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मोदी से मिले कश्मीरी पंडित, सिख और वोहरा समुदाय, 370 हटाने और करतापुर कॉरिडोर के लिए कहा शुक्रिया

हाउडी मोदी से पहले अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय समुदाय के लोगों ने जोरदार स्वागत किया। अमेरिका में र​ह रहे कश्मीरी पंडित और सिख तथा वोहरा समुदाय के लोगों ने उनसे मुलाकात की। कश्मीरी पंडितों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के लिए तो सिख समुदाय के ​लोगों ने करतारपुर कॉरिडोर के लिए पीएम का आभार जताया।

इस दौरान कश्मीरी पंडित काफी भावुक नजर आए। एक ने पीएम मोदी के हाथ को चूमकर कहा, “7 लाख कश्मीरी पंडितों की ओर से आपको धन्यवाद।” पीएम ने उनका हालचाल पूछने के बाद कहा, “आप लोगों ने जो कष्ट झेला है वह कम नहीं है।”

मुलाकात के दौरान कश्मीरी पंडित समुदाय का नेतृत्व करते हुए सुरिंदर कौल ने कहा, “पीएम ने हमसे कहा कि हमलोगों ने बहुत कुछ सहा है। अब हमें एक साथ मिलकर नया कश्मीर बनाना है। युवाओं ने उन संदेशों को प्रस्तुत किया, जो हमारे समुदाय ने उनके लिए तैयार किए थे। मैंने समुदाय की ओर से एक स्मृति-पत्र प्रस्तुत किया। जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।”

कौल ने कहा कि कश्मीर पर उनके द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसले के लिए उन्होंने दुनिया भर में 700,000 कश्मीरी पंडितों की ओर से उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर पर लिया गया उनका फैसला शांतिपूर्ण और विकास से भरा है। इस फैसले से सभी लोग खुश हैं। कौल ने कहा कि उन्होंने पीएम को आश्वासन दिया है कि कश्मीर को लेकर उनके सपने को पूरा करने के लिए उनका समुदाय सरकार के साथ काम करेगा।

पीएम ने वोहरा समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ भी मुलाकात की। उन्होंने भी उनका काफी गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी ने उनके साथ काफी देर तक बातें की और सम्मान स्वरूप उनका अंगवस्त्र भी स्वीकार किया।

सिख समुदाय भी पीएम मोदी से काफी जोश के साथ मिले। कैलिफोर्निया के कमिश्नर अविंदर चावला ने कहा कि मोदी सरकार ने सिखों के कल्याण के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। खास तौर पर करतापुर कॉरिडोर खोले जाने को लेकर भारत सरकार के प्रयासों के लिए प्रवासी सिखों ने प्रसन्नता व्यक्त की और उनका शुक्रिया अदा किया। साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी के कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का खुद चलकर आना यह बताता है कि मोदी दुनिया के लिए कितने बड़े और महत्वपूर्ण शख्सियत हैं।

सिख समुदाय ने मुलाकात के दौरान पीएम मोदी को ज्ञापन सौंपते हुए, उनसे 1984 के सिख जनसंहार के मुद्दों को संबोधित करने के साथ ही दिल्ली एयरपोर्ट का नाम गुरुनानक देव इंटरनेशनल एयरपोर्ट किए जाने का अनुरोध किया। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, आनंद मैरिज एक्ट, वीजा एवं पासपोर्ट में संशोधन और नवीनीकरण को लेकर आग्रह किया है। मोदी ने प्रवासी सिखों की माँगों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद यथासंभव प्रयासों का आश्वासन दिया। 

चिन्मयानंद से ₹5 करोड़ की रंगदारी मॉंगने में छात्रा हो सकती है गिरफ्तार, कॉल डिटेल से बढ़ी मुश्किलें

यौन शोषण के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे भेजे गए चिन्मयानंद से रंगदारी मॉंगने के आरोप में पीड़ित छात्रा की गिरफ्तारी हो सकती है। पॉंच करोड़ रुपए की रंगदारी मॉंगने के इस मामले के तीन आरोपित पहले से ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। असल में कॉल डिटेल सामने आने के बाद से इस मामले में छात्रा की भी मुश्किलें बढ़ गई है।

मामले की जॉंच कर रही एसआईटी के अनुसार जनवरी 2019 से अगस्त महीने तक चिन्मयानंद और पीड़ित छात्रा के बीच 200 बार फोन पर बातचीत हुई थी। वहीं, पीड़ित छात्रा की उसके साथी संजय से इसी अवधि में 4200 बार कॉल पर बातचीत हुई। हालॉंकि छात्रा और उसके परिजन इन आरोपों को गलत बताते हैं और उनका दावा है कि उन्हें बेवजह फॅंसाने की कोशिश हो रही है।

मीडिया रिपोर्टों में पीड़ित छात्रा के हवाले से कहा गया है कि संजय, सचिन और दुर्गेश ने किस से और कितने पैसे मॉंगे इसकी मुझे जानकारी नहीं है। परेशान करने के लिए इस मामले में मेरा नाम शामिल किया गया है। दबाव बनाने की कोशिश हो रही ताकि चिन्मयानंद के खिलाफ हम मजबूत पैरवी न कर सकें। इस संबंध में शनिवार को छात्रा के पिता ने वकीलों से घंटों मशविरा किया। उनका कहना है कि उनकी बेटी का ही उत्पीड़न हुआ और अब उसे ही आरोपित बनाने की साजिश रची जा रही है।

रंगदारी मॉंगने के मामले में गिरफ्तार किए जा चुके संजय, दुर्गेश और सचिन सेंगर को भी शाहजहॉंपुर की उसी जेल में रखा गया है, जहॉं चिन्मयानंद बंद है। हालॉंकि अंदर विवाद की कोई स्थिति नहीं पैदा हो इसलिए इन्हें चिन्मयानंद की बैरक से काफी दूर रखा गया है। संजय इससे पहले भी जानलेवा हमले के आरोप में जेल जा चुका है।

गौरतलब है कि 25 अगस्त को चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने इस संबंध में मामला दर्ज कराया था। इसके मुताबिक 22 अगस्त को चिन्मयानंद के मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से वाट्सएप मैसेज आया। जिसमें लिखा था कि पॉंच करोड़ रुपए की रंगदारी नहीं देने पर बदनाम कर देंगे। इसके बाद दस सितंबर को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें चार युवक व लड़की बात करते दिखाई दे रहे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जेल में चिन्मयानंद को बमुश्किल नींद आ रही है। बताया जा रहा है कि शनिवार को विधायक मानवेंद्र और रोशन लाल ने उससे जेल में मुलाकात की। हालॉंकि दोनों विधायकों ने इससे इनकार किया है।

हाउडी मोदी: ‘PM मोदी के साथ ट्रंप का मंच साझा करना पाकिस्तान के मुँह पर करारा तमाचा’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार शलभ शैली कुमार ने ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है । उन्होंने कहा कि हाउडी मोदी कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्टेज साझा करना पाकिस्तान के मुँह पर करारा तमाचा है।

बता दें कि, शलभ शैली ट्रंप के चुनावी अभियान के दौरान उनके सलाहकार थे। शैली अमेरिका में जाने-माने उद्योगपति है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के कार्यक्रम को अमेरिका की तरफ से आयोजित करना अमेरिकी प्रशासन का भारत को बड़ा समर्थन है। शैली ने कहा कि प्रेसिडेंट ट्रंप यहाँ आने के लिए तैयार हुए और पीएम मोदी के साथ स्टेज साझा करने के लिए राजी हुए, यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के मुँह पर तमाचा है।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जम्मू-कश्मीर मसले पर मध्यस्थता की बात पर शैली ने कहा, “इस तरह के सवाल उठाए जा रहे थे कि क्या राष्ट्रपति ने कश्मीर मसले पर मध्यस्थता के लिए कदम बढ़ाया है? लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि कुछ मुश्किल सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ने यह बात कही थी।” आगे उन्होंने कहा “अमेरिकी सरकार और डोनाल्ड ट्रंप का रुख पहले ही दिन से इस मसले पर बिल्कुल साफ रहा है। 15 अक्टूबर 2016 को ट्रंप ने साफ कहा था कि अगर वह चुने जाते हैं तो व्हाइट हाउस में भारत उनका सबसे अच्छा मित्र होगा और हम हिंदुओं से प्यार करते हैं।”

व्यापार को लेकर चल रहे मसलों के बारे में कुमार ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कोई बड़ा ट्रेड विवाद नहीं है। कुछ मसले हैं, जिन्हें सुलझा लिया जाएगा। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (सितंबर 21, 2019) को ह्यूस्टन पहुँचे। वे आज यहाँ हाउडी मोदी कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शिरकत करेंगे। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में 50,000 लोग हिस्सा लेंगे।

मुंबई मेट्रो: ऐसे बॉलीवुड वालों को जब दो टके का नचनिया कहा जाता है तो बुरा नहीं लगता

जब पेट में भोजन हो, घर में शीतोष्ण तापमान की समुचित व्यवस्था हेतु वातानुकूलन यंत्र काम कर रहे हों, कहीं जाना हो तो कार उपलब्ध हो, सड़के सपाट हों, हवाई जहाज में चढ़ने पर आपकी समस्या हो कि ‘ओ माय गॉड, दैट टर्बुलेन्स फ्रीक्ड मी आउट!’, तब आप खाली समय में एक छद्म-एक्टिविस्ट बन जाते हैं। छद्म एक्टिविस्ट वो लोग होते हैं जिनकी सारी संवेदना, सारा ज्ञान मुद्दे पर नहीं, समय, सरकार और विचारधारा देख कर निकलती है।

एक जंगल है, जो 1000 एकड़ से बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। वहाँ सरकार को उसकी उतनी ही जमीन चाहिए, जिस पर लगभग 2,700 पेड़ हैं। सरकार ने कुछ पेड़ों को एक जगह से उठा कर दूसरी जगह लगाया और इस कटाई से होने वाले नुकसान की भरपाई, इसका छः गुणा ज्यादा पेड़ लगा कर करेगी। फिर कुछ एक्टिविस्ट पिक्चर में आते हैं जिन्होंने इस मुद्दे को ऐसे दिखाया है कि पूरा जंगल ही काटा जा रहा है, और अब तो विपदा आने वाली है। भाजपा सरकार तो बस बर्बादी फैला रही है।

विकास बनाम पर्यावरण

कभी सोचिए कि हम जिस घर में रहते हैं, जिस सड़क पर चलते हैं, जिस ट्रेन से लम्बी यात्रा करते हैं, जिस मॉल में खरीदारी करते हैं, जिस फूड कोर्ट में खाना खाते हैं, जिस विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते हैं, इन सारी जगहों के वहाँ होने से पहले वहाँ क्या था? क्या ये सारी जगहें रेगिस्तानों में बनाई गई थी? क्या ये बड़े-बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट, ये छः और आठ लेन के हाइवे और एक्सप्रेस वे, ये रेल की डबल लाइन, चमचमाते मॉल्स, कारों की फ़ैक्टरियाँ, पावर प्लांट, या कोई भी ढाँचा क्या ऐसी जगह पर बनाया गया जहाँ पहले कुछ भी नहीं था?

जनसंख्या बढ़ती जाती है, नई तकनीक आती है, सरकारों से हम बेहतरी की उम्मीद करते हैं, हमेशा चिल्लाते हैं कि हम कब तक विकासशील या अविकसित देश रहेंगे, हम क्यों नहीं अमेरिका बन रहे। विकास से क्या मतलब है? विकास से मतलब है नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर करने के साथ-साथ, उनके दैनिक जीवन के हर कार्य में सुगमता आए। जैसे कि उसके पास खाने को हो, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा मिले, घर से कहीं जाने के लिए सड़कें सही हों, बिजली की सुविधा हो… आप अपनी इच्छा के हिसाब से इसमें और भी चीजें जोड़ते जाइए।

जैसे-जैसे समय बीतता है, जनसंख्या बढ़ती है, राष्ट्र की अर्थव्यवस्था बेहतर होती है, उसका असर हर नागरिक पर दिखता है। आज से पचास साल पहले जब मध्यम वर्ग बेहतर जीवन के बारे में सोचता होगा तो उसके लिए रात में बिजली का होना भी पर्याप्त लगा करता होगा। वो अपने घर में कार रखने की नहीं सोचता होगा। टेलिफोन एक लग्जरी हुआ करती होगी। टीवी का होना एक ऐसा सपना होता होगा जो मुहल्ले में ही किसी एक व्यक्ति के पास हुआ करता होगा।

समय बदलता गया, हर सरकार ने अपने समय के हिसाब से, उन नागरिकों की जरूरतों के लिए काम किए। बिजली के लिए पावर प्लांट बने, पहले दो, फिर दस… सुगम आवागमन के लिए पतली सड़कें बनीं, जो बाद में चौड़ी हुईं, फिर पतली सड़कें गाँवों में पहुँची, फिर छोटे शहरों की सड़कें चौड़ी हुईं, फिर एक्सप्रेस वे बने… लोगों ने कार लेना शुरु किया, डिमांड बढ़ा होगा तो फ़ैक्ट्री बनी होगी। घरों में एसी लगने लगे।

फिर नौकरियों के बढ़ने के कारण ऑफ़िस स्पेस बने। लोग गाँवों से शहरों की ओर निकले। शहरों में जमीन उतनी ही थी, लोग बढ़ते गए। नए घरों की जरूरत पड़ी, तो आवासीय परिसर बने, नए कॉलेज खुले, कार्यलयों के लिए बड़ी-बड़ी इमारतें बनीं। इन कार्यालयों तक पहुँचने के लिए एसी बस चले, एसी कारें चलीं, मेट्रो ट्रेन चली।

विकास हमेशा पर्यावरण को नुक़सान पहुँचाता है

कहने का तात्पर्य यह है कि विकास के कार्यों के लिए, ऊपर देखती अर्थव्यवस्था के लिए, नागरिकों के जीवन स्तर की बेहतरी के लिए आप उसी जमीन का दोहन करते हैं, जो आपके पास है। अगर मुंबई में ट्रैफिक की समस्या है, तो उसके लिए सरकार को मेट्रो ट्रैक बनाना होगा। वो मेट्रो ट्रैक उसी इलाके से जाएगी जहाँ से उसे एक जगह से दूसरी तक जाने के लिए कम से कम दूरी तय करनी पड़े। और आपको पता ही है कि मुंबई में रेगिस्तान तो है नहीं कि वहाँ से ट्रैक निकाला जाए या मेट्रो के डिब्बों के डीपो के लिए समंदर में प्रोजेक्ट लगाया जाए।

वैसा करना निहायत ही बेवकूफी की बात होगी। कुछ चीजें आपको करनी होती हैं क्योंकि वैसा करना वृहद परिदृश्य में उचित होता है। ऐसा नहीं है कि सरकार बस पेड़ काट ही रही है। इस प्रोजेक्ट के लिए तो छः गुणा पेड़ कटने के बदले लगाए जा ही रहे हैं, इसके अलावा हर हाइवे के किनारे सरकार ने सवा अरब पेड़ लगाने का भी लक्ष्य लिया है और उसके लिए काम भी चालू है। तो, ये पेड़ किसके लिए लगाए जा रहे हैं?

इसी तरह की वाहियात बात विकसित देश करते हैं कि पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है इसलिए विकासशील देश पावर प्लांट न लगाएँ, ये न करें, वो न करें! मतलब, आपने अपने विकास के लिए पर्यावरण को बर्बाद कर दिया, फ़ैक्ट्री लगाए, पावर प्लांट बनाए, कारों से जमीन पाट दी, हर घर में एसी और हीटर चल रहे हैं, लेकिन गरीब देश अपने नागरिकों को बिजली भी न दे!

विकास के प्रोजेक्ट्स चुनाव नहीं, मजबूरी हैं। कौन चाहता है कि वो ट्रैफिक में फँसा रहे? कौन चाहता है कि बिजली हमेशा न हो? क्या हाल ही में अर्थव्यवस्था पर लोग ज्ञान नहीं दे रहे थे कि जीडीपी ग्रोथ कम हो रही है? आखिर ये सड़कें अर्थव्यवस्था में योगदान नहीं देती जब ट्रकों से सामान नियत समय से पहुँचता है? आखिर ये मेट्रो जो लाखों लोगों को हर दिन कहीं से कहीं ले जाता है, धुआँ नहीं छोड़ता, स्टेशनों के ऊपर सोलर पैनल लगा कर आत्मनिर्भर होना चाहता है, तो क्या उससे राष्ट्रहित के कार्य नहीं होते? क्या इससे इकॉनमी की बेहतरी नहीं होती?

यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि गरीबों के पेट में अन्न भी जरूरी है और चंद्रयान भी। विज्ञान और तकनीक में विकास, वैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करना अंततः उस आखिरी इंसान की ही मदद है जो हर तरह से उपेक्षित है। विकास के कार्यों का फल धीरे-धीरे नीचे तक पहुँचता है। सड़कें बनेंगी तो व्यापार सुगम होगा, व्यापार सुगम होगा तो लोगों के पास पैसे होंगे खर्च करने को, लोग पैसे खर्च करेंगे तो चीजों का उत्पादन होगा, उत्पादन होगा तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, रोजगार मिलेगा तो सरकार को दोनों तरह के टैक्स का लाभ होगा, उस टैक्स के पैसे से उस गरीब को दो रुपए किलो के हिसाब से गेहूँ देना संभव हो पाएगा।

छद्म-एक्टिविस्ट और इनके मौसमी विरोध

लेकिन हमने हमेशा देखा है कि कई बार एक अस्वस्थ चर्चा पैदा करने की कोशिश होती है जहाँ सड़कें बनाना या फ़ैक्ट्री लगाना एक राक्षसी कृत्य की तरह दिखाया जाता है, और साथ ही, मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के परफॉर्मेंस के नीचे जाने पर भी सरकार को मूकदर्शक कह कर नकारा बताया जाता है। लोग पूछते हैं कि बुलेट ट्रेन की क्या जरूरत है, उसकी जगह इतने हजार ट्रेन आ जाएँगे। फिर तो चंद्रयान की भी जरूरत नहीं, अमेरिका भेज ही रहा है, किताबों में पढ़ लेंगे कि क्या हो रहा है। राजधानी ट्रेन भी क्यों बनाएँ, उतने पैसों में तो लाखों सायकिल आ जाएँगे, जो कि हर नागरिक को बाँट दी जाए ताकि वो पटना से दिल्ली, पहले से ही बनी सड़कों पर रैमसन्स का रेडियो पर ‘लहरिया लूटा ए राजा’ बजाते हुए निकल ले…

ये कुतर्क है क्योंकि अगर आपकी समझ में यह नहीं आता कि टेक्नॉलॉजी से मानवता की समस्याओं को दूर किया जा सकता है, तो आपका विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए है। ये जो लोग विरोध के लिए जुटे हैं, वो वही लोग हैं जिनकी बात शुरुआत में की गई है। इनका पेट भरा हुआ है, घरों में एसी है, कारों में एसी है, बड़ी अट्टालिकाओं में रहते हैं और समय से काम पर न पहुँचना इनके लिए एक वांछित गुण है, “अरे! सर आ गए, शूटिंग चालू करो।”

ये बॉलीवुड के वो सेलिब्रिटी हैं जो किसी व्हाट्सएप्प ग्रुप का हिस्सा हैं जहाँ एक मैसेज फॉर्वर्ड किया जाता है कि फलाँ बात को ट्रेंड कराना है, चर्चा में लाना है। बेचारे कॉपी-पेस्ट करके, एक ही ट्वीट कर देते हैं। वो रीट्वीट होता है, अनभिज्ञ लोग चिंतित हो जाते हैं कि सरकार तो जंगलों को काटने पर तुली है, भावावेश में वो भी हैशटैग-हैशटैग खेलने लगते हैं।

इनके नाम देखिए आप कि ये लोग कौन हैं! ये वही हैं जो हमेशा अपनी फिल्मों के आने पर सक्रिय हो जाते हैं या चुनावों के समय में सिग्नेचर कैम्पेन चलाते हैं। इन्होंने कब किसी मुद्दे को आखिरी मुकाम तक पहुँचाया है, मुझे याद नहीं है। ये बरसाती मेंढक हैं, और उनमें से भी वैसे वाले जिन्हें ये भी किसी व्हाट्सएप्प मैसेज से पता चलता है कि बरसात आ गई है, टर्राना चालू किया जाए।

इसलिए, जब इन्हें कोई दो टके की नचनिया कह कर हिकारत भरी निगाहों से देखता है तो मुझे बुरा नहीं लगता। अगर इस फिल्म इंडस्ट्री के सेलेब्स इस तरह के महामूर्ख और मालाफाइड इंटेशन वाले मोटिवेटेड लोग हैं, तो इन्हें हर तरह से धिक्कारना चाहिए। इनसे उम्मीद की जाती है कि ये लोग विचारधारा से परे जा कर, विवेक का इस्तेमाल करते हुए, या किसी जानकार से समझते हुए, दोनों पक्षों को तौलने के बाद, अपनी राय रखें।

लेकिन होता क्या है? होता है इसके उलट यह कि किसी के कहने पर, अपनी फिल्म के रिलीज के समय, चार लोग दस मिनट के भीतर एक ही तरह की शब्दावली के साथ ट्वीट करते हैं, और अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं यह सोच कर कि वो जागरूक नागरिक हैं।

विकास इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी मेट्रो परियोजना के कारण, धुँआ छोड़नेवाली गाड़ियों में कमी आएगी, लोग अपनी कार छोड़ कर मेट्रो से चलेंगे जिसके परिचालन में पर्यावरण को सीधा नुकसान नहीं होता। आप कहेंगे कि मेट्रो की बिजली भी तो किसी थर्मल पावर प्लांट से आती होगी। आपकी बात बिलकुल सही है, लेकिन एक मेट्रो कोच की लंबाई में तीन से चार कारें आती हैं, जिसमें अगर चार लोग भी बैठें तो कुल सोलह होंगे। जबकि एक मेट्रो कोच में पचास तो सीटें होती हैं, और डेढ़ सौ लोग खड़े हो सकते हैं। ये फर्जी के कुतर्क हैं जहाँ आपको बताया जाएगा कि सड़क पर थूक कर तुमने गलती की है, इसलिए तुम अब किसी बलात्कारी को गलत नहीं कह सकते।

ऐसी परियोजनाओं के आने या न आने से इस तरह के अमीरों को फर्क नहीं पड़ता। वो शायद मेट्रो में कभी नहीं चढ़ेंगे, क्योंकि उनके पास ड्राइवर के साथ कार उपलब्ध है। वो बुलेट ट्रेन पर भी नहीं बैठेंगे, क्योंकि वो हवाई जहाज से आते-जाते हैं। वो अगर सेट पर लेट भी पहुँचेंगे तो उनकी सैलरी नहीं कटेगी। उनके बारे में खबरें छपती हैं कि फलाँ साहब के पास सी-फेसिंग अपार्टमेंट है और उन्हें कारों का बड़ा शौक है। इसलिए ये अपने घर के सामने से फ्लाइओवर के जाने पर भी विरोध करते हैं कि इनके घर का व्यू खराब हो जाएगा, शोर आएगा घर में।

इन्हें इससे मतलब नहीं है कि लाखों लोगों के जीवन में किसी फ्लाइओवर के आने से, मेट्रो ट्रैक बिछ जाने से समय की बचत होगी, क्योंकि पब्लिक के मुद्दे उठाने के नाम पर इन्होंने हमेशा निजी स्वार्थ या फिर किसी व्यक्ति, किसी विचारधारा के प्रति घृणा को हवा दी है। ये कुतर्की लोग हैं जो अपनी मूर्खता में फॉर्मूला वन के रेस पर सवाल उठा देंगे कि ये कार तो एक लीटर में बस दो किलोमीटर चलती है, लेकिन वो भूल जाते हैं कि साल के बीस रेस में, जितनी तकनीक का इस्तेमाल इन कारों में होता है, जितने वैज्ञानिक और इंजीनियर इस पर काम करते हैं, वो अंततः दुनिया की हर कार तक एक नए फीचर के रूप में पहुँचता है। और वही फीचर या तकनीक, पूरी दुनिया के कारों का करोड़ों लीटर तेल बचाती है, सुरक्षित बनाती है और ब्रेकिंग से उत्सर्जित होनी वाली ऊर्जा का पुनः इस्तेमाल कर पाती है।

लेकिन इन्हें क्या, मेकअप पोतना है, व्हाट्सएप्प देखना है, और हैशटैग ट्रेंड कराना है क्योंकि क्यूटनेस में इनका कोई सानी नहीं।

मुस्लिम युवकों ने की मारपीट, शांति भंग करने के आरोप में वाजिद, अकरम, दानिश सहित 8 गिरफ़्तार

राजस्थान के टोक जिले में स्थित टोडसिंहराय कस्बे में मुस्लिम समाज के 8 युवकों को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। बुद्धसागर के रास्ते में ये घटना तब हुई, जब मुस्लिम समाज के कुछ युवकों ने हिन्दू युवकों के साथ कहासुनी की और बात हाथापाई तक पहुँच गई। पीड़ित युवकों ने थाने में मामला दर्ज करा कर कहा कि मुस्लिम युवकों ने उन्हें रास्ते में रोका और फिर मारपीट की

इस मामले में 8 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। गिरफ़्तार आरोपितों के नाम हैं- वाजिद कुरैशी, शाहरूख कुरैशी, मोहसीन, वसीम अहमद मारुफ उर्फ गुल्लु, आजाद मोहम्मद, अकरम व दानिश कुरैशी। इन सभी मुस्लिम युवकों पर शांति भंग करने का आरोप लगाया गया है। इन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। घटना के बाद इलाक़े में तनाव पसरा हुआ है और पुलिस अधिकारी वहाँ कैम्प कर रहे हैं।

‘राजस्थान पत्रिका’ के टोंक संस्करण में छपी ख़बर

मुस्लिम युवक बाइक लेकर बुद्धसागर के रास्ते में रहते थे और लोगों के साथ बदसलूकी करते थे। उन्होंने पीड़ित युवकों को ‘देख लेने’ और मारपीट करने की धमकी दी थी। मुस्लिम युवकों न पीड़ित युवकों के साथ गाली-गलौच भी किया। मुस्लिम युवकों ने ‘अपने मोहल्ले’ का हवाला दिया और बदसलूकी की। फ़िलहाल पुलिस क्षेत्र में कैम्प कर रही है।

चंद्रयान-2 98% सफल, 2020 तक एक और मिशन, 2021 में स्वदेशी रॉकेट से चाँद पर भारतीय: इसरो प्रमुख

इसरो प्रमुख के शिवन ने आज मीडिया से बात करते हुए चंद्रयान-2 और भारत के आगामी अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। चंद्रयान-2 को उन्होंने जहाँ विक्रम लैंडर से सम्पर्क टूटने के बाद भी 98% सफ़ल मिशन बताया, वहीं 2020 तक एक और चंद्र मिशन की तैयारी की बात की। इसके अलावा उन्होंने 2021 तक चन्द्रमा पर भारतीय मानवयुक्त अभियान भेजने की भी बात बताई।

शिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर ठीक वैसे काम कर रहा है, जैसे उसे काम कराना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि उस पर लगे 8-के-8 उपकरण अपना काम भी भली-भाँति कर रहे हैं। शिवन भुबनेश्वर हवाई अड्डे पर IIT-भुबनेश्वर के कनवोकेशन समारोह में शिरकत करने जाने के पहले मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने दोहराया कि हालाँकि खुद वैज्ञानिकों को ऑर्बिटर के केवल एक साल काम करने की उम्मीद थी, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह आने वाले 7.5 साल तक जानकारियाँ देता रहेगा। विक्रम ऑर्बिटर के बारे में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक यह समझने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं कि उसके साथ आखिर गड़बड़ कहाँ और क्या हुई।

दिसंबर 2021 तक चाँद पर भारतीय, छात्रों को रिस्क लेना चाहिए

इसरो प्रमुख ने बताया कि इसरो का अगला बड़ा लक्ष्य गगनयान है। उन्होंने बताया कि संस्था दिसंबर, 2021 तक चन्द्रमा पर मनुष्य को भेजने के लक्ष्य पर काम कर रही है। और उस मिशन में रॉकेट भी भारत में बना हुआ ही होगा। छात्रों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने नपे-तुले जोखिम उठाने और नवाचार (innovation) की आवश्यकता पर बल दिया। “अगर आप चांस नहीं ले रहे, तो जीवन में कुछ भी महत्वपूर्ण हासिल करने का कोई चांस नहीं है। नपे-तुले जोखिम उठाइए। जब आप जोखिम नपे-तुले उठाते हैं, तो सबसे मुसीबत वाली जगहों से खुद को बचा लेते हैं।”

उन्होंने बताया कि वे जिस जगह से आते हैं (इसरो), वह बड़ी विफलताओं और बड़े जोखिमों वाला स्थान है। उन्होंने महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम की तरह बनने की अपील IIT-भुबनेश्वर के छात्रों से की

रुपए दो नहीं तो पैर में से रॉड बाहर निकाल लूँगा: राजस्थान में सरकारी डॉक्टर ने मरीज को धमकाया

राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह में एक मरीज के साथ डॉक्टर द्वारा बदतमीजी करने की ख़बर आई है। डॉक्टर ने मरीज के साथ जबरदस्ती की। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में देखा जा सकता है कि डॉक्टर निवेन्दु द्वारा एक मरीज के परिजनों से रुपए लेने के लिए जबरदस्ती कर रहे हैं। उक्त मरीज के पैर में इलाज के दौरान रॉड लगाया गया था। इसके रुपए को लेकर डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच झड़प हुई।

डॉक्टर ने मरीज से कहा कि अगर रुपए नहीं दिए गए तो वह पैर में डाला गया रॉड वापस निकाल लेगा। रिश्तेदार ‘भामाशाह योजना’ के तहत निःशुल्क इलाज की बात कह रहे थे लेकिन डॉक्टर ने कहा कि प्लेट भामाशाह योजना से नहीं आती है। डॉक्टर ने कहा कि प्लेट बाहर से आती है जिसका इम्प्लांट ख़रीदा गया और दुकानदार को अभी तक इसका पेमेंट नहीं किया गया है।

सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टर ने की मरीज के साथ बदसलूकी (साभार: न्यूज़ 18)

डॉक्टर ने कहा कि इसीलिए वह दूसरे मरीजों को भी इम्प्लांट नहीं दे रहा है। बता दें कि राजस्थान में ‘भामाशाह योजना’ के तहत यह व्यवस्था दी गई थी कि कोई भी इम्प्लांट बाहर से नहीं आएगा जबकि वीडियो में डॉक्टर साफ़-साफ़ कहता दिख रहा है कि उसने प्लेट बाहर से मँगाई है। उक्त मरीज के पास ‘भामाशाह कार्ड’ भी था लेकिन डॉक्टर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। डॉक्टर ने मरीज से कहा कि जल्दी रुपए दो क्योंकि तुम्हारे कारण मेरे बाकि मरीज फँसे हुए हैं।

ऑर्थो विभाग के यूनिट हेड ने सफाई देते हुए कहा कि मरीज तुरंत ऑपरेशन चाहता था, इसीलिए उसके पास ‘भामाशाह कार्ड’ होने के बावजूद भी बाहर से इम्प्लांट मँगा कर उसकी सर्जरी की गई। सवाई मानसिंघ अस्पताल के अधीक्षक ने मामले की जाँच के लिए टीम के गठन की बात कही है। मरीज सत्यनारायण मीणा का सोमवार (सितम्बर 16, 2019) को एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उसका पैर डैमेज हो गया।

कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की हत्या कराई जा सकती है: कॉन्ग्रेस ने जताई आशंका

शारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार की तलाश कर रही है लेकिन वह गायब हैं। राजीव कुमार शारदा चिरफंड घोटाले के जाँचकर्ता थे और उन पर कई प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए घोटाले से जुड़ी फाइलें गायब कराने का आरोप है। इस वर्ष फ़रवरी में जब सीबीआई की टीम कोलकाता स्थित उनके आवास पर पूछताछ के लिए पहुँची थी, तब कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के अधिकारियों को ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने भाजपा की साज़िश का हवाला देते हुए राजीव कुमार के पक्ष में धरना प्रदर्शन किया था।

अब कॉन्ग्रेस ने कहा है कि राजीव कुमार की हत्या कराई जा सकती है। पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने आशंका जताई कि राजीव कुमार से पूछताछ के बाद कई प्रभावशाली लोगों के भेद खुल जाएँगे, इसीलिए उनकी हत्या कराइ जा सकती है। बता दें कि इस मामले में तृणमूल के कई नेता भी आरोपित हैं। मित्र ने कहा कि चूँकि आरोपितों में तृणमूल नेता शामिल हैं, आशंका है कि राजीव कुमार को हमेशा के लिए चुप कराने की कोशिश की जाएगी।

सीबीआई की टीमें अभी भी विभिन्न जगहों पर राजीव कुमार की तलाश कर रही है क्योंकि 4 बार समन भेजे जाने के बावजूद वह एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। राजीव कुमार पर टिप्पणी करते हुए पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने कहा:

“यह बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि राजीव कुमार को गिरफ़्तार किया जाता है और वह मुँह खोलते हैं तो कई प्रभावशाली लोग मुश्किल में होंगे। शारदा चिटफंड घोटाले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई शीर्ष नेताओं एवं मंत्रियों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है और कई को गिरफ़्तार भी कर चुकी है। यही कारण है कि तृणमूल सरकार उन्हें बचाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उन्हें चुप कराने की कोशिश हो सकती है। हमें आशंका है कि उनकी हत्या की जा सकती है।”

हज़ारों करोड़ रुपए के शारदा घोटाले में कई लोगों को चूना लगाया गया था। सोमेन मित्रा के आरोपों पर तृणमूल कॉन्ग्रेस ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। अब देखना यह है कि सीबीआई राजीव कुमार को गिरफ़्तार करने में कब सफल होती है?

जिहाद पर वार: NIA का तमिलनाडु में छापा, IS मॉड्यूल की हो रही तहकीकात

वैश्विक जिहादी संगठन आइएस के तमिलनाडु अंसरुल्ला मॉड्यूल की तहकीकात कर रही आतंकरोधी जाँच एजेंसी NIA ने तमिलनाडु में संदिग्ध ऑपरेटिव के घर छापेमारी की। तिरुनेलवेली जिले में पड़े इस छापे के लिए राज्य की राजधानी चेन्नै स्थित विशेष NIA अदालत ने एजेंसी को इसके लिए वारंट प्रदान किया था। जाँच IS के तमिलनाडु-केरल में सक्रिय माने जा रहे अंसारुल्ला मॉड्यूल के बाबत चल रही है।

3 मोबाइल, 4 सिम कार्ड बरामद

संदिग्ध ऑपरेटिव एम दीवान मुजीपीर के आवास पर पड़े इस छापे के बारे में NIA के एक प्रवक्ता ने मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि छापे में NIA को 3 मोबाइल फ़ोन, 4 सिम कार्ड, एक मेमोरी कार्ड मिलने के अलावा संदेहास्पद दस्तावेज़ भी हाथ लगे हैं। प्रवक्ता का यह भी कहना था कि अपनी जाँच के दौरान NIA को मुजीपीर के अंसारुल्ला मॉड्यूल से जुड़े होने की बात उन्हें पता चली। ज़ब्त दस्तावेज़ों और अन्य चीज़ों को अदालत के सामने पेश किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा। NIA की जानकारी के हिसाब से अंसारुल्ला मॉड्यूल को आइएस के अलावा अल कायदा का भी समर्थन प्राप्त है। इसके पहले इस मामले में NIA ने 9 जुलाई को भी छापेमारी की थी

जिहाद की चल रही थी तैयारी

गत 9 जुलाई को NIA ने 16 आरोपितों के ख़िलाफ़ प्रतिबंधित जिहादी संगठनों आइएस/दएश, अल कायदा और सिमी के प्रति निष्ठा रखने का मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपित व्यक्ति अंसारुल्ला नामक आइएस मॉड्यूल बनाने की तैयारी में लगे थे, ताकि भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा सके। इसके लिए वीडियो और अन्य प्रोपेगंडा सामग्री के ज़रिए लोगों को बरगलाने के अलावा अपने समर्थकों से विस्फ़ोटकों, विष, चाकुओं और वाहनों के ज़रिए जिहाद करने की अपील की जा रही थी।

दो ‘खेपों’ में हुई गिरफ़्तारी

NIA ने इस सिलसिले में हसन अली, हरीश मोहमद, मोहमद इब्राहिम, मीरां ग़नी, गुलाम नबीसत, रफ़ी अहमद, मुन्तशिर उमर बारूक, और फारूक को 13 जुलाई को गिरफ़्तार कर लिया था। इसके बाद 15 जुलाई को मोहमद शेख मैतीन, अहमद अज़रुद्दीन, तौफ़ीक़ अहमद, मोहमद इब्राहिम, मोहमद अफ़ज़ार, मोहिदीन सीनी शाहुल हमीद और फज़ल शरीफ़ को गिरफ़्तार कर लिया गया।

नहीं चलेगा पवार का पावर, BJP को महाराष्ट्र में 200+ सीटें: ABP के ओपिनियन पोल में देवेंद्र के करिश्मे पर मुहर

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव और मतगणना के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने 21 अक्टूबर को चुनाव और 24 अक्टूबर को मतगणना कराने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र के साथ-साथ हरियाणा में भी विधानसभा चुनाव होंगे। इसके साथ-साथ कई अन्य राज्यों में 64 सीटों पर उपचुनाव भी होंगे। लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा और इसमें कॉन्ग्रेस की भी कड़ी परीक्षा होगी। इसी बीच एबीपी न्यूज़ का ओपिनियन पोल भी आ गया है।

महाराष्ट्र में लोगों ने सीएम पद के लिए देवेंद्र फडणवीस को अपनी पहली पसंद माना है और दूसरे-तीसरे नंबर पर आने वाले नेता उनके नजदीक कहीं नहीं ठहरते। ऐसा सामने आया है एबीपी न्यूज़ के ओपिनियन पोल में। देवेंद्र फडणवीस को 39% लोगों ने मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद माना है जबकि 6% लोग उद्धव ठाकरे के पक्ष में थे। बता दें कि उद्धव की शिवसेना भी राजग का हिस्सा है। कॉन्ग्रेस के अशोक चव्हाण को और एनसीपी के शरद पवार को पाँच-पाँच प्रतिशत लोगों ने सीएम के लिए पहली पसंद माना। दोनों ही पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

महाराष्ट्र में कुल विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोजित किए जाएँगे। एबीपी न्यूज़ के ओपिनियन पोल के अनुसार, जहाँ हरियाणा में भाजपा को तीन चौथाई से अधिक सीटें मिल रही हैं, महाराष्ट्र में भी पार्टी बड़ी बहुमत की तरफ बढ़ रही है। भाजपा की सीटों का आँकड़ा 200 पार होता दिख रहा है और ओपिनियन पोल में इसे 205 सीटें दी गई हैं। वहीं कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन मात्र 55 सीटों पर सिमट कर रह जाएगा।

अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो एबीपी के ओपिनियन पोल में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 46% वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं कॉन्ग्रेस-एनसीपी को 30% वोट मिलने का अनुमान है फ़िलहाल इस ओपिनियन पोल से यह साबित हो रहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करिश्मा बरकरार है, वहीं पवार कॉन्ग्रेस के साथ मिल कर भी फ्लॉप साबित होंगे।