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काले जादू से बच्चे की मौत, जिम्मेदार था मुस्लिम आलिम… NDTV और मीडिया गिरोह ने लिखा तांत्रिक

ऐसा अमूमन देखा गया है कि ज्यादातर मीडिया हाउसों ने अक्सर मुस्लिम समुदाय के ढाल बनने की प्रवृत्ति दिखाई है। गुनहगार मुस्लिम होने पर प्राय: ये मीडिया हाउस अपने रिपोर्ट में उसका नाम छुपा लेते हैं और कई बार तो इसे हिन्दू अपराध के साथ जोड़ देते हैं।

ऐसे कई उदाहरण हैं, जब ये मीडिया हाउस मुस्लिमों द्वारा किए गए अपराध को ‘हिन्दू स्पिन’ दे देते हैं। ऐसा ही एक मामला फिर से सामने आया है। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मुस्लिम आलिम द्वारा काले जादू का उपयोग करके किए गए इलाज में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई। मगर मीडिया गिरोह ने इस अपराध को हिन्दू द्वारा किए गए अपराध के रूप में फैलाया।

नकाशीपारा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि अर्फिना बीबी नाम की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि कंथलबेरिया गाँव के मुस्लिम आलिम अल्पना बीबी द्वारा किए गए इलाज के दौरान आई गंभीर चोट के कारण उनका 10 साल का बेटा जान नबी शेख की मौत हो गई और 6 साल के बेटे जहाँगीर शेख हॉस्पिटल में भर्ती है। 

ऑफिसर ने बताया कि अर्फिना बीबी और हलंधर शेख 22 सितंबर को अपने बेटों को लेकर मुस्लिम आलिम के पास इलाज के लिए गए थे। जिसमें से एक की मौत हो गई है और दूसरा अस्पताल में भर्ती है। अधिकारी ने बताया कि अर्फिना बीबी जब 25 सितंबर को वहाँ पहुँची थी, तो उन्होंने देखा कि उनके बेटों का पीठ गर्म तेल, घी और मिर्च पाउडर लगाने की वजह से जला हुआ था।

मुस्लिम आलिम के गिरफ्तार होने पर मीडिया हाउस ने इसे हिन्दू स्पिन देने के लिए मुस्लिम आलिम की जगह ‘तांत्रिक’ लिखा। NDTV, India Today, The Tribune और कई अन्य  मीडिया हाउसों ने PTI द्वारा प्रकाशित की गई उस खबर को आगे फैलाया। जिसमें लिखा गया था कि तांत्रिक द्वारा पारंपरिक तरीके से इलाज के दौरान पश्चिम बंगाल में 10 साल के बच्चे की मौत हो गई।

NDTV की हेडलाइन

बता दें कि तांत्रिक से मतलब तंत्र विद्या अभ्यास करने से जुड़ा है। ये मुख्य रूप से हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ है। मीडिया द्वारा की गई रिपोर्ट से ये संदेश जा रहा है कि अपराध हिन्दू व्यक्ति द्वारा किया गया था। जबकि ये अपराध मुस्लिम आलिम द्वारा किया गया था। पीटीआई की रिपोर्ट में हेडलाइन के बारे में स्पष्ट हिंदू शब्द दिया गया है और मुस्लिम आलिम को ‘तांत्रिक’ कहा गया है। इसके बाद कई मीडिया हाउसों ने इस हेडलाइन में बिना कोई बदलाव किए शब्दशः इस्तेमाल किया।

India Today की खबर

इंडिया टुडे ने इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए खबर की हेडलाइन में ऐसा फीचर इमेज लगाया, जो कि हिन्दू रीति रिवाज की तरह दिखता है। इसमें सिंदूर, फूल और कलावा को प्रदर्शित किया गया है। इसके माध्यम से उसने ये दिखाने की कोशिश की कि ये हिन्दू द्वारा किया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इस तरह के आलिमों को बचाने की काफी कोशिश की जा चुकी है। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार एक महिला ने अजमेर में एक “तांत्रिक” पर दरगाह में नमाज़ अदा करने के बहाने ले जाने के बाद उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। उसी महीने, टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था, “तांत्रिक को बलात्कार और जबरन वसूली के लिए 10 साल की जेल” इसमें आरोपित का नाम वारसी था।

यहाँ तक कि वर्नाक्यूलर मीडिया को भी उसी ट्रिक का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया है। दैनिक जागरण ने किसी कारण से एक उत्पीड़न मामले में आरोपित को हेडलाइन में  “तांत्रिक सूफी बाबा” के रूप में प्रदर्शित किया। हालाँकि, उसके कंटेंट में आरोपित का नाम आफताब बताया गया था। इसी तरह Hindi News18 ने अपने लेख में लिखा, “भूत भगाने के बहाने नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में तांत्रिक गिरफ्तार।” बाद में तांत्रिक की पहचान हाफिज साजिद के रूप में हुई थी।

हिंदू नहीं जाएँगे देश से बाहर, अब कोई रामनवमी पर रोक लगाकर दिखाए: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (अक्टूबर 1, 2019) को कोलकाता में एक जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि एनआरसी से हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को डरने की ज़रूरत नहीं है। एनआरसी से नागरिकता संशोधन विधेयक आएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि इन लोगों को भारत की नागरिकता मिले। शाह ने लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जिताने के लिए बंगाल की जनता का आभार भी व्यक्त किया।

भाजपा अध्यक्ष ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बंगाल का महान सबूत बताते हुए याद दिलाया कि किस तरह जम्मू-कश्मीर में शेख अब्दुल्ला की पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया, जिसके बाद संदेहास्पद स्थिति में उनकी मृत्यु हो गई। शाह ने कॉन्ग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस समझती थी कि मामला ख़त्म हो गया लेकिन उनको मालूम नहीं है कि हम जनसंघ और भाजपा वाले जिसको पकड़ते हैं, उसको छोड़ते नहीं हैं।” शाह ने लोगों को याद दिलाया कि आज़ादी के वक़्त जब पूरा का पूरा बंगाल पाकिस्तान के अंदर जाने वाला था, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंग-भंग करा कर पश्चिम बंगाल की रचना की भी।

उन्होंने ममता बनर्जी के उस बयान का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि एनआरसी लागू होने के बाद लाखों हिन्दू शरणार्थियों को बाहर जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह यहाँ विशेषकर हिन्दू शरणार्थियों को आश्वस्त करने आए हैं, क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है। शाह ने कहा कि किसी भी हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख और ईसाई शरणार्थी को देश छोड़ने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बंगाल में वामपंथियों के शासन के दौरान घुसपैठिए उन्हें वोट देते थे और तब विपक्षी नेता रहीं ममता बनर्जी उन्हें बाहर निकालने की बात करती थीं।

शाह ने कहा कि किसी भी शरणार्थी को जाने नहीं देंगे और किसी भी घुसपैठिए को रहने नहीं देंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को चेतावनी देते हुए कहा कि वह बंगाल में दुर्गा पूजा में भाग लेने आए हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं है कि दुर्गा पूजा को रोक ले क्योंकि अब पहले जैसे हालात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को 18 सीटें देने का कमाल है कि आज किसी की वसंत पंचमी, रामनवमी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रतिबन्ध लगाने की हिम्मत नहीं रही। उन्होंने भ्रष्टाचार पर बात करते हुए कहा:

“ममता बनर्जी बंगाल में आयुष्मान भारत योजना नहीं पहुँचने दे रही हैं। ग़रीबों का इलाज नहीं हो पा रहा है। मेरा ममता और तृणमूल को चुनौती है, आप जितना रोकना चाहो रोक लो, बंगाल में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमें जीत मिलेगी। अगर उनकी लोकप्रियता देखना हो तो ‘हाउडी मोदी’ का वीडियो देख लीजिए, विदेशों में भी उनकी कितनी प्रसिद्धि है। उन्होंने आज तक एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। हमारा कार्यकर्ता एक-एक शरणार्थी के घर जाकर समझाएगा कि उनके साथ कुछ बुरा नहीं होने वाला।”

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता में एनआरसी को लेकर स्थिति स्पष्ट की

भाजपा अध्यक्ष ने इस दौरान कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सभी एक-एक घुसपैठियों को निकाल बाहर करने का संकल्प दोहराएँ। बता दें कि बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर सीएम ममता अचानक से सक्रिय हो उठी हैं और पंडाल-पंडाल घूम कर उद्घाटन कर रही हैं। बंगाल के एक मंत्री का तो दावा है कि उन्हें 30,000 दुर्गा पूजा महोत्सवों से निमंत्रण आए हैं और उनमें से 75 का उद्घाटन वह ख़ुद अपने हाथों से करेंगी।

बाढ़ से बिफरे: अपनी ही सरकार पर बरसे MLA बोगो बाबू, गिरिराज भी बोले- हाँ, मैं बागी हूँ

बिहार बाढ़ की त्रासदी झेल रहा है और पटना की हालत तो यह है कि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी एसडीआरएफ की टीम को रेस्क्यू करना पड़ा। वह परिवार सहित अपने घर में ही फँसे हुए थे। बाढ़ से निपटने को लेकर समुचित तैयारी नहीं करने और लचर राहत अभियान के लिए नीतीश सरकार की किरकिरी हो रही है। केवल विपक्ष और सहयोगी दल ही नहीं, बल्कि जदयू के नेताओं के निशाने पर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं।

बेगूसराय के मटिहानी से विधायक नरेंद्र सिंह उर्फ़ बोगो बाबू ने अपनी ही सरकार को लपेटे में लिया है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार चल रही है। विधायक बोगो बाबू ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को पूर्णतया उदासीन करार दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों (बिहार सरकार व प्रशासन) की मानवीय संवेदना जीरो पर आउट हो गई है (शून्य हो गई है) और उन्हें मानवता से कोई मतलब नहीं है। बोगो बाबू ने आगे कहा;

“AC में बैठना, चार-चक्का AC गाड़ी में बैठ कर बाँध पर घूमते हुए बाढ़ का हालचाल लेना, एनडीआरएफ की नावों से घूम कर जल-विहार करना, ऐसे कृत्यों को मैं मानवीय संवेदना नहीं मानता हूँ। ये लोग बैठ कर घोटाले पर घोटाले कर रहे हैं, लूट मचाए हुए हैं। पन्नी (पॉलोथिन) बाँटे जा रहे हैं। उनका आकार देख कर लगता है कि पता नहीं कौन सी तीन नंबर की (घटिया क्वालिटी की) पन्नी ख़रीद कर लाई गई है। हमारे मवेशी मर रहे हैं। पिछले वर्ष प्रति मवेशी 20 किलो भूँसा वितरण हुआ था जबकि इस वर्ष आधा किलो, एक किलो दिया जा रहा है, जैसे कि भीख दी जा रही हो।”

राज्य सरकार और जिला प्रशासन से परेशान नज़र आ रहे विधायक बोगो बाबू ने कहा कि अब कोई उपाय नहीं बचा है, सिर्फ़ भगवान ही कुछ कर सकते हैं और लोग अब भगवान भरोसे ही रहेंगे। उन्होंने राज्य सरकार के नेताओं व अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा कि वे लोग AC गाड़ियों में घूम-घूम कर समीक्षा करते रहें। विधायक बोगो बाबू का यह बयान काफ़ी वायरल हो रहा है। यहाँ तक कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी उनके बयान का समर्थन किया।

गिरिराज ने कहा कि सच कहना अगर बगावत है तो वह बागी हैं। गिरिराज ने इससे पहले भी नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर निशाना साधा था, जब एक इफ्तार पार्टी के दौरान दोनों इस्लामिक टोपी पहने हुए नज़र आए थे। गिरिराज ने बाढ़ को लेकर बोगो बाबू का बयान ट्वीट करते हुए लिखा कि अधिकारियों का राजनीतिकरण कर दिया गया है। उन्होंने विधायक को अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए धन्यवाद दिया। केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने पिछले दिनों बाढ़ को लेकर शिकायत मिलने पर कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी।

SC/ST ACT: अब फिर से पहले की तरह होगी तुरंत गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना पुराना फैसला

SC/ST Act के प्रावधानों के अंतर्गत शिकायत होते ही बिना जाँच गिरफ़्तारी का प्रावधान वापस आ गया है। पुरानी व्यवस्था की तरह एक बार फिर इस कानून के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति के शिकायतकर्ता के FIR अधिकारी को आरोपित को तुरंत हिरासत में लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए राह प्रशस्त करते हुए अपने ही मार्च, 2018 के उस फैसले को पलट दिया जिसमें उनकी दो जजों की बेंच ने बड़ी संख्या में कानून के दुरुपयोग और झूठे केसों से बेगुनाहों की प्रताड़ना देखते हुए उसे रोकने के लिए बिना जाँच गिरफ़्तारी पर रोक लगाकर अग्रिम जमानत का प्रावधान, आम जनता की गिरफ़्तारी के लिए एसएसपी और लोकसेवक की गिरफ़्तारी के लिए नियोक्ता की अनुमति लेना आवश्यक करने जैसे निर्देश जारी किए थे। मोदी सरकार ने इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर तीन-सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही थी।

कानून का दुरुपयोग जाति नहीं, “मानवीय विफ़लता” से होता है

जस्टिस अरुण मिश्रा, एम आर शाह और बीआर गवई की पीठ के अनुसार अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का संघर्ष अभी भी जारी है। वे आज भी जातिगत आधार पर अस्पृश्यता, दुर्व्यवहार और सामाजिक परित्यक्तता का शिकार होते हैं। उन्हें संविधान के अनुच्छेद 15 में सुरक्षा मिलने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट बेंच के अनुसार, सामाजिक दुर्व्यवहार और भेदभाव झेलना पड़ता है।

18 सितंबर को इस मामले की पहली सुनवाई में ही अदालत ने अपने संभावित फैसले की दिशा को लेकर संकेत दिए थे, जब तीन-सदस्यीय पीठ ने अपनी ही अदालत के दो-सदस्यीय बेंच के फैसले की आलोचना की थी। 20 मार्च, 2018 को दिए गए इस फैसले को संविधान की भावना के प्रतिकूल बताते हुए कहा था, “क्या विधान और संविधान के खिलाफ कोई फैसला केवल इसलिए दिया जा सकता है क्योंकि कानून का दुरुपयोग हो रहा है। क्या किसी व्यक्ति पर केवल उसकी जाति के चलते शक किया जा सकता है? कोई जनरल कैटेगरी का आदमी भी झूठी FIR कर सकता है।”

वहीं कानून के दुरुपयोग और झूठे मुकदमों से बेहाल लोगों के बारे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बताया कि यह “मानवीय असफलता” (“human failure”) के चलते होता है न कि जातिवाद या जाति व्यवस्था के चलते।

पीठ ने कानून के प्रावधानों के अनुरूप ‘समानता लाने’ के लिए कुछ दिशा-निर्देश देने का संकेत देते हुए कहा था कि आजादी के 70 साल बाद भी देश में अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्यों के साथ ‘भेदभाव’ और ‘छुआछूत’ बरता जा रहा है। यही नहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने हाथ से मलबा उठाने की कुप्रथा और सीवर तथा नालों की सफाई करने वाले SC/ST समुदाय के लोगों की मृत्यु पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा था कि दुनिया में कहीं भी लोगों को ‘मरने के लिये गैस चैंबर’ में नहीं भेजा जाता है।

‘पीड़िता जब भी कपड़े उतारने से मना करती थी तो चिन्मयानंद उसके कपड़े जबरन फाड़ देता था’

पूर्व केंद्रीय मंत्री और यौन उत्पीड़न के आरोपित चिन्मयानन्द वाले मामले में एक नया खुलासा हुआ है। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया है कि पीड़िता चिन्मयानंद के सामने जब भी कपड़े उतारने से मना करती थी तो चिन्मयानंद उसके कपड़े जबरन फाड़ देता था।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान एसआईटी ने बताया कि चिन्मयानंद के आश्रम के सुरक्षा गार्ड सहित 4 लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि छात्रा अक्सर ‘दिव्य धाम’ जाया करती थी। जहाँ पीड़िता के मुताबिक उसका बार-बार बलात्कार हुआ। लड़की का कहना है कि उससे धाम में मालिश करवाई जाती थी और उसका वीडियो शूट होता था।

जिला सत्र न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सिंह की मानें तो शिकायतकर्ता ने कई बार बताया कि चिन्मयानंद ने उसका बलात्कार किया और जब उसने खुद को बचाने का प्रयास किया तो चिन्मयानंद द्वारा उसके कपड़े फाड़ दिए गए।

अनुज सिंह ने कहा, “कई ऐसे पहलू हैं जो पीड़िता के बयान की पुष्टि करते हैं। पीड़िता एक छात्रा थी, ऐसे में उसे बार-बार आश्रम में बुलाया जाना भी सवाल खड़े करता है क्योंकि यह उसके शैक्षणिक कार्यों से कोई संबंध नहीं रखता है।“

फाइल फोटो
पुलिस की हिरासत में चिन्मयानंद

बता दें कि मामले में आरोपित और पीड़ित दोनों की जमानत याचिका को शाहजहांपुर की जिला अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया है। दोनों फिलहाल 14 दिन की न्याययिक हिरासत में हैं। जानकारी के मुताबिक पीड़िता ने जेल में बंद होने के दौरान जेल अधीक्षक के माध्यम से एक प्रार्थना पत्र सीजेएम की अदालत में भेजा था। जिसमें पीड़िता ने कहा था कि वह खुद उपस्थित होकर अदालत में अपनी बात रखना चाहती है, क्योंकि वह अधिवक्ता है। लेकिन, कोर्ट ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा था कि मामले की जाँच विशेष जाँच दल द्वारा की जा रही है और इलाहाबाद हाई कोर्ट खुद इसकी निगरानी कर रहा है।

जम्मू को दहलाने की साजिश नाकाम, 18 किलो विस्फोटक बरामद, आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर में जम्मू बस स्टैंड से मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को 18 किलो विस्फोटक बरामद कर सुरक्षाबलों ने आतंकियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। इन खतरनाक विस्फोटकों के साथ बस ड्राइवर और कंडक्टर को भी हिरासत में ले लिया गया। हालाँकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि इन विस्फोटकों का इस्तेमाल कहाँ किया जाना था, लेकिन इस धड़पकड़ को सुरक्षाबलों की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इसके अलावा बता दें कि मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में भी सुबह सुरक्षाबलों ने आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकी को मारकर अपने नाम सफलता दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज सुबह खुफिया इनपुट के आधार पर सतर्कता बरतते हुए जम्मू बस स्टैंड के पास केसी रोड पर सुरक्षाबलों ने एक बस रोकी और उससे 18 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की। इस दौरान सुरक्षाबलों ने बस ड्राइवर और कंडक्टर को भी हिरासत में ले लिया। जाँच में इनके पास से एक नक्शा भी बरामद हुआ, जिसमें बस स्टैंड, एयरपोर्ट और बड़ी ब्राह्मणा सैन्य शिविर के बारे में जानकारी दर्ज है।

कहा जा रहा है कि यह विस्फोटक सामग्री जम्मू के आतंकियों को पहुँचाई जानी थी, लेकिन पूरी सच्चाई क्या है? इसका पता किया जा रहा है। शुरुआती जाँच में खुलासा हुआ है कि 200 रुपए देकर एक महिला ने बिलावर से ड्राइवर को ये पैकेट दिया था और कहा था कि इसे बस स्टैंड पर एक व्यक्ति के हवाले करना है। लेकिन सावाधानी बरतते हुए प्राप्त सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने इसे पकड़कर ये सफलता हासिल कर ली और आतंकी मनसूबों को नाकाम कर दिया।

ड्राइवर की पहचान विक्रम और विजय के रूप में हुई है। सेना ने उन्हें एसओजी पुलिस टीम (SOG Police) को सौंप दिया है। पूरे मामले में जाँच की जा रही है, खुफिया एजेंसियाँ संदिग्ध महिला (पैकेट देने वाली) और उस शख्स की भी तलाश की जा रही है, जो डिलीवरी लेने आया था।

बता दें कि मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में मंगलवार की ही सुबह सुरक्षाबलों को आतंकियों के होने की सूचना मिली। जिसके बाद सेना ने इलाके की घेराबंदी की। खुद को चारों ओर से घिरा देख आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान सेना ने आतंकियों से समर्पण करने की अपील की, लेकिन आतंकियों ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ अभी भी जारी है। इस मुठभेड़ में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया है। सेना की ओर से चलाया ऑपरेशन अभी चालू है। यहाँ भी भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है।

UP में भी NRC! फिंगर प्रिंट डाटा इकट्ठा किया जाएगा, बाहर निकाले जाएँगे घुसपैठिए

असम के बाद अब उत्तर प्रदेश में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) लागू करने की कवायद शुरू हो गई है। योगी सरकार ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों का फिंगर प्रिंट लेकर डाटा इकट्ठा किया जाएगा। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। इसके तहत अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए मसौदा तैयार कर लिया गया है।

राज्य भर में इनकी पहचान के लिए प्रदेश स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक मुख्यालय ने इस संबंध में मसौदा तैयार किया है। डीजीपी मुख्यालय द्वारा तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि इसकी शुरुआत सभी जिलों के बाहरी इलाके में स्थित रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सड़क किनारे बसी नई बस्तियों से होगी। इस अभियान के तहत बांग्लादेश व अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही अवैध नागरिकों के फर्जी दस्तावेज बनानेवाले भी बख्शे नहीं जाएँगे। इस सम्बन्ध में सभी जिले के डीएम और एसपी को निर्देश भेजा जाएगा।

जानकारी के मुताबिक अगर कोई अपने निवास या प्रवास का फर्जी दस्‍तावेज उपलब्‍ध कराएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दस्तावेज का निरस्तीकरण भी हो जाएगा और दस्‍तावेज मुहैया कराने वाले बिचौलिए, कर्मचारी और अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। सत्यापन में चिह्नित अवैध विदेशी नागरिकों को देश से बाहर निकालने के लिए गृह विभाग को सूचित किया जाएगा और बीएसएफ (BSF) की भी मदद ली जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जब से असम में एनआरसी लागू हुई है, देश के कई राज्यों में इसे लागू करने की बात शुरू हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो असम की तरह ही यूपी में भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि असम में एनआरसी को लागू करना एक महत्वपूर्ण और साहसिक कदम था। वहीं, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी इस पर विचार करने के संकेत दिए हैं।

रोती माँ को छोड़ ईसाई युवती ने अपनाया इस्लाम, प्रेमी से निकाह करने भागी दुबई

दिल्ली में रहने वाली 19 वर्षीय सियानी ने अबुधाबी जाकर इस्लाम अपना लिया है। ईसाई परिवार से आने वाली सियानी के इस क़दम से उसका पूरा परिवार सदमे में है। जहाँ उसकी माँ का रो-रो कर बुरा हाल है, वहीं उसके पिता को अभी भी लगता है कि उनकी बेटी का अपहरण हुआ है। उन्होंने इस सम्बन्ध में पुलिस में मामला भी दर्ज कराया था। अब युवती ने ख़ुद आगे आकर कहा है कि न ही उसका अपहरण हुआ और न ही उसे जबरन किसी आतंकी संगठन में शामिल किया गया है। बकौल सियानी, उसने अपने प्यार को पाने के लिए ख़ुद इतना बड़ा निर्णय लिया।

सियानी बेनी के पिता ने पुलिस थाने में अपनी बेटी के गायब होने का मामला दर्ज कराया था। उसके कॉलेज के साथियों ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को एक याचिका भेज कर कहा था कि सियानी को खूँखार वैश्विक आतंकी संगठनों ने अपहृत कर लिया है। उक्त युवती ने बयान दिया है कि वह स्वेच्छा से दुबई गई है और ओपन जीवन का उद्देश्य पूरा कर रही है। उसने कहा कि वह एक वयस्क भारतीय नागरिक होने के कारण अपने फ़ैसले ख़ुद लेने के लिए स्वतंत्र है।

सियानी ने इस्लाम अपनाने के बाद अपना नाम भी बदल लिया है। उसने अपना नया नाम आयशा रखा है। ख़बरों के अनुसार, सियानी ने 18 सितम्बर को सुबह 11.30 तक अपने क्लासेज किए और फिर दोपहर 2.45 में अबुधाबी के लिए फ्लाइट ले ली। वहाँ जाकर उसने इस्लाम धर्म अपना लिया ताकि वह अपने प्रेमी से निकाह कर सके। सयानी और उसके प्रेमी सोशल मीडिया के माध्यम से पिछले 9 महीनों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। उसके माता-पिता मूल रूप से केरल के कोझिकोड से हैं।

उसके माता-पिता के अनुसार, उन्हें भय है कि उनकी बेटी के ब्रेनवाश किया गया है और उसे भटकाया गया है। उसका परिवार मानता है कि ये धोखाधड़ी का मामला है, जिसके जाल में सियानी फँस गई है। सियानी बेनी ने इन सभी आरोपों को नकार दिया है। सियानी ने बताया कि उसने 24 सितम्बर को अबुधाबी के एक कोर्ट में स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया और वह ज़िंदगी भर इसी मज़हबी का पालन करेगी। उसने गृह मंत्रालय, दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को लिखे पत्र में ये बातें कही है।

सियानी को भारतीय दूतावास ने फोन किया। फोन पर भी सियानी ने इन्हीं बातों को दोहराया। उसने कहा कि वह काफ़ी पहले से इस्लाम के प्रति आकर्षित रही है और इसका अध्ययन भी करती रही है। उसने कहा कि अब अरबी में प्रार्थना करती थी, इसलिए उसके परिवार को लगता है कि उसका ब्रेनवाश किया गया है। उसने कहा कि वह अबुधाबी में ही रहना चाहती और और अपने प्रेमी से जल्द ही निकाह करेगी।

गर्लफ्रेंड का सिर दीवार पर मारने वाला मुनीर अकरम UN में PAK का नया डिप्लोमेट

मुनीर अकरम को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में अपना नया स्थायी प्रतिनिधि बनाया है। वे मलीहा लोधी की जगह लेंगे। अकरम की नियुक्ति की जानकारी पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है। लोधी ने भी ट्वीट कर इसकी पुष्टि की है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए अकरम को शुभकामनाएँ दी है। हालाँकि, मलीहा का कहना है कि उन्होंने खुद इस जिम्मेदारी को छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि यह फैसला दबाव में लिया गया है।

मुनीर का कई घोटालों और विवादों से नाता रहा है। 2003 में परवेज मुशर्रफ ने भी उन्हें यूएन में स्थायी प्रतिनिधि बनाया था। उस वक्त वे मरिजाना मिहिक नामक अपनी 35 वर्षीय गर्लफ्रेंड पर हमला कर विवादों में आ गए थे। गर्लफ्रेंड ने आधी रात में अमेरिकी पुलिस को कॉल कर बुला लिया था। बाद में आसिफ अली जरदारी जब राष्ट्रपति बने तो मुनीर को इस पद से हटा दिया गया।

आजतक की खबर के मुताबिक मुनीर अकरम की ये तैनाती काफी विवादों में रही थी। साल 2003 में पाकिस्तान को दो साल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता मिली थी। ऐसे वक्त में मुनीर यूएन की गंभीर चर्चाओं का हिस्सा बनने की बजाए अपने से 22 साल छोटी यूरोपियन मूल की एक लड़की के साथ अफेयर में मशगूल थे। इस लड़की ने बाद में मुनीर पर मारपीट करने और उसका सिर दीवार पर मारने का आरोप लगाया था।

हालाँकि, राजनयिक संरक्षण होने के कारण उस वक्त मुनीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। लेकिन, इस घटना से वैश्विक पटल पर पाकिस्तान की बहुत थू-थू हुई। बाद में पुलिस ने पाक सरकार से माँग की कि मुनीर का राजनयिक संरक्षण खत्म किया जाए ताकि ये मामला कोर्ट के बाहर सुलझ सके।

बाद में जरदारी ने उन्हें यूएन से बाहर का रास्ता दिखाया। कहा जाता है कि जरदारी अपनी पत्नी और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या का मामला वे यूएन तक ले जाना चाहते थे। लेकिन मुनीर इससे सहमत नहीं थे।

उल्लेखनीय है कि मुनीर कश्मीर को लेकर भड़ास निकालने के लिए कुख्यात रहे हैं। वे अक्सर कश्मीरियों को हथियार उठाने के लिए भड़काते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने आर्टिकल 370 हटने पर अपने एक लेख में कहा था कि हुर्रियत की बजाए हिज्बुल जैसे संगठनों को कश्मीर में लड़ाई शुरू करनी चाहिए। यूएन में उनकी तैनाती की एक बड़ी वजह यही है।

ईसाई बहुल मेघालय में छात्र संघ की धमकी के आगे झुका NIT, हटाई भगवान गणेश की प्रतिमा

23 सितंबर को शिलांग स्थित संस्थान के निदेशक सचिवालय के प्रवेश द्वार पर स्थापित एक भगवान गणेश की मूर्ति को छात्र संघ के दबाव के कारण सोमवार (सितंबर 30, 2019) को हटा दिया गया है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) मेघालय के अधिकारियों ने मात्र एक सप्ताह पहले स्थापित हुई मूर्ति को हटाने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि वहाँ के स्थानीय छात्र निकाय का मानना ​​था कि इससे ईसाई बहुसंख्यक राज्य में ‘सांप्रदायिक तनाव’ पैदा हो सकता है।

बता दें कि जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन (जेएसयू) ने गणेश प्रतिमा को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के एनआईटी के फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था। ईसाई-बहुल राज्य के छात्र संघ ने कहा था कि गणेश की मूर्ति की स्थापना अन्य धर्मों के लोगों की भावनाओं को आहत कर रही है।

जानकारी के मुताबिक जेएसयू ने 26 सितंबर को एनआईटी मेघालय के निदेशक विभूति भूषण बिस्वाल को ज्ञापन भेजकर मूर्ति को तत्काल हटाने की माँग की थी। जेएसयू ने कथित तौर पर निदेशक को चेतावनी दी थी कि एनआईटी मेघालय में भगवान गणेश की मूर्ति को मुख्य रूप से परिसर में स्थापित करने के फैसले से ईसाई बहुमत वाले राज्य में ‘सांप्रदायिक तनाव’ पैदा हो सकता है।

छात्र संघ के दबाव डालने के बाद निदेशक विभूति भूषण बिस्वाल ने सोमवार को कहा कि भगवान गणेश की प्रतिमा की कोई ‘स्थापना’ नहीं की गई थी। यह केवल एक ‘सजावटी वस्तु’ थी, जिसे बरामदे में रख दिया गया था। उन्होंने कहा, “इसका कोई धार्मिक एंगल नहीं था।” भूषण बिस्वाल ने कहा कि इस मूर्ति को लेकर धार्मिक मुद्दा बनाने का उनका कोई इरादा नहीं था। छात्रों ने इसे अलग तरीके से ले लिया। जिसके बाद अब इसे हटा लिया गया है।

भगवान गणेश की इस मूर्ति की कथित तौर पर एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मूर्तिकार द्वारा नक्काशी किया गया था। जेएसयू ने प्रशासन को सुझाव दिया था कि गणेश की मूर्ति के बजाय विज्ञान, कला, साहित्य आदि के क्षेत्र से किसी प्रसिद्ध व्यक्तित्व की प्रतिमा की स्थापना करनी चाहिए।