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अमृतसर हादसा: 59 मृतकों के परिवारों को 1 साल बाद भी नहीं मिला न्याय, कॉन्ग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

जहाँ पूरे देश में दशहरा को लेकर हर्ष-उल्लास का मौसम है, पंजाब में एक शहर ऐसा भी है जहाँ दशहरा का नाम आते ही एक ऐसी भीषण दुर्घटना याद आ जाती है, जिसे भुलाए नहीं भुलाया जा सकता। सबसे बड़ी बात तो यह कि अब तक इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के साथ न्याय नहीं हो सका है। इस हादसे को एक साल हो गए और लोग आज भी न्याय की उम्मीद में सड़कों पर हैं। अमृतसर में लोगों ने कैप्टेन अमरिंदर सिंह की सरकार के ख़िलाफ़ कैंडल मार्च निकाला है, पोस्टर लहराए हैं। साथ ही जनता ने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। शिरोमणि अकाली दल के विधायक विक्रम सिंह मजीठिया ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

कैंडल मार्च के दौरान पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके परिवारों के घर में खाने को रोटी तक नहीं है। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने नौकरी का वादा भी अभी तक पूरा नहीं किया है। उन्होंने आरोपितों को सज़ा देने की भी माँग की। पूर्व मंत्री मजीठिया ने कहा कि पंजाब सरकार ने झूठे वादे किए और अब तक आरोपितों के खिलाफ कर्रवाई नहीं की। उन्होंने माँग करते हुए कहा कि अमरिंदर सरकार आरोपितों पर कार्रवाई करे और वादे के मुताबिक पीड़ित परिवारों को नौकरी दे। उन्होंने कहा:

“अमृत सर रेल हादसे को लेकर 3 जाँच कमिटियाँ बनीं लेकिन अब तक एक भी व्यक्ति के ऊपर FIR तक नहीं हुआ। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जाँच कमिटी ने दोषी कॉन्ग्रेस नेताओं को बचाने की कोशिश की। मैंने विधानसभा में इस मामले को उठाया था और बताया था कि कई कॉन्ग्रेस नेता इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार हैं लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। कॉन्ग्रेस सरकार का पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का कोई इरादा नहीं है।”

बता दें कि बीते वर्ष अमृतसर के जोड़ा फाटक पर दशहरा महोत्सव चल रहा था। वहाँ लोग रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार ट्रेन वहाँ से गुजरी और कई लोग काल के गाल में समा गए। इस हादसे के बाद हर्षोल्लास में डूबे शहर में मातम पसर गया। इस हादसे ने 59 लोगों की ज़िंदगियाँ लील लीं। कई दर्जन लोग घायल हुए। मरने वालों में बच्चे, बूढ़े, जवान और महिलाएँ शामिल थीं।

उस दशहरा समारोह में कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी मुख्य अतिथि थीं। हादसे के तुरंत बाद वह वहाँ से निकल गई थीं। सिद्धू दम्पति ने भी कई बड़े-बड़े वादे करते हुए कहा था कि वे पीड़ित परिवारों को गोद लेंगे, घायलों का इलाज करवाएँगे और मृतकों के परिजनों के लिए नौकरी की व्यवस्था करेंगे। हालाँकि, तब सिद्धू के मंत्री रहते भी यह सब नहीं हो सका।

नवरात्रि के आखिरी दिन शिव मंदिर में तोड़फोड़: UP में आंदोलन की धमकी, इलाके में तनाव

उत्तर प्रदेश के बदायूं के उघैती में नवरात्रि के आखिरी दिन रविवार की देर रात कुछ अराजक तत्वों ने इलाके में स्थित शिव मंदिर में तोड़फोड़ करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में तनाव बढ़ गया। पुलिस को मामले की सूचना दी गई और अज्ञातों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही थाना पुलिस समेत सीओ बिल्सी संजय रेड्डी घटनास्थल पर पहुँचे और तोड़फोड़ करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देकर लोगों का गुस्सा शांत करवाया। उघैत के रहने वाले पुरुषोत्तम की शिकायत पर इस मामले के संबंध में अज्ञातों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज हुआ।

खबर के अनुसार ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि रविवार की रात में सभी लोग मंदिर में पूजा-अर्चना करके अपने-अपने घर चले गए थे। उस समय तक धार्मिक स्थल की सभी मूर्तियाँ सुरक्षित थीं। लेकिन जब सुबह अर्चना हेतु मंदिर में जाया गया तो मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त थीं। जिसे देखने के बाद स्थानियों में गुस्सा फैल गया।

आनन-फानन में पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया गया और ग्रामीणों द्वारा जल्द से जल्द गिरफ्तारी की माँग उठाई गई। लोगों ने पुलिस को अज्ञात आरोपितों को न पकड़ने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी।

लेकिन, मौक़े पर पहुँची पुलिस ने सूझ-बूझ से घटनास्थल की वीडियोग्राफी करवाते हुए लोगों को शांत करवाया और उन्हें आश्वस्त किया कि मामले में उचित कार्रवाई होगी। इसके बाद पुलिस ने मंदिर का जायजा लिया और मीडिया को बताया, “उघैती में शिव मंदिर में मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई हैं। अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। खुराफाती तत्वों को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही उनको पकड़कर जेल भेजा जाएगा। “

गौरतलब है कि अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के देवरिया थाना क्षेत्र के मदिरा पाली भरत राय में काली मंदिर में देवी की प्रतिमा को अराजक तत्वों द्वारा खंडित करने का भी मामला सामने आया था। जब घटना की सूचना मिलते ही पुलिस द्वारा फौरन काली माता की प्रतिमा को ठीक करवाया गया था और तनावपूर्ण स्थिति से काबू पाने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात हुआ था। जाँच में पता चला था कि मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित है।

Pak ने किया था जिस Avenger को मार गिराने का दावा, IAF ने उड़ाया वही विमान

बालाकोट एयर स्ट्राइक के जवाब में हुई हवाई झड़प में पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनंदन के अलावा जिस दूसरे लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा कर रहा था, हिंदुस्तान ने आज वायु सेना दिवस पर उसी को उड़ा कर पाकिस्तान को करारा तमाचा मारा है। यही नहीं, अभिनंदन वर्तमान समेत फरवरी की उस संक्षिप्त जंग में पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स को धूल चटाने वाले विमान के चालक दल के सैनिक भी वायुसेना की परेड का हिस्सा बने। 87वें वायु सेना दिवस पर यह नज़ारा दिल्ली के पास स्थित हिंडन वायु सेना बेस, गाज़ियाबाद पर देखने को मिला।

पाकिस्तान को मुँह चिढ़ाता ‘Avenger-1’

परेड का एक हिस्सा था वायुसेना का Avenger नामक battle formation (हवा में युद्धक विमानों का व्यूह)। इसमें शामिल थे तीन मिराज-2000, और उन्हें अपने सुरक्षा घेरे में लिए हुए दो Sukhoi-30MKI। और इन्हीं Sukhoi-30MKI में से एक का नाम है Avenger-1, जिसके लिए पाकिस्तानी वायु सेना ने दावा किया था कि उसने इस विमान को 27 फरवरी की झड़प में मार गिराया था। हिंदुस्तान ने उस समय भी इस दावे को सिरे से नकार दिया था, और आज उस विमान का दुनिया के सामने प्रदर्शन कर पाकिस्तान के मुँह पर जवाब फेंक कर मारा है। Avenger-1 के चालक दल के सदस्य वही वायु सैनिक थे, जिन्होंने इस Sukhoi-30MKI को फरवरी में हुए ‘ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट’ में हिस्सा लिया था।

अभिनंदन और MiG- Bison भी शामिल  

इसके अलावा वीर चक्र से सम्मानित होने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने भी अपने MiG- Bison विमान के साथ परेड में हिंदुस्तानी वायु सेना की ताकत और घातकता का प्रदर्शन किया। MiG- Bison वही विमान है, जिसमें बैठकर उन्होंने फरवरी में पाकिस्तान के अत्याधुनिक F-16 विमान को हवा में दौड़ा कर मार गिराया था। उसके बाद उनका विमान भी पाकिस्तानी हमले की चपेट में आकर पाकिस्तानी सीमा में क्रैश हो गया, और उन्हें 60 घंटों तक पाकिस्तानी कैद में रहना पड़ा।

समारोह के पहले हिन्दुस्तान के तीनों सैन्य प्रमुखों- थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, वायु सेना के मुखिया एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, और नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर एयर चीफ मार्शल भदौरिया ने कहा कि बालाकोट का असली रणनीतिक महत्व राजनीतिक नेतृत्व का जिहादियों को सज़ा देने की इच्छाशक्ति के प्रदर्शन का है। “सरकार के आतंकवादी हमलों ने निपटने के तरीके में भारी बदलाव है।”

हिन्दू महिला और मुस्लिम प्रोफेसर को OYO होटल ने नहीं दिया रूम, कहा – ‘अलग-अलग धर्म के हो’: मीडिया रिपोर्ट्स

जयपुर के एक होटल ने एक जोड़े को रूम देने से सिर्फ़ इसीलिए मना कर दिया क्योंकि वो दोनों अलग-अलग धर्म से ताल्लुक रखते हैं। उक्त पुरुष मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है तो महिला हिन्दू है। जयपुर के होटल ने दोनों का धर्म अलग-अलग होने पर आपत्ति जताई। होटल के रिसेप्शन पर दोनों को कहा गया कि उन्हें चेक-इन नहीं करने दिया जाएगा लेकिन क्योंकि दोनों अलग-अलग धर्म से हैं।

शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को ये घटना हुई जब उदयपुर के एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ‘ओयो’ के सिल्वरकी होटल में चेक-इन करने की कोशिश की। होटल ने कहा कि वो जयपुर पुलिस द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का अनुसरण करते हुए ऐसा कर रहे हैं। हालाँकि, होटल के अधिकारियों ने लिखित में ये सूचना देने से इनकार कर दिया।

होटल के मैनेजर गोवर्धन सिंह ने कहा कि अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाले जोड़ों को होटल में चेक-इन न करने देना होटल की पॉलिसी है और साथ ही यह स्थानीय पुलिस की हिदायतों के अनुरूप है। असिस्टेंट प्रोफेसर ने कहा कि सरकार द्वारा ऐसा कोई भी नियम नहीं बनाया गया है और होटल या ओयो की वेबसाइट पर कहीं भी इसका जिक्र नहीं है। प्रोफेसर ने ओयो की वेबसाइट पर इस बात की शिकायत की।

इसके बाद ओयो ने उनका रुपया रिफंड किया और फिर उन्हें शहर के एक अन्य होटल में मुफ़्त कमरा उपलब्ध कराया। महिला ने कहा कि वह असिस्टेंट प्रोफेसर को एक दशक से जानती हैं और कभी भी उनके बीच धर्म आड़े नहीं आया। उन्होंने कहा कि जोड़े में अगर हिन्दू और सिख होते तो शायद होटल उन्हें अनुमति दे देता।

जयपुर के पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पुलिस ने ऐसा कोई भी आदेश नहीं दिया है, जिसमें होटलों को हिन्दू-मुस्लिम कपल को न रखने को कहा गया हो। उन्होंने कहा कि होटल ने पुलिस का नाम लेकर झूठ बोला है। वहीं ओयो ने कहा कि यह उसके सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है और इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।

सामान्यतः होटलों में अविवाहित जोड़ों को एक साथ कमरा नहीं दिया जाता है। और ग्राहकों को चिड़चिड़ा बना देने की हद तक उनसे आईडी और तमाम तरह की चीजें माँगी जाती हैं। यह कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है लेकिन स्थानीय दादा/गुंडे/नेता इन मामलों के तिल का ताड़ बना देते हैं, इस कारण से होटल मैनेजमेंट अविवाहित जोड़ों को कमरा देने से इनकार करने का हर संभव प्रयास करते हैं। जैसा कि इस मामले में मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि इस जोड़े को हिंदू-मुस्लिम के कारण कमरा नहीं दिया गया, यह बहुत तार्किक नहीं है।

अमेरिका ने चीन की 28 संस्थाओं को किया ब्लैकलिस्ट, उइगर मुस्लिमों के साथ अत्याचार करने पर लिया एक्शन

चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ होते अत्याचार को देखते हुए अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने चीन की 28 संस्थाओं को सोमवार को ब्लैकलिस्ट कर दिया। खुद अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने इस फैसले की घोषणा की। जिसके बाद अब चीन की ये 28 संस्थाएँ अमेरिकी सामान नहीं खरीद पाएँगी।

वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने उइगर मुस्लिमों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार और वाणिज्य विभाग चीन में अल्पसंख्यकों का निर्मम उत्पीड़न बर्दाशत नहीं कर सकते और न ही करेंगे। उन्होंने अपने इस कदम पर कहा कि इस फैसले से ये सुनिश्चित होगा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त उद्यम के माहौल में बनी उनकी तकनीक का उपयोग लाचार अल्पसंख्यकों की आबादी के दमन के लिए न हो।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये स्पष्ट कहा गया है कि ये कार्रवाई चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य अल्पसंख्यक मुस्लिमों के मानवाधिकारों का हनन करने में संलिप्तता के चलते लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका द्वारा जिन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया गया है, उनमें मुख्य रूप से सर्विलांस और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से संबंधित कंपनियाँ हैं। जिनमें दहुआ और हाईकेविजन जैसी कंपनियाँ हैं जो निगरानी रखने के लिए उपकरण बनाती हैं और आईफ्लाईटेक एवं मेग्वी जैसी संस्थाएँ हैं जो फेस और वॉयस रेकॉगनाइजेशन वाली तकनीक पर काम करती हैं।

इस प्रतिबंध के बाद हाईकेविजन के एक प्रवक्ता ने अमेरिका के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। प्रवक्ता का कहना है कि अमेरिका के वाणिज्य विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले से वैश्विक कंपनियों द्वारा पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की बेहतरी के लिए किए जा रही कोशिशों पर प्रभाव पड़ेगा।

यहाँ बता दें कि चीन के ख़िलाफ अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब चीन के साथ उसका ट्रेड वॉर चल रहा है और पूरे विश्व की नजर दोनों देशों पर है।

अधिकार समूहों (right groups) की मानें तो पश्चिमी शिनजियाँग क्षेत्र के शिक्षा शिविरों में 10 लाख उइगरों और अन्य मुस्लिमों को चीन ने अपनी हिरासत में लिया हुआ है। जो कि वाशिंगटन के अनुसार नाजी जर्मनी की याद दिलाता है।

हालाँकि, इस पर चीन शुरुआत में ऐसे शिविरों के अस्त्तिव के होने से इंकार करता रहा था, लेकिन अब उसने खुलकर दावा किया है कि ये शिविर व्यावसायिक प्रशिक्षण स्कूल हैं, जो आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हैं। विश्व भर में होती आलोचनाओं पर चीन ने इस पूरे मामले को आतंरिक करार दिया है और कहा है कि वे इस मामले में किसी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि 28 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने से पहले भी अमेरिका इसी वर्ष चीन के टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनी हुवावे के ख़िलाफ़ भी ऐसा ही मिलता-जुलता कदम उठा चुका है। जब हुवावे पर इरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और अमेरिकी तकनीक को चुराने का आरोप लगा था।

119 जज और 1372 वकील… सब के सब हो गए फेल: जिला न्यायाधीश बनने के लिए दी थी परीक्षा

गुजरात में हाल ही में 40 जिला न्यायाधीश पदों के लिए परीक्षा हुई। जिसमें 119 जजों और 1,372 वकीलों ने हिस्सा लिया। लेकिन, हैरानी की बात ये है कि इनमें से कोई भी जिला न्यायाधीश की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका। खुद गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को लिखित परिणामों का ऐलान करते हुए इसकी पुष्टि की। कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर इस परीक्षा का परिणाम शून्य बताया।

गुजरात हाईकोर्ट के पोर्टल पर परीक्षा के परिणाम

गुजरात हाईकोर्ट के पोर्टल पर लगी लिस्ट के मुताबिक असफल अभ्यार्थियों में 119 जज हैं। इनमें से 51 जज गुजरात के किसी न किसी कोर्ट में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं, जो जून तक वहाँ की अदालतों में प्रिंसिपल जज या फिर चीफ जुडिशल मैजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे।

जानकारी के मुताबिक ये परीक्षा 35 प्रतिशत सीटों के लिए हुई थी। क्योंकि हाईकोर्ट ने नियमानुसार जिला जजों की रिक्त पड़ी 65 प्रतिशत सीटों पर सीनियर सिविल न्यायाधीशों का प्रमोशन किया था। जबकि शेष 25 प्रतिशत पदों पर वकीलों का और 10 प्रतिशत पर अडिशनल डिस्ट्रिक्‍ट जजों का चयन होना था। इनमें 40 खाली पदों को 26 प्रैक्टिस कर रहे वकीलों द्वारा भरा जाना था और 14 पद के लिए 119 न्यायधिकारी प्रतिस्पर्धा की पंक्ति में थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इस परीक्षा के लिए आवेदन मार्च माह में माँगे गए थे और जून में इसके मद्देनजर एक ऑनलाइन एलिमिनेशन एग्जाम हुआ था। इस परीक्षा में 1,372 वकीलों ने भाग लिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत नंबर लाने वाले सिर्फ़ 494 अभ्यार्थियों को लिखित परीक्षा के लिए उत्तीर्ण किया था।

इसके बाद लिखित परीक्षा 4 अगस्त को हुई, लेकिन जब परिणाम आया तो कोई भी अभ्यार्थी लिखित परीक्षा को पास करके साक्षात्कार के चरण तक नहीं पहुँच पाया। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एचडी सुथार ने खुद इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 494 वकील में से एक भी उम्मीदवार लिखित परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम अंक नहीं ला सका। यहाँ तक जिन न्यायिक अधिकारियों ने वकीलों की ऑनलाइन परीक्षा ली थी, वे खुद भी लिखित परीक्षा में फेल हो गए।

लड़की की हत्या कर पुलिस के बगल में खड़ा हो गया दाढ़ी वाला हत्यारा: ब्रिटिश नेता ने ट्वीट किया Video

ब्रिटेन के नेता डेविड वांस ने लन्दन की सड़क पर खुलेआम हत्या का एक दिल दहला देने वाला वीडियो ट्वीट किया है। वीडियो में एक शख्स किसी महिला पर प्रत्यक्षदर्शियों से भरी सड़क पर चाकू या कार की चाभी जैसी नुकीली चीज से हमला करता है और 5 बार उस पर वार करता है। लेकिन वहाँ मौजूद एक भी शख्स उसे न ही रोकता है, न ही बाद में घायल होकर गिरी महिला की सहायता का प्रयास करता है।

पहले से गुत्थमगुत्था

जिस महिला पर हमला हुआ, वीडियो में वह पहले से किसी महिला से उलझी हुई दिख रही थी। यह दोनों महिलाएँ एक कार के बगल में लड़ रहीं थीं। दोनों की हाथापाई में यह हमलावर शख्स, जो दाढ़ी रखे हुए है, कूद पड़ता है। एक-एक कर वह उनमें से एक महिला पर ताबड़तोड़ पाँच वार करता है, जिसमें से तीन सीधे गले पर होते हैं। इसके बाद उसे एक दूसरी कार की तरफ़ भागता हुआ दिखाया जा रहा है।

मूक प्रत्यक्षदर्शी, पुलिस के बगल में टहल रहा हत्यारा

खुलेआम हत्या और हमलावर के दुस्साहस से भी ज़्यादा स्तब्ध कर देने वाली वहाँ मौजूद अन्य लोगों की उदासीनता है। पहले तो किसी ने भी हमला रोकने की कोई कोशिश नहीं की। उसके बाद जब वह शख्स भागा, तो न ही किसी ने उसे पकड़ने का कोई प्रयास किया, न ही उस महिला की मदद की कोशिश।

यही नहीं, हमलावर आगे वीडियो में दूसरी कार पर झपटता दिखने के बाद घटनास्थल पर लौटता है, और महिला की लाश का मुआयना कर रहे पुलिस वाले के बगल में खड़ा हो जाता है।

वीडियो शेयर करने वाले डेविड वांस के ट्विटर थ्रेड के जवाबों में लोग इन सभी पहलुओं पर हैरत जाता रहे हैं। खुद वांस ने कहा कि लंदन एक ऐसा वीभत्स और बर्बर शहर बनता जा रहा है, जहाँ इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है।

प्रेमी जोड़े को जबरन रोका, युवती का दुपट्टा हटा कर वीडियो बनाने का प्रयास: हैदर और गुरफान गिरफ़्तार

कौशाम्बी में 4 बदमाशों ने एक प्रेमी जोड़े के साथ बदसलूकी की और फिर वीडियो बना कर वायरल कर दिया। पुलिस ने इस मामले में हैदर और गुफरान नामक दो आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया है। दोनों ही आरोपितों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस 2 अन्य आरोपितों की तलाश कर रही है। उनकी पहचान लड्डन और विपिन के रूप में हुई है। सभी आरोपितों के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर मुकदमा चलाने की जानकारी कौशाम्बी पुलिस ने दी है।

बता दें कि जहाँ ये घटना हुई, वह जगह घोसिया गाँव से लगभग 25 किलोमीटर की ही दूरी पर है। घोसिया वही गाँव है, जहाँ हाल में दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप की जघन्य घटना हुई थी। जब पीड़िता ने भगवान के नाम पर छोड़ देने की गुहार लगाई थी, तब आरोपितों ने उसे अल्लाह के नाम पर रहम की भीख माँगने को कहा था। गैंगरेप के दौरान पीड़िता लगातार बहन समझ कर छोड़ देने की मिन्नतें करती रही थी। ताज़ा घटना भी कौशाम्बी की है, जिससे इलाक़े की क़ानून-व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।

मंझनपुर में प्रेमी-प्रेमिका बाइक से कहीं जा रहे थे। तभी 4 बाइक सवार बदमाशों ने उनका पीछा किया और एक सुनसान जगह पर उन्हें जबरन रोक लिया। फिर बदमाशों ने युवती के साथ बदसलूकी करना शुरू कर दिया गया। युवती ने अपना चेहरा दुपट्टे से ढक रखा था। बदमाशों ने जबरन दुपट्टा हटा कर वीडियो बनाने का प्रयास किया। बाद में आरोपितों ने लड़के को पकड़ लिया। इसके बाद पीड़िता और उसका प्रेमी किसी तरह बदमाशों के चंगुल से भाग निकले।

‘अमर उजाला’ के कौशाम्बी संस्करण में छपी ख़बर

जब प्रेमी जोड़े ने बाइक से भागने की कोशिश की, तब बदमाशों ने फिर से उनका पीछा किया। आरोपित लगातार उन्हें धमका रहे थे कि युवती का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। मामले में एसपी के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है।

आस्था के साथ बेहूदा खिलवाड़: हिंदू दम्पति को PoK बुलाया, लेकिन शारदा माँ के दर्शन से रोक दिया

हिन्दुओं की आस्था का बेहूदा अपमान करने वाले वाकये में पाकिस्तान की सरकार ने एक हिन्दू दम्पति को PoK स्थित माँ शारदा पीठ के दर्शन के लिए अनुमति देकर पूरी तरह खंडहर हालात में पड़े मन्दिर के बाहर ही रोक दिया। 72 साल से हिन्दुओं के लिए अगम्य रहे इस मन्दिर में दर्शन करने के लिए पीटी वेंकटरमण और सुजाता हॉन्गकॉन्ग से आए थे। लेकिन उन्हें मन्दिर के पास की नदी पर ही पूजा-अर्चना कर लौटना पड़ा।

माँ शारदा के नाम पर ही कश्मीरी भाषा की लिपि

कश्मीरी भाषा की लिपि का नाम भी ‘शारदा’ देवी सरस्वती के ही एक रूप शारदा के नाम पर पड़ा है। इस्लामी हमलों से पहले के भारतवर्ष में यह शक्तिपीठ न केवल आध्यात्म, बल्कि ज्ञान और शिक्षा का भी बहुत बड़ा केंद्र था। आदि शंकराचार्य देवी के दर्शन के लिए आठवीं सदी में केरल से चलकर यहाँ आए थे। लेकिन 1947 में पाकिस्तानी जिहादियों के PoK पर कब्जे के बाद इस पीठ तक जा पाना हिंदुस्तानी हिन्दुओं के लिए असम्भव हो गया।

गोलीबारी पर आस्था भारी

मंदिर के बाहर तक भी जाने के लिए पीटी वेंकटरमण और सुजाता को काफ़ी जद्दोजहद करनी पड़ी और जान का खतरा तक उठाना पड़ा। पहले तो पाकिस्तानी हुकूमत ने उन्हें अनुमति देने से ही मना कर दिया। फिर उन्होंने जब मिन्नत की कि वे हॉन्गकॉन्ग निवासी हैं, तो उन्हें अनुमति किसी तरह मिली। इसमें भी एक एनजीओ ‘सेव शारदा समिति कश्मीर’ से जुड़े रविन्द्र पंडिता के एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाने पर यह संभव हो पाया।

पाक अधिकृत कश्मीर में माँ सरस्वती का निवास, भारत की धरोहर है यह शारदा पीठ

और इसी बीच पाक ने हिंदुस्तान के खिलाफ़ कश्मीर में जिहाद का ऐलान करने और जम्मू-कश्मीर में हिंदुस्तानी सेना के खिलाफ़ मानवाधिकार हनन के प्रोपेगंडा को हवा देने के लिए LOC पर मार्च शुरू कर दिया। जिस रात पीटी वेंकटरमण और सुजाता PoK में थे, उस रात भी जमकर गोलीबारी हुई। उन्हें वहाँ से सुरक्षित निकालने में दो स्थानीय लोगों तनवीर अहमद और मोहम्मद रयीस ने मदद की।

हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए की गई ‘मॉब लिंचिंग’ की ब्रांडिंग: विजयदशमी उत्सव पर भागवत

दशहरा के मौके पर नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने देश की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार की पीठ थपथपाई। उन्होंने भाजपा को दोबारा मिली बहुमत की बात करते हुए कहा कि नई सरकार को बढ़ी हुई संख्या के साथ फिर से लाकर समाज ने उनके पिछले कार्यों से सहमति व आने वाले समय के लिए बहुत सारी अपेक्षाओं को व्यक्त किया था। मोहन भागवत ने साफ़ कर दिया कि जन अपेक्षाओं को प्रत्यक्ष में साकार कर, जन भावनाओं का सम्मान करते हुए देशहित में उनकी इच्छाएँ पूर्ण करने का साहस दोबारा चुने हुए शासन में है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अनुच्छेद 370 को अप्रभावी बनाने के सरकार के काम से यह बात सिद्ध हुई है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बधाई एवं अभिनन्दन का पात्र बताया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सफल अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए इसरो की भी पीठ थपथपाई। सरसंघचालक ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रमा के अनछुए प्रदेश अर्थात उसके दक्षिण ध्रुव पर अपना चंद्रयान ‘विक्रम’ उतारने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यद्यपि अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण सफलता नहीं मिली, परंतु पहले ही प्रयास में इतना कुछ कर पाना भी काफ़ी महत्वपूर्ण है।

सरसंघचालक मोहन भागवत ने वैज्ञानिकों का हौंसला भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की बौद्धिक प्रतिभा व वैज्ञानिकता का तथा संकल्प लेकर उस कार्य को परिश्रमपूर्वक पूर्ण करने की लगन के कारण ही हमारे वैज्ञानिकों का सम्मान दुनिया में सर्वत्र बढ़ गया है। उन्होंने जनता को भी अहम सन्देश देते हुए कहा:

“सुखद वातावरण में अलसा कर हम अपनी सजगता व अपनी तत्परता को भुला दें, सब कुछ शासन पर छोड़ कर और निष्क्रिय होकर विलासिता व स्वार्थों में मग्न हो जाएँ- ऐसा समय नहीं है। जिस दिशा में हम लोगों ने चलना प्रारंभ किया है, वह अपना अंतिम लक्ष्य-परमवैभव संपन्न भारत-अभी दूर है। मार्ग के रोड़े, बाधाएँ और हमें रोकने की इच्छा रखने वाली शक्तियों के कारनामे अभी समाप्त नहीं हुए हैं। हमारे सामने कुछ संकट हैं जिनका उपाय हमें करना है। कुछ प्रश्न है जिनके उत्तर हमें देने हैं, और कुछ समस्याएँ हैं, जिनका निदान कर हमें उन्हें सुलझाना है।

कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक ने शस्त्र-पूजन भी किया। एचसीएल के संस्थापक और अरबपति कारोबारी शिव नादर इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मोहन भागवत ने ‘मॉब लिंचिंग’ गिरोह को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछेक सामाजिक अपराध की घटनाओं को ‘मॉब लिंचिंग’ के रूप में ब्रांड किया गया। उन्होंने इसे भारत को बदनाम करने वाला दुष्प्रचार करार देते हुए कहा कि ‘मॉब लिंचिंग’ के ब्रांडिंग के माध्यम से हिन्दुओं को बदनाम करने और कुछ समुदायों में डर पैदा करने की कोशिश की गई।

वहीं आज की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पाठ्यक्रम से लेकर शिक्षकों के प्रशिक्षण तक, सब चीजों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता लगती है। संघ प्रमुख ने याद दिलाया कि केवल ढाँचागत परिवर्तनों से काम बनने वाला नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि अपनी मातृशक्ति को हमको प्रबुद्ध, स्वावलंबनक्षम, स्वसंरक्षणक्षम बनाना ही होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को देखने की पुरुषों की दृष्टि में हमारी संस्कृति के पवित्रता व शालीनता के संस्कार भरने ही पड़ेंगे।