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कोई विरोध नहीं, कुछ भी नहीं, बस जिहाद: ब्रिटिश ‘सुंदरी’ ने कश्मीर के नाम पर लोगों को भड़काया

कभी ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवॉर्ड के लिए नामांकित होने वाली सुमैरा फारुख के खिलाफ पुलिस ने जाँच शुरू कर दिया है। दरअसल, सुमैरा ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद पिछले महीने बर्मिंघम में विरोध रैली का आयोजन किया था। इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए थे, जो कश्मीर से 370 निरस्त होने का विरोध कर रहे थे। इस दौरान सुमैरा खान ने लोगों को संबोधित करते हुए बयान दिया था कि ‘जिहाद ही इसका एकमात्र उपाय है।’ बता दें कि वह 2017 में ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवार्ड्स में ‘बिज़नेसवुमन ऑफ़ द ईयर’ कैटेगरी में हारने वाली फाइनलिस्ट थीं।

सुमैरा फारुख, जो पहले प्रिंस चार्ल्स के साथ फोटो खिंचवा चुकी हैं, ने सैकड़ों लोगों की भीड़ से कहा कि कश्मीर से कर्फ्यू हटाने के लिए आज एक सिर्फ एक ही नारा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को एक बात सच-सच बताना है कि इसका केवल एक ही समाधान है, और वो है जिहाद। कोई विरोध नहीं, कुछ भी नहीं, बस जिहाद।

बता दें कि सुमैरा फारूख, एक बिजनेसवुमैन होने के साथ ही एक पत्रकार भी हैं। उन्होंने भारतीय संघ के साथ जम्मू और कश्मीर को पूरी तरह से एकीकृत करने के भारत के फैसले के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। ठीक 24 घंटे पहले, वहाँ के उप नेता टॉम वाटसन, जैक ड्रोमी और लियाम बायरन समेत शीर्ष श्रम सांसदों के एक मेजबान ने उसी स्थान पर एकसमान विरोध में भाषण दिए थे।

अपने ऊपर लगे आरोपों पर बचाव करते हुए समैरा फारुख ने हिंसा भड़काने से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक मुखर महिला हैं। अपनी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “जिहाद का कोई विशेष अर्थ नहीं है। यदि आपको यूके की सरकार के साथ कोई समस्या है और आप अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, तो इस्लाम के अर्थ में संघर्ष को जिहाद कहा जाता है। मुस्लिम उस संदर्भ में शब्द का अर्थ जानते हैं। क्या आपको लगता है कि मैं ऐसी इंसान हूँ, जो उस शब्द का उपयोग लोगों को लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए करूँगी? मैं समुदायों और ब्रिटिश सेना के साथ काम करती हूँ, जो एशियाई समुदाय को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है। मैं हिंसा को कैसे प्रोत्साहित कर सकती हूँ?”

वहीं, जब सुमैरा फारूख से पूछा गया कि उन्होंने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, क्या उन्हें करना चाहिए था, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा, “जो लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं, वे वही हैं जो नहीं चाहते हैं कि एक महिला बोले। वहाँ लोग कह रहे हैं कि हम बंदूकों के साथ आज़ादी पाने जा रहे हैं। लोग बुरे शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं, कह रहे हैं बाहर आओ और लड़ो, लेकिन वे जाँच नहीं करते हैं। लोग हमेशा मुझ पर हमला करते हैं क्योंकि मैं एक मुखर महिला हूँ।”

पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि वे इस मामले की जाँच कर रहे हैं। वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम यह देखने के लिए उपलब्ध कॉन्टेंट का आकलन कर रहे हैं कि क्या कोई अपराध किया गया है।”

अलकायदा-IS की भारत पर जिहाद की तैयारी, निशाने पर होंगे यहूदी-इज़राइली, सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

इस्लामिक स्टेट (आईएस) से छिटके जिहाद सेल और अल-कायदा भारत पर जिहादी हमले की तैयारी कर रहे हैं। निशाने पर होंगे यहूदी, और अन्य इज़राइली नागरिक। इंटेलिजेंस एजेंसियों के मुताबिक यह हमला उनके त्यौहारों और छुट्टियों के समय यानि सितंबर-अक्टूबर में किए जाए सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस बाबत बड़ी यहूदी आबादी वाले राज्यों को सतर्क करना शुरू कर दिया है

तीन यहूदी त्यौहार होंगे अगले एक महीने में

अगले एक महीने में यहूदियों के तीन महत्वपूर्ण त्यौहार होंगे। शुरूआत 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक रोष हाशानह से होगी, उसके बाद यहूदियों का पवित्रतम दिन योम किप्पुर 8-9 अक्टूबर को पड़ेगा, और 13 से 22 अक्टूबर तक सुक्कोत मनाया जाएगा। इस कालखंड में एक बड़ी संख्या में यहूदी समुदाय के लोग अक्सर साल-दर-साल खास जगहों पर इकठ्ठा होते हैं। भारत में इज़राइल से इसके लिए बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं।

गौरतलब है कि संयोगवश इसी बीच हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण शारदीय नवरात्रि (29 सितंबर-7 अक्टूबर), दुर्गा पूजा/काली पूजो (5-7 अक्टूबर) और दशहरा (8 अक्टूबर) भी पड़ रहे हैं।

ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे देशों की जासूसी एजेंसियों ने जो इनपुट भारत भेजा है, उसके मुताबिक निशाने पर नई दिल्ली में इज़राइली दूतावास भी है। इसके अलावा इज़राइलियों और यहूदियों द्वारा चलाए जाने वाले स्कूल और होटल भी निशाने पर हैं। यह जानकारियाँ 26/11 जैसे जिहादी हमले की याद दिलातीं हैं, जब कसाब और उसके साथियों के निशाने पर आए मुंबई के 10 इलाकों में से दो विशेष तौर पर यहूदियों को निशाना बनाने के लिए ही चुने गए थे। लियोपॉल्ड कैफ़े यहूदियों के बीच खासा मशहूर था, और नरीमन हाउस भारत में यहूदियों के महत्वपूर्ण स्थलों में गिना जाता है।

कश्मीर का बदला इज़राइल से

मीडिया सूत्रों के मुताबिक इज़राइल के कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दे पर भारत के समर्थन से जिहादियों में नाराज़गी फैली हुई है। जिहादी आतंकी हमले में भारत की ज़मीन पर यहूदियों को मार कर इज़राइल को ‘सबक’ सिखाना चाहते हैं। इसीलिए इंटेलिजेंस एजेंसियों ने स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस को सूचित कर दिया है, ताकि जिहादी मंसूबों को कामयाब होने से रोका जा सके। यहूदियों के आवास, यहूदी और इज़राइली संस्थानों और दिल्ली स्थित चबड हाउस की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।

हरियाणा में BJP और मजबूत: पहलवान योगेश्वर दत्त और पूर्व हॉकी कप्तान संदीप सिंह ने थामा दामन

हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ओलंपिक खेलों में देश का नाम रोशन करने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। योगेश्वर दत्त के साथ-साथ भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। दोनों ने हरियाणा बीजेपी प्रमुख सुभाष बराला की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ली।

बता दें कि ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त की भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की खबर पहले से ही चल रही थी। बताया जा रहा है कि योगेश्वर दत्त अगले महीने होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार बन सकते हैं। हरियाणा के रहने वाले कुश्ती खिलाड़ी ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को यहाँ राज्य भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला से मुलाकात की थी और उन्हें सूचित किया था कि उन्होंने हरियाणा पुलिस से इस्तीफा दे दिया है। दत्त ने 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और उन्हें 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

वहीं खबर है कि संदीप सिंह को आगामी हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी कुरूक्षेत्र के पेहोवा विधानसभा क्षेत्र से टिकट दे सकती है। संदीप पिछले कई दिनों से पेहोवा में काफी सक्रिय भी रहे हैं। पूर्व भारतीय कप्तान संदीप सिंह को उनके शानदार फ्लिक के लिए फ्लिकर सिंह के नाम से जाता है। संदीप सिंह को उनके शानदार खेल के लिए 2010 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया था। वह 2004 से 2012 तक भारत की हॉकी टीम का हिस्सा रहे हैं। वह 2009 में भारत की हॉकी टीम के कप्तान बनाए गए थे। उनके जीवन पर 2018 में ‘सूरमा’ नाम की एक फिल्म भी बन चुकी है।

बॉलीवुड की हीरोइनें, कॉलेज की लड़कियाँ, लगभग 40 कॉल गर्ल्स: MP हनी ट्रैप कांड का घिनौना सच

मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप कांड के खुलासे के बाद जाँच टीम को इस मामले में हर सिरे पर नई जानकारी मिल रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे कांड में 40 काल गर्ल्स के शामिल होने की खबर है, जिनमें बॉलीवुड की कुछ हिरोइनों के नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन अब गिरोह को चलाने वाली श्वेता जैन ने एसआइटी के सामने खुलासा किया है कि उसने करीब 2 दर्जन कॉलेज जाने वाली लड़कियों को सेक्स जाल का हिस्सा बनाया, जिसमें अधिकतर मिडिल क्लास परिवार की लड़कियाँ शामिल थीं।

इस हनी ट्रैप रैकेट में गिरफ्तार महिलाओं में श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी, श्वेता स्वप्निल जैन, आरती दयाल, और एक 18 वर्षीय लड़की शामिल है। आरती दयाल के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया गया है।

इंदौर की पहली महिला एसएसपी रुचि वर्धन सिंह ने इस संबंध में बताया कि श्वेता और उसकी साथी आरती ने कॉलेज जाने वाली लड़कियों को फँसाकर, उन्हें मॉडर्न लाइफस्टाइल का लालच दिखाकर हनी ट्रैप गैंग में घसीटा था।

वहीं, श्वेता ने अपने मनसूबों के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि हनी ट्रैप का मकसद वीआईपी लोगों को इसमें फँसाकर उनसे करोड़ों रुपए के आकर्षक सरकारी कॉन्ट्रैक्ट की खरीद करना था। जिनमें से कई कॉन्ट्रैक्ट श्वेता जैन और उनकी साथी आरती दयाल की कंपनियों को कमीशन के आधार पर दिए गए थे। हनी ट्रैप में फँसाकर कॉन्ट्रैक्ट खरीदने के अलावा श्वेता मध्यप्रदेश में आईएस और आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग भी मैनेज करती थीं।

पूछताछ में श्वेता ने एसआईटी को बताया कि अधिकारियों की डिमांड पर वह आर्थिक रूप से कमजोर कॉलेज जाने वाली छात्राओं को रैकेट में फँसाती थी और बाद में नामी हस्तियों के साथ बिस्तर पर जाने के लिए मजबूर करती थी। जिन लोगों के साथ लड़कियों को रात गुजारने के लिए कहा जाता था, उनमें अधिकतर लोग लड़कियों की पिता के उम्र के होते थे।

एसआईटी के सामने पेश हुई एक लड़की ने खुलासा किया कि प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन लेने की मंशा से वह श्वेता के संपर्क में आई थी। लेकिन श्वेता ने किसी तरह लड़की को इस गिरोह का हिस्सा बना लिया और उसे भोपाल ले गई। वहाँ उसकी पहचान तीन अधिकारियों से करवाई गई, जहाँ शुरू में लड़की ने ये काम करने से मना कर दिया और अपने घर लौट आई। किंतु बाद में श्वेता की साथी आरती दयाल उसके घर गई और लड़की के पिता से बताया कि अगर वह अपनी बच्ची को भोपाल भेजेंगे तो उनका एनजीओ लड़की की पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाएगा।

लड़की के मुताबिक आरती ने उसे श्वेता का एक एमएमएस भी दिखाया, जिसमें वो एक अधिकारी के साथ शारीरिक संबंध बना रही थी। आरती ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के लिए ये सब करना पड़ता है।

इसके बाद आरती और श्वेता लड़की को एक लग्जरी कार में इंदौर लेकर चली गईं, वे वहाँ पॉश इंफिनिटी होटल में ठहरे। अगले दिन शाम को 60 वर्षीय इंजिनियर हरभजन सिंह की पहचान लड़की से कराई गई और पूरी रात लड़की को अपने पिता की उम्र के व्यक्ति के साथ रुककर सेक्स करना पड़ा। इस बीच आरती ने हरभजन का लड़की के साथ चुपके से वीडियो बना लिया। जिसे बाद में दिखाकर श्वेता ने हरभजन से 3 करोड़ रुपए माँगे और लड़की को भी धमकी मिली थी कि अगर उसने अपने पैरेंट्स को कुछ भी बताया तो वह उसकी वीडियो इंटरनेट पर डाल देंगे।

जाँच में खुलासा हुआ कि लोअर मिडिल क्लास परिवारों की लड़कियों को नौकरी का लालच देकर पहले फँसाया जाता था, फिर फाइव स्टार होटल का ग्लैमर और लग्जरी कल्चर दिखाया जाता था। बाद में उन्हें बहला-फुसला कर अधिकारियों को हनी ट्रैप में फँसाने के लिए बड़ी कीमत दी जाती थी।

इस पूरे कांड में बता दें कि आज जाँच टीम को एक हिट लिस्ट हाथ लगी है, जिसमें 13 आइएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें लड़कियों ने प्रेम में फँसा लिया था और उनकी सेक्स वीडियो दिखाकर उनसे पैसे माँगने वाले थे। पुलिस को इस ब्लैकमेल करने वाले गिरोह से अभी तक 90 वीडियो मिल चुके हैं। जिनमें सियासत से जुड़े लोगों से लेकर कई ब्यूरोक्रेट्स के चेहरे उजागर हुए हैं। गिरोह में शामिल महिलाओं के पास से 8 सिम कार्ड भी मिले हैं, बाकी रिकॉर्ड अभी खंगाले जा रहे हैं।

‘जो नेता पार्टी हित को देशहित से पहले रखते हैं, वे देश के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूस्टन में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम की तारीफ़ करने वाले मिलिंद देवड़ा ने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने लिखा कि जो नेता पार्टी हित को देशहित से पहले रखते हैं वे देश के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक हैं।

इसके अलावा अपलोड किए गए वीडियो में उन्होंने कहा कि कोई भी चाहे वो बीजेपी में हो या कॉन्ग्रेस में हो या फिर किसी क्षेत्रीय पार्टी में हो, जो कोई भी इससे अलग सोचता है, देश के लिए सबसे अधिक ख़तरनाक है। उन्होंने कहा,

“मुझे गर्व है कि मैं जब संसद पहुँचा तो वहाँ पर अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बड़े नेता थे, सोमनाथ चटर्जी स्पीकर थे। मुझे गर्व है कि जब मैं संसद पहुँचा तो मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। यह सभी बड़े नेता थे, वे पार्टी से अलग जा सकते थे।”

दरअसल, मिलिंद देवड़ा उस बात को लेकर चर्चा में आए गए हैं, जब सोमवार (23 सितंबर) को उन्होंने अमेरिका में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम की तारीफ़ कर दी थी। तब उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक ताक़त (सॉफ़्ट पॉवर डिप्लोमेसी) को दर्शाता है।

मिलिंद देवड़ा द्वारा की गई इस तारीफ़ पर आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “आपने मेरे मित्र स्वर्गीय मुरली देवड़ा जी की अमेरिका के साथ मज़बूत संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए बिल्कुल सही कहा है। वह दोनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूत होता देखकर वाकई बहुत ख़ुश होते।”

इस पर मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट कर पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने ट्वीट किया कि मुरलीभाई ने भारत और अमेरिका में सभी सरकारों के साथ काम किया और हमारे देशों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिए काम किया। दिलचस्प बात यह है कि मिलिंद का यह बयान उनकी पार्टी से अलग है।

आखिर फेसबुक मजहबी बलात्कारियों को बचाना क्यों चाहता है? क्यों डिलीट कर रहा है खबरें?

22 सितंबर 2019 को कौशाम्बी में हुए एक बच्ची के सामूहिक बलात्कार की खबर आई। पता चला कि बच्ची दलित है, और आरोपित समुदाय विशेष से। जैसा कि आजकल के सेकुलर समाज में हो रहा है, इस खबर पर न कोई रोष प्रकट किया गया, न ही मानवता के शर्मसार होने की बात कही गई। जबकि, इसमें बच्ची दलित समाज से है, जो कि शायद किसी सवर्ण जाति के आरोपित का शिकार होती तो मीडिया कवरेज अलग होती।

ख़ैर, ऑपइंडिया ने इस खबर को उसी दिन उठाया। उसके बाद इससे जुड़ी और बातें सामने आई कि आरोपितों ने न सिर्फ ऐसा जघन्य अपराध किया बल्कि उस कुकृत्य की विडियो बनाते रहे, वो बच्ची उन्हें पहचानती थी और बार-बार विडियो में ‘भैया आप तो मुझे जानते हो, अल्लाह का वास्ता मुझे छोड़ दो’ कह कर गिड़गिड़ाती रही।

वो खबर जिस पर फेसबुक अपना रहा है दोहरा रवैया

आदिल, जो कि ‘छोटका’ और ‘आतंकवादी’ जैसे उपनामों से जाना जाता है, अपने एक साथी नाजिक और एक अज्ञात लड़के के साथ इस अपराध में शामिल था। फिर खबर आई कि आदिल को एक मजार में पुलिस ने पकड़ लिया। नाजिक पहले ही पकड़ा जा चुका था, एक अभी भी फरार है। पुलिस को इस त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद।

अब बात आती है कि ऐसी खबरों को फेसबुक ‘कम्यूनिटी गाइडलाइन्स’ का हवाला दे कर न सिर्फ डिलीट करता है, बल्कि शेयर करने वालों के अकाउंट सस्पैंड कर देता है। ऑपइंडिया ने इस खबर को पोर्टल पर लगाने के बाद फेसबुक पेज के जरिए शेयर किया, जिसका स्क्रीनशॉट आप देख सकते हैं। हेडलाइन में कोई ऐसी बात नहीं है जो बनाई गई हो, घृणा फैलाने की मंशा दिखाती हो, या पत्रकारिता की स्वनिर्धारित नीतियों के खिलाफ हो।

इसी फेसबुक पर ‘जय श्री राम’ और ‘वह चिल्लाती रही कि भगवान के नाम पर छोड़ दो’ ऐसे हेडलाइन वाली खबरें आपको हमेशा दिख जाएँगी, फिर मजहबी नामों या मजहबी नारों पर फेसबुक इतना संवेदनशील कैसे हो जाता है? ये तो स्पष्ट तौर पर मजहबी अपराधियों को बचाने जैसा है।

जब हमने फेसबुक से बात करने की कोशिश की तो बताया गया कि शायद हमारी इमेज में कुछ समस्या है! जबकि आप तस्वीर को देखें तो वहाँ आरोपित का चेहरा दिख रहा है, लड़की को पूरी तरह से धुँधला किया गया है, और सिवाय इसके उसके कपड़े का रंग पीला है, आप न तो यह कह सकते हैं कि यहाँ कुछ हिंसक दृश्य है, या घृणा फैलाने की बात। जब तस्वीरों से लोग मतलब निकालते हैं, तो फिर ऐसी खबरों में कौन सी तस्वीर लगाई जाए?

क्या एक सहमी सी लड़की को कोने में बिठा कर ही ऐसे जघन्य अपराधों की प्रस्तुति की जाए? क्या इस तस्वीर को देख कर बलात्कार जैसे अपराध की जघन्यता कम हो जाती है, या ज्यादा हो जाती है? इससे घृणा कैसे फैल रही है, या ये डिस्टर्बिंग कैसे है? शायद अब से हर बलात्कार की खबर पर फेसबुक का ही लोगो लगाया जाए, तब वो न्यूट्रल होगा, किसी के खिलाफ नहीं होगा।

पंद्रह साल की बच्ची का बलात्कार कर रहे हैं दरिंदे और ये खबर फेसबुक की कम्यूनिटी गाइडलाइन्स के खिलाफ है! साथ ही, ये लोग कभी भी आपको सटीक कारण नहीं बताते। आपको ‘कम्यूनिटी गाइडलाइन’ का लिंक थमा दिया जाता है, आप खोजते रहिए कि कौन से अनुच्छेद का कौन सा सब-सेक्शन आपने तोड़ा है।

फिर भी, आप कोशिश करते हैं, अपने स्तर से समझना चाहते हैं कि किस बात पर नाराज हैं फेसबुक वाले। घूम-फिर कर, आपको सिवाय इस बात के कि त्रिशूल पर कंडोम लगा दो, हिन्दू देवी की योनि में कुछ लगा दो, हिन्दुओं के देवताओं को अश्लील तरीके से दिखाओ, आप अगर मजहबी नाम या मजहबी नारों को लिख रहे हैं तो इन्हें स्थानविशेष में दर्द होने लगता है।

हिन्दू धर्म और हिन्दूविरोध धड़ल्ले से चल रहा है फेसबुक पर, गंदी गालियाँ, शिवलिंग पर पेशाब करने की बातें, मंदिरों को तोड़ने की बातें, भगवान हनुमान की तस्वीर पर जूते मारते लोगों की खबरें, ये इनके कम्यूनिटी गाइडलाइन्स के किसी अनुच्छेद, सेक्शन, सब-सेक्शन, वाक्य, शब्द, विचार, किसी चीज को किसी हिस्से को वायलेट नहीं करती।

तब आदमी सोचने लगता है कि इनकी कम्यूनिटी क्या चौदहवीं शताब्दी के इस्लामी लुटेरों की है, या उनके डीएनए लिए लोग वहाँ बैठे हैं जो ऐसी नीतियाँ बनाते हैं जहाँ हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं का मजाक बनाना, अश्लीलता से प्रदर्शित करना सही हो जाता है, लेकिन इन मजहबी नाम वाले किसी पंद्रह साल की बच्ची का बलात्कार करें, विडियो बनाएँ, तो इन्हें मरोड़ें उठती हैं!

फेसबुक हो या यूट्यूब, ये लोग हमेशा कम्यूनिटी गाइडलाइन्स के कंबल तले आपस में कूची-कूची-कू करते रहते हैं। ये लोग अघोषित तौर पर चाहते हैं कि खास समुदाय के अपराधों को ‘राम (बदला हुआ नाम)’ के शाब्दिक जाल में उलझा कर लिखा जाए ताकि एक समुदाय की भावनाएँ आहत न हों। जबकि, कोई समुदाय, हिन्दू या दूसरे मजहब का, किसी बलात्कारी के नाम लिखने से आहत होता है, तो लानत है ऐसे समुदाय पर। ऐसे लोगों को हथेली पर थूक कर, नाक डुबा कर डूब मरना चाहिए।

कौन करता है ऐसे कांड: कम्प्यूटर या आदमी?

इसी से जुड़ी दूसरी बात इस शक को गहरा करती है कि सब कुछ कम्प्यूटर या एल्गोरिदम से नहीं होता, शायद कुछ लोग, कुछ संस्थानों को टार्गेट करने में व्यस्त रहते हैं। इसी खबर को हमने पेज पर शेयर किया तो थोड़ी देर में फेसबुक का संदेश आ गया कि हमने कम्यूनिटी गाइडलाइन्स को तोड़ा है। आप अपील भी नहीं कर सकते ऐसे मामलों में जबकि आम तौर पर अपील करने के लिए ‘डीटेल्स’ नाम का एक बटन होता है। वो बटन इन्होंने इस मामले में बंद कर रखा था।

जाहिर सी बात है कि इस पर आप जानना चाहेंगे कि हुआ क्या है। हमने फेसबुक से बात करने के लिए मेल किया तो बताया गया कि हमें अपील करना चाहिए, और यह भी कि हेडलाइन को ऐसे नहीं लिखना चाहिए। मैं एक एडिटर हूँ मीडिया इंडस्ट्री का और मुझे फेसबुक में काम करने वाले लोग बता रहे हैं, जिनका पत्रकारिता का अनुभव शून्य है, कि हम हेडलाइन कैसे रखें!

वो शायद चाहते हैं कि ये हेडलाइन ऐसे होती: ‘लड़की के साथ कुछ लोगों ने कुछ किया, पुलिस कुछ कर रही है’। भीतर में हम ये लिखते कि पंद्रह साल की लड़की कहीं गई थी, उसे ‘राम, श्याम और कन्हैया (तीनों नाम बदले हुए), कहीं ले गए और उसके साथ बहुत गलत किया। आप बदले हुए नाम कभी भी ‘सलीम-राशिद-परवेज’ देखे हैं? क्योंकि मजहबी अपराधियों को मीडिया ने हमेशा ‘समुदाय विशेष’ के नाम पर ढका है, और उनके नामों को हिन्दू नामों से।

समस्या यह नहीं है कि ऐसे अपराधियों का नाम लिखना क्यों जरूरी है। समस्या यह है कि हिन्दुओं का नाम लिखना अगर प्रचलन में है, मजहब विशेष के अपराध का भी बोझ जब मीडिया हिन्दू नामों पर डालती है, तो फिर मजहब विशेष का नाम लिखने में क्या हर्ज है? क्या कोर्ट ने ऐसा करने से मना किया है?

जब पेज से पोस्ट डिलीट किया गया और कहा गया कि अब आपके पेज की पहुँच घटा दी जाएगी, तो मैंने मेल किया कि जब यही खबर पेज पर है जो कम्यूनिटी गाइडलाइन्स तोड़ती दिखती है, जो कि कोई कम्प्यूटर तय करता है, या निष्पक्ष लोग तय करते हैं, तो फिर यही खबर तीस हजार लोगों द्वारा फेसबुक पर ही पढ़ी और शेयर की गई, वो वहाँ कैसे है? डिलीट तो हर पोस्ट को करना चाहिए। तो इन्होंने आठ घंटे बाद, मेरा निजी अकाउंट सस्पैंड कर दिया क्योंकि मैंने वो पोस्ट शेयर किया था। मतलब ऑटोमेटिक तो नहीं है कुछ भी। मैंने जब खुद ही बताया कि मैंने शेयर किया है, तब मेरा अकाउंट सस्पैंड हो जाता है। शायद इतना कम नहीं था कि किसी ने ट्विटर पर भी मेरे उस ट्वीट को रिपोर्ट किया लेकिन ट्विटर ने मुझे बताया कि इसमें कोई समस्या नहीं।

वही खबर, ट्विटर के लिए सही है, फेसबुक के लिए गलत है

सवाल यह कि खास समुदाय के अपराधी होने पर फेसबुक की इतनी क्यों जलती है कि बदबू हर तरफ फैल जाती है? ऐसा क्या है उनमें कि उनके द्वारा किए गए ऐसे जघन्य अपराध किसी राम के नाम लिख दिए जाएँ? क्या फेसबुक इन मजहबी बलात्कारियों का समर्थक है? क्या फेसबुक की कम्यूनिटी गाइडलाइन्स किसी खास किताब के उन हिस्सों को तो शामिल नहीं करती जहाँ काफिरों का बलात्कार जायज बताया गया हो?

अगर ऐसा है तो फिर कम्यूनिटी गाइडलाइन्स का हवाला देने की बजाय यही कह दिया जाए कि हमारी गाइडलाइन्स तो आसमान से उतरी है और जुकरबर्ग को समय-समय पर हवाई आईलैंड की गुफा में मिलती रही है। इसलिए, हम तो हिन्दुओं के देवी-देवताओं पर किए गए अश्लील कमेंट्स, पोस्ट्स, टिप्पणियाँ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम पर जाने देंगे लेकिन मजहब विशेष वालों के बलात्कार करने पर, तथ्यात्मक खबरों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि वो फेसबुक की इस गाइडलाइन्स के खिलाफ जाता है।

मतलब ये प्लेटफॉर्म कमाएँ लेकिन सेेसरशिप के नाम पर आपको चूना लगाएँ

फैसला आपको करना है कि यहाँ क्या हो रहा है। यूट्यूब पर आप कुछ भी पोलिटिकल बोलिए, ‘वामपंथी’ शब्द लिख दीजिए और आपका विडियो अपलोड होने से पहले ही ‘पीला डॉलर’ चिह्न दिखाने लगता है, मतलब ये एडवर्टाइजर फ्रेंडली नहीं है। आप रिव्यू के लिए उसे डालते हैं। इसके लिए उन्हें सात दिन चाहिए। दो दिन बाद आपका विडियो अडवर्टाइजर फ्रेंडली हो जाता है, और ‘डॉलर’ फिर से हरा दिखने लगता है। लेकिन तब तक आपने दो और विडियो डाल दिया, उस प्रतिबंधित विडियो पर जो व्यू आना था, पहले दो दिन में आ गया। आपके पैसे उसमें गायब हो गए। बाद में हरा हो जाए, या लाल, आपको कोई फायदा नहीं हुआ।

फेसबुक हमारा डेटा लेता है, हमारी पसंद-नापसंद, हमारी तस्वीरों को, हमारे लेखों को, लिखने के तरीके को, हमारे कहीं आने-जाने को, हर बात को अपने डेटा सेंटर में रखता है। ये डेटा वो किसी पोलिटिकल पार्टी को बेचता है, किसी फूड चेन को, कपड़े की कम्पनी को, कॉस्मेटिक्स बनाने वाले को, बैंकों को, किसी को भी बेचता है।

इसलिए, कोई यह नहीं कह सकता कि तुम देते क्या हो? या यह कि, वो प्राइवेट कम्पनी है, वो अपनी नीतियाँ तय कर सकती है। बिलकुल तय कर सकती है, अगर वो अपने उपभोक्ताओं से डेटा लेना बंद कर दे। हम इस कम्पनी को भुगतान कर रहे हैं, और वो हमारे लिए उत्तरदायी है क्योंकि जब इसके मालिक लम्बी-लम्बी छोड़ते हैं, और दुनिया बदलने की बातें करते हैं, तब उनके लिए यही उपभोक्ता एक टूल की तरह काम करते हैं।

यही कम्पनियाँ अपनी करतूतों से किसी देश में सत्ता परिवर्तन कराने की फिराक में रहती हैं, और कहीं ‘ऑर्गेनिक ट्रेंड’ के नाम पर अपने मालिक की विचारधारा को न्यूज ट्रेंड वाले सेक्शन में सबसे ऊपर दिखाती है। वहाँ वैसी खबरों को जगह दी जाती थी जो किसी विचारधारा, पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ हों।

इसलिए, फेसबुक को अपना दोगलापन त्याग कर, दुनिया को यह बात साफ शब्दों में बताना चाहिए कि वो मजहबी बलात्कारियों की तरफदारी क्यों कर रहा है? फेसबुक को बताना चाहिए कि क्या फेसबुक पर शरियत के हिसाब से चलते हुए खबरें शेयर होनी चाहिए? फेसबुक को खुल कर कहना चाहिए कि क्या किसी मीडिया संस्थान को मक्का की तरफ सर करके, हर पोस्ट लिखने से पहले नमाज भी पढ़ना ज़रूरी है? फेसबुक को बताना चाहिए कि क्या अब पत्रकारिता भी ‘हलाल सर्टिफ़ाइड’ होनी चाहिए?

इतिहास से छेड़छाड़, पुनः लिखने की जरुरत: शिवाजी, ज्ञानेश्वर, लक्ष्मीबाई, शंकराचार्य… के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने देश में पढ़ाए जाने वाले इतिहास पर सवाल उठाए हैं। पुणे में आयोजित एक पुरस्कार समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में लंबे समय तक औपनिवेशिक शासन रहने की वजह से हमारे इतिहास को तोड़-मरोड़ कर सामने रखा। ऐसा जानबूझकर किया गया, ताकि भारत की ख़राब छवि पेश की जा सके। बाहर से आने वाले जिन लोगों ने देश पर हमला किया, लूटा, धोखा दिया और बर्बाद किया, उनके बारे में हमें बताया जाता है कि वे महान थे। 

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे इतिहास को फिर से लिखने और उसे ठीक करने की बहुत अधिक संभावना है, भूतकाल में औपनिवेशिक शासन की वजह से इतिहास के साथ छेड़छाड़ हुई है। भारत कभी ‘विश्व गुरू’ के रूप में जाना जाता था। लोग कहते हैं कि जीडीपी लगभग 20 फ़ीसदी थी। भारत ने भी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया। 

इसके आगे उन्होंने कहा, “इतिहास में शिवाजी महाराज, बासवेश्वर, ज्ञानेश्वर, रानी लक्ष्मीबाई, शंकराचार्य के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं है। इसलिए मैं कहता हूँ कि हमें वास्तविक इतिहास को लोगों के सामने रखना होगा।”

वेंकैया नायडू ने कहा कि इस वक्त देश में राष्ट्रीय अहमियत के कई स्मारक हैं। इनके बारे में जागरूकता पैदा करना और स्कूल-कॉलेज के छात्रों को इनके बारे में बताना बहुत ज़रूरी है। उपराष्ट्रपति ने छात्रों को नज़दीकी क्षेत्रों में मौजूद ऐतिहासिक स्मारकों का दौरा करने और इतिहास जानने पर भी ज़ोर देने के लिए कहा।

नायडू ने कहा,

“पूरी दुनिया भारत को देख रही है। जाति, पंथ, धर्म, लिंग और क्षेत्र पर आधारित सभी मौजूदा सामाजिक बुराइयों को दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि हम वन नेशन और वन पीपल हैं। हमें अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए, जो देश में शांति और सद्भाव बनाए रखने के अलावा जीवन जीने का एक तरीका है। हमारी युवा पीढ़ी की मानसिकता को बदलने की ज़रूरत है, जिसे हमारे समृद्ध इतिहास और अतीत के बारे में बताया जाना चाहिए। तभी भारत एक मज़बूत राष्ट्र होगा।”

महाराष्ट्र में पिछले हफ्ते विधानसभा चुनाव के साथ आने वाले आदर्श आचार संहिता का उल्लेख करते हुए, नायडू ने कहा, “देश में बार-बार चुनाव होना चिंता का विषय है क्योंकि सभी को तीन चरणों का पालन करना पड़ता है- चुनाव, सुरक्षण और सुधार। देश के हित में, 15 दिनों के भीतर सिर्फ़ एक चुनाव होना चाहिए ताकि जनता के काम में कोई बदलाव न हो।”

गैर मुस्लिम लोग नहीं खरीद सकते प्रॉपर्टी, किराए पर देने से भी इंकार का नोटिस: Pak कार्यकर्ता

पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान वैश्विक मंच पर भारत के खिलाफ यह दुष्‍प्रचार करते दिखाई देते हैं कि यहाँ अल्‍पसंख्‍यकों के साथ भेदभाव किया जाता है। लेकिन, हकीकत इसके बिलकुल उलट है। हकीकत यह है कि पाकिस्तान में न तो अल्पसंख्यक सुरक्षित है और न ही उन्हें समान अधिकार है। 

बता दें कि, गैर मुस्लिमों को पाकिस्‍तान के शहर कराची में प्रॉपर्टी खरीदने तक का अधिकार नहीं है। एक पाकिस्तानी कार्यकर्ता कपिल देव ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। कपिल देव के मुताबिक, “यदि आप गैर-मुस्लिम हैं तो कराची के पॉश इलाके में आप प्रॉपर्टी खरीदना तो दूर किराए पर भी लेने के बारे में नहीं सोच सकते हैं। कराची के पॉश इलाके में खालीक-उज-जमन रोड, ब्लॉक 8 क्लिफ्टन पर स्थित मछियारा रेजिडेंसी ने अपने गेट के बाहर गैर-मुस्लिम लोगों को प्रॉपर्टी बेचने, किराए पर देने से इंकार करने का नोटिस लगाया हुआ है।

बता दें कि, फ्लैट के गेट पर लगे नोटिस में उर्दू में लिखा गया है कि गैर-मुस्लिमों को समाज में फ्लैट खरीदने या किराए पर लेने की मनाही है। कपिल का कहना है कि इस तरह का नोटिस यहाँ कई कॉलोनियों में भी लगा हुआ है। 

कपिल देव के ट्वीट पर एक यूजर ने अपनी अपनी व्‍यथा बताते हुए लिखा है कि 2018 में वह कराची में एक फ्लैट तलाश कर रहा था। इस दौरान उसे 20 से ज्यादा ऐसी बिल्डिंग मिलीं, जहाँ पर इस तरह का नोटिस लगा हुआ था कि आप अपने फ्लैट न तो गैर-मुस्लिमों को बेच सकते हो और न ही उसे किराए पर दे सकते हो। बहादुरबाद की लगभग हर इमारत में भी यही नियम है। खासकर ज़म ज़म रेजिडेंसी के मालिक ऐसा करते हैं।

धार्मिक भेदभाव और कट्टरता में पाकिस्तान का काफी लंबा फेहरिस्त रहा है। हाल ही में, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अज्ञात मुस्लिम हमलावरों द्वारा एक हिंदू लड़की का अपहरण कर जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया। लड़की को सियालकोट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के कार्यकर्ता मिर्जा दिलावर बेग के घर पर रखा गया था।

कुछ दिनों पहले, सिंध प्रांत में एक अन्य हिन्दू लड़की लारसाना के असीफा मेडिकल डेंटल कॉलेज में अपने हॉस्टल के कमरे में सोमवार (16 सितंबर) को मृत पाई गई। जिसकी पहचान नमृता चंदानी के रूप में हुई थी। नमृता, बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज की अंतिम वर्ष की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता थी। इसके अलावा, जगजीत कौर नाम की एक सिख लड़की को पाकिस्तान के ननकाना साहिब में जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था।

SC में अयोध्या मामला: पुरातत्व विभाग पर सवाल उठाने के लिए मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने माफ़ी माँगी

2003 की पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठाने के लिए मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी माँगी है। मुस्लिम पक्ष के मुख्य वकील ने माना कि इसमें अदालत के समय की हानि हुई है, और इस दिशा में बहस को मोड़ने का कोई अर्थ नहीं था कि ASI की रिपोर्ट के हर पेज पर हस्ताक्षर क्यों नहीं है

मीनाक्षी अरोड़ा ने उठाया था मुद्दा

मुस्लिम पक्ष की एक दूसरी वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने बुधवार (25 सितंबर) को ASI की रिपोर्ट पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि चूँकि रिपोर्ट के बाकी अध्याय (चैप्टर) पर लिखने वाले है, लेकिन अंत में साराँश को किसने लिखा, यह तय नहीं है, अतः यह इस पर सवाल खड़े करने वाला है।

वहीं आज (गुरुवार, 26 सितंबर) धवन ने कहा कि रिपोर्ट और साराँश के लेखन पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता। “अगर हमने मी लॉर्ड लोगों का समय बर्बाद किया तो इसके लिए हम माफ़ी चाहते हैं। इस दिशा में जाने का कोई अर्थ नहीं है।” मुख्य न्यायाधीश गोगोई के अलावा जस्टिस बोबडे, चंद्रचूड़, अशोक भूषण, और एस अब्दुल नज़ीर की पीठ के सामने धवन ने हालाँकि यह जोड़ा कि वे उस रिपोर्ट पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि यह मान ले रहे हैं कि अगर अदालत ने उसे साक्ष्य के तौर पर स्वीकार कर लिया है तो उसकी विश्वसनीयता को चुनौती नहीं दी जा सकती।

’18 अक्टूबर के बाद एक भी अतिरिक्त दिन नहीं’

मामले की रोज़ाना सुनवाई में 32वें दिन की सुनवाई शुरू करते ही बेंच ने हिन्दू-मुस्लिम पक्षों को साफ़ बता दिया कि 18 अक्टूबर के बाद सुनवाई के लिए एक दिन भी अतिरिक्त नहीं दिया जाएगा। “अगर हम चार हफ़्ते में कोई फैसला सुना पाए तो यह अपने आप में एक चमत्कार सरीखा होगा।” जस्टिस गोगोई ने कहा। इसके बाद बेंच ने मुस्लिम पक्ष को ASI रिपोर्ट पर अपने तर्क दिन भर में समाप्त कर लेने का निर्देश दिया। पीठ ने अक्टूबर में छुट्टियों का हवाला दिया, और कहा कि 4 हिन्दू पक्षों में से केवल एक ही वकील को मुस्लिम पक्ष की दलीलों का जवाब देने की अनुमति होगी।

मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप गैंग के निशाने पर थे 13 IAS, कई नेता, इंजिनियर, बड़े व्यापारी: SIT के हाथ लगी ‘हिट लिस्ट’

मध्यप्रदेश हनी ट्रैप कांड का भंडाफोड़ होने के बाद जाँच एजेंसियों ने इस मामले में बड़ा खुलासा किया है। जानकारी के मुताबिक मालूम चला है कि इस गिरोह के सदस्यों के पास आईएस अधिकारियों के नाम की एक टारगेट सूची थी, जिन्हें गिरोह की लड़कियों ने अपने प्रेम जाल में फँसा लिया था और अब उनकी सेक्स वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने की तैयारी में थे। गिरोह के पास अधिकारियों के नाम कोड लिस्ट में दर्ज पाए गए हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस जाँच के दौरान SIT को जो लिस्ट मिली है उसमें 13 ऐसे अधिकारियों के नाम हैं, जो अलग-अलग समय पर कृषि, संस्‍कृति, उद्योग, जल संसाधन, जन संपर्क, शहरी प्रशासन, मत्‍स्‍य पालन, श्रम, वन, और प्रशासनिक विभागों में काम कर चुके हैं। जिनके नामों को इस गिरोह के संचालक ने एक सरकारी डायरी के पन्नों पर लिखा हुआ था।

जाँच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार इस हिट लिस्ट में शामिल अफसरों के नामों के आगे टिक का निशान लगाकर कोड भाषा में कुछ लिखा हैं। इसके अलावा इस डायरी में कुछ लोगों के नाम के आगे घेरा भी बनाया हुआ और कुछ के नाम के आगे महत्वपूर्ण एवं ओके जैसी चीजें लिखी हैं। मामले में जाँच में जुटी टीम अब फिलहाल कोड वर्ड में लिखी बातों का मतलब पता लगा रही है।

एक अधिकारी के मुताबिक, “इस जाल में फँसे अधिकारियों की पहचान वीडियो क्लिप देखकर की जा रही है और बिना उनकी वरिष्ठता एवं पद का लिहाज किए उन्हें अब कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।”

गौरतलब है कि इस कांड को देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल कहा जा रहा है। इस मामले में जाँच में जुटी एसआईटी की टीम अब तक 4 हजार से ज्यादा फाइलें जुटा चुकी हैं और बाकी के मिलने का सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है गिरोह के शिकंजे में कई शीर्ष नेता, आईएस अधिकारी, इंजिनियर और बड़े व्यापारी फँस चुके हैं। जिनकी सेक्स वीडियो और अश्लील चैट, ब्लैकमेलिंग के सबूत गिरोह के सदस्यों के लैपटॉप और मोबाइल से बरामद हुए हैं।

जिसके बाद सवाल उठने लगा है कि पूरी तरह से महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे इस गिरोह के पीछे और कौन लोग हैं? जो इन महिलाओं को टारगेट देते थे।

जानकारी के लिए बता दें कि इस हनी ट्रैप कांड से पूरे मध्यप्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। जाँच टीम जहाँ भी अपनी तफ्तीश कर रही है, उसे हर बार इस मामले में कुछ नया मिल रहा है। इन 13 अधिकारियों के नाम के अलावा जो खुलासा इस मामले में हुआ है कि वो ये कि इस पूरे मायाजाल में करीब 40 कार्ल गर्ल्स थीं, जिसमें कुछ हिरोइनों के नाम भी सामने आ रहे हैं।