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Howdy Modi कार्यक्रम में 50,000 लोगों को सम्बोधित कर रहे हैं मोदी-ट्रम्प, देखें लाइव Video

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अमेरिका के ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ नामक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम की तैयारी कई दिनों से चल रही थी। कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी हिस्सा ले रहे हैं और उनका भी सम्बोधन होगा। पूरे कार्यक्रम को आप नीचे संलग्न किए गए वीडियो में लाइव देख सकते हैं:

ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में मोदी और ट्रम्प का सम्बोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 50,000 लोग हिस्सा ले रहे हैं। एनआरजी स्टेडियम में आयोजित इस समारोह में कई रंगारंग कार्यक्रम भी होंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने एनर्जी कैपिटल ह्यूस्टन में एनर्जी सेक्टर के सीईओ से मुलाकात की और 50 लाख टन के एलएनजी करार पर हस्ताक्षर किया गया। पीएम मोदी ने कश्मीरी पंडितों और बोहरा समुदाय के लोगों सहित भारतीय समुदाय से मुलाक़ात की।

ज्ञात हो कि 24 सितम्बर को बिल गेट्स फाउंडेशन द्वारा पीएम मोदी को सम्मानित किया जाएगा। उसी दिन वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से दोबारा मुलाक़ात भी करेंगे। ह्यूस्टन से न्यू यॉर्क रवाना होने से पहले पीएम मोदी अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे। उनके कार्यक्रम में कई अमेरिकी नेता भी शामिल हो रहे हैं।

बता दें कि ह्यूस्टन अमेरिकी प्रान्त टेक्सास के एक शहर है, जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। पिछली बार जब न्यू यॉर्क में पीएम मोदी ने ऐसे ही कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, तब 18,000 लोगों ने शिरकत की थी। इस लिहाज से यह उससे भी बहुत बड़ा कार्यक्रम है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और ट्रम्प के लिए भी भारतीय मूल के वोटरों को लुभाने का यह अच्छा मौक़ा है। ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब दो विशाल लोकतंत्र के नेता किसी रैली को एक साथ सम्बोधित करेंगे।

खंड-खंड हो जाएगा Pak, कितने भी आतंकी पैदा कर ले जिंदा एक न जाएगा: राजनाथ

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पटना में आयोजित ‘जन जागरण सभा’ में न सिर्फ़ जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले निर्णय के बारे में बताया बल्कि पाकिस्तान को भी कड़ी चेतावनी दी। राजनाथ सिंह के मंच पर आते ही लोगों ने ‘भारत माता की जय’ के नारे के साथ उनका स्वागत किया। सिंह ने कहा कि जब कभी भारत की सीमा को किसी देश-विरोधी ताक़त से ख़तरा हुआ है, भाजपा और जनसंघ ने उसके ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद किया है।

राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के जन्म के लिए भी अनुच्छेद 370 को ज़िम्मेदार ठहराया। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर को लहूलुहान कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें देखना है कि पाकिस्तान कितने आतंकी पैदा करने की कुव्वत रखता है? रक्षा मंत्री ने इमरान ख़ान के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के नौजवानों को भारत-पाक सीमा पर न जाने की सलाह दी थी। राजनाथ ने कहा कि ये अच्छी सलाह है क्योंकि हमारे जवान सीमा पर तैनात हैं और जो भी आएगा, वह वापस लौट कर नहीं जाएगा।

उन्होंने पाकिस्तान को 1965 और 1971 को न दोहराने की चेतावनी दी। राजनाथ ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर से अपनी नापाक हरकत दोहराई तो पीओके का क्या होगा, इस सम्बन्ध में वह विचार कर ले। राजनाथ ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद जब तक ख़त्म नहीं करता, कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर बात होगी भी तो सिर्फ़ पीओके पर ही होगी। उन्होंने कहा:

“भारत का बँटवारा मज़हब के आधार पर हुआ है। गाँधी और अम्बेडकर नहीं चाहते थे कि भारत के टुकड़े हों लेकिन कुछ सांप्रदायिक नेताओं ने देश का विभाजन कर दिया। मजहब के आधार पर गठित पाकिस्तान की यह हालत हो गई कि 1971 आते-आते बांग्लादेश उससे अलग हो गया। मैं पाकिस्तानी हुक्मरानों से कहना चाहता हूँ कि यदि बलूचों और पख्तूनों के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों का उल्लंघन चलता रहा तो पाकिस्तान को खंड-खंड होने से कोई नहीं बचा सकता। पाकिस्तान अपनी हरकतों की वजह से अपनेआप टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के आतंकियों को पाकिस्तान स्वतंत्रता सेनानी कहता है। उन्होंने पूछा कि किसी एक देश का आतंकी दूसरे देश का स्वतंत्रता सेनानी कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर में 41,500 लोग मारे गए हैं। राज्य में अब तक सुरक्षा बलों के भी 5500 से अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने याद दिलाया कि लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल में भी संसद ने अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया था।

पटना में आयोजित ‘जन जागरण सभा’- राजनाथ सिंह का सम्बोधन 1:28:45 के बाद

राजनाथ सिंह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बात करते हुए कहा कि उन्हें शेख अब्दुल्ला की पुलिस ने जेल में डाल दिया, जहाँ संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। राजनाथ ने कॉन्ग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अनुच्छेद 370 पर अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के नेता अनुच्छेद 370 पर सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

कार्यक्रम को बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे और केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सम्बोधित किया।

वैश्विक मंदी में भी देश की अर्थव्यवस्था के विकास की गति बनाए रखना मोदी सरकार की सफलता

वैश्विक मंदी को लेकर दुनियाभर में उथल-पुथल है। भारत भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं है। यद्यपि पिछले साढ़े पाँच सालों में भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की मोदी सरकार की सफल नीतियों के कारण अन्य देशों की तुलना में भारत इसके प्रभाव से निपटने में सक्षम है। सरकार के वित्तीय, कर, बैंकिंग व संस्थागत सुधारों का सुखद परिणाम यह है कि आर्थिक समीक्षा 2018-19 के वर्ष 2019-20 में अर्थव्यवस्था के 7 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान है। 

आश्चर्यजनक बात यह है कि दुनिया के बड़े देश मंदी से कराह रहे हैं, जबकि वैश्विक वित्तीय संस्थाएँ भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने का अनुमान लगा रही हैं। तो इसका आधार क्या है? केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को जो गति प्रदान की गई है, वह ऐतिहासिक है। यह केंद्र सरकार की सफल आर्थिक व मौद्रिक नीतियों का ही परिणाम है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के विश्व आर्थिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ), जुलाई 2019 की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार विश्व अर्थव्यवस्था एवं ईएमडीई में 0.4 प्रतिशत बिंदु की मंदी के अनुमान के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। 

यद्यपि वैश्विक मंदी से उपजे हालात का प्रभाव भारत पर भी कुछ पड़ा है, पर कुछ राजनीतिक दलों ने निहित स्वार्थ के वशीभूत मंदी के वास्तविक प्रभाव का आंकलन करने के बजाय दुष्प्रचार करके भय का वातावरण उत्पन्न करना प्रारंभ कर दिया है। जबकि केंद्र सरकार इस वैश्विक घटना को लेकर न केवल सचेत है, बल्कि त्वरित व तत्पर कदम उठाकर यह प्रयास किया है कि मंदी का असर भारत की जनता, अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत पर न पड़े।

इसी क्रम में देश की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने हाल ही उपायों की घोषणा की है। इससे पूर्व बैंकिंग सुधार व सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय करके 27 के स्थान पर 12 राष्ट्रीय बैंक रखने तथा इन बैंकों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने का निर्णय महत्वपूर्ण है। सरकार का यह कदम न केवल 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को पूरा करने में सहायक होगा, बल्कि वर्द्धित चालू खाता व बचत खाता एवं अधिक जनसंपर्क होने के कारण अर्थव्यवस्था व जनता दोनों के लिए लाभदायक होगा। 

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में यदि निवेश जारी रहता है तो मंदी से उतना चिंतित होने की आवश्यकता नहीं होती। सरकार द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति की समीक्षा कर कोयला क्षेत्र में कोयले की बिक्री हेतु शत प्रतिशत एफडीआई, कोयला खनन के लिये स्वचालित मार्ग के अंतर्गत संबद्ध प्रसंस्करण अवसंरचना सहित गतिविधियों से सक्षम प्रतिस्पर्धी बाजार निर्माण कर अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने का कदम लाभदायक होगा। 

संविदा के माध्यम से विनिर्माण में स्वचालित मार्ग के अंतर्गत एफडीआई की अनुमति न केवल इस क्षेत्र के विकास में सहायक हो रहा है, बल्कि मेक इन इंडिया के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दे रहा है। सरकार एकल ब्रांड खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिये स्थानीय सोर्सिंग मानकों को आसान बनाकर आधार वर्ष में अधिक निर्यात की पृष्ठभूमि तैयार करके अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित कर रही है।

अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता के लिए उठाए गए इन कदमों के कारण भारत मंदी से उतना प्रभावित नहीं हुआ, जितना कि अन्य विकसित और बड़े देश हुए हैं। देश के बाजार को थामने के लिए सरकार ने जो 5 लाख करोड़ रुपए की चल निधि जारी करने के लिए सार्वजनिक क्षे़त्र के बैंकों में अग्रिम 70 हजार करोड़ रुपए डालने का निर्णय लिया है, वह कॉरपोरेट, खुदरा ऋण ग्राहियों, मध्यम व लघु क्षेत्र के उद्यमों और छोटे व्यापारियों को लाभ पहुँचाएगी। इसके अतिरिक्त मध्यम व लघु उद्योगों के जीएसटी के लंबित भुगतान 30 दिनों के भीतर करने तथा भविष्य के भुगतान 60 दिनों के भीतर करने के सरकार के निर्णय से इस क्षेत्र में तेजी आएगी।

घर, वाहन व उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद को प्रोत्साहन देने के लिये राष्ट्रीय आसावन बैंक द्वारा राष्ट्रीय आवासन वित्त निगम को 20 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी सहायता को बढ़ाकर 30 हजार करोड़ रुपये करना तथा गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों व आवासन वित्त कंपनियों की 1 लाख करोड़ रुपए तक की पूल आस्तियों की खरीद हेतु आंशिक साख गारंटी योजना को प्रत्येक बैंक द्वारा उच्चतम स्तर पर निगरानी किए जाने का निर्णय किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों की सहायक प्रणाली में मध्यम व लघु उद्योग, छोटे व्यापारियों, स्वयंसहायता समूहों तथा सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के ग्राहकों के ऋण ग्राह्यों का त्वरित सहयोग करने को निर्देशित किया गया है।

सरकार के इन कदमों से घरेलू निवेशकों व उद्योग जगत निराशा से बचेगा और अर्थव्यवस्था की गति स्थिर बनी रहने की संभावना है। इसके लिए निम्न उपाय किए गए हैं:

  • केंद्रीय बजट 2019-20 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में और उदारीकरण
  • 25 प्रतिशत कर की निम्न कॉरपोरेट दर के लिए वार्षिक टर्नओवर सीमा को 250 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 400 करोड़ रुपए किया गया
  • विद्युत वाहनों की खरीद पर ऋण के ब्याज से 1.5 लाख रुपए अतिरिक्त आयकर कटौती और विद्युत वाहनों पर जीएसटी दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के लिए जीएसटी परिषद में जाना
  • अवसंरचना विकास के बजट को प्रोत्साहन देते हुए अवसंरचना एवं राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम के पुनर्गठन के द्वारा 100 लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रावधान
  • 1.5 करोड़ से कम वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे दुकानदारों व खुदरा व्यापारियों के लिये 60 वर्ष की आयु के पश्चात 3000 रुपए मासिक की स्वैच्छिक पेंशन योजना का प्रारंभ
  • घरेलू विनिर्माण को अधिक प्रोत्साहन देने के लिये चयनित कच्चे माल व पूंजीगत माल पर सीमा शुल्क में कटौती
  • 6000 रुपए की वार्षिक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का दायरा दो हेक्टेयर से कम भूमिधारकों से बढ़ाकर सभी किसानों के लिए करना

केंद्र सरकार के इन निर्णयों से अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने में भी सहायता मिल रही है और जनता को आर्थिक व वित्तीय संबल भी मिल रहा है, जिससे जनजीवन को मंदी के असर से बचाने में सफलता मिलेगी। रिजर्व बैंक द्वारा रेट में कटौती करके भी जनता को राहत देने का प्रयास किया गया है।

सरकार के इतने कदमों के बाद भी मंदी को लेकर भ्रम व भयावहता फैलाए जाने का ठोस आधार है भी या नहीं? यह समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि 2008-09 की वैश्विक महामंदी के समय की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों में बड़ा अंतर है। मोदी सरकार की मौद्रिक नीतियों की सफलता से भारतीय बाजार का वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में प्रभाव व पैठ दोनों बढ़ा है तथा पश्चिमी देशों के उद्यमी उत्पाद से लेकर तकनीक तक भारतीय बाजारों में ला रहे हैं।

पिछले साढ़े पाँच वर्षों में तुलनात्मक रूप से महँगाई नहीं बढ़ी है और मुद्रास्फीति न केवल नियंत्रण में रही है, बल्कि वर्ष 2014-15 के 5.9 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2018-19 में केवल 3.4 प्रतिशत रह गई है। घरेलू मोर्चे पर आर्थिक वातावरण को उत्साहजनक बनाए रखने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इसके अंतर्गत अभी वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि सितम्बर और अक्टूबर में देशभर के 400 जिलों में बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और खुदरा ऋण लेने वालों की बैठकें होंगी और राष्ट्रीय बैंकिंग वित्त निगम को नकदी उपलब्ध कराकर खुदरा लेनदारों को ऋण दिया जाएगा। साथ ही निर्यात को प्रोत्साहन देने वालो सामानों पर आयात शुल्क में छूट, प्राथमिकता वाले क्षेत्र के अंतर्गत निर्यात ऋण के लिये 36 हजार करोड़ से 68 हजार करोड़ अतिरिक्त निर्गत किए जाएँगे।

घरेलू कंपनी के किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लेने पर उसके लिए 22 प्रतिशत की दर से आयकर देने का प्रावधान किया गया है। यह विकल्प चुनने वाली कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर भुगतान करने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। एक अक्टूबर, 2019 के बाद बनी नई घरेलू विनिर्माण कंपनियाँ बिना किसी प्रोत्साहन के 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान कर सकती हैं और यह लाभ उन कंपनियों को मिलेगा, जो किसी छूट या प्रोत्साहन को नहीं लेती हैं और 31 मार्च, 2023 से पहले उत्पादन प्रारंभ कर देती हैं। 

नई विनिर्माण कंपनियों के लिए सभी अधिशेषों व उपकर समेत प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत कर दी गई है। जो कंपनियाँ छूट या प्रोत्साहन लेती हैं, उनके लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर की वर्तमान दर भी 18.5 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। कैपिटल गेन टैक्स से सरचार्ज भी हटा लिया गया है। 5 जुलाई 2019 से पूर्व शेयरों की पुनर्खरीद करने वाली कंपनियों पर कर नहीं लगेगा। 

इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा किफायती आवास योजना के अंतर्गत मकान खरीदने वालों को वित्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वाह्य फाइनेंसिंग (ईसीबी) में ढील देने, 31 मार्च 2020 तक 45 लाख रुपए तक के मकान के ऋणों के ब्याज पर डेढ़ लाख रुपए की छूट देने, अटके पड़े किफायती व मध्यम वर्ग आवास परियोजना को पूरा करने के लिए पृथक निधि बनाकर 10 हजार करोड़ रुपये का योगदान देने के निर्णय से भवन निर्माण क्षेत्र में तेजी आने की संभावना है, जो मंदी के कारण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव से बचने का माध्यम बन सकता है। 

सरकार के इन उपायों से अर्थव्यवस्था में घरेलू व वैश्विक निवेशकों का विश्वास बना हुआ है। यह विश्वास मोदी सरकार की दीर्घकालिक व त्वरित आर्थिक नीतियों के सकारात्मक परिणामों के कारण बना है। जैसे कि देश का सामान्य सकल घरेलू उत्पाद 2013-14 में केवल 1.9 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर था, किंतु मोदी सरकार के आने के बाद चार सालों में 2018-19 तक आते-आते यह 42.10 प्रतिशत बढ़कर 2.7 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। 

अर्थव्यवस्था की प्रगति की यह अभूतपूर्व गति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आने वाले पाँच सालों अर्थात 2024 तक 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँचाने के संकल्प के फलीभूत होने का ठोस आधार प्रदान करती है। विश्व बैंक के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में भारत का स्थान 23 से सुधरकर 77वाँ हो गया और यह 2024-25 तक देश की अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर का होकर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का पूर्वाभास है। 

वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी के बावजूद भारत का विश्व में सबसे तेज विकास करने वाला देश बने रहना भी इस ओर संकेत करता है। ये अनेक संकेत यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि मंदी को लेकर विपक्षी दलों द्वारा मचाया जा रहा हो-हल्ला तथ्य-आधारित कम और राजनीति-प्रेरित अधिक है।

कागज़ माँगे तो गाड़ी लेकर फ़रार हो गए सपा विधायक नाहिद हसन, खोज रही पुलिस की 11 टीमें

उत्तर प्रदेश के कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन को समर्थकों संग मिल एसडीएम को धमकी देना और गाड़ी के कागज़ात न दिखाना भारी पड़ता दिख रहा है। पुलिस ने उन्हें गाड़ी का कागज़ दिखाने के लिए पाँच दिनों की मोहलत दी थी, जिसकी समय सीमा समाप्त हो चुकी है। उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी व सर्च वारंट जारी किया जा चुका है और पुलिस टीम उनके घर पर दबिश दे रही है। विधायक संदिग्ध गाड़ी के साथ फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस की 11 टीमें उनकी तलाश में लगी है।

सपा विधायक नाहिद हसन अगर फरार रहते हैं तो उनके ख़िलाफ़ कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही उन पर इनाम भी घोषित किया जाएगा। कई थानों की पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान उनके आवास पर कैम्प कर रहे हैं। उनके ख़िलाफ़ विभिन्न थानों में 11 संगीन मामले दर्ज हैं। सुरक्षा बलों ने उनके घर को घेर कर तलाशी अभियान चलाया। शामली जिले के एसपी ने भी इसकी पुष्टि की है कि विधायक संदिग्ध गाड़ी लेकर समर्थकों समेत फरार हो गए हैं।

समाजवादी पार्टी विधायक नाहिद हसन पर धोखाधड़ी, जानलेवा हमला करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और अभद्रता करने समेत कई मामले दर्ज हैं। ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी होने के कारण उनकी गिरफ़्तारी तय मानी जा रही है। उनके संभावित ठिकानों पर पुलिस की दबिश जारी है और लखनऊ में उच्चाधिकारियों को भी पल-पल की अपडेट दी जा रही है। लखनऊ के साथ-साथ दिल्ली में भी पुलिस की टीमें भेजी गई हैं। जिले के डीएम और एसपी ने भी दिन भर कैराना में ही डेरा डाला। कैराना में सुरक्षा के लिए चेकपॉइंट्स बनाए गए हैं।

कैराना में एक दर्जन से भी अधिक चेकपॉइंट्स बनाए गए हैं। शहर के बाहर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। डीएम अखिलेश सिंह और एसपी अजय कुमार ने पुलिस बल समेत इलाक़े में पैदल मार्च किया ताकि जनता में भय का माहौल न बने। उन्होंने सीसीटीवी के माध्यम से घटनाक्रम पर नज़र रखा। विधायक का आवास आलदरम्यान में है, जिसे एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

पूरे तलाशी अभियान की वीडियोग्राफ़ी भी कराई गई। पुलिस बलों ने कैमरा और मोबाइल से पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की। विधायक पक्ष ने प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए कैराना में 1 लाख लोगों के साथ धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति माँगी थी लेकिन उनकी एक न चली। एसपी ने बताया कि सारी कार्रवाई कोर्ट से ऑर्डर लेकर और स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर की जा रही है।

जरूरी नहीं कि सारे मुस्लिम 4 निकाह करे और सबसे बच्चे पैदा करें: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन ऐक्ट 2019 अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। इस संशोधन के मुताबिक जिनके दो से अधिक बच्चे होंगे वे पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

इसके विरोध में दाखिल याचिकाओं को गुरुवार को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने यह बात कही। इनमें से कुछ याचिकाएँ एक्ट के अन्य प्रस्तावों के खिलाफ भी थी। यह एक्ट 25 जुलाई 2019 मान्य होगी। इसका मतलब है कि 25 जुलाई से पहले जिनके तीन बच्चे हैं, वे चुनाव लड़ सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और आलोक वर्मा की संयुक्त खंडपीठ गुरुवार को मामले में दायर याचिकाओं पर फ़ैसला सुनाया। दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने दो-बच्चे के मानक नियम के ख़िलाफ़ अपील करते हुए कहा था कि देश में समान नागरिक संहिता नहीं है। ऐसे में पंचायती ऐक्ट का प्रावधान अल्पसंख्यक विरोधी है। यह अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि क़ानून मुस्लिम पुरुष को एक से अधिक बीवी रखने की अनुमति देता है, ऐसे में उसकी हर पत्नी से एक बच्चा होना तो लगभग तय है। इसलिए यह दो बच्चों का नियम उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

अदालत ने इस तर्क को ख़ारिज करते हुए कहा कि धर्म या क़ानून के अनुसार किसी चीज की अनुमति होने का मतलब यह नहीं है कि वह अनिवार्य है। मुस्लिमों को चार शादी करने की अनुमति है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी मुस्लिमों को चार महिलाओं से निकाह और सबसे बच्चे पैदा करने ही होंगे। अदालत ने यह भी कहा कि केवल मुस्लिमों के दो से अधिक बच्चे होने का आधार भी ग़लत है। अदालत ने कहा कि इस मामले में 21 याचिकाकर्ताओं में से सभी ने दो से अधिक बच्चे होने की बात स्वीकार की है। जबकि इनमें केवल एक मुस्लिम है, वह भी एक महिला।

उत्तराखंड पंचायत राज चुनावों के लिए दो बच्चों का मानक नियम लागू करने वाला पहला राज्य नहीं है। कई अन्य राज्यों ने भी यह नियम लागू किया है। ऐसे कई क़ानूनों को अदालत में चुनौती दी गई थी, लेकिन उन सभी विरोधों को उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया था।

ख़बर के अनुसार, उत्तराखंड के 12 ज़िलों में तीन चरणों में 6 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक पंचायत चुनाव होंगे। चुनाव के नतीज़ों की घोषणा 21 अक्टूबर को होगी। प्रदेश के निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट के अनुसार, प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया 20 सितंबर को नामांकन पत्रों के भरने की शुरुआत से होगी।

‘इस्लामिक देशों के मुकाबले भारत के मुस्लिम भाग्यशाली, कर सकते हैं किसी भी इस्लामी परंपरा की उपासना’

पद्म भूषण से सम्मानित और दो दशकों तक बीबीसी दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रहे पत्रकार और लेखक मार्क टली का कहना है कि इस्लामिक देशों के मुकाबले भारत में मुस्लिम “अधिक भाग्यशाली” हैं, क्योंकि यहाँ वे किसी भी इस्लामिक परंपरा की उपासना कर सकते हैं।

एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में, जहाँ वो रहते हैं, वहाँ तब्लीगी जमात का मुख्यालय है और वे बेहद “सख्त और रूढ़िवादी” हैं। उन्होंने कहा कि उसके ठीक बगल में सूफी परंपरा का केंद्र है, जहाँ लोग निजामुद्दीन औलिया के मकबरे की पूजा करते हैं और कव्वालियाँ गाते हैं।

द इक्वेटर लाइन पत्रिका के ताजा अंक में टली के हवाले से लिखा गया है, “भारत की सहिष्णुता की भावना उसकी ताकत है, जिससे विभिन्न धर्मों के लिए साथ-साथ मिलजुल कर रहने का सद्भावपूर्ण माहौल बनता है।”

टली के मुताबिक भारत अनूठा है और ये सभी धर्मों का घर है। उन्होंने कहा, “भारत में आध्यात्मिकता है। इस्लामी देशों के मुस्लिम के मुकाबले भारत में मुस्लिम अधिक भाग्यशाली हैं, क्योंकि भारत में वे किसी भी इस्लामी परंपरा में पूजा या उपासना कर सकते हैं।”

पत्रिका के इसी अंक में ब्रिटेन के टिम ग्रांडेज का भी एक लेख है, जो 32 साल पहले कोलकाता में एक बैंकिंग अधिकारी के रूप में आए थे। बाद में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और झुग्गी-बस्तियों के बच्चों के लिए काम करने लगे। उन्होंने एक धर्मार्थ संस्था फ्यूचर होप भी बनाई है।

ग्रांडेज ने लिखा है कि उन्होंने यहाँ के इन बच्चों से बहुत कुछ सीखा है। जैसे किसी पर विश्वास करना, किसी की देखभाल करना, अवसर, प्रतिबद्धता और सहिष्णुता के मूल्य को जानने के साथ ही दूसरों से बात करना और उनकी भी बात सुनना सीखा। इसके अलावा, उन्होंने इन बच्चों से ये भी सीखा कि एक गिलास को आधा भरा हुआ देखना है, न कि आधा खाली देखना।

गौरतलब है कि हाल ही में मार्क टली ने कॉन्ग्रेस की ‘धर्मनिरपेक्षता’ पर सवाल उठाते हुए हिन्दुओं की उपेक्षा के लिए उसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय संदर्भों में धर्मनिरपेक्षता उपयुक्त शब्द नहीं है। धर्मनिरपेक्षता में सभी धर्मों के प्रति शत्रुता का भाव है या फिर उदासीनता का। भारतीय न तो धर्म के प्रति शत्रुता रखते हैं और न ही उदासीन हैं। उन्होंने हिन्दू धर्म के संदर्भ में कहा था कि यह धर्म सहिष्णु होने और अन्य धर्म का स्वागत करने पर गर्व करता है, जो कि भारत के इतिहास पर गर्व करने वाली बात है।

बाढ़ पीड़ितों से आपकी काफ़ी तारीफ सुनी, दोबारा सुनने को न मिले: गिरिराज सिंह

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र बेगूसराय के बाढ़ पीड़ित इलाक़ों का दौरा किया। गिरिराज ने बाढ़ पीड़ितों की बात सुनी और इस सम्बन्ध में राज्य सरकार व अन्य अधिकारियों से बात कर उनकी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। हालाँकि, इस दौरान वह एसडीओ पर भड़क गए और बीच सड़क उन्हें जमकर फटकार लगाई।

दरअसल, ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री से उक्त एसडीओ की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्होंने अधिकारी की क्लास लगाई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें गिरिराज ने एसडीओ को कैम्प लगाने को कहा।

बाढ़ पीड़ितों की शिकायत के बाद गिरिराज सिंह ने एसडीओ को सुनाई खरी-खरी

वायरल वीडियो में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने अनुमंडल पदाधिकारी से कहा:

“एसडीओ साहब भला गाड़ी से क्यों उतरेंगे? वो तो बाबू हैं, साहब हैं। एसडीओ साहब बहुत बड़े आदमी हैं। मैंने बाढ़ पीड़ितों से आपकी (एसडीओ की) काफ़ी तारीफ (शिकायत) सुनी है। कोशिश कीजिए कि मुझे ये तारीफ दोबारा सुनने को न मिले। आप सरकारी अधिकारी हैं। सारे लोग आपके लिए बराबर हैं। 2016 में बाढ़ के दौरान यहाँ पीड़ितों के लिए कैम्प लगाया गया था। अगर इस बार कैम्प नहीं लगा तो मैं आपके दफ़्तर के बाहर धरना दूँगा। हम जनप्रतिनिधियों से भी ज्यादा आपका दायित्व बनता है। आप पक्षपात न करें।”

वीडियो में देखा जा सकता है कि स्थानीय लोग एसडीओ से काफ़ी नाराज़ दिख रहे हैं। गिरिराज सिंह ने बारिश में भींगते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और लोगों की समस्याओं को जाना। इस दौरान राज्य सरकार के अधिकारी नदारद रहे। गिरिराज ने फोन कर के अधिकारियों को लोगों की समस्याओं के बारे में बताया और बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करने को कहा। अधिकारियों से बात करते हुए उन्होंने उन्हें घर से बाहर निकलने और क्षेत्र में घूमने की सलाह दी।

गिरिराज सिंह ने बिहार के मुख्य सचिव से बात कर उन्हें लोगों की समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य प्रशासन से सहयोग का आश्वासन मिला है। उन्होंने राज्य सरकार से मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने की भी अपील की। उन्होंने राज्य सरकार से माँग करते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए दवाइयों और नाव की व्यवस्था की जाए।

सेक्स रैकेट: फरार RJD विधायक अरुण यादव का सुराग नहीं, जब्त होगी संपत्ति

सेक्स रैकेट मामले में फरार चल रहे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक अरुण यादव के खिलाफ कोर्ट ने कुर्की वारंट जारी किया है। आरा कोर्ट की विशेष पोक्सो कोर्ट ने विधायक के खिलाफ यह आदेश जारी किया है। भोजपुर पुलिस ने वारंट के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। अब विधायक से जुड़ी सारी संपत्ति जब्त की जाएगी। 

बता दें कि, अरुण यादव पटना-आरा देह व्‍यापार व दुष्‍कर्म कांड में फरार चल रहे हैं। उनका मोबाइल अभी तक बंद है। मोबाइल का अंतिम लोकेशन झारखंड में मिलने के कारण माना जा रहा है कि वे बिहार के बाहर भूमिगत हैं।

गौरतलब है कि, 18 जुलाई को देह व्‍यापार गिरोह के चंगुल से निकलकर भागी 11 वर्षीय एक नाबालिग लड़की भोजपुर पुलिस के पास पहुँची। उसने पुलिस को बताया था कि विधायक की करीबी एक महिला उसे विधायक अरुण यादव के पटना स्थित आवास पर ले गई थी़। जहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के बयान वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने उसका दूसरी बार कोर्ट में 164 के तहत कलमबंद बयान दर्ज किया।

इस सेक्स रैकेट का खुलासा होने और RJD विधायक का नाम सामने आने के बाद से ही कुछ लोगों द्वारा किशोरी पर दबाव दिया जाने लगा था। इसके लिए धमकी के साथ प्रलोभन भी दिए जा रहे थे। इसमें शहर के ही एक युवा नेता का नाम सामने आया था, वह आरोपित विधायक का करीबी व एक प्रकोष्ठ के राज्य स्तर का नेता बताया जा रहा है।

पीड़िता के बयान के आधार पर भोजपुर पुलिस ने सेक्स रैकेट की संचालिका अनीता देवी, इंजीनियर अमरेश कुमार, दलाल संजीत और सेक्स रैकेट का संचालक संजय यादव उर्फ जीजा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस के आग्रह पर कोर्ट ने कुर्की का वारंट भी जारी कर दिया है।

इससे पहले, भोजपुर पुलिस ने पास्को कोर्ट में एडीजे-1 आरके सिंह के यहाँ फरार विधायक अरुण यादव के घर इश्तेहार चस्पा करने की भी इजाजत माँगी थी और कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने विधायक के आवास पर इश्तेहार का नोटिस चस्पा कर दिया था।

Video Viral: सरपंच असलम ने हिन्दू विधवा को गोमांस खिलाया, जबरन इस्लाम क़बूल करा अकबर से कराई शादी

बिहार के अररिया ज़िले के बौंसी थाना क्षेत्र के फरकिया पंचायत में एक विधवा महिला का जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह कराने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक आदमी और एक विधवा महिला को रस्सी से बांध रखा है और सरपंच उन्हें भरी पंचायत में छड़ी से पीट रहा है।

दरअसल, इस वीडियो के वायरल होने से मामले ने तूल पकड़ लिया है। ख़बर के अनुसार, विधवा महिला का जबरन धर्म परिवर्तन भी कराया गया। सरपंच की अगुआई में एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने घटना को अंजाम दिया। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित महिला के पिता के आवेदन पर सरपंच समेत 16 लोगों के ख़िलाफ़ बौंसी थाने में FIR दर्ज कराई गई है।

ग्रामीणों ने दोनों के बीच अवैध संबंध होने का आरोप लगाया और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद घटना की सूचना स्थानीय सरपंच मोहम्मद असलम को दी गई। सरपंच अपने दल-बल के साथ घटना-स्थल पर पहुँचा, जहाँ कुल 16 नामज़द व्यक्तियों ने पीड़िता व अकबर के साथ बेरहमी से मारपीट की।

मारपीट के बाद सरपंच के समक्ष सभी आरोपितों ने मिल कर पंचायती की। पंचायती में दोनों को छोड़ने के बदले में 25-25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया गया। पीड़ित के पिता ने कहा कि जान बचाने के लिए दोनों ने अपने-अपने खेत बंधक लगा कर कुल पचास हज़ार रुपए सरपंच को दिए। आरोप यह भी लगाया गया कि जुर्माना देने के बाद भी दोनों का जबरन विवाह कराने से पहले धर्म परिवर्तन करने के लिए गाय का मांस खिलाया।

इसके बाद सरपंच की मौजूदगी में सभी आरोपितों ने मारपीट कर विधवा महिला का अकबर के साथ जबरन शादी करा दी। इस घटना के बाद से दोनों (अकबर और पीड़िता) लापता हैं, काफ़ी खोजबीन के बाद भी दोनों का कुछ पता नहीं चल सका है। महिला के पिता ने आरोपितों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करने की भी माँग की है।

एसएचओ साजीद आलम (बौंसी थाना) ने बताया कि पीड़िता के पिता की शिक़ायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। फ़िलहाल, मामले की जाँच चल रही है। जल्द ही पीड़िता को बरामद कर लिया जाएगा। वहीं, सरपंच ने अपनी ग़लती स्वीकार कर ली है। लेकिन, जुर्माने की रकम वसूले जाने की बात का असलम ने पूरी तरह से खंडन किया।

Article 370 ने 40,000 लोगों की जान ली, हमारी 3 पीढ़ियों ने J&K के लिए बलिदान दिया: शाह

महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा केंद्र सरकार द्वारा पिछले दिनों लिए गए निर्णयों को मुद्दा बना कर चुनावी वैतरणी पार करने की तैयारी में है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के सबसे बड़े फ़ैसलों में से एक है और भाजपा जन-जन तक इसके बारे जानकारियाँ पहुँचाने में लगी है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अनुच्छेद 370 को लेकर अपनी बात रखी।

शाह ने महाराष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का श्रेय पीएम मोदी की इच्छाशक्ति को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से ही देश में एक विधान और एक निशान का सपना साकार हो सका। शाह ने कहा कि अब भारत की संसद से पारित कानून जम्मू-कश्मीर में भी लागू होंगे। वहाँ अब परिसीमन होगा, महिलाओं को प्रोपर्टी के अधिकार होंगे और सफाई कर्मचारियों को उनका हक़ मिलेगा।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के लिए समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 370 और 35ए का जनसंघ और भाजपा शुरू से विरोध करती रही है। शाह के अनुसार, 370 देश के साथ कश्मीर के जुड़ाव में बाधा रही है और साथ ही देश की एकता में भी बाधा रही है। जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पीएम मोदी के साहस और हौसले के कारण अनुच्छेद 370 को उखाड़ फेंका जा सका। शाह ने कहा:

“एक विधान-एक निशान के नारे के साथ श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर गए, उस समय वहाँ जाने के लिए परमिट की ज़रूरत पड़ती थी, लेकिन वो बिना परमिट के गए थे। उन्हें शेख अब्दुल्ला द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और वहीं संदिग्ध परिस्थितयों में उनकी मृत्यु हो गई। राहुल बाबा तो आजकल आए हैं राजनीति में। हमारी 3-3 पीढ़ियाँ कश्मीर के लिए अपना बलिदान देने से कभी पीछे नहीं हटी। अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा के लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं है, भारत माँ को एक और अखंड बनाने का संकल्प है जो मोदी जी ने पूरा किया है। कॉन्ग्रेस को इसमें राजनीति दिखाई देती है और हमें इसमें देशभक्ति दिखती है।

अमित शाह ने कहा कि बँटवारे के बाद पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता नहीं दी गई। जबकि मनमोहन सिंह, आइके गुजराल और एलके आडवाणी जैसे लोग जो देश के दूसरे हिस्सों में बसे वे प्रधानमंत्री और उप-प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचे। शाह ने बताया कि कश्मीर में हिन्दू शरणार्थियों को वोट देने तक का अधिकार नहीं था। अमित शाह ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 के कारण 40,000 लोग मारे गए। उन्होंने इसे आतंकवाद की जननी करार दिया।

जम्मू कश्मीर में सबकुछ ठीक-ठाक न होने की ख़बरों को नकारते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सिर्फ़ 10 थाना क्षेत्रों में ही प्रतिबंधित धाराएँ लगी हैं और 99% लैंडलाइन्स खोल दिया गया है। उन्होंने बताया कि कश्मीर के विकास के लिए भेजे गए 2 लाख 27 हजार करोड़ रुपए वहाँ की जनता तक नहीं पहुँचे और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, क्योंकि वहां ‘एंटी करप्शन ब्यूरो’ नहीं था।

राजनाथ सिंह ने बताया कैंसर

वहीं केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पटना में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अनुच्छेद 370 एक ऐसा कैंसर था, जिसमें जम्मू-कश्मीर में कइयों का ख़ून बहाया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 75% जनता अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के पक्ष में थी।

उन्होंने पाकिस्तान को चुनौती देते हुए कहा कि वह देखना चाहते हैं कि पाकिस्तान कितने आतंकी भेज सकता है, क्योंकि उनमें से एक भी लौट कर वापस नहीं जा सकेगा।

अम्बेडकर नहीं थे पक्ष में: नड्डा

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अनुच्छेद 370 के माध्यम से आदिवासियों का हक़ मारने का काम किया है। उन्होंने इस समस्या के लिए प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि संविधान सभा में कोई भी इसके पक्ष में नहीं था। उन्होंने कहा कि देश के पहले क़ानून मंत्री भीमराव अम्बेडकर भी इसको लेकर राज़ी नहीं थे।

नड्डा के अनुसार, अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्ला से पूछा था कि क्या आप जम्मू कश्मीर में भारतीयों को नागरिकता अधिकार नहीं देना चाहते हैं? अम्बेडकर ने इसे अस्वीकार्य बताया था।