केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब देश में एक पहचान पत्र का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा है कि इस पहचान पत्र में पासपोर्ट, आधार, और वोटर आईडी कार्ड सब कुछ समाहित होंगे। गृह मंत्री ने अपने प्रस्ताव में बैंक अकॉउंट को भी इसी कार्ड से जोड़ देने की सलाह दी है।
गृहमंत्री अमित शाह ने साल 2021 में होने वाली जनगणना को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि आगामी वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना में मोबाइल ऐप का इस्तेमाल होगा। शाह ने कहा है कि इससे हमें कागज से डिजीटल जनगणना की तरफ जाने में मदद मिलेगी।
Union Home Minister Amit Shah: A digital application, an app will be used for population census in the year 2021. It will be transformation from paper to digital census. pic.twitter.com/Xn992vekGz
उन्होंने इस दौरान ये भी कहा कि एक ऐसा सिस्टम भी होना चाहिए कि यदि किसी शख्स की मौत हो जाए तो ऑटोमेटिक उसकी जानकारी पॉपुलेशन डाटा में अपडेट हो जाए।
उन्होंने दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान माँग की कि हम ऐसा कार्ड चाहते हैं जो सभी की जरूरतें जैसे आधार, पासपोर्ट, बैंक अकॉउंट, ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी की जरूरत को पूरा कर सके। जिसकी संभावनाएँ हैं।
Union Home Minister, Amit Shah: Population census is not a boring exercise. It is an exercise that helps to provide people the benefits of the government schemes. National Population Register (NPR) will help government solve many issues in the country. pic.twitter.com/9pcucorhaR
अमित शाह ने बताया कि देश के पहले डिजिटल सेंसस पर कुल 12 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने कहा, “जनगणना कोई बोरिंग काम नहीं होता है। इससे सरकार को अपनी स्कीम लोगों के लिए लागू करने में मदद मिलती है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) कई मुद्दों को सुलझाने में सरकार की मदद करता है। ये देश के इतिहास में पहली बार होगा, जब जनगणना का काम ऐप के जरिए होगा”
उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ देश में अभी आधार की अनिवार्यता पर जनमानस में लगातार बहस चल रही है। उस बीच गृहमंत्री ने पहचान पत्र का ये प्रस्ताव रखा है।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आतंकवादियों को गिरफ़्तार किया है। इन आतंकवादियों की गिरफ़्तारी के साथ ही बीजेपी नेता चंद्रकांत शर्मा और उनके PSO की हत्या और एक अन्य बीजेपी नेता अनिल परिहार की हत्या की गुत्थी भी सुलझ गई है। गिरफ़्तार किए गए आतंकियों के पास से पुलिस ने हथियार व गोला बारूद भी बरामद किया है।
तीनों आतंकियों के बारे में पता चला है कि ये किश्तवाड़ में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हुए थे। आतंकियों की पहचान, निषाद अहमद शेख़, निसार और आज़ाद हुसैन के रूप में हुई है।
IGP, Jammu Zone: So far, we’ve arrested 3 people in these cases. They have been arrested in killing of Chanderkant Sharma(BJP) & his PSO. Among theses arrested people, one is Nisar Ahmad Sheikh, who was part of conspiracy&was present during killing of Anil Parihar (BJP). https://t.co/wxQmFLt3sJ
जम्मू क्षेत्र के आई जी मुकेश सिंह ने बताया, “पिछले एक साल में किश्तवाड़ में 4 आतंकी घटनाएँ हुईं। किश्तवाड़ पुलिस की लगातार कोशिश, सीआरपीएफ, सेना और NIA टीम की मदद से हमने ये चारो केस सुलझा लिए हैं।” इसके आगे उन्होंने बताया,
“हमने इन घटनाओं से जुड़े 3 लोगों को गिरफ़्तार किया है। ये आतंकी नेता चंद्रकांत शर्मा (बीजेपी) और उनके पीएसओ की हत्या में शामिल थे। गिरफ़्तार लोगों में से एक निसार अहमद शेख है जो बीजेपी नेता अनिल परिहार की हत्या की साज़िश में शामिल था।”
ख़बर के अनुसार, इस साल के अप्रैल महीने में बीजेपी के चंद्रकांत शर्मा और उनके पीएसओ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, पिछले साल 1 नवंबर को किश्तवाड़ ज़िले में बीजेपी के प्रदेश सचिव अनिल परिहार और उनके भाई की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इससे पहले सांबा और कठुआ ज़िले में आतंकी हमले की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया गया था। जानकारी के अनुसार आतंकियों की ओर से सांबा और कठुआ समेत कुछ ज़िलों में दहशतगर्द बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने के कोशिश में हैं। सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी में ख़ासतौर पर सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
साल 2003 में जिहादी गतिविधियों में शामिल मोस्ट वांटेड आतंकी अब्दुल वहाब शेख को पकड़कर गुजरात पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जानकारी के मुताबिक जेद्दाह (सऊदी अरब) से अहमदाबाद लौटने के दौरान पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर अब्दुल को हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया। वह साल 1999 से सऊदी अरब में रह रहा था। उस पर बीजेपी और विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं की हत्या की साजिश रचने और आतंकी गतिविधियों के लिए पैसे भेजने का आरोप है।
क्राइम ब्रांच के एसीपी बीवी गोहिल ने बताया , “गुजरात एटीएस, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आतंकी अब्दुल वहाब शेख को गिरफ्तार कर लिया है। सऊदी अरब के जेद्दाह से अहमदाबाद वापस आने पर उसे गिरफ्तार किया गया। उस पर 2003 के एक आतंकी साजिश के लिए धन मुहैया करने के आरोप हैं।”
BV Gohil,ACP Crime Branch,Ahmedabad:Terrorist Abdul Wahab Sheikh has been arrested by Gujarat Anti-Terrorism Squad (ATS),Ahmedabad Crime Branch, while he was returning from Jeddah(Saudi Arabia) to Ahmedabad.He’s accused of providing financial support in the 2003 jihadi conspiracy
उल्लेखनीय है कि साल 2003 में 3 नेताओं की हत्या की साजिश रची गई थी। साजिश के तहत जिन नेताओं पर हमला हुआ उनमें भाजपा नेता हरेन पांड्या एवं वीएचपी के नेता जयदीप पटेल और जगदीश पटेल का नाम शामिल थे। हरेन पांड्या की हत्या कर दी गई जबकि वीएचपी के दोनों नेता बच गए थे।
2003 के इस मामले में पुलिस ने 82 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। जिसमें 12 से ज्यादा आरोपित फरार थे। इनमें से कुछ भागने में विदेश कामयाब रहे थे। ऐसे में गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप जाडेजा ने 16 साल बाद हुई गिरफ्तारी के लिए गुजरात एटीएस को बधाई दी है। उन्होंने कहा, “मैं गुजरात की आतंक निरोधी इकाई (एटीएस) को बधाई देता हूँ। आतंकी अब्दुल वहाब शेख से उसकी भूमिका पर पूरी तरह से पूछताछ की जाएगी।”
Gujarat Home Minister Pradipsinh Jadeja in Ahmedabad: I congratulate the Gujarat Anti-Terrorism Squad (ATS). Terrorist Abdul Wahab Sheikh will be thoroughly interrogated on his role. pic.twitter.com/vimtHLJjYz
भारत के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का तैल चित्र संसद भवन में लगा हुआ है। उनका जन्म बिहार के बेगूसराय जिले स्थित सिमरिया गाँव में आज ही के दिन 1908 में हुआ था। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से लेकर जेएनयू छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार तक वहाँ स्थित दिनकर के प्रतिमा पर लोकार्पण करने पहुँचे। ये तो रही राजनीति की बात। नेता वोट के लिए अक़्सर महापुरुषों का सम्मान करते रहते हैं। लेकिन, दिनकर किसी जाति, धर्म, विचारधारा और क्षेत्र से ऊपर के कवि थे। एक ऐसा लेखक, जो पद्य में महारथी था लेकिन जब गद्य लिखा तो वह भी ऐतिहासिक साहित्य बन गया।
रामधारी सिंह दिनकर समसामयिक समस्याओं के समाधान की तलाश के लिए लिखते थे। वह भारत-चीन युद्ध में भारत की हार पर क्रुद्ध होकर अपने विचारों को प्रकट करने के लिए अपने लेखनी का सहारा लेते थे। उनकी कृतियाँ ‘सम्पूर्ण क्रांति’ के दौरान जयप्रकाश नारायण जैसे महान नेता के लिए भी प्रेरणा बन जाती थीं और वह इसका उपयोग लाखों की भीड़ में ऊर्जा का संचार करने के लिए करते थे। वह राज्यसभा सांसद रहे। वह एक शिक्षाविद थे, जो भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। लेकिन, दिनकर की कृतियों में क्या अलग था?
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक बहुत बड़ी ख़ासियत यह थी कि इतिहास और भारतीय धर्म-ग्रंथों के मामले में उनका ज्ञान अभूतपूर्व था, जिसे जनमानस तक पहुँचाने के लिए उन्होंने अपनी लेखनी का सहारा लिया। वह बात-बात में किसी भी वर्तमान समस्या का समाधान ढूँढने के लिए द्वापर युग जा पहुँचते थे। ख़ुद उन्होंने ‘संस्कृति के चार अध्याय’ और ‘कुरुक्षेत्र’ में ऐसा स्वीकारा है। जब कृष्ण से कर्ण संवाद कर रहा होता है तो उसकी बातों में दिनकर रिश्ते-नातों की महत्ता, त्याग की भावना और वैभव-विलास को लेकर एक उचित विचार-प्रक्रिया को बुन रहे होते हैं।
मनोज वाजपेयी की आवाज़ में ‘रश्मिरथी’ के कुछ अंश
जब मृत्युशैया पर पड़े भीष्म युधिष्ठिर से अपने जीवन के अनुभव साझा कर रहे होते हैं, तब उनके शब्दों में दिनकर शासन चलाने के तरीके और सत्तासीनों के लिए एक नियमावली तैयार कर रहे होते हैं। आज जब पीएम मोदी ‘सबका साथ-सबका विकास’ की बात करते हैं तो तालियाँ बजती हैं। लेकिन, दिनकर ने बिना पक्षपात किए सम्पदा और समृद्धि के मामले में जन-जन की समान भागीदारी सुनिश्चित करने और हर चीज में उनकी समान हिस्सेदारी की बात करते हुए ‘कुरुक्षेत्र’ में लिखा था:
शान्ति नहीं तब तक; जब तक सुख-भाग न नर का सम हो, नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो।
वामपंथी ही कुछ ऐसी ही बात करते हैं लेकिन उनकी विचारधारा में ‘जबरदस्ती’ है, ‘हिंसा’ है और ‘हर प्रकार की सत्ता से संघर्ष’ है, जिसके कारण यह एक तानाशाही रवैये को जन्म देता है, जहाँ दूसरों की बातें सुनी ही नहीं जाती। दिनकर की विचारधारा सभी पक्षों की राय विस्तृत रूप से जानने के बाद ही आकार लेती है। वह द्वापर से आती है। भारतीय संस्कृति से आती है, इतिहास से आती है, धर्म-ग्रंथों की कहानियों से आती है। ‘रश्मिरथी’ में जब स्वयं श्रीकृष्ण कर्ण को पांडव कुल में मिल जाने और बदले में पूरे भारतवर्ष का सम्राट बनने को कहते हैं तो वह अस्वीकार कर देता है। इसकी वजह है ‘दुर्योधन से उनकी मित्रता’। कर्ण दुर्योधन के स्नेह से अभिभूत है और दिनकर उसके शब्दों में मित्रता की परिभाषा कुछ इस तरह बताते हैं:
मैत्री की बड़ी सुखद छाया, शीतल हो जाती है काया, धिक्कार-योग्य होगा वह नर, जो पाकर भी ऐसा तरुवर, हो अलग खड़ा कटवाता है, खुद आप नहीं कट जाता है। जिस नर की बाह गही मैने, जिस तरु की छाँह गहि मैने, उस पर न वार चलने दूँगा, कैसे कुठार चलने दूँगा, जीते जी उसे बचाऊँगा, या आप स्वयं कट जाऊँगा, मित्रता बड़ा अनमोल रतन, कब उसे तोल सकता है धन? धरती की तो है क्या बिसात? आ जाय अगर बैकुंठ हाथ। उसको भी न्योछावर कर दूँ, कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
काफ़ी सुन्दर तरीके से दिनकर ने कर्ण की भावनाओं को शब्द दिया है और उसका पक्ष पेश किया है। कर्ण कहता है कि मित्रता एक घने पेड़ की ठंडी छाया की तरह है और ऐसे पेड़ को छोड़ कर कौन जाएगा? कर्ण का तर्क है कि वह जिस पेड़ की छाया में खड़ा है, उसे कैसे कटने देगा? दिनकर ने कर्ण के शब्दों में मित्रता और धन की तुलना करते हुए लिखते हैं कि मित्रता के आगे वैकुण्ठ तक का भी त्याग करना पड़े तो यह ग़लत नहीं है। दरअसल, रामधारी सिंह दिनकर कर्ण के शब्दों की प्रासंगिकता आज के ज़माने में खोज रहे हैं और द्वापर से एक उदाहरण लेकर अपनी बात को साबित भी कर रहे हैं।
रामधारी सिंह दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ में भीष्म के शब्दों में आज के सत्ताधीशों को शासन करने का तरीका सिखाया है और शत्रु से निपटने का गुर बताया है। भला इसके लिए उन्हें शरशैया पर पड़े भारतवर्ष के उस बूढ़े महावीर से अच्छा कौन मिलता, जिसनें महाभारत जैसे पूरे युद्ध को देखा हो, उसमें हिस्सा लिया हो और कुरुवंश की कई पीढ़ियों को अपना मार्गदर्शन दिया हो। कुरुक्षेत्र में दिनकर शांति की वकालत करते हैं लेकिन ऐसी परिस्थितियों की भी बात करते हैं, जब युद्ध को टाला ही नहीं जा सके। शत्रु को बार-बार क्षमा करने और उसके कुकृत्यों को झेलते रहने का विरोध करते हुए भीष्म ‘कुरुक्षेत्र’ में कहते हैं:
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही। अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है पौरुष का आतंक मनुज कोमल होकर खोता है। क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो उसको क्या जो दंतहीन विषरहित, विनीत, सरल हो।
दिनकर की इस कृति में कवि के मन में अंग्रेजों के अत्याचार से उत्पन्न पीड़ा साफ़ झलक देखी जा सकती है। पांडवों ने पग-पग पर कौरवों को क्षमा किया लेकिन शत्रु इसका ग़लत फायदा उठा कर एक से बाद एक बड़ी ग़लती करता रहा और पांडवों को नुकसान पहुँचाता रहा। दिनकर ने भीष्म के शब्दों को अपनी लेखनी से सँवारते हुए लिखा है कि अत्याचार को सहन करना भी ग़लत है। अत्याचार सहन करने से व्यक्ति की क्षमता जाती रहती है। अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ ज्यादतियाँ हों या पाकिस्तान द्वारा बार-बार की जाने वाली हरकतें, भारत और भारतीयों ने जब भी पलटवार किया है, तभी सफलता मिली है।
दिनकर लिखते हैं कि क्षमा भी वही कर सकता है जो सचमुच बलशाली हो, क्षमतावान हो। भारत-चीन युद्ध के बाद भी वह व्यथित थे। उस समय वह राज्यसभा सांसद थे। नेहरू की नीतियों से ख़फ़ा होकर कहा,
रे, रोक युधिष्ठिर को न यहाँ, जाने दे उनको स्वर्ग धीर, पर, फिरा हमें गाण्डीव-गदा, लौटा दे अर्जुन-भीम वीर। कह दे शंकर से, आज करें वे प्रलय-नृत्य फिर एक बार। सारे भारत में गूँज उठे, ‘हर-हर-बम’ का फिर महोच्चार।
दिनकर ने संसद में अपनी ये कविता तब पढ़ी, जब भारत चीन से युद्ध हार गया था। यहाँ भी देखिए, वह समसामयिक घटनाक्रम की समस्याओं के समाधान के लिए फिर द्वापर पहुँचते हैं और उस समय के शासक युधिष्ठिर को लेकर आते हैं। दिनकर लिखते हैं कि ऐसे समाय में युधिष्ठिर की नहीं बल्कि गदावीर भीम धनुर्धारी अर्जुन की ज़रूरत है। कई लोगों का मानना है कि दिनकर ने नेहरू के लिए युधिष्ठिर का उदाहरण दिया। दिनकर यहाँ भगवान शिव की बात करते हैं, उनके तांडव नृत्य की बात करते हैं और ‘हर-हर-बम’ की बात करते हैं।
राष्ट्रकवि दिनकर पर कुमात्र विश्वास का शो (साभार: ABP News)
रामधारी सिंह दिनकर भारतीय संस्कृति और इतिहास से उदाहरण लेकर आते तो हैं लेकिन सोचिए अगर आज के ज़माने में कोई ऐसा करे तो वर्ग विशेष द्वारा उसे सांप्रदायिक थाने में कितना वक़्त लगाया जाएगा? वह राष्ट्र के लिए और राष्ट्र की जनता के लिए सोचते थे। तभी भरी सभा में देश के पीएम के ख़िलाफ़ बोलने की हिम्मत रखते थे और चोट भी ऐसी कि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। रामधारी सिंह दिनकर की जन्मतिथि 23 सितम्बर है। उनके जीवन के बारे में, उनकी लेखनी के बारे में और उनके विचारों के बारे में चर्चा करने का आज से बेहतर समय भला क्या हो सकता है?
जम्मू-कश्मीर मेंअनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद से घाटी में मौजूद आतंकवादियों का सम्पर्क उनके पाकिस्तान स्थित आकाओं से टूट गया है। ऐसा होने से अब आतंकवादियों को किसी भी तरह का निर्देश नहीं मिल पा रहा है। यह जानकारी भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने सोमवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दी।
उन्होंने कहा कि बालाकोट को पाकिस्तान ने हाल ही में फिर से शुरू कर दिया है। इससे पता चलता है कि बालाकोट प्रभावित हुआ था। वह क्षतिग्रस्त और नष्ट हुआ था। इसलिए लोग वहाँ से चले गए थे और अब वह फिर से सक्रिय हो गया है।
Army Chief General Bipin Rawat: Balakot has been re-activated by Pakistan, very recently. This shows Balakot was affected, it was damaged; it highlights some action was taken by the Indian Air Force at Balakot & now they have got the people back there. pic.twitter.com/IFN7SjJDud
इस कार्यक्रम में पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर का उल्लंघन करता है, लेकिन हमें पता है कि उससे कैसे डील करना है। हमारे जवानों को पता है कि ऐसी परिस्थियों से कैसे निपटना है।
उन्होंने कहा कि क़रीब 500 घुसपैठिए भारत में घुसने की फिराक में हैं। किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए जवान उच्चतम स्तर के अलर्ट पर हैं। विपिन रावत ने कहा, “मुझे लगता है कि कुछ तत्वों द्वारा इस्लाम की व्याख्या इस तरह की जा रही है, जैसे लगता है कि वे व्यवधान पैदा करना चाहते हैं। मुझे लगता है कि हमारे पास प्रचारक हैं जो इस्लाम के सही अर्थ को बता सकते हैं।”
Army Chief General Bipin Rawat: Pakistan violates ceasefire to push terrorists into our territory. We know how to deal with ceasefire violations. Our troops know how to position themselves and take action. We are alert and will ensure that maximum infiltration bids are foiled. https://t.co/88UjUARGHj
सेनाध्यक्ष ने सरहद पर जारी तनाव के संदर्भ में कहा कि हमारी उत्तर-पश्चिम की सीमाओं पर तनाव की स्थिति है। उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश में किसी भी तरह से घुसपैठ न होने पाए। पाकिस्तान का नाम लिए बिना सेनाध्यक्ष ने कहा कि हमारा पश्चिमी पड़ोसी राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और जम्मू-कश्मीर में हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहा है।
ग़ौरतलब है कि पुलवामा में आतंकी हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान स्थित बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। भारतीय वायु सेना की इस एयरस्ट्राइक में जैश के ट्रेनिंग कैम्प ध्वस्त हो गए थे। वायु सेना की रिपोर्ट के अनुसार बालाकोट में उनके 80% निशाने सही लगे।
राजस्थान के अलवर जिले में रविवार (सितंबर 22, 2019) देर रात गौ तस्करी के आरोप में मुनफेद खान नामक शख्स की पिटाई की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि गौ तस्करी के कई मामलों के आरोपित मुनफेद की स्थिति इस घटना के बाद गंभीर है, उसे शाहजहाँपुर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके शरीर में कई फ्रैक्चर आए हैं।
#अलवर जिले में फिर मॉब लिंचिंग भीड़ ने गौ तस्कर को पीटा, गंभीर हालत पुलिस ने भीड़ से बचा कराया अस्पताल में भर्ती देर रात खुसा की ढाणी में वारदात, 3 साथी भागे गाड़ी से 7 गौवंश बरामद आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी गौ तस्करी के केस दर्ज#moblynching@PoliceRajasthan
आजतक में प्रकाशित खबर की मानें तो पुलिस ने बताया कि देर रात खुसा की ढाणी में भीड़ ने मुनफेद खान को घेरा और उसकी गाड़ी से 7 गोवंश बरामद किए। इस दौरान लोगों का गुस्सा उसपर फूट पड़ा और उन्होंने मुनफेद की जमकर पिटाई कर दी।
अलवर में फिर सामने आया मॉब लिंचिंग का मामला, गौ तस्करी के शक में भीड़ ने शख्स की पिटाईhttps://t.co/OmGcghzfaz
हालाँकि, मौक़े पर पहुँची पुलिस ने मुनफेद को बचाकर शाहजहाँपुर के अस्पताल में भर्ती करवाया, लेकिन वहाँ उसकी स्थिति गंभीर हैं। कहा जा रहा है कि भीड़ का शिकार हुआ गौ तस्कर पुलिस की नाकाबंदी तोड़कर भाग रहा था, लेकिन हड़बड़ाहट में वो भीड़ के हत्थे चढ़ गया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी राजस्थान से गौ तस्करी के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ पर गौ तस्करों पर लोगों का गुस्सा फूटता हुआ देखा गया। 1 अप्रैल 2017 को पहलू खान वाली घटना इसका सबसे ज़्यादा सुना हुआ उदहारण है। इसके अलावा साल 2018 में रकबर खान नामक शख्स भी इस आरोप में भीड़ के गुस्से का शिकार हुआ था, तब इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
ह्यूस्टन, टेक्सास में आयोजित मेगा इवेंट में कल रात प्रधानमंत्री मोदी ने दर्शकों को याद दिलाया कि कैसे 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान, डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में भारतीय प्रवासी मतदाताओं से अपील करते हुए ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ कहा था।
#WATCH PM Narendra Modi: We in India have connected well with President Trump, the words of candidate Trump, ‘Ab ki baar Trump sarkar’, rang loud and clear. pic.twitter.com/9WPq9w7eKf
पीएम मोदी ने कहा, “हम भारत में राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ अच्छी तरह से जुड़े हैं, उम्मीदवार ट्रम्प के शब्द, ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’, स्पष्ट हैं।” अक्टूबर 2016 में, अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के दौरान, तत्कालीन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रम्प थे, उन्होंने कहा था कि अमेरिका में भारतीय और हिन्दू समुदाय का ‘दोस्त’ व्हाइट हाउस में होगा। फिर, प्रधानमंत्री मोदी के 2014 के लोकप्रिय चुनावी नारे, ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ का उपयोग करते हुए, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था, ‘अबकी बार, ट्रम्प सरकार’ (इस बार, यह एक ट्रम्प सरकार होगी)।
कल रात, अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रम्प द्वारा उपरोक्त अभियान के नारे को याद किया।
हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेताओं और अन्य मीडिया गिरोहों ने मिलकर झूठ फैलाया कि पीएम मोदी ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प का समर्थन किया।
कॉन्ग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी पर ट्रम्प के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करने का आरोप लगाया और ट्वीट किया और उन्हें यह याद दिलाने की कोशिश की कि वह भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अमेरिका गए थे न कि अमेरिकी चुनावों में स्टार प्रचारक के रूप में।
द हिंदू की को-चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी ने इसे डोनाल्ड ट्रम्प के रीइलेक्शन के लिए ‘वर्चुअल एंडोर्समेंट’ के रूप में घोषित कर दिया।
PM Modi virtually endorses @realDonaldTrump’s re-elections bid as Trump looks on, pleased as punch! Not sure why organisers of this rally didn’t put chairs on the stage for the two leaders to sit!
सागरिका घोष भी झूठ फैलाने में इस फेहरिस्त में शामिल हो गईं।
Abki baar Trump sarkar, (this time its Trump again) says @narendramodi rooting for a @realDonaldTrump win 2020. Break with convention here: should visiting heads of government openly take sides in the domestic politics of the host country? https://t.co/rYoIdY5Tla
अचंभे वाली बात तो यह है कि सागरिका के लेख में स्पष्ट रूप से यह लिखा गया कि पीएम मोदी 2016 के चुनावी नारे का उपयोग कर रहे थे। जिसका सीधा सा मतलब साफ़ निकलकर सामने आता है कि पीएम मोदी आने वाले चुनाव के संदर्भ में बात नहीं कर रहे थे।
पीएम मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे को ब्लूमबर्ग ने भी 2020 के चुनाव के लिए ट्रम्प के समर्थन के रूप में ग़लत तरीके से समझा और प्रस्तुत किया।
अन्य लोगों ने भी यह कहते हुए अपनी अज्ञानता को उजागर किया कि यह पीएम मोदी थे जिन्होंने अब की बार ट्रम्प सरकार का नारा गढ़ा था।
Wow. India’s Modi endorses ‘Candidate Trump.’ He also uses his 2014 campaign slogan for Trump.
प्रधानमंत्री मोदी ने कल रात ह्यूस्टन, टेक्सास में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का स्वागत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज हमारे साथ एक महत्वपूर्ण शख्स मौजूद हैं, इन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं है। इनका नाम धरती का हर व्यक्ति जानता है।”
पीएम मोदी ने इस दौरान विश्व की एनर्जी कैपिटल कहे जाने वाले ह्यूस्टन में अमेरिकी कॉन्ग्रेस के कई नेताओं से मुलाक़ात की। कार्यक्रम में 50,000 लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को अमेरिका के बड़े नेता और अमेरिका के ‘हाउस मेजोरिटी लीडर’ स्टेनी होयर ने भी सम्बोधित किया। होयर ने इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की बात की और पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में बात की।
हरियाणा के बल्लभगढ़ में रविवार (सितंबर 22, 2019) को पृथला विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र वशिष्ठ के लिए आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में दो गुटों की लड़ाई के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आयोजन में पहुँचे पार्टी के सांसद सतीशचंद्र मिश्रा को कार्यक्रम बीच में छोड़कर भागना पड़ा। जानकारी के मुताबिक यहाँ वशिष्ठ की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे लोगाें और समर्थकों में जमकर लाठियाँ-डंडे चले। पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन काफी मशक्कत के बाद वो स्थिति पर काबू पाने में सफल हुए।
बल्लभगढ़- बसपा की मीटिंग में टिकट के दावेदार ग्रुपों में भिड़ंत, मारपीट। Pic Courtesy: Tribune pic.twitter.com/lLB7boVGag
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बहुजन समाज पार्टी की तरफ से पृथला विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र वशिष्ठ रविवार को बल्लभगढ़ की अग्रवाल धर्मशाला में एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने पहुँचे थे। जिसमें सांसद सतीश चंद्र मिश्रा भी शिरकत करने आए थे।
लेकिन जानकारी के मुताबिक इस दौरान कार्यक्रम में विरोधी गुट के वो लोग भी आ पहुँचे, जो गिरीराज जटौला को पार्टी से निकाल दिए जाने को लेकर नाराज थे और वशिष्ठ को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर उनका विरोध कर रहे थे।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जटौला के भाई और उनके कुछ समर्थकों ने इस कार्यक्रम में आने के बाद वशिष्ठ के विरोध में पहले नारेबाजी करनी शुरू की, जिससे दोनों पक्षों में तनातनी बढ़ गई और कुछ ही देर में दोनों ओर से लाठियाँ चलने लगीं। जिस कारण झड़प में वशिष्ठ के 2 कार्यकर्ताओं को चोटें आई।
हालाँकि, पुलिस ने हालातों को काबू पाने के बाद गिरिराज जटौला के भाई को हिरासत में ले लिया और माहौल को शांत करवाया। लेकिन इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो गई, जिस कारण बहुत से लोग इसपर बसपा अध्यक्ष मायावती का नाम उछालकर चुटकियाँ ले रहे हैं।
हाल ही में अपने शो के दौरान बैकग्रॉउंड में युवा सेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे को भावी राहुल गाँधी बताकर आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप एक बार फिर से ट्रोल हो गईं। उनकी इस गलती की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसमें साफ़ सुना जा सकता है कि वो आदित्य ठाकरे की बाइट के पीछे कह रहीं है, “यह शिवसेना का ‘राहुल गाँधी’ साबित होगा। लिखकर रख लीजिए।”
हालाँकि, बाद में अंजना ओम कश्यप द्वारा इस घटना के संबंध में ट्वीट करके खेद व्यक्त किया गया। उन्होंने अपने ट्विटर पर इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “आदित्य ठाकरे पर दिए गए मेरे जिस बयान को विद्वेष के साथ फैलाया जा रहा है वह एक निर्णय संबंधी चूक थी। मैं इसके लिएखेद व्यक्त करती हूँ। मेरे इस बयान कामेरे चैनल या नेटवर्क से किसी भी तरह का संबंध नहीं है।”
My remark on Aditya Thackeray which is being spread with malice was out of lapse of judgement. I regret it. This, by no means, reflects the views of the channel or the network.
यहाँ उल्लेखनीय है कि इस वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद लोगों ने तरह-तरह की बातें करते हुए अंजना ओम कश्यप को खूब खरी खोटी सुनाई। लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता ने तो हद ही कर दी, जब उन्होंने खुले आम एक महिला पत्रकार को अपने ट्वीट के जरिए हिंसात्मक नोटिस दिया।
दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता और NSUI के पूर्व अध्यक्ष कुमार राजा ने अपने ट्वीट में लिखा, “कॉन्ग्रेस के सभी युवा साथियों से अपील है कि जो भी हो कोई नेता या अंजाना ओम कश्यप जैसे बिके हुए पत्रकार, अगर हमारे नेता के बारे में कोई बेहूदा टिप्पणी करते हैं, तो उसको मजबूती से जवाब मिलेगा उसके ही भाषा में और जरूरत पड़ने पर पिटाई भी। जय हिन्द।”
इस ट्वीट के बाद कुमार राजा के समर्थकों की इस पोस्ट पर भीड़ लग गई। लोगों ने न केवल अंजना की इस दौरान आलोचना की बल्कि इस पिटाई वाले संदेश पर लोग ये भी पूछने लगे कि ये कबसे शुरू करना है। किसी ने कहा, कॉन्ग्रेस की महिला नेत्रियों को सुष्मिता देव के नेतृत्व में आजतक के स्टूडियो में घुसकर अंजना का ‘यथोचित सत्कार’ करना चाहिए था तो किसी ने दूसरे दर्शकों से गुहार लगाई कि इस चैनल को देखना बंद करें।
हम गलत दिशा में जा रहे हैं , अभी चाहिए था कि @sushmitadevinc जी के नेतृत्व में @MahilaCongress की नेत्रियां @aajtak के स्टूडियो में घुंसकर @anjanaomkashyap का यथोचित सत्कार करती ! हमने आजतक ये नहीं किया है तभी दो पैसे की बिकाऊ एंकर अपनी हैसियत से ऊपर के बोल बोलकर भी चैन से है !
हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता और उनकी इस इस खुली चेतावनी के बाद शिवसेना के नेता राहुल कालते ने कुमार राजा को उनके बयान पर घेरते हुए पार्टी की विचारधारा पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “राहुल गाँधी अपनी रैलियों में प्यार की राजनीति की बात करते हैं, और उनके युवा नेता महिला पत्रकार की पिटाई की तैयारी कर रहे है। कॉन्ग्रेस पार्टी जैसी ढोंगी पार्टी पूरे ब्रह्मांड में नही मिलेगी।”
.@RahulGandhi अपनी रैलियों में प्यार की राजनीति की बात करते हैं, और उनके युवा नेता महिला पत्रकार की पिटाई की तैयारी कर रहे है। कांग्रेस पार्टी जैसी ढोंगी पार्टी पूरे ब्रह्मांड में नही मिलेगी। https://t.co/EAV8TuFI6P
बता दें कुमार राजा को इस संबंध में कोई फर्क़ नहीं पड़ा। बल्कि वो खुलकर अपनी हिंसात्मक संदेश का समर्थन कर रहे हैं और जो लोग उनके विरोध में बोल रहे हैं, वो उन्हें आपत्तिजनक भाषा में प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जिसका स्क्रीनशॉट एक यूजर ने राहुल कालते के ट्वीट में लगाया भी है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा अपनी विवादित और तीखी टिप्पणियों से आए दिन सुर्ख़ियों में बनी रहती हैं। अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी की लोकप्रियता और कार्यक्रम की सफलता महबूबा के गले नहीं उतर रही है। वे भी इस कार्यक्रम पर तीखी टिप्पणी से बाज नहीं आईं।
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया दर्ज करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाने का फ़ैसला इसलिए लिया गया जिससे राज्य के ‘विशेष हितों’ को सुरक्षित किया जा सके, यह इस देश की विडंबना है। इस फ़ैसले को लेकर कई जगहों पर ख़ुशियाँ मनाई जा रही हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग ही इससे ख़ुश नहीं हैं, जहाँ इसका लाभ सबसे अधिक होने की उम्मीद की जा रही है।
Ironic that a move ostensibly taken to secure “special interests” of J&K gets cheered on everywhere except in the state that’s it meant to benefit. While people in Kashmir have been gagged , mass hysteria is orchestrated elsewhere to justify this decision. https://t.co/Z3cr3BkqDr
बता दें कि यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब महबूबा मुफ़्ती ने मोदी सरकार की आलोचना की हो। फरवरी महीने में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार, राज्यपाल सत्यपाल मलिक के माध्यम से राज्य में आग से खेलने का प्रयास कर रही है राज्य की मुस्लिम बहुल चरित्र को तोड़ने का प्रयास कर रही है। मुफ़्ती ने कहा था कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक को ज़रिया बनाकर केंद्र सरकार जो भी निर्णय ले रही है, वो जम्मू-कश्मीर राज्य के लोगों और उनके हितों के ख़िलाफ़ है।
इसके अलावा, अप्रैल महीने में पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने धमकी दी थी कि अगर बीजेपी या किसी ने भी संविधान के अनुच्छेद-370 को हटाया तो जम्मू-कश्मीर हिन्दुस्तान से अलग हो जाएगा। दरअसल, तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद-370 और 35-A को हटाकर जम्मू-कश्मीर का पूर्ण विलय बीजेपी की देशवासियों के प्रति पुरानी प्रतिबद्धता है, जिसे 2020 में राज्यसभा में बहुमत मिलने के बाद पूरा किया जाएगा।
इसके जवाब में महबूबा मुफ़्ती अमित शाह के बयान की न सिर्फ़ खिल्ली उड़ाई थी बल्कि इसे दिवास्वप्न बताया और धमकी दी कि जो कोई भी 370 और 35-A को हटाने की कोशिश करेगा, उसके हाथ काट लिए जाएँगे।