस सबके बीच गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) को शिवसेना नेता संजय राउत ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस के शरद पवार से मुलाकात की, जिसने सियासी गर्मी को और बढ़ा दिया।

बता दें कि राज्य में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कॉन्ग्रेस को 44 सीटों पर जीत हासिल हुई है। मौजूदा परिस्थिति में बीजेपी और शिवसेना को बहुमत है। वो आसानी से सरकार बना सकती है, लेकिन शिवसेना के 50-50 फॉर्मूले को लेकर पेंच फँसा हुआ है। अगर शिवसेना इस पर अड़ी रहती है और एनसीपी-कॉन्ग्रेस विपक्ष में बैठने पर कायम रहती है, तो प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। लेकिन यदि कॉन्ग्रेस और एनसीपी का गठबंधन शिवसेना का साथ देने के लिए राजी हो जाती है, तो शिवसेना आराम से सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।

इसके साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में अल्पमत की सरकार बन सकती है, जिसे बाहर से एनसीपी समर्थन दे सकती है। जिस तरह से 2014 के चुनाव के बाद 288 सदस्यीय विधानसभा में जब 122 विधायकों वाली फड़नवीस की अल्पमत सरकार ने शपथ ली थी तो एनसीपी ने उसे बाहर से समर्थन दिया था।

वहीं मौजूदा सियासी समीकरण को देखते हुए ये भी बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की संयुक्त सरकार बन सकती है। बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चह्वाण ने शिवसेना को उकसाते हुए कहा था कि विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। इसके बावजूद यदि वह सरकार बनाने में अक्षम रहती है तो दूसरे बड़े दल के रूप में शिवसेना को मौका मिलना चाहिए। 

चह्वाण का कहना है कि ऐसी स्थिति में यदि शिवसेना सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस से समर्थन माँगती है तो वो पार्टी आलाकमान से इस पर विचार करने को कहेंगे। एस तरह से प्रदेश में शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की संयुक्त सरकार की संभावना भी दिखाई दे रही है।

इस बीच बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) ने ठाकरे परिवार के आवास ‘मातोश्री’ के बाहर लगे उन होर्डिंग को हटा दिया है, जिनमें आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की बात लिखी गई थी। इन होर्डिंग में लिखा था- सिर्फ आदित्य ठाकरे ही महाराष्ट्र के सीएम। बता दें कि बीएमसी में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी है, ऐसे में इन पोस्टरों को हटाया जाना सरकार गठन के लिए जारी उठापटक को एक नया मोड़ दे सकता है।

ISIS से खतरा अब भी कायम: अबू हमजा ने की बगदादी के मारे जाने की पुष्टि, अल-हाशिमी नया सरगना, दी धमकी

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने नया ऑडियो जारी कर अपने सरगना अबु बकर अल-बगदादी के मारे जाने की पुष्टि कर दी है। साथ ही अपने नए सरगना का भी ऐलान कर दिया है। इस्लामिक स्टेट ने अबु इब्राहिम अल-हाशिमी को नया सरगना घोषित किया है। नए ऑडियो में बगदादी के बेहद क़रीबी अबु हसन अल-मुहाजिर के मारे जाने की भी पुष्टि की गई है।

अल-मुहाजिर को रविवार (27 अक्टूबर) को उत्तरी सीरिया के जारबिलस में अमेरिकी ऑपरेशन में मार गिराया गया था। अबू हमजा अल-कुरैशी नाम के वक्ता ने इस्लामिक स्टेट के अनुयायियों से नए खलीफ़ा के प्रति निष्ठा रखने का आग्रह किया और अमेरिकियों को संबोधित करते हुए कहा कि जश्न मत मनाओ

इससे पहले अमेरिका ने ISIS चीफ अबू बकर अल बगदादी के संभावित उत्तराधिकारी को भी एयरस्ट्राइक में मार गिराने का ऐलान किया था। इसकी जानकारी ट्रंप ने ट्वीट कर दी थी जिसमें कहा गया था कि बगदादी के नंबर एक उत्तराधिकारी को भी ढेर कर दिया गया।

ख़बर के अनुसार, बगदादी के मारे जाने के बाद भी ख़तरा टला नहीं है। एक शीर्ष अमेरिकी जनरल ने कहा है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट अभी भी ख़तरनाक है और यह अपने लीडर अबू बकर-बगदादी के की मौत का बदला लेगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल केनेथ मैकेंजी ने पेंटागन द्वारा जारी किए वीडियो और अमेरिकी विशेष बलों की रेड में बगदादी की मौत को स्वीकारते हुए संवाददाताओं से बात करते हुए बताया कि आतंकी संगठन के नेतृत्व को बगदादी की मौत से झटका लगा है। इससे उभरने में भले ही उन्हें थोड़ा वक़्त लगे, इसलिए यह नहीं मान लेना चाहिए कि ख़तरा टल गया।

ग़ौरतलब है कि उत्तर-पश्चिम सीरिया में अमेरिका के विशेष अभियानों में बगदादी मारा गया था। बगदादी के मारे जाने की भी पुष्टि डोनाल्ड ट्रंप ने ह्वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बगदादी कुत्ते की मौत मारा गया।

इस अभियान में अमेरिकी जवानों को किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़ा। ट्रंप ने बताया था कि बगदादी के साथ उसके तीन बच्चों, दो बीवी और एक सुरक्षा गार्ड भी मारा गया। इस सफल मिशन के लिए उन्होंने रूस, तुर्की और सीरिया का शुक्रिया भी अदा किया। साथ ही बताया कि इस ऑपरेशन से अमरीकी सेना को ‘बहुत सी संवेदनशील जानकारियाँ और चीज़ें’ भी मिली थी।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: कामरान के बाद अब सौदागरन मोहल्ला आया रडार पर, दाउद कनेक्शन भी आ रहा सामने

कमलेश तिवारी हत्याकांड में हत्यारोपियों की मदद करने वालों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि आए दिन पुलिस किसी न किसी को गिरफ्तार कर रही है। इस कड़ी में अभी हाल में पुलिस ने पेशे से वकील नावेद और उसके 3 साथियों को गिरफ्तार किया। लेकिन अब खबर है कि एटीएस, एसटीएफ समेत तमाम जाँच एजेंसियों की नजर सौदागरन नाम के मोहल्ले पर है। मीडिया खबर के अनुसार यहाँ कादरी होटल से लेकर कई संगठन सक्रिय है, जिनपर कार्रवाई करने के लिए पुलिस उनके नाम और नंबर की लिस्ट जुटा रही है।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों नावेद की गिरफ्तारी के बाद मौलाना सैयद कैफी अली को भी एटीएस गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा अशफाक का फोन ट्रेन में रखकर पुलिस को भ्रमित करने वाले कामरान को भी जाँच में जुटी टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। इसी तरह के तमाम खुलासे होने के बाद अब जाँच टीमों ने सौदागरान मोहल्ले की हर गतिविधि पर अपनी नजर टिकाई हुई है।

जानकारी के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने ऐसे तमाम संगठन और मशहूर लोगों के नाम की सूची बनाकर उनके नंबर जुटाने शुरू कर दिए हैं, जिनसे मामले के संबंध में पूछताछ होनी है। कहा जा रहा है पुलिस इन लोगों से पूछताछ में उन नामों के बारे में पूछेगी, जिन्होंने बरेली में हत्यारों की हर मुमकिन मदद की।

फिलहाल बता दें कि कमलेश तिवारी हत्याकांड हालिया जाँच के दौरान पूरा नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। दरअसल, जाँच एजेंसियों की रडार पर इस मोहल्ले के अलावा एक नया कोड वर्ड भी आया है, जिसे अभी तक ‘दाउद इब्राहिब’ की डी कंपनी से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। न्यूज 18 की खबर के अनुसार हत्याकांड की जाँच में जुटी टीम इस संबंध में जल्द ही नया खुलासा कर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जाँच एजेंसियों ने अपनी जाँच में कुछ फोन कॉल ट्रेस किया है। जिसमें प्रमोद नाम का खुलासा हुआ। जिसके बाद बताया गया कि प्रमोद नाम का शख्स हकीकत में मुस्लिम समुदाय का है, जो देश से बाहर है और जाँच एजेंसियों से बचने के लिए हिंदू नाम का इस्तेमाल कर रहा है। प्रमोद के मिडिल ईस्ट कंट्री में होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं जाँच एजेंसियों का दावा है कि वो जल्द ही प्रमोद नाम के कोड को डिकोड कर लेंगे और इस शख्स का असली नाम का पता लगा लेंगे।

किरण बेदी ‘राक्षस’ हैं, क्योंकि कॉन्ग्रेसियों के लिए नारी सम्मान बस मैडम जी की चमचई है

  • इंदिरा माँ का बलिदान युग-युग याद करता रहेगा हिंदुस्तान। 35वीं पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि।
  • केंद्र ने यहाँ एक राक्षस को नियुक्त कर दिया है। वह योजनाओं को लागू करने में बाधा पहुँचा रही है।

एक देश की पहली और इकलौती महिला प्रधानमंत्री। दूसरी, पहली महिला जिसने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) को चुना। दोनों ही महिला सशक्तिरण की मिसाल। लेकिन, शुक्रवार यानी 31 अक्टूबर 2019 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गॉंधी की पुण्यतिथि पर ही दूसरी महिला यानी पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी की तुलना ‘राक्षस’ से की गई।

ट्वीट कर इंदिरा को माँ बताने वाला भी कॉन्ग्रेसी और बेदी को भरी सभा में राक्षस कहने वाला भी कॉन्ग्रेसी। फर्क केवल इतना कि एक नया-नया बना कॉन्ग्रेसी, तो दूसरा पार्टी की मुखिया सोनिया गाँधी का पुराना वफादार। दिल्ली कॉन्ग्रेस की प्रचार समिति के अध्यक्ष कीर्ति आजाद ने इंदिरा गॉंधी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें ‘माँ’ कहा। वहीं, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने पुण्यतिथि पर कॉन्ग्रेस की ओर से आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “हम विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए लोगों की प्रगति के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं। लेकिन केंद्र ने यहाँ एक ‘राक्षस’ को नियुक्त कर दिया है और वह योजनाओं को लागू करने में बाधा पहुँचा रही हैं।”

इंदिरा गाँधी से आपके वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। उनके फैसलों की भी आलोचना हो सकती है। यह भी सच है कि अपने ही सुरक्षाकर्मियों के हाथों उनके मारे जाने के बाद देश भर में सिखों का नरसंहार हुआ था। लेकिन, इस तथ्य को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि वे देश की प्रधानमंत्री थीं। उनके नेतृत्व में देश ने कई मुकाम हासिल किए। इसलिए, कीर्ति आजाद की सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने इंदिरा को श्रद्धांजलि देते हुए माँ कहा। वरना, पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद ने दिसंबर 2013 में बकायदा ऐलान किया था, “सोनिया गाँधी सिर्फ राहुल गाँधी की माँ नहीं हैं। वे हमारी भी माँ हैं और पूरे देश की माँ हैं।” गनीमत यह थी कि उस वक्त प्रियंका गाँधी ने खुद को रायरबेली और अमेठी तक ही सीमित कर रखा था। नहीं तो खुर्शीद साहब इस बयान में यकीनन प्रियंका गाँधी का नाम भी एडजस्ट कर लेते।

असल में, यही कॉन्ग्रेसियों का चरित्र है। उनके लिए नारी सम्मान का मतलब ही मैडम जी की चाटुकारिता है। इसलिए, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारे का मजाक उड़ाने से वे नहीं चूकते। वे एक एयरहोस्टेस की अकाल मौत का इस्तेमाल अपनी सुविधा से राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए कर लेते हैं। चंद दिन ही बीते हैं जब महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने भाजपा अध्यक्ष एवं गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूछा था कि उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है? सत्ता या महिला सुरक्षा? सुष्मिता देव ने यह पत्र इस बिना पर लिख दिया था कि एयरहोस्टेस की आत्महत्या के मामले में आरोपित निर्दलीय विधायक ने बिना माँगे भाजपा को समर्थन का ऐलान कर दिया था, जबकि यह निर्दलीय विधायक कॉन्ग्रेसी सरकार में मंत्री रह चुका है।

इस निर्दलीय विधायक के समर्थन को ठुकरा कर भाजपा ने साफ कर दिया है कि उसके लिए महत्वपूर्ण क्या है। अब बारी कॉन्ग्रेस की है। नारायणसामी के बयान के बाद उसे बताना चाहिए कि कॉन्ग्रेस के लिए नारी सम्मान का मतलब क्या है? क्या कॉन्ग्रेस का नारी सम्मान गॉंधी परिवार की चौखट तक ही बॅंधा है?

आखिर वो कौन सी सोच हो सकती है जिससे प्रेरित होकर एक सीएम पद का लिहाज न रखे। मर्यादाओं को भूल जाए। नारी के सम्मान का ख्याल न करे। इंदिरा, सोनिया और आने वाले कल में प्रियंका में माँ तलाशने वाली परंपरा के नेता को यह भी याद नहीं रहा कि जिस महिला को वे राक्षस कह रहे हैं, वह एक बेटी की मॉं भी हैं। शालीनता की कथित प्रतिमूर्ति मनमोहन सिंह की कैबिनेट की शोभा रहे नारायणसामी को शायद यह भी याद नहीं रहा होगा कि जिस महिला की तुलना वे राक्षस से कर रहे हैं, नाश्ते की मेज पर कभी उसकी मेजबानी इंदिरा गॉंधी ने की थी। 1975 में 26 जनवरी की परेड के अगले दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा ने किरण बेदी को नाश्ते पर बुलाया था। बकौल किरण बेदी, “पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी इस बात से खुश थीं कि परेड में एक दस्ते का नेतृत्व महिला कर रही थी।” खैर, परिवार के बाहर की जो सोच लें वो भला कॉन्ग्रेसी कैसा!