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मुंबई पुलिस पर ईरानी गैंग का हमला, तीन अधिकारी घायल: पहले भी ईरानियों के इलाके में हो चुके हैं वर्दी पर हमले

मुंबई में बुधवार (5 दिसंबर 2024) की रात ईरानी गैंग के करीब 20 लोगों ने पत्थरबाजी कर पुलिस पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में तीन पुलिसकर्मी – सहायक पुलिस निरीक्षक यशवंत पावले, हनुमंत पुजारी और सुनील लोखंडे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना अंबिवली रेलवे स्टेशन के पास हुई, जब पुलिस ने एक 20 वर्षीय चेन स्नैचर को गिरफ्तार किया था।

चेन स्नैचरों को छुड़ाने के लिए पुलिस पर हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने चेन स्नैचिंग के एक मामले में आरोपित ओनु लाला ईरानी को गिरफ्तार किया था। आरोपित ओनु लाला ईरानी को अंबिवली रेलवे स्टेशन लाया जा रहा था, तभी ईरानी गैंग के सदस्य अचानक वहाँ इकट्ठा हो गए। उन्होंने रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाकर पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस हमले के दौरान तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें गैंग के सदस्य ट्रैक से पत्थर उठाकर पुलिस पर फेंकते दिख रहे हैं। हमले के दौरान, आरोपित ओनु लाला ईरानी पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया। गैंग के सदस्यों ने रेलवे कार्यालय को भी नुकसान पहुँचाया।

मुंबई पुलिस ने अब तक चार आरोपितों को हिरासत में लिया है और पाँच नाबालिगों की भी पहचान की है। कल्याण रेलवे पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक पंधारी कांडे ने बताया कि 15-20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और रेलवे अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बीएनएस और रेलवे एक्ट के तहत धारा 109(1), 132, 121(1), 189(2), (3), (5), 262, 263, 352, 351(1) और 3(5) में मामला दर्ज किया है।

ईरानी बस्ती में पुलिस पर पहले भी हुए हैं हमले

  • अगस्त 2022: डीएन नगर पुलिस स्टेशन की टीम को इतिहासशीटर फिरोज फैयाज़ खान को गिरफ्तार करने के दौरान हमला झेलना पड़ा।
  • 2019: चार चोरों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर पत्थर और बोतलों से हमला किया गया।
  • अप्रैल 2017: एक चेन स्नैचर को पकड़ने के दौरान 25 लोगों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और एक पुलिसकर्मी पर केरोसिन डालकर जलाने की कोशिश की।

सहायक पुलिस निरीक्षक यशवंत पावले ने बताया कि 1 नवंबर को दर्ज मामले में सीसीटीवी और तकनीकी जानकारी से आरोपित की पहचान हुई थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए ईरानी बस्ती में ऑपरेशन चलाया गया था। पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है।

मंदिर की माँग करने वाला हिंदू ‘तानाशाह-अत्याचारी’, हिंदू हमेशा कानून के खिलाफ: सुप्रीम कोर्ट से रिटायर जज सुप्रीम कोर्ट के ही राम मंदिर फैसले पर रोए

सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवम्बर, 2019 को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का पटाक्षेप कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने लगभग एक दशक तक सुनवाई करने के बाद इस दिन हिन्दू पक्ष में फैसला दिया था। इसको लेकर लम्बे समय तक देश के बुद्धिजीवी और कट्टरपंथी वर्ग ने रोना-धोना किया था। इसके बाद मंदिर भी बन गया और लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन भी कर लिए। लेकिन जिस तरह पुरवाई हवा चलने पर पुराना दर्द उठ पड़ता है, उसी तरह अब भी कभी-कभार लिबरल जमात के मन में यह हूक उठती ही रहती है।

राम मंदिर के फैसले को लेकर विलाप करने वालों में नया नाम उसी बिरादरी से है, जिसने उसे बनाने का फैसला दिया था। कॉन्ग्रेस सरकार में देश के सॉलिसिटर जनरल रहे और बाद में सुप्रीम कोर्ट में जज बने रोहिंटन नरीमन ने एक लेक्चर के दौरान राम मंदिर पर दिए गए फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इसे ‘न्याय का मजाक’, सेक्युलरिज्म का उल्लंघन करने वाला फैसला करार दिया, हिन्दुओं को कानून के खिलाफ रहने वाला बताया, मस्जिदों के खिलाफ याचिका डालने को दैत्य के सर की तरह बताया।

रोहिंटन नरीमन ने यह टिप्पणियाँ जस्टिस AM अहमदी मेमोरियल लेक्चर में की हैं। ये अहमदी फाउंडेशन ने आयोजित करवाया था। इसका विषय ‘धर्मनिरपेक्षता और भारतीय संविधान’ था। इसमें रोहिंटन नरीमन समेत तमाम जजों को बुलाया गया था। नरीमन ने यहाँ इस कार्यक्रम का पहला लेक्चर दिया। उनके लेक्चर की गाड़ी संविधान के अलग-अलग प्रावधानों, सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और AM अहमदी की बात करते हुए राम मंदिर मामले और लिबरल रोने-धोने की तरफ मुड़ गई।

रोहिंटन नरीमन ने कहा कि यह पूरा मसला 1984 में विश्व हिन्दू परिषद की राम मंदिर बनाने की माँग को ‘तानाशाही’ और ‘अत्याचारी’ माँग से चालू हुआ था। यानि अपने आराध्य देव के पूजास्थल की माँग करना नरीमन के लिए तानाशाही की बात है। वह इस दौरान यह भी भूल गए कि VHP ने सिर्फ अपनी माँग कानूनी रूप से उठाई थी, यह अत्याचार कैसे हो सकता है। अत्याचार तो मंदिर का विध्वंस था। मंदिर के लिए लड़ाई सदियों पहले से चल रही थी।

उनके लिए शायद यह सब कहना बहुत आसान है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह जिस समुदाय से आते हैं, उसके खिलाफ भारत में कभी कोई अन्याय नहीं हुआ। लेकिन हाँ, उन्हें ये जरूर याद करना चाहिए कि उनके पुरखे पर्शिया से क्यों भागे थे। उनको ना याद हो, मैं बता देता हूँ। यहाँ इस्लाम का कानून नाफ़िज हो गया था, इसलिए पारसी भारत आ गए थे और सैकड़ों सालों से अपने धर्म को स्वतंत्रतापूर्वक मान रहे हैं। उन्हें शरण भी इन्हीं ‘अत्याचारी’ और ‘तानाशाह’ VHP वालों के पुरखों ने ही दी थी।

इसके बाद नरीमन ने राम मंदिर के मामले में हिन्दू पक्ष को हमेशा कानून के खिलाफ रहने वाला भी करार दिया। जबकि असल बात ये है कि यदि हिन्दू पक्ष कानून के खिलाफ रहता तो बाबरी 6 दिसम्बर, 1992 तक खड़ी ही ना रह पाती और मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को ना होती। हिन्दू पक्ष ने तो इस मामले में अंग्रेज न्यायाधीशों से लेकर जिला अदालत, हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी। वो तो कानून से मंदिर मांगते रहे और इसी कानून के अनुसार मंदिर बनाया। इस बीच उनके आराध्य को ‘काल्पनिक’ तक बताया गया।

अगर हिन्दू कानून के खिलाफ होते तो आज देश में बहुसंख्यक होने के बाद भी वह कश्मीर से भाग नहीं रहे होते। अगर हिन्दू कानून के खिलाफ होते तो काशी मथुरा का मामला कोर्ट में अटका नहीं होता। खैर पीढ़ी दर पीढ़ी वकालत का पेशा अपनाने वाले नरीमन साहब को यह सब कैसे पता होगा। वह तो जन्म से लेकर अब तक उस ‘बबल’ में रहते होंगे जिसका नाम ‘लिबरल जमात’ है। नरीमन ने हिन्दुओं को कानून के खिलाफ तो पाया ही इस बात पर भी बड़ी निराशा जताई कि बाबरी गिराने के एवज में उसी राम जन्मभूमि के सीने पर मस्जिद दुबारा क्यों नहीं खड़ी की गई।

मस्जिद ना तामीर किए जाने को नरीमन ने ‘न्याय के साथ भद्दा मजाक‘ बताया और कहा कि यह भरपाई होती। शायद नरीमन साहब को यह नहीं पता कि असल भरपाई तो राम मंदिर का निर्माण ही है। उन्हें एक ढाँचे के गिराए जाने की भरपाई याद है लेकिन जो अन्याय हिन्दुओं के साथ सैकड़ों साल तक हुआ है उसकी भरपाई की उन्हें चिंता नहीं है। नरीमन का कहना है कि फैसले में ‘सेक्युलरिज्म’ का ध्यान नहीं रखा गया। यानी सेक्युलरिज्म का ध्यान तब होता जब हिन्दू अपना दावा छोड़ कर चुप चाप बैठ जाते।

माफ़ करिए नरीमन साहब। आप पारसी समुदाय के पादरी हैं। आपको आपके पिता ने छोटी उम्र से आपके धर्म के बारे में सिखाना चालू कर दिया था। आपसे कोई आपके धार्मिक स्थल छोड़ने को कहे तो कैसे लगेगा। तब आप सेक्युलरिज्म की दुहाई देंगे? नहीं देंगे! इसलिए हम भी सेक्युलरिज्म की खातिर अपने धर्म को नहीं छोड़ेंगे। लेक्चर के दौरान रोहिंटन नरीमन के दुख का स्तर इसके बाद धीमे-धीमे बढ़ता ही गया।

उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, साध्वी ऋतम्भरा समेत भाजपा और VHP के नेताओं को बरी किए जाने पर दुख जताया और उस जज को लानतें भेजी, जिसने यह फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा कि उस जज को यूपी में एक पद दिया गया, जिसने इन नेताओं को बरी किया था। अरे नरीमन साहब! एक निचली अदालत के जज को कहीं नियुक्त किए जाने पर इतनी समस्या? आपके पिता जी सरकारी वकील रहे, आप भी रहे, जज बने फिर एक जज से इतनी समस्या।

और शायद ही ऐसा कोई दिन होता हो जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अपने यहाँ के रिटायर्ड जज को किसी कमिटी और मध्यस्थता में नहीं शामिल करते हों। इस कानूनी रोजगार गारंटी योजना पर हजारों सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन आपने कभी उस पर प्रश्न उठाए। कभी आपने उस कॉन्ग्रेस से सवाल पूछा जिसका एक नेता बहरुल इस्लाम पहले राज्य सभा का सदस्य बना फिर गुवाहाटी हाई कोर्ट में जज बना दिया गया, कुछ ही महीने में यहाँ का चीफ जस्टिस बन गया और यहाँ से भी रिटायर हुआ तो उसे सुप्रीम कोर्ट में जज बनाया गया।

पहली बात तो निचली अदालत के जज को उपलोकायुक्त बनाए जाने में कोई दिक्कत नहीं थी। फिर अगर आपको नैतिकता का मसला लगता है तो आखिर क्यों आप बाकियों पर सवाल नहीं उठाते। शायद ये जज आपके निशाने पर इसलिए था क्योंकि उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी समेत बाकी हिन्दुओं के लिए बात करने वाले नेताओं को जेल में नहीं डाला। तो समझिए महाराज! ये इमरजेंसी का दौर नहीं है। आपका इगो ना हर्ट हो, सिर्फ इसके लिए कोई जेल नहीं भेजा जाएगा।

घंटों तक पानी पी-पी कर बोलने के बाद रोहिंटन नरीमन का असल दुख बाहर आ गया। वह इस बात पर वह खासे फ्रस्टेटेड नजर आए कि आखिर अब कोर्ट में उन मस्जिदों के खिलाफ याचिकाएँ क्यों पड़ रही हैं, जो संभवतः मंदिरों को तोड़ कर बनाई गई हैं। उन्होंने इन याचिकाओं को ‘हाईड्रा हेड्स’ करार दिया। हाईड्रा ग्रीक मान्यता में एक ऐसा समुद्री दैत्य था जिसके कई सर थे। यानी अपने अधिकार के लिए लड़ने वाले हिन्दुओं को रोहिंटन नरीमन ने दैत्य करार दिया है।

नरीमन का कहना है कि अब 1991 का कानून सख्ती से लागू कर दिया जाए, जिसके तहत कोई भी हिन्दू इतिहास में अपने धार्मिक स्थल के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटा सकता है। उन्होंने कहा कि तभी हम सहिष्णु हो पाएँगे। भाईसाहब! आपको सहिष्णु होना है, हो जाइए। संविधान में अधिकार है। लेकिन हम अपने मंदिरों की कीमत पर सहिष्णु कहलाने का टैग नहीं खरीदेंगे। आपका सहिष्णुपना आपको मुबारक हो।

रोहिंटन नरीमन की राम मंदिर के खिलाफ फैसले पर खीझ क्यों है, यह उनके पिता और देश के बड़े वकीलों में शुमार रहे फली एस नरीमन की बातों से भी समझ आता है। फली एस नरीमन को इस बात से दिक्कत थी कि एक हिन्दू संत को यूपी का मुख्यमंत्री क्यों बनाया गया। खुद रोहिंटन नरीमन ने भी ऋग्वेद का उद्धरण देते हुए सनातन परंपरा में महिलाओं की प्रतिष्ठा के संबंध में विवादास्पद टिप्पणी की थी। एक बार किसी दूसरे मजहब की किताब पर ऐसी टिप्पणी करके उन्हें देखना था, सारी सहिष्णुता सामने आ जाती।

₹3146337 करोड़ की कंपनी का CEO, गोली मार कर हत्या… लड़की से बतियाने के चक्कर में फँस गया हत्यारा

अमेरिका की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी यूनाइटेड हेल्थकेयर के सीईओ ब्रायन थॉम्पसन की 4 दिसंबर को मिडटाउन मैनहट्टन में गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हमला हिल्टन होटल के बाहर हुआ, जहाँ सुबह करीब 6:40 बजे एक अज्ञात बंदूकधारी ने बेहद नजदीक से गोली चलाई। थॉम्पसन को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के अनुसार, हत्या सुनियोजित थी। संदिग्ध ने गोली मारने के बाद ई-बाइक पर घटनास्थल से भागने की कोशिश की। गोलीबारी के दौरान उसकी बंदूक जाम हो गई थी, लेकिन उसने बंदूक को तुरंत ठीक किया और फिर से फायर किया। इसका मतलब है कि हत्यारा पूरी तरह से ट्रेंड था और वो शांत दिमाग से काम कर रहा था। अपना काम करने के बाद वह मौके पर घबराए बिना बच निकला। सुराग के लिए जाँच अधिकारियों ने कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

पता चला कि संदिग्ध ने अपर वेस्ट साइड के एक हॉस्टल में नकली ड्राइवर लाइसेंस का उपयोग कर चेक-इन किया था। घटना से पहले उसे स्टारबक्स में भी देखा गया, जहाँ उसने कॉफी का ऑर्डर दिया और फिर क्राइम सीन की ओर बढ़ गया।

फ्लर्टिंग की वजह से सामने आ गया चेहरा

हत्यारा भले ही प्लानिंग कर अपने काम को अंजाम देने में माहिर था, लेकिन फ्लर्टिंग ने उसकी पहचान उजागर कर दी। होटल में ही काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने पुलिस को बताया कि संदिग्ध ने मास्क पहन रखा था। बातचीत के दौरान महिला ने छेड़छाड़ भरे लहजे में उसे मास्क उतारने को कहा। महिला के साथ हंसी-मजाक में उसने मास्क नीचे कर लिया, जिससे उसका चेहरा कैमरे में कैद हो गया।

पुलिस ने इस तस्वीर को सार्वजनिक कर दिया और जनता से जानकारी माँगी है। न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) ने कहा, “यह हमला रैंडम नहीं था बल्कि यह एक टारगेटेड मर्डर था। संदिग्ध के बारे में जानकारी देने पर $10,000 का इनाम घोषित किया गया है।” भारतीय रुपये में इसकी कीमत 8.47 लाख रूपये होती है। पुलिस ने बताया कि संदिग्ध ने हमले से पहले इलाके की रेकी की थी। उसके बैग और जैकेट का विवरण भी जारी किया गया है। हालाँकि, वह अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

अप्रैल 2021 से थे सीईओ थॉम्पसन

ब्रायन थॉम्पसन ने अप्रैल 2021 में यूनाइटेड हेल्थकेयर के सीईओ का पद संभाला था। वे 2004 से कंपनी से जुड़े हुए थे और उनकी नेतृत्व क्षमता को काफी सराहा गया था। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने उनकी मौत पर दुख जताते हुए इसे हेल्थकेयर इंडस्ट्री के लिए ‘अपूर्णीय क्षति’ बताया। बता दें कि यूनाइटेड हेल्थकेयर का रेवेन्यू साल 2023 में $371.6 बिलियन (3146337 करोड़ रुपये) था।

थॉम्पसन की हत्या ने अमेरिका के हेल्थकेयर क्षेत्र और हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। वहीं, ‘फ्लर्टिंग’ जैसी छोटी घटना से संदिग्ध की पहचान उजागर होना दिखाता है कि अपराधी कितनी भी तैयारी कर ले, लेकिन इंसानी कमजोरियाँ उसका पर्दाफाश कर सकती हैं।

मोहम्मद साहब ने 12 साल की बच्ची का महीने भर किया रेप, खुद है 2 बच्चों का अब्बा: बिहार से किडनैप कर कलकत्ता-विशाखापटनम-राँची में की हैवानियत, देता था नशे का डोज

बिहार के नवादा में पाँचवी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया है। आरोपित की पहचान मोहम्मद साहब के तौर पर हुई है। वह पीड़िता के घर के पड़ोस में रहता था और खुद दो बच्चों का अब्बा भी है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, इसी साल अक्तूबर माह में मोहम्मद साहब ने भदौनी राजा नगर मोहल्ले से 12 साल की बच्ची को किडनैप किया, उसके बाद उसे कलकत्ता, विशाखापटनम और राँची ले जाकर उसका महीने भर रेप करता रहा।

इस दौरान बच्ची को बेसुध रखने के लिए उसने उसे कई बार नशीले पदार्थ दिए और आखिर में 3 दिसंबर को बच्ची को सद्भावना चौक पर छोड़ फरार हो गया।

पीड़िता के पिता ने अब इस घटना की शिकायत पुलिस में दी है। उन्होंने बताया कि 12 साल की बेटी 27 अक्तूबर की देर शाम राशन की दुकान से कुछ खरीदने गई थी। जब काफी समय तक वह वापस नहीं लौटी तो खूब खोजबीन हुई और आखिर में नगर थाना में सूचना दी गई।

महीने भर बाद बच्ची 3 दिसंबर को घर लौटी। उसकी स्थिति ऐसी थी कि हर कोई हैरान रह गया। पूछताछ करने पर पता चला कि पड़ोस में रहने वाले मोहम्मद साहब ने उसके साथ हैवानियत की और किसी को कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

इस पूरे मामले में उक्त मीडिया रिपोर्ट बताती है कि अभी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पीड़ित परिवार न्याय की माँग को लेकर एसपी डीएम से गुहार लगा रहा है।

गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में बिहार के नवादा में तीन साल की बच्ची से रेप की घटना प्रकाश में आई थी। घटना नारदीगंज थाना की थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि आरोपित बच्ची को रात में सोते समय उठाकर ले गया था और उसके बाद उसने दुष्कर्म करके उसे खून से लथपथ अवस्था में फेंक दिया था।

भाजपा छोड़ो… वरना मौत: नक्सलियों ने की 2 पूर्व सरपंचों की हत्या, पत्नी के सामने उठा ले गए, बेटी ने की जिंदा छोड़ने की अपील… फिर भी नहीं पिघले

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों की बर्बरता एक बार फिर सामने आई है। बीजेपी से जुड़े होने के आरोप में नक्सलियों ने दो पूर्व सरपंचों की हत्या कर दी। भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के बिर्याभूमि गाँव से सुकलु फरसा और नैमेड़ थाना क्षेत्र के मुरगा बाजार से सुखराम अवलम का अपहरण कर उन्हें मौत के घाट उतारा गया।

धमकी भरे पर्चे में बीजेपी समर्थकों को चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुकलु फरसा के शव के पास नक्सलियों द्वारा छोड़े गए पर्चे में साफ लिखा था कि उन्होंने कई बार बीजेपी से दूरी बनाने की चेतावनी दी थी, लेकिन फरसा ने इसे नजरअंदाज कर दिया। नक्सलियों ने फरसा पर बीजेपी के समर्थन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पार्टी से अलग रहने के लिए तीन बार चेताया गया था। पर्चे में साफ संदेश दिया गया कि बीजेपी से जुड़े लोग या तो पार्टी छोड़ दें या मरने के लिए तैयार रहें।

अंतिम संस्कार से लौटते समय पत्नी के सामने किया था अगवा

माओवादियों ने बिरयाभूमि गाँव के पूर्व सरपंच सुकलु फरसा का अपहरण नक्सलियों ने बीते 3 दिसंबर को उनके भतीजी के अंतिम संस्कार से लौटते वक्त आदवाड़ा इलाके से उनकी पत्नी के सामने किया था। वहीं, गडेर ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सुखराम का नक्सलियों ने मुर्गा बाजार से अपहरण किया था। दोनों ही पूर्व सरपंच की हत्या की जिम्मेदारी नक्सलियों के भैरमगढ़ एरिया कमेटी ने ली है।

परिजनों की अपील के बाद भी ले ली जान

अपहरण के बाद सुकलु फरसा की बेटी यामिनी ने सोशल मीडिया पर भावुक अपील करते हुए अपने पिता की रिहाई की गुहार लगाई। लेकिन नक्सलियों ने न सिर्फ इस अपील को अनसुना किया, बल्कि फरसा की हत्या कर शव को गाँव के पास फेंक दिया। घटनास्थल पर गंगालूर एरिया कमेटी के नाम से पर्चा बरामद हुआ।

नक्सलियों द्वारा फेंका गया पर्चा (फोटो साभार: ETV Bharat)

बीते 3 सालों में बीजेपी से जुड़े 10 लोगों की हत्याएँ

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते तीन सालों में अब तक 10 ऐसी हत्याएँ नक्सली कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने मरने वालों पर बीजेपी से जुड़े होने के आरोप लगाए थे। इन ताजी हत्याओं के बाद से इलाके में डर और आक्रोश का माहौल है, और लोग माओवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं, बीजापुर जिले के एडिशनल एसपी चंद्रकांत गवर्ना ने घटना की पुष्टि की और बताया कि पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है।

जिन ‘बंगबंधु’ ने बांग्लादेश बनाया, उनको ही नोटों से यूनुस सरकार ने हटाया: पहले राष्ट्रपति के दफ्तर से हटाई थी फोटो, कैंसिल कर दी थी उनके नाम की छुट्टियाँ

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट कर्ट करके आई मोहम्मद यूनुस सरकार राष्ट्रपिता मुजीबुर रहमान की निशानियों को मिटाने में जुटी हुई है। इस्लामी कट्टरपंथ और पाकिस्तान की विचारधारा पर चलते हुए अब यूनुस सरकार ने बांग्लादेश की करेंसी पर से भी बंगबंधु की फोटो हटाने का फैसला कर लिया है। उनकी जगह पर जुलाई में हुए तख्तापलट की तस्वीरें नोटों पर छापी जाएँगी। इससे पहले मुजीबुर रहमान का इतिहास मिटाने के लिए और कई कारस्तानियाँ यूनुस सरकार कर चुकी है।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, देश की सेंट्रल बैंक ने नए नोटों की छपाई चालू कर दी है। सेंट्रल बैंक 100, 200, 500 और 1000 टका के नोटों की छपाई कर रही है। इनकी छपाई बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के आदेश पर हो रही है।

इन नोटों पर मुजीबुर रहमान की फोटो नहीं होगी। इनसे यह हटा दी गई है। इनकी जगह पर जुलाई-अगस्त में हुए इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन की तस्वीरों को इन नोटों पर लगाई जाएँगी। इसके अलावा इन नोटों पर बांग्लादेश की मस्जिदों और बाकी धार्मिक स्थलों की फोटो इन पर छापी जाएगी।

यह नोट अगले 6 महीने के भीतर बाजार में आएँगे। पहले बड़े नोटों पर मुजीबुर रहमान की फोटो हटाई जा रही है, इसके बाद सभी प्रकार की करेंसी नोट पर यही नीति लागू की जाएगी। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 29 सितम्बर, 2024 को इन नोटों की डिजाइन बदलने को लेकर सेंट्रल बैंक को कहा था, जिनकी डिजाइन अब फाइनल हो गई है।

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने मुजीबुर रहमान की स्मृतियाँ मिटाने का प्रयास किया है। इससे पहले यूनुस सरकार के एक मंत्री (एडवाइजर) महफूज आलम ने राष्ट्रपति के दफ्तर बांग्ला भवन के दरबार हॉल से मुजीबुर रहमान की फोटो हटा दी थी।

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने सत्ता में आते ही 8 छुट्टियों को भी रद्द कर दिया था। यह छुट्टियाँ बंगबंधु की हत्या की तारीख और बाकी घटनाओं से जुड़ी हुई थीं। यहाँ तक कि बांग्लादेश मुक्ति युद्ध से जुड़ी फोटो भी हटा दी गईं थी। यूनुस सरकार में शामिल एडवाइजर मुजीबुर रहमान को ‘फासिस्ट’ बता चुके हैं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में मुजीबुर रहमान के साथ वही बर्ताव किया जा रहा है जो पाकिस्तान में किया जाता रहा है। पाकिस्तानी मुजीबुर रहमान से घृणा करते आए हैं, वह उन्हें पाकिस्तान तोड़ने का दोषी मानते हैं। बांग्लादेश में अब तक मुजीबुर रहमान को करोड़ों बंगालियों को मुक्ति दिलाने वाले नायक माना जाता रहा है। इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के सहारे सत्ता में आई यूनुस की अंतरिम सरकार इन सब चीजों को मिटाना चाहती है।

बोला था न उलटा-सीधा सवाल नहीं करेंगे… अवध ओझा ने बीच में छोड़ा BBC का इंटरव्यू, AAP पदाधिकारियों ने बंद करवाया कैमरा: सर सर… करता ही रह गया रिपोर्टर

मीडिया की एक वामपंथी दुकान है ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन, यानी की BBC। एक मास्टर साहब हैं अवध ओझा, जो संघ लोक सेवा आयोग यानी की UPSC की प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग देते हैं। एक राजनीतिक दल है आम आदमी पार्टी, यानी की AAP। वैसे हैं तो तीनों एक ही थैली के चट्टे-बट्टे पर कभी-कभी ‘हित’ देख एक-दूसरे की दुकान बंद कराने की भी कोशिश कर लेते हैं।

ऐसी ही एक ताजा कोशिश में AAP के पदाधिकारियों ने BBC का इंटरव्यू बीच में ही रुकवा दिया। कैमरा बंद करवा दिया। रिपोर्टर सर सर… कर अवध ओझा की मनुहार करता रह गया पर सर यह कहकर इंटरव्यू छोड़ गए कि पार्टी लाइन डिसाइड करेगी

अवध ओझा ताजा-ताजा आपिए बने हैं। दिल्ली की ‘शिक्षा क्रांति’ से प्रभावित होकर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में AAP का पट्टा पहना है। आप में शामिल होने से पहले UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के ‘ओझा सर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन हुआ करते थे। कहते हैं कि बीजेपी से टिकट न मिलने पर उनका मन राहुल गाँधी के लिए भी डोला। कथित तौर पर बीएसपी ने उनको टिकट भी दे दिया था। पर आखिरकार राजनीति की पाठशाला में उन्हें ठौर AAP में आकर मिला है।

इसके बाद से वे लगातार इंटरव्यू देकर अपने पुराने बयानों पर सफाई दे रहे हैं। बता रहे हैं कि क्यों वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। वगैरह, वगैरह। इसी क्रम में उनका एक इंटरव्यू बीबीसी के लिए अंशुल सिंह ने लिया है। बीबीसी न्यूज हिंदी के यूट्यूब पर जारी किया गया यह इंटरव्यू 8 मिनट का 31 सेकेंड का है।

शुरुआत में इंटरव्यू सही चल रहा है। अरविंद केजरीवाल को श्रीकृष्ण बताने से लेकर दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP की फिर से जीत की भविष्यवाणी तक अवध ओझा करते हैं। अचानक से 7 मिनट 45 सेकेंड पर पीछे से कुछ आवाज सुनाई पड़ती है। बीबीसी का रिपोर्टर पीछे मुड़ता है। एक शख्स यह कहते हुए वीडियो में सुनाई पड़ता है कि आपको मैंने बोला था न कि उलटा सीधा सवाल नहीं करने के लिए। जवाब में बीबीसी का रिपोर्टर भी हाँ कहता है।

इसके बाद बीबीसी का रिपोर्टर कहता है- नहीं सर से नॉर्मल सवाल ही कर रहे हैं। वह अवध ओझा से भी पूछता है कि सर ऐसा कोई आब्जेक्शनल सवाल आपसे क्या किया? इस पूरी बातचीत के दौरान मुंडी हिलाते रहे अवध ओझा अचानक से कहते हैं कि देखो पार्टी लाइन डिसाइड करेगी, ये तो ये लोग डिसाइड करेंगे। इतना कहकर वे माइक निकाल देते हैं और बीबीसी का कैमरा बंद हो जाता है।

इसके बाद बीबीसी ने यूट्यूब चैनल पर जो वीडियो जारी किया है उस पर लिखा आता है आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने इसके बाद यह इंटरव्यू जारी नहीं रहने दिया और रिकॉर्डिंग रुकवा दी। इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं।

इस इंटरव्यू में बीबीसी का रिपोर्टर सबसे पहले अवध ओझा से पूछता है कि कोचिंग देते-देते वे राजनीति में कैसे आ गए? दूसरे सवाल में पूछा जाता है कि आपकी विचारधारा क्या है? फिर पूछा जाता है कि आपने AAP ही क्यों चुनी, जबकि आप बीजेपी और कॉन्ग्रेस से टिकट माँग रहे थे। दावा है कि बीएसपी ने आपको टिकट दे भी दिया था? इसके बाद अवध ओझा से उनके उस वीडियो को लेकर सवाल किया जाता है जिसमें उन्होंने सिसोदिया और केजरीवाल के शराब घोटाले में जेल जाने को लेकर टिप्पणी की थी? फिर ओझा को केजरीवाल के उस पुराने बयान के बारे में पूछा जाता है जिसमें वह आरोप लगने पर इस्तीफे की माँग करते थे।

इसके बाद बीबीसी का रिपोर्टर पूछता है कि पहले आप मोदी और राहुल गाँधी की तारीफ करते थे। आप में शामिल होने के बाद भी क्या आप इसे जारी रखेंगे? यही वो सवाल है जिसका जवाब अवध ओझा दे रहे थे जब पीछे से आकर किसी व्यक्ति ने इस इंटरव्यू को बंद करवा दिया।

बीबीसी द्वारा जारी किए गए इंटरव्यू में उस व्यक्ति का चेहरा नहीं दिखता जो पीछे से रिपोर्टर को हड़का रहा है और आगे इंटरव्यू नहीं होने देता है। लेकिन इस पूरे इंटरव्यू से यह तो साफ है कि आम आदमी पार्टी के नेता जो इंटरव्यू देते हैं वह असल में ‘फिक्स’ रहता है। रिपोर्टरों को पहले ही बता दिया जाता है कि वे किस तरह का सवाल करेंगे। किस तरह के सवाल नहीं करने हैं।

ढाँचों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बनाया जो कानून, उसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: बोले विष्णु शंकर जैन- मंदिरों पर मोहम्मद बिन कासिम के हमलों से पहले की स्थिति बहाल हो

हिन्दू हितों के लिए काम करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि 1991 में लाया गया प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट असंवैधानिक है। उन्होंने कहा है कि इसमें मंदिरों और बाकी धार्मिक स्थलों की जोस्थिति को तय करने वाली जो तारीख रखी गई है, वह गलत है। जैन ने इस कानून को नागरिक अधिकारों का हनन बताया है।

वकील विष्णु शंकर ने इस मामले में हिन्दू पक्ष की तरफ से बहस कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट से माँग की है कि इस कानून को असंवैधानिक घोषित किया जाए। इस संबंध में गुरुवार (5 दिसम्बर, 2024) को हुई सुनवाई के बाद उन्होंने इसकी कमियाँ भी गिनवाई हैं।

विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से कहा, “हमने प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 की संवैधानिक मान्यता को चुनौती दी है। हमारा कहना है कि इस एक्ट का जो मतलब जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द बता रहा है, वह असंवैधानिक है। दूसरी सबसे जरूरी बात यह है कि इस एक्ट में कट ऑफ की तारीख 15 अगस्त, 1947 क्यों है, यह तारीख 712 ईस्वी क्यों नहीं है?”

जैन ने आगे कहा, “जब मुहम्मद बिन कासिम ने भारत में मंदिरों में तोड़ा था, वही तारीख कट ऑफ होनी चाहिए। कट ऑफ की तारीख 15 अगस्त, 1947 होनी ही नहीं चाहिए। यह असंवैधानिक है। संसद को ऐसा क़ानून बनाने की कोई शक्ति नहीं है जो लोगों को अदालत जाने से रोकता है। यह संविधान के मूल ढाँचे और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।”

गौरतलब है कि प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट को लेकर 6 याचिकाएँ दायर की गई हैं। हिन्दू पक्ष की इनकी तरफ से विष्णु शंकर जैन बहस कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यों वाली बेंच कर रही है। कानून के समर्थन में जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द भी सुप्रीम कोर्ट में है।

क्या है 1991 का प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट?

पूजास्थल अधिनियम, 1991 या फिर प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट, 1991 पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार 1991 में लेकर आई थी। इस कानून के जरिए किसी भी धार्मिक स्थल की प्रकृति यानी वह मस्जिद है मंदिर या फिर चर्च-गुरुद्वारा, यह निर्धारित करने को लेकर नियम बनाए गए हैं।

इस कानून के अनुसार, देश के आजाद होने के दिन यानी 15 अगस्त, 1947 को जिस धार्मिक स्थल की स्थिति जैसी थी, वैसी ही रहेगी। यानि इस दिन यदि कोई स्थान मस्जिद था तो वह मस्जिद रहेगा। कानून में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल का स्वरुप बदलने की कोशिश करेगा तो उसकी 3 वर्ष तक का कारावास हो सकता है।

इसी कानून में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी धार्मिक स्थल के स्वरुप के बदलने को लेकर याचिका कोर्ट में लगाएगा तो वह भी नहीं मानी जाएगी। यानि कोई भी व्यक्ति किसी मस्जिद के मंदिर होने का दावा नहीं कर सकता या फिर किसी मंदिर के मस्जिद होने का दावा नहीं किया जा सकता।

कानून में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि यह स्पष्ट तौर पर साबित हो जाए कि इतिहास में किसी धार्मिक स्थल की प्रकृति में बदलाव किए गए थे तो भी उसका स्वरुप नहीं बदला जाएगा। यानी यह सिद्ध भी हो जाए कि किसी मंदिर को इतिहास में तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी तो भी उसे अब दोबारा मंदिर में नहीं बदला जा सकता।

कुल मिलाकर यह कानून कहता है कि 1947 के पहले जिस भी धार्मिक स्थल में जो कुछ बदलाव हो गए या फिर उस दिन जैसे थे, वह वैसे ही रहेंगे। उनके ऊपर अब कोई दावा नहीं किया जा सकेगा। इसी कानून में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

इस कानून में कई छूट भी दी गई हैं। यह कानून कहता है कि यदि किसी धार्मिक स्थल में बदलाव 15 अगस्त, 1947 के बाद हुए हैं तो ऐसे में कानूनी लड़ाई हो सकती है। इसके अलावा ASI द्वारा संरक्षित स्मारकों को लेकर भी इसमें छूट दी गई है।

विरोध क्यों हो रहा, क्या कहा विरोध में?

प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट का विरोध कोई नई बात नहीं है। इस कानून के पास किए जाने के समय ही इसका विरोध भाजपा ने किया था। हिन्दू संगठनों ने तब भी इसको लेकर आपत्ति जताई थी। अब इस कानून के खिलाफ लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है।

इस कानून को हिन्दुओं की तरफ से सुब्रमण्यम स्वामी, अश्विनी उपाध्याय और बाकी संगठनों ने चुनौती दी है। वहीं मुस्लिमों की तरफ से आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत ने याचिका दायर की है। इस मामले में नई याचिका ज्ञानवापी मस्जिद कमिटी ने दायर की है। उसका कहना है कि वह भी प्रभावित है।

मुस्लिम चाहते हैं कि इस कानून के खिलाफ दायर की गई याचिकाएँ खारिज कर दी जाएँ और कानून को पूरी तरह से लागू किया जाए। उनका कहना है कि कानून के तहत अब किसी भी मुस्लिम मजहबी स्थल पर दावा नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस कानून के जरिए उन सभी धार्मिक स्थलों को कानूनी मान्यता दे दी गई जिनका स्वरुप 1947 से पहले बदल दिया गया था। हिन्दू पक्ष ने कहा है कि इस कानून की धारा 2,3 और 4 को रद्द कर दिया जाए। हिन्दू पक्ष ने कहा है कि कानून के चलते उन धार्मिक स्थलों को भी वह वापस नहीं ले सकते, जिनको आक्रांताओं ने तोड़ा था।

हिन्दू पक्ष ने इस कानून को संसद में पास किए जाने का भी विरोध किया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यह ऐसा कानून है जो लोगों को न्यायालय के दरवाजे खटखटाने से रोकता है ऐसे में यह असंवैधानिक है। हिन्दू पक्ष ने इसके अलावा कानून की संवैधानिकता पर भी प्रश्न उठाए हैं।

साइबर फ्रॉड से बचाने को पंकज त्रिपाठी ने बनाया ‘मूर्ख नहीं हूँ’ Video , AAP ने उसमें भी कर दिया ‘फर्जीवाड़ा’: पकड़े जाने पर पोस्ट डिलीट, नेटिजन्स बोले- एक्टर करें मानहानि का केस

दिल्ली विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया पर भारी फजीहत हुई है। उनके आधिकारिक हैंडल से अभिनेता पंकज त्रिपाठी की एक एडिटिड वीडियो शेयर की गई जिसमें AI की मदद से ऐसा दिखाया गया है कि पंकज त्रिपाठी दिल्ली की जनता को बीजेपी के खिलाफ वोट करने को कह रहे हैं।

जब यूजर्स ने इसे देखा तो तुरंत वो AAP के फर्जीवाड़े को पहचान गए और अभिनेता से अपील की गई कि पार्टी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। विवाद बढ़ता देख AAP के मुख्य हैंडल से वीडियो को हटा लिया गया है, लेकिन अन्य जगह ये अब भी मौजूद है।

पंकज त्रिपाठी के नाम पर आप ने फैलाया झूठ

फर्जी वीडियो में देख सकते हैं कि पंकज त्रिपाठी को कहते दिखाया जाता है- “हम मूँगफली बेचते हैं, अपनी अक्ल नहीं। मैसेज देखिए भाजपा वालों ने भेजा है। कहते हैं वोट करो, हम विकास करेंगे। हमें मालूम नहीं है क्या। इधर हम वोट करेंगे उधर सरकारी पैसा गायब। मूँगफली वाला हूँ मूर्ख नहीं हूँ। यदि भाजपा के लोग लालच दें तो कहो-मैं मूर्ख नहीं हूँ।”

अब अगर पंकज त्रिपाठी की असली वीडियो को देखें तो पता चलेगा कि वो हकीकत में ऑनलाइन फ्रॉड के विरुद्ध जागरुकता फैला रहे हैं जिसे AAP ने प्रोपगेंडा बनाकर साझा किया। वह असली वीडियो में कहते हैं- “हम मूँगफली बेचते हैं अपनी अक्ल नहीं। ये मैसेज देखिए। कहते हैं- लॉटरी लगी है, लिंक क्लिक करके यूपीआई पिन डालिए पैसा मिलेगा। हमको मालूम नहीं है क्या, इधर यूपीआई पिन डाला, उधर पैसा गया। याद रहे यूपीआई कहता है कि अगर कोई लालच दे तो कहो- मैं मूर्ख नहीं हूँ।”

पंकज त्रिपाठी का असली एड देखने वाले यूजर्स ने AAP के इस फर्जीवाड़े को पहचानने में जरा देर नहीं लगाई और पंकज त्रिपाठी को टैग करके कहा कि वो मानहानि का केस करें। वहीं भाजपा ने भी आप की इस हरकत का पलटवार करते हुए कहा कि AAP की राजनीति झूठ, धोखा और फर्जीवाड़े पर आधारित है।

इस पूरे विवाद के बाद AAP ने अपने मुख्य हैंडल से इस वीडियो को हटा लिया जबकि AAP के यूपी पेज पर ये वीडियो खबर लिखने तक भी थी।

अयोध्या, संभल, बांग्लादेश… सबका DNA एक: CM योगी ने इस्लामी कट्टरपंथ के खतरे को लेकर चेताया, कहा- हिंदुओं को बाँटकर कटवाने हो रही तैयारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आक्रान्ता बाबर के एक कमांडर ने अयोध्या और संभल में मंदिर तुड़वाए थे। CM योगी ने कहा कि अब बांग्लादेश में वही काम हो रहा है और इन सभी का DNA एक ही है। उन्होंने कहा कि अगर हिन्दू पहले एक रहते तो विदेशी आक्रान्ता सफल नहीं होते।

CM योगी ने कहा है कि विदेशी आक्रांताओं के ही जीन वाले लोग आज समाज को जाति में बाँट रहे हैं। CM योगी ने कहा कि बाँटने वालों ने दुनिया के कई देशों में अपनी सम्पत्तियाँ खरीदी हुई हैं और संकट के समय वह वहाँ भाग जाएँगे। उन्होंने लोगों से एकता की अपील की है।

CM योगी ने यह बयान अयोध्या के श्री राम कथा पार्क में ’43वां रामायण मेला’ का शुभारम्भ करते हुए दिया है। यहाँ वह बुधवार (4 दिसम्बर, 2024) को पहुँचे हुए थे। उन्होंने इस दौरान कई धार्मिक मुद्दों और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन और उनके आदर्शों की चर्चा की।

उन्होंने यहाँ कहा, “भगवान राम ने पूरे समाज और सबको जोड़ा था। ये जोड़ने के कार्य को हमने अगर महत्व दिया होता, सामाजिक विद्वेष को आगे बढ़ाने की नीति को अगर सफल नहीं होने देते तो यह देश कभी गुलाम नहीं होता। हमारे तीर्थ अपवित्र नहीं होते।” CM योगी के इस वक्तव्य को आप 33 मिनट से 37 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

CM योगी ने कहा, “चंद मुट्ठी भर आक्रांता आकर भारत को पददलित करने का दुस्साहस नहीं कर पाते। भारत के वीर योद्धा उन्हें रौंद डालते। लेकिन आपसी एकता में बाधा पैदा करने वाले लोग सफल रहे। उन्हीं के जींस वाले लोग आज जाति में तोड़ कर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।”

उन्होंने इसके बाद बांग्लादेश के वर्तमान हालात पर चिंता जताई। CM योगी कहा, “दुश्मन बगल के देश में किस प्रकार का कृत्य कर रहे हैं। अगर किसी को ग़लतफ़हमी तो याद रखना कि किस प्रकार बाबर के एक सिपाहसालार ने जो कृत्य अयोध्या में किया था, संभल में किया था और जो काम बांग्लादेश में हो रहा है, तीनों की प्रकृति और DNA एक जैसा है।”

CM योगी ने चेताया कि बांग्लादेश की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर कोई मानता है कि जो बांग्लादेश में हो रहा है, तो यहाँ भी बाँटने वाले तत्व उनके लिए बेंट बन कर पहले से खड़े हैं। वह सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं।”

अयोध्या में CM योगी ने इसके बाद बाँटने वालों के विषय में भी बताया। CM योगी बोले, “आपको बाँट कर के कटवाने की पूरी तैयारी है। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने विदेशों में जमीन ले रखी है। फिर यहाँ लोग कटते रहेंगे।” CM योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल है।