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तौफीक ने 67 साल की दिव्यांग महिला से किया रेप, फिर कर दी हत्या: कान में पहनीं सोने की बालियाँ भी लूटी, केरल पुलिस ने किया गिरफ्तार

केरल के तिरुवनंतपुरम में एक दिव्यांग वृद्धा की रेप के बाद हत्या कर दी गई है। पीड़िता का अर्धनग्न शव मंगलवार (10 दिसंबर 2024) को उसके अस्थाई घर में मिला। इस घटना के आरोपित के तौर पर पुलिस ने तौफीक को गिरफ्तार किया है। तौफीक लूटपाट के इरादे से वृद्धा के घर में घुसा था। उसने मृतका के शव से गहने भी उतार कर बेच दिए, जिसे जब्त कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तिरुवनंतपुरम के मंगलपुरम इलाके की है। मंगलवार (11 दिसंबर 2024) की सुबह 7 बजे पुलिस को एक अस्थाई टेंट में एक महिला का अधनंगा शव पड़े होने की सूचना मिली। पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची तो पाया कि लगभग मृतका की उम्र 67 साल की है। लाश को धोती से ढका गया था और उस पर घाव के भी निशान थे।

पड़ोस में ही रहने वाली मृतका की बहन ने लाश की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच-पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस की पड़ताल में पता चला कि हत्या से पहले मृतका से रेप किया गया था। मृतका के कान से सोने की बालियाँ गायब थीं। CCTV फुटेज व अन्य माध्यमों से खोजबीन की गई तो आरोपित की पहचान तौफीक के तौर पर हुई।

तौफीक तिरुवनंतपुरम के ही पास ही स्थित पोथनकोडे का रहने वाला है। पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपित को दबोच लिया। तौफीक की गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वह दिव्यांग मृतका से लूटी गई ज्वैलरी को बेचकर बाजार से लौटा ही था। उसकी निशानदेही पर ज्वैलरी को भी जब्त कर लिया गया है।

खुद को किन्नर बताने वाले फरीन अहमद ने 7 साल की बच्ची से किया रेप किया, जाँच शुरू हुई तो निकला पुरुष: कोर्ट ने 20 साल के लिए भेजा जेल

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की एक अदालत ने सोमवार (9 दिसंबर 2024) को एक बच्ची से रेप करने वाले कथित किन्नर को 20 साल सश्रम कारावास की सजा दी। किन्नर बनकर लोगों को गुमराह करने वाले फरीन पर कोर्ट ने 12 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका है। फरीन 29 मार्च 2022 को 7 साल की एक बच्ची को खीरा दिलाने के बहाने ले गया और उसके रेप किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की सुनवाई बरेली की पॉक्सो स्पेशल कोर्ट में हुई। लगभग ढाई साल चली सुनवाई में फरीन खुद को किन्नर बताते हुए बेगुनाह होने का दावा करता रहा। जज उमा शंकर के आदेश पर आरोपित के लिंग की जाँच हुई तो वह पुरुष निकला। यह भी पता चला कि फरीन लम्बे समय से किन्नर बनकर लोगों को गुमराह कर रहा था। पोल खुल जाने के बाद फरीन अदालत में ही रोने लगा।

किन्नर बना फरीन कोर्ट से कम सजा देने की अपील करने लगा। हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने फरीन के अपराध को गंभीर बताते हुए अदालत से कड़ी सजा देने की माँग की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने फरीन को दोषी करार देते हुए 20 साल की सश्रम कारावास और 12 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। पुलिस ने फरीन को अदालत से ही कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया।

क्या था पूरा मामला

यह घटना बरेली जिले के थाना क्षेत्र मीरगंज की है। यहाँ 9 अप्रैल 2022 को 7 साल की नाबालिग बच्ची की माँ ने पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर में महिला ने बताया था कि 29 मार्च को उसकी बेटी TV देख रही थी। इसी दौरान इस्लामिया स्कूल के पास रहने वाला जमील अहमद का बेटा फरीन किन्नर वहाँ पहुँचा। उसने पीड़िता बच्ची को खीरा खिलाने का लालच दिया और अपने साथ ले गया।

फरीन किन्नर ने फिर बच्ची से रेप किया। उसने पीड़िता को धमकी भी दी कि अगर यह बात किसी को बताई तो वह उकी कर देगा। रेप की वजह से पीड़िता को ब्लीडिंग शुरू हो गई थी। बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने फरीन पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 376A, 376B और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया।

अडानी पर फर्जी रिपोर्ट देने वाला OCCRP अमेरिकी दलाल, स्वतंत्र संस्था नहीं… USAID से लेता है पैसा: वामपंथी MediaPart ने छापी खबर, भाजपा ने शेयर किया तो ‘फेक न्यूज’ बता रोने लगा

फ्रांस का वामपंथी मीडिया संस्थान मीडियापार्ट अब कथित तौर पर भारत में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) से नाराज़ है। मीडियापार्ट की नाराजगी का कारण उसी की एक रिपोर्ट का भाजपा द्वारा इस्तेमाल है। मीडियापार्ट ने हाल ही में अडानी समूह पर आरोप जड़ने वाले OCCRP पर एक रिपोर्ट छापी थी। इसमें OCCRP के लिंक अमेरिकी विदेश विभाग से जुड़े बताए गए थे। भाजपा ने इस रिपोर्ट के आधार पर कॉन्ग्रेस समेत अमेरिका को निशाने पर लिया था।

मीडियापार्ट की रिपोर्ट में बताया गया था कि अडानी समूह पर दो हिट पीस प्रकाशित करने वाले ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की फंडिंग का आधे से अधिक हिस्सा अमेरिकी विदेश विभाग से आता है। OCCRP खुद को एक स्वतंत्र संस्थान बताता आया है। इस रिपोर्ट के बाद स्पष्ट हुआ था कि OCCRP अमेरिका के कहने पर विदेशों में अलग-अलग कम्पनियों या सरकारों को निशाना बनाता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भाजपा ने इसके कुछ हिस्से साझा किए थे। भाजपा ने भारत और भारतीय कम्पनियों के खिलाफ की गई बड़ी साजिश की तरफ इशारा किया था। हालाँकि, भाजपा का रिपोर्ट के कुछ हिस्से साझा करना मीडियापार्ट को पसंद नहीं आया। मीडियापार्ट ने इसको लेकर एक बयान जारी किया है।

भारत में मीडियापार्ट की रिपोर्ट पर हुए सियासी हँगामे के बाद इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मीडियापार्ट ने 7 दिसंबर को कहा, “मीडियापार्ट OCCRP के बारे में हाल ही में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट के पीएम मोदी का एजेंडा बढ़ाने और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करने के लिए भाजपा द्वारा इस्तेमाल करने की कड़ी निंदा करता है।”

मीडियापार्ट की डायरेक्टर और प्रकाशक कैरीन फाउटेउ ने कहा कि भाजपा ने फर्जी खबरें फैलाने के लिए मीडियापार्ट के लेख का गलत तरीके से फायदा उठाया है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने जिस रिपोर्ट का हवाला दिया वह मीडियापार्ट ने प्रकाशित नहीं की…भाजपा द्वारा प्रचार की जा रही साजिश की योजना के पक्ष में कोई भी तथ्य उपलब्ध नहीं हैं।” मीडियापार्ट ने इस बीच यह नहीं बताया कि भाजपा द्वारा कौन सा हिस्सा साझा किया आना साजिश के तहत आता है।

गौरतलब है कि 2 दिसंबर, 2024 को मीडियापार्ट ने ‘द हिडेन लिंक्स बिटवीन जायंट ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म एंड यूएस गवर्मेंट’  शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसमें OCCRP के कामकाज में अमेरिकी सरकार के हस्तक्षेप की बात की गई थी। मीडियापार्ट ने इस रिपोर्ट में बताया कि OCCRP खुद को भले ही पूरी तरह से स्वतंत्र बताता है, लेकिन इसके मैनेजमेंट ने इसे अमेरिका पर पूरी तरह से निर्भर कर दिया है। मीडियापार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी OCCRP की फंडिंग का लगभग 50% से अधिक अमेरिकी एजेंसियाँ देती हैं।

अडानी पर हमले का OCCRP का है इतिहास

अगस्त 2023 में, ऑपइंडिया ने भविष्यवाणी की थी कि OCCRP अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ के नक्शेकदम पर चलते हुए भारतीय बाजार में उथल-पुथल मचाने की योजना बना रहा है। हमने खुलासा किया था कि OCCRP को जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (OSF), फोर्ड फाउंडेशन और रॉकफेलर ब्रदर्स फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से फंड मिलता है।

OSF ने संगठन की क्रॉस-बॉर्डर रिपोर्टिंग को ‘मजबूत’ करने और प्रभाव बढ़ाने के लिए संगठित OCCRP को $8,00,000 (₹6.61 करोड़) का अनुदान भी दिया। ‘पत्रकारों के नेटवर्क’ ने अब तक दो हिट लेख प्रकाशित किए हैं। एक अगस्त 2023 में और दूसरा मई 2024 में। अडानी समूह और मॉरीशस स्थित फंड ‘360 वन’ द्वारा OCCRP के इन दावों को खारिज कर दिया गया।

यहाँ तक ​​कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी फैसला सुनाया था कि OCCRP की रिपोर्ट का इस्तेमाल सेबी द्वारा चल रही जाँच पर संदेह जताने के लिए नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना किसी सत्यापन के किसी संगठन की रिपोर्ट पर सबूत के तौर पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

मीडियापार्ट के खुलासे ऐसे समय में हुए हैं जब गौतम अडानी को रिश्वतखोरी के कथित आरोपों को लेकर अमेरिका में परेशान किया जा रहा है। गौरतलब है कि जिस USAID से OCCRP पैसा लेता है, वह कई देशों में सरकारें बदलने के लिए ज़िम्मेदार रहा है।

रिक्शावाले मुस्लिम भी हिंदुओं को दिखाते हैं आँख, मारते हैं ओवरटेक करने पर भी… बांग्लादेश में 79 दिन में हिंदुओं के खिलाफ 88 घटनाएँ: यूनुस सरकार ने खुद माना

बांग्लादेश ने मंगलवार (10 दिसंबर 2024) को स्वीकार किया कि शेख हसीना को पीएम पद से हटाने के बाद मुल्क में अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बताया गया। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने माना कि अल्पसंख्यक, खासकर हिंदुओं के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा की 88 घटनाएँ हुई हैं। हालाँकि, ये आँकड़े वास्तविक नहीं लगते और घटनाएँ इससे कहीं ज्यादा हैं, फिर भी बांग्लादेश ने यह सच्चाई स्वीकार की।

मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने भी कहा कि 5 अगस्त से 22 अक्टूबर तक अल्पसंख्यकों से संबंधित घटनाओं के 88 मामले दर्ज किए गए हैं। इन घटनाओं में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, “मामलों और गिरफ्तारियों की संख्या में वृद्धि होने की आशंका है, क्योंकि पूर्वोत्तर सुनामगंज, मध्य गाजीपुर और अन्य क्षेत्रों में हिंसा की नई घटनाएँ सामने आई हैं।”

हालाँकि, तीन महीनों से भी कम समय में हुई इतनी घटनाओं को अलग मोड़ देने की कोशिश करते हुए आलम ने कहा कि कुछ घटनाओं को छोड़कर हिंदुओं पर उनकी आस्था के कारण हमला नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इनमें ऐसे भी मामले हैं, जिनमें पीड़ित शेख हसीना के नेतृत्व वाली पिछली सत्तारूढ़ पार्टी आवामी लीग के सदस्य थे। वहीं, कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें लड़ाई व्यक्तिगत है।

शफीकुल आलम ने कहा कि 22 अक्टूबर के बाद हुई घटनाओं के बारे में मीडिया को जल्द ही विवरण साझा किया जाएगा। बता दें कि कुछ दिन पहले ही भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री बांग्लादेश की यात्रा पर थे। वहाँ उन्होंने मोहम्मद यूनुस और अपने समक्ष से मुलाकात कर अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद बांग्लादेश का यह बयान आया है।

सरकार के दावों से अलग है कहानी

बांग्लादेश की सरकार भले ही अपनी छवि बचाने के लिए यह दावा करे अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा, उनकी आस्था को लेकर नहीं बल्कि राजनीतिक एवं व्यक्तिगत था। लेकिन, सच्चाई इससे अलग है। बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं का कहना है कि उन्हें मुल्क में आवाज नीची करके बात करना पड़ता है। रिक्शेवाले भी आँख दिखाते हैं। गाड़ी ओवरटेक करने पर भी पिटाई कर दी जाती है।

ढाका में रेडीमेड कपड़ों की फैक्ट्री चलाने वाले उद्यमी संजीव जैन ने हिंदी अखबार एवं सोशल मीडिया दैनिक जागरण को इसके बारे में बताया। 10 दिन पहले ही बांग्लादेश से लौटे जैन ने बताया कि वहाँ स्थिति बहुत बिगड़ गई है। वहाँ अल्पसंख्यकों का जीना हराम होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वे ढाका गए थे तो खुद दाढ़ी बढ़ाकर गए थे।

महाराष्ट्र में VVPAT की पर्चियों की EVM के वोटों में नहीं मिला कोई अंतर, चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी के विपक्षी दावों को किया खारिज

भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने कहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों की अनिवार्य गणना के दौरान कोई खामी नहीं पाई गई है। ECI ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सत्यापन प्रक्रिया सभी 288 निर्वाचन क्षेत्रों में आयोजित की गई। दरअसल, महाविकास अघाड़ी (MVA) ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।

आयोग ने कहा कि दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम रूप से चयनित पाँच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गणना करना आवश्यक है। आयोग ने दिशा-निर्देशों के तहत काम किया और उसे किसी तरह का मिसमैच नहीं मिला। आयोग ने परिणाम के दिन 23 नवंबर को मतगणना पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पर्चियों की गिनती की।

चुनाव आयोग
चुनाव आयोग (साभार: TOI)

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने पूरी प्रक्रिया के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को साथ रखा था। इस दौरान सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक किए गए थे। यह पूरा प्रोसेस सीसीटीवी कैमरों के सामने किया गया, ताकि किसी को कोई आशंका ना रहे और नहीं बाद में किसी तरह का इस पर विवाद हो।

महाराष्ट्र के सभी 36 जिला चुनाव अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, सभी निर्वाचन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में दर्ज वोटों की उम्मीदवार के अनुसार संख्या वीवीपीएटी पर्चियों से पूरी तरह मेल खाती है। इसके लिए कुल 1,440 वीवीपैट पर्चियों की गिनती की गई।

दरअसल, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन आयोजित शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था। इसके कुछ दिनों के बाद चुनाव आयोग का यह बयान आया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हारने वाले विपक्षी दलों के 20 से अधिक उम्मीदवारों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।

दुर्गाडी किला महाराष्ट्र सरकार की, मस्जिद पर वक्फ बोर्ड के दावे को कोर्ट ने नकारा: बोली एकनाथ शिंदे की शिवसेना- दुर्गा माता की जय, यहीं से छत्रपति शिवाजी ने शुरू किया था नौसैनिक अभियान

महाराष्ट्र के कल्याण जिले में स्थित दुर्गाडी किला पर महाराष्ट्र सरकार का अधिकार है। कल्याण की जिला एवं सत्र न्यायालय ने किले के भीतर स्थित मस्जिद और ईदगाह पर वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया है। इस किले में दुर्गा माता का एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल्याण कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि किले के भीतर की मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है। बता दें कि इस जगह पर 1968 तक मंदिर और मस्जिद दोनों का इस्तेमाल दोनों समुदाय करते थे, लेकिन इसके बाद विवाद हो गया। साल 1967 में यहाँ पूजा करने पर भी रोक लगा दी गई थी। हालाँकि शिवसैनिक रोक के बावजूद यहाँ पूजा किया करते थे। फिलहाल, ये संपत्ति कल्याण म्यूनिसिपल काउंसिल के कब्जे में है। यहाँ नवरात्रि के मौके पर शिवसेना प्रशासन से अनुमति लेकर बड़े पैमाने पर पूजा और मेले का आयोजन करती है।

कोर्ट के इस फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना ने स्वागत किया है। शिवसेना का कहना है कि यह फैसला देवी दुर्गा के आशीर्वाद और हिंदू समुदाय की एकजुटता का परिणाम है। शिवसेना नेता दिनेश देशमुख और गोपाल लांडगे समेत कई कार्यकर्ताओं और सरकारी वकीलों के प्रयासों को भी इस जीत का श्रेय दिया गया है। शिवसेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया, “दुर्गा माते की जय, शिवसेना जिंदाबाद। कल्याण का दुर्गाडी किला अब आधिकारिक रूप से देवी दुर्गा का मंदिर है। न्याय की जीत हुई है। जय हिंदुत्व!”

दुर्गाडी किला ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह वह स्थान है जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य के पहले नौसैनिक अभियान की शुरुआत की थी। यह किला हमेशा से हिंदू समुदाय के लिए आस्था का केंद्र रहा है। पिछले 48 वर्षों से दुर्गाडी किले को देवी दुर्गा का मंदिर घोषित करने के लिए शिवसेना और हिंदू संगठनों ने आंदोलन चलाया।

इस संघर्ष की शुरुआत शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे ने की थी। धर्मवीर आनंद दिघे और वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस आंदोलन को मजबूती दी। शिवसैनिकों ने कई बार दुर्गाडी किले के पास घंटानाद आंदोलन किया और सामूहिक आरती गाई। खासतौर पर नवरात्रि के दौरान इस किले को केंद्र में रखकर भव्य धार्मिक आयोजन किए गए।

दुर्गाडी किले पर आज का फैसला न केवल एक ऐतिहासिक निर्णय है, बल्कि यह हिंदुत्व और मराठा इतिहास के गौरव को भी पुनर्जीवित करता है। शिवसेना और हिंदू संगठनों के प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्य को दबाया नहीं जा सकता। अब यह किला न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि मराठा इतिहास का एक जीवंत स्मारक भी बनेगा।

कभी AAP का था लाडला, अब ओवैसी का बना दुलारा: दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों का मास्टरमाइंड है AIMIM का उम्मीदवार ताहिर हुसैन, हथियार खरीदने पर फूँके गए थे ₹1.30 करोड़

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए असदुद्दीन औवैसी की पार्टी AIMIM ने दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन को मुस्तफाबाद से उम्मीदवार बनाया है। ताहिर हुसैन साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के बाद से ही जेल में बंद है। वह पहले आम आदमी पार्टी (AAP) में था। बाद में AAP ने उसे पार्टी ने निकाल दिया था। औवैसी ने इसकी घोषणा की है।

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया साइट X पर इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा, “एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन AIMIM में शामिल हो गए हैं और आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से हमारे उम्मीदवार होंगे। उनके परिवार के सदस्य और समर्थक आज मुझसे मिले और पार्टी में शामिल हुए।”

ओवैसी द्वारा अपनी पोस्ट में शेयर किए गए तस्वीर में असदुद्दीन ओवैसी ताहिर हुसैन के परिजनों और समर्थकों के साथ दिख रहे हैं। तस्वीर में शोएब जमई और AIMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील भी साथ हैं। इस पर भाजपा ने ओवैसी को घेरा है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ओवैसी ने साफ कर दिया कि ये उन लोगों को सम्मानित करेंगे, जो हिंदुओं को मारते हैं और उनके घर जलाते हैं।

कौन है ताहिर हुसैन?

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 लोगों के खिलाफ 23 मार्च 2023 को कड़कड़डूबा कोर्ट में आरोप तय हुए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचल ने कहा था कि गवाहों के बयानों से स्पष्ट पता चलता है कि सभी आरोपित घटनास्थल पर मौजूद थे।

न्यायाधीश ने अंकित शर्मा हत्या केस में आरोप तय करते हुए माना था, “ताहिर भीड़ पर निगरानी रखने और उन्हें प्रेरित करने के लिए लगातार काम कर रहा था। ये सभी चीजें हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए की गई थीं।” अदालत ने कहा था, “भीड़ के इन कृत्यों से यह स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य हिंदुओं को उनके शरीर और संपत्ति को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाना था।”

कोर्ट ने आगे कहा था, “यह भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि यह भीड़ जानबूझकर हिंदुओं को भी मारना चाहती थी। यह नहीं कहा जा सकता है कि इस भीड़ का हिस्सा होने के बावजूद वो ऐसे उद्देश्य से बेखबर थे। जाहिर तौर पर, यह एक गैरकानूनी भीड़ थी, जो उस उद्देश्य के लिए काम कर रही थी।” इससे पहले ताहिर हुसैन पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले और दंगों की फंडिंग में आरोप तय किए थे।

ताहिर हुसैन और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 153 ए, 302, 365, 120बी, 149, 188 और 153ए के तहत आरोप तय किए गए थे। ताहिर हुसैन के खिलाफ आईपीसी की धारा 505, 109 और 114 के तहत भी केस आरोप तय किए गए थे। इस मामले के अन्य आरोपितों के हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम हैं।

ताहिर हुसैन ने ‘काफिरों’ को मारने के लिए धर्म के नाम पर भीड़ को उकसाया था। इस बात का जिक्र दिल्ली पुलिस ने गवाह के बयानों का हवाला देते हुए दायर किए गए आरोप पत्र में किया है। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हिन्दुओं के उन सब दुकानों व मकानों का आग लगा दी। भीड़ में शामिल सभी लोग हिंदुओं को गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे थे और हिंदुओं को खतम करने की बात बोल रहे थे।

गवाह ने आगे बताया था कि सभी लोग हिंदुओं के घर जलाने की बात व हमको काफिर कह रहे थे। उनकी बातें हमें बहुत बुरी लग रही थी। दंगाई मुस्लिम भीड़ हमारी दुकान के बाहर तोड़-फोड़ कर रहे थे व हमारी तरफ पत्थर मार रहे थे। भीड़ में शामिल सभी लोग हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे थे और कह रहे थे कि ‘इन काफिरों को देश से निकाल देंगे, मारेंगे और हिंदुओं की लड़कियों को उठा कर ले जाएँगे’। 

आरोप पत्र चश्मदीदों के बयान के आधार पर तैयार किया गया है। साथ ही इलाके के सीसीटीवी फुटेज और आरोपितों के फोन कॉल रिकार्ड को भी आधार बनाया गया है। पुलिस के अनुसार चश्मदीदों का कहना है कि ताहिर हुसैन घटना वाले दोनों दिनों में 40-50 गुंडों की भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। पहला चार्जशीट चाँदबाग के एक पार्किंग लॉट में आगजनी और दंगे से संबंधित है।

इसमें कम से कम सौ वाहनों में आग लगा दी गई थी। दूसरा मामला करावल नगर इलाके में एक गोदाम में लूटपाट और आगजनी से संबंधित है। दोनों ही घटनाओं में ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया गया था। आरोप पत्र चश्मदीदों के बयान के आधार पर तैयार किया गया है। साथ ही इलाके के सीसीटीवी फुटेज और आरोपितों के फोन कॉल रिकार्ड को भी आधार बनाया गया है। 

चाँदबाग और जफराबाद में हुए दंगों को लेकर ये दायर चार्जशीट में ताहिर हुसैन पर दंगों को फंड करने और इसका मास्टरमाइंड होने की बात कही गई थी। दंगों को भड़काने में 1.3 करोड़ रुपए से भी ज्यादा फूँके गए। ताहिर हुसैन के छत से मिले सबूतों के अलावा उसके खिलाफ कई अन्य सबूतों की बात भी कही गई थी। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा था कि वह दंगे भड़का रहा था।

पुलिस को उसके पास से एक पिस्टल भी मिला था, जिसके साथ मिले कुल 200 गोलियों में से 125 गोलियाँ थीं। हालाँकि, 75 बुलेट्स गायब मिले थे। ताहिर इसका कोई जवाब नहीं दे पाया था कि 75 गोलियाँ कहाँ गईं। पुलिस ने उस वीडियो को भी सबूत के तौर पर लिया था, जिसमें ताहिर हुसैन के गुंडे पेट्रोल बम फेंकते दिख रहे थे। 

म्यांमार का मौलाना मुजम्मिल भागकर बांग्लादेश आया, बीबी-बच्चों को छोड़ दूसरा निकाह कर भारत में घुसा: ₹500 में आधार कार्ड बनवा पुणे में बस गया रोहिंग्या मुस्लिम

म्यांमार का एक रोहिंग्या मौलाना बांग्लादेश के रास्ते भारत आया। उसने ₹500 में फर्जी आधार कार्ड बनवाया। उसने इसी के सहारे सिम, पासपोर्ट, पैन कार्ड और यहाँ तक कि घर भी ले लिया। इस मौलाना ने पुणे में अपना धंधा भी जमा लिया था। महाराष्ट्र में सुरक्षा एजेंसियों ने उसे एक और रोहिंग्या की सूचना पर उसे उसके परिवार के साथ गिरफ्तार किया था। उसे जमानत भी मिल गई है। अब वह पुणे में खरीदे गए घर से गायब है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने जुलाई, 2024 में पुणे में मुहम्मद मुजम्मिल खान नाम के एक रोहिंग्या घुसपैठिए को पकड़ा था। उसके साथ उसकी बीवी और दो बच्चों को भी पकड़ा गया था। पुलिस ने जब उसकी जाँच की थी तो कई खुलासे हुए।

पुलिस को पता चला कि मुजम्मिल असल में म्यांमार का रहने वाला है और वहाँ उसने मौलाना का कोर्स किया था। इसके बाद वह 2012 में भाग कर बांग्लादेश चला गया। यहाँ वह अपनी बीवी के साथ पहुँचा था। उसके दो बेटियाँ भी थी।

बांग्लादेश में उसने रोहिंग्या शरणार्थी कैम्प में उसने अपनी बीवी और दोनों बेटियों को छोड़ दिया और एक और महिला से निकाह कर भारत में घुसपैठ की। यहाँ उसने कोलकाता में कुछ दिन गुजारे, लेकिन काम ना मिलने पर वह पुणे चला गया। पुणे में उसने एक फैक्ट्री में काम किया।

यहाँ काम करने के दौरान उसने ₹500 देकर एक फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया। उसने साथ ही पैन कार्ड और सिम और साथ ही में पासपोर्ट भी बनवा लिए। उसने पुणे में कपड़े बेचने और सुपारी बेचने का भी धंधा किया। इसमें उसे स्थानीय मस्जिद में आने वालों से मदद मिली।

मुजम्मिल ने यहाँ जमीन भी खरीद ली। इसकी भी कोई लिखापढ़ी नहीं की गई। इसके बाद इस पर मुजम्मिल ने घर भी बना लिया। यहाँ वह मजे से रहता रहा और उसकी नई बीवी ने एक बच्चे को भी जन्म दिया। हालाँकि, उसका भांडा जुलाई, 2024 में फूटा।

जुलाई में उसके घर महाराष्ट्र की ATS पहुँच गई। दरअसल, ATS ने इससे पहले एक रोहिंग्या को पकड़ा था। उसने एजेसियों को बताया कि पुणे में ही उसके मुजम्मिल मामू रहते हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार करे कागज भी पकड़े। उसके साथ परिजनों को गिरफ्तार किया गया था।

उसे कोर्ट से बाद में जमानत भी मिल गई। अब वह परिवार यहाँ से फरार है। उसके घर पर ताला पड़ा हुआ है। पुणे में इससे पहले दिसम्बर, 2023 में कई ऐसे बांग्लादेशी पकड़े गए थे जिन्होंने एक हिन्दू महिला की मौत के बाद भी उसके कागजों के आधार पर झुग्गी का रेंट अग्रीमेंट बनवा लिया था। उन्होंने इसके बाद पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की थी।

‘…अभी तक सुसाइड नहीं किए हो’: सास-बीवी ने कोर्ट में कहा, महिला जज हँसती रही – बेंगलुरु के IT इंजीनियर ने की आत्महत्या, 3 साल से नहीं देखने दी थी बेटे का मुँह

कर्नाटक के बेंगलुरु में नौकरी करने वाले AI इंजीनियर ने 24 पन्नों की सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली है। मरने से पहले उस शख्स ने एक वीडियो भी जारी किया और अपनी पत्नी एवं ससुराल वालों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं उसने ने जौनपुर में पारिवारिक मामले को देखने वाली महिला जज पर पक्षपात का आरोप लगाया है। इसके साथ ही लिखा है कि उसके अस्थि को तब तक ना विसर्जित किया जाए, तब उसके ससुराल वालों को सजा नहीं मिल जाती।

पुलिस के अनुसार, अतुल सुभाष नाम का 34 वर्षीय शख्स बेंगलुरु के एक निजी फर्म में काम करता था। उसका शव शहर के मंजूनाथ लेआउट इलाके में स्थित उनके आवास पर लटका हुआ पाया गया है। आत्महत्या करने से पहले सुभाष ने 24 पन्नों के नोट लिखा, जिसमें से चार पन्ने हाथ से लिखे हुए हैं। वहीं, 20 पन्ने टाइप किए हुए। सुसाइड में लिखा है ‘मुझे न्याय मिलना चाहिए’।

मृतक सुभाष ने अपनी सुसाइड नोट में अपनी पत्नी और उसकी माँ, भाई और चाचा को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उसने पत्नी के साथ अनबन के साथ कोर्ट में उसके साथ किए जा रहे कथित भेदभाव को लिखा है। सुभाष की सुसाइड नोट के अनुसार, उसकी पत्नी ने उस पर दहेज प्रताड़ना से लेकर अप्राकृतिक सेक्स करने तक का आरोप लगाया है।

बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले मृतक अतुल सुभाष से अलग रह रही पत्नी ने उससे 80 हजार रुपए मासिक और बच्चे को पालने के लिए 2 लाख रुपए महीने की माँग की थी। उसकी बीवी निकिता सिंघानिया B.Tech, MBA है और दिल्ली की एक बड़ी आईटी फर्म में AI इंजीनियर है। वह अपने पति को इस तरह प्रताड़ित करती थी कि 4 साल के अपने बेटे को मृतक से बात भी नहीं करने देती थी।

मृतक ने ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा अपने पिता और भाई को भी झूठे केस में फँसाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी ने उसे परेशान करने के लिए उत्तर प्रदेश के जौनपुर में केस किया था। इस केस के लिए वह बेंगलुरु से जौनपुर 120 बार जा चुका है। इसके कारण वह वित्तीय ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान हो गया है और न्याय नहीं मिलता देखकर यह स्ट्रीम कदम उठा रहा है।

सोशल मीडिया पर मृतक का 1:21 घंटा का एक वीडियो और सुसाइड नोट भी सामने आया है। इस वीडियो और नोट में उसने छोटी-से-छोटी बात को लिखा है कि किस तरह उसके ससुराल वाले उसे परेशान कर रहे थे। इसके साथ ही मृतक ने यह भी बताया कि जौनपुर की महिला जज उससे पक्षपात करती हैं और कोर्ट रूम में उस पर हँसती थी।

मरने से पहले क्या-क्या किया, डिटेल में लिखा

अतुल ने अपनी सुसाइड नोट बेहद शांत भाव से और सोच-समझकर लिखा है। पुलिस को उसकी अलमारी में एक टाइम टेबल पिन किया हुआ मिला। यह टाइम टेबल हिंदी और अंग्रेजी, दो भाषाओं में लिखी गई हैं। इस टाइमटेबल में सुभाष ने आत्महत्या वाले दिन किस समय पर क्या-क्या किया, सारा विवरण लिखा है। जैसे कि उसने सुबह उठकर प्रार्थना की, उसके बाद अपना सामान छाँटा, कोर्ट और अपनी कंपनी को इसके बारे में ईमेल भेजा।

हर तरफ से हताश होने के बाद मृतक ने ‘मरने से पहले क्या किया’ शीर्षक के अंतर्गत लिखा: “स्नान किया। खिड़कियाँ और गेट का ताला खोला। भगवान शिव का 100 बार नाम जपा। कार और बाइक की चाबियाँ फ्रिज पर रखी। सुसाइड नोट को टेबल पर रखा।” मृतक की पत्नी ने पिछले 2 सालों में उसके और परिवार के खिलाफ 8 मुकदमे कर रखे थे। इससे मृतक बेहद परेशान हो उठा था।

जज पर आरोप लगाया

अतुल सुभाष ने अपने वीडियो और सुसाइड नोट में दावा किया है कि जौनपुर में अदालत में सुनवाई के दौरान उसकी पत्नी ने जज के सामने ही उसे आत्महत्या के लिए उकसाया। इस दौरान महिला जज भी हँस पड़ी। मृतक ने अपनी सुसाइड नोट में महिला जज पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा है कि जौनपुर में सबको पता है कि रिश्वत देकर उस महिला से मनमुताबिक फैसला लिया जा सकता है।

मृतक अतुल सुभाष ने अपनी नोट में आरोप लगाया कि महिला जज ने केस को सेटल करने के लिए उससे भी 5 लाख रुपए की रिश्वत माँगी थी। वहीं, हर पेशी में जज का पेशकार उससे पैसे लेता था। इतना ही नहीं, वह पेशकार जज के सामने ही वह कोर्ट में आने वाले हर व्यक्ति से वह 50-100 रुपए वसूल करता था।

मृतक ने आरोप लगाया, “सभी सबूतों के साथ ईमानदारी से केस लड़ते रहो, लेकिन एक भ्रष्ट जज मुझे और मेरे परिवार को परेशान करके, चीजों में हेरफेर करके और हमारे खिलाफ मामले के हर तथ्य को तोड़-मरोड़ कर फैसला देकर पत्नी का पक्ष ले रही है।” उसने कहा कि अब वह अपने माता-पिता के खिलाफ शुरू किए गए मुकदमों के लिए भरण-पोषण राशि के रूप में फंडिंग नहीं कर सकता।

मृतक ने नोट में कहा, “मेरी पत्नी मेरे बच्चे को अलग-थलग रखेगी और मुझे, मेरे बुजुर्ग माता-पिता और मेरे भाई को परेशान करने के लिए और भी केस दर्ज करवाएगी। वह भी उसी पैसे का इस्तेमाल करके, जो मैं उसे भरण-पोषण के तौर पर देता हूँ। मेरे द्वारा दिए गए पैसे का इस्तेमाल मेरे बच्चे के भरण-पोषण के लिए करने के बजाय, उसे मेरे खिलाफ हथियार बनाया जा रहा है।”

अतुल ने अपनी सुसाइड नोट में लिखा है कि एक दिन कोर्ट में उसे देखकर उसकी पत्नी ने कहा, “अरे तुम अभी सुसाइड नहीं किए?” इस पर मृतक ने कहा, “मैं मर गया तो तुम लोगों की पार्टी कैसे चलेगी?” इस पर अतुल की पत्नी बोली, तब भी चलेगी। तुम्हारा बाप देगा पैसा। पति के मरने पर सब वाइफ का होता है। तेरे मरने के बाद तेरे माँ-बाप भी जल्दी मरेंगे फिर। उसमें भी बहु का हिस्सा होता है।”

अतुल ने अपनी नोट में आगे लिखा है कि उसकी पत्नी ने उसे और उसके पूरे परिवार को धमकी देते हुए आगे कहा, “पूरी जिंदगी तेरा पूरा खानदान कोर्ट के चक्कर काटेगा।” मृतक ने कहा कि उसके उकसाने के बाद वह सुसाइड करने का निर्णय लिया है और इससे उसके दुश्मनों और भ्रष्ट न्याय व्यवस्था को मिलने वाला पैसा बंद हो जाएगा। अतुल ने लिखा कि बेटे को पिता से रुपए वसूलने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जना चाहिए।

मेरी अस्थि को कोर्ट के बाहर गटर में डाल देना: मृतक की अंतिम इच्छा

मृतक अतुल सुभाष ने मौत के बाद अपनी कुछ इच्छाएँ भी अपनी सुसाइड नोट में डाली है। 12 प्वॉइन्ट में लिखे इस नोट में अतुल ने लिखा है कि जिस तरह से उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी पत्नी के पक्ष में पक्षपात किया गया, उसको देखते हुए इस केस की सुनवाई लाइव होनी चाहिए, ताकि पूरा देश सच्चाई जान सके। उन्होंने अपनी सुसाइड नोट और वीडियो को सबूत मानने की अपील की है।

उन्होंने इस मामले की सुनवाई कर रही जौनपुर की महिला जज के इरादे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि जज इस केस से जुड़े सबूतों एवं दस्तावेजों में हेरफेर कर सकती हैं। उन्होंने यूपी के कोर्ट की अपेक्षा बेंगलुरु की कोर्ट को अधिक न्यायप्रिय बताते हुए इससे जुड़े सभी केस को बेंगलुरु ट्रांसफर करने की माँग की है।

मृतक ने अपने बेटे की कस्टडी अपने बुजुर्ग माँ-बाप को देने की अपील की है। इसके साथ ही उनके शव के आसपास उनकी पत्नी या ससुराल के किसी भी व्यक्ति को आने से रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित करने वाले उनकी पत्नी एवं ससुराल के लोगों के साथ-साथ महिला जज को दंडित नहीं किया जाता, तब तक उनकी ‘अस्थि विसर्जन’ ना की जाए। अगर ये लोग दंडित नहीं होते हैं तो उनकी अस्थि को किसी कोर्ट के बाहर स्थित गटर में डाल दिया जाए।

अतुल ने यह भी कहा है कि उनकी मौत के बाद उनके ससुराल के लोगों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि केस की सुनवाई करके दंडित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इच्छा जाहिर की है कि उनकी पत्नी को उनके एवं उनके परिवार के खिलाफ किए गए केस को वापस लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। न्यायिक व्यवस्था से हताश मृतक ने कहा कि अगर उनके मरने के बाद भी उनके माता-पिता और भाई का उत्पीड़न जारी रहता है तो कोर्ट उन्हें इच्छा-मृत्यु की अनुमति दे।

शादी डॉट कॉम से मुलाकात

अतुल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी पत्नी निकिता से उसकी मुलाकात शादी डॉट कॉम नाम की मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर हुई थी। इसके बाद साल 2019 में दोनों ने शादी कर ली। अतुल का आरोप है कि निकिता ने साल 2021 में बेंगलुरु स्थित उसके घर को छोड़ दिया। अपने साथ वह अपने गहने और पैसे भी लेकर चली गई।

रिश्तों में दरार की शुरुआत अतुल द्वारा अपनी सास को 15 लाख रुपए देने से शुरू हुई। उसकी सास निशा ने बिजनेस में लगाने के लिए उससे 15 लाख रुपए माँगे, लेकिन उसने लगभग एक करोड़ रुपए के मकान खरीद लिए। इस पर अतुल ने अपनी नाराजगी जाहिर की और अपने पैसे माँगे। इसके बाद उसकी सास ने 1.5 लाख रुपए दे दिए और बाकी पैसे माँगने पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

अपने पिता के लिए ऐसे 100 बेटे कुर्बान कर सकता हूँ, लेकिन अपने बेटे के लिए 1000 बार मैं कुर्बान हो सकता हूँ: अपने बेटे को प्रताड़ना का हथियार बनाए जाने से परेशान मृतक

इसके बाद उत्तर प्रदेश के जौनपुर की रहने वाली मृतक की पत्नी ने उस पर तमाम तरह के आरोप लगाते हुए पिछले 2 सालों में 8 केस दर्ज करा दिए। इनमें मारपीट, दहेज से लेकर अप्राकृतिक सेक्स करने तक के मामले शामिल हैं। इतना ही नहीं, निकिता ने आरोप लगाया कि अतुल और उसके परिवार द्वारा 10 लाख रुपए दहेज माँगने के कारण दिल के मरीज उसके पिता की मौत हो गई।

इन केसों में मृतक के परिजनों का भी नाम दिया गया था। इस तरह वे लगातार परेशान हो रहे थे। वहीं, अतुल ने अपनी सुसाइड नोट में लिखा है कि उसके पिता दिल के मरीज थे और पिछले 10 सालों से दिल्ली के AIIMS में उनका इलाज चल रहा था। शादी से पहले ही डॉक्टरों ने कहा था कि निकिता के पिता कुछ महीने जिंदा रहेंगे। इसके बाद दोनों मे मुलाकात के कुछ ही महीनों के बाद 2019 में शादी कर ली थी।

जस्टिस शेखर यादव ने ‘कठमुल्लों’ को बताया खतरनाक, सुप्रीम कोर्ट ने माँग ली रिपोर्ट: हलाला-चार निकाह को बताया था अस्वीकार्य, नेशनल कॉन्फ्रेंस के MP ने कहा- महाभियोग लाएँगे

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के विश्व हिन्दू परिषद (VHP) कायर्क्रम में दिए गए वक्तव्य पर सुप्रीम कोर्ट ने जानकारी माँगी है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पूरे बयान का विवरण इलाहाबाद हाई कोर्ट से माँगा है। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक शिकायत भी की गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद रूहुनाल्लाह मेहँदी ने शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग चलाने की बात कही है। जस्टिस शेखर यादव ने एक कार्यक्रम में कह दिया था कि इस देश में हलाला और चार निकाह जैसी रूढ़ियाँ स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने सामाजिक सुधार पर और भी बातें कही थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया, “सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव द्वारा दिए गए भाषण की समाचार पत्रों में छपी खबरों पर संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट से इसका विवरण और जानकारियाँ मंगवाई गई हैं और यह मामला अभी विचाराधीन है।”

इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद रूहुनाल्लाह मेहँदी ने ऐलान किया कि वह जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद में लाएँगे। रूहुनाल्लाह मेहँदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार माननीय इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव को नोटिस में उल्लिखित आरोपों के आधार पर हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव ला रहा हूँ। इस प्रस्ताव को लाने के लिए मुझे 100 सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए। 7 से अधिक सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।”

मेहँदी ने बताया कि उनके प्रस्ताव पर सपा सांसद जियाउररहमान बर्क और मोहम्मद मोहिबुल्लाह ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके अलावा सांसद सुदामा प्रसाद और राजकुमार रोत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। मेहँदी ने कहा है कि उन्होंने सपा, कॉन्ग्रेस, DMK और TMC से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की है।

इसके अलावा CJAR नाम के एक वामपंथी रुखों वाले संगठन ने चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को शिकायत दी है। CJAR ने जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ एक आंतरिक जाँच करने की माँग की है। CJAR ने कहा,”न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के इस भाषण ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और तटस्थता के बारे में आम नागरिकों के मन में संदेह पैदा कर दिया है, इसे मिली कवरेज को देखते हुए, एक मजबूत रिएक्शन जरूरी है।”

किस बात पर छिड़ा है विवाद

8 दिसम्बर, 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में UCC पर आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने मुस्लिम समाज में चल रही रूढ़िवादिता और इस पर लोगों के ना बोलने पर प्रश्न खड़े किए थे। इसके साथ ही उन्होंने UCC जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे थे। उन्होंने ‘कठमुल्ला’ शब्द का उपयोग भी किया था। उन्होंने कहा था कि ‘कठमुल्ले’ देश के लिए खतरनाक हैं।

जस्टिस शेखर यादव ने यहाँ कहा था, “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा। यही कानून है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं हाईकोर्ट के जज होने के नाते ऐसा कह रहा हूँ। दरअसल, कानून ही बहुमत के हिसाब से काम करता है।”

जस्टिस शेखर यादव ने मुस्लिमों में फैली रूढ़िवादिता और दकियानूसी को लेकर प्रश्न खड़े किए थे। उन्होंने कहा, “हमारे हिंदू धर्म में बाल विवाह, सती प्रथा और बालिकाओं की हत्या जैसी कई सामाजिक कुरीतियाँ थीं, राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। लेकिन जब मुस्लिम समुदाय में हलाला, तीन तलाक और गोद लेने से जुड़े मुद्दों जैसी सामाजिक कुरीतियों की बात आती है, तब उनके पास इनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं थी।”

VHP के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों की तरफ से भी यह प्रथाएँ खत्म करने को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने कहा था, “आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी का दर्जा दिया गया है। आप 4 बीवियाँ रखने, हलाला करने या तीन तलाक़ का अधिकार नहीं रख सकते। आप कहते हैं, हमें ‘तीन तलाक’ कहने का अधिकार है, और महिलाओं को भरण-पोषण ना देने का अधिकार है।”

जस्टिस शेखर यादव ने यहाँ कहा था, ” इस तरह से कोई अधिकार नहीं चल पाएगा। UCC कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसकी वकालत VHP, RSS या हिंदू धर्म करता हो। देश का सुप्रीम कोर्ट भी ऐसी ही बात करता है…मैं शपथ ले रहा हूँ कि यह देश UCC कानून ज़रूर लाएगा, और बहुत जल्द लाएगा।” जस्टिस शेखर यादव ने इस बात को लेकर भी प्रश्न खड़े किए गए कि मुस्लिम तीन तलाक और हलाला जैसे मुद्दों को अपना पर्सनल लॉ बताते हैं और कानून से बचते हैं।

उन्होंने कहा था, “अगर आप कहते हैं कि हमारा पर्सनल लॉ इसकी इजाजत देता है, तो ये अस्वीकार्य है। एक महिला को भरण-पोषण मिलेगा, दो विवाह की इजाजत नहीं होगी, और एक आदमी की सिर्फ़ एक पत्नी होगी, चार पत्नियाँ नहीं… अगर एक बहन को भरण-पोषण मिलता है और दूसरी को नहीं, तो इससे भेदभाव पैदा होता है, जो संविधान के खिलाफ है।”

जस्टिस शेखर यादव ने इस दौरान कहा कि सिर्फ गंगा में डुबकी लगाने और माथे पर चंदन लगाने वाला ही हिन्दू नहीं है बल्कि भारतवर्ष को अपनी माँ मानने वाला भी हिन्दू है। उनके इस बयान के बाद लगातार लिबरल जमात में हंगामा मचा हुआ है।