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राफेल की शस्त्र-पूजा से कॉन्ग्रेस को दिक्कत, कहा – ‘हर चीज को नौटंकी बना देती है मोदी सरकार’

विजयादशमी के दिन भारत को राफेल एयरक्राफ्ट के रूप में अत्याधुनिक फाइटर जेट मिला। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस जाकर औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना के लिए निर्मित (जरूरी बदलावों सहित) पहले राफेल को प्राप्त किया। राजनाथ ने बताया कि फ़रवरी 2021 तक 18 राफेल की डिलीवरी भारत को मिल जाएगी और मई 2022 तक सारे के सारे 36 फाइटर राफेल जेट भारत को मिल जाएँगे। हालाँकि, रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि यह भारत की आक्रामकता का सन्देश नहीं है बल्कि आत्मरक्षा का उपाय है। राजनाथ सिंह ने क़रीब आधे घंटे तक राफेल में उड़ान भरने के बाद कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो सुपरसोनिक गति से किसी एयरक्राफ्ट में उड़ान भरेंगे।

इस दौरान सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय बना राजनाथ सिंह द्वारा शस्त्र-पूजा करना। विजयादशमी के दिन ही ‘भारतीय वायुसेना दिवस’ थी था और इसी दिन वायुसेना के लिए राजनाथ ने राफेल की औपचारिक प्राप्ति की। राजनाथ सिंह ने राफेल फाइटर जेट पर ‘ॐ’ लिख कर पूजा-अर्चना की। राफेल एयरक्राफ्ट के चक्कों के नीचे नीम्बू रखा गया क्योंकि ऐसा करना शुभ माना जाता है। राजनाथ ने कहा कि यह भारत और फ्रांस, दोनों के लिए ही काफ़ी अच्छा दिन है। लेकिन, कॉन्ग्रेस पार्टी को राजनाथ की शस्त्र-पूजा पसंद नहीं आई।

कॉन्ग्रेस ने कहा कि राफेल एयरक्राफ्ट पर ‘ॐ’ लिख कर और शस्त्र-पूजा कर के राजनाथ सिंह इसे धर्म के साथ जोड़ रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने पूछा कि राफेल को दशहरा से जोड़ने का क्या तुक है? उन्होंने कहा कि कोई वायुसेना का अधिकारी भी फ्रांस जाकर यह औपचारिकता पूरी कर सकता था लेकिन राजनाथ ख़ुद वहाँ क्यों गए? कॉन्ग्रेस नेता ने कहा:

“ये क्या बात हुई कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राफेल को रिसीव करने फ्रांस गए हैं। वायुसेना से जुड़े लोगों को इसे रिसीव करना चाहिए था। यह औरों की तरह सिर्फ एक हथियार है, जिसे आप ख़रीद रहे हैं। दशहरा के त्योहार और राफेल का भला क्या मेल है? हम सब जिस त्योहार को मनाते हैं, उसे राफेल एयरक्राफ्ट से जोड़ने का क्या तुक है? मोदी सरकार के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिना कोई ठोस काम किए हर चीज को नौटंकी बना देते हैं।”

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि राफेल को रिसीव करने के बहाने मोदी सरकार अपना ‘भगवा एजेंडा’ चला रही है। वहीं दूसरी तरफ राजनाथ सिंह ने बताया कि हमारी वायुसेना विश्व की चौथी सबसे शक्तिशाली वायुसेना है और राफेल के आने से इसकी क्षमता में कई गुना ज्यादा वृद्धि होगी, जिससे इस क्षेत्र की शांति और सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा सुदृढ़ होगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राफेल अब भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया है और अब यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह इससे पहला गोला कब खाएगा?

कर्ज लेने के मामले में इमरान सरकार ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, PAK मीडिया ने खुद खोली पोल

अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में ही इमरान सरकार ने पूर्व के सभी रिकॉर्डों को तोड़ते हुए बेतहाशा कर्ज ले लिया है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक इमरान सरकार के सत्ता संभालने के बाद देश के कुल कर्ज में 7509 अरब पाकिस्तानी रुपए की वृद्धि हुई है।

सूत्रों का हवाला देते हुए पाकिस्तान की ही एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा करते हुए बताया गया है कि कर्ज के यह आँकड़े स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री कार्यालय भिजवा दिए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त 2018 से अगस्त 2019 के बीच इमरान सरकार ने विदेश से 2804 अरब, जबकि घेरलू स्रोतों से 4705 अरब पाकिस्तानी रुपए का कर्ज लिया।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में ही पाकिस्तान के सार्वजनिक कर्ज में 1.43 फीसदी का इजाफा देखने को मिला। जबकि संघीय सरकार का यह कर्जा बढ़कर 32,240 अरब पाकिस्तानी रुपए हो गया है, जो कि पिछले वर्ष तक 24,732 अरब था।

इसके अलावा रिपोर्ट में ये बताया गया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले तीन महीने में सरकार का कर संग्रह 960 अरब पाकिस्तानी रुपए का रहा, जोकि एक ट्रिलियन रुपए के निर्धारित लक्ष्य से कम है।

उल्लेखनीय है कि ‘नया पाकिस्तान’ का सपना दिखाकर सत्ता हासिल करने वाले इमराम खान के पहले कार्यकाल में उनके मुल्क की इतनी दुर्गति हो चुकी, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। पड़ोसी मुल्कों से फजीहत और बेबुनियादी बातों का सिलसिला पाकिस्तान को इमरान सरकार के शासनकाल में ही देखने को मिला है। विदेशों से लेकर अपने मुल्क की संसद में मुँह की खा चुके इमरान खान अब देश पर बढ़ रहे कर्जे पर भी घिरने शुरू हो गए हैं।

मुस्लिम बहुल इलाके में विजयादशमी जुलूस पर पथराव: राजस्थान प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, इंटरनेट बंद

दशहरे के शुभ अवसर पर राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में अराजक तत्वों द्वारा जुलूस पर पथराव किए जाने के बाद से वहाँ के हालात तनावपूर्ण हैं। जिला प्रशासन ने बिगड़ी स्थिति को देखते हुए इलाके में सुबह 6 बजे से कर्फ्यू लगा दिया है। साथ ही रात 12 बजे के बाद से यहाँ सभी कंपनियों की इंटरनेट सेवाओं को आगामी 48 घंटे के लिए बंद कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक इलाके में दशहरे का जुलूस जब मुस्लिम बहुल इलाके की आरएसी चौकी के पास से गुजर रहा था, उसी समय माहौल बिगाड़ने के लिए कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। इससे जुलूस में शामिल लोगों में भगदड़ मच गई।

दशहरे पर हुई इस घटना के विरोध में मालपुरा के विधायक कन्हैयालाल 150 लोगों के साथ धरने पर बैठ गए और रावण दहन भी नहीं होने दिया गया। इनकी माँग थी कि जब तक पत्थरबाजों को नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक वह रावण दहन नहीं करेंगे। लेकिन हालातों के बिगड़ने के डर से प्रशासन ने नगरपालिका के कर्मचारियों के साथ मिलकर आज सुबह 4:30 बजे रावन दहन कर दिया और इसके बाद 6 बजे से ही वहाँ पर कर्फ्यू लगा है। मालपुरा विधायक अब भी थाने के बाहर धरने पर बैठे हैं।

घटना के बाद से इलाके की स्थिति इतनी नाजुक थी कि पूरे दशहरा मैदान को पुलिस व अन्य बलों के जवानों ने अपनी निगरानी में ले लिया। बाद में कलेक्टर केके शर्मा व एसपी आदर्श सिद्धु की उपस्थिति में रावण दहन हो पाया। सुबह कस्बे में अख़बारों के वितरण पर रोक लगाते हुए रोडवेज़ बसों से पहुँचे अखबारों के बंडलों को भी प्रशासन ने कब्ज़े में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस का दावा है कि वो इस मामले के संबंध में 6-7 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस बल मँगवा लिया गया है। जबकि एसपी सिद्धू का कहना कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध बदमाशों की पहचान व उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि टोंक जिले में मालपुरा कस्बा हमेशा से संवेदनशील रहा है। यहाँ कहा जाता है कि हर साल 2 या 3 बार हिंदू मुस्लिम आबादी आपस में भिड़ते हैं। जिसके चलते कई बार यहाँ दंगे भी हो चुके हैं।

कॉन्ग्रेस की हार का विश्लेषण तो कर लेते… लेकिन हमारा नेता ही हमें छोड़ कर निकल गया: खुर्शीद

राहुल गाँधी ने जब लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, तब काफ़ी लोगों का मानना था कि वह जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। अब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से भी इसी बात की बू आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि अब वक्त आ गया है, जब कॉन्ग्रेस अपनी बुरी हार की समीक्षा करे और यह समझने का प्रयास करे कि जनादेश का सन्देश क्या है? उन्होंने कहा कि पार्टी हार का विश्लेषण इसीलिए नहीं कर पाई क्योंकि राहुल गाँधी ऐन मौके पर निकल गए, जिससे पार्टी में एक शून्य पैदा हो गया।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रह चुके खुर्शीद ने कहा कि कॉन्ग्रेस एकजुट होकर हार का विश्लेषण नहीं कर सकी क्योंकि उनके नेता ही उन्हें छोड़ कर चला गया। खुर्शीद ने सोनिया गाँधी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि वह सोनिया के कार्यकारी अध्यक्ष बनने से ख़ुश नहीं हैं। खुर्शीद ने कहा कि जो भी अध्यक्ष बने, वह टिका रहे। यूपीए-2 में विदेश, अल्पसंख्यक मामले और क़ानून जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके खुर्शीद ने बताया कि वह अपनी पीड़ा इसीलिए व्यक्ति कर रहे हैं ताकि नेतृत्व इसे सुने।

खुर्शीद ने आशा जताई कि कॉन्ग्रेस पार्टी हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव के लिए तैयार है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हरियाणा कॉन्ग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को उन्होंने सकारात्मक बताया। उन्होंने माना कि पार्टी हरियाणा में आंतरिक कलह से जूझ रही है लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इससे निपट लिया जाएगा। खुर्शीद ने आगाह किया कि समय कम है और कॉन्ग्रेस को इससे जल्द निपटना चाहिए। राहुल गाँधी के सम्बन्ध में खुर्शीद ने कहा:

“हार के विश्लेषण के लिए नेता की मौजूदगी तो होनी चाहिए। लेकिन, दुःखपूर्वक कहना पड़ रहा है कि दुर्भाग्य से हमने ऐन वक़्त पर अपना नेता ही खो दिया। हमारी समस्या यह है कि उनके जाने के बाद भी हम उनके प्रति कटिबद्ध हैं। यह एक अनोखी स्थिति है। 2 बड़े हार और नेता फिर भी नेता ही बना हुआ है। कॉन्ग्रेस के लोग अब भी उनके प्रति निष्ठावान बने हुए हैं। लेकिन फिर बात वही है कि उनके यहाँ न होने से हम पार्टी की हार का विश्लेषण नहीं कर सके।”

2009 लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद से जीत दर्ज करने वाले सलमान खुर्शीद 2014 लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए थे। वह चौथे स्थान पर रहे थे। इससे पहले 1991 में भी वह संसद में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। अब खुर्शीद ने उम्मीद जताई है कि काश कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल पार्टी के साथ होते। खुर्शीद ने पार्टी को आगाह किया कि जितनी जल्दी हार की समीक्षा कर ली जाए, उतना ही अच्छा है।

मौलवी जारी करे फतवा, राजदीप को लगता है ये इस्लाम के खिलाफ मीडिया की है साजिश!

राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया है कि एक “unknown Maulana” के “stupid remark” के आधार पर ‘बिग डिबेट’ नहीं चला देना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता है तो वह ‘Islamo-phobia’ फैला रहा है। सही बात है- या शायद सही बात लगती, अगर राजदीप सरदेसाई का रवैया सभी मज़हबों/आस्थाओं के खिलाफ हिंसा या द्वेष न भड़काने को लेकर इतना ही संजीदा होता। लेकिन हिन्दुओं को लेकर उनका नज़रिया इसके उलट ही रहा है।

याद कीजिए पिछले लोक सभा चुनाव को, जिसमें उर्मिला मातोंडकर ने ‘डर का माहौल है’ का हवाला देकर अपने चुनाव लड़ने को तर्कसंगत बताने की कोशिश की थी। उस समय जब यही राजदीप सरदेसाई उनका साक्षात्कार कर रहे थे तो मातोंडकर ने हिन्दू धर्म के बारे में कहा था, “… and the religion that has been known for its tolerance has turned out to be the most violent religion of them all”

समय का अभाव हो तो नीचे के वीडियो में 5:30 से 5:40 तक आप उर्मिला को सुन सकते हैं, जहाँ सीधा-सीधा हमला धर्म पर ही था- किसी विचारधारा पर नहीं, किसी राजनीतिक दर्शन या व्यक्ति या पर नहीं, सीधे धर्म पर। और राजदीप सरदेसाई को उस पर चाय/कॉफ़ी/पानी का घूँट भरते हुए मौन सहमति देते देखा जा सकता है। न कोई सवाल, न टोकना, न कोई स्पष्टीकरण। उनकी मूक सहमति ऐसे थी जैसे हिन्दुओं को “सबसे हिंसक मज़हब/आस्था वाली कौम” कहा जाना सूरज के पूर्व से निकलने जितनी ‘obvious’ बात है- इस पर बहस क्या करना?


यहाँ उनका मौन, मौन सहमति ही माना जाएगा- इसलिए कि जिस खुद को ‘लिबरल’ कहने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष से वह आते हैं, वह, और राजदीप सरदेसाई भी, मोदी को इसी ‘चुप्पी’ के आधार पर गुजरात का दोषी मानते हैं। उनके हिसाब से पहले तो मोदी की चुप्पी उनका आँख मार के हिन्दू दंगाईयों को इशारा थी कि तमे जो मरजी आए, तीन दिन तक करी जाओ; हूँ पुलीसानी संभाल लईसा। जब ये ‘थ्योरी’ औंधे मुँह गिर गई, क्योंकि न केवल मोदी के पुलिस का हाथ पकड़ने का एक भी सबूत अदालत को नहीं मिला, और मारे जाने वालों में एक तिहाई हिन्दू निकले, तो राजदीप ने गियर बदल कर मोदी पर ‘नैतिक जिम्मेदारी’ ठेलनी शुरू कर दी- क्योंकि वे चुप रहे, समुदाय विशेष के पैर में नाक रगड़ कर माफ़ी नहीं माँगी। जिन्हें इस बात पर शक है, इन्टरनेट पर बहुतेरे इंटरव्यू मिल जाएँगे, जिनमें राजदीप बताते हैं कि मोदी न केवल दंगों के लिए ‘नैतिक रूप से जिम्मेदार’ हैं, बल्कि यह भी कि राजदीप ने खुद उन्हें “एक बार माफ़ी माँग के खुद को इस जिम्मेवारी से मुक्त कर लो” की सलाह दी थी।

अतः अगर राजदीप मोदी को उनकी चुप्पी से दंगों में सहभागी मानते हैं, तो उर्मिला मातोंडकर के हिन्दुओं को हिंसक बताने में भी उनकी सहभागिता चुप्पी के चलते मानी जाएगी।

और यह कोई पहली और आखिरी घटना होती तो एक बार अपवाद माना भी जा सकता था। राजदीप सरदेसाई लगातार हिन्दुओं के बारे में वही चीजें अन्यायपूर्ण तरीके से कहते रहते हैं, जो अगर समुदाय विशेष के बारे में न्यायोचित, तथ्यपरक तौर पर भी कही गई हो तो भी उन्हें तकलीफ़ होने लगती है। मसलन कुरआन के आधार पर भी इस्लाम की व्याख्या कर उसकी आलोचना करने वाले हिन्दुओं को राजदीप अक्सर बिन-मांगी सलाह देते फिरते हैं कि वे समुदाय विशेष पर कोई ‘लेबल’ लगाने का हक़ नहीं रखते। और यही राजदीप लल्लनटॉप के सम्पादक सौरभ द्विवेदी के साथ लगभग हर सप्ताह हिन्दुओं पर ऐसी ही ‘ठप्पागिरी’ करते, किसका “हिंदूइस्म” सही, किसका गलत, इसकी विवेचना करते देखे जा सकते हैं।

“My Hinduism” के नाम पर हिन्दुओं के खिलाफ़ नफ़रत और भ्रम फ़ैलाने और उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत कर उन्हें उकसाने (Hindu baiting) वाले राजदीप एक तरफ़ हिन्दुओं पर ही निशाना साधने के लिए “diversity” का नाटक करते हैं, और दूसरी ओर उसी diversity वाले धर्म के साधुओं पर निशाना इस आधार पर साधते हैं कि उनका साधु होना ‘स्व-घोषित’ है, किसी पवित्र किताब या ‘अथॉरिटी’ से ठप्पा-प्राप्त नहीं।

इस्लामोफोबिया सच में है या नहीं, मैं यह तो नहीं जानता। नहीं जानता, क्योंकि इस शब्द का अर्थ है कि समुदाय विशेष के व्यवहार और कुरान की आयतों की आलोचना गलत है, जबकि दुनिया भर में हो रहे बम धमाकों से लेकर महज़ ढोल बजा कर नाच लेने, या चूड़ी-बिंदी लगा लेने, पर नुसरत जहाँ के खिलाफ़ समुदाय विशेष की नाराज़गी से ऐसा लगता तो नहीं है। लेकिन इतना तो पक्का है कि राजदीप जैसे हिन्दूफ़ोबिक इन्सान को तो इस पर बोलने का कोई नैतिक हक़ नहीं है।

49 हस्तियों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला, कमल हासन ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने मंगलवार को उन 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ देशद्रोह मामला चलाए जाने की निंदा की, जिन्होंने मॉब लिंचिंग के दौरान जय श्रीराम नारे का प्रयोग किए जाने वाले घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखा था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि इन 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे मुकदमे में हस्तक्षेप करें, और उनके ख़िलाफ़ एफआईआर को निरस्त करें

कमल हासन ने ट्वीट करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री सांमजस्यपूर्ण भारत की तलाश में हैं। जो संसद में दिए उनके बयान से पुख्ता होता है, लेकिन क्या राज्य और उसके कानून को इसका अनुसरण नहीं करना चाहिए?” उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की आकांक्षाओं का खंडन करते हुए उनके 49 साथियों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।

कमल हासन का ये बयान ठीक 4 दिन बाद आया है, जब मुजफ्फपुर कोर्ट के आदेश पर इनके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई। इसी कारण से ही ट्विटर पर कमल हासन ने इन 49 हस्तियों के प्रति अपने संवेदना व्यक्त की और दर्ज एफआईआर की निंदा की। इस दर्ज प्राथमिकी में बता दें कि अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन और इतिहासकार रामचंद्र गुहा जैसे लोगों का नाम भी शामिल है। इसके अलावा इस एफआईआर में तमिल फिल्म निर्माता मणि रत्नम भी का नाम भी है, जिन्होंने जुलाई माह में प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था।

इसी के मद्देनजर कमल हासन ने कहा, “मैं एक नागरिक के रूप में अनुरोध करता हूँ कि हमारा सर्वोच्च न्यायालय लोकतंत्र के साथ न्याय करने और बिहार से आने वाले इस मामले को खत्म करने के लिए आगे बढ़े।

बता दें कि इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद हासन से पहले कई जाने-माने लोग इसका विरोध कर चुके हैं। जिनमें कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का भी नाम शामिल है। इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स इस खबर को ऐसे प्रकाशित कर चुकी है जैसे केंद्र सरकार ही इसके पीछे जिम्मेदार हो। लेकिन बता दें कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्वयं इस मामले पर स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार ने 49 सेलेब्रिटीज के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज नहीं कराई है।

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जुलाई महीने में कुछ अभिनेता-अभिनेत्रियों-फिल्मकार-सामाजिक कार्यकर्ता-इतिहासकार समेत विभिन्न क्षेत्रों के 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में दलित व अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की गई थी। इस पत्र में लिखा गया था, “अफसोस की बात है कि जय श्रीराम का इस्तेमाल आज उकसाने के लिए किया जा रहा है। यह युद्धोन्मादी और भड़काऊ नारा है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को राम के नाम पर डराया जा रहा है।”

‘काश, मैं भी चीनी राष्ट्रपति जैसा बन पाता, 500 लोगों को जेल में डाल देता’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रश्क जताया है कि वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरह अपने देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कदम नहीं उठा पा रहे हैं। उनके मुताबिक वे यह सुनकर बहुत प्रभावित हुए कि चीनी राष्ट्रपति ने पिछले 5 सालों में भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप में 400 के करीब मंत्री-स्तर के अधिकारियों को जेल पहुँचा दिया है। इमरान China Council for Promotion of International Trade के कार्यक्रम में बोल रहे थे। वे फ़िलहाल चीन के दौरे पर हैं।

बड़ा ही ‘स्लो’ है पाकिस्तान वाला सिस्टम

इमरान खान ने अफ़सोस जताया कि पाकिस्तान में भ्रष्टाचारियों को जेल भेजना वाला सिस्टम बहुत ही धीमा चलता है। उन्होंने जिनपिंग की तरह 500 भ्रष्ट लोगों को जेल भेजने की ख्वाहिश जताई। साथ ही पाकिस्तान के चीन से गरीबी उन्मूलन सीखने पर ज़ोर दिया। “मुझे जो चीज़ चीन की सबसे अधिक प्रेरित करती है, वह है पिछले 30 सालों में 70 करोड़ लोगों को गरीबी से उबारना। ऐसा मानव इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।”  

पाकिस्तान को निवेश-फ्रेंडली बनाने की कर रहे हैं कोशिश

इमरान खान ने दावा किया कि जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, कोशिश देश को निवेशकों के लिए अधिक से अधिक दोस्ताना और लाभदायक बनाने की है। “हम चाहेंगे कि वे पाकिस्तान में लाभ कमाएँ।” उन्होंने साथ में यह भी माना कि भ्रष्टाचार निवेश में सबसे बड़ी रुकावटों में से एक है।

इमरान के पहले पहुँचे बाजवा

इमरान के पहले ही पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा चीन पहुँच गए थे। वहाँ वह न केवल चीन के सैन्य नेतृत्व से मिलेंगे, बल्कि इमरान खान की चीनी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ बैठकों में  भी उनकी शिरकत होगी।

मन्दिर के पुजारियों से 6-6 पन्नों पर लिखवाया ‘राष्ट्रद्रोही’: क्या पागल हो गई है ‘गौभक्त कमलनाथ’ की पुलिस?

एक तरफ़ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद को भाजपा से बड़ा ‘गौभक्त’ साबित करने में लगे हैं, और दूसरी तरफ़ उनकी पुलिस के कर्मचारी गाँधी जी के कटआउट के साथ छेड़-छाड़ में किसी और को न पकड़ पाने पर अब मन्दिर के पुजारियों को मामले में फँसाने की कोशिश कर रहे हैं। गाँधीजी के कट-आउट पर लिखे ‘राष्ट्रद्रोही’ से लक्ष्मण बाग़ मन्दिर के पुजारियों की लिखावट मिलाने के लिए उनसे बार-बार ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखने को कहा जा रहा है। मीडिया की खबरों के अनुसार अब तक 6 पन्ने भर कर उनसे यही शब्द लिखवाया जा चुका है, और इससे व्यथित पुजारियों के अन्न-जल त्यागने की भी खबर आ रही है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित मेमोरियल में से राष्ट्रपिता गाँधी जी की चिता की राख चोरी कर ली गई थी। इतना ही नहीं, चोरों ने उनके पोस्टर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ भी लिख दिया। ‘बापू’ के उपनाम से प्रख्यात रहे गाँधी जी की चिता की राख को लक्ष्मण बाग स्थित बापू भवन में रखा गया था, जहाँ ये घटना हुई। बापू भवन का निर्माण 1948 में किया गया था और तब से ही लक्ष्मण बाग ट्रस्ट इसकी देखभाल करता रहा है।  

कलश था ही नहीं, तो चोरी कैसे हुआ?

एक तरफ़ स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं ने अज्ञात लोगों के खिलाफ़ राष्ट्रद्रोह जैसी संगीन धारा में मामला दर्ज कराया हुआ है, और दूसरी ओर पुजारियों का कहना है कि जिस कथित अस्थि-कलश के पीछे यह सब कवायद हो रही है, पिछले कई वर्षों के अपने मन्दिर प्रवास के दौरान उन्होंने वह कलश कभी देखा ही नहीं। यह दावा करने वाले एक-दो नहीं, पाँच पंडित हैं।

और-तो-और, कॉन्ग्रेस नेताओं की मूल तहरीर में तो अस्थि कलश का ज़िक्र था भी नहीं। नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक बिछिया थाने में पहली शिकायत केवल गाँधी जी की तस्वीर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखने को लेकर हुई थी। उसके दो घंटे बाद जाकर शहर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने थाना प्रभारी को पत्र देकर अस्थि-कलश चोरी की बात कही।

मन्दिर में 40 साल से सेवाएँ दे रहे एक पुजारी और पूजा पाठ प्रभारी पंडित दीनानाथ शास्त्री के मुताबिक कलश यहाँ आया अवश्य था, लेकिन श्रद्धांजलि अर्पित होने के बाद कलश वापस इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) चला गया था।

लिखावट का नमूना आखिर कितना चाहिए?  

मन्दिर के पुजारियों का आरोप है कि रोज़ाना उन्हें बुलाकर नए सिरे से कोरे कागज़ पर ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखवाया जाता है। अब तक 6 पन्ने भरे जा चुके हैं। थाने के पुलिस वालों का कहना है कि यह लिखावट के नमूने के लिए किया जा रहा है।

खाना-पीना छोड़ा तो पहुँचे आईजी-एसपी  

यह विडम्बना की ही बात है कि जिन मोहनदास करमचन्द गाँधी की तस्वीर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखने का आरोप लगाकर पुजारियों का उत्पीड़न हो रहा है, उन्हीं की तरह पुजारियों को अनशन भी करना पड़ रहा है। जब आरोपित पुजारियों ने खाना-पीना छोड़ दिया तो आईजी चंचल शेखर, एसपी आबिद खान, डीआईजी अविनाश श्रीवास्तव उनसे मिलने पहुँचे। तब ही जाकर पुजारियों को प्रशासन की तरफ़ से निष्पक्षता का आश्वासन भी मिला।

नुसरत जहां को जल्द मारना होगा, पूरा मुस्लिम समुदाय खतरे में: कॉन्ग्रेस समर्थक की माँग

कॉन्ग्रेसी समर्थक एवं खुद को कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया का संयोजक बताने वाले हसन लसकर नाम के शख्स ने तृणमूल सांसद नुसरत जहाँ को जल्द मारने की बात कही है। लसकर का कहना है कि नुसरत जहां को जल्द मारना होगा, वरना पूरा मुस्लिम समुदाय खतरे में आ जाएगा।

नुसरत के लिए सरेआम ये जहर लसकर ने ट्वीट के जरिए उगला है। लसकर ने अपने ट्वीट में नुसरत को मारने की बात ऐसी तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए कही है, जिसमें एक ओर वे संसद में माँग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पहनकर खड़ी हैं और दूसरी ओर बुर्के में एक औरत खड़ी है।

ट्वीट में बताया जा रहा है कि नुसरत ने दूसरी तस्वीर में होने की बजाय पहली तस्वीर में होना इसलिए चुना क्योंकि ऐसा होना उन्हें आजादी देता है। जिसे देखते हुए ही लसकर ने खुलेआम कहा कि नुसरत को मार दिया जाना चाहिए। वरना पूरा मुस्लिम समुदाय खतरे में आ जाएगा।

हैरानी की बात तब हुई जब लसकर के फेसबुक अकॉउंट को खँगाला गया, जिसका लिंक उसके ट्विटर अकॉउंट पर ही दिया गया है। इस अकॉउंट से मालूम हुआ (फेसबुक पर लिखे अनुसार) कि लसकर ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी के सोशल मीडिया का संयोजक है। और इसके पेज पर शेयर किए पोस्ट भी यही दिखाते हैं कि यह शख्स कॉन्ग्रेस समर्थक है। पेज पर अधिकतर कॉन्ग्रेस एवं राहुल गाँधी से संबंधित पोस्ट हैं और ऐसे मीम्स हैं जो भाजपा और नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बनाए गए।

वहीं, लसकर का ट्विटर अकॉउंट देखने पर भी मालूम हुआ कि उसके अधिकतर ट्वीट नफरत से भरे हुए हैं। जिसमें कश्मीर संबधित पोस्ट हैं। जिनमें से एक में लिखा गया है कि कश्मीर कभी हिंदुओं का नहीं हो सकता, बल्कि कश्मीर में हिंदुओं का शमशान होगा।

वहीं, एक दूसरे पोस्ट में हसन लिखता है कि अगली पीढ़ी में वे बाबरी मस्जिद का बदला लेगा।

गौरतलब है कि लसकर जैसे नफरत फैलाने वाले लोग नुसरत को पहले भी ट्रोल कर चुके हैं। उन्हें निखिल जैन से शादी करने से लेकर हिंदू त्यौहारों में शिरकत करने तक में इस्लाम को शर्मसार करने वाला बताया जा चुका है।

इतना ही नहीं, दुर्गा पूजा में उन्हें पूजा करते देखकर मजहबी गुरू ये तक कह चुके हैं कि अगर उन्हें पूजा पाठ करना है तो वो इस्लाम को छोड़कर अपना धर्म परिवर्तन कर लें क्योंकि इस्लाम में ये सब हराम है।

अब फिलहाल इस मामले में ऑपइंडिया असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी और हसन लसकर से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, ताकि ज्ञात हो सके कि क्या वाकई में नुसरत के लिए अपशब्द बोलने वाला शख्स एपीसीसी में आधिकारिक रूप से पद पर कार्यरत है या नहीं? अभी तक हमें इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन जैसे ही इसके बारे में पता चलेगा हम अपनी रिपोर्ट को उसी अनुसार अपडेट करेंगे।

जब रावण ने पत्थर पर लिटा कर अपनी बहू का ही बलात्कार किया… वो श्राप जो हमेशा उसके साथ रहा

विजयादशमी के दौरान यह याद करना ज़रूरी है कि भगवान श्रीराम ने किसी ऐसे रावण का वध नहीं किया था जो विद्वान था, शास्त्रों का ज्ञाता था और अपने राज्य की भलाई के बारे में सोचता था। राम ने ऐसे रावण का वध किया था जो स्त्रियों का सम्मान नहीं करता था, उनके साथ दुर्व्यवहार करता था और बलपूर्वक अपनी बात मनवाता था। आजकल रावण को ‘अच्छा’ साबित करने के लिए उसके ग़लत पक्षों को सही बता कर पेश किया जा रहा है। हाँ, रावण रचित ‘शिव तांडव’ हम आज भी गाते हैं, जिसका अर्थ यह हुआ कि बुरे से बुरे व्यक्ति ने भी अगर कोई अच्छा काम कर दिया तो उस अच्छे को याद रखा जाता है लेकिन उसे अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

रावण के संगीत-ज्ञान की प्रशंसा चल सकती है लेकिन ‘उसने सीता को छुआ भी नहीं’ वाला नैरेटिव बहुत ग़लत है क्योंकि रावण का इतिहास उस प्रकार का नहीं रहा है। रावण की शिवभक्ति कई ऋषियों-मुनियों के भी तपस्या से परे थी लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि ‘रावण ने सीता के साथ बलपूर्वक व्यवहार नहीं किया’ वाला नैरेटिव सही है। रावण ने क्या अपहरण करते समय सीता पर अपने बल का प्रयोग नहीं किया था? लंकापति का इतिहास वाल्मीकि रामायण के ही एक अंश से पता चलता है, जो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित है और जिसे रामकथा का मूल माना जाता है।

रम्भा का नाम आपने सुना होगा। वह स्वर्ग की अप्सरा थी जो तमाम नृत्यों और कई कलाओं में पारंगत थीं। आगे बढ़ने से पहले एक और बात बताना ज़रूरी है कि रावण और कुबेर भाई थे। कुबेर के पुत्र का नाम था नलकुबेर। रम्भा नलकुबेर की प्रेमिका थी और इस रिश्ते से वह रावण की बहू लगती थी। एक दिन जब वह अपने प्रेमी से मिलने जा रही थी, तभी रावण उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया और उसने रम्भा से आपत्तिजनक बातें पूछी। रावण ने रम्भा से पूछा कि वह इतना सज-धज कर किसको तृप्त करने जा रही है? रावण ने इसके लिए संस्कृत में ‘भोक्ष्यते’ शब्द का प्रयोग किया, जो दिखाता है कि वह स्त्री को उपभोग की वस्तु समझता था।

रम्भा ने रावण को रिश्ते-नातों की याद दिलाई। रावण ने पहले तो मानने से इनकार कर दिया कि वह उसकी पुत्रवधू है लेकिन जब रम्भा ने नलकुबेर के बारे में बताया तो रावण ने फिर आनाकानी शुरू कर दी। उस समय रम्भा काफ़ी डरी हुई थी और देवताओं को भी जीत चुके रावण के बारे में उसे पता था कि वह कुछ भी कर सकता है। डर से काँप रही रम्भा को शायद यह नहीं पता था कि रावण अपनी दुष्टता के कारण रिश्तों-नातों की भी परवाह नहीं करेगा। क्या आपको पता है जब यह साबित हो गया कि रम्भा रावण की पुत्रवधू है तब रावण ने क्या जवाब दिया?

रावण ने कहा कि सारे रिश्ते-नाते सिर्फ़ उन्हीं स्त्रियों के लिए होते हैं जो किसी एक पुरुष की पत्नी हो। उसने रम्भा से कहा कि स्वर्गलोक में तो ऐसा कोई नियम-क़ानून या रिश्ते-नाते नहीं होते। उसके बाद रावण ने रम्भा के जाँघों और वक्षस्थल को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। साथ ही उसने घमंड से चूर होकर अपनी वीरता का बखान किया और यहाँ तक कहा कि अश्विनीकुमार सहित दुनिया का कोई भी पुरुष उससे बेहतर नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम जहाँ शबरी के झूठे फल खाते थे, रावण किसी भी स्त्री की तरफ़ सही नज़र से नहीं देखता था। ‘वाल्मीकि रामायण’ के अनुसार, रावण ने रम्भा का बलात्कार किया

एवमुक्त्वा स तां रक्षो निवेश्य च शिलातले ।
कामभोगाभिसंसक्तो मैथुनायोपचक्रमे ।। ७.२६.४२ ।। (उत्तरकाण्ड)

इस श्लोक का अर्थ यह है कि राक्षसराज रावण ने रम्भा को बलपूर्वक शिला पर बिठाया और फिर कामभोग में लीन होकर बलपूवक उसके साथ समागम किया। रम्भा के पुष्पहार टूट गए, उसके द्वारा धारण किए गए आभूषण बिखर गए और व्याकुलता से वह पीड़ित हो उठी। रावण रम्भा का बलात्कार करने के बाद उसे वहीं छोड़ दिया और निकल गया। महर्षि वाल्मीकि लिखते हैं कि उसकी हालत ऐसी हो गई थी, जैसे किसी फूलों की लता को हवा द्वारा झकझोड़ दिया गया हो। उसका श्रृंगार अस्त-व्यस्त हो गया था और उसका शरीर काँप रहा था।

बिलखती हुई रम्भा अपने प्रेमी नलकुबेर के पैरों पर गिर पड़ी थी। रम्भा ने नलकुबेर को बताया कि रावण स्वर्ग जीतने के लिए भारी संख्या में सैन्यबल लेकर आया है और इसी दौरान उसने उसका बलात्कार किया। नलकुबेर महामना थे। उनमें ब्राह्मण सी धर्मशीलता और क्षेत्रीय सी वीरता थी। अपनी प्रेमिका के साथ हुए अत्याचार से क्रुद्ध होकर नलकुबेर ने उसी क्षण रावण को श्राप दिया कि आगे से उसने किसी भी स्त्री के साथ बलपूर्वक समागम करना चाहा तो उसके सिर के टुकड़े हो जाएँगे। अर्थात, रावण तब तक किसी स्त्री के साथ संभोग नहीं कर सकता था, जब तक वह ऐसा न चाहती हो।

अब आपको जवाब मिल गया होगा कि रावण ने सीता से इतनी मिन्नतें क्यों की? उसने क्यों सीता के साथ लंका में जबरन कुछ ग़लत करने की कोशिश नहीं की? इस श्लोक में नलकुबेर का श्राप देखें:

यदा ह्यकामां कामार्तो धर्षयिष्यति योषितम् ।
मूर्धा तु सप्तधा तस्य शकलीभविता तदा ।। ७.२६.५७ ।।
(उत्तरकाण्ड)

सीता-हरण के समय भी रावण ने अपने ही मुँह से कहा था कि किस तरह से उसने इधर-उधर से काफ़ी सारी स्त्रियों का अपहरण कर उन्हें लंका में लाकर रखा है। अगर किसी के भीतर रावण के अच्छे पक्षों की चर्चा करने की ही इच्छा है तो उसकी अच्छे की चर्चा करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन जिस क्षेत्र में वह बुरा था, बलात्कारी था- उस मामले में उसकी बुराई में अच्छा ढूँढने वालों को कम से कम बिना तथ्यों को जाने दुष्प्रचार तो नहीं फैलाना चाहिए।

इस लेख में वाल्मीकि रामायण के अलावा किसी अन्य सोर्स से कुछ भी नहीं लिया गया है। उपर्युक्त कहानी वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड में वर्णित है और श्लोक संख्या देख कर आप उसे पढ़ सकते हैं। आप सीता-हरण वाला भाग भी पढ़ सकते हैं, जहाँ रावण ने जोर-जबरदस्ती करते हुए सीता को हाथ लगाया और फिर उन्हें उठा कर अपने रथ में लेकर गया। रावण अक्सर माँ सीता को अपनी वीरता और धन का लोभ भी देता रहता था। लेकिन, यही श्राप का डर था कि उसने सीता को हाथ नहीं लगाया।