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14 साल में पति सहित घर के 6 लोगों की कर दी हत्या, सबको साइनाइड से मारा

केरल से एक बेहद ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। 14 साल के भीतर एक महिला ने अपने परिवार के 6 सदस्यों की साइनाइड देकर हत्या कर दी। पुलिस ने इस मामले में शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को 47 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आरोपित महिला को उसके पति, सास-ससुर और परिवार के तीन अन्य सदस्यों की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हत्याओं में शामिल उसके दो कथित साथियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

कोझीकोड जिले के एसपी केजी साइमन ने बताया कि कूडाथई गाँव की जॉली जोसेफ ने परिवार के सभी 6 सदस्यों की हत्या करने का गुनाह कबूल कर लिया है। एसपी केजी साइमन ने कहा कि जॉली की गिरफ्तारी उसके 40 वर्षीय पति रॉय थॉमस की हत्या के मामले में हुई है, जिसमें पुलिस को 2011 में शव परीक्षण के दौरान हत्या के कुछ वैज्ञानिक साक्ष्य मिले थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में थॉमस के शरीर में साइनाइड की मौजूदगी का पता चला था। केस की जाँच का निरीक्षण कर रहे एसपी केजी साइमन ने बताया, “हमने पाया कि परिवार के 5 अन्य लोगों की मौत भी एक ही परिस्थिति में हुई थी। इन सभी स्थितियों को देखते हुए हमारा ध्यान जॉली की तरफ गया। उसने हत्या करने की बात कबूल ली है।” 

जानकारी के मुताबिक, ये रहस्यमय मौतें 2002 से लेकर 2016 के बीच हुईं थी। मगर पुलिस ने मृतक बुजुर्ग दंपति के दूसरे बेटे रोजी की शिकायत के बाद केवल दो महीने पहले जाँच शुरू की है। रोजी संयुक्त राज्य अमेरिका में रहता है। उसे 2011 में हुई अपनी भाई की मौत को लेकर संदेह था।

बता दें कि कूडाथाई गाँव के पोन्नम्तमम परिवार में पहली मौत 57 वर्ष की एक सेवानिवृत्त शिक्षिका अन्नामा थॉमस की हुई थी। वह सूप पीने के बाद गिर गईं और अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके 6 साल बाद 2008 में अन्नामा के पति टॉम थॉमस भी खाने के बाद गिर गए और उनकी मौत हो गई। वो 66 साल के थे। उस दौरान दोनों मौतों को कार्डियक अरेस्ट माना गया था।

उनकी मृत्यु के बाद बेटे थॉमस रॉय ने भी खाने के तुरंत बाद उल्टी शुरू कर दी थी। उन्हें अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। उस वक्त रॉय के मामा 68 वर्षीय एम मैथ्यू ने पोस्टमॉर्टम पर काफी जोर दिया। जिसके बाद जाँच में रॉय के शरीर में साइनाइड मिलने की पुष्टि हुई। लेकिन, इसके बाद अगली मौत मैथ्यू की ही हो गई।

2014 में जॉली (आरोपित महिला) मैथ्यू के घर के पास ही रहती थी। उसने अचानक शोर मचाया कि मैथ्यू बेहोश होकर अपने घर में गिर गए हैं। इस दौरान मैथ्यू की पत्नी घर से बाहर थी। स्थानीय लोग मैथ्यू को लेकर अस्पताल गए, मगर तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

बारामूला से पकड़ा गया जैश आतंकी मोहसिन, भारी मात्रा में मिले गोला-बारूद और हथियार

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को हटाने के बाद से ही आतंकी संगठन भारत में बड़े हमले की साज़िश रच रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठनों ने कश्मीर में अपने मॉड्यूल को फिर से सक्रिय कर दिया है। इन आतंकवादियों को मुँहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना भी काफ़ी मुस्तैदी है। रविवार (6 अक्टूबर) को भारतीय सुरक्षा बल ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला सेक्टर से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मोहसिन मुस्ताक को गिरफ़्तार किय। सुरक्षा बल को आतंकी के पास से काफ़ी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार भी मिले।

जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को एक घर में आतंकी के छिपे होने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया और जैश आतंकी को गिरफ़्तार कर लिया गया। आतंकी के पास से एक पिस्टल, 17 गोलियाँ, 1 मैग्ज़ीन बरामद हुई है। फ़िलहाल, पकड़े गए आतंकी से पूछताछ जारी है। इससे पहले भी जैश का एक और आतंकी पकड़ा गया था।

ख़बर के अनुसार, अमेरिकी एजेंसी से मिले इनपुट के मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं, जिसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 निष्क्रिय किए जाने के बाद आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISI) प्रायोजित आतंकी हमले हो सकते हैं। गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों के मुताबिक़, दिल्ली और मुंबई में सभी प्रमुख एयरपोर्ट, बंदरगाह, प्रमुख प्रतिष्ठानों और सरकारी दफ़्तरों पर सुरक्षा सख़्त कर दी गई है।

खबरों के मुताबिक रविवार सुबह चार से पांच आतंकियों ने बारामूला सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश की। हालॉंकि सुरक्षाबलों ने उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया। सुरक्षा बल लगातार नियंत्रण रेखा पर नजरें जमाए हुए हैं और आतंकियों की हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।

पाक में इमरान से ‘आज़ादी’ का मार्च: Pok में भी ढीले पड़े तेवर, कहा- ना पार करें LoC

कश्मीर राग अलापते-अलापते पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की खुद की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख फजलुर रहमान ने उनकी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए आजादी मार्च का ऐलान किया है। इधर, पीओके में भी इमरान के तेवर ढीले पड़ने लगे हैं। उन्होंने शनिवार को यहॉं जुटे अलगाववादियों को नियंत्रण रेखा पार नहीं करने की चेतावनी दी।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाने के बाद से ही पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। दुनिया भर में वह कश्मीर पर प्रोपगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। हालॉंकि उसे इस दिशा में कोई खास समर्थन अब तक नहीं मिल पाया है। डॉन की ख़बर के अनुसार, पेशावर में शनिवार (5 अक्टूबर) को प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर फ़ज़लुर रहमान ने अपने ‘आज़ादी’ मार्च को इमरान सरकार के ख़िलाफ़ जंग करार दिया।

बेहद तल्ख़ अंदाज़ अपनाते हुए उन्होंने कहा कि यह जंग तब तक जारी रहेगी जब तक इमरान ख़ान की सरकार चली नहीं जाती। उन्होंने 27 अक्टूबर को सरकार के ख़िलाफ़ एक मार्च निकालने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा,

“हमारी रणनीति एकसमान नहीं रहेगी। हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इसमें बदलाव करते रहेंगे। पूरे देश से लोगों का जनसैलाब इस मार्च में भाग लेने आ रहा है और फ़र्ज़ी शासक इसमें एक तिनके की तरह डूब जाएँगे।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें इसके लिए अन्य विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिल रहा है, उन्होंने कहा, “मैं उन्हें मार्च में देखने की उम्मीद करता हूँ। सभी पार्टियाँ इस बात को लेकर सहमत हैं कि बीते वर्ष हुआ चुनाव फ़र्ज़ी था और दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए, उन्हें निश्चित ही हमारे मार्च में शामिल होना चाहिए।”

कट्टरपंथी नेता फजलुर रहमान की चुनौती से पहले पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर कारोबारियों संग मीटिंग करते दिखे थे। कुर्सी पर बढ़ते खतरे के बीच कश्मीर पर भी इमरान के तेवर ढीले पड़ते जा रहे हैं।

शनिवार को ट्वीट में उन्होंने पीओके के लोगों से कहा, “ AJK (पाक अधिकृत कश्मीर) में कश्मीरियों के गुस्से को मैं समझता हूँ। उन्हें सीमा पार के अपने साथियों की चिंता है, लेकिन किसी भी व्यक्ति का मानवीय सहायता के लिए एलओसी पार करना भारत के नैरेटिव को मजबूत करेगा।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा कि कोई भी एलओसी पार करेगा तो उसे दुनिया के सामने पाकिस्तान प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद करार दिया जाएगा। उन्होंने अपने लोगों को भारत द्वारा किए गए स्ट्राइक की याद दिलाते हुए कहा कि भारत स्ट्राइक करने से पीछे नहीं हटेगा। जरूरत पड़ने पर वो एलओसी के पार भी हमला कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अलगाववादियों से वापस जाने का भी अनुरोध किया है।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद 370 के निरस्त किए जाने के लगभग 2 महीने बाद भी पाकिस्तान लगातार कश्मीर में घुसपैठ कराने की कोशिश में है। जानकार के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एलओसी के पास सैकड़ों पाकिस्तानी इकट्ठा हो गए हैं, जो भारत को ‘आजादी मार्च’ के लिए घुसपैठ कराने के लिए तैयार हैं। इस रैली का आयोजन अलगाववादी समूह जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के नेता यासीन मलिक के समर्थकों ने किया है। इस रैली का उद्देश्य पीओके से शुरू होकर एलओसी को पार करना है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सैकड़ों प्रदर्शनकारी पीओके के मुजफ्फराबाद में इकट्ठा हुए हैं और वो एलओसी पार करके श्रीनगर पहुँचने की फिराक में हैं। जेकेएलएफ के प्रवक्ता रफीक डार ने पाकिस्तानी न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा कि एलओसी पार करने के लिए पाकिस्तानियों के पास सभी ‘कानूनी अधिकार’ हैं क्योंकि वे “कश्मीरियों के विभाजन को मान्यता नहीं देते हैं”। इतना ही नहीं, उन्होंने तो पाकिस्तानी सैनिकों से उन्हें घुसपैठ करने की अनुमति देने की भी अपील की है।

खबरों के अनुसार, पीओके में 50 महिलाओं समेत 500 से अधिक लोग इकट्ठा हुए हैं और एलओसी पार करने के लिए ‘शांतिपूर्ण मार्च’ करने वालों की कुल संख्या 3,000 के करीब है।

अभी लाखों बिहारी फिर से अपने गाँव-घर जाने को परेशान होंगे

नीतीश कुमार जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने एक लक्ष्य यह तय किया था कि सड़क मार्ग से राज्य के किसी भी कोने से पटना पहुँचने में 6 घंटे से अधिक न लगे! बाकी का तो पता नहीं, हाँ इस बीच उन्होंने ऐसी पुरजोर व्यवस्था जरूर कर दी कि पटना से दरभंगा जैसी 3 घंटे में खत्म होने वाली दूरियाँ 6 घंटे से कम में खत्म न हो।

लालू प्रसाद के जंगलराज पर अब सिर पीटने का फायदा नहीं। लब्बोलुआब यह कि जब जगन्नाथ मिश्र से लालू और फिर उनसे नीतीश बाबू ने बेटन संभाला, तो लोगों की उम्मीदें बेपनाह उछलीं। सड़कों को लेकर केंद्र की वाजपेयी सरकार का काम (बाद में मोदी सरकार ने बढ़ाया) ही है कि दरभंगा से मुजफ्फरपुर अब एक घंटे में आदमी पहुँचता है। वरना वे दिन भी देखे हैं, जब हम 20 किमी प्रति घंटे की मारक रफ्तार से तीन घंटे में मुजफ्फरपुर पहुँचते थे।

1997 में मैं दरभंगा छोड़कर दिल्ली के लिए निकला। मुझे तब से गाँधी-सेतु की मरम्मत और उसके पुनर्निर्माण का हल्ला सुनने को मिला। कुल पाँच किलोमीटर का सेतु पिछले तीन दशकों में नहीं बन सका और वह ऐसा कोढ़ है कि पटना पहुँचने का औसत समय तीन घंटे बढ़ा दे। आप वहाँ अगर जाम में नहीं फँसे, तो आपका सौभाग्य है। अभी जंगलराज-2 में युवा उप-मुख्यमंत्री ने पीपा पुल का उद्घाटन किया था, अब वो गंगा की गोद में है।

2005 से हाजीपुर का ओवरब्रिज बन रहा है, अब तक खत्म नहीं हुआ। पूरे देश के इंजीनियर्स से अलहदा बिहारियों का हाल है। सोनपुर वाले पुल पर चढ़ कर देखिएगा। उसकी चौड़ाई न जाने क्या सोच कर भाई लोगों ने उतनी कम रखी है। पटना के ओवरब्रिज देखिए। आपका मन करेगा कि उस इंजीनियर को जाकर तीन किलो ईंट दे आएँ, जो इस विचित्र प्रकार की रचना करता है।

लेख बहुत लंबा हो जाएगा और ‘गर्वीले बिहारियों’ के जज्बात भी घायल हो जाएँगे, लेकिन सच तो कहना ही होगा। यूँ तो स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा तक नीतीश कुमार और उनके छोटे भाई सुशील मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पतन के नए आयाम छुए हैं, लेकिन यह लेख यातायात पर निर्भर है, तो कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:

  • बिहारी जिस उत्तर प्रदेश की ओर बड़ी उम्मीद से देखकर अपने पतन को जायज ठहराते हैं, वहाँ भी सार्वजनिक परिवहन नाम की एक व्यवस्था है और अच्छी है। बाकी गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि राज्यों की सार्वजनिक व्यवस्था की तो बात न ही करें, तो बेहतर…।
  • 12 करोड़ (जिनमें तीन करोड़ पलायित) बिहारियों को चंद निजी बस-ऑपरेटर्स और टेंपो वाले के भरोसे छोड़ दिया गया है। ये सभी माफिया हैं। घटिया बसें, अनियमित टाइमिंग, गंदगी, अश्लील भोजपुरी गाने और भगवान भरोसे सफर ही बिहारियों के भाग्य में है। अब अगर आपके पास अपनी गाड़ी है, तो शायद आपका सफर सुहाना हो क्योंकि सड़के थोड़ी-बहुत सुधरी हैं, लेकिन कब 15 लौंडे एनएच तक को रोक देंगे, कह नहीं सकते।
  • निजी उद्यमी जब वॉल्वो लेकर आए, तो नीतीश सरकार ने लाइसेंस देने में इतनी देर कर दी कि उसका 600 करोड़ रुपया डूबा और वह कान-नाक पकड़कर भाग गया।
  • क्या बिहार में कोई जिम्मेदार व्यक्ति, संस्था या बोर्ड है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था पर सवाल किए जा सकें?क्या सार्वजनिक परिवहन के बारे में सोचने वाला भी कोई है?
  • बस-अड्डों की तो बात ही मत कीजिए। राज्य की राजधानी पटना का मीठापुर बस अड्डा घूम आइए, सारी गलतफहमी दूर हो जाएगी। महिला यात्री क्या कुछ झेलती हैं, ये उनसे ही पूछिएगा।

सारांश यह है कि मेरे गर्वीले बिहारियों! मिजोरम या असम जैसे पहाड़ी आतंकवाद ग्रस्त राज्यों से अपनी तुलना कर बिहार को महान ठहराकर आप जैसे लोगों ने ही नीतीश तक को शिथिल बना दिया है। किसी नेता को यह उम्मीद ही नहीं है कि कोई उनसे सवाल भी पूछ सकता है ,क्योंकि हम सभी ने शूकरवृत्ति में ही मोक्ष मान लिया है। बिहार मेरा राज्य है और मैं इसके लिए आज की बात करुँगा। मैं मैथिलों की तरह याज्ञवल्क्य और जनक पर अहो-अहो कर गंदगी, कीचड़ और लीचड़ लोगों से भरे मिथिला को डिफेंड नहीं करुँगा। सार्वजनिक परिवहन के मामले में बिहार शून्य के भी बहुत नीचे है, क्योंकि यहाँ वह किसी के जेहन में ही नहीं है।

-व्यालोक पाठक

1998 में समुदाय को भड़काया, 21 साल बाद सिमी सरगना सफदर नागौरी और मुनीर को 3 साल की सजा

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिला न्यायलय ने प्रतिबंधित संगठन सिमी के सरगना आतंकी सफदर नागौरी और उसके साथी मोहम्मद मुनीर को धार्मिक भावना भड़काने के आरोप में शनिवार को 3-3 साल की सजा सुनाई। दोनों पर अदालत ने एक-एक हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। उज्जैन के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अफजल खान ने शनिवार को धारा 153 में इन दोनों आतंकियों को दोषी करार दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों आतंकी भोपाल के रहने वाले हैं। दोनों ने करीब 21 साल पहले अपने एक और साथी के साथ उज्जैन के तोपखाना क्षेत्र में सभा को संबोधित करते हुए दूसरे मजहब वालों के ख़िलाफ़ युवाओं की धार्मिक भावना भड़काने वाले भाषण दिए थे। मामले में तीसरे आरोपित सैयद सलाउद्दीन की मौत हो चुकी है।

नागौरी फ़िलहाल अहमदाबाद की जेल में बंद है। वहीं, मुनीर फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उपसंचालक अभियोजन डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि 5 नवंबर 1998 को तोपखाना में धार्मिक भावना भड़काने वाले भाषण देने पर महाकाल थाना पुलिस ने सफदर नागौरी, मुनीर और सैयद सलाउद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज किया था। भाषण की ऑडियो जाँच के बाद तीनों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद पुलिस ने अपनी जाँच में नागौरी के आतंकवादी संगठनों से संबंधों का भी खुलासा किया था। पुलिस ने नागौरी को पीथमपुर से आतंकी साथियों के साथ एक कमरे में आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाकर गिरफ्तार किया था।

गाँधी परिवार में खटपट! कॉन्ग्रेस को मँझधार में छोड़ बैंकॉक गए राहुल गाँधी

यूॅं तो गॉंधी परिवार को वह फेविकोल माना जाता है जिसके सहारे पूरी पार्टी चिपकी रहती है। यही वजह है कि आम चुनावों के बाद जब राहुल गॉंधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया तो कॉन्ग्रेसियों ने परिवार के बाहर से अपना नेता चुनने की बजाए फिर से सोनिया गॉंधी के ही हाथों में कमान सौंप दी, जबकि इस्तीफा देते वक्त राहुल ने साफ किया था कि पार्टी का अगला अध्यक्ष परिवार से नहीं होना चाहिए।

लेकिन, अब लगता है कि गॉंधी परिवार के भीतर भी सब कुछ सही नहीं चल रहा है। राहुल के इस्तीफे के बाद उनकी बहन प्रियंका ने भाई की भावनाओं की अनदेखी कर अध्यक्ष बनने के लिए पर्दे के पीछे से किस तरह से लॉबिंग की थी, इसकी खबरें पहले भी सामने आ चुकी है। हालॉंकि आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद बदले माहौल के कारण उन्होंने आखिरी क्षणों में अपने पॉंव पीछे कर लिए थे।

अब अचानक से राहुल गॉंधी के बैंकॉक जाने से परिवार के भीतर खटपट के कयासों को फिर से बल मिल गया है। राहुल ऐसे वक्त में बैंकॉक गए हैं, जब महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने में करीब दो हफ्ते का ही समय बचा है। दोनों जगहों पर चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट में उनका नाम था।

राहुल के बैंकॉक जाने की खबर शनिवार देर शाम को आई। देखते ही देखते बैंकॉक ट्विटर पर टॉप ट्रेंड करने लगा। राहुल के बैंकॉक जाने पर तंज कसते हुए बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “क्या आप भी हैरान हैं कि बैंकॉक क्यों ट्रेड कर रहा है।” सोशल मीडिया में कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि चुनाव में भाजपा अपने स्टार प्रचारक की कमी महसूस करेगी।

इस खबर के सामने आने से पहले तक कॉंन्ग्रेस की अंदरुनी लड़ाई सुर्खियों में थी। हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे अशोक तंवर ने यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि राहुल के करीबी लोगों की राजनीतिक हत्या हो रही है। उनसे पहले मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी कहा था कि पार्टी में उन नेताओं को किनारे लगाया जा रहा है जिन्हें राहुल ने आगे बढ़ाया था।

सोनिया ने अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर जब पार्टी की कमान संभाली थी तो उम्मीद की जा रही थी कि नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला थमेगा और भीतरी कलह रुकेगी। लेकिन, हो ठीक इसके उलट रहा है। ​उनके नेतृत्व संभालने के बाद त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रद्योत देब बर्मन और झारखंड के अध्यक्ष अजय कुमार ने पार्टी को अलविदा कह दिया।

इसकी बड़ी वजह वे ओल्ड गार्ड बताए जाते हैं जिनसे अपने पूरे कार्यकाल राहुल भी जूझते नजर आए थे। दीगर है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चेतावनियों के बावजूद राहुल ने तंवर को उनके पद से नहीं हटाया था। लेकिन, सोनिया के आते ही तंवर की छुट्टी हो गई और हुड्डा को आगे किया गया। इससे पहले ओल्ड गार्ड के कारण ही बीते साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में राहुल अपने खास माने जाने वाले युवा नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट को प्रदेश की कमान नहीं सौंप पाए थे।

कॉन्ग्रेस में ओल्ड गार्ड और न्यू गार्ड की लड़ाई 2007 में राहुल के पार्टी महासचिव बनने के बाद ही शुरू हो गई थी। 2014 के आम चुनावों से पहले राहुल ने युवाओं को पूरे जोर-शोर से आगे भी बढ़ाया था। इनमें मीनाक्षी नटराजन, अशोक तंवर, शनीमोल उस्मान, कनिष्क सिंह, अजय माकन, संजय निरुपम, दिव्या स्पंदना, सुष्मिता देव, शर्मिष्ठा मुखर्जी, मिलिंद देवड़ा, सचिन पायलट, जितेन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कई नाम शामिल थे।

शुरुआत में लगा कि ओल्ड गार्ड से राहुल पार पाने में कामयाब भी हो गए। लेकिन, पंजाब में अमरिंदर सिंह के सामने उनके सरेंडर से ओल्ड गार्ड फिर से पार्टी में प्रभावी होने लगे। राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसका नतीजा भी दिखा। 2019 के आम चुनावों में करारी शिकस्त के बाद ओल्ड गार्ड दोबारा मुखर हो गए। और अब सोनिया की वापसी के साथ ऐसा लगता है कि ओल्ड गार्ड राहुल के करीबियों से पुराना हिसाब चुकता करने में लग गए हैं।

इससे कॉन्ग्रेस की मुश्किलों में इजाफा होना तय है। जैसा कि तंवर ने इस्तीफे के बाद कहा, “वास्तव में कॉन्ग्रेस के भीतर ही कुछ लोग हैं जो भारत को कॉन्ग्रेस मुक्त करना चाहते हैं।”

8 मामलों में नहीं मिली बेल, एसआईटी ने 2 घंटे की पूछताछ, आजम बोले- अब बहुत हुआ

उत्तर प्रदेश के रामपुर से सपा सांसद एवं कई आपराधिक मामलों के आरोपित आजम खान कल यानी शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए। 2 घंटे से ज्यादा उनसे पूछताछ की गई।

पूछताछ के बाद आजम खान ने बताया, “इन मामलों के संबंध में मुझसे 2 बार पहले भी पूछताछ हो चुकी है। हाल ही में मुझे 4 बार जाँच के लिए बुलाया गया। इसका मतलब है कि अब तक कुल 6 बार मेरी जाँच की जा चुकी है । अब बस बहुत हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैंने अब तक कम से कम 3 बार उनके सवालों के जवाब लिखित में दिए हैं और साथ ही मैंने उपयुक्त दस्तावेज भी दिखाए हैं।”

बता दें कि शनिवार को रामपुर की कोर्ट से भी आजम खान को बड़ा झटका मिला। कोर्ट ने आजम खां की आठ मामलों में अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। दलीलें सुनने के बाद आजम खान की याचिका को खारिज कर दिया गया। इसमें सभी मामले शहर कोतवाली से संबंधित हैं।

इससे पहले आजम खान 2 अक्टूबर को अपने परिवार के साथ जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले के संबंध में बयान दर्ज करवाने के लिए एसआईटी के सामने पेश हुए थे। इस दौरान जाँच टीम ने सपा सांसद से 150 सवाल पूछे थे। जिसके बाद उन्होंने बयान दिया था कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

वे निगम भर्ती घोटाले मामले में एसआईटी जाँच के बाद भी मीडिया से पूछते हुए नजर आए थे कि क्या ऐसा हो सकता है कि चार बार मंत्री और 9 बार विधायक रह चुका इंसान बकरी चुराता फिरे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके ऊपर दर्जनों मुकदमे पिछला लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही लादे जा रहे हैं, जबकि योगी सरकार तो ढाई साल से है।

गौरतलब है कि इसी गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को रामपुर की जिला अदालत ने आजम खान, उनकी पत्नी तन्जीन फातिमा और बेटे अब्दुल्लाह आजम पर फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में जमानती वारंट जारी किया है। जिसकी सुनवाई अब 29 अक्टूबर को होगी।

ISI के लिए जासूसी करते पकड़े गए BJP पदाधिकारी, उन पर देशद्रोह का मुकदमा चले: दिग्विजय सिंह

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी और बजरंग दल पर निशाना साधते हुए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए जासूसी करने का बड़ा आरोप लगाया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि बीजेपी और बजरंग दल के लोग पैसा लेकर आईएसआई के लिए जासूसी करते रहे हैं।

एक कार्यक्रम में बोलते हुए दिग्विजय ने कहा, “ऐसे कुछ लोग जो कि बजरंग दल और बीजेपी के पदाधिकारी थे और आज भी हैं। आईएसआई के लिए जासूसी करते हुए पकड़े गए थे। भाजपा के राज में उनकी जमानत हो गई। ये जमानत कैंसिल होना चाहिए। उन पर मुकदमा चलना चाहिए। देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।”

दिग्विजय ने आगे कहा, “एक तरफ बीजेपी पाकिस्तान के खिलाफ जंग की बात कहते हुए रोज हमें राष्ट्रवाद का संदेश देती है। ये आखिर कैसा राष्ट्रवाद है कि उन्हीं के लोग ISI से पैसा लेकर भारत के लिए जासूसी करें। इसका स्पष्टीकरण उन्हें देना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह ने हाल ही में बीजेपी-RSS पर कई हमले बोले हैं। बीते दिनों दिग्विजय सिंह ने एक बयान में कट्टर हिंदुत्व को खतरनाक बताया था। उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामोफोबिया और कट्टरता का जिक्र किया था। हिंदुओं की भी कट्टरता मुस्लिमों की कट्टरता की तरह ही खतरनाक है।” उन्होंने कहा था कि अगर बहुसंख्यक जनसंख्या का सांप्रदायीकरण होता है तो देश को इससे बचाना मुश्किल होगा।

इसके साथ ही उन्होंने भगवा वस्त्र पर निशाना साधते हुए यहाँ तक कह डाला था कि भगवा वस्त्र पहनकर लोग मंदिरों के अंदर बलात्कार कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था, “आज भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं, भगवा वस्त्र पहनकर बलात्कार हो रहे हैं, मंदिरों में बलात्कार हो रहे हैं। क्या यही हमारा धर्म है? हमारे सनातन धर्म को जिन लोगों ने बदनाम किया है, उन्हें ईश्वर माफ़ नहीं करेगा।”

दिल्ली में 53 जगहों पर रेड, 69 से पूछताछ: जैश ने लश्कर और हरकत से मिलाए हाथ, निशाने पर 4 बड़े बाजार

बीते दिनों दिल्ली में जैश के 4 आतंकियों के घुसने की सूचना मिलने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी अलर्ट पर है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। खुफिया एजेंसियों ने खुलासा करते हुए बताया है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने दिल्ली दहलाने के लिए लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के साथ गठजोड़ कर लिया है।

खबर के अनुसार लश्कर और हरकत के स्लीपर सेल के साथ मिल जैश काम कर रहा है। इनकी अगुआई जैश कमांडर अबु उस्मान कर रहा है। उसने ही बीते सप्ताह इस संबंध में जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा इलाके के मीर मोहल्ले में सेब के बाग में एक बैठक की थी। इस दौरान उसने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को तबाही मचाने का आदेश दिया था। जिसकी सारी जानकारी खुफिया इकाइयों ने दिल्ली पुलिस और बाकी सुरक्षा एजेंसियों को मुहैया कराई थी। बताया गया था कि बैठक में आतंकी अबू उस्मान ने आतंकी हमलावरों से कहा कि कश्मीर के लोगों को जल्द अच्छी खबर सुनने को मिलेगी और ये अच्छी खबर जम्मू एवं दिल्ली में बड़े धमाकों के साथ आएगी।

उल्लेखनीय है कि इस सूचना के मिलने के बाद से ही दिल्ली में छापेमारी चल रही है। जैश के इस मॉड्यूल से जुड़ी हर तरह की सूचना जुटाई जा रही है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की 18 टीम के 105 पुलिसकर्मियों इस मिशन में लगे हैं। दिल्ली में अब तक 53 जगहों पर छापेमारी की गई है। 69 संदिग्धों से पूछताछ की गई है। इनमें 7 लोगों के फोन और उनके जु़ड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जाँच हुई है। पुलिस को संदिग्धों की गतिविधि पर शक है। इसलिए पिछले 3 दिनों में 5 बार इनसे पूछताछ हुई है। पुलिस ने करीब 12 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स भी निकाली है, जबकि कुछ मोबाइल नंबरों को निगरानी पर लगाया गया है।

ख़ुफ़िया इनपुट्स के मुताबिक जैश के कमांडर अबू उस्मान के नेटवर्क से जुड़ा मॉड्यूल दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाके में घुसकर अपने मनसूबों को अंजाम देने की फिराक में है। इनका मकसद त्योहारों में भीड़भाड़ वाले इलाके में तबाही मचाने का है। इनके निशाने पर दिल्ली में चार प्रमुख बाजार हैं। इनमें दक्षिणी दिल्ली का एक, मध्य दिल्ली का 2 और यमुनापार का एक बाजार शामिल है।

बेटी फरहीन से हुई अनबन तो दामाद इंतजार को घर बुलाकर जिंदा जलाया

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बेटी के सामने ही परिवारवालों ने दामाद को जलाकर मार डाला। घटना मेरठ के थाना लिसाड़ी गेट की है। फरहीन नाम की युवती के शौहर इंतजार को ससुरालवालों ने कथित तौर पर मिट्टी का तेल छिड़क आग लगा दी। इंतजार की चीख-पुकार सुनकर इलाके के लोग मौके पर पहुँचे और आग बुझा उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस वारदात को अंजाम देने के बाद से इंतजार के ससुराल वाले घर से फरार हैं। उन्होंने बताया कि इंतजार इंडियन गैस एजेंसी में गाड़ी चलाने का काम करता था। नगर पुलिस अधीक्षक एएन सिंह ने शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को इस घटना के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मेरठ के थाना इचौली क्षेत्र निवासी युवक इंतजार का निकाह तकरीबन 3 साल पहले लिसाड़ी गेट निवासी फरहीन नाम की युवती से हुआ था। इनके बीच आपस में कुछ ठीक नही चल रहा था। 3 अक्टूबर को फरहीन के परिजन इंतजार के घर पहुँचे और उसे अपने साथ ले आए। फरहीन के पीछे-पीछे इंतजार भी ससुराल पहुँच गया और फिर 4 अक्टूबर को संदिग्ध परिस्थितियों में जलने के कारण उसकी मौत हो गई।

इंतजार के परिजनों ने फरहीन के परिजनों पर आरोप लगाया है कि बीबी को घर वापस ले जाने को लेकर इंतजार की कहासुनी हो गई। इसके बाद फरहीन के सामने ही ससुरालवालों ने इंतजार पर मिट्टी का तेल छिड़क उसे आग लगा दी। आग लगने से चिल्लाता हुआ इंतजार गली में आ गिरा, मोहल्ले के लोगों ने उसकी आग बुझाई और पुलिस को भी मामले की सूचना दी। मामले में परिजनों ने थाना लिसाड़ी गेट में पत्नी और साले के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। नगर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है।