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25000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड में शरद पवार बिना समन पहुँच रहे ED ऑफिस, राजनीतिक स्टंट!

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार को उनके दफ्तर आने पर रोक लगा दी है। ईडी ने शरद पवार से दफ्तर न आने का अनुरोध किया है और साथ ही कहा है कि जब उन्हें पूछताछ के लिए समन जारी किया जाए तभी वो ईडी दफ्तर पहुँचें। दरअसल, पवार पर महाराष्ट्र राज्य सहकारी (एमएससी) बैंक घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

हालाँकि ईडी ने अब तक उन्हें पूछताछ के लिए नहीं बुलाया है, इसके बावजूद पवार शुक्रवार (सितंबर 27, 2019) दोपहर 2 बजे ईडी दफ्तर पहुँचने वाले हैं। इसको लेकर बलार्ड पियर स्थित ईडी दफ्तर के बाहर और मुंबई के सात पुलिस थानों में धारा 144 लगा दी गई है। इधर, जाँच के लिए राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यालय में एक पुलिस दल स्निफर डॉग के साथ पहुँचा है।

बता दें कि एनसीपी का कार्यालय भी बलार्ड पियर में ही है, जहाँ पर ईडी का कार्यालय है। इसको लेकर काफी संभावना है कि पवार के आने पर अधिक संख्या में एनसीपी के समर्थक जुटेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले, जब ईडी ने इस मामले में पवार का नाम लिया था, तो एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने मुंबई, बारामती और पुणे में विरोध प्रदर्शन किया था। शुक्रवार को इसी तरह के विरोध प्रदर्शन की आशंका और यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए, ईडी कार्यालय के बाहर धारा 144 के तहत लोगों के समूहों के आंदोलन को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए गए हैं।

चुनावी माहौल में अपने खिलाफ लगे आरोपों के बाद पवार ने गुरूवार (सितंबर 25, 2019) को ट्वीट करते हुए कहा था कि वह खुद ईडी दफ्तर जाएँगे। पवार ने कहा था कि वह महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के संबंध में अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जाँच एजेंसी के सामने पेश होंगे।

गौरतलब है कि मामला 25,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड से जुड़ा है। जाँच एजेंसी ने कर्ज देने और अन्य प्रक्रिया में कथित अनियमितता की जाँच के लिए पवार, और उनके भतीजे अजित पवार के साथ ही तकरीबन 70 अन्य के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था। ईडी का मामला मुंबई पुलिस की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें बैंक के निदेशकों, राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सहकारी बैंक के 70 पूर्व पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं।

पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए आई हूँ: रूसी महिलाओं ने गया में किया पिंडदान

भारत का सनातन धर्म और इसकी परम्पराएँ विश्व भर में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। विश्व के कई ऐसे देश हैं, जहाँ के लोग वर्षों से भारत आते रहे हैं और यहाँ की धार्मिक परम्पराओं पर रिसर्च करते रहे हैं। यह भारत की संस्कृति के प्रभाव का ही उदाहरण है कि हर साल गया में आयोजित पितृपक्ष मेले में दूसरे देशों के लोग भी आकर पितृ मुक्ति के लिए पिंडदान करते हैं।

इसी कड़ी में गुरुवार (26 सितंबर) को रूस से छ: महिलाओं ने देवघाट पर पिंडदान किया। रूस से आई इन महिलाओं ने कहा कि गया उनके लिए बहुत ख़ास जगह है, यह बहुत स्पेशल है। उन्होंने कहा कि कर्मकांड की महत्ता की वजह से इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है।

पिंडदान करती रूसी महिलाएँ (तस्वीर सौजन्य: इंडिया टुडे)

रूसी महिलाओं ने अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए सभी अनुष्ठान किए और सनातन धर्म के अनुसार फल्गु नदी में ‘पिंड दान’ किया। इस अनुष्ठान प्रक्रिया में पुजारी लोकनाथ गौड़ ने इन महिला तीर्थयात्रियों मदद की। उन्होंने कहा, “पिंड दान के लिए आने वाली महिलाएँ रूस के विभिन्न क्षेत्रों में रहती हैं। ये महिलाएँ ऐलेना कशिटसाइना, यूलिया वेर्मिन्को, एरेस्को मैगिटा, औक्सना कलीमेंको, इलोनोरा खातीबोबा और इरीना खुचमिस्तोबा हैं।”

फल्गू नदी में पिंडदान करती रूसी महिलाएँ (तस्वीर सौजन्य: प्रभात ख़बर)

गौड़ ने कहा कि महिलाओं का मानना ​​था कि अनुष्ठान करने से उनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलेगी। रूसी महिलाओं ने दान की सभी रस्में भारतीय वेशभूषा में निभाईं।

ऐलेना कशिटसाइना ने कहा, “भारत धर्म और आध्यात्मिकता का देश है। मुझे गया में आंतरिक शांति की अनुभूति होती है। मैं यहाँ अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए आई हूँ।”

अपने पूर्वजों के लिए मोक्ष की कामना करती रूसी महिलाएँ (तस्वीर साभार: प्रभात ख़बर)

इंडिया टुडे की ख़बर के अनुसार, पिछले साल, रूस, स्पेन, जर्मनी, चीन, कजाकिस्तान के 27 विदेशी पर्यटकों ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए ‘पिंड दान’ किया था। लोकनाथ गौड़ कहते हैं कि हर साल पितृ पक्ष के अवसर पर, विदेशी पर्यटकों का एक समूह अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की मंशा से यहाँ आता है। उन्होंने कहा कि यह जत्था बिहार के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने के बाद स्वदेश लौट जाएगा।

‘पिंड दान’ के लिए लाखों लोग गया आते हैं, इस साल 28 सितंबर तक यह संख्या क़रीब आठ लाख तक पहुँचने की उम्मीद है।

NASA ने जारी की 3 हाई रेजॉलूशन तस्वीरें, कहा- लैंडर विक्रम की हुई थी हार्ड लैंडिंग

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रयान-2 मिशन के लैंडर विक्रम पर एक नई जानकारी दी है। नासा ने 26 सितंबर को 3 तस्वीरें जारी करते हुए बताया है कि भारत के चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर ने चाँद पर हार्ड लैंडिंग की थी। नासा ने बताया कि इसकी और अधिक तस्वीरें अब अक्टूबर में ली जाएँगी।

हार्ड लैंडिंग हुई यह कंफर्म है, लोकेशन और लैंडर का अभी तक पता नहीं (फोटो साभार: NASA)

बता दें कि ये हाई रेजॉलूशन तस्वीरें नासा के लूनर रेकॉन्सेंस ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) कैमरा के जरिए खींची गई हैं। नासा की ओर से जारी बयान के मुताबिक, “चंद्रमा की सतह पर विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई, यह स्पष्ट है। मगर लैंडर के बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। तस्वीरें शाम के अंधेरे में ली गईं हैं। बाकी तस्वीरें अक्टूबर में बेहतर प्रकाश की स्थिति में ली जाएँगी।”

नासा ने कहा कि लैंडर विक्रम को 6 सितंबर को शाम के 4:24 बजे चाँद की सतह पर लैंड करना था। चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग का यह भारत का पहला प्रयास था। अमेरिकी स्पेस एजेंसी के अनुसार, लूनर रेकॉन्सेंस ऑर्बिटर, लैंडिग साइट के ऊपर से 17 सितंबर को क्रॉस किया। इस दौरान एलआरओसी ने कई सारी हाई रेजॉल्यूशन तस्वीरें ली हैं। मगर शाम का समय होने के कारण वहाँ पर अधिकतर क्षेत्र धुँधला था। विक्रम लैंडर भी इसी धुँधले क्षेत्र में छिपा हो सकता है।

विक्रम लैंडिंग साइट का व्यू, इमेज विड्थ 87 किलोमीटर (फोटो साभार: NASA)

नासा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एलआरओ एक बार फिर लैंडिंग साइट के पास पहुँचने का प्रयास करेगा। अक्टूबर में जब प्रकाश की स्थिति अनुकूल होगी तो एक और कोशिश की जाएगी।

लैंडिंग साइट की नैरो एंगल तस्वीर (फोटो साभार: NASA)

गौरतलब है कि ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का 7 सितंबर को चाँद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। विक्रम 2 सितंबर को आर्बिटर से अलग हो गया था। विक्रम ने ‘रफ ब्रेकिंग’ और ‘फाइन ब्रेकिंग’ चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था, लेकिन ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया था। नासा के ताजा बयान से पता चलता है कि चंद्रमा के जिस अनछुए सतह पर भारत के महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग होनी थी, तकनीकी गलती की वजह से वहाँ लैंडर विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई।

IPS ऑफिसर SMH मिर्ज़ा गिरफ्तार: नारदा स्टिंग मामले में तृणमूल सांसदों, मंत्रियों के साथ रिश्वत का आरोप

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने नारदा स्टिंग मामले में लिप्त रहने के आरोप में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के शीर्ष अधिकारी एसएमएच मिर्ज़ा को गुरुवार (26 सितंबर, 2019) को गिरफ़्तार कर लिया गया है। बता दें कि इस मामले में यह पहली गिरफ़्तारी है। गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अधिकारी मिर्ज़ा को बैंकशाल कोर्ट में CBI की विशेष अदालत में पेश किया गया था, जहाँ उन्हें पाँच दिनों तक यानी 30 सितंबर तक CBI हिरासत में भेज दिया गया। IPS मिर्ज़ा उस समय वर्धमान ज़िले के पुलिस अधीक्षक थे, जब नारद न्यूज़ पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल्स ने यह स्टिंग ऑपरेशन किया था। इसमें उन्हें पाँच लाख रुपए की कथित रिश्वत लेते देखा गया था।

ग़ौरतलब है कि नारदा स्टिंग मामला 2016 में सामने आया था। नारद न्यूज़ के मैथ्यू सैमुअल्स ने 2014 में 52 घंटे की वीडियो फुटेज वाला जो स्टिंग ऑपरेशन किया था, उसे उन्होंने 2016 में बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अपलोड किया था। इस वीडियो में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसदों, मंत्रियों और कोलकाता नगर निगम के मेयर को काम करने के एवज़ में पैसा लेते हुए दिखाया गया था।

स्टिंग ऑपरेशन में मिर्ज़ा ख़ुद यह कहते हुए दिखे कि वे तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई मंत्री, सासंद, विधायक व नेताओं के काफ़ी क़रीबी हैं। इस मामले में CBI मिर्ज़ा से उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ करना चाहती है। साथ ही अन्य आरोपितों के साथ मिर्ज़ा का क्या आर्थिक लेन-देन हुआ, इसका भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी।

इस मामले में हुई पहली गिरफ़्तारी पर बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा का कहना है कि जल्द ही अन्य गिरफ़्तारियाँ होंगी। वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि IPS मिर्ज़ा की गिरफ़्तारी बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी।

इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI को जाँच सौप दी गई थी। CBI ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के 12 शीर्ष नेताओं और एक IPS अधिकारी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। इन नेताओं में सांसद और पश्चिम बंगाल के मंत्री भी शामिल थे, जिनके ख़िलाफ़ रिश्वत और आपराधिक कदाचार से निपटने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। पूछताछ के लिए उन्हें निजाम पैलेस में आठ बार समन जारी किया गया था, इसके बाद उनकी गिरफ़्तारी हुई।

पाकिस्तान भी कोई देश है… पूर्व प्रधानमंत्री के साथ हिरासत में मारपीट, मुँह पर पानी वाला ग्लास फेंक कर मारा

भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के साथ अधिकारियों ने मारपीट की और उनके मुँह पर पानी का गिलास फेंक दिया। जानकारी के मुताबिक, जेल में बंद अब्बासी से अधिकारी पूछताछ कर रहे थे। इस दौरान एक अफसर नाराज हो गया और उनके मुँह पर पानी का गिलास फेंक कर मारा। बता दें कि भ्रष्टाचार के आरोप में इसी साल 19 जुलाई को अब्बासी को गिरफ्तार किया गया था और इसके बाद से वे नेशनल अकांउटबिलिटी ब्यूरो (NAB) की हिरासत में हैं।

जियो न्यूज़ के अनुसार, अब्बासी से नैब के मुख्यालय में पूछताछ की जा रही थी। पूछताछ के दौरान अब्बासी ने कुछ सवालों को जवाब देने से इनकार कर दिया। उनके इस बर्ताव से नैब का एक अधिकारी गुस्से में आ गया। उसने आपा खोते हुए, पूर्व प्रधानमंत्री से मारपीट की। मारपीट के बाद उसने गुस्से में पानी से भरा ग्लास अब्बासी पर फेंक दिया। हालाँकि, नैब की टीम में शामिल मोहम्मद जुबैर ने हालात को संभाल लिया। बताया जा रहा है कि अफसर ने मामले की रिपोर्ट रावलपिंडी नैब के महानिदेशक इरफान नईम मंगी को सौंपी है।

गौरतलब है कि 60 वर्षीय अब्बासी पर आरोप है कि जब वह पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कैबिनेट में पेट्रोलियम मंत्री थे, तब उन्होंने एलएनजी टर्मिनल के लिए नियमों के खिलाफ जाकर 15 साल का अनुबंध दिया था। इस घोटाले के कारण पाकिस्तान को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था। एनएबी ने यह मामला 2016 में बंद कर दिया था, लेकिन 2018 में इस मामले को फिर से खोला गया।

हालाँकि नैब प्रवक्ता ने इस बारे में पूछे जाने पर इसे पूरी तरह से गलत बताया और कहा कि ‘जियो न्यूज’ की यह सूचना पूरी तरह से आधारहीन और झूठी है। वहीं अदालत में पेश हुए अब्बासी की बात से यह साफ हुआ कि यह घटना वास्तव में घटी है।

वैसे, पाकिस्तान में राष्ट्राध्यक्षों से मारपीट का ये पहला मामला नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्रियों को हिरासत में बेइज्जत किए जाने के मामले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। इससे पहले जनरल जिया उल हक के शासन में पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और जनरल मुशर्रफ के शासन में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ जाँच एजेंसियों ने मारपीट की थी।

कौशाम्बी दलित नाबालिग गैंगरेप: पकड़ा गया तीसरा आरोपित मोहम्मद आकिब उर्फ बड़का, ₹25000 का था इनाम

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी गैंग रेप केस में आरोपित ₹25 हजार के इनामी मोहम्मद आकिब उर्फ बड़का को कौशाम्बी पुलिस ने सराय अकिल इलाके से हिरासत में ले लिया है। आकिब पर अपने दो दोस्तों आदिल, नाजिक के साथ मिल कर एक दलित नाबालिग लड़की का बलात्कार करने और उसका अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है। शनिवार को हुई इस घटना का मुख्य आरोपित मोहम्मद आदिल उर्फ़ छोटका उर्फ आतंकवादी को पुलिस पहले ही गिरफ़्तार कर चुकी है। एक अन्य आरोपित नाज़िक को पहले ही ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। इनकी धर-पकड़ के लिए पुलिस ने पाँच टीमें गठित की थीं। आज बड़का की गिरफ़्तारी के साथ पुलिस का यह अभियान सफलतापूवक सम्पन्न हो गया है।

बता दें कि घोसिया गाँव में घास काटने गई दलित नाबालिग लड़की के साथ नाज़िक, आकिब (बड़का) और आदिल (छोटका) ने बलात्कार किया था। तीनों आरोपित लड़की को पकड़ कर झाड़ियों में ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान लड़की बार-बार दया की भीख माँगती रही, लेकिन आरोपितों ने उसकी एक न सुनी और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। रिपोर्ट के अनुसार वीडियो बनाने का काम आकिब ने किया था। वायरल वीडियो में साफ सुना जा सकता है पीड़िता दलित नाबालिग लड़की गिड़गिड़ा रही है, ‘भैया आप मुझे जानते हो, अल्लाह के लिए छोड़ दो” फिर भी इन दरिंदों को रहम नहीं आई। वह रोती, चीखती, चिल्लाती रही और आदिल, नजिक जैसे दरिंदे उसकी चीख को फिल्माते रहे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दलित नाबालिग लड़की की चीख-पुकार सुनकर खेतों में काम कर रहे लोग घटनास्थल पर पहुँचे, नाजिक को पकड़ लिया, और उसकी जमकर पिटाई की। लेकिन बाकी दोनों मौक़े से भागने में क़ामयाब रहे थे

पुलिस पर गोलीबारी करने लगा था ‘आतंकवादी’

पुलिस को ख़बर मिली थी कि आरोपित आदिल रावतपुर गाँव में छिपा हुआ है। इसके बाद चार थानों की पुलिस वहाँ उसे गिरफ़्तार करने पहुँचीं। आरोपित आदिल जंगल में स्थित एक मजार में छिपा हुआ था। जैसे ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी की, वह तमंचे से गोलीबारी करने लगा। पुलिस सादी वर्दी में हथियारों से लैस होकर पहुँची थी। पहले तो ग्रामीणों को लगा कि गैंगवार जैसी कोई स्थिति उत्पन्न हो गई है लेकिन जैसे ही उन्हें असलियत पता चली, वे सभी पुलिस की तारीफ करने लगे।

इन्हें फाँसी तक चैन नहीं, खुद लड़ेगी केस

पीड़िता ने साफ़-साफ कहा है कि जब तक आरोपितों को फाँसी की सज़ा नहीं मिल जाती, तब तक उसे शांति नहीं मिल सकती है। पीड़िता ने मदद करने वाले नेताओं व संगठनों को धन्यवाद करते हुए लोगों से आगे आने की अपील की। पीड़िता ने कहा कि वह ख़ुद क़ानूनी लड़ाई लड़ेगी। आरोपित की गिरफ़्तारी करने वाली टीमों को ₹25 हज़ार का इनाम भी दिया जाएगा। वहीं पीड़िता का हालचाल जानने के लिए लगातार नेताओं की लाइन लगी रही। दलित सेना संगठन ने एसपी से मुलाक़ात कर आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

J&K में तेज होगा आतंकी सफाई अभियान: डोभाल ने दिया काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड को तैयार रहने का आदेश

जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद की ओर से संभावित खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को दिल्ली लौटने से पहले कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। बता दें कि अजीत डोभाल ने जम्मू एवं कश्मीर में बड़े आतंकी हमले की आशंका जताए जाने के बाद एक बार फिर इस केंद्र शासित राज्य का दौरा किया।

क्योंकि, हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिली सूचना व अन्य रिपोर्टो में बताया गया है कि नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से 450 से 500 आतंकवादी राज्य में घुसने के लिए घात लगाए बैठे हैं। पाकिस्तान कश्मीर में अशांति फैलाने की लगातार कोशिश में लगा है। डोभाल ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट रहने और काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड को मजबूत रखने का आदेश दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को कश्मीर में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि आतंकवाद निरोधक अभियान में और तेजी लाएँ। साथ ही जम्मू-कश्मीर के आम लोगों के जीवन में सुधार के लिए भी काम करें।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को कश्मीर पहुँचे डोभाल ने सुरक्षा अधिकारियों और नौकरशाहों के साथ कई बैठकें कीं। जिस दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि आतंकवादी समूहों से भयभीत हुए बगैर आम आदमी अपनी दिनचर्या का ठीक तरीके से पालन कर सके इसका खयाल रखा जाए।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि एनएसए ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान के दौरान सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नागरिकों के जानमाल को नुकसान नहीं पहुँचे। उन्होंने कहा कि यह पहल इन खबरों के बाद की गई है कि आतंकवादी नागरिकों, सेब उत्पादकों को धमका रहे हैं, दुकानों को बंद रखने के लिए कहकर, जबर्दस्ती कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं।

बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने की घोषणा करने के बाद एनएसए ने अपनी पहली यात्रा के दौरान कश्मीर में 11 दिनों तक डेरा डाला था। उस दौरान डोभाल ने सुनिश्चित किया था कि सरकार के निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर में हिंसा की कोई घटना नहीं हो।

केरल: SC के आदेश के बावजूद जैकोबाइट व ऑर्थोडॉक्स के बीच चर्च के अधिकार को लेकर संघर्ष, कई गिरफ्तार

केरल के एक चर्च पर नियंत्रण को लेकर ईसाई समुदायों की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। एर्नाकुलम ज़िले के पिरवोम स्थित सेंट मेरी चर्च में उस समय अफ़रा-तफ़री मच गई जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पुलिस ने चर्च में प्रवेश करने की कोशिश की।

पिरवोम में स्थित चर्च में गुरुवार को उस समय हालात बिगड़ गए जब ऑर्थोडॉक्स ग्रुप ने नियंत्रण लेने की कोशिश की और जैकबाइट्स ने नियंत्रण देने से इनकार कर दिया। आत्महत्या की धमकियों के बीच, जिला कलेक्टर एस सुहास मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों के साथ उन्होंने बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन शीर्ष अदालत के आदेशों का पालन कर रही है। आख़िरकार, पुलिस ने चर्च में प्रवेश किया और प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार करना शुरू कर दिया। दरअसल पुलिस इतनी मुस्तैदी इसलिए दिखा रही है क्योंकि कोर्ट ने अपने आदेश पर की गई कार्रवाई की गुरुवार दोपहर 1.45 बजे तक रिपोर्ट माँगी थी।

दरअसल, चर्च का संचालन अपने हाथ में लेने के लिए जैकोबाइट ईसाई और ऑर्थोडॉक्स ईसाई एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। फ़िलहाल चर्च पर जैकोबाइट ईसाइयों का नियंत्रण है।

बता दें कि 3 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने चर्च प्रशासन को ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों को देने का आदेश दिया था। इस आदेश के चलते 1,100 चर्च का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के पास चला गया।

2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने मलंकरा चर्च के 1934 के संविधान को बरक़रार रखा था जिसके तहत केरल में 1,100 पैरिश (पादरी का इलाक़ा) और चर्चों के नियंत्रण को ऑर्थोडॉक्स समूह के नियंत्रण में देना था, लेकिन अधिकांश चर्चों को नियंत्रित करने वाले जैकबाइट्स इस बात के लिए तैयार नहीं थे।

केरल में इस तनाव को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। राज्य में उपचुनाव होने हैं और नेतागण दोनों ही समुदायों की जनसंख्या को देखते हुए उन्हें अपनी तरह लुभाने में लगे हैं। जैकोबाइट पादरियों ने ऑर्थोडॉक्स ईसाई मानवाधिकार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। जैकोबाइट ईसाई ने विरोध में धरना दिया, जिसमें केरल सरकार और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए। वहीं, जैकोबाइट धड़े का आरोप है कि ऑर्थोडॉक्स उनके मृत रिश्तेदारों की अंतिम क्रिया में भी बाधा पहुँचा रहे हैं और यहाँ तक कि मरे हुए लोगों को भी शांति से नहीं रहने दे रहे।

इसी मामले में केरल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का निर्णय दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोड़ा था कि केरल के जजों को यह बताया जाना चाहिए कि वे भी भारत के ही अंग हैं। एक बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद चर्च के ऑर्थोडॉक्स गुट ने परिवार की बात न मानते हुए जैकोबाइट पादरी से अंतिम क्रिया-कर्म की प्रक्रिया संपन्न कराने से मना कर दिया था, जिसके बाद दोनों गुट भिड़ गए थे।

जेटली के ‘उत्तराधिकारी’ बन सकते हैं मनोज सिन्हा, मिल सकती है राज्य सभा सीट

मीडिया खबरों के मुताबिक गाज़ीपुर के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को दिवंगत नेता अरुण जेटली की जगह पर राज्य सभा में भेजा जा सकता है। पूर्व वित्त और कॉर्पोरेट मंत्री जेटली का लम्बी बीमारी के बाद 24 अगस्त को निधन हो गया था। वहीं मोदी सरकार 1.0 में मंत्री रहे मनोज सिन्हा 1.2 लाख मतों से 2019 में बसपा के अफ़ज़ल अंसारी से हार गए थे

2024 तक रहेंगे सांसद

केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जेटली और पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी के निधन से खाली हुई सीटों पर चुनाव की घोषणा की है। 16 अक्टूबर को यह चुनाव होंगे। अगर मनोज सिन्हा अरुण जेटली की सीट पर काबिज़ होने में सफल रहते हैं तो वे अप्रैल 2024 तक इस पद पर बने रहेंगे। जेटली उत्तर प्रदेश और जेठमलानी बिहार के सांसद थे। मीडिया खबरों के मुताबिक इस बाबत सिन्हा ने भाजपा के पूर्णकालिक अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात आज (26 सितंबर को) मुलाकात की है।

18 को परिणाम, यूपी में भाजपा प्रत्याशी की जीत तय

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास 325 विधायकों के साथ तीन-चौथाई से अधिक बहुमत है। इसलिए वहाँ के भाजपा प्रत्याशी की जीत तय है

निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार 27 सितंबर (कल) से चुनाव की घोषणा अधिसूचित मानी जाएगी, और उसी दिन से नामांकन प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि 4 अक्टूबर है। इसके बाद 5 तारीख को छँटनी होगी, और 9 अक्टूबर तक प्रत्याशी अपना नाम वापिस ले सकते हैं। 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान, और उसके बाद मतगणना कर 18 को परिणाम घोषित कर दिए जाएँगे।

कर्नाटक: SC में अयोग्य विधायकों पर फैसला होने तक चुनाव आयोग ने टाला उपचुनाव

कर्नाटक में 21 अक्टूबर को होने जा रहे 15 विधानसभा सीटों के उपचुनाव को निर्वाचन आयोग ने फ़िलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के इंतज़ार में किया गया है, ताकि अयोग्य घोषित हुए विधायकों की याचिका पर उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले से स्थिति स्पष्ट हो सके। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने यह बात सुप्रीम कोर्ट में आज (26 सितंबर) को कही।

संविधान के दुरुपयोग की याचिका

कॉन्ग्रेस के 13, जदएस के 3 और एक स्वतंत्र विधायक को कर्नाटक विधान सोउधा (विधान सभा) के तत्कालीन अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने जुलाई में सदन के लिए अयोग्य करार दिया था। इन विधायकों के हट जाने से एचडी कुमारास्वामी की कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार गिर गई थी, और बीएस येद्दियुरप्पा 26 जुलाई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद स्पीकर केआर रमेश कुमार ने भी सदन की अध्यक्षता से त्यागपत्र दे दिया था। कॉन्ग्रेस और जेडीएस दोनों ने ही भाजपा पर विधायकों को पैसे और मंत्रिपद का लालच देकर उनके इस्तीफ़े लेने का आरोप लगाया था

तत्पश्चात निष्कासित विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया था कि कुमार का निर्णय पूरी तरह अवैध, स्वेच्छाचारी और संविधान की 10वीं अनुसूची में मिली शक्तियों का दुरुपयोग था। इसके अलावा उनके खुद से दिए गए इस्तीफ़ों को ‘बेईमान’ और ‘स्वेच्छा से नहीं’ करार देने के स्पीकर के फैसले पर भी पूर्व-विधायकों ने सवाल उठाया।

‘आप ही दे दीजिए दिशानिर्देश’

सुप्रीम कोर्ट से ही दिशानिर्देश की माँग करते हुए कर्नाटक विधान सोउधा अध्यक्ष के कार्यालय ने कहा कि इस्तीफ़ा देना विधायकों का लोकतान्त्रिक अधिकार है, और न्यायपालिका को स्पीकरों के लिए एक दिशानिर्देश तय कर देने चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ को बताया कि विधायकों को अयोग्य पार्टी से इस्तीफ़ा देने पर करार दिया जा सकता है, लेकिन सदन से इस्तीफ़ा देने पर नहीं। निर्वाचन आयोग ने तीन दिन पहले (23 सितंबर को) अदालत को बताया था कि इन 17 विधायकों को उपचुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता